Fri Jan 06 2023 12:06:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
विकल्पहीन (सिर्फ़ निकालने की प्रक्रिया वाला) Rtr लागू करने के बाद अब हरियाणा सरकार सरपंचों को धमका रहे है कि — हमारे हिसाब से नही चले तो तुम्हें रिकॉल करवा (निकलवा) देंगे।
Kapil Bishnoi:
Minister threatening Sarpanch with Recall
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Sun Jan 08 2023 23:11:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
RSS द्वारा लागू किया गया विकल्पहीन राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून (सिर्फ़ निकालने की प्रक्रिया वाला) भारत में किस पैमाने का ग़दर मचा सकता है इसे आप लेटिन अमेरिकी देशों के कुछ उदाहरणों से समझिए :
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(1) पेरू में वर्ष 1997 से 2013 के बीच नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों के ख़िलाफ़ 20,000 रिकॉल याचिकाएँ दायर की गयी !! जिसमें से 5,300 याचिकाओ पर रिकॉल इलेक्शन आयोजित हुए, और 745 जनप्रतिनिधियों को निष्कासित किया गया !!!
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(2) इक्वाडोर में 1998 से 2008 के बीच 785 दायर याचिकाओं में से 80 याचिकाओं पर रिकॉल इलेक्शन हुए !! और कमोबेश यही स्थिति कोलंबिया, बोलीविया, वेनेजुएला आदि देशों की है !!!
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किसी भी देश की बेंड बजाने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि वहाँ पर विकल्पहीन राईट टू रिकॉल लागू कर दो।
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और पेड मीडिया के प्रायोजक (रॉकफ़ेलर, रॉथस्चाइल्ड) एक एक करके उन सभी देशों में विकल्पहीन प्रक्रिया वाला राईट टू रिकॉल लागू करवा रहे है जहाँ उनका नियंत्रण है। ताकि सोसायटी में विभाजन-वैमनस्य बढ़े, स्थानीय स्तर पर झगड़ों में इजाफ़ा हो और शासन में अस्थिरता आए।
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JSM के कार्यकर्ताओ से अपील है कि वे RSS द्वारा हरियाणा में लागू किए गए विकल्पहीन राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून का सार्वजनिक रूप से विरोध करें। क्योंकि RSS इस क़ानून को भारत के शेष राज्यों में भी लागू करने की दिशा में काम कर रहा है।
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Mon Jan 09 2023 20:28:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
मुख्यमंत्री एवं राज्य स्तर के मंत्रियो पर वोट वापसी लागू करने का प्रस्ताव (Repost)
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(Vote Vapsi over Cm and ministers)
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इस कानून का सार : यह कानून मुख्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री के अधीन मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के लिए लिखा गया है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को निम्नलिखित आदेश भेजें-
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“मुख्यमंत्रीजी, कृपया मुख्यमंत्री एवं मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के आदेश जारी करें – #VvpCM #VoteVapsiCm
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===क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ===
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टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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(01) यह कानून राज्य के गृह मंत्री एवं वित्त मंत्री पर लागू नहीं होगा।
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(02) इस कानून में मंत्री शब्द से आशय है, राज्य के गृह एवं वित्त मंत्री के अतिरिक्त राज्य सरकार एवं मुख्यमंत्री के अधीन आने वाले सभी मंत्रालयों के मंत्री।
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(03) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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3.1. मुख्यमंत्री
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3.2. धारा (1) में बताये गए 2 मंत्रियो को छोड़ते हुए राज्य सरकार के अधीन सभी मंत्रालयों के मंत्री।
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तब यदि आप मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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(04) मुख्यमंत्री एवं मंत्री बनने के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा आवेदन करना :
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30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि मुख्यमंत्री या मंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर विधायक के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, और एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(05) मतदाताओ द्वारा स्वीकृति दर्ज करना :
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(5.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर / रजिस्टर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(5.2) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(5.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(5.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(06) मुख्यमंत्री की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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पदासीन मुख्यमंत्री निचे दी गयी दोनों परिस्थितियों में से अपनी पसंद के अनुसार उच्च संख्या को चुन सकते है –
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(6.1) नागरिको द्वारा दी गयी स्वीकृतियों की संख्या, अथवा
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(6.2) मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधानसभा विधायको को चुनाव में प्राप्त हुए मतों का कुल योग।
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(6.3.) यदि किसी प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या पदासीन मुख्यमंत्री की स्वीकृतियों या मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायको को प्राप्त मतों की कुल संख्या से 10 लाख अधिक हो जाती है तो पदासीन मुख्यमंत्री अपना पद त्याग सकते हैं या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है, और विधायको से सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को नया मुख्यमंत्री नियुक्त करने के लिए कह सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। अथवा विधायक सबसे अधिक स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को नया मुख्यमंत्री चुन सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है।
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[ स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि, 3 करोड़ आबादी एवं 200 विधानसभा सीटो के राज्य में X मौजूदा सीएम है, और उसे विधानसभा में 120 विधायको का समर्थन प्राप्त है। मान लीजिये कि, इन 120 विधायको को चुनाव में कुल 1 करोड़ मत प्राप्त हुए थे, और X को नागरिको से सीधे प्राप्त होने वाली स्वीकृतियो की संख्या 80 लाख है।
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(i) मान लीजिये, Y सीएम का एक प्रत्याशी है और उसे 90 लाख नागरिक स्वीकृतियां दे देते है तो भी X सीएम बना रहेगा, क्योंकि X को जिन विधायको का समर्थन प्राप्त है, उनके मतों का योग 1 करोड़ है। किन्तु यदि Y को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है तो X अपना इस्तीफा दे सकता है, या नहीं भी दे सकता है।
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(ii) अब मान लीजिये, Y को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है, किन्तु यदि X सीएम के रूप में संतोषप्रद काम कर रहा है, अत: X की स्वीकृतियां बढ़कर यदि 1.15 करोड़ हो जाती है, तो भी X सीएम बना रहेगा। ]
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(07) यदि किसी मंत्रालय के मंत्री पद के किसी प्रत्याशी को राज्य की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ की 30% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां अमुक मंत्रालय के पदासीन मंत्री से 2% अधिक भी है, तो मुख्यमंत्री मौजूदा मंत्री को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले व्यक्ति को अमुक मंत्रालय में मंत्री नियुक्त कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। मंत्री की नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री का ही होगा।
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(08) जनता की आवाज :
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(8.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(8.2) यदि कोई मतदाता धारा 8.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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===ड्राफ्ट का समापन==
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Wed Jan 11 2023 11:15:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
RRP द्वारा प्रस्तावित Vvp Cm क़ानून की धारा (4) कहती है कि -
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30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि मुख्यमंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर विधायक के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, और एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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और धारा (5) कहती है -
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कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर / रजिस्टर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ / ना को दर्ज करके रसीद देगा।
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इससे क्या बदलाव आएगा ?
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मौजूदा स्थिति में यदि कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बनना चाहता है तो उसे पहले विधायक का चुनाव जीतना होता है, फिर उसे विधायक ख़रीदने पड़ते है, और फिर आलाकमान से हरी झंडी लेनी पड़ती है। इस पूरी प्रक्रिया में राज्य के मतदाताओं की कोई भूमिका नहीं होती।
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उदाहरण के लिए इस क़ानून के आने के बाद JSM के संयोजक हरियाणा का मुख्यमंत्री बनने के लिए आवेदन कर सकेंगे। और हरियाणा के मतदाता उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे।
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और यदि JSM संयोजक की स्वीकृतियाँ मौजूदा Cm से अधिक हो जाती है, तो वे विधायक उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त कर सकते है। और मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें अगले 6 माह में विधायक का चुनाव जीतना होगा।
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इस तरह Vvp Cm का क़ानून आने के बाद मतदाता अपने राज्यों के उन मुख्यमंत्रीयों को बदल सकेंगे जो विदेशियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे है।
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इस तरह किसी अच्छे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनने के लिए न तो पहले विधायक का चुनाव जीतना पड़ेगा, न उसे विधायक ख़रीदने पड़ेंगे, न आला कमान को खुश करना पड़ेगा, न ही उसे पेड मीडिया की चिरौरी करनी पड़ेगी। उसे सिर्फ़ नागरिकों का समर्थन हासिल करना होगा।
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इस तरह वोट वापसी मुख्यमंत्री का क़ानून मुख्यमंत्री को विदेशियों एवं पेड मीडिया के चंगुल से आज़ाद करके उन्हें नागरिकों के नियंत्रण में लाता है।
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JSM के कार्यकर्ता कृपया बताएँ कि जनता की शक्ति बढ़ाने वाले और विदेशियों की शक्ति कम करने वाले ऐसे वोट वापसी मुख्यमंत्री क़ानून का वे समर्थन क्यों नही कर रहे है ?
और वे मौजूदा व्यवस्था को ही क्यों बनाए रखना चाहते है ?
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#VoteVapsiCM , #VvpCM
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Mon Jan 23 2023 16:19:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
RSS के मुख्यमंत्री हेमंत सरमा की शाहरुख़ से फ़ोन पर बात होने के बाद RSS कार्यकर्ताओ ने ग़लीज़ फ़िल्म ‘पठान’ का बॉयकॉट करना बंद कर दिया है !!
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सरमा ने ट्वीट किया कि - “श्री शाहरुख़ ख़ान से कल रात मेरी बात (डील) हो गई है। और मैंने उन्हें आश्वस्त किया है कि फ़िल्म के निर्बाध प्रदर्शन में कोई बाधा नहीं आने देंगे।
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एक फ़ोन और आ जाए (मतलब, थोड़ा पैसा और मिल जाए) तो ये लोग पठान फ़िल्म का प्रमोशन भी करना शुरू कर देंगे !!!
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Tue Jan 24 2023 19:44:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
RSS के नेता फ़िल्मों के बॉयकॉट से भी पैसा बना रहे है। पहले वे अपने कार्यकर्ताओ को फ़िल्म का विरोध करने को कहते है, और फिर निर्मताओं से हफ़्ता वसूलने के बाद विरोध करना छोड़ देते है।
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और जब RSS के कार्यकर्ताओं को निर्देश मिल जाते है कि पैसा वसूला जा चुका है, तो वे भी ख़ामोश हो जाते है !!!
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#buycottpathan
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Thu Jan 26 2023 10:21:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
(1) सरकार में बैठे बीजेपी नेताओ (शक्तिमान) ने ग़लीज़ दृश्य होने के बावजूद “पठान” के निर्मताओं से पैसा लेकर पहले फ़िल्म को पास किया !!
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(2) फिर उन्होंने RSS नेताओ (गंगाधर) से ग़लीज़ दृश्यों का हवाला देकर फ़िल्म का विरोध करने को कहा !! इस तरह नोट लेने के बाद मुस्लिम विरोधी-हिंदू समर्थक वोट खींचने के लिए RSS ने फ़िल्म का विरोध करना शुरू किया ।
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(3) निर्मताओं ने सरकार में बैठे नेताओं (शक्तिमान) से कहा कि पैसा लेने के बावजूद भी विरोध क्यों करवा रहे हो ?
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शक्तिमान ने कहा कि विरोध तो RSS (गंगाधर) कर रहा है !! इसीलिए वो दृश्य हमें काटने पड़ेंगे जिन्हें न काटने के एवज़ में आपने पैसा दिया था।
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(4) तब निर्माताओ ने BJP नेताओ (शक्तिमान) को दृश्य न काटने के एवज में और पैसा दिया !! BJP नेताओं ने उन्हें आश्वस्त किया कि अब अमुक दृश्य नहीं काटे जाएँगे।
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(5) नोट कमाने के बाद अब अपने वोट बचाने के लिए शक्तिमान ने इधर उधर से 2-3 सेकेंड के कुछ शॉट काट दिए (किंतु ग़लीज़ दृश्यों को नहीं काटा गया।)
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(6) गंगाधर (RSS) ने अपने कार्यकर्ताओ को यह बुत्ता देकर विरोध का मजमा समेटने को कहा कि - फ़िल्म में से अवांछित दृश्य काट दिये गए है !!!
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कुशल नेता किसी मुद्दे से नोट एवं वोट दोनों कमाते है। और बारी बारी से नोट एवं वोट दोनों कमाने के लिए गंगाधर को शक्तिमान की एवं शक्तिमान को गंगाधर की ज़रूरत होती है !!
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[ पुनश्च : हिंदू धर्म एवं संस्कृति का उपहास उड़ाने के विषय पर पीके एवं ओह माय गॉड में जितना कीचड़ परोसा गया है, उतना आज तक किसी मुख्य धारा की फ़िल्म में नहीं परोसा गया ।
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किंतु मोटा पैसा मिलने के कारण बीजेपी=RSS के नेताओं एवं कार्यकर्ताओ ने पूरे भारत में इन फ़िल्मों का प्रमोशन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी !!! ]
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Fri Jan 27 2023 19:28:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Efficient Courts ; Back bone of the country
Kushagra Yadav Salonup:
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Fri Jan 27 2023 23:45:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
BJP (शक्तिमान) के नेता अपनी कमाई बढ़ाने के लिए ग़लीज़ फ़िल्म पठान का प्रमोशन कर रहे है !!
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उल्लेखनीय है कि, RSS (गंगाधर) से विरोध का ड्रामा स्टेज करवाने के बाद शक्तिमान ने ग़लीज़ फ़िल्म पठान के निर्माताओं से यह डील की थी, कि वे उन्हें X करोड़ रुपये एवं कमाई में Y% हिस्सा दें, तो हम गंगाधर को चुप रहने को कह देंगे।
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पर बॉयकॉट नियंत्रण से बाहर चला गया और अब ग़लीज़ फ़िल्म पठान को दर्शक नहीं मिल रहे। फ़िल्म ऐतिहासिक फ्लॉप की और बढ़ रही है। अत: इस ग़लीज़ फ़िल्म को बचाने के लिए बीजेपी के नेता मैदान में आ गए है।
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Sat Jan 28 2023 12:54:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
क्या ग़लीज़ फ़िल्म पठान के किसी ट्रेन के दृश्य में रूसी एजेंटों को अपराधी, नाकाबिल और जोकर की तरह दर्शाया गया है ?
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यदि ऐसा है तो यह बहुत ही बड़ा एवं गंभीर शिफ्ट है। इस फ़िल्म को बेन करने की ज़रूरत है। यह हमारे और रूस के संबंध ख़राब करने के बारे में है।
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Sat Jan 28 2023 14:37:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
यदि कार्यकर्ताओ ने अपने नाम के पीछे अपनी विधानसभा का नाम एवं स्टेट कोड जोड़ कर रखा होता तो सिर्फ़ 24 घंटे में पूरे देश के सामने यह बात साफ़ तौर पर स्थापित की जा सकती थी, कि ग़लीज़ फ़िल्म पठान फ्लॉप हो चुकी है, और पेड मीडिया इसे कवर अप करने के लिए फ़र्ज़ी आँकड़े दिखा रहा है !!!
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कैसे ?
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सभी कार्यकर्ता अपने मोबाईल से ऑनलाइन टिकट बुक करने की प्रक्रिया का इस्तेमाल करके थियेटर की ऑक्यूपेंसी का स्क्रीन शॉट अपनी फ़ेसबुक वॉल पर पोस्ट कर सकते थे, और इसे पिन पोस्ट बनाकर अपडेट कर सकते है।
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और इसके बाद कोई भी व्यक्ति इसे चेक कर सकता है कि किस शहर में फ़िल्म कितना बिज़नेस कर रही है। और इस डेटा को विधिवत रूप से देखने के लिए यूज़र को सर्च ऑप्शन में जाकर सिर्फ़ शहर और स्टेट कोड डालना होगा।
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उदाहरण के लिए, यदि दिल्ली में बैठा कोई व्यक्ति यह जानना चाहता है कि भीलवाड़ा में पठान की कितनी सीट ख़ाली या भरी है, तो उसे सर्च में जाकर सिर्फ़ BhilwaraRj टाइप करना है, और एफबी का सर्च ऑप्शन उसे टॉप पर मेरी एवं मेरे जैसे राजनीतिक कार्यकर्ताओ की प्रोफाइल दिखा देगा।
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और ऐसा तब भी होगा जब मैं या मेरे जैसे अन्य कार्यकर्ता सर्च करने वाले की मित्र सूची में नहीं है। और अब वह मेरी प्रोफाइल पर रखे गये पिन पोस्ट में थियेटर की ऑक्यूपेंसी का स्क्रीन शॉट देख सकता है। और इस तरह वह राजस्थान के अन्य शहरों का नाम जैसे AjmerRj , TonkRj, JodhpurRj डालकर राजस्थान के अन्य थियेटर के हालात भी देख सकता है।
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और ये डेटा देखने के लिए सिर्फ़ इतना काफ़ी है कि किसी शहर में सिर्फ़ एक भी ऐसा व्यक्ति मौजूद हो जिसने अपने नाम में विधानसभा और स्टेट कोड जोड़ा हो।
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यदि अमुक व्यक्ति ने अपनी पिन पोस्ट में अपने थियेटर का स्क्रीन शॉट नहीं रखा है तब भी हम उसे कह सकते है कि - क्या आप अपने थियेटर की ऑक्यूपेंसी का स्क्रीन शॉट एफबी पर रख सकते है। और वह ऐसा कर देगा। क्योंकि, उसने अपने नाम में विधानसभा का नाम जोड़ा हुआ है, और यह इसका संकेत है कि वह राजनीतिक सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए फ़ेसबुक पर है।
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तो फ़िलहाल यदि मुझे यह जानना है कि कानपुर में पठान कैसा बिज़नेस कर रही है तो मेरे पास कोई तरीक़ा नहीं है। क्योंकि जब मैं सर्व में KanpurUp टाइप कर रहा हूँ तो मुझे कोई प्रोफाइल नज़र नहीं आ रही। जबकि कानपुर में सैंकड़ों ऐसे कार्यकर्ता है जो पठान का बॉयकॉट कर रहे है। किंतु उन्होंने अपनी विधानसभा एवं स्टेट कोड का नाम अपने फ़ेसबुक नाम में नही जोड़ा है, अत: मैं उनसे संपर्क नहीं बना सकता !!!
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मेरे शहर भीलवाड़ा के थियेटर का कल एवं आज के स्क्रीन शॉट इस पोस्ट के साथ सलग्न है। और जो भी भी व्यक्ति यह स्क्रीन शॉट मेरी वाल पर देखेगा उसे यह पूछने की ज़रूरत नही है कि यह कहाँ का थियेटर है, क्योंकि मेरे नाम में ही यह लिखा है कि मैं राजस्थान के भीलवाड़ा से हूँ।
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Sat Jan 28 2023 18:48:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Sun Jan 29 2023 19:43:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
ग़लीज़ फ़िल्म पठान ने संडे को भी पैसा गँवाया !! जितनी सीट बुक हो रही है, उतने में हॉल वालो का खर्चा निकलने में भी फाइट है। निर्माता को कहाँ से मिलेगा !! प्राइम टाइम में 5 में से 4 शो ख़ाली है।
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Sun Jan 29 2023 20:22:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
जिन लोगो को पठान फ़िल्म देखनी ही है, वे इसे टोरेंट पर या टेलीग्राम से डाउनलोड करके देखें। थियेटर में देखने न जाएँ। टेलीग्राम पर यह फ़िल्म आसानी से उपलब्ध है।
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ग़लीज़ फ़िल्म पठान कई तरह के ग़लत संदेश देने के लिए बनाई गई है।
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(1) यह फ़िल्म अमरीकियों द्वारा फ़ंडेड है और हमारे मित्र देश रूस के सैनिकों को उपहास बनाती है। यह पहली बार है जब भारत के सेंसर बोर्ड ने रूसियों का विद्रूप निरूपण करने वाली फ़िल्म को पास किया है। अब से पहले इस तरह के दृश्यों को सेंसर बोर्ड पास नहीं करता था।
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(2) इसके अलावा इस फ़िल्म में भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के एजेंट को ग़द्दारी करते और पाकिस्तान की ISI एजेंट को भारत को बचाने वाली भूमिका में दर्शाया गया है।
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अमेरिकी मीडिया घाटा खाने के बावजूद इस फ़िल्म को सुपर हिट बताने में इसीलिए इतना खर्च कर रहा है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि, भारत ने रूसियों का मजाक बनाने वाली फ़िल्म को पास किया और इस फ़िल्म को भारतीय दर्शकों द्वारा काफ़ी पसंद किया गया। और इसीलिए इस फ़िल्म को प्रधानमंत्री (जो कि अमेरिकियो की कठपुतली है) के आदेश से राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किया जा रहा है।
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और फिर आप आने वाले समय में कनाड़ा कुमार जैसे ग़लीज़ अभिनेताओ की ऐसी कई फ़िल्में देखेंगे जिनका प्लॉट एंटी रशियन होगा।
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Sun Jan 29 2023 20:46:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
समाज में गंदगी परोसने वाली पठान, पीके, पद्मावती और ऐसी ही फिल्मों को रोकने के लिए एक मात्र स्थाई इलाज है —
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सेंसर बोर्ड चेयरमैन को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाना।
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यदि सेंसर बोर्ड चेयरमैन वोट वापसी के दायरे में होता तो वह इस फ़िल्म को कोई न कोई हवाला देकर लटका कर रख देता। साल दो साल या पाँच साल तक भी !! और फ़िल्म डिब्बा बन जाती।
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और यदि सेंसर बोर्ड चेयरमेन इसे पास कर भी देता तो अब तक नागरिक पासबुक का प्रयोग करके उसे निकालकर ऐसे व्यक्ति को नौकरी पर रख देते जो इस फ़िल्म को बेन करे। और नया चेयरमेन आते ही पहला काम इस फ़िल्म को बैन करने का करता ।
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और यदि भारत में जूरी कोर्ट का क़ानून होता तो चेयरमेन पर अब 50 लोगो की नागरिक जूरी के सामने मुक़दमें की सुनवाई होती। और जूरी उसके सार्वजनिक नार्को टेस्ट का आदेश देती। और तब पूरे देश के सामने यह बात खुल जाती कि इस ग़लीज़ फ़िल्म को यहाँ तक पहुँचाने में सरकार में बैठे कौन कौन लोगो ने कितना पैसा खाया है !!!
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अब सेंसर बोर्ड चेयरमैन का पद काफ़ी महत्त्वपूर्ण हो चुका है । क्योंकि पेड मीडिया के प्रायोजक इसका इस्तेमाल समाज में अलगाव के बीज बोने, धर्म-जाति संघर्ष को बढ़ावा देने, अपसंस्कृति को फैलाने और भारत के मित्र देशों से संबंध ख़राब करने में कर रहे है ।
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#JuryCourt
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Sun Jan 29 2023 22:13:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Not a single journalist report total number of EMPTY seats in sick movie Pathaan !!
Because every journalist is a paid journalist !!!
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Mon Jan 30 2023 20:38:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर ठीक उसी स्थिति का सामना कर रहा है, जिस स्थिति का सामना भारत 1991 में कर रहा था — निरंतर व्यापार घाटे के कारण डॉलर खतम !!!
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भारत को तब IMF साइन करने को बाध्य होना पड़ा था। IMF साइन करने का मतलब है - विदेशियों के लिए अपना बाज़ार खोलना। [ FDI ]
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बाजार खुलने के बाद विदेशी आपके देश की राष्ट्रीय संपत्तियाँ ख़रीदना शुरू कर देते है। जैसा कि भारत में हो रहा है। और उसके बाद जब देश दिवालिया होता है, तो हमेशा के लिए दिवालिया हो जाता है।
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कोई भी देश निम्न चरणों में दिवालिया होता है-
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टेम्प्रेरी बेंक करेप्सी —-> IMF समझौता —> परमानेंट बैंक करेप्सी।
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पाकिस्तान ने कुछ ही हफ़्तों पहले IMF समझौते पर हस्ताक्षर किए है। पाकिस्तान उस चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसमें भारत ने 1991 में प्रवेश किया था।
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मतलब FDI, निजीकरण, विनिवेश*, PPP जनित विकास वहाँ बॉर्डर पर खड़ा है, लेकिन TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के कारण अंदर आने से कतरा रहा है।
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TTP जाएगा तो विकास आएगा। और फिर यह FDI जनित विकास पाकिस्तान को अजगर की तरह निगल जाएगा।
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(*) विनिवेश - अपनी राष्ट्रीय सम्पत्तियाँ जैसे LIC, ONGC, Coal india आदि में अपनी हिस्सेदारी को बेच देना विनिवेश एवं निजीकरण कहाता है।
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Tue Jan 31 2023 21:54:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
ताक़त वाला टॉनिक !!
आचार्य पंडित राजेश तिवारी:
स्वैच्छिक वैक्सीन लगाया गया
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Tue Jan 31 2023 22:13:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पेड मीडिया के सोशल मीडिया पोर्टल प्रतिदिन अपने एजेंडे के तहत ढेर सारी फ़ेक न्यूज़ प्रकाशित करता है। ग़लत नेरेटीव खड़ा करने वाली इन ख़बरों में आधे अधूरे या झूठे तथ्य दिए जाते है।
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घटनाओं से संबंधित इस प्रकार की ज़्यादातर फ़ेक न्यूज़ के बारे में यदि आप स्थानीय व्यक्ति से पूछेंगे तो मालूम होता है कि पेड मीडिया ने आधे अधूरे तथ्य लिखकर मामले को गढ़ा है।
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पर चूँकि आप अमुक क्षेत्र के किसी व्यक्ति को नहीं जानते अत: आप सच्चाई तक नहीं पहुँच पाते और पेड मीडिया का प्रॉपेगेंडा चल जाता है।
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यदि सभी राजनीतिक कार्यकर्ता अपने फ़ेसबुक नाम में अपनी विधानसभा / तहसील / शहर और स्टेट कोड जोड़ दें तो पेड मीडिया घटनाओं की फ़ेक रिपोर्टिंग की क्षमता खो देगा।
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