Posts for 2017-11

Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 07 2017 17:25:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कुछ अंध भगतो का कहना है कि विमुद्रीकरण की वर्ष गाँठ पर यदि एक बार और नोट बंदी कर दी जाये तो देश से बचा खुचा काला धन भी ख़त्म हो जायेगा। और इस बार नोटबंदी 100 एवं 50 के नोटो पर भी आनी चाहिये !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Nov 08 2017 15:27:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ता भारतीय रेल को स्टील भी आयात करने को कह रहे है !!!
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"मेक इन इण्डिया" के नाम पर अब पटरियों के लिए लोहा लक्कड़ भी विदेशियों से ख़रीदा जा रहा है !!
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रेलवे पटरियों के का निर्माण बेहद पोचे दर्जे की तकनीक है और इन्हें भारत में आसानी से बनाया जा सकता है। पर मोदी साहेब का कहना है कि इस कारोबार में भी विदेशियों को हिस्सा मिलना चाहिए !!
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रेलवे को लगभग 3000 हजार करोड़ के स्टील की जरूरत है। और इसका एक बड़ा हिस्सा आयात किया जायेगा !!!

इन लोगो को स्टील अथोरिटी ऑफ़ इण्डिया को कुशल बनाने के लिए आवश्यक कानूनों को लागू करने की फ़िक्र नहीं है। क्योंकि इससे सिर्फ देश को मुनाफा होगा इन्हें नहीं।

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<https://scroll.in/latest/855682/indian-railways-floats-global-tender-to-get-seven-lakh-tonnes-of-rail-from-private-companies>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Nov 08 2017 15:54:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कृपया राईट टू रिकॉल कानूनों के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को आर्थिक सहयोग करे अथवा स्वयं चुनावों में हिस्सा लें।
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साथ ही यह भी ध्यान रखे कि आपके इस आर्थिक सहयोग को भुला दिया जाएगा।
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कई रिकालिस्ट्स की आर्थिक स्थिति इतनी माकूल है कि उन्हें प्रचार करने या चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक सहयोग की जरूरत नहीं रहती है। किन्तु कतिपय कारणों के चलते इनमे ज्यादातर रिकालिस्ट्स चुनाव लड़ने में रुचि नहीं दिखाते। और कुछ कार्यकर्ता ऐसे भी है जो इन कानूनों पर चुनाव लड़ते है, किन्तु उनकी आर्थिक स्थिति उतनी बेहतर नहीं है।उदाहरण के लिए, मेरी जानकारी में ऐसे कार्यकर्ता है जो 20 हजार माहवार वेतन पर काम करते हुए 4 सदस्यीय परिवार का पालन करते है एवं चुनाव लड़ने पर अपना समय तथा धन भी खर्च करते है।
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तो जो रिकालिस्ट्स समर्थ है उन्हें ऐसे प्रत्याशियों को आर्थिक सहयोग करना चाहिए जो चुनावों में भाग ले रहे है।
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कृपया अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर एक एल्बम बनाए और जब भी आप किसी चुनावी कार्यकर्ता को आर्थिक सहयोग दें तो इस राशी को इस एल्बम पोस्ट में दर्ज करें, ताकि रिकॉर्ड के लिए इस अंशदान के अभिलेख आसानी से जुटाए जा सके।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Nov 09 2017 09:07:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पद्मावती ; फिल्म का प्रचार करने के नाम पर चलाये जा रहे फर्जी समाधान Vs वास्तविक समाधान
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(1) फर्जी समाधान -- फेसबुक प्रोफाइल पर इसके विरोध में पोस्ट लिखें , फिल्म के खिलाफ नारेबाजी करें , इसके अभिनेताओं एवं निर्देशकों को गालियां दें, थियेटर मालिकों को धमकाए, उनके साथ मारपीट करें, तोड़फोड़ करें एवं इस फिल्म के खिलाफ ट्वीटर पर अभियान चलाएं। इन सब हरकतों से इस फिल्म का प्रचार होगा और जितना ही इसका विरोध होगा उतना ही अंतराष्ट्रीय बाजार में इसका मूल्य बढ़ता जाएगा। इस प्रकार के विरोध एवं प्रचार से इस फिल्म के सेटेलाइट अधिकारों के दाम भी उछल जाएंगे और निर्माता को मोटी कमाई होगी।
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सरकार से इसे बेन करने की मांग करना भी व्यर्थ है। अव्वल तो सरकार इसे बेन नहीं करेगी। और यदि कर भी देती है तो निर्माता शेष विश्व में इसे रिलीज करके मोटा मुनाफा कमा सकेगा। हिन्दू रानी का विद्रूप चित्रण करने के आरोप में बेन करने के एवज में सऊदी अरेबिया जैसे देश इसे टेक्स फ्री भी कर सकते है या दर्शको को इसे देखने के लिए उलटे पैसे भी दे सकते है। इसके अलावा मिशनरीज तो है ही।
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तो आप देखेंगे कि पेड मीडिया इस फिल्म के विरोध को पर्याप्त हवा दे रहा है, विरोध की खबरें दिखाई जा रही है तथा विभिन्न संगठन खुद का एवं फिल्म का प्रचार करने के लिए इस फिल्म का जमकर विरोध कर रहे है। कई कार्यकर्ता भी इन सबकी मिली जुली रणनीति के शिकार होकर जाने अनजाने इस फिल्म का प्रचार करने में लगे है।
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1.a) इससे पहले पीके, ओह माय गॉड , दंगल जैसी फिल्मो का विरोध हो चुका है, और ये फिल्मे रिलीज भी हुयी और बेहद सफल भी हुयी। पद्मावती का फर्जी विरोध करने वाले जानते है कि इस विरोध से जो भी होगा वह इसका प्रचार होगा। अंततोगत्वा फिल्म रिलीज होगी और देश भर के सिनेमाघरों में चलेगी। यदि फिल्म की ओपनिंग कमजोर रहती है तो कुछ हुड़दंगी संगठन थियेटर में जाकर तोड़फोड़ कर देंगे या निर्देशक के पुतले जला देंगे जिससे इसका प्रचार होगा और शेष राज्यों में यह फिल्म भीड़ खींचने लगेगी !!!
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1.b) रिलीज होने के बाद इस फिल्म के सेटेलाइट अधिकार बेचे जायेगे और पीके , ओह माय गॉड , दंगल की तरह इस फिल्म को प्रति सप्ताह तब तक दिखाया जायेगा जब तक कि प्रत्येक भारतीय इस फिल्म को न देख ले।
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1.c) सरकार इस फिल्म को बेन नहीं करना चाहती है। किन्तु यदि बेन करने का पर्याप्त दबाव बन जाता है तो वे इसे बेन कर देंगे और निर्माता से कहेंगे कि कोर्ट से इसकी एन ओ सी ले आये। निर्माता 2 दिन में कोर्ट से रिलीज का आदेश ले आएगा। कोर्ट सरकार को यह भी आदेश देगी कि इस फिल्म के प्रसारण की समुचित सुरक्षा के प्रबंध करें। कोर्ट के आदेश पर जब पुलिस थियेटरो के बाहर खड़ी रहेगी तो तोड़फोड़ करने की मंशा रखने वाले संगठन खामोश हो कर घर चले जाएंगे। जजों का पुतला फूंकने में जो साहस चाहिए वे उससे वंचित है।
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1.d) दरअसल फिल्म से मुनाफा कमाना कोई विषय ही नहीं है। फिल्म में पैसा सऊदी अरेबिया / मिशनरीज ने लगाया है और उन्हें इससे मुनाफा कमाने की कोई फ़िक्र भी नहीं है। वे हिन्दू चरित्रों का नकारात्मक चित्रण करना चाहते है। वे यह सन्देश देना चाहते है कि जौहर करना एक अतार्किक एवं बेवकूफी भरा कदम था, और पद्मावती को खिलजी के साथ चले जाना चाहिए था। मदर इण्डिया ऑस्कर के अंतिम दौर से इसीलिए बाहर हो गयी थी क्योंकि "उनका" मानना था कि नरगिस को साहूकार से आर्थिक मदद लेने के बदले अपनी देह का सौदा कर लेना चाहिए था। मददगार को अपनी देह न सौंप कर नायिका ने बच्चों के पालन पोषण से समझौता किया था।
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(2) वास्तविक समाधान
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@pmoindia पर ट्वीट करें कि फिल्म के प्रसारण का फैसला करने के लिए ज्यूरी ट्रायल किया जाए।
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ज्यूरी मंडल का गठन :
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१) ज्यूरी में 500 सदस्य होंगे। इसमें आधे सदस्य मेवाड़ प्रदेश से तथा शेष सदस्य राजस्थान से होंगे।
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२) ज्यूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा।
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३) इन सदस्यों का चयन प्रदेश की मतदाता सूचियों से अक्रमत ( रेंडमली ) विधि से किया जाएगा।
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४) ज्यूरी नियमति रूप से सुनवाई करेगी और तीन चौथाई बहुमत से आरोपियों का नार्को टेस्ट ले सकेगी।
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५) ज्यूरी जो भी फैसला दे उसकी अपील राष्ट्रीय ज्यूरी में की जा सकती है। राष्ट्रीय ज्यूरी में 1500 सदस्य होंगे और इनका चयन पूरे देश से किया जाएगा।
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६) राष्ट्रीय ज्यूरी के फैसले की अपील सुप्रीम कोर्ट में नहीं की जा सकेगी न ही संसद इस फैसले की खिलाफ कोई प्रस्ताव ला सकती है। किन्तु इस फैसले को राष्ट्रिय स्तर पर जनमत संग्रह की किसी प्रक्रिया द्वारा तब पलटा जा सकेगा जब देश के 51% मतदाता ऐसा समर्थन दर्शाएं।
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इस ज्यूरी के सामने फिल्म के निर्माता निर्देशक एवं विभिन्न अन्य पक्षकार फिल्म के बारे में अपना स्पष्टीकरण या पक्ष रख सकते है। ज्यूरी सदस्य फिल्म देखकर यह तय कर सकते कि फिल्म को बेन करने के अलावा राष्ट्रिय चरित्रों का विद्रूप चित्रण करने के आरोप में निर्माता , निर्देशक एवं अभिनेताओ को क्या सजा दी जानी चाहिए। यदि मुझे ज्यूरी में आने का अवसर मिलता है और यह पाया जाता है कि फिल्म में विद्रूप चित्रण किया गया है तो मेरा वोट इन्हें जेल में भेजने के लिए होगा। निर्माता , निर्देशक, एवं फिल्म के तीनो मुख्य अभिनेताओं / अभिनेत्री को कम से कम 3 साल की सजा दी जानी चाहिए। तीन साल की यह सजा इन्हें चित्तोड़ जेल में काटनी होगी और इन्हें एक भी दिन के लिए पैरोल पर रिहा नहीं किया जाएगा।
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ऐसे फैलसे से यह फिल्म देश के अलावा अन्य देशो में भी ऑफिसियली रिलीज नहीं हो पाएगी। अलबत्ता टोरेंट पर यह फिल्म उपलब्ध रहेगी और इसे किसी भी तरह से रोका नही जा सकेगा। पर सजा मिलने से आइन्दा से कोई भी निर्माता-निर्देशक ऐसी फिल्म बनाने का साहस नहीं जुटाएगा और यदि वह साहस जुटाता भी है तो उसे अभिनेता नहीं मिल सकेंगे।
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कृपया @pmoindia पर यह ट्वीट करें - @pmoindia I instruct you to order jury trial on padmavti movie makers. #JuryTrialOnPadmawatiMakers .
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स्थायी समाधान सेंसर बोर्ड चेयरमेन पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया है। इस क़ानून के आने से ऐसी गलीज फिल्मो रिलीज करने वाले चेयरमेन को जनता नौकरी से निकाल सकेगी, और नया आने वाला चेयरमेन तमीज से काम करेगा। ज्यूरी सिस्टम प्रक्रियाएं लागू होने से इस तरह की फिल्में बनाने वाले और इन्हे प्रमोट करने वाले अपना प्रभाव खो देंगे।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Nov 09 2017 16:58:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Nov 09 2017 18:34:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पेड़ रविश कुमार द्वारा प्रस्तुत यूनिवर्सिटी सीरिज, एपिसोड 22. निचे दिया गया वीडियो देखें। ( अवधि - 16 मिनिट )
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<https://www.youtube.com/watch?v=ShTCPA2T2Bk&feature=share>;
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पेड रविश कुमार ने 22 एपिसोड में देश के लगभग सभी राज्यों की ज्यादातर यूनिवर्सिटीज का ग्राउंड पर जाकर जायजा लिया है। यू ट्यूब पर जाकर आप इन्हें देख सकते है। कुछ 2-4 एपिसोड देखने से आपको स्थिति की भयावहता का अंदाजा हो जाएगा।
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ऊपर जो वीडियो दिया गया है वह विज्ञान-गणित की यूनिवर्सिटी से सम्बंधित है। और यही सबसे चिंतनीय बात है।
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पेड रविश कुमार पेड होने के कारण इसके समाधान पर चर्चा नहीं करते। वे सिर्फ समस्याएं उठाते है।
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समाधान ?
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राईट टू रिकॉल शिक्षा मंत्री, राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी एवं ज्यूरी सिस्टम के अलावा इस सिस्टम को किसी भी तरह से सुधारा नहीं जा सकता। इन कानूनों के ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 10 2017 07:56:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल कानूनों के प्रचार के लिए "राकेश सूरी" कौशाम्बी क्षेत्र ( उत्तर प्रदेश ) से नगरपालिका चुनावो में प्रत्याशी है।

Rakesh Suri Ghaziabad UpActivist:

आज 6/11/2017 को राइट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्याशी राकेश सूरी ने वार्ड नम्बर 72 कौशांबी से नामंकन फॉर्म जमा करवा दिया

नामांकन फॉर्म की रसीद

राकेश सूरी

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 10 2017 19:17:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि जीएसटी की दरें और रिटर्न भरने की अवधि में किये गए ज्यादातर बदलाव अस्थायी यानी चुनावी है और दी गयी ये राहते 14 दिसंबर 2017 को शाम 6 बजे फिर से वापिस ले ली जायेगी। ज़ाहिर है ये सभी राहतें सिर्फ गुजरात चुनावों के मद्देनजर दी गयी है।
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कल्पना कीजिये कि यदि देश की सभी विधानसभाओ एवं लोकसभा के चुनाव एक ही दिन एक साथ हो। और फिर अगले 5 साल तक कोई चुनाव न हो !! क्या तब हमें जीएसटी में आये ये बदलाव देखने को मिलेंगे ?
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कुल मिलाकर सिर्फ चुनाव ही है जिनकी वजह से कांग्रेस / बीजेपी / आपा / सीपीएम के नेता भारत में ग़दर नहीं मचा पा रहे है !! स्वतंत्रता सेनानियों के कुछ नैतिक मूल्य थे। लेकिन आजादी के बाद के नेताओ पर यदि चुनावी अंकुश न होता तो ये लोग देश को अब तक पूरी तरह से हजम कर चुके होते। तब हमें वास्तविक जीवन में एक हॉरर फिल्म देखने को मिलती !!
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तो ऐसे कौन कौन सज्जन है जो मोदी साहेब के समकालिक चुनावो के प्रस्ताव का समर्थन करते है ? मतलब , देश की सभी विधानसभाओ एवं लोकसभा के चुनाव एक साथ करवा देना !! ( सिर्फ 5 सप्ताह में ) ? और अगले 5 साल तक कोई चुनाव नहीं ?
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समाधान ?
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मेरा प्रस्ताव है -- राईट टू रिकॉल पीएम , सांसद एवं राईट टू रिकॉल विधायक की प्रक्रियाएं लागू की जाये।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Nov 11 2017 19:02:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अपराधी सिर्फ कुछ ही लोगो का क़त्ल कर सकते है। लेकिन मनोविकृति के शिकार नेता जान बूझकर ऐसे "बुरे" कानून लागू करते है जिससे हजारो अपराधी लाखों नागरिको की जान ले सके और करोड़ो नागरिको का उत्पीड़न कर सके !!
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एक अच्छा उदाहरण जुवेनाइल एक्ट है। यह क़ानून संघ के नेता वाजपेयी और जेटली ने 2002 में लागू किया था। तब कांग्रेस / संघ / सीपीएम / आपा* के सभी नेताओ ने भी इसका समर्थन किया था। और आज भी सोनिया-मोदी-केजरीवाल इस क़ानून के घोर समर्थक है। *( तब आम आदमी पार्टी के नेता सीपीएम में थे )
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वाजपेयी द्वारा छापा गया और मोदी साहेब द्वारा समर्थित यह क़ानून कहता है कि , "यदि आप 18 वर्ष या इससे कम आयु के है तो -- जितने चाहे उतने लोगो को मार दो और मर्जी हो जितने लोगो का अपहरण या बलात्कार कर लो, लेकिन आपको ३ वर्ष से अधिक अवधि का कारावास नहीं दिया जायेगा !!"
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और ऐसा क़ानून रेयान स्कूल के आपराधिक मिजाज वाले युवा छात्र को योजना बनाकर ठन्डे दिमाग से हत्या करने के लिए प्रोत्साहित कर देता है !!
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हत्यारा वकील का पुत्र है और उसे क़ानून की समझ है !! उसे यह जानकारी है कि अपराध करने पर भी उसे अधिकतम 3 साल तक की ही सजा मिलेगी। इससे ज्यादा नहीं। और इसी सूचना ने उसे हत्या करने के लिए उकसाया।
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यदि लड़के को यह पता होता कि उसे पूरी जिन्दगी के लिए जेल में डाला जा सकता है तो वह हत्या नहीं करता।
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महिलाओं के खिलाफ अपराधो का उदाहरण लीजिये -- इस श्रेणी के अपराधियों में आधे से ज्यादा अपराधियों की आयु 14 से 18 वर्ष के बीच होती है !! वे यह अपराध करते है क्योंकि उन्हें पता है कि अधिकतम सजा 3 वर्ष है !! दिसम्बर में हुए निर्भया बलात्कार पर विचार कीजिये। मुख्य आरोपी की आयु 18 वर्ष से कम थी, ( स्कूली प्रमाण पत्र के अनुसार ) और उसे यह जानकारी थी कि उसे अधिकतम सजा 3 वर्ष तक की ही दी जा सकती है !! जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो उसके पास आयु प्रमाण पत्र था , और उसने तुरंत पुलिस को प्रमाण पत्र दिखाकर कहा कि उसे न तो रिमांड पर लिया जा सकता है और न ही जेल में भेजा जा सकता है। लिहाजा पुलिस को उसे बाल-गृह भेजना पड़ा !!
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वाजपेयी / जेटली को शामिल करते हुए नेतृत्व गुणों से लबरेज सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नेता इसी प्रकार के मनो विकार से ग्रस्त है, और अपने कैरियर को चमकाने के लिए किसी भी हद तक गिर कर दिखा सकते है। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके द्वारा लागू कानूनों से समाज के कितने निर्दोषों को इसका तावान चुकाना पड़ेगा।
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समाधान ?
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राईट टू रिकॉल कानूनों के अलावा इन्हें किसी भी तरह से सुधारा नहीं जा सकता। समाधान यह है कि इन सभी पदों पर राईट टू रिकॉल एवं देश में जनमत संग्रह प्रक्रियाएं लागू की जाए, ताकि कोंग्रेस / संघ / सीपीएम / आपा के भ्रष्ट नेताओं द्वारा लागू किये गए कानूनों को जनता बहुमत से खारिज कर सके।
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तो यदि आप देश के व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते है तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल पर अपना समय नष्ट न करे, बल्कि राईट टू रिकॉल एवं टीसीपी जैसे कानूनों की मांग करें।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Nov 13 2017 17:58:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कर्नाटक से संघ के विधायक टीपू जयंती समारोह में शिरकत कर रहे है !!
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<http://www.thehindu.com/news/national/karnataka/mla-anand-singh-local-bjp-leaders-participate-in-tipu-jayanti/article20104163.ece>;
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तो संघ के कार्यकर्ता पहले संघ के उम्मीदवारों के लिए हिन्दू वोट इकठ्ठा करते है ( संघ = बीजेपी , = गंगाधर = शक्तिमान ) , और फिर संघ के विधायक सेकुलर वोट खींचने के लिए अपने आप को उदारवादी हिन्दू की तरह पेश करते है।
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साफ़ है कि, कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी की तरह ही संघ के कार्यकर्ताओ को भी प्रतिबद्धता से कोई लेना देना नहीं है। उनकी भूमिका सिर्फ अपने उम्मीदवार के लिए वोट खींचने तक सीमित है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 14 2017 11:16:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

MRCM ; खनिज रॉयल्टी सीधे नागरिकों व सेना के खाते में जमा करने के लिए कानूनी ड्राफ्ट
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यह क़ानून केंद्र सरकार के अधीन आने वाली समस्त खदानों एवं सरकार के नियंत्रण में भूमि , स्पेक्ट्रम आदि को देश के नागरिको की सम्पत्ति घोषित करता है। इन मदों से आने प्राप्त राशि के दो हिस्से किये जायेंगे। 34% हिस्सा सेना को मिलेगा तथा शेष 66% हिस्सा देश के सभी ( सभी नागरिको को न की सिर्फ कुछ को ) नागरिको में बराबर बराबर बांटा जाएगा। नागरिको को यह राशि प्रतिमाह सीधे उनके खाते में प्राप्त होगी।
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इस ड्राफ्ट की पीडीऍफ़ फाइल, sha1 हैश एवं मूल अंग्रेजी संस्करण का लिंक कमेंट बॉक्स में देखें। यदि आप इस कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो कृपया अपने पीएम को ट्विट करके कहें कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।
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प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले ट्वीट का प्रारूप :
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@PmoIndia #Ddmrcam , #Mrcam 77d18a7660e4d5e1104be104629d821927b9cdd4 <https://newindia.in/causes/ddmrcm/>; put mineral royalty,GoI land rent in citizens' accounts.
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==== MRCM कानूनी ड्राफ्ट का प्रारम्भ ====

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[ टिप्पणी : यह कानूनी ड्राफ्ट राजपत्र अधिसूचना के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा सीधे गेजेट में प्रकाशित किया जा सकता है। इसे लागू करने के लिए लोकसभा या राज्यसभा की अनुमति आवश्यक नहीं है।
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इस ड्राफ्ट के 3 भाग हैं -
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भाग -1 : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग -2 : कानूनी ड्राफ्ट का सारांश
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भाग -3 : नागरिकों और अधिकारीयों के लिए निर्देश और टिप्पणियाँ
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महत्वपूर्ण खंड हैं-- (1.1) , (1.2) , (1.3) , (3.1) , (3.2) , (J.1) , (J.3.6), (RTR.2) , (RTR.4) , (CV.1) ]
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भाग -1: नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) नागरिकों के लिए कुछ सामान्य निर्देश इस प्रकार है -
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(1.1) इस कानून को प्रधानमंत्री द्वारा राजपत्र में छापने के दो महीनो के अन्दर भारत सरकार के पास ( खनिज आमदनी + स्पेक्ट्रम आमदनी + भारत सरकार द्वारा अधिग्रहत जमीनों का किराया ) के रूप में प्राप्त होने वाली राशि को भारत के समस्त नागरिकों की संख्या से विभाजित करने पर आपके हिस्से में आया पैसा ( आप अर्थात भारत के मतदाता ) सीधे आपके बैंक खाते में जमा होगा।
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(1.2) और अधिक स्पष्ट रूप से, भारत की केंद्र सरकार को होने वाली खनिज आमदनी, स्पेक्ट्रम आमदनी और केंद्र सरकार द्वारा अधिग्रहत जमीनों के किराये का लगभग 65% हिस्सा भारत के नागरिकों में समान रूप से बांटा जायेगा। और हर महीने इस धनराशि को आपके बैंक खाते में सीधा जमा कर दिया जायेगा। शेष 35% हिस्से का उपयोग सिर्फ सेना में सुधार के लिए खर्च होगा।
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(1.3) प्रत्येक नागरिक को मिलने वाला पैसा लगभग बराबर होगा, लेकिन इसमें अंतर हो सकता है, जो कि नागरिक की आयु, पुत्र और पुत्रियों की संख्या, शारीरिक या मानसिक विकलांगता आदि तत्वों पर निर्भर करेगा। यह कानून लागू होने के बाद नागरिक जितनी अधिक संताने पैदा करता है उसे मिलने वाला पैसा उतना ही कम होता जायेगा। और कुछ मामलों में किसी एक राज्य में निवास कर रहे नागरिकों को अमुक राज्य के खनिज और जमीन से प्राप्त राशि में से अधिक पैसा मिल सकता है, लेकिन ये सभी नागरिकों को मिल रहे पैसे के दो-गुना से अधिक नहीं हो सकता। और ऐसे क्षेत्रों में जिनकी सीमा शत्रु देशों से लगी हो या सुदूर क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों को भी बंटने वाली राशि में अतिरिक्त पैसा मिल सकता है। लेकिन उपरोक्त अपवादों को छोड़कर अन्य सभी नागरिकों को केंद्र सरकार के पास आ रहे पैसे में से बराबर हिस्सा मिलेगा।
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(1.4) प्रधानमंत्री "राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी" ( NLRO = National Land Rent Officer ) पदनाम से एक अधिकारी नियुक्त करेंगे जो नीलामियों की प्रक्रिया स्थापित करेगा और आमदनी और किराया तय करने और उसे इकठ्ठा करने और इसका 65% हिस्सा भारत के सभी नागरिको के खातों में बराबर रूप से जमा करने की अन्य प्रक्रियायें भी स्थापित करेगा। यदि आप भूमि किराया अधिकारी को किसी अन्य व्यक्ति से प्रतिस्थापित करना चाहते है, तो ये कानून आपको भूमि किराया अधिकारी पद के लिए पटवारी कार्यालय जाकर या एस.एम.एस के माध्यम से अधिकतम 5 प्रत्याशियों को अनुमोदित करने की अनुमति देगा। और आप किसी भी दिन अपना अनुमोदन निरस्त कर सकते है। बाद में कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि आप प्रत्येक प्रत्याशी के लिए 0 से 100 के बीच के अंक दे पाए। जब किसी प्रत्याशी के पास पदासीन भूमि किराया अधिकारी से अधिक अनुमोदन होंगे, केवल तब ही भूमि किराया अधिकारी को बदला जाएगा। इस तरह आपके पास राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी को बदलने की प्रक्रिया होगी।
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(1.5) भूमि किराया अधिकारी के पास आमदनी और किराया तय करने, इकठ्ठा करने और आप सभी नागरिकों के बैंक खतों में जमा करने हेतु आवश्यक कर्मचारी होंगे। यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत आती है तो अमुक जिले या राज्य या पूरे भारत से क्रमरहित तरीके से चुने हुए 25 से 1500 मतदाताओं की जूरी का चयन किया जायेगा। यह जूरी तय करेगी कि कर्मचारी निर्दोष है या नहीं और यदि वह दोषी है तो उस पर कितना जुर्माना लगेगा और क्या उसे नौकरी से निकाल देना चाहिए या नहीं। यदि आपका नाम क्रमरहित तरीके से चुने हुए इन 25 से 1500 मतदाताओं की सूची में आता है तो आपको ( नागरिक को ) इस जूरी सुनवाई में जाना पड़ेगा।
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(1.6) यह कानून पानी या पानी के वितरण से मिलने वाली राशि पर लागू नहीं होगा।
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(1.7) यह कानून ऐसा कोई वादा नहीं करता कि आपको प्रति महीने रु. 500 या रु.1000 या कोई स्थिर राशि प्राप्त होगी। यदि खनिजों / स्पेक्ट्रम का या जमीनों का बाजार मूल्य बढ़ता है तो आमदनी और किराया बढ़ सकता है। लेकिन यदि खनिज आमदनी और किराया घटता है तो सभी नागरिकों की प्रति महीने आय भी घटेगी।
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(1.8) यह कानून सिर्फ केंद्र सरकार के अधीन आने वाली खनिज खदानों और स्पेक्ट्रम और केंद्र सरकार के अन्दर आने वाली जमीनों पर लागू होगा। अमुक कानून राज्य, नगरपालिकाओं और जिले / तहसील / ग्राम पंचायतों के अधिकार में आने वाली खदानों और जमीनों को शामिल नहीं करेगा। मुख्यमंत्री, महापौर और सरपंच राज्य / नगर / जिले / तहसील / गाँव अपने स्वामित्व की खनिज आमदनी / जमीनों के किराए से प्राप्त आय को अमुक राज्य / नगर / जिले / तहसील / गाँव के नागरिकों में बांटने का ऐसा ही कानून लागू कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है।
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भाग -2 : कानूनी ड्राफ्ट का सारांश
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(2) टिप्पणी :
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(2.1) यह सारांश बाध्यकारी नहीं है। यह मात्र एक घोषणा है जो इस क़ानून के ढांचे को समझने की एक समीप दृष्टी देती है।
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(2.2) इस कानून द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी नाम से एक अधिकारी नियुक्त कर पाएंगे। भारत के मतदाता "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी" सेक्शन में दी गयी धाराओं का प्रयोग करके इस अधिकारी को बदल सकते है।
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(2.3) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी सम्पूर्ण भारत में सभी खनिज खदानों की नीलामी करवाएगा और बैंड विड्थ बांटने की नीलामी भी आयोजित करेगा। वह केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली जमीनों के किराये के लिए भी नीलामी करवाएगा। वह इन जमीनों की रूप रेखा तैयार करेगा और इन सभी जमीनों पर लीज की लम्बाई तय करेगा।
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(2.4) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी प्रत्येक व्यक्ति या कंपनी जिसके पास खदाने या स्पेक्ट्रम या सरकारी जमीने लीज पर है, से आमदनी और किराया प्रति माह इकठ्ठा करेगा। किराया अधिकारी के पास जल संसाधनों पर कोई अधिकार नहीं होंगे।
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(2.5) किराया अधिकारी इकट्ठी की गयी राशि को भारत के सभी व्यस्क नागरिकों के बैंक खातों में प्रति महीने जमा करवाएगा। सभी नागरिकों को लगभग बराबर राशि मिलेगी लेकिन ये राशि व्यक्ति की आयु, उसके पुत्र या पुत्रियों की संख्या, विकलांगता आदि के आधार पर कम ज्यादा हो सकती है। वितरण अनुपात की जानकारी आगे की धाराओं में दी गयी है।
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(2.6) यदि किराया अधिकारी के किसी कर्मचारी के विरुद्ध कोई शिकायत आती है तो क्रमरहित तरीके से चुने हुए 25 से 1500 मतदाताओं की जूरी ये तय करेगी कि क्या उस पर जुर्माना लगना चाहिए या उसे नौकरी से निकाल देना चाहिए या उसे कोई भी सजा नहीं देनी चाहिए।
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भाग -3 : नागरिकों और अधिकारीयों के लिए निर्देश और टिप्पणियाँ
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(3) भारत सरकार के अधिकार में आने वाले भू-खंडो का स्वामित्व
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(3.1) भारत के नागरिक आई.आई.एम. अहमदाबाद के भू-खंड , सभी आई. आई. एम. के भू-खंड और जेएनयू के भू-खंडो को संयुक्त और समान रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाली संपत्ति घोषित करते है। अमुक भू-खंड भारत की राज्य सरकार या भारत की केंद्र सरकार या किसी अन्य सरकारी पक्ष / निजी पक्ष की संपत्ति नहीं है, बल्कि ये भू-खंड भारत के नागरिकों की संपत्ति है। आगे, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों जिनका स्वामित्व निजी कंपनियों या ट्रस्टों के पास नहीं है, के सभी भू-खंडो को भारत के नागरिकों की संपत्ति घोषित किया जाता है। भारत के सभी अधिकारीयों, न्यायाधीशों, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों से निवेदन किया जाता है कि भारत के नागरिकों के इस निर्णय के विरुद्ध किसी भी याचिका को स्वीकार ना करें।
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(3.2) निम्नलिखित मंत्रालयों और विभागों के सभी भू-खंड राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के क्षेत्राधिकार में आयेंगे :

(1) विज्ञान, चिकित्सा, गणित और इंजीनियरिंग शिक्षण का कार्य कर रहे संस्थानों को छोड़कर सभी आई.आई.एम, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय।
(2) एयरपोर्ट, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के स्वामित्व वाले सभी भवन
(3) पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय
(4) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
(5) उपभोक्ता मामलें एवं लोक वितरण मंत्रालय
(6) मानव संसाधन विकास मंत्रालय
(7) सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
(8) ग्रामीण विकास मंत्रालय
(9) लघु उद्योग एवं कृषि एवं ग्राम उद्योग मंत्रालय
(10) सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय
(11) कपड़ा उद्योग मंत्रालय
(12) शहरी विकास एवं गरीबी उपशमन मंत्रालय
(13) युवा मामलें और खेल मंत्रालय
(14) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
(15) नीति आयोग
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(3.2.1) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी का निजी व्यक्तियों या कंपनियों या ट्रस्टों या राज्य सरकार या नगरों या जिलों के स्वामित्व वाले भू-खण्डों पर किसी भी प्रकार का अधिकार नहीं होगा। उसके पास सेना, न्यायालयों, जेलों, रेलवे, बस स्टेशनों, कक्षा 12वी तक के सरकारी विद्यालयों और कर संग्रहण कार्यालयों द्वारा उपयोग किये जा रहे भू-खंडो पर भी किसी प्रकार का अधिकार नहीं होगा।
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(3.3) सभी चिकित्सा महाविद्यालयों, आईआईटी, एनआईटी, इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, आईआईएससी, विज्ञान और गणित महाविद्यालयों को स्वास्थ्य मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय या विज्ञान मंत्रालय जैसा प्रधानमंत्री तय करे, का अंग बनाया जायेगा। संबंधित मंत्री इन महाविद्यालयों में दिन-प्रतिदिन के संचालन हेतु अध्यक्ष नियुक्त करेंगे। सभी महाविद्यालय जिनमें चिकित्सा, विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग का शिक्षण कार्य हो रहा हैं, वे भूखंड किराया अधिकारी के क्षेत्राधिकार में नहीं आएंगे।
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(4) भारत सरकार के स्वामित्व वाले भू-खण्डों से किराया इकठ्ठा करना
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(4.1) अनुपयोगी भूमि के लिए -- किराया अधिकारी अपनी समझ से अमुक भूमि को उचित माप के भू-खंडो में विभाजित करेगा। किराया अधिकारी हर भू-खंड के लिए नीलामी करवाएगा। नीलामी के लिए निम्नलिखित शर्तें होगी

(1) लीज 5, 10, 15, 20 या 25 वर्षो की होगी। किराया अधिकारी इसमें से कोई अवधि तय करेगा। किन्तु लीज 25 वर्षों से अधिक नहीं हो सकती।
(2) बोली लगाने वाले मासिक किराये और लीज की अवधि के लिए बोलियां लगाएंगे जो कि अधिकतम लीज अवधि से कम हो सकती है। बोली का प्रारूप मासिक किराये, लीज महीने के अनुसार होगा। एक व्यक्ति एक से ज्यादा निविदा / बोली लगा सकता है। न्यूनतम लीज अवधि 12 महीने होनी चाहिए।
(3) निविदा का भार मासिक_ किराया / लॉग ( मासिक_लीज ) के अनुसार होगा। अर्थात जितना अधिक किराया उतना अधिक भार और जितनी लम्बी लीज, उतना कम भार।
(4) निविदा सार्वजनिक रहेगी और सभी निविदाएँ सभी को दिखेगी।
(5) किराया अधिकारी निविदाओ के भार के अनुसार भू-खंड देगा। [ मासिक_ किराया / लॉग ( मासिक_लीज ) ]
(6) किराया अधिकारी जमा राशि के रूप में 6 महीने का किराया या इसके समान राशि लेगा।
(7) अमुक किरायेदार किसी भी दिन भूमि खाली करने के लिए और अदा किये जा रहे किराये को बंद करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

(4.2) लीज अवधि के दौरान अमुक भू-खंड के आस पास के 1 वर्ग किमी क्षेत्र में जमीन के दाम में प्रतिशत बदलाव और जिस दिन से अमुक भू-खंड लीज पर दिया गया है, से लेकर उस दिन तक जब किराये में संशोधन हुआ है, की प्रधान ऋण ब्याज दर में प्रतिशत बदलाव के आधार पर किराया अधिकारी हर 3 वर्ष में किराये का संशोधन करेगा।
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(4.3) लीज अवधि समाप्त होने के बाद किराया अधिकारी एक नयी नीलामी करवाएगा, जिसमे कार्यरत लीज धारक को निम्नलिखित अतिरिक्त लाभ मिलेंगे।

(1) उसका निविदा भार 1.1 से 1.5 से गुणा हो जायेगा जो इस पर निर्भर करेगा कि उसने कितने वर्षों तक किराया चुकाया है।
(2) नीलामी समाप्त होने के बाद वह 3 महीने के अन्दर अपनी बोली बढ़ा सकता है।
(3) कार्यरत लीज धारक को 20% से 50% तक का नए लीज धारक द्वारा चुकाया जा रहा 6 महीने का अग्रिम किराया मिलेगा जो निर्भर करेगा कि कितने महीनों के लिए उस कार्यरत लीज धारक ने जमीन ले रखी थी।
(4) लेकिन यदि कार्यरत लीज धारक नीलामी से चूक जाता है, तब वह उस भूमि पर निर्मित संपत्ति को हटा सकता है या बेच सकता है। लेकिन उसे ये भूमि खाली करनी होगी।
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(4.4) यदि अमुक भू-खंड किसी कार्यरत व्यक्ति या कंपनी ने ले रखा है तो उस व्यक्ति या कंपनी को 25% अधिक (25% * लीज महीनो में /300) के साथ अधिकतम 50% तक का बोनस निविदा में प्राप्त होगा, अर्थात उसकी निविदा 1.25 से 1.50 तक गुणीत हो जायेगी, लेकिन इससे अधिक नहीं।
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(4.5) यदि अमुक भू-खंड वर्तमान में उपयोग में लिया जा रहा है, तब किराया अधिकारी भू-खंड के आस पास के 1 किमी के क्षेत्र में पिछले 3 वर्षों की जमीन बिक्री के मूल्य का मध्यांतर निकालेगा और भूखंड की कीमत तय करेगा और अगले 10 वर्षों के लिए (बाजार मूल्य * प्रधान ब्याज दर / 3) के रूप में वार्षिक किराये को निर्धारित करेगा। किराया हर 3 वर्ष में संशोधित होगा। 10 वर्षों के बाद इस सेक्शन के खंड -1 और इसके आगे से बताये गए नियम लागू होंगे।
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(4.6) किराया अधिकारी इकट्ठे हुए किराये का 34% रक्षा मंत्री को सेना मजबूत करने और हथियार उपलब्ध करने और सभी नागरिकों को हथियार चलाने की शिक्षा देने के लिए देगा।
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(4.7) किराया अधिकारी किराया और आमदनी को निम्न प्रकार से बांटेगा
(1) किराया अधिकारी इकट्ठे हुए किराये का 33% हर महीने उन नागरिकों को भेजेगा जो पिछले 10 वर्षों से अमुक राज्य में निवास कर रहे हैं, पर इस किराये की सीमा पिछले वर्ष में भारत के नागरिकों द्वारा प्राप्त राशि के दोगुने से अधिक नहीं होगी।
(2) किराया अधिकारी शेष किराया हर महीने भारत के नागरिको को भेजेगा।
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(4.8) इस कानून के पारित होने के 1 वर्ष के बाद, किसी नागरिक को प्राप्त होने वाला किराया इस प्रकार से बदलेगा :

(1) यदि उसके पास (0 पुत्र), (0 पुत्र, 1 पुत्री), (0 पुत्र, 2 पुत्री) है, तब किराया 33% अधिक मिलेगा और उसके 60 वर्ष का होने के बाद उसे किराया 66% अधिक मिलेगा।
(2) यदि उसके पास (1 पुत्र, 0 पुत्री), (1 पुत्र, 1 पुत्री), (1 पुत्र, 2 पुत्री) है, तब किराया 15% अधिक मिलेगा और उसके 60 वर्ष का होने के बाद उसे किराया 33% अधिक मिलेगा।
(3) यदि उसके पास (2 पुत्र, 0 पुत्री), (2 पुत्र, 1 पुत्री) है, तब किराया में कोई बदलाव नहीं होगा - ना बढेगा और ना घटेगा।
(4) यदि उसके पास (2 पुत्र, 2 पुत्री) या (3 पुत्र, 1 पुत्री) है, तब किराया 33% कम मिलेगा।
(5) यदि उसके पास ऊपर दिए गए सभी मामलों से अधिक संताने हैं, तब उसे किराया 66% कम मिलेगा।
(6) यहाँ, जुड़वाँ संतान एक संतान के रूप में गिनी जाएगीं और गोद ली गयी संताने नहीं गिने जाएगी।
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(4.9) 60 वर्ष से ऊपर के पुरुषों और 55 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को मिलने वाला किराया 33% अधिक होगा और 75 वर्ष से ऊपर के पुरुषों और 70 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को मिलने वाला किराया 66% अधिक होगा।
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(4.10) 7 वर्ष से कम आयु के बच्चे को कोई भी किराया नहीं मिलेगा ; 7 वर्ष से 14 वर्ष के बीच के बच्चों को मिलने वाला किराया सामान्य किराये का एक-तिहाई (33%) होगा और 14 वर्ष से 18 वर्ष के बीच के बच्चों को मिलने वाला किराया सामान्य किराये का दो-तिहाई (66%) होगा। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को मिलने वाला किराया उसकी माता को दिया जायेगा, जब तक कि जूरी किराया अधिकारी को उस बच्चे के पिता या किसी अन्य संबंधी को देने का आदेश नहीं करती या यदि माता जीवित नहीं है।
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(4.11) आगे, यदि जूरी पाती है कि पति एक या उससे अधिक संतान की देखभाल अच्छे से नहीं कर रहा है, तब जूरी किराया अधिकारी को निर्देश कर सकती है कि पिता को मिलने वाले किराये का आधा भाग माता को दिया जाये। ऐसी स्थिति में किराया अधिकारी किराये का आधा भाग पिता को देगा और आधा भाग माता को |
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(5) खनिज रॉयल्टी इकठ्ठा करना
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(5.1) सभी विभागीय सचिव जो खदानों या कच्चे तेल के कुओं या खदानों या कच्चे तेल के कुओं से इकट्ठी होने वाली आमदनी के प्रभारी है, उन्हें इस आमदनी को किराया अधिकारी को भेजने का आदेश दिया जाता है।
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(5.2) किराया अधिकारी प्राप्त खनिज रोयल्टी एवं भूमि किराया सेना में, राज्यों में और भारत में निवास कर रहे नागरिकों में उसी समान अनुपात में बाँटेगा जैसा कि भूमि किराया वितरण से संबंधित खण्डों में वर्णित किया है।
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(J) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के कर्मचारियों और निर्णयों पर जूरी सुनवाई
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(J.1) जब भी कभी किराया अधिकारी या उसके अधिकारियों और लीज धारक या नागरिकों के बीच विवाद होता है, तब किराया अधिकारी या उसके अधिकारी उस मामले के निर्णय के लिए रेंडमली चुने 30-55 वर्ष की आयु के मध्य के 12 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा। जूरी गठन के नियम इस सेक्शन में दिए गए है।
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(J.2) किराया अधिकारी प्रत्येक जिले के लिए एक जिला जूरी प्रशासक, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य जूरी प्रशासक और भारत के लिए एक राष्ट्रीय जूरी प्रशासक नियुक्त करेगा।
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(J.3) आमदनी या किराया या जमा राशि का विवाद सुलझाना
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(J.3.1) किसी लीज धारक या नागरिक या किराया अधिकारी के अधिकारीयों के मध्य का विवाद उस जिले में दर्ज होगा जहाँ प्रॉपर्टी स्थित है या नागरिक रहता है। यदि वांछित नागरिक या लीज धारक या अधिकारी स्थान का बदलाव उसी राज्य में स्थित किसी अन्य जिले में चाहते है तो वे राज्य जूरी प्रशासक या राज्य के हाई कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं। और यदि दोनों में से कोई भी स्थान का बदलाव उस राज्य के बाहर किसी अन्य जिले में चाहता है तब वे राष्ट्रीय जूरी प्रशासक या सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं।
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(J.3.2) जिले में हर विवाद के लिए जिला जूरी प्रशासक रैंडमली ( क्रमरहित ) 3 से 10 गणित, विज्ञान या इंजीनियरिंग में स्नातकों का चयन, मामले में सहायता देने के लिए तैयार स्नातकों की सूची से करेगा। चयनित इंजीनियरों की आयु 30 वर्ष से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उनके पास 5 वर्षों का कार्य अनुभव होना चाहिए।
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(J.3.3) जिला जूरी प्रशासक भारत की मतदाता सूची से रैंडमली (क्रमरहित) 30 वर्ष और 55 वर्ष के मध्य के मतदाता चुनेगा। चुना गया व्यक्ति पिछले 10 वर्षों में किसी भी जूरी में प्रस्तुत नहीं होना चाहिए और पूर्व में किसी भी अपराध में दोषी नहीं होना चाहिए।
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(J.3.4) जूरी सदस्यों की संख्या :

(1) जूरी सदस्यों की संख्या न्यूनतम 12 और अधिकतम 1500 होगी। जूरी सदस्यों की संख्या 12, 50, 200 या 500 तक हो सकेगी, तथा यह संख्या इस पर निर्भर करेगी कि क्या आरोपी कर्मचारी वर्ग-4, वर्ग-3, वर्ग-2 या वर्ग-1 का है।
(2) यदि विवाद की राशि रु. 10 लाख से कम है तो जूरी का आकार 12 होगा, और प्रति रु.10 लाख के लिए एक जूरी सदस्य बढ़ा दिया जायेगा।
(3) यदि शिकायत में राशि के साथ किसी अधिकारी के विरुद्ध शिकायत भी शामिल है तो जूरी आकार का निर्धारण ऊपर बताये गए बिंदु (1) या (2) में से जो भी अधिक है, उसके अनुसार होगा।
(4) जूरी का अधिकतम आकार 1500 होगा।
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(J.3.5) जूरी सदस्यों का स्थान : जूरी सदस्य उन जिलों से चयनित होंगे जहाँ की जिला अदालतें वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग द्वारा सुनवाई करने वाली जिला अदालत से जुड़ी हो। यदि वांछित जिला वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा किसी अन्य जिले से नहीं जुड़ा है, तो सभी जूरी सदस्य उस जिले से होंगे जहाँ मामला दर्ज किया गया है।
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(J.3.6) जूरी सदस्य दोनों पक्षों को 1-1 घंटे के लिए सुनेंगे। 65% से अधिक जूरी सदस्यों के ये कहने के बाद कि वे पर्याप्त सुन चुके, सुनवाई समाप्त हो जाएगी।
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(J.3.7) यदि 75% से अधिक जूरी सदस्य कहते हैं कि अमुक कर्मचारी जिसके विरुद्ध शिकायत हुई है, को नौकरी से निकाल देना चाहिए तो किराया अधिकारी उसे निकाल सकता है या उसे ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यदि 75% से अधिक जूरी सदस्य जुर्माना लगाने पर सहमत होते हैं तो किराया अधिकारी आरोपी से बताया गया जुर्माना ले सकता है या उसे ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यदि अमुक शिकायतकर्ता को लगता है कि किराया अधिकारी ने जूरी सदस्यों के निर्णय को सही से निष्पादित नहीं किया है तो वह भारत के मतदाताओं से आगे के खंडो में दी गयी “राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी” प्रक्रिया के प्रयोग द्वारा किराया अधिकारी को पद से हटाने के लिए मांग कर सकता है |
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(J.3.8) जिला अदालत के जूरी सदस्यों के निर्णय के विरुद्ध याचना राज्य हाई कोर्ट के जूरी सदस्य या जजों के सामने की जा सकती है और बाद में सुप्रीम कोर्ट के जूरी सदस्य या जजों के सामने की जा सकती है जैसा अन्य प्रचलित कानून तय करें।
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(RTR) राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी
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(RTR.1) यदि भारत का कोई मतदाता राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी बनना चाहता है तो वह व्यक्तिगत रूप से अपने जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित हो सकता है। जिला कलेक्टर उससे सांसद के चुनाव में जमा होने वाली राशि के बराबर का आवेदन शुल्क लेकर राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी पद के लिए उसकी उम्मीदवारी स्वीकार करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(RTR.2) कोई भी मतदाता पटवारी कार्यालय में 3 रू शुल्क देकर अधिकतम 5 उम्मीदवारों को राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी पद के लिए अनुमोदित कर सकता है। पटवारी उसके अनुमोदनो को कंप्यूटर में डालेगा और उस व्यक्ति का मतदाता पहचान पत्र संख्या, समय / दिनांक और उसके द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नामो को दर्ज करके एक रसीद देगा। पटवारी नागरिक द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर नागरिक के मतदाता पहचान पत्र संख्या के साथ रखेगा।
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(RTR.3) यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा।
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(RTR.4) यदि किसी उम्मीदवार को भारत के 43 करोड़ से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्त हो जाता है तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन पाने वाले व्यक्ति को नए राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकते हैं, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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(RTR.5) प्रधानमन्त्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे नागरिक अपने अनुमोदन एस.एम.एस या एटीएम या मोबाइल फ़ोन एप्प के माध्यम से दर्ज / रद्द करवा सके।
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(CV) जनता की आवाज (Citizen’s Voice):
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(CV.1) यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस कानून से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र एवं अन्य विवरण के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2) किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाएगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा। मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा। हाँ / नही की गिनती प्रधानमंत्री या किसी अधिकारी या अन्य पर बाध्यकारी नहीं होगी।
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===MRCM कानूनी ड्राफ्ट का समापन ====

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 14 2017 17:02:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rakesh Suri Ghaziabad UpActivist:

आज 14/11/2017 को मैने वोटर को राइट टू रिकॉल का पर्चा वितरण किया

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Nov 15 2017 09:41:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

"यदि प्रत्येक भारत वासी के पास बंदूक होगी क्या तब भी अमेरिका हमें एटम बम से ख़तम कर सकता है" ?
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कर सकता है। लेकिन अमेरिका परमाणु अस्त्र का प्रयोग करे यह व्यवहारिक नहीं है। यदि भारत अमेरिका के हाथ से निकलता नजर आता है तो हद से हद अमेरिका पाकिस्तान एवं भारत के बीच परमाणु युद्ध करवायेगा। स्वयं हस्तक्षेप नहीं करेगा। किन्तु प्रत्येक नागरिक के पास बन्दुक होने से इस प्रकार के युद्ध से भी न तो पाकिस्तान को कोई लाभ होगा और न ही अमेरिका को। भारत का 20-30% हिस्सा पूरी तरह जल जाएगा लेकिन शेष हिस्से के नागरिको के पास बन्दुक होने के कारण न तो अमेरिका न पकिस्तान न ही चीन अमुक हिस्से पर कब्ज़ा कर सकेंगे। तो इस तरह के युद्ध में सभी को नुकसान होगा। पाकिस्तान का ज्यादातर हिस्सा ख़त्म हो जाएगा, भारत का कुछ हिस्सा नष्ट हो जाएगा लेकिन अमेरिका को भी बेहद आर्थिक क्षति होगी। यदि युद्ध में सभी पक्षों को यह नजर आये कि उन्हें सिर्फ नुकसान ही होगा , लेकिन फायदा होने की सम्भावना बेहद कम है , तो युद्ध टल जाता है।
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लेकिन यदि भारत के नागरिको के पास बंदूके नहीं है तो अमेरिका द्वारा प्रायोजित भारत पकिस्तान युद्ध के बाद अमेरिका पुनर्निर्माण के नाम पर भारत में अपनी सेनाएं उतार कर भारत को पूरी तरह से टेक ओवर कर लेगा। हथियारविहीन नागरिक उन्हें रोक नहीं सकेंगे। इस तरह युद्ध हारने के बाद यदि किसी देश के नागरिको के पास हथियार होते है तो गुलामी नहीं आती, सिर्फ युद्धक नुकसान होता है। किन्तु हथियार विहीन नागरिक समाज पहले युद्ध हारता है और फिर उन पर गुलामी भी आती है।
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उदाहरण के लिए जब सांगा युद्ध हार गए तो भारतीयों को मुगलिया शासन स्वीकार करना पड़ा। यदि नागरिको के पास हथियार होते थे तो वे उन्हें फिर से खदेड़ देते या फिर मुगल सल्तनत के फैलाव को रोक देते। और इसी तरह ब्रिटिश ने मुगलो को हराकर अपनी सत्ता स्थापित की और भारतीयों को गुलाम बना लिया। वजह - भारतीय नागरिक हथियार विहीन थे। कुल मिलाकर हथियार बंद नागरिक समाज हर स्थिति में देश, धर्म, समाज आदि की रक्षा कर देता है। वार्ना जनता शासक के रहमो करम पर रहती है। राजा हारता है या सरेंडर करता है तो प्रजा के पास गुलामी स्वीकारने के सिवाय कोई विकल्प नहीं होता।
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समाधान ; हथियारबंद नागरिक समाज की रचना। प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/549842378527294>;
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 17 2017 08:26:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि / जब आप अपनी एयरटेल सिम को आधार कार्ड से लिंक करते है तो एयरटेल आपको मिलने वाली सब्सिडी में से पैसा काट सकता है !!! और एयरटेल यह घोटाला शीर्ष अधिकारियों एवं मंत्रियो की मिली भगत से कर रहा है !!!
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जब आप सिम के एग्रीमेंट पर tick करते है तो आप एयरटेल को यह अधिकार दे देते है कि एयरटेल आपके नाम से एक एकाउंट खोले जिसमे सरकार की तरफ से आने वाली आपकी गैस आदि की सब्सिडी जमा हो सके। और फिर एयरटेल आपके इस खाते से मिनिमम बेलेंस मेंटेन न होने पर रुपया काट सकता है !! और फिर उपभोक्ता अपना काम धंधा छोड़कर सिस्टम की भूल भुलैया में इधर से उधर चक्कर लगाते रहेगा कि मेरी सब्सिडी कहाँ गायब हो गयी !!
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कृपया इस लिंक पर यह एग्रीमेंट देखें - <https://www.airtel.in/bank/terms>;
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Pls see "23. DECLARATION BY CUSTOMER "
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see (1)(v) I authorize the Bank to use information which is KYC documents , particulars provided and usage based relationship information, for Account opening purpose. I authorize the Bank to link my Bank Account with Aadhaar number for electronic transfer of subsidies. Related entities and further solemnly authorize Bank to use or share my documents and/or information provided for provision of third party products.
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भारत में कितने लोग अंग्रेजी जानते है ? और उनमे से कितने लोग अखबार के अक्षरों से आधे साइज के इस 4 पेज के एग्रीमेंट को अंग्रेजी में पढ़कर समझ सकते है ?
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( टिप्पणी - हमारे कई प्रस्तावो में से एक प्रस्ताव यह भी है कि कम्पनी अपने सभी उपभोक्ता समझौते अमुक राज्य की स्थानीय भाषा में प्रकाशित करेगी , तथा पाठ्य का अक्षरों का आकार समाचार पत्रों में छपने वाले अक्षरों से तीन गुना होगा )
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चौंका देने वाली बात यह है कि ट्राई और आरबीआई ने एयरटेल को समझौते में ऐसे प्रावधान डालने की अनुमति दी है। और सबसे चौंकाऊ यह है कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल इसे कोई मुद्दा नहीं बना रहे है , और एयरटेल के पक्ष में खामोश बैठे है। और सबसे बदतर हालत यह है कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भगत अपने नेताओं की इस खामोशी का समर्थन कर रहे है !!
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समाधान ?
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राईट टू रिकॉल रिजर्व बैंक गवर्नर एवं राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री का क़ानून आये बिना इन लोगो को आप कैसे भी नहीं सुधार सकते।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 17 2017 09:18:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि मोदी जी पद्मावती फिल्म को बेन नहीं करेंगे तो भी मैं मोदी जी को वोट दूंगा। और अगर सुप्रीम कोर्ट बेन हटा देता है और मोदी जी सुप्रीम कोर्ट के जज को नौकरी से नहीं निकालते है तब भी मैं मोदी जी को ही वोट दूंगा। विरोध अपनी जगह है वोट अपनी जगह है। मोदी जी पर 100 पद्ममिनी कुर्बान है। जाओ, जो उखाड़ना है उखाड़ लो -- पद्मावती फिल्म विरोधी भक्त उवाच !!
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( और इसी वजह से पद्मावती भारत में प्रदर्शित होगी। )
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समाधान - राईट टू रिकॉल पीएम , राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज एवं राईट टू रिकॉल सेंसर बोर्ड चेयरमेन
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 17 2017 21:23:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

संघ नेतृत्व पद्मावती पर अब तक खामोश क्यों है ; क्योंकि संघ का फर्जी राष्ट्रवाद फर्जी हिन्दुवाद के खिलाफ पड़ता है !!
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संघ अपनी सभाएं एवं जमाव कभी मंदिरों या धार्मिक स्थलों पर नहीं करता , मैदानों में करता है। संघ भारत माता की जय की पुकारा लगाता है लेकिन हर हर महादेव, जय श्री कृष्णा , जय श्री राम* या जय माता दी जैसे जयघोष से उसे 'आधिकारिक' परहेज है। संघ ध्वज वंदन करता है किन्तु शाखाओं में ईश वंदना या हिन्दू देवी देवताओं की पूजा की अनुमति नहीं देता। संघ अपने नेताओं के भाषण एवं विचार पुस्तको में प्रकाशित करता है , किन्तु कभी उसने हिन्दू धर्म से सम्बंधित साहित्य छपवाकर नागरिको में वितरित नहीं किये। संघ की मंदिरों के निर्माण एवं मौजूदा मंदिरों के प्रशासन को सुधारने में कभी रुचि नहीं रही। संघ कभी किसी हिन्दू उत्सव पर सामूहिक आयोजन नहीं करता। आप इस तरह काफी लम्बी सूची बना सकते है। संघ ऐसी सभी गतिविधियों की अवहेलना करता है जिससे हिन्दूओ के धार्मिक उत्साह में वृद्धि हो, मंदिरों के प्रशासन में सुधार आए एवं हिन्दू धर्म मजबूत हो।
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इसकी वजह फर्जी राष्ट्रवाद एवं फर्जी हिन्दुवाद का टकराव है। फर्जी राष्ट्रवाद और फर्जी हिन्दुवाद साथ साथ नहीं पनप सकते। ये एक दुसरे को काटते है।
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(*) 'जय श्री राम' जयघोष संघ का आधिकारिक जयघोष नहीं है। न ही संघ के नेतृत्व में साहस है कि वे इसे अपना सके। राम मंदिर मुद्दे को दुहने के लिए संघ के अंध सेवक इस जयघोष को अनाधिकृत रूप से पिछले 25 साल से ढो रहे है। मूल रूप से यह मुद्दा विहिप के पास था जिसे 1990 में संघ के नेताओं ने हाईजेक कर लिया था।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 21 2017 19:16:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

किस धारा के तहत पद्मावती फिल्म को बेन किया जा सकता है ? भारतीय दंड सहिंता की धारा 295A !! कैसे ?
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भारतीय दंड सहिंता की धारा 295A पर गूगल करें
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पद्मावती को देवी की तरह नहीं पूजा जाता है। लेकिन कई शताब्दियों से उत्तर भारत के राजपूत उन्हें देवी की तरह ही मानते है। और इतिहास के अनुसार उन्होंने कभी भी नृत्य नहीं किया था। फिल्म में उन्हें नृत्य करते हुए दिखाकर निर्माता-निर्देशक ने धारा 295A का उलन्घन किया है। अत: फिल्म को बेन करके निर्माता-निर्देशक पर मुकदमा कायम किया जाना चाहिए।
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कल्पना कीजिये कि यदि देवी दुर्गा को यदि किसी फिल्म में कामुक नृत्य करते दिखाया जाये तो बंगाली किस तरह प्रतिक्रिया करेंगे ? पद्मावती देवी नहीं है किन्तु राजपूत समाज में उन्हें देवी तुल्य श्रद्धा से ही देखा जाता है।
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कृपया यह ट्विट करें , "@PmoIndia #BanPadmavati #BanPadmavatiIpc295A . Padmavati isnt taken as Godess, but she has been Godly figure in Rajputs across North India since ages. She never danced as per history. And so by showing her dance, movie violets IPC section-295A . So ban the movie".
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ट्विट का हिन्दी अनुवाद , "@PmoIndia #BanPadmavati #BanPadmavatiIpc295A , उत्तर भारत का राजपूत समाज कई शताब्दियों से पद्मावती को देवी तुल्य ही मानता है। इतिहास के अनुसार उन्होंने कभी भी नृत्य नहीं किया था। नृत्य दिखाकर फिल्म आईपीसी की धारा 295A का उलन्घन करती है। पद्मावती फिल्म को बेन किया जाए"
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मेरे द्वारा किये गए ट्विट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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भारतीय दंड सहिंता की धारा 295 क
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विमर्शित और विद्वेषपूर्ण पूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासो का अपमान करके उसके धार्मिक विश्वास को आहत करने के आशय से किये गए हो -- जो कोई [ भारत के नागरिको के ] किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासो का अपमान [ उच्चारित या लिखित शब्दों द्वारा या संकेतो या दृश्यरूपण द्वारा या अन्यथा ] करेगा या करने का प्रयत्न करेगा वह दोनों में से किसी भाँती के कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
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Section 295A in The Indian Penal Code
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272 [295A. Deliberate and malicious acts, intended to outrage reli­gious feelings of any class by insulting its religion or reli­gious beliefs.
—Whoever, with deliberate and malicious intention of outraging the religious feelings of any class of 273 [citizens of India], 274 [by words, either spoken or written, or by signs or by visible representations or otherwise], insults or attempts to insult the religion or the religious beliefs of that class, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to 4[three years], or with fine, or with both.]
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Nov 25 2017 08:44:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मेरी मान्यता है कि 80% से ज्यादा जज पूरी तरह से भ्रष्ट है :
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मेरा मानना है कि भारत की सुप्रीम कोर्ट के जजों में से 80% पूरी तरह से भ्रष्ट है, भाई भतीजा वादी है और उन्होंने देशी-विदेशी धनिको के साथ कुटिल गठजोड़ बना रखे है। जो उन्हें पैसा देता है वे उसके हिसाब से काम करते है। शेष 20% भी किसी काम के नही है। क्योंकि वे भारत की अदालतों में किसी भी प्रकार का सुधार लाने के लिए कोई फ़िक्र मोल लेना नहीं चाहते। वे अपनी नौकरी करते है और आँखें मूँद कर पड़े रहते है।
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मेरा यह भी विश्वास है कि भारत की हाई कोर्ट जजों में से भी 80% पूरी तरह से भ्रष्ट है, भाई भतीजा वादी है और उन्होंने देशी-विदेशी धनिको के साथ कुटिल गठजोड़ बना रखे है। साथ ही ये पदोन्नति के भूखे भी है। जो उन्हें पैसा देता है या इन्हे पदोन्नति का चुग्गा डाल देता है , वे उसके हिसाब से फैसले दे देते है। शेष 20% भी किसी काम के नही है। क्योंकि वे भारत की अदालतों में किसी भी प्रकार का सुधार लाने के लिए कोई कदम उठाना नहीं चाहते।
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मैं यह भी विश्वास करता हूँ कि सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट की तरह ही भारत की निचली अदालतों के जजों में से भी 70% पूरी तरह से भ्रष्ट है, भाई भतीजा वादी है और उन्होंने देशी धनिको के साथ कुटिल गठजोड़ बना रखे है। वे पदोन्नति के भूखे तो है ही साथ ही वे अच्छी जगह पोस्टिंग पाने के लिए भी लालायित रहते है। इस वजह से वे हाई कोर्ट / सुप्रीम कोर्ट जजों को खुश रखने के नजरिये से फैसले देते है। और जो भी उन्हें पैसा देता है उसके लिए तो खैर काम करते ही है। शेष 30% भी किसी काम के नही है। क्योंकि वे भारत की अदालतों में किसी भी प्रकार का सुधार लाने के लिए कोई लोड लेना नहीं चाहते। वे अपनी नौकरी करते है और खामोश रहते है।
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कुछ लोग मेरे इस विश्वास से इत्तिफ़ाक नहीं रखते। उनका मानना है कि भारत का सबसे ज्यादा भ्रष्ट महकमा न्यायपालिका ही है , और सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के तो सारे ही जज भ्रष्ट है। एक भी अपवाद नहीं है। किन्तु यह उनका मानना है। मुझे लगता है कि 80% जज ही भ्रष्ट है, और शेष 20% निकम्मे है, भ्रष्ट नहीं है।
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मैंने अपना यह रुख ट्विटर पर भी रखा है।
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a) #iBelieve , #AboutJudges , #Over80percentSupremeJudgesAreCorruptNepoticNexused and rest are useless
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b) #iBelieve , #Over80percentSupremeJudgesAreCorruptNepoticNexused and rest are useless. same is my belief abt high/lower judges. 80% corrupt

( मेरे द्वारा किया गया ट्विट कमेन्ट बॉक्स में देखें )
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यदि आप भी मानते है कि सुप्रीम कोर्ट में 80% से ज्यादा जज भ्रष्ट है, तो निचे दी गयी हेश टैग को अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करें।

#Over80percentSupremeJudgesAreCorruptNepoticNexused
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समाधान - सुप्रीम कोर्ट , हाई कोर्ट एवं निचली अदालतों के सभी जजों को नौकरी से निकाल कर देश में ज्यूरी सिस्टम लागू किया जाए, तथा नए जजों की नियुक्तियां राईट टू रिकॉल जज कानूनों द्वारा की जाए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Nov 25 2017 08:45:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मेरी मान्यता है कि 95% से ज्यादा अर्थशास्त्र , राजनीति शास्त्र एवं इतिहास के प्रोफ़ेसर बिकाऊ है !!
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#95_फीसदी_से_अधिक_राजनीति_विज्ञान_के_प्रोफ़ेसर_बिकाऊ_है , #Over95percentPoliticalScienceProfessorsAreBikaau ,
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#95_फीसदी_से_अधिक_इतिहास_के_प्रोफ़ेसर_बिकाऊ_है , #Over95percentHistoriansAreBikaau ,
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#95_फीसदी_से_अधिक_अर्थशास्त्र_के_प्रोफ़ेसर_बिकाऊ_है , #Over95percentEconomistsAreBikaau ,
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मेरे विचार में , भारत में जितने भी अर्थशास्त्री, इतिहासकार एवं राजनीती विज्ञान के प्रोफ़ेसर, विशेषग्य आदि है उनमे से 95% से ज्यादा लोग बिकाऊ है। और शेष 5% निकम्मे है व देश की व्यवस्था सुधारने में उनकी कोई रुचि नहीं है।
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@PMOIndia #MyPoliticalBelief #Over95percentEconomistsAreBikaau #Over95percentSociologyProfessorsAreBikau #Over95percentHistoriansAreBikaau
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नीचे दिए गए विकल्पों में से अपना विकल्प चुने एवं इन विषयों के प्रोफेसरों के बारे में आपका जो भी आकलन है कृपया उसे अपने ट्विटर एकाउंट पर रखें। मेरा ट्विट कमेन्ट बॉक्स में देखें
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(a) #Over95percentPoliticalScienceProfessorsAreBikaau
(b) #Between80to95percentPoliticalScienceProfessorsAreBikaau
(c) #Between60to80percentPoliticalScienceProfessorsAreBikaau
(d) #Between40to60percentPoliticalScienceProfessorsAreBikaau
(e) #Between20to40percentPoliticalScienceProfessorsAreBikaau
(f) #Below20percentPoliticalScienceProfessorsAreBikaau
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कृपया अपने ट्विट में हेशटेग का इस्तेमाल करे।
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इतिहासकारो के बारे में आप क्या सोचते इससे कोई विशेष फर्क नहीं आता। क्योंकि मेरे विचार में इतिहास एक अर्थहीन सब्जेक्ट है।
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किन्तु यदि आप सोचते है कि भारत के 40% से ज्यादा राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर बिकाऊ नहीं है बल्कि ईमानदार है , तो कृपया समाचार पत्रों में विज्ञापन दें एवं अपने फेसबुक /ट्विटर पर इन प्रोफेसरों से सार्वजनिक अपील करें कि वे अपनी राजनैतिक पार्टी बनाए एवं चुनाव लड़ें।
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और यदि आपको लगता है कि राजनीति विज्ञान के 40% से ज्यादा प्रोफ़ेसर ईमानदार है तो मान कर चलिए कि राईट टू रिकॉल , ज्यूरी सिस्टम क़ानून किसी काम के नहीं है ,अत: इन कानूनों के प्रचार में अपना समय नष्ट न करे। इसकी जगह आपको राजनीति विज्ञान के प्रोफेसरों को चुनाव लड़ने के लिए राजी करना चाहिए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Nov 26 2017 18:53:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पाओलो कोहेल्हो की पुस्तक "अल्केमिस्ट" में एक नामचीन एवं सफल पात्र कहता है -- "मैं अपना दिमाग भिड़ाकर जटिल चीजो को तो समझ लेता हूँ, किन्तु सरल चीजो को समझने में धोखा खा जाता हूँ। जबकि कई लोग सरल चीजो को समझ लेते है , जो कि वाकई काम की होती है।"
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कभी कभी राईट टू रिकॉल कानूनों की शक्ति कोई कार्यकर्ता इसीलिए भी नहीं समझ पाता क्योंकि वह इसे जटिल तरीके से समझने की कोशिश कर रहा होता है। उन्हें लगता है कि इतने बड़े देश की इतनी पेचीदा व्यवस्था को सुधारने के लिए काफी दिमागी मशक्कत करके एक वृहद व्यवस्था को ईजाद करना पड़ेगा, और इसके लिए कोई विशेषग्य चाहिए। सिर्फ 2 पेज का कानून कैसे देश में इतना बड़ा परिवर्तन ला सकता है कि सरकारी विभागों / नेताओं का भ्रष्टाचार एवं अकार्यकुशलता रातों रात हवा हो जाए !!
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असल में राईट टू रिकॉल की अवधारणा बेहद सरल है। यह इतनी सीधी है कि जटिलता ढूँढने का अभ्यस्त व्यक्ति इसमें जटिलता ढूँढने लगता है। और जब उसे इसमें जटिलता नहीं मिलती तो वह यह मान लेता है कि यह उससे भी ज्यादा जटिल है जितना मैंने अनुमान किया था !! सुलझी हुयी गुत्थी को सुलझाने का खब्त तो सिर्फ कवि और दार्शनिक ही पाल सकते है। साधारण व्यक्ति तो उलझी हुयी बात को सुलझा सकता है सुलझी हुयी को नहीं।
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यह गड़बड़ तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति राईट टू रिकॉल की प्रक्रिया का ड्राफ्ट पढ़े बिना ही इसे समझने की कोशिश करता है !!
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समाधान - प्रक्रिया विहीन राईट टू रिकॉल को समझा नहीं जा सकता। इसका ड्राफ्ट पढना इसे समझने का सबसे आसान तरीका है। अत: इसे समझने के लिए इसका प्रस्तावित ड्राफ्ट पढ़े।
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