Posts for 2021-07

Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jul 10 2021 18:54:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Senioriit Baba:

UP Elections 2022 में RTR पार्टी से Elections contest करने वाले कृपया
अपनी wall पर घोषणा करें कि 'मैं इस इस विधानसभा से उत्तरप्रदेश चुनाव 2022 में RTR पार्टी का प्रत्याशी हूँ'.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 21 2021 06:20:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Pawan Jury BhilwaraRj:

भारत के सबसे बड़े हिन्दी अखबार "दैनिक भास्कर" में यह सूचना कल यानी 20 जुलाई 2019 को प्रकाशित की गयी है। पेड कॉलमिस्ट जय प्रकाश चौकसे ने लिखा कि — सुकरात को मृत्यु दंड देने का फैसला आधा दर्जन जजों ने दिया था !!
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जबकि सच्चाई यह है कि सुकरात को मृत्यु दंड नागरिको की जूरी ने दिया था !!! एथेंस के 500 आम नागरिको ने सुकरात का मुकदमा सुना और उनमे से 380 नागरिको ने वोट किया कि सुकरात जो अपराध कर रहा है उसके लिए उसे मृत्यु दंड दे दिया जाना चाहिए। जूरी सुकरात को मारना नहीं चाहती थी , अत: उन्होंने ट्रायल से पहले सुकरात को एथेंस छोड़कर चले जाने को कहा , पर सुकरात ने एथेंस छोड़ कर जाने से मना कर दिया।
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सजा सुनाने के बाद भी कारागार के दरवाजे खुले रखे गए, ताकि यदि वह जाना चाहता है चला जाए। सुकरात फिर भी नहीं गया। अंत में मजबूरी में उसे जहर का प्याला पिलाया गया, जिससे उसकी मौत हो गयी।
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ऐसा नहीं है कि पेड जयप्रकाश चौकसे को इस बारे में जानकारी नहीं है। किन्तु फिर भी उन्होंने जान बुझकर इस बात को छिपाया, क्योंकि वे अपने पाठको को जूरी सिस्टम की जानकारी नहीं देना चाहते थे। यदि वे इस तथ्य को उद्घाटित करते तो पाठक के दिमाग में यह जायज प्रश्न खड़ा होता कि आखिर सुकरात ऐसा क्या कर रहा था कि उसके देश के 500 में से 380 लोग उसे मार दिए जाने पर सहमत थे। और फिर भी वे उसे मारना नहीं चाहते थे। किन्तु सुकरात शहीद होने पर तुला हुआ था और उसने देश छोड़कर जाने से मना कर दिया। अतत: उसे जहर पिलाना पड़ा।
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इसके अलावा पेड जय प्रकाश चौकसे यह बात भी लिखते रहते है कि राईट टू रिकॉल आने से रोज चुनाव होंगे। लेकिन वे किस पद पर राईट टू रिकॉल की बार कर रहे है और अमुक राईट टू रिकॉल की क्या प्रक्रिया होगी इस बारे में वे कोई खुलासा नहीं करते !! वे अपने पाठको तक बस ये जानकारी पहुँचाना चाहते है कि राईट टू रिकॉल में रोज चुनाव होते है !! हालांकि अमेरिका में जिला पुलिस प्रमुख को शामिल करते हुए दर्जन भर पदों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं मौजूद है, किन्तु वहां पर रोज चुनाव नहीं होते। दरअसल अमेरिका में लगभग 20 से 30 साल में भी कभी रिकॉल इलेक्शन नहीं होता।
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भारत में राईट टू रिकॉल के ड्राफ्ट सिर्फ राईट टू रिकॉल ग्रुप ने प्रस्तावित किये है। और राईट टू रिकॉल ग्रुप के प्रस्तावित ड्राफ्ट में तो चुनाव होने का सिस्टम ही नहीं है। मतलब जब किसी अधिकारी को निकाला जाएगा तब भी चुनाव नहीं होंगे !! और राईट टू रिकॉल ग्रुप के अलावा अब तक भारत में किसी भी व्यक्ति/संस्था/पार्टी/संगठन ने राईट टू रिकॉल के ड्राफ्ट सामने नहीं रखे है। तो ये रोज चुनाव की थ्योरी वे कहाँ से लाते है सिर्फ उनके स्पोंसर जानते है !!
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एक अपवाद वरुण गाँधी जी का है। किन्तु उन्होंने सिर्फ एक पद पर यानी राईट टू रिकॉल सांसद का ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। वैसे भी सांसद पर राईट टू रिकॉल होना न होना बराबर है, और इससे कोई फर्क नहीं आएगा। सांसद के पास नीति बनाने का निर्णायक अधिकार नहीं होता है, और व्हिप क़ानून के कारण वह अपनी पार्टी द्वारा पेश किये गए बिल पर ठप्पा लगाने के लिए बाध्य है। अत: राईट टू रिकॉल के लिहाज से सांसद एक चिल्लर पद पर है। एक सांसद के रूप में उसके पास कोई शक्तियाँ नहीं है।
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इसके अलावा भी पेड दैनिक भास्कर काफी तेज अखबार है। आपको याद होगा कि 27 सितम्बर 2016 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। लेकिन पेड दैनिक भास्कर के एडिटर ने इस स्ट्राइक की खबर 23 सितम्बर 2016 को ही दे दी थी !!! इस तरह पेड दैनिक भास्कर के पाठको को इस स्ट्राइक की एडवांस खबर थी। पेड भास्कर ने यह भी बता दिया था कि रात को बोर्डर क्रोस करके भारत के सैनिको ने 30 आतंकियों को मार गिराया था और सुरक्षित रूप से वापिस लौट आये थे। और जब सेना ने 27 सितम्बर को प्रेस कोंफ्रेंस की तो दैनिक भास्कर के पाठको के लिए यह खबर पुरानी हो चुकी थी !!!

तारीख़ - 22-sep-2016 , दिव्य भास्कर , भोपाल , पेज - 1
मुख्य ख़बर — Sharif truns cry baby , Indian troops crossed LoC and killed 20 Jihadiis on 21-sep-2016
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और यही घटना 28 सितम्बर -2016 को घटी । छपने के 6 दिन बाद ।
इ-पेपर का लिंक जिसे पेड दैनिक भास्कर ने अब हटा दिया है -<http://epaper.dbpost.com/epaper_>;...
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पर इसका आशय यह कतई नहीं है कि अन्य समाचार पत्र कमतर है। सभी समाचार पत्र एवं टीवी चेनल लगभग इसी स्तर के है और इसी तरह की विश्वसनीय ख़बरों का प्रकाशन करते है। हालांकि मैं टीवी-अख़बार आदि का पाठक नहीं हूँ, अत: इस तरह की विश्वसनीय किन्तु मनोरंजक सूचनाओं से वंचित बना रहता हूँ।
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बहरहाल, मीडिया के लिए सही नाम पेड मीडिया है। मीडिया 200 साल पहले भी पेड मीडिया था और आज भी पेड मीडिया है। पेड मीडिया ने खुद के बारे सबसे बड़ा झूठ यह फैलाया है कि वह लोकतंत्र का चौथा खम्बा है, और उसका काम ख़बरें देना है।
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असल में मीडिया कम्पनियां भी अन्य व्यावसायिक कम्पनियों की तरह ही मुनाफा बनाने वाली कम्पनियां है। उनका ख़बरें दिखाने से कोई लेना देना नहीं है। जिस खबर को दिखाने के लिए इन्हें पैसा मिलता है, उस खबर का प्रसारण किया जाता है। जब खबर छिपाने के लिए पैसा मिलता है तो खबरें छिपा दी जाती है। वैसे पेड मीडिया की ज्यादातर कमाई खबरों को छिपाने से होती है। इस तरह मीडिया खबरें छिपाने का कारोबार है।
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समाधान ?
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पेड मीडिया को अन पेड नहीं बनाया जा सकता। किसी न किसी को तो इसके लिए पैसा देना ही पड़ेगा। तो मेरा प्रस्ताव इसे सिटिजन पेड मीडिया बनाने का है। इसके लिए मैंने दूरदर्शन चेयरमेन पर वोट वापसी एवं उसके स्टाफ पर जूरी प्रक्रियाओं का प्रस्ताव किया है। इस क़ानून को यदि गेजेट में छाप दिया जाए तो दूरदर्शन अपना प्रसारण तेजी से सुधारने लगेगा। और यह इतना बेहतर हो जाएगा कि प्राइवेट चेनल अपने दर्शक खोने लगेंगे। अभी डीडी अध्यक्ष निजी चैनलों से घूस खाकर दूरदर्शन के प्रसारण को घटिया बनाए रखता है।

इसके अलावा फिलहाल दूरदर्शन अध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार पीएम के पास है। जब वह पीएम के कंट्रोल में है तो ऐसी खबरें कभी नहीं दिखायेगा जिससे सरकार को हानि हो। मेरे द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया के आने से दूरदर्शन अध्यक्ष एवं उसका स्टाफ नागरिको के प्रत्यक्ष नियन्त्रण में आ जाएगा। मेरे द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया "रिगो" का ड्राफ्ट यहाँ देखा जा सकता है - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2174155309369360>;
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एक जरुरी बात — पेड मीडिया की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यदि देश के 100 करोड़ नागरिको को इस बात का अच्छी तरह से विश्वास हो जाए कि मीडिया बिका हुआ है तब भी इसकी ताकत में 1% की भी गिरावट नहीं आती। मतलब पेड मीडिया को एक्सपोज करने से कोई फायदा नहीं होता है। और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
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इसीलिए पेड मीडिया को कोसने वाले कार्यकर्ताओ को इस बात पर ध्यान देना शुरू करना चाहिए कि कौनसे क़ानून गेजेट में छापने से पेड मीडिया को सुधारा जा सकता है। यदि आप समाधान नही दे रहे है तो आप सिर्फ समस्या की जानकारी फैलाने का काम कर रहे है। और समस्याओ को उठाने से राजनैतिक परिदृश्य में कोई बदलाव नहीं आता। क्योंकि जब आप समस्या उठाते है तो राजनेता उसका जो समाधान लायेंगे वह समस्या को और भी बदतर बना देता है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 22 2021 08:06:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jul 23 2021 12:17:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Missionary links? is that the reason to oppose milk?
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Pls watch for at least 5 minutes
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<https://youtu.be/KwB8DMngbWg?t=373>;
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Pls send this link to ( real as well as fake ) Rajivvaadies , who are now BRC-andhbhagats

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jul 26 2021 21:25:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि भारत में वोट वापसी स्वास्थ्य मंत्री या वोट वापसी मुख्यमंत्री का क़ानून होता तो पैड मीडिया के प्रायोजको ने करोना की आड़ लेकर जो ग़लत क़ानून (लॉकडाउन, बलात टीकाकरण, अनिवार्य मास्क आदि) छपवाए, उनसे बचा जा सकता था।
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विडियो - <https://youtu.be/NbDnZV8lkaU>;
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#VvpCm , #VvpHealthMin
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