Posts for 2018-05

Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 01 2018 14:09:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

तेरी जुबान है झूठी जम्हूरियत की तरह
तू एक जलील सी गाली से बेहतरीन नहीं
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--दुष्यंत कुमार

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 03 2018 08:56:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

देखिये , पैसा न देने पर कैसे मीडिया नेता के वोट बिगाड़ने की खुले आम धमकी देने लगता है !! मोदी साहेब ने कहा कि - "मैंने 100% गाँवों तक बिजली पंहुचा दी है"। लेकिन दैनिक भास्कर ने फ्रंट पेज पर तथ्यों के साथ यह प्रकाशित कर दिया कि -- प्रधानमन्त्री झूठ बोलकर जनता को गुमराह कर रहे है !!!
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लिंक - <https://goo.gl/yeQ9xX>;
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ऐसा बहुत कम होता है जब मोदी साहेब बोले भी और झूठ भी न बोले। झूठ में इस तरह के बयान और हरकतें भी शामिल है जो कि सच्ची तस्वीर पेश न करके श्रोता को गुमराह करती है। मेरा मानना है कि, बहुधा सभी नेता जनता को गुमराह करने के लिए ही बोलते है।
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लेकिन पेड मीडिया इन सभी झूठो को चुपचाप पचा लेता है। और यदि किसी समय में नेताओ या उनके प्रायोजकों ने मीडिया को पैसा नहीं दिया या फिर किसी अन्य पार्टी के नेताओं या उनके प्रायोजकों ने अमुक नेता के झूठ को एक्सपोज करने के लिए ज्यादा पैसा दे दिया तो ऐसे हादसे हो जाते है !! इससे पेपरखोर समुदाय के लोगो में भी यह भ्रम बना रहता है कि -- अमुक अख़बार सच्ची खबरें दिखाता है।
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अब संघ के स्वयंसेवको को यह तय करना चाहिए कि कौन झूठला है -- मोदी साहेब या पेड भास्कर !! पेड भास्कर झूठ बोल रहा है, तो मोदी साहेब भास्कर पर झूठ फैलाने एवं जनता को गुमराह करने के एवज में कार्यवाही कर सकते है।
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फेसबुक पर हमारी पाठक संख्या 100-150 लोगो तक सीमित है। लेकिन जब हम मोदी साहेब पर कोई वाजिब आरोप रखते है तो संघ के स्वयंसेवक हमारी वॉल पर आकर तांडव करने लगते है। लेकिन भास्कर करोडो लोगो को एलानिया यह बता रहा है कि -- हमारा प्रधानमंत्री देश को गुमराह कर रहा है !! पर वे लोग भास्कर पर कोई कार्यवाही नहीं करेंगे !! क्यों ? जवाब उन्ही से पूछिए।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri May 04 2018 18:07:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब और संघ के स्वयंसेवक अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जिन्ना का चित्र हटाने से इंकार कर रहे है।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केंद्र सरकार के नियंत्रण में काम करती है। शिक्षा मंत्री इसके लिए मेमो भेजकर चित्र हटाने की प्रक्रिया चालू कर सकती है। और यदि यूनिवर्सिटी इसका विरोध करती है तो सरकार पुलिस बल का प्रयोग करके इसे हटा सकती है।
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मोदी साहेब पिछले 4 साल से पीएम है। वे जिन्ना का चित्र हटाने के लिए कानूनी कदम उठा सकते थे। और उन्होंने अब तक इसे नहीं भी हटाया तो कोई बात नहीं , हम इसकी शिकायत नहीं कर रहे है। क्योकि हमें भी यह मालूम नहीं था कि वहां पर जिन्ना की फोटो लगी हुयी है। वर्ना हम इसे हटाने के मांग कर चुके होते। और अब जब हमें इसका पता चला है तो हम इसे हटाने की मांग कर रहे है।
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पर अब मोदी साहेब ने इसे कानूनी रूप से हटाने की जगह संघ के स्वयंसेवको को आदेश दिया कि वे सीधे घुसकर वहां इस मुद्दे पर हंगामा मचाये। जाहिर है वे ऐसा माहौल गरम करके वोट बटोरने के लिए कर रहे है !!!
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साथ ही योगी जी ने पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया कि संघ के कार्यकर्ताओ को गिरफ्तार न किया जाए। इस हड़बोंग का नतीजा यह हुआ कि पूरा अलीगढ़ तनाव में आ गया और इंटरनेट सेवांए रद्द करनी पड़ी !! इंटरनेट के अभाव से व्यापारी ई-वे-बिल बनाने का ठप हो गया है। और ई-वे-बिल के अभाव में न तो माल अलीगढ़ से बाहर भेजा जा सकता है और न ही शहर में किसी एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। अब इन्हे 1-2 दिन इंतजार करना होगा !!
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और इनके पाखंड की सीमा देखिये -- यही मोदी साहेब और संघ के स्वयंसेवक सऊदी अरब से घूस खाकर जम्मू में कश्मीर के मुस्लिमो एवं रोहिंग्यो को बड़े पैमाने पर बसा रहे है , लेकिन अलीगढ़ में जिन्ना का चित्र हटाने के नाम पर तमाशा कर रहे है !!
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समाधान ?
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जूरी सिस्टम , टीसीपी एवं राईट टू रिकॉल वाइस चांसलर का क़ानून आने से नागरिक खुद यह तय कर सकेंगे कि ऐसे चित्र हटाये जाने चाहिए या नहीं। और यदि उप कुलपति जनता के आदेश का पालन नहीं करता है तो नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उसे नौकरी से निकाल सकते है। और राईट टू रिकॉल पुलिस कमिश्नर क़ानून के आने से पुलिस प्रमुख गुंडई करने वाले तत्वों से सख्ती से पेश आएगा। चाहे अमुक अपराधी सत्ता धारी पार्टी के ही क्यों न हो।
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ज्यूरी सिस्टम , टीसीपी एवं राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख का ड्राफ्ट देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पेज को क्लिक करके डिस्क्रिप्शन देखें।
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यदि आप ज्यूरी सि
स्टम का समर्थन करते है तो इस लिंक पर वोट करें -- <https://newindia.in/JurySys3>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 05 2018 08:17:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रधानमंत्री को ट्वीट करें कि वे जिन्ना की तस्वीर AMU से हटाने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाये।
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" @PMOIndia , #RemoveJinnaPhotoAMU , कृपया AMU से जिन्ना की तस्वीर हटाने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आवश्यक कानूनी कदम उठाये। #जिन्ना_की_तस्वीर_हटाये_AMU , please take necessary legal step to remove jinnah's portrait. "
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मेरा ट्विट --<https://twitter.com/PawanJury/status/992675490363097088>;
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मोदी साहेब पिछले 4 साल से जिन्ना की तस्वीर अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय से हटाने के फैसले को लंबित करके रखे हुए है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केंद्र सरकार के नियंत्रण में काम करती है। मोदी साहेब एक मेमो भेजकर चित्र हटाने की प्रक्रिया चालू कर सकते थे। और यदि यूनिवर्सिटी इसका विरोध करती है तो सरकार पुलिस बल का प्रयोग करके इसे हटा सकती है। लेकिन संघ के स्वयंसेवक एवं मोदी साहेब इस मुद्दे पर बवाल खड़ा करके तनाव भड़काना चाहते है। इस तरह के तनाव से हिन्दू वोटरो के उनकी तरफ दौड़ लगाने की स्पीड बढ़ जाती है।
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तो यदि आप जिन्ना ही तवीर वहां से हटवाना चाहते है तो मोदी साहेब को यह ट्विट भेजे। संघ के स्वयसेवक इस प्रकार के ट्विट भेजने का विरोध कर रहे है। उनका कहना है कि --- "यदि मोदी साहेब इसे हटाने के लिए कानूनी कदम उठाते है तो यह तस्वीर हट जायेगी , और तस्वीर के हटने से इस मुद्दे पर माहौल को गरमाने का अवसर हमारे हाथ से निकल जाएगा।"
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जाहिर है कि संघ के स्वयंसेवकों की रुचि तस्वीर हटाने में नहीं है बल्कि इस मुद्दे पर देश भर में माहौल भड़काने की है। और इसीलिए वे ट्विट भेजने का विरोध कर रहे है। लेकिन यदि आप जिन्ना की तस्वीर AMU से हटाना चाहते है तो मोदी साहेब को ऊपर दिया गया ट्विट भेजें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 05 2018 19:33:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

उना में 300 दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाया है एवं पिछले साल से बौद्ध धर्म में धर्मांतरित होने वालो की संख्या में 3 गुना तक वृद्धि हुई है। पंजाब पूरी तरह से मिशनरीज के हवाले हो चुका है , और वहां पर हमें बड़े पैमाने पर धर्मांतरण देखने को मिल रहे है। डेरा सच्चा सौदा के टूटने के बाद अब मिशनरीज के लिए वहां कोई बाधा नहीं रही है। कुल मिलाकर हिन्दू धर्म से अन्य धर्मो में धर्मान्तरण जारी है , और सोनिया-मोदी-केजरीवाल की सारी नौटंकी हिन्दू धर्म के सिकुड़ने में और इजाफा ही करेगी।
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समाधान - राष्ट्रीय हिन्दू देवालय ट्रस्ट अधिनियम , ज्यूरी सिस्टम , राईट टू रिकॉल पीएम , राईट टू रिकॉल डीडी चेयरमेन , टीसीपी , हथियार बंद नागरिक समाज आदि कानूनों के अलावा इसे किसी भी तरह से नहीं रोका जा सकता। 1951 से 2011 तक के आंकड़े उठाकर देख लीजिये। इसे रोकना मौजूदा नेताओं की औकात से बाहर की बात है। उनकी रुचि सिर्फ समस्याएँ उठाकर वोट खींचने तक सीमित है। उपरोक्त कानूनों के अलावा कोई उपाय नहीं।
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<https://timesofindia.indiatimes.com/india/unas-dalit-flogging-victims-along-with-300-others-embrace-buddhism/articleshow/63961490.cms>;
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<http://indianexpress.com/article/india/three-fold-rise-in-gujarat-dalits-converting-to-buddhism-una-4745002/>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun May 06 2018 18:26:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Piyush Jain:

कैसे निजीकरण का एकाधिकार राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की क्षमता को घटाता है??
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मान लीजिये एक रेलवे स्टेशन है और वहां 100 दुकानों के लिए ख़ाली निर्धारित स्थान है और मान लीजिये विक्रेता के लिए सभी निर्धारित स्थानों का मूल्य एक समान है अर्थात किसी भी विक्रेता के लिए, वह किसी भी ख़ाली निर्धारित स्थान के लिए एक जैसा किराया देगा |
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(a)स्टेशन मास्टर ने किराया प्रति महिना 10000 रूपये रखने का फैसला लिया और आवेदको की संख्या 110 हैं |
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(b)और अब उसने किराया बढ़ाकर प्रति महिना 13000 रूपये रखने का फैसला किया और उसने पाया कि अब सिर्फ 90 आवेदक ही है | ऐसे में कुल किराया = 90 x रु.13000= रु. 11,70,000 प्रति महिना होगा
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(c)और अब उसने किराया बढ़ाकर प्रति महिना 12000 रूपये रखने का फैसला किया और उसने पाया कि अब सिर्फ 95 आवेदक ही है | ऐसे में कुल किराया = 95 x रु.12000= रु. 11,40,000 प्रति महिना होगा
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(d)और अब उसने किराया बढ़ाकर प्रति महिना 11000 रूपये रखने का फैसला किया और उसने पाया कि अब सिर्फ 100 आवेदक ही है | ऐसे में कुल किराया = 100 x रु.11000= रु. 11,00,000 प्रति महिना होगा
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मालिक के लिए सबसे उत्तम विकल्प कौन सा है ? विकल्प (b)!!
समाज के लिए सबसे उत्तम विकल्प कौन सा है ? विकल्प (d)!!
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मान लीजिये रेलवे स्टेशन के खर्चें देने के बाद भी शेष किराया यदि नागरिकों में समान वितरण कर दिया जाए तब भी विकल्प (d) समाज के लिए सबसे उत्तम होगा क्योंकि यह प्रतिस्पर्धा, रोजगार, कुल उत्पादन आदि को बढ़ाएगा |
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इसलिए हर निजी कंपनी विकल्प (b) को चुनेगी ना कि विकल्प (d) को |
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इसलिए आप एयरपोर्ट पर कॉफ़ी महंगी पाते है और इतनी बड़ी जगह ख़ाली होते हुए भी | निजी कंपनी जो एयरपोर्ट पर रखरखाव का काम देखती है, जानबूझकर रिक्त स्थान अनावंटित रखती है जिससे कि दुकानों के लिए निर्धारित स्थानों की संख्या कम से कम रहे और ज्यादा से ज्यादा किराया वसूला जा सके!! समाज के लिए ये हर तरह से हानिकरक स्थिति है| अधिक से अधिक ग्राहको का अपने घर से खाना लाना, अक्षमता बढ़ाएगा और एयरपोर्ट पर रोजगार उच्चतम से नीचे होगा |
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लेकिन यदि कंपनी सरकार के स्वामित्व की है और नागरिको के पास राईट टू रिकॉल/ और शीर्ष लोगो /स्टाफ के ऊपर जूरी का अधिकार है तब नागरिक उस शीर्ष अधिकारी या स्टाफ को विकल्प (d) के लिए मजबूर कर सकते है |
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अब यहाँ, एकाधिकार रेलवे स्टेशन या लाल किला या ताज महल किसी प्राइवेट कंपनी के द्वारा नहीं बनाया गया है | वास्तव में, पेटेंट को छोड़कर, ऐसा कोई रास्ता नहीं है जिससे प्राइवेट कंपनी एकाधिकार लम्बे समय तक बरक़रार रख सके क्योंकि उस कंपनी के कर्मचारी स्वयं नौकरी छोड़कर जल्द ही नए सप्लायर बन जाएंगे !!
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ताजमहल या लाल किला जैसे एकाधिकार एतिहासिक घटनाओं के कारण या शायद गलत इतिहास के कारण अस्तित्व में हैं | रेलवे स्टेशन जैसे एकाधिकार सरकारी शक्ति द्वारा रेलवे चलाने के लिए भूमि अधिग्रहण करने के लिए बनाये गए है | रेलवे स्टेशन या ताज महल, माइक्रोसॉफ्ट जिसका कभी ऑपरेटिंग सिस्टम में एकाधिकार हुआ करता था,जैसी कंपनियों की तरह किसी निजी व्यक्ति का परिश्रम या जोखिम से नहीं बनाए गए हैं |
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तो जब ऐसे एकाधिकारों का निजीकरण होता है, इनका मालिक अधिक से अधिक लाभ कमाता है जबकि इसमें पूर्व या वतर्मान के लोगों का योगदान रहा हो |
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हम देख रहे है कि आईटीसी, डालमिया आदि जैसी कंपनिया इन एकाधिकार वाले व्यवसायों में छलांग मारने को बहुत उत्सुक है | वे दावा करते हैं कि उनके पास सरकारी क्षेत्रों के मुकाबले अधिक टैलेंट है और वे इन एकाधिकारों को सँभालने का काम बेहतर कर सकते हैं | अच्छा, तो क्यों ये कंपनियां अपने टैलेंट का इस्तेमाल माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक, गूगल आदि बनाने में नहीं करती ?
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बात साफ़ है, इन कंपनियों के पास ना ज्यादा मेरिट/ टैलेंट है | ये सिर्फ मंत्रियों, अधिकारीयों और जजों को रिश्वत खिलाने में और अपनी तंत्र चलाने में और बिकाऊ मीडिया से चुप्पी खरीदने में अव्वल है |
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क्या कोई व्यक्ति लाल किले के लिए बोली लगा सकता है ?
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नहीं | कोई भी लाल किले आदि पर होटल और भोजनालय बनाकर एक बड़ा मुनाफा बना सकता है | लेकिन ये सभी एतिहासिक धरोहर है और इसलिए इनकी जमीन का व्यावसायिक उपयोग कागजों पर प्रतिबंधित है | तो केवल वही व्यक्ति जो इस कॉन्ट्रैक्ट को बदलने और इसके बाद उससे बच निकलने के योग्य है, एक बड़ा मुनाफा बना सकता है | दुसरे शब्दों में, यदि एक बोली लगाने वाले के पास जजों, अधिकारीयों, बिकाऊ मीडियावालों आदि से गहरे संबंध है तब वह जमीन का व्यावसायिक उपयोग कर सकता है और बचकर निकल सकता है| लेकिन जिस व्यक्ति के ऐसे संबंध नहीं है वह इतना बड़ा मुनाफा नहीं कमा पायेगा | तो जब एकाधिकार बोली के लिए रखे जाते हैं, धनिक जिसके पास ऐसे जघन्य संबंध है, ऊँची बोली लगा पाएंगे |
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अब सोनिया-मोदी-केजरीवाल (सब एक ही हैं, ये सभी विदेशी मालिकों की कठपुतलियां हैं) और कांग्रेस-संघ-आप के कार्यकर्ता ( फिर से सब एक ही हैं, ये राजनीती में सिर्फ पैसा बटोरने के लिए है), लाल किला, ताजमहल, सभी रेलवे स्टेशन आदि को निजी हाथों में देने के लिए बहुत उत्सुक है | ये सिर्फ जोर से चिल्लाना जानते है कि सरकारी कर्मचारी निकम्मे हैं और लापरवाह है और इसलिए निजीकरण जरुरी हैं | इनका अंतिम लक्ष्य सभी एकाधिकार संपत्तियों को विदेशी कंपनियों को देना है | क्यों? अमेरिका ब्रिटेन के धनिकों के पास मीडिया है और ये धनिक देश में परिवर्तन लाने के लिए विकल्प के रूप में सोनिया-मोदी-केजरीवाल और कांग्रेस-संघ-आप को ही दिखाने का वादा करते हैं यदि सोनिया-मोदी-केजरीवाल और कांग्रेस-संघ-आप अर्थव्यवस्था के सभी बड़े क्षेत्रों को एक के बाद एक विदेशी धनिकों को सौपतें है |
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समाधान?
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प्रस्तावित समाधान – कार्यकर्ताओं को मंत्रियों के ऊपर राईट टू रिकॉल कानूनी ड्राफ्ट और सरकारी करमचारियों के ऊपर जूरी सिस्टम कानूनी ड्राफ्ट लाने के लिए कार्य करना चाहिए | हम “राईट टू रिकॉल मंत्री” का ड्राफ्ट अपलोड करने की तैयारी में है| लेकिन जब तक आप, यदि चाहे तो राईट टू रिकॉल आन्दोलन की सहायता राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री ड्राफ्ट का समर्थन करके, कर सकते हैं |
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राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री ड्राफ्ट की लिंक -- <https://newindia.in/causes/rtrpm2>;
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प्रस्तावित ड्राफ्ट का विवरण--<https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10154897547041922>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun May 06 2018 19:15:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कुछ साल भर पहले एक अमेरिकी ने "मेरे देश से निकल जाओ" का नारा लगाकर भारतीय इंजिनियर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। साल भर के अंदर ही उसे आजीवन कारावास की सजा सुना दी गयी है। जबकि हमें सलमान और लालू जैसे चर्चित मामलो का फैसला करने में भी 20 साल लग जाते है !!!
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<https://goo.gl/GhCUZo>;
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अमेरिका की अदालते भारत की तुलना में ज्यादा तेजी से एवं ज्यादा निष्पक्ष रूप से काम करती है। वजह -- १) राइट टू रिकॉल जज एवं २) ज्यूरी सिस्टम
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यदि अपराधी को अदालत ईमानदारी से जल्दी दण्डित करे तो अपराधियों के हौंसले टूटते है और अपराध की दर में गिरावट आती है -- यह बात समझने के लिए किसी को आइंस्टाइन होने की जरुरत नहीं है। हाँ इंसान होना जरुरी है। खच्चर होने से बात दूसरी हो जाती है।
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समाधान - हमें अपनी अदालतों को दुरुस्त करने लिए राइट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों को देश में लागू करने की मांग करनी चाहिए। इन कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर का डिस्क्रिप्शन देखें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 08 2018 14:50:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A022) Law drafts I support (51 to 200)
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( इस एल्बम के सभी पोस्ट देखने के लिए "feed view" क्लिक करें।)
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यदि आप अपने वर्तमान एवं भविष्य में बनने वाले मित्रो को उन क़ानून ड्राफ्ट्स के बारे में सूचित करना चाहते है जिनका आप समर्थन करते है तो कृपया निचे दिए गए 3 एल्बम बनाए --
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(A021) Law drafts I support (top 50) -- इस एल्बम में पोस्ट की अधिकतम सीमा 200 होनी चाहिए।
(A022) Law drafts I support (51 to 200) -- अधिकतम सीमा 300 पोस्ट।
(A023) Law drafts I support (after 201) --- कोई सीमा नहीं।
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प्रत्येक एल्बम में एक पोस्ट "table of contents" नाम से होना चाहिए तथा इस पोस्ट का लिंक अमुक एल्बम के डिस्क्रिप्शन एवं एल्बम कवर में होना चाहिए।
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इस तरह यदि कोई फेसबुक यूजर आपकी वाल पर आता है तो वह उन कानूनों को आसानी से देख सकेगा जिन कानूनों का आप समर्थन करते है।
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मान लीजिये कि आप 500 क़ानून ड्राफ्ट्स का समर्थन करते है। लेकिन यदि आप इन सभी ड्राफ्ट्स को एक ही एल्बम में रखेंगे तो आगंतुक इनमे से महत्त्वपूर्ण कानून ड्राफ्ट्स को ढूंढ नहीं सकेगा। इसीलिए आपको तीन एल्बम बनाने चाहिए।
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मैंने इस एल्बम में उन कानून ड्राफ्ट्स को रखा है जो मेरे द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट्स के top 50 में शामिल नहीं है।
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table of contents की सूची इस लिंक पर देखें ----
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इस एल्बम में प्रत्येक क़ानून ड्राफ्ट पर 1-2 पोस्ट रखे गए है। 1 पोस्ट में क़ानून ड्राफ्ट है एवं एक पोस्ट अमुक कानून ड्राफ्ट के बारे अन्य महत्त्वपूर्ण विवरण देता है।
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भारत के सभी कार्यकर्ताओ एवं नागरिको से मेरा आग्रह है कि वे अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर ऐसा ही एक एल्बम तैयार करे। इस एल्बम का नाम "(A022) Law Drafts I support ( 51-200 )" होना चाहिए। इन सभी क़ानून ड्राफ्ट्स के पोस्ट्स की लिंक्स की सूची बनाकर भी इस पोस्ट में रखें, ताकि पाठक इन्हे आसानी से पढ़ सके। साथ ही उन ट्वीट्स के लिंक्स की सूची भी रखे जो ट्वीट आपने इन कानूनों की मांग के लिए पीएम को भेजे है।
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जब आप ऐसा एल्बम बना लेंगे तो आप देश की किसी भी कार्यकर्ता से पूछ सकते है कि देश की समस्याओ के समाधान के लिए वे किन कानूनों का समर्थन करते है और क्या उन्होंने इसकी मांग का ट्वीट पीएम को भेजा है। इस तरह उन आप कार्यकर्ताओ को चिन्हित कर सकते है जिनकी रुचि देश में सिर्फ समस्याएं उठाने यानी कि उन्हें फैलाने में है समाधान में नहीं। ये फेसबुक पर फर्जी सुधारको को एक्सपोज करने का सबसे सुगम तरीका है। एक फर्जी कार्यकर्ता की सबसे सटीक पहचान यह है कि वह देश की विभिन्न समस्याओ पर बहुत ऊँचे ऊँचे डायलॉग देता है किन्तु इनके समाधान के लिए आवश्यक कानूनों की मांग करने के लिए पीएम को कभी भी ट्वीट तक नहीं भेजता।
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मेरा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे इस बात पर गौर करे कि -- यदि कोई व्यक्ति इंटरनेट का इस्तेमाल करता है और लम्बे चौड़े दावे करता है कि कि वह के कार्यकर्ता है या "थिंकर" है या सामजसेवी है तो उसकी फेसबुक प्रोफाइल देखें कि क्या उसने ऐसा एल्बम बनाया है। यदि उसने ऐसा एल्बम न बनाया है तो यह इस बात का साक्ष्य है कि वह जो गतिविधियां करता है उसके पीछे उसका मुख्य उद्देश्य अपना समय काटना और अन्य कार्यकर्ताओ का समय बर्बाद करना है। ऐसे फर्जी कार्यकर्ताओ से दूरी बना ले।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 08 2018 14:52:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A023) Law drafts I support (after 200)
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( इस एल्बम के सभी पोस्ट देखने के लिए "feed view" क्लिक करें।)
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यदि आप अपने वर्तमान एवं भविष्य में बनने वाले मित्रो को उन क़ानून ड्राफ्ट्स के बारे में सूचित करना चाहते है जिनका आप समर्थन करते है तो कृपया निचे दिए गए 3 एल्बम बनाए --
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(A021) Law drafts I support (top 50) -- इस एल्बम में पोस्ट की अधिकतम सीमा 200 होनी चाहिए।
(A022) Law drafts I support (51 to 200) -- अधिकतम सीमा 300 पोस्ट।
(A023) Law drafts I support (after 201) --- कोई सीमा नहीं।
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प्रत्येक एल्बम में एक पोस्ट "table of contents" नाम से होना चाहिए तथा इस पोस्ट का लिंक अमुक एल्बम के डिस्क्रिप्शन एवं एल्बम कवर में होना चाहिए।
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इस तरह यदि कोई फेसबुक यूजर आपकी वाल पर आता है तो वह उन कानूनों को आसानी से देख सकेगा जिन कानूनों का आप समर्थन करते है।
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मान लीजिये कि आप 500 क़ानून ड्राफ्ट्स का समर्थन करते है। लेकिन यदि आप इन सभी ड्राफ्ट्स को एक ही एल्बम में रखेंगे तो आगंतुक इनमे से महत्त्वपूर्ण कानून ड्राफ्ट्स को ढूंढ नहीं सकेगा। इसीलिए आपको तीन एल्बम बनाने चाहिए।
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मैंने इस एल्बम में उन कानून ड्राफ्ट्स को रखा है जो मेरे द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट के top 200 में शामिल नहीं है।
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table of contents की सूची इस लिंक पर देखें ----
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इस एल्बम में प्रत्येक क़ानून ड्राफ्ट पर 1-2 पोस्ट रखे गए है। 1 पोस्ट में क़ानून ड्राफ्ट है एवं एक पोस्ट अमुक कानून ड्राफ्ट के बारे अन्य महत्त्वपूर्ण विवरण देता है।
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भारत के सभी कार्यकर्ताओ एवं नागरिको से मेरा आग्रह है कि वे अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर ऐसा ही एक एल्बम तैयार करे। इस एल्बम का नाम "(A023) Law Drafts I support ( after 201 )" होना चाहिए। इन सभी क़ानून ड्राफ्ट्स के पोस्ट्स की लिंक्स की सूची बनाकर भी इस पोस्ट में रखें, ताकि पाठक इन्हे आसानी से पढ़ सके। साथ ही उन ट्वीट्स के लिंक्स की सूची भी रखे जो ट्वीट आपने इन कानूनों की मांग के लिए पीएम को भेजे है।
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जब आप ऐसा एल्बम बना लेंगे तो आप देश की किसी भी कार्यकर्ता से पूछ सकते है कि देश की समस्याओ के समाधान के लिए वे किन कानूनों का समर्थन करते है और क्या उन्होंने इसकी मांग का ट्वीट पीएम को भेजा है। इस तरह उन आप कार्यकर्ताओ को चिन्हित कर सकते है जिनकी रुचि देश में सिर्फ समस्याएं उठाने यानी कि उन्हें फैलाने में है समाधान में नहीं। ये फेसबुक पर फर्जी सुधारको को एक्सपोज करने का सबसे सुगम तरीका है। एक फर्जी कार्यकर्ता की सबसे सटीक पहचान यह है कि वह देश की विभिन्न समस्याओ पर बहुत ऊँचे ऊँचे डायलॉग देता है किन्तु इनके समाधान के लिए आवश्यक कानूनों की मांग करने के लिए पीएम को कभी भी ट्वीट तक नहीं भेजता।
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मेरा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे इस बात पर गौर करे कि -- यदि कोई व्यक्ति इंटरनेट का इस्तेमाल करता है और लम्बे चौड़े दावे करता है कि कि वह के कार्यकर्ता है या "थिंकर" है या सामजसेवी है तो उसकी फेसबुक प्रोफाइल देखें कि क्या उसने ऐसा एल्बम बनाया है। यदि उसने ऐसा एल्बम न बनाया है तो यह इस बात का साक्ष्य है कि वह जो गतिविधियां करता है उसके पीछे उसका मुख्य उद्देश्य अपना समय काटना और अन्य कार्यकर्ताओ का समय बर्बाद करना है। ऐसे फर्जी कार्यकर्ताओ से दूरी बना ले।
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Tue May 08 2018 14:57:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A041) Links to important videos and PDFs
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महत्त्वपूर्ण पीडीऍफ़ एवं वीडियो के लिंक
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रिकालिस्ट्स ,
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कृपया अपनी फेसबुक वॉल पर एक एल्बम "(A041) Links to important videos and PDFs" शीर्षक से बनाये। इस एल्बम में आप सभी महत्त्वपूर्ण पीडीऍफ़ एवं वीडियो के लिंक रखें।
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Tue May 08 2018 15:35:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A035) Newsaper ads I gave to publicizie RTR
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मेरे द्वारा दिए गए समाचार पत्र विज्ञापन एवं अंशदान
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यदि आपने राईट टू रिकॉल कानूनों के प्रचार के लिए समाचार पत्र में कोई विज्ञापन दिया है या किसी विज्ञापन में कोई अंशदान दिया है अथवा आप इन कानूनों के प्रचार के लिए यदि विज्ञापन के लिए अंशदान देना चाहते है तो कृपया "(A035) Newsaper ads I gave to publicizie RTR, cancel EVM etc" शीर्षक से एक एल्बम बनाए तथा आपके द्वारा दिए गए विज्ञापन एवं अंशदान की जानकारी इस एल्बम में रखें
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 08 2018 17:10:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A028) Proofs I supported law on NewIndia.in twitter etc ( after 200)
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मान लीजिये कि आप भारत में कोई क़ानून पास कराना चाहते है। लेकिन मेरी जानकारी में भारत में ऐसा कोई तरीका नहीं है जो इस बात की 100% गारंटी दे सके कि इस तरीके का इस्तेमाल करने से अमुक क़ानून पास हो जाएगा। आप सिर्फ अमुक क़ानून ड्राफ्ट के पास होने की सम्भावना बढाने पर काम कर सकते है। निचे इसी प्रकार का एक तरीका दिया गया है , जो किसी कानून ड्राफ्ट के देश में लागू होने की सम्भावना बढ़ा देगा।
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(1) अमुक कानून ड्राफ्ट को newindia .in पर वोट करें , @PmoIndia पर इस क़ानून को लागू करने के लिए ट्विट करें एवं प्रधानमंत्री कार्यालय पर पोस्टकार्ड भेजे।
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(2) अपने वर्तमान एवं भविष्य के संभावित मित्रो को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।
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अब प्रश्न यह है कि आप अपने वर्तमान एवं भविष्य के संभावित मित्रो को ये 3 कदम उठाने के लिए प्रेरित कैसे करेंगे ?
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मेरा सुझाव है कि - यदि आप उक्त तीनो कदम उठाएंगे एवं इसके सबूत फेसबुक पर व्यवस्थित ढंग से एक एल्बम में रखेंगे तो इस एल्बम को देखने के बाद आपके मित्रो द्वारा यह कदम उठाने की सम्भावना बढ़ जायेगी।
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भारत के सभी कार्यकर्ताओ एवं नागरिको से मेरा आग्रह है कि वे अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर ऐसा ही एक एल्बम तैयार करे। इस एल्बम का नाम ""(A028) Proofs I supported law on NewIndia .in twitter etc ( after 200)" होना चाहिए।
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यदि किसी नागरिक / कार्यकर्ता को आपके सुझाव पसंद आते है तो वह भी अमुक क़ानून की मांग करने के लिए NewIndia .in पर वोट कर सकता है , ट्विट कर सकता है एवं पोस्टकार्ड भेज सकता है। और इन गतिविधियों से इन अमुक क़ानून के पास होने की संभावनाएं बढ़ जाएगी।
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कृपया इसे व्यवस्थित करने के लिए निम्नांकित 3 एल्बम बनाए :
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(1) 50 सबसे महत्त्वपूर्ण क़ानून ड्राफ्ट्स के लिए "(A026) Proofs I supported law on NewIndia.in twitter etc (top 50)" शीर्षक से एल्बम बनाए।
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(2) 50 के बाद कम महत्त्वपूर्ण 51 से 200 क़ानून ड्राफ्ट्स के लिए "(A027) Proofs I supported law on NewIndia.in twitter etc (51 to 200)"
शीर्षक से एल्बम बनाये।
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(3) जिन कानूनों को आप 200 के बाद रखते है उनके लिए "(A028) Proofs I supported law on NewIndia.in twitter etc (after 200) नाम से एल्बम बनाए।
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ऐसा इसीलिए ताकि जब आपका कोई वर्तमान मित्र या भविष्य में संभावित मित्र आपकी फेसबुक वाल पर आये तो वह आपके द्वारा प्रस्तावित top 50 महत्त्वपूर्ण क़ानून ड्राफ्ट्स को आसानी से देख सके। यदि सभी क़ानून ड्राफ्ट्स को एक ही एल्बम में रख दिया जायेगा तो इन महत्त्वपूर्ण क़ानून ड्राफ्ट्स को ढूंढना मुश्किल होगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 08 2018 17:37:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A099) Unclassified posts - may classify them later
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अवर्गीकृत लेख - इन्हे बाद में वर्गीकृत किया जा सकता है।
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सभी रिकालिस्ट्स से आग्रह है कि , इस शीर्षक से एक एल्बम बनाए। सभी पोस्ट सम्बंधित एल्बम में होने चाहिए , लेकिन जिन विषयो के लिए आपने एल्बम नहीं बनाया है , वे पोस्ट इस एल्बम में रखे जाने चाहिए। बाद में , आप इस एल्बम में रखे गए पोस्ट्स को या तो सम्बंधित एल्बम में रख सकते हो या फिर इन्हे डिलीट कर सकते हो।
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सभी कार्यकर्ताओ के लिए यह बेहद आवश्यक है कि वे अपने सभी पोस्ट सिर्फ एल्बम में ही रखें। यदि ऐसा नहीं किया गया तो इन कानूनों की जानकरी करने के लिए आपके फेसबुक एकाउंट पर आने वाला नया व्यक्ति आपके महत्त्वपूर्ण पोस्ट्स को कभी भी ढूंढ नहीं पायेगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 08 2018 17:59:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A042) FAQ on right to recall
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राईट टू रिकॉल मूवमेंट पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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रिकालिस्ट्स ,
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कृपया अपनी फेसबुक वॉल पर एक एल्बम "(A042) FAQ on right to recall" शीर्षक से बनाये। इस एल्बम में आप विभिन्न क़ानून ड्राफ्ट्स से सम्बंधित पूछे जाने वाले प्रश्नो से सम्बंधित पोस्ट रख सकते है। इससे नए आगुन्तक के लिए इन कानूनों को समझना आसान रहेगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 09 2018 07:52:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B020) Weaponization of we the commons
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प्रत्येक भारतीय के लिए बन्दुक रखना अनिवार्य किया जाए
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( इस एल्बम के सभी पोस्ट देखने के लिए "Feed view" क्लिक करें )
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अमेरिका के 50% से ज्यादा पुरुषो एवं 25% महिलाओ के पास बन्दुक होना सबसे बड़ी वजह है कि भारत के उलट अमेरिका के नेता एवं धनिक वहां के आम नागरिको की बात गंभीरता से सुनते है और उनकी समस्याओ का समाधान करने की दिशा में काम करते है। भारत में 0.5% लोगो के पास भी बंदूके नहीं है , और न ही वे बंदूके जुटा सकते है, जबकि अमेरिका में यदि शेष नागरिक बन्दुक खरीदना चाहे तो सिर्फ सप्ताह भर में अमेरिका के 100% नागरिको के पास बंदूके होगी !! इस तरह जरूरत पड़ने पर बंदूके अमेरिकीयो की पहुँच में है। सरकार उन्हें रोक नहीं सकती !! आम अमेरिकी की पास बन्दुक होना और उनकी पहुंच बंदूकों तक होना सबसे बड़ी वजह है कि आज तक अमेरिकी धनिक एवं राजनेता वहां पर ज्यूरी सिस्टम , राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख, राइट टू रिकॉल जज आदि क़ानून प्रक्रियाओं को निलंबित करने का साहस नहीं कर सके है। और अमेरिकियों के पास बंदूक होने के कारण ही अमेरिकी धनिक एवं नेता जीएसटी एवं ई-वे बिल जैसे क़ानून थोपने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
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अमेरिका का प्रशासन भारत की तुलना में बेहतर काम करता है क्योंकि वहां के नागरिको के पास -- a) राईट टू रिकॉल , b) जूरी सिस्टम , c) जीएसटी का न होना , d) वेल्थ टेक्स का होना , e) मल्टी इलेक्शन और f) जनमत संग्रह आदि प्रक्रियाएं है।
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अमेरिकी धनिक इन प्रक्रियाओं को खत्म करना चाहते है। लेकिन अमेरिकी धनिको को ऐसा करने से कौनसी चीज रोक देती है ? वजह सिर्फ यह है कि , अमेरिकी नागरिको के पास बंदूके है एवं वे बन्दुक का महत्त्व समझते है।
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तो मेरे विचार में हम रिकालिस्ट को भारतीय नागरिको को यह सूचना देनी चाहिए कि , अमेरिका का प्रशासन हमसे बेहतर है क्योंकि -- वहां के 50% नागरिको के पास बंदूके है 90% अमेरिकी बन्दुक का महत्त्व समझते है।
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जबकि भारत में हमारे पास सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नेता, संघ-कांग्रेस-आपा के कार्यकर्ता और अर्थव्यवस्था , राजनीति विज्ञान, इतिहास आदि के क्षेत्र में काम करने वाले ऐसे कपटी बुद्धिजीवियों की गेंग है जो भारत के नागरिको को बन्दुक रखने का अधिकार देने का विरोध करती है। उनका कहना है कि -- सिर्फ खुद उनको छोड़कर भारत के अन्य आम नागरिक गंवार है और उन्हें बन्दुक रखने की छूट नहीं दी जानी चाहिए।
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हम राइट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ता भारत में इस मुद्दे पर जनमत संग्रह करवाने की प्रक्रिया लाने पर काम कर रहे है , ताकि भारत के नागरिक स्वयं यह तय कर सके कि क्या प्रत्येक भारतीय को बन्दुक रखने का अधिकार होना चाहिए या नहीं। इस जनमत संग्रह में मेरा वोट "हाँ" होगा। लेकिन सोनिया-मोदी-केजरीवाल का कहना है कि इस मुद्दे पर कोई जनमत संग्रह नहीं किया जाना चाहिए, और भारतीयों को हथियार विहीन ही रखा जाना चाहिए।
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मेरा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि ,कृपया वे अपनी फेसबुक वॉल पर एक एल्बम "(B020) Weaponization of we the commons" शीर्षक से बनाये , एवं इस एल्बम में इस विषय से सम्बंधित पोस्ट रखे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 09 2018 18:51:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B030) Taxation : reduce regressiveness / corruption
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(B030) कर सुधार : प्रतिगामी कर Vs अनुगामी कर
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क्यों हमें जीएसटी को रद्द करके वेल्थ टेक्स लागू करना चाहिए एवं अन्य कर सुधारो पर मेरा रुख
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इस एल्बम के पोस्ट इस बात को रेखांकित करते है कि क्यों जीएसटी वेल्थ टेक्स की तुलना में एक बदतर कर प्रणाली है। इस एल्बम में यह भी बताया गया है कि अर्थ क्रांति के अनिल बोकिल द्वारा प्रस्तावित ट्रांजेक्शन टेक्स कैसे एक बेहद बकवास प्रस्ताव है और इसका प्रस्ताव सिर्फ इसीलिए किया जा रहा है ताकि जीएसटी जैसे कर प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सके !! इस एल्बम में प्रतिगामी कर , अनुगामी कर एवं समान कर ( फ्लेट टेक्स ) के बारे में भी विवरण रखे गए है।
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एल्बम में जीएसटी की खामियां एवं हमारे द्वारा प्रस्तावित वेल्थ टेक्स के बारे में भी विस्तार से विवरण दिया गया है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 09 2018 19:17:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि आप अहमदाबाद में है तो आज दिनांक 10-5-2018 का गुजरात समाचार पत्र खरीदें ( अहमदाबाद एडिशन )
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पहले पेज पर रिकालिस्ट राहुल चिमनभाई मेहता द्वारा निम्नांकित विषय पर विज्ञापन दिया गया है :

"यूनिवर्सल वॉटर मीटरिंग और मिलावट की रोकथाम का क़ानून पास करवाने के लिए आम नागरिक ऐसे क्या कदम उठा सकते है जिससे मंत्री इन कानूनों को पास करने के लिए बाध्य हो जाए। "
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<https://www.facebook.com/mehtarahulc>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 10 2018 17:01:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आज दिनांक 10 मई 2018, गुरुवार को गुजरात समाचार पत्र में रिकालिस्ट राहुल चिमनभाई मेहता ने १) यूनिवर्सल वॉटर मीटरिंग एवं , २) खाद्य पदार्थो में मिलावट की रोकथाम के लिए आवश्यक क़ानून की जानकारी देने के लिए पहले पेज पर विज्ञापन दिया है। विज्ञापन गुजराती में है। जल्दी ही इसका अंग्रेजी एवं हिंदी अनुवाद उपलब्ध होगा।
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Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

(ગુજરાતી , हिंदी, english)
Today's (10-may-2018, thus) Gujarat Samachar, first page, ahmedabad edition has my newspaper advt. The advt is about ----
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(1) proposed laws to bring water meters on ALL water connections to reduce water crisis
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(2) what steps voters can take on whatsapp, twitter, facebook and outside internet to bring these proposed new laws
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I will soon put full hindi / english translation of this advt, Pls follow my profile at fb.com/MehtaRahulC
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આજના ગુજરાત સમાચાર (તા, ૧૦-મેં-૨૦૧૮ , ગુરુવાર) અમદાવાદ આવૃત્તિમાં પ્રથમ પાના પર મારી જાહેરાત છે. આ જાહેરાત ના મુદ્દાઓ છે .
(૧) પાણીના તમામ કનેકશનો પર પાણીના મીટર મુકવા જેથી કદ્દાચ પાણીની સમસ્યા ઘટી શકે અને કયા કાયદાઓથી ખાવાની વસ્તુઓમાં ભેળસેળ અને કેમિકલોનું પ્રમાણ ઘટી શકે?
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(૨) નાગરીકો કયા ક્યા કાર્યો કરી શકે, જેથી આ કાયદાઓ આવાની શક્યાતાઓ વધે? આ અગત્યનું છે, કેમકે વર્તમાન નેતાઓ , અધિકારીઓ અને ન્યયાશીશોને આ કાયદાઓ આવે તેમાં રસ નથી અંદ તેઓ આ પ્રસ્તાવાઓની વિરુદ્ધમાં છે
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હું આ જાહેરાતનો અંગ્રેજી , હિન્દી, ગુજરાતી અનુવાદ ટૂંક સમયમાં મુકીશ . આપને મારો ફેસબુક પ્રોફાઈલ fb.com/MehtaRahulC ફોલો કરવા વિનંતી છે.
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आजके (१०-मई-२०१८ , गुरूवार) के गुजरात समाचार, प्रथम पृष्ठ , अहमदाबाद अंकमें मेरा विज्ञापन है. यह विज्ञापन दो मुद्दों पर हे -
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(१) किन नए प्रस्तावित कानूनों से पानीके मिटर आ सकते है , और पानीकी समस्या कम हो सकती है?
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(२) भारतके नागरीक कौन कौन से कार्य करनेके द्वारा, यह कानून भारतमें ला सकते है?
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मैं इस विज्ञापनका कुछ ही समयमें हिंदी , अंग्रेजी , गुजराती अनुवाद दूँगा. कृपया मेरे फेसबुक प्रोफाइल fb.com/MehtaRahulC फोलो करे.
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<https://goo.gl/vbwDaw>;
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<http://gujaratsamacharepaper.com/epaper.php?edition=Ahmedabad&date=2018-05-10&pageno=1&pid=GUJARAT_AHM#Article/GUJARAT_AHM_20180510_1_3/220px>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 10 2018 21:31:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इन्होंने यह नही बताया कि हेडगेवार गए थे क्या भगत सिंह जी से मिलने !!! ओह संघी तो तब भगत सिंह जी को “भटके हुए नौजवान” कहते थे , और हेडगेवार जी ख़ुद युवाओं को भगत सिंह जी के रास्ते पर चलने से रोकने के लिए काफ़ी मेहनत कर रहे थे !!!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri May 11 2018 08:24:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

वालमार्ट द्वारा फ्लिप्कार्ट का अधिग्रहण ; इन बुलन्दो के नसीबो में है पस्ती एक दिन
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कुछ 3 वर्ष पहले फेसबुक पर संघ के एक स्वयंसेवक से स्वदेशी Vs विदेशी की बहस के दौरान मैंने कहा था कि - "फ्लिप्कार्ट अमेजन के लिए जमीन तैयार कर रहा है , और एक दिन अमेजन इसे टेक ऑवर कर लेगा। बिना जूरी सिस्टम लाये इस प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।" उन महोदय का कहना था कि यदि आप स्वदेशी के समर्थक हो तो स्वदेशी कम्पनियों से सामान खरीदो , लेकिन विदेशी कम्पनीयो का विरोध क्यों कर रहे हो !! मैं उन्हें समझाने का प्रयास कर रहा था कि जूरी सिस्टम के अभाव में स्वदेशी इकाइयां विदेशी कम्पनियों के सामने किसी भी हालत में नहीं टिक सकेगी। तो आज जो आप स्वदेशी अपनाने की सलाह दे रहे है , वह कोरी बकवास है। सिर्फ जूरी सिस्टम ही भारत की स्थानीय इकाइयों को इतना मजबूत बना सकता है कि वे विदेशी कम्पनियों से प्रतिस्पर्धा कर सके।
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जब 1977 में जनता सरकार ने भारत से कोक और पेप्सी को निकाल बाहर किया था तो पार्ले ने सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में अपने पैर जमाने की हिम्मत की थी। पार्ले ने तब तीनो फ्लेवर में 3 ब्रांड लिम्का , थम्स अप और गोल्ड स्पॉट उतारे थे। उसी समय केम्पा कोला ने भी अपना सॉफ्ट ड्रिंक लांच किया था। 22 साल तक ये कम्पनियां चलती रही। लेकिन 1991 में कोक और पेप्सी को फिर से भारत में आने की अनुमति दी गयी और 1 साल के अंदर ही कोक ने पार्ले के तीनो ब्रांड टेक ओवर कर लिए !! और केम्पा कोला का क्या हुआ ? लेकिन केम्पा कोला को पेप्सी-कोक ने बाजार से पूरी तरह बाहर कर दिया !! केम्पा कोला तब काफी बड़ा और पॉपुलर ब्रांड था। इसके अलावा सैंकड़ो छोटे मोटे स्थानीय ब्रांड भी उपलब्ध थे। लेकिन आज भारत में सॉफ्ट ड्रिंक के कारोबार पर 100% विदेशी कंपनियों कोक-पेप्सी का कब्ज़ा है।
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कुल मिलाकर , जिन जिन क्षेत्रो में विदेशी कम्पनियों को अनुमति दी जायेगी , उन क्षेत्रो में कुछ समय बाद आपको सिर्फ 2-3 कम्पनियां ही नजर आएगी। और भारत का पूरा बाजार इन कम्पनियों के कब्जे में होगा। रेल, उर्जा, ऑटो मोबाईल, मीडिया , निर्माण , कृषि , रक्षा , टेलीकोम , बैंकिंग , स्वास्थ्य , उड्डयन आदि सभी क्षेत्र धीरे धीरे विदेशियों के हाथो में जा रहे है। इसे मार्केट मोनोपॉली कहते है। बाजार पर एकाधिकार। और यह एकाधिकार विदेशी कम्पनियों का होगा।
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तो इससे हमें नुकसान क्या है ?
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विदेशी कम्पनी भारत में जो मुनाफा कमाती है उसके बदले हमें डॉलर चुकाने होते है। इस तरह जितना ही आप विदेशी कम्पनी से सामान खरीदेंगे उतना ही हमें ज्यादा डॉलर चुकाना होगा। हमारे पास डॉलर छापने की मशीने नहीं है। तो हम यह डॉलर हमारे संसाधन बेचकर चुकाने होते है। और हम लगातार यह चुकाते जा रहे है। जितना इन कंपनियों को मुनाफा होगा उतना ही हम डूबते जायेंगे। कुछ खच्चर इसी को "विकास" शब्द से जोड़ कर इसकी वकालत करते है !!
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इससे बहुत बड़े पैमाने पर स्वरोजगार एवं मालिकाना हक़ में कमी आती है। उदाहरण के लिए तब भारत में केम्पा , पार्ले के अलावा भी सॉफ्ट ड्रिंक के सैंकड़ो छोटे बड़े ब्रांड देश में चल रहे थे। मतलब सैंकड़ो ऐसे कारोबारी थे जिनके पास खुद का व्यवसाय था, उनके अपने प्लांट थे, और वे बाजार में खुद को बनाये रखने के लिए कम्पीटीशन कर रहे थे। लेकिन कोक-पेप्सी ने इन सभी इकाईयों को बंद करवा दिया।

फिर ये लोग क्या करते है ? अब ये लोग निर्माण जैसे उत्कृष्ट कार्य से बाहर होकर ट्रेडिंग एवं रिटेलिंग जैसे काम चलाऊ धंधे करने के लिए बाध्य होते है। मालिकाना हक़ खोने के बाद कारोबारियों का बाजार पर कोई नियन्त्रण नहीं रह जाता। क्योंकि वस्तु क्या होगी, कैसी होगी, इसका दाम क्या होगा यह मालिक तय करते है , रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर नहीं। अब स्थानीय कारोबारियों के पास रोजगार के नाम पर सिर्फ नौकरी एवं सप्लाई का काम रह जाता है।
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जब निर्माण पर कुछ 2-3 कम्पनियों का एकाधिकार हो जाता है तो वे आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं करते , बल्कि ऊँची कीमतों पर माल बेचना तय कर लेते है। तब कीमतें आसमान छूने लगती है , और उपभोक्ताओं को इसके दाम चुकाने होते है। बचने का कोई विकल्प नहीं है। उदाहरण के लिए पिछले वर्ष फ्लिप्कार्ट , अमेजन और स्नेप डील तीनो कम्पनियां घाटे में रही। इन तीनो ने मिलाकर लगभग 12 हजार करोड़ का घाटा बनाया।

क्योंकि इन्हें आपस में एवं अन्य कंपनियों से कम्पीटीशन करना पड़ रहा है। जब बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती है तो कम्पनियों के मुनाफे की दर सीमित ( लगभग 10-20% ) रहती है , तथा उपभोक्ता को फायदा होता है। लेकिन एक बार यदि मोनोपॉली बन जाए तो कम्पनियां अपनी वस्तु दुगने दाम में बेच सकेगी। और विकल्प नहीं होने से आपको दाम चुकाने होंगे। उदाहरण के लिए 2014 में फ्लिपकार्ट ने मिंत्रा को टेक ओवर किया , 2016 में जबोंग और फोन-पे को टेक ओवर किया और अब वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट को टेक ओवर कर लिया है !! अब स्नेप डील का नंबर है। फिर आपके पास सिर्फ अमेजन और वॉलमार्ट है !!
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तो हमारे पास क्या विकल्प है ?
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स्वदेशी अपनाओ का नारा लगाना और स्वदेशी वस्तुओ के इस्तेमाल की सलाह देना सबसे बड़ी बकवास है। विदेशी कम्पनियां ऐसे नारे लगाने वालो को पैसा देती है। क्योंकि ये नारे लगाने वाले लोग नागरिको को अव्यवहारिक विकल्प अपनाने की और धकेलते है जिससे समस्या के मूल समाधान की तरफ से कार्यकर्ताओ का ध्यान हट जाता है, साथ ही इनके नेताओ द्वारा इन्हे यह निर्देश होते है कि ये उन सभी कानूनों का विरोध करें जिनसे भारत की स्थानीय इकाइयों को विदेशियों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया जा सके।

इस तरह ये नारे लगते रहते है और विदेशी कम्पनियां भारतीय इकाइयों को टेक ओवर करती रहती है। फिर कार्यकर्ताओ का यह समूह "स्वदेशी अपनाओ" को देशभक्ति से जोड़ देता है। और नागरिको को कहता है कि तुम देशभक्ति की चपेट में आकर 1000 रूपये की चीज के 1500 रूपये चुकाओ। जबकि ये खुद भी सुबह से शाम तक विदेशी वस्तुओ का इस्तेमाल करते है, और बढ़िया क्वालिटी की सस्ती चीज खरीदने के लिए 25 दुकानों को खंगालते है !!!
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समाधान ?
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हमें ऐसे कानूनों की जरूरत है जिनसे हम भारत की स्वदेशी इकाइयों को वह प्रशासन दे सके कि भारत की इकाईया उसी दाम में विदेशी कम्पनियों की टक्कर के उत्पाद बना सके। सिर्फ तब ही भारत की इकाइयां विदेशी कंपनियों के आगे टिक पाएगी। और हमें अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक क्षेत्रो जैसे - ऊर्जा , टेलिकॉम , परिवहन , रेल , उड्डयन, खनन , रक्षा , बैंक , निर्माण , मीडिया आदि क्षेत्रो में विदेशी निवेश पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए। शुरूआती दौर में प्रतिबंध लगाना इसीलिए जरुरी है कि अमेरिका में ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स और राईट टू रिकॉल ने अमेरिकी कम्पनियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए वाजिब माहौल उपलब्ध करवाया। अब उनके पास पिछले 200 सालों से ज्यूरी सिस्टम है, और इस वजह से उनकी कम्पनियां खा पीकर पहलवान बन चुकी है।
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तो पहले हमें अपने देश में ऐसी क़ानून व्यवस्थाएं लानी होगी जिससे हमारी कम्पनियां अपने आप को मजबूत बना सके। यदि भारत में राईट टू रिकॉल , ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स लागू कर दिया जाता है तो हमारा मानना है कि अगले 5-10 वर्षो में हम ऐसी कम्पनियां खड़ी कर सकेंगे जो अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों से मुकाबला कर सके। तब स्वदेशी अपनाओ के नारों की जरूरत नहीं रह जायेगी। क्योंकि उपभोक्ता जब देखेगा कि भारत की कम्पनी कम दाम में बढ़िया माल बना रही है तो वह विदेशी सामान नहीं खुद ही नहीं खरीदेगा।
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राईट टू रिकॉल , ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स आदि कानूनों के प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट्स देखने के लिए यह लिंक देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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उल्लेखनीय है कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके अंध भगत ऐसे सभी कानूनों का विरोध कर रहे है जिससे भारत की अदालतों में सुधार आये , भ्रष्टाचार कम हो और भारत में निर्माण इकाइयों के हालात सुधरें। संघ के सभी स्वयंसेवक भी इन कानूनों के कट्टर विरोधी है।
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तो मेरा कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे इस बात को नोट करें कि किन कानूनों की वजह से अमेरिकी कम्पनियों में इतनी शक्ति आयी है कि वे दुनिया के किसी भी देश में जाकर सभी स्थानीय इकाइयों को निगल लेती है, और किन कानूनों के अभाव में भारत की कम्पनियां आज भी कमजोर प्रदर्शन कर रही है। मेरा मानना है कि एक मात्र वजह ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स एवं राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं है , शेष सभी अफ़साने है। तो जो भी व्यक्ति स्वदेशी अपनाओ के नारे लगा रहा है उनसे यह पूछे कि आप कौनसे क़ानून सुझाते है जिससे हम भारत की कम्पनियों को अमेरीकी-ब्रिटिश कम्पनियों से ज्यादा ताकतवर बना सके।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 12 2018 11:08:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

शेयर करने से पाठक संख्या घटती है। यदि आप मेरी फेसबुक वाल पर रखे गए किसी पोस्ट से सहमत है तो इसे कॉपी करके अपनी वाल पर पेस्ट करे। शेयर न करें। यदि आप इसे शेयर करेंगे तो यह ज्यादा पाठको तक नहीं पहुंचेगा।
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शेयर करने से पाठक संख्या क्यों गिरती है ?
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१) शेयर करने फोंट्स छोटे और धुंधले हो जाते है, अत: यूजर्स को इसे पढने में असहजता महसूस होती है।
२) फेसबुक का सोफ्टवेयर शेयर किये गए पोस्ट पर फ़िल्टर लगा देता है। अत: कम यूजर्स को न्यूज फीड जाती है।
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यदि आप मेरी फेसबुक वाल से कोई पोस्ट कॉपी करके अपनी वाल पर पोस्ट करते है तो आप मेरा नाम मेंशन न करने के लिए स्वतंत्र है। आपसे यह भी आग्रह है कि कृपया मुझे टैग न करें।
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( यह आग्रह मेरे घनिष्ठ एवं पारिवारिक मित्रो पर लागू नहीं है )
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun May 13 2018 13:59:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पोकरण-2 असफल रहा था -- ऐसे परीक्षणों में असफलता अप्रत्याशित नहीं है। लेकिन हमारी साथ ट्रेजेडी यह है कि -- हमनें इसे सुधारने के लिए फिर कभी कोई परिक्षण नहीं किया !!!
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न्यूज लिंक -- <https://goo.gl/m4JkJS>;
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पोकरण-2 में तीन परिक्षण किये गए थे। लेकिन फिशन और लोइल्ड डिवाइस के परिक्षण हम 1974 में ही सफलता पूर्वक कर चुके थे। पोकरण-2 में मुख्य परिक्षण थर्मो न्यूक्लियर ( हाइड्रोजन बम ) डिवाइस का था। लेकिन यह असफल रहा। किन्तु सरकार ने देश की जनता को यह बताया कि हाइड्रोजन बम का विस्फोट कामयाब था।
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हमें अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम फिर से शुरू करना चाहिए। अमेरिका ने 1050 , रूस ने 750 और चीन ने 50 से ज्यादा परिक्षण किये है। लेकिन भारत ने सिर्फ 2 !!! और सबसे चिंताजनक बात यह है कि हमने अब तक एक भी असली टेस्ट ( वातावरणीय परिक्षण ) नहीं किया है। चीन ने 23 वातावरणीय परिक्षण किये है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon May 14 2018 18:29:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B029) गरीबी कम करने के प्रस्ताव

इस एल्बम में गरीबी कम करने के लिए आवश्यक कानूनों के विवरण है तथा गरीबी दूर करने के छद्म प्रस्तावों का भी खंडन किया गया है। साथ ही गरीबी के मूल कारण तथा अन्य देशो से भारत का तुलनात्मक अध्ययन।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon May 14 2018 18:31:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A009) परस्पर संवाद स्तम्भ
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रिकालिस्ट्स ,
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आप सभी से आग्रह है कि "(A009) Two person threads" शीर्षक से के एल्बम बनाएं। \
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राईट टू रिकॉल कानूनों के बारे में जानकारी देने के लिए आपको Two person threads का प्रयोग करना होगा। इन सभी थ्रेड्स को इस एल्बम में पोस्ट करें ताकि आप इन्हें आसानी से ढूंढ सके।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon May 14 2018 18:32:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B014) टेलिकॉम , केबल , इंटरनेट आदि में सुधार

इस एल्बम में टेलीकोम, इंटरनेट , केबल एवं अन्य संचार माध्यमो की प्रणाली को दुरुस्त बनाने के लिए आवश्यक कानून ड्राफ्ट्स की जानकारी एवं अन्य विवरण रखें गए है।
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Mon May 14 2018 18:33:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B001) कृषि सुधार
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रासायनिक खाद के प्रयोग में कमी लाना , किसानो को फसलो के उचित दाम दिलवाने की व्यवस्था बनाना , जमाखोरी की समस्या से निपटना आदि के सम्बन्ध में विवरण।
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Mon May 14 2018 18:34:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B019) सेना को ताकतवर बनाने के प्रस्ताव
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भारतीय सेना को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कानून ड्राफ्ट्स का ब्यौरा एवं अन्य विवरण।
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Mon May 14 2018 18:37:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B024) जल वितरण प्रणाली सुधारने के लिए प्रस्ताव
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इस एल्बम में जल वितरण को बेहतर बनाने , भू गर्भ जल स्तर को बढाने , युनिवर्सल वाटर मीटरिंग और जल संसाधनों का पर नागरिको के स्वामित्व का बटवारा सुनिश्चित करने एवं उसे वितरित करने के लिए आवश्यक कानून ड्राफ्ट्स का ब्यौरा रखा गया है।
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Mon May 14 2018 18:37:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B031) बैंको की लूट कम करने के प्रस्ताव
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इस एल्बम में राष्ट्रीयकृत बैंको की व्यवस्था को सुधारने के लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट्स एवं अन्य सम्बंधित विवरण रखें गए है।
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Tue May 15 2018 12:47:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत में लोकतंत्र के नजरिये से चुनाव के नतीजे फरेब है , और इसका "जनता की जीत" , या "लोकतंत्र की जीत" या "जनता हमारे साथ है" जैसी धारणाओं से कोई सरोकार नहीं है।
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मेरे अनुसार भारत में लोकतंत्र नहीं है, बल्कि लोकतंत्र का विकृत रूप है।
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लोकतंत्र से आशय :
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यदि किसी राज्य का राज वर्ग अमुक राज्य में निवास करने वाले नागरिको के बहुमत के निरंतर अधीन हो, और एक क्षण के लिए इस अधीनता का निलंबन न किया जा सके, तो ऐसे तंत्र को लोकतंत्र कहा जा सकता है।

जनता के प्रति शासक वर्ग की "निरंतर अधीनता" सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं -
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१) नागरिको के पास शासक वर्ग को चुनने एवं उन्हें निष्कासित करने की शक्ति हो।

स्पष्टीकरण - यदि नागरिको के पास शासक को चुनने का अधिकार होगा किन्तु उसे निष्कासित करने का अधिकार नहीं होगा तो चुनने के साथ ही नागरिको के बहुमत की सर्वोच्चता का निलम्बन हो जाएगा। अत: नागरिको के पास शासक वर्ग को चुनने के साथ ही यह भी अधिकार होना चाहिए कि वे शासक वर्ग को भ्रष्टाचार में लिप्त पायें तो उन्हें अविलम्ब पद से निष्काषित कर सके।

भारत के नागरिको शासक को चुन तो सकते है किन्तु उन्हें 5 वर्ष से पहले निष्कासित नहीं कर सकते। अत: चुनाव खत्म होने के साथ ही अगले 5 वर्ष के लिए शासक नागरिको की अधीनता से मुक्त हो जाता है। इस तरह भारत में एक दिन का लोकतंत्र है। जैसे ही चुनावी नतीजे आते है वैसे ही नागरिको का बहुमत शासक वर्ग को नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है।
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२) नागरिको के पास अपराधियों को दण्डित करने की शक्ति हो।

स्पष्टीकरण - यह आवश्यक है कि दंडाधिकारी नागरिको के बहुमत के नियंत्रण में रहे तथा दंड देने की सर्वोच्च सकती नागरिको में निहित हो। यदि ऐसा नहीं किया गया तो दंडाधिकारी अपराधियों एवं शासक वर्ग के साथ गठजोड़ बनाकर नागरिको का उत्पीडन करेगा। यदि न्याय तंत्र नागरिको के अधीन हुआ अपराध एवं उत्पीडन में कमी आएगी।

भारत में दंड देने की सर्वोच्च शक्ति जजों के पास है , किन्तु नागरिको के पास जजों को नियुक्त करने और उन्हें निष्काषित करने की कोई प्रक्रिया नहीं है। भारत में जजों की नियुक्ति खुद जज ही करते है, एवं एक बार नियुक्त होने के बाद आजीवन अपने पद पर बने रहते है। इस तरह भारत का न्याय पालिका नागरिको के नियन्त्रण से पूरी तरह से बाहर है।
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३) नागरिको के पास अपने देश की सेना एवं पुलिस को काबू करने की शक्ति हो।
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यदि चुनकर आया व्यक्ति शासक बनने के बाद सेना एवं पुलिस की सहायता से लोकतंत्र को निलम्बित कर देता है, तो नागरिको के पास वह वास्तविक शक्ति होनी चाहिए जिससे वे अपने राज्य की सेना एवं पुलिस को काबू कर सके। यह शक्ति सिर्फ हथियार बंद नागरिक समाज से ही आती है। अत: यह आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक हथियारबंद हो। हथियारबंद नागरिक समाज ही "लोकतंत्र की जननी" है। इसके अभाव में धीरे धीरे नागरिको के सभी अधिकारों का निलम्बन हो जाता है।

भारत में 1% नागरिको के पास भी बंदूके नहीं है, जबकि शासक के पास राज्य की सेना एवं पुलिस होती है। अत: भारत के नागरिक शासक के मुकाबले में बेहद कमजोर है। इसके अलावा यदि भारत को युद्ध का सामना करना पड़ता है और भारत की सेना हार जाती है तो नागरिको के पास अपनी एवं अपने देश की रक्षा करने के लिए कोई हथियार नहीं है।
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तो जब किसी देश के नागरिको के पास ये तीनो अधिकार हो तो शासक वर्ग निरंतर प्रजा के अधीन रहता है। जब तक शासक वर्ग प्रजा के अधीन बना रहेगा तब तक यह कहा जाएगा कि अमुक तंत्र पर लोक ( लोक = जनता ) का नियन्त्रण है , अत: यह लोकतंत्र है। किन्तु जैसे ही किसी वजह से इन प्रक्रियाओ का
निलम्बन होता है वैसे ही लोकतंत्र का निलम्बन हो जाता है। भारत में नागरिको के पास सिर्फ 1 दिन के लिए वोट करने का अधिकार आता है, और एक बार वोट करने के बाद अगले 5 वर्ष तक लोकतंत्र का निलम्बन हो जाता है। अत: भारत में लोकतंत्र नहीं है , बल्कि इसका विकृत रूप है।
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भारत में लोकतंत्र की स्थापना के लिए हमने ऐसी प्रक्रियाओ का प्रस्ताव किया है जिससे भारत के नागरिको को उपरोक्त तीनो अधिकारी मिल जायेंगे। हमारा प्रस्ताव है कि :

१) भारत के नागरिको के पास अपने जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारियो को निष्कासित करने का अधिकार अर्थात राईट टू रिकॉल होना चाहिए।
२) भारत के नागरिको के पास दंड देने की शक्ति होनी चाहिए। ज्यूरी सिस्टम लाकर ऐसी व्यवस्था कायम की जा सकती है।
३) प्रत्येक नागरिक के लिए बन्दुक रखना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

इनके प्रस्तावित कानून ड्राफ्ट्स देखने के लिए यह लिंक देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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"राजा को प्रजा अधीन होना चाहिए , वर्ना वह प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा" - महर्षि दयानंद सरस्वती , सत्यार्थ प्रकाश 1870
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भारत में चुनाव प्रणाली को इस तरह रचा गया है कि, जीतने का अवसर पार्टी उम्मीदवार के पास ही होता है। राजनैतिक पार्टियों के पास पूरे देश में / राज्य में / संसदीय क्षेत्र में / विधानसभा क्षेत्र में / बूथ स्तर तक फैला हुआ विशाल नेटवर्क होता है। जबकि निर्दलीय उम्मीदवार के पास ऐसा कोई नेटवर्क नहीं होता। चुनावों की अधिसूचना महीने भर पहले जारी की जाती है, और उम्मीदवार के पास चुनाव प्रचार के लिए 2 हफ्ते का समय होता है। अपने संसाधनों एवं मीडिया को भुगतान करने की अपनी क्षमता के कारण सिर्फ बड़ी एवं स्थापित पार्टियाँ ही मतदाता तक पहुंच पाती है। इसके पीएम का सीधा चुनाव न होने के कारण पीएम / सीएम वही बनता है जिसकी पार्टी के पास सांसदों / विधायको का बहुमत होता है। तो मतदाता के पास सिर्फ राजनैतिक पार्टी के उम्मीदवार ही विकल्प के रूप में रहते है। इस तरह कुछ 2-3 बड़ी पार्टियाँ अपना उम्मीदवार मैदान में उतार देती है और जनता को इन 2-3 लोगो में से सबसे कम बदतर व्यक्ति को चुनना होता है।
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दुसरे शब्दों में जनता के पास चुनने के लिए 2-3 विकल्प ही होते है। अब यदि इन 3 उम्मीदवारों में से एक डकैत है , दूसरा लुटेरा है एवं तीसरा चोर है , तो आप किसे चुनेंगे ? अब यदि आप चोर को चुनते है तो इसका यह मतलब कतई नहीं है कि आप चोर को चुनना चाहते थे। बल्कि इसका आशय यह है कि आपके सामने तीन बदतर विकल्प मौजूद थे, जिसमे से आपने सबसे कम बदतर व्यक्ति को चुना। इस तरह यह बाध्यकारी समर्थन है। इसे लोकतंत्र की जीत, जनता की पसंद , जतना का मत , जनता का आदेश जैसी गलत धारणाओं से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 15 2018 17:40:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हास्यास्पद --- 90 साल बाद अब बीजेपी के शीर्ष नेता मोहन भागवत यह दावा कर रहे है कि महात्मा राजगुरु संघ के स्वयंसेवक थे !!! शायद 2019 आते आते संघ यह भी बताने लगे कि महात्मा भगत सिंह जी भी लकड़ी चलाना सीखने के लिए नियमित रूप से शाखा जाते थे !!
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संघ के प्रचारक नरेन्द्र सहगल ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि महात्मा राजगुरु शाखा भी जाते थे , और जब ब्रिटिश सरकार उनका पीछा कर रही थी तो वे हेडगेवार से मिले थे व हेडगेवार ने उनके छिपने का इंतजाम भी किया था !! पुस्तक की भूमिका बीजेपी के शीर्ष नेता मोहन भागवत ने लिखी है !!
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लेकिन महात्मा राजगुरु के भाई के पोतो का कहना है कि हमारे दादाजी या पिताजी ने हमें यह कभी नहीं बताया कि महात्मा राजगुरु संघ के स्वयंसेवक थे !! देश के इतिहासकारों के अनुसार भी इस तरह के दूर दूर तक कोई साक्ष्य / दस्तावेज नहीं है जो महात्मा राजगुरु के स्वयंसेवक होने की पुष्टि करें। यहाँ तक कि महात्मा राजगुरु की बायोग्राफी में भी इसका कोई जिक्र नहीं है !! लगता है महात्मा राजगुरु संघ के अंडर कवर स्वयंसेवक थे !!
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न्यूज लिंक - <https://goo.gl/PNfrJ8>;
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बीजेपी के नेता मोहन भागवत का यह दावा तो बिलकुल ही झूठा है कि महात्मा राजगुरु संघ के स्वयंसेवक थे , और जहां तक हेडगेवार से मिलने और हेडगेवार द्वारा महात्मा राजगुरु के छिपने का इंतजाम करने की बात है, तो यदि हम संघ की बात एक मिनिट के लिए मान भी ले कि महात्मा राजगुरु हेडगेवार से मिले थे और संघ महात्मा राजगुरू का समर्थन करता था , तो भी इस बात के कोई मायने नहीं है। इसकी दो मुख्य वजह है --
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१) यदि संघ महात्मा राजगुरु एवं महात्मा भगत सिंह जी का समर्थन करता था तो उन्होंने तब उन्हें "सार्वजनिक" समर्थन क्यों नहीं दिया ? चुपचाप समर्थन करने का क्या मतलब होता है ? यह खुली हुई बात है कि संघ इन क्रांतिकारियों को सार्वजनिक रूप से "भटके हुए नौजवान" कहता था , और खुद हेडगेवार ने अपने संस्मरण में यह बात कई जगह लिखी है कि वे युवाओं को भगत सिंह जी के रास्ते पर न चलने के लिए समझा रहे थे !!!
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जिन्हें इसकी पुष्टि करनी है वे संघ द्वारा प्रकाशित हेडगेवार की ऑटो बायोग्राफी "द एपोक मेकर" पढ़ें। तो संघ ने तब सार्वजनिक रूप से महात्मा भगत सिंह जी , महात्मा राजगुरु एवं महात्मा चंद्रशेखर आजाद का सार्वजनिक समर्थन नहीं किया, और चुपचाप समर्थन करने के कोई मायने नहीं होते। क्योंकि चुपचाप समर्थन सिर्फ तब किया जाता है जब समर्थन देने का नाटक करना होता है।
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दरअसल तब ब्रिटिश सरकार इन क्रांतिकारियों का पीछा कर रही थी और उनके निशाने पर वे सभी लोग थे जो इन क्रांतिकारियों का समर्थन कर रहे थे। संघ ब्रिटिश सरकार से कोई रार मोल नहीं ले सकता था , क्योंकि उन्हें संगठन चलाने के लिए जो पैसा आता था वह देशी राजाओं द्वारा दिया जा रहा था। ये सभी देशी राजा अंग्रेजो के सामने समर्पण कर चुके थे और उनके गुलाम थे। इस तरह ब्रिटिश शासन में सिर्फ वही संगठन पनप सकता था जो ब्रिटिश के एजेंडे पर काम करे। संघ का यह ओफिसियल स्टेंड था कि हमारा उद्देश्य आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेना नहीं है। संघ तब औपनिवेशिक शासन का समर्थन करता था और गोलवलकर ने खुद यह बात कई दफे अपनी पुस्तक "बंच ऑफ़ थोट्स" में कही है।
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२) संघ ने इतने सालो तक इस बात का जिक्र क्यों नहीं किया कि महात्मा राजगुरु संघ के स्वयंसेवक थे और वे भगत सिंह जी आदि क्रांतिकारियों का समर्थन करते थे ? उनके किसी साहित्य में किसी दस्तावेज में इस बात का कहीं पर जिक्र नहीं है। ऐसा इसीलिए है क्योंकि संघ तब इन क्रांतिकारियों से दूरी बनाकर रखता था। यदि संघ इनका समर्थन करता तो और भी ज्यादा युवा इन क्रांतिकारियों के मार्ग का अनुसरण करते और ब्रिटिश सरकार को समस्या का सामना करना पड़ता। लेकिन संघ एवं ब्रिटिश दोनों ही ऐसा बिलकुल नहीं चाहते थे।
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जहां तक महात्मा राजगुरु के हेडगेवार से मिलने की बात है , इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि महात्मा राजगुरु हेडगेवार जी से मिले हो। क्योंकि उस समय विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता एक दुसरे से सहयोग की उम्मीद में एक दुसरे से मिलते रहते थे। हेडगेवार महात्मा सुभाष चन्द्र बोस से मिलने गए थे , एक बार महादुरात्मा गाँधी भी हेडगेवार से मिलने के लिए संघ कार्यालय में आया था।
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तो इस तरह की मुलाकातों का कोई मतलब नहीं। हो सकता है कि महात्मा राजगुरु हेडगेवार जी को यह समझाने के लिए मिले हो कि जो हजारो युवाओं को उन्होंने शाखाओ में व्यायाम करने में उलझाकर रखा हुआ है , उनमे से क्यों न कुछ युवाओ को सांडर्स की तरह ही कुछ अंग्रेजो को ठिकाने लगाने का दायित्व दिया जाये, और बदले में हेडगवार ने महात्मा राजगुरु को यह समझाने की कोशिश की हो कि तुम हिंसा का रास्ता छोड़कर क्यों नहीं शाखा में आकर लकड़ी चलाना सीखते !!
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ऐसा प्रतीत होता है कि संघ की आई टी सेल और संघ के स्वयंसेवक जल्दी ही इस आशय की ख़बरें फैलाने लगेगें कि संघ की शाखाओं में क्रांतिकारियों को बम बनाना सिखाया जाता था , और संसद में फोड़ने के लिए महात्मा भगत सिंह जी को बम बनाकर खुद हेडगेवार जी ने ही दिया था !!
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बहरहाल यह स्थापित तथ्य है कि संघ का आजादी की लड़ाई से कोई लेनदेन नहीं था बल्कि वे आजादी की लड़ाई लड़ने वाले युवाओं को समझा बुझाकर "सही रास्ते पर" लाने का काम कर रहे थे। और अब संघ के नेता अपने इस इतिहास से पीछा छुड़ाने के लिए छटपटा रहे है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 17 2018 14:13:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मैं राहुल गांधी के इस बयान से सहमत हूँ --- "भारत की अदालतों की हालत पाकिस्तान जैसी हो चुकी है।
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राहुल गांधी ने भारत के सुप्रीम कोर्ट के जजों को सार्वजनिक रूप से भ्रष्ट और निकम्मा बताकर उनका अपमान करने का साहस किया है। भारत में अभी तक इस कद का कोई भी नेता इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाया था। सभी नेता आज तक न्यायपालिका एवं जजों का स्तुति गान ही करते रहे है। मोदी साहेब भी इस मामले में अपवाद नहीं है। बताने को भले ही उनका सीना 56 इंच का हो , लेकिन भ्रष्ट जजों के सामने आते ही उनका सीना पिचक जाता है। चिल्लर मुद्दों पर वे खूब दहाड़ते है , लेकिन जजों के भ्रष्टाचार पर जब वे मुहँ खोलते है तो दहाड़ की जगह थकी हुई म्याऊं ही निकलती है।
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न्यूज लिंक -- <https://goo.gl/DJmbtM>;
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हालाँकि , यह बात और है कि जब कोंग्रेस केंद में सत्ता में थी और जहाँ जहां राज्यों में सत्ता में है , वहां पर राहुल गांधी ने आज तक एक जजों का भ्रष्टाचार कम करने के लिए कुछ भी नहीं किया है। तो यदि आप यह उम्मीद करते है कि राहुल सत्ता में आकर न्यायपालिका में सुधार ले आयेंगे तो आप गफलत है। क्योंकि मोदी एवं केजरीवाल की तरह राहुल गांधी भी राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम के खिलाफ है।
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लेकिन जहां तक बयान की बात है। बयान उन्होंने अच्छा दिया है। क्योंकि यह बयान देश की न्यायपालिका की वास्तविक हालत बताता है। और यदि उन्होंने यह बयान मम्मी से बिना पूछे ही दे दिया है तो 2-3 दिन तक उन्हें पोगो देखने को नहीं मिलेगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 17 2018 16:59:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

स्वदेशी में मानने वाले कार्यकर्ता भी मोदी साहेब / संघ=बीजेपी को वोट करते है और ऍफ़डीआई के समर्थक भी संघ को ही वोट करते है !! इसी तरह से आरक्षण के समर्थक भी मोदी साहेब / संघ को वोट करते है और आरक्षण के विरोधी भी इन्हें ही वोट करते है !! कत्लखाने चलाने वाले भी मोदी साहेब / संघ को वोट करते है और गौ हत्या रोकने की मांग करने वाले लोग भी इन्ही को वोट करते है !!! सूची बेहद लम्बी की जा सकती है।
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मोदी साहेब / संघ के नेता इस तरह का धुंआ कैसे रचते है ? वो किस तरीके का इस्तेमाल करते है कि दो परस्पर विरोधी गुटों के वोट भी अपनी और खींचे जा सके।
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छोटे में जवाब है -- भाषण
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इस बिंदु को केंद्र में रखकर आप इनकी पूरी राजनीति की व्याख्या कर सकते है।
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कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी भी ठीक यही करते है। लेकिन उनकी परास कम है। विरोधी खेमो को एक साथ साधने में वे संघ एवं इनके नेताओं के मुकाबले में टिक नहीं पाते।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 17 2018 19:21:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सबूत भगतो के लिए --
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क्या सोनिया गाँधी को आज तक किसी अदालत ने भ्रष्टाचार के आरोप में सजा दी है ? क्या मायावती , केजरीवाल , मुलायम , ममता , चिदमबरम को सजा हुयी है ? क्या इनके भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी के पास कोई सबूत है ? यदि है तो सबूत यहां रखिये। सबूत दीजिये कि मनमोहन ने पैसा खाया था। सबूत दीजिये जवाहर लाल गाज़ी भ्र्ष्ट था। यदि आपके पास हो तो इनके द्वारा ली गयी घूस की रसीदें भी दिखाइए !!
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मेरा मानना है कि उपरोक्त वर्णित सभी नेता सर से पाँव तक भ्रष्टाचार में लिप्त थे। मुझे इसके लिए किसी रसीद या सबूत की जरूरत नहीं है। कॉमन सेन्स और कॉमन नॉलेज से यह बात स्थापित है कि ये सभी भ्रष्ट थे। क्योंकि हमने एवं जनता ने इनका शासन देखा है। यहां तक कि केजरीवाल भी भ्रष्ट है। बल्कि वह सबसे ज्यादा भ्रष्ट है। दुरात्मा अन्ना एवं महादुरात्मा गांधी बह सिर से लेकर पाँव तक भ्र्ष्ट था। केजरीवाल पॉवर एवं फेम करप्ट ( शक्ति एवं ख्याति लोलुप ) है , जबकि अन्ना और मोहन ख्याति लोलुप थे। और ख्याति हासिल करने के लिए ये लोग किसी हद तक गिर जाते है।
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तो बिंदु यह है कि उपरोक्त सभी लोग बिना किसी सबूत के भ्रष्ट है , तो मोदी साहेब कौन से देवदूत है कि उनके किसी भी भ्रष्टाचार की बात करने पर मोदी भगत लिखित में सबूत मांगने चले आते है ? और मोदी साहेब के इन्ही भगतो से जब सोनिया-राहुल-सिब्बल के खिलाफ सबूत माँगा जाता है तो इनका मुंह घोड़े जैसा लटक जाता है। मतलब ये लोग बुरा मानकर मुहं फुला लेते है।
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पूरा देश जान रहा है कि विधायक कम होने के बावजूद मोदी साहेब ने कर्नाटक में सरकार बनाने का जो दावा किया है वह हॉर्स ट्रेंडिंग बिना संभव नहीं है !! जब बिकना होता है तो बीजेपी के विधायक / सांसद पैसा लेकर बिकते आये है, और जब सरकार बनानी होती है तो पैसा देकर विधायको को खरीदते आये है।
दर्जनों उदाहरण मौजूद है। और इसमें कोई गलत बात भी नहीं है। अब सरकार बनानी है तो पैसा तो देना ही पड़ेगा न। दूसरी पार्टी के विधायक क्या मुफ्त में बीजेपी की सरकार बनवायेंगे ? लेकिन अब भी मोदी भगत यह साबित करने में लगे है कि हम बिना किसी खरीद फरोख्त के सरकार बना रहे है !! मतलब एक हद होती है।
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इस बारे में हमारा प्रस्ताव है कि राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री क़ानून लागू किया जाना चाहिए। प्रत्यक्ष चुनाव होने से जनता सीधे मुख्यमंत्री को चुन सकेगी और विधायको की खरीद फरोख्त बंद हो जायेगी। कहने की जरुरत नहीं है कि संघ के सभी कार्यकर्ता इस क़ानून का विरोध कर रहे है। मोदी साहेब , सोनिया एवं केजरीवाल भी इस कानून का विरोध कर रहे है। क्यों वे इसका विरोध कर रहे है ? यदि आप इन नेताओं के भगत नहीं है तो आपको बताने की जरूरत नहीं है कि इस कानून के आने से इन नेताओं की पार्टियो की एवं इनके कार्यकर्ताओ की कमाई बंद हो जायेगी।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri May 18 2018 20:23:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

संघ की नेता और मंत्री मेनका गांधी किसानो को झिड़क रही है कि -- "उन्हें गन्ना नहीं उगाना चाहिए। देश को गन्ने और चीनी की जरुरत नहीं है" !!! इनकी जबान कतरने के लिए भारत के नागरिको के पास ज्यूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल होना बहुत जरुरी है। सिर्फ वोट देने का अधिकार होने और वोट को वापिस नहीं ले लेने का अधिकार नहीं होने के कारण ही ये लोग वोट लेने के बाद अगले 5 वर्ष तक जनता को भेड़ बकरियों की तरह ट्रीट करते है।

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

वोट वापसी पासबुक कानून होता तो इस नेता की बोलने की हिम्मत नही होती ऐसा किसानों के बोलने के लिये
और सरकार जो पाकिस्तान से चीनी मंगा रही है

समाधान ~ वोट वापसी पासबुक
जूरी कोर्ट

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri May 18 2018 21:01:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri May 18 2018 21:27:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पुरानी खबर , दिसंबर -2009 --- मोदी साहेब ने अपने राज्य के चुनाव आयुक्त को राईट टू रिकॉल क़ानून के समर्थन में बयान देने को कहा था !!!
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मोदी साहेब ने 1980 से 2009 तक राईट टू रिकॉल के बारे में कभी एक शब्द भी नहीं कहा था। और अचानक वर्ष 2009 में उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव आयुक्त को राईट टू रिकॉल के पक्ष में बयान देने को कहा !! इस घटना को 9 साल गुजर चुके है। बस इसके बाद कोई हरकत नहीं !!
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रिकालिस्ट राहुल चिमन भाई मेहता ने राईट टू रिकॉल के मुद्दे पर मई 2009 में गुजरात से चुनाव लड़ा था और दिसंबर 2008 से जनवरी 2009 के बीच में उन्होंने समाचार पत्रों में 7 विज्ञापन दिए थे। इन प्रयासों की वजह से राईट टू रिकॉल तब कार्यकर्ताओ एवं नागरिको में कुछ हद तक चर्चा में आ गया था।
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तो हो सकता है कि , मोदी साहेब ने यह खबर इसीलिए उडाई ताकि कार्यकर्ताओ को मूरख बनाकर संघ से चिपकाये रखा जा सके। और या फिर यह बिना किसी आशय के जनता में उछाला गया एक जुमला था , और अपने श्रोताओ का मनोरंजन करने के लिए वे ऐसे 10-20 जुमले में हर सप्ताह फेंकते रहते है। बहरहाल , वजह जो भी रही हो लेकिन तब उन्होंने राईट टू रिकॉल के समर्थन में बयान दिया था और तब से अब तक न तो उन्होंने इसकी चर्चा की है, और क़ानून पास करने की मंशा तो खैर उनकी कभी थी ही नहीं !!!
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न्यूज की हेडलाइन थी -- "After must-vote, Modi govt plans voter’s Right to recall" , हिंदी - "मोदी सरकार राईट टू रिकॉल लाने की तैयारी में है"
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पूरी न्यूज इस लिंक पर पढ़ें -- <https://goo.gl/MuPUa8>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri May 18 2018 21:40:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत विधायको के खरीद फरोख्त की खुली मंडी बन चुका है !!
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Due to a horse trading farm called BHARAT horse farm, Yedi is 100% sure !!!

Nilim Dutta:

😂😂😂

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri May 18 2018 22:04:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राहुल गांधी ने राईट टू रिकॉल का समर्थन किया है !! उनका लक्ष्य वही है जो संघ=बीजेपी और केजरीवाल का है --- वे राईट टू रिकॉल मूवमेंट को हाईजेक करके इसे ख़त्म करने का प्रयास कर रहे है।
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हम सभी को मालूम है कि राहुल गाँधी जैसे भ्रष्ट नेता से राईट टू रिकॉल कानूनों के समर्थन की उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन राईट टू रिकॉल के बढ़ते हुए समर्थको की संख्या देखते हुए राहुल गांधी ने यह बयान दिया है। वे चाहते है कि राईट टू रिकॉल के समर्थक उनका मौखिक बयान सुनकर उनके पाले में आ जाये। उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि राईट टू रिकॉल के सच्चे समर्थक बयानों में नहीं मानते , बल्कि सिर्फ ड्राफ्ट में मानते है। और उन्होंने राईट टू रिकॉल के लिए कोई ड्राफ्ट नहीं दिया है। मतलब साफ़ है कि वे कार्यकर्ताओ को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे है। राहुल गांधी समझते है कि राईट टू रिकॉल के कार्यकर्ता भी कोग्रेस के नारेबाज कार्यकर्ताओ की तरह ठस बुद्धि है !! राहुल गांधी को समझना चाहिये कि रिकालिस्ट नरेंद्र मोदी के भाषणों तक की चपेट में नहीं आते, तो उनकी लपेट में कैसे आयेंगे। बहरहाल, राईट टू रिकॉल के फर्जी समर्थको की सूची में आज से राहुल गांधी का भी नाम शरीक हो गया है।
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राहुल गांधी ने कहा --- "पंचायती राज की धारा 40 के तहत चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का जनता को अधिकार मिला हुआ है. यह नियम सांसद, विधायक, प्रधानमंत्री पर क्यों नहीं लागू होता ? पंचायती राज के नेताओं पर यह लगाना चाहते हैं तो पीएम पर क्यों नहीं लगाते? हमारी पूरी कोशिश होगी, जितनी भी शक्ति आपको दे सकें, देंगे"
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ये बात समझ नहीं आ रही है कि यह प्रश्न राहुल पूछ किससे रहे है ? अरे, 2004 से 2014 तक आप सत्ता में रखकर चंगा पौ खेल रहे थे क्या ? विपक्ष में आते ही आपको राईट टू रिकॉल पीएम की जरूरत महसूस होने लगी। आपकी मंशा इस क़ानून को पास करने की थी तो तब क्यों नहीं किया !! और अब ड्राफ्ट विहीन बयान देकर लोगो को मूरख बनाने की कोशिश कर रहे हो।
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न्यूज लिंक - <https://goo.gl/mAk6nm>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 19 2018 10:06:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कर्नाटक हॉर्स ट्रेडिंग - हम लम्बे समय से भारत के नागरिको को यह सूचित कर रहे है कि, सिर्फ मोदी साहेब ही भ्रष्ट नहीं है बल्कि संघ के सभी कार्यकर्ता भी सिर से पाँव तक भ्रष्ट है , और सरकार जो भी हफ्ता वसूलती है उसमे से एक बड़ा हिस्सा संघ के कार्यकर्ताओ में बंटता है। पुष्टि के लिए आप संघ के किसी कार्यकर्ता की फेसबुक वाल पर जाकर देख लीजिये , वहां आपको ऐसे तमाम तर्क मिलेंगे जिनसे वे यह साबित करने में लगे हुए है कि कोंग्रेस / जेडीएस के विधायको को खरीद कर बीजेपी को सरकार बना लेनी चाहिए !!! संघ के ये सभी कार्यकर्ता अब खुले आम विधायको की खरीद फरोख्त का समर्थन कर रहे है !!
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उनके कुछ तर्कों का जायजा लीजिये :
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१) सत्ता में आने के लिए सब "कुछ करना" जायज है -- साम दाम दंड भेद।

( मतलब , वे सत्ता में आने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है )
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२) कोंग्रेस भी तो पिछले 60 साल तक विधायक / सांसद खरीद रही थी। तो हम भी यही करेंगे

( मतलब वे मानते है कि, कोंग्रेस जो कर रही थी वह सही था , या फिर कोंग्रेस एवं संघ में कोई अंतर नहीं है , कोंग्रेस भी भ्रष्ट थी और हम भी भ्रष्ट है !! कोंग्रेस ने भ्रष्टाचार किया था इसीलिए हम भी करेंगे !! )
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३) यदि हम सरकार नहीं बनायेंगे तो संघ सत्ता में आ जायेगा !!

( संघ के कार्यकर्ता कोंग्रेस का डर दिखाकर अपने सभी भ्रष्टाचार को जायज ठहराना चाहते है )
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और भी इसी तरह के सभी तर्क , जो इस बात की स्वीकारोक्ति करते है कि -- संघ के कार्यकर्ता भी उतने ही भ्रष्ट है जितने की कोंग्रेस के कार्यकर्ता है !! इन दोनों में कोई अंतर नहीं। भ्रष्ट , मौकापरस्त और सत्ता में आने के लिए कितना भी गिर कर दिखाने वाले।
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समाधान ?
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यदि नागरिको को यह अधिकार दे दिया जाए कि वे अपने राज्य का मुख्यमंत्री सीधे चुन सके , तो इस सर्कस का अंत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री का सीधा चुनाव होने से जनता यह तय कर सकेगी कि उनके प्रदेश का सीएम कौन होगा। हमने इस प्रक्रिया के लिए लिखित में ड्राफ्ट दिया है। इसे गेजेट में प्रकाशित करने से भारत के नागरिको को अपने सीएम को सीधे चुनने का अधिकार मिल जाएगा। और इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए संविधान में कोई संशोधन भी नहीं लाना पड़ेगा।
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लेकिन संघ एवं कोंग्रेस के सभी कार्यकर्ता इस क़ानून का विरोध कर रहे है। क्यों कर रहे है ? क्योंकि इस क़ानून के आने से ये लोग विधायको की खरीद फरोख्त करके पैसा नहीं बना सकेंगे !!
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राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860654192130>;
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वेल्थ टेक्स पार्टी
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 19 2018 13:47:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

१) चित भी मेरी पट भी मेरी , और अंटा मेरे बाऊजी का
२) रहजनो से तो भाग निकला था , अब मुझे रहबरों ने घेरा है
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चित भी मेरी पट भी मेरी ,
और अंटा मेरे बाऊजी का
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मोदी साहेब , येदुरप्पा और अमित शाह को छोड़कर पूरा देश जानता था कि बीजेपी के पास आवश्यक संख्या नहीं है। लेकिन उन्होंने फिर भी सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनकी योजना थी कि विधायको को पैसा फेंककर अपने पाले में मिला लिया जाएगा। कोंग्रेस / जेडीएस के विधायक दूध के धुले तो है नहीं , सबके पास अपार बेनामी संपतियां है जो उन्होंने भ्रष्टाचार करके खड़ी की है , कई पर अदालतों में मामले चल रहे है , तो जो पैसे से नहीं आएगा उन्हें सीबीआई या आयकर रेड की धमकी देकर अपनी तरफ खींच लिया जाएगा। सिर्फ इसी वजह से उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया। और उन्होंने इसके लिए खरीद फरोख्त शुरू भी की।
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प्रत्येक विधायक को 20 करोड़ तक का ऑफर दिया गया, और कुछ को टोकन पेमेंट कर भी दी गयी थी। लेकिन भ्रष्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी समय सीमा को 15 दिन से समेट कर सिर्फ 1 दिन तक सीमित कर दिया था। तो बिकने वाले और खरीदने वाले दोनों ही तालमेल नहीं बिठा पाए। नतीजा -- येदुरप्पा को सदन में पहुच कर मालूम हुआ कि, अरे हमारे पास तो बहुमत ही नहीं है !! जाहिर है , संघ के नेताओं ने विधायको को खरीदने के लिए अपने सारे घोड़े खोल दिए थे। पर मामला बैठा नहीं।
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लेकिन नतीजा आते ही अब संघ के कार्यकर्ताओ ने बिजली की गति से अपना स्टेंड बदल लिया है। संघ के कार्यकर्ता अब कह रहे है -- "संघ ईमानदारी पार्टी है , और हम विधायको की खरीद फरोख्त नहीं करते" !! इन्हें दोनों हाथों में लड्डू चाहिए !!! संघ के कार्यकर्ता इस संदेह में गिरफ्तार है कि देश में अनाज सिर्फ वे ही खा रहे है , शेष भारत तो मैदान में जाकर घास चर आता है। विधायको को खरीद कर सरकार बनाते ही ये लोग तुरंत "लोकतंत्र की जीत" की पुकारा लगाने लगते , और अब नैतिकता के एलान दे रहे है !!! चित भी मेरी पट भी मेरी , और अंटा मेरे बाऊजी का !!! संघ के कार्यकर्ता कलाबाजी दिखाने में अब बिलकुल नए स्तर को छू रहे है।
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रहजनो से तो भाग निकला था ,
अब मुझे रहबरों ने घेरा है
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यह कहने की जरूरत नहीं है कि, यदि संघ की जगह कोंग्रेस को इतनी सीटे मिलती तो वे भी सरकार बनाने का दावा पेश करते और संघ के विधायको को खरीदने के लिए आकाश को पाताल से मिला देते। उनको मौका नहीं मिला तो अभी वे सफेदपोश बनकर गर्दने चला रहे है। इस तरह का गुल गपाड़ मचाने में कोंग्रेस कितनी हुनरमंद है यह बात देश से छुपी हुयी नहीं है l
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बहरहाल कोंग्रेस / जेडीएस के लिए सरकार बनाने में अब कोई बाधा नहीं है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि कर्नाटक को अब जेडीएस और कोंग्रेस का शासन झेलना पड़ेगा। शासन के स्तर पर कोंग्रेस=बीजेपी=जेडीएस में कोई अंतर नहीं है। और कर्नाटक के लोगो ने कोंग्रेस को इस बात के वोट नहीं दिए थे कि वे जेडीएस के साथ सरकार बना ले, और न ही जेडीएस के मतदाताओ ने उन्हें कोंग्रेस से गठबंधन के लिए वोट किये थे। पर नारा यह है कि जो भी जैसे तैसे जीत जाए उसी तरफ लोकतंत्र की जीत दिखा दी जाती है।
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तो यह कुश्ती अच्छे और बुरे विकल्प के बीच नहीं थी। यह लड़ाई 3 बदतर लोगो के समूहों के बीच थी। सरकार कोई भी बनाए , शासन बदतर ही मिलेगा। और ख़ास तौर पर तब जब जनता की इसमें कोई भागीदारी न हो।
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यदि नागरिको को यह अधिकार दे दिया जाए कि वे अपने राज्य का मुख्यमंत्री सीधे चुन सके , तो इस सर्कस का अंत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री का सीधा चुनाव होने से जनता यह तय कर सकेगी कि उनके प्रदेश का सीएम कौन होगा। और असली तमाशा तो अब शुरू होगा। अब कोंग्रेस+जेडीएस उसी बदतर ढंग से शासन करेंगे जिस तरह से करते आये है , और कर्नाटक के मतदाताओ को इसे भुगतना होगा। क्योकी उनके पास 5 साल से पहले इन्हें बदलने का अधिकार नहीं है।
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हमारा प्रस्ताव है कि भारत में राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री का क़ानून लागू किया जाए। इसके लिए प्रस्तावित प्रकिया यहाँ देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860654192130>;
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इस बात पर विशेष रूप से ध्यान दें कि संघ, कोंग्रेस , जेडीएस एवं आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ता इस क़ानून का विरोध कर रहे है। क्यों कर रहे है ? वजह आप उन्ही से पूछे !!
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 19 2018 13:56:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

येदुरप्पा ने प्रत्येक विधायक को 20 करोड़ की पेशकश की थी। विधायक राजी भी थे। लेकिन वे यह राशि 100-100 के नोटों में चाहते थे जबकि येदिरप्पा सभी नोट 2000 के देने पर अड़े हुए थे !! विधायको को अंदेशा था कि मोदी साहेब 1 जून 2018 को 2000 के नोट केंसिल कर देंगे और हम चित हो जायेंगे !!!
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येदुरप्पा ने 160 करोड़ के 2000 के नोटों को 100-100 के नोटों में कन्वर्ट करने की बहुत कोशिश की। लेकिन स्थानीय बैंको के पास इतनी बड़ी मात्रा में छोटे नोट नहीं थे। और इसी वजह से सौदा अटक गया।
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अंत में कोई उपाय होते न देख कुछ 5 विधायको ने 2000 के नोट लेना स्वीकार कर लिया। और अब येदुरप्पा उनसे 20 करोड़ रूपये लौटाने को कह रहे है !! ऐसे थोड़ी होता है भईया। एक बार पैसा हाथ से गया तो फिर गया बस !!!
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ख़ासा तमाशा बन रहा था , पर सुप्रीम कोर्ट ने बीच में आकर रंग उड़ा दिया। सुप्रीम कोर्ट के जजों को लगा कि पैसा लेने वाले विधायक भी जजों की तरह पैसा पकड़ने में काफी तेज तर्रार होंगे। अत: उन्होंने सोचा कि लेनदेन का मामला तो 2 घंटे में ही निपट जाएगा , 24 घंटे तो बहुत है। मी लार्ड , विधायक पैसा खींचने में तो माहिर है , लेकिन विश्वास मत के मामले में उनका मुंह काफी बड़ा होकर खुलता है , और फिर छोटे नोटों का चक्कर अलग से , ऊपर से सारी मिदियाकी निगाहें उनका पीछा कर रही थी , ऊपर से उनकी पार्टियो ने उन्हें पकड़ के रखा हुआ था , तो गफलत हो गयी !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 19 2018 16:50:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Hahahahahaha !!! Shortest summary of what happened to Yeddyurappa ji !! 🤣🤣🤣🤣

Rahul Arya Ballari Karnataka:

Hahahahahaha !!! Shortest summary of what happened to Yeddyurappa ji !! 🤣🤣🤣🤣

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Sat May 19 2018 19:45:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कुछ समय पहले हमने यह बात कही थी कि पाकिस्तान से आये हुए हिन्दू विस्थापितों को नागरिकता देने के बदले में संघ के कार्यकर्ता और नेता हफ्ता वसूल रहे है और हफ्ता न देने पर मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ताओ ने पाकिस्तान से आये 500 हिन्दू विस्थापितों को लात मार कर देश से बाहर खदेड़ दिया है. हाल ही में गृह मंत्रालय के एक अधिकारी को हिन्दू शर्णार्थियो से घूस वसूलते गिरफ्तार किया गया है . संभवत यह अधिकारी वसूली गयी घूस में से एक बड़ा हिस्सा बिना बताये खुद ही रख ले रहा था , अत: इस पर कार्यवाही कर दी गयी.
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न्यूज लिंक -- <http://epaper.bhaskar.com/bhilwara/158/19052018/0/6/>;
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Sat May 19 2018 20:04:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A013) Using facebook effectively
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(A013) फेसबुक का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करना
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इस एल्बम में उन विवरणों के बारे में जानकारी है जिनका इस्तेमाल करके कार्यकर्ता अपने फेसबुक एकाउंट का ज्यादा बेहतर एवं सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल कर सकते है।

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Sat May 19 2018 20:06:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B101) corruption of SoGa/NaMo/ArKe & apex leaders
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं अन्य शीर्ष नेताओ का भ्रष्टाचार
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इस एल्बम में भारत की सभी राजनैतिक पार्टियो के शीर्ष नेताओ के भ्रष्टाचार एवं उनकी अकार्यकुशलता के बारे में विवरण रखा गया है। इसके अलावा अन्य सम्बंधित ख़बरें एवं जानकारी

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Sat May 19 2018 20:07:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B042) Health : proposed law-drafts to improve health care
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(B042) स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट्स
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इस एल्बम में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट्स के बारे में बताया गया है। इसके अलावा अन्य सम्बंधित ख़बरें एवं जानकारी
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Sat May 19 2018 20:09:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B206) On imp current issues raised by media
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(B206) मीडिया द्वारा उठाये गए समसामयिक मुद्दों पर
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पेड मीडिया अपने प्रयोजको से भुगतान मिलने पर या उनके आदेश से जनता का ध्यान भटकाने एवं उन्हें भ्रमित करने के लिए समय समय पर किन्ही मुद्दों को राष्ट्रव्यापी बनाने के लिए प्रसारण करता है। इस एल्बम में अमुक मुद्दों पर टिप्पणियाँ एवं अन्य जानकारी रखी गयी है।
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Sat May 19 2018 20:10:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A037) Q I asked leaders I voted, replies I got from them
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(A037) जिन्हें मैंने वोट किया मेरे द्वारा उनसे पूछे गए प्रश्न एवं मिले हुए जवाब
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जिन पार्टियों एवं नेताओं को मैंने वोट किया उनसे मैंने क्या प्रश्न किये और उन्होंने क्या जवाब दिए -- इस एल्बम में इसका विवरण रखा गया है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 19 2018 20:11:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B081) Footpaths, roads, highways.
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(B081) फुटपाथ , सड़के एवं हाइ वे सुधारने के लिए प्रस्ताव
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इस एल्बम में भारत की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट्स के बारे में बताया गया है। इसके अलावा अन्य सम्बंधित ख़बरें एवं जानकारी
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 19 2018 20:12:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B003) Stopping cow slaughter and reducing subsidies to meat
(B003) गौ हत्या निषेध एवं मांस को दी जा रही सब्सिडी कम करना
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इस एल्बम में गौ हत्या निषेध करने के लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट्स के बारे में बताया गया है। इसके अलावा मांस के कारोबार को दी जा रही अन्यथा सब्सिडी के बारे अन्य सम्बंधित ख़बरें एवं जानकारी।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 19 2018 20:13:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B057) Improving school , college ; Removing RTE
(B057) स्कूल, कोलेज आदि में सुधार लाना एवं RTE हटाना

इस एल्बम में शिक्षा सुधार के लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट्स के बारे में जानकारी रखी गयी है। साथ ही यह विवरण भी रखा गया है कि, किस तरह सोनिया-मोदी-केजरीवाल के नेतृत्व में कोंग्रेस-बीजेपी-आम आदमी पार्टी एवं इनके कार्यकर्ता RTE का इस्तेमाल करके निजी स्कूलों से हफ्ता वसूली कर रहे है।
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यदि आप भारत में शिक्षा सुधार लाना चाहते है तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप अपने फेसबुक एकाउंट पर (B011) Law drafts I have proposed to improve Education") शीर्षक से एल्बम बनाए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 19 2018 20:15:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A012) Math/Logic to understand RTR & religions etc
(A012) गणित एवं लॉजिक से धर्म एवं RTR को समझना
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मेरे विचार में गणित एवं लॉजिक में ऐसे कई अभ्यास है जिनकी सहायता से हम हिन्दू , इस्लाम, ईसाइ , सिक्ख , यहूदी आदि धर्मो के प्रभाव में अंतर को समझ सकते है। और ये लॉजिक हमें अर्थव्यवस्था , राजनीति , जूरी सिस्टम , राईट टू रिकॉल आदि को समझने में सहायक होते है।
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इस एल्बम में इन विषयों के बारे में विवरण रखे गए है।
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यदि आपको ये विवरण पसंद आते है तो कृपया अपनी वाल पर इस नाम से एक एल्बम बनाये और इन्हें कॉपी करके इस एल्बम में रखें। इस पोस्ट्स को एल्बम से बाहर पोस्ट नहीं करें। वर्ना वक्त गुजरने के साथ आप ये पोस्ट खो देंगे और उन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाएगा।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun May 20 2018 07:59:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

संघ के नेता येदुरप्पा जी विश्वास मत हासिल करने में असफल क्यों रहे ?
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इस पोस्ट में 2 वर्जन है। दोनों वर्जन अलग अलग कारण बताते है। आपको जो वर्जन उचित लगे उसे ग्रहण कर सकते है।
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1) संघ के कार्यकर्ताओ का वर्जन :
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चूंकि येदुरप्पा जी संघ से आते है अत: वे एक बेहद ईमानदार व्यक्ति है , और उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी नैतिक आदर्शो का पालन करते हुए गुजारी है। उन्हें समझाया गया कि उनके पास नंबर नहीं है अत: सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करना चाहिए , जबकि यह बात साफ तौर पर नजर आ रही है कि कोंग्रेस+जेडीएस के पास नंबर है। लेकिन येदुरप्पा जी नहीं माने। उन्होंने कहा कि कोंग्रेस और जेडीएस के दो दर्जन विधायक उनके साथ आने को तड़प रहे है, अत: उन्हें सरकार बनाने का दावा पेश करना चाहिए। अत: उन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ ले ली। बाद में कोंग्रेस+जेडीएस के कुछ 11 विधायको ने उनसे सम्पर्क किया और 20 करोड़ रूपये प्रति विधायक देने की मांग की। लेकिन येदुरप्पा ने उनसे कहा कि वे इस तरह के अनैतिक कारोबार के सख्त खिलाफ है।
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तब इन सभी विधायको ने येदुरप्पा जी से मंत्री पद के साथ 5 करोड़ माँगा। लेकिन येदुरप्पा जी ने इस से भी इनकार कर दिया। येदुरप्पा जी ने कहा कि, इस तरह की अग्रिम शर्तों और केश पेमेंट पर समर्थन लेना मुझे मंजूर नहीं है। मैं राजनीति में सेवा के उद्देश्य से आया हूँ। यदि आपको अपनी "अंतरात्मा की आवाज" के आधार पर मुझे समर्थन देना है तो दो वर्ना न दो। यह बात सुनकर सभी विधायक सुन्न हो गए। चूंकि सभी विधायक कोंग्रेस+जेडीएस के थे , अत: बुरी तरह भ्रष्ट थे और उनकी अंतरात्मा मर चुकी थी , अत: इन विधायको ने येदुरप्पा जैसे ईमानदार व्यक्ति की ईमानदार सरकार को समर्थन देने से इनकार कर दिया !!!
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संघ के सभी कार्यकर्ता इस बात का दावा कर रहे है कि सिर्फ अंतरात्मा की आवाज के कारण ही विधायको ने येदुरप्पा को समर्थन नहीं दिया और पैसे के लेनदेन की बातें सिर्फ अफवाह है। ऑफर देने के जो ऑडियो-वीडियो वगेरह सामने आने का दावा किया जा रहा है वे सभी फर्जी है और कोंग्रेस ने डुपलीकेट्स का इस्तेमाल करके इन्हें बनाया है।
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यदि किसी व्यक्ति को संघ के इस वर्जन पर कोई शुबहा हो तो वे कृपया संघ के कार्यकर्ताओ की फेसबुक वाल पर उनसे सम्पर्क करें। चूंकि संघ के कार्यकर्ता "सबूत" में बहुत ज्यादा मानते है अत: शायद उनके पास येदुरप्पा जी के बेहद ईमानदार होने कोंग्रेस+जेडीएस के विधायको की अंतरात्मा मर जाने के सभी सबूत भी मौजूद है। यदि आप उनसे आग्रह करेंगे तो वे अवश्य ही इसके सबूत आपको दिखाएँगे।
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तो संघ के कार्यकर्ताओ के वर्जन के मुख्य बिंदु निम्लिखित है --
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a) येदुरप्पा जी बेहद ईमानदार व्यक्ति है , और उनसे किसी प्रकार के अनैतिक आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती। जबकि कोंग्रेस+जेडीएस के सभी विधायक भ्र्ष्ट है।
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b) येदुरप्पा जी सच्चे व्यक्ति है। कोंग्रेस+जेडीएस के 12 विधायक ने उनका समर्थन करने का वादा किया था , अत: उनका यह दावा सच्चा था कि उनके पास बहुमत है।
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c) विधायक समर्थन के बदले पैसा मांग रहे थे, अत: येदुरप्पा जी ने उन्हें इनकार करके "अंतरात्मा की आवाज" पर समर्थन देने को कहा।
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d) कोंग्रेस+जेडीएस के विधायको की अंतरात्मा मर चुकी थी , अत: वे पलट गए।
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e) येदुरप्पा जी की अंतरात्मा जिन्दा थी अत: उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
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(2) मेरा वर्जन
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मेरा वर्जन "कॉमन सेन्स एवं तर्क" पर आधारित है।

कॉमन सेन्स एवं तर्क से आशय -- कॉमन सेन्स एवं तर्क का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी घटना का अनुसन्धान करने के लिए भौतिक सबूत प्राप्य नहीं होते। भौतिक सबूत नहीं होने पर हम परिस्थितियों का आकलन करने के लिए अपने अनुभव को , सम्बंधित सूचनाओं को , भूतकाल में वैसी ही घटनाओं और उनके नतीजो को आधार बनाते है। किसी व्यक्ति के कॉमन सेन्स के स्तर के आधार पर ये आकलन सही या गलत हो सकते है। तर्क के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष अंतिम सत्य नहीं है। अत: इन्हें चुनौती दी जा सकती है। लेकिन इन्हें चुनौती सिर्फ तर्क से ही दी जा सकती है। किन्तु यदि किसी घटना के "सबूत" मौजूद हो तो उन्हें तर्क से नहीं काटा जा सकता। तब आपको इसे काटने के लिए सबूत की ही जरूरत होगी।
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उदाहरण के लिए मेरा कहना है कि सोनिया, राहुल , मुलायम , माया , ममता , आदि नेता सर से पाँव तक भ्रष्ट है। मैं ऐसा मेरे अनुभव के आधार पर इनका शासन देखकर कह रहा हूँ। और मेरे पास इनके भ्रष्ट होने के पक्ष में सैंकड़ो ऐसे तर्क है जिन्हें काटा नहीं जा सकता। लेकिन जब भी मैं ऐसा कहता हूँ तब कोंग्रेस के कार्यकर्ता मेरी वाल पर आपका मुझसे सबूत मांगते है !!! बताइये। इनका मानना है कि किसी व्यक्ति को सिर्फ तब ही अपने माँ-बाप को पेरेंट्स मानना चाहिए जब तक कि वे डीएनए रिपोर्ट न दिखा दें !!! अरें भैया , यह बात पूरा देश जानता है कि ये सभी नेता करप्ट है। खुद कोंग्रेस के कार्यकर्ता भी यह बात जानते है। लेकिन चूँकि वे खुद भी भ्रष्ट है अत: इनकी वकालत करते है और भौतिक सबूत मांगते है।
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मेरा वर्जन है कि --
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a) येदुरप्पा जी भी उतने ही झूठे , उतने ही अनैतिक एवं उतने ही भ्रष्ट है जितने की कोंग्रेस एवं जेडीएस के नेता है।
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b) वे जानते थे कि उनके पास नम्बर नहीं है। लेकिन उन्होंने सोचा कि पैसा फेंककर विधायको को खरीद लिया जाएगा। वो विश्वस्त थे कि कोंग्रेस+जेडीएस के विधायक बिकने के लिए तैयार बैठे है।
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c) कोंग्रेस+जेडीएस के विधायक भी बिकने को तैयार बैठे थे।
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d) लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे की सीमा निर्धारित कर दी , और इस वजह से सारी सेटिंग एक ही दिन में करना पडी।
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e) लेकिन एक ही दिन में इतनी बड़ी राशि का नकद* इंतजाम येदुरप्पा जी नहीं कर पाए , और डील अटक गयी।*
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f) येदुरप्पा जी कोंग्रेस+जेडीएस के विधयाको को कुछ पेमेंट कर चुके थे , और अब उनसे पैसा लौटने को कह रहे है।**

(*) येदुरप्पा नकद का इंतजाम क्यों नहीं कर पाए , इसके पीछे जो वास्तविक वजह मुझे जो नजर आती है -- भारत में नोटबंदी हो के चुकी है, और 2000 रू के नोट रद्द होने की लगातार सम्भावना बनी हुयी है। पिछली बार जब नोटबंदी हुयी थी तो कोंग्रेस+जेडीएस के विधयाको को इन्हें बदलवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। तब बीजेपी के नेताओं ने इन नोटों को बदलने के लिए मोटा कमिशन लिया था ( लगभग 30-40% ) ! तो ये विधायक फिर से इस चक्कर में नहीं आना चाहते थे। अत: उन्होंने 100-100 के नोट मांगे। सिर्फ 4-5 घंटो में इतनी बड़ी राशि का इंतजाम 100 के नोटों में करना मुमकिन नहीं था, क्योंकि बैंक खुद कैश की कमी से जूझ रहे है। तो येदुरप्पा नकदी का इंतजाम न कर सके। मेरा मानना है कि यदि येदुरप्पा जी को एक दिन और मिल जाता तो शायद वे इसका इंतजाम कर देते।
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(**) ऐसे मामलो में "बाद में" या उधारी का कोई काम नहीं होता। और वैसे भी कोंग्रेस+जेडीएस के विधायक एडवांस में ही मानते है, बाद में दे देंगे में नहीं। तो येदुरप्पा जी के विभिन्न व्यक्ति अलग अलग विधायको को सेट कर रहे थे, और इनमे से जो 2-3 विधायक राजी हो गए थे उन्हें पेमेंट दी जा चुकी थी। लेकिन फ्लोर टेस्ट से पहले ही येदुरप्पा जी ने इस्तीफा दे दिया। अब येदुरप्पा जी इन विधायको से पैसा लौटाने को कह रहे है, लेकिन इन विधायको का कहना है कि हमने पैसा लिया था तो आपको वोट भी दे देते , लेकिन आपन शक्ति परिक्षण नही करवाया तो हम क्या करे। और येदुरप्पा जी ने इस्तीफा इसीलिए दे दिया था कि वे सभी पर्याप्त विधायको को पेमेंट नहीं कर पाए थे , तो फ्लोर टेस्ट में सरकार गिर जाती।
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मेरे वर्जन का स्त्रोत - जैसा कि घटनाक्रम के दौरान कर्नाटक के शीर्ष नेताओं के बेहद निकटस्थ रहे संघ एवं कोंग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ताओ ने मुझे बताया।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun May 20 2018 11:47:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B089) आरक्षण को कम करना एवं क्यों मैं जातीय आरक्षण के पक्ष में हूँ।
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सभी कार्यकताओ से मेरा आग्रह है कि वे अपनी फेसबुक वाल पर "(B020) why I [suport/oppose]" शीर्षक से एक एल्बम बनाये।
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शीर्षक में यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि आप आरक्षण का समर्थन करते है या विरोध करते है या इसमें कोई बदलाव सुझाते है।
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मैंने उन कानूनों का प्रस्ताव किया है जिनके लागू होने से आरक्षण में प्रभावी रूप से कमी आएगी और इसका ढांचा संतुलित हो जाएगा। लेकिन मैं जातिगत आधार पर आरक्षण दिए जाने का समर्थन करता हूँ। वजह - मौजूदा स्थिति यह है कि
यदि आरक्षण को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए तो ज्यादातर सम्भावना है कि मुख्यधारा से बाहर जीवन यापन कर रहे दलितो को मिशनरीज लपक लेगी। कोई व्यक्ति यह कह सकता है कि, "यदि वे हिन्दू धर्म छोड़कर जाना चाहते है, तो
इससे मुझे क्या फर्क पड़ता है" !! लेकिन वे इसकी भयावह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से परिचित नहीं है। भारत में जातीय आधार पर आरक्षण 1880 में भारतीय राजाओं ने लागू किया था !!! उन्होंने देखा कि इस्लामिस्ट और मिशनरीज हिन्दू धर्म में
इस मुद्दे पर तेजी से विभाजन लाने में सफल हो रहे है तो उन्होंने यह रास्ता चुना। और आरक्षण के कारण इस्लामिस्ट एवं मिशनरीज का मार्ग अवरुद्ध हो गया।
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इस एल्बम में 4 बिन्दुओ के बारे में लिखा गया है।
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(a) दलितों / ओबीसी के समर्थन से आरक्षण को घटाकर 5% तक करने के लिए प्रस्तावित कानून ड्राफ्ट्स।

(b) क्यों मैं जातीय आधार पर आरक्षण का समर्थन करता हूँ।

(c) क्यों मौजूदा आरक्षण नीति दोषपूर्ण है और इससे क्या नुकसान हो रहा है।

(d) क्यों "आर्थिक आधार पर आरक्षण" नितांत बकवास प्रस्ताव है।
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(e) कैसे सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं अन्य शीर्ष नेता मिशनरीज के आदेश पर आरक्षण नीति का इस्तेमाल करके हिन्दुओ में एक स्थाई विभाजन करने की नीति पर काम कर रहे है।
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कृपया इस बात पर ध्यान दें कि इस एल्बम का शीर्षक आरक्षण पर आपके रूख के अनुसार होना चाहिए। अत: इस एल्बम का शीर्षक कॉपी न करे , अपने रूख के अनुसार आप अपना शीर्षक स्वयं बनाए, एवं इसका डिस्क्रिप्शन भी स्वयं
लिखे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun May 20 2018 11:50:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B110) नेताओ व मीडिया द्वारा RTR को हाईजेक करके नष्ट करने के प्रयास
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राईट टू रिकॉल मूवमेंट नयी नहीं है . भारत में इसकी मांग 1925 से हो रही है . जब भी इन कानूनों की मांग बढती है तब सत्ता में शीर्ष पर बैठे नेता और धनिक वर्ग इसे हाईजेक करके नष्ट करने का प्रयास करते है . आज के दौर में यह
भूमिका सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नेता निभा रहे है . इस एल्बम में ऐसे RTR के इन विरोधियो द्वारा किये जा रहे नकारात्मक प्रयासों के बारे में विवरण दिया गया है .
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon May 21 2018 06:40:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

"ये तीन पेटियां ही किसी राज्य के नागरिको की रक्षा करती है -- १) मतपत्र पेटी , २) ज्यूरी मत की पेटी , ३) कारतूस की पेटी" --- यह उद्बोधन असली लोकतंत्र पर सबसे सटीक टिपण्णी करता है
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यदि किसी राज्य के नागरिको के पास इनमे से किसी एक पेटी की भी कमी है तो वहां लोकतंत्र नहीं है , बल्कि लोकतंत्र का वहम है। भारत के नागरिको के पास इनमे से सिर्फ 1 ही डब्बा है। शेष 2 गायब है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon May 21 2018 20:00:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

( A420 ) Less known facts about RSS=BJP
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( A420 ) संघ=बीजेपी के बारे में अल्पज्ञात सूचनाएं

इस एल्बम में संघ=बीजेपी के बारे उन सूचनाओ एवं एजेंडे के बारे में जानकरी रखी जाएगी जिनके बारे में सामान्य कार्यकर्ताओं को जानकारी नहीं है।
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मेरा मानना है कि संघ ही बीजेपी है। इनमे बुनियादी रूप से कोई अंतर नहीं है। संघ के नेता और कार्यकर्ता संघ और बीजेपी में जो अंतर करते है वह अंतर गंगाधर एवं शक्तिमान के अंतर से भिन्न नहीं है। तो यदि कोई व्यक्ति यह कहता है कि संघ एवं बीजेपी एक नहीं है बल्कि अलग अलग है , तो मैं उनके मत का प्रतिकार नहीं करता हूँ, बल्कि यह कहता हूँ कि संघ एवं बीजेपी में वही अंतर है जो गंगाधर एवं शक्तिमान में है। या तो सिर्फ बच्चे ही गंगाधर एवं शक्तिमान में अंतर देखते है या फिर कोई ऐसा व्यक्ति जिसकी बुद्धि असाधारण विकास कर चुकी है।
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इसी एल्बम में इस बारे में भी विवरण है कि क्यों संघ के कार्यकर्ता एवं नेता खुद को बीजेपी से बार बार अलग दिखाने की कोशिस करते है। साथ ही संघ के बारे अन्य अल्प प्रचारित विवरण।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 22 2018 09:00:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क्यों / कैसे चर्च 2019 के चुनावों में मोदी साहेब एवं संघ के नेताओं की सत्ता में वापसी की संभावनाएं बढाने के लिए काम कर रहा है ?
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न्यूज लिंक -- <https://goo.gl/gcv6S6>;
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it says -- "Church asks Christians to prepare and pray every Friday for a new govt in 2019, interferes in politics again"
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"चर्च ईसाइयो कह रहा है कि वे प्रत्येक शुक्रवार को यीशु से प्रार्थना करें कि 2019 में नयी सरकार सत्ता में आये"
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लेकिन चर्च यह बात सार्वजनिक रूप से क्यों कह रहा है ?
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ताकि 2019 के आगामी लोकसभा चुनावों में हिन्दू वोटर और भी तेजी से मोदी साहेब और संघ की कार्यकर्ताओ की और दौड़ लगाए !!
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तो प्रश्न यह है कि --- चर्च मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ताओ की सत्ता में फिर वापसी क्यों चाहता है ?
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क्योंकि मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ता RTE का इस्तेमाल करके प्राइवेट बजट स्कूलों को बर्बाद करने में काफी मेहनत कर रहे है !! साथ ही संघ के सभी कार्यकर्ताओ ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मंदिर सरकारी नियन्त्रण में रहे , ताकि हिन्दू मंदिरों एवं हिन्दू धर्म को और भी कमजोर किया जा सके।
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जब प्राइवेट बजट स्कूल तबाह हो जायेंगे तो गरीब तबके के बच्चो के पास सिर्फ एक विकल्प बचेगा -- उन्हें मिशनरीज द्वारा संचालित स्कूलों में जाना पड़ेगा !!! इसके अलावा जब बजट स्कूल बंद हो जायेंगे तो मिशनरीज इन्हें कौड़ियो के दाम पर अधिगृहित कर लेगी !!!
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और सबसे कमाल की बात यह है कि -- ज्यादातर हिंदूवादी कार्यकर्ता / मतदाताओ को इस बात की भनक तक नहीं लग रही है कि मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ता भी उसी नीति पर काम कर रहे है जिस पर कोंग्रेस / आप आदमी पार्टी के नेता करते है !!!
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ऐसे हालात में स्वभाविक रूप से चर्च यही चाहेगा कि मोदी साहेब एवं संघ के कार्यकर्ताओ की सत्ता में वापसी हो।
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लेकिन चर्च मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ताओ खुला समर्थन करने से क्यों बच रहा है ? क्योंकि , यदि चर्च सार्वजनिक रूप से संघ का समर्थन करता है तो ज्यादातर हिन्दूवादी कार्यकर्ता मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ताओ को संदेह की नजरो से देखने लगेंगे। तो चर्च सार्वजनिक रूप से मोदी साहेब का विरोध करके हिंदूवादी कार्यकर्ताओ का यह भ्रम बनाए रखना चाहता है कि, मोदी साहेब हिंदुत्व को मजबूत करने के लिए काम कर रहे है !!
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और बची खुची कसर अब संघ की आई टी सेल पूरी करेगी। वे सोशल मीडिया पर यह खबर फैलाना शुरू करेंगे कि , "देखो चर्च मोदी साहेब एवं संघ की सत्ता में वापसी नहीं चाहता। यदि संघ 2019 में फिर से सत्ता में नहीं आ सका तो चर्च का प्रभाव भारत में बढ़ जाएगा और हिन्दू धर्म का क्षरण होगा। इसीलिए अगर तुम खुद को और हिन्दू धर्म को बचाना चाहते हो तो 2019 के चुनावों में संघ की सत्ता वापसी के लिए प्रचार करो" !!!
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समाधान ?
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हमें देश के सभी हिंदूवादी कार्यकर्ताओ को सूचित करने की जरूरत है कि , संघ के कार्यकर्ता और मोदी साहेब सरकारी / निजी स्कूलों , मंदिरों को बर्बाद करने और देशी गाय को जर्सी से बदल देने के लिए बहुत तेजी से कार्य कर रहे है। और यदि हमें मिशनरीज के कदम रोकने है तो किसी पार्टी या नेता को सपोर्ट करने की जगह उन कानूनों को लागू करवाने पर ध्यान देना चाहिये जिससे वास्तविक बदलाव आ सके। और संघ के मुकाबले में हमारी संख्या बहुत मामूली है और हमारे पास पर्याप्त संसाधन भी नहीं है ,अत: हमें लम्बा रास्ता तय करना है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 22 2018 11:58:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B009) क़ानून ड्राफ्ट समझने के एवज में पारितोषिक प्राप्त करना
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(B009) understand law draft to get PRIZE
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यदि कोई कार्यकर्ता मेरे द्वारा प्रस्तावित किसी क़ानून ड्राफ्ट्स को समझने का दावा करता है तो वह अमुक क़ानून ड्राफ्ट से सम्बंधित प्रश्नों का उत्तर देकर इसके बदले में पारितोषिक प्राप्त कर सकता है। इस पारितोषिक की राशि 5 रू से 50 रू तक हो सकती है। इस एल्बम में प्रतियोगिता के संचालन आदि के बारे में नियम वगेरह तथा अन्य विवरण रखें जायेंगे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 22 2018 18:56:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क़ानून ड्राफ्ट पुरस्कार चर्चा में भाग लेने एवं पारितोषिक प्राप्त करने से सम्बंधित नियम-विनियम।
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मैंने देश की विभिन्न समस्याओ के समाधान के लिए 200 से अधिक कानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है। यदि कोई व्यक्ति मेरे द्वारा प्रस्तावित किसी क़ानून ड्राफ्ट्स को समझ जाने का दावा करता है , तो वह अमुक क़ानून ड्राफ्ट से सम्बंधित प्रश्नों का उत्तर देकर इसके बदले में पारितोषिक प्राप्त कर सकता है। इस पारितोषिक की राशि 20 रू से 50 रू तक हो सकती है। इस चर्चा के संचालन से सम्बंधित नियम निम्नलिखित है -
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(A) भाग लेने के लिए अर्हता :
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१) सिर्फ वही यूजर्स इसमें शामिल हो सकते है, जो मेरी फेसबुक मित्र सूची में है। यदि यूजर मेरी फ्रेंड लिस्ट में नहीं है तो वह फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर इस चर्चा में शामिल हो सकता है।
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२) सिर्फ वही फेसबुक यूजर इसमें हिस्सा ले सकते है जिनकी फेसबुक आई डी असली* है। आयु का कोई बंधन नहीं है।
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३) सिर्फ भारतीय नागरिक एवं भारत में निवास करने वाले ही इसमें हिस्सा ले सकते है।

(*) किसी यूजर को अपनी आई डी असली साबित करने के लिए कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है। यदि मैं मानता हूँ कि अमुक आई डी असली है, यूजर इसमें हिस्सा ले सकता है।
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(B) प्रक्रिया
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१) नीचे के कोलम (D) में कुछ क़ानून ड्राफ्ट्स की सूची दी गयी है। यूजर इनमे से कोई भी एक या एक से अधिक ड्राफ्ट चुन सकता है।
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२) ड्राफ्ट पढने के बाद मैं यूजर से ड्राफ्ट से सम्बंधित कोई 5 प्रश्न करूँगा। यदि इनमे से यूजर किन्ही 4 प्रश्नों के सही उत्तर दे देता है तो वह पारितोषिक प्राप्त करेगा।
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३) प्रश्न सिर्फ ड्राफ्ट में से ही पूछे जायेंगे। ड्राफ्ट के बाहर से कोई प्रश्न नहीं किया जायेगा।
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४) प्रश्नोत्त्तर ऑनलाइन होंगे और यूजर को प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने के लिए अधिकतम 20 मिनिट का समय मिलेगा।
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(C) भुगतान
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१) यूजर को भुगतान Paytm से किया जाएगा। यदि यूजर के पास Paytm नहीं है तो यूजर अपने मोबाइल में उतनी राशि का टॉप अप ले सकता है।
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२) भुगतान 48 घंटे में कर दिया जाएगा। यदि यूजर 24 घंटे में पारितोषिक प्राप्त करने के लिए अपने Paytm एकाउंट से सम्बद्ध मोबाईल नंबर नहीं देता है तो भुगतान रद्द हो जाएगा।
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(D) क़ानून ड्राफ्ट्स की सूची :
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1. टू चाइल्ड लॉ ( 15 रुपये , 5 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/835548539956675>;
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2. बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने के लिए कानूनी ड्राफ्ट ( 20 रूपये , 6 प्रश्न )
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1395609733890592>;
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3.जिला न्यायलय में ज्यूरी प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 25 रूपये , 7 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/829456537232542>;
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4. सेना तथा नागरिकों के लिए खनिज रॉयल्टी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 25 रूपये , 7 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/848060668705462>;
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5. संपत्ति कर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 40 रूपये 7 प्रश्न ) :
<https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/575904979254367>;
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6. राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट ( 10 रूपये , 5 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/821128631398666>;
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7. राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 15 रूपये , 4 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859858050859057>;
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8 राईट टू रिकॉल उच्चतम न्यायालय मुख्य न्यायाधीश के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 15 रूपये , 4 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860420858820>;
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9.सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) के लिए कानूनी ड्राफ्ट ( 5 रूपये , 8 प्रश्न ) :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809743912477180
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10.भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट ( 5 रूपये , 8 प्रश्न ) :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809740312477540
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11. राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट ( 25 रूपये , 6 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1428070950644470>;
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12. राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री के लिए कानूनी ड्राफ्ट ( 15 रूपये , 4 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1455949007856664>;
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(E) ड्राफ्ट का चयन एवं पारितोषिक की सीमा
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१) यूजर राईट टू रिकॉल सीएम एवं राईट टू रिकॉल पीएम में से एक ड्राफ्ट ही चुन सकता है, दोनों नहीं।
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२) यूजर राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज, राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी एवं पुलिस अधिकारी में से एक ड्राफ्ट ही चुन सकता है।
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३) एक से अधिक प्रश्नों के उत्तर गलत होने से यूजर को पारितोषिक नहीं मिलेगा।
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४) यूजर दूसरी बार फिर से चर्चा में शामिल हो सकता है। लेकिन तीसरी बार नही।
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५) किसी यूजर को अधिकतम भुगतान 50 से अधिक नहीं किया जाएगा।
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इस योजना का उद्देश्य -
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इस कवायद का मुख्य उद्देश्य नागरिको / कार्यकर्ताओ में ड्राफ्ट को समझने की स्किल का मापन करना है। पारितोषिक की राशि इतनी छोटी है कि , इसे नगण्य माना जा सकता है। किन्तु पारितोषिक देने का औचित्य यह है कि प्रत्येक व्यक्ति के समय एवं उर्जा की एक कीमत होती है। यदि कोई व्यक्ति किसी के आग्रह पर अपना समय निवेश करता है तो निवेश किये गए उसके समय के एवज में भुगतान किया जाना चाहिए। विभिन्न व्यक्तियों के समय के कीमत कम ज्यादा हो सकती है , लेकिन तय की गयी राशि मेरे बजट एवं हैसियत के अनुसार है , यूजर की हैसियत के अनुसार नहीं।
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नागरिको एवं कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि जो यूजर 3-4 पेज का ड्राफ्ट पढ़कर उसे समझने की स्किल रखते है , वे इस कंटेस्ट में हिस्सा ले। जो मित्र इसमें हिस्सा लेना चाहते है वे कमेन्ट में अपने ड्राफ्ट का नाम लिख सकते है। आपके कमेन्ट पर मेरे अनुमोदन के साथ ही आपकी प्रविष्टि हो जायेगी। जब आप ड्राफ्ट को पढ़कर समझ ले तब प्रश्नोत्तर के लिए सहमती दे सकते है।
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यह प्रतियोगिता असीमित समय एवं असीमित यूजर्स के लिए नहीं है। यह सीमित समय एवं सीमित यूजर्स के लिए खुलती एवं बंद होती रहेगी। अस्थायी रूप से इसके बंद होने और खुलने की सूचना इसी पोस्ट के पहले से पांचवे कमेन्ट में देखी जा सकती है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 22 2018 21:01:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मेरे समेत कई लोग यह मानते है कि संघ और बीजेपी एक ही है। लेकिन जब भी मैं ऐसा कहता हूँ, तो संघ के स्वयंसेवक इस बात का बेहद तीखे शब्दों में विरोध करते है। वे हमेशा इस बात पर जोर देते है कि संघ को बीजेपी के साथ न जोड़ा जाए। तो इस विषय पर मेरा स्पष्टीकरण यह है कि -- यह मेरी निजी मान्यता है कि संघ और बीजेपी एक ही है। और मैं मेरी यह मान्यता किसी अन्य पर थोप नहीं रहा हूँ। मेरी जो मान्यता है , वो है। हर कोई किसी भी मुद्दे पर अपना मत रखने के लिए स्वतंत्र है।
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उदाहरण के लिए -- पहले आप उनसे इस प्रश्न का जवाब लीजिये कि , "क्या गंगाधर ही शक्तिमान है" ?
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मेरा जवाब है कि, कई लोग मानते है कि गंगाधर और शक्तिमान में कोई फर्क नहीं है जबकि कई लोग कहते है कि ये दोनों अलग अलग है !! तो जिसे जो मानना है वह वैसा मान सकता है।
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अभी देखिये, निचे जो चित्र दिया गया है उसे दिखाकर कई लोग कहते है कि गंगाधर और शक्तिमान अलग अलग है। और उनके पास इसका सबूत भी है -- दोनों के आधार कार्ड अलग अलग है !! तो अब क्या कर सकते है , उनकी मान्यता है तो ठीक है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 23 2018 06:49:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

( पुरानी खबर ) राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने पिछले साल मंत्री वेतन अधिनियम में संशोधन लाकर यह विधेयक पास किया था। कोंग्रेस से लेकर बीजेपी तक किसी भी विधायक ने इसका विरोध नहीं किया। सिर्फ बीजेपी के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी ने इसका विरोध किया। वे इसका विरोध इसीलिए कर रहे है क्योंकि वे राजे के प्रतिद्वंदी है , और खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते है। जब यदि तिवाड़ी मुख्यमंत्री होते और राजे तिवाड़ी की जगह होती तो राजे विरोध करती और तिवाड़ी इस बिल का समर्थन करते !!
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यह न्यूज भी पढ़े ( हिंदी में ) --<https://goo.gl/DoXyXX>;
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इन लोगो का इलाज निचे दिए गए लिंक पर दिया गया है :
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राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट --
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860654192130>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 23 2018 09:26:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क्यों मोदी साहेब के अंध भगतो और संघ के कार्यकर्ताओ को पेट्रोल के दाम 1000 रूपये प्रति लीटर हो जाने तक कोई समस्या नहीं आएगी ? क्योंकि , जब सवार गाडी चलाते समय "हर हर मोदी घर घर मोदी" का पुकारा लगाता है तो वाहन का एवरेज एकदम से बढ़ जाता है !!!
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2014 से पहले तक मोदी साहेब के अंध भगत और संघ के कार्यकर्ता पेट्रोल के दाम बढ़ने पर काफी नारे लगा रहे थे , लेकिन इन दिनों वे खामोश है। क्यों ?
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क्योंकि जून -2014, में सभी वाहन निर्माता कम्पनियो ने पुराने एवं नए वाहनों में एक एक्स्ट्रा डिवाइस लगा दिया था। यदि सवार "हर हर मोदी घर घर मोदी" का नारा लगाता है तो यह डिवाइस दुपहिये वाहन का एवरेज बढ़ाकर 50 पैसे प्रति किमी और कारो का 1 रूपये प्रति किमी कर देता है।
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तो जब पेट्रोल का दाम 60 रूपये प्रति लीटर से बढ़कर 80 रूपये होता है तो मोदी साहेब के अंध भगत एवं संघ के कार्यकर्ता "मोदी-मोदी-मोदी-मोदी" का नारा लगाकर अपना एवरेज बढ़ा लेते है। और इसी वजह से उन्हें पेट्रोल के दाम बढ़ने से किसी प्रकार की तकलीफ महसूस नहीं होती।
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यह डिवाइस पेट्रोल के दाम 1000 प्रति लीटर तक ही काम करेगा। ( हाँ , आपने सही पढ़ा है -- 1000 रूपये , टाइपिंग मिस्टेक नहीं है )
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लेकिन उन लोगो का क्या जो मोदी साहेब के अंध भगत एवं संघ के कार्यकर्ता नहीं है ?
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देखो , उनकी तरफ से ये लोग चाहे तो सिकने के लिए भाड़ में छलांग लगा सकते है। वैसे भी जो मोदी साहेब का अंध भगत नहीं है वह एंटी नेशनल ही है। इसकी तस्दीक आप मोदी साहेब के अंध भगतो और संघ के कार्यकर्ताओ से कर सकते है। तो हम एंटी नेशनल लोगो की परवाह कब तक करेंगे।
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एक व्यक्ति ने इस आशय की बात कही थी कि , "पाकिस्तान में पेट्रोल 51 रूपये लीटर है जबकि भारत में 80 !!! , और मोदी साहेब के अंध भगत ने जवाब दिया कि , "अच्छा !! तो तुम पाकिस्तान में जाकर क्यों नही सेट हो जाते" ? मैं अंध भगत के इस जवाब से सहमत हूँ।
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और जब आप किसी भी अंध भगत से पेट्रोल के दाम बढ़ने का समर्थन करने का कारण पूछेंगे तो वे आपको यह नहीं बताएँगे कि वे मोदी साहेब का नारा लगाकर अपना एवरेज बढ़ा ले रहे है , बल्कि आपको चरका देने के लिए पेट्रोल का दाम बढ़ना देश हित में है , इससे तरक्की होगी , विकास होगा , आदि जैसे तर्क देंगे !!
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पेट्रोल के दाम बढ़ने की समस्या का समाधान --- जीएसटी को हटाकर वेल्थ टेक्स लागू किया जाना चाहिए। किन्तु पेट्रोल पर टेक्स जारी रहेगा। इसके अलावा हमें उन कानूनों की जरूरत है जिससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट एवं फुटपाथ की दशा सुधारी जा सके। इससे वाहनों की जरूरत में कमी आएगी।
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इससे समस्या का समाधान कैसे होगा ? क्योंकि जीएसटी हटाकर वेल्थ टेक्स लाने से अन्य वस्तुओ पर टेक्स कम होने से कीमतें नीचे आ जाएगी , लेकिन वेल्थ टेक्स के कारण सरकार के खजाने में फिर भी ज्यादा पैसा आएगा।
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इस समय और यहाँ तक कि बाद में भी पेट्रोल पर लगाए गए टेक्स को कम क्यों नहीं किया जा सकता ? क्योंकि सरकार अभी बेहद ज्यादा घाटे में है और हमारे पास तेल आयात करने के लिए डॉलर नहीं है !! ऐसे हालात में पेट्रोल पर टेक्स घटाने की मांग जायज नहीं है।
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किन्तु समस्या यह है कि तेल एवं ऑटोमोबाइल कम्पनियां भारत में वाहनों एवं तेल की खपत को बढ़ाना चाहती है , अत: वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट एवं फुटपाथ को बढ़ावा देने वाले कानूनों को खिलाफ है। ये कम्पनिया बेहद शक्तिशाली है और हमारे देश की सभी पार्टियों का सुबह से शाम तक का खर्चा पानी इन्ही के चंदे से आता है। कोंग्रेस इन कम्पनियों से हफ्ता खाती थी और पब्लिक ट्रांसपोट सुधारने के कानूनों का विरोध करती थी , और सत्ता में आने के बाद संघ के कार्यकर्ताओ ने इस हफ्ते पर अपना कब्ज़ा कर लिया है। और जहां तक वेल्थ टेक्स की बात है तो देश की सभी पार्टियाँ , सारे जज, मंत्री, नेता, उद्योगपति , धनिक वर्ग और इनके टुकडो पर पर पलने वाले सभी कार्यकर्ता भारत में वेल्थ टेक्स लाने के सख्त खिलाफ है। यदि वेल्थ टेक्स आ जाता है तो ये सभी भ्रष्ट उद्योगपति एवं नेता रातों रात एक्सपोज हो जायेंगे।
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वेल्थ टेक्स के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/575904979254367>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 23 2018 16:41:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कैसे सीमांकित वोटिंग सिस्टम आने से भारत के मतदाता कोंग्रेस के भय से आजाद हो सकते है ?
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कर्नाटक में कांग्रेस+जेडीएस की सरकार जनता की राय का मखौल है। जेडीएस को 38 सीट मिली है। मतलब कर्नाटक की जनता के बड़े समूह ने उन्हें ख़ारिज कर दिया था। लेकिन अब वे सरकार चला रहे है !! कोंग्रेस को भी सिर्फ 78 सीट मिली है , और उन्हें यह वोट जेडीएस के साथ मिलाकर सरकार चलाने के लिए नहीं मिला है।
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एक दृष्टिकोण से इन दोनों पार्टियों को मिलाकर जो सीट मिली है वे बीजेपी की सीट से ज्यादा है , अत: यह सरकार जनता के बहुमत का प्रदर्शन करती है। लेकिन इसमें पेच यह है कि , जिन मतदाताओ ने कोंग्रेस को वोट दिया था उनमे ज्यादातर मतदाता जेडीएस के खिलाफ थे और यही स्थिति कोंग्रेस के मतदाताओ के साथ भी है। मतलब कोंग्रेस को जितने लोगो ने वोट किया उनमे से कई मतदाता जेडीएस के जबरदस्त खिलाफ थे , और यदि उन्हें फिर से मौका मिले तो वे कोंग्रेस की जगह बीजेपी को वोट कर देंगे। क्योंकि वे जेडीएस को सत्ता में नहीं देखना चाहते। और जेडीएस के कई मतदाताओ को भी यदि यह मालूम होता कि वे कोंग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे तो वे जेडीएस की जगह बीजेपी को वोट कर देते , ताकि कोंग्रेस को सत्ता में आने रोका जा सके।
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इस पूरे झमेले का कारण इंस्टेंट रन ऑफ़ वोटिंग सिस्टम एवं सीमांकित मतदान प्रणाली का अभाव है। सीमांकित मतदान प्रणाली में मतदाता उम्मीदवार को (-100 से 100) के बीच अंक दे सकता है। इस कारण मतदात के पास दो विकल्प आ जाते है -- १) वह किसी उम्मीदवार को कितना पसंद करता है , और २) वह किसी उम्मीदवार को कितना सख्त नापसंद करता है। आज भारत में मतदान की जो प्रणाली है वह मतदाता को बाध्य करती है कि वह बेहद बदतर उम्मीदवार को सत्ता में आने से रोकने के लिए कम बदतर उम्मीदवार को वोट करे। इस तरह जनता सिर्फ बदतर लोगो और बदतर पार्टियों को ही चुन पाती है।
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इससे एक बड़ा नुकसान यह है कि , किसी नेता या पार्टी के एक्सपोज हो जाने के बावजूद भी वह तब तक जीतता रह सकता है जब तक कि वह विपक्षी पार्टी से भी और ज्यादा एक्सपोज न हो जाए !! उदाहरण के लिए कोंग्रेस ने देश को बदतरीन शासन दिया , और इस वजह से लोगो ने बीजेपी को चुना। लेकिन मोदी साहेब भी अपने अब तक के कार्यकाल में इतने एक्सपोज हो चुके है कि उनको वोट करने वाले लगभग 90% कार्यकर्ता अब उन्हें वोट नहीं करना चाहते !! आपने सही पढ़ा है , -- "उनको वोट करने वाले लगभग 90% कार्यकर्ता अब उन्हें वोट नहीं करना चाहते !!" लेकिन फिर भी वे मोदी साहेब को वोट करने के लिए बाध्य है , क्योंकि उन्हें यह भय है कि बीजेपी को वोट न करने से कोंग्रेस सत्ता में आ जाएगी। और यह बात सही भी है कि बीजेपी को वोट न देने से कोंग्रेस सत्ता में आ जाती है। जैसे कि हमने कर्नाटक में देखा।
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मुझे शामिल करते हुए अन्य जो भी लोग राजनीति में रुचि रखते है और जिन्होंने कोंग्रेस का शासन देखा है , वे यह बात जानते है कि कोंग्रेस का शासन एक बुरे सपने से कम नहीं है। तो वे सभी लोग कोंग्रेस को सत्ता से बाहर रखने के लिए मोदी साहेब को वोट करने को बाध्य है। इस लिहाज से कर्नाटक में संघ को अधिक सीट मिलने के बावजूद उन्हें सत्ता न मिलना संघ को दूरगामी फायदा पहुंचाएगा। क्योंकि इससे अब संघ के कार्यकर्ता मतदातो में इस डर को और भी पुख्ता कर सकेंगे कि यदि आपने संघ को वोट नहीं किया तो कोंग्रेस सत्ता में आ जायेगी।
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लेकिन , यह व्यवस्था बहुत ही खतरनाक है। क्योंकि इससे मोदी साहेब की सत्ता तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक कि वे कोंग्रेस से भी ज्यादा एक्सपोज न हो जाए, या इन दोनों से आजिज आकर जब तक लोग तीसरे विकल्प ( केजरीवाल ) की तरफ दौड़ लगाना न शुरू कर दे। और तब वे केजरीवाल के जाल में फंस जायेंगे। और संघ के कार्यकर्ता इसीलिए सीमांकित मतदान प्रणाली लाने का विरोध कर रहे है क्योंकि वे जानते है कि यदि लोगो को संघ को खारिज करने के बावजूद यदि कोंग्रेस को सत्ता से दूर रखने का विकल्प मिल गया तो मोदी साहेब की लोकप्रियता का गुब्बारा फट जाएगा। दरअसल मोदी साहेब कोंग्रेस के खिलाफ देश की नफरत पर सवारी कर रहे है , खुद की लोकप्रियता पर नहीं। कोंग्रेस के सत्ता में आने का भय खत्म हो जाने पर मोदी साहेब की लोकप्रियता भी ढल जायेगी। और तब उन्हें सत्ता में रहने के लिए काम करके दिखाना होगा। फिलहाल वे अपने भाषणों से कोंग्रेस को निशाना बनाते हुए भी सत्ता में बने रहे सकते है।
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यही वजह है कि आप संघ से उनके द्वारा किये जा रहे किसी भी फैसले पर कोई भी सवाल करे वे तुरंत आपको कोंग्रेस का शासन काल याद दिलाते है। पूरे देश में हर आलोचना के जवाब में पिछले 4 सालो से "60 साल की थ्योरी" इसीलिए घोटी जा रही है। दरअसल यह कह कर संघ के नेता मतदाताओ में यह डर जगाये रखने का प्रयास करते है कि आप मोदी साहेब की आलोचना करके कोंग्रेस की सत्ता वापसी का रास्ता बना रहे है। वे कोंग्रेस के डर को जिन्दा रखना चाहते है और इसीलिए वे बार बार कोंग्रेस के कर्म गिनाते रहते है। आप मोदी साहेब के किसी भी फैसले पर अंगुली उठाये , अगले ही वाक्य में वे कोंग्रेस को ले आयेंगे। ( पुष्टि के लिए कमेन्ट बोक्स देखे )
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और मोदी साहेब को वोट करने वाले 90% कार्यकर्ताओ के सामने मोदी साहेब एक्सपोज हो चुके है इसका मंडन मैं इस बात से करता हूँ कि -- आप किसी भी कार्यकर्ता को मोदी साहेब के गलत फैसलों ( जैसे टू चाइल्ड लॉ न लाना , बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ना , धारा 370 जैसे फैसले न लेना ) के बारे में कहने पर जवाब में बहुधा यह सुनेंगे कि -- "तो आप बताओ देश के पास मोदी साहेब के अलावा दूसरा विकल्प कौन है" ? यह उनकी स्वीकारोक्ति है कि वे खुद भी जानते है कि मोदी साहेब का शासन घटिया है , लेकिन हम उन्हें सिर्फ इसीलिए समर्थन दे रहे है क्योंकि हमारे पास विकल्प नहीं है।
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ऐसे में कार्यकर्ताओ से मेरा आग्रह है कि उन्हें विकल्प के रूप में व्यक्तियों को देखना बंद करना चाहिए और अच्छे कानूनों को लागू करवाने के लिए प्रयास करना चाहिये। हमने पीएम / सीएम के चुनाव के लिए जो प्रक्रिया प्रस्तावित की है उसमे जनता सीधे पीएम् के उम्मीदवार को वोट कर सकेगी और यदि पीएम / सीएम उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है तो उसे किसी भी समय नौकरी से निकाल सकेगी। इसी प्रक्रिया में हमने सीमांकित वोटिंग सिस्टम की प्रक्रिया भी रखी है। ताकि मतदाता यह बता सके कि किस उम्मीदवार को वह किसी भी सूरत में जीतते देखना नहीं चाहता।
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नीचे राईट टू रिकॉल पीएम का ड्राफ्ट दिया गया है। इसमें कुल 18 धाराएं है और इसे गेजेट में प्रकशित करने से यह क़ानून देश में लागू हो जाएगा। इसके लिए किसी भी प्रकार के संविधान संशोधन की जरूरत नहीं है। सीमांकित वोटिंग सिस्टम समझने के लिए इस ड्राफ्ट की धारा 16 देखें।
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राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट (संशोधित):
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859858050859057>;
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इसके अलावा एक अन्य प्रस्ताव इंस्टेंट रन ऑफ़ वोटिंग सिस्टम का है। यह प्रणाली जातीय आधार पर वोटिंग करने को हतोत्साहित करती है। इस बारे में विवरण के लिए निचे दिया गया लेख पढ़े।
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जातिवाद को कम करने के लिए इंस्टेंट रन ऑफ वोटिंग सिस्टम (आईआरवी) टू राउंड वोटिंग सिस्टम ( टीआरवी ) से बेहतर परिणाम देगा --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/847905751994329>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 24 2018 07:33:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क़ानून ड्राफ्ट प्रश्नोत्तर पारितोषिक चर्चा - 1
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Gaurang Patel , यह थ्रेड आपके द्वारा चयनित क़ानून ड्राफ्ट्स पर विभिन्न प्रश्न पूछने के लिए बनाया गया है। यदि आप अमुक क़ानून ड्राफ्ट्स से सम्बंधित प्रश्नों का सही उत्तर देते है तो आप पारितोषिक प्राप्त करेंगे। कृपया आपके द्वारा चयनित क़ानून ड्राफ्ट्स का लिंक कमेन्ट बॉक्स में रखें।
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सभी के लिए -- यह थ्रेड सिर्फ gaurang patel से पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए बनाया गया है। अन्य सभी के कमेन्ट डिलीट किये जायेंगे।
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कोई भी फेसबुक यूजर क़ानून ड्राफ्ट आधारित इस चर्चा में भाग लेकर पारितोषिक प्राप्त कर सकता है। इस चर्चा के नियम एवं देय पारितोषिक का विवरण जानने के लिए यह पोस्ट देखें -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1631737470277816>;
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क़ानून ड्राफ्ट्स की सूची :
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1. टू चाइल्ड लॉ ( 15 रुपये , 5 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/835548539956675>;
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2. बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने के लिए कानूनी ड्राफ्ट ( 20 रूपये , 6 प्रश्न )
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1395609733890592>;
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3.जिला न्यायलय में ज्यूरी प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 25 रूपये , 7 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/829456537232542>;
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4. सेना तथा नागरिकों के लिए खनिज रॉयल्टी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 25 रूपये , 7 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/848060668705462>;
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5. संपत्ति कर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 40 रूपये 7 प्रश्न ) :
<https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/575904979254367>;
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6. राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट ( 10 रूपये , 5 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/821128631398666>;
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7. राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 15 रूपये , 4 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859858050859057>;
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8 राईट टू रिकॉल उच्चतम न्यायालय मुख्य न्यायाधीश के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ( 15 रूपये , 4 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860420858820>;
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9.सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) के लिए कानूनी ड्राफ्ट ( 5 रूपये , 8 प्रश्न ) :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809743912477180
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10.भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट ( 5 रूपये , 8 प्रश्न ) :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809740312477540
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11. राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट ( 25 रूपये , 6 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1428070950644470>;
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12. राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री के लिए कानूनी ड्राफ्ट ( 15 रूपये , 4 प्रश्न ) :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1455949007856664>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 24 2018 11:30:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मंत्री महोदय किरेन रिजुजू का यह वीडियो देखें - ( अवधि 1 मिनिट )
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यदि आप सारे दिन कुर्सी पर बैठकर काम करते है तो हर घंटे में 1-2 मिनिट चहल कदमी करना अच्छा व्यायाम है।
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लेकिन मंत्री जी अपनी कुर्सी सिर्फ 10-15 सेकण्ड के लिए ही छोड़ना चाहते है। क्योंकि लम्बा अंतराल होने से कोई दूसरा उनकी प्यारी कुर्सी खींच ले जा सकता है !!
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तो इस समस्या से बचने के लिए उन्होंने चेयर-एक्सरसाईज करने का सुझाव दिया है। इस व्यायाम की खासियत यह है कि इसे करने के दौरान आपको कुर्सी से दूर होने की जरूरत नहीं है। आप कुर्सी को पकड़े पकड़े ही यह व्यायाम कर सकते है !!!
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Kiren Rijiju:

Fabulous campaign by Sports Minister Rajyavardhan Rathore on #HumFitTohIndiaFit to make India a healthy nation. Yes, I accept the #FitnessChallenge. Here's my video & I challenge three others Salman Khan, Pema Khandu & Saumya Tandon.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun May 27 2018 08:32:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब समेत संघ के सभी नेता , एवं सोनिया-केजरीवाल-मुलायम-ममता आदि "राष्ट्रीय सनातन देवालय प्रबंधक ट्रस्ट" क़ानून के विरोध में क्यों है ?
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हिन्दू धर्म की धार्मिक संस्थाओ जैसे मंदिर / मठ / आश्रम आदि का प्रशासन इसाई एवं मुस्लिम धर्म की संस्थाओ की तुलना में कमजोर है। हमने SGPC act की तर्ज परहिन्दू धर्म की संस्थाओ का प्रशासन बेहतर बनाने के लिए "राष्ट्रीय सनातन देवालय प्रबंधक ट्रस्ट" का प्रशासनिक ढांचा प्रस्तावित किया है। इस क़ानून के आने से मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो जायेंगे और इन पर हिन्दू श्रधालुओ का नियन्त्रण रहेगा।
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ट्रस्ट के गठन के लिए हिन्दुओ की अलग से अतिरिक्त वोटर लिस्ट होंगी तथा अमुक ट्रस्ट के ट्रस्टी हिन्दुओ द्वारा चुन कर आयेंगे। यदि ट्रस्टी अकार्यकुशलता दिखाते है , प्राप्त दान का कल्याणकारी कार्यो में समुचित उपयोग नहीं करते, धर्म को मजबूत बनाने एवं इसके प्रसार के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाते है तो हिन्दू नागरिको के पास यह अधिकार होगा कि अपने बहुमत का प्रदर्शन करके उन्हें किसी भी समय पद से निष्कासित कर सके , एवं अन्य किसी काबिल व्यक्ति / संत / गुरु / प्रशासक को चुन सके। इस प्रक्रिया का प्रस्तावित ड्राफ्ट ( रोड मेप ) निचे दिए गए लिंक में दिया गया है। यदि पीएम इस पर हस्ताक्षर करके इसे गेजेट में छपवा दे तो यह क़ानून लागू हो जाएगा।
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"राष्ट्रीय सनातन देवालय प्रबंधक ट्रस्ट" के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/838551942989668>;
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हम यह ड्राफ्ट मोदी साहेब एवं संघ के को कई बार भेज चुके है। किन्तु वे इसके विरोध में है। उन्हें भय है कि इससे हिन्दुओ का नेतृत्व उनके हाथ से निकल जाएगा। वे धर्म के उत्थान के लिए अलग से किसी संस्था / नेता को पनपने नहीं देना चाहते। उनका मानना है कि हिन्दुओ को राजनैतिक रूप से संघ के निचे ही संगठित रहना चाहिए किसी अन्य धार्मिक संस्था के अंतर्गत नहीं। उनका कहना है कि यदि हिन्दूओ को हिन्दू धर्म के उत्कर्ष के लिए अन्य कोई विकल्प मिल गया तो वे हिन्दू धर्म को बचाने के लिए उनके एक मात्र विकल्प संघ की और दौड़ लगाना बंद कर देंगे और उन्हें वोटो की हानि होगी।
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कोंग्रेस एवं आम पार्टी मिशनरीज एवं इस्लाम के प्रयोजको पर बुरी तरह से निर्भर है। चूंकि इस क़ानून के आने से हिन्दू धर्म मजबूत होगा और इस्लाम एवं इसाई धर्म के भारत में बढ़ते गैर वाजिब प्रभाव में कमी आएगी अत: कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी भी इस क़ानून का विरोध कर रहे है। कोंग्रेस को लगता है कि इस क़ानून के आने से मोदी जी / योगी जी / तोगड़िया जी जैसे नेता ही इस ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी चुन लिए जायेंगे और इस वजह से कोंग्रेस के सत्ता में आने बावजूद वे हिन्दू धर्म को नुकसान पहुंचाने की क्षमता खो देंगे।
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मिशनरीज द्वारा प्रायोजित मीडिया इसका विरोध इसीलिए करता है कि इस क़ानून के आने से मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो जायेंगे और वे मंदिरों में आये हुए दान का इस्तेमाल मिशनरीज की गतिविधियाँ बढाने में नहीं कर पायेंगे। अभी मंदिर सरकार के नियंत्रण में होने के कारण वे नेताओं को प्रलोभन देकर / दबाव बनाकर मंदिरों में आये दान का मनमाना इस्तेमाल कर पाते है। इस क़ानून के आने से वे सरकार एवं अदालत के जरिये मंदिरों पर अपना नियंत्रण खो देंगे।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 29 2018 16:45:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कॉमन नोलेज --- निचे एक पहेली दी गयी है, जो कि निम्नलिखित प्रश्नों का सबसे अधिक सटीक , सबसे अधिक तर्कपूर्ण एवं सबसे अधिक व्यवहारिक तरीके से जवाब देती है :
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१) इस्लाम को टिके रहने एवं विस्तार करने की शक्ति कहाँ से मिलती है ?
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२) इस्लाम में हिंसा का स्तर उच्च क्यों है ?
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३) जब भी हिन्दू धर्म एवं इस्लाम में टकराव हुआ तो हिन्दूओ ने अपनी जमीन एवं अनुयायी क्यों गंवाए ?
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५) इस्लाम को रोकने में इसाई धर्म क्यों कामयाब है ?
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६) क्यों जहां जहां / जब जब हिन्दू धर्म इसाई एवं इस्लाम के संपर्क में आएगा वहां हिन्दू सिकुड़ते चले जायेंगे ?
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७) किस वजह से अमेरिका ब्रिटेन समेत दुनिया के सभी देशो को पीछे छोड़ते हुए सबसे ताकतवर देश बन पाया ?
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८) और भी इसी तरह के सैंकड़ो सवाल।
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यह पहेली ज्यादातर राजनैतिक , सामाजिक एवं धार्मिक समस्याओ की वजह बताती है , एवं इनके सबसे सटीक समाधान का रास्ता भी सुझाती है।
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A) किसी टापू पर 100 ड्रेगन है। इनमे से 4 ड्रेगन की आँखों का रंग लाल एवं शेष 96 की आँखों का रंग हरा है। सभी ड्रेगन एक दुसरे की आँखों का रंग देख सकते है , किन्तु उनके पास ऐसा कोई तरीका नहीं है , जिससे वे खुद की आँखों का रंग जान सके। लेकिन , यदि किसी ड्रेगन को खुद की आँख का रंग मालूम हो जाता है तो उसे सुबह होने से पहले या तो अपनी आँख का रंग हरे में बदल देना होगा या फिर टापू छोड़ देना पड़ेगा। यदि वह अपनी आँख का रंग नहीं बदलता है और न ही टापू छोड़ता है , और हरी आखों वाले सभी ड्रेगन यह बात जान जाते है कि अमुक ड्रेगन को मालूम हो चुका है कि, उसकी आँख का रंग लाल है और फिर भी उसने टापू नहीं छोड़ा है तो सभी हरे ड्रेगन मिलकर अमुक ड्रेगन को जान से मार देंगे। टापू पर कोई दर्पण नहीं लगे है , और ड्रेगन आँखों के रंग के बारे कभी चर्चा नहीं करते। लेकिन वे तर्क का प्रयोग करके अपनी आँखों का रंग जान सकते है।
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किसी दिन एक संत टापू पर आकर सभी ड्रेगन को अलग अलग ले जाकर यह सूचना देता है कि -- "इस टापू पर कम से कम एक ड्रेगन की आँख का रंग लाल है" , तो कितने दिन में कितने ड्रेगन टापू छोड़ देंगे या मारे जायेंगे ?
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B) किसी टापू पर 100 ड्रेगन है। इनमे से 4 ड्रेगन की आँखों का रंग लाल एवं शेष 96 की आँखों का रंग हरा है। सभी ड्रेगन एक दुसरे की आँखों का रंग देख सकते है , किन्तु उनके पास ऐसा कोई तरीका नहीं है , जिससे वे खुद की आँखों का रंग जान सके। लेकिन , यदि किसी ड्रेगन को खुद की आँख का रंग मालूम हो जाता है तो उसे सुबह होने से पहले या तो अपनी आँख का रंग हरे में बदल देना होगा या फिर टापू छोड़ देना पड़ेगा। यदि वह अपनी आँख का रंग नहीं बदलता है और न ही टापू छोड़ता है , और हरी आखों वाले सभी ड्रेगन यह बात जान जाते है कि अमुक ड्रेगन को मालूम हो चुका है कि, उसकी आँख का रंग लाल है और फिर भी उसने टापू नहीं छोड़ा है तो सभी हरे ड्रेगन मिलकर अमुक ड्रेगन को जान से मार देंगे। टापू पर कोई दर्पण नहीं लगे है , और ड्रेगन आँखों के रंग के बारे कभी चर्चा नहीं करते। लेकिन वे तर्क का प्रयोग करके अपनी आँखों का रंग जान सकते है।
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किसी दिन एक संत टापू पर आकर सभी ड्रेगन को इकट्ठा करता है उन सभी को एक साथ यह सूचना देता है कि -- "इस टापू पर कम से कम एक ड्रेगन की आँख का रंग लाल है" , तो कितने दिन में कितने ड्रेगन टापू छोड़ देंगे या मारे जायेंगे ?
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C) किसी टापू पर 100 ड्रेगन है। इनमे से 4 ड्रेगन की आँखों का रंग लाल एवं शेष 96 की आँखों का रंग हरा है। सभी ड्रेगन एक दुसरे की आँखों का रंग देख सकते है , किन्तु उनके पास ऐसा कोई तरीका नहीं है , जिससे वे खुद की आँखों का रंग जान सके। लेकिन , यदि किसी ड्रेगन को खुद की आँख का रंग मालूम हो जाता है तो उसे सुबह होने से पहले या तो अपनी आँख का रंग हरे में बदल देना होगा या फिर टापू छोड़ देना पड़ेगा। यदि वह अपनी आँख का रंग नहीं बदलता है और न ही टापू छोड़ता है , और हरी आखों वाले सभी ड्रेगन यह बात जान जाते है कि अमुक ड्रेगन को मालूम हो चुका है कि, उसकी आँख का रंग लाल है और फिर भी उसने टापू नहीं छोड़ा है तो सभी हरे ड्रेगन मिलकर अमुक ड्रेगन को जान से मार देंगे। टापू पर कोई दर्पण नहीं लगे है , और ड्रेगन आँखों के रंग के बारे कभी चर्चा नहीं करते। लेकिन वे तर्क का प्रयोग करके अपनी आँखों का रंग जान सकते है।
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किसी दिन एक संत टापू पर आकर सभी ड्रेगन को इकट्ठा करता है एवं उन सभी को एक साथ यह सूचना देता है कि -- "इस टापू पर कम से कम एक ड्रेगन की आँख का रंग लाल है"। किन्तु जब संत ने ड्रेगंस को इकट्ठा करके यह सूचना दी थी तो एक लाल आँख वाला ड्रेगन कुछ समय के लिए वहां उपस्थित नहीं था। अत: वह यह सूचना नहीं प्राप्त कर सका। वह कुछ समय बाद सभा में फिर से लौट आता है , किन्तु तब तक सूचना दी जा चुकी थी।
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तो इस स्थिति में कितने दिन बाद कितने ड्रेगन टापू छोड़ देंगे या मारे जायेंगे ?
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मैं कॉमन नोलेज एवं धार्मिक / राजनैतिक व्यवस्था से इसके अंतर्संबंधो पर स्पष्टीकरण के बारे में फिर कभी और भी विवरण रखूँगा। आप अद्यतन जानकारी के लिए इस पोस्ट पर नोटिफिकेशन ऑन कर सकते है , और इस एल्बम को फ़ॉलो कर सकते है।
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कॉमन नोलेज के बारे में अधिक जानकारी के लिए गूगल करे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 29 2018 16:50:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कॉमन नोलेज --- निचे एक पहेली दी गयी है, जो कि निम्नलिखित प्रश्नों का सबसे अधिक सटीक , सबसे अधिक तर्कपूर्ण एवं सबसे अधिक व्यवहारिक तरीके से जवाब देती है -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1638407422944154>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 30 2018 20:33:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राजिव भाई "हथियार बंद नागरिक समाज" का समर्थन करते थे .

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Dixitjee says ...
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ब्रिटिश पार्लियामेंट में क़ानून बनाने के लिए बहस क्या हुई?
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ब्रिटिश पार्लियामेंट में बहस ये हुई कि क़ानून ऐसे बनाये जाने चाहिए कि सारे भारतवासी कभी भी दुबारा से खड़े न हो सकें और अंग्रेजों के खिलाफ बगावत न कर सकें.
तो सबसे पहला क़ानून जानते हैं क्या आया? सबसे पहला क़ानून.......आपको हैरानी होगी जानकर ...... अंग्रेजों के खिलाफ जो बगावत हुई थी वो सशस्त्र बगावत थी. उसमे हथियारों का इस्तेमाल हुआ था.
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अंग्रेजों ने सबसे पहला क़ानून बनाया - कि भारत में हथियार वही रख सकेगा जिसके पास लाइसेंस होगा. लाइसेंस जिसके पास नहीं होगा वो हथियार रखने का अधिकारी नहीं होगा.
तो अंग्रेजों ने क्या किया?
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लाइसेंसिंग ऑफ़ आर्म्स एक्ट; ये पहला क़ानून बनाया . और इस क़ानून के आधार पर क्या किया गया? घर घर की तलाशियां ली गयीं, किसके घर में बन्दूक है, किसके घर में हंसिया है, छूरा है, चाकू है, क्या क्या हथियार है वो सब अंग्रेजों ने छीन लिए. क्योंकि अंग्रेजों को डर था कि इन्ही हथियारों की मदद से भारतवासी फिर दुबारा बगावत कर सकते हैं. तो सबसे पहले उन्होंने लाइसेंसिंग ऑफ़ आर्म्स एक्ट बनाके हथियार छीनने का कानून बनाया. और एक बार भारतवासियों के हथियार छिन गए तो भारतवासी कमजोर हो गए और वो कमजोरी इतनी भारी पड़ी कि अगले 90 साल तक फिर अंग्रेजों की गुलामी हमें सहन करनी पड़ी.
ये एक क़ानून बनाया उन्होंने.
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ये क़ानून दुर्भाग्य से आजादी के 62 साल के बाद भी अभी चल रहा है इस देश में. मालूम है?
हथियार वही रख सकता है जिसके पास लाइसेंस हो सकता है. लाइसेंस देने का काम सरकार करती है. पहले काले गोर अंग्रेजों की सरकार वो काम करती थी अब काले अंग्रेजों की सरकार वो काम करती है.
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लेकिन अब उल्टा होता है, शरीफ आदमी लाइसेंस वाला हथियार रखता है और गुंडा आदमी बिना लाइसेंस वाला हथियार रखता है.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 30 2018 20:41:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

स्वामी रामदेव जी का 2 मिनिट का यह वीडियो देखें। तब मोदी साहेब इन्हें भी गुमराह करने में कामयाब थे , और रामदेव जी बड़े ही विश्वसनीय अंदाज में जनता को या भरोसा दिला रहे थे कि मोदी साहेब के पीएम बनते है पेट्रोल के दाम 35 रूपये लीटर हो जायेंगे। कोई डाउट ही नहीं !!
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ड्राफ्ट पढने की अवहेलना करते हुए डायलोग / भाषण / एलान / बातें ( मन की ) सुनकर फैसले करने वालो के साथ यही होता है . और फिर वे कहते है कि -- हमें धोखा हो गया !!
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Ravindra Patwal:

बाबा रामदेव के अनमोल वचन आज पत्थर की लकीर की तरह हैं भारत के 130 करोड़ लोगों के लिए.
बाबा की बात से सौ फ़ीसद सहमत

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 31 2018 11:38:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#ShutupTrump PMO India : Report Card.
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मेरा ट्विट - <https://twitter.com/PawanJury/status/1002147053969915904>;

"#ShutupTrump @PmoIndia pls ask a Minister to ask Trump administration to SHUT UP on nonsensical objections they are raising -- कृपया अपने मंत्री को आदेश दें कि वे ट्रंप को भारत के बारे में बकवास बयानबाजी न करने के लिए "शट अप" कहे।
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ट्रंप ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे यह बात फैलाए कि भारत में धार्मिक असहिष्णुता बढ़ रही है। जबकि सच्चाई यह है कि भारत में सरकार एवं समुदाय में किसी भी धर्म के खिलाफ शून्य असहिष्णुता है। हमारा मानना है कि खुद पीएम को इसमें दखल नहीं करना चाहिए किन्तु वे अपने किसी भी मंत्री को इस तरह का बयान देने के लिए कह सकते है कि , ट्रंप का प्रशासन अपने काम से काम रखें , हमारे मामलो में अतिक्रमण न करें।
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