> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-01-13

Pawan Jury BhilwaraRj

आपत्ति : जज राजनेताओ से ज्यादा भ्रष्ट किस तरह से है ?
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स्पष्टीकरण : भारत के नागरिको के पास राइट टू रिकॉल प्रक्रियाएं न होने के कारण नेता एक बार चुन लिए जाने के बाद निरंकुश होकर भ्रष्टाचार करते है। वे जानते है कि एक बार कुर्सी लपक लेने के बाद उन्हें अगले 5 वर्ष तक किसी भी तरह से हटाया नहीं जा सकता। किन्तु फिर भी उन्हें 5 वर्ष बाद एक बार जनता के सामने वोट लेने आना ही होता है। चुनावों में उतरने की उनकी यह मजबूरी उन्हें कुछ समय के लिए सौम्य बना देती है। हालांकि चुनाव जीतने के अगले दिन ही वे फिर अपने असली रंग में आ जाते है।

किन्तु जजों के सामने इस तरह की कोई मजबूरी नहीं है। एक बार नियुक्त हो जाने के बाद जनता उलटे भी होकर लटक ले तो उनका कुछ उखाड़ नहीं सकती। जनता के प्रति यह शून्य जवाबदेही उन्हें पूरी तरह से बेलगाम कर देती है। निचली अदालतों के जज हाई कोर्ट जजों की और हाई कोर्ट जज सुप्रीम कोर्ट जजों की चमचागिरी करके आजीवन पद पर बने रहते है व जनता को भेड़ बकरियों से ज्यादा नहीं गिनते। और सुप्रीम कोर्ट के जज तो पूरी तरह से निरंकुश है। अत: जज हमारे देश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री है।
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समाधान - राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम क़ानून प्रक्रियाएं लागू होने से जज नागरिको के प्रति जवाबदेह हो जायेंगे और तमीज से अपना काम करने लगेंगे। राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम के प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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