Posts for 2020-03

Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 02 2020 16:47:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

2008 की बात है जब महात्मा अरविंद केजरीवाल आरक्षण विरोधी थे । आरक्षण विरोधी कार्यकर्ताओं को खींचने के बाद वे 2012 में वे आरक्षण समर्थक हो गए !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 02 2020 16:54:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Gopal Dhakad ChittorgarhRj:

दुनियाभर की 90 से 95% अफ़ीम अफगानिस्तान में पैदा होती है। हमारा देश भी अफ़ीम की खेती के लिए उपयुक्त है किन्तु यहाँ की शरणार्थी सरकार हमको अफ़ीम की खेती नहीं करने देती।

यदि अफ़ीम की खेती की आज़ादी हो तो:
1. दुनियाभर के बाजार में हमारा हिस्सा काफ़ी ज्यादा होगा जिससे हमारा व्यापार घाटा कम होगा।
2.दारू की बिक्री खत्म हो जाएगी जिससे पूंजीवादियों के द्वारा होने वाली लूट कम हो जाएगी। पिछले साल हमारे देश में अकेले अंग्रेजी दारू का कारोबार 67 मीलियन का था,और यह पैसा राॅयल्टी के रूप में देश से बाहर जाता है, अगर यह पैसा देश के किसान-मजदूर को मिले तो कितनी खुशहाली आयेगी ।
3.अफ़ीम के नियंत्रित सेवन से हमारे कामगारों की कार्यक्षमता में जबरदस्त इजाफ़ा होगा।
4.अफ़ीम पोषित तथाकथित इस्लामिक आतंकवाद में जबरदस्त कमी आएगी।
5.प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में होने वाली किसान आत्महत्या बन्द हो जाएंगी।
6.हमारे देश की दर्दनिवारक दवा दुनियाभर को निर्यात हो सकेगी जिनकी जरूरत दिनोदिन बढ़ते कैंसर की वजह से बढ़ती ही जाएगी।

कुल मिलाकर सारा देश खुशहाल होकर पुनः सोने की चिड़िया बन जाएगा।

Win win for whole of India
जोहार
सबका साथ सबका विकास।।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 04 2020 17:23:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

संसद मे बेशर्मी से बोले सांसद घाटा हो या मुनाफा हम तो बेचेंगे ।
<https://boltahindustan.in/bh-news/modi-govt-about-to-sell-28-companies-including-scooters-india/>;

मैने यह पहले ही कहा था कि सरकार का मकसद सार्वजनिक कम्पनियो से घाटा कम करना या टेक्स पेयर्स का पैसा बचना नही है बल्कि इनको बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का आदेश मिला हुआ है जो कर रहे है ।

ये सांसद अच्छे तरीके से जानते है कि मजबूत कानून बना कर इनकी आर्थिक हालात को सुधारा जा सकता है लेकिन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के भ्रष्टाचार के बोझ के कारण जूरी कोर्ट जैसे मजबूत कानून पास नही कर सकते है ।

अतः देश के जिम्मेदार लोगों को सरकार की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के इशारों पर सार्वजनिक कम्पनियो को बेचने की योजनाओं का विरोध कर जूरी कोर्ट कानून की मांग करनी चाहिए ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 04 2020 19:53:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कैसे अमेरिकी धनिकों ने मोदी साहेब को 22000 करोड़ रुपये के हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए मजबूर किया ?
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अमेरिकी धनिकों ने मोदी साहेब को धमकाया कि यदि वे अमेरिकी फाइटर कॉप्टर नहीं खरीदेंगे, तो वे पाकिस्तान को इनमें से कुछ हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य साजो सामान मुफ्त में दे देंगे !!!
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और धमकी ने काम किया !!
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<https://tinyurl.com/vqtt6pc>;
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अब हम 3 बिलियन डॉलर का भुगतान करेंगे। और हमें ये सभी हेलीकॉप्टर End Use Monitoring Agreement के साथ मिले है !! मतलब इनका इस्तेमाल करने के लिए हमें अमेरिका की अनुमति लेनी होगी। यदि हमने अमेरिकी शर्तो का पालन नहीं किया तो वे किल स्विच का इस्तेमाल करके इन्हें ऑफ कर देंगे और फिर इसके स्पेयर पार्ट्स भी नहीं भेजेंगे !!
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मनमोहन सिंह जी पर भी अमेरिकी धमकी इसी तरह से काम करती थी।
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हम अक्सर देखते हैं कि आईपीएस, जज आदि किसी गैंग के सरगना को कहते है कि वे अमुक कारोबारीयों का उत्पीड़न करना शुरू करे अपराधी को प्रायोजित और प्रेरित करेंगे। और फिर जब ये गुंडे अमुक कारोबारी को पीटना शुरू करते है तो वह आईपीएस / जज की शरण में जाता है। और तब आईपीएस / जज उस असहाय कारोबारी से मोटी घूस लेकर उसकी रक्षा करते है !!
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यहाँ यदि अमुक कारोबारी भारत है तो गैंग का सरगना पाकिस्तान, और आईपीएस अमेरिकी धनिक है।
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20,000 ईसा पूर्व से अंतरराष्ट्रीय राजनीति इसी तर्ज पर चल रही है !!
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समाधान - जूरी कोर्ट क़ानून के आने से जल्द ही भारत जटिल हथियारों के निर्माण की तकनीक जुटा लेगा और तब अमेरिका इस तरह हमें धमका नहीं पायेगा।
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यदि आप पेड मीडिया पार्टियो एवं उनके भारी भरकम नेताओ के पीछे लगे रहेंगे तो वे आपको सिर्फ अमेरिकी हथियार ही देंगे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 04 2020 20:05:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Just listen for 1 min, what RSS leader Kapil Mishra had said when he was AAP leader. No need to listen to whole 9 minute of GARBAGE video. But please listen for 1 min.
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What he muttered is nonsense
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But see how he changes color. Just like soga namo arle change colors.
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<https://www.facebook.com/surendrakumar.thakur.1/posts/2449122828633879>;

Surendra Kumar Rana:

यही है ना वो कपिल मिश्रा जो 2017 में दिल्ली विधानसभा में मोदी की अय्याशी के सबूत दे रहा था

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 05 2020 10:31:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

PMP02 ( पेड मीडिया पार्टी ) के नेता डेविड फडणवीस और पेड मीडियाकर्मी पेड अर्नब गोस्वामी PMP10 ( पेड मीडिया पार्टी ) के नेता वारिस पठान के बेटे की शादी में शरीक होते हुए।
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in reality, rss leaders/workers are good friends of aimim leaders/friends.
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And defacto RSS spokesperson Arnab Goswami also attends wedding of waris pathan son. See the video
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<https://www.facebook.com/watch/?v=196125655046280>;
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Pls download this video via fbdown dot net and sent to all via whatsapp
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<https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10156728915586922>;

Sonu Handikhera:

#वारिस_पठान के बेटे की सगाई में #श्री_देवे्द्र_फडणवीस,ये है राजनीति और तुम आपस में लड़ते रहो 👇👇👇👇

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 05 2020 17:01:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आज नागरिक कर्तव्य दिवस ( हर महीने की 5 तारीख को ) के उपलक्ष्य पर मुख्यमंत्री महोदय को भीलवाड़ा जूरी कोर्ट कानून का गैजेट नोटिफिकेशन जारी करने की पोस्टकार्ड लिख कर मांग करी ।

भीलवाड़ा जूरी कोर्ट कानून का गैजेट नोटिफिकेशन जारी होने से भीलवाड़ा जिले के हर मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी जिसके फलस्वरूप जिले की सरकारी स्कूलें, हॉस्पिटल , पुलिस थाने व अदालतें सही तरीके से काम करने लगेगी ।

Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

आज नागरिक कर्तव्य दिवस ( हर महीने की 5 तारीख को ) के उपलक्ष्य पर मुख्यमंत्री महोदय को भीलवाड़ा जूरी कोर्ट कानून का गैजेट नोटिफिकेशन जारी करने की पोस्टकार्ड लिख कर मांग करी ।

भीलवाड़ा जूरी कोर्ट कानून का गैजेट नोटिफिकेशन जारी होने से भीलवाड़ा जिले के हर मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी जिसके फलस्वरूप जिले की सरकारी स्कूलें, हॉस्पिटल , पुलिस थाने व अदालतें सही तरीके से काम करने लगेगी ।
साथ ही जिले के सरपंच , प्रधान, जिला प्रमुख , पार्षद , नगरपरिषद चेयरमैन के भ्रष्टाचार करने , जनता की बात नही मानने पर नोकरीं से निकालने का अधिकार जनता को मिल जाएगा ।

देश के हर जिम्मेदार नागरिक को अपना संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करके जो भी व्यवस्था परिवर्तन चाहते है उसको कानूनी ड्राफ्ट के रूप में भेजना चाहिए ।

भीलवाड़ा जूरी कोर्ट की अधिक जानकारी इस लिंक से प्राप्त करे ।
Tinyurl.com/bhilwarajurycourt

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 05 2020 17:02:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नागरिक कर्तव्य दिवस
(प्रतिमाह 5 ता. )
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आज 5/3/2020 गुरूवार मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से ~ मुख्यमंत्री जी को #जूरी_कोर्ट कानून गैजट में छापने की मांग पत्र भेज कर करी |

Ashok Jain VotevapsiCm:

नागरिक कर्तव्य दिवस
(प्रतिमाह 5 ता. )
.
आज 5/3/2020 गुरूवार मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से ~ मुख्यमंत्री जी को #जूरी_कोर्ट कानून गैजट में छापने की मांग पत्र भेज कर करी |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 05 2020 17:38:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

5-3-2020, आज नागरिक कर्तव्य दिवस पर पीएम को पोस्टकार्ड भेजा गया कि : दिल्ली दंगो के सदिग्धो का जूरी ट्रायल एवं सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने के आदेश जारी किये जाए - #DelhiJuryCourt , #JuryCourt
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पेड मीडिया पार्टियों ( आरएसएस+कोंग्रेस+आपा ) के नेता एवं उनके सभी कार्यकर्ता नागरिको से कह रहे है कि उन्हें पीएम को इस तरह की कोई चिट्ठी नहीं भेजनी चाहिए।
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वे जोर देकर कह रहे है कि चाहे जो हो जाए लेकिन दिल्ली दंगो के आरोपियों के सभी मुकदमो की सुनवाई जज ही करेगा। वे कपिल मिश्रा एवं ताहिर हुसैन के सार्वजनिक नारको टेस्ट के सख्त खिलाफ है।
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भेजे गए इस पोस्टकार्ड की फोटो कॉपी My Letter to Pm रजिस्टर में रख ली गयी है। चुनावों में पेड मीडिया पार्टियों के कार्यकर्ता जब वोट मांगने आयेंगे तो नागरिको को ये चिट्ठियां दिखा कर सूचित किया जाएगा, कि इन लोगो ने दिल्ली दंगो के आरोपियों के सार्वजनिक नार्को टेस्ट का खुलकर विरोध किया था, ताकि यह बात जनता के सामने न आ सके कि इस दंगे को किसने प्लांट किया था।
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उल्लेखनीय है कि, यदि आरोपियों का जूरी के सामने सार्वजनिक नारको टेस्ट लिया जाता है, तो आरोपी उन सभी लोगो के नाम उगल देंगे जिनके इशारे पर कपिल मिश्रा एवं ताहिर हुसैन ने दंगो के लिए लोगो को उकसाया था। जूरी ट्रायल होने से मुकदमो का अंतिम फैसला भी दो चार हफ्तों में आ जाएगा।
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लकिन पेड मीडिया पार्टियो के सभी नेता एवं कार्यकर्ता इनका सार्वजनिक नारको टेस्ट लेने का विरोध कर रहे है। सबूत के लिए आप पेड मीडिया पार्टियों के कार्यकर्ताओ की फेसबुक वाल देख सकते है। वहां पर आपको भर भर डाइलोग और ज्ञान देने की बातें मिलेगी लेकिन दिल्ली दंगो के आरोपियों का जूरी ट्रायल एवं सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने की मांग की चिट्टी का चित्र नहीं मिलेगा। चिट्ठी तो छोड़िये ये लोग तो नार्को टेस्ट के लिए पीएम को ट्विट करने के लिए भी नागरिको को मना कर रहे है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Mar 07 2020 18:43:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पेड मीडिया के प्रायोजक कौन है और इनका एजेंडा क्या है ?
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लोकतंत्र आने के बाद से मीडिया समूह दुसरे नंबर की सबसे ताकतवर कम्पनियां बन गयी है। पहला नंबर हथियार बनाने वाली कम्पनियों का है। पिछले 200 वर्षो से वैश्विक राजनीती पर हथियार निर्माताओ का कब्जा है, और दुनिया में सबसे बेहतर हथियार बनाने वाली कम्पनियां अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिको के पास है।
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निर्णायक हथियारों के अलावा ये कम्पनियां और भी ऐसी ढेर सारी तकनिकी वस्तुएं बनाती है जो दुनिया के ज्यादातर देशो को बनानी नहीं आती। और इन वस्तुओ के बिना न तो देश चलाया जा सकता है, और न ही बचाया जा सकता है।
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ये लॉक हीड मार्टिन, बोईंग, जेट, जीई, रेथओन, एयर बस, फोर्ड जैसी कम्पनियां है, जो फाइटर प्लेन, वॉर शिप, फाइटर हेलीकोप्टर, लेसर गाईडेड बम, ड्रोन जैसे मारक एवं निर्णायक हथियार बनाती है। अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस के कुछ 20-25 घराने है, जो तकनीक आधारित उत्पादन करने वाली कम्पनियों के मालिक है।
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जो भी देश अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों को टक्कर देने वाले हथियार नहीं बना पा रहा है, उन देशो के मीडिया को अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक नियंत्रित करते है। भारत भी हथियार निर्माण में काफी पिछड़ा हुआ है, अत: भारत के मीडिया को भी अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक नियंत्रित करते है।
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इन कम्पनियों का मुख्य एजेंडा वैश्विक भारत पर आर्थिक-सामरिक-धार्मिक नियंत्रण बनाना है। पेड मीडिया के माध्यम से वे भारत की मुख्यधारा की सभी राजनैतिक पार्टियों एवं नेताओं को नियंत्रित करते है, ताकि इनका इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में किया जा सके।

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पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा क्या है ?
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उनका मुख्य एजेंडा अपने कारोबारी हितो की रक्षा करना है। चूंकि उनकी शक्ति का स्त्रोत हथियारों की तकनीक पर टिका हुआ है, अत: किसी देश के नेताओं को नियंत्रण में लेने के बाद वे उन्हें बाध्य करके ऐसे क़ानून छपवाते है जिससे देश तकनिकी वस्तुओं का उत्पादन न कर सके। इसके लिए वे गेजेट एवं पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है। गेजेट में वे ऐसी इबारते छपवाते है जिससे उनकी शक्ति बढे , और नागरिको को भ्रमित करने के लिए वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है
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अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों का एजेंडा :
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(1) आर्थिक नियंत्रण बनाने के लिए
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(1.1) भारत के प्राकृतिक संसाधन एवं खनिज लूटने के लिए उनका अधिग्रहण करना।
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(1.2) आवश्यक सेवाओं जैसे मीडिया, पॉवर, बैंकिंग, माइनिंग, रेलवे, एविएशन, ऑटो मोबाइल, निर्माण, कृषि, दवाइयाँ आदि के कारोबार पर एकाधिकार बनाना।
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वे पेड मीडिया पार्टियों एवं उनके नेताओं का इस्तेमाल करके गेजेट में लगातार ऐसी इबारतें छपवायेंगे जिससे देश की राष्ट्रिय संपत्तियां, प्राकृतिक संसाधन, सार्वजनिक उपक्रम आदि बिक जायेंगे और ये संपत्तियां अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों के स्वामित्व में चली जाएगी।
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पेड मीडिया में इस बेचान को एक सधी हुयी आर्थिक नीति एवं साहसिक फैसले के रूप में बताया जाएगा। नागरिको का ध्यान बंटाने के लिए वे अस्पष्ट आर्थिक शब्दावली जैसे विनिवेश, विदेशी निवेश, आर्थिक सुधार, निजीकरण, पीपीपी मोड़, उदारीकरण, भूमंडलीकरण, पूंजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद, नव उदारवाद आदि का इस्तेमाल करते है।
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(1.3) भारत में तकनिकी उत्पादन करने वाली छोटी स्वदेशी इकाइयों को बाजार से बाहर करना।
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तकनिकी उत्पादन करने वाले स्थानीय छोटे कारखानों को बाजार से बाहर करना उनका मुख्य एजेंडा है। जिस देश में छोटे कारखानों का आधार टूट जाता है, वह देश हमेशा के लिए तकनीकी वस्तुओ के लिए परजीवी हो जाता है। अत: अमेरिकी-ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय कम्पनियां जहाँ भी जाती है वहां के तकनिकी उत्पादन करने वाले स्थानीय कारखानों को गायब करने में काफी संजीदगी से काम करती है। तकनिकी आधार टूटने के बाद अमुक देश हर क्षेत्र में तकनीक के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों का ग्राहक बन जाता है।
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(1.3.1) बॉटम 80% का गणित-विज्ञान का आधार तोड़ना।
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(1.3.2) अनुत्पादक नस्ल का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए प्रतिभाशाली छात्रों को इतिहास, राजनीती विज्ञान, मनोरंजन, खेलकूद आदि जैसे क्षेत्रो में जाने के लिए प्रेरित करना।
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(1.3.3) रेग्रेसिव टेक्स सिस्टम में छोटे कारोबारीयों का कारोबार बड़ी फैक्ट्रियो के पास चला जाता है। अत: वे रिग्रेसिव टेक्स प्रणाली के समर्थन, एवं प्रोग्रेसिव टेक्स के सख्त खिलाफ है। सेल्स टेक्स, एक्साइज टेक्स, वैट एवं जीएसटी आदि सभी रिग्रेसिव टेक्स प्रणालियाँ है।
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(1.3.4) वे गेजेट में ऐसी इबारतें छापेंगे जिससे शहरी क्षेत्र की जमीन महंगी बनी रहे। जमीन की कीमतें ऊँची रहने से कारखाने लगाना मुश्किल हो जाता है।
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(1.3.5) तकनिकी उत्पादन तोड़ने के लिए उन्हें अदालतों एवं पुलिस का ऐसा स्ट्रक्चर चाहिए कि पैसा फेंकने वाले का काम हो सके। यदि किसी देश में अदालतें एवं पुलिस ईमानदार है तो तकनिकी विकास में विस्फोटक विकास होने लगता है। अत: वे अदालतों को किसी भी कीमत पर केंद्रीकृत बनाये रखना चाहते है।
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(2) सैन्य नियंत्रण बनाने के लिए
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आर्थिक नियंत्रण बढ़ने के साथ ही अगले चरण में वे सैन्य नियंत्रण बनाना शुरू करते है। यदि कोई देश अपने आर्थिक क्षेत्र अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों को देने से इनकार करता है तो फिर कोई न कोई बहाना से सेना भेजकर पहले सैन्य नियंत्रण बनाया जाता है, और फिर वे अर्थव्यवस्था का अधिग्रहण करना शुरू करते है। ईराक इसी मॉडल का शिकार हुआ था, और अब ईरान का नंबर है। भारत ने आर्थिक नियंत्रण देना स्वीकार कर लिया अत: हम युद्ध से बच गए। और अब वे सैन्य नियंत्रण बढ़ाने की इबारतें गेजेट में छपवा रहे है।
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(2.1) भारत की सेना पर नियंत्रण बनाने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियों के हथियार इंस्टाल करना।
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अगस्तावेस्ट लेंड, रफाल आदि के बाद अभी जब ट्रंप ने भारत की विजिट की तो फिर से भारत को 3 बिलियन डॉलर के ब्लेक हॉक हेलीकोप्टर लेने के लिए बाध्य किया। इन सभी जटिल हथियारों को खरीदते समय निर्माता से End Use Monitoring Agreement करना होता है। EUMA और स्पेयर पार्ट्स की निर्भरता के कारण सेना हथियार का इस्तेमाल करने के लिए अमुक निर्माता पर हमेशा निर्भर बनी रहती है।
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(2.2) भारत के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू न होने देना।
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पाकिस्तान के पास सामरिक बम है और वह आज भी अपनी परमाणु क्षमता निरंतर बढ़ा रहा है। भारत के पास सामरिक परमाणु बम नहीं है, और अमेरिका 123 एग्रीमेंट करके 2008 में ही हमारा परमाणु कार्यक्रम बंद करवा चुका है।
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(2.3) भारत एवं विशेष रूप से कश्मीर में अपने सैन्य अड्डे बनाना।
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक ईरान+चीन के खिलाफ भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहते है, और इसके लिए उन्हें भारत की जमीन-सेना पर पूर्ण नियंत्रण चाहिए। अभी आप भारत में जो हिन्दू-मुस्लिम तनाव देख रहे है, यह इसी नीति का हिस्सा है। भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ने के बाद जब अमेरिका भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करेगा तो एंटी-मुस्लिम सेंटिमेंट की लहर की चपेट में आकर भारतीय हिन्दू ईरान में सेना भेजने का विरोध नहीं करेंगे।
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(2.4) नागरिको को हथियार विहीन बनाये रखना।
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यह सब तभी तक चलता है, जब तक नागरिको को इस बारे में पता नहीं रहे कि उनका पीएम अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के नियंत्रण में जा चुका है। यदि राजनैतिक कार्यकर्ता एवं नागरिक पेड मीडिया की चपेट से बाहर आ जाते है, या कोई नेता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको के खिलाफ हो जाता है तो अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों को निष्कासित करने और सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी हथियारों के निर्माण के लिए आवश्यक कानूनों की मांग को लेकर जन आन्दोलन खड़ा हो सकता है।
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और तब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के पास भारत को काबू करने का एक मात्र विकल्प यह होगा कि वह सीधे सेना का इस्तेमाल करे। किन्तु जिस देश के नागरिको के पास हथियार होते है उस देश की सेना को तो हराया जा सकता है, किन्तु टेरेटरी को टेकओवर नहीं किया जा सकता। अत: अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों नागरिको को हथियार रखने की अनुमति देने के सख्त खिलाफ है।
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(3) धार्मिक नियंत्रण बनाने के लिए :
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का गठजोड़ मिशनरीज के साथ है। अत: जब किसी देश पर उनका आर्थिक-सैन्य नियंत्रण बढ़ता है, तो अगले चरण में वे स्थानीय धर्मो को आपस में लड़वाकर कन्वर्जन के प्रयास शुरू करते है। पिछले 400 सालो से अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों का यही ट्रेक रहा है।
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(3.1) भारत में सांप्रदायिक आधार पर अलगाववादी हिंसक गृह युद्ध की जमीन तैयार करना।
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(3.2) भारतीय मुस्लिमों को अलग देश की मांग करने के लिए तैयार करना
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(3.3) भारत को 3 हिस्सों में विभाजित करना ( कश्मीर एवं पूर्वोत्तर )।
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(3.3.1) वे शुरू से ही भारत में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून डालने के खिलाफ रहे है। इससे धार्मिक जनसँख्या का संतुलन बिगड़ता है, और अलगाव की जमीन तैयार होती है।
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(3.3.2) इसके अलावा वे भारत में रह रहे 2 करोड़ अवैध विदेशी निवासियों को खदेडने के भी खिलाफ है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें किसी भी समय हथियार भेजकर गृह युद्ध ट्रिगर किया जा सके।
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(3.3.3) हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ाने के लिए वे गाय का भी कई तरीको से इस्तेमाल करते है। आजादी से पहले भी उन्होंने गाय का इस्तेमाल हिन्दू-मुस्लिम को लड़ाने में किया था।
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(3.4) सरकारी नियंत्रण में लेकर मंदिरों की संपत्तियां लूटना एवं उत्सवों में होने वाले धार्मिक जमाव को तोडना।
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(3.4.1) वे मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के भी खिलाफ है, ताकि मंत्रियो एवं जजों का इस्तेमाल करके मंदिर की जमीनो को बेचा जा सके।
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(3.4.2) उत्सवो में धार्मिक जमाव तोड़ने के लिए वे भ्रष्ट जजों एवं पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है।
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(3.5) देशी गाय की प्रजाति को लुप्त प्राय करके इसके उत्पादों पर एकाधिकार बनाना।
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(3.6) भारत में बड़े पैमाने पर कन्वर्जन करना।
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(4) सामाजिक एवं सांस्कृतिक एजेंडा
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सामाजिक-पारिवारिक कलेश, जातीय-क्षेत्रीय अलगाव से उत्पादक व्यक्तियों को मानसिक एवं आर्थिक हानि होती है, और समग्र देश की उत्पादकता गिर जाती है। साथ ही इसमें कारोबार एवं धर्मांतरण भी है। संस्कृति का रूपांतरण करने के बाद कन्वर्जन करना आसान हो जाता है।
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(4.1) जाति एवं नस्ल के आधार पर हिंसक अलगाव खड़ा करना।
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(4.2) लैंगिक आधार पर आपसी घर्षण बढ़ाकर परिवार एवं विवाह नामक संस्थाए ध्वस्त करना।
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(4.2.1) पहले 498A का इस्तेमाल करके उन्होंने परिवारों को तोड़ा, और फिर लिव इन को कानूनी करके लिव इन संतानों को कानूनी मान्यता दी।
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(4.2.2) उन्होंने 2012 में यह क़ानून छापा कि, पुरुष पर यौन उत्पीड़न साबित करने के लिए लड़की का सिर्फ बयान ही पर्याप्त होगा। इन सभी क़ानूनो के समग्र प्रभाव से स्त्री-पुरुष के बीच सामाजिक संघर्ष बढ़ गया, और यह आगे भी बढ़ता जाएगा।
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(4.3) फूहड़ता, अश्लीलता एवं नग्नता को सार्वजनिक स्वीकार्यता दिलाना।
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(4.3.1) उन्होंने सेल्फ सेंसरशिप का क़ानून छापा ताकि वेब सीरिज, इंटरनेट आदि में गाली गलौज और यौन विकृतियों की सामग्री को बढ़ावा दिया जा सके।
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(4.3.2) पारिवारिक स्तर पर अश्लीलता एवं फूहड़ता को स्वीकार्यता दिलाने के लिए वे मनोरंजन चेनल्स का इस्तेमाल करते है।
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(4.4) दवाईयों पर निर्भरता बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थो में मिलावट को बढ़ावा देना।
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(4.5) अफीम एवं भांग पर प्रतिबंधो को कठोर करना।
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इन प्रतिबंधो से एक तरफ दवाईयों की बिक्री बढ़ती है, और दूसरी तरफ युवाओं को शराब, ड्रग आदि नशो की और धकेलना आसान हो जाता है। मिशनरीज कन्वर्जन में नशे का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करती है। अभी पंजाब में इस मॉडल पर काम चल रहा है। आगे अन्य राज्यों का भी नम्बर आएगा।
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(5) राजनैतिक एजेंडा
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वे राजनीति में केंद्रीकृत व्यवस्था चाहते है ताकि बड़ी पार्टियों में पेड मीडिया का इस्तेमाल करके नेताओं को प्लांट किया जा सके। यदि पार्टियाँ एवं नेता उनके कंट्रोल से निकल गए तो वे गेजेट में इबारतें छपवाने की क्षमता खो देंगे।
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(5.1) EVM जारी रखना।
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evm उन व्यक्तियों के निर्देश पर परिणाम दिखाती है जो व्यक्ति इसका प्रोग्राम लिखते है। नेताओ को कंट्रोल करने के लिए evm उनका सबसे प्रभावी टूल है। पेड मीडिया का इस्तेमाल करके वे इस तरह की गलतफहमी फैलाते है तो अमुक राजनीतिक दल या पीएम evm द्वारा वोटो की हेरा फेरी कर रहा है। जबकि केंचुआ और evm पर पीएम का कोई कंट्रोल नहीं होता है।
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(5.2) छोटी पार्टियों को कमजोर करना।
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वे निरंतर ऐसे क़ानून छापते है जिससे छोटी पार्टियों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल होता जाए और सिर्फ बड़ी पार्टियाँ मैदान में रहे।
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(5.3) बड़ी पार्टियों का केन्द्रीयकरण करना।
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वे राजनैतिक पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र यानी कि पार्टी मेम्बर्स को वोटिंग राइट्स देने के खिलाफ है। इससे वे भारत की बड़ी पार्टियों में ऐसे नेताओं को आगे बढ़ा पाते है जो उनके एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहे है।
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(5.4) युवाओं को राजनीती से दूर रहने को प्रेरित करने के लिए पेड मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है।
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(5.5) नागरिको के मतदान एवं चुनावी अधिकारों में कटौती करना
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उन्हें इस तरह का सिस्टम चाहिए कि एक बार वोट देने के बाद अगले 5 वर्ष तक मतदाताओ की प्रशासनिक-राजनैतिक प्रक्रियाओ में कोई भूमिका न रहे, ताकि वे पीएम एवं मंत्रियो को घूस देकर या उनका हाथ मरोड़ कर मनमर्जी की इबारतें गेजेट में निकलवा सके। वोट वापसी, जनमत संग्रह प्रक्रियाएं इस मेकेनिज्म को पूरी तरह से तोड़ देती है। अत: वे इन दोनों प्रक्रियाओ को गेजेट में छापने के सख्त खिलाफ है।
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(6) प्रशासनिक एजेंडा :
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पुलिस एवं अदालतों की सरंचना इस तरह रखना कि पैसा फेंककर अपना काम करवाया जा सके
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पुलिस एवं अदालतें सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। जो आदमी पुलिस एवं जजों को नियंत्रित करता है, उस पर कोई भी क़ानून लागू नहीं होता। क्योंकि जब भी कोई क़ानून तोड़ा जाता है अपराधी को पकड़ने का काम पुलिस, और दंड देने का काम जज करता है।
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वे इतने बड़े भारत में अपने एजेंडे को इसीलिए आगे बढ़ा पा रहे है, क्योंकि भारत में जज सिस्टम है। जज सिस्टम का डिजाइन इस तरह का होता है कि इसमें चयनात्मक न्याय दिया जा सकता है। मतलब, जब पैसे वाला आदमी फंसता है तो वह जज को पैसा देकर अपने पक्ष में फैसला निकलवा लेगा। इसी तरह जिसके पास पैसा है वह अपने प्रतिद्वंदियों को भी उल्टे सीधे मुकदमों में फंसा कर अंदर करवा सकता है।
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अदालतों एवं पुलिस को अपनी पकड़ में रखने के लिए वे भारत में जज सिस्टम जारी रखना चाहते है, एवं जूरी सिस्टम से अत्यंत घृणा करते है। वे जूरी सिस्टम से इतनी घृणा करते है कि उन्होंने भारत की सभी पाठ्यपुस्तको में से इस लफ़्ज को निकाल दिया है। आपको भारत की किसी भी अखबार, साहित्य, पाठ्यपुस्तक और यहाँ तक की क़ानून की किताबों तक में जूरी सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं मिलेगी !!
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उल्लेखनीय है कि अमेरिका एवं ब्रिटेन की अदालतों में जूरी सिस्टम है, जज सिस्टम नहीं। और जूरी सिस्टम होना सबसे बड़ी वजह रही कि अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस जैसे देश भारत जैसे देशो से तकनीक के क्षेत्र में आगे, काफी आगे निकल गए। जूरी मंडल ने वहां के छोटे-मझौले कारोबारियों की जज-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार से रक्षा की और वे तकनिकी रूप से उन्नत विशालकाय बहुराष्ट्रीय कम्पनियां खड़ी कर पाए !!
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अपने ताकतवर हथियारों का इस्तेमाल करके वे पेड मीडिया पर कंट्रोल लेते है और फिर पेड मीडिया की सहायता से नेता खड़े करते है। नागरिक एवं कार्यकर्ता इसे देख न सके इसके लिए वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है। जो नेता उनके एजेंडे के खिलाफ जाता है उसका प्लग निकाल दिया जाता है, और नया नेता प्लांट कर दिया जाता है। सभी पेड मीडिया पार्टियाँ इसी एजेंडे को आगे बढाने का काम रही है।
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आप पिछले 30 वर्षो का अवलोकन करें तो देखेंगे कि तमाम सत्ता परिवर्तनों के बावजूद गाड़ी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है, और आगे भी गाड़ी इसी दिशा में जायेगी। पेड मीडिया में जितने भी चेहरे आप देखते है, वे पेड मीडिया के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करते है। जो व्यक्ति या नेता या संस्था या पार्टी या बुद्धिजीवी ऊपर दिए गए एजेंडे के किसी भी बिंदु की समस्या का समाधान करने का क़ानून ड्राफ्ट की बात करेगा तो उसे मुख्य धारा के पेड मीडिया में आप फिर नहीं देखेंगे।
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बहरहाल, पेड मीडिया की भारत पर पकड़ कितनी गहरी है, इसे समझने का एक मात्र तरीका यह है कि – ऊपर दिए हुए किसी भी एक बिंदु को चुने जिसे आप समस्या की तरह देखते है। और फिर जब आप अमुक समस्या का समाधान ढूँढने की दिशा में जाना शुरू करेंगे तो आपका सामना पेड मीडिया की ताकत से होगा। जब तक आप सिर्फ समस्या से चिपके रहेंगे लेकिन समाधान की तरफ नहीं जायेंगे तब तक आप पेड मीडिया द्वारा रचे गए इस परिदृश्य को ठीक से समझ नहीं सकेंगे।
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पेड मीडिया के अंग :

(i) कक्षा 5 से स्नातकोत्तर तक की सामाजिक विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीती विज्ञान, लोक प्रशासन की सभी पुस्तकें पेड मीडिया है।
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(ii) सभी फ़िल्में, धारावारिक, वृत्त चित्र पेड मीडिया है।
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(iii) समाज-राजनीती-अर्थशास्त्र पर लिखी गयी मुख्यधारा की सभी पुस्तकें पेड पुस्तके है। यदि इन विषयों पर लिखी गयी किसी पुस्तक को पुरूस्कार मिला है तो यह डबल पेड है।
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(iv) मुख्यधारा के सभी अख़बार, मनोरंजन चैनल, न्यूज चेनल पेड मीडिया है।
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(v) टीवी-अखबार में आने वाले सभी बुद्धिजीवी पेड बुद्धिजीवी है। सभी पत्रकार पेड पत्रकार है। सभी सम्पादक पेड सम्पादक है। सभी क़ानून-संविधान विशेषग्य पेड विशेषग्य है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 10 2020 17:55:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कितने मुनासिब है ये लोग सफर के लिए ...

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 10 2020 18:37:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क्या मोदी सरकार पिछली यूपीए सरकार की तुलना में मीडिया को अपने वश में ज्यादा कर रही हैं? ( पार्ट – 1 )
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यह गलत धारणा पेड मीडिया द्वारा ही फैलाई गयी है कि मोदी साहेब मीडिया को कंट्रोल कर रहे है । असल में मीडिया को कंट्रोल करना किसी भी सरकार के लिए मुमकिन नहीं है। चाहे सरकार कितनी भी ताकतवर क्यों न हो !!
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पिछले 200 वर्षो में दुनिया के किसी भी देश की कोई भी सरकार प्राइवेट मीडिया को नियंत्रित नहीं कर पायी है। सरकार के पास प्राइवेट मीडिया को कंट्रोल का एक मात्र तरीका यह है कि — वह देश के सारे प्राइवेट मीडिया को बंद कर दे, और सिर्फ सरकारी मीडिया को काम करने अनुमति दे।
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मीडिया पूरी तरह से धनिकों के नियंत्रण में ही रहता है। और धनिकों में भी यह उन धनिकों के नियंत्रण में रहता है जो हथियारों का निर्माण कर रहे है। भारत का मीडिया हथियार बनाने वाली अमेरिकी-ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको के पूर्ण नियंत्रण में है, और वे ही भारतीय मीडिया के प्रायोजक है। जो नेता पेड मीडिया के प्रायोजकों के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करते है उन्हें पेड मीडिया में कवरेज दिया जाता है, वर्ना नहीं दिया जाता। किन्तु लोकतंत्र का लिहाज रखने के लिए नागरिको को यह बुत्ता दिया जाता है कि नेता कंट्रोल कर रहा है !!
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चुनाव जीतने एवं छवि बनाए रखने के लिए सभी नेता पेड मीडिया के प्रायोजको का समर्थन चाहते है, अत: वे पेड मीडिया के प्रायोजकों से संपर्क करके कहते है कि, आप एक बार हमें मौका दो, और हम आपके एजेंडे को बेहद तेजी से आगे बढ़ाएंगे। इस तरह सभी पार्टियों के सभी नेताओं में पेड मीडिया का सपोर्ट लेने के लिए एक प्रकार का कम्पीटीशन रहता है। क्योंकि पेड मीडिया के पास भारत का सबसे बड़ा वोट बैंक है !!
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क्यों प्राइवेट मीडिया को कोई भी सरकार नियंत्रित नहीं कर सकती
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व्यवसायिक रूप से पेड मीडिया घाटे का धंधा है। जैसे जैसे मीडिया समूह विस्तार करता है, इसका घाटा भी बढ़ता जाता है। जितनी बड़ी मीडिया कम्पनी उतना ज्यादा घाटा। जितनी छोटी मीडिया कम्पनी उतना कम घाटा। अब आपको यह अजीब लगेगा कि ऐसा कैसे हो सकता है। लेकिन सच यही है कि मीडिया व्यवसायिक रूप से घाटे में ही चलता है।
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यदि आप सहज बोध (Common Sense) से इस दिशा में अवलोकन करना शुरू करेंगे तो इसे आसानी से समझ सकते है कि पेड मीडिया कैसे घाटे का धंधा है। और यदि आप इसे धरातल पर घटित होते देखना चाहते है तो, यह मानते हुए कि आपके पास 100 से 500 करोड़ की पूँजी है, एक मॉस मीडिया कम्पनी शुरु करने का प्रोजेक्ट बनाए और वास्तविक आंकड़ो की गणना करें कि एक राष्ट्रिय स्तर का अख़बार / चैनल शुरू करने के लिए आपको कितना पैसा लगेगा और इससे मासिक / सालाना कितनी कमाई होगी।
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यदि आप प्रोजेक्ट बनाने के लिए गंभीरत से प्रयास करते है तो 1-2 महीने में आपको आपकी ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट यह बता देगी कि यह धंधा आपको किस दर से घाटा बनाकर देगा।
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उदाहरण के लिए इन्डियन एक्सप्रेस या टाइम्स ऑफ़ इण्डिया की एक प्रति छापने में सिर्फ कागज एवं प्रिंटिंग की लागत 16 से 20 रू आती है, लेकिन आपको हॉकर यह प्रति 3 रू में दे जाता है !! आप सोचते है कि, शेष पैसा विज्ञापनों से आता है। लेकिन जब आप विज्ञापनों का हिसाब लगायेंगे तो मालूम होगा कि विज्ञापनों से 25 से 30% के आस पास लागत ही वसूल होती है। तो बाकी पैसा वे कहाँ से ला रहे है ? ये पैसा मीडिया समूह 2 स्त्रोतों से लाते है :
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(i) वे अपने प्रायोजको से अनुदान लेते है
(ii) वे खबरे बेचते है
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ख़बरें बेचने से आशय है कि किसी अख़बार के फ्रंट पेज पर जितनी भी खबरें छपती है उन्हें छापने का पैसा लिया जाता है !! मतलब, यदि दैनिक भास्कर ने फ्रंट पेज पर खबर लगाई है कि “Yes bank डूब गया” तो इसे छापने का पैसा लिया जाता है !! यदि पैसा नहीं दिया गया तो वे इस खबर को इस तरह ड्राफ्ट करेंगे कि सरकार के वोट कट जायेंगे !! तो अख़बार में Yes bank के डूबने की खबर तो आएगी, लेकिन ड्राफ्टिंग कैसी होगी, इसके लिए पेमेंट करनी होती है !! और इसी तरह से वे पूरा अख़बार बेचते है !! प्रत्येक खबर के एवज में पैसे लिए जाते है। और ठीक इसी तरह से टीवी पर भी खबरें बिकती है।
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राजनैतिक खबरों को खरीदने वाले दो वर्ग है। एक वर्ग राजनैतिक पार्टियाँ, नेता, सरकार है, और दूसरा वर्ग वे धनिक है जिनके धंधे को राजनैतिक नीतियाँ प्रभावित करती है। जो ज्यादा बड़ी बोली लगाएगा खबर का प्लाट उसे बेच दिया जायेगा !!
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अब पेड मीडिया के प्रायोजको को तो चुनाव नहीं लड़ना है, अत: मीडिया में जितना भी पैसा वे फूंक रहे है वह उनका घाटा है। इस घाटे को वे कवर कैसे करते है ? वे मीडिया को कंट्रोल करके नेताओं को कंट्रोल करते है, और फिर नेताओं से गेजेट में ऐसी इबारतें छपवाते है, जिससे उन्हें फायदा हो। और इस अतिरिक्त मुनाफे से वे अपना घाटा पूरा कर लेते है। तो व्यावसायिक रूप से मीडिया घाटा बनाता है, लेकिन राजनैतिक लाभ लेकर इसे मुनाफे में बदल लिया जाता है।
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अब यहाँ इस बात को समझना जरुरी है कि एक भ्रष्ट नेता गेजेट में ऐसी इबारतें नहीं छाप सकता जिससे वह बड़े पैमाने पर "कानूनी रूप से" पैसा बना सके। इसके लिए उसे भ्रष्टाचार करना होगा और वह जांच / संदेह के दायरे में आ जाएगा। लेकिन धनिक वर्ग के पास ऐसा इन्फ्रास्त्रक्चर होता है कि वे गेजेट में छापी गयी इबारतो से अरबों रूपये का अतिरिक्त मुनाफा बना सकते है। और यह मुनाफा पूरी तरह से कानूनी होगा, गैर कानूनी नहीं।
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सामंजस्य : यदि सत्ताधारी पार्टी पेड मीडिया के प्रायोजको के हितो में नीतियाँ बनाती है तो सरकार एवं पेड मीडिया के प्रायोजको के आपसी सम्बन्ध मधुर बने रहेंगे, और नेता को सकारत्मक कवरेज मिलेगा।
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टकराव : और यदि सरकार पेड मीडिया के प्रायोजको के हितो के खिलाफ नीतियाँ बनाती है तो टकराव शुरू होगा। जब टकराव आएगा तो सरकार मीडिया को अपने फेवर में लेने की कोशिश शुरू करेगी। और फिर पेड मीडिया कर्मियों को कंट्रोल करने के सरकार के पास 2 रास्ते है :
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पैसे से खरीदना
पेड मीडियाकर्मियों को दबाव में लेना
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(1) पैसे से खरीदना : सरकार भ्रष्टाचार करके कितना भी पैसा बना ले किन्तु वे पेड मीडिया का घाटा पूरा नहीं कर सकते। भारत की बात करें तो लगभग 25 न्यूज चेनल एवं 50 बड़े अख़बार है जो प्रतिदिन खबरों के नाम पर अफीम बाँटते है। इसके अलावा फेसबुक, व्हाट्स एप आदि जैसी कम्पनियों का घाटा भी पूरा करना होता है।
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सरकार इतने बड़े स्ट्रक्चर का घाटा पूरा नहीं कर सकती। पेड मीडिया के प्रायोजक यह घाटा इसीलिए पूरा कर सकते है, क्योंकि उनके पास पैसे की बारिश करने वाले कारखाने है, और वे सालो साल से इन मीडिया समूहों का घाटा पूरा कर रहे है। मतलब अब यह बोली लगाने वाला मामला है। धनिक वर्ग सरकार से ज्यादा बोली लगाएगा और मीडियाकर्मी धनिक वर्ग की तरफ चला जायेगा।
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(2) मीडियाकर्मियों को दबाव में लेना : यदि सरकार पेड मीडियाकर्मियों को खरीद नहीं पा रही है तब वे मीडिया को दबाना शुरू करेंगे। किन्तु पेड मीडिया के प्रायोजको के खिलाफ जाकर मुख्य धारा के किसी मीडिया हाउस को दबाना भी मुमकिन नहीं है। क्योंकि पेड मीडिया के प्रायोजको के पास हथियार है !!
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पेड मीडिया के प्रायोजक अमेरिकन-ब्रिटिश-फ्रेंच बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक है। ये कम्पनियां फाइटर प्लेन, लेसर गाईडेड बम, लेसर गाइडेड मिसाईले, ड्रोन जैसी चीजे बनाती है। इन हथियारों पर नियंत्रण होने के कारण उनके पास वास्तविक ताकत है। अत: पीएम इन कम्पनियों को दबाने का प्रयास करेगा तो ये कम्पनियां उसे युद्ध में खींचेगी।
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(2.1) तो जब तक सरकार या पीएम के पास हथियार निर्माताओं से टक्कर लेने वाले हथियार ना हो तब तक पीएम सरकारी मीडिया को भी नियंत्रित नहीं कर सकता।
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(2.2) और प्राइवेट मीडिया को तो हथियार होने के बावजूद भी नियंत्रित नहीं किया जा सकता। क्योंकि प्राइवेट मीडिया का घाटा पूरा करने के लिए लगातार पैसा चाहिए होता है, जो कि सरकार के पास नहीं होता।
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(2.3) यदि सरकार प्राइवेट मीडिया को कंट्रोल करने की कोशिश करेगी तो उसे इसका अधिग्रहण ही करना पड़ेगा। और जैसे ही सरकार प्राइवेट मीडिया का अधिग्रहण करेगी यह सरकारी मीडिया हो जाएगा। और इस तरह पीएम को मीडिया पर कंट्रोल लेने के लिए सभी प्राइवेट मीडिया हाउस का अधिग्रहण करना पड़ेगा।
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(2.4) यदि पीएम देश के सभी प्राइवेट मीडिया हाउस का अधिग्रहण कर लेगा तो फ्रीडम ऑफ़ एक्प्रेशन का निलम्बन हो जाएगा और डेमोक्रेसी ख़त्म हो जायेगी !!
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दुसरे शब्दों में प्राइवेट मीडिया पर सरकार का नियंत्रण और डेमोक्रेसी साथ साथ एग्जिस्ट नहीं करती !! ये दोनों चीजे साथ साथ होती ही नहीं है। यदि किसी देश में प्राइवेट मीडिया है तो इसे हमेशा धनिक वर्ग ( हथियार निर्माता ) ही नियंत्रित करेगा, चाहे सरकार कितनी भी ताकतवर क्यों न हो।
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इसे फिर से पढ़िए - प्राइवेट मीडिया पर सरकारी नियंत्रण और डेमोक्रेसी साथ साथ एग्जिस्ट नहीं कर सकती है !!
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कुछ वास्तविक उदाहरण देखिये ;
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(a) स्टालिन : जोसेफ स्टालिन (1922–1953) ने बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन करना शुरू किया था, और उसने अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों को सोवियत रूस में आने की अनुमति नहीं दी। यदि स्टालिन प्राइवेट मीडिया को अनुमति दे देते तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक किसी न किसी तरीके से स्टालिन को चित कर देते। अत: स्टालिन ने मीडिया का 100% अधिग्रहण कर लिया और सोवियत रूस में डेमोक्रेसी ख़त्म हो गयी। आज रूस के पास अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के बराबर ताकतवर हथियार है, किन्तु मीडिया आज भी 100% रूसी सरकार के कंट्रोल में है। प्राइवेट मीडिया को वहां काम करने की अनुमति नहीं है। यदि रूस प्राइवेट मीडिया को आज भी अनुमति दे देता है, तो अगले 20-25 साल में अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक रूस के फिर से 8 से 10 टुकड़े कर देंगे।
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वजह यह है कि, रूस के पास जूरी सिस्टम नहीं है। और जूरी सिस्टम न होने के कारण उनके पास हथियार निर्माण करने वाली निजी कम्पनियां नहीं है। रूस के सभी निर्णायक हथियार सरकारी कम्पनियां बनाती है। तो यदि रूस में प्राइवेट मीडिया खोल दिया जाता है, तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक निजी मीडिया को वहां पर सरकारी मीडिया से भी ज्यादा शक्तिशाली बना देंगे। सरकारी मीडिया इतना घाटा नहीं उठा सकेगा, और निजी मीडिया की तुलना में पिछड़ जायेगा।
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और एक बार यदि प्राइवेट मीडिया सरकारी मीडिया से ज्यादा ताकतवर हो गया तो पेड मीडिया का इस्तेमाल करके रूस के 5-7 टुकड़े करना मामूली बात है। तब रूस के राष्ट्रपति को देश बचाने के लिए फिर से प्राइवेट मीडिया का अधिग्रहण करना पड़ेगा !! तो स्टालिन को हथियार भी बनाने थे, और जूरी सिस्टम भी नहीं लाना था। तो फिर एक ही रास्ता बचता है – पेड मीडिया का अधिग्रहण किया जाए।
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(b) चेयरमेन माओ : माओ जिडोंग के साथ भी यही मामला था। उसे भी हथियार बनाने थे और जूरी सिस्टम भी नहीं लाना था। तो उसको भी सबसे पहले मीडिया का अधिग्रहण करना पड़ा। और फिर उसने सरकारी हथियार बनाने शुरू किये। यदि माओ अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों को मीडिया चेनल खोलने देता तो वे अगले 5 वर्ष में ही चीन को आधा दर्जन टुकड़ो में विभाजित करके माओ को निपटा देते।
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चीन आज अपनी सेना काफी मजबूत कर चुका है, लेकिन आज भी यदि चीन प्राइवेट चेनल को अनुमति दे दे तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक बिना कोई युद्ध लड़े अगले 20 साल में चीन को के राजनेताओ पर कंट्रोल ले लेंगे। और पूरा मीडिया खोलने की भी जरूरत नहीं है। सिर्फ फेसबुक और गूगल को आने दो तो ये दो कम्पनियां भी चीन को काबू करने के लिए काफी है। चीन मीडिया में विदेशी निवेश खोल नहीं रहा है, और इस वजह से चीन को अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के साथ युद्ध लड़ना पड़ेगा।
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(c) हिटलर एवं मुसोलिनी : इन्होने भी वही ट्रेक लिया। मीडिया पर हिटलर का 100% कंट्रोल था। कोई प्राइवेट मीडिया नहीं। हिटलर बड़े पैमाने पर सरकारी हथियारों का निर्माण कर रहा था, अत: मीडिया पर कंट्रोल लेना जरुरी था। हिटलर मीडिया को छोड़ देता तो सेना नहीं खड़ी कर पाता।
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(d) ईराक-ईरान : सद्दाम हुसैन ने अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों को मीडिया चेनल नहीं खोलने दिए, अत: उसे अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के साथ युद्ध में जाना पड़ा। यदि ईराक प्राइवेट मीडिया आने देता तो अमेरिकी-ब्रिटिश शांतिपूर्ण तरीके से सद्दाम को हटाकर मिनरल्स टेकओवर कर लेते, और ईराक युद्ध से बच जाता।
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अभी ईरान भी इसी रास्ते पर है। ईरान में मीडिया पर काफी सेंसरशिप है। ईरान में वोटिंग होती है, लेकिन मीडिया पर 100% सरकारी नियंत्रण है। अभी ईरान यदि मीडिया में विदेशी निवेश खोल देता है तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक 5-7 साल में नागरिको को भेड़ा बनाकर ऐसे नेताओं को शीर्ष पर पहुंचा देंगे जो ईरान के मिनरल्स अमेरिकी कम्पनियों को देना शुरू करें। मतलब, ईरान में शिया-सुन्नी में घर्षण बढ़ जाएगा और अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियां वहां पर “विकास” करने लगेगी। और विकास का सामान (यानी मिनरल्स) ख़त्म होने तक ईरानियो को मालूम ही नहीं चलेगा कि विकास किसका हो रहा था !!
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दुसरे शब्दों में, ईरान प्राइवेट मीडिया को अनुमति देने से इंकार करके ईरान के विकास में बाधा डाल रहा है, अत: अब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों को न चाहते हुए भी पहले ईरान से युद्ध करना पड़ेगा और तब वे वहां पर विकास कर पायेंगे। क्योंकि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक असली "विकास पुरुष" है। उन्होंने पूरी दुनिया के उन देशो में विकास करने का संकल्प लिया हुआ है, जो हथियार भी नहीं बनाते है, और उनके पास मिनरल्स भी है !! रूस के पास भी काफी मिनरल्स है, किन्तु चूंकि रूस अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों को टक्कर देने वाले हथियार बना चुका है, अत: अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक वहां विकास करने नहीं जाते।
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(e) इंदिरा गाँधी जी : इंदिरा जी ने भी हथियार बनाने शुरू किये तो पहले उन्होंने दूरदर्शन के माध्यम से कम्पीट करने की कोशिश की। पर अंत में उन्हें आपातकाल लगाकर मीडिया पर प्रतिबन्ध लगाने पड़े। वे भारत की अब तक की सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री थी, लेकिन प्राइवेट मीडिया को वे भी नियंत्रित नहीं कर पायी थी।
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(f) अमेरिका : अमेरिका के पास आज दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है, और इसके बावजूद अमेरिका के मीडिया पर वहां के हथियार निर्माताओ का ही नियंत्रण है, राष्ट्रपति का नहीं। पर चूंकि अमेरिका का मीडिया अमेरिकी धनिकों के ही नियंत्रण में है विदेशियों के नहीं, और अमेरिकी नागरिको के पास जूरी सिस्टम-राईट टू रिकॉल-जनमत संग्रह-मल्टी इलेक्शन एवं बंदूक रखने की आजादी है अत: वहां का प्राइवेट मीडिया अमेरिकी हितो का नुकसान नहीं पहुंचाता।
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ऊपर दिए गए सभी ताकतवर लोगो ने हथियार बनाने के बड़े पैमाने पर प्रयास किये और इन सभी को प्राइवेट मीडिया को प्रतिबंधित करना पड़ा। क्योंकि यदि ये लोग पेड मीडिया को काम करने की अनुमति दे देते तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक इन्हें गिराने में कामयाब हो जाते।
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मेरा बिंदु यह है कि असल में दुनिया की कोई भी सरकार आज तक प्राइवेट मीडिया को कंट्रोल नहीं कर पायी है। यदि सरकार के पास हथियार है तब भी सिर्फ सरकारी मीडिया नियंत्रित किया जा सकता है, प्राइवेट मीडिया को नहीं। प्राइवेट मीडिया से तालमेल बनाने का सिर्फ एक ही तरीका है – चुपचाप पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले क़ानून गेजेट में छापते रहो, और बदले में पेड मीडियाकर्मी नेताजी को जनता के सामने सुपरमेन बना कर दिखाते रहेंगे।
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का सिंगल पॉइंटेड एजेंडा यह है कि कोई देश आधुनिक एवं निर्णायक हथियार नहीं बनाएगा !! और यह एजेंडा कोई छुपा हुआ नहीं है। एकदम खुली हुई बात है।
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ऊपर दिए गए लोगो ने हथियार बनाने शुरू किये और और इसीलिए अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के साथ इनका घर्षण बढ़ गया था। और इन लोगो को मीडिया पर प्रतिबन्ध लगाने पड़े।
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तो मनमोहन सिंह जी एवं मोदी साहेब का मीडिया पर कितना वश है ?
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शून्य !! जीरो !! अंडा !! मतलब = 0 !!
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सबूत ?
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पहली बात तो यह कि हम हथियार नहीं बनाते। असल में हम अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के हथियारों पर ही अपनी सेना चला रहे है। तो उनसे टक्कर लेने का सवाल ही नहीं। और जहाँ तक पैसे से खरीदने की बात है, न तो बीजेपी के पास उतना पैसा है और न ही कोंग्रेस के पास कि वे मीडिया खरीद सके। ये खुद ही विदेशियों के चंदे पर चल रहे है, मीडिया का घाटा किधर से पूरा करेंगे। अभी बीजेपी=संघ को विदेशियों से 950 करोड़ एवं कोंग्रेस को 150 करोड़ बेनामी इलेक्टोरल बांड से मिले है। इसी पैसे से इनकी आई टी सेल वगेरह के कर्मचारियों को वेतन आदि दिए जाते है, और इनके कट आउट, झंडी बैनर आदि छपते है।
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यदि संघ=बीजेपी मीडिया का घाटा पूरा कर सकती थी, तो वो पिछले 70 साल में अपना खुद का मीडिया हाउस स्थापित कर लेती थी। उन्होंने कोशिश भी की पर खड़ा नहीं कर पाए। पांचजन्य उन्होंने 1948 में और पाथेय कण 1987 में शुरू किया था। सरकार बना ली लेकिन अपना मीडिया खड़ा नहीं कर पाए !! और इसीलिए चुनाव जीतने के लिए उन्हें पेड मीडिया की जरूरत होती है।
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जवाहर लाल ने भी 1938 में नेशनल हेरल्ड नाम से पेपर शुरू किया था। यह लगातार वित्तीय संकट से जूझता रहा। अंत में अपडेटेड प्रिंटिंग मशीनों के अभाव में घाटा खाकर बंद हो गया !! एक समय पूरा देश ही कोंग्रेस को वोट करता था, लेकिन पेपर उनसे भी नहीं चला !! मलतब, सरकार बनाना आसान है, लेकिन मीडिया हाउस खड़ा करना और उसे चलाते रहना और उसे कंट्रोल करना उससे भी बड़ा काम है। जब तक आप हथियार बनाने की फैक्ट्रियां नहीं चला रहे हो तब तक आप प्राइवेट मीडिया को कंट्रोल नहीं कर सकते !! अभी 2017 में इन्होने नेशनल हेरल्ड का डिजिटल वर्जन ( यानी मुफ्त का मीडिया ) निकालना शुरू किया है।
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शिवसेना के पेपर “सामना” की भी यही दशा है। इसे 1988 में बाला साहेब ने शुरू किया था !! ये भी हमेशा हाशिये पर ही रहा, मुख्य धारा में नहीं आ पाया।
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ये सब तो सामने के प्रयास है। इसके अलावा परदे के पीछे से भी एंट्री मारने के काफी प्रयास इन्होने किये। असल में कोंग्रेस, संघ=बीजेपी, शिवसेना आदि हथियार बनाने की फैक्ट्रियां नहीं चलाते है, इसीलिए मीडिया खड़ा नहीं पर पाए। मीडिया पर कंट्रोल लेने की पहली शर्त यह है कि आपके पास हथियार बनाने के कारखानो पर नियंत्रण होना चाहिए। क्योंकि सिर्फ पैसे से मीडिया पर कंट्रोल आता था तो साबुन और शेम्पू बनाकर पैसा कमाने वाले (अम्बानी-टाटा) लोग भी मीडिया कम्पनियां खोल लेते थे।
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सार की बात यह है कि राजनीति को पूरी तरह से पेड मीडिया के प्रायोजक (हथियार निर्माता) कंट्रोल करते है, और उनका सहयोग लिये बिना आप सरकार में शीर्ष स्तर पर नहीं आ सकते। और यदि आप पेड मीडिया के प्रायोजको का सहयोग लेकर सत्ता में आयेंगे तो आपको उनके एजेंडे पर ही काम करना पड़ेगा।
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और उनका एकनिष्ठ एजेंडा यह है कि — आप हथियार नहीं बनाओगे बल्कि अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियों के हथियार ही खरीदोगे, ताकि वे आपकी सेना को नियंत्रित कर सके !!
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आप उनके एजेंडे से एक इंच भी इधर उधर हुए तो वे आपका प्लग निकाल देंगे, और पेड मीडिया की सहायता से नया नेता इंस्टाल कर देंगे।
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जारी -- पूरा जवाब यहाँ देखें : <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1077246149315128/>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 11 2020 06:14:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#वोट_वापसी_पासबुक , #जूरी_कोर्ट , #JuryCourt

Gram Raj:

चुनाव के बाद दल बदलने का अधिकार नैताओ को हे
तो वोट बदलने का अधिकार जनता के पास भी होना चाहिए

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 11 2020 20:32:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

श्रीमती इंदिरा गाँधी के शासन काल में राजस्थान के राजघरानों से निकाले गए खजानों का क्या हुआ? क्या उसे देशहित में प्रयोग किया गया है?
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यदि कोई देश ऐसी वस्तुएं नहीं बना पा रहा है जिन्हें निर्यात करके डॉलर कमाए जा सके तो व्यापार घाटा होने लगता है। और डॉलर ख़त्म होने के बाद यदि कोई भी देश डॉलर देने को तैयार न हो तो सिर्फ सोना ही देश को बचा सकता है।
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1969 में भारत पर पहली बार बड़ा डॉलर संकट आया था, तब सोने के कारोबार / आयात पर कई तरह के प्रतिबन्ध रोक लगा कर डॉलर की निकासी कम करने के प्रयास किये गए (जो कि एक गलत फैसला था) । 1974 के परमाणु परिक्षण के कारण अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने भारत पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबन्ध लगा दिए, अत: 1976 में डॉलर फिर से ख़त्म हो गए।
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इंदिरा जी के पास तब 4 रास्ते थे :
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(i) परमाणु कार्यक्रम रोककर CTBT साइन करना, ताकि अमेरिका हमारे लिए डॉलर के रास्ते खोले। ( इस संधि को पोकरण के कारण ही ड्राफ्ट किया गया था )
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(ii) मंदिरों को सरकारी नियंत्रण में लेकर मंदिरों से सोना उठाना ( उनके आर्थिक सलाहकारों ने उन्हें यही राय दी थी )
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(iii) सोना इकट्ठा करने के अन्य विकल्पों पर विचार करना
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(iv) निर्यात बढाने के लिए जूरी सिस्टम लागू करना
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जूरी सिस्टम तो उनको लाना नहीं था, अत: उन्होंने तीसरे रास्ते के तहत राजाओं का सोना उठाने की कोशिश की। आजादी के समय सभी रजवाड़ो ने अपनी संपत्तियो की घोषणा की थी, और इंदिरा जी संदेह था कि जयपुर राजघराने ने बहुत बड़ी मात्रा में खजाना छिपाया हुआ है। अत: उन्होंने आपातकाल के दौरान जयगढ़ पर छापा मारकर खजाने की तलाश शुरू की। छापे के समय राजपरिवार जेल में था। सेना द्वारा कई दिनो तक किले में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस गोल्ड हंटिंग के 2 वर्जन मौजूद है :
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(a) ऑफिशियल वर्जन है, कि सरकार को वहां से कुछ नहीं मिला। सोने का एक सिक्का तक नहीं।
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(b) अटकलें लगाई जाती है कि खजाना मिल गया था, लेकिन इंदिरा जी ने इसे हड़प लिया।
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कुछ मानते है कि खजाना नहीं मिला और कुछ मानते है कि खजाना मिल गया था। अब यह अपना अपना अनुमान लगाने वाली बात है। जिसे जो वर्जन सूट करता है, वह वैसा दावा करता है। सबूत किसी भी पक्ष के पास कोई नहीं है।
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मेरा अनुमान है कि, सेना को खजाना नहीं मिला था। इस तरह के ऑपरेशन को इतने गुप्त रूप से नहीं चलाया जा सकता कि पीछे कोई भी सुराग नहीं रहे। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों एवं सर्वेयरो को शामिल करते हुए लगभग 250 लोगो का स्टाफ था, जो यह खुदाई कर रहा था। यदि खजाना मिलता तो बात छुपती नहीं थी, और कोई न कोई संकेत सामने आ जाते। राजपरिवार ने भी तब से आज तक कभी भी सरकार पर यह आरोप नहीं बनाया कि उनका खजाना ले लिया गया। तब भी जब इंदिरा जी सत्ता गँवा चुकी थी, और जनता सरकार आने के बाद हत्या, अपहरण आदि जैसे मुकदमो का सामना कर रही थी।
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1990 में हम फिर से अटक गए और देश चलाने के लिए सिर्फ 2 हफ्ते का डॉलर बचा था। अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने पूरी फील्डिंग लगाकर रखी थी कि हमें कहीं से भी लोन न मिल पाए। यहाँ तक कि आईएम्ऍफ़ एवं विश्व बैंक ने हमें शोर्ट टर्म लोन देने से भी इंकार कर दिया। तब भारत में 46 टन सोना जहाज में भरकर बैंक ऑफ़ इंग्लेंड भेजा और बदले में डॉलर लिए। लेकिन यह देश चलाने के लिए काफी नहीं था।
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आईएम्ऍफ़ ने भारत के सामने शर्त रखी कि, यदि हम भारत का बाजार अमेरिकी-ब्रिटिश कंपनियों के लिए खोल देते है (WTO agreement) तो ही हमें डॉलर मिलेंगे वर्ना नहीं। इस समय स्थिति यह थी कि पैसा न होने के कारण चंद्रशेखर सरकार अपना बजट भी पेश नहीं कर पाई थी। अंत में भारत ने अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों की शर्तें मानी और हमने समझौते पर दस्तखत किये।
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बाजार खोलने के बाद भी भारत का व्यापार घाटा निरंतर बढ़ रहा है, किन्तु अब यह आपको इसीलिए नजर नहीं आता कि विदेशी निवेश की अनुमति देने के बाद सरकारें भारत की राष्ट्रिय संपत्तियां बेचकर देश चलाती रहती है। पिछले 30 वर्षो से वे लगातार इसी तरीके से देश चला रहे है। और इस तरह हम आज पहले से भी बदतर स्थिति में है।
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जब ये संपत्तियां ख़त्म हो जायेगी तो हमारे नेता अपना झोला (भरा हुआ) उठाकर निकल लेंगे। क्योंकि जब भी भारत की संपत्ति औने पौने दामो में बेचीं जाती है तो एक बड़ा हिस्सा हमारे नेताओं की जेब में जाता है !! कभी यह पेड मीडिया में सकारत्मक कवरेज के रूप में होता है कभी नकदी के रूप में।
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अभी अगले साल तक इन लोगो ने 2 लाख करोड़ का माल बेचने का टार्गेट बनाया है - <https://boltahindustan.in/bh-news/modi-govt-about-to-sell-28-companies-including-scooters-india/?fbclid=IwAR1cPKCNa8AMuEyYZGoqKiqa4X9PZYdEYkZAa9RDCaS-ehKMGretK29bj0U>;
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समाधान – रिक्त भूमि कर एवं जूरी कोर्ट का प्रस्तावित क़ानून गेजेट में आने से भारत में बड़े पैमाने पर निर्माण इकाइयां शुरू होने का रास्ता साफ़ हो जाएगा, और भारत ऐसी वस्तुएं बनाने लगेगा जिन्हें निर्यात करके डॉलर कमाए जा सके। जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर लाये बिना निर्यात बढ़ाना संभव नहीं है।
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Thu Mar 12 2020 07:36:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

विडियो : दिल्ली हिंसा के असली आरोपियों को ढूँढकर उन्हें सज़ा देने का तरीक़ा ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 12 2020 20:39:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रधानमंत्री जी को ट्विट करें कि SBI बैंक का पैसा Yes Bank में डाले.
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मोदी साहेब प्राइवेट बेंक का घाटा कवर करने के लिए उसमें SBI का पैसा डाल रहे है. अत: मोदी साहेब को ऐसा न करने का निर्देश भेजने के लिए यह ट्विट करें :
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@PmoIndia
#DontUseSbiMoneyToSaveYesBank #DontUseAnyPublicMoneyToSaveYesBank #TreatYesBankAtParWithPMCB . Treat Yes Bank at par with Punjab Maharashtra coo bank. Let Yes Bank default. Pay depositors if when as loans get recovered. Pls dont throw burden on citizens of India.
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<https://twitter.com/PawanJury/status/1238200020068782080>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 12 2020 21:04:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

PMP03 के विधायक अमानतुल्लाह खान ने अपने ट्वीट में दिल्ली दंगो के संदिग्धों का "पब्लिक नार्को टेस्ट" लेने की मांग रखी है।
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कृपया उन्हें ट्वीट करके पब्लिक नार्को टेस्ट का ड्राफ्ट मांगें। क्योंकि उन्होंने ट्वीट में "जूरी ट्रायल" या "दिल्ली जूरी कोर्ट" का जिक्र नहीं किया है। अत: यह स्पष्ट नहीं है कि पब्लिक नार्को टेस्ट के आदेश कौन देगा -- जज या जूरी ?
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यदि जूरी आदेश देगी तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि जूरी का चयन कैसे होगा, जूरी का आकार क्या होगा आदि आदि। और यदि वे जज की बात कर रहे है तो इसका कोई मतलब नहीं है।
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यदि उनके पास ड्राफ्ट नहीं है तो उन्हें प्रस्तावित दिल्ली जूरी कोर्ट के ड्राफ्ट को सपोर्ट करना चाहिए। दिल्ली जूरी कोर्ट के ड्राफ्ट में जूरी के गठन एवं संचालन आदि की प्रक्रिया दी गयी है।
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दिल्ली जूरी कोर्ट का हेश कोड -- #DelhiJuryCourt
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दिल्ली जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2698338923617660>;
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Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

राइट टू रिकॉल के कार्यकर्ताओं द्वरा दिल्ली हिंसा में शामिल सदिग्धो का पब्लिक ने नार्को टेस्ट की बढ़ती हुई मांग के दबाव के कारण ही आप नेता अमानतुल्लाह खान ने आज दोपहर ट्वीट करके पब्लिक में नार्को टेस्ट की मांग की है ।

कोन सही कोन गलत यह तो पब्लिक में नार्को टेस्ट के बिना नही बता सकते है लेकिन दूध का दूध पानी का पानी करने के लिए पब्लिक में नार्को टेस्ट बहुत ही जरूरी है ।

अमानतुल्लाह खान के ट्वीट के लिंक ।
<https://twitter.com/KhanAmanatullah/status/1237984457396805633?s=19>;

अमानतुल्लाह खान अभी दिल्ली मे विधायक है , उसने यह ट्वीट मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को पब्लिक में नार्को टेस्ट के कानून का गैजेट नोटिफिकेशन की मांग करने के बजाय दिल्ली की जनता को किया है ।

पब्लिक में नार्को टेस्ट कानून पास करने का अधिकार मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के पास है । अतः अमानतुल्लाह खान को यह ट्वीट मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करना चाहिए था ।

अमानतुल्लाह खान ने यह भी नही बताया कि सुनवाई कोन जज करेगा या नागरिको की ज्यूरी ?

इस प्रकार से अमानतुल्लाह खान पब्लिक में नार्को टेस्ट ककानून का ड्राफ्ट दिए बिना जजो से ही न्याय करवाने के पक्षधर है जिससे दिल्ली दंगो में दूध का दूध और पानी का पानी दूर की कौड़ी साबित होगा ।

अतः देश के जिम्मेदार नागरिको को अमानतुल्लाह खान से पब्लिक में नार्को टेस्ट के कानून का ड्राफ्ट व दंगो की सुनवाई नागरिको की जूरी द्वारा करने की मांग करनी चाहिए ।

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Thu Mar 12 2020 21:37:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

PMP03 के विधायक अमानतुल्लाह खान ने अपने ट्वीट में दिल्ली दंगो के संदिग्धों का "पब्लिक नार्को टेस्ट" लेने की मांग रखी है।
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उनकी ट्विट का लिंक - <https://twitter.com/KhanAmanatullah/status/1237984457396805633?s=19>;
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उनके ट्विट पर मेरी टिप्पणी :
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(1) उन्होंने लिखा है कि -- कपिल मिश्रा, ताहिर हुसैन, प्रवेश वर्मा एवं अमित शाह का पब्लिक नार्को टेस्ट लिया जाए।
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हमारा कहना है कि इसका फैसला जूरी करेगी कि किसका नार्को टेस्ट होगा और किसका नहीं होगा। अमित शाह दिल्ली दंगो के आरोपी नहीं है। यदि जूरी ट्रायल के दौरान अमित शाह की भूमिका सामने आती है तब जूरी इस पर विचार कर सकती है।
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(2) उन्होंने अपनी मांग का ट्विट अपने मुख्यमंत्री को भी नहीं भेजा है, और प्रधानमन्त्री को भी नहीं भेजा है। उन्होंने यह ट्विट दिल्ली की जनता को संबोधित करते हुए किया है। लेकिन नार्को टेस्ट का क़ानून तो मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री छाप सकते है। दिल्ली की जनता इसे लागू नहीं कर सकती।
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(3) उन्होंने ट्वीट में "जूरी ट्रायल" या "दिल्ली जूरी कोर्ट" का जिक्र नहीं किया है। अत: यह स्पष्ट नहीं है कि "सार्वजनिक नार्को टेस्ट" के आदेश कौन देगा -- जज या जूरी ?
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(4) और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि यदि वे जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट की बात कर रहे है तो उन्होंने इसका ड्राफ्ट सामने नहीं रखा है।
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कृपया उन्हें ट्वीट करके पब्लिक नार्को टेस्ट का ड्राफ्ट मांगें।
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आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान को यह ट्विट भेजे - कृपया सार्वजनिक नार्को टेस्ट का ड्राफ्ट सार्वजनिक करें या दिल्ली दंगो के संदिग्धों का "जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट" लेने के लिए दिल्ली_जूरी_कोर्ट क़ानून का समर्थन करें - #DelhiJuryCourt
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क्योंकि यदि वे जूरी की बात कर रहे है तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि जूरी का चयन कैसे होगा, जूरी का आकार क्या होगा आदि आदि। और यदि वे जज की बात कर रहे है तो उनकी मांग का कोई मतलब नहीं है।
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यदि उनके पास ड्राफ्ट नहीं है तो उन्हें प्रस्तावित दिल्ली जूरी कोर्ट के ड्राफ्ट को सपोर्ट करना चाहिए, और पीएम एवं सीएम को #DelhiJuryCourt लिखकर ट्विट करना चाहिए। दिल्ली जूरी कोर्ट के ड्राफ्ट में जूरी के गठन एवं संचालन आदि की प्रक्रिया दी गयी है।
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दिल्ली जूरी कोर्ट का हेश कोड -- #DelhiJuryCourt
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दिल्ली जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2698338923617660>;
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दिल्ली जूरी कोर्ट का पीडीऍफ़ - <https://tinyurl.com/JuryCourtDelhi>;
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मेरे द्वारा भेजा गया ट्वीट - <https://twitter.com/PawanJury/status/1238215298810925057>;
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Thu Mar 12 2020 23:03:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पिछले 5 साल में सरकार 132 वैज्ञानिक DRDO छोड़ चुके है !!! यूँ भी कह सकते है कि सरकार इन्हें रोकने में असफल रही है। इन्हें चिल्लर वेतन दिया जाता है, और प्रॉजेक्ट्स को हरी झंडी नही मिलती। अतः ये अवसरों की तलाश में नौकरी छोड़कर प्राइवेट फ़ील्ड में चले जाते है ।
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Fri Mar 13 2020 22:21:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

स्टेट बैंक 7,000 करोड़ yes bank में डाल रहा है !!

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Sat Mar 14 2020 22:00:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इंडोनेशिया रूस से 11 सुखोई ख़रीदने वाला था। लेकिन अमेरिकी कम्पनियों ने उन्हें F-35 लेने के लिए धमकाया !! इंडोनेशिया ने सुखोई की डील केंसिल कर दी है !!
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किसी देश की सेना में हथियार इसी तरह इंस्टॉल किए जाते है । अभी ट्राम्प ने भारत को 2 बिलियन के ब्लेक़ हॉक इसी तरह धमका कर बेचे थे !!
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Mon Mar 16 2020 12:41:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

करोना के कारण अमेरिका में बंदूक़ की बिक्री में बड़ा उछाल आ गया है । ऐशिया मूल के नागरिक करोना के कारण असुरक्षित महसूस कर रहे है। अतः सुरक्षा के लिए उन लोगों ने भी बंदूके लेना शुरू किया जिन्होंने कभी बंदूक़ नही ख़रीदी।
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Tue Mar 17 2020 09:52:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चमचा डेमोक्रेसी = राज्य सभा सीट के लिए विधायको की नीलामी
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(1) सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज रंजन गोगोई को राज्यसभा सीट दी गयी।
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(2) बीजेपी=संघ ने पैसा फेंककर गुजरात कांग्रेस के 4 MLA खरीदे ताकि राज्यसभा सीटे नीलाम की जा सके।
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1910 से पहले तक अमेरिका में भी सीनेटर (राज्य सभा सांसद ) विधायकों द्वारा मनोनीत होते थे, अत: वे पैसा लेकर खुले आम बिक जाते थे। फिर अमेरिका के कार्यकर्ताओ ने सांसदों पर दबाव बनाया कि वे राज्य सभा सांसदों के सीधे चुनाव का कानून छापे। अमेरिका के नेता एवं धनिक इस तरह का कानून नहीं चाहते थे। किन्तु कार्यकर्ताओ के दबाव में, उन्हें यह क़ानून छापना पड़ा और 1911 से अमेरिका में राज्य सभा मेंबर भी सीधे चुनकर आने लगे। और इस तरह वहां पर राज्य सभा सांसदी पाने के लिए विधायकों की नीलामी यानि हॉर्स ट्रेडिंग ख़त्म हुई।
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जब भारत का संविधान लिखा जा रहा था तो हमारे नेताओ को पहले से पता था कि यदि विधायकों को राज्य सभा सदस्य चुनने का अधिकार दिया गया तो सभी विधायक बिकने लगेंगे और उस व्यक्ति को ही राज्य सभा सदस्य के लिए वोट करेंगे जो उन्हें ज्यादा पैसा देगा !!
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पर पेड मीडिया के प्रायोजकों यानि ब्रिटिश धनिको द्वारा उन्हें निर्देश दिए गए कि चमचा डेमोक्रेसी बनाये रखने के लिए राज्य सभा सदस्यों को चुनने का अधिकार विधायकों के पास ही रखो, ताकि जब जरूरत हो हम MLA वगैरह के सामने पैसा फेंककर अपने चमचो को राज्य सभा में भेज सके।
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संविधान लिखने वालो ने पूछा कि - लेकिन भारत के कार्यकर्ता कहेंगे कि इस क़ानून के कारण विधायकों की नीलामी हो रही है तो उन्हें क्या जवाब दिया जाएगा ?
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पेड मीडिया के प्रायोजकों ने कहा - वो आप लोग टेंशन मत लो। हम पेड मीडिया की सहायता से उनके दिमाग में यह बात अच्छी तरह से ठांस देंगे कि विधायक इसीलिए बिक जाते है कि भारतीय लोग भ्रष्ट एवं स्वार्थी है और उनका नैतिक चरित्र घटिया है आदि आदि।
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संविधान लिखने वालो ने फिर शंका रखी कि - लेकिन जब भारत के कार्यकर्ता कहेंगे कि, 1910 से पहले अमेरिका में भी राज्य सभा की वोटिंग के लिए MLA इसी तरह बिक जाते थे, लेकिन वहां डायरेक्ट इलेक्शन आने से स्थिति पलट गयी तो इस स्थिति को कैसे डील किया जायेगा।
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पेड मीडिया के प्रायोजकों ने कहा - वो बात उन्हें कभी मालूम नहीं होगी। क्योंकि हम भारत की किसी भी पाठ्य पुस्तक, मैगजीन, अख़बार, पत्रिका आदि में यह जानकारी छापने ही नहीं वाले है। अत: तुम बस हम बोल रहे वैसी इबारत छाप दो और बाकी हम पर छोड़ दो। और अगर तुम्हे इससे दिक्कत हो रही हो तो तुम संविधान सभा से निकल सकते हो, हम किसी दूसरे को तुम्हारी जगह रख देंगे।
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पेड मीडिया पार्टियां Vs राईट टू रिकॉल पार्टी
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भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियां आज भी राज्य सभा सांसदों के डायरेक्ट इलेक्शन का विरोध करती है। उनका कहना है कि - राज्य सभा सांसदों को तो विधायक ही चुनेंगे, चाहे जो हो जाए। भारत के मतदाताओ को राज्य सभा सांसदों से कोई लेना देना नहीं रखना चाहिए। और जिन मतदाताओं को राज्य सभा सांसदों के लिए वोटिंग करने का ज्यादा शौक है उन्हें अमेरिका जाकर सेट हो जाना चाहिए।
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भारत में राइट टू रिकॉल पार्टी एक मात्र पार्टी है जिसने यह प्रस्ताव किया है कि - राज्य सभा सांसदों को सीधे मतदाताओं द्वारा चुना जाना चाहिए। साथ ही हमारा प्रस्ताव राज्य सभा सांसद को वोट वापसी के दायरे में भी लाना है ताकि वह अगले 6 वर्ष तक भी मतदाताओं के नियंत्रण में रहे।
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#JuryCourt , #VoteVapsi
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 17 2020 18:19:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

"कारगिल युद्ध ; अमेरिका ने भारत का सेटेलाईट बंद करवाया ताकि हेलिकोप्टर के स्मोक सिग्निचेर , हिट सिग्निचेर और मेटल ऑब्जेक्ट को ट्रेस न किया जा सके, और पाकिस्तानी चोटियों पर चढ़ सके।"
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पेड इकॉनोमिक टाइम्स ने घटना के 20 साल बाद इस सूचना को डिजिटल एडिशन में प्रकाशित किया -.<https://tinyurl.com/Kargil01>;
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राईट टू रिकॉल पार्टी Vs पेड मीडिया पार्टियाँ
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पेड मीडिया, पेड मीडिया पार्टियों (कोंग्रेस+बीजेपी+आपा), पेड मीडिया नेताओं (मोदी+सोनिया+केजरीवाल+ओवेसी) एवं इनके सभी कार्यकर्ताओ ने आपसे यह सूचना पूरे 20 वर्षो तक छिपाई। और पेड मीडिया के नेता एवं कार्यकर्ता आज भी आप से यह सूचना छिपा रहे है।
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इन सभी पार्टियों के नेता अमेरिकी धनिकों के सामने घुटने तोड़ कर बैठे हुए है, और भारत का आर्थिक-सैन्य नियंत्रण अमेरिकियों को दे रहे है। यदि ये जानकारी भारतीयों को मिली तो वे एंटी अमेरिका हो जायेंगे और ये नेता भारत के संसाधन अमेरिकियों को बेच नहीं सकेंगे।
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राईट टू रिकॉल पार्टी ने यह जानकारी 15 साल पहले ही नागरिको को देनी शुरू कर दी थी और पिछले 15 वर्षो ने रिकालिस्ट यह जानकारी देश के नागरिको में फैला रहे है। और जब जानकारी काफी फ़ैल गयी तो पेड इकॉनोमिक टाइम्स ने इसे रिपोर्ट किया। और पिछले 15 वर्षो से पेड मीडिया नेताओं के अंध भगत हमसे यह सबूत मांग रहे थे कि -- अमेरिका ने अगर हमारा सेटेलाईट बंद करवाया था तो हमें इसका सबूत लाकर दो !!
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और अब हम सबूत दे रहे है तो बीजेपी=संघ के कार्यकर्ता कर रहे है कि - तो भी 2024 में अमेरिकी धनिक पीएम तो मोदी जी को ही बनवायेंगे !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 18 2020 08:39:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

और अब रशिया इंडोनेशिया को सुखोई की डील केंसेल न करने के लिए धमका रहा है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 18 2020 09:23:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

असम ; अब वे यदि हथियार भेजना शुरू करे तो पूर्वोत्तर से लाखों हिंदुओ को पलायन करना पड़ सकता है —

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 18 2020 10:45:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

2012 में अवैध बांग्लादेशी निवासियों+ बांगलदेशी घुसपेठीयों के हथियार बंद दस्ते ने लगभग 4 लाख हिंदुओ को भागकर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर कर दिया था !! कई गाँव उन्होंने ख़ाली करवा दिए और उनकी सम्पत्तियों पर क़ब्ज़ा कर लिया । सिर्फ़ 5 हज़ार लोगों का दस्ता था !!
<https://en.m.wikipedia.org/wiki/2012_Assam_violence>;
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अभी अगर अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक उन्हें हथियार भेजना शुरू करे तो वे बड़े पैमाने पर ग़दर काट सकते है !!
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समाधान - असम में नागरिकों को बंदूक़ रखना अनिवार्य करने का क़ानून छापे बिना इस स्थिति को सम्भाला नही जा सकता ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 18 2020 22:38:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हथियार विहीन नागरिक अपराधियों को हिंसा करने के लिए प्रेरित करते है !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 20 2020 22:24:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A) Covid-19 से बचाव के लिए निम्न तथ्यों को ध्यान में रखें :
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(1) कोरोना वाइरस शरीर में मुख्यतया 3 मार्गो से प्रवेश करता है :
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(a) मुँह
(b) नाक
(c) आँख
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(2) नमी, सतह एवं तापमान के आधार पर यह वातावरण में कुछ घंटो से कुछ दिनों तक जिन्दा रह सकता है। सामान्यतया यह वातावरण में 12 से 14 घंटे तक सक्रीय रहता है और क्रमिक रूप से कमजोर होता जाता है।
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(3) इस वायरस पर लिपिड प्रोटीन का खोल है, जो इसे सुरक्षा प्रदान करता है। साबुन / सेनेटाईजर / क्लीनिंग लिक्विड इस आवरण को तोड़ देता है, और सुरक्षा आवरण टूटने के बाद वायरस विघटित होना शुरू हो जाता है।
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(4) यदि संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता है तो वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलकर वातावरण में आ जाता है और जब आपका शरीर इस वातावरण / सतह के सम्पर्क में आता है तो यह आपके शरीर पर सवार हो जाता है। बदन की सतह पर आने के बाद यदि किसी तरह ( हाथ से चेहरा छूना आदि ) यह आपके चहरे तक पहुँच जाता है तो ज्यादातर सम्भावना है तो यह आपके शरीर में प्रवेश कर जायेगा।
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(5) Covid 19 के कोई विशेष लक्षण नहीं है, और इसीलिए यह खतरनाक है। संक्रमित व्यक्ति में सर्दी-जुकाम, खांसी, हल्के बुखार के सामान्य लक्षण प्रकट होते है। लक्षण सामने आने की सीमा 2 सप्ताह है।
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(B) संक्रमण से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानीयां बरतें
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(1) जब आप दूध की थेली ले तो इसे धो लें और साथ ही उसी समय अपने हाथ भी साबुन से धोएं।
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(2) संभव हो तो समाचार पत्र लेना बंद करें।
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(3) कोरियर के लिए एक अलग ट्रे रखें। कूरियर को कम से कम 24 घंटे बाद छुएँ।
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(4) परिवार के सदस्यों को निर्देश दें कि वे मुख्य दरवाजे को न छुएं। जब भी घर में प्रवेश करें अन्य चीजों को छूने से पहले तुरंत अच्छी तरह से अपने हाथ धोएं। इसके बाद सेनेटाईजर / क्लीनिंग लिक्विड से मुख्य दरवाजे के हेंडल एवं डोर बेल स्विच को पोंछें।
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(5) यदि आप खब्बू ( Lefty ) है तो दरवाजे आदि खोलने के लिए दाएं हाथ का अन्यथा बाएं का इस्तेमाल करें।
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(6) जब आप घर से बाहर को तो रुमाल / मास्क चेहरे में लगाए ताकि आदतन आपका हाथ चेहरे को न छुए।
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(7) जहां तक संभव हो स्विगी, अमेजन आदि से बचें।
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(8) सभी फलों और सब्जियों को घर लाने के बाद अच्छी तरह से धोएं।
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(9) रिमोट, फोन और की-बोर्ड आदि के संक्रमित होने की सम्भावना सबसे अधिक है। सेनेटाईजर / क्लीनिंग लिक्विड द्वारा उन्हें दिन में कम से कम एक बार साफ करें।
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(10) घर या ऑफिस में अक्सर हाथ धोएं। हर घंटे में कम से कम एक बार।
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(11) जहां तक संभव हो सार्वजनिक परिवहन से बचें। यहां तक कि ओला और उबेर का उपयोग सिर्फ तब करें जब या बेहद जरुरी हो।
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(12) जिम, स्विमिंग पूल, ट्यूशन, डांस / म्यूजिक क्लास , व्यायाम शालाओं आदि जैसे स्थान जहां सतह संपर्क या वायु-जनित संदूषण की दर अधिक होने की सम्भावना है, से बचें।
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(13) ऑफिस, शोपिंग आदि से लौटते ही अपने हाथ-पैर अच्छी तरह धोएं।
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(14) सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चेहरे पर कहीं भी हाथ न लगाएं। बच्चों और माता-पिता को भी इस बारे में सूचित करें।
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(15) वरिष्ठ नागरिकों को सैर आदि पर जाने से रोकें।
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(16) मेल मिलाप के दौरान व्यक्तियों से 2 मीटर की दूरी रखें।
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(17) अपनी वसीयत बनाये।
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(18) पैनिक कम करने के लिए पेड मीडिया का सेवन कम करें।
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(C) भारत में Covid 19 कब ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा ?
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(1) सलंग्न चित्र में लाल रंग से दर्शाया गया हिस्सा उस स्थिति को दर्शाता है जब रखरखाव के लिए समुचित कदम नहीं उठाये गए। इस स्थिति में संक्रमण बेहद तेजी से फैलता है, और संक्रमितो की संख्या में तेजी से वृद्धी होने के कारण “चिकित्सीय ढांचे पर बोझ” काफी बढ़ जाता है। रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण सभी को इलाज नहीं मिल पाता इलाज के अभाव में और मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ता है !!
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(2) हरा वक्र दर्शाता है कि, संक्रमितो की संख्या ज्यादा होने के बावजूद चूंकि संक्रमण की दर समय के अनुपात में कम है, अत: सभी को चिकित्सीय सहायता मिल जाती है, और अपेक्षाकृत कम जाने जाती है। दुसरे शब्दों में, यदि सभी नागरिक बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाते है तो चिकित्सीय ढांचा चरमराता नहीं है, नुकसान कम होता है।
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Covid 19 सबसे पहले फेफड़ो को संक्रमित करेगा, और रोगी को सांस लेने में तकलीफ होगी। अत: इलाज के प्राथमिक चरण में संक्रमित व्यक्ति को आक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है। भारत ऑक्सीजन कन्संट्रेटर (मशीनरी जो वातावरण से आक्सीजन खींचकर उन्हें संपीड़ित करती है) नहीं बनाता, अत: हमें इसे बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ सकता है। टेस्टिंग किट के लिए भी हम आयात पर निर्भर है। और यदि हमारे पास ये दोनों उपलब्ध भी हो तो हमारे पास इतनी बड़ी आबादी को ट्रीटमेंट देने का मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अभी तक न तो इसकी कोई वैक्सीन खोजी गयी है और न ही दवाई। मतलब एक पॉइंट के बाद प्रशासन इस भार को संभालने सक्षम नहीं है, और इसीलिए नागरिको की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
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(D) Covid 19 कितना मारक है ?
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(1) यदि 100 व्यक्ति इससे संक्रमित होते है तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि लगभग 80% लोगो के लिए यह बिना किसी चिकित्सीय सहायता के भी जानलेवा साबित नहीं होगा।
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(1.1) 80% संक्रमण : - मामूली लक्षण ( प्रतिरोधक क्षमता बनने की सम्भावना ज्यादा )
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(1.2) 15% संक्रमण: - गंभीर (ऑक्सीजन की आवश्यकता )
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(1.3) 5% संक्रमण: - महत्वपूर्ण ( वेंटिलेशन की आवश्यकता )

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(2) जोखिम :
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(2.1) बुजुर्ग आयु वर्ग
(2.2) पहले से अन्य व्याधियों से ग्रस्त व्यक्ति
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यहाँ सूचना नहीं बल्कि सतर्कता और लापरवाही निर्णायक है। रख रखाव के निर्देशों से सूचित होने के बावजूद यदि नागरिक सतर्कता नहीं बरतेंगे और लापरवाही से काम लेंगे तो Covid 19 के फैलने की सम्भावना बढती जायेगी।
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(E) इसे किसी लैब में बनाया गया है, या यह प्रकृति जन्य है ?
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जिस तरह की ताकत इस वायरस में है, उस आधार पर कहा जा सकता है कि यदि इसे लैब में बनाया गया है तो यह मेडिकल हिस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ा ब्रेक थ्रू है। क्योंकि तमाम कोशिशो के बावजूद अब तक मानव ऐसा वायरस बनाने में सफल नहीं हुआ है जो खुले वातावरण में इतने लम्बे समय तक सर्वाइव कर सके। तो अभी तक के हिसाब से ज्यादातर सम्भावना यही है कि, यह चमगादड़ से ही मनुष्य में ट्रांसमिट हुआ है।
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बहरहाल, लैब में बनाया गया हो या प्रकृति जन्य हो, दोनों ही स्थितियों वास्तविकता यह है कि यह वाइरस जानलेवा है। शेष वक्त गुजरने के साथ साथ और भी सूचनाएं सामने आएगी और स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी।
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सार : यदि हम सामान्य रख रखाव का पालन करते है तो इसके प्रभाव को सीमित किया जा सकता है। यदि सतर्कता एवं अनुशासन नही बरता गया तो यह हावी हो सकता है।
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और पेड मीडियाकर्मीयों को अनसुना करें। क्योंकि वे यदि यह हावी नहीं भी होता है तो वे आपको यह विश्वास दिला देंगे कि यह हावी हो चुका है !!
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Credit : Dr Tejpal Katewa
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Covid 19 के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह एल्बम देखें - <https://www.facebook.com/Kulwantyadv06/media_set?set=a.642705303157970&type=3>;
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<https://www.healthline.com/health/coronavirus-transmission>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 23 2020 12:40:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(1) 2017 में नागालेंड से वुहान इंस्टीट्युट यह वायरस चीन लेकर गया था, और फिर वहां से "जाने अनजाने" में यह पूरी दुनिया में फैला।
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(2) कोरोना के फैलने का एक परिणाम यह है कि, इससे अमेरिका-चीन का युद्ध लगभग 3-4 वर्षो के लिए टल गया है।
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(1) पेड द हिन्दू ने रिपोर्ट किया है कि, 2017 में वुहान इंस्टीट्युट, टाटा इंस्टीट्युट ऑफ़ रिसर्च एवं मेलिंडा फाउन्डेशन ने मिलकर नागालेंड के चमगादड़ो पर एक रिसर्च की थी। रिसर्च का विषय था - चमगादड़ इबोला, सार्स, रैबीज आदि वायरस के वाहक कैसे है और चमगादड़ो की घनी आबादी के बावजूद नागालेंड में इन वायरस जनित रोगों का इतिहास क्यों नहीं रहा है !!
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<https://www.thehindu.com/news/national/study-on-bats-and-bat-hunters-of-nagaland-come-under-the-scanner/article30722099.ece?fbclid=IwAR0RAff1q-Y1BUZvOXscLqV61IKSDvLgsf8ZUre160gUp-aX0_Hw2HIHvCQ>;
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उन्होंने इसके लिए चमगादड़ो को पकड़ने वाले लोगो के खून के नमूने भी लिए और वे अपने साथ में कई चमगादड़ भी साथ में ले गए। 2019 में मेलिंडा फाउन्डेशन ने इस बारे में किये गए अध्ययनों को प्रकाशित किया। कोरोना सार्स का ही एक वर्जन है।
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<https://journals.plos.org/plosntds/article?id=10.1371%2Fjournal.pntd.0007733&fbclid=IwAR3FY5m7Chy5IL2PCLnyk2_wy832MNfFZCpiJDst5KBhy2-mpy8fQuuEpIs>;
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भारत सरकार ने अब इस अध्ययन पर जाँच बैठाई है कि बिना अनुमति के ये लोग भारत से चमगादड़ कैसे लेकर गए !!
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तो यह बात साफ़ है कि वुहान रिसर्च इंस्टीट्युट नागालेंड से ले जाए गए चमगादड़ो पर सार्स, इबोला, कोरोना आदि वायरसो से सम्बंधित रिसर्च कर रहा था। इस प्रकरण में कुछ भी संदिग्ध नहीं है, क्योंकि बीमारियों पर रिसर्च करने वाले विभिन्न संस्थान एवं फार्मास्युटिकल कम्पनियां इस तरह के शोध करती रहती है। यहाँ गड़बड़ सिर्फ इतनी है कि, वे भारत में आकर ये चमगादड़ लेकर चले गये और सरकार अब जांच कर रही है कि वे लोग किसकी परमिशन से चमगादड़ लेकर गए थे !!
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वुहान इंस्टीट्युट से यह वायरस कैसे फैला, इसे लेकर 2 औचित्यपूर्ण आकलन है :
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(a) वुहान के करीब एक मांस मंडी है, और ज्यादातर प्राथमिक रोगी इस इलाके के आस पास से थे। तो यह माना जा रहा है कि चमगादड़ के सूप वगेरह से यह वायरस मानव शरीर में चला गया और फिर फैलने लगा। कोरोना का वाहक ये चमगादड़ वहां कैसे आये इस बारे में पक्के तौर पर कुछ पता नहीं।
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(b) वुहान इंस्टीट्युट के 2 शोधार्थी भी कोरोना से ग्रस्त हुए है, अत: यह सम्भावना है कि शोध के दौरान ये लोग इससे संक्रमित हो गए हो और फिर उनसे यह अन्य में फ़ैल गया हो।
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(2) अब इसमें एक तीसरी सम्भावना भी है, जो कि कन्स्पेरेसी थ्योरी होने और न होने की बॉर्डर लाइन पर खड़ी है !!
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2.1. कुछ लोगो का मानना है कि चाइना ने इसे लैब में डेवलप किया और यह एक जैविक हथियार है।
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मेरे मानने में ऐसा होना बहुत दूर की कौड़ी है। इस तरह के वायरस को लैब में नहीं बनाया जा सकता। वैसे यह मान्यता वाली बात है, अत: जिसे जो मानना है, मान सकता है। मान्यताएं रखने के लिए कोई सबूत की जरूरत तो होती नहीं है। यह सब तर्क पर चलता है।
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2.2. यह भी कहा जा रहा है कि, यह प्रकृति जन्य वायरस है और सुरक्षा मानक कमजोर होने के कारण वुहान की लैब से लीक हो गया है। किन्तु चीन का दावा है कि वुहान इंस्टीट्युट की लेब के सुरक्षा मानक Level 4 के है, और वहां से वायरस का इस तरह लीक होना मुमकिन नहीं है।
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2.3. एक वर्जन यह है कि, यह प्रकृति जन्य वायरस है, और चीन ने इसे वुहान लेब से जानबूझकर फैलाया है !!
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यदि चीन ने ऐसा किया है तो मेरे विचार में इसके पीछे वजह पैसा या जैविक हथियार होना नहीं है। इसकी वजह युद्ध हो सकती है।
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दरअसल, अमेरिका-ब्रिटेन के धनिकों ने पिछले 6 साल से युद्ध की जितनी तैयारी की है, वह सब मिट्टी हो गयी है। मतलब कम से कम अगले 3-4 वर्षो तक अब अमेरिका-ब्रिटेन को युद्ध की दिशा में काम करने की फुर्सत नहीं मिलेगी, और उन्हें अब इसे फिर जीरो से शुरू करना होगा। भारत में भी CAA+NRC पर किया गया सारा निवेश कचरा हो चुका है।
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यह तय है कि कोरोना दुनिया के प्रत्येक इंसान को संक्रमित करेगा। इसके रोगी को ठीक होने में कम से कम 20 दिन लगते है, और तब तक उसे होस्पिटल में ही रहना होता है। मतलब पूरी दुनिया के देशो को बड़े पैमाने पर चिकित्सीय उपकरणों के निर्माण एवं आपूर्ति में निवेश करने की जरूरत है। GE और टेस्ला तक सहयोग देने के लिए वेंटिलेटर बनाने की बात कह रहे है !! 50 वर्ष से कम आयुवर्ग के लोगो को यह नुकसान नहीं देता, लेकिन बुजुर्ग व्यक्तियों में मृत्यु का अनुपात ऊँचा रहेगा।
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यदि इसकी वैक्सीन या टेबलेट खोज ली जाती है तब भी हालात सामान्य होने में 2 से 3 वर्ष खप जायेंगे, और यदि वैक्सीन / टेबलेट नहीं बन पाती है तब Herd Immunity एक मात्र इलाज है। मलतब तब मामला और भी लम्बा खींचेगा।
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युद्ध से बचने के लिए क्या चीन ने कोरोना खुद फैलाया है ?
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इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। वक्त गुजरने के साथ शायद और भी सूचनाएं सामने आये जिससे तस्वीर और साफ़ हो।
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लेकिन जिस स्तर का युद्ध चीन को अमेरिका से लड़ना है उसे टालने के लिए यदि चीन को अपने 2-4 लाख वृद्ध / अधेड़ व्यक्तियों की कुर्बानी देनी पड़ती है तो यह बहुत छोटी कीमत है। और इसीलिए चीन को युद्ध और कोरोना में से एक चुनना हो तो चीन कोरोना चुनेगा। क्योंकि युद्ध में चीन पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगा, और दक्षिण एशिया के अन्य देश भी इस तबाही की चपेट में आयेंगे !!
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अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन इतना तय है कि कोरोना में सिर्फ चिकित्सीय आयाम नहीं है। यह वैश्विक राजनीती को बहुत गहराई तक जाकर प्रभावित करने वाला है। कोरोना जैसा वायरस अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस आदि को चीन की तुलना में कई गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा। क्योंकि अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस की प्रशासनिक व्यवस्था कोरोना जैसी चुनौती से निपटने में चीन के मुकाबले पिछड़ी हुयी है !! शायद जल्दी ही यह बात निकलकर सामने आयेगी !!!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 23 2020 18:46:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Doctors बोलते बोलते थक गए की सोशल distancing kro लेकिन फिर भारत के लोगों ने श्री मोदी जी के आह्वान पर और पैड मीडिया के लगातार वहीं बात दोहराते रहने के कारण थाली/ताली/घंटियां बजाकर ,समूहों में निकालकर सोशल distancing ko अंगूठा दिखाते हुए Corona ko भगाकर ही दम लिया।

इस अभियान में बहुत से पढ़े लिखे,अच्छे पदों पर बैठे लोग और बुद्धिजीवी लोगों ने भी हिस्सा लिया।

Tiger Khan:

देश भर से क्रोना विसर्जन के वीडियो आ रहे है।
आखिर हमने क्रोना पे विजय प्राप्त कर ली है।
प्रकट होइए 8 बजे प्रभु......रोक लीजिये इन्हें।
🙏

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 24 2020 10:07:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस एल्बम में कोरोना वायरस से संबधित पोस्ट रखे गए है.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 24 2020 10:09:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रधानमंत्री जी को ट्विट करें कि वह जल्द से जल्द सभी डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के लिए N95 मास्क और Hazmat सूट उपलब्ध कराये, इन सुरक्षा सामान के बिना हमारे मेडिकल स्टाफ को इन्फेक्शन का खतरा है
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"Respected @PMOIndia #CmStates please #ProvideN95MaskHazmatSuit and other protective gear to the medical staff of India. We need to protect our Doctors and Nurses from infection while dealing with coronavirus."

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My tweet: <https://twitter.com/PawanJury/status/1242389352052740103>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 24 2020 10:25:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चीन ने जुलाई 2019 में चमगादड़ खाना शुरू किया था। वे कई सालों से सभी प्रकार के जीव-जंतु कीट पतंगे खा रहे है, लेकिन चमगादड़ नहीं। किन्तु जुलाई 2019 में चमगादड़ खाना चीन में सनक बन गया था।
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और नगालैंड में एक जनजाति है जो सदियों से चमगादड़ का शिकार कर रही है।
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इन जन जातियों में चमगादड़ द्वारा वाहित किये जाने वाले सभी वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता है।
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क्या आदिवासियों में उन्हें इसका प्लाज्मा मिला ?
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यह प्लाज्मा कोरोना पीड़ित को ठीक कर सकता है।
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चीनी, अमेरिकी और कुछ भारतीय वैज्ञानिकों ने 2018 में अमुक जनजाति और चमगादड़ खाने की उनकी आदत का अध्ययन किया था।
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क्या अमरीका और चीन इसके नमूने लेकर गए थे?
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तो क्या कोरोना वायरस उनकी प्रयोगशालाओं के माध्यम से खुले वातावरण में आया है ?
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 24 2020 10:48:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कला वर्ग या किसी क्षेत्र में किताबी अध्ययन करके डॉक्टरेट (PHD) लेने वाले लोगो को डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। ये पंचायती लोग इस उपाधि का इस्तेमाल मेडिकल सलाहें देने में करने लगते है, जिससे लोगो में भ्रम फैलता है।
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कोरोना जैसी आपदा में इस तरह के लोग समाज में काफी बड़े पैमाने पर भ्रम फैलाकर अपूरणीय क्षति पहुंचा सकते है। क्योंकि ये लोग जब अपने वीडियो बनाते है तो यह स्पष्ट नहीं करते कि वे MBBS डॉक्टर नहीं है। और इस वजह से लोग उन्हें गम्भीरता से लेने लगते है।
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डॉ शब्द लगाने का अधिकार सिर्फ चिकित्सीय डिग्री हासिल करने वालो (MBBS, BAMS) को ही दिया जाना चाहिए।
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Tue Mar 24 2020 11:35:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रधानमंत्री जी को यह ट्विट करें, ताकि कोरोना वायरस पर अफवाह फैलाने वालों को रोका जा सके :

@PMO India , तत्काल आदेश जारी करें कि अब से PHD धारको को अपने नाम के आगे Dr या डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी। अन्यथा उन पर भ्रम फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। #NoDrTitleForPHD , #CoronaRumors

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<https://twitter.com/PawanJury/status/1242415535632961537>;
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Tue Mar 24 2020 14:22:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आज मोदी साहेब को नागरिको को संबोधित करने के बाद, स्पीच के अंत में अपने भक्तो का भी एक विशेष सेशन लेना चाहिए और उन्हें यह सूचना स्पष्ट रूप से दे देनी चाहिए कि -- थाली, ताली, शंख बजाने के लिए उन्हें सड़को पर आकर झुण्ड नहीं बनाना है।
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क्योंकि उन्हें यह बात सिर्फ मोदी साहेब ही समझा सकते है। अन्य नहीं। मोदी साहेब को तो उन्हें समझाना भी नहीं है। सिर्फ कहने से ही काम चल जाएगा, और तब वे कोरोना का संक्रमण बांटने के लिए एकत्र नहीं होंगे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 25 2020 13:34:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

2016 की ख़बर - सरकार सार्वजानिक क्षेत्र की दवा निर्माता कंपनियों को बंद कर रही है, ताकि भारतीय दवा बाजार की निर्भरता विदेशियों एवं निजी क्षेत्र पर बढ़े !!
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चिकित्सा एवं दवाओं की कीमतें कई गुना बढ़ाने का सबसे आसान तरीका यह है कि इस क्षेत्र को पूरी तरह से निजी कम्पनियो के हवाले कर दो। पेड मीडिया पार्टियां (कांग्रेस-संघ-आपा) और पेड मीडिया द्वारा खड़े किये गए नेता (सोनिया-मोदी-केजरीवाल) हमेशा से इस दिशा में ही काम कर रहे है, जिससे दवा निर्माण करने वाली सरकारी कंपनियां ज्यादा से ज्यादा बंद हो या उन्हें प्राइवेट कर दिया जाए।
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पेड मिडिया पार्टियों द्वारा लिए गए ऐसे कई फैसलों में से एक खबर यह देखिये - <https://www.thehindubusinessline.com/companies/psu-drugmaker-hindustan-antibiotics-hopes-to-regain-health-post-250-crore-vrs/article28077781.ece/amp/?fbclid=IwAR2CN6GLbKl8NecqlxUrdLDII94EJIu6onXXVrGGJ8RsQsYIoQpZ1bQ2IzI>;
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केंद्र ने 2016 में चार सरकारी कंपनियों का विनिवेश या बंद करने का निर्णय लिया था। कंपनियों के नाम -- हिंदुस्तान एंटी बायोटिक , बंगाल केमिकल्स फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड , इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड और राजस्थान ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड।
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प्रथम दो की बिक्री के लिए सामर्थ्य ख़रीददार खोजे जाएंगे जबकि अंतिम दो को पूर्णत: बंद किया जायेगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 25 2020 14:38:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अर्जेंट - प्रधानमंत्री जी को ट्वीट करें कि भारत के प्रत्येक नागरिक के खाते में 1000 रू मासिक के हिसाब से जमा करें। और यह राशि प्रत्येक 30 दिन में अगले 3 माह तक जमा करें। प्रधानमंत्री आधार का इस्तेमाल करते हुए यह राशि खाते में भेज सकते है, या पैसा पहुँचाने के लिए अन्य किसी पारदर्शी तरीके का इस्तेमाल कर सकते है।
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कृपया यह ट्वीट करें --
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@PmoIndia #DepositRsThousandPerAdharPerMonthForThreeMonths आधार का उपयोग कर 3 महीने तक बैंक खाते में प्रति व्यक्ति 1000 रु प्रति माह जमा करें। RBI के पास इसके लिए पर्याप्त कोष है। वर्ना लॉ एंड ऑर्डर को बनाये रखने की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है !!
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@PmoIndia #DepositRsThousandPerAdharPerMonthForThreeMonths using adhar, pls deposit Rs 1000 per PERSON per MONTH in bank account for 3 months, starting asap. RBI has reserves, and it will meet this expense. Or create new money. Or else, LAW ORDER situation may become SERIOUS !!
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इस वितरण की कुल लागत है = 4 लाख करोड़ रुपये।
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RBI के पास 28 लाख करोड़ से अधिक का कोष है, जिसमें से 5 लाख करोड़ भारतीय मुद्रा के रूप में है। कोष में आयी इस कमी की पूर्ती बाद में की जा सकती है, किन्तु अभी यह वितरण जरुरी है। यदि 1000 रुपये नहीं तो कम से कम 500 रुपये तो दिए ही जाने चाहिए।
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और यह फैसला तुरंत लेने की जरूरत है। क्योंकि रिक्शा चालक, श्रमिक आदि दैनिक रूप से कार्य करके जीवन यापन करने वाले और कम वेतन वाले वर्ग को इस लॉकडाउन में गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। और इस वजह से बड़े पैमाने पर अव्यवस्था फ़ैल सकती है।
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जिन्हें इस पैसे की जरूरत नहीं है या जो समृद्ध है उन्हें कुछ हफ्तों के बाद यह पैसा RBI को फिर से लौटा देना चाहिए। और सरकार उन लोगों के नाम प्रकाशित कर सकती है जिन्होंने यह पैसा नहीं लौटाया है, या लौटाने से इनकार कर दिया है। रिफंड नहीं करने वाले लोगो के नामों का प्रकाशन यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे 99% नागरिक पैसा लौटा देंगे जिन्हें इसकी आवश्यकता नहीं रह गयी है।
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लेकिन वास्तविकता यह है कि - आज 80% से अधिक लोगो को इस धन की आवश्यकता है।
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अत: ज्यादा से ज्यादा नागरिको को यह ट्वीट भेजना चाहिए।
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मेरा ट्विट - <https://twitter.com/PawanJury/status/1242822471977324544>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 25 2020 19:28:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कोरोना ; क्यों विगत दशकों में भारतीयों में प्रतिरोधक क्षमता कम हुई है
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इसके निम्नलिखित कारण है :
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(1) फलों में उच्च कीटनाशक
(2) फलों को पकाने में रसायनो का ज्यादा उपयोग
(3) पशुओ में दूध बढ़ाने वाले हार्मोन्स का इस्तेमाल
(4) रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग
(5) रासायनिक खाद्य तेल यानी रिफाइंड तेल का उपयोग
(6) पॉलिश किए हुए चावल का अधिक इस्तेमाल
(7) गुड़ की जगह चीनी का इस्तेमाल
(8) फैक्ट्रीयों में बने रिफ़ाइंड साल्ट का इस्तेमाल
(9) अफीम पर प्रतिबंध, और इससे शराब / तंबाकू के उपयोग में वृद्धि हुयी
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इसमें से प्रत्येक और प्रत्येक मामले में, पेड मीडिया पार्टियों (कांग्रेस-संघ-आपा) और पेड मीडीया नेताओ (सोनिया-मोदी साहेब-अरविंद केजरीवाल) द्वारा छापे गए कानून ड्राफ्ट्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई !!
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उदाहरण के लिए, उन्होंने चीनी को सब्सिडी देने वाले कानून ड्राफ्ट्स छापे जिससे चीनी की तुलना में गुड़ की लागत बढ़ गयी। और उन्होंने ऐसे कानून लागू किये जिससे छोटी तेल मिले बाजार से बाहर हो गयी, जबकि बड़ी चीनी मिलों को अप्रत्यक्ष सब्सिडी मिली। बड़ी मिलें खाद्य तेलों में रासायन डालती है, जिसे रिफाइंड ऑइल कहा जाता है।
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फलों और वनस्पति को पकाने में रासायनो का इस्तेमाल करने से प्रतिरोधक क्षमता में काफी कमी आई है। उदाहरण के लिए केले में ऐसे कई विटामिन है जिनका निर्माण सिर्फ तब होगा जब उन्हें प्राकृतिक रूप से पकाया जाए। और प्राकृतिक रूप से पकाने के लिए कई दिनों की आवश्यकता होती है। लेकिन भारतीय शहरों में मिलने वाले ज्यादातर केलो को रसायनो का इस्तेमाल करके 4 घंटो में ही पका लिया जाता है !!! इस तरह पकाये गए केले में शून्य विटामिन होते है, और यह आपको शून्य प्रतिरक्षा देता है !!
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संतरो को पकाने के लिए भी इसी तरह के रसायनो का इस्तेमाल किया जाता है। रसायनो से पकाये गए संतरो में कीटनाशक अधिक एवं विटामिन काफी कम होते है। इस तरह किसी ज़माने में संतरे रोग प्रतिशोधक क्षमता बढ़ाते थे, किन्तु आज नहीं !!
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और रिफाइंड तेल पर विचार करें। प्राकृतिक तेल को रिफाइंड करते समय कई अच्छे या बुरे बैक्टीरिया हटा दिए जाते है, और दर्जनों हानिकारक रसायनों को इसमें मिला दिया जाता है !!! रिफाइंड तेल के पैकेट पर dirty oil या "खाने योग्य नहीं" का लेबल होना चाहिए, लेकिन इसे स्वास्थ्यवर्धक तेल के रूप में बताया जाता है !! भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियों एवं पेड मीडिया नेताओ ने ऐसे कानून छापे जो तेल निर्माताओं को इस अखाद्य तेल को रिफाइंड तेल कहने की अनुमति देते है !!!
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फैक्ट्री में बना सफ़ेद रिफ़ाइंड फ़्री फ़्लो नमक व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को घटाता नहीं है, लेकिन इसमें ऐसे कई आवश्यक घटक नहीं होते है जो कि सेंधे नमक में होते है। फैक्ट्री का नमक उच्च रक्तचाप देता है, और उच्च रक्तचाप की दवाओ के कई अन्य दुष्प्रभाव है।
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तो इस तरह पेड मीडिया पार्टियों द्वारा छापे गए कई सारे कानूनों की श्रृंखला के कारण, भारत के लोगो की प्रतिरक्षा क्षमता कफी कम हो गई है।
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लेकिन एंटी बायोटिक, बेहतर चिकित्सीय उपकरणों की उपलब्धता एवं अधिक अस्पतालों आदि के कारण व्यक्ति की औसत आयु बढ़ी है। लेकिन औसत उम्र बढ़ने बावजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता घट गयी है !!
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तो हमें प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई क़ानून ड्राफ्ट्स को गैजेट में छपवाने की जरूरत है।
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अपनी खुराक में सिर्फ फल-सब्जियां आदि को शामिल करने से कोई बदलाव नहीं आयेगा। क्योंकि हम जितने अधिक फल खाते है उसी अनुपात में शरीर में कीटनाशक और जहरीले रसायन भी पहुंचा देते है !! और इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 25 2020 22:41:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

21 दिन के लॉक डाउन में मुझे दवा और किराने जैसी आवश्यक वस्तुएं कैसे मिलेंगी ?
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(1) प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति के लिए प्रत्येक क्षेत्र में कुछ दुकानों को चिन्हित किया है। यदि आपके पास पैसा है तो आप अमुक दुकानों से आवश्यक सामग्री ले सकेंगे।
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(2) भारत में एक बड़ी आबादी ऐसी है जो “रोज कमाने रोज खाने” की चुनौती का सामना करते हुए जीवन जीती है। अत: रिक्शा चालक, श्रमिक आदि दैनिक रूप से कार्य करके जीवन यापन करने वाले और कम वेतन वाले वर्ग को 21 दिवसीय लॉकडाउन में गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा। और इनके सामने वास्तव में यह समस्या है कि – वे दवा और किराने जैसी आवश्यक वस्तुएं कैसे जुटाएंगे !!
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और सम्भावना है कि, लॉक डाउन बढ़कर 60 दिनों या उससे भी ज्यादा समय तक खिंच सकता है। ऐसे करोड़ो परिवार है (हाँ, करोड़ो) जिनकी अर्थव्यस्था 1000-2000 की नकदी के इर्द गिर्द घूमती है। मतलब उनके पास 1000-2000 रूपये से ज्यादा नकदी कभी एक मुश्त नहीं होती !! यदि इस वर्ग पर जीवन यापन का बोझ बढ़ जाता है तो कानून व्यवस्था को बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
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(2.1) प्रस्तावित समाधान :
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RBI के पास 28 लाख करोड़ से अधिक का कोष है। इस कोष का उपयोग निम्न तरीके से किया जा सकता है :
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(2.1.1) प्रधानमंत्री प्रत्येक नागरिक के खाते में 1000 रू मासिक के हिसाब से जमा करने का आदेश जारी करें।
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(2.1.2) और यह राशि प्रत्येक 30 दिन में अगले 3 माह तक जमा करें।
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(2.1.3 ) इस तरह प्रत्येक नागरिक को अगले 90 दिनों में 3,000 रू प्राप्त होंगे।
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(2.1.4) प्रधानमंत्री आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हुए यह राशि खाते में भेज सकते है, या पैसा पहुँचाने के लिए अन्य किसी पारदर्शी तरीके का इस्तेमाल कर सकते है।
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(2.2) कैसे अर्थव्यस्था के दृष्टीकोण से ऐसा किया जाना व्यवहारिक, न्यायपूर्ण एवं निरापद है।
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(2.2.1) तीन माह तक प्रत्येक व्यक्ति को 1000 रूपये मासिक देने में कुल 4 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे, जो कि हमारी अर्थव्यवस्था के लिए आसानी से वहन करने योग्य है।
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(2.2.2) RBI को इसके लिए किसी विदेशी मुद्रा या डॉलर की जरूरत नहीं है। यह राशि RBI के पास तरल रूप में पड़ी है, और तुरंत ट्रांसफर की जा सकती है।
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(2.2.3) यह पैसा पहले से सप्लाई में है, अत: इसके लिए RBI को नोट छापने की जरूरत भी नहीं है, और इससे इन्फ्लेशन भी नहीं बढेगा।
यह पैसा नागरिको के टैक्स से ही इकट्ठा किया गया है, और आपातकाल में इस्तेमाल किये जाने के लिए है।
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कोष में आयी इस कमी की पूर्ती बाद में की जा सकती है, किन्तु अभी यह वितरण जरुरी है। यदि 1000 रुपये नहीं तो कम से कम 500 रुपये तो दिए ही जाने चाहिए। और यह फैसला तुरंत लेने की जरूरत है।
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(2.3) पैसा सभी को क्यों दिया जाए सिर्फ गरीबो को क्यों नहीं ?
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(2.3.1) पहली वजह यह है कि — आज 70% से अधिक लोगो को इस धन की आवश्यकता है। जिन्हें इस पैसे की जरूरत नहीं है, या जो समृद्ध है उन्हें कुछ हफ्तों के बाद यह पैसा RBI को फिर से लौटा देना चाहिए। और सरकार उन लोगों के नाम प्रकाशित कर सकती है जिन्होंने यह पैसा नहीं लौटाया है, या लौटाने से इनकार कर दिया है। रिफंड नहीं करने वाले लोगो के नामों का प्रकाशन यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे 99% नागरिक पैसा लौटा देंगे जिन्हें इसकी आवश्यकता नहीं रह गयी है।
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और जो कमी रह जाती है उसकी पूर्ती करने के लिए सरकार बाद में कोई भी आयोजन (टेक्स दर में सामयिक अतिरिक्त वृद्धि या सरकारी खर्चो आदि में कटौती) कर सकती है। एक बार हम इस संकट से निकल जाते है तो यह पैसा फिर से खड़ा करना कोई समस्या नहीं है।
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(2.3.2) दूसरी वजह यह है कि — इस समय हमारे पास गरीब-अमीर को चिन्हित करने की कोई सटीक व्यवस्था नहीं है। BPL के सूचीकरण में भी काफी दोष है। सटीक और पारदर्शी व्यवस्था नहीं होने के कारण सरकार इसे चयनात्मक रूप से लागू करेगी जिससे झमेला बढ़ जाएगा। यदि प्रत्येक व्यक्ति को 1000 रुपया भेजा जाता है तो यह एकदम पारदर्शी एवं सत्यापित रहेगा कि प्रत्येक व्यक्ति को पैसा मिल गया है। और यह आसानी से गणन योग्य है।
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यह खुली हुई बात है कि यदि कोरोना भारत में फ़ैलता है तो हमारे पास इससे डील करने के लिए कुछ नहीं है। कोरोना वायरस फेफड़ो पर हमला करता है अत: इससे इन्फेक्टेड व्यक्ति को सबसे पहले वेंटिलेटर की जरूरत होती है।
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हमारे पास वेंटिलेटर नहीं है, और हमें बनाने भी नहीं आते है। यदि आयात करने जायेंगे तो इसमें भी शोर्टेज है, और हमें डॉलर की जरूरत होगी !!
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यदि हम वेंटिलेटर आयात कर लेते है तो हमारे पास ICU यूनिट्स नहीं है। और हमारे पास रातों रात ICU यूनिट्स खड़ी करने की क्षमता भी नहीं है। और अगर हमने ICU यूनिट्स खड़े कर दिए तो हमारे पास डॉक्टर्स का उतना स्टाफ नहीं है।
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और वैक्सीन एवं क्योर तो कोरोना का अभी तक दुनिया में किसी के पास नहीं है। और वैक्सीन बन भी जाती है तो अगले 6 महीने तक यह आने वाली नहीं है !!
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अकेली मुंबई में 20% लोग लगभग फुटपाथ पर सोते है, 30% चालो में रहते है। ये लोग साझा / सार्वजानिक शौचालयों और साझा सार्वजनिक नलो का इस्तेमाल करते है। 100 आदमी इन्फेक्टेड हो गए तो आंकड़ा सप्ताह भर में ही हजारो में चला जायेगा। एक बहुत बड़ी आबादी गाँवों में निवास कर रही है, जहाँ कई किलोमीटर तक वेंटिलेटर, ICU, डॉक्टर का नामो निशान नहीं है।
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मतलब यदि भारत में कोरोना पसर गया तो सरकार पूरे प्रयास करके भी कोई मदद नहीं कर पाएगी। और तब जो लोग इन्फेक्टेड होंगे उन्हें दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा – वित्तीय एवं चिकित्सीय !!
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कोरोना को फैलने से रोकने के लिए लॉक डाउन जरुरी है, और लॉक डाउन ने भारत के करोड़ो नागरिको पर फैलने से पहले ही वित्तीय संकट तो डाल दिया है। अत: सरकार को लॉक डाउन का दबाव कम करने के लिए नागरिको को वित्तीय मदद देनी तत्काल रूप से शुरू करनी चाहिए। और यह सीधे नकदी के रूप में होनी चाहिए।
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(2.4) इसके लिए आप क्या कदम उठा सकते है :
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प्रधानमंत्री जी को ट्वीट करें कि भारत के प्रत्येक नागरिक के खाते में 1000 रू मासिक के हिसाब से जमा करें। और यह राशि प्रत्येक 30 दिन में अगले 3 माह तक जमा करें। प्रधानमंत्री आधार का इस्तेमाल करते हुए यह राशि खाते में भेज सकते है, या पैसा पहुँचाने के लिए अन्य किसी पारदर्शी तरीके का इस्तेमाल कर सकते है।
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कृपया यह ट्वीट करें —
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@PmoIndia #DepositRsThousandPerAdharPerMonthForThreeMonths आधार का उपयोग कर 3 महीने तक बैंक खाते में प्रति व्यक्ति 1000 रु प्रति माह जमा करें। RBI के पास इसके लिए पर्याप्त कोष है। वर्ना लॉ एंड ऑर्डर बनाये रखने की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है !!
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@PmoIndia #DepositRsThousandPerAdharPerMonthForThreeMonths using adhar, pls deposit Rs 1000 per PERSON per MONTH in bank account for 3 months, starting asap. RBI has reserves, and it will meet this expense. Or create new money. Or else, LAW ORDER situation may become SERIOUS !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 27 2020 10:48:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Urgent - कृपया @PmoIndia पर ट्विट करें कि वे लॉक डाउन की अवधि पर जनता की राय जानने के लिए मोबाईल SMS का इस्तेमाल करते हुए एक देश व्यापी जनमत संग्रह करें। और जनमत संग्रह के बावजूद अंतिम फैसला करने का अधिकार पीएम के पास ही रहेगा।
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@PmoIndia #OpenSmsVoteOnLockDown #PmDecsionFinal pls put a phno. voter can SMS his voterid, number of lockdown days he wants. 0 for no lockdown. voterid nDays be made public on PMO website. PM's decision will be final. Using adhar of each phno, ensure one adhar votes only once.
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My tweet - <https://twitter.com/PawanJury/status/1243489343253221376>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 27 2020 11:18:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

@PmoIndia पर ट्विट करें कि वे लॉक डाउन की अवधि पर जनता की राय जानने के लिए मोबाईल SMS का इस्तेमाल करते हुए एक देश व्यापी जनमत संग्रह करें। और जनमत संग्रह के बावजूद अंतिम फैसला करने का अधिकार पीएम के पास ही रहेगा।
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अब लॉकडाउन की अवधि कोरोना से ज्यादा बड़ा मुद्दा है !! और इसीलिए हमें इसे हल करने के लिए प्रक्रिया की आवश्यकता है !!
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मैंने ट्विटर पर @PmoIndia से अनुरोध किया है कि प्रधानमंत्री को SMS आधारित एक जनमत संग्रह की प्रक्रिया स्थापित करें , ताकि कोई भी मतदाता अपना वोटर आई डी नम्बर लिखकर यह sms भेज सके कि वह कितने दिनों तक लॉकडाउन जारी रखना चाहता है। यदि मतदाता लॉकडाउन नहीं चाहता तो वह शून्य “0” लिखकर मेसेज करेगा।
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मतदाताओ द्वारा भेजा गया डेटा पीएम की वेबसाइट पर सार्वजनिक रहेगा, ताकि इसे स्वतंत्र रूप से वेरीफाई किया जा सके।
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अब प्रत्येक फोन नं आधार से जुड़ा हुआ है, इसलिए प्रधानमंत्री यह सुनिश्चित कर सकते है कि प्रत्येक मतदाता एक ही sms भेजे। आधार कार्ड नंबर सार्वजनिक नहीं किये जायेंगे, किन्तु वोटर आई डी नंबर सार्वजनिक होंगे। और भारत के सभी मतदाताओं के वोटर आई डी पहले से ही सार्वजनिक है।
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यदि जनमत संग्रह नहीं किया जाता है तो लॉकडाउन के स्तर एवं अवधि की जिम्मेदारी पीएम पर आएगी, जो कि एक बड़ा मुद्दा है। यदि जनमत संग्रह हो जाता है तो इसमें जनता की भागीदारी होगी। और पीएम को यह अधिकार होगा कि वे जनता द्वारा दिए गए फीड बेक को मान भी सकते है, और नहीं भी मान सकते है। मतलब अंतिम फैसला पीएम के पास ही रहेगा।
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इस समय लॉकडाउन के स्तर एवं इसकी अवधि का फैसला निर्णायक रूप से पीएम कर रहे है। और चूंकि पीएम पेड मीडिया के प्रायोजकों पर बुरी तरह से निर्भर करते है, अत: पीएम पेड मीडिया के प्रायोजको की सलाह पर ही फैसला लेंगे!!
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तो हमारे विचार में, पीएम की जगह भारत के नागरिको को यह अधिकार दिया जाना चाहिए कि वे लॉक डाउन की अवधि के बारे में अपनी मंशा व्यक्त कर सके।
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हम इस वायरस की ताकत का कोई सटीक अंदाजा नहीं है। हो सकता है कि यह स्पेनिश फ्लू की तरह करोड़ो नागरिको की जान ले ले, और हो सकता है कि ज़ीका, निपाह की तरह इसकी मारक क्षमता काफी कम हो।
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इसलिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि भारत का प्रत्येक मतदाता लॉकडाउन की लंबाई पर अपनी राय पीएम को भेजे। और फिर पीएम मतदाताओ से प्राप्त राय को आधार बनाकर कोई भी माध्य अवधि चुन सकते है।
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कृपया निचे दिया गया ट्विट करें –
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@PmoIndia #OpenSmsVoteOnLockDown #PmDecsionFinal pls put a phno. voter can SMS his voterid, number of lockdown days he wants. 0 for no lockdown. voterid nDays be made public on PMO website. PM's decision will be final. Using adhar of each phno, ensure one adhar votes only once.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 27 2020 12:33:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कोरोना वायरस कितना घातक है, इसका इन्फेक्शन कितने लोगो को किस स्तर पर नुकसान पहुंचाता है, यह असली है या षड्यंत्र और इसी तरह के कई जवाबो के उत्तर कुछ ही दिनों में हमें पाकिस्तान से मिलेंगे !!
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क्योंकि उनके पास वेंटिलेटर नहीं है, टेस्टिंग किट नहीं है, ICU यूनिट्स एवं डॉक्टर्स नहीं है, उनके पास 5G भी नहीं है, और वे लॉकडाउन में भी नहीं है। लेकिन उनके पास कोरोना वायरस फुल है !!!
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पाकिस्तान को कोरोना से आमने सामने की फाईट करनी पड़ रही है !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 27 2020 21:07:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क्या लॉकडाउन की अवधि पर नागरिको की रायशुमारी की जानी चाहिए ?
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(A) एक धारा यह है कि, यह वायरस फेफड़ो को इन्फेक्ट कर रहा है। जब ये वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो लगभग 20% लोगो (उम्र एवं इम्युनिटी के अनुसार) को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। जिन्हें सांस लेने में तकलीफ होगी और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होगी। शेष 80% मामूली सर्दी जुकाम के लक्षणों के साथ स्वयं ही ठीक हो जायेंगे।
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आवश्यकतानुसार वेंटिलेटर मिलने पर इन्हें अगले 2 हफ्ते तक आक्सीजन मिलती रहेगी, और इस दौरान शरीर कोरोना से फाईट करते हुए इम्युनिटी जुटा लेगा। वेंटिलेटर के अलावा इन्हें आइसोलेशन यूनिट्स एवं अन्य दवाइयाँ भी मिलेगी जिससे ये जी भी जायेंगे और इन्फेक्शन अन्य लोगो को भी नहीं फैलेगा। लॉकडाउन संक्रमण की गति को कम कर देता है। संक्रमण तो होगा, लेकिन स्पीड टूट जायेगी, ताकि ज्यादा लोगो को इलाज मिल सके। और इस वजह से मृत्यु दर कम होगी।
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(B) दूसरी धारा यह है कि, अन्य फ्लू की तरह ही यह एक साधारण फ्लू है। और उतना जानलेवा नहीं है जितना जानलेवा इसे पेड मीडिया द्वारा रिपोर्ट किया जा रहा है। वे अन्य प्रकार की बीमारियों से होने वाली मृत्यु, सामयिक मृत्यु, वृद्धावस्था के कारण होने वाली मृत्यु आदि को भी कोरोना के खाते में डाल रहे है, और इस वजह से आंकड़ो में भयावहता आ रही है।
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यदि लॉकडाउन न करके सामान्य सोशल डीस्टेंसिंग रखी जायेगी तो नागरिको में इस वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Herd Immunity) उत्पन्न हो जायेगी, जिससे जाने भी कम जायेगी और इकॉनोमी में नुकसान भी कम होगा। फिर इसमें काफी विरोधभासी सूचनाएं, तर्क, राजनीति, कारोबार, अफवाहें, षड्यंत्र, प्रोपेगेंडा आदि सभी कुछ है।
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अब कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश अलग अलग रणनीति का इस्तेमाल कर रहे है।
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(b1) जापान ने लॉकडाउन नहीं किया है। किन्तु वहां पर लगभग सभी लोग मास्क का इस्तेमाल कर रहे है, और जापान में हाईजीन का स्तर भी अन्य देशो की तुलना में काफी उच्च है। तो वहां पर जनजीवन सुचारू होने के बावजूद कोरोना के संक्रमण की दर काफी कम है।
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(b2) अमेरिका में ट्रंप ने इस तरह के एलान दिए है कि वे लॉकडाउन नहीं करेंगे। लेकिन अमेरिका में नागरिको के पास जिस तरह के राइट्स और प्रशासनिक व्यवस्था है वहां पर लॉकडाउन का फैसला अकेला राष्ट्रपति नहीं करता। वहां पर विभिन्न राज्यों के गवर्नर्स ने आंशिक लॉकडाउन किया है, और शेष नागरिको पर छोड़ दिया है। तो आधा लॉक डाउन सरकार की तरफ से है और आधा नागरिको पर।
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(b3) पाकिस्तान के पीएम ने लॉकडाउन से इंकार किया है, किन्तु वहां पर भी राज्य सरकारों ने लॉक डाउन किये है। पाकिस्तान में भी लॉकडाउन को जबरिया निष्पादित नहीं गया है। और वहां पर भी लॉकडाउन है भी और नहीं भी। लेकिन पाकिस्तान में सोशल डिसटेंसिंग भी नहीं है और एक बड़ा वर्ग कोरोना से बेपरवाह है।
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चूंकि इसकी मारक क्षमता को लेकर अलग अलग राय है अत: लॉकडाउन होना चाहिए या नहीं होना चाहिए या कितनी अवधि के लिए होना चाहिए, और क्या इससे कोरोना वायरस रुकेगा इस पर भी विभिन्न देश अलग अलग तरीके से कार्य कर रहे है।
दुसरे शब्दों में, कोरोना जितना ही बड़ा मुद्दा अब लॉकडाउन भी है।
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(C) भारत में लॉकडाउन : भारत में अभी लॉकडाउन भी है और कर्फ्यू भी है। और यह पूरी तरह से लागू भी है। अभी इसकी अवधि 21 दिन तय की गयी है, जिसे बढ़ाया भी जा सकता है। कितने दिनों का लॉकडाउन कितना प्रभावी होगा इस विषय पर भारत में अलग अलग लोगो की अलग राय है। और किसी को नहीं पता कि किस स्तर के और किस अवधि के लॉकडाउन से हम अपना बचाव कर पायेंगे। और चूंकि यह राय का मामला है, तथ्य का नहीं, इसीलिए सभी को सुना जाना चाहिये।
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हमारा सुझाव है कि, लॉक डाउन की अवधि पर जनता की राय जानने के लिए प्रधानमंत्री को मोबाईल SMS का इस्तेमाल करते हुए एक देश व्यापी जनमत संग्रह कराना चाहिए। और जनमत संग्रह के बावजूद अंतिम फैसला करने का अधिकार पीएम के पास ही रहेगा।
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प्रधानमंत्री SMS आधारित जनमत संग्रह के लिए निम्नलिखित प्रकिया का इस्तेमाल करेंगे :
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(1) पीएम जनमत संग्रह के लिए एक मोबाईल नंबर सार्वजनिक करेंगे।
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(2) कोई भी मतदाता अपने आधार से लिंक्ड मोबाईल द्वारा इस नम्बर पर SMS भेज सकता है।
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(3) मतदाता SMS में लॉकडाउन के दिनों की संख्या एवं अपना वोटर आई डी नंबर लिखकर भेजेगा।
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(4) यदि मतदाता 0 (जीरो) लिखकर भेजता है तो इसका आशय होगा शून्य दिनों का लॉकडाउन।
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(5) पीएम प्राप्त हुए सभी SMS को अपनी वेबसाईट पर सार्वजनिक करेंगे।
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(6) आधार कार्ड नंबर सार्वजनिक नहीं किये जायेंगे, किन्तु वोटर आई डी नंबर सार्वजनिक होंगे। और भारत के सभी मतदाताओं के वोटर आई डी पहले से ही सार्वजनिक है।
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(7) 18 वर्ष से के कम उम्र के आधार धारको के SMS ख़ारिज कर दिए जायेंगे।
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(8) प्राप्त SMS के आधार पर पीएम लॉकडाउन की अवधि का माध्य निकालेंगे। यह माध्य ही जनता की राय मानी जाएगी।
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(9) शेष लोगो का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सांसद करेंगे।
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(10) जनमत संग्रह में जो भी नतीजे आये, लेकिन लॉकडाउन की अवधि के बारे में अंतिम फैसला पीएम का ही होगा।
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हमें इस वायरस की ताकत का कोई सटीक अंदाजा नहीं है। हो सकता है कि यह स्पेनिश फ्लू की तरह करोड़ो नागरिको की जान ले ले, और हो सकता है कि ज़ीका, निपाह की तरह इसकी मारक क्षमता काफी कम हो।
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यदि जनमत संग्रह नहीं किया जाता है तो लॉकडाउन के स्तर एवं अवधि की जिम्मेदारी पीएम पर आएगी, जो कि एक बड़ा मुद्दा है। यदि जनमत संग्रह हो जाता है तो इसमें जनता की भागीदारी होगी। और पीएम को यह अधिकार होगा कि वे जनता द्वारा दिए गए फीड बेक को मान भी सकते है, और नहीं भी मान सकते है।
.
इस समय लॉकडाउन के स्तर एवं इसकी अवधि का फैसला निर्णायक रूप से पीएम कर रहे है। और चूंकि पीएम पेड मीडिया के प्रायोजकों पर बुरी तरह से निर्भर करते है, अत: पीएम पेड मीडिया के प्रायोजको की सलाह पर ही फैसला लेंगे !!
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यदि आप चाहते है कि पीएम इस तरह की रायशुमारी करें ताकि आप लॉकडाउन पर अपना प्रतिभाव भेज सके तो यह ट्विट पीएम को भेजे –
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@PmoIndia, #OpenSmsVoteOnLockDown #PmDecsionFinal कृपया एक फोन नं जारी करें ताकि नागरिक अपनी वोटर ID व लॉकडाउन की अवधी (N days) लिखकर SMS भेज सके। 0 से आशय होगा लॉकडाउन नही। मतदाता द्वारा भेजी दिनों की संख्या सार्वजनिक की जाएगी, और लॉकडाउन की अवधि पर अंतिम फैसला पीएम ही करेंगें।
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@PmoIndia, #OpenSmsVoteOnLockDown #PmDecsionFinal pls put a phno. voter can SMS his voterid, number of lockdown days he wants. 0 for no lockdown. voterid nDays be made public on PMO website. PM's decision will be final. Using adhar of each phno, ensure one adhar votes only once.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 27 2020 22:38:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आवश्यक : निम्बाहेडा पुलिस ने गोपाल टाइगर बडोली को कोरोना वायरस पर अफवाह फैलाने का बहाना बनाकर गिरफ्तार किया है। यह दूसरी बार है जब गोपाल जी धाकड़ को पुलिस ने फेसबुक पर लिखे गए पोस्ट को बहाना बनाया है।
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कृपया यह ट्विट करें : @PoliceRajasthan @ChghPolice #ReleaseGopalDhakadofBadauli , थाना निम्बाहेड़ा के पुलिस अफसर ने गोपाल धाकड़ बड़ोली से व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए इस बार कोरोना का इस्तेमाल किया, और उन्हें फिर झूठे मामले में फंसाया। @ashokgehlot51 @SachinPilot @ajaymaken
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Mar 29 2020 22:14:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Covid 19 का क्या इलाज है ?
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कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के पास 3 विकल्प है :
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(i) प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता
(ii) खेल में बने रहने के लिए वेंटिलेटर एवं सहायक दवाइयाँ
(iii) ब्लड प्लाज्मा ट्रीटमेंट
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(1) प्रतिरोधक क्षमता विकसित होना : अभी तक के आंकड़े बताते है कि कोरोना से संक्रमित होने वालो में से औसतन 80% व्यक्तियों को किसी इलाज की जरूरत नहीं होती और मामूली लक्षण प्रकट होने के साथ ही उनका शरीर कोरोना के प्रति प्रतिरक्षा जुटा लेता है जिससे वे ठीक हो जाते है।
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आयु, स्वास्थ्य, जींस आदि व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करते है, अत: कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले शेष 15-20% को इलाज की जरूरत होगी।
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(1.1) शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कैसे विकसित होती है ?
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शरीर पर लगातार कई जीवाणु-विषाणु आदि हमला करते रहते है, और मानव शरीर इन्हें नष्ट करने के लिए निरंतर एन्टीजन बनाता रहता है। जब शरीर किसी पैथोजन (बैक्टीरिया, वायरस आदि) के खिलाफ एन्टीबॉडी बना लेता है, तो कहा जाता है कि शरीर ने अमुक पैथोजन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है।
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मान लीजिये कि कोई नया पैथोजन C शरीर पर आक्रमण करता है। अब शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली C को परास्त करने के लिए एन्टीबॉडी विकसित करना शुरू कर देगी। जब तक प्रतिरोधक प्रणाली एवं C के बीच में यह लड़ाई चलेगी तब तक शरीर बीमार रहेगा।
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यदि पैथोजन C हावी हो गया तो शरीर के कई महत्त्वपूर्ण अंगो को डेमेज कर देगा और व्यक्ति मर जायेगा। लेकिन यदि शरीर C की सेना को मारने वाले एन्टीबॉडी बना लेता है तो एन्टीजन के सैनिक पैथोजन की सेना को मार देंगे और व्यक्ति ठीक हो जाएगा।
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अब चूंकि शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली C के खिलाफ एन्टीबॉडी बनाने का फार्मूला ईजाद कर चुकी है, अत: आने वाले समय में भी जब कभी C हमला करेगा तो शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली C को हराने वाले एन्टीबॉडी का उत्पादन करना तुरन्त शुरू कर देगी, और C चित हो जाएगा।
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कोरोना एक नया वायरस है, अत: मानव शरीर में इस वायरस का मुकाबला करने वाले एन्टीजन नहीं है। जब व्यक्ति में कोरोना प्रवेश करता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए यह एक नया दुश्मन है। अत: शरीर को इसके खिलाफ एन्टीबॉडी बनाने पड़ेंगे। और लगभग 80% मानव शरीर कोरोना को परास्त करने वाले एन्टीजन बना लेंगे।
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तो संक्रमित होने वाले 80% लोग प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने के कारण खुद ही ठीक होने वाले है। इन लोगो को कब इन्फेक्शन होगा और कब ये ठीक होंगे उन्हें पता भी नहीं चलेगा !!
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लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि, यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण हो जाता है तो उसे यह पता नहीं है कि वह 80% वालों में शामिल है या 20% में !! इसीलिए यह जरुरी है कि यदि कोई व्यक्ति संक्रमित होता है तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास पहुंच जाना चाहिए या खुद को कोरेंटाईन कर लेना चाहिए।
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(1.2) मेडिकल साइंस में रातों रात प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का कोई तरीका नहीं है। मतलब ऐसी कोई दवा मौजूद नहीं है जो सटीक रूप से किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता में 1% का भी इजाफा तुरंत कर सके।
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(1.3) नॉन मेडिकल साइंस वाले तबके से कई लोग इस बारे में अपने अपने तरीके से सलाहें दे रहे है, जिसमें अच्छे खान पान से लेकर, पूरी नींद एवं कुल्हाड़ी का सूप तक शामिल है।
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बहरहाल वांछित प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेने वाले इन 80% को लेकर कोई समस्या नहीं है, किन्तु समस्या इन शेष 20% लोगो को लेकर है। क्योंकि कुल्हाड़ी का सूप इन पर काम नहीं करेगा !!
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(2) टिके रहने के लिए वेंटिलेटर एवं सहायक दवाइयाँ : कोरोना वायरस फेफड़ो पर मौजूद जीवाणुरोधी परत / झिल्ली को खा जाता है, जिससे अन्य बैक्टीरिया फेफड़ो को संक्रमित कर देते है। यदि संक्रमित व्यक्ति को वेंटिलेटर नहीं मिला तो उसके फेफड़े जाम हो जायेंगे और मृत्यु होने की सम्भावना बढ़ जायेगी। वेंटिलेटर उसे सांस देता रहेगा और इस दौरान शरीर एन्टीबॉडी बनाने का प्रयास करेगा।
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इसके अलावा डॉक्टर अपने अनुभव एवं अनुमान से अन्य सहायक दवाइयाँ (मलेरिया की दवा, HIV की दवा आदि) भी देते रह सकते है, ताकि रोगी के आवश्यक अंगो को कम नुकसान हो। यदि शरीर वक्त रहते कोरोना का एन्टीबॉडी बना लेता है तो व्यक्ति बच जायेगा वर्ना मृत्यु होना तय है।
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इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि, वेंटिलेटर एवं अन्य सहायक दवाइयाँ सिर्फ उस डेमेज को कम करने का काम कर सकते है जो डेमेज कोरोना वायरस दे रहा है। अभी तक ऐसी कोई दवा मौजूद नहीं है जो कोरोना के वायरस को मार सके। उसे शरीर द्वारा बनाए गए एन्टीबॉडी ही मारेंगे।
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लेकिन यदि रोगी को वेंटिलेटर एवं अन्य सहायक दवाइयाँ नही दी गयी तो कोरोना एक के बाद एक शरीर के अन्य अंगो को नुकसान पहुंचाता जाएगा। अन्य अंगो के निष्क्रिय हो जाने से रोगी मर जाएगा, और शरीर को एन्टीबॉडी विकसित करने का पर्याप्त समय नही मिलेगा।
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(3) कोरोना से रिकवर हुए व्यक्ति का प्लाज्मा : मौजूदा स्थिति में कोरोना का यह सबसे प्रभावी इलाज है। प्लाज्मा ट्रीटमेंट के साथ कई व्यवहारिक कठिनाइयाँ है। लेकिन यदि कोई VVIP कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो उसे यह इलाज मिल सकता है।
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(3.1) ब्लड प्लाज्मा क्या है ?
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खून के मुख्य रूप से 2 संघटक है :

(3.1.1) ब्लड प्लाज्मा - हल्के पीले रंग का एक द्रव है जो खून का मूल तत्व है। खून में लगभग 55% हिस्सा प्लाज्मा नामक द्रव होता है।
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(3.1.2) रक्त कोशिकाएं (Rbc + Wbc + Platelets) – ये कोशिकाएं प्लाज्मा नामक तरल में ही बहती है।
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शरीर में से प्लाज्मा निकालने के लिए पहले व्यक्ति का रक्त निकाला जाता है, और फिर इसमें से प्लाज्मा अलग कर लिया जाता है।
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शरीर जब भी कोई एन्टीजन बनाता है तो ये एन्टीबॉडी प्लाज्मा में संग्रहित रहते है। मान लीजिये कोई व्यक्ति X कोरोना से संक्रमित हुआ और कुछ दिनों बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया है। चूंकि अब X के प्लाज्मा में कोरोना वायरस को मारने वाले एन्टीबॉडी मौजूद है, अत: X के रक्त में से प्लाज्मा निकाल कर किसी संक्रमित व्यक्ति को दिया जा सकता है। जब संक्रमित व्यक्ति को X का प्लाज्मा दिया जायेगा तो शरीर में कोरोना वायरस को मारने वाले एन्टीबॉडी चले जायेंगे और वे कोरोना वायरस को मार देंगे !! ( Imported Weapons )
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(3.2) प्लाज्मा ट्रीटमेंट के साथ चुनौतियाँ :

(3.2.1) यदि संक्रमण काफी फैल चुका है तो सीमित एन्टीबॉडी व्यक्ति को बचा नहीं पायेंगे।
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(3.2.2) दाता का रक्त निर्दोष होना चाहिए। मतलब उसे अन्य कोई बीमारी न हो।
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(3.2.3) खर्चीली एवं जटिल प्रक्रिया होने से सिर्फ अमीर / शक्तिशाली व्यक्ति ही इस्तेमाल कर सकेंगे।
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(3.2.4) प्लाज्मा डोनर बदले में ऊँचे दाम मांग सकता है।
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(3.2.5) यदि रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली काफी कमजोर है तो शरीर एन्टीबॉडी को एडोप्ट नहीं कर पायेगा, और सीमित संख्या के एन्टीजन कोरोना वायरस की संख्या को कवर नहीं कर सकेंगे।
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(3.3) अमेरिका में कोरोना वायरस से रिकवर हुए व्यक्तियों के प्लाज्मा से अन्य संक्रमित व्यक्तियों का इलाज करने की दिशा में काम किया जा रहा है - <https://www.theatlantic.com/science/archive/2020/03/plasma-blood-covid-19-survivors/609007/>;
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(3.4) वुहान इंस्टीट्युट जब नागालेंड से चमगादड़ लेकर गया था तो उन आदिवासियों के रक्त नमूने भी ले गया था जिनमे सार्स परिवार के वाइरस के प्रति प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता मौजूद है। कोरोना सार्स परिवार का ही सदस्य है। पूरी सम्भावना है कि इन आदिवासियों के प्लाज्मा में कोरोना के एन्टीबॉडी मौजूद है।
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टाटा भी इस अध्ययन में शामिल था। हमें नहीं पता कि टाटा के पास इस बारे में क्या जानकारी है। उसने यह जानकारी भारत सरकार को दी है या नही दी है, और सरकार ने मांगी भी है या नहीं। हालांकि सरकार ने इस प्रकरण की जांच कराई थी। लेकिन नतीजे सार्वजनिक नहीं है।
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(3.5) वुहान में कोरोना का संक्रमण बड़े पैमाने पर हुआ था। लगभग पूरा प्रान्त इसकी चपेट में था। अभी उन सभी में इसके एन्टीबॉडी बन चुके है, और उनके प्लाज्मा का इस्तेमाल इसके लिए किया जा सकता है। हमें नहीं पता अगर चीन ने प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया हो।
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तो इन्फेक्शन होने पर संक्रमित व्यक्ति के पास बचाव के अतिरिक्त उपरोक्त 3 विकल्प से इतर कोई मार्ग नहीं है।
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जहाँ तक वैक्सीन की बात है, कोरोना वायरस को मारने वाली कोई दवा या वैक्सीन वास्तविक दुनिया में उपलब्ध नहीं है। हालांकि सोशल मीडिया एवं पेड मीडिया पर रोज एक न एक दवा या वैक्सीन की खोज-खबर आती रहती है !!
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Fittest will Survive…
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 30 2020 12:36:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

स्थानीय समाचार पत्र भीलवाड़ा हलचल की हेडलाइन कहती है कि - कोरोना से पहली मौत
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हेडलाइन के अंदर लिखा है - मौत कोरोना से नहीं हुई। उनकी किडनी फ़ैल हो गयी थी एवं ब्रेन स्ट्रोक भी हो चुका था।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 31 2020 06:17:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पीएम को ट्विट करें कि कोरोना फंड के लिए अलग से कोष स्थापित करें ताकि दानदाता द्वारा दिया गया पैसा जरूरतमंद के खाते में सीधे भेजा जा सके। साथ ही दानदाता एवं प्राप्तकर्ता का नाम, मतदाता संख्या और धनराशी को सार्वजनिक वेबसाईट पर रखें. यह भी प्रावधान जोड़े कि दानदाता यह निर्दिष्ट कर सके कि उसके द्वारा दिया पैसा किसे भेजा जाना चाहिए।
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इससे घपला नहीं होगा और जरूरतमंद को पैसा पहुंचेगा।
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@PMOIndia, #SeparateDonationFundForDirectDepositToNeedy कोरोना फंड के लिए अलग कोष स्थापित करें एवं प्राप्त धन जरूरतमंद के खाते में सीधे भेजे। दाता एवं प्राप्तकर्ता का नाम, वोटर ID, धनराशि को सार्वजनिक करें. दानदाता यह निर्दिष्ट कर सके कि उसके द्वारा दिया पैसा किसे भेजा जाए।
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PMO India #SeparateDonationFundForDirectDepositToNeedy pls create a separate fund where donor's money will be all DIRECTLY deposited into accounts of needy, and names/voterid and amount receiver donor will be on website. Donor may specify specific receiver, amounts if he wants.
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my tweet : <https://twitter.com/PawanJury/status/1244869721746329600>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 31 2020 18:29:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2764159737035578>;

Pawan Jury BhilwaraRj:

स्थानीय समाचार पत्र भीलवाड़ा हलचल की हेडलाइन कहती है कि - कोरोना से पहली मौत
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हेडलाइन के अंदर लिखा है - मौत कोरोना से नहीं हुई। उनकी किडनी फ़ैल हो गयी थी एवं ब्रेन स्ट्रोक भी हो चुका था।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 31 2020 20:43:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चीन ने 23 जनवरी 2020 को वुहान में लॉकडाउन कर दिया था। हमें पता था कि यह वायरस भारत में भी आएगा। और 100% आएगा !!
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हमारे पास नागरिको को संभावित लॉकडाउन के बारे में सूचित करने के लिए 60 दिन का समय था।
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हमारे पास फैसला लेने एवं योजना बनाने के लिए 60 दिन थे कि हमें लॉकडाउन करना है या नहीं करना है, या किस अवधि के लिए किस क्रम में करना है। और हमें वायरस की मारक क्षमता के बारे में भी जानकारी थी !!
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इस बात पर बहस हो सकती है, कि हमें 60 दिन पहले ही नागरिको को इस बारे में सूचित / डराना चाहिए था या नहीं। लेकिन इतना तय है कि हमारे पास सूचित करने या न करने के लिए 60 दिनों का वक्त था !!
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और हमारे पास दक्षिण कोरिया जैसे देशों के आंकड़ो का अध्ययन करके निष्कर्ष निकालने का भी वक्त था कि किस उम्र के लोगो पर यह वायरस ज्यादा असर दिखा रहा है, या यह किस स्थिति में ज्यादा मारक है। और इन नतीजो के आधार पर नागरिको को सूचित किया जा सकता था।
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दुसरे शब्दों में, पीएम के पास कई हफ्तों तक यह विकल्प मौजूद था कि वे लॉकडाउन की घोषणा में नोटबंदी की तरह एडवेंचर डालना चाहते है या नहीं।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 31 2020 21:01:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

@PmoIndia को ट्वीट करें कि कोरोना से मरने वाले रोगियों के नाम, उम्र, उनकी अन्य बीमारियों का इतिहास एवं मतदाता संख्या को सार्वजनिक करें।
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मेरी राय में, मरने वालों पर निजता का अधिकार लागू नहीं होता।
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और जो जीवित है उन्हें इन आंकड़ो का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकालने की जरूरत है, ताकि वे जिन्दा रहने की दिशा में सटीक कदम उठा सके।
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@PmoIndia, #DiscloseNameAgeOtherIllnessesOfCoronaDead कोरोना से मरने वालो के नाम, उम्र, उनकी अन्य बीमारियों का इतिहास एवं मतदाता संख्या सार्वजनिक करें, ताकि इनका अध्ययन किया जा सके। मेरी राय में मृतक को निजता का अधिकार नहीं है। ये आंकड़े छिपाने से अफवाहे फैलेगी एवं नुकसान होगा।

@PmoIndia #DiscloseNameAgeOtherIllnessesOfCoronaDead .Not all patients. Only those who passed away. In my opinion,dead have no right to privacy. And those alive need to decide to have their right to life. Information suppression will cause more rumors and damages. #Transparency
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my tweet - <https://twitter.com/PawanJury/status/1245093280703901696>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 31 2020 21:28:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

लॉकडाउन की घोषणा सबसे पहले अरविन्द केजरीवाल, पंजाब (कांग्रेस) के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कई मुख्यमंत्रियों ने की थी। और फिर मोदी साहेब ने लॉकडाउन का फैसला लिया -- क्या ये सभी लोग एक ही इकाई से निर्देश लेते है ?
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20 मार्च 2020, शुक्रवार - मोदी साहेब ने एक दिन का जनता कर्फ्यू घोषित किया।
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22 मार्च 2020, रविवार - केजरीवाल ने 8 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की।
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22 मार्च 2020, रविवार - कांग्रेस पंजाब के सीएम ने 8 दिन के लॉक डाउन की घोषणा की।
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और अगले दिन मोदी साहेब ने 3 सप्ताह के लॉकडाउन की घोषणा की।
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तो अचानक पार्टियों एवं नेताओं में लॉकडाउन करने की प्रतियोगिता शुरू हो गयी थी !! उनके बीच आंतरिक स्तर पर क्या संवाद चल रहा था हम नहीं जानते।
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पर अचानक सभी नेता लॉकडाउन करने पर सहमत हो जाते है, या बाध्य किये जाते है !!
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हो सकता है कि उन्हें नागरिको की फ़िक्र हो और उन्हें लगा हो कि लॉकडाउन की जरूरत है। यह भी हो सकता है कि ये सभी लोग एक ही इकाई से आदेश ले रहे हो !!
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और इस तथ्य पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि, हफ्तों से पेड मीडियाकर्मी इधर उधर छलांगे लगाते हुए बता रहे थे कि चाइना में कोरोना ने तबाही ला दी है, किन्तु सभी पेड मीडियाकर्मीयों ने इस बात को काफी सफाई से छिपाया कि -- चीन में सिर्फ वुहान में लॉकडाउन किया गया था, पूरे देश में नहीं। वुहान के अलावा शेष राज्यों में चीन ने सिर्फ DE CROWDING की थी, लॉकडाउन नहीं। इसके अलावा पेड मीडिया ने सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और जापान के तथ्यों को भी दबा दिया।
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यह मामला सिर्फ कोरोना तक सीमित नहीं है। इसमें वायरस के अलावा भी काफी कुछ है। जो वक्त गुजरने के साथ सामने आएगा।
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