Pawan Jury BhilwaraRj
Tue Sep 01 2020 19:06:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Nitish Prajapati:
ये खबरें डराने के लिए काफ़ी हैं
#निजीकरण_रोको
Tue Sep 01 2020 19:06:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Nitish Prajapati:
ये खबरें डराने के लिए काफ़ी हैं
#निजीकरण_रोको
Wed Sep 02 2020 21:55:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
हरियाणा सरकार का नोटबंदी / जीएसटी / लॉकडाउन से भी ज्यादा खतरनाक राईट टू रिकॉल सरपंच नामक प्रस्तावित क़ानून
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उपाय : राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच का क़ानून
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RSS समर्थित हरियाणा सरकार राईट टू रिकॉल सरपंच नामक क़ानून ला रही है। दुःख का विषय है कि हरियाणा सरकार ने अभी तक (2 सितम्बर 2020) क़ानून का ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया से जो विवरण सामने आये है उससे मालूम होता है कि यह एक बैठक या हस्ताक्षर आधारित नकारने का (Negative) राईट टू रिकॉल क़ानून है।
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सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण जब रिकॉल होगा तो सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी, और सरपंच की कुर्सी तब तक खाली रहेगी जब तक अगला चुनाव नहीं होता !! हमारे विचार में, मतदाताओं के पास सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तावित यह क़ानून आने से अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे प्रशासन और भी बदतर हो जाएगा।
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राईट टू रिकॉल पार्टी (RRP – Right to Recall Party) द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच एक सकारात्मक क़ानून है। हमारे द्वारा प्रस्तावित क़ानून वोट वापसी पासबुक पर आधारित है, और इसमें सरपंच तब तक निष्काषित नहीं किया जाएगा जब तक मतदाताओ का बहुमत किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच के रूप में चुन न ले। इस तरह RRP द्वारा प्रस्तावित क़ानून प्रशासन में अस्थिरता नहीं लाएगा, बल्कि सुधार लाएगा।
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#OpooseRssRtrSarpanch , #SupportRrpVvpSarpanch , #Rrp28
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इस पोस्ट में इन दोनों कानूनों के तुलनात्मक विवरण दिए गए है। इस पोस्ट को बेहतर फोर्मेट में पढ़ने के लिए पीडीऍफ़ (8 पेज) यहाँ से डाउनलोड करें – Tinyurl. Com/VvpSarpanch
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मुख्यमंत्री को ट्विट एवं पोस्टकार्ड भेजकर उनसे कहें कि - राईट टू रिकॉल सरपंच की जगह पर वोट वापसी सरपंच का क़ानून गेजेट में छापें - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRssRtrSarpanch
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RSS के राईट टू रिकॉल सरपंच एवं RRP के पार्टी के वोट वापसी सरपंच कानून की तुलना।
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(1) सरपंच को बदलने की प्रक्रिया की शुरुआत
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(1.1) BJP का राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून : सरपंच को रिकॉल करने की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार संयुक्त रूप से ‘ग्राम सभा’ को दिया गया है, इकाई मतदाता को नहीं। यदि किसी पंचायत की ग्राम सभा में कुल मतदाताओं के 33% मतदाता इकट्ठे होकर सरपंच के खिलाफ रखे गए अविश्वास प्रस्ताव को हाँ / हस्ताक्षर द्वारा पारित करते है तो अमुक ग्राम पंचायत में रिकॉल इलेक्शन (Recall Poll) करवाया जायेगा।
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(1.1.1) अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए गाँव के 33% मतदाताओं को इकट्ठा होना होगा। ऐसे पूर्व नियोजित जमाव के दौरान बहस बाजी से लेकर हिंसक मारपीट तक की नौबत आ सकती है। इससे गाँव में भाईचारा बिगड़ने एवं जातीय वैमनस्य आदि की घटनाए हो सकती है। (Source : Media)
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(1.1.2) गाँवों में ज्यादातर नागरिको को हस्ताक्षर करना नहीं आता है, और सरकार के पास उनके हस्ताक्षर जांचने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। अत: सरपंच अविश्वास प्रस्ताव को फर्जी बताकर कोर्ट में याचिका डाल सकता है और रिकॉल प्रक्रिया ठन्डे बस्ते में जा सकती है।
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(1.1.3) चूंकि अविश्वास प्रस्ताव की विश्वसनीयता की जांच का पॉवर BDO के पास है, अत: जब सरकार को किसी सरपंच को हटाना होगा तो वे फर्जी अविश्वास प्रस्ताव पर भी रिकॉल इलेक्शन करवा सकते है, और यदि सरकार सरपंच को बनाए रखना चाहती है तो सच्ची रिकॉल याचिका को भी जाँच के नाम पर लटका कर रख सकते है।
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(1.2) RRP द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच क़ानून : कोई भी मतदाता किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर मौजूदा सरपंच को निकालने या सरपंच पद के किसी अन्य प्रत्याशी को सरपंच बनाने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज / रद्द करवा सकता है। मतदाता अपनी स्वीकृति SMS या मोबाइल एप द्वारा भी दर्ज करवा सकेगा। यदि सरपंच पद के किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 51% मतदाताओ की स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां मौजूदा सरपंच को प्राप्त स्वीकृतियों से अधिक भी है, तो रिकॉल ही इलेक्शन करवाया जाएगा, अन्यथा नहीं। (धारा 5.3 देखें)
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(1.2.1) मौजूदा सरपंच को निकालने एवं किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच बनाने की स्वीकृति देने के लिए मतदाता को किसी जमाव या सभा में शामिल होने की जरूरत नहीं होगी। मतदाता किसी भी दिन पटवारखाने में जाकर या अपने सत्यापित मोबाइल द्वारा SMS भेजकर अपनी स्वीकृति दर्ज / रद्द करवा सकता है।
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(1.2.2) मतदाता जो स्वीकृति दर्ज करेगा उसकी एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी एवं उसे फीडबेक का SMS प्राप्त होगा। स्वीकृति देने के लिए मतदाता द्वारा पटवारखाने में उपस्थित होने की सत्यापित प्रणाली के कारण इसमें फर्जीवाड़े की सम्भावना बेहद कम है।
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(1.2.3) मतदाता जो भी स्वीकृति दर्ज करेंगे उन्हें पटवारी द्वारा प्रत्येक सोमवार को सार्वजनिक किया जायेगा। यदि कोई फर्जी स्वीकृति दर्ज हो गयी है तो प्रत्येक सोमवार को स्वीकृतियों के सार्वजनिक होने के कारण इसे तुरंत जांचा जा सकेगा। दोहरा सत्यापन होने के कारण यह प्रक्रिया हस्ताक्षर की तुलना में विश्वसनीय है। अत: कोई पक्षकार इसे ख़ारिज नहीं कर सकेगा
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(2) रिकॉल इलेक्शन की प्रक्रिया एवं सरपंच का निष्कासन :
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(2.1) BJP का राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून : रिकॉल इलेक्शन में वोटिंग सिर्फ इस प्रश्न पर होगी कि, मौजूदा सरपंच को हटाना चाहिए या नहीं। सरपंच पद के अन्य उम्मीदवारों के नाम मतपत्र या इवीएम पर नहीं होंगे। यदि रिकॉल इलेक्शन में पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 60% मतदाता सरपंच को हटाने के लिए वोट कर देते है तो मौजूदा सरपंच निकाल दिया जाएगा।
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(2.1.1) RSS के ड्राफ्ट में सरपंच को सिर्फ नकारने की प्रक्रिया दी गयी है, सरपंच को बदलने की नहीं। जब भी रिकॉल सफल होगा तो सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी। और कुर्सी तब तक खाली रहेगी, जब तक अमुक पंचायत में फिर से चुनाव नहीं होते, और फिर से नया सरपंच नहीं चुना जाता।
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(2.1.2) नया सरपंच चुनने के लिए बाद में फिर से चुनाव होंगे और मतदाताओं को फिर से वोट करने के लिए आना होगा।
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(2.2) RRP द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच क़ानून : रिकॉल इलेक्शन में मतपत्र / इवीएम पर उन 10 प्रत्याशियों के नाम भी होंगे जिन्हें मतदाताओ की सबसे अधिक स्वीकृतियां मिली है। ताकि मतदाता जिसे सरपंच बनाना चाहते है उसे वोट कर सके। यदि रिकॉल इलेक्शन में किसी प्रत्याशी को पंचायत के कुल मतदाताओ के 51% मत प्राप्त हो जाते है तो मौजूदा सरपंच का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और 51% वोट लाने वाला प्रत्याशी सरपंच बन जाएगा।
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(2.2.1) RRP के क़ानून में सरपंच सिर्फ तब निष्काषित होगा जब ग्राम पंचायत के मतदाताओ का बहुमत किसी अन्य प्रत्याशी को सरपंच बनाने के लिए वोट करें। यदि किसी भी प्रत्याशी को बहुमत नहीं मिलता, तो मौजूदा सरपंच निकाला नहीं जाएगा। इस तरह सरपंच की कुर्सी किसी भी समय खाली नहीं रहेगी।
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(2.2.2) रिकॉल इलेक्शन में ही मतदाता नया सरपंच चुन लेंगे, अत: मतदताओ को फिर से वोट करने नहीं आना पड़ेगा।
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(3) BJP के राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून की खामियां एवं दुष्प्रभाव
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(3.1) हरियाणा की RSS समर्थित सरकार के इस कानून के लागू होने से निम्नलिखित परिणाम आ सकते है :
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(3.1.1) पंचायतो के प्रशासन में अस्थिरता आएगी और मतदाता राईट टू रिकॉल कानूनों को एक बदतर प्रक्रिया के रूप में देखना शुरू कर देंगे।
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(3.1.2) ग्राम पंचायतो में सरपंच के राजनैतिक प्रभाव में कटौती होगी तथा इसके एवज में विधायक एवं मंत्रीयों का राजनैतिक प्रभाव ग्राम पंचायतो में बढ़ जायेगा ।
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(3.1.3) सरपंच की मौजूदा स्थिति कमजोर होगी और उस पर सरकारी नियंत्रण बढेगा। और इससे ग्राम पंचायत के मतदाताओं की शक्ति में भी कमी आयेगी।
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(4) कुछ व्यवहारिक उदाहरण
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निचे कुछ उदाहरणों द्द्वारा बताया गया है कि, कैसे BJP द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सरपंच का यह क़ानून ग्राम पंचायत में विधायको, मंत्रियों एवं सरकारी अधिकारियों की शक्ति बढ़ाकर ग्राम पंचायतो के स्थानीय कार्यकर्ताओ, मतदाताओ एवं सरपंच की स्थिति को कमजोर करके प्रशासन को बदतर बना देगा।
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(4.1) मान लीजिये कि, कोई सरपंच ईमानदार व्यक्ति है और वह विधायक के किसी गलत आदेश को मानने से इंकार कर देता है। या मान लीजिये की, सरपंच घूस के रूप में इकट्ठा की गयी राशि में से विधायक को हफ्ता देने से मना कर देता है, तो इस स्थिति में विधायक निम्नलिखित कदम उठाएगा :
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(4.1.1) विधायक गाँव के उन कार्यकर्ताओ, नेताओं एवं उम्मीदवारों से सम्पर्क करेगा, जो सरपंच बनने के इच्छुक है, या अमुक सरपंच के सामने चुनाव हार गए थे।
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(4.1.2) विधायक, ग्राम सचिव, BDO एवं तहसीलदार को भी इसी दिशा में कदम उठाने को कहेगा।
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(4.1.3) सरपंच का विरोधी यह समूह मतदाताओ नाम से झूठे-सच्चे हस्ताक्षर / बैठक करवाकर अविश्वास प्रस्ताव की याचिका BDO को भेज सकते है।
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(4.1.4) विधायक के निर्देश पर BDO सही या गलत याचिका को सही घोषित करके इलेक्शन की घोषणा कर सकता है।
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(4.1.5) यदि सरपंच न्यायालय की शरण लेता है, तो ज्यादातर मामलों में विधायक, मंत्री आदि जज को घूस / रसूख का इस्तेमाल प्रभावित कर सकते है, और जज सरपंच की अपील या तो लेगा ही नहीं या वर्षो तक लटका कर रखेगा।
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अब मान लीजिये कि, कोई सरपंच एकदम भ्रष्ट / निकम्मा हो गया है, और पंचायत के अधिकतम मतदाता सरपंच को निकालना चाहते है। किन्तु संभव है कि, सरपंच एवं विधायक के बीच काफी अच्छा गठजोड़ हो, और सरपंच जो भी गबन करता है, उसमें से एक बड़ा हिस्सा विधायक को पहुँचा देता हो, या सरपंच विधायक का ख़ास आदमी हो, और विधायक सरपंच को बनाए रखना चाहता है तो सरपंच का रिकॉल कभी नहीं हो सकेगा। कैसे ?
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क्योंकि, यदि 60% मतदाता ग्राम सभा में सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर भी देते है तो विधायक BDO से कहकर अविश्वास प्रस्ताव याचिका को ठन्डे बस्ते में डलवा देगा। तब BDO याचिका की जाँच के नाम पर इसे महीनो तक लटकाकर रखेगा, या इसे फर्जी बताकर खारिज कर देगा !! और इस तरह विधायक के पसंदीदा सरपंच को रिकॉल इलेक्शन का कभी सामना नहीं करना पड़ेगा !!
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दरअसल, विधायक एवं सांसदों के चुनाव 4-5 बड़ी पार्टीयों के नाम पर होते है, किन्तु सरपंच के चुनावों में पार्टी के नाम का इस्तेमाल नहीं किया जाता। और इस वजह से सरपंचो पर बड़ी राजनैतिक पार्टियों का नियंत्रण काफी कमजोर है। सरपंच अपने स्थानीय जनाधार पर चुनाव लड़ते एवं जीतते है। न तो चुनाव लड़ने के लिए किसी पार्टी से टिकेट लेने की जरूरत होती है, और न ही चुनाव जीतने के लिए वे किसी बड़े नेता / विधायक / मंत्री पर निर्भर होते है। अब बड़ी पार्टियों के बड़े नेता सरपंचो पर अपनी पकड़ बढ़ाना चाहते है, और यह कानून उनके इस उद्देश्य को पूरा करेगा।
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हरियाणा सरकार ने जिस प्रकार की रिकॉल इलेक्शन की प्रक्रिया रखी है, उससे बड़े नेताओं की पकड़ सरपंचो पर बढ़ेगी। यदि कोई सरपंच विधायक / मंत्री से बनाकर नहीं रखेगा तो विधायक / मंत्री उस सरपंच को BDO द्वारा रिकॉल की प्रक्रिया को शुरू करने की धमकी देंगे। धीरे धीरे लगभग सभी सरपंच विधायको के पिट्ठू बन जायेंगे और मतदाताओं के हितो के खिलाफ जाकर भी विधायकों / मंत्रियो के सभी सही-गलत आदेशो का पालन करने लगेंगे।
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राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी क़ानून में मतदाताओं को ग्राम सभा में इकट्ठे होकर संयुक्त रूप से प्रस्ताव पास करने की जरूरत नहीं है। मतदाता अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर या SMS / APP के जरिये अपनी स्वीकृति दे सकेगा। और यदि किसी समय पंचायत के 51% मतदाता किसी अन्य प्रत्याशी को सरपंच बनाने के लिए स्वीकृतियां दे देते है तो रिकॉल इलेक्शन होगा। इस तरह RRP के वोट वापसी ड्राफ्ट में रिकॉल इलेक्शन होगा या नहीं इसका फैसला सीधे मतदाता करेंगे, BDO या सरकार नहीं।
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सार यह है कि, BJP का क़ानून सरपंच एवं मतदाताओं की शक्ति में कटौती करके विधायको / सरकार की शक्ति में इजाफा करता है, जबकि RRP का वोट वापसी ड्राफ्ट सरपंच पर सिर्फ मतदाताओं का नियंत्रण बढ़ाता है।
(4.2) मान लीजिये कि, किसी ग्राम पंचायत में 5,000 मतदाता है, और सरपंच के किसी चुनाव में 4,000 वोट गिरते है और प्रत्याशियों को निम्न वोट प्राप्त होते है :
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X – 1500 वोट
Y – 1200 वोट
Z – 1000 वोट
अन्य प्रत्याशी – 300 वोट
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इस स्थिति में X सरपंच बन जाता है। किन्तु ध्यान देने वाली बात यह है कि जो सरपंच जीता है, उसके खिलाफ कुल 1200+1000+300 = 2500 वोट गिरे है। इस तरह अमुक ग्राम पंचायत में 4000 में से 2500 मतदाता ऐसे है जिन्होंने X को सरपंच बनाने के लिए वोट नहीं किया है। और 1000 मतदाता ऐसे है जिन्होंने किसी को भी वोट नहीं किया है। और संभव है कि इन 1000 मतदाताओ में से भी कई मतदाता X के समर्थन में नहीं हो।
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BJP द्वारा प्रस्तावित क़ानून कहता है कि, यदि पंचायत के कुल मतदाताओं के 60% मतदाता रिकॉल इलेक्शन में मौजूदा सरपंच के खिलाफ वोट करते है, तो मौजूदा सरपंच निकाल दिया जाएगा।
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(4.2.1) इस स्थिति में जब अमुक पंचायत में रिकॉल इलेक्शन होगा तो चूंकि 3500 यानी कि पंचायत के 70% मतदाता मौजूदा सरपंच यानी X के समर्थन में नहीं है अत: वे X को निकालने के लिए वोट कर सकते है और इस स्थिति में सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी। और तब तक खाली रहेगी, जब तक सरपंच के फिर से चुनाव नहीं होते।
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(4.2.2) जब सरपंच के दुबारा चुनाव होंगे तो ज्यादातर सम्भावना है कि फिर से X ही चुनाव जीतेगा। क्योंकि पंचायत के कुल 5,000 मतदाताओ में से 1500 मतदाता X के समर्थन में है। अत: नए चुनाव में शेष प्रत्याशियों में वोट बंट जायेंगे और सर्वाधिक वोट फिर से X को ही मिलेंगे !!
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दुसरे शब्दों में, बीजेपी द्वारा प्रस्तावित क़ानून में कोई सरपंच तब भी निकाल दिया जाएगा जब उसे सर्वाधिक मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हो। यह एक नकारात्मक प्रक्रिया है जो मतदाताओं को सिर्फ सरपंच नकारने का अधिकार देती है।
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इसके उलट RRP द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी क़ानून में सरपंच सिर्फ तब निष्काषित होगा, जब कम से कम 51% मतदाता किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच बनाने के लिए वोट करें। यदि मतदाता किसी अन्य प्रत्याशी को बहुमत नहीं देते तो मौजूदा सरपंच रिकॉल नहीं होगा, और कुर्सी खाली नहीं होगी। क्योंकि RRP के वोट वापसी क़ानून में सकारात्मक प्रकिया है।
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राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच का कानून ड्राफ्ट यहाँ देखें – <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3174296922688522>
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, राईट टू रिकॉल सरपंच की जगह पर वोट वापसी सरपंच का क़ानून गेजेट में छापें - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRssRtrSarpanch
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Thu Sep 03 2020 19:42:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सभी के लिए सामान्य सूचना - यदि आप पीएम या सीएम से कोई मांग कर रहे है तो कृपया आने वाले 5 सितम्बर 2020 को पोस्टकार्ड भेजकर पीएम / सीएम को अपनी मांग के बारे में बताने का कष्ट करें। इससे 2 तरह के फायदे होंगे :
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(1) पीएम को पता चल जाएगा कि आप कोई मांग कर रहे है
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(2) पीएम को यह भी पता चलेगा कि, आप यह मांग पीएम से कर रहे है अपने मित्रो एवं पड़ोसियों से नहीं।
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आपकी जो भी मांग हो 5 सितम्बर सांय 5 बजे पोस्टकार्ड में लिखकर भेजें। और पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी(*) अपने पास रखें।
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मांग के कुछ सुझाव -
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(1) पीएम के लिए - #EndLockdownTottaly
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(2) हरियाणा सीएम के लिए - #OpposeRssRtrSarpanch , #SupportRrpVvpSarpanch
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(3) जूरी कोर्ट के लिए - #JuryCourt
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(4) सिर्फ भीलवाड़ा के नागरिको के लिए - #ExpelSecure
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आप इनमें से कोई भी एक पोस्टकार्ड या एक से अधिक पोस्टकार्ड या सभी पोस्टकार्ड भेज सकते है। या अन्य कोई मांग का पोस्टकार्ड भी भेज सकते है।
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(*) जरूरी सूचना : कृपया जो भी पोस्टकार्ड आप भेजते है उसकी फोटोकॉपी अवश्य कराएं एवं उसे "My Letters to Pm" नाम से बनाए रजिस्टर में अवश्य चिपकाकर रखें। पोस्टकार्ड को ऐसे ही रद्दी की तरह पोस्टबॉक्स में फेंक कर न आये।
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पीएम को चिट्ठी भेजना जनआन्दोलन (Mass Movement) खड़ा करने का सबसे प्रभावी एवं निरापद तरीका कैसे है, इस बारे में विवरण इस पोस्ट में पढ़ें --<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3162726007178947>
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Sat Sep 05 2020 17:16:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Ashok Jain VotevapsiCm:
आज 5 सितंबर 2020 शनिवार भीलवाड़ा राजस्थान से मैं अशोक कुमार जैन ने अपने शहर के मुख्य डाकघर पर शाम 5:00 बजे |
लोकडाउन खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री जी को पोस्टकार्ड भेजकर मांग करी | तथा मुख्यमंत्री जी को पोस्टकार्ड लिखकर सिक्योर कंपनी की सर्विस रद्द करवाने बाबत पोस्टकार्ड भेजकर मांग करें | यह मांग भीलवाड़ा के नागरिकों के साथ में प्रति माह नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को करता हूं |
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कोई भी नागरिक इस दिवस पर मुख्यमंत्री जी, प्रधानमंत्री जी से सीधे बात कर सकते हैं , पोस्ट कार्ड भेजकर |
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शहर के कई नागरिकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया |
Sat Sep 05 2020 17:16:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:
आज नागरिक कर्तव्य दिवस पर मुख्यमंत्री महोदय को पोस्टकार्ड लिखकर भीलवाड़ा जिले में बिजली सप्लाई सिक्योर मीटरिंग को. केे एग्रीमेंट को रद्द कर पुनः अजमेर विधुत वितरण निगम से करवाने तथा जिले में प्रशासनिक, राजनीति, न्यायपालिका की व्यवस्था को सुधारने के लिए भीलवाड़ा जुरीकोर्ट #BhilwaraJuryCourt कानून का गेजेट नोटिफिकेशन जारी करने की मांग की ।
Sat Sep 05 2020 17:18:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:
Lockdown has NOT ended . eg Railway used to cut 2.20 crore tickets a day, and now it is cutting only 3 lakh per day !! Likewise, local trains and metro are down. and there is a hanging sword on all that anyone can be tested and even if 100% asymptomatic, he can be forced to be hospitalized !!!
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So only manufacturers which have monopoly or unlimited access to unlimited bank loans or foreign capital will survive. And rest will collapse
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Solution is to #EndLockDownTotally i.e. #Restore_01_jan_2020_status , #NoRestrictions etc
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Now on 27-mar-2020 , over 70 crore voters out of 90 crore voters were against lockdown. and the number of voters against lockdown only increased after that.
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And lockdown was implemented by orders of PM and all 30 CMs of India, not by WHO or Bill Gates or God or ghots or ghouls etc.
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Now if 45 crore voters had sent #EndLockDown postcard to PM on 27-mar-2020, then a democratic lockdown would have ended, or a democratic legal peaceful process to expel / replace PM and all 30 CMs would have started, or perhaps PM and all 30 CMs would have cowed down, and ended lockdown.
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IOW, so simple was solution --- 45 crore voters sending #EndLockDown postcard to PM and their CMs !!!
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So my request to all antilockdown people is ---
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(1) pls send #EndLockdownTotally postcard to PM / CM asap
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(2) Keep xerox of that postcard posted on register
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(3) put live vdo on FB
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Here is my live vdo --- <https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10157276722261922/>
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scan of postcard sent on 05-sep-2020 --- <https://www.facebook.com/MehtaRahulC/posts/10157277390421922>
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scan of xerox for 05-sep-2020 postcard--- <https://www.facebook.com/mehtaRahulC/posts/10157277390561922>
Sat Sep 05 2020 17:19:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Sat Sep 05 2020 17:21:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Sat Sep 05 2020 17:28:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Sat Sep 05 2020 17:29:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Sat Sep 05 2020 17:36:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
M K Singh:
Sat Sep 05 2020 18:21:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
मोदी साहेब के YouTube वीडियो पर इतने सारे डिसलाइक क्यों आ रहे हैं ?
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यह सामान्य समझ का विषय है कि, यू ट्यूब पर रखे गए किसी भी वीडियो पर कितने लाइक / डिस लाइक आयेंगे इसे निर्णायक रूप से यू ट्यूब का एडमिन तय करता है, दर्शक नहीं। और ऐसा करने के उनके पास दर्जनों तरीके है। 1 उदारहण मैंने निचे दिया है। यदि यू ट्यूब के प्रायोजक पीएम के किसी वीडियो की बेंड बजाना चाहते है तो वे इन तरीको का इस्तेमाल करेंगे :
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(i) यू ट्यूब अमुक वीडियो उन यूजर्स की न्यूज़ फीड वाल पर फेंकना शुरू करेगा जो संभावित रूप से मोदी साहेब का वीडियो डिसलाइक करने वाले है !!
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(ii) यू ट्यूब अमुक वीडियो उन यूजर्स की न्यूज फीड पर कम भेजेगा जो मोदी साहेब का वीडियो लाइक करने वाले है !!
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(iii) यू ट्यूब पीएम के वीडियो पर लाइक का अपर सर्किट लगा सकता है। अपर सर्किट लगाने के बाद जब भी कोई व्यक्ति लाइक करेगा, तब सिस्टम ऑटोमेटिक इसे समायोजित करके लाइक की संख्या घटाता रहेगा ताकि डिसलाइक की संख्या बढती रहे।
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(1) क्या यू ट्यूब ऐसे यूजर्स को चिन्हित कर सकता है ?
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देखिये, यदि यू ट्यूब राजनैतिक रूप से कीमती इस डेटा को वर्गीकृत नहीं करेगा तो यू ट्यूब बंद हो जाएगा। क्योंकि यह डेटा उसे राजनीतिक ताकत देता है, और इसी वजह से यू ट्यूब के प्रायोजक राजनेताओं की गर्दन मरोड़ कर उन्हें अपने काबू में रखते है।
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यू ट्यूब उन यूजर्स को वर्गीकृत करता है जो राजनैतिक सामग्रियों आदि के वीडियो देखते है। इन यूजर्स में से फिर यूट्यूब उस डेटा को वर्गीकृत करता है जिन्होंने मोदी / बीजेपी / आरएसएस विरोधी विचारधाराओं के यू ट्यूब चैनल्स को सबस्क्राइब किया हुआ है, और वे इन्हें देखते, लाइक करते और कमेन्ट करते है ।
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साथ ही यू ट्यूब के पास उन लोगो का डेटा भी है जो कोंग्रेस, कम्युनिस्ट या इसी वर्ग के चेनल्स से जुड़े है, और अमुक पार्टियों को सकारात्मक रूप से पेश करने वाले वीडियो आदि को लाइक, शेयर, फोरवर्ड करते है। यूट्यूब इन यूजर्स की फेसबुक, व्हाट्स एप आई डी से भी समायोजित करता है, ताकि और भी सटीक डेटा वर्गीकृत किया जा सके। इस समायोजन के लिए यूट्यूब मुख्य रूप से इंटरनेट के खून यानी जीमेल का इस्तेमाल करता है। जरूरत पड़ने पर यूट्यूब का एडमिन ट्विटर आदि से भी डेटा मांग सकता है।
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यू ट्यूब के पास ऐसे और भी कई तरीके है जिससे वह किसी वीडियो की पहुँच बढ़ा / घटा सकता है !!
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(2) क्या डिस लाइक करने वाले SSC Railway वाले छात्र थे !!
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देखिये, इस बात से कोई फर्क नहीं आता कि ये डिस लाइक असली है या नकली है !! असली बात यह है कि, यू ट्यूब यदि नहीं चाहे तो पीएम जैसे आदमी के किसी वीडियो पर लाइक से ज्यादा डिसलाइक आना मुमकिन नहीं है। मतलब यह एकदम बचकाना है। हम यहाँ पीएम के वीडियो की बात कर रहे !! मतलब सर्कस चल रहा है क्या ?
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मेरा बिंदु यह है कि, यदि ये आंकड़े सच्चे है तब भी इसे पलट कर दिखाना यू ट्यूब एडमिन के लिए बाएँ हाथ का खेल है। और जब तब यू ट्यूब के प्रायोजक नहीं चाहेंगे तब तक पीएम के वीडियो की यह दशा होने पर भी आपको यह दशा होती नजर नहीं आ सकती। यह आपको सिर्फ तब ही नजर आ सकता है जब यू ट्यूब चाहता है कि यह नजर आये !!
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उदाहरण के लिए, कोंग्रेस+विपक्ष के जितने कार्यकर्ता / समर्थक है, और जिस पैमाने पर वे आईटी सेल चला रहे है, उसके बरअक्स कथित Ssc छात्रों की कोई हैसियत नहीं है। तो कोंग्रेस+विपक्षी दल अपनी फ़ोर्स के इस्तेमाल करके पीएम के किसी भी वीडियो आदि की बैंड बजा सकते है। किन्तु वे ऐसा आज तक इसीलिए नहीं कर पाए क्योंकि यू ट्यूब के प्रायोजक ऐसा नहीं चाहते। तो यह तर्क सिरे से ही गलत है कि कोई Ssc के छात्र यू ट्यूब के एडमिन के खिलाफ जाकर पीएम के किसी वीडियो की बेंड बजा देंगे !!
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और यू ट्यूब की तरह ही, यदि ट्विटर का एडमिन ना चाहे तो 50 लाख ट्विट होने पर भी अमुक हेश टेग ट्रेंड नहीं करेगा और यह भी पता नहीं चलेगा कि किसी हेश टेग को लेकर 50 लाख ट्विट हुए है !!
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दरअसल, इस तरह की हरकतें करके पेड मीडिया के प्रायोजक युवाओं में यह गलत धारणा बनाए रखते है कि — सोशल मीडिया प्लेटफोर्म की धारा को वाकयी सोसाइटी तय करती है और इनका इस्तेमाल पीएम को झुकाया जा सकता है !!
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और इस तरह की गलत धारणा खड़ी होने से सबसे अधिक नुकसान होता है। क्योंकि इससे उन कानूनों की मांग आगे नहीं बढ़ पाती, जिन्हें लागू करके ऐसी प्रक्रिया की स्थापना की जा सके जिससे नागरिक पारदर्शी एवं अधिकृत रूप से अपनी मांग पीएम के सम्मुख रख सके !!
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(3) तो यू ट्यूब के प्रायोजक पीएम की बैंड क्यों बजा रहे है ?
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अब यह अनुमान लगाने की बात है। और हर व्यक्ति इस बारे में अपना अनुमान लगा सकता है। मेरा अनुमान इस तरह है :
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(3.1) हो सकता है मोदी साहेब चीन-पाकिस्तान-ईरान के खिलाफ युद्ध की तैयारी में ढील बरत रहे हो। तो इस तरह की हरकतें वे वार्निंग देने के लिए करते है। इतना होने से पीएम चीन के खिलाफ भारत को युद्ध को धकलने की प्रक्रिया में तेजी ले आयेंगे।
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(3.2) पीएम ने क्लाश्निकोव को भारत में राइफल बनाने की फैक्ट्री लगाने की अनुमति दी है। हो सकता है, अमेरिकी-इस्रैली कम्पनीयां भारत के राइफल बाजार पर भी कब्ज़ा करने के लिए रूस को बाहर करना चाहती हो।
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(3.3) हो सकता है, पेड मीडिया के प्रायोजक मोदी साहेब को 2024 में रिपीट नहीं करना चाहते। अत: अब वे उनका कद गिराना शुरू कर रहे है। और एवज में पेड मीडिया के माध्यम से योगी जी / शाह या केजरीवाल जी का कद बढ़ाया जाएगा।
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और भी इसी तरह की दर्जनों निहाँ-जाहिर वजहें हो सकती है।
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बहरहाल, पेड मीडिया के प्रायोजक नोटबंदी , जीएसटी एवं लॉकडाउन लगाकर मोदी साहेब की छवि को अच्छा खासा सूंत चुके है। अत: ज्यादातर सम्भावना है कि दाढ़ी बढ़वाने के बाद उन्हें रिटायर कर दिया जाए। और जल्दी ही पेड मीडिया के प्रायोजक पेड मीडिया द्वारा खड़े किये गए नेताओं की भक्ति करने के आदी कार्यकर्ताओ के गले भरने के लिए योगी जी / शाह या केजरीवाल जी के लॉकेट से बाजार पाट देंगे।
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HAPPY PAID MEDIA ANDHBHAKTI
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Sat Sep 05 2020 19:59:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
नागरिक कर्तव्य दिवस - प्रत्येक महीने की 5 तारीख
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आज 5 सितम्बर 2020 को मैंने 2 पोस्टकार्ड भेजे :
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(1) हरियाणा के मुख्यमंत्री को चिट्ठी भेजी गयी कि - Rss द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सरपंच नामक क़ानून पंचायतो में अस्थिरता लाएगा। अत: इस क़ानून को पास न करें। इसकी जगह पर Rrp द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच के क़ानून को लागू करें।
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#OpposeRssRtrSarpanch , #SupportRrpVvpSarpanch
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Rrp के वोट वापसी सरपंच का क़ानून ड्राफ्ट - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3174296922688522>
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(2) राजस्थान के मुख्यमंत्री को चिट्ठी भेजी गयी कि - भीलवाड़ा में सिक्योर कम्पनी के अनुबंध को रद्द करके बिजली प्रबंधन का काम फिर से AVNL को दिया जाए।
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#ExpelSecure , #NationaliseAvnlBhl
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Sun Sep 06 2020 07:46:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
मनोज सोलंकी:
हर महीने की 5 तारीख को 5 बजे इस तरह पीएमओ से जनसमस्या के निराकरण हेतु पोस्टकार्ड द्वारा मांग की जा सकती है , मेरे द्वारा यह पोस्ट कार्ड आज पीएमओ भेजे गए ।
आज अलग अलग शहरों में छात्रों और बेरोजगारों ने ताली थाली मुहिम भी चलाई है ।
तरीका कोई भी लेकिन आवाज ऊपर तक जानी चाहिए ।
आज 3 मांगे पोस्ट कार्ड द्वारा भेजी गयी है
1. जनता की लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था में भागीदारी हेतु राइट टू रिकाल(वोट वापसी पासबुक), जूरी सिस्टम, टीसीपी , और वेल्थ टैक्स की मांग करे ।
2. देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को रोकने हेतु लॉक डाउन को पूर्णतः खत्म करे ।
3. किसानों की मक्का फसल का उचित मूल्य मीले जिसके लिए प्रधानमंत्री जी ने जो हाल ही में कम आयात शुल्क कर 5 लाख टन मक्का का जो आयात हो रहा है उसे निरस्त किया जाए । जिससे कि किसानों की मक्का का दाम उचित प्राप्त हो , जैसे कि पिछले वर्ष 4 लाख टन मक्का का आयात किया गया था जिससे कि आज किसानों की मक्का 1000 रुपये क्विंटल भी नही बिक रही है और इस वर्ष 5 लाख टन मक्का का आयात होना है जिससे कि मक्का की कीमत और भी कम हो सकती है ।
इन सब मांगो को पूरा करने हेतु आप लोग हर महीने की 5 तारीख को 5 बजे इन मांग को लेकर पोस्टकार्ड को प्रधानमंत्री जी को आप मे से कितने लोग भेजना चाहते है।
Sun Sep 06 2020 08:05:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Shailendra Rathore Rtr:
नागरिकता कर्तव्य दिवस 5/09/2020.
मैंने और बहुत सारे भारत के ज़िम्मेदार नागरिकों ने पीएमओ को #EndLockdownCompletely एवम् भीलवाड़ा शहर की बिजली व्यवस्था के लिये सिक्योर मीटर के साथ जो अनुबंध किया है उसे रद्द करके पुनः ये कार्य AVVNL के द्वारा किया जाना सुनिस्चित करे ! #Expelsecure
हम सब ज़िम्मेदार नागरिक अब समझ गए हैं की सिर्फ YouTube, एवम् फेसबुक पे लिख या बोल देने से प्रधानमंत्री जी तक हमारे सुझाव या शिकयत नहीं पहुंचेगी, और प्रधानमंत्री जी ने भी हमारे सुझाव एवम् शिकायत सुनने के लगभग सभी रास्ते बंद किए हुए हैं इसीलिए पोस्टकार्ड लिख कर भेजना सबसे आसान एवम् लोकतांत्रिक तरीका है।
Sun Sep 06 2020 17:19:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
डॉ तरुण जी कोठारी और डॉ विलास जी जगदाले "अब" पोस्टकार्ड कैम्पेन का समर्थन कर रहे है !!
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4 मिनिट का यह वीडियो देखें -- <https://www.facebook.com/amit.s.upadhyay.16/videos/3712275555467759/>
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वीडियो में डॉ तरुण जी कोठारी एवं डॉ विलास जी जगदाले इस बिंदु पर डिस्कस कर रहे है कि लॉकडाउन खत्म करने के लिए पोस्टकार्ड भेजना शुरू करना चाहिए !!
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(1) यह खुली हुई बात है कि, ये दोनों महोदय शुरु से ही पोस्टकार्ड केम्पेन के खिलाफ रहे है, और इसीलिए न तो इन्होने कभी पीएम / सीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए पोस्टकार्ड लिखा और न ही इन्होने अपने दर्शको को कभी पीएम को पोस्टकार्ड भेजने के निर्देश दिए।
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हम रिकालिस्ट्स पिछले 4 महीनो से लगातार नागरिको से अपील कर रहे है कि, उन्हें पीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए पोस्टकार्ड भेजना शुरू करना चाहिए। और जब यह मांग काफी आगे बढ़ गयी और ये अपने समर्थको के सामने एक्सपोज होने लगे तो इन्हें पोस्टकार्ड भेजने का समर्थन करने के लिए बाध्य होना पड़ा !!
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मेरा मानना है कि, यदि इन्होने अपने समर्थको को वैक्सीन आदि षड्यंत्रों पर डिबेट करने में न उलझा लिया होता और यदि ये अपने दर्शको को यह स्पष्ट निर्देश देते कि -- उन्हें लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने के लिए पीएम को पोस्टकार्ड / भेजना शुरू करना चाहिए तो शायद लॉकडाउन काफी पहले समाप्त हो गया होता, या कम से कम लॉकडाउन समाप्त होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती। और इससे भारत के लाखों करोड़ो लोग उस नुकसान से बच जाते जो नुकसान उन्हें लॉकडाउन की वजह से उठाना पड़ा है !!
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(2) डॉ तरुण जी कोठारी और डॉ विलास जी जगदाले पिछले कई महीनो से पीएम को पोस्टकार्ड भेजने का विरोध क्यों कर रहे थे ?
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(2.1) असल में, पोस्टकार्ड भेजने का तरीका ऐसा है कि पोस्टबॉक्स पर नेता एवं नागरिक के बीच का अंतर लुप्त हो जाता है। पोस्टकार्ड भेजने के लिए किसी अतिरिक्त स्किल, विशेषज्ञता, एप्रोच आदि की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ 50 पैसे में पोस्टकार्ड खरीद कर कोई भी व्यक्ति हेश टेग लिखकर इसे डिब्बे में गिरा सकता है।
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यदि नेता पोस्टकार्ड डालने आएगा तो कार्यकर्ता एवं नागरिक सोचेंगे कि -- अरे यह तो मैं भी कर सकता हूँ। और फिर उसे नेता की जररूत नहीं रह जायेगी।
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अत: यह देखने में आया है कि, लीड करने की इच्छा रखने वाले बहुधा कार्यकर्ता / नेता पोस्टकार्ड केम्पेन का समर्थन नहीं करते !! बल्कि वे ऐसे तरीके को तरजीह देते है जिस तरीके से आन्दोलन को आगे बढ़ाने में उनकी जरूरत पड़े, और समर्थक उनसे चिपके रहे।
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(2.2) यदि ये नागरिको को पीएम / सीएम के पीछे जाने को कहेंगे तो इन्हें बीजेपी-कोंग्रेस-आम आदमी पार्टी के नेताओं एवं उनके अंधभक्तो के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। अत: अपने आप बचाए रखने के लिए ये विरोध के ऐसे तरीके का इस्तेमाल करते है ताकि बीजेपी-कोंग्रेस-आम आदमी पार्टी के नेताओं को सेफ एग्जिट दिया जा सके।
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ये दोनों महोदय पहले दिन से यह बात जानते थे कि असली मुद्दा कोरोना / मास्क / वैक्सीन आदि नहीं बल्कि लॉकडाउन है, और नागरिको को लॉकडाउन इसीलिए झेलना पड़ रहा है क्योंकि पीएम एवं सभी 28 राज्यों के सीएम लॉकडाउन के समर्थन में है !! किन्तु इन्होने नेताओं से अपने गठजोड़ के अवसरों को बचाए रखने के लिए लॉकडाउन को मुद्दा नही बनने दिया और कार्यकर्ताओ को उलझाए रखने के लिए कोरोना/ वैक्सीन आदि का इस्तेमाल किया !!
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(3) देर आयद पर दुरुस्त नहीं !!
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जैसा कि वीडियो में नजर आ रहा है , डॉ तरुण जी कोठारी और डॉ विलास जी जगदाले ने अपने दर्शको को पोस्टकार्ड भेजने के लिए स्पष्ट रूप रेखा नहीं दी है। उन्होंने अपने 20 मिनिट लम्बे वीडियो के अंत में इसे कुछ इस तरह डिस्कस किया कि, जो व्यक्ति पोस्टकार्ड डालने के आमादा है, वह ही पोस्टकार्ड डालने के बारे में विचार करेगा, वर्ना नहीं !!
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(3.1) उन्होंने इस बात को मुख्यतया रेखांकित नहीं किया है कि, नागरिको को लॉकडाउन समाप्त करने के लिए पीएम पोस्टकार्ड भेजना शुरू कर देना चाहिए।
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(3.2) उन्होंने EndLockdown हेश का उच्चारण किया है, EndLockdownTottaly का नहीं। जहाँ तक लॉकडाउन समाप्त करने की बात है लॉकडाउन की समाप्ति तो 2 महीने पहले ही शुरु हो चुकी है !! और पीएम / सीएम लॉकडाउन को धीरे धीरे खोलने में अगले 4 महीने का टाइम पास कर देने वाले है !!
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अत: हमने काफी पहले से ही #EndLockdownकी जगह #EndLockdownTottaly का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। और वे अब भी सिर्फ EndLockdown हेश टेग की बात कर रहे है !! मेरे विचार में EndLockdown हेश का इस्तेमाल करना अब व्यर्थ है, और इसके कोई मायने नहीं है !!
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(3.3) उन्होंने अपने दर्शको को यह सूचना नहीं दी है कि, पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी करवाकर इसे अपने पास रखना आवश्यक है। जबकि उन्हें इस बात की जानकारी है कि यदि नागरिक फोटोकॉपी अपने पास नहीं रखेंगे तो पोस्टकार्ड भेजना नहीं भेजना बराबर है !!
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तो मुझे नहीं लगता कि, डॉ तरुण जी कोठारी और डॉ विलास जी जगदाले का यह प्रयास सही दिशा में है। वे सिर्फ 2 अक्टूबर को पोस्टकार्ड भेजने की बात कर रहे है। किन्तु उन्होंने अपने समर्थको से यह नहीं कहा कि वे तुरंत पोस्टकार्ड भेजना शुरू करे और 2 अक्टूबर को भी फिर से भेजें।
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हम प्रत्येक महीने की 5 तारीख को 5 बजे पोस्टकार्ड भेजने का कैम्पेन चलाते है किन्तु लॉकडाउन जैसे इमरजेंसी मामले के लिए हम नागरिको से कहते है कि -- लॉकडाउन का पोस्टकार्ड आप किसी भी तारीख को भेज सकते है। किन्तु तब भी 5 तारीख को यह पोस्टकार्ड पुन: भेजे। क्योंकि यदि हम लॉकडाउन जैसे मसले के लिए 1 महिना इंतजार करेंगे तो जिस नागरिक को इस बारे में 6 तारीख को सूचना मिली है, उसे 1 महीने का इंतजार करना होगा !! और इस तरह एक महीने का टाइम पास हो जायेगा।
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तो हमारे विचार में 2 अक्टूबर तक इन्तजार करने की कोई तुक नहीं !! नागरिको को तुरंत लॉकडाउन को पूर्णतया समाप्त करने के लिए पोस्टकार्ड भेजना शुरू करना चाहिए। और फिर उनके समर्थक 2 अक्टूबर को भी फिर से पोस्टकार्ड भेज सकते है।
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Amit Upadhyay RrpMhulhasnagar MhUlhasnagar:
।। श्री राम समर्थ ।।
राइट टू रिकॉल पार्टी
डॉ तरुण कोठारी और डॉ विलास जगदाले की
" मन की बात " , मुझे समझ में नहीं आता यह डॉक्टर सरकार से मिले हुए हैं या विश्व स्वास्थ्य संगठन से जो चीज सबको पता है कि कोरोनावायरस बिल्कुल भी घातक नहीं है और इससे कोई खास मौतें नहीं हुई है उसे ही बार-बार कोसते रहते हैं , लॉकडाउन के विषय में इनके विचार बड़े कमजोर हैं।
और अब जब " संपूर्ण लॉकडाउन समाप्ति " के लिए पूरे देश में मांग उठ रही है तो यह उसे काट कर छोटा करने में लगे हैं और मात्र " लॉकडाउन समाप्ति " पर रोक रहे हैं ? लॉकडाउन समाप्ति तो शुरू ही हुई है तो आप क्या मांग रहे हैं ? व्यवस्था परिवर्तन को लेकर इनके पास कोई कानून नहीं ?
यह स्पष्ट समझ में आ रहा है कि लॉकडाउन घातक है और उसे समाप्त करने के लिए मार्च से ही राइट टू रिकॉल पार्टी द्वारा पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया। उसमें hashtag #EndLockDownTotally है और संपूर्णता लॉकडाउन समाप्ति की मांग पार्टी द्वारा और देश के कई कार्यकर्ताओं द्वारा रखी गई।जबकि यहां पर डॉक्टर जगदाले यह स्पष्ट रूप से कहते आ रहे हैं कि
# Endlockdown ही मात्र होना चाहिए।
तो स्पष्ट रूप से यह एक समांतर नकली आंदोलन खड़ा करना चाह रहे हैं संपूर्ण लॉकडाउन समाप्ति के सामने। जिसमें राजीव वादियों और अन्य कार्यकर्ताओं की समय ऊर्जा नष्ट किया जाएगा और लॉकडाउन को लंबा खींचा जा सके।
जिन भी यह 2 अक्टूबर का चुन रहे हैं और इनके गुरु भी मोहन गांधी हैं जो देश के स्पष्ट रूप से बहुत बड़े गद्दार हो चुके हैं। जब भगत सिंह ने संपूर्ण आजादी की क्रांति फैलाई थी तो उसी समय मोहन गांधी ने डुप्लीकेट नमक का आंदोलन खड़ा किया था यह अपने गुरु की बात को पूरी तरह मानते हुए उसी तरह के काम में लग गए हैं।
पर वैक्सीनेशन 5G इत्यादि के नाम पर राजीव वादियों और अन्य को मूर्ख बनाने का काम करने वाले डॉ विश्वरूप राय चौधरी डॉक्टर तरुण कोठारी और अब महाराष्ट्र से नए ड्रामेबाज डॉक्टर विलास जगदाले जुड़े हैं। डॉक्टर जगदाले से तो मैंने स्वयं कई बार संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए राइट टू रिकॉल के कानूनों पर बातचीत की पर यह हमेशा बात टालते चले आए।
अब यह 2 अक्टूबर से नकली आंदोलन खड़ा करना चाहते हैं जिसमें जनता को मूर्ख बनाकर उनका गुस्सा ठंडा किया जाएगा। अभी तक इस बात को लेकर मैं स्पष्ट नहीं हूं कि यह मोदी के आदमी हैं या अरविंद केजरीवाल के या फिर सीधे-सीधे यह विदेशियों से तार जोड़ने के पीछे लगे हुए हैं। पर यह निश्चित है कि यह देश के लिए काम नहीं कर रहे और आम जनता और राजीव वादियों को बरगला रहे हैं। यह नकली है, इनका आंदोलन नकली है उनके मुद्दे नकली हैं इनका नेता उनके गुरु गांधी हैं ।
डॉ विश्वरूप राय चौधरी के बारे में तो कोई संदेह नहीं है कि उन्हें खड़ा किया गया है और लॉकडाउन इतना लंबा चल सके उसे मास्क वैक्सीन और 5G के नाम पर खींचा जा सके, डॉक्टर साहब खींचते रहेंगे।
डॉक्टर जगदाले एक तरफ तो कह रहे हैं कि हमें कोई मीडिया सपोर्ट नहीं करेगा और मुंबई में अंतरराष्ट्रीय मीडिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं कहां से आएगा और क्यों आएगा अंतरराष्ट्रीय मीडिया इस मामले में ? क्या संबंध है विदेशियों से ? आज तक राइट टू रिकॉल मूवमेंट और राजीव भाई के लिए तो कोई भी देश इंडिया नहीं आया।
एक तरफ कह रहे हैं कि मीडिया सारा उनके हाथ में है यानी Rockefeller और Rothschild के और दूसरा पर उसी के द्वारा अपनी बात लोगों तक पहुंचाना चाह रहे हैं। एक समय आएगा कि इन्हें निश्चित ही मेंस्ट्रीम मीडिया की भी सहायता मिलेगी।
Sun Sep 06 2020 22:09:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
(1) कंगना का यह ट्विट कहता कि -- गौ मांस खाने में कुछ गलत नहीं है !!
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<https://twitter.com/KanganaTeam/status/1131809998953222146>
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"There is nothing wrong with eating beef or eating any other meat. It's not about religion! It's not a hidden fact that Kangana turned vegetarian 8 years ago and chose to be a yogi. She still doesn’t believe in just one religion."
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यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि, कंगना को गौ मांस भक्षण का इस तरह सार्वजनिक समर्थन करने की कोई जरूरत नहीं थी !! न तो यह उसके पेशे की मांग है और न ही उसकी यह बाध्यता है कि वह हिन्दुओ की भावना को इस तरह आहत करे।
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उसे युवाओं को गौ मांस भक्षण के लिए प्रेरित करने की कोई जरूरत नहीं थी !! साथ ही कंगना रनौत ने गौ हत्या पर प्रतिबन्ध लगाने के क़ानून का हमेशा विरोध किया है !!
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दरअसल, कंगना को मिशनरीज द्वारा संचालित पेड मीडिया का समर्थन चाहीये। गाय को लेकर पेड मीडिया के प्रायोजको के 4 उद्देश्य है :
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(1.1) वे भारत के युवाओ को गौ मांस खाने के लिए प्रेरित करना चाहते है
(1.2) वे गौ मांस भक्षण को "सामाजिक स्वीकार्यता" दिलाना चाहते है
(1.3) वे भारत में से देशी गाय की नस्ल को ख़त्म करना चाहते है
(1.4) वे गाय का इस्तेमाल करके हिन्दू-मुस्लिम तनाव भड़काना चाहते है
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कंगना रनौत को पेड मीडिया का सकारात्मक कवरेज चाहिए और इसीलिए वह गौ कशी एवं गौ मांस भक्षण के समर्थन में इस तरह के बयान देती है। और एवज में पेड मीडिया के प्रायोजक यह सुनश्चित करते है कि कंगना को सकारत्मक मीडिया कवरेज एवं फ़िल्मो में काम मिले।
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और कंगना की तरफ से गौ रक्षक चाहे तो भाड़ में जा सकते है।
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(2) जब 18 सितम्बर 2016 को पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किये गए हमले में हमारे 19 सैनिक शहीद हो गए थे तो कंगना ने पाकिस्तान का बॉयकॉट करने और उनके साथ जारी कला, फ़िल्मी आदि संबंधो को ख़त्म किये जाने का विरोध किया था !!
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<https://www.youtube.com/watch?v=fJ3GkCojN0k>
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see, the thing is that right now we are very overwhelmed with the loss of our soldiers. so the country is mourning in in that grief and it's very hard to be objective right now. but we hope the love and art prevails. but right now we can't expect people to be objective when such a big loss. we have to deal with.
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सीधे लफ्जो में कहें तो - हमें भावनाओं में बहकर पाकिस्तानी अभिनेताओं पर प्रतिबन्ध नहीं लगाने चाहिए !!
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और कंगना की तरफ से वे लोग भाड़ में जा सकते है जो पाकिस्तानी अभिनेताओ पर प्रतिंबध लगाने की मांग कर रहे थे !!
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और इसी कंगना ने 2018 में पाकिस्तानी अभिनेताओं पर बेन का समर्थन किया, क्योंकि भारत में तब तक पेड मीडिया के प्रायोजक हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव काफी बढ़ा चुके थे, और कंगना इस लहर पर सवारी करना चाहती थी !!
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(3) कंगना रनौत को पेड मीडिया में सकारत्मक कवरेज मिलने की एक बड़ी वजह यह है कि, उसकी फिल्मों में युवतियों को शराब का सेवन करने के लिए प्रेरित करने वाले दृश्य होते है।
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(a) 30 सेकेण्ड का यह वीडियो देखें - <https://youtu.be/IcMUB8qY-qo?t=76>
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(b) 30 सेकेण्ड का एक वीडियो यह भी देखें - <https://www.youtube.com/watch?v=YR-m00jMN-M&t=58>
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(c) 2 मिनिट का एक वीडियो और - <https://www.youtube.com/watch?v=CuImU3SaqgY&t=30>
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ये सभी दृश्य युवतियों द्वारा शराब पीने को "सामाजिक स्वीकार्यता" दिलाने के लिए ठूंसे जाते है !! इससे युवतियों में शराब का सेवन बढ़ता है। शराब का उपभोग बढ़ने से दवा कम्पनियां पैसा बनाती है। क्योंकि शराब सेवन से लीवर, हार्ट कमजोर होकर स्वास्थ्य खराब हो जाता है, और दवाइयों की बिक्री बढती है !!
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और फिर कंगना की तरफ से वे अभिभावक भाड़ में जा सकते है, जिनकी बच्चियों को शराब की लत लग चुकी है !!
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यहाँ कम से कम एक बात तय है कि यदि कंगना रनौत जैसी गलीज अभिनेत्रियों का समाज में प्रभाव बढ़ेगा तो निश्चित रूप से आपके आस पास महिला नशेड़ियो की संख्या बढ़ जायेगी !!
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तो आप स्वयं तय कर सकते है कि आपको किस प्रकार के कथित सशक्त समाज के लिए किस तरह की महिलाओं को बढ़ावा देना चाहिए।
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मुझे सिर्फ कंगना ही नहीं, बल्कि परेश रावल से लेकर अक्षय कुमार, अजय देवकरण, आमिर खान, सलमान खान, सैफ अली खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, करण जौहर, दीपिका पादुकोण से लेकर महेश भट्ट तक लगभग उन सभी बालीवुडिया कलाकारो से अत्यंत घृणा है, जो पैसे एवं करियर के लिए परदे पर गंदगी परोसते है !! ]
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(4) समाधान : ऍफ़डीआई बढ़ने के साथ साथ वक्त के साथ परदे पर नंगई, फूहड़ता, अश्लीलता एवं संस्कृति का विद्रूप चित्रण बढ़ता जाएगा। मेरे विचार में जूरी कोर्ट लाये बिना इसे किसी भी तरह से रोका नहीं जा सकता।
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शायद शराब और गौ मांस का प्रमोशन एक बड़ी वजह है कि कंगना रनौत RSS=BJP के कार्यकर्ताओ के काफी लोकप्रिय है !!
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Mon Sep 07 2020 17:29:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
डॉ तरुण जी ने कोठारी ने पीएम को लॉकडाउन खत्म करने के लिए पोस्टकार्ड भेजा है।
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कोठारी जी को धन्यवाद। हालांकि उनके पोस्टकार्ड में कई महत्त्वपूर्ण चीजे अस्पष्ट है. अत: इस बारे में उनसे सुधार अपेक्षित है.
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<https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=1787338364750699&id=100004236575462>
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पोस्टकार्ड लिखने का तरीका ऐसा होना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा नागरिक पोस्टकार्ड भेज सके, एवं सरकार पर दबाव बने। कृपया पोस्टकार्ड के text में निम्नलिखित सुधार करें.
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(1) कृपया पोस्टकार्ड पर हेश के अतिरिक्त 3-4 शब्दों से ज्यादा नहीं लिखे। जब लाखों-करोड़ो नागरिक पोस्टकार्ड भेजेंगे तो पीएम / सीएम का कार्यालय सिर्फ इनकी गिनती करके समरी बना सकता है, किन्तु इन्हें पढ़ नहीं सकता। अत: आपकी जो भी मांग हो केवल उसकी हेश लिखे। हेश हिन्दी में एवं अंग्रेजी दोनों में से किसी भी भाषा में लिख सकते है।
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उदाहरण के लिए यदि आप लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने की मांग कर रहे है तो पोस्टकार्ड में सिर्फ #EndLockdownTotally लिखना काफी है
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यदि आप जूरी कोर्ट की मांग कर रहे है तो सिर्फ "#JuryCourt गेजेट में छापे" लिखना काफी है।
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यदि आप अतिरिक्त विवरण लिख देंगे तो हेश का फॉण्ट आपको छोटा करना पड़ेगा और पोस्टकार्ड की फोटो में हेश ठीक से दिखाई नहीं देगी। हेश इस तरह लिखी जानी चाहिए कि जैसे ही किसी व्यक्ति की पोस्टकार्ड पर नजर पड़े तो नजर पड़ने के साथ ही उसे हेश दिखाई दे।
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(2) पोस्टकार्ड बक्से में डालने से पहले इसकी फोटोकॉपी अवश्य कराएं तथा फोटोकॉपी "My Letters to Pm" नामक रजिस्टर में चिपका कर रखें। ताकि आपके पास इसका रिकॉर्ड रहे। हमारे विचार में, यदि आप पोस्टकार्ड भेजते है किन्तु इसकी फोटोकॉपी सहेज कर नहीं रखते है तो पोस्टकार्ड भेजना ना भेजना बराबर है।
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(3) फेसबुक पर "प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग" या "My Letters to Pm" नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। ताकि अन्य नागरिक इसे देख सके और वे भी चिट्ठी भेज सके।
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(4) कृपया पोस्टकार्ड में अपना वोटर आई डी नंबर लिखे.
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Mon Sep 07 2020 20:06:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कृपया Rss एवं Rrp द्वारा प्रस्तावित सरपंच के क़ानून की यह तुलना देखें
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<https://www.youtube.com/watch?v=XH6C2pVVl-U&fbclid=IwAR3vkQ2h76KB96hIohDT-GvFPhgd_f_bKxBQOmQomQhlcJyiprADgQCFy7Y>
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#VoteVapsiSarpanch (राइट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित)
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Vs
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RightToRecallSarpanch (आरएसएस + JJP द्वारा प्रस्तावित)
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लघु सारांश
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1. Rrp द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच के क़ानून में वोट वापसी पासबुक आधारित सकारात्मक रिकॉल प्रक्रिया है। जबकि आरएसएस का आरटीआर सरपंच हस्ताक्षर आधारित नकारात्मक प्रक्रिया का उपयोग करता है।
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2. Rrp द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच प्रशासन में सुधार करेगा जबकि आरएसएस द्वारा प्रस्तावित RTRSarpanch अस्थिरता लाएगा. इससे भी बदतर इससे गाँवों में हिंसक संघर्ष और मारपीट-झगड़े आदि पनपेंगे।
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-- कपिल जी बिश्नोई, हिसार , हरियाणा
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Tue Sep 08 2020 20:02:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
भाग -1 : राईट टू रिकॉल मूवमेंट के नये कार्यकर्ताओ के लिए
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विभिन्न मंचो के माध्यम से कई कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल पार्टी के क़ानून ड्राफ्ट्स के बारे में सूचित होते है, और इस आन्दोलन में जुड़ते है। जब नए कार्यकर्ता इस आन्दोलन में आते है तो उनके पास काफी प्रश्न होते है। इस पोस्ट में नए कार्यकर्ताओ द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर करने वाले प्राथमिक विवरण दिए गए है :
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(1) राईट टू रिकाल आन्दोलन का संक्षिप्त परिचय :
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(1.1) अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरणा लेने वाला यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है और राईट टू रिकॉल पार्टी इस जन आन्दोलन का एक हिस्सा है। राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ता किसी भी प्रकार की घोषणाओं एवं अस्पष्ट वादों में नहीं मानते है, बल्कि सिर्फ कानून ड्राफ्ट में मानते है। अत: पार्टी के मेनिफेस्टो में सिर्फ क़ानून ड्राफ्ट है, और क़ानून ड्राफ्ट के अलावा कुछ नहीं है। राईट टू रिकॉल पार्टी किसी भी प्रकार की विचारधारा में भी नहीं मानती है, सिर्फ क़ानून ड्राफ्ट धारा में मानती है।
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(1.2) पार्टी के घोषणा पत्र में कुल 27 क़ानून ड्राफ्ट्स है। इन कानून ड्राफ्ट्स की सूची आप इस पोस्ट में देख सकते है – <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3174332716018276>
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(1.3) पार्टी के कार्यकर्ताओ का मूल उद्देश्य उपरोक्त 27 क़ानून ड्राफ्ट्स की जानकारी भारत के 90 करोड़ नागरिको तक पहुँचाना है, ताकि कम से कम 45 करोड़ नागरिको को तैयार किया जा सके कि वे Pm को पोस्टकार्ड भेजकर इन कानूनों को गेजेट में छापने के लिए कहे।
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(2) प्रचार का तरीका :
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(2.1) पार्टी के कार्यकर्ता प्रचार के लिए विकेन्द्रित तरीको का प्रयोग करते है, अत: प्रचार में पेड मीडिया का इस्तेमाल नहीं किया जाता। पेड मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ विज्ञापन देने में किया जाता है। विकेन्द्रित तरीको में पर्चे बांटना, बैनर लगाना, नागरिक सभाएं करना, सोशल मीडिया आदि शामिल है।
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(2.2) यदि आप राईट टू रिकॉल पार्टी के बारे में किसी भी टीवी/ अख़बार आदि में कोई खबर/ सूचना /विश्लेष्ण आदि देखें और यदि यह विज्ञापन के रूप में नहीं है, तो हमारा सुझाव है कि इसे गंभीरता से न ले और इसकी अवहेलना करें। पार्टी के सदस्य अपनी गतिविधियों आदि के बारे में सूचनाएं प्रकाशित कराने के लिए समाचार पत्रों के दफ्तरों में जाकर लॉबीइंग नहीं करते है। अत: यदि पेड मीडिया पार्टी के बारे में अच्छी खबरें प्रकाशित करता है, तब भी इस पर ध्यान न दें।
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(3) जन आन्दोलन या पार्टी में शामिल होने का तरीका :
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(3.1) भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह Pm / Cm को चिट्ठी भेजकर उन कानूनों की मांग करें, जिनका वे समर्थन करते है। साथ ही My Letters To Pm नाम से एक नोटबुक बनाए और भेजी गयी चिट्ठियों की फोटो कॉपी का इसमें रिकॉर्ड भी रखें। पार्टी के सदस्यों से यह आशा की जाती है कि वे अपना नागरिक कर्तव्य अनिवार्य रूप से पूरा करेंगे।
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(3.2) पीएम / सीएम को चिट्ठी भेजना एक मात्र तरीका है, जिसके माध्यम से आप इस आन्दोलन का हिस्सा बनते है। अत: पीएम को पोस्टकार्ड भेजना एवं भेजे गए पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी रजिस्टर में चिपकाकर रखना प्राथमिक कार्य है जो इस आन्दोलन में आने वाले कार्यकर्ताओ को करना होता है।
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(4) निष्कासन सम्बन्धी नियम :
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(4.1) राईट टू रिकॉल पार्टी में सदस्यता स्वैच्छिक है, और एक बार सदस्य बनने के बाद पार्टी आपको किसी भी तरह से निष्काषित नहीं कर सकती है। पार्टी के पास अनुशासन सम्बन्धी कार्यवाही करने के भी कोई अधिकार नहीं है। यदि आप पार्टी के टिकेट पर लड़ रहे उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करते है, या पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष आदि के खिलाफ किसी भी स्तर की आलोचना या खुला विरोध करते है, तब भी आपको पार्टी से निकाला नही जा सकता।
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(4.2) पार्टी के मतदाता सदस्यों के पास वोटिंग राइट्स होते है, ताकि वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को शामिल करते हुए अन्य पदाधिकारियों को बदलने के लिए वोट कर सके। अभी पार्टी का संविधान चुनाव आयोग से स्वीकृत नहीं किया है, अत: मतदाता सदस्यों के जुड़ने की प्रक्रिया मौजूद नहीं है। अगले 1 से 2 वर्षो में इसका सिस्टम बना दिया जायेगा।
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(5) पार्टी की कार्य शैली :
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(5.1) पार्टी में सभी सदस्यों की हैसियत समान है, और सीनियर-जूनियर के आधार पर किसी भी व्यक्ति को कोई भी अतिरिक्त तवज्जो नहीं दी जाती। पार्टी का नेता क़ानून ड्राफ्ट है। और क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में ही सभी कार्यकर्ता काम करते है। पार्टी में जिलाध्यक्ष, राज्य अध्यक्ष आदि कोई पदाधिकारी नहीं होते। पार्टी के सभी सदस्यों को सिर्फ कार्यकर्ता के रूप में ही काम करना होता है।
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(5.2) पार्टी के अध्यक्ष का मुख्य काम सिर्फ चुनाव आयोग से डील करना है, पार्टी को चलाना नहीं। इस पार्टी को कार्यकर्ता ही चलाते है, अध्यक्ष नहीं। पार्टी अध्यक्ष द्वारा सिर्फ सुझाव जारी किये जा सकते है, निर्देश नहीं। अध्यक्ष द्वारा जारी सुझावो को पार्टी सदस्य मान भी सकते है, और नहीं भी मान सकते है।.
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(6) पार्टी का फंड मैनेजमेंट :
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(6.1) यह पार्टी केंद्रीय स्तर पर कोई पैसा इकट्ठा नहीं करती है। कोई बैंक एकाउंट भी नहीं है। RRP नकद में कोई चंदा भी नहीं लेती। बैंक एकाउंट नहीं होने के कारण पार्टी केन्द्रीय स्तर पर पैसो का कोई भी लेन देन नहीं करती है। यदि चुनाव आयोग आगे चलकर कोई ऐसा नियम बना देता है कि पार्टी को खाता खोलना अनिवार्य हो जाए तो बात अलग है।
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(6.2) पार्टी की सदस्यता नि:शुल्क है। अत: पार्टी केन्द्रीय स्तर पर कोई सदस्यता शुल्क नहीं लेती है। स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार, स्थानीय प्रभारी या क़ानून ड्राफ्ट्स का प्रचार करने वाले कार्यकर्ता स्थानीय नागरिको से सहायता ले सकते है, और इसका ब्यौरा फेसबुक आदि पर रख सकते है। स्थानीय स्तर पर नागरिको से सहायता ग्रहण करने वाले कार्यकर्ता पार्टी के नाम से कोई रसीद वगेरह नहीं देते है।
(6.3) यदि आप पार्टी को कोई सहयोग देना चाहते है तो स्थानीय स्तर पर जो कार्यकर्ता पार्टी की और से चुनाव लड़ते है या कानूनों का प्रचार करते है उन्हें सहयोग कर सकते है। यदि कोई व्यक्ति पार्टी के टिकेट पर चुनाव लड़ता है तो पार्टी न तो किसी भी रूप में उसे कोई चंदा / अनुदान / आर्थिक सहायता देती है, और न ही किसी भी रूप में कोई चंदा / अनुदान / आर्थिक सहायता लेती है।
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(7) पार्टी की मीटिंग एवं बैठके :
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(7.1) पार्टी राष्ट्रिय एवं राज्य स्तर पर कभी भी कोई मीटिंग आयोजित नहीं करती है। सभी लोगो को अपने स्तर पर एक इकाई के रूप मंन काम करना होता है। टीम वर्क का सिस्टम यहाँ नहीं है। पार्टी कोई भी नीति बनाकर कार्यकर्ताओ को नहीं देती, न ही कोई रणनीति या पार्टी लाइन देती है। प्रत्येक सदस्य को कानूनों के प्रचार के लिए खुद ही नीति बनानी होती है, और खुद ही खुद के खर्चे पर खुद के संसाधनों से काम करना होता है।
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(7.2) स्थानीय स्तर पर मीटिंग : पार्टी के कार्यकर्ता आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर मीटिंग वगेरह रख सकते है। स्थानीय स्तर की इस मीटिंग के लिए नियम एकदम स्पष्ट एवं अपरिवर्तनीय है :
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(7.2.1) ऐसी मीटिंग सिर्फ महीने के दुसरे रविवार यानी 2nd Sunday को सांय 4 बजे ही की जा सकती है।
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(7.2.2) यह मीटिंग अनिवार्य रूप से सार्वजनिक स्थल पर ही रखी जानी चाहिए। इसके लिए कार्यकर्ता कोई मंदिर / रेलवे-बस स्टेशन / शेड / पार्क परिसर आदि चुन सकते है।
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(7.2.3) यदि एक बार कोई सार्वजानिक परिसर तय हो जाता है तो फिर उस स्थान को किसी भी सूरत में बदला नहीं जा सकता है। फिर वह स्थान हमेशा के लिए तय हो जाएगा ।
दुसरे रविवार के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु पार्टी की ऑफिशियल मीटिंग महीने के द्वितीय रविवार को सार्वजनिक स्थल पर ही होती है।
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(9) पार्टी का मुख्य प्रतिद्वंदी :
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RRP बुनियादी रूप से भारत की किसी भी पार्टी / नेता के खिलाफ नहीं है। RRP के कई सदस्य एवं कार्यकर्ता देश की विभिन्न राजनैतिक पार्टियों एवं संगठनो में भी जुड़े हुए है। RRP में काम करने के लिए उन्हें उन पार्टियों को छोड़ना नहीं होता है, अत: RRP का अन्य राजनैतिक दलों से कोई प्रतिरोध नहीं। RRP का मुख्य और एक मात्र प्रतिद्वंदी पेड मीडिया है। RRP के कार्यकर्ता सिर्फ पेड मीडिया के खिलाफ काम करते है। RRP के कार्यकर्ताओ का लक्ष्य पेड मीडिया को विदेशी कम्पनियों के नियंत्रण से मुक्त करवाना है।
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यदि आपका कोई प्रश्न है तो इस लिंक के कमेन्ट बॉक्स में रख सकते है -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1810964342355127>
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Tue Sep 08 2020 21:31:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
भाग - 2 : राईट टू रिकॉल मूवमेंट के नये कार्यकर्ताओ के लिए
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इस पोस्ट में नए कार्यकर्ताओ द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर करने वाले प्राथमिक विवरण दिए गए है । यह इस श्रुंखला का दूसरा पोस्ट है। पहला पोस्ट यहाँ पढ़ें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3210944292357118>
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(1) मैं राईट टू रिकॉल पार्टी या आन्दोलन से कैसे जुड़ सकता हूँ ?
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इस आन्दोलन से जुड़ने के लिए आपको पीएम को चिट्ठी भेजनी होती है, और चिट्ठी की फोटोकॉपी “My Letters to Pm” नाम से बनाए गए रजिस्टर में चिपकाकर रखनी होती है। जैसे ही आप इतना करते है वैसे ही आप इस आन्दोलन में शामिल हो जाते है।
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(2) चिट्ठी में क्या लिखना है ?
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राईट टू रिकॉल पार्टी ने 27 क़ानून ड्राफ्ट्स प्रस्तावित किये है। इन कानून ड्राफ्ट्स की सूची आप इस पोस्ट में देख सकते है – <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3174332716018276>
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उपरोक्त 27 कानूनों में से जिन भी कानूनों का आप समर्थन करते है, उस क़ानून के नाम की हेश आपको पोस्टकार्ड में लिखकर पीएम को भेजनी होती है। उदाहरण के लिए यदि आप जूरी कोर्ट क़ानून का समर्थन करते है तो आपको पोस्टकार्ड में लिखना है – प्रधानमंत्री जी , #JuryCourt गेजेट में छापें
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(3) यदि मुझे कोई प्रश्न करना है तो मैं प्रश्न किससे पूछूं ?
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आप अपना प्रश्न राईट टू रिकॉल आन्दोलन के किसी भी कार्यकर्ता से पूछ सकते है। कार्यकर्ता को खोजने के लिए आप अमुक व्यक्ति के फेसबुक एल्बम को देखें। राईट टू रिकॉल आन्दोलन के किसी भी कार्यकर्ता की फेसबुक प्रोफाइल पर आपको 2 एल्बम अनिवार्य रूप से मिलेंगे :
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(a) Law drafts I asked Pm to print – इस एल्बम में आपको वे क़ानून ड्राफ्ट्स मिलेंगे जिनका अमुक कार्यकर्ता समर्थन करता है ।
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(b) My letters to Pm – इस एल्बम में आपको उस रजिस्टर के पेज के चित्र मिलेंगे जिस रजिस्टर में अमुक व्यक्ति ने pm को भेजे गए पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी चिपका कर रखी है।
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तो जिस भी कार्यकर्ता ने ये 2 एल्बम बनाए है , आप उनसे मूवमेंट के बारे में कोई भी प्रश्न कर सकते है। वे आपको जवाब दे देंगे।
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(4) प्रश्न पूछने का तरीका क्या है ?
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हम प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सार्वजनिक मंच का इस्तेमाल करते है । अत: आप अपना प्रश्न फेसबुक पर पूछ सकते है। चूंकि फोन कॉल्स, मेसेंजर, व्हाट्स एप आदि सार्वजनिक मंच नहीं है, अत: हम महत्त्वपूर्ण डिस्कसन के लिए इन माध्यमो का इस्तेमाल नहीं करते। या बेहद कम करते है।
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(5) मैं इस आन्दोलन में कैसे अपना योगदान दे सकता हूँ ?
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इसके लिए आप 2 कदम उठा सकते है :
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(a) पहला कदम पीएम को चिट्ठी भेजना है । तो आप राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट पढ़े और जिन कानूनों का आप समर्थन करते है, उनकी चिट्ठी पीएम को भेजे। (और इसकी फोटोकॉपी रखना न भूलें)
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(b) दूसरा कदम – ज्यादा से ज्यादा नागरिको तक अमुक क़ानून ड्राफ्ट्स की जानकारी पहुंचाए ताकि अन्य नागरिको को भी पीएम को चिट्ठी भेजने के लिए तैयार किया जा सके।
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(6) क़ानून ड्राफ्ट की जानकारी पहुँचाने के लिए मुझे क्या करना होगा ?
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इस बारे में आपको खुद ही तय करना पड़ेगा। जैसे आपको समझ आये वैसे आप कर सकते है। आप अपने संसाधनों, सुविधा, समय आदि के अनुसार ऑनलाइन, ऑफलाइन आदि किसी भी तरीके का इस्तेमाल करके नागरिको तक जानकारी पहुँचा सकते है। क़ानून ड्राफ्ट के प्रचार के तरीको के बारे में हमारे पास को नियत नियम या दिशा निर्देश नहीं है। आपको जो तरीका ठीक लगे आप उसका इस्तेमाल करें।
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(7) कैसे पता चलेगा कि मैं मूवमेंट को बढ़ाने की सही दिशा में काम कर रहा हूँ ?
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यदि आपके प्रचार के तरीके का परिणाम यह है कि, पीएम को पोस्टकार्ड भेजने और फोटोकॉपी सहेज कर रखने वाले नागरिको की संख्या बढ़ रही है, तो आपकी दिशा सही और प्रभावी है। किन्तु यदि यह संख्या नहीं बढ़ रही है, तो इसका आशय है कि आपको अपने प्रचार के तरीके को सुधारने की जरूरत है।
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क्योंकि यदि पोस्टकार्ड भेजने वालो की संख्या नहीं बढ़ेगी तो अमुक कानूनों की मांग भी आगे नहीं बढ़ेगी। तो यदि आप खूब प्रचार कर रहे है, किन्तु पोस्टकार्ड भेजने और फोटोकॉपी सहेज कर रखने वाले नागरिको की संख्या नहीं बढ़ रही है, तो इसका आशय है कि आप गोल गोल घूम रहे है, किन्तु दूरी तय नहीं कर रहे है !!
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(8) पोस्टकार्ड कब भेजना होता है, और कितनी बार ?
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पोस्टकार्ड सिर्फ 5 तारीख को सांय 5 बजे ही भेजा जाना चाहिए। 5 तारीख के अतिरिक्त दिवस पर यदि पोस्टकार्ड भेजा जाता है, तो इससे आन्दोलन आगे नहीं बढ़ता। और इसीलिए यदि आपने 5 तारीख के अतिरिक्त दिन पोस्टकार्ड भेजा है तो आपको अमुक मांग का पोस्टकार्ड 5 तारीख को फिर से भेजना होगा।
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कम से कम एक बार तो आपको पोस्टकार्ड भेजना ही है। और इसके बाद आप अपनी मांग का पोस्टकार्ड प्रत्येक महीने की 5 तारीख को निरंतर भेजते रहना है। यदि आप एक बार पोस्टकार्ड भेजकर रूक जायेंगे तो आन्दोलन में नए नागरिक नहीं जुड़ेंगे और मांग आगे नहीं बढ़ेगी।
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(इसमें लॉकडाउन अपवाद है। और लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने का पोस्टकार्ड किसी भी दिन भेजा जा सकता है।)
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(9) प्रचार के लिए मुझे सामग्री एवं जानकारियां कहाँ से मिलेगी ?
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राईट टू रिकॉल के कार्यकर्ताओ द्वारा विभिन्न मंचो पोस्ट की गयी सभी सामग्री कॉपी लेफ्ट है। आप किसी भी कार्यकर्ता की वाल से कोई भी सामग्री उठाकर उनका इस्तेमाल किसी भी मंच पर कर सकते है। और आपको इसके लिए स्त्रोत या कार्यकर्ता के नाम का उल्लेख करने की जरूरत नहीं है।
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उदाहरण के लिए, मान लीजिये मैंने या किसी कार्यकर्ता ने कोई फेसबुक पोस्ट लिखा है। तो आप अमुक पोस्ट को कॉपी करके अपनी फेसबुक वाल पर रख सकते है, और आपको मेरे या अमुक कार्यकर्ता के नाम का उल्लेख करने की जरूरत नहीं है। या आप अमुक पोस्ट को किसी भी अन्य सोशल मीडिया मंच पर पोस्ट कर सकते है, और आपको स्त्रोत का जिक्र करने की जरूरत नहीं है।
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इस तरह राईट टू रिकॉल आन्दोलन के कार्यकर्ताओ द्वारा जितनी भी सामग्री अब तक लिखी / पोस्ट की गयी है, आप उनका इस्तेमाल आंशिक / पूर्ण / चयनात्मक रूप से इस्तेमाल कर सकते है, और आपको किसी कार्यकर्ता / स्त्रोत का उल्लेख करने की जरूरत नहीं है।
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Wed Sep 09 2020 19:08:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
भाग – 3 : राईट टू रिकॉल मूवमेंट के नये कार्यकर्ताओ के लिए
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इस पोस्ट में नए कार्यकर्ताओ द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर करने वाले प्राथमिक विवरण दिए गए है। यह इस श्रुंखला का तीसरा पोस्ट है। पहला पोस्ट यहाँ पढ़ें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3210944292357118>
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(01) राईट टू रिकॉल आन्दोलन के बारे में सभी जानकारियाँ मुझे कहाँ से मिल सकती है ?
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यह आन्दोलन विकेन्द्रित तरीके से काम करता है। अत: ऐसा कोई केन्द्रीय स्त्रोत नहीं है, जहाँ से आपको सभी जानकारियां मिल सके। यह जानकारी आपको कई तरह के स्त्रोतों से जुटानी होगी। ये स्त्रोत निम्नलिखित है :
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(a) राईट टू रिकॉल पार्टी का मेनिफेस्टो
(b) राईट टू रिकॉल कार्यकर्ताओ की फेसबुक प्रोफाइल पर रखे गए पोस्ट
(c) राईट टू रिकॉल का यू ट्यूब चेनल
(d) विभिन्न कार्यकर्ताओ द्वारा बनाए गए वीडियो
(e) राईट टू रिकॉल कार्यकर्ताओ द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया मंचो जैसे कोरा आदि एवं अन्य वेबसाइट्स पर रखे गए पोस्ट
(f) अन्य स्त्रोत जिनकी हमें खुद भी जानकारी नहीं है
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ये सब मिलाकर हजारो पृष्ठों की सामग्री है। और ये सभी सामग्री इतनी फैली एवं बिखरी हुयी है कि, हम खुद भी अब इन्हें पूरी तरह ढूंढ कर इकट्ठी नहीं कर सकते। अत: जैसे जैसे इस आन्दोलन में आपकी भागीदारी बढ़ेगी, वैसे वैसे यह जानकारियां आपके सामने आती जायेगी।
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(02) राईट टू रिकॉल आन्दोलन का मुख्य फेसबुक ग्रुप कौनसा है ?
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यह आन्दोलन विकेन्द्रित तरीके से काम करता है। अत: ऐसा कोई मुख्य केन्द्रीय ग्रुप नहीं है। और आगे भी ऐसे किसी केन्द्रीय ग्रुप के होने की संभावना बेहद कम है। किन्तु कोई भी कार्यकर्ता चाहे तो कुछ भी नाम से फेसबुक ग्रुप बना सकता है, और इसे बड़ा कर सकता है।
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(03) राईट टू रिकॉल पार्टी की वेबसाईट कौनसी है ?
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यह आन्दोलन विकेन्द्रित तरीके से काम करता है। अत: पार्टी की कोई केन्द्रीय वेबसाईट नहीं है। और निकट भविष्य में होने की सम्भावना भी नहीं है। किन्तु कोई भी कार्यकर्ता चाहे तो पार्टी की वेबसाईट शुरू कर सकता है। उदाहरण के लिए अभी किसी कार्यकर्ता ने Rtr. Party नाम से वेबसाईट शुरू की है। इसी तरीके से कोई भी कार्यकर्ता वेबसाईट खोल सकता है, और अपने हिसाब से इसे चला सकता है।
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(04) राईट टू रिकॉल पार्टी का मुख्य फेसबुक पेज कौनसा है ?
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यह आन्दोलन विकेन्द्रित तरीके से काम करता है। अत: पार्टी का कोई केन्द्रीय फेसबुक पेज नहीं है। आगे यदि होगा भी तो आन्दोलन उस पर कभी निर्भर नहीं करेगा। किन्तु कोई भी कार्यकर्ता चाहे तो किसी भी नाम से कोई फेसबुक पेज शुरू कर सकता है। उदाहरण के लिए अभी किसी कार्यकर्ता ने Jury Court नाम से फेसबुक पेज शुरू किया है । बस ऐसे ही आप भी शुरू कर सकते है।
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(05) राईट टू रिकॉल आन्दोलन में कुल कितने कार्यकर्ता काम कर रहे है ?
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इसका हमारे पास कोई सेंट्रल डेटा नहीं है। हमारे पास सिर्फ चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ताओ का डेटा है। हमें खुद नहीं पता है कि इस आन्दोलन में कहाँ कहाँ पर कौन जुड़ा हुआ है, और क्या / कैसे काम कर रहा है। इस आन्दोलन में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जो सभी कार्यकर्ताओ को जानता हो। नए नए कार्यकर्ता इसमें जुड़ते रहते है, और कुछ समय सक्रीय रहकर कुछ समय के लिए निष्क्रिय हो जाते है । और फिर कुछ समय बाद फिर से सक्रीय हो जाते है। इस तरह आने-जाने सक्रीय-निष्क्रिय का रोटेशन चलते रहता है।
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(06) मेरे शहर में कोई कार्यकर्ता है या नहीं, इसके बारे में मुझे कैसे जानकारी होगी ?
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यदि किसी कार्यकर्ता ने आपके क्षेत्र से चुनाव लड़ा है तो किसी भी कार्यकर्ता को पूछने से पता लग जाएगा। यदि चुनाव नहीं लड़ा है किन्तु अमुक कार्यकर्ता पीएम को चिट्ठी भेजता है, तब आपको अमुक कार्यकर्ता 5 तारीख को 5 बजे शहर के हेड पोस्ट ऑफिस पर मिल जाएगा। यदि आपके क्षेत्र से कोई कार्यकर्ता चुनाव भी नहीं लड़ा है और 5 तारीख को चिट्ठी भी नहीं भेज रहा है, तो समझ लीजिये कि वहां पर कोई सक्रीय कार्यकर्ता नहीं है।
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(07) आप लोगो के बहुधा लेख काफी लम्बे है ? छोटे में लिखना चाहिए !!
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आप छोटे छोटे लिख सकते है। जिसे लम्बे आर्टिकल लिखने की आदत है, वह लम्बा ही लिखेगा। आप लम्बे आर्टिकल्स को छोटे छोटे छोटे हिस्सों में विभाजित करके छोटे पोस्ट करें। इस समस्या का समाधान आप स्वयं कर सकते है।
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(08) राईट टू रिकॉल के पर्याप्त वीडियो क्यों उपलब्ध नहीं है ?
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आप वीडियो बना सकते है। किसी अन्य कार्यकर्ता को कहने से अच्छा है, कि आप खुद ही वीडियो बनाकर पोस्ट करने लगे।
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(09) यदि मैं कुछ एक्टिविटी करूँ और कोई रिकालिस्ट दखल करे तो मुझे क्या करना चाहिए ?
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यदि आप कोई भी एक्टिविटी करते है और कोई भी कार्यकर्ता / अध्यक्ष आपको कोई सुझाव देता है तो आपके पास 2 विकल्प है। यदि आपको अमुक सुझाव आंशिक / पूर्ण ठीक लगे तो उसे मान सकते है, या नहीं भी मान सकते है। अंतिम फैसला आपको ही करना होगा। यदि कोई कार्यकर्ता ज्यादा दखलंदाजी कर रहा है, तो आप उसे बोल सकते है, वह दखल न करें। या आप उसे फेसबुक पर ब्लॉक कर सकते है।
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इस आन्दोलन में यह अधिकार किसी को भी नहीं है कि, वह किसी अन्य कार्यकर्ता के काम में जाया दखल करें.
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Thu Sep 10 2020 07:39:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पेड मीडिया की ताकत :
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किसी हिन्दू की जिस औलाद ने कभी नमाज न पढ़ी, मस्जिद न गया, पूरी जिन्दगी शराब पी और सूअर खाया , उसे भी पेड मीडिया चाहे तो मुस्लिमों के सबसे बड़े नेता के रूप में स्थापित कर सकता है !! और मुस्लिम उसके नाम की तलावत करने लगेंगे !!!
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और ठीक यही शर्त हिंदूवादी नेताओं पर भी लागू होती है। पेड मीडिया के प्रायोजक एक गौ मांस भक्षी एवं हिन्दू धर्म को नष्ट करने के प्रयासों में मुब्तिला किसी भी हिन्दू द्रोही को इतना बड़ा हिन्दुवादी ठहरा सकते है, कि पेड मीडिया की चपेट में आकर हिन्दू उसके नाम की माला जपने लगेंगे।
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पेड मीडिया में जितने भी चेहरे आप देखते है वे सभी मिशनरीज के लिए काम करते है। मीडिया अमुक नेताओं को कथित हिंदूवादी के रूप में पेंट करके दिखाता है। यदि वे मिशनरीज के विरोध में है तो आप उनका चेहरा मुख्य धारा के मीडिया में कभी भी नहीं देखेंगे।
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दुसरे शब्दों में, यदि किसी नेता को आप तक पेड मीडिया पहुँचा रहा है तो एक बात तय है कि वह मिशनरीज के लिए काम कर रहा है। यदि वह मिशनरीज के पाले में नहीं है तो मीडिया उसे आप तक कभी पहुँचाने वाला नहीं।
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और इस सिलसिले में सन 1900 ईस्वी से कोई बदलाव नहीं आया है !!
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Thu Sep 10 2020 17:08:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Jury Court:
भारत का पेड मीडिया देश के भ्रष्ट लोगो को महान लोगो की तरह प्रदर्शित करता है जिस वजह से युवा पीढ़ी अक्सर गलत लोगो को मसीहा मान कर पूजा करने लगती है।
Thu Sep 10 2020 17:10:13 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Ishwar Choudhary BhilwaraRj:
ग्राम पंचायत में सुधार लाने के लिए उम्मीदवार के झुमलें, कर्मठ, सेवाभावी, मिलनसार, पंचायत को सुधार देगें यह सब टाइमपास वाक्य हैं जिससे पंचायत में कोई सुधार नहीं आने वाला है।
ऐसे कानून पास करवाने पड़ेंगे जिससे ग्राम पंचायतों की स्थिति सुधरेगी जैसे #जूरी_पंचायत #वोट_वापसी ऐसे कानूनों की सख्त जरूरत हैं जो उम्मीदवार इन कानूनों का समर्थन नहीं करता है वह पंचायत के साथ खिलवाड़ कर रहा है
ग्राम पंचायत गांगलास सरपंच उम्मीदवार शिवराज जाट को वोट एंड सपोर्ट करें
Thu Sep 10 2020 17:13:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
"अहम् अवदम - रोथ्सचाइल्डस्य रॉकफेलरस्य शुभम दिवासनाम आगमिन .
यूयम मूर्खाः अवगच्छन्ति - युष्माकं शुभम दिवासनाम आगमिन
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यूयम युष्माकं भ्राँतिहिः उत्तरदायिन्..
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अहम् नास्मि उत्तरदायिन् " कल्किपुरुष तृतीय श्री मोदी उवाच
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Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:
"अहम् अवदम - रोथ्सचाइल्डस्य रॉकफेलरस्य शुभम दिवासनाम आगमिन .
यूयम मूर्खाः अवगच्छन्ति - युष्माकं शुभम दिवासनाम आगमिन
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यूयम युष्माकं भ्राँतिहिः उत्तरदायिन्..
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aham नास्मि उत्तरदायिन् " कल्किपुरुष तृतीय श्री मोदी उवाच
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first shloka of NaMo Puran (someone needs to write a new Puran in Sanskrit language )
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Translation -
अहम् - I अवदम - had said रोथ्सचाइल्डस्य - rothschilde's रॉकफेलरस्य - rockefellar's शुभम दिवासनाम -- you know what it means ... आगमिन - will come
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यूयम you all ... अवगच्छन्ति - thought ... युष्माकं yours
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यूयम - you युष्माकं -- yours भ्राँतिहिः - bhranti , misunderstanding
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उत्तरदायिन् - responsible
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नास्मि - not me
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उवाच - said
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When I was in 12th, I had started a project --- translation of Sholay script , except songs, in Sanskrit and all Indian languages. I could never finish it though,
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But now something more important has come up
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A whole new puran named as NaMo Puran needs to be written in Sanskrit.
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Thu Sep 10 2020 17:18:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Bhavesh Bamaniya Bhopal Mp:
अगर कंगना लक्ष्मी बाई है तो ,
ह्रितिक रोशन अकबर है ,
ऐश्वर्या राय जोधाबाई है ,
आमिर ख़ान मंगल पांडेय है ,
शाहरुख़ ख़ान अशोक दी ग्रेट है ,
संजय खान टीपू सुल्तान है ,
अजय देवगन भगत सिंह है ,
परेश रावल सरदार पटेल है ,
और हीरो विवेक ओबराय मोदी है ।
😁😁😁
Mon Sep 14 2020 18:12:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
So called new world order romance
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संभावित अनिवार्य वैक्सीनेशन को कैसे रोके ?
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आने वाले कुछ महीनो में कोरोना की वैक्सीन बाजार में आ सकती है। और तब सरकार यह तय करेगी कि वैक्सीन को अनिवार्य किया जाए या नहीं। यदि सरकार ने वैक्सीनेशन को अनिवार्य कर दिया तो नागरिको के पास वैक्सीन लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। यदि सरकार इसे वैकल्पिक रखती है तो प्रत्येक नागरिक यह तय कर सकता है कि उसे वैक्सीन लेनी है या नहीं लेनी है।
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भारत में लगभग 550 जिले है। यदि किसी जिले में निचे दिया गया क़ानून लागू हो जाता है तो अमुक जिले के नागरिको के पास यह प्रक्रिया आ जायेगी कि वे यह तय कर सके कि उनके जिले में वैक्सीनेशन अनिवार्य का क़ानून लागू होगा या नहीं।
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----क़ानून ड्राफ्ट का प्रारंभ----
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(1) यह कानून जिले के मतदाता को यह अधिकार देता है कि वे अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सकेंगे।
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(1.1) यह शपथपत्र आपके द्वारा प्रस्तुत कोई शिकायत, सुझाव या आरटीआई आवेदन या प्रस्तावित कानून या अन्य कोई याचनात्मक समाधान हो सकता है।
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(1.2) आप शपथपत्र जमा करते समय 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क अदा करेंगे।
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(1.3) कलेक्टर कार्यालय प्रस्तुत शपथपत्र को चिन्हित करने के लिए एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(1.4) कलेक्टर कार्यालय आपके द्वारा दिए शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाइट पर इस तरह अपलोड करेगा कि कोई भी व्यक्ति यह शपथपत्र बिना लॉग-इन (Log in) के देख सके।
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(2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पर पटवारी कार्यालय जाकर धारा 1 के तहत प्रस्तुत शपथपत्र के नंबर का उल्लेख करते हुए अमुक शपथपत्र पर अपनी हाँ / ना दर्ज करवा सकता है।
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(2.1) कलेक्टर कार्यालय मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को मतदाता के नाम एवं मतदाता संख्या को जिला वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से दर्ज करेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को देख सके।
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(2.2) किसी शपथपत्र पर हाँ / नहीं दर्ज करने या उसे बदलने के लिए मतदाता को शुल्क देना होगा। बीपीएल कार्ड धारकों के लिए यह शुल्क 1 रू तथा अन्य नागरिको के लिए यह 3 रू होगा।
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(3) यदि जिले के 51% से अधिक मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दर्ज किये गए कार्यों की पालना के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकते है।
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(4) धारा 1 में शपथपत्र देने के लिए कलेक्टर आपसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड लाने के लिए कह सकता है, एवं आपकी फोटो और फिंगरप्रिंट भी ले सकता है। कलेक्टर आपसे शून्य से लेकर पांच गवाह तक, जो कि आपको निजी रूप से जानते हो, लाने के लिए भी कह सकता है।
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(4.1) यदि आप एक बार शपथपत्र फ़ाइल कर देते है तो फिर आप इसे हटा नहीं सकेंगे। अदालत के आदेश को छोड़कर किसी भी अधिकारी को आपका शपथपत्र हटाने की अनुमति नहीं होगी।
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(4.2) आपको सूचित किया जाता है कि - शपथपत्र में अनुचित जानकारी या मानहानि कारक, या निन्दात्मक कथन के लिए आप पर किसी भी पक्षकार द्वारा अदालत में वाद दायर किया जा सकता है, और दोष सिद्ध होने पर अदालत आपको सजा दे सकती है।
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(6) आप अपना मोबाइल नंबर मतदाता सूची का रखरखाव करने वाले क्लर्क को दर्ज करवा सकते है। यदि आप अपना मोबाईल नंबर दर्ज करवाते है तो जब भी आप कोई शपथपत्र फ़ाइल करेंगे या किसी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करेंगे तो आपको फीडबैक के लिए एक SMS प्राप्त होगा। यह SMS उसी तरह का होगा जैसा ATM आदि से नकदी निकालने पर खाताधारक को प्राप्त होता है। और यदि कोई अन्य व्यक्ति छल द्वारा आपके नाम पर शपथपत्र फ़ाइल करने का प्रयास कर रहा है या आपके नाम से हाँ / ना दर्ज करवा रहा है, तब भी आपको ऐसा SMS प्राप्त होगा।
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(8) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे आप अपनी हाँ / ना SMS या मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज करवा सके। यदि आप किसी शपथपत्र SMS या मोबाइल एप के माध्यम से हाँ / ना दर्ज करते है तो इसके लिए शुल्क का निर्धारण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।
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(9) सूचना प्रभारी सचिव को आदेश जारी किये जाते है कि वे ऐसी आवश्यक वेबसाइट आदि की रचना के निर्देश जारी करे जिससे कलेक्टर, पटवारी आदि ऊपर दी गयी धाराओं में दर्ज प्रक्रिया को लागू कर सके।
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जिला टीसीपी का पूरा ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3173094346142113>
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-----क़ानून ड्राफ्ट का समापन-----
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यदि किसी जिले के 4 विधायक इस क़ानून का समर्थन करते है तो जिला टीसीपी नामक यह क़ानून सिर्फ 30 दिनों के भीतर विधिवत रूप से अमुक जिले लागू भी हो जाएगा, और काम भी करने लगेगा।
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मुख्यमंत्री चाहे तो यह क़ानून अपने राज्य के एक से अधिक जिलो में या पूरे राज्य में लागू कर सकते है।
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प्रधानमंत्री चाहे तो यह क़ानून पूरे देश में लागू कर सकते है।
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यह क़ानून कैसे अनिवार्य वैक्सीनेशन को रोक देगा ?
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इस क़ानून की धारा (1) के तहत तब जिले का कोई भी नागरिक जिला कलेक्टर कार्यालय में यह शपथपत्र दे सकेगा कि, अमुक जिले में वैक्सीन को अनिवार्य की जगह वैकल्पिक किया जाये। फिर धारा (2) के तहत जिले के नागरिक इस शपथपत्र पर अपनी हाँ / ना दर्ज करवा सकते है।
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जैसे जैसे अनिवार्य वैक्सीनेशन का विरोध करने वाले कार्यकर्ता नागरिको को इस बारे में सूचित करेंगे वैसे वैसे इस शपथपत्र पर नागरिको की स्वीकृतियां बढती जायेगी। और जब जिले के 51% नागरिक इस पर हाँ दर्ज कर देंगे तो अमुक जिले में अनिवार्य वैक्सीनेशन का कानून रद्द हो जायेगा।
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यदि यह क़ानून पहले से किसी जिले में लागू होता तो न तो अमुक जिले में सरकार लॉकडाउन डाल पाती और न ही वहां पर मास्क अनिवार्य का कानून लागू हो पाता।
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और यह एक बड़ी वजह है कि, लॉकडाउन से ध्यान हटाने के लिए अनिवार्य वैक्सीनेशन का प्रोपेगेंडा फैलाने वाले नेता जैसे विश्वरूप चौधरी एवं डॉ तरुण कोठारी वगेरह टीसीपी क़ानून के हमेशा से खिलाफ रहे है !!
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इस कानून को लागू करवाने के लिए आप क्या कदम उठा सकते है ?
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कृपया आने वाली 5 तारीख को 5 बजे मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजे कि टीसीपी क़ानून गेजेट में छापा जाए। पोस्टकार्ड में यह लिखे - #Tcp , #DistrictTcp
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कृपया पोस्टकार्ड में अपना नाम एवं वोटर आई डी नंबर अवश्य लिखे, और पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी करवाकर “My Letters to Pm” नाम से बनाए गए रजिस्टर में रखें.
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कृपया ध्यान दें –
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(1) डॉ तरुण जी कोठारी अपने समर्थको से कह रहे है कि, नागरिको को लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने के लिए पीएम को पोस्टकार्ड तो भेजना चाहिए किन्तु पोस्टकार्ड में अपना वोटर आई डी नंबर नहीं लिखना चाहिए। और डॉ कोठारी अपने समर्थको से यह भी कह रहे है कि, नागरिको को रिकॉर्ड के लिए पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी भी अपने पास नहीं रखनी चाहिए !!
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(2) जहाँ तक विश्वरूप जी चौधरी की बात है, उन्होंने साफ़ कर दिया है कि, वे लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने का पोस्टकार्ड पीएम को भेजने वाले नहीं है !!
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Tue Sep 15 2020 21:16:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सच्ची कॉन्सपरेसी (जूरी / हथियार) Vs फर्जी कॉन्सपरेसी थ्योरी
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फर्जी कॉन्सपरेसी थ्योरी की जरूरत इसीलिए होती है, ताकि सूचित कार्यकर्ताओ को सच्ची कॉन्सपरेसी तक पहुँचने से रोका जा सके !!
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक हथियारों के कारण सफल रहे हैं, और उन्होंने पेड इतिहासकारों को भुगतान किया ताकि वे हथियारों / जूरी की भूमिका को छिपाए तथा कार्यकर्ताओ को फर्जी कोंस्पेरेसी थ्योरी में उलझाकर रखने के लिए डेविड आइक / ग्रेट गेम इण्डिया / मोहन गांधी / विश्वरूप रॉय चौधरी जैसे टाइम वेस्टर्स को बढ़ावा दे !!!
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अध्यायों की सूची :
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(1) 300 साल पुराना और आज भी निरंतर रूप से जारी सही षड्यंत्र है --- उन्नत हथियारो पर नियंत्रण रखने वाला वर्ग शासन करेगा !! कोई नियम नहीं, कोई अपवाद नहीं !! नैतिकता मायने रखती है, लेकिन सिर्फ तब जब अगर नैतिकता में मानने वाले लोग हथियारों की इंजीनियरिंग के निर्णायक प्रभाव को स्वीकार करते है, और बेहतर हथियारों के निर्माण के लिए आवश्यक इंजीनियरिंग जुटाने के लिए काम करते है।
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(2) पेड इतिहासकारों को भुगतान किया गया कि वे इतिहास की पुस्तकों में "हथियारों की निर्णायक भूमिका का उल्लेख न करें !!!
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(3) डेविड आइक और ग्रेटगेमइंडिया जैसे बदमाशों को उभारा गया ताकि वे यू ट्यूब / फेसबुक आदि का इस्तेमाल करके कार्यकर्ताओ का ध्यान "हथियारों द्वारा नियंत्रण" वास्तविकता से हटाएं और फर्जी कोंस्पिरेसी थ्योरी में उन्हें उलझा दें !!
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(4) कार्यकर्ताओं का समय बर्बाद करने के लिए फर्जी समाधान लाये गए - जैसे नमक सत्याग्रह, विश्वरूप चौधरी द्वारा मास्क जलाओ अभियान, कंगना रनौत की नौटंकी, इत्यादि।
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विवरण :
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(1) 300 साल पुराना और आज भी निरंतर रूप से जारी सही षड्यंत्र है ---
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(1.01) अमेरिका और ब्रिटेन के हथियार निर्माताओ ( रॉकेफेलर रोथाचिल्ड इत्यादि ) के पास ज्यादा उन्नत एवं खतरनाक हथियार थे, और इस वजह से उन्होंने नॉर्थ अमेरिका, साउथ अमेरिका, अफ्रीका, एशिया इत्यादि क्षेत्रो के राजाओं को पराजित किया। और वे उन्नत हथियार इसीलिए बना पाए क्योंकि जूरी मंडल जज+पुलिस+नेता माफिया से अमेरिका-ब्रिटेन के कारखाना मालिको की रक्षा कर रहा था !!
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(1.02) इन हथियारों के बल पर अमेरिकी–ब्रिटिश धनिकों ने पूरी दुनिया की खनिज संपदाएँ एवं धन लूटा।
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(1.03) लुटे गए इस धन के बल पर उन्होंने अमेरिका ब्रिटेन और यूरोप की मीडिया पर नियंत्रण प्राप्त किया और मीडिया के द्वारा उन्होंने राजनेताओ एवं राजनीती को कब्ज़े में लिया।
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(1.04) जब ये धन लूट कर वे अपने देश में ले गए, तो इस धन से उनके देशो में समृद्धि आई। इस तरह अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने अमेरिका-ब्रिटेन के लोगो को नहीं लूटा। वास्तव में, उन्होंने अपने देश के लोगों को अमीर बनाया। लूट केवल लैटिन अमेरिका + एशिया + अफ्रीकी आदि देशो में की गई थी।
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(1.05) बैंक, मीडिया, न्याय व्यवस्था और अनुत्पादक शिक्षा प्रणाली, विभिन्न व्यापार समझौते एवं संधियाँ आदि लूट के साधन थे, और लॉकडाउन भी लूटने का इसी तरह का एक साधन है !! लेकिन इसमें से किसी भी साधन द्वारा किसी को तब तक लूटा नहीं जा सकता, जब तक आपके पास बेहतर हथियार न हो !! उन्हें लूटने की यह ताकत सिर्फ हथियारों से ही मिलती है।
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उदाहरण के लिए, भारत में लॉकडाउन प्रधानमन्त्री और 30 मुख्यमंत्रियो द्वारा लागू किया गया था, देवताओं द्वारा नहीं !! और भारत के नेताओं ने अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माताओ के आदेशों का पालन इसीलिए किया अनुसार क्योंकि उनके पास उन्नत हथियार है। और उन्होंने किल स्विच वाले हथियार (राफेल, जगुआर, मिराज आदि) भारत की सेना में इंस्टाल किये है।
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यहाँ कोई मायाजाल नहीं है !! असली वजह सिर्फ उन्नत हथियार है !!
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(2) और फिर हथियारों द्वारा नियंत्रण की इस वास्तविकता को छिपाने के लिए इतिहासकारों को भुगतान किया गया !!
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और पेड इतिहासकारों द्वारा यह जानकारी भी छिपाई गयी कि जूरी सिस्टम / वोट वापसी / जनमत संग्रह प्रक्रियाओ की वजह से अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियां ताकतवर हथियार बना पा रही थी !!!
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उदाहरण के लिए 1730 में, रोथ्स्चाइल्ड ने जो कारखाना शुरू किया था उसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तोपें बनाईं जा रही थी। और उन तोपों का इस्तेमाल करके रॉबर्ट क्लाइव ने 1757 में प्लासी का युद्ध जीता।
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और 1830 में, बर्मिंघम में रोथ्सचाइल्ड ने जो कारखाने शुरू किये उन कारखानों में दुनिया की सबसे उन्नत राइफलें बनाईं गयी। और इन्ही राइफलो का इस्तेमाल करते हुए ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत में 1857 की क्रांति को असफल किया !!
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इसी तरह, सिकंदर इसीलिए जीतता गया क्योंकि उसके पास बेहतर हथियार थे। और चक्रवर्ती सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य ने कई दौर की लड़ाइयाँ जीती क्योंकि उन्हें पुर्तगालियों से बेहतर तोपें मिली थी। और छत्रपति महाराज शिवाजी को भी पुर्तगाली तोपों से काफी लाभ मिला, क्योंकि इन तोपों ने सुल्तान की तथाकथित 'धावा तकनीक" (बड़ी सेना के इस्तेमाल करके हमला करना) को बेकार कर दिया था !!!
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और जब मैंने ईस्ट इण्डिया कम्पनी एवं ब्रिटिश राज पर 1600 ईस्वी से 1947 ई. तक लिखी गयी हजारों पुस्तकों को खंगाला तो मुझे हथियारों एवं इनकी भूमिका के बारे में एक लफ्ज भी लिखा हुआ नहीं मिला !!
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साफ़ है, कि पेड इतिहास कारो को ये विवरण छिपाए रखने के लिए काफी कठोर निर्देश दिए गए थे।
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(3) और फिर भावुक कार्यकर्ताओ को बुत्ता देने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने उन्हें कुछ फर्जी लेकिन रोमांटिक कॉन्सपरेसी थ्योरी की और धकेला, ताकि कार्यकर्ताओ का ध्यान असली तथ्यों से हटाया जा सके।
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और इस काम को डेविड आइक, ग्रेट गेम इंडिया आदि द्वारा सफलतापूर्वक किया गया !! इन लोगो ने फर्जी / हवाई / रोमांटिक साजिश सिद्धांत बनाए और कार्यकर्ताओ को इस बकवास की जुगाली करने के धंधे में लगा दिया !! कुछ इसी तरह के गढ़े गए फर्जी षड्यंत्र निचे दिए गए है :
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(3.01) डीपापुलेशन --- बिल गेट्स और डेविड आइक ने यह सुनिश्चित किया कि भारत के कार्यकर्ता डीपापुलेशन के फर्जी षड्यंत्र पर शोध करके अपना और अन्य नागरिको का समय एवं ऊर्जा जाया करते रहें, ताकि लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने का आन्दोलन आगे न बढ़ सके !! और वे भारत के ज्यादातर सयाने कार्यकर्ताओ को अपने ट्रेप में फंसाने में सफल रहे !!
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(3.02) इलुमिनाटी --- यह हवाई थ्योरी इसलिए बनाई गई ताकि कार्यकर्ता यह सोचें कि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के पास कोई परग्रही रहस्यमयी शक्ति है, और इस वजह से ही वे इतने ताकतवर है, न कि हथियारों की वजह से !!
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(3.03) वैक्सीन --- कोरोना वायरस वैक्सीन के कारण अब तक कितने लोग मरे ? जीरो , शून्य !! अब तक की सारी वैक्सिनो से कितने लोग मरे हैं ? कुछ हजार !! लॉकडाउन से कितने लोग मरे हैं ? 10 से 100 गुना अधिक !! और कितने लोग हमेशा के लिए अपना रोजगार खो चुके है ? लॉकडाउन ने कितने कारखानों को तबाह कर दिया है ? कोई अंदाजा है आपको ?
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दरअसल, लॉकडाउन ने लोगों के स्वास्थ्य पर जितना दुष्प्रभाव डाला है वह कथित संभावित वैक्सीन से 1000 गुना ज्यादा है !! वैक्सीन की नौटंकी इसीलिए गढ़ी गयी ताकि कार्यकर्ताओ को इस हवाई थ्यारी में एंगेज किया जा सके।
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यदि कार्यकर्ताओ को यह चिंगम नहीं पकड़ाई जाती तो वे यह जान जाते कि लॉकडाउन देश को तबाह कर रहा है, और तब वे पीएम / सीएम पर लॉकडाउन ख़त्म करने का दबाव बनाते !! और विश्वरूप चौधरी जैसे लोगो ने उनका यह काम आसान किया !! इस आदमी ने लाखो लोगो को कोरोना असली / कोरोना फर्जी की बहस में खींच लिया ताकि कार्यकर्ता लॉकडाउन विरोधी आन्दोलन खड़ा करने पर ध्यान न दे सके !!
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(3.04) माइंड कंट्रोल -- सबसे बड़ी बकवास : एलन मस्क ने जो चिप बनाई है वह मात्र नाड़ियों के विद्युत करंट को मापती है। अभी विज्ञान को ऐसी चिप बनाने में 100 से 200 साल लगने वाले है जिसे मनुष्य के दिमाग में रखा जा सके और उससे मनुष्य का दिमाग भी कंट्रोल किया जा सके !! दरअसल, यह फर्जी कॉन्सपरेसी थ्योरी कम और किसी ऐसी विज्ञान फंतासी फिल्म की स्क्रिप्ट ज्यादा है, जिसे कोई प्रोड्यूसर नहीं मिल रहा है।
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(3.05) 5g : क्या आप बता सकते है कि, 5g से अब तक कितने लोग मर चुके है ? जीरो !! अपने घर के बाहर निकलकर 2-4 आदमियों से पूछिए कि उन्हें 5g ने मारा है या लॉकडाउन ने ?
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(3.06) बैंको का मायाजाल, संधियों, समझौतों का मायाजाल, न्यायिक मायाजाल, सैद्धांतिक मायाजाल --- आपने बहुत से लोगों को कहते सुना होगा कि अंग्रेजों ने राजाओं के साथ संधियों का उपयोग करते हुए भारत पर अधिकार कर लिया था।
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या इसी तरह के दर्जन भर सिद्धांतों (जैसे उत्तराधिकार की चूक का सिद्धांत आदि) का इस्तेमाल करके या अनुबंधों का उपयोग करके या न्यायालयों का उपयोग करके अंग्रेजो ने साम्राज्यों को हड़प लिया था !!
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अच्छा, अगर ऐसा है तो, सद्दाम हुसैन और गद्दाफी के पास अपने खुद के बैंक थे। और हिटलर के पास भी बैंक था। लेकिन वास्तविकता यह है कि बैंक चलाने की ताकत हथियारों से आती है। सद्दाम और गद्दाफी के पास हथियार नहीं थे, और इसीलिए अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने उनका चमड़ा उधेड़ दिया था !! सार यह है कि, ये सभी मायाजाल नकली है, और सिर्फ हथियारों से ध्यान हटाने के लिए बनाए गए है !!
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(3.07) न्यू वर्ल्ड ऑर्डर (NWO) --- जिसके पास बेहतर हथियार हैं वह कमतर हथियारों वाले व्यक्ति पर हावी हो जायेगा। मेरे विचार में, यह 20,000 साल से दुनिया को चलाने की एकमात्र व्यवस्था। यह सिद्धांत सड़को से लेकर जंगलो तक और सभी व्यवस्थाओ में लागू है, और निरंतर काम कर रहा है !!! इसमें कुछ भी नया नहीं है, यदि आपके हाथ में लाठी है, तो भैंस आप ही लेकर जायेंगे !!
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तो NWO की बकवास इसीलिए रची गयी ताकि कार्यकर्ताओं का ध्यान "हथियारो द्वारा नियंत्रण" और बेहतर हथियार बनाने के कारकों (जैसे जूरी कोर्ट, वोट वापसी, रिक्त भूमि कर, धनवापसी पासबुक आदि) से हटाया जा सके।
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(3.08) एजेंडा 2020 --- यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया कि कार्यकर्ता अपना समय यू ट्यूब पर इन बकवास वीडियो को देखने में बिताए और लॉकडाउन विरोधी जनआन्दोलन को आगे बढ़ाने पर ध्यान न दें !!
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(4) फर्जी समाधान को बढ़ावा देना
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(4.01) जब अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह का पूर्ण स्वराज्य अभियान गति पकड़ रहा था, और महात्मा भगत सिंह युवाओं को बंदूक और बम बनाना सीखने की जानकारी देने की कोशिश कर रहे थे, तब इस आन्दोलन को पटरी से उतारने के लिए, मोहन गाँधी ने कहा कि पहले "नमक कर का विरोध करना ज्यादा जरुरी है" !!!
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(4.02) उसी तरह, लॉकडाउन को समाप्त करने के लिए जब पीएम और 30 सीएम को मजबूर करने के लिए काम करने की जरूरत थी, तब बिश्वरूप रॉय चौधरी (छोटा गाँधी) आदि ने नागरिको से कहा कि -- अरे, जरा रुको !! पहले मास्क जलाना और वैक्सीन का विरोध जरुरी है !! (कौनसी वैक्सीन -- जो तब तक थी ही नहीं !!)
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लॉकडाउन की वजह से कितने लोगों की मौत हुई और कितने लोगो की मौत मास्क या कोरोना वैक्सीन के कारण हुयी है ? और लॉकडाउन के कारण कितने लोगो को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है और, मास्क- वैक्सीन के कारण अब तक देश के लोगो को कुल कितनी आर्थिक क्षति हुयी है ? अनुपात 1000: 1 है !! तो मास्क और वैक्सीन का विरोध करने में इतने संसाधन क्यों फूंके गए ? ताकि लॉकडाउन हटाओ के आन्दोलन को पटरी से उतारा जा सके !!!
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सार :
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(a) वास्तविक षड्यंत्र यह है कि 1760 से लेकर 1800 के बीच में अंग्रेजों ने हथियारों का इस्तेमाल करके भारत की फैक्ट्रियां बंद करवाई (अकेले बंगाल में हजारो कपड़ा कारखाने बंद कर दिए गए थे) और भारत के कारोबार पर कब्ज़ा कर लिया !!
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(b) और पेड इतिहासकारों. पेड मीडिया कर्मियों को "हथियारों द्वारा नियंत्रण" के इन तथ्यों को छिपाने के लिए भुगतान किया गया।
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(c) और अब उसी प्रकार अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने हथियारों का इस्तेमाल करके लॉकडाउन डाला ताकि भारत की फैक्ट्रियों को बंद किया जा सके !!
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(d) और कार्यकर्ताओ का ध्यान लॉकडाउन विरोधी आन्दोलन से हटाने के लिए उन्होंने यू ट्यूब / फेसबुक के माध्यम से विश्वरूप चौधरी (छोटे गाँधी) जैसे लोगो को आगे बढ़ाया ताकि वे कार्यकर्ताओ को कॉन्सपरेसी थ्योरीयों की जुगाली करने में उलझा सके !! .
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Wed Sep 16 2020 15:48:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
स्वामी विवेकानंद जी ने गौ मांस भक्षण के पक्ष में दलीलें तब देनी शुरू की थी, जब पूरे देश में गाय बचाओ आन्दोलन चल रहा था। सत्तावन की क्रांति के बाद 1870 ई. में शुरू हुआ यह देश व्यापी आन्दोलन 1895 ई. तक चला !! इस दौरान देश भर में हुए दंगो में हजारो जानें गयी थी।
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(1) 1888 में ब्रिटिश हाई कोर्ट ने IPC की धारा 295 के तहत सुनाए गए फैसले में पहली बार यह कहा था कि – गाय धार्मिक रूप से पवित्र पशु नहीं है !! (धारा 295 धार्मिक भावनाएं आहत करने के बारे में है)
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मुझे नहीं पता कि स्वामी विवेकानंद ने गौ मांस भक्षण के समर्थन में दलील देना पहले ही शुरू कर दिया था, और इसके बाद ब्रिटिश राज ने यह फैसला दिया कि गाय हिन्दू धर्म में पवित्र पशु नहीं है, या फिर विवेकानंद जी को यह ज्ञान ब्रिटिश जज द्वारा दिए गए फैसले के बाद हुआ !!
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पिछले 10,000 साल में भारत की धरती पर ऐसा कोई भी संत नहीं हुआ है, जिसे इतना ऊँचा ज्ञान था !! इस श्रेणी में विवेकानंद जी एक मात्र संत है !!
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(2) अपने अमेरिका प्रवास के दौरान स्वामी विवेकानंद जी से रोकेफेलर फैमिली का फाउंडर जॉन डेविस रोकेफेलर 2 बार मिला था !! मुझे नहीं पता कि, स्वामी जी को “गौ मांस भक्षण वैदिक संस्कृति का अंग रहा है” का यह ज्ञान पहले ही हो गया था और इसीलिए रोकेफेलर उनसे मिला, या यह ज्ञान स्वामी जी को रोकेफेलर से मिलने के बाद प्राप्त हुआ !!
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विवेकानंद साहित्य में बताया गया है - स्वामी जी का रोकेफेलर पर काफी प्रभाव पड़ा और रोकेफेलर ने स्वामी जी से मिलने के बाद धार्मिक संस्थाओ को दान देना शुरू कर दिया था !!
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दरअसल, रोकेफेलर 15 वर्ष की आयु से ही चर्च को दान दे रहा था. रोकेफेलर की लेजर की एंट्रियाँ बताती है कि वह जो भी कमाता था उसमें से 6% हिस्सा चर्च को दे देता था. 20 वर्ष की आयु तक आते आते उसने दान का हिस्सा 10% कर दिया था. और फिर आगे जैसे जैसे उसकी कमाई बढती गयी, वह चर्च को दिए जाने वाले हिस्से में इजाफा करता गया !!
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(3) स्वामी विवेकानंद जी के बारे में कुछ और तथ्य जिनसे ज्यादातर नागरिक सूचित नहीं है :
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(3.1) स्वामी जी अपने प्रवास के दौरान 2 पुस्तकें साथ रखते थे – गीता, और इमिटेशन ऑफ़ क्राइस्ट !! उनका मानना था कि व्यक्ति को ये दोनों किताबें पढ़नी चाहिए !! इस तरह वे वैदिक धर्म के साथ साथ बाइबिल का भी प्रचार करते थे !! उन्होंने इमिटेशन ऑफ़ क्राइस्ट का अनुवाद भी किया था और इसे महान खजाना बताया था !! उन्ही के शब्दों में :
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“The Imitation of Christ is a cherished treasure of the Christian world. This great book was written by a Roman Catholic monk. “Written”, perhaps, is not the proper word. It would be more appropriate to say that each letter of the book is marked deep with the heart’s blood of the great soul who had renounced all for his love of Christ.”
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<http://vivekavani.com/swami-vivekananda-quotes-jesus-christ/>
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(3.2) 2015 में जब मोदी साहेब रामकृष्ण मिशन के वेलुर मठ गए थे तो उन्हें बाइबिल भी भेंट की गयी थी !!
<https://timesofindia.indiatimes.com/india/Modi-visits-Dakshineswar-temple-Belur-Math/articleshow/47221252.cms>
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(3.3) 2016 में रामकृष्ण मिशन द्वारा क्रिसमस सेलिब्रेशन के यह फोटो देखिये - <https://media.belurmath.org/christmas-eve-2016-photos-926/>
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(4) स्वामी विवेकानंद जी को ब्रिटिश राज से आज तक पेड मीडिया द्वारा सबसे अधिक सकारात्मक कवरेज दिया जाता रहा है !! और गौ मांस भक्षण का समर्थन करना एक बड़ी वजह है कि, स्वामी विवेकानंद आरएसएस के नेताओं एवं कार्यकर्ताओ में काफी लोकप्रिय है !!
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आरएसएस के पदाधिकारी एवं चिंतक स्वामी विवेकानंद के बारे में ये महत्त्वपूर्ण बात कभी नहीं बताते थे !! वे स्वामी जी के जीवन के सभी महान प्रसंगो के बारे में जिक्र करते है, किन्तु इस प्रसंग को हमेशा छिपा लेते है। इस तरह की चयनात्मक सूचनाएं देना ठीक नीति नहीं है। महान लोगो के बारे में सभी महान बातें बताई जानी चाहिए।
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(5) स्वामी विवेकानंद जी के गौ मांस के बारे में ये वक्तव्य आपको उनकी अधिकृत बायोग्राफी में मिल जायेंगे
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There was a time in this very India when, without eating beef, no Brahmin could remain a Brahmin; you read in the Vedas how, when a Sannyasin, a king, or a great man came into a house, the best bullock was killed; how in time it was found that as we were an agricultural race, killing the best bulls meant annihilation of the race. Therefore the practice was stopped, and a voice was raised against the killing of cows."
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Source : The Complete Works of Swami Vivekananda/Volume 3/Lectures from Colombo
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<http://aryamantavya.in/swami-vivekanand-meat-eating/?fbclid=IwAR00mDVCeMFQfAs22LykpUT1S8OEaitaIuH1Mo4libSmAajxTPNj4pvvGrg>
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स्पष्टीकरण : यहाँ स्वामी विवेकानंद जी के संतत्व की आलोचना करना मेरा हेतु नहीं है। किन्तु चूंकि पेड मीडिया एवं आरएसएस के कार्यकर्ताओ द्वारा इस जानकारी को निरंतर छिपाया गया है, इसीलिए यह सूचना दी गयी है। और यह सूचना इसीलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले समय में पेड मीडिया के प्रायोजक (मिशनरीज) भारत के युवाओं को गौ मांस खाने की प्रेरणा देने के लिए उन चरित्रों का उभारने वाले है, जिन्होंने गौ मांस भक्षण के समर्थन में दलीलें दी है !!
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स्वामी विवेकानन्द पर एक पुराना पोस्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1387224581395774>
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Fri Sep 18 2020 11:39:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
(A) स्वामी विवेकानंद जी की अधिकृत बायोग्राफी के अनुसार -- स्वामी विवेकानंद जी ने गौ-मांस भक्षण को वैदिक संस्कृति अभिन्न अंग बताया था और इस तरह गौ मांस सेवन का समर्थन किया था !!
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मैं वेदों का मर्मग्य नहीं हूँ। किन्तु जो वेद मैंने पढ़े है उनमें इस तरह के कोई प्रमाण नहीं मिलते। मुझे अपने जीवनकाल में भी ऐसा कोई संत / महात्मा नहीं मिला जिसने कहा हो कि, गौ मांस सेवन वैदिक संस्कृति का अंग था।
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मैं गौ मांस को लेकर दिए गए विवेकानंद जी के इन वक्तव्यों से असहमत हूँ और विवेकानंद जी के इन वक्तव्यों की निंदा करता हूँ।
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(B) जब भी मैं RSS के कार्यकर्ताओं से पूछता हूँ कि, क्या आप विवेकानंद जी के इन वक्तव्यों का समर्थन करते है ?, तो RSS के कार्यकर्ता निम्नलिखित तरीके से पेश आते है :
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(01) RSS कार्यकर्ता : देखिये, कौन आदमी क्या खाता है, और क्या नहीं खाता है, यह अलग बात है।
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मैं : कौन आदमी घर में बैठकर क्या खाता / नहीं खाता है, यह एक अलग बात है, किन्तु कोई व्यक्ति "सार्वजनिक" रूप से समाज को क्या खाने का सन्देश देता है, यह बिलकुल ही अलग बात है। आप इस वक्तव्य का बचाव करने के लिए इन दो अलग चीजो को आपस में मिक्स कर रहे है।
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मेरा प्रश्न है कि क्या आप विवेकानंद के गौ मांस सेवन का समर्थन करने वाले इन वक्तव्यों का समर्थन करते है या नहीं !!
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(02) RSS कार्यकर्ता : क्या आप जानते है विवेकानंद जी कितने महान संत थे !! आप उनके महान कार्यो को देखिये, उनमें कमी मत निकालिए
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मैं : विवेकानंद जी महान थे या नहीं थे यह अलग विषय है। मैंने उनकी महानता पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मैंने इतना कहा है कि, मैं विवेकानंद जी के इस वक्तव्य से असहमत हूँ कि - गौ मांस भक्षण वैदिक संस्कृति का अंग था।
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और मैं अपनी असहमति सार्वजानिक रूप से प्रकट कर रहा हूँ।
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आपका इस वक्तव्य पर क्या रूख है ? क्या आप विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का समर्थन करते है ?
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(03) RSS कार्यकर्ता : विवेकानंद जी बंगाली थे, और शायद आपको नहीं पता कि बंगाली संस्कृति में मांस-मछली आदि का सेवन किया जाता रहा है !!
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मैं : आप फिर से इस वक्तव्य का बचाव करने के लिए मांस एवं गौ मांस को मिक्स कर रहे है !! मैं यहाँ पर मांस की बात नहीं कर रहा हूँ, बल्कि गौ मांस की बात कर रहा हूँ। विवेकानंद जी ने गौ मांस भक्षण को वैदिक संस्कृति से जोड़ कर गौ मांस को प्रमोट किया था। और उन्होंने यह तब किया था, जब पूरे देश में गौ हत्या रोको आन्दोलन चल रहा था !!
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तो यहाँ पर यह मुद्दा नहीं है कि विवेकानंद जी मांस खाते थे या नहीं खाते थे, बल्कि मुद्दा यह है कि उन्होंने गौ मांस को वैदिक संस्कृति से जोड़ कर दिखाया !!
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क्या आप मानते है कि, गौ मांस भक्षण वैदिक संस्कृति का अंग था ? क्या आप विवेकानन्द जी के इस वक्तव्य का समर्थन करते है ?
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(04) RSS कार्यकर्ता : आप हिन्दू धर्म को बदनाम करने का षड्यंत्र कर रहे हो !!
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मैं : अब आप इस वक्तव्य का बचाव करने के लिए विवेकानंद जी को हिन्दू धर्म का पर्याय ठहरा रहे हो। हिन्दू धर्म में गाय को पवित्र माना गया है और गौ मांस सेवन त्याज्य है। किन्तु विवेकानंद जी ने कहा कि, वैदिक काल में गौ मांस भक्षण की परम्परा थी !!
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उन्होंने यह भी कहा कि, - वैदिक काल में ऐसा कोई ब्राहमण न हो सकता था जो गौ मांस न खाता हो !!
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विवेकानंद जी का यह वक्तव्य हिन्दू धर्म के खिलाफ है, और चूंकि मैं एक हिन्दू हूँ अत: मैं विवेकानंद जी के इस वक्तव्य की निंदा करता हूँ !! क्या आप विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का समर्थन करते है ?
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(05) RSS कार्यकर्ता : विवेकानंद जी अंतराष्ट्रीय संत थे। तुम्हारे जैसे टुच्चे लोगो की हैसियत नहीं है कि, उनकी बातों को समझ सके !!
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मैं : कुल मिलाकर, आप विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का विरोध नहीं करेंगे कि, गौ मांस भक्षण वैदिक संस्कृति का अंग था !! कृपया मुझे बताइये कि , आपको विवेकानंद जी के इस वक्तव्य से असहमत होने में क्या आपत्ति है !!
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(06) RSS कार्यकर्ता : मुझे आपकी नियत पर शक है !! आप हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए ये कहानियाँ गढ़ रहे है !!
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मैं : दरअसल, मैं RSS=BJP से 15 वर्ष तक जुड़ा रहा हूँ। मैंने RSS द्वारा विवेकानंद जी पर आयोजित कई गोष्ठियों को सुना है, और विवेकानंद जी के चित्र पर कई बार फूल, मालाएं चढ़ाई है !! RSS के पदाधिकारियों ने विवेकानंद जी के बारे में यह महत्त्वपूर्ण बात मुझसे वर्षो तक छिपाए रखी, और इस सूचना को छिपा लेने के कारण मैं इस गफलत में रहा कि स्वामी विवेकानंद गौ हत्या के खिलाफ थे !!
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तो मैं यह सूचना नागरिको को इसीलिए देता हूँ, क्योंकि पेड मीडिया एवं आरएसएस के नेता यह सूचना नागरिको से छिपा रहे है !! कोई व्यक्ति स्वामी विवेकानंद जी का पसंद करे या नापसंद करे, इससे मुझे कोई सरोकार नहीं है। किन्तु मेरा मानना है कि नागरिको को यह सूचना दी जानी चाहिए कि विवेकानंद जी के गौ रक्षा के बारे में क्या विचार थे। और फिर व्यक्ति तय कर सकता है की, उसे विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का समर्थन करना है या नहीं।
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(07) RSS कार्यकर्ता : यह सरासर गलत आरोप है कि, स्वामी विवेकानन्द जी ने गौ हत्या समर्थन किया था। उन्होंने कभी भी गौ हत्या का समर्थन नहीं किया !!
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मैं : यदि कोई व्यक्ति गौ मांस सेवन का सार्वजनिक रूप से समर्थन करेगा तो नतीजे में गौ मांस खाने वालो संख्या बढ़ेगी और इस वजह से ज्यादा गौ कशी होगी। गाय का मांस सस्ता है, और मांस होने के कारण यह पोषक भी है। किन्तु तब भी हिन्दू गाय इसीलिए नहीं खाते है क्योंकि हिन्दू धर्म में गाय को पवित्र एवं पूजनीय माना गया है। ट्रेक्टर, रासायनिक खाद आदि के आने बाद सिर्फ धार्मिक वजह के कारण ही गौ वंश की रक्षा हो रही है।
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यदि कोई हिन्दू संत आकर हिन्दुओ को कहता है कि हिन्दू धर्म में गाय खाना निषिद्ध नहीं है तो गौ मांस न खाने की वजह ख़त्म हो जायेगी और बड़े पैमाने पर हिन्दू युवा गाय खाने लगेंगे !! और इस वजह से गौ हत्या में विस्फोटक वृद्धि होगी !! तो जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से गौ मांस सेवन का समर्थन करता है तो इसका एक अनिवार्य असर यह है कि गौ हत्या में वृद्धि होगी।
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इस तरह, गौ मांस भक्षण को प्रमोट करना और गौ हत्या को प्रमोट करना एक ही सिक्के के दो पहलू है।
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(08) RSS कार्यकर्ता : तुम कुछ भी बकवास करते रहो, विवेकानंद बहुत महान संत थे और महान रहेंगे !!
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मैं : मूल विषय से ध्यान हटाने के लिए आपने फिर से बात “महानता” वाले खांचे में डाल दी है। मैं यहाँ विवेकानंद की महानता को चुनौती नहीं दे रहा हूँ। आप विवेकानंद को महान बताइये, उससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है, मेरा बिंदु सिर्फ यह है कि – क्या आप विवेकानंद जी के गौ मांस सेवन के वक्तव्यों का समर्थन करते है या नहीं !! बस मुझे इस पर अपना स्टेंड बताइये !!
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(09) RSS कार्यकर्ता : अभी आपको हिन्दू धर्म एवं वैदिक धर्म में अंतर समझने की जरूरत है !! पहले हिन्दू धर्म का असली मतलब समझिये फिर बात करेंगे !!
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मैं : मुझे फ़िलहाल सिर्फ इतना समझना है कि, क्या आप विवेकानंद जी के गौ मांस सेवन के वक्तव्य का समर्थन करते है या विरोध !! बस अभी इतना ही बताइये !!
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(10) RSS कार्यकर्ता : अभी आपने आरएसएस और विवेकानंद जी को समझा नहीं है !! यदि आपको आरएसएस को समझना है तो शाखा में आइये !! जब आप शाखा में आने लगेंगे तो सब अपने आप समझ आ जाएगा !!
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जय हो !!
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(C) आप देखेंगे कि आरएसएस के अलावा किसी भी हिन्दू को आप विवेकानंद जी के बारे में यह सूचना देंगे तो वे इस वक्तव्य का बचाव करने के लिए आप पर उल्टा हमला नहीं करेंगे, और न ह आपको गालियाँ देंगे । बल्कि वे इस आशय का प्रश्न करते है कि, क्या सच में विवेकानंद जी ऐसा कहा था, और यदि कहा था तो हिन्दू धर्म के खिलाफ ऐसा बयान देने के पीछे वजह क्या थी, आदि आदि !!
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दुसरे शब्दों में, एक गैर आरएसएस हिन्दू कार्यकर्ता इसके पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश करता है और जब उसे मालूम होता है कि, विवेकानंद ने ऐसा कई अवसरों पर एलानिया कहा था तो वह विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का विरोध करता है !! वह गौ मांस सेवन का बचाव करने के लिए विवेकानंद का बचाव नहीं करता बल्कि विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का विरोध करता है !!
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किन्तु आरएसएस के कार्यकर्ता हमेशा कोई न कोई तर्क देकर विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का बचाव करते है, और यह साबित करने की कोशिश करते है कि तुम्हे विवेकानंद जी की समझ पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है !! यदि उन्होंने कहा है कि गौ मांस खाना वैदिक संस्कृति का हिस्सा रहा है, तो या तो इसे मान लो, या फिर इस मुद्दे पर चुप रहो !! यदि तुम इस विषय को उठाओगे तो हम तुम्हे ट्रोल करेंगे और गालियाँ देंगे !!
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तो यह एक बड़ा फर्क है, हिन्दू और राजनैतिक हिन्दू में !! आरएसएस का कार्यकर्ता कभी भी एक हिन्दू नहीं होता, वह हमेशा एक राजनैतिक हिन्दू होता है !!
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जहाँ तक मैं देखता हूँ, आरएसएस कार्यकर्ताओ द्वारा विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का समर्थन करने की निम्न वजहें है :
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(C1) मोदी साहेब विवेकानंद जी के घोर प्रशंषक रहे है, और मोदी साहेब ने भी अपने जीवन में कभी भी विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का विरोध नहीं किया है !! आरएसएस के कार्यकर्ता मोदी साहेब के खिलाफ नहीं जा सकते अत: यह एक बड़ी वजह है कि आरएसएस के कार्यकर्ता विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का बचाव करते है !!
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(C2) विवेकानंद जी का हमेशा से आरएसएस में काफी क्रेज रहा है। आरएसएस के कार्यालयों में आपको इनके काफी चित्र वगेरह मिलेंगे। आरएसएस के कार्यकर्ता अब इस तथ्य को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहते कि वे एक ऐसे संत को प्रचार करते आये है जिसने गौ मांस सेवन का समर्थन किया था !!
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(C3) आरएसएस में अनुशासन का काफी महत्त्व है, और संगठन द्वारा दी गयी लाइन से आगे जाकर कोई राय बनाने को काफी हिकारत की दृष्टी से देखा जाता है। आरएसएस के शीर्ष नेताओं एवं पदाधिकारियो की लाइन है कि विवेकानंद जी सबसे महान संत थे, अत: आरएसएस के कार्यकर्ता इस लाइन के खिलाफ जाने से कतराते है !!
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(C4) आरएसएस में लगातार ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ रही है, जो खुले आम गौ मांस भक्षण का समर्थन करते है। अत: आरएसएस के ग्रास रूट वर्कर्स इस बिंदु पर खामोश रहने के लिए बाध्य है।
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विवेकानंद जी पर एक पोस्ट यह भी देखें –
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3234785646639649>
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Sat Sep 19 2020 05:18:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Sat Sep 19 2020 12:02:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Sat Sep 19 2020 19:26:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Sun Sep 20 2020 19:17:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Wed Sep 23 2020 11:47:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कृषि बिल :
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(1) कांट्रेक्ट फार्मिंग के विवादों का निपटान करने का अधिकार मजिस्ट्रेट को दिया गया है। मजिस्ट्रेट उस आदमी के पक्ष में फैसला सुनाएगा जो उसे ज्यादा घूस देगा। बड़े व्यापारी के पास ज्यादा पैसा होता है, अत: वे छोटे किसानो के खिलाफ फैसले निकलवा लेंगे।
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असल में, सरकार ऐसा कोई क़ानून नहीं बना सकती जो किसी भी पक्षकार को अदालत जाने से रोकता हो। इस तरह यह प्रावधान फर्जी है, और कोर्ट इसे उड़ा देगा। मतलब, व्यवहारिक रूप से यदि कोई पक्षकार जज के पास जाता है, और जज को दखल करना है तो जज मामला स्वीकार कर सकता है !!
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और यह खुली हुई बात है कि, जज फैसला घूस की राशि के आधार पर देते है। क़ानून और अनुबंध में कुछ भी लिखा हो, उन्हें उससे कोई मतलब नहीं होता !!
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(2) अभी तक जो व्यवस्था थी उसमें मंडियों में आढतियों (होलसेलर) ने जिला स्तर पर कार्टेल बनाया हुआ था और इस वजह से वे किसानो से कम दाम में फसल खरीदकर ज्यादा मुनाफा बना पाते थे। अब मंडियों के जिला स्तरीय कार्टेल को तोड़ दिया गया है, और इसकी जगह अब देश व्यापी कार्टेल ले लेगा !!
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मतलब अब पूरे देश में 25-50 कम्पनियां जरुरी जिंसो की कीमतों को देशव्यापी स्तर पर नियंत्रित कर सकेगी। पहले चरण में इससे उपभोक्ता एवं किसानो दोनों को फायदा होगा।
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उदाहरण के लिए, अभी व्यापारी किसान से 5 से 8 रू किलो में प्याज खरीदकर 30 रू किलो में बेच देते है। लदान भाड़ा, भण्डारण आदि का 5 रूपया और जोड़े तो भी 30-13 = 17 रू बिचौलियों में बंट जाता है। अब चूंकि बड़ी कम्पनियां सीधे खरीद करके असीमित भण्डारण कर सकती है, अत: वे किसान को 10 रू प्रति किलो तक दे देंगे और अपने स्टोर पर उपभोक्ता को 30 रू की जगह 25 रू में ही बेच देंगे।
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इस तरह प्रथम चरण में किसान एवं उपभोक्ता दोनों को 3 से 5 रू का फायदा हुआ। किन्तु एक बार कार्टेल (भंडारण, कांट्रेक्ट, रिटेलिंग स्टोर आदि का नेटवर्क) बनाने के बाद वे इस पर एकाधिकार बनाकर किसानो को कम कीमत देंगे और उपभोक्ता से ऊँचे दम वसूलेंगे !!
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इस व्यवस्था में छोटे कार्टेल को बड़ा कार्टेल खा जायेगा। वोल्यूम बड़ा होने एवं मोनोपॉली के कारण खाद्य जिंसो की कीमतों पर बड़े कारोबारियों का निर्णायक नियंत्रण रहेगा। और सरकार के हाथ में न कुछ रहने से वे कह सकते है कि अब महंगाई वगेरह बाजार के हवाले है, और सरकार इसमें कुछ न कर सकती है !!
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(3) कृषि से सम्बंधित 3 बिल पास किये गए है, और इनमें काफी विसंगतियां है। घूमा फिरा कर इन प्रावधानों से अंतिम चरण में बड़ी कम्पनियां की ताकत एवं मुनाफा बढ़ेगा। और पुलिस-अदालतों के बदतर होने से उनकी मूल्य नियंत्रण की उनकी इस ताकत में और भी इजाफा होगा।
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भारत में कृषि मंत्री कौन होगा इसका फैसला पेड मीडिया के प्रायोजक करते है, नागरिक नहीं। अत: पिछले कई सालो से कृषि मंत्री किसानी को ख़त्म करने और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को लाभ देने वाले क़ानून छापते रहे है, और आगे भी वे पेड मीडिया के प्रायोजको को मुनाफा देने वाले क़ानून बनाते रहेंगे।
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(4) समाधान :
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(4.1) कांट्रेक्ट के विवादों का निपटान करने का "अधिकार" नागरिको की जूरी को दिया जाना चाहिए। यदि यह अधिकार जूरी को दे दिया जाए तो जूरी मंडल बड़े व्यापारियों से छोटे किसानो की निरंतर रक्षा करता रहेगा।
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(4.2) यदि कृषि मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में कर दिया जाए तो नागरिको यह अधिकार मिल जायेगा कि वे कृषि मंत्री को निष्काषित करने का फैसला कर सके। और इस तरह कृषि मंत्री वे नीतियाँ बनाना शुरू करेगा जो किसानो के हित में हो, पेड मीडिया के प्रायोजको के हित में न हो।
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(5) जरुरी बात :
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(5.1) चूंकि पेड मीडिया के प्रायोजक "नागरिको को अधिकार" देने के सख्त खिलाफ है। अत: RSS ने बिल में कोंट्रेक्ट के विवादों का फैसला करने का अधिकार नागरिको की जूरी को न देकर जजों+मजिस्ट्रेट के पास ही रखा है।
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साथ ही वे कृषि मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के भी खिलाफ है। क्योंकि इससे "नागरिक अधिकारों" में वृद्धि होती है।
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(5.2) चूंकि पेड मीडिया के प्रायोजक नागरिको को "अधिकार" देने के सख्त खिलाफ है। अत: कोंग्रेस ने भी सरकार से यह मांग नहीं की है कि, कोंट्रेक्ट के विवादों का फैसला करने का अधिकार नागरिको की जूरी को दिया जाना चाहिए।
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और कोंग्रेस भी कृषि मंत्री को वोट वापसी पासबुक एक दायरे में लाने के खिलाफ है !!
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कोंग्रेस यह जता रही है कि वे किसानो की लड़ाई लड़ रही है !! जबकि कोंग्रेस भी बीजेपी=आरएसएस के तरह किसानो एवं नागरिको को "अधिकार" देने के खिलाफ है, और इस तरह पेड मीडिया के प्रायोजको के पाले में है।
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दुसरे शब्दों में, बीजेपी एवं कोंग्रेस दोनों का यह कहना है कि, किसानो एवं नागरिको का हित किस क़ानून में है इसका फैसला "हम" करेंगे किन्तु नागरिको-किसानो को यह अधिकार नहीं देंगे कि वे इस बारे में खुद फैसला कर सके !!
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(5.3) चूंकि पेड मीडिया के प्रायोजक नागरिको को "अधिकार" देने के सख्त खिलाफ है। अत: षड्यंत्रकारी सिद्धांतो को बढ़ावा देकर नागरिको का टाइम पास एवं समय बर्बाद करने वाले कार्यकर्ता (जैसे न्यू वर्ल्ड ऑर्डर, इलुमिनाटी आदि प्रोपेगेंडा चलाने वाले) भी कोंट्रेक्ट फार्मिंग के विवादों का फैसला करने का अधिकार नागरिको की जूरी को देने का समर्थन नहीं करते।
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और ये षड्यंत्रकारी कार्यकर्ता (कोंस्पिरेसी थ्योरिस्ट) वोट वापसी कृषि मंत्री के क़ानून के विरोध में भी है। क्योंकि यदि कृषि मंत्री वोट वापसी पासबुक के दायरे में आ जाता है, तो कृषि मंत्री पेड मीडिया के नियंत्रण से निकलकर सीधे नागरिको के "नियन्त्रण" में आ जाएगा, और तब पेड मीडिया के प्रायोजक कृषि मंत्री को बाध्य करके मन मुताबिक क़ानून नहीं बनवा पायेंगे !!
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तो जब भी कोई व्यक्ति "नागरिक अधिकारों में वृद्धि" की बात करे तो नागरिक अधिकारों की मांग को चर्चा से बाहर रखने के लिए षड्यंत्रकारी सिद्धांतो के प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल करते है।
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इस तरह षड्यंत्रकारी सिद्धांतो का प्रचार करने वाले कार्यकर्ता भी "नागरिक अधिकारों में वृद्धि" के खिलाफ है, ताकि पेड मीडिया के प्रायोजको एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको की शक्ति में इजाफा हो।
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Wed Sep 23 2020 22:04:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कृषि उपज एवं वितरण में हम अब तक ठीक वैसा ही शासन भुगत रहे थे, जैसा गोरो के आने से पहले जमीदारों एवं राजाओं का था। और अब सोनिया-मोदी-केजरीवाल इस बदतर शासन को बदतरीन से बदल रहे है !!
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हम कृषि की पूर्व व्यवस्था के भी खिलाफ थे, और नयी व्यवस्था के भी खिलाफ है - हमारे द्वारा प्रस्तावित कानून सोनिया-मोदी-केजरीवाल द्वारा समर्थित दोनों (जमीदारों का राज एवं विदेशी राज) व्यवस्थाओं से बेहतर है।
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1870 से 1947 के दौर में सभी स्वतंत्रता सेनानी गोरो के राज से नफरत करते थे, किन्तु उनमे से भी ज्यादातर स्वतंत्रता सेनानी गोरो से भी ज्यादा घृणा देशी राजाओं एवं जमीदारों के शासन से करते थे !! और इस वजह से उन्होंने कई अवसरों पर गोरो के खिलाफ लड़ाई में राजाओं एवं जमींदारो का साथ नहीं दिया !!
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और गोरो को भगाने के आन्दोलन में कार्यकर्ताओ ने तब तक रुचि लेना शुरू नहीं किया था, जब तक कि अहिंसामूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल एवं अहिंसामूर्ती महात्मा चंद्रशेखर आजाद ने विकल्प के रूप में लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रस्ताव नहीं किया था।
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आज हम ठीक वैसी ही स्थिति से गुजर रहे है। हम शरद पवारो और बादलो के राज का विरोध करते है, और हम सोनिया-मोदी-केजरीवाल द्वारा प्रस्तावित रोथ्स्चाइल्ड राज के भी खिलाफ है।
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कृषि : राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित क़ानून का सारांश :
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(01) MSP का आवंटन गरीब एवं छोटे किसानों को पहले किया जाए -
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किसानो को उनकी जमीन, संपत्ति आदि के आधार पर घटते क्रम में 20 समूहों में वर्गीकृत किया जाये। मतलब सबसे गरीब 5% किसान सबसे निचे, इसके बाद अगले 5% और सबसे अधिक संपत्ति धारण करने वाले किसान सबसे ऊपर के वर्ग में। MSP में सबसे पहले निचले 5% को फसल बेचने का मौका मिलेगा और उसके बाद अगले 5%, फिर अगले 5% और इसी तरह से MSP में सरकार फसल खरीदेगी। एक बार डेटा बनाने के बाद इस प्रणाली को आसानी से लागू किया जा सकता है।
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इससे निचले वर्ग के 50% से 70% गरीब एवं छोटे किसानों को सुरक्षा मिलेगी, और अमीर किसानो का नंबर बाद में आएगा। क्योंकि हमें किसानो के नाम पर प्रकाश सिंह बादल, शरद पवार, पी चिदंबरम जैसे "किसानों" को बचाने की जरूरत नही है !!
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मौजूदा व्यवस्था में अमीर किसान अपना घटिया माल सरकार को MSP पर बेच देते है, और छोटे किसान का नंबर नहीं आता। आरएसएस, कोंग्रेस एवं सभी राजनैतिक पार्टियाँ गरीब किसानो को यह प्राथमिकता देने के खिलाफ है !! उनका कहना है कि गरीब किसानो को कोई विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए !! या तो MSP का लाभ “सभी” किसानो को मिले, या किसी भी किसान को न मिले !!
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(02) कृषि मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में किया जाए । कृषि मंत्री 90 करोड़ मतदाताओ द्वारा नियंत्रित होगा।
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(03) किसान प्रतिनिधियों की राष्ट्रिय स्तर पर 5 सदस्यीय कमेटी : कमेटी के ये सदस्य भी वोट वापसी पासबुक के दायरे होंगे लेकिन इन्हें सिर्फ किसान ही वोट कर सकेंगे, गैर किसान मतदाता नहीं। 1 एकड़ = 1 वोट, लेकिन उच्चतम सीमा 10 वोट।
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मतलब, यदि किसी किसान के पास 1 एकड़ भूमि है तो वह 1 वोट करेगा, और 2 एकड़ होने पर 2 वोट। किन्तु 10 एकड़ से अधिक भूमि होने पर भी उसके पास अधिकतम 10 वोट ही होंगे।
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यह कमेटी वास्तविक रूप से किसानो का प्रतिनिधित्व करेगी, और किसानो के हित में नीतियों के प्रस्ताव तैयार करके कृषि मंत्री को देगी। कृषि मंत्री कमेटी के प्रस्तावों को मान सकते है, या नहीं भी मान सकते है।
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(04) कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग पर जूरी कोर्ट – सभी कृषि अनुबंधों के विवादों का निपटान जूरी द्वारा हो, जज द्वारा नहीं।
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(05) प्रत्येक परिवार को 7 एकड़ भूमि या 3 लाख मूल्य की भूमि ( दोनों में से जो भी अधिक हो) रखने की छूट होगी और उन्हें इस पर कोई कर नहीं चुकाना होगा। (60 वर्ष से कम आयु पर प्रति व्यक्ति 1 एकड़, 60 वर्ष से ऊपर आयु होने पर प्रति व्यक्ति 2 एकड़)
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इससे अधिक भूमि सालाना 1% की दर से कर योग्य होगी, किन्तु इस देय कर में से किसान को उस राशि के 20% की छूट मिलेगी, जितनी राशि की उसने खाद्य फसल बेचीं है। इस तरह 90% किसान कर के दायरे से बाहर रहेंगे और जो वास्तव में अनाज आदि उगा रहे है, उन पर भी इस कर का प्रभाव नहीं आएगा।
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(06) गेहूँ और चावल के अनुदानों में कटौती करते हुए बाजरे, ज्वार, देसी मक्के के अनुदानों में धीरे धीरे क्रमिक रूप से वृद्धि। ताकि किसान उन्हें उगाने एवं उपभोक्ता इन्हें खाने को प्रोत्साहित हो।
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(07) कृषि में कीटनाशक, उर्वरक, बिजली, डीजल आदि के रूप में दिए जा रहे अनुदानो की राशि को सभी 90 करोड़ मतदाताओं के खाते में सीधे जमा किया जाए।
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(08) खाद्य अनाज के आयात और निर्यात पर उच्च आयात शुल्क। सिर्फ गंभीर कमी आने की स्थिति में ही आयात शुल्क घटाया जाये।
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(09) 300 रू प्रति किलो से ऊपर की जिंसो (जैसे मेवे आदि) को छोड़ते हुए सभी खाद्य जिंसो की खरीद-बिक्री पर कोई कर नहीं।
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(10) कोई भी व्यक्ति किसी भी फसल का निचे दी गयी शर्तो के अधीन असीमित भण्डारण कर सकता है :
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(i) यदि फसल किसान ने खुद उगायी है तो कोई टेक्स नहीं ।
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(ii) यदि किसी फसल की कीमत अमुक फसल के वार्षिक औसत मूल्य से डेढ़ गुना (150%) ज्यादा हो गयी है तो डेढ़ गुना से ज्यादा हुयी राशि का 5% मासिक टेक्स चुकाना होगा।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि, टमाटर का औसत वार्षिक मूल्य 40 रू प्रति किलो है, और यदि दाम बढ़कर 60 रू हो जाते है तो भंडारण करने वालो को कोई टेक्स नहीं देना होगा। किन्तु यदि टमाटर 90 रू किलो हो जाता है तो टमाटर का स्टॉक रखने वाले को रखे गए टमाटरो पर 1.50 रू प्रति किलो के हिसाब से मासिक कर देना होगा। इस व्यवस्था के होने से जमाखोरी की प्रवृति में कमी आएगी।
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प्रत्येक व्यापारी को रखे गए स्टॉक की सूचना जिला रसद अधिकारी के पास सार्वजनिक करनी होगी। यदि कोई व्यापारी स्टॉक की जानकारी छिपा रहा है तो सही सूचना देने वाले व्यक्ति को कुछ मात्रा में पारितोषिक मिलेगा, और रसद अधिकारी व्यापारी पर आर्थिक दंड लगा सकता है।
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यह कुछ मोटे बिंदु दिए है । हम जल्द ही इसका पूरा ड्राफ्ट सार्वजनिक करेंगे।
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Thu Sep 24 2020 15:07:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
गांग्लास ग्राम पंचायत से वोट वापसी पासबुक के उम्मीदवार - शिवराज जी जाट
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चुनाव चिन्ह : कोट
Sun Sep 27 2020 17:54:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Ankit Tak Jury BhilwaraRj:
चुनाव प्रचार ग्राम पंचायत गांगलास , भीलवाड़ा
सरपंच उम्मीदवार - शिवराज जी जाट ( राईट टू रिकाल पार्टी = वोट वापीस लेने अधिकार )
Ishwar Choudhary Jury Court Rameshwar Jat Jury Shivraj Jat Mahaveer Prasad Kumawat Jury Mahaveer Tagaya Rrg Vishnu Sen Rrg
Sun Sep 27 2020 17:54:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Ankit Tak Jury BhilwaraRj:
चुनाव प्रचार ग्राम पंचायत गांगलास , भीलवाड़ा
सरपंच उम्मीदवार - शिवराज जी जाट ( राईट टू रिकाल पार्टी = वोट वापीस लेने अधिकार )
Ishwar Choudhary Jury Court Rameshwar Jat Jury Shivraj Jat Mahaveer Prasad Kumawat Jury Mahaveer Tagaya Rrg Vishnu Sen Rrg Yogesh Kumar Rrg Shailendra Rathore Rtr Sunil Sharma Satnam Kaur Dey Nitin Sharma
Sun Sep 27 2020 19:44:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Mahaveer Regar:
ग्राम पंचायत #गांगलास मे सरपंच प्रत्याशी Shivraj Jat जनता को #वोटवापसी पासबुक, #जूरी कोर्ट की जानकारी देते हुए.
Mon Sep 28 2020 12:04:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
बिहार चुनाव से सम्बंधित सूचना : यदि आप बिहार से है या बिहार के कार्यकर्ताओ से सोशल मीडिया मंचो पर जुड़े हुए है तो कृपया निचे दिया गया पोस्ट कॉपी करके उन व्हाट्स एप / फेसबुक ग्रुप्स में भेजे जिन ग्रुप्स में बिहार राज्य के मतदाता-कार्यकर्ता होने की सम्भावना है।
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बिहार में विधानसभा चुनाव 28 अक्टूबर से शुरू होने वाले है। नामांकन भरने की प्रक्रिया 2-4 दिनों में शुरू हो जाएगी। राईट टू रिकॉल पार्टी उन कार्यकर्ताओ की तलाश कर रही में है जो - (a) बिहार के नागरिको को वोट वापसी पासबुक दिलवाने, एवं (b) बिहार के मतदाताओं को जूरी में आने की सत्ता दिलाने के लिए चुनाव लड़ सके।
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(1) अन्य राज्यों के रिकालिस्ट्स बिहार में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशीयों को आर्थिक सहयोग के रूप में जमानत राशि देने के इच्छुक है। अत: नामांकन स्वीकृत होने पर राईट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्येक प्रत्याशी को जमानत राशि के रूप में 10,000 रू का अंशदान प्राप्त होगा।
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(2) यदि आप बिहार राज्य के मतदाता है, 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुके है और वोट वापसी पासबुक का समर्थन करते है तो आप राईट टू रिकॉल पार्टी के टिकेट पर चुनाव लड़ सकते है।
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(3) राईट टू रिकॉल पार्टी का मेनिफेस्टो यहाँ देखें – www.Rtr .Party/manifesto (लिंक ओपन करने के लिए बीच में से स्पेस हटा दें।)
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(4) बिहार के मतदाताओ के लिए वोट वापसी पासबुक का नमूना यहाँ से डाउनलोड करें – Tinyurl .com/VvpBihar
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यदि आप बिहार में विधायक का चुनाव लड़ने के इच्छुक है, एवं आपको इस बारे में और अधिक जानकारी चाहिए तो कमेन्ट में पूछ सकते है, या मुझे मेसेज कर सकते है।
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इस पोस्ट को व्हाट्स एप में भेजने के लिए इस पोस्ट के पहले कमेन्ट से text को कॉपी करें। पहले कमेन्ट में लिंक के बीच में से स्पेस हटा दिया गया है, ताकि व्हाट्स एप यूजर लिंक अपने फोन में लिंक क्लिक सीधे राईट टू रिकॉल पार्टी का मेनिफेस्टो ओपन कर सके।
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Mon Sep 28 2020 23:19:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
इस तरह के सैंकड़ों संगठन दलितों/आदिवासियों को ईसाई धर्म में कन्वर्ट करने के लिए काम कर रहे है। एफडीआइ को रोके बिना यह सिलसिला रूकने वाला नही है, और मोदी-सोनिया-केजरीवाल एफडीआइ के समर्थक है !!
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समाधान - #Woic , #HinduBoard , #JuryCourt
Binod Teli:
धरा गया बामसेफ,
आदिकिसान Chandra Raj ने बामसेफ का साजिश पकडा है,
👉#बामसेफ अंग्रेजों की गुलामी करके और _संघ का स्लीपर सेल होकर इंडिया के आदिवासियों को क्रिश्चन बनाने की शाजिश रच रहा है ताकि भविष्य में इंडिया से आदिवासियत का नामोनिशान मिटाया जा सके
Tue Sep 29 2020 21:08:10 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
नागरिक सत्ता एवं नागरिक अधिकार में क्या अंतर है?
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सत्ता एवं अधिकार का बहुधा एक ही अर्थ लगाया जाता है, किन्तु तकनीकी रूप से इसमें एक बड़ा अंतर है। यह अंतर संप्रभुता का है। सत्ता हमेशा संप्रभु होती है, जबकि अधिकार सशर्त होने के कारण निर्णायक नहीं होते।
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राजवर्ग प्रजा को लूटने के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है, और राजवर्ग की इस लूट को सिर्फ नागरिक सत्ता में वृद्धि करके ही रोका जा सकता है। नागरिक अधिकार राजवर्ग की नकेल कसने में नाकाफी साबित होते है।
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इस पोस्ट को बेहतर फोर्मेट में यहाँ भी पढ़ सकते है - <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1237809383258803/>
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[ टिप्पणी : कार्यकर्ताओ को भ्रमित करने के लिए राजवर्ग+धनिकों ने राजनीती विज्ञान, लोक प्रशासन, समाज शास्त्र, क़ानून एवं ज्ञान देने वाली किसी भी किताब में नागरिक अधिकार एवं नागरिक सत्ता के अंतर को नहीं लिखा है। ताकि नागरिक सिर्फ अधिकारों की लड़ाई लड़ने में व्यस्त रहे, और नागरिक सत्ता में वृद्धि के प्रस्तावों की उपेक्षा करें। ]
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इस जवाब के बिंदु :
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(1) सत्ता (Power) क्या है
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(2) अधिकार (Right) क्या है
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(3) नागरिको को लूटने के लिए राजवर्ग एवं धनिकों का गठजोड़।
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(4) नागरिक सत्ता में वृद्धि होने से राजवर्ग+धनिकों द्वारा प्रजा को लूटने की शक्ति “हमेशा के लिए” घट जाती है।
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(5) राजवर्ग+धनिको का नागरिक सत्ता में बढ़ोतरी पर रूख।
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(6) प्रजा विरोधी नेताओं / कार्यकर्ताओ को चिन्हित करना।
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(1) सत्ता (Power) क्या है – किसी विषय में निर्णायक, अंतिम एवं सम्प्रभु शक्ति होना सत्ता है। और जब यह निर्णायक शक्ति जनता के पास हो तो इसे नागरिक सत्ता कहते है।
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उदाहरण के लिए, नागरिक के पास वोटिंग पॉवर होना नागरिक सत्ता है। वोटिंग पॉवर सत्ता इसीलिए है क्योंकि जब नागरिको का बहुमत चुनावी प्रक्रिया का पालन करके किसी व्यक्ति को चुन लेता है तो नागरिको के इस फैसले को न तो कहीं चुनौती दी जा सकती है, और न इसे सही-गलत के मापदंड पर तौला जा सकता है।
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एक बार नागरिको ने मत शक्ति का प्रयोग करके जिस व्यक्ति को सांसद चुन लिया अब वही व्यक्ति सांसद बनेगा। कोई अपील नहीं !! और यही स्थिति उन सभी पदों के साथ है जो नागरिको के वोट से चुन कर आते है, जैसे - विधायक, सरपंच, पार्षद, सभापति आदि।
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जब नागरिक मत शक्ति का प्रयोग करके कोई फैसला लेते है तो यह संप्रभु है, निर्णायक है, अंतिम है, और राजवर्ग को नागरिको के इस फैसले की समीक्षा का कोई विवेकाधिकार नहीं दिया गया है !! अत: नागरिको की मत शक्ति (Voting Power) नागरिको की सत्ता है।
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(पेड पाठ्यपुस्तकों में मत-शक्ति को मताधिकार कहा गया है, जबकि यह अधिकार न होकर सत्ता है।)
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कुछ और नागरिक सत्ताओ के उदाहरण निम्नलिखित है :
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(1.1) रिटेंशन रिव्यू : रिटेंशन इलेक्शन की प्रक्रिया में नागरिक वोट करके यह तय करते है कि किसी कार्यरत शीर्ष जज को नौकरी से निकाल दिया जाना चाहिए या नहीं। जजों के निष्कासन की अंतिम शक्ति नागरिको के पास होने के कारण यह नागरिक सत्ता है। जापान के नागरिको के पास यह प्रक्रिया मौजूद है। हालांकि यह वोट वापसी की शक्ति की तुलना में कम प्रभावी है।
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(1.2) जूरी सिस्टम : जूरी सिस्टम में मुकदमे सुनकर फैसला देने की अंतिम शक्ति / सत्ता नागरिको के पास होने के कारण जूरी प्रणाली नागरिक सत्ता है। किन्तु जज सिस्टम में दंड देने की अंतिम सत्ता जज के पास होती है।
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(1.3) असेसर सिस्टम : एसेसर सिस्टम में नागरिको के 2 प्रतिनिधि जज के साथ बैठकर मुकदमा सुनते है और सजा / रिहाई का फैसला करते है। अत: दंड देने की शक्ति में नागरिको की सहभागिता होने के कारण यह नागरिक सत्ता है। चीन में यह प्रणाली मौजूद है।
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(1.4) वोट वापसी प्रक्रियाएं : वोट वापसी में नागरिक बहुमत का प्रयोग करके किसी अधिकारी को निकाल सकते है, और नागरिको के बहुमत द्वारा दिए गए इस फैसले को कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती।
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(1.5) जनमत संग्रह : जनमत संग्रह में नागरिक सरकार के किसी भी फैसले या मामले के बारे में अपना मत प्रदर्शित करते है और बहुमत द्वारा प्रदर्शित फैसला ही अंतिम होता है। अभी हाल ही में किया गया ब्रेग्जिट जनमत संग्रह का उदाहरण है।
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(1.6) विविध स्तरीय चुनाव प्रणाली : चूंकि इलेक्शन में मत शक्ति का इस्तेमाल होता है, अत: मल्टी इलेक्शन भी नागरिक सत्ता में इजाफा करता है।
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सार - यदि किसी मामले या विषय में नागरिको के बहुमत को यदि कोई फैसला लेने / प्रतिभाव देने का हक़ दिया गया हो और यदि नागरिको का यह फैसला अंतिम एवं निर्णायक हो, तो कहा जाएगा कि - अमुक विषय में सत्ता नागरिको के पास है, राजवर्ग के पास नहीं। किन्तु यदि अंतिम फैसला करने की शक्ति शासन के किसी अंग के पास हो तो यह नागरिक सत्ता नहीं है।
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(2) अधिकार (Right) क्या है – नागरिक अधिकारों में निर्णायक सत्ता जनता के पास न होकर राजवर्ग / शासन के पास ही रहती है। और राजवर्ग अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करके जनता के किसी अधिकार को कानूनी रूप से निलम्बित / स्तंभित कर सकता है।
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नागरिक अधिकारों के कुछ उदाहरण
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(2.1) न्याय का अधिकार : भारतीय नागरिको को न्याय पाने का अधिकार है, किन्तु अंतिम रूप से न्याय जज ही देता है। इस तरह “न्याय पाने का अधिकार” नागरिको के पास है , किन्तु “न्याय देने” की अंतिम सत्ता जज (राजवर्ग) के पास है।
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(2.2) सूचना का अधिकार : भारत में सूचना का अधिकार नागरिको के पास होने के बावजूद “सूचना देने” की निर्णायक सत्ता सूचना आयुक्त के पास है। सूचना के अधिकार में सत्ता नागरिको के पास नहीं होने के कारण वे महत्त्वपूर्ण सूचनाएं नहीं निकलवाई जा सकती है, जो शासन देना नहीं चाहता।
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उदाहरण के लिए कुछ 2 साल पहले यह सूचना मांगी गयी थी कि RSS=BJP और कोंग्रेस ने इलेक्टोरल बांड के माध्यम से कौन कौन सी विदेशी कम्पनियों से चंदा लिया है। 2 साल से सूचना मांगने वाले कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग आदि के चक्कर लगा रहे है।
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सूचना पाने का अधिकार होने के बावजूद यह सूचना आज तक नहीं दी गयी, क्योंकि नागरिको को “सूचना पाने” का तो अधिकार है, किन्तु “सूचना देने” की सत्ता शासन के पास है !! अत: सूचना का अधिकार एक नागरिक अधिकार है, किन्तु नागरिक सत्ता नहीं है।
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इसी तरह शिक्षा का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार आदि कई प्रकार के अधिकार लोकतंत्र का प्रोपेगेंडा खड़ा रखने के लिए भारत के नागरिको को दिए गए है, किन्तु इन सभी अधिकारों पर काफी सारी शरायत यानी “Terms & Condition apply” होती है। और सभी मामले में अंतिम शक्ति राजवर्ग के पास ही है।
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असल में, नागरिक सत्ता असली तत्व है, और अधिकारों में कोई वैल्यू नहीं है। क्योंकि अधिकार सिर्फ तब तक काम करेंगे जब मामला प्रजा Vs प्रजा के बीच है। लेकिन जब प्रजा का राजवर्ग से टकराव होता है, तो अधिकार काम नहीं करते। राजवर्ग से प्रजा की रक्षा सिर्फ सत्ता ही कर सकती है !!
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(3) नागरिको को लूटने के लिए राजवर्ग एवं धनिकों का गठजोड़
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“राजा को प्रजा के अधीन होना चाहिए , वर्ना वह प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा। प्रजा के अधीन नहीं होने पर राजवर्ग अन्याय पूर्वक दंड लगाकर प्रजा का उसी तरह से भक्षण कर जाएगा जिस तरह माँसाहारी पशु शाकाहारी जीवो को खा जाते है “ – महर्षि दयानंद सरस्वती, सत्यार्थ प्रकाश
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राजवर्ग के अंग :
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(3a) प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, सांसद आदि (राजनेता)
(3b) कलेक्टर, एसपी, तहसीलदार, कर अधिकारी आदि (अधिकारी वर्ग)
(3c) सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट एवं लोअर कोर्ट के जज (अदालतें)
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इन तीनो वर्गों के सदस्य राजवर्ग है, और इनके जीवन का वही उद्देश्य है, जो अमूमन दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति का होता है – मतलब, ज्यादा से ज्यादा पैसा बनाना → ज्यादा पैसा बनाकर अपनी शक्ति में वृद्धि में करना, और → शक्ति बढ़ने पर और भी ज्यादा पैसा बनाना, ताकि → अपनी शक्ति को और भी बढ़ाया जा सके !!
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पैसा बनाने के लिए ये तीनो वर्ग (नेता+अधिकारी+जज) आपस में गठजोड़ बना लेते है, और 24 घंटे नागरिको को लूटने एवं उनका शिकार करने की टोह में रहते है !! अब इस गठजोड़ में तीसरा सबसे महत्त्वपूर्ण घटक और जुड़ता है – धनिक वर्ग !!
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चूंकि राजवर्ग को पैसा बनाना है, और धनिक वर्ग के पास पैसा बनाने के कारोबार है, अत: वे धनिक वर्ग को लाभ देने वाले क़ानून छापते है, और बदले में धनिक वर्ग उन्हें पैसा देता है। और फिर धनिक वर्ग अमुक क़ानून का फायदा उठाकर उस राशि से 100 गुना पैसा बना लेता है, जितना पैसा उसने अमुक क़ानून छापने के एवज में राजवर्ग को चुकाया है !!
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आम तौर पर धनिक एवं राजवर्ग को जनता का दमन करने में कोई रुचि नहीं होती है। उन्हें बस पैसा चाहिए। किन्तु पैसा बनाने के लिए वे अन्यायपूर्वक तरीको का इस्तेमाल करते है, अत: नागरिको एवं धनिकों+राजवर्ग में घर्षण बढ़ जाता है।
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नागरिको को राजवर्ग+धनिक नामक उपरोक्त शिकारियों से निरंतर खतरा है !! और शिकार करने के लिए उनके पास काफी ताकत है। उनके पास पैसा वसूलने के लिए उलटे सीधे क़ानून छापने की शक्ति है, पकड़ने के लिए पुलिस है, और दंड देने के लिए अदालतें है। और यदि नागरिक हिंसक प्रतिरोध करते है तो सेना है !!
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(4) नागरिक सत्ता में वृद्धि होने से राजवर्ग द्वारा प्रजा को लूटने की शक्ति “हमेशा के लिए” घट जाती है।
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राजवर्ग+धनिकों की लूट / दमन को आप तीर-चाकू-भालों की संज्ञा दे सकते है। राजवर्ग की तरफ से निरंतर तीरों की यह बारिश चलती रहती है। जैसे ही उन्हें मौका मिलेगा वे आपका खून निकाल लेंगे। यदि नागरिको ने निचे बैठकर या दाएं-बाएँ होकर तीरो से बचने का कोई रास्ता निकाला है, तो वे भाले निकाल लायेंगे। और आप सामने के भालो से निपटेंगे, उतने में वे आपके पीछे से चाकू या तलवार चला कर आपका खून निकाल लेंगे।
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उन्हें आपको जान से नहीं मारना है, उन्हें आपका खून (पैसा) चाहिए। अत: आपका खून (पैसा) निकालने के बाद वे आपको छोड़ देंगे। जब आप में नया खून बन जायेगा तो वे फिर से अपनी बोतल लेकर आ जायेंगे और कोई न कोई तिकड़म लगाकर फिर से आपका खून निकाल लेंगे !! नागरिक चिल्ला चोट करते रहेंगे और राजवर्ग+धनिक नागरिको को नयी नयी तरकीबें लगाकर लूटते रहेंगे।
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वे अस्त्रों-शस्त्रों से सुसज्जित होकर हर समय आपका खून निकालने के लिए मुस्तैद है। उनका दिमाग 24*7 घंटे इसी दिशा में काम करता है, कि किस तरह वे प्रजा ज्यादा से ज्यादा लूट सकते है। सिर्फ मौका मिलने की देर है।
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जब चमगादड़ किसी पशु का खून पीना शुरू करता है तो उसके सलाइवा में मौजूद रसायन उस हिस्से को सुन्न कर देता है। सुन्न हो जाने के कारण पशु को खून निकलने का पता नहीं चलता। पेड मीडिया का मुख्य काम नागरिको के शरीर-दिमाग को सुन्न करके रखना है, ताकि जब खून निकाला जाए तो आपको अहसास न हो।
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अब मान लीजिये कि आप एक नागरिक है और आपके सामने निम्नलिखित परिस्थिति है :
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(4.1) ‘क’ आकर आपसे कहता है कि - यदि मुझे राजा बना दिया जाता है तो मैं नागरिको का खून निकालने के लिए कोई तीर-भाला-तलवार नहीं चलाऊंगा, और न ही राजवर्ग के किसी सदस्य को ऐसा करने दूंगा !!
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किन्तु यदि आप उससे कवच और ढाल मांगते है, ताकि आप निरंतर चलने वाले इस द्वन्द से खुद की रक्षा कर सके तो वह आपको कवच / ढाल धारण करने की शक्ति देने से इंकार कर देता है !!
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(4.2) एक और सज्जन ‘ख’ आकर आपसे कहता है कि शासन द्वारा प्रहार के लिए प्रयुक्त किये जा रहे भालो a, b, c, d, e, f, g, h ....... x, y ,z में से भाला c बहुत ही घातक है, और मैं आपको c नंबर के भाले से बचाने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।
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किन्तु यदि आप उससे कवच और ढाल मांगते है, ताकि आप निरंतर चलने वाले इस द्वन्द से खुद की रक्षा कर सके तो वह आपको कवच / ढाल धारण करने की शक्ति देने से इंकार कर देता है !!
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(4.3) एक व्यक्ति ‘ग’ आकर आपको कहता है कि नागरिको को कवच / ढाल धारण करने की शक्ति दी जानी चाहिए ताकि वे हमेशा के लिए खुद की रक्षा कर सके।
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मुझे नहीं पता कि आप उपरोक्त में से किस विकल्प को चुनेंगे। किन्तु मैं ‘ग’ के प्रस्ताव को चुनूंगा। क्योंकि यदि एक बार नागरिको के पास ढाल-कवच धारण करने की शक्ति आ जाती है तो वे हमेशा के लिए राजवर्ग+धनिक के तीरों-भालों-तलवारों से खुद को बचा सकेंगे।
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यहाँ नागरिको का ढाल / कवच का स्वामी होना और इसे धारण करने की शक्ति होना नागरिक सत्ता है, ताकि प्रजा खुद राजवर्ग+धनिकों के हमलो से निरंतर अपनी रक्षा कर सके।
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नागरिक सत्ता होने से मतलब आपके पास उस मकान का स्वामित्व साबित करने वाले कानूनी दस्तावेज है जिसमें आप रह रहे है, और किसी भी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वे आपको बेदखल कर सके। जबकि नागरिक अधिकार वह किराए का मकान है, जो आपको रहने के लिए दिया गया है। और शासन किसी भी दिन आपसे यह मकान छीन सकता है।
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भारत में जब गोरो का शासन था तो नागरिको के पास कोई भी शक्ति / सत्ता नहीं थी। और सिर्फ इस वजह से गोरो का दमन बढ़ गया था। जब अंग्रेज भारत से गए तो सत्ता का हस्तांतरण कोंग्रेस को कर गए थे। यदि आजादी आने के बावजूद भारतीयों को मत शक्ति (Voting Power) नहीं दी जाती तो कोंग्रेस के नेता अगले 10 साल में भारतीयों का इतना चमड़ा उधेड़ देते कि, भारतीय फिर से इंग्लेंड जाकर अंग्रेजो को बुला लाते, ताकि वे इन नेताओं से छुटकारा पा सके !!
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और आज भी भारत के विधायक / नेता आपकी और हमारी किडनियां निकालकर विदेशियों को बेच देने के प्रोग्राम को सिर्फ इसीलिए मुल्तवी कर रहे है क्योंकि भारतीयों के पास मत शक्ति के रूप में एक ढाल है !! आप जैसे ही यह ढाल हटायेंगे राजवर्ग आपकी किडनी निकालने के लिए दरवाजा खटखटा देगा !!
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ब्रिटेन पूरी दुनिया से इसीलिए आगे निकल गया क्योंकि वहां के कार्यकर्ताओ ने 12 वी सदी में राजा की गर्दन दबाकर जूरी में आने की शक्ति पर हस्तक्षर करवा लिए थे। ब्रिटेन में नागरिको के पास वोटिंग पॉवर 1920 के आस पास आये थे। किन्तु जूरी सत्ता की ढाल होने कारण वे राजवर्ग+धनिको से खुद की रक्षा कर पाए।
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वोटिंग पॉवर की तुलना में जूरी पॉवर ज्यादा बेहतर ढाल है । वोटिंग पॉवर सिर्फ एक दिन के लिए मिलती है, और जिस दिन नागरिक वोट करके आता है, उसी समय वह अपनी ढाल भी राजवर्ग के पास जमा करके आ जाता है। अब अगले 5 वर्षो तक नागरिक के पास कोई ढाल नहीं है।
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इसके उलट जूरी पॉवर कभी निलम्बित नहीं होता और निरंतर नागरिक इसका इस्तेमाल करते रहते है। किसी देश में रोज सैंकड़ो झूठे-सच्चे मुकदमें दर्ज होते है और नागरिक निरंतर जूरी में जाकर मुकदमें सुनते है और फैसले देते है। अत: जिस देश के नागरिको के पास जूरी पॉवर है वहां राजवर्ग की दमन शक्ति में तेजी से गिरावट आ जाती है।
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अमेरिका के नागरिको के पास राजवर्ग से खुद को बचाने के लिए सबसे ज्यादा ढाले एवं इंतजामात है। अमेरिकियों के पास 5 प्रकार की सत्ता है जिनका इस्तेमाल वे राजवर्ग+धनिकों से खुद को बचाने के लिए करते है :
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(4a) उनके पास मत शक्ति (Voting Power) है,
(4b) जनमत संग्रह की शक्ति (Referendum) भी है,
(4c) जूरी में आने की सत्ता ( Jury Power) भी है,
(4d) वोट वापसी की शक्ति (Recall Power) भी है, और
(4e) विविध स्तरीय चुनाव प्रणाली (Multi Election) भी है।
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और इसके अलावा अमेरिकन नागरिको के पास बंदूक रखने की शक्ति भी है !! ताकि कोई जनरल जिया या मुशर्रफ आकर नागरिको की उपरोक्त सत्ता का निलम्बन न कर दें। इस तरह नागरिको के पास यदि बंदूक नहीं है तो ये सभी नागरिक सत्ताएँ अनाथ संताने है। बंदूक इन सभी सत्ताओ की माँ है, जो सभी नागरिक सत्ताओ की रक्षा करती है।
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सार यह है कि , जिस देश में नागरिक सत्ता के रूप में ढालो की संख्या बढ़ जाती है, वहां पर राजवर्ग द्वारा नागरिको के अन्यायपूर्वक शोषण करने की शक्ति में कमी आती है, और जिस देश के नागरिको के पास नागरिक सत्ता के रूप में कम ढाले है वहां पर राजवर्ग+धनिकों द्वारा किये जा रहे शोषण में इजाफा हो जाता है। नागरिको के पास जितनी कम ढाले होंगी शोषण / दमन उतना ही बढ़ जायेगा।
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(5) राजवर्ग+धनिक वर्ग का नागरिक सत्ता में बढ़ोतरी पर रूख :
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पिछले 10,000 वर्षो से दुनिया की सभी सभ्यताओं में राजवर्ग नागरिको को सत्ता देने के जबरदस्त खिलाफ रहा है। जब तक खून की नदियाँ ना बहने लगे तब तक राजवर्ग नागरिको की सत्ता बढाने वाली प्रक्रियाएं कभी लागू नहीं करता। असल में यह छीनने की चीज है, मांगने से कभी भी मिलती नहीं है !!
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Power cannot be Given... it has to be Taken !!
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(5.1) यदि राजवर्ग+धनिक यदि नागरिको को सत्ता दे देते है तो वे नागरिको को आसानी से लूट नहीं पायेंगे। आप राजवर्ग से अधिकार मांगेंगे तो वे आपको Terms & Condition apply वाला अधिकार दे देंगे, लेकिन सत्ता किसी भी सूरत में नहीं देंगे।
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(5.1.1) यदि आप अपने जिले / राज्य में “मास्क-वैक्सीन अनिवार्य” का क़ानून डालने का विरोध करेंगे तो वे आपके जिले / राज्य में “मास्क-वैक्सीन अनिवार्य” का कानून नही डालेंगे, लेकिन वे ऐसी प्रक्रिया कभी लागू नहीं करेंगे कि जिले / राज्य के नागरिक जनमत संग्रह की शक्ति का प्रयोग करके “सीधे” इस क़ानून को रद्द कर सके !!
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(5.1.2) यदि आप निर्भया रेप केस के आरोपियों को फांसी देने की मांग करेंगे तो वे उन्हें फांसी दे देंगे लेकिन नागरिको को यह पॉवर कभी नहीं देंगे कि देश के नागरिक जूरी में आकर “सीधे” इसका फैसला दे सके !!
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(5.1.3) यदि नागरिक किस मंत्री को निष्कासित करने की मांग करेंगे तो वे अमुक मंत्री को निष्काषित कर देंगे लेकिन नागरिको को यह शक्ति कभी नहीं देंगे कि नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके “सीधे” किस मंत्री को नौकरी से निकाल सके !!
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(5.1.4) यदि आप अपने जिले के एसपी को ट्रांसफर / सस्पेंड करने की मांग करते है तो वे एसपी को बर्खास्त कर देंगे लेकिन जिले के नागरिको को यह शक्ति नहीं देंगे कि वे अपने जिले के एसपी को “सीधे” निष्कासित करने के लिए बहुमत का प्रयोग कर सके।
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और इस तरह के हजारो उदाहरण दिए जा सकते है। वे आपको फ्री स्कूल देंगे, अस्पताल देंगे, भत्ते देंगे, रोजगार देंगे, फ्री अनाज-राशन देंगे, सड़के, पुल, विकास सभी कुछ दे देंगे, लेकिन जैसे ही आप उनसे नागरिक सत्ता वे वृद्धि करने वाली प्रक्रियाएं लागू करने को कहेंगे राजवर्ग की आँखे लाल हो जाती है !!
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सार यह है कि राजवर्ग+धनिक वर्ग नागरिको को सीधे निर्णायक सत्ता / शक्ति देने से अत्यंत घृणा करता है।
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(5.2) अब मैं आपको एक व्यवहारिक उदाहरण द्वारा स्पष्ट करता हूँ कि कैसे नागरिक सत्ता में वृद्धि करने वाली प्रक्रियाएं खेल को पूरी तरह पलट कर रख देती है। हमेशा के लिए !! निचे मैंने नागरिक सत्ता बढ़ाने वाली 3 धाराओं की एक प्रक्रिया दी है। और मान लीजिये कि, मुख्यमंत्री अपने राज्य में निचे दी गयी प्रक्रिया को लागू कर देते है :
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(5.2a) यदि कोई मतदाता जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई शपथपत्र प्रस्तुत करता है तो जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट स्वीकार कर लेगा और एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। कलेक्टर यह शपथपत्र मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा, ताकि कोई भी नागरिक इसे बिना लॉग इन के देख सके।
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(5.2b) यदि कोई मतदाता धारा उपरोक्त धारा के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपनी स्वीकृति दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और मतदाता की स्वीकृति को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक कर देगा।
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(5.2c) यदि किसी शपथपत्र पर राज्य के कुल मतदाताओं के 51% मतदाता हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री अमुक शपथपत्र पर कार्यवाही करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते है।
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(5.3) यह प्रकिया किस तरह का बदलाव ले आती है ?
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मान लीजिये कि, राज्य / केंद्र सरकार ने “मास्क अनिवार्य” का क़ानून लागू किया है नागरिक उपरोक्त प्रक्रिया का निम्नलिखित तरीके से इस्तेमाल कर सकते है :
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पहली धारा का इस्तेमाल करके कोई भी नागरिक “मास्क अनिवार्य” के क़ानून को रद्द करने का एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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दूसरी धारा का इस्तेमाल करके राज्य के नागरिक इस कानून को खारिज करने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे।
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और जब किसी राज्य के 51% नागरिक अपनी स्वीकृति दर्ज करवा देंगे तो मुख्यमंत्री इस कानून को हटा देंगे।
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और इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करके राज्य के नागरिक स्वयं उन सभी गलत कानूनों को बहुमत का प्रदर्शन करके “सीधे” रद्द कर सकते है, जिन कानूनों को हटाना चाहते है। और नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उन कानूनों को लागू करवा सकते है, जिन कानूनों को वे लागू करवाना चाहते है। और राज्य की तरह किसी जिले के नागरिक भी बहुमत का प्रदर्शन करके ये फैसले ले सकेंगे !! सीधे !!!
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तो यह एक उदाहरण है, जो इस बात को स्पष्ट करता है कि नागरिक सत्ता बढ़ाने वाली प्रक्रियाएं किस पैमाने का बदलाव ला सकती है। ऊपर दी गयी प्रक्रिया में शासन का कोई दखल नहीं है। पूरी प्रकिया नागरिको द्वारा ही शुरू की गयी है, और सरकार के किसी फैसले को खारिज / स्वीकार करने की अंतिम शक्ति भी नागरिको के पास है। यह एक जनमत संग्रह के सदृश प्रक्रिया है, और यह नागरिक सत्ता की श्रेणी की प्रक्रिया है, अधिकार नहीं।
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दुसरे शब्दों में, ऊपर दी गयी प्रक्रिया एक ढाल की तरह है, क्योंकि एक बार जिस देश / राज्य / जिले में यह प्रक्रिया लागू हो जाती है वहां के नागरिको को किसी गलत फैसले को पलटने के लिए कभी भी किसी नेता की जरूरत नहीं पड़ेगी !!
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(6) प्रजा विरोधी नेताओं / कार्यकर्ताओ को चिन्हित करना।
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मुझसे कई कार्यकर्ताओ द्वारा निरंतर यह पुछा जाता है कि, अमुक नेता/कार्यकर्ता कैसा है, या अमुक नेता/कार्यकर्ता के बारे में मेरा क्या विचार है।
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और जब भी मुझे यह चिन्हित करना होता है कि अमुक नेता / कार्यकर्ता / समाजसेवी / लेखक / बुद्धिजीवी / कलाकार आदमी प्रजा की तरफ है या राजवर्ग के पाले में है तो मैं उसे सिर्फ इस कसौटी पर परखता हूँ कि अमुक व्यक्ति प्रजा को ढाल देने की प्रक्रियाओं का समर्थन कर रहा है, या प्रजा को ढाल देने वाली प्रक्रियाओं के खिलाफ है।
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और जब मैं लोगो के चरित्र को इस कसौटी पर कसता हूँ तो मुझे इतिहास से लेकर वर्तमान तक के सभी महान लोग नंगे नजर आने लगते है। क्योंकि ये सभी नेता / कार्यकर्ता नागरिको को सिर्फ Terms & Condition apply वाला अधिकार दिलाना चाहते है, किन्तु नागरिको की सत्ता में वृद्धि करने का विरोध करते है !!
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(6.1) 1947 के जवाहर लाल से लेकर 2020 में मोदी साहेब तक भारत में जितने भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री हुए है मुझे वे सभी नेता प्रजा विरोधी नजर आने लगते है। कोई अपवाद नहीं !!
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इन सभी लोगो ने अच्छा शासन किया, या बुरा शासन किया, यह दीगर बात है। वे कितने न्याय प्रिय थे और कितने निर्मम थे, इसे भी जाने दीजिये। लेकिन एक बात बिलकुल साफ़ है, कि भारत के ये सभी नेता प्रजा की सत्ता में इजाफा करने के सख्त खिलाफ थे। कोई अपवाद नहीं !! कोई भी अपवाद नहीं !! और वे प्रजा की सत्ता में इजाफा करने के खिलाफ इसीलिए थे क्योंकि वे स्वयं राजवर्ग का हिस्सा थे !!!
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(6.2) भारत में पिछले 70 सालो में आज तक जितने भी विधायक-सांसद (और इनकी संख्या लाखों में है) हुए है, उनमें से किसी भी विधायक / सांसद ने अपनी जिन्दगी में कभी भी प्रजा की सत्ता बढ़ाने वाले किसी भी क़ानून का समर्थन नहीं किया, बल्कि उन्होंने पूरा जोर लगाकर उन सभी कानून प्रक्रियाओं का विरोध किया जिससे नागरिको की शक्ति में इजाफा हो !! एक भी अपवाद नहीं !! एक भी नहीं !!
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(6.3) अपनी पूरी जिन्दगी में मैंने आज तक किसी भी कथित महान और कथित ज्ञानी इंसान को नागरिको की सत्ता में वृद्धि करने वाली प्रक्रियाओ का समर्थन करते नहीं पाया !! इसीलिए राजवर्ग के शक्ति में इजाफा करने वाले कानूनों का समर्थन एवं प्रजा की शक्ति बढाने वाले कानूनों का विरोध करने वाले इन सभी महान / ज्ञानी लोगो से मुझे अत्यंत घृणा करता है !! कोई अपवाद नहीं !!
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इन सभी महान / बुध्दिजीवियों / ज्ञानियों ने जनता को गुमराह किया, और उन्हें ढाल विहीन बनाये रखने में कोई कसर नहीं रखी, ताकि राजवर्ग प्रजा का शिकार करते रह सके !! और उन्होंने नागरिक सत्ता को बढ़ाने वाले सभी प्रस्तावों का इसीलिए विरोध किया क्योंकि या तो वे खुद राजवर्ग में शामिल थे या फिर राजवर्ग से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते थे !!
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कार्यकर्ताओ से मेरा आग्रह है कि जब भी वे इतिहास के किसी महान व्यक्ति / ज्ञानी / बुद्धिजीवी / नेता के योगदान की पड़ताल करे तो उसे सबसे पहले यह देखना चाहिए कि क्या वो नागरिक सत्ता में इजाफा करने वाले प्रस्तावों का समर्थन कर रहा था !! और आप पायेंगे कि सभी कथित महान व्यक्ति / राजनेता इस मुद्दे पर जानबूझकर खामोश थे !! क्योंकि वे राजवर्ग+धनिकों की आँख की किरकिरी नहीं बनना चाहते थे !!
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हम रिकालिस्ट है : आजादी आने से भारतीय नागरिको को सिर्फ मत शक्ति (Voting Power) मिली, और जैसा कि हम देख ही रहे है कि नागरिको को राजवर्ग से बचाने के लिए यह अकेली ढाल पर्याप्त नहीं है। हम भारत में कार्यकर्ताओ का एकमात्र समूह है जो जनता को सत्ता दिलाने वाली क़ानून प्रक्रियाओं की मांग को आगे बढ़ा रहे है !! हम Terms & Condition apply के वाले थोथे अधिकारों की मांग करने वालो की फेहरिस्त का हिस्सा नहीं है !! हम प्रजा को ढाल दिलाने की लड़ाई में है !!
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हमारा उद्देश्य नागरिको को कवच, बख्तर, ढाल से लैस कर देना है, ताकि नागरिक राजवर्ग के हमलो से खुद को प्रभावी ढंग से बचा सके। हमेशा के लिए !!
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[ टिप्पणी : एक प्रश्न / आरोप जिसका हम रिकालिस्ट्स को बार बार सामना करना पड़ता है कि – हम इतिहास एवं वर्तमान के लगभग सभी राजनेताओ / महान लोगो का विरोध क्यों करते है ? यह उत्तर इस सवाल के औचित्यपूर्ण जवाब की अंतर्दृष्टि देता है। ]
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Wed Sep 30 2020 19:52:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
2 अक्टूबर पर विशेष : जब तक मोहन के पास राष्ट्रपिता का तमगा रहेगा तब तक गाँधीवाद नए असूचित कार्यकर्ताओ को फंसा कर उनका टाइम पास करता रहेगा। हमें मोहन की जगह अहिंसामूर्ती महात्मा सुभाष चन्द्र बोस को राष्ट्रपिता घोषित करने की जरूरत है। साथ ही हमें पीएम से यह भी कहना शुरू करना चाहिए कि वे 2 अक्टूबर की जगह 23 जनवरी* को राष्ट्रिय पर्व घोषित करें।
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(*) 23 जनवरी, अहिंसामूर्ती महात्मा सुभाष चन्द्र बोस की जयंती है और इस दिन को राष्ट्रिय अवकाश घोषित नहीं किया गया है !! दुःख का विषय है कि, जिस महात्मा ने आजादी दिलाने के लिए देश से निर्वासित होकर फ़ौज खड़ी की उनकी जगह हम आज भी स्वतंत्रता आन्दोलन को तोड़ने वाले आदमी के जन्म दिवस को राष्ट्रिय पर्व के रूप में मना रहे है !!
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(1) यदि आप सुभाष चन्द्र जी बोस को राष्ट्रपिता घोषित करने का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को कहें कि – वे इस सम्बन्ध में आवश्यक गेजेट नोटिफिकेशन जारी करें। प्रधानमंत्री को इसीलिए कहना है कि, क्योंकि भारत में गेजेट नोटिफिकेशन निकालने की शक्ति पीएम के पास होती है, और यह आदेश सिर्फ तब लागू होगा जब यह पीएम इसे गेजेट में छापेंगे।
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पीएम को यह बात “कहने” के लिए आपको जो भी तरीका सूट करता है, आप उस तरीके का इस्तेमाल कर सकते है। किन्तु तरीके का चयन करते समय इस बात पर ध्यान दें कि तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा नागरिक इसका प्रयोग कर सके। क्योंकि प्रधानमंत्री सिर्फ तब इस मांग को मानेंगे जब ज्यादा से ज्यादा नागरिक उन्हें यह आदेश निकालने को कहें।
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(2) हमारा सुझाव है कि पीएम को कहने के लिए पोस्टकार्ड का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। पोस्टकार्ड इसीलिए क्योंकि पोस्टकार्ड भेजना सस्ता, सुलभ एवं सरल है, और ज्यादा से ज्यादा नागरिक इस तरीके का इस्तेमाल कर सकते है। आपको पोस्टकार्ड का तरीका ठीक न लगे तो आप कोई दूसरा तरीका भी इस्तेमाल कर सकते है। यह आपकी इच्छा है। मूल विषय पीएम को “कहने” का है।
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कोंग्रेस के कार्यकर्ता इस प्रस्ताव के खिलाफ है, और उनका मानना है कि, राष्ट्रपिता मोहन को ही रहना चाहिए, सुभाष जी को नहीं।
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RSS के कार्यकर्ताओ का इस बारे में स्टेंड काफी इंट्रेस्टिंग है। उनका कहना है कि हम मोहन की जगह सुभाष बाबू को राष्ट्रपिता बनाने का समर्थन करते है, किन्तु हम यह बात पीएम को नहीं बोलेंगे। हम फेसबुक, व्हाट्स एप आदि पर अपने मित्रो आदि को तो हम यह बात दिन में 3 बार बोल सकते है, किन्तु पीएम को नहीं !!
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(3) यदि आप मोहन की जगह पर अहिंसामूर्ती महात्मा सुभाष चन्द्र बोस को राष्ट्रपिता घोषित करना चाहते है तो निम्नलिखित कदम उठाए :
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(3.1) 2 अक्टूबर को पीएम को पोस्टकार्ड भेजे,
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(3.2) भेजे गए पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी कराएं तथा फोटोकॉपी को “My Letters to Pm” नाम से बनाए गए रजिस्टर में चिपकाएँ
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(3.3) यदि आप ट्विटर पर है तो पीएम को ट्विट भी करें
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(3.4) पोस्टकार्ड में क्या लिखना है - पोस्टकार्ड एवं ट्विट में आपको अपनी मांग को सिर्फ हेश के रूप में लिखना है। पोस्टकार्ड में भी वही हेश लिखी जायेगी, जो ट्विट में लिखी जायेगी। निचे हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों की हेश दी गयी है। आप इसमें से कोई भी हेश लिख सकते है :
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#सुभाषजी_को_राष्ट्रपिता_घोषित_करे
#Honor_Subhash_Boseji_as_Rashtrapita
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#End_Oct_02_as_Holiday
#jan_23_national_holiday
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(4) यदि आप लॉकडाउन के खिलाफ है और यदि आपने अब तक पीएम को लॉकडाउन समाप्त करने को नहीं कहा है तो आप लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने का पोस्टकार्ड भी इसके साथ भेज सकते है।
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(5) मोहन की जगह सुभाष बाबू को राष्ट्रपिता बनाने की मांग का यह पोस्टकार्ड अब से हर वर्ष 2 अक्टूबर को भेजा जायेगा। नागरिक कर्तव्य दिवस यानी 5 तारीख को भेजे जाने वाले पोस्टकार्ड के अतिरिक्त यह एक अतिरिक्त पोस्टकार्ड जोड़ा गया है। चूंकि 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती मनाई जाती है, अत: इस मांग का पोस्टकार्ड हर वर्ष 2 अक्टूबर को अवश्य भेजा जाना चाहिए।
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यह उन कार्यकर्ताओ को एक्सपोज करेगा जो मोहन गाँधी के छद्म विरोध का ड्रामा करते है किन्तु मोहन को राष्ट्रपिता बनाए रखने एवं अहिंसामूर्ती महात्मा सुभाष चन्द्र बोस को राष्ट्रपिता घोषित करने का विरोध करते है। और इसीलिए वे पीएम इस मांग को सिर्फ अपने आस पडौस के मित्रो में उठाते है लेकिन पीएम के सामने नहीं।
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