Posts for 2021-10




Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Oct 05 2021 16:56:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

05 अक्टूबर 2021 नागरिक कर्तव्य दिवस.
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#VoteVapsiHealthMinister -- वोट वापसी स्वास्थ्य अधिकारी कानून राजपत्र मे प्रकाशित करने हेतु मुख्यमंत्री जी को खुला निर्देश पत्र भेजा.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Oct 05 2021 16:58:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

नागरिक कर्तव्य दिवस
5/10 /2021 मंगलवार |
भीलवाड़ा राजस्थान से आज मुख्यमंत्री जी को ओपन लेटर भेजकर स्वास्थ्य मंत्री पर वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने की मांग करी |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Oct 08 2021 00:17:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Elections in Roman republic
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I rememebr reading about Roman histiory in class-9/10. And even though I was in science stream, I had read history books of 11th / 12th and also BA
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None of the books I had read in India, talked about ELECTIONS or Jury in Roman from 700 BC to almost 100 AD
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IOW, historians of India , simply suppressed information about democracy in Rome from 700 BC onwards !!
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Here are some articles worth reading for all
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Lex Hortensia - Almost a referendum taken in Rome .
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<https://en.wikipedia.org/wiki/Lex_Hortensia>;
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The lex Hortensia, also sometimes referred to as the Hortensian law, was a law passed in Ancient Rome in 287 BC which made all resolutions passed by the Plebeian Council, known as plebiscita, binding on all citizens. It was passed by the dictator Quintus Hortensius in a compromise to bring the plebeians back from their secession to the Janiculum.
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The early monarchs in Rome were elected !!! The term was lifem but upon death, next monarch will be elected !!!
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<https://en.wikipedia.org/wiki/King_of_Rome>;
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The king of Rome (Latin: rex Romae) was the chief magistrate of the Roman Kingdom.[1] According to legend, the first king of Rome was Romulus, who founded the city in 753 BC upon the Palatine Hill. Seven legendary kings are said to have ruled Rome until 509 BC, when the last king was overthrown. These kings ruled for an average of 35 years.
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The kings after Romulus were not known to be dynasts and no reference is made to the hereditary principle until after the fifth king Tarquinius Priscus. Consequently, some have assumed that the Tarquins' attempt to institute a hereditary monarchy over this conjectured earlier elective monarchy resulted in the formation of the republic.
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And pls read following articles too
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<https://en.wikipedia.org/wiki/Plebeian_Council>;
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<https://en.wikipedia.org/wiki/Centuriate_Assembly>;
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The chief priest in Rome was also elected !!!
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IOW, Rome and many election system.
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Imo, that was the reason why Rome was so strong. And thats why, when Alexander decided to expand his empire, he decided not to attack eastern regions ( which were under Rome) but descided to attach western regions (Turkey, Iran etc ).
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All in all, history stuidents of India were never informed about democratic setup Rome had.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Oct 09 2021 11:45:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

To, those like awaken , and BRC andbhagats --- who were proudly boasting that our "send order to PM in writing" campaign will have zero impact.
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Well , then why this attempt to hijack and destroy our campaign ?

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Oct 17 2021 07:55:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चरण सिंह जी : राइट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवार
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सिरसा जिले की एलेनाबाद विधानसभा से चरण सिंह जी राईट टू रिकॉल पार्टी की और से वोट वापसी पासबुक के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे है।
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चुनाव चिन्ह - बेटरी टोर्च
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#JuryCourt , #VoteVapsiPassbook ,

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Oct 20 2021 10:01:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अगस्त 2020 के इस पोस्ट में मैंने लिखा था कि - यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक पीएम को खुला निर्देश पत्र भेजते है तो प्रधानमंत्री पोस्टल अधिकरियों को यह आदेश दे सकते है कि, प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले पत्रों के लिए एक अलग से पोस्ट बॉक्स लगाया जाए।
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पोस्ट का लिंक - <https://www.facebook.com/100003247365514/posts/3168520073266207>;
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भीलवाड़ा में पोस्ट ऑफिस ने पीएम को सम्बोधित करने वाले पत्रों के लिए अलग से डिब्बा लगा दिया है।
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Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

भीलवाड़ा में पोस्ट ऑफ़िस ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजने के लिए अलग से डिब्बा लगवा दिया है !!

जो कहते थे कि आपके द्वारा भेजे गए निर्देश प्रधानमंत्री कार्यालय पर जाते है क्या, उनके लिए यह पोस्ट ही काफी है । देखिए अब डाक विभाग खुद ऐसी व्यवस्था करने में लगा हुआ है कि आपके द्वारा भेजे गए खुले निर्देश सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय पँहुचाए जाएंगे ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Oct 24 2021 17:43:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

RRP द्वारा प्रस्तावित क़ानूनो के नए हैशटैग की सूची :
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राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित कानूनों के हैशटैग्स को अद्यतित (Updated) किया गया है। अब से निचे दिए गए हैशटैग चलन में रहेंगे। अत: पुराने हैशटैग का इस्तेमाल न करें।
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वजह : पेड मीडिया एवं आरएसएस द्वारा राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित किये गए कानूनों के शीर्षकों (Titles) को हाईजेक करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। अत: ज्यादातर हेशटैग में Rrp एवं Draft शब्द जोड़ दिया गया है।
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(01) धनवापसी पासबुक - #DhanVapsiRrp
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(02) रिक्त भूमि कर - #EltRrp
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(03) जूरी कोर्ट - #JuryCourtDraftRrp
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(04) राज्य जूरी कोर्ट - #StateJuryCourtDraftRrp
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(05) जिला जूरी कोर्ट - #JilaJuryCourtDraftRrp
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(06) वोइक - #WoicRrp
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(07) वोट वापसी दूरदर्शन अध्यक्ष - #VvpDdChairman
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(08) वोट वापसी केन्द्रीय मंत्री - #VvpCentralMinister
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(09) वोट वापसी राज्यमंत्री - #VvpStateMinister
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(10) हिन्दू बोर्ड - #HinduBoardDraftRrp
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(11) गौ नीति - #GauNitiDraftRrp
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(12) जूरी पंचायत - #JuryPanchayatRrp
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(13) टू चाइल्ड लॉ - #TwoChildLawRrp
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(14) NRCI - #NcriRrp
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(15) गन लॉ इण्डिया - #GunLawDraftRrp
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(16) स्टेट गन लॉ - #StateGunLawDraftRrp
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(17) डिस्ट्रिक्ट गन लॉ - #DistrictGunLawDraftRrp
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(18) टीसीपी इण्डिया - #TcpIndiaRrp
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(19) स्टेट टीसीपी - #StateTcpRrp
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(20) डिस्ट्रिक्ट टीसीपी - #DistrictTcpRrp
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(21) वोट वापसी सांसद - #VoteVapsiMpRrp
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(22) रेडो - #Redo
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(23) रेगो - #Rego
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(24) वोट वापसी सीएम - #VoteVapsiCm
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(25) वोट वापसी पीएम - #VoteVapsiPm
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(26) इतिहास पुनरीक्षण - #HistoryRevisedRrp
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(27) आरक्षण समायोजन - #ModifiedReservationRrp
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(28) राईट टू रिकॉल सरपंच – #VoteVapsiSarpanchRrp
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(29) PIRM - #MarriedWomenProtection
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(30) MBP - #MinBuyingPriceRrp
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(31) वोट वापसी स्वास्थ्य मंत्री - #VvpHealthMin
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Oct 24 2021 18:37:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मिशनरीज जहाँ भी जाती है स्थानीय धर्म को तोड़ने के लिए धार्मिक परम्पराओं / रीतियों को उड़ाने के लिए तर्क (Logic) एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Approach) का इस्तेमाल करती है। और ज्यादातर मामलों में 'क्राइसिस ऑफ़ कोंशस' एवं 'क्राइसिस ऑफ़ फेथ'(*) से ग्रस्त युवा पेड मीडिया के इस दुष्प्रचार की चपेट में आ जाते है।
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तथ्य यह है कि, धार्मिक परम्पराओं / रीतियों आदि के पीछे कभी कोई लॉजिक या वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं होता, और न ही धार्मिक रीतियों के पीछे किसी लॉजिक को ढूँढने का प्रयास करना चाहिए। यदि आपने धार्मिक रीती रिवाज में तर्क एवं विज्ञान ढूंढना शुरू किया तो आपका पूरा का पूरा धर्म उड़ जाएगा, और आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा।
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चूंकि हिन्दू धर्म की धार्मिक संस्थाओ का प्रशासन पहले से ही बेहद कमजोर है और इस वजह से हिन्दू धर्म का क्षरण हो रहा है, इस स्थिति में वैसे भी हिन्दू धर्म के पास उत्सवों में मनोरंजन एवं बेहिसाब धार्मिक रीतियों के सिवा कुछ भी नहीं है, जो इसे टिका के रख सके। जैसे जैसे धार्मिक रीतियों की खिल्ली उड़ाई जायेगी, समाज में इन रीतियों का पालन करने वालो को प्रतिगामी माना जाने लगेगा और वे इनका पालन करने में शर्म महसूस करने लगेंगे, और इस तरह सभी धार्मिक परम्पराएं / रीतियाँ चलन से बाहर हो जाएगी, और नतीजे में हिन्दू धर्म भरभरा कर ढह जाएगा।
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तो दीवाली पर आतिशबाजी करने न करने के बीच कोई लॉजिक मत ढूंढिए। आतिशबाजी सिर्फ इसीलिए कीजिये क्योंकि यह दीपावली नामक हिन्दू उत्सव की एक परम्परा है। दही हांडी या होली खेलने की वजह का विश्लेषण करने से परहेज कीजिये, इनमें सिर्फ इसीलिए हिस्सा लीजिये क्योंकि यह हिन्दू धर्म के उत्सव में धार्मिक जमाव बनाने का एक जरिया है। और रक्षाबंधन पर यह ज्ञान मत बांटिये कि सूत का एक कच्चा डोरा कैसे किसी की रक्षा कर सकता है।
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और जागरूक बुद्धिजीवियों से मेरा कहना है कि, जो नागरिक अपने धर्म की परम्पराओं का पालन कर रहे है उन्हें करने दीजिये, उन्हें रोकने का बीड़ा उठाकर खुद को हलकान मत कीजिये। यह बीड़ा पेड मीडिया ने पहले से उठा रखा है। और पेड मीडिया जितना एक घंटे में उठाकर फेंक देता है, उतना आप पूरी जिन्दगी लगाकर भी हिला नहीं पाओगे।
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(*) क्राइसिस ऑफ़ कोशंस : भारत में बहुधा पढ़े लिखे लोगो को एक मनोवैज्ञानिक बिमारी हो जाती है, जिसका नाम क्राइसिस ऑफ़ कोशंस है। कई लोग इसमें भी बारीकी से एक और बिमारी क्राइसिस ऑफ़ फेथ भी ढूंढ निकालते है। हालांकि इस बिमारी का रोगी अन्य व्यक्तियों की तरह ही आहार, निद्रा, भय मैथुन के सहारे ही जीता है, लेकिन खुद को बुद्धि के सहारे जीने वाला बुद्धिजीवी मानकर चलता है। इस रोग में व्यक्ति जागरूक दिखने एवं जागरूक करने के हल्ले में लम्बे लम्बे वक्तव्य देता है, और सामने वालो को बेवकूफ मानकर चलता है। और बहुधा इस बिमारी का अंत कॉफ़ी हाउस की बहसों में, आवारा औरतो की बाहों में, आत्महत्या में, या सरकारी नौकरी में होता है। (साभार : राग दरबारी से)
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Oct 24 2021 20:31:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

देश की राजनीती में आपकी हैसियत एक वोटर है, वोटर के अलावा कुछ नहीं। आपको जितना भी राजनैतिक ज्ञान है उसका इस्तेमाल अंत में आप सिर्फ यह तय करने में करते है / कर सकते है कि, आपको वोट किसे देना है !!
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जब आप अशिक्षित होते है या आप पढ़ लिख जाते है तब भी सिर्फ यह फैसला करते है कि वोट किसे देना है
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जब आप ज्ञानी हो जाते है तब भी सिर्फ यह फैसला करते है कि वोट किसे देना है
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यदि आप जागरूक है तब भी और जागरूक नहीं है तब भी आप सिर्फ यह फैसला करते है कि वोट किसे करना है।
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आपकी सारी राजनितिक समझ, राजनैतिक ज्ञान, राजनैतिक जागरूकता अंत में आपके लिए सिर्फ एक फैसला लेकर आती है कि -- आप वोट किसे देंगे !!
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पूरे राजनैतिक परिदृश्य में अधिकृत रूप से आपकी सिर्फ एक भूमिका है कि -- आप वोट करते है और आपकी समझ इससे तय होती है कि आप किसे वोट करते है !!
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जब एक व्यक्ति A जो कि काफी पढ़ा लिखा, ज्ञानी एवं जागरूक है और पार्टी X को वोट करता है, और एक व्यक्ति B जो कि अशिक्षित एवं अजागरूक है, और वह भी पार्टी X को वोट करता है तो राजनैतिक रूप से दोनों (A+B) की भूमिका एक ही सफ में आ जाती है।
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तो आगे से जब भी आप किसी कार्यकर्ता को सोशल मीडिया पर राजनैतिक पंचायत करते देखे तो उससे पहला प्रश्न यह अवश्य पूछे कि आगामी चुनाव में वो किसे वोट करने वाला है, और वह किस पार्टी के उम्मीदवार को वोट करने की सलाह देता है। यदि अमुक व्यक्ति इस प्रश्न का जवाब देने में आनाकानी करता है, या इस प्रश्न को टाल देता है, आगे से उसे सुनना बंद कर दें। क्योंकि वह काम की बात का जवाब देने के अलावा सभी तरह की बकवास करके आपका टाइम खराब कर रहा है।
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मैं उदाहरण से इसे और भी स्पष्ट करता हूँ :
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(1) उल्लेखनीय है कि - कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी, सपा, बसपा, शिवसेना आदि को शामिल करते हुए भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियाँ भी FDI के समर्थन में ही है। और यदि पेड मीडिया पार्टियाँ सत्ता में आती है तो यह नीति जारी रहेगी। और भारत की किसी भी पेड मीडिया पार्टी के घोषणा पत्र में आपको यह लिखा नहीं मिलेगा कि वे fdi के खिलाफ है।
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अभी मोदी साहेब धड़ाधड़ सभी क्षेत्र FDI के लिए खोल रहे है, और देश के सार्वजनिक उपक्रम (जो कि हम नागरिको की संपत्ति है) औने पौने दामो में बेच रहे है। और आपको फेसबुक पर ऐसे लाखों कार्यकर्ता मिलेंगे तो मोदी साहेब की इस "India on OLX"योजना के विरोध में लिख रहे है, और मोदी साहेब को गलिया रहे है। सोशल मीडिया पर आपको ऐसे हजारो राजीव वादी कार्यकर्ता मिलेंगे जो FDI के विरोध में है।
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लेकिन जब आप इन लोगो से पूछेंगे कि - FDI को रोकने के लिए हमें किस पार्टी को वोट करना चाहिए ? तो ये आपको सीधा कोई जवाब नहीं देंगे !! और बीजेपी का विरोध करने वाले ये लोग घूमा फिरा कर आपको उन्ही पार्टियों को वोट करने को कहेंगे जो पार्टियां fdi के समर्थन में है !!
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(2) इसी तरह भारत की किसी भी पेड मीडिया पार्टी ने लॉकडाउन और बाध्यकारी वैक्सीन का विरोध नहीं किया, और न ही आज कोई भी पार्टी इसका विरोध कर रही है। लेकिन न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ताओ से आप पूछेंगे कि न्यू वर्ल्ड ऑर्डर को रोकने के लिए आगामी चुनावों में किस पार्टी को वोट करना चाहिए तो वे कोई सीधा जवाब नहीं देंगे। वे घूमा फिरा कर आपको उन्ही पार्टियों को वोट करने कोई कहेंगे जो पार्टियाँ न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के समर्थन में है।
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राजनैतिक ज्ञान बाँटने वाले ये सभी कार्यकर्ता किसी न किसी पेड मीडिया पार्टी से सम्बद्ध होते है और इनकी मंशा यही होती है कि सरकार की गलत नीतियों के प्रति आपके असंतोष को तिरोहित करके यह सुनिश्चित किया जा सके कि आप पेड मीडिया पार्टियों को ही वोट करते रहे। और जब तक आप पड़ी मीडिया पार्टियो को वोट करते रहेंगे पेड मीडिया पार्टियों की ताकत बनी रहेगी।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Oct 24 2021 20:56:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A) राईट टू रिकॉल पार्टी देश की एक मात्र पार्टी है जिसने विदेशी निवेश (FDI) को रोकने के लिए #WoicRrp कानूनी ड्राफ्ट दिया है, और हम स्पष्ट रूप से WTO समझौता रद्द करने के समर्थन में है। बीजेपी,कोंग्रेस, आपा को शामिल करते हुए भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियां FDI जनित कथित विकास के स्पष्ट रूप से समर्थन में है।
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यदि आप भारत की सभी राष्ट्रिय संपत्तियां विदेशियों को बेचने के समर्थन में है तो पेड मीडिया पार्टियों (बीजेपी+कोंग्रेस+आपा) को वोट करके उनकी ताकत में इजाफा करें। और यदि आप अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माताओ के बढ़ते नियंत्रण को खतरे के रूप में देखते है तो राईट टू रिकॉल पार्टी का समर्थन करें।
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(B) भारत की सभी पड़ी मीडिया पार्टियाँ FDI के समर्थन में है और इस तरह से ये सभी पार्टियाँ एवं इनके शीर्ष नेता भारत में मिशनरीज के विस्तार के लिए सक्रीय रूप से कार्य कर रहे है।
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यदि आप पूरे भारत को ईसाई देश में कन्वर्ट करना चाहते है तो पेड मीडिया पार्टियों (बीजेपी+कोंग्रेस+आपा) को वोट करें। और यदि आप भारत में मिशनरीज का विस्तार रोकना चाहते है तो राईट टू रिकॉल पार्टी का समर्थन करें।
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(C) भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियाँ कथित न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के समर्थन में है और सभी पेड मीडिया पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने बाध्यकारी लॉकडाउन, बाध्यकारी वैक्सीन का समर्थन किया है। सिर्फ राईट टू रिकॉल पार्टी एक मात्र पार्टी है जिसने पहले दिन से लॉकडाउन एवं बाध्यकारी वैक्सीन का विरोध किया है।
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यदि आप कथित न्यू वर्ल्ड ऑर्डर को भारत में लागू कराना चाहते है तो न्यू वर्ल्ड ऑर्डर पार्टियों (बीजेपी+कोंग्रेस+आपा) को वोट करें, और यदि आप NWO को रोकना चाहते है तो राईट टू रिकॉल पार्टी का समर्थन करें।
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राईट टू रिकॉल पार्टी अपंजीकृत रूप से पिछले 20 वर्षो से काम कर रही है, और देश की एक मात्र राष्ट्रिय पार्टी है जिसने लगभग देश की सभी समस्याओं के समाधान के लिए लिखित में 31 क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है।
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आप राईट टू रिकॉल पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कदम उठा सकते है :
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(1) सबसे महत्त्वपूर्ण कदम है चुनाव लड़ना। अत: यदि आप कर सकते है राईट टू रिकॉल पार्टी की और से चुनावी उम्मीदवार बने। आपके लोकसभा क्षेत्र में जो भी आगामी चुनाव है (पार्षद , सरपंच, विधायक, सांसद) उसमें आप चुनावों में हिस्सा ले। चुनावों में भाग लेना एक मात्र तरीका है, जिससे नागरिको को हम पेड मीडिया पार्टियों का विकल्प दे सकते है। जब तक तक हम चुनावों में नहीं आते तब तक कोई बदलाव नहीं आएगा।
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(2) दूसरा महत्त्वपूर्ण काम है, प्रधानमंत्री को खुला निर्देश पत्र भेजना। प्रत्येक महीने की 5 तारीख को प्रधानमंत्री को अमुक कानूनों को गेजेट में छापने का खुला निर्देश पत्र भेजिए जो राईट टू रिकॉल पार्टी ने प्रस्तावित किये है। इससे मौजूदा पेड मीडिया पार्टियों के शीर्ष नेताओं पर उन कानूनों का गेजेट में छापने का दबाव बनेगा, जिन कानूनों को लागू करवाना हमारा उद्देश्य है।
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राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित सभी कानूनों के ड्राफ्ट देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल पिक को क्लिक करे और डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक पर जाए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Oct 25 2021 09:33:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Pawan Jury BhilwaraRj:

## [**पटाखे जलाना हमारी संस्कृति से जुड़ा है किन्तु पर्यावरण की खातिर क्या आप इनका बहिष्कार करेंगे?**](<https://hi.quora.com/%E0%A4%AA%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF>;)

**.**

कृपया कोई ज्यादा बेहतर कारण ढूंढ कर लाइए। क्योंकि दीवाली की आतिशबाजी का पर्यावरण से कोई लेना देना नहीं है। निचे मैंने इससे सम्बंधित कुछ बिंदु दिए है :

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खंड - अ
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**(1)** आतिशबाजी से हुआ प्रदुषण सिर्फ 3 घंटे के अंदर वातावरण से पूरी तरह गायब हो जाता है !!! ऐसा दिल्ली के रोहिणी स्टेशन पर लगे प्रदूषण मापक सिस्टम के आंकड़ों से सिद्ध होता है। 2013 में आई आई टी कानपुर ने यह अध्ययन किया था !! उन्होंने कई सेम्पल इकट्ठे करके यह जांचा और पाया कि दिवाली के दिन सुबह 4 बजे तक PM2.5 का स्तर फिर से 300 से 375 micrograms तक आ जाता है, जो कि दिल्ली के नियमित दिनों के लिए प्रदुषण का औसत स्तर है। लिंक देखें -

[Firecrackers ban in Delhi-NCR: Not just Diwali, what’s SC plan for other periods?](<https://www.financialexpress.com/india-news/firecrackers-ban-delhi-ncr-not-just-diwali-whats-sc-plan-periods/889207/?fbclid=IwAR3XMKGfY7vgY4lnPab6HLIoYn7uesurOHeQqInXgWG14I_3yrFJSW8XK4k>;)

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**(2)** 2003 में दिल्ली नगर निगम एवं स्वास्थ्य मंत्रालय नागरिको को आतिशबाजी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था !!!

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**वजह ?**

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उन्होंने पाया कि घनघोर आतिशबाजी डेंगू के मच्छरों का नाश कर देती है। और इस लिहाज से आतिशबाजी जरुरी है। आतिशबाजी का धुंवा वातावरण की नमी सोख लेता है और धुंवे के कारण मच्छरों की एक बड़ी आबादी नष्ट हो जाती है। नतीजा : इससे नए मच्छरों के पनपने के अवसर भी कम हो जाते है !! पेड द हिन्दू का लिंक देखें -

[Say yes to fire-crackers to control dengue](<https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/say-yes-to-fire-crackers-to-control-dengue/article27803956.ece>;)

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2006 में पेड टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ने विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट किया कि दिवाली की आतिशबाजी मच्छरों से निपटने के लिए प्रभावी उपाय है। पेड टाइम्स ऑफ़ इण्डिया का लिंक -

[Cracker cure | Delhi News - Times of India](<https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Cracker-cure/articleshow/2181064.cms?fbclid=IwAR3bXcmwV7tnLUTJ0Ns-GMM42wZYsC_91bSFtCYz5nv3WOqQ2EmgVVXa3gc>;)

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उल्लेखनीय है कि पटाखों से जो धुंआ और गर्मी पैदा होती है वह मच्छरों के लिए तो हानिकारक है लेकिन इंसान के लिए नहीं। क्योंकि आतिशबाजी का धुंआ वातावरण में सिर्फ 3 घंटे ही टिका रह सकता है। सांय 6 बजे से आतिशबाजी शुरू होती है और 11 बजे तक यह बड़े पैमाने पर चलती रहती है। इन पांच घंटो में मच्छर मर जाते है और 2 बजे तक प्रदूषण का स्तर फिर से वही हो जाता है जैसा कि आतिशबाजी से पहले था !!!

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दुसरे शब्दों में, दिल्ली में पिछले 15 सालो से जो आतिशबाजी के खिलाफ प्रचार चलाया जा रहा है, उसकी वजह से डेंगू एवं अन्य मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया लगता है। और अगर ऐसा है तो मेरे विचार में इन अतिरिक्त मौतों के लिए जिम्मेदार वे लोग है जो मिशनरीज द्वारा नियंत्रित पेड मीडिया की चपेट में आकर दिवाली की आतिशबाजी के खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे है !!!

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बहरहाल, हमें किसी विश्वनीय संस्था द्वारा इस बारे में व्यवस्थित तकनिकी अध्ययन करवाए जाने की जरूरत है, ताकि यह बात एकदम साफ़ तौर पर और भी निर्विवाद रूप से निकलकर स्थापित हो सके कि दिवाली की आतिशबाजी मच्छरो की बड़ी आबादी को नष्ट कर देती है। और इसके लिए यह आवश्यक है कि दीवाली के इन 6 घंटो के दौरान एकदम भयंकर वाली आतिशबाजी की जाए।

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यदि मच्छरों पर दिवाली की आतिशबाजी का प्रतिकूल प्रभाव स्पष्ट हो जाता है तो सरकार को देश व्यापी प्रचार अभियान चलाना चाहिए जिससे नागरिक दिवाली पर आतिशबाजी करने को प्रोत्साहित हो !!

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**(3)** दिवाली पर प्रदूषण बढ़ जाता है क्योंकि ज्यादातर लोग खरीददारी करने के लिए वाहन लेकर निकलते है। माल की खपत ज्यादा होने से ट्रको का परिवहन भी बढ़ता है और और इस वजह से भी प्रदुषण बढ़ जाता है। दूसरे शब्दों में , दिवाली पर प्रदुषण बढ़ने की एक बड़ी वजह ट्रेफिक का बढ़ना भी है, न की आतिशबाजी।

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**(4) **इसी समय किसान अपनी पराली भी जलाते है और फूस जलाने से भी प्रदुषण बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए पिछले साल दिवाली के अगले दिन सुबह 5 बजे दिल्ली और लाहौर में प्रदुषण का स्तर एक समान था !!! क्यों ? क्योंकि दोनों इलाको में किसान फूस जला रहे थे। और फूस जलाने से भी प्रदुषण होता है !

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खंड - ब
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**उत्सवों में भागीदारी कम होने से धार्मिक जमाव टूटेगा और हिन्दू धर्म के विघटन में तेजी आएगी।**

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हिन्दू धर्म का प्रशासन बेहद कमजोर है और इसे दुरुस्त नहीं किया गया तो अगले 50 वर्षो में इसके अनुयायियों की संख्या लगभग आधी रह जायेगी। यह शान्ति काल की स्थिति है। यदि इस दौरान भारत को युद्ध का सामना करना पड़ जाता है तो अगले 50 वर्षो में हिन्दू धर्म पूरी तरह से लुप्त होने की कगार पर जा सकता है।

* ईसाई धर्म लगातार विस्तार कर रहा है , क्योंकि उनके पास *जूरी सिस्टम* है।
* इस्लाम ने भी लगातार विस्तार किया है क्योंकि उनके पास हर सप्ताह *एकत्र *होने की प्रक्रिया है।
* सिक्ख धर्म अब तक टिका हुआ है क्योंकि उनके पास गुरुद्वारा प्रमुख को चुनने की प्रक्रिया है। ( हालांकि अब यह कमजोर हो रहा है )

हिन्दू धर्म के प्रशासन में इनमे से कुछ भी नहीं है, और न ही ऐसी कोई प्रक्रिया है जो इनकी कमी को पूरा करे। इसीलिए वह लगातार जमीन एवं अनुयायी खो रहा है। लेकिन फिर भी इसके विघटन की दर धीमी है। आखिर , हिन्दू धर्म का क्षरण उतनी तेजी से क्यों नहीं हो रहा है, जितनी तेजी से होना चाहिये ?

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मेरे विचार में इसकी 2 बड़ी वजहें है :

1. हिन्दू धर्म को अब तक किसी ताकतवर प्रतिस्पर्धी का सामना नहीं करना पड़ा और इस वजह से विघटन की दर धीमी रही। किन्तु अब एफडीआई के माध्यम से मिशनरीज की घुसपेठ भारत में तेजी से बढ़ रही है।
1. उत्सवो पर धार्मिक जमाव। किन्तु अब इसे तोड़ने के निरंतर प्रयास किये जा रहे।

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हिन्दू धर्म में साल भर बेतहाशा त्यौहार आते है और इनमें से ज्यादातर त्योहारों में अध्यात्म / भक्ति के साथ साथ मनोरंजन का तत्व भी शामिल है। मनोरंजन का तत्व होने से सभी तबके के सभी आयु वर्ग के लोग इन उत्सवो में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है। इस कवायद से उत्सवो पर भारी संख्या में धार्मिक जमाव देखने को मिलता है और धर्म के प्रति जुड़ाव बना रहता है।

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**उदाहरण के लिए ,** दिवाली पर आतिशबाजी, मिठाई और नए कपडे का चलन बच्चो एवं युवाओ को आकर्षित करता है, जबकि गृहणियां साफ़ सफाई रंग रोगन में व्यस्त हो जाती है। बुजुर्गो एवं वरिष्ठ जनों के लिए इसमें लक्ष्मी पूजा। फिर धनिकों के लिए जुआ भी है। सामुदायिकता बढ़ाने के लिए अगले दिन "राम राम"। कुल मिलाकर दिवाली सभी आयु वर्ग के लोगो को खींच लेती है, और लोग इसमें उत्साह के साथ भाग लेते है। किन्तु यहाँ मनोरंजन और रोमांच का मुख्य तत्व आतिशबाजी है जो दीवाली को हिट बनाता है। इसमें सामूहिक गतिविधि है।

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इसी तरह होली पर सिर्फ होलिका दहन उत्साह बनाये नहीं रख सकता। रंग, गुलाल खेलना और ढपली पर फाग गाना वह तत्त्व है जो लोगो की भागीदारी बढाता है। फिर जन्माष्टमी पर मनोरंजन के लिए दही हांड़ी प्रतियोगिता एवं झांकियां है। दुर्गा पूजा एवं गणपति स्थापना पर 9 दिनों तक नाच-गान। और पूजा तो खैर है ही। तो हिन्दू धर्म के ज्यादातर उत्सवो में मनोरंजन के तत्व डाले गए है, ताकि इनमे नागरिको का उत्साह बना रहे। विभिन्न उत्सवो जैसे दुर्गा पूजा / महाशिवरात्रि / कुम्भ आदि पर मेले इस धार्मिक जमाव में और भी वृद्धि कर देते है।

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तो यदि प्रतिस्पर्धी धर्म भारत में हिन्दू धर्म को और भी कमजोर करना चाहते है तो उन्हें हिन्दू धर्म के त्योहारों पर होने वाले धार्मिक जमाव को तोड़ना होगा। **वे** ऐसा कैसे कर रहे है ?

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1. प्रदुषण का हवाला देकर वे आतिशबाजी का विरोध करते है और अन्य लोगो को भी दिवाली पर आतिशबाजी का बहिष्कार करने के लिए प्रेरित करते है !! इससे सामूहिकता घटती है, और रोमांच चला जाता है।
1. अगले दौर में वे यह तर्क लेकर आयेंगे कि, देश में बिजली की कमी है और कई गरीब लोगो तक बिजली नहीं पहुँच रही है , किन्तु दिवाली पर हम महज सजावट के लिए इतनी बिजली बर्बाद कर दे रहे है, अत: हमें सोच समझकर बिजली खर्च करनी चाहिए !!
1. फिर वे इस तरह का अभियान लायेंगे कि दिवाली पर दीपक जलाने से तेल की घी-तेल की हानि हो रही है। ज्यादा से ज्यादा एक-दो दीपक जलाए और बाकी तेल-घी किसी गरीब को दान कर दें !!!
1. फिर वे होली पर आयेंगे और होली को पानी की बर्बादी से जोड़ देंगे। लोगो को समझायेंगे कि होली खेलने में करोडो गेलन पानी व्यर्थ हो रहा है और इस बर्बादी के कारण लोग प्यासे मर रहे है !!!
1. जन्माष्टमी पर वे दही हांडी की उंचाई घटाने की मुहीम छेड़ देंगे। वे लोगो को समझाएंगे कि जन्माष्टमी पर चुपचाप घर पर पंजरी बना कर खा ले। दही हांडी जैसे उत्सवो में हिस्सा न ले। क्योंकि इससे चोट आती है। हांडी की उंचाई घटने से रोमांच चला जाता है, और धार्मिक जमाव टूटता है।
1. गरबा पर वे आपको बताएँगे कि इससे किस प्रकार का जानलेवा ध्वनी प्रदुषण होता है। यदि फिर भी लोग इकट्ठे होने से न माने तो उन्हें साइलेंट गरबा करने की सलाह देंगे। साइलेंट गरबा में प्रत्येक खिलाडी कान में हेडफोन से गाना सुनता रहता है और नाचता रहता है। इस तरह पंडाल पूरी तरह से साइलेंट रहता है। उत्सवों के लिहाज से यह **सन्नाटा** है, लेकिन पेड मीडिया की अफीम चाटने वाले इसे **शांति** बताते है।
1. शिवरात्रि आने पर वे आपको कहेंगे की शिवलिंग पर दूध चढाने की जगह यह दूध किसी बच्चे को पिला दो। इससे व्यक्ति के पास शिवरात्रि पर मंदिर जाने की वजह खत्म हो जायेगी और धार्मिक जमाव एवं मेला टूटेगा।
1. अंतिम संस्कार का वे यह कह कर विरोध करेंगे कि इससे लकड़ी की हानि और प्रदुषण हो रहा है !! अत: शव को बिजली से जला दो।

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ये छोटे में लिखा है। उनके दिमाग काफी उर्वर है। वे सभी त्योहारों में ऐसे ढेर सारे बिंदु खोजकर ला सकते है, जिससे उत्सवो को सुट्ट किया जा सके। यहां तक कि वे करणी माता मंदिर ( चूहों वाली माता ) में प्रसाद, नारियल, ध्वजा, धूपबत्ती आदि चढाने पर भी रोक लगा चुके है। वजह - इससे मंदिर में प्रदुषण होता है !!

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साइलेंट गरबा, आतिशबाजी मुक्त दिवाली, जल विहीन होली, दही हांडी मुक्त जन्माष्टमी के बाद अब उन्होंने एक नयी चीज पेश की है - *रावण बर्निंग विद कोल्ड फायर*** ***!!*

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रावण दहन के कारण होने वाले धूम्र प्रदुषण से बचने के लिए पिछले वर्ष उदयपुर नगर निगम ने दशहरे पर धुआं मुक्त आतिशबाजी करने का फैसला किया !! उम्मीद है कि जल्दी ही हमें साइलेंट आतिशबाजी ( विशेष तौर पर दशहरे और दिवाली पर ) भी देखने को मिलेगी !!!

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किन्तु , यदि आप हिन्दू धर्म की परम्पराओं में मानते है और इन्हें जारी रखना चाहते है तो दिवाली पर आतिशबाजी करें , होली पर रंग खेले, शिवरात्रि पर मेले में भाग ले , साइलेंट गरबा का विरोध करे और उन लोगो का भी विरोध करे जो "पर्यावरण के नाम पर" हिन्दू त्योहारों की परम्पराओं पर रोक लगाना चाहते है। यह हर तरीके से साबित है कि दिवाली पर आतिशबाजी का प्रदुषण से कोई लेना देना नहीं है। आतशबाजी से सिर्फ एक दिन प्रदुषण होता है और उस एक दिन भी आतिशबाजी का प्रदुषण में हिस्सा सिर्फ 6% है !!! और यह प्रदुषण में अगले 8 घंटे में वातावरण से पूरी तरह से तिरोहित हो जाता है।

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कुल मिलाकर सयानो की बातों में न आये और दिवाली पर खुद भी आतिशबाजी करें, और दुसरो को भी प्रेरित करे। लेकिन आतिशबाजी करते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखे। सूती कपडे पहने और यदि उपलब्ध हो तो प्लेन ग्लास का चश्मा लगा ले। अनार, फुलझड़ी , चकरी आदि सुरक्षित पटाके चलाये और मिर्ची बम, रोकेट आदि पटाको की अवहेलना करे। तथा बच्चो को अपने पर्यवेक्षण में आतिशबाजी करवाएं।

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बहरहाल , जब से पेड मीडिया ने दिवाली की आतिशबाजी को प्रदुषण से कनेक्ट करने में पैसा फूंकना शुरू किया है, तब से मैंने भी आतिशबाजी का अपना बजट बढ़ा दिया है। मैं आतिशबाजी भी करता हूँ, और इसका चित्र सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करता हूँ। कृपया आप भी दीवाली की आतिशबाजी के चित्र सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इसे प्रदर्शित करें ताकि ताकि अन्य नागरिक भी आतिशबाजी करने के लिए प्रेरित हो।

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*आतिशबाजी युक्त दिवाली की शुभकामनाएं।*

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खंड - स
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**संघ=बीजेपी के मंत्रियों का आतिशबाजी पर स्टेंड :**

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संघ के नेता और मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने पिछले साल 3 हिन्दू उत्सव-विरोधी ट्वीट किये थे, जिन्हें अब उन्होंने डिलीट कर दिया है !!! एक कार्यकर्ता ने इन ट्वीट्स को सेव कर लिया था। डिलीट किये गए ट्वीट के लिंक और विवरण :

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(1)
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[<https://twitter.com/drharshvardh>;...](<https://twitter.com/drharshvardhan/status/917358020304060416>;)

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> *Welcome decision by the SC on ban of fire crackers sales in NCR. Comes as a huge support for my #GreenDiwali initiative for our environment
बहुत ख़ुशी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में दीवाली पर आतिशबाजी बेचने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इस फैसले से मेरे #GreenDiwali मिशन को भारी समर्थन मिलेगा !!
*

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(2)

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[<https://twitter.com/drharshvardh>;...](<https://twitter.com/drharshvardhan/status/917358448748126213>;)

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> *And of course, we must spare a thought for poor birds and animals who spend a terrible evening scared by all the fire & noise #GreenDiwali "
और हाँ, हमें उन निरीह पक्षियों एवं जानवरो की फ़िक्र भी करनी चाहिए जो आग और धुएं के कारण दिवाली की शाम काफी सदमे में बिताते है, #GreenDiwali !
*

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(3)

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[<https://twitter.com/drharshvardh>;...](<https://twitter.com/drharshvardhan/status/917358573604048896>;)

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> *Instead of spending thousands on crackers, lets buy food & sweets and share it with poor/underprivileged, make it an awesome #GreenDiwali "
आतिशबाजी पर हजारो रूपये फूंकने की जगह हमें उन पैसो से मिठाइयाँ व भोजन खरीद कर गरीबों में बाँट देनी चाहिए। तभी सच्चे अर्थो में दिवाली होगी, #GreenDiwali !
*

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ये तीनो ट्वीट अब गायब है !!

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शर्म की बात है कि एक मंत्री ट्वीट करता है और फिर उन्हें डिलीट कर देता है !! यहाँ तक कि मेरे जैसे छोटे और पार्ट टाइम एक्टिविस्ट को भी इतना शउर है कि - यदि मैंने सार्वजनिक रूप से कुछ गलत लिखा है तो, या तो मुझे इसके लिए खेद प्रकट करना चाहिए या फिर इसे सम्पादित करके ठीक करना चाहिए। किन्तु रिकॉर्ड को मिटा देना किसी भी तरीके से ईमानदार व्यवहार नहीं है।

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दरअसल डॉक्टर हर्षवर्धन को आतिशबाजी से कोई समस्या नहीं है। लेकिन उन्हें दिवाली पर की जाने वाली आतिशबाजी से **ख़ास एलर्जी** है। डॉक्टर साहेब दिवाली पर आतिशबाजी न करने की मुहीम चलाते है, लेकिन बीजेपी के चुनाव जीतने पर यही हर्षवर्धन कार्यकर्ताओ से कहते है कि — *आतिशबाजी करो !!*

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(i) यहाँ आप देख सकते है कि हर्षवर्धन ने दीपावली पर आतिशबाजी न करने की अपील की - [Health minister Harsh Vardhan advocates for a silent Diwali in Capital](<https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/health-minister-harsh-vardhan-advocates-for-a-silent-diwali-in-capital/articleshow/44843427.cms?fbclid=IwAR1kcNk6NTozJqWsDWinnedvbMHT-JXY6GTemAhbcV2fJAkSC79Bm7ivID0&intenttarget=no>;)

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(ii) हर्षवर्धन यह समझाते हुए कि किस तरह सिर्फ दीपावली पर आतिशबाजी करने से स्वास्थ्य को नुक्सान होता है : [Union Health Minister on dangers of Diwali Cracker](<https://www.youtube.com/watch?v=ON8rNRPL2rQ>;)

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(iii) और चुनाव जीतने पर यही हर्षवर्धन खुद खड़े होकर आतिशबाजी करवा रहे है - [Celebrations on Narendra Modi arrival, Harshvardhan dances - Live Video](<https://www.youtube.com/watch?v=MMkXD76OidE>;)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Oct 25 2021 17:07:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जान लेना जुर्म है, और सही समय पर जान लेना राजनीती – सुभाष नागरे, (हिन्दी फीचर फिल्म सरकार राज का एक चरित्र)
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इसी तर्ज पर ज्यादा महत्त्व इस बात का नहीं होता कि पेड मीडिया द्वारा उठाया जाने वाला कोई मुद्दा सही / सच्चा है या गलत / झूठा है। राजनीती में महत्त्व इस बात का होता है कि, किस समय (Timing) पर किसी मुद्दे पर उठाया जा रहा है।
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क्योंकि ऐसे हजारों मुद्दे है जो बरसों से बने हुए है, और उनमें से ज्यादातर सच्चे है। पर चूंकि उन के प्रचार पर निवेश नहीं किया गया अत: उन्हें मीडिया द्वारा उठाया नहीं गया। और पेड मीडिया किसी मुद्दे को सिर्फ तब ही प्रमोट करता है, जब उस पर निवेश किया जाता है। और निवेश करने वाले इसके लिए टाइमिंग का चयन करते है।
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ठीक यही स्थिति इतिहास के साथ है। इतिहास की पेड पुस्तकों में ऐसा बहुत कुछ है, जो सच नहीं है। किन्तु उस सच को पेड मीडिया द्वारा एक्सपोज नहीं किया जाता। वे किसी सच को सिर्फ तब एक्सपोज करते है जब एक्सपोज करने की टाइमिंग उनके पक्ष में हो। और इस तरह ऐसा सच वर्तमान में समुदाय को नुकसान एवं पेड मीडिया को फायदा देता है।
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तो राजनीती में सच हमेशा ही लाभप्रद नहीं होता। ऐसे बहुत सारे सच हो सकते है जिनका सामने आना विभाजनकारी हो सकता है। और कार्यकर्ताओ को यह देखना चाहिए कि पेड मीडिया छुपाए गए किसी सच को क्यों सामने ला रहा है।
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Because sometimes truth is not good enough. Sometimes people deserve more…sometimes peoples deserves to have their faiths rewarded – Batman (Dark Knight)
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Oct 26 2021 10:34:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आवश्यक सूचना : धनवापसी पासबुक क़ानून में एक अतिरिक्त धारा (धारा नं 21) जोड़ी गयी है।
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यह धारा भारत सरकार के स्वामित्व में मौजूद सभी सार्वजनिक उपक्रमों का मालिक भारत के नागरिको को घोषित करती है। इस धारा के गेजेट में आने के बाद सभी PSUs (जैसे कोल इंडिया, एयर इण्डिया, ओएनजीसी आदि) से होने वाले मुनाफे को नागरिको में वितरित किया जाएगा।
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और यदि सरकार किसी PSUs को बेचती है तो ऐसे बेचान से प्राप्त होने वाली राशि (शुद्ध लाभ) भी देश के नागरिको में वितरित की जायेगी। वितरण का फार्मूला वही रहेगा जो खनिज रोयल्टी के बारे में बताया गया है।
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यदि सभी PSUs सकल रूप से किसी वर्ष लाभ की जगह घाटा बनाते है तो यह हानि अग्रेषित (Carry Forward) हो जाएगी। और इसे अगले वर्ष के शुद्ध लाभ में समायोजित किया जाएगा।
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------धारा 21 का प्रारंभ -----
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(21) केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले सभी सार्वजनिक उपक्रमो (excluding RBI) को होने वाले शुद्ध लाभ (इसमें अमुक PSUs के स्वामित्व वाले सभी शेयर, बांड आदि से उपार्जित आय भी शामिल है) का 67.7% हिस्सा भारतीय नागरिको में लगभग बराबर रूप से वितरित किया जायेगा। वितरण की प्रकिया एवं तरीका खनिज रॉयल्टी वाले के वितरण के सदृश ही रहेगा।
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शुद्ध लाभ से यहाँ आशय है : सभी PSUs द्वारा कमाया गया लाभ – (minus) सभी PSUs द्वारा उपार्जित हानि + पूंजीगत विक्रय से उपार्जित राशि – (minus) पूंजीगत निवेश एवं व्यय। धनराशी की गणना नकद प्रवाह (on cash flow basis) के आधार पर की जाएगी, संभूति के आधार (not on accrual basis) पर नहीं।
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टिप्पणी : उपरोक्त वर्णित अनुसार राज्य सरकारें, नगर, जिला, तहसील एवं ग्राम सरकारें भी अपने स्वामित्व वाले PSUs से प्राप्त होने वाले शुद्ध लाभ का 66.7% हिस्सा अपने राज्य / जिले / नगर / तहसील / ग्राम के निवासियों (domiciles) में वितरित कर सकती है।
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------धारा 21 का समापन ----
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Oct 26 2021 18:12:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Pawan Jury BhilwaraRj:

## **[क्या मैच फिक्सिंग को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता ?](<https://hi.quora.com/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%9A-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80>;)**

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यदि मैच फिक्सिंग को कानूनी कर दिया जाए तो धीरे धीरे मैच फिक्सिंग कम होती चली जायेगी, और एक बिंदु के बाद यह पूरी तरह से बंद भी हो सकती है।

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कुछ चीजे ऐसी होती है, जिनका धंधा प्रतिबन्ध पर ही टिका होता है। शराब, तम्बाकू, अफीम, गांजा, जुआ, वैश्यावृति और मैच फिक्सिंग इसी तरह की चीजे है। इन्हें प्रतिबंधो से कभी भी रोका नहीं जा सकता। तो सरकारें इन धंधो से हफ्ता वसूलने के लिए प्रतिबन्ध लगाने का नाटक करती है। प्रतिबन्ध लगाने के बाद अधिकारी-नेता-जज आदि इस धंधे के कारोबारियों एवं उपभोक्ताओं से हफ्ता लेना शुरू कर देते है।
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सरकारें डाकू गब्बर सिंह की तरह लोगो को लूटने के लिए बंदूक का इस्तेमाल नहीं करती है। वे इसके लिए कानूनों का इस्तेमाल करते है। और क्रिकेट में काफी पैसा है।

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**समाधान : **मेरे विचार में सरकार को मैच फिक्सिंग को कानूनी करने के लिए गेजेट में निचे दी गयी इबारत छापनी चाहिए :
## *.*
## *यदि कोई व्यक्ति यह आरोप लगाता है कि अमुक मैच फ़िक्स था, तो इस आरोप पर कोई FIR या शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी। यदि कोई खिलाड़ी मैच फिक्सिंग करता है तो यह पूरी तरह से कानूनी होगा, और उसे भारत के किसी भी न्यायालय या सरकारी संस्था द्वारा दण्डित नहीं किया जा सकेगा।*

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**इससे क्या बदलाव आएगा ?**

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1. जब यह तय हो जाएगा कि अब मैच फिक्सिंग को आरोप नहीं बनाया जा सकता तो क्रिकेट पर पैसा लगाने वालो को यह सही शुबहा होने लगेगा कि ज्यादातर मैच फिक्स है, और मैंने यदि पैसा लगाया तो यह डूब जाएगा। इससे सट्टा लगाने वालो की संख्या में कमी आएगी।
1. सट्टा लगाने वालो की संख्या गिरने से सटोरियों ( आयोजको ) की कमाई गिरने लगेगी, और वे क्रिकेट को प्रोत्साहित करने के लिए कम पैसा खर्च कर सकेंगे।
1. पैसे का बहाव कम होने से कम लोग क्रिकेट देखेंगे, और इससे दर्शक संख्या और भी घट जायेगी। दर्शक घटने से खिलाड़ी सस्ते में बिकने लगेंगे, और फिक्सिंग के लिए टके टके पर मिलने लग जायेंगे। और इससे फिक्सिंग में मुनाफा नहीं रह जाएगा।

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दुसरे शब्दों में जल्दी ही युवा वर्ग इस तथ्य से सूचित हो जाएगा कि सभी खिलाड़ी फिक्सर है। क्रिकेट के आयोजक पहले दौर में यह साबित करने की कोशिशे करेंगे कि हम सभी लोग पूरी तरह ईमानदार है और किसी भी मैच में कोई धोखा धड़ी नहीं कर रहे है। किन्तु युवा उनकी बात सुनना बंद कर देंगे। दुसरे शब्दों में जल्दी ही यह बात कॉमन नोलेज में आ जायेगी कि सभी मैच फिक्स होते है।

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यह 1999 के आस पास की बात है जब क्रोनिये ने कैमरों के सामने स्वीकार किया था, कि उसने मैच फिक्सिंग की थी। उसने लगभग दर्जन भर खिलाडियों के भी नाम बताए थे जिन्होंने पैसे लिए थे।

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तब क्रोनिये की विश्वसनीयता बहुत ज्यादा थी। वाकयी में काफी ज्यादा। इस स्केंडल में लगभग आधा दर्जन भारतीय खिलाड़ी भी चपेट में आए थे। लेकिन भारत में क्रिकेट को बचाने के लिए पेप्सी रत्न सचिन को बचाना जरुरी था, और वे उसे निकाल भी ले गए। बहरहाल, मेरा मानना है कि, यदि हमें फिक्सिंग रोकनी है तो इसे कानूनी कर देना चाहिए।

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क्रिकेट पर और विवरण आप यहाँ भी पढ़ सकते है - [<https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/posts/1512807665758972/>;](<https://hi.quora.com/%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A8/answers/115654760>;)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Oct 26 2021 18:33:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

old post (2018)

Pawan Jury BhilwaraRj:

**सचिन तेंडुलकर को भारत रत्न देने के पीछे क्या कारण थे?**

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शीतल पेय कम्पनियां एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत में क्रिकेट को बढ़ावा देना चाहती है ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र विज्ञान-गणित विषयों में आपने आप को खपाने की जगह क्रिकेट के मैदानों की और दौड़ लगाए। अत: क्रिकेट को प्रमोट करने के लिए सचिन को भारत रत्न दिया गया। लेकिन सचिन ने जिस तरह से यह अवार्ड लपका उसने इस पुरस्कार की रही सही गरिमा भी गिरा दी।
> सब के जैसे होकर भी बाइज़्ज़त है बस्ती में,
> कुछ है लोगों का सीधापन कुछ है अपनी एय्यारी भी

1. तब भारत रत्न खेल की श्रेणी में नही दिया जाता था । सचिन चाहते थे कि चूँकि वे भगवान है अतः इस तरह के नियम उन पर लागू नही होने चाहिए । अतः सचिन को भारत रत्न देने के लिए रातों रात इस पुरस्कार में खेल की श्रेणी को लागू किया गया ।
1. सचिन अपने सन्यास समारोह को भव्य एवं यादगार बना देना चाहते थे । अतः उन्होंने तत्काल रूप से कोंग्रेस ज्वाइन की और खुले आम भारत रत्न ख़रीद लिया। सचिन को भारत रत्न वैसे भी मिल जाता था, लेकिन वे इंतज़ार नही करना चाहते थे। उन्होंने भारत रत्न लपकने के लिए पूरे देश के सामने इस पुरस्कार की रही सही गरिमा को भी नष्ट कर दिया। उन्होंने यह पुरस्कार बेहद अशोभनिय ढंग से झपटा , जिसकी कोई ज़रूरत नही थी।
1. सचिन को फ़रारी कम्पनी ने २००२ में एक कार गिफ़्ट की थी । इम्पोर्टेड कार पर सचिन को १ करोड़ इम्पोर्ट ड्यूटी चुकानी थी । पर सचिन का मानना था कि वे भगवान है अतः उन्हें इसमें छूट मिलनी चाहिए । सरकार ने उन्हें बताया कि ड्यूटी तब माफ़ की जाती है जब यह पुरस्कार आपको किसी प्रतियोगिता में मिला हो । लेकिन यह एक प्राइवेट गिफ़्ट है अतः आपको ड्यूटी चुकानी होगी । सचिन ने तब वित्त मंत्री मेजर जसवंत सिंह से कहा कि शायद आप टीवी बराबर नही देखते है, अतः आपको यह पता नही है कि मैं भगवान हूँ । यदि मौजूदा नियमों के तहत ड्यूटी माफ़ नही हो सकती तो आप अपने नियम बदलिए ।
1. जसवंत सिंह जी ने तब क़स्टम एक्ट में एक संशोधन [ 25 (3) ] तुरंत किया, जिसके अनुसार यदि सरकार चाहे तो किसी विशेष मामले को देखते हुए पुरस्कार पर ड्यूटी की छूट देने के सम्बंध में अपने विवेक से फ़ैसला ले सकती है । इस तरह बिकाऊ सचिन तेंदुलकर को कर दाताओ से वसूले गए पैसे में से १ करोड़ १३ लाख की राहत दी गयी । यह राहत उन्हें इसीलिए नही दी गयी क्योंकि उनके पास ड्यूटी चुकाने के पैसे नही थे, बल्कि इसीलिए दी गयी क्योंकि वे भगवान है, अतः नियमो से ऊपर है । और सचिन ने उपहार में मिली इस कार का क्या किया ? उन्होंने कुछ वर्षों बाद इसे सूरत के एक व्यापारी को बेच दिया !
1. कपिल को भी इसी तरह से दो कारे गिफ़्ट में मिली थी, पर उन्हें सरकार ने एक धेले की भी छूट नही दी । उन्हें ड्यूटी के पूरे पैसे चुकाने पड़े । और गोल्फ़र अमरिंदर को जब गिफ़्ट में कार मिली तो उन्हें इसे विदेश में ही बेचना पड़ा !! क्योंकि सरकार ने ड्यूटी माफ़ नही की और ड्यूटी चुकाना वे वहन नही कर सकते थे । और अकोर्डिंग टू मीडिया, भगवान ये लोग थे नहीं। तो छूट देने की कोई वजह ही नहीं बनती !!
1. क्रिकेट मैच तो हमेशा से ही फ़िक्स थे लेकिन जब यह बात खुलकर सामने आयी कि अजहरूद्दीन, जडेजा समेत लगभग सभी खिलाड़ी मैच फ़िक्सिंग में शामिल है पर तब भी सचिन शक के दायरे से बाहर रहे ।

बहरहाल , इस बारे में मेरा प्रस्ताव है कि क्रिकेट को खेल की श्रेणी से निकाल दिया जाना चाहिए।

## क्रिकेट को क्यों खेल की श्रेणी से निकाल देना चाहिए ?

एक तर्क यह है कि -- "सरकार को सभी खेलो के साथ समान रूप से पेश आना चाहिए । क्रिकेट को खेल की श्रेणी से निकालना क्रिकेट के साथ सौतेला व्यवहार है"। किंतु मेरा मानना है कि क्रिकेट अन्य खेलो की तरह नही है । क्रिकेट का मामला अपवाद है ।

1. क्रिकेट कोई खेल नही है, यह एक बिज़नेस है । अतः सरकार इसे यदि खेल की श्रेणी से निकाल भी देगी तब भी पैड मीडिया एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ इसे प्रोत्साहित करती रहेगी और यह चलन में बना रहेगा । क्योंकि यह खेल पैसा बनाता है जबकि अन्य सभी खेल पैसा गँवाते है ।
1. क्रिकेट में बेतहाशा सट्टे बाज़ी है, और हर सिरीज़ ख़त्म होते होते सैंकड़ों घर परिवार उजड़ जाते है । युवाओं को भी इस पर सट्टा लगाने की लत है । वे पैसा उधार करके रातों रात लखपति बनने के लिए सट्टा लगाते है और गले गले तक क़र्ज़ में डूब जाते है ।
1. अनिश्चितता खेल का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है । किंतु क्रिकेट में मैच फ़िक्सिंग एक अनिवार्य तत्व है जो कि इसे खेल नही रहने देता । अन्य खेलो में इस पैमाने पर फ़िक्सिंग नही है ।
1. क्रिकेट एक महँगा खेल है । बच्चों को क्रिकेट की लत लग जाती है और माता पिता को हैसियत न होने पर भी उन्हें खेल का सामान दिलाना होता है । एक बच्चे की किट पर लगभग 5-10 हज़ार का ख़र्च आता है। जबकि अन्य आउटडोर खेल सस्ते है, और किसी भी वर्ग के बच्चे इन्हें खेल सकते है ।
1. बाज़ार क्रिकेट को भुगतान करता है, अतः राज्य स्तर के खिलाड़ियों को भी मोटा पैसा एवं सुविधाएँ मिलती है । ( आज का मुझे मालूम नही है, किंतु १० साल पहले राज्य स्तर के जूनियर [१७ वर्ष से कम आयु ] खिलाड़ी को एक मैच का 4 हज़ार रुपया मिलता था जबकि हेंडबोल या होक़ी के खिलाड़ी को 150 रुपए मिलते थे । जूनियर क्रिकेटरों को तब 3 स्टार होटेल में ठहराते थे जबकि अन्य खेलो के खिलाड़ियों को धर्मशाला में )
1. यह सभी भुगतान बाज़ार करता है तो इसमें दख़ल नही दिया जा सकता । किंतु उस पर तुर्रा यह कि ज़िला स्तर पर सरकारें सम्मानित भी इन्ही खिलाड़ियों को कर देती है । अर्जुन, पद्म, भारत रत्न आदि एवार्ड अलग से है । यह सरकारी सम्मान और प्रोत्साहन अन्य खेल के खिलाड़ियों को बलात रूप से क्रिकेट की और ठेलता है । उन्हें लगता है कि हम बेवक़ूफ़ है जो क्रिकेट नही खेल रहे है । इस तरह क्रिकेट अन्य खेलो को खा रहा है । जब बाज़ार क्रिकेट के पीछे इतनी मजबूती से खड़ा है तो सरकार को चाहिए कि वह इसे पूर्ण रूप से बाज़ार के हवाले कर दे ।
1. और इस बात पर कोई बहस नही है कि जितने ज़्यादा युवा/बच्चे क्रिकेट खेलेंगे और देखेंगे देश को उतना ही नुक़सान होगा । बेरोज़गारी बढ़ेगी, आत्म हत्याएँ बढ़ेगी, अपराध में वृद्धि होगी और प्रतिभाशाली बच्चों का भविष्य बर्बाद होगा। अन्य खेल इस पैमाने पर हानि नही पहुँचाते ।
1. क्रिकेट के कारण युवा आज ऐसे लोगों को अपना हीरो बना कर रखे है जो कि वास्तविक अर्थों में अनुसरण करने लायक नही बल्कि बहिष्कार करने लायक है । आज के सभी क्रिकेट खिलाड़ी फिक्सर है, यानी वे कपटी, धूर्त, झूठे, मक्कार और भ्रष्ट है । सभी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के एजेंट है वो अलग से । मतलब एंटी नेशनल भी है । टके टके पर नीलाम होते है । और ये युवा पीढ़ी के आदर्श है । इतनी गंदगी अन्य किसी खेल में नही । एक बोलीवुड़ है और अब बोलीवुड़ की यह दूसरी ब्रांच और आ गयी है ।
1. क्रिकेट में जितना व्यापार, सट्टा और फ़िक्सिंग है सब विदेशियों एवं डी कम्पनी के नियंत्रण में है । इस तरह यह खेल जो रुपया बनाता है वह हमारे दुश्मन को मजबूत और देश को कमज़ोर करता है ।

इसीलिए मैं इस बात में मानता हूँ कि जिस तरह सभी प्रकार के नशों को एक श्रेणी में नही रख सकते उसी तरह क्रिकेट को अन्य सभी खेलो के समकक्ष नही रखा जा सकता । क्रिकेट शराब, तम्बाकू, अफ़ीम, भांग, कैफ़िन नही है, यह कोकीन बन चुकी है ।

इसीलिए मेरे मत में सरकार को चाहिए कि वह इसे खेल की श्रेणी से निकाल बाहर करे और क्रिकेट की मैच फ़िक्सिंग को क़ानूनी कर दे । इससे देश पर छाये इस नशे का काफ़ी हद तक शमन हो जाएगा ।

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सरकार द्वारा इसके लिए निम्न कदम उठाये जाने चाहिए :

1. सरकारी स्कूल एवं कोलेजों में क्रिकेट प्रतियोगिताओं पर प्रतिबंध लगाया जाए ।
1. सरकार क्रिकेट संगठनों को किसी भी प्रकार की टेक्स रियायते न दे । और इन्हें खेल मैदान के लिए एक इंच भी भूमि आवंटित नही करे ।
1. क्रिकेट जब खेल की श्रेणी से बाहर हो जाएगा तो क्रिकेट खेलने वालों को अर्जुन, पद्म, भारत रत्न पुरस्कार मिलने और क्रिकेट खेलने की एवज़ में सरकारी नौकरी मिलने के रास्ते ख़ुद ही बंद हो जाएँगे ।
1. सरकारी संगठन, अर्ध सरकारी संगठन एवं सरकार द्वारा पोषित किसी भी संगठन पर क्रिकेट प्रतियोगिताए आयोजित करवाने या टीम उतारने पर प्रतिबंध लगे ।
1. जब क्रिकेट खेल की श्रेणी में नही रहेगा तो दिल्ली दूरदर्शन एवं आकाशवाणी क्रिकेट की ख़बरों एवं इसकी कमेंट्री का प्रसारण भी नही करेंगे । यदि तब भी करते है तो सरकार इन पर प्रतिबंध लगाए ।
1. ज़ीसटी की अधिकतम कर सीमा 28% है, अतः क्रिकेट की बोल, बेट, पैड आदि सभी पर 28% कर लगाया जाए । ( वैसे इस पर एक १०% का अलग से टेक्स "समय बर्बाद मनोरंजन कर" नाम से भी लगाया जा सकता है । पर मैं ऐसे कर को सपोर्ट नही करता )
1. सरकार मैच फ़िक्सिंग को क़ानूनी कर सकती है । मतलब यदि कोई व्यक्ति यह आरोप लगाता है कि अमुक मैच फ़िक्स था, तो इस आरोप पर कोई एफ आइ आर नही दर्ज की जाएगी ।

इतना होने से क्रिकेट से देश व युवाओं को होने वाले नुक़सान की अच्छी ख़ासी भरपायी हो जाएगी । शेष जिन्हें क्रिकेट खेलना एवं देखना है वे निजी संसाधनों से अपना खेल सकते है । सरकार दख़ल नही करेगी । मतलब जिन्हें क्रिकेट खेलना व देखना है और जिन्हें दिखाना एवं खिलाना है वे ख़ुद के संसाधन ख़र्च करे देश पर बोझ न डाले ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Oct 26 2021 20:27:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रश्न : क्या कॉलेज या यूनिवर्सिटी में प्रार्थना न करवाने के पीछे भी इन्ही मिशनरीज का हाथ हैं। क्यूंकि अगर उस स्तर पर लोगो से हिंदू धर्म की बात छुड़वा दी जाए तो उसको कन्वर्ट करना आसान होगा।
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मुझे इस बारे में सटीक जानकारी नहीं है कि, आजकल स्कूलों / कॉलेज वगेरह में सामूहिक प्रार्थना करवाई जाती है या नहीं और यदि करवाई जाती है तो इन प्रार्थनाओ के शब्द क्या है। हमारे समय में सभी विद्यालयों में सामूहिक प्रार्थना एक अनिवार्य अंग था। सभी धर्मो के छात्र ये प्रार्थनाएँ करते थे। और जहाँ तक मुझे याद है प्रार्थनाओं के शब्द सामाजिक / सामुदायिक सौहार्द को बढ़ाने वाले होते थे।
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यदि अब प्रार्थनाएं बंद कर दी गयी है तो इससे सामुदायिक भाईचारे में कमी आएगी। क्योंकि इस तरह की सामूहिक गतिविधियाँ आपसी भाईचारे को मजबूत बनाती है।
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समाज को कई हिस्सों में बांटना एवं उनमें जाति, धर्म, संस्कृति के आधार पर अलगाव पैदा करना बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पुराना एजेंडा है। जैसा कि आप देख ही रहे है कि, उन्होंने पेड मीडिया का इस्तेमाल करके भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों में वैमनस्य के बीज बो दिए है, और आज लगभग प्रत्येक वर्ग (जाति, धर्म, संस्कृति के आधार पर) अपना झुण्ड बनाकर किसी न किसी अन्य वर्ग के खिलाफ 24*7 विष वमन कर रहा है।
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किसी देश को तोड़ने के लिए यदि आपको सबसे गहरा आघात करना हो तो सबसे प्रभावी तरीका यह है कि अमुक देश में रहने वाले विभिन्न समुदायों के बीच इतना अविश्वास पैदा कर दो, कि वे एक दुसरे को दुश्मन की तरह देखने लगे। और फिर अमुक देश खुद ही अंदर ही अंदर लड़ मर कर ख़त्म हो जाता है।
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हिन्दुओ का एक झुण्ड मुसलमानों को देश से बाहर खदेड़ने पर आमादा है, दलितो के कुछ झुण्ड अगड़ो को देश से बाहर खदेड़ना चाहते है, कुछ अगड़ो के झुण्ड दलितों को देश से बाहर भेजना चाहते है, कुछ झुण्ड ब्राह्मणों को देश से निकालने पर काम कर रहे है, और कुछ झुण्ड बनियों को देश निकाला देना चाहते है। इन सबके पास "अपने अपने सत्य और तर्क" है !!
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कुछ सालों बाद हम ऐसे मंजर के गवाह बनेंगे जब कोई झुण्ड पार्किंग में खड़ी आपकी गाड़ी को सिर्फ इसीलिए जला जाएगा क्योंकि उस पर जाट, दलित, मुस्लिम, ब्राह्मण या जैन का प्रतीक बना हुआ था। और आप कभी जान नहीं पायेंगे कि यह क्यों किया गया।
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FDI द्वारा किया गया यह सबसे बड़ा आघात है, और वैमनस्य का यह पूरा प्रोपेगेंडा पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित है !! वो पूरे देश में बारूद बिछा रहे है, और ट्रिगर करने के साथ ही भारत जलने लगेगा।
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जूरी कोर्ट लाये बिना इस विघटन को काबू नहीं किया जा सकता। जूरी कोर्ट आने के 3 महीने के अन्दर ही जाया तौर पर वैमनस्य फ़ैलाने वाले इन झुंडो पर लगाम आ जायेगी, क्योंकि जूरी उन लोगो की तम्बीह करना शुरू करेगी जो पहचान की राजनीती (Identity Politics) के नाम पर यह तंदूर दहका रहे है। जजों को इस विघटनकारी प्रक्रिया को रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि वे पेड मीडिया के प्रयोजको की कठपुतली है।
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मेरे छात्र जीवन के दौरान गाई जाने वाली कुछ प्रार्थनाएं, जिनके बोल जैसे मुझे याद है :
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(1) दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना
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(2) जयति जय जय माँ सरस्वती...
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(3) तू ही राम है तू रहीम है, तू करीम कृष्ण खुदा हुआ
तू ही वाहे गुरु तू यीशु मसीह हर नाम में तू समा रहा
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(4) अस्तो माँ सद गमय...
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सरस्वती वंदना से लेकर सभी तरह की प्रार्थनाएँ होती थी, और सभी धर्मो के छात्र इन्हें करते थे।
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1989 से पहले तक भारत में जातीय, साम्प्रदायिक वैमनस्य काफी कम था, या कम से कम यह मुख्यधारा की राजनीती में नहीं था, और इसे सामाजिक स्वीकार्यता नहीं थी। साथ ही विभिन्न समुदायों में अविश्वास का माहौल नहीं था।
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कोंग्रेस ने भारत में इस्लामिस्ट के बढ़ते हुये “गलत प्रभाव” को कम करने के लिए आवश्यक क़ानून (टू चाइल्ड लॉ, बांग्लादेशी अवैध निवासियों को खदेड़ना, पुलिस-अदालतों को ठीक करने के लिए जूरी कोर्ट) नहीं छापे, जिसकी वजह से इस्लाम के बढ़ते गलत प्रभाव में वृद्धि हुयी और साम्प्रदायिक आधार पर राजनीति की जमीन में उर्वरता बढ़ गयी।
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और इसका राजनैतिक फायदा बीजेपी=आरएसएस ने उठाया। बीजेपी =आरएसएस साम्प्रदायिक राजनीती में खुद को स्थापित इसीलिए कर पायी क्योंकि 1990 से अमेरीकी-ब्रिटिश धनिको का प्रभाव बढ़ना शुरू हो गया था, और उन्होंने साम्प्रदायिक, जातीय वैमनस्य फैलाने वाले मुद्दों को पेड मीडिया की सहायता से प्रमोट करना शुरू किया।
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1989 से पहले तक बीजेपी=आरएसएस का हिन्दू, हिंदुत्व आदि से कोई ज्यादा लेना देना नहीं था। आप 1952 से 1985 तक आरएसएस=बीजेपी का राजनैतिक घोषणा पत्र देख सकते है, उसमें आपको हिन्दू, हिंदुत्व आदि का कुछ उल्लेखनीय नहीं मिलेगा।
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1991 से भारत की सभी मुख्यधारा की पार्टियों एवं शीर्ष नेताओं ने मिशनरीज को जॉइन कर लिया और वे मिशनरीज के विस्तार के लिए काम करने लगे। आज पेड मीडिया पर निर्भर सभी पार्टियों के शीर्ष नेता खुले तौर पर मिशनरीज के लिए काम कर रहे है।
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कुल मिलाकर , 1991 से अब तक हम काफी गहरे धंस चुके है, और यह दलदल FDI की आवक के अनुपात में बढ़ता जाएगा। दो क़ानून गेजेट में छापकर इस विभाजनकारी प्रक्रिया को रोका जा सकता है
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(1) जूरी कोर्ट #JuryCourtDrartRrp
(2) वोइक #WoicRrp
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और चुनाव जीतने के लिए मिशनरीज पर निर्भर होने के कारण भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियाँ इन कानूनों के खिलाफ है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Oct 27 2021 06:09:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

ग़द्दार एक ख़ास कल्चर (प्रशासनिक व्यवस्था) की वजह से पैदा होता है। जज सिस्टम ग़द्दार पैदा करने की फ़ैक्टरी है। मैग्नाकार्टा (जूरी सिस्टम) आने के कारण ब्रिटेन में ग़द्दारी की प्रवृति में कमी आयी।

Pawan Jury BhilwaraRj:

इस वीडियो में 3:40 से 4:55 से बीच का हिस्सा सुने।
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वक्ता का कहना है कि -- "मैग्नाकार्टा ( जूरी सिस्टम ) ने अंग्रेजो को अपने मुल्क के प्रति वफादार बना दिया और वहां कम गद्दार पैदा होने लगे !! गद्दार एक ख़ास कल्चर में पैदा होता है। जहां फर्द और रियासत का मुफाद घुल-मिल जाता है वहां गद्दार पैदा नहीं होते" !!!
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वैसे वफ़ादारी / गद्दारी आदि मानवीय गुण है, एवं इन्हें मापा नही जा सकता। यह शुद्ध प्रशासनिक तत्व नहीं है। लेकिन जूरी सिस्टम शासको / बदमाशो द्वारा नागरिको पर किये जा रहे दमन में कमी ले आता है और उन्हें न्याय देता है। ज्यूरी सिस्टम उद्यमशील व्यक्ति के हितो की रक्षा करके उसे आगे बढ़ने के समान अवसर भी देता है। त्वरित न्याय एवं स्वतंत्रता मिलने से अवाम शासन को अपने रक्षक एवं खैर ख्वाह के रूप में देखने लगता है, जिससे नागरिक अपेक्षाकृत ज्यादा वतन परस्त हो जाते है।
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तो जिन लोगो को "लगता" है कि भारत जयचंद एवं मीर जाफर पैदा करता रहा है, तो उन्हें इस बात को समझना चाहिए कि प्रशासनिक प्रक्रियाओ में सुधार करके इस प्रवृति पर काफी हद तक रोक लगायी जा सकती है। ज्यूरी सिस्टम का प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/829456537232542>;
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वीडियो में शेष बातें वही है जो अवाम को कोसने और समाधान को दरकिनार करने के लिए "वहां के और यहाँ के" पेड इतिहासकार एवं राजनीति विज्ञान के पेड विशेषग्य बोलते रहते है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Oct 27 2021 19:28:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

गंभीर कार्यकर्ताओं के लिए जरुरी सूचना :
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कृपया चुनावी नामांकन पत्र भरने का प्रयास करें।
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राईट टू रिकॉल मूवमेंट का एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओ में चुनावी नामांकन पत्र (Election Nomination Form) भरने का कौशल विकसित करना है। अत: कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे नॉमिनेशन फॉर्म भरने का प्रयास करें।
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और यह बिंदु यहाँ अप्रासंगिक है कि, आप भविष्य में चुनाव लड़ने वाले है या नहीं। आप चुनाव लड़ने वाले नहीं है तब भी आपको सेम्पल नामांकन पत्र भरकर सार्वजनिक करना चाहिए। मेरे विचार में राजनैतिक परिदृश्य को समझने के लिए नॉमिनेशन फॉर्म भरना एक सबसे महत्त्वपूर्ण गतिविधि है। और इस बात को तब तक नहीं समझा जा सकता जब तक आप स्वयं नामांकन पत्र नहीं भरते।
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(1)सेम्पल नॉमिनेशन फॉर्म भरने का तरीका -
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कृपया इस लिंक पर जाएँ - Tinyurl. com/NominationRrp1 (लिंक खोलने के लिए स्पेस हटा दें)
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उपरोक्त लिंक पर आपको एक फोल्डर मिलेगा, जिसमें 10 पीडीऍफ़ फाइल्स है
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(1.1) फॉर्म 26 हिंदी में, 1 फाइल (इसे एफिडेविट भी कहा जाता है।)
(1.2) फॉर्म 2A हिंदी में, 1 फाइल (इसे नाम निर्देशन पत्र कहा जाता है।)
(1.3) Form 26 in English, one file
(1.4) Form 2A in English , one file
(1.5) भरे हुए नोमिनेशन फॉर्म की 4 सेम्पल फाइल्स
(1.6) फॉर्म AB
(1.7) पार्षद का नामांकन पत्र (optional)
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(2) यदि आप हिन्दी में फॉर्म भरना चाहते है तो हिन्दी की तीनो फाइल्स (फॉर्म 26, फॉर्म 2A, फॉर्म AB) डाउनलोड करें और इसका प्रिंट आउट ले ले।
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(3) अब इस फॉर्म को खुद भरना शुरू करें। यदि आपको कोई दिक्कत आती है तो भरे हुए सेम्पल फाइल्स का अध्ययन कर सकते है। गलत सही जैसे भी आप भर सकते है वैसे फॉर्म को भरें। फॉर्म में गलती होने से कोई दिक्कत नहीं है, इसे बाद में सुधारा जा सकता है। एफिडेविट भरने के बाद स्टाम्प लगाकर इसे प्रोपरली नोटराईज कराएं।
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(4) अब XXX's Files नाम से कम से कम दो लोगो का एक पब्लिक या प्राइवेट फेसबुक ग्रुप बनाएं, जिसमें राहुल भाई, राकेश जी सूरी, रामेश्वर जी या मुझे जोड़ें। और अपने भरे हुए फॉर्म की फोटो खींच कर इस फेसबुक ग्रुप में डाल दें। अपने भरे हुए फॉर्म का पीडीऍफ़ बनाए और इस ग्रुप में पीडीऍफ़ भी अपलोड कर दें।
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भरे हुए फॉर्म के सभी पृष्ठों पर page no डालें और फॉर्म की JPG फाइल्स पोस्ट करने के लिए निम्नानुसार 6 fb स्टेटस बनाएं :
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(4.1) नाम निर्देशन फॉर्म (1 स्टेटस पोस्ट)
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(4.2) वोटर सर्टिफिकेट (1 स्टेटस पोस्ट)
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(4.3) फॉर्म AB
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(4.4) एफिडेविट के प्रथम 6 पेज (1 स्टेटस पोस्ट)
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(4.5) एफिडेविट के 7 से 12 तक पेज (1 स्टेटस पोस्ट)
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(4.6) एफिडेविट के शेष पेज (1 स्टेटस पोस्ट)
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(4.7) जोड़े गए अतिरिक्त पेज annextures (1 स्टेटस पोस्ट)
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(5) अपलोड किये गए jpg files / pdf का लिंक मुझे / राहुल भाई / रामेश्वर जी / राकेश जी सूरी को भेजे ताकि जांचा जा सके कि फॉर्म में क्या क्या गलतियाँ है, और आगे इसमें सुधार किया जा सके।
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(6) नोमिनेशन फॉर्म में आपके बारे में कुछ वित्तीय जानकारियाँ मांगी जाती है, जिनके बारे में सही जानकारी भरने की आप अवहेलना कर सकते है। उदाहरण के लिए बेंक खाते वाले कॉलम में अपना खाता नंबर लिखने की जगह आप #####1234 लिख सकते है, और खाते के बेलेंस की जगह आप ###123 लिख सकते है। इस तरह जो जानकारियां आप सार्वजनिक नहीं करना चाहते है, उन्हें प्रतीकात्मक रूप से भर दें, किन्तु कोई भी कॉलम खाली कदापि न छोड़े।
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आम तौर पर वकील नोमिनेशन फॉर्म भरने का 10 से 15 हजार चार्ज करते है, और तब भी ऐसे कई मामले है, जब वकील द्वारा भरे गए फॉर्म ख़ारिज हो जाते है। यदि आप सटीक ढंग से फॉर्म भरना सीख लेते है तो यह वाकयी बेहद काम की बात है और आप आगे चलकर अन्य कार्यकर्ताओ को काफी सहयोग कर सकेंगे। अत: कृपया ऊपर दिए गए चरणों का पालन करके नोमिनेशन फॉर्म भरने का प्रयास करें।
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(a) यदि आप सरकारी कर्मचारी है तो फॉर्म न भरें।
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(b) यदि आप महिला कार्यकर्ता है तब भी आप फॉर्म न भरने का फैसला ले सकते है।
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(c) यदि आप चुनाव लड़ चुके है और तब यदि आपने अपना फॉर्म स्वयं ही भरा था तब भी आप सेम्पल फॉर्म न भरने का फैसला ले सकते है। किन्तु यदि आपने अपना फॉर्म स्वयं नहीं भरा तो आप सेम्पल फॉर्म फिर से स्वयं भरें।
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(d) यदि आप ऐसे व्यवसाय में है (सरकारी ठेके आदि) कि आपके नोमिनेशन फॉर्म भरने से आपको कारोबारी हानि होने की सम्भावना आसन्न हो सकती है तो तब भी आप नोमिनेशन फॉर्म न भरने की अवहेलना कर सकते है।
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यदि आप उपरोक्त 4 में शामिल नहीं है और राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कानूनों को लेकर वाकयी गंभीर है तो कृपया चुनावी नोमिनेशन फॉर्म भरने का प्रयास करें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Oct 28 2021 13:40:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Pawan Jury BhilwaraRj:

हमने 14 नवम्बर से चुनावी नामांकन पत्र भरने शुरू किये और 19 नवंबर को सभी 8 फॉर्म रिटर्निंग ऑफिसर को जमा कर दिए। ये 6 दिन बेहद थका देने वाले और तनावपूर्ण रहे। फॉर्म भरने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि आपको लगने लगता है कि चुनाव लड़ने में जितनी ऊर्जा एवं समय लगता है उतना तो आप नामांकन भरने में ही खर्च कर चुके है।
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बड़ी पार्टियों के उमीदवारो को इन सब समस्याओ से नहीं जूझना पड़ता। मतलब यहाँ भी हालात जीएसटी जैसे ही है। प्रक्रिया को जान बूझकर इस तरह डिजाइन किया गया है कि छोटे उम्मीदवारो को जाया परेशानीयों का सामना करना पड़े, जबकि ऊँचे कद के उम्मीदवार फायदे की स्थिति में रहे ।
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चुनाव प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाना सबसे जरुरी है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो ज्यादा कार्यकर्ता चुनावों में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। और व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए यह सबसे ज्यादा जरुरी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग चुनावों में हिस्सा ले।
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कार्यकर्ताओ से मेरा आग्रह है कि वे चुनाव लड़ने का कोई मौका न गवांए और लोकसभा , विधानसभा आदि सभी प्रकार के चुनावों में हिस्सा ले। असल में यदि आप राजनैतिक कार्यकर्ता है , और मौजूदा किसी भी पार्टी के एजेंडे से सहमत नहीं है , और फिर भी आप सिर्फ उन पार्टियों की आलोचना कर रहे है , किन्तु चुनाव लड़ने की जहमत नहीं उठा रहे है , तो आप राजनैतिक टिप्पणियां करके अपना और नागरिको का सिर्फ समय जाया कर रहे है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Oct 28 2021 13:41:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Pawan Jury BhilwaraRj:

सभी गम्भीर कार्यकर्ताओं को चुनावी नामांकन भरने का अभ्यास करना चाहिए । चाहे वे चुनाव लड़ने वाले हो या नही ।
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चुनाव लड़ना सबसे महत्त्वपूर्ण और सबसे ज़्यादा चुनौती पूर्ण कार्य है , और ज़्यादातर कार्यकर्ता चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पाते ।
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चुनाव लड़ने का एक सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा नामांकन भरने की प्रक्रिया भी है । अतः कार्यकर्ताओं को चुनाव पूर्व या चुनावों के दौरान नामांकन अवश्य भरना चाहिए । यदि आपको चुनाव नही लड़ना हैं , तब भी आप नामांकन अवश्य भरे , और इसे स्कैन करके अपनी FB profile पर रखे ।
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जब आप नामांकन भरेंगे तब आप जान पाते है कि चुनावी नामांकन भरना कितना महत्त्वपूर्ण है । और चुनाव लड़ना तो ख़ैर सबसे महत्त्वपूर्ण और सबसे चुनौती पूर्ण है ही
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राजस्थान , मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के गम्भीर कार्यकर्ताओं से आग्रह है कि वे मौजूदा विधानसभा चुनावों के दौरान ड़मी नामांकन भरने का अभ्यास करें ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Oct 28 2021 22:17:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बिहार के चुटिया बेलारी पंचायत से राईट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्याशी :
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(1) अशोक कुमार जी :
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पद - पंचायत समिती सदस्य प्रत्याशी
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निर्वाचन क्षेत्र संख्या - 15
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ग्राम पंचायत - चुटिया बेलारी
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जिला - बांका , बिहार
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(2) मधुमाला जी :
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पद - मुखिया
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निर्वाचन क्षेत्र संख्या - 13
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ग्राम पंचायत - चुटिया बेलारी
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जिला - बांका , बिहार
.
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#VoteVapsiPassbook , #JuryCourt , #JuryCourtDraftRrp

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Oct 29 2021 10:32:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Kumar Jurycourt:

मैं और मधुमाला देवी जी राइट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्याशी हैं। मैं और मधुमाला देवी जी चुटिया बेलारी पंचायत से पंचायत समिति सदस्य और मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।हमारा फाॅर्म स्वीकृत हो गया है।15 नवंबर को मतदान होगा।

बिहार पंचायत चुनाव -2021 में बैनर,पम्पलेट आदि के लिए कोई आर्थिक सहयोग करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। मैंने अपना अकाउंट डिटेल नीचे दे दिया है।

Ashok Kumar
UCO Bank,Shambhuganj
A/c-08950100008574
IFSC code-UCBA0000895
Mob-9939520520

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Oct 29 2021 19:37:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्याशी :
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(1) मधुमाला जी : चुटिया बेलारी पंचायत से मुखिया उम्मीदवार
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चुनाव चिन्ह - बैंगन
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जिला - बांका , बिहार
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(2) अशोक कुमार जी : चुटिया बेलारी पंचायत समिती सदस्य प्रत्याशी
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निर्वाचन क्षेत्र संख्या - 15
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जिला - बांका , बिहार
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#VoteVapsiPassbook , #JuryCourt , #JuryCourtDraftRrp

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Oct 29 2021 20:28:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Hitesh Shakya – Thinker Vs Doer
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कुछ 2 वर्ष पूर्व जब हितेश जी से मेरी पहली मुलाकात हुई थी तो हमने राजनैतिक परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की थी । इसी दौरान इस बिंदु पर भी तफसील से बात हुई कि क्यों कोई भी राजनैतिक बदलाव लाने के लिए युवाओं को अधिक से अधिक चुनावी राजनीती में भाग लेना चाहिए।
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मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी, कि हितेश जी चुनाव लड़ने के महत्त्व को इतनी जल्दी समझ लेंगे। अमूमन जब कोई व्यक्ति राईट टू रिकॉल मूवमेंट के संपर्क में आता है तो वोट वापसी, जूरी कोर्ट कानूनों के ड्राफ्ट्स की उपयोगिता समझने में उसे हफ्तों एवं कभी कभी महीनो लग जाते है।
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और ड्राफ्ट्स की उपयोगिता समझने के बाद भी उसे यह बात समझने में और भी ज्यादा वक्त लगता है कि, क्यों इन कानूनों की मांग आगे बढ़ाने के लिए उन्हें चुनावों में आना होगा, और इससे भी ज्यादा वक्त उन्हें चुनावों में आने की हिम्मत जुटाने में लगता है, (जिसके पीछे वजह वास्तविक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक है)।
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हितेश जी ने ये पूरा फासला सिर्फ 48 घंटो में तय कर लिया था !! उन्होंने ड्राफ्ट पढने के दुसरे दिन ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी, और उन्होंने वोट वापसी, जूरी कोर्ट के मुद्दे पर दो बार चुनाव लड़ा भी।
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यह अंतर ज्ञान होने और कदम उठाने का है। आपके पास कितना भी ज्ञान हो, यदि आप कदम नहीं उठाते तो ऐसे ज्ञान की कोई व्यवहारिक उपयोगिता नहीं। क्योंकि बदलाव सिर्फ कदम उठाने से ही आता है। कोरा ज्ञान कोई बदलाव लेकर नहीं आता।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Oct 30 2021 09:37:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुटिया बेलारी पंचायत से राईट टू रिकॉल प्रत्याशियों को आर्थिक सहयोग करें
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मधुमाला देवी जी एवं अशोक कुमार जी राइट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्याशी हैं। दोनों प्रत्याशियों का फाॅर्म स्वीकृत हो गया है। 15 नवंबर को मतदान होगा।
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बैनर,पम्पलेट आदि के लिए आप कोई आर्थिक सहयोग करना चाहते हैं तो कृपया निचे दिए गए खाते में भेजे सकते हैं।
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प्रचार के लिए अनुमानित 15,000 रू की आवश्यकता है। अत: जब आप योगदान भेजे तो कमेंट में राशि भी लिखे। ताकि बजट पूर्ण होने पर अन्य कार्यकर्ताओ को सूचना रहे।
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प्रत्याशी भी प्राप्त होने वाली राशि का ब्यौरा यहाँ रखते रहेंगे।
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Ashok Kumar
UCO Bank,Shambhuganj
A/c-08950100008574
IFSC code-UCBA0000895
Mob-9939520520
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Oct 30 2021 09:54:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यह पोस्ट चुनावी फॉर्म भरने से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर लिए है।
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यदि आप चुनावी नामांकन पत्र भर रहे है, और यदि आपका इस सम्बन्ध में कोई प्रश्न है तो इस पोस्ट के कमेंट के अपना प्रश्न रख सकते है। कृपया इस पोस्ट में सिर्फ फॉर्म भरने से सम्बंधित प्रश्न ही रखे। अन्य विषयो से सम्बंधित प्रश्न डिलीट कर दिए जाएंगे।
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चुनावी फॉर्म भरने से सम्बंधित प्राथमिक जानकारी के लिए पहले इस पोस्ट को पढ़ें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/4378422938942575>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Oct 30 2021 14:31:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनाव पूर्व नामांकन फॉर्म नहीं भरने का खामियाजा जो हमने भुगता !!
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(1) 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में हम भीलवाड़ा की 7 विधानसभाओ से चुनाव लड़ रहे थे और हमें 7 नोमिनेशन फॉर्म भरने थे। 12 नवम्बर को फॉर्म मिलने शुरू हुए और 19 नवम्बर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख थी। नोटिफिकेशन निकलने से पहले तक हममे से किसी ने भी न तो नोमिनेशन फॉर्म भरा था, और न ही इसे देखा था। 13 नवम्बर को हम कलेक्ट्री से फॉर्म लाये और 14 को हमने इन्हें भरना शुरू किया।
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(2) नतीजा : मैं, और अन्य कार्यकर्ता सुबह 11 बजे से फॉर्म भरना शुरू करते थे, और रात 2-3 बजे तक फॉर्म भरते रहते थे। इस तरह हम अगले 6 दिन तक 14 से 16 घंटे प्रतिदिन के हिसाब से फॉर्म भरने का काम कर रहे थे !! बावजूद इसके हम अपने सभी फॉर्म अंतिम दिनांक (19 नवम्बर 2018) तक ही पूर्ण कर पाए, और सभी फॉर्म अंतिम तारीख को ही जमा किये गए !!
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(3) खामियाजा :
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(3.1) हमारे 2 फॉर्म रिजेक्ट हुए। ये दोनों फॉर्म यदि हमने सिर्फ 2 दिन पहले भी (यानी 17 तारीख को) जमा कर दिए होते तो ये फॉर्म स्वीकार हो सकते थे। क्योंकि तब हमारे पास इनमे सुधार करने का वक्त होता।
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(3.2) फॉर्म भरने के दौरान हमें जिस तनाव से गुजरना पड़ा उसमें हमारी पूरी ताकत ख़त्म हो चुकी थी। और हम केम्पेन ठीक से नहीं चला पाए।
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राहुल भाई ने मुझे 2017 से ही यह बोलना शुरू कर दिया था कि, चाहे मैं चुनाव लडूं या न लडूँ लेकिन मुझे नामांकन फॉर्म भरने का अभ्यास कर लेना चाहिए। लेकिन चूंकि मैं पार्टी के दीगर कार्यो (ड्राफ्ट, पेम्पलेट बनाना आदि) में भी व्यस्त था अत: मैंने फॉर्म भरने के अभ्यास पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन यह भी सच है कि, मैं चुनाव पूर्व नामांकन फॉर्म भरने की उपयोगिता तो समझ नहीं पाया था, और मैंने इसे लापरवाही में लिया।
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(4) 2021 में भीलवाड़ा में पार्षद चुनाव आये, और इस बार हम 24 सीट लड़ने वाले थे। लेकिन बार बार आग्रह करने के बावजूद किसी भी कार्यकर्ता ने चुनाव पूर्व नामांकन फॉर्म भरने का अभ्यास नहीं किया था !!
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(5) नतीजा : हमने नोटिफिकेशन आने के बाद फॉर्म भरने शुरू किये। रोज हमारे 12-14 घंटे फिर से फॉर्म भरने में जाया होना शुरू हुए। हमने पूरी कोशिश की कि अंतिम तारीख से एक दिन पहले ही सभी फॉर्म जमा कर दें, किन्तु फिर भी 24 में से 7 फॉर्म हम फिर से अंतिम तिथि को ही जमा कर पाए।
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(6) खामियाजा :
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(6.1) हमारे फिर से 2 फॉर्म अस्वीकृत हुए और 1 फॉर्म समय निकल जाने के कारण हम जमा नहीं कर पाए।
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(6.2) फॉर्म भरने की प्रक्रिया ने हमें मानसिक-शारीरिक रूप से काफी थका दिया था, और इसने हमारे प्रचार एवं प्रचार सामग्री के निर्माण की तैयारी पर असर डाला।
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विधानसभा चुनावों में फॉर्म भरने के दौरान मैं, रामेश्वर जी, ईश्वर जी, स्वप्नेश जी, महावीर जी आदि कार्यकर्ता नामांकन फॉर्म भरना सीख चुके थे, और सिर्फ इस वजह से पार्षद चुनावों में हमारे सिर्फ 2 फॉर्म अस्वीकार हुए। यदि हमनें विधानसभा चुनावों में फॉर्म न भरे होते तो पार्षद चुनावों में अस्वीकृत होने वाले फॉर्म की संख्या और भी बढ़ जाती थी।
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(7) 2019 के लोकसभा चुनावों में मुझे फॉर्म भरने में किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। क्योंकि 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान मुझे फॉर्म भरने का अभ्यास हो गया था, और मेरे पास विधानसभा चुनाव में दाखिल किये गए फॉर्म की फोटो कॉपी मौजूद थी। लोकसभा में सिर्फ मैं ही प्रत्याशी था, अत: अन्य फॉर्म भरने का वजन भी नहीं था।
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तो मुझे लोकसभा फॉर्म को भरने में सिर्फ 2 घंटे लगे। मैंने सिर्फ एक सिटींग में ही आसानी से फॉर्म भर दिया और फॉर्म स्वीकृत हो गया। और इस वजह से लोकसभा चुनावों के दौरान मैं प्रचार पर ज्यादा संतोषप्रद काम कर पाया।
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(8) बहरहाल, इससे हमें यह सबक मिला कि प्रत्येक कार्यकर्ता को नामांकन फॉर्म भरने का अभ्यास करके यह कौशल अवश्य जुटाना चाहिए। इससे 2 तरह के लाभ होंगे :
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(8.1) यदि आप भविष्य में चुनाव लड़ने का फैसला करते है तो आपकी काफी ऊर्जा एवं समय जाया होने से बच जायेगी। और चुनाव लड़ने के दौरान फॉर्म भरने के दौरान जाया होने वाला समय काफी कीमती होता है।
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(8.2) यदि आप चुनाव नही लड़ने वाले तब भी आप उन कार्यकर्ताओ को फॉर्म भरने में सहयोग कर सकेंगे, जो चुनाव लड़ रहे है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Oct 31 2021 17:07:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Senioriit Baba:

I used to strongly support ban on firecrackers till last year.
Now I realize it is Rothschild's agenda to suppress Hindu festivals.

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