Pawan Jury BhilwaraRj
Mon Jan 01 2018 17:17:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
रजनीकांत के जीसस पर ये वीडियो देखें :
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<https://www.youtube.com/results?search_query=rajnikant+jesus>
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Mon Jan 01 2018 17:17:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
रजनीकांत के जीसस पर ये वीडियो देखें :
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<https://www.youtube.com/results?search_query=rajnikant+jesus>
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Mon Jan 01 2018 18:01:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
रुग्णता !!!
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AUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने सुषमा स्वराज को ट्वीट किया - येरुशेलम को इस्राएल की राजधानी मानने के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राएल के खिलाफ वोटिंग करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद।
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"@BadruddinAjmal tweets : Thanks Government of India for voting in the UN against US decision of Jerusalem as Israel's capital. @SushmaSwaraj ."
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सुषमा जी का प्रत्युत्तर - शुक्रिया अजमल साहिब। उम्मीद है अब आप भी हमें वोट करेंगे।
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फिलिस्तीन के पक्ष में वोट करना उचित कदम नहीं है - भारत वोटिंग से अनुपस्थित रहने का फैसला कर सकता था। लेकिन हम इसे मुद्दा नहीं बनाएंगे - क्योंकि विदेश ननीति की प्रकृति काफी जटिल एवं बहु आयामी होती है। लेकिन सुषमा जी फिलिस्तीन के पक्ष में वोट करने का हवाला देकर संघ=बीजेपी के पक्ष में मुस्लिमो से वोट मांग रही है !!!
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इनकी फितरत भी कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी से भिन्न नहीं है।
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बदरद्दीन अजमल का ट्वीट - <https://twitter.com/BadruddinAjmal/status/944234723311730688>
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सुषमा जी का ट्वीट - <https://twitter.com/SushmaSwaraj/status/944250670806265856>
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Mon Jan 01 2018 18:12:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कुछ 4 वर्ष पहले रिकालिस्ट राहुल भाई ने यह आकलन दर्शाया था कि जल्दी ही कांग्रेस एवं सपा जैसी सेकुलर पार्टियां एंटी-मुस्लिम हो जायेगी।
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वजह हिन्दू वोट बैंक नहीं है। वजह वह पैसा है जो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक एवं मिशनरीज इन्हे देंगे। और ऐसा इसीलिए क्योंकि मिशनरीज एवं अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत में हिन्दू-मुस्लिम के बीच गृह युद्ध चाहते है। इस वीडियो में यह बताया गया था कि कांग्रेस एवं सपा इतने ज्यादा मुस्लिम विरोधी हो जाएंगे कि विश्व हिन्दू परिषद् तक हमें सेकुलर नजर आने लगेगी !!!
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वीडियो इस लिंक पर देखें - <https://www.youtube.com/watch?v=Cr4t-VZSKdM>
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राहुल गांधी के बाद अब अखिलेश यादव का भी मंदिरो की और दौड़ लगाना इसी क्रम में एक कड़ी है।
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Mon Jan 01 2018 18:53:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
GST के बाद बांग्लादेश से होने वाले कपडे के आयात में 56% की वृद्धि हुयी है !!
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जीएसटी के साथ साथ इसके लिए इम्पोर्ट ड्यूटी भी जिम्मेदार है। बांग्लादेश से भारत को होने वाले कपडे के आयात पर शुल्क नहीं है। और चीन से होने वाले आयात पर भी बांग्लादेश को आयात शुल्क नहीं देना होता। जबकि भारत को चीन से यार्न का आयात करने पर शुल्क चुकाना होता है। इस तरह बांग्लादेश में यार्न सस्ता आयात होता है और वे इससे कपडा बनाकर सस्ते में भारत को निर्यात कर देते है। यही सिलसिला जारी रहा तो भारत के कपडा उद्योग पर गहरी मार पड़ेगी। नतीजा - कपडा उद्योग कम हो जाएंगे, बेरोजगारी बढ़ेगी, जीडीपी घटेगी और विदेशी मुद्रा का भार बढ़ेगा।
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समाधान - वेल्थ टेक्स एवं ज्यूरी सिस्टम आने से भारत में निर्माण लागत चीन से सस्ती हो जायेगी और चीन हमारे उद्योगों को हड़प नहीं सकेगा।
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<http://www.fibre2fashion.com/news/apparel-news/india-s-garment-imports-from-bangladesh-up-56-post-gst-229524-newsdetails.htm>
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India has imported $87.4 million ( Rs 500 crore approx) worth of readymade garments from Bangladesh during July-November 2017, registering a sharp rise of 56 per cent compared to $55.92 million ( Rs 330 crore approx) during the same period last year, according to the data released by Export Promotion Bureau of Bangladesh. Indian apparel manufacturers will face stiff competition from Banglades
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Mon Jan 01 2018 19:22:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
FRDI का हिंदी अनुवाद भी नदारद है !!
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फाइनैंशियल रिजॉल्यूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (FRDI) ; जिस बिल के प्रवृत होने से सरकारी बैंको की एफडी में जमा पैसे में भी कटौती कर दी जाएगी , यदि बैंक घाटे में जाता है। बैंक को घाटा एनपीए देते है। एनपीए कोलेट्रल फ्री लोन से जनरेट होती है। लाखों करोड़ो के कोलेट्रल फ्री लोन घूस खाकर बांटे जाते है। इस घूस में प्रधानमंत्री से लेकर मंत्रियो एवं बैंक के निदेशकों तक का हिस्सा होता है। बाद में लोनिया भाग जाता है। अब जब एनपीए से बैंको को घाटा होगा तो बैंक इस घाटे की भरपायी आपकी जमाओ से कर लेंगे।
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भूमि अधिग्रहण एवं जीएसटी की तरह इस बिल का हिन्दी अनुवाद भी देने से मोदी साहेब ने इंकार कर दिया है। या तो मोदी साहेब हिंदी भाषीयो को भेड़ बकरियों की गिनती में रखते है और मानते है कि उन्हें सिर्फ भाषण ही सुनने चाहिए या फिर वे नहीं चाहते कि इस बिल को कार्यकर्ता पढ़े। क्योंकि हिंदी अनुवाद आने से ज्यादा कार्यकर्ता इसे पढ़ेंगे और यह जान जाएंगे कि यह क़ानून दोष पूर्ण है। अत: मालूम होता है कि उन्होंने हमेशा की तरह इस बिल का भी हिंदी अनुवाद रखने से मना कर दिया है।
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यदि किसी के पास इसका हिंदी संस्करण उपलब्ध हो तो लिंक रखें।
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Tue Jan 02 2018 18:26:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ता किस तरह पब्लिक को झाँसा दे रहे है !!
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मुस्लिम शौहर अपनी बीबियों को मुख्यतया दो तरीके से तलाक देते है।
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(1) तलाक-ए-एहसान एवं तलाक-ए-हसन --- लगभग 99% मामलो में इस प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है। पुरुष एक बार तलाक कहता है और उसे दूसरी बार तलाक कहने के लिए अगले 30 दिनों तक इन्तजार करना होता है। दूसरी बार तलाक कहने के बाद शौहर को फिर से अगले 30 दिनों तक इन्तजार करना होता है , और 30 दिन गुजरने के बाद तीसरी बार तलाक कहा जाता है। मोदी साहेब द्वारा लाया गया क़ानून इस प्रकार दिए गए तलाक पर कोई प्रतिबन्ध नहीं लगाता।
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(2) तलाक-ए-बिद्दत --- इस प्रकार से तलाक 1% से भी कम मामलो में दिया जाता है। इस तरीके में शौहर सिर्फ दो सेकण्ड में तलाक-तलाक-तलाक फोन पर या आमने सामने कहता है, या व्हाट्स एप पर लिख कर भेज देता है। और तलाक हो जाता है।
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संघ के सांसदों ने लोकसभा से जो क़ानून पास किया है वह सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत (2) पर रोक लगाता है, तलाक ए हसन (1) पर नहीं। तो अब से इन 1% मामलों में शौहर को 60 दिनों तक इन्तजार करना होगा !! इतना बड़ा बदलाव !!!
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लेकिन पेड मीडियाकर्मी , मोदी साहेब, और संघ के कार्यकर्ताओ ने देश में इस तरह का माहौल बना दिया है जैसे समूचे ट्रिपल तलाक को प्रतिबंधित कर दिया गया है !! दरअसल संघ के कार्यकर्ता एवं मोदी साहेब नापते तो 100 गज है , किन्तु फाड़ते 2 गज भी नहीं है।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ पर मेरा रूख
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(1) प्रस्तावित क़ानून - यदि कोई हिन्दू युवती ( या मुस्लिम युवती ) किसी मुस्लिम युवक ( या हिन्दू युवक ) से विवाह करती है , तो चाहे वह विवाह के पूर्व या विवाह के पश्चात धर्मांतरण करे या न करे, दोनों ही परिस्थितियों में यदि युवती यह मंशा जाहिर करती है कि उसके वैवाहिक जीवन पर उसका जन्मना धर्म लागू होगा , तो वैवाहिक विवादों का निपटान युवती के जन्मना धर्म के क़ानून के अनुसार ही किया जाएगा। यह क़ानून लव जिहाद की समस्या को कुछ ही महीनो में जड़ से खत्म कर देगा।
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(2) इसके अलावा, मुस्लिम महिलाओ को इस बात की सूचना दी जानी चाहिए कि यदि वे चाहे तो निकाह के दौरान निकाहनामे में वे अपनी मर्जी से तलाक की शर्तें आदि तय कर सकती है। और उन्हें वह भी सूचित किया जाना चाहिए कि मुस्लिम युवतियां/युवक यदि चाहे तो अपना निकाह "स्पेशल मैरिज एक्ट" के तहत दर्ज करवा सकते है। ऐसे स्थिति में मामले का निपटान स्पेशल मरीज एक्ट के तहत होगा, न कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार। तो उस तरह मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव की कोई जरूरत नहीं रह जायेगी।
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(3) भारत की मुख्य समस्या टू चाइल्ड पॉलिसी का अभाव है। इसके अलावा बांग्लादेशी घुसपेठियो को रोकने एवं उन्हें खदेड़ने के क़ानून भी तुरंत लागू करने की जरूरत है। सोनिया-मोदी-केजरीवाल इन कानूनों के विरोधी है और देश में इन्हे लागू नहीं करना चाहते। अपनी नाकामयाबी को छिपाने के लिए मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ता "2 सेकण्ड के ट्रिपल तलाक" को बड़ा मुद्दा बनाकर पेश कर रहे है !!
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Fri Jan 05 2018 08:16:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
क्या कोई तमिल कार्यकर्ता रजनीकांत जी के इस पूरे भाषण का हिंदी / अंग्रेजी अनुवाद कर सकता है। इस वीडियो में रजनीकांत जी यह कहते प्रतीत हो रहे है कि जीसस सर्वोच्च उनका गुरु है, और श्री कृष्ण एवं जीसस एक ही है !!!
Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:
I need English translation of this whole 30 minute Tamil speech by Sri Rajinikant. Any Tamil volunteers? At 13:00, listen for 60 seconds, He clearly says --- Jesus Christ is the supreme most guru !!! And he says Jesus Christ and Krishna are same !!!
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But lets get translation of whole speech. Any Tamil volunteers?
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<https://youtu.be/LHHsQBEk5Bw?t=780>
Thu Jan 11 2018 11:04:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
संघ के नेता और महाराष्ट्र के सीएम श्री डेविड फड़नवीस मंदिरों की जमीने बेचने का मंसूबा बना रहे है -- किसलिए ? वजह संदिग्ध है !!! प्रतीत होता है कि बिक्री से प्राप्त धन का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं में किया जाएगा !!!
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प्रशांत पी उमराव के "प्रमाणिक" ट्विटर एकाउंट से यह ट्विट किया गया है :
<https://twitter.com/ippatel/status/950949114996338688>
" Maharashtra govt allows sale of land of 4,000 temple trusts, including Shirdi, Siddhivinayak, Pandharpur & Mahalaxmi in Kolhapur to increase revenue, Laws are amended."
ट्विट का हिंदी अनुवाद : " शिर्डी, सिद्धिविनायक, पंढरपुर , महालक्ष्मी आदि को शामिल करते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 4000 मंदिर ट्रस्टो की जमीने बेच कर पैसा उगाहने का फैलसा किया है। इसके लिए क़ानून में आवश्यक संशोधन कर लिया गया है "
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<https://twitter.com/ippatel/status/950951508396335105>
" @Dev_Fadnavis govt is working over past 3 yrs to make Temples land available for infrastructure projects. Revenue Depart. proposed 74 provisions to ease of doing business around land."
ट्विट का हिंदी अनुवाद : @Dev_Fadnavis , फड़नवीस सरकार पिछले 3 वर्षो से मंदिरों की जमीने का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं में करने का प्रयास कर रही है। रेवेन्यु डिपार्टमेंट ने आस पास की जमीनों पर धंधा करना सुलभ बनाने के लिए 74 प्रावधान प्रस्तावित किये है"
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बीजेपी नेता मोहन भागवत एवं मोदी साहेब को शामिल करते हुए संघ के सभी कार्यकर्ता इस फैसले का समर्थन कर रहे है !!!
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Thu Jan 11 2018 11:06:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Thu Jan 11 2018 11:08:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
अगस्त, 2017 की खबर -- ये सभी राष्ट्रीय संपत्तियां विदेशियों की झोली में जायेंगी। क्योंकि न तो भारत के कारोबारियों के पास इतना पैसा बचा है और न ही उनके पास रक्षा तकनीक है।
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भारत सरकार रक्षा के 4 निगमों का 25% हिस्सा निजी क्षेत्र को बेचेगी।
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<http://www.livemint.com/Politics/AHw9dQaHTfvqGaozOFjxTM/Govt-to-sell-up-to-25-stake-in-4-defence-PSUs-via-IPO.html>
१) भारत डायनामिक्स ; मिसाइले वगेरह बनाता है। पिछले वर्ष का मुनाफा - 563 करोड़
२) गार्डेन शिप बिल्डर्स ; युद्धपोत निर्माण है। मुनाफा - 160 करोड़
३) मेजेगोन शिप बिल्डर्स ; नौसेना के लिए उपकरण निर्माण। मुनाफा - 637 करोड़
४) मिश्र धातु निगम ; सेना के लिए रक्षा उपकरण। पिछले वर्ष का मुनाफा - 118 करोड़
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यह भी देखें :
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<https://newsclick.in/bjp-government-moves-privatise-30-psus-including-air-india>
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एयर इण्डिया को शामिल करते हुए अब मोदी साहेब ने सार्वजनिक क्षेत्र के 30 उपक्रमों को भी बेचने का फैसला किया है। इनमे मुनाफा कमाने वाले उपक्रम भी शामिल है।
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सोनिया जी / केजरीवाल जी और कोंग्रेस/संघ/आपा के सभी कार्यकर्ता मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहे है।
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एफडीआई , एफडीआई, और एफडीआई। तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल के पास देश की अर्थव्यवस्था को चलाने का एक ही फार्मूला है -- जनता को भारत माता की जय एवं वन्दे मातरम में व्यस्त रखो , और देश की अर्थव्यवस्था अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के हवाले करते जाओ। और फिर शिक्षा एवं चिकित्सा का क्या ? इसका समाधान मिशनरीज द्वारा संचालित स्कूल्स एवं अस्पताल कर देंगे। तो इस तरह सोनिया-मोदी-केजरीवाल की नीति है कि भारत की अर्थव्यवस्था अमेरिकी धनिकों के हवाले करो और गरीब तबके को मिशनरीज को सौंप दो। और इस तरह भारत की दशा ऊंट की तरह हो जायेगी, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक इस्लामिस्ट एवं चाइना को तोड़ने में करेंगे। भारत एवं चीन के मध्य युद्ध की इस पूरी व्यवस्था बनाने के एवज में ही मिशनरीज द्वारा संचालित पेड मीडिया इन नेताओं को "राष्ट्रवादी एवं हिंदूवादी" होने के प्रमाण पत्र देता है।
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समाधान - राईट टू रिकॉल पीएम , वेल्थ टेक्स एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों को लाये बिना किसी भी तरह से इस समस्या से नही निपटा जा सकता।
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Thu Jan 11 2018 18:25:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
ब्राह्मणो के वोट खींचने के लिए ममता बानो का ब्राह्मण कार्ड -- जवाब में संघ मुस्लिमो को अपने पाले में करने के लिए मुस्लिम सम्मलेन आयोजित कर रहा है !!!
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लिंक - <https://aajtak.intoday.in/story/west-bengal-bjp-muslim-convention-in-kolkata-narendra-modi-tmc-mamata-banerjee-tpt-1-976938.html>
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'लेफ्ट-टीएमसी ने मुस्लिमों के लिए कुछ नहीं किया' - बीजेपी
बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल राशिद अंसारी ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि "पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के मतों के सहारे कांग्रेस और लेफ्ट ने राज किया और अब टीएमसी सत्ता में है. इसके बावजूद राज्य में मुस्लिमों की हालत देखिए, वो भिखारी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं. बंगाल में मुस्लिमों की हालत बहुत खराब है, वो बेरोजगारी और गरीबी में जीने को मजबूर हैं. बीजेपी सिर्फ नारेबाजी नहीं करती है बल्कि सबका साथ और सबका विकास के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है"
उन्होंने कहा कि "राज्य के मुस्लिमों को लेफ्ट, कांग्रेस और टीएमसी की सच्चाई से वाकिफ कराने और उन्हें गले लगाने के लिए हम कोलकाता आए हैं. हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना किसी भेदभाव के विकास कर रहे हैं. बंगाल में मुस्लिमों के दिल में बीजेपी ने जगह बनाया है, इससे लेफ्ट से लेकर ममता बनर्जी तक के दिल में घबराहट महसूस हो रही है. इसीलिए वो बेचैन हैं".
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मिशन 2019 में जुटी बीजेपी जहां बाकी राज्यों में हिंदुत्व के रथ पर सवार होकर चुनावी जीत पर फोकस किए हुए हैं वहीं बंगाल में अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी पैर जमाने के लिए मुस्लिमों को भी गले लगाने की कवायद में है. राज्य में मुस्लिम मतों की सियासी अहमियत को देखते हुए बीजेपी कोलकाता के मो. अली पार्क में आज अल्पसंख्यक सम्मेलन कर रही है. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल राशिद अंसारी के साथ पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष और वरिष्ठ नेता मुकुल राय संबोधित करेंगे.
30 फीसदी मुस्लिम मतों की मारामारी
पश्चिम बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है. राज्य में लेफ्ट और टीएमसी के बाद अब बीजेपी भी मुस्लिमों को रिझाने में जुट गई है. इस साल होने वाले पंचायत चुनाव के मद्देनजर ही बीजेपी के मुस्लिम सम्मेलन को देखा जा रहा है. देर से बीजेपी ने महसूस किया है कि वह 30 फीसदी मजबूत मुस्लिम वोटों को लुभाए बिना बंगाल नहीं जीत सकती.
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Fri Jan 12 2018 17:10:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों की आपसी थुक्का फजीहत ; झूठो ने झूठो से कहा है कि - "सच बोलो" !!!
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भारत के राजनेता दुसरे नंबर का सबसे भ्रष्ट वर्ग है। पहला नंबर जजों का है। शायद इन लोगो में घूस के पैसे में बटवारें का कोई झगड़ा पड़ है। इसीलिए बाहर निकलकर एक दुसरे से हिसाब चुकता कर रहे है। बहरहाल , इस एपिसोड से सबसे ज्यादा धक्का न्यायमूर्ति पूजको को पहुंचा है। वे अब तक यह तय नहीं कर पा रहे है, कि अब जबकि "कुछ" मीलार्ड ने खुद ही आकर कह दिया है कि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट है , तो हम भारत की न्यायपालिका एवं जजों को भ्रष्ट माने या नहीं।
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जहां तक हमारी बात है। हम रिकालिस्ट्स पिछले 20 सालो से निरंतर यह कह रहे है कि भारत के 80% से ज्यादा जज भ्रष्ट है, और इन्हें ठीक करने के लिए हमें राईट टू रिकॉल जज एवं जूरी सिस्टम की तत्काल जरूरत है। हमारे द्वारा प्रस्तावित कानूनों के लागू होने के महीने भर में इन स्वयंभू "मीलॉर्ड़ो" का नशा उतर जाएगा और ये जमीन पर चलने लगेंगे।
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प्रस्तावित कानूनों के लिंक देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर को क्लिक करे।
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और जो भी व्यक्ति / कार्यकर्ता न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर चिंता जाहिर करता है , उससे न्य्यापलिका में सुधार के लिए आवश्यक कानूनों के ड्राफ्ट देने को कहें। आप देखेंगे कि समाधान के लिए ड्राफ्ट मांगते ही ऐसे कथित फर्जी सुधारवादी कार्यकर्ता फरार हो जायेंगे। वे सिर्फ न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर चिंतन करना चाहते है , समाधान नहीं चाहते। समाधान को "टालने" का उनका यह अपना तरीका है। और यदि आप जजों के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाकर न्यायपालिका को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना चाहते है तो राइट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम क़ानूनो का समर्थन, प्रचार एवं इनकी मांग करे।
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मैंने अपने फेसबुक एलबम में यह लिखा हुआ है कि भारत के 80% से ज्यादा जज भ्रष्ट है और शेष 20% निकम्मे है। फेसबुक एल्बम के पोस्ट का लिंक - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1454616177989947>
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मेरी मान्यता है कि 80% से ज्यादा जज पूरी तरह से भ्रष्ट है :
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मेरा मानना है कि भारत की सुप्रीम कोर्ट के जजों में से 80% पूरी तरह से भ्रष्ट है, भाई भतीजा वादी है और उन्होंने देशी-विदेशी धनिको के साथ कुटिल गठजोड़ बना रखे है। जो उन्हें पैसा देता है वे उसके हिसाब से काम करते है। शेष 20% भी किसी काम के नही है। क्योंकि वे भारत की अदालतों में किसी भी प्रकार का सुधार लाने के लिए कोई फ़िक्र मोल लेना नहीं चाहते। वे अपनी नौकरी करते है और आँखें मूँद कर पड़े रहते है।
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मेरा यह भी विश्वास है कि भारत की हाई कोर्ट जजों में से भी 80% पूरी तरह से भ्रष्ट है। जो उन्हें पैसा देता है या इन्हे पदोन्नति का चुग्गा डाल देता है , वे उसके हिसाब से फैसले दे देते है।
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मैं यह भी विश्वास करता हूँ कि सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट की तरह ही भारत की निचली अदालतों के जजों में से भी 70% पूरी तरह से भ्रष्ट है। वे पदोन्नति के भूखे तो है ही साथ ही वे अच्छी जगह पोस्टिंग पाने के लिए भी लालायित रहते है। इस वजह से वे हाई कोर्ट / सुप्रीम कोर्ट जजों को खुश रखने के नजरिये से फैसले देते है। और जो भी उन्हें पैसा देता है उसके लिए तो खैर काम करते ही है। शेष 30% भी किसी काम के नही है। क्योंकि वे भारत की अदालतों में किसी भी प्रकार का सुधार लाने के लिए कोई लोड लेना नहीं चाहते। वे अपनी नौकरी करते है और खामोश रहते है।
मैंने अपना यह रुख ट्विटर पर भी रखा है।
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a) #iBelieve , #AboutJudges , #Over80percentSupremeJudgesAreCorruptNepoticNexused and rest are useless
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मेरी फेसबुक एलबम पर यह पोस्ट पढ़े और अपनी फेसबुक एल्बम में भी ऐसा पोस्ट रखें जिसमे यह दर्शाया गया हो कि आपकी मान्यता में भारत के कितने प्रतिशत जज भ्रष्ट है।
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Sat Jan 13 2018 20:35:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
आपत्ति : जज राजनेताओ से ज्यादा भ्रष्ट किस तरह से है ?
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स्पष्टीकरण : भारत के नागरिको के पास राइट टू रिकॉल प्रक्रियाएं न होने के कारण नेता एक बार चुन लिए जाने के बाद निरंकुश होकर भ्रष्टाचार करते है। वे जानते है कि एक बार कुर्सी लपक लेने के बाद उन्हें अगले 5 वर्ष तक किसी भी तरह से हटाया नहीं जा सकता। किन्तु फिर भी उन्हें 5 वर्ष बाद एक बार जनता के सामने वोट लेने आना ही होता है। चुनावों में उतरने की उनकी यह मजबूरी उन्हें कुछ समय के लिए सौम्य बना देती है। हालांकि चुनाव जीतने के अगले दिन ही वे फिर अपने असली रंग में आ जाते है।
किन्तु जजों के सामने इस तरह की कोई मजबूरी नहीं है। एक बार नियुक्त हो जाने के बाद जनता उलटे भी होकर लटक ले तो उनका कुछ उखाड़ नहीं सकती। जनता के प्रति यह शून्य जवाबदेही उन्हें पूरी तरह से बेलगाम कर देती है। निचली अदालतों के जज हाई कोर्ट जजों की और हाई कोर्ट जज सुप्रीम कोर्ट जजों की चमचागिरी करके आजीवन पद पर बने रहते है व जनता को भेड़ बकरियों से ज्यादा नहीं गिनते। और सुप्रीम कोर्ट के जज तो पूरी तरह से निरंकुश है। अत: जज हमारे देश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री है।
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समाधान - राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम क़ानून प्रक्रियाएं लागू होने से जज नागरिको के प्रति जवाबदेह हो जायेंगे और तमीज से अपना काम करने लगेंगे। राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम के प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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Sun Jan 14 2018 07:37:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
एफडीआइ रिटेल के पूर्व प्रस्ताव में मोदी साहेब ने एक मह्त्त्व्पूर्ण बदलाव किया है — विदेशी कम्पनियाँ अब अपने प्रोजेक्ट में 30% भारतीय वस्तुओं एवं श्रम के उपयोग को 5 वर्षों तक के लिए टाल सकेगी !!! संघ के सभी कार्यकर्ता इस फ़ैसले का समर्थन कर रहे है ।
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पहले इस प्रकार का प्रावधान था कि — विदेशी कम्पनियों के कुल विक्रय में 30% हिस्सा “मेड इन इंडिया” होगा । उदाहरण के लिए यदि किसी विदेशी कम्पनी की सालाना बिक्री 100 करोड़ है तो उन्हें 30 करोड़ मूल्य की वस्तुएँ भारत में निर्मित ख़रीदनी होगी या इस मूल्य के बराबर श्रम का भुगतान भारतियों को किया जाएगा । इस व्यवस्था से विदेशी कम्पनियों के कारोबार में भारतीय इकाइयों की भागीदारी होती है और विदेशी कम्पनियाँ सिर्फ़ ज़रूरी वस्तुएँ / कच्चा माल / उपकरण ही आयात करती है , ग़ैर ज़रूरी नही । मोदी साहेब ने अब इस प्रावधान में छूट दे दी है ।
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गुजरात चुनावों के चलते पद्मावती का प्रदर्शन टाल दिया गया था । नतीजे आने के बाद इसे हरी झंडी दे दी गयी है । ज़ाहिर है, मोदी साहेब राजस्थान एवं एम पी चुनावों के कारण ठहरे हुये है । इन राज्यों के चुनाव निपटते ही सिंगल ब्राण्ड की तरह मल्टी ब्राण्ड रिटेल में भी FDI की सीमा बढ़ाकर 100% कर दी जाएगी ।
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इन्हें सुधारने का एक मात्र उपाय राईट टू रिकॉल क़ानून प्रक्रियाएँ है । राईट टू रिकॉल नंगी तलवार की तरह सिर पर लटका रहता है । दरअसल राईट टू रिकॉल पदासीन व्यक्ति को निरंतर कसौटी पर परखता है । जैसे ही व्यक्ति प्रजा हित की अनदेखी करेगा, वैसे ही प्रजा उसे पद से निष्कासित कर देगी । चाहे व्यक्ति जज हो या प्रधानमंत्री ।
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Sun Jan 14 2018 16:44:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
अमेरिका में राईट टू रिकॉल क़ानून कैसे काम करता है, और कैसे इस वजह से वहां जजों के भ्रष्टाचार में कमी आती है।
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बलात्कार के एक आरोपी को किसी जज ने बहुत कम सजा दी। और अब वहां के नागरिक राईट टू रिकॉल प्रक्रिया का प्रयोग करके उसे नौकरी से निकालने का प्रयास कर रहे है। यदि रिकॉल असफल भी हो जाता है तो ऐसा प्रयास इस जज एवं अन्य जजों के व्यवहार में परिवर्तन ले आएगा।
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<https://patch.com/california/paloalto/effort-recall-stanford-rape-trial-judge-continues>
और यहाँ इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि पूरे देश में सिर्फ एक मात्र राईट टू रिकॉल पार्टी है जो जजों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं लागू करने की मांग कर रही है , और इसके लिए हमने क़ानून ड्राफ्ट भी प्रस्तावित किया है। जबकि सोनिया-मोदी-केजरीवाल और इनके अंधभगत हमेशा से जजों पर राइट टू रिकॉल प्रक्रियाओ के विरोधी रहे है , और आज भी वे इन प्रक्रियाओ का विरोध कर रहे है। हमारे द्वारा प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Sun Jan 14 2018 17:17:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं उनके अंधभगत भारत के उच्च मध्य वर्ग को दोनों हाथो से लूट रहे है और उन्हें लगातार पंगु बनाते जा रहे है। वजह -- भारत के निम्न वर्ग के मतदाताओ को प्रभावित करने की उच्च मध्य वर्ग की क्षमता घटी है , जबकि टीवी चेनल्स के माध्यम से अब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत के मतदाताओं पर अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत पकड़ बना चुके है।
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल द्वारा क्रमिक रूप से निरंतर उठाये जा रहे एवं जानबूझकर अनदेखे किये जा रहे कदमो पर गौर कीजिये -- १) नोटबंदी, २) वेल्थ टेक्स का विरोध , ३) जीएसटी , ४) रिटेल बाजार को शामिल करते हुए सभी क्षेत्रो में एफडीआई का समर्थन , ५) सिंगल ब्रांड रिटेल में स्थानीय इकाइयों की भागीदारी की सीमा में छूट देना , ६) और सबसे बदतर FRDI बिल , जो कि उच्च मध्य वर्ग की कमर तोड़ देगा।
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ये सभी फैसले अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों एवं टाटा, गोदरेज जैसे भू माफियाओ को गैर वाजिब लाभ तथा भारत के छोटे / मझौले कारोबारियों को गैर वाजिब हानि पहुंचाते है। ये सभी फैसले मोदी साहेब द्वारा लिए गए है और सोनिया-केजरीवाल एवं इनके सभी अंधभगत इन सभी फैसलों के समर्थन में है।
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल ऐसे फैसले इसीलिए ले पा रहे है क्योंकि -- भारत के मतदाताओं पर उच्च मध्य वर्ग की पकड कमजोर हुयी है। अब व्हाट्स एप , फेसबुक एवं टीवी चेनल्स की वजह से अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के पास मतदाताओं को प्रभावित करने की ज्यादा बेहतर व्यवस्था मौजूद है।
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तो इस वजह से सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने भारत के उच्च मध्य वर्ग को भाव देना कम कर दिया है।
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FRDI बिल खुली लूट है, और यह क़ानून भारत के उच्च मध्य वर्ग की जमाओ एवं कोष को भारी नुक्सान पहुंचाएगा। इससे वे और कमजोर हो जायेगे और 2019 के आम चुनावों में मतदाताओ को प्रभावित करने की उनकी ताकत में और भी कमी आएगी।
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हमारे द्वारा प्रस्तावित समाधान -- भारत के नागरिको को नेताओं का पूजन करने की जगह राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स आदि क़ानून लागू करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए। इन कानूनों के आने से भारत की स्थानीय इकाइयों की निर्माण क्षमता बढ़ेगी और अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का प्रभाव कम होने लगेगा। अन्यथा, सोनिया-मोदी-केजरीवाल के भरोसे रहने से भारत पर अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का पूर्ण नियंत्रण लगभग नहीं बल्कि पूरी तरह से तय है।
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राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम एवं वेल्थ टेक्स के प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Sun Jan 14 2018 19:27:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
बिकाऊ ओपिनियन पोल - कैसे बिकाऊ राजनीती शास्त्री, बिकाऊ अर्थशास्त्री एवं बिकाऊ पत्रकार ओपिनियन पोल के नतीजे गढ़ते है।
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एक सवाल लीजिये - भारत के 90 करोड़ मतदाताओं में से कितने प्रतिशत मतदाता सुप्रीम कोर्ट / हाई कोर्ट एवं लोअर कोर्ट के जजों पर भरोसा करते है ?
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स्पष्ट है कि किसी के भी पास इतना पैसा एवं समय नहीं है कि इस सवाल का जवाब जानने के लिए वह 90 करोड़ नागरिको की पड़ताल करे।
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तो एक तरीका यह है कि कुल मतदाताओं में से अक्रमत ढंग से किन्ही 10,000 मतदाताओं को चुना जाए एवं उनसे यह प्रश्न किया जाए। और यहीं पर बिकाऊ बुद्धिजीवी अपनी सुविधानुसार ओपिनियन पोल गढ़ देते है।
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मान लीजिये कोई बिकाऊ बुद्धिजीवी यह दर्शाना चाहता है कि भारत के 90% मतदाताओं को जजो पर भरोसा है। अब मान लीजिये कि वह इन 10,000 मतदाताओं से यह प्रश्न पूछता है , और पाता है कि उनमे से सिर्फ 2,000 नागरिक ही जजों पर भरोसा करते है, और शेष 8,000 उन्हें बदमाश एवं भ्रष्ट मानते है। तब बिकाऊ बुद्धिजीवी अपने सर्वे में उन 2,000 नागरिको को शामिल करेगा और इन 8,000 में से सिर्फ 200 को रखते हुए शेष 7,800 नागरिको को सर्वे से बाहर कर देगा !!
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और अब इस घपले का अंतिम परिणाम वे इस तरह बताएँगे -- देखिये, हमने पूरे देश से रेंडमली चुने गए 2,200 नागरिको पर सर्वे किया है , और यह पाया है कि इनमे से 2,000 नागरिक जजों पर पूरा भरोसा करते है, जबकि 200 नागरिक जजों पर भरोसा नहीं करते। और इस तरह से हम कह सकते है कि भारत के नागरिको में से 90% नागरिक जजों को ईमानदार मानते है !!! और फिर वे इस सर्वे को टीवी एवं अखबारों में प्रसारित करके देश के 100% नागरिको पर यह जताएंगे कि देश के 90% नागरिको के अनुसार हमारे जज ईमानदार है।
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तो इस तरह पिछले 100 सालों से बिकाऊ राजनीति शास्त्री, बिकाऊ अर्थशास्त्री एवं बिकाऊ पत्रकार सर्वे कर कर के और इनका प्रसारण कर कर के नागरिको की आँखों में धुल झोंक रहे है।
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समाधान ?
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हमें सभी नागरिको से यह आग्रह करना चाहिए कि वे किसी मुद्दे पर अपनी राय ट्विटर पर रखें। इससे इन बिकाऊ बुद्धिजीवियों के फर्जी ओपिनियन पोल्स गढ़ने की क्षमता घटती चली जायेगी।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Tue Jan 16 2018 17:19:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पतंजलि के मामले में एफडीआई संभवत भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
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१) मान लीजिये एक विदेशी कम्पनी को इस शर्त पर आमंत्रित किया जाता है कि -- वे भारत में अपने उत्पाद बेचेंगे और जो रुपया वे भारत में कमाएंगे उसके बदले में रिजर्व बैंक ऑफ़ इण्डिया उन्हें डॉलर में भुगतान करेगा। इस स्थिति में भारत पर विदेशी मुद्रा का भार बढेगा और हमें घाटा होगा।
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२) लेकिन मान लीजिये कोई विदेशी कम्पनी किसी भारतीय कम्पनी में इस शर्त पर निवेश करती है कि -- यह साझा उद्यम भारत में किसी उत्पाद की बिक्री नहीं करेगा, लेकिन भारत में इस साझा उद्यम द्वारा निर्मित उत्पादों का विक्रय भारत से बाहर किन्ही अन्य अमेरिकी-यूरोपीय देशो में करेगा। इस बिक्री से होने वाले लाभ को साझेदारो द्वारा आपस में बाँट लिया जाएगा। तो इस तरह का अनुबंध भारत पर किसी प्रकार की विदेशी मुद्रा के भुगतान का भार नहीं रखता।
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जहां तक मुझे जानकारी है , यदि पतंजली विदेशी कम्पनी से अनुबंध करती है तो वह बिंदु (२) में वर्णित परिस्थिती को प्राथमिकता देगी। तब पतंजली द्वारा विदेशी कम्पनी के साथ की गयी ऐसी साझेदारी भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।
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लेकिन, यदि पतंजलि बिंदु (१) के तहत अनुबंध करती है तो यह भारत पर विदेशी मुद्रा का भार बढ़ाएगा। किन्तु मुझे नहीं लगता कि पतंजली को बिंदु (१) में वर्णित परिस्थिति के तहत समझौता करने की जरूरत है। पतंजली को भारत में स्थानीय स्तर पर बिक्री बढाने के लिए पूँजी की आवश्यकता नहीं है। उन्हें विदेशी पूँजी की जरूरत सिर्फ भारत से बाहर कारोबार फैलाने के लिए है।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Tue Jan 16 2018 17:33:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
जैसा कि नजर आ रहा था , मोदी साहेब के आदेशानुसार सेंसर बोर्ड ने फिल्म पद्मावती की रिलीज को हरी झंडी दे दी है। संघ के सभी कार्यकर्ता मोदी साहेब के इस फैसले का भरपूर समर्थन कर रहे है !!
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जिन 2-3 राज्यों में चुनाव नजदीक है और वोट लेने के लिए बीजेपी नेताओ को सड़को पर लौटना होगा, उन राज्यों को छोड़ते हुए शेष पूरे भारत में फिल्म प्रदर्शित होगी और जो लोग इसे थियेटर में नहीं देखेंगे बाद में उनके लिए सेटेलाइट टीवी पर इस फिल्म को निरंतर हफ्ते में दो बार दिखाया जाएगा।
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सिर्फ संघी ही जानते है कि इस फिल्म की रिलीज के एवज में उन्हें कितना मोटा पैसा मिला है।
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समाधान - फिल्म को 500 नागरिको की ज्यूरी के हवाले किया जाए और यह ज्यूरी तय करे कि फिल्म को बेन किया जाना चाहिए या रिलीज किया जाना चाहिए।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Tue Jan 16 2018 17:57:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
रेलवे में खाना परोसने का काम भी अब नेस्ले करेगी -- संघ के नेता मोदी साहेब , रेल मंत्री पियूष गोयल एवं संघ के सभी कार्यकर्ता मिलजुल कर ऐसी स्कीम पर काम कर रहे है जिससे अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों की कम्पनी नेस्ले को रेलवे में भोजन परोसने के एवज में बड़ा मुनाफा होगा।
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जैसा कि मैंने जिग्नेश मेवानी के समर्थको से कई बार कहा है कि, उन्हें संघ के नेता मोदी साहेब , बीजेपी नेता मोहन भागवत एवं अन्य संघ=बीजेपी कार्यकर्ताओ को "नव पेशवा" कह कर पुकारने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह विशेषण संघ=बीजेपी नेताओं पर कतई लागू नहीं होता। सभी नकारात्मक पहलुओ के बावजूद पेशवाओ ने भारतीय अर्थव्यवस्था अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के हाथो में सौंप देने के लिए कभी काम नहीं किया। जबकि संघ के नेता मोदी साहेब, बीजेपी नेता मोहन भागवत एवं संघ=बीजेपी के सभी कार्यकर्ताओ की एक मात्र हैसियत अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों एवं मिशनरीज के प्रतिनिधियों की है। और इन लोगो से सिर्फ आप एक ही उम्मीद कर सकते है -- कतरा कतरा करके ये लोग भारत के सभी संसाधन अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के हवाले कर देंगे। और ये लोग ऐसा धीरे धीरे नहीं बल्कि बहुत तेजी से कर रहे है।
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समाधान - राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम बिना इन्हें किसी भी तरह से काबू नहीं किया जा सकता। इन कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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नेस्ले न्यूज की खबर का लिंक - <http://www.financialexpress.com/india-news/pilot-scheme-nestle-to-vend-ready-to-eat-meals-for-train-passengers/991100/>
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Tue Jan 16 2018 19:02:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
90 के दशक में संघ के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया , मोदी साहेब और केशु भाई पटेल एक ही टीम में थे। तब संघ के नेता शंकर सिंह वाघेला व कई संघ के अन्य विधायक कोंग्रेस से जुड़ने की कोशिश कर रहे थे। कहा एवं माना जाता है कि , संघ के एक वरिष्ठ नेता एवं विधायक आत्माराम को पीटने के लिए मोदी साहेब एवं तोगड़िया जी ने संघ के कुछ कार्यकर्ताओ को उकसाया। आत्माराम पटेल की जमकर पिटाई हुयी, उनके कपडे फाड़ दिए गए और उन्हें जान बचाकर अधनंगी हालत में स्टेडियम से भागना पड़ा !! पर हमलावर कार्यकर्ताओ ने रोड़ तक उनका पीछा किया !! स्टेडियम में भरपूर पुलिस व्यवस्था थी , लेकिन उन्हें आदेश दिए गए थे कि वे कोई हस्तक्षेप न करे !!! तो उन्होंने भी इस मामले में दखल नहीं किया। आत्माराम ने थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गयी, जिसमे हत्या का प्रयास करने का आरोप लगाया गया। लेकिन इस रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही नहीं हुयी। यह घटना 1996 की है। इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि, पूरा वाकया -- हमलावर, पीड़ित, उकसाने वाले, योजना, मारपीट और पुलिस को चुप रहने के आदेश आदि सभी कृत्य संघ के कार्यकर्ताओ एवं नेताओं द्वारा किये गए थे। कोंग्रेस एवं सीपीएम का इस घटना से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था !!
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और अब एक दिन अचानक , 21 साल बाद , 1996 के उस मारपीट के केस में मजिस्ट्रेट संघ के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया के खिलाफ "गैर जमानती वारंट" जारी करता है !!! क्यों ?
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न्याय की इतनी "जल्दबाजी" क्यों ? क्योंकि, ऐसी चर्चा है कि प्रवीण भाई तोगड़िया गुजरात के मंत्री एवं संघ के नेता नितिन भाई पटेल एवं हार्दिक पटेल के साथ गठजोड़ बना रहे है !!! तो तोगड़िया जी को सबक सिखाने के लिए संघ के शीर्ष नेता मोदी साहेब एवं गुजरात के मुख्यमंत्री रूपाणी जी ने मजिस्ट्रेट को आदेश दिया कि वे 21 साल पुराने इस मामले को निकालकर टॉप गियर में डाल दे !!!
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हमारी न्याय व्यवस्था को नेताओं एवं जजों ने इसी तरह से रचा है। यह खुद से ही धीमी नहीं है, इसे जान बूझकर धीमा बनाया गया है। ताकि लोगो की एक टांग में मुकदमो की रस्सी लिपटी रहे। जब जिसको खींचना हो उसकी टांग खींच कर उसे "क़ानून का शासन" के नाम पर सींखचो में डाला जा सके। चाहे मामला लालू का हो या श्री गुरमीत राम रहीम जी का, चाहे आसाराम जी बापू का। केस लम्बे चलते नहीं है। इन्हें जान बुझकर लटका कर रखा जाता है। इसी लटकाने को "केस चल रहा है" कहा जाता है। हमारे सभी नेता एवं जज इन मुकदमो का इस्तेमाल इसी तरह से अपने फायदे के लिए लोगो को काबू करने में करते है। हमारे पीएम से लेकर सभी पार्टियों के नेता एवं जज आदि इस गोरखधंधे में शामिल है।
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आप कुछ भी कर लीजिये, वे भारत की अदालतों को चुस्त नहीं करेंगे। क्योंकि इससे उनके हाथ से लोगो को काबू में रखने की ताकत निकल जायेगी। इन्हें सिर्फ राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों द्वारा ही सुधारा जा सकता है। अन्य कोई उपाय नहीं।
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राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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खबर का न्यूज लिंक - <http://indianexpress.com/article/india/attempt-to-murder-case-non-bailable-warrant-against-vhp-leader-praveen-togadia-38-others-5012212/>
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Fri Jan 19 2018 20:18:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
अंदाजा लगाइये कि, पद्मावती फिल्म पर रोक लगाने के फैसले को किस जज ने रद्द किया होगा ? संकेत - इन्ही राष्ट्रवादी ( !!) जज ने जल्लिकट्ट को बेन किया था, और मुंबई में डांस बार फिर से खुलवाने के आदेश भी इन्ही ने दिए थे !!!
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पद्मावती फिल्म को रिलीज करने का आदेश देने वाले इस राष्ट्रवादी जज का नाम है -- दीपक मिश्रा !!! वही दीपक मिश्रा जिसके नाम का लॉकेट आजकल संघ के कार्यकर्ता अपने गले में लटकाये घूम रहे है !!
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मुख्यमंत्री यदि चाहे तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए पद्मावती फिल्म पर बेन जारी रख सकते है। सुप्रीम कोर्ट जज के पास तब सिर्फ एक विकल्प बचता है - वह केंद्र सरकार को यह आदेश दे सकता है कि राज्य सरकार को बर्खास्त किया जाये। पर यदि प्रधानमंत्री राज्य सरकार को बर्खास्त करने से इंकार कर देते है तो सुप्रीम कोर्ट जज के पास अपने चेंबर में जाकर खामोश बैठ जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। भारत के सुप्रीम कोर्ट के पास केंद्र सरकार को बर्खास्त करने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री चाहे तो सुप्रीम कोर्ट जज को नौकरी से निकाल सकते है।
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तो अब हमारे मुख्यमंत्रियों एवं प्रधानमंत्री को यह तय करना पड़ेगा कि वे सुप्रीम कोर्ट जज की आज्ञा का पालन करते है या उसे चुप करके बैठ जाने को कहते है।
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असल में अब मालूम होगा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्रीयो में से किसके सीने का नाप 56" है।
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भारत के लोग पीएम एवं सीएम को चुनते है सुप्रीम कोर्ट जज को नहीं। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट जज ने भारत के पीएम एवं सीएम को जमा कर दिया है तब भारत के मतदाताओं को यह तय करना चाहिए कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश को नौकरी से निकालने का अधिकार चाहिए या नहीं ?
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दीपक मिश्रा ने पद्मावती फिल्म पर बेन को खारिज करते हुए इसे रिलीज करने के आदेश दिए है। और अब हम मेरुदण्ड विहीन मुख्यमंत्रियों एवं प्रधानमंत्री को इस आदमी के आदेश का पालन करते देखेंगे !!
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समाधान - भारत के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज के क़ानून की मांग करे ताकि नागरिक जब चाहे तब सुप्रीम कोर्ट जज को नौकरी से निकाल सके।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Sat Jan 20 2018 08:03:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सभी नागरिको से आग्रह है कि, वे पद्मावती फिल्म न देखें। यदि कुछ मल्टीप्लेक्स इस गलीज़ फिल्म का प्रदर्शन करते है तो इस दौरान आप उस मल्टीप्लेक्स में कोई अन्य फिल्म भी देखने न जाए।
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क्योंकि कई कार्यकर्ता इस फिल्म का प्रदर्शन करने वाले मल्टीप्लेक्स का घेराव कर सकते है। पुलिस विभाग में मौजूद कई राजपूत एवं ठाकुर भी इन कार्यकर्ताओ के समर्थक एवं फिल्म के विरोधी है। तो सम्भावना है कि वहां हिंसा होगी। और इस हिंसा की चपेट में आप आ सकते है या आपका वाहन क्षतिग्रस्त हो सकता है।
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मैं पद्मावती फिल्म का विरोध करने वाले इन कार्यकर्ताओ के हिंसक तरीको का विरोध करता हूँ। लेकिन जिस देश में जज भ्रष्ट हो जाते है वहां हिंसा बढ़ती है और एक बिंदु के बाद अवाम इस हिंसा का समर्थन भी करने लगती है। लेकिन हम यहाँ आपकी एवं आपके वाहनों सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
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तो कृपया उन सभी मल्टीप्लेक्स एवं थियेटरों से दूरी बनाकर रखें जिनमे यह फिल्म प्रदर्शित होती है।
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Sat Jan 20 2018 08:26:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कुछ स्थानीय कार्यकर्ता पद्मावती फिल्म की DVD मुफ्त में वितरित करने तथा स्थानीय स्तर पर फ्री हॉट स्पॉट उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहे है, ताकि नागरिक इस फिल्म का MP4 वर्जन फ्री डाउनलोड कर सके।
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पद्मावती एक गलीज़ फिल्म है , और यह आईपीसी की धारा 295 एवं 295A का उलंघन करती है। अत: इस फिल्म को बेन करके इसके निर्माता, निर्देशकों पर पेनल्टी लगाकर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।
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मैंने सुना है कि, कुछ स्थानीय कार्यकर्ता पद्मावती फिल्म की लाखों DVD मुफ्त में बांटने वाले है, तथा वे इसका फ्री डाउनलोड उपलब्ध कराने के लिए फ्री हॉटस्पॉट भी सेट करेंगे। मैं इस तरह की गतिविधि का विरोध करता हूँ। मैं इस फिल्म पर कानूनी प्रतिबन्ध लगाने के पक्ष में हूँ।
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इसके अलावा कार्यकर्ता थियेटर मालिको को भी धमका रहे है , कि यदि उन्होंने एक भी स्क्रीन पर इस फिल्म का प्रदर्शन किया तो उनके लिए अच्छा नहीं होगा। मैं इस तरह की आक्रामक गतिविधियों का विरोधी हूँ। हालांकि जिस देश में जज भ्रष्ट हो जाते है और मुख्य नीति नियन्ता जजों के भ्रष्टाचार की तरफ से आँखे मूँद लेते है उस देश में इस तरह की हिंसा आम बात हो जाती है।
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तो कृपया ऐसे किसी भी थियेटर में कोई अन्य फिल्म भी देखने न जाए जिस थियेटर की किसी एक स्क्रीन पर भी पद्मावती फिल्म चल रही हो। इससे आपके एवं आपके वाहन की सुरक्षा खतरे में आ सकती है।
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Sun Jan 21 2018 19:36:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Rahul Arya Ballari Karnataka:
Sri Sri Ravi Shankar says Padmaavat(i) movie is a beautiful tribute to Rani Padmini. He even wonders why people are opposing it !!! Jai Guru Dev !!!
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Sun Jan 21 2018 20:03:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
तोगड़िया जी का यह वीडियो देखें। अवधि- 12 मिनिट। तोगड़िया जी का कहना है कि -- उन्होंने वंचित तबके के हिन्दूओ को चिकित्सा मुहैया कराने के लिए 10,000 हिन्दू डॉक्टर्स का एक संगठन बनाया है। किन्तु केंद्र सरकार के अधीन पुलिस अधिकारीयों ने इन डॉक्टर्स को घर घर जाकर धमकाना शुरू कर दिया !! .
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इसके अलावा भी उन्होंने कई आरोप लगाए।
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तोगड़िया जी एवं मोदी साहेब के बीच ठनी इस लड़ाई में किसी भी पक्ष के समर्थन में नहीं हूँ। ये दोनों ही महाशय मंदिरो को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए आवश्यक क़ानून का विरोध करते है। दरअसल इसके बीच विवाद का मुख्य बिंदु भी मंदिर ही है। दोनों ही चाहते है कि मंदिरो के ट्रस्ट इनके अपने लोगो के कब्जे में रहे। अब मंदिरो को कब्जे में करने की यह लड़ाई अब सतह पर आ गयी है।
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Sun Jan 21 2018 20:45:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
प्रश्न : "हमने आपने जब पद्मावती फ़िल्म देखी नहीं तो विरोध किस आधार पर कर रहे हैं ?"
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स्पष्टीकरण : निर्माता फिल्म इसीलिए बनाता है ताकि लोग इसे देखें। इस तर्क के मुताबिक चले तो इस फिल्म का समर्थन या विरोध सिर्फ उस व्यक्ति को करना चाहिए जिसने यह फिल्म देखी हो !! इस लिहाज से यह फिल्म लगभग 5000 हजार करोड़ का कारोबार करेगी, और ज्यादातर लोग इसे देखने चले जायेंगे। और यही निर्माता, निर्देशक का उद्देश्य है। फिल्म देखने के बाद इसका विरोध या समर्थन करने के कोई मायने नहीं है।
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हमारा प्रस्ताव है कि - 500 नागरिको की ज्यूरी को यह फिल्म दिखायी जाए। यदि वे इसे बेन करते है तो फिल्म बेन होगी और यदि वे इसे रिलीज करने के आदेश देते है तो फिल्म रिलीज होगी।
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इस समाधान के अतिरिक्त इस फिल्म का किसी भी तरह से विरोध करना इस फिल्म का प्रचार एवं समर्थन करना है। सभी संगठनों समेत सभी नेता, पार्टियां, कलाकार , मीडिया आदि पिछले 4 महीने से यही कर रहे है। मतलब वे इस फिल्म का विरोध नहीं कर रहे है। दरअसल वे इस फिल्म का प्रचार कर रहे है। वे इस फिल्म को चर्चा में ला रहे है। जिससे लोगो में इसके प्रति कौतुहल बन जाता है। और फिर वे थियेटर की तरफ इसे देखने के लिए दौड़ लगा देते है। और जो इस फिल्म को नहीं देखने का अभियान चलाते है उनकी तरफ यह सवाल उछाला जाता है कि -- जब आपने यह फिल्म देखी ही नहीं है तो इसका विरोध या समर्थन कैसे कर सकते है। जाइये पहले देखकर आइये। गोया कहा जा रहा हो कि - आप बिना गटर में उतरे कैसे बता सकते है कि इसमें मल-मूत्र एवं विष्ठा है। जाइये पहले इस परनाले में डुबकी लगाइये !!! ऐसे नहीं होता है।
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ऐसा प्रश्न मार्केटिंग विशेषज्ञों द्वारा प्लांट किया जाता है। कोई इसे मुख्य धारा में सुनता या पढता है और वैसे ही आगे बढ़ा देता है। वर्ना दो मिनिट रूककर सोचने वाला व्यक्ति इस बात को समझ लेता है कि यह एक चालाक प्रश्न है और सिर्फ फिल्म देखने के लिए प्रेरित करने के लिए पूछा जा रहा है। हालांकि कई लोग यह चालाकी जान बूझकर नहीं करते। वे बस जैसे यह प्रश्न सुनते / पढ़ते है वैसे ही आगे बढ़ा देते है।
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Sun Jan 21 2018 21:16:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
30 सेकंड का यह वीडियो देखें ; गलीज़ फिल्म पद्मावत के दृश्य में बड़ी रानी राणा रतन सिंह से कहती है -- भेज दो छोटी रानी ( पद्मावती ) को खिलजी के पास , चित्तोड़ तो बच जायेगा ..... "
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<https://www.youtube.com/watch?v=mWAc0cEhHZ8&feature=youtu.be&t=464>
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जबकि मलिक मोहम्मद जायसी के काव्य में ( जो कि खुद एक काल्पनिक कथा है ) और ऐतिहासिक पाठ्य में भी कहीं भी कभी भी इसका उल्लेख नहीं है, जब बड़ी रानी ने चित्तोड़ बचाने के लिए रानी पद्मिनी को खिलजी के पास भेज देने को कहा हो।
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इसके अलावा जायसी की काव्य एक फंतासी यानि काल्पनिक कथा है। रानी पद्मिनी कभी भी आईने के सामने नहीं आई थी। और न ही कभी खिलजी ने उन्हें आईने में देखा था। वहां कोई आईने थे ही नहीं। नेहरु जी ने जब चित्तोड़ किला विजिट किया था या गाइड की शूटिंग के दौरान ये आईने चित्तोड़ के दुर्ग में लगवाये गए थे। बाद में इन्हें हटाया नहीं गया और ये आईने वहीँ पर लगे रह गए। दरअसल, खिलजी चित्तोड़ अपने शासकीय विस्तार के लिए आया था। जायसी ने लिखा कि -- खिलजी ने राणा रतन सिंह से कहा था कि, यदि वह उसे किले के दरवाजे तक छोड़ने आएगा तो वह इसके एवज में ढेर सा सोना देगा। यह भी सरासर झूठ है -- भारत में यह परम्परा थी एवं आज भी है कि, मेजबान अपने मेहमान को दरवाजे तक छोड़ने आता है। राणा उसी परम्परा का पालन कर रहे थे। वे स्वर्ण के उसे किले की दरवाजे तक छोड़ने नही आये थे।
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कुल मिलाकर जायसी का लेखन काल्पनिक है।
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और रानी पद्मिनी राजस्थान एवं देश के कुछ अन्य प्रदेशो में भी देवी की तरह मानी जाती है। और इस आधार पर आईपीसी की दफा 295 एवं 295-A के तहत इस फिल्म को बेन करके निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक, मुख्य अभिनेताओ एवं अभिनेत्री पर कई सौ करोड़ का आर्थिक दंड लगाकर उन्हें 3 वर्ष तक के लिए कारागार में भेजा जाना चाहिए।
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अफ़सोस की बात है कि मोदी साहेब एवं उनकी मंत्री स्मृति ईरानी ऐसी गलीज़ फिल्म का सरेआम समर्थन कर रहे है, और संघ के सभी कार्यकर्ता उनके इस फैलसे के समर्थन में है।
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Tue Jan 23 2018 18:19:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
अहमदाबाद में पद्मावती के विशेष शो के साथ ही आगजनी एवं मारपीट की शुरुआत।
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<http://www.news18.com/news/india/unhappy-with-screening-of-padmaavat-protesters-set-vehicles-ablaze-outside-ahmedabad-multiplex-1640041.html>
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23 जनवरी 2018 , 10:30 pm
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अहमदाबाद का एक थियेटर ने पत्रकारों के लिए गलीज फिल्म पद्मावती के विशेष शो का आयोजन किया था। थियेटर मालिक द्वारा इन्हें इस बात के पैसे भी दिए थे कि वे कल के सभी अखबारों में फिल्म की तारीफ करने वाले रिव्यू लिखे।
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पद्मावत फिल्म का विरोध करने वाले कार्यकर्ता भी अमुक स्थल पर पहुँच गए।
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और फिर वही हुआ जो कि ऐसे देश हर उस देश में होता है जहाँ के प्रधानमंत्री , मंत्री एवं जज सर से पाँव तक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हो।
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर घूस खाओ और पूरे देश को सुलगने के लिए छोड़ दो।
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देश के प्रधानमंत्री को ऐसी गलीज़ फिल्म का समर्थन करते देखना बेहद लज्जित करने वाला है।
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Tue Jan 23 2018 19:10:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पद्मावती फिल्म के समर्थन में कनाडाई नागरिक एवं "राष्ट्रवादी" अभिनेता अक्षय कुमार ने अपनी फिल्म "पेडमेन" की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी है। पहले दोनों फिल्में 25 जनवरी को रिलीज होनी थी। किन्तु अक्षय कुमार ने बताया कि, इससे "पद्मावती" फिल्म को नुकसान होगा, और वे ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहते।
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<https://www.youtube.com/watch?v=9u-zwfDvgrs>
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हालांकि इसके पीछे व्यावसायिक दृष्टिकोण भी है। यदि पेडमेन पद्मावती के साथ रिलीज होती तो पेडमेन के दर्शको की संख्या भी गिरती। दरअसल अक्षय कुमार एवं भंसाली के प्रायोजक एक ही है। दोनों उनके ही आदमी है। दोनों फिल्मों में उनका ही पैसा लगा है। तो वे नहीं चाहते कि फिल्मों का व्यवसाय आपस में बँट जाए। अत: उन्होंने अक्षय कुमार को अपनी फिल्म आगे बढ़ा देने को कहा, ताकि दर्शको के पास सिर्फ पद्मावती ही विकल्प के रूप में रहे।
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( ज्ञातव्य है कि , आमिर खान की "दिल" एवं सन्नी देओल की "घायल" , "लगान" एवं "ग़दर" और "राजा हिन्दुस्तानी" एवं "घातक" एक ही दिन रिलीज हुयी थी। सभी छः फिल्मे बड़ी सुपरहिट रही !! )
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Tue Jan 23 2018 19:35:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
जिस पैनल को पद्मावती फिल्म दिखायी गयी थी उनमें से एक इतिहासकार का कहना है कि -- इससे पहले कि हम अपने ऐतराज एवं टिप्पणियाँ सेंसर बोर्ड को भेजें उससे पहले ही फिल्म को सर्टिफिकेट दे दिया गया !!
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( see video 12:30 to 14:20 )
<https://www.youtube.com/watch?v=mWAc0cEhHZ8&feature=youtu.be&t=464>
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फिल्म देखेने वाले प्रो कपिल कुमार जी का कहना है कि, सायं 7 बजे फिल्म खत्म हुयी और कुछ मौखिक चर्चा के बाद हमने कहा कि हम अपना दृष्टिकोण कल आपको लिखित में देंगे। लेकिन सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जी जोशी ने रात को ही फिल्म को हरी झंडी दे दी थी। अगले दिन हम जवाब भेजे उससे पहले मीडिया में खबर आ गयी थी कि फिल्म को सर्टिफिकेट दे दिया गया है !!!
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Tue Jan 23 2018 19:53:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
अहमदाबाद ; फिल्म पद्मावती के विरोध में हिमालयन मॉल में लगभग 2000 कार्यकर्ताओ ने तोड़फोड़ की एवं आग लगाईं है।
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प्रस्तावित समाधान - कृपया @pmoindia पर ट्वीट करें कि फिल्म को तुरंत प्रभाव से बेन किया जाए
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यह ट्वीट करें - " @PmoIndia #BanPadmavatiMovie #BanPadmavati "
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Wed Jan 24 2018 08:00:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कृपया ध्यान दें ; ऐसे कोई साक्ष्य नहीं है जिससे पुष्टि हो कि अहमदाबाद में की गयी हिंसा एवं आगजनी में करणी सेना के कार्यकर्ता शामिल थे। अत: सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि, करणी सेना के शीर्ष नेतृत्व एवं इसके कार्यकर्ताओ को इस हिंसा के लिए दोषी न ठहराए।
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दरअसल इस फिल्म का विरोध सिर्फ करणी सेना ही नहीं कर रही है , बल्कि कई राजपूत संगठनों के अलावा भी कई अन्य स्वतंत्र संगठन एवं कई स्वतंत्र कार्यकर्ता भी इसका विरोध कर रहे है। ऐसे कई स्वतंत्र कार्यकर्ता है जो इस प्रकार की हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल है। अत: कृपया इस आगजनी के लिए करणी सेना को दोषी न ठहराए।
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दरअसल, समस्या की जड़ में भारत के प्रधानमंत्री एवं जजों का भ्रष्टाचार है। इनके साथ ही भारत की प्रमुख शीर्ष पार्टियों संघ-कांग्रेस-आपा के सभी नेता, प्रशासनिक अधिकारी , मंत्री आदि भी भ्रष्टाचार में लिथड़े पड़े है। और इन राजनेताओ की रुचि जजों के भ्रष्टाचार को कम करने में बिलकुल भी नहीं है।
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तो हमें उन कानूनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिससे न्यायपालिका में व्याप्त भाई भतीजा वाद एवं भ्रष्टाचार में कमी आये। हमारा प्रस्ताव राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री एवं राइट टू रिकॉल पीएम है। इन कानूनों के होने से पीएम एवं जजों का भ्रष्टाचार नगण्य हो जाएगा और पीएम / जजों की घूस खाने की प्रवृति में भारी गिरावट आएगी।
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इस तथ्य पर भी विशेष ध्यान दें कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल समेत संघ-कांग्रेस-आपा के सभी नेता डायलॉग बाज है और वे अदालतों के भ्रष्टाचार को कम करने के लिए आवश्यक राईट टू रिकॉल कानूनों का विरोध कर रहे है।
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Wed Jan 24 2018 18:42:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पद्मावत फिल्म को लेकर विरोध हिंसक हो चुका है और कई शहर इसकी चपेट में है। ज्यूरी सिस्टम एक मात्र समाधान है, जो इस तरह की परिस्थिति से निपट सकता है।
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हमारा प्रस्ताव है कि, यह फिल्म 500 नागरिको की ज्यूरी के हवाले की जानी चाहिए। ज्यूरी सदस्य फिल्म देखकर तय करें कि इस फिल्म को बेन किया जाना चाहिए या नहीं। यदि ज्यूरी सदस्य फिल्म को आपत्तिजनक पाते है तो बेन करने के साथ ही निर्माता, निर्देशक एवं अभिनेताओं को जेल भी भेज सकते है।
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जज सिस्टम इस मामले में इसीलिए काम नहीं करेगा क्योंकि हमारे जज पूरी तरह से भ्रष्ट है। यदि निर्माता उन्हें पैसे पहुंचा देता है तो वे फिल्म को हरी झंडी दे देते है। नागरिको के पास इन भ्र्ष्ट जजों को नौकरी से निकालने का कोई अधिकार नहीं है। अलबत्ता वे चाहे तो सड़क पर आकर तोड़ फोड़ मचा सकते है। किन्तु इससे सुरक्षा घेरो में बैठे भ्रष्ट जजों के स्वास्थ्य पर कोई फर्क नहीं आता। यदि "राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज" का क़ानून होता तो नागरिक सुप्रीम कोर्ट के भ्र्ष्ट जज को नौकरी से निकाल सकते थे।
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मोदी साहेब भी उतने ही भ्र्ष्ट है जितना कि हुआ जा सकता है। केजरीवाल की तरह ही मोदी साहेब भी घूस में नकदी नहीं लेते। वे घूसदाता को यह भुगतान सीधे मीडिया कर्मियों को करने को कहते है। मीडिया इसके बदले मोदी साहेब को सकारात्मक कवरेज दे देता है। उन्होंने गुजरात चुनाव के मद्देनजर फिल्म को होल्ड करने को कहा और चुनाव ख़त्म होते है सेंसर बोर्ड चेयरमेन को फिल्म रिलीज करने के आदेश दे दिए। यदि राईट टू रिकॉल पीएम का क़ानून होता तो मोदी साहेब यह फिल्म नागरिको की ज्यूरी के हवाले कर देते थे। लेकिन ज्यूरी सिस्टम आने से पीएम के हाथ से घूस खाने का अवसर निकल जाता है।
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व्यवस्था में दोष सिर्फ इसीलिए बनाकर रखे जाते है ताकि घूस खाने के अवसर बने रहे। तो यदि आप समझते है कि हमारे जनप्रतिनिधियों को व्यवस्था सुधारने में रुचि है तो आप भुलावे में है। अगर व्यवस्था में से दोष निकल गए तो शासको के हाथ से पैसा कमाने और मनमानी करने का अवसर हाथ से निकल जाएगा। यही वजह है कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल समेत संघ-कांग्रेस-आपा के सभी नेता हमेशा से राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम के विरोधी रहे है और आज भी इसका पूरी शक्ति लगाकर विरोध कर रहे है।
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पद्मावती ; फिल्म का प्रचार करने के नाम पर चलाये जा रहे फर्जी समाधान Vs वास्तविक समाधान
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1439648852820013>
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Sat Jan 27 2018 08:12:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पद्मावत जैसी गलीज़ फिल्म का समर्थन करके योगी जी ने अपना असली रंग दिखा दिया है।
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गलीज़ फिल्म पद्मावत यूपी के मल्टीप्लेक्स में अच्छा व्यवसाय कर रही है।
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2003 में जब लालकृष्ण आडवाणी "हाजी आडवाणी" बन गए थे तब संघ के कार्यकर्ताओ ने अपनी श्रद्धा मोदी साहेब में दिखानी शुरू कर दी और वे मोदी साहेब का प्रचार "2009 के लिए असली हिंदूवादी प्रधानमंत्री" के रूप में करने लगे, और इसी वजह से हिंदूवादी कार्यकर्ता संघ=बीजेपी से इतर किसी अन्य हिंदूवादी राजनैतिक विकल्प खड़ा नहीं कर पाये।
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और अब जब मोदी साहेब ने अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको एवं मिशनरीज का खुले आम समर्थन करना शुरू कर दिया है और संघ के कार्यकर्ताओ को यह अहसास हो गया है कि वे अब मोदी साहेब को "असली हिंदूवादी" के रूप में प्रचारित नहीं कर सकते है तो संघ के कार्यकर्ताओ ने हिंदूवादी कार्यकर्ताओ को मूर्ख बनाये रखने के लिए योगी जी को "2024 का असली हिंदूवादी प्रधानमंत्री" दिखाना शुरू कर दिया है।
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लेकिन योगी जी ने यूपी में गलीज फिल्म पद्मावत को यूपी में बेन नहीं करने का फैसला करके यह दिखा दिया है कि वे भी एक "फर्जी हिंदूवादी" नेता है।
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और या फिर मोदी साहेब और योगी दोनों ही "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" में बहुत गहरी आस्था रखते है !!
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प्रस्तावित समाधान - राईट टू रिकॉल पीएम एवं राईट टू रिकॉल सीएम। इन कानूनों के ड्राफ्ट देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर को क्लिक करे। कवर पिक्चर के डिस्क्रिप्शन में इनके लिंक एवं अन्य विवरण दिया गया है।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Sat Jan 27 2018 08:27:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
राजपूत कार्यकर्ता गुजरात एवं मध्यप्रदेश में गलीज़ फिल्म पद्मावत के प्रदर्शन को रोकने में सफल रहे --- किन्तु यूपी के मामले वे नाकाम क्यों हुए ? क्योंकि यूपी में उन्होंने इसके लिए प्रयास ही नहीं किया !!! उन्होंने कोशिश क्यों नहीं की ? क्योंकि उन्हें योगी जी पर अन्धविश्वास थे !!!
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एमपी एवं गुजरात के कार्यकर्ता यह बात जानते थे कि मोदी साहेब एंव शिवराज चौहान गलीज़ फिल्म पद्मावत के निर्माताओं के सामने खड़े खड़े ही बिक जाएंगे , अत: उन्होंने इन प्रदेशो में सिनेमा मालिकों से सम्पर्क करके और अन्य कदम उठाकर फिल्म के प्रदर्शित न होने को सुनिश्चित किया।
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लेकिन यूपी के राजपूत कार्यकर्ताओ ने सोचा कि, "योगी जी खुद एक राजपूत है , और हिंदूवादी भी है , अत: वे इस फिल्म को डिब्बे में डालने के लिए कुछ न कुछ कदम जरूर उठाएंगे" , इसीलिए हमें इस बारे में कोई विशेष योजना बनाने की जरूरत नहीं है !!! लेकिन योगी भी बिक गए, और उन्होंने इस फिल्म का समर्थन करने का फैसला किया !! और इसी वजह से गुजरात के कार्यकर्ता नाकाम रहे।
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प्रकरण का सामान्य सबक यह है की -- अपने नेताओ पर कभी भरोसा न करे।
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तो जब योगी जी का असली रंग सामने आ चुका है तो उन्हें यह मौका दुबारा न दे कि वे आपको फिर से बेवकूफ बना सके।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Sat Jan 27 2018 09:13:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सेंसर बोर्ड से पास होने के बावजूद सिनेमेटोग्राफी एक्ट की धारा 5F एवं 6 के अनुसार केंद्र सरकार किसी भी फिल्म को पूरे देश में या कुछ राज्यों में बेन कर सकती है, और अदालत केंद्र सरकार के इस फैसले को चुनौती भी नहीं दे सकती।
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लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार को एक अधिसूचना निकालनी होगी जिसमें इन दो धाराओं को इंगित किया गया हो।
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कुछ उदाहरण देखिये :
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गुजराती फिल्म "पॉवर ऑफ़ पाटीदार" 2016 में बनायी गयी , और इसे गुजरात सेंसर बोर्ड ने विधिक रूप से रोक लिया ( फिल्म गुजराती भाषा में होने के कारण इसे गुजरात सेंसर बोर्ड से प्रमाणित होना था )। निर्माता अदालत में चले गए और यह मामला पिछले 2 साल से अदालत में लटका हुआ है !!
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भारत में कानूनी रूप से प्रतिबंधित फिल्मो की सूची देखें।
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इसी तरह से , भारत में कई किताबें प्रतिबंधित की गयी है। और संविधान किताबों एवं फिल्मो में "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" के नाम पर कोई फर्क नहीं करता। इन्हें एक ही श्रेणी में रखता है। तो जिस तरह से पुस्तके प्रतिबंधित की जा सकती है , उसी तरह से फिल्मो को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।
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गलीज़ फिल्म पद्मावत को अदालत द्वारा हरी झंडी दी गयी क्योंकि -- १) केंद्र सरकार के मुख्य नीति नियन्ता साहेब बिक गए और उन्होंने धारा 5F एवं 6 को निर्दिष्ट करते हुए अधिसूचना जारी नहीं की, २) जजों ने फिल्म के प्रायोजकों से घूस खा ली।
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इसके अलावा, यदि केंद्र एवं राज्य सरकारें चाहती तो इस फिल्म को भारतीय दंड संहिता की धारा 295 एवं 295A के तहत बेन कर सकती थी। यदि फिल्म को इन धाराओं के तहत बेन किया जाता तो केस मजबूत बनता और निचली अदालत में ही यह केस अगले 10 साल तक घिसटता रहता।
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कहने की जरुरत नहीं कि, मोदी साहेब, योगी जी , संघ के नेता एवं इनके कार्यकर्ता इस गलीज़ फिल्म का जबरदस्त समर्थन कर रहे है , और इसीलिए उन्होंने इस फिल्म को रोकने के लिए कोई भी आवश्यक कदम नहीं उठाये और उनकी जानबूझकर अनदेखी की।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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