Posts for 2018-07

Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 03 2018 18:44:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Arya Ballari Karnataka:

One of the best photoshop portraits in recent times !!!
.
As we @ Right to Recall Party have always maintained, Modiji is implementing exactly the same policies as did the previous PM Manmohan Kaur. The differences between them are superficial; like for eg. singing or not singing Vande Mataram, shouting / not shouting Bharat Mata ki Jai, etc; but they implement the same formula for growth i.e. FDI = hand over every sector of the economy to multinational corporations. There are far more similarities between the two than differences.
.
(Pic credit - The Satya Show)

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 04 2018 08:22:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

4 जुलाई - कारगिल युद्ध में संघर्ष विराम की घोषणा इसी दिन की गयी थी । 30 जून को मोदी साहेब अमेरिका से रवाना हुए और 1 जुलाई को क्लिंटन ने नवाज़ शरीफ़ को वाशिंगटन तलब किया । 2 जुलाई को ही यह तय पा लिया गया था कि भारत पाकिस्तान को सेफ़ पेसेज देगा और पोईंट .5353 पाक के क़ब्ज़े में रहेगा ।
.
लेकिन क्लिंटन चाहते थे कि यह विराम 4 जुलाई को घोषित किया जाए । वजह - 4 जुलाई अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस था , और वे जश्न का मौक़ा गँवाना नही चाहते थे । रात 3 बजे क्लिंटन ने वाजपेयी को संघर्ष विराम की घोषणा करने के आदेश जारी किए । वाजपेयी ने 4 बजे जनरल को यह आदेश फोरवर्ड किया और प्रातः 6 बजे भारत ने संघर्ष विराम की घोषणा की ।
.
कई क्षेत्रों में FDI की अनुमति देने से लेकर भविष्य में परमाणु परीक्षण / अनुसंधान न करने तक की कई शर्तें भारत ने मानी । इस तरह कारगिल युद्ध में भारत-पाक दोनो की हार हुयी और अमेरिका जीत गया ।
.
अमेरिका ने तब से भारत की राजनीतिक-आर्थिक-सामरिक व्यवस्था पर जो पकड़ बनायी वह दिनो दिन और भी मजबूत होती जा रही है । राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम , वेल्थ टेक्स और हथियारबंद नागरिक समाज जैसे कानूनो को लागू किए बिना इस शिंकजे से आज़ाद नही हुआ जा सकता है ।
.
( सबूत भगत तथ्यों की पुष्टि के लिए गूगल करें , मुझसे लिंक उपलब्ध करवाने का आग्रह न करे )
.
===========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 05 2018 11:57:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Arya Ballari Karnataka:

An excellent video on the propaganda hit-piece masquerading as a biopic movie - Sanju.
.
After insulting Hindus in his previous movie PK, director Rajkumar Hirani insults Hindus once again. According to this video, the movie makes no mention of dawood ibrahim, the mastermind of the Bombay blasts of 1993, who met Sanjay Dutt while the latter was shooting in Dubai. Instead, the director chose to show worshipers of Lord Ganesha as the "bad guys" who invite Dutt to Ganapati Visarjan.
.
Please boycott this third-rate movie and third-rate director.
.
(Video credit - FMF)
.
Youtube link to the same video: <https://youtu.be/EWR6zoz-dBo>;

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 11 2018 14:15:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब का मास्टर स्ट्रोक -- भारत सरकार ने जिओ इंस्टीट्युट को IoE ( IoE = institute of excellence) का दर्जा दिया !!!
.
लेकिन मौजूदा नीति के अनुसार -- निजी कोलेज वगेरह को सरकारी अनुदान नहीं दिए जा सकते। क्योंकि जिओ ने अभी तक अपना बैंक एकाउंट नहीं खुलवाया है !! हम देखेंगे कि "जैसे ही श्याम प्लेटफोर्म पर पहुंचा वैसे ही रेलगाड़ी चल दी" कि तर्ज पर जिओ द्वारा बेंक एकाउंट खुलवाते ही सरकार कि यह नीति बदल जायेगी।
.
एक बार एक व्यक्ति ने किसी संत से पूछा था की -- "यदि ईश्वर मौजूद है तो मुझे वह दिखाई क्यों नहीं देता" ? संत ने जवाव दिया , "दूध खट्टा हुए बिना कितनी देर तक टिका रह सकता है। लगभग एक दिन। लेकिन यदि आप इसका दही जमा दे तो अगले 2-3 दिन तक इसका सेवन किया जा सकता है। बटर बनाने पर यह लगभग सप्ताह भर तक खराब नहीं होगा और यदि आप इससे घी बना लेते है तो इसे सालों तक खाया जा सकता है। तो इस तरह दूध में वर्षो तक टिके रहने का गुण है , लेकिन क्या आप इसे देख सकते है ?
.
तो जिओ के पास आज छात्र नहीं है , शिक्षक नहीं है और यहाँ तक कि इमारत भी नहीं है। लेकिन यह तय है कि आने वाले समय में जिओ के पास एक विशाल इमारत , नोबेल पुरूस्कार प्राप्त महान शिक्षक और अति मेधावी छात्र होंगे। यह विश्वनीय है कि मुकेश भाई भी रोकेफेलर एवं रोथ्स्चाइल्ड कि तरह IoE के लिए नोबेल कमिटी को सेट कर सकते है।
.
तो किसी व्यक्ति में यह काबिलियत होनी चाहिए कि वह एक बीज में पूरा पेड़ देख सके। और ऐसे किसी बीज को बीज न कहकर सीधे पेड़ कह कर संबोधित करने के लिए और भी ज्यादा असाधारण मेधा कि जरूरत होती है। और सौभाग्य से हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री है जो ऐसी ईश्वरीय मेधा से प्लावित है।
.
और मुकेश भाई ने मोदी साहेब को इसके एवज में जो तर्क दिया वह भी एकदम वाजिब था -- "अगर आप ऐसे बी ए का तमगा ले सकते है तो मेरा कोलेज IoE का स्टेट्स क्यों न पा सकता" !!
.
कुल मिलाकर बिना इमारतो, बिना शिक्षको एवं बिना छात्रों के किसी कोलेज के लिए असाधारण संस्थान का दर्जा हासिल कर लेना वाकई में एक असाधारण उपलब्धि है। और यह कहने कि जरूरत नहीं कि ऐसा मास्टर स्ट्रोक सिर्फ मोदी साहेब कि लगा सकते है।
.
===========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 11 2018 14:21:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब का मास्टर स्ट्रोक -- भारत सरकार ने जिओ इंस्टीट्युट को IoE ( IoE = institute of excellence) का दर्जा दिया --- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1696425267142369>;
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 12 2018 11:53:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जिओ इंस्टिट्यूट -- मौजूदा नीति के अनुसार अभी जिओ इंस्टीट्यूट को कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलेंगे , लेकिन इसे IoE = institute of excellence का दर्जा होने के कारण आने वाले समय में इसे भारी भरकम प्रोजेक्ट के नाम पर सरकार से बड़ी धनराशि मिलेगी।
.
-----------
.
ONGC / GAIL आदि ने तेल की वास्तविक रॉयल्टी से कम चुका कर भारत में बड़े पैमाने पर लूट चलायी और इस घपले से ONGC / GAIL के कर्मचारीयों / मंत्रीयों / जजों ने मोटा पैसा बनाया। ONGC के सामान्य कर्मचारी के पास भी करोड़ो की सम्पत्ति है !! मेरे एक परिचित 2010 में ONGC के शीर्ष अधिकारी के संपर्क में आये थे , और ये अधिकारी तब 300 करोड़ का निवेश करने के लिए प्रॉपर्टी ढूंढ रहे थे !!!
.
तो भारत के सभी सार्वजनिक उपक्रम = PSU संसाधनों को लूटने के अड्डे बने हुए है , और यह लूट मंत्रियो की मिली भगत से चलायी जाती है। और तेल के धंधे में लगे हुए सार्वजनिक उपक्रम इस प्रकार के घपलो के महारथी है।
.
रिलायंस ने भी इस तरह से लूट चलायी। रिलायंस ने मंत्रियो को घूस दी और एवज में मंत्रियो ने उनके लिए रॉयल्टी की सस्ती दरें तय की। और इस तरह रिलायंस ने भारी मुनाफा कमाया। लेकिन रिलायंस के कर्मचारियों के पास घपले करके करोड़ो रूपये बनाने का अवसर नहीं है। हालांकि रिलायंस के शीर्ष अधिकारियों ने इससे हजारो करोड़ रूपये बनाये , किन्तु रिलायंस के मध्यम दर्जे के अधिकारीयों की तुलना में ONGC के कर्मचारी काफी अधिक अमीर है।
.
मुफ्त में लूटे गए इसी पैसे के एक हिस्से का इस्तेमाल जिओ मोबाइल जैसी चैरिटी योजना में किया गया , और जिओ इंस्टीट्यूट भी इसी तरह की चैरिटी योजना है। इस तरह की चैरिटी में व्यक्ति से उसके हिस्से के 100 रूपये नियमो के अधीन लूट लिए जाते है और इसमें से 2 रूपये चैरिटी के रूप में लौटा दिए जाते है। । लेकिन ONGC इस तरह की लूट चलाने के बावजूद इस तरह की कभी कोई चैरिटी नहीं करता। ONGC सिर्फ मंत्रियो एवं कर्मचारियों के लिए ही पैसा बनाता है !!
.
और रिलायंस रोकेफेलर की कम्पनी है। रोकेफेलर सामने से रिलायंस का CEO बनकर इसे नहीं चलाना चाहता, क्योंकि उसे मालूम है कि भारतीयो को गोरो से एलर्जी है। और इसीलिए रोकेफेलर को भारत में कारोबार करने के लिए एक भारतीय चेहरा चाहिए। तो इसीलिए हमारे पास अम्बानी है। 1858 के बाद ब्रिटिश भारतीय राजाओ के माध्यम से ही अपना संचालन करते थे। यह वही स्थिति है।
.
कहानी का सबक यह है कि -- जब तक भारत में ONGC जैसी संस्थाएं लूट चलाती रहेगी तब तक वे ऐसी निजी कंपनियों को खड़ा रखेंगे जो ONGC जैसी अति भ्रष्ट कम्पनियो की तुलना में ज्यादा अच्छी नजर आये।
.
समाधान -- हमारा प्रस्ताव है कि MRCM , Rtr पेट्रोल मिनिस्टर , Rtr ओएनजीसी चैयरमेन और इन सार्वजनिक उपक्रमों पर ज्यूरी सिस्टम क़ानून लागू किया जाए। MRCM यह सुनिश्चित करेगा कि तेल की रॉयल्टी ऊँचे दाम पर तय हो और यह प्रत्येक भारतीय के खाते में सीधे जमा की जाए। साथ ही राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम इन संस्थाओ में घपले होने की सम्भावना न्यूनतम कर देगा।
.
इन कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पेज को क्लिक करे , एवं @pmoindia पर ट्वीट भेजे कि इन कानूनों को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
.
====================

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 12 2018 12:08:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जिओ इंस्टिट्यूट -- मौजूदा नीति के अनुसार अभी जिओ इंस्टीट्यूट को कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलेंगे , लेकिन इसे IoE = institute of excellence का दर्जा होने के कारण आने वाले समय में इसे भारी भरकम प्रोजेक्ट के नाम पर सरकार से बड़ी धनराशि मिलेगी -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1697993270318902>;
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 12 2018 14:12:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मिशनरीज काशी में एक अभियान चला रही है --- "देखो , तुम्हारा ईश्वर खुद के मंदिरो की रक्षा भी करने में सक्षम नहीं है। तुम्हारा ईश्वर झूठा है। अत: तुम यीशु की शरण में आओ" !!!
.
और इस तरह छोटे किन्तु पौराणिक मंदिरो को तोड़ने का आदेश देकर मोदी साहेब सिर्फ मिशनरीज को सहायता पहुंचा रहे है। विकास के नाम पर !!
.
क्यों मोदी साहेब , योगी जी एवं संघ के कार्यकर्ता काशी के छोटे किन्तु पौराणिक महत्त्व के मंदिरो को तोड़ने में इतनी मेहनत कर रहे है ?
.
मोदी साहेब , योगी जी एवं संघ के कार्यकर्ताओ के बड़े मंदिरो के मालिको के साथ गठजोड़ है बने हुए है। बड़े मंदिरो के मालिक छोटे किन्तु महत्त्वपूर्ण मंदिरो को क्यों तोड़ देना चाहते है ?
.
ताकि बड़े मंदिरो में श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो !!!
.
और इसी दौरान निम्न वर्ग के कई श्रद्धालु मिशनरीज की गोद में चले जाएंगे !!
.
==============

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 12 2018 14:17:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क्यों मोदी साहेब , योगी जी एवं संघ के कार्यकर्ता काशी के छोटे किन्तु पौराणिक महत्त्व के मंदिरो को तोड़ने में इतनी मेहनत कर रहे है ? --- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1698166586968237>;
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 19 2018 18:33:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

स्वप्न झरे फूल से,
मीत चुभे शूल से,
लुट गए सिंगार सभी बाग के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
.
नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई,
पाँव जब तलक उठें कि ज़िन्दगी फिसल गई,
पात-पात झर गए कि शाख़-शाख़ जल गई,
चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई,
गीत अश्क बन गए,
छंद हो दफन गए,
साथ के सभी दिए धुआँ-धुआँ पहन गए,
और हम झुके-झुके,
मोड़ पर रुके-रुके,
उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे।
.
क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा,
क्या सुरूप था कि देख आइना सिहर उठा,
इस तरफ़ ज़मीन और आसमाँ उधर उठा
थाम कर जिगर उठा कि जो मिला नज़र उठा,
एक दिन मगर यहाँ,
ऐसी कुछ हवा चली,
लुट गई कली-कली कि घुट गई गली-गली,
और हम लुटे-लुटे,
वक़्त से पिटे-पिटे,
साँस की शराब का खुमार देखते रहे।
कारवाँ गुजर गया, गुबार देखते रहे।
.
हाथ थे मिले कि जुल्फ चाँद की सँवार दूँ,
होंठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ,
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ,
और साँस यों कि स्वर्ग भूमि पर उतार दूँ,
हो सका न कुछ मगर,
शाम बन गई सहर,
वह उठी लहर कि ढह गए किले बिखर-बिखर,
और हम डरे-डरे,
नीर नयन में भरे,
ओढ़कर कफ़न, पड़े मज़ार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
.
माँग भर चली कि एक, जब नई-नई किरन,
ढोलकें धुमुक उठीं, ठुमुक उठे चरन-चरन,
शोर मच गया कि लो चली दुल्हन, चली दुल्हन,
गाँव सब उमड़ पड़ा, बहक उठे नयन-नयन,
पर तभी ज़हर भरी,
गाज एक वह गिरी,
पोंछ गया सिंदूर तार-तार हुईं चूनरी,
और हम अजान-से,
दूर के मकान से,
पालकी लिए हुए कहार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे।
.
"नीरज"
.
==============

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jul 22 2018 06:01:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस वीडियो में बीजेपी के शीर्ष नेता मोहन भागवत कहते पाए गए है कि -- "मैं कुछ बोलूंगा तो मेरी नौकरी चली जाएगी" !!! 30 सेकेण्ड का यह वीडियो देखें।
.
मुझे नहीं पता कि यह वीडियो वास्तविक है या इसके साथ छेड़छाड़ की गयी है !!
.
यह वीडियो मेरे जैसे उन लोगो के लिए भी एक झटके कि तरह है जो यह बात वर्षो से जानते है कि संघ=बीजेपी , आपा , कोंग्रेस आदि पार्टियों के सभी शीर्ष नेता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के लिए काम करते है। लेकिन अब तक हम यह मानते थे कि ये सभी लोगो एक "अनुबंध" के तहत उनकी मातहती में है , न कि "वेतनभोगी कर्मचारी" !!!
.
इस वीडियो की विश्वसनीयता मालूम करने के लिए इसे अपने फेसबुक एवं व्हाट्स एप एकाउंट पर साझा करें ताकि स्पष्टीकरण सामने आ सके।
.
============

Narayan Sharma:

नरेन्द्र मोदीने गौरक्षकोको गुडा कहा तब मोहन भागवतजी चुप रहे थे,
तब आज सोमनाथमे पत्रकारोके प्रश्न पुछेजाने पर भागवतजी बोलेकी मे कुछ बोलुगातो मेरी नोकरी चली जाऐगी।
तो भागवतजीशे हम पुछते हे की आप कहा ओर कौनशी नोकरी कर रहे है।
संघके प्रचारको अब नोकरी करने लगे है क्या ?

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jul 22 2018 09:07:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

1954 में बनी अकिरा कुरोसोवा कि महान फिल्म "सेवेन समुराई" ( शोले जिसका रीमेक है ) betrayal by beneficiaries के बारे में बताती है।
.
एक गाँव डाकुओ के गिरोह से पीड़ित है। वे लड़ना नहीं चाहते। अत: 7 जरायम पेशा योद्धाओ को रोटीयों के बदले अपनी जंग लड़ने के लिए किराए पर ले आते है। लेकिन उनके पास समुराई को अनुबंधित द्रव्य देने कि भी हैसियत नहीं है। किन्तु समुराई जंग लड़ने का फैसला करते है। एक लम्बी लड़ाई के बाद समुराई योद्धा डाकुओ का सफाया कर देते है जिसमे 4 समुराई योद्धा भी मारे जाते है। लेकिन डाकुओ के भय से मुक्त होते ही गाँव के लोग अपने पैदाइशी टुच्चेपन पर लौट आते है , और बचे हुए समुराई योद्धाओ को गाँव छोड़कर जाना पड़ता है। उनके लिए वहां कोई जगह नहीं है।
.
बाद में लगभग सभी देशो में इस थीम पर फिल्मे बनायी गयी और आज भी इस थीम पर लगातार फिल्मे बनायी जाती है। आपराधिक प्रष्ठभूमि पर बनने वाली फिल्मो में यह सबसे ज्यादा लोकप्रिय विषय है। लेकिन किसी भी फिल्मकार ने seven samurai के अंत को नहीं दोहराया। क्योंकि इस फिल्म का अंत कठोर यथार्थ है , व दर्शको के हाजमे के खिलाफ पड़ता है।
.
शोले में वीरू बसंती के साथ वापिस शहर लौटने के लिए ट्रेन पर सवार हो जाता है। उसे विदाई देने के लिए प्लेटफोर्म पर सिर्फ ठाकुर खड़ा है। शेष गाँव वाले अपने अपने रोजगार में व्यस्त है। वीरू गाँव में ही रह जाना चाहता था। किन्तु जंग जीत जाने के बाद वीरू के लिए यही बेहतर है कि वह गाँव छोड़ दे। यदि गब्बर जेल से फिर छूट आता है तो वीरू को फिर से बुला लिया जाएगा !!
.
( वास्तविक कथा में गब्बर ओम शिवपुरी ( पुलिस अधिकारी ) और जज को पैसा देकर फिर छूट जाता है और आकर ठाकुर के पैर भी काट देता है। गाँव वाले वीरू को फिर से बुलाते है , लेकिन बसंती वीरू को लौटकर जाने से मना कर देती है। )
.
===========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jul 23 2018 05:13:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

"भारत में नेताओ की गुंडई का ईमानदार पुलिस अधिकारी द्वारा प्रतिरोध" विषय पर RGV प्रोडक्शन कि फिल्म "शूल" यथार्थ के सबसे करीब है।
.
एक ईमानदार पुलिस अधिकारी स्थानीय विधायक की गुंडई का प्रतिरोध करना शुरू करता है, लेकिन विधायक डीजीपी से कह कर उसे सस्पेंड करवा देता है। विधायक के गुंडों से मारपीट के दौरान नायक की बेटी की मौत हो जाती है और उसकी बीवी आत्महत्या कर लेती है। बाप नायक को समझाता है कि उसे यदि नौकरी करनी है तो विधायक के आगे घुटने टेककर माफ़ी मांग लेनी चाहिए। सारा शहर , सारा पुलिस स्टाफ और सारी विधानसभा जानती है कि विधायक नायक पर जुल्म कर रहा है। लेकिन सब निरुपाय है। कोई मार्ग न देखकर नायक विधानसभा में जाकर विधायक को गोली मारकर सरेंडर कर देता है।
.
लेकिन अन्य फिल्मो के तरह ही इस फिल्म में भी अंतिम रील में निर्देशक ने फ़िल्मी नौटंकी डाल दी है। जहाँ नायक विधायक को गोली मारकर जयहिंद के नारे लगा देता है। वास्तविक कथा में जब नायक विधायक को गोली मारने के लिए विधानसभा में प्रवेश करने की कोशिश करता है तो विधायक के सुरक्षाकर्मी उसे गोली मार देते है , और उसे आतंकी का टेग दे दिया जाता है। बाद में अमुक विधायक मंत्री बन जाता है।
.
-----
.
भारत में पुलिस अधिकारीयो को एपोइंट करने , प्रमोट करने , सस्पेंड करने और डिमोट करने का अधिकार नेताओं के पास है। अत: पूरा पुलिस विभाग अपना कैरियर चमकाने के लिए नेताओं कि चमचई करता है। क़ानून कहता है की उन्हें नागरिको के हितो के लिए काम करना चाहिए। किन्तु वे ऐसा नहीं करते। क्योंकि वे यह बात जानते है कि नागरिको के पास उन्हें एपोइंट करने , प्रमोट करने , सस्पेंड करने और डिमोट करने का अधिकार नहीं है। यदि हमें ईमानदार एवं प्रजा हित में कार्य करने वाले पुलिस अधिकारी चाहिए तो इस व्यवस्था को बदलना होगा। जाहिर है , इस बारे में बालीवुडिया फिल्मे नहीं बताएगी।
.
नीचे एक प्रस्तावित प्रक्रिया दी गयी है , जिसे गेजेट में प्रकाशित करने से जिले के पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने का अधिकार जिले के नागरिको को मिल जाएगा। इस व्यवस्था के आने से पुलिस विभाग नेताओं के चंगुल से आजाद हो जाएगा और प्रजाहित के लिए कार्य करेगा। यदि पुलिस प्रमुख कोताही बरतता है तो जिले नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उसे नौकरी से निकाल कर किसी अन्य ईमानदार अधिकारी को अपना नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकेंगे।
.
राईट टू रिकॉल - पुलिस प्रमुख ( Rtr-SP ) के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट की कुंजी :
.
(1) उम्मीदवारी - 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या राज्‍य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक / सांसद या पार्षद / जिला पंचायत सदस्‍य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के उम्‍मीदवार के रूप में अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करवा सकेगा।
.
(2) मतदाताओ द्वारा स्वीकृती - जिले का कोई भी मतदाता अपनी पसंद के अधिकतम 5 उम्मीदवारो को SP के लिए स्वीकृत कर सकता है।
.
(3) स्वीकृति दर्ज करना - मतदाता किसी भी दिन किसी भी उम्मीदवार को स्वीकृत कर सकते है या किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में दी गयी स्वीकृति रद्द कर सकते है।
.
(4) स्वीकृति दर्ज करने के तरीके - मतदाता पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ / नहीं दर्ज कर सकते है , या मोबाईल एप द्वारा या अपने रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर से SMS करके या ATM से भी अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकते है।
.
(5) स्वीकृतियों का प्रदर्शन - प्रत्येक मतदाता द्वारा दर्ज हाँ / नहीं को मतदाता संख्या, नाम और उसके द्वारा स्वीकृत उम्मीदवारों के नाम के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा।
.
(6) SP की नियुक्ति - यदि कोई उम्‍मीदवार जिले के सभी मतदाताओं के 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्‍त कर लेता है तो मुख्‍यमंत्री उसे जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला SP नियुक्‍त कर सकते है , या नहीं भी कर सकते है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
.
7) राज्‍य के सभी नागरिक मतदाताओं के 51 प्रतिशत मतदाताओं के अनुमोदन से मुख्‍यमंत्री किसी जिले में इस कानून को 4 वर्षों के लिए हटा सकते है, और अपने विवेक से उस जिले में अपनी पसंद का जिला पुलिस प्रमुख की नियुक्‍त कर सकते है।
.
------
.
प्रभाव - इस प्रक्रिया के आने से मतदाता सीएम को बता सकेंगे कि वे अमुक भ्रष्ट SP को हटाकर अमुक व्यक्ति को SP बनाना चाहते है। इस प्रक्रिया के आने के बाद पुलिस प्रमुख यदि भ्रष्ट आचरण करता है और क़ानून व्यवस्था में सुधार नहीं लाता है तो नागरिक उसे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बदल सकेंगे।
.
गेजेट में प्रकाशित होने के लिए तैयार पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें -- fb.com/668820996629431
.
==========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jul 23 2018 06:18:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

लोकतंत्र की मेरी परिभाषा :
.
साम्यवाद , उदारवाद , पूंजीवाद , राष्ट्रवाद आदि की तरह ही लोकतंत्र भी एक वाद है। वाद मतलब -- जिसकी कोई सर्वमान्य परिभाषा न हो , जिसकी अपने मन मुताबिक़ व्याख्या की जा सके, जिसमे आदर्श एवं अव्यवहारिकता का अजीब घालमेल हो , जिसको लागू करने की कोई प्रक्रिया न हो। कुल मिलाकर लोगो को कन्फ्यूज करने और अपनी बौद्धिकता का आतंक जमाने के लिए की गयी शुद्ध दार्शनिक राजनैतिक बकवास। माने फुल सर्कस !!
.
मैं बहुधा लोकतंत्र शब्द का इस्तेमाल करता हूँ। अत: मैं जब "लोकतंत्र" कहता हूँ तो मेरा इस लफ्ज से आशय क्या है उसकी परिभाषा नीचे दी गयी है। यह परिभाषा राजनीति विज्ञान की किताबों में लिखी गयी लोकतंत्र की परिभाषा की बकवास ( 'जनता का जनता के लिए जनता द्वारा' ) से भिन्न है।
.
लोकतंत्र की परिभाषा एवं इसकी प्रक्रिया -
.
इन पांच प्रक्रियाओं से युक्त व्यवस्था को लोकतंत्र कहा जाता है --- १) इलेक्शन , २) रिकॉल , ३) रेफरेंडम , ४) ज्यूरी ट्रायल , ५) हथियार बंद नागरिक समाज
.
१) लोक = नागरिको के पास नोड़ल अधिकारियो एवं प्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार होना चाहिए।
२) नागरिको के पास बहुमत का प्रदर्शन करके नोड़ल अधिकारियो एवं प्रतिनिधियों को किसी भी समय नौकरी से निकालने का अधिकार होना चाहिए।
३) नागरिको के पास जिला, राज्य एवं केंद्रीय स्तर पर जनमत प्रक्रियाएं होनी चाहिए।
४) दंड देने की शक्ति नागरिको के पास होनी चाहिए।
५) नागरिको के पास बन्दुक रखने का अधिकार होना चाहिए।
.
इन प्रक्रियाओ को लागू करने के लिए जिन क़ानून ड्राफ्ट्स को गेजेट में प्रकाशित करने की जरूरत है उन्हें देखने के लिए इस लिंक पर जाएँ -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
.
भारत में ऊपर दिए गए 5 बिन्दुओ में से नागरिको के पास सिर्फ एक ही प्रक्रिया है, शेष नदारद है। अत: भारत में लोकतंत्र कि जगह छद्म लोकतंत्र या लोकतंत्र का विकृत रूप है।
.
==============

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 25 2018 08:07:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब के शिक्षा मंत्री मोदी साहेब के कालजयी उपदेश का जश्न मनाते हुए !! साहेब "सिद्ध योगी" भी है। उन्हें यह आत्मज्ञान हाल ही में हुआ था। इस रहस्योद्घाटन से श्रद्धालु लाभान्वित होंगे !!
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jul 27 2018 19:21:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

"न्याय में देर है अंधेर नहीं है" --- यह कहावत एक अन्यायी एवं दोषपूर्ण व्यवस्था का औचित्य साबित करने की दार्शनिक कोशिश है। यह डायलोग एक प्रकार से उन करोडो वादीयो का मजाक भी उड़ाता है, जो बरसो से अदालतों में चक्कर लगा रहे है। इस तरह की कहावतें इसीलिए प्रचलित की गयी है ताकि अवाम के बरसो तक धूल फांकने के बावजूद मिले विलम्बित न्याय को महिमामंडित किया जा सके। यथार्थ यह है कि अपराधियों को दंड मिलने में जितनी देरी होती है , अपराधियों के हौंसले उतने ही बुलंद होते जाते है। अपराध की रोकथाम के लिए तवरित दंड जरुरी है। हालाँकि "न्याय में देर है अंधेर नहीं है" ईश्वरीय दंड के सम्बन्ध में प्रयुक्त होता है। मतलब जब व्यवस्था असफल रहेगी तो ईश्वर दंड देगा। व्यवस्था द्वारा दिया गया दंड त्वरित होता है और इसे त्वरित ही होना चाहिए।
.
भारत में कुल 3 करोड़ से ज्यादा मुकदमे अदालतों में लंबित है !! हमारे देश में जजों कि संख्या कुल 20 हजार है , चीन में यह संख्या 2 लाख है !! जबकि अमेरिका-ब्रिटेन में ज्यूरी सिस्टम होने के कारण किसी भी मुकदमे का फैसला हफ्ते दो हफ्ते में ही आ जाता है। "न्याय में देरी" उस कारखाने मालिक को तबाह कर देती है जिसकी फेक्ट्री फर्जी मुकदमो के कारण बंद पड़ी है और जब तक फैसला आता है तब तक वह कभी न उबरने वाले घाटे में डूब चुका होता है !!
.
समाधान -- ज्यूरी सिस्टम, राइट टू रिकॉल जज के क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए। एवं भारत में जजों कि संख्या बढाकर 2 लाख की जाए।
.
इन क़ानूनो के प्रस्तावित ड्राफ्ट्स इस लिंक पर देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
.
-------
.
another example of wrongful saying is -- we want justice !!
dont say we want justice, say -- "we want to give justice" . jury system will bring this choice.
.
=========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jul 27 2018 20:39:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

एक नयी समस्या जो भारत में लगातार बढ़ रही है। भारत में शिक्षा का प्रसार होने से भारत की राजनैतिक व्यवस्था में सुधार आने की संभावनाएं कमजोर होती जा रही है। जैसे जैसे शिक्षा का स्तर और दायरा बढ़ेगा, वैसे वैसे स्थिति और भी बदतर होती चली जायेगी।
.
क्योंकि शिक्षित व्यक्तियों में से ज्यादातर लोग कई माध्यमो से अफीम का सेवन करने लगते है -- वे अखबार खाते है , मेगजीन पीते है, समाधान बताने की जगह राजनैतिक समस्याओं की व्याख्या करने वाले पेड बौद्धिक लेखको की किताबो की जुगाली करते है , इसी प्रकार के पेड ( कचरा ) लेखको की स्पीचे सुनते है और इसी रौ में खुद को जागरूक और सामने वाले को भेड़-बकरा मानकर चलते है। वे अपनी पूरी खुराक इसी लुगदी साहित्य से पूरी करते है। और इस मलबे की बुनियाद में उन सैंकड़ो किताबो की तह जमी रहती है, जो वे अपनी शिक्षा पूरी करने के दौरान पढ़ते है। जैसे जैसे इनकी उम्र और शिक्षा बढती जाती है मलबे का यह पहाड़ भी बढ़ता जाता है। इनके कोमन सेन्स को यह वजन पूरी तरह से आच्छादित कर लेता है। फिर जब भी ये कुछ उगलते है तो उनका स्त्रोत यही कबाड़ होता है। कला वर्ग के शिक्षितों के हालात इस मामले में सबसे ज्यादा शोचनीय है। ज्यादातर अशिक्षित व्यक्ति इस मलबे से वंचित होने के कारण यथार्थ से जुड़े रहते है।
.
यथार्थ से जुड़े होने के कारण अशिक्षित व्यक्ति यह बात जल्दी समझ जाते है कि देश कि व्यवस्था में क्या दोष है और इसे किस तरह से सुधारा जा सकता है। लेकिन पढ़ लिख गए लोगो को सरल समाधान से एक तरह का परहेज होता है। उनकी रुचि राजनितिक समस्याओं को दर्शन और बौद्धिक विलास से जोड़ देने में अधिक होती है। और टुच्चेपन में इनका स्तर इतना गिरा हुआ होता है कि देश के खराब हालात के लिए अशिक्षितों को जिम्मेदार ठहराने का ये कोई मौका नहीं चूकते। इस विषय पर फिर कभी विस्तार से लिखा जायेगा।
.
समाधान - राईट टू रिकॉल मानव संसाधन मंत्री एवं शिक्षा मंत्री का क़ानून आने से पाठयपुस्तको के माध्यम से पिलाई जा रही अफीम पर रोक लगाई जा सकती है , एवं राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष का क़ानून मीडिया द्वारा परोसे जाने वाले नशे पर रोक लगा देगा। इसके अलावा शेष फुटकर नशे के कारोबारियों को साधने के लिए जूरी सिस्टम भी आवश्यक है।
.
इन क़ानूनो के प्रस्तावित ड्राफ्ट्स इस लिंक पर देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
.
===========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jul 27 2018 21:59:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि आप प्रधानमंत्री बन जाते है तो सबसे पहला काम क्या करेंगे ?
.
सबसे पहले मैं "राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री" के क़ानून का विरोध करना शुरू करूँगा। मैं नागरिको को समझाऊंगा कि राइट टू रिकॉल से देश में अस्थिरता आ जायेगी, और देश तबाह हो जायेगा।
.
आप "राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री" का विरोध क्यों करेंगे ?
.
क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में मुझे सिर्फ 300 सांसदों को संभालना होता है। तो उनके साथ गठजोड़ बनाकर निश्चिन्त हो सकता हूँ । फिर जनता हमारे साथ है के नारे दोहराकर जैसे मर्जी वैसे शासन करो। जनता साथ न भी हो 5 साल तक मेरा कुछ उखाड़ नहीं सकती। लेकिन "राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री" का क़ानून यदि लागू हो जाता है तो मेरे डोरे 90 करोड़ नागरिको के हाथो में चले जाएंगे। मैं नागरिको के अधीन काम नहीं करना चाहता। तब मुझे प्रजाहित के लिए काम करना पड़ेगा। वर्ना जनता मुझे लात मारकर नौकरी से निकाल देगी।
.
तो फिर आप अभी "राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री" क़ानून की मांग क्यों कर रहे है ?
.
क्योंकि मैं अभी प्रधानमंत्री नहीं हूँ। नागरिक हूँ। अभी नागरिक हूँ तो मैं अपने अधिकार और शक्ति बढ़ाना चाहता हूँ। तब की बात और होगी।
.
( इस कथ्य से यह पता चलता है कि हमारे प्रधानमंत्री भी एक "चतुर" व्यक्ति है !! )
.
==========
.
राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859858050859057>;
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jul 28 2018 06:45:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

ज़हालतो के सारे अँधेरे मिटाकर लौट आया
मैं आज सारी किताबें जला कर लौट आया -- 'राहत इन्दोरी'
.
हालांकि , शेर, ग़ज़ल, काव्य आदि गंभीर विषय को भी रूमानी बनाकर पेश करने के लिए कुख्यात है , किन्तु मेरे मानने में यह शेर एकदम सच्चा है। एक कैफियत यह दी जानी जरुरी है कि इन किताबों में गणित-विज्ञान-तकनीक की पुस्तकों को छोड़ते हुए कक्षा 5 से कोलेज में पढाई जाने वाली सभी पाठ्यपुस्तके शामिल है। शिक्षा का स्तर जैसे जैसे बढ़ता जाता है , जहालत यानी अशिक्षा एवं मूढ़ता के अँधेरे और भी घने होते जाते है। और इनमे पाठयपुस्तको से इतर वे पुस्तके विशेष रूप में शामिल है जिनका विषय सामाजिक सौद्देश्य एवं राजनीतिक होता है। और राजनितिक विज्ञान, समाज शास्त्र , अर्थशास्त्र एवं इतिहास की पुस्तके इनमे सबसे कुख्यात है।
.
एक उम्र निकल जाती है इससे उभरने में। क्योंकि पाठक को लगता है कि वह इन्हें पढ़कर ज्ञान हासिल कर रहा है। उसे इस बात का इल्म ही नहीं होता कि शासको को उन्हें ज्ञानी बनाने में कोई रूचि नहीं है। वे उन्हें जाहिल बनाए रखना चाहते है , ताकि उन्हें शासित किया जा सके। यदि अवाम में बोध विकसित हो गया तो उन पर अनुचित रूप से शासन करना मुमकिन नहीं रह जाएगा। यदि अवाम को कचरा किताबें उपलब्ध नहीं कराई जायेगी तो वे अपना दिमाग भिड़ाना शुरू कर देंगे। इसीलिए उनकी जिज्ञासा शांत करने और उनका भ्रम बनाए रखने के लिए इस कचरे का उत्पादन किया जाता है। इस तरह अवाम को शिक्षा देने का चूपा देकर अशिक्षित रखा जाता है।
.
इसी विषय पर एक सम्बंधित लेख यहाँ देखें -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1722953651156197>;

=========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jul 28 2018 22:32:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राजस्थान के कवि “सम्पत सरल” की राईट टू रिकाल पर टिप्पणी — कृपया 3 मिनिट से 3:30 तक की अवधी का विडियो देखें ।
.
मेरी जानकारी में यह दूसरी बार है जब सम्पत सरल ने राईट टू रिकाल की ज़रूरत बतायी है ।
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jul 29 2018 21:37:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

न्यू इंडिया ( newindia. in ) पोर्टल शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद।
.
न्यू इंडिया वेबसाईट को मोदी साहेब ने अगस्त 2014 में शुरू किया था। इससे पहले ऐसा कोई मंच नहीं था जहाँ व्यक्ति अपना सुझाव पीएम के सामने रख सके। लेकिन अब ये व्यवस्था उपलब्ध है। इस वेबसाईट पर कोई भी व्यक्ति अपने विस्तृत सुझाव का पीडीऍफ़ डाउनलोड कर सकता है। पीएम किसी सुझाव पर अमल करेंगे या नहीं यह उन पर निर्भर है , किन्तु कम से कम अब व्यक्ति अपना सुझाव सीधे पीएम को भेज सकते है। वो भी त्वरित गति से।
.
न्यू इण्डिया पर सुझाव / प्रस्ताव रखने का तरीका :
.
1) mygov पर आई डी बनाकर लॉग इन करें
.
2) अपने लिखित सुझाव का पीडीऍफ़ बनाकर newindia पर इसे सम्बंधित वर्ग में डाउनलोड करें।
.
3) प्रपोजल अपलोड करने के बाद आप इसका लिंक अपनी फेसबुक एवं ट्विटर वाल पर शेयर कर सकते है।
.
उदाहरण के लिए यह लिंक देखें --<https://newindia.in/causes/twochildlaw5/>;
.
------
.
न्यू इण्डिया पर रखे गए किसी प्रस्ताव पर वोटिंग करने की प्रक्रिया :
.
न्यू इण्डिया में एक फीचर और है। यदि कोई व्यक्ति newindia पर रखे गए किसी प्रस्ताव से सहमत है तो वह इस प्रस्ताव पर अपना वोट कर सकता है। यदि आपने newindia पर आई डी नहीं बनायी है तो वोट करने के लिए पहले आपको अपनी आई डी बनानी होगी। यदि आपने आई डी बना ली है तो आप लॉग इन करके किसी भी प्रस्ताव पर वोट कर सकते है, एवं इस प्रस्ताव को अपने फेसबुक / ट्विटर वाल पर शेयर कर सकते है।
.
उदाहरण के लिए इस प्रस्ताव पर वोट करके देखें -- <https://newindia.in/causes/twochildlaw5/>;
.
-------
.
newindia के लाभ :
.
1) सुझाव आमंत्रित करने के लिए newindia भारत सरकार एवं प्रधानमंत्री कि अधिकृत वेबसाईट है। एवं इसे इसीलिए शुरू किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति अपना सुझाव त्वरित गति से भारत के प्रधानमंत्री के सम्मुख रख सके। यह पूरी तरह से निशुल्क है।
.
2) newindia पर किसी सुझाव पर वोट भी किया जा सकता है।
.
3) newindia पर रखे गए प्रस्ताव को प्रस्तावक द्वारा न तो एडिट किया जा सकता है और न ही इसे डिलीट किया जा सकता है। इससे प्रस्ताव कि विश्वसनीयता बनी रहती है।
.
newindia की मुख्य कमियां :
.
1) newindia में आधार कार्ड के साथ साथ फेसबुक , ट्विटर , इ मेल आदि से भी लॉग इन किया जा सकता है। इस तरह newindia पर की गयी वोटिंग काउंट में विश्वसनीयता नहीं है। एक ही व्यक्ति सैंकड़ो आई डी बनाकर किसी प्रस्ताव पर वोटिंग कर सकता है। अत: नागरिक यह कभी नहीं जान सकते कि किसी प्रस्ताव को समर्थन देने वाले "वास्तविक मतदाताओं" की संख्या क्या है।
.
किन्तु उल्लेखनीय है कि newindia में आधार कार्ड से लॉग इन करने का भी विकल्प है। अत: यदि प्रधानमंत्री चाहे तो यह जान सकते है कि किसी प्रस्ताव को कितने वास्तविक लोगो ने समर्थन दिया है।
.
2) newindia पर एक बार वोट करने के बाद अपना वोट बदला नहीं जा सकता।
.
3) newindia सिर्फ केन्द्रीय स्तर पर उपलब्ध है, राज्यों एवं जिला स्तर पर नहीं।
.
4) सरकार खुद ही इसे प्रमोट नहीं कर रही है , अत: यह पोर्टल नामालूम एवं मुख्य धारा से कटा हुआ है। जब तक इस पर यूजर नहीं बढ़ेंगे तब तक इसमें सुधार आने कि गुंजाइश भी नहीं के बराबर है।
.
------
.
हमें केंद्र के साथ साथ राज्य एवं जिला स्तर पर भी जनमत संग्रह की ऐसी प्रक्रिया चाहिए जिससे मतदाता ( न कि व्यक्ति ) अपना सुझाव प्रधानमन्त्री एवं नागरिको के सम्मुख रख सके एवं किसी प्रस्ताव पर अपना समर्थन / विरोध दर्ज करवा सके। newindia यह सुविधा तो देता है कि आप पीएम के सम्मुख अपनी मांग रख सके , किन्तु यह व्यवस्था नहीं देता जिससे यह जाना जा सके कि कितने मतदाता अमुक प्रस्ताव के समर्थन या विरोध में है। बहरहाल , मोदी साहेब ने आधा काम तो किया है, और इससे कार्यकर्ताओ को अपनी बात सीधे पीएम तक पहुँचाने की सुविधा मिली है। उन्होंने इसे आधा अधुरा क्यों लागू किया है इस विषय पर किसी अन्य पोस्ट में लिखा जाएगा। दरअसल यह आधा टीसीपी है। टीसीपी का पूरा ड्राफ्ट मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर के डिस्क्रिप्शन में देखें।
.
------
.
newindia को लेकर मेरा रुख :
.
मेरा कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि यदि वे पीएम से कोई मांग करना चाहते है तो इस मागं को लिखित रूप में newindia पर अपलोड करें एवं अन्य नागरिको से इस प्रस्ताव पर वोट करने को कहे। फेसबुक, ट्विटर आदि सरकार द्वारा शुरू किये गए मंच नहीं है, बल्कि नागरिको के आपसी संचार के लिए है। इसीलिए यदि आप पीएम तक कोई मांग पहुँचाना चाहते है तो, सबसे पहले इसे newindia पर रखें , और तब सोशल मीडिया के माध्यम से इस प्रस्ताव का नागरिको में प्रचार करें। यदि आप अपनी मांग का प्रचार सिर्फ नागरिको में करते है किन्तु पीएम को नहीं भेजते है तो आप उस वकील की तरह पेश आ रहे है जो पान के गल्ले पर बढ़ चढ़कर दलीले देता है , किन्तु जज के सामने जाते ही खामोश हो जाता है।
.
जैसे जैसे ज्यादा नागरिक newindia का इस्तेमाल करने लगेंगे वैसे वैसे पीएम पर यह दबाव बनेगा कि वे newindia में सुधार लाये। हमने newindia के माध्यम से प्रधानमंत्री को यह प्रस्ताव भेजा है कि newindia पर लॉग इन के लिए आधार को अनिवार्य किया जाए, तथा newindia पर वोटिंग की सुविधा पटवारी कार्यालय पर भी उपलब्ध कराई जाये , ताकि मतदाता बिना इंटरनेट एवं बिना मोबाइल के भी अपना वोट कर सके।

newindia पर रखा गया यह प्रस्ताव यहाँ देखें -- <https://newindia.in/causes/allowvotingonnewindiaviapatwarioffice/>;
.
===============

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 31 2018 11:53:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

NRC ड्राफ्ट का बांग्लादेशी घुसपेठियो को "खदेड़ने" से कोई लेना देना नहीं है। यह नाटक देश में 2 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठियो को बसाये रखने और उन्हें न खदेड़ने के लिए पिछले कई दशको से चलाया जा रहा है।
.
कोंग्रेस और स्थानीय पार्टियों ने इस मुद्दे पर काफी वोट बटोरे और अब इस मुद्दे को संघ=बीजेपी ने लपक लिया है। प्रचार कुछ इस तरह का है कि NRC ड्राफ्ट बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने के लिए है। जबकि स्थिति इसके बिलकुल उलट है।
.
NRC ड्राफ्ट क्या है ?
.
NRC ड्राफ्ट मतदाताओ की एक सूची है जो यह निर्धारित करती है कि 24 मार्च 1971 तक असम की मतदाता सूचियों में किनका नाम था और किनका नाम नहीं था। बस यह इतना ही है। ड्राफ्ट में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है कि जिन लोगो के नाम इस सूची में नहीं है उन्हें कितने समय में देश से बाहर भेजा जाएगा और उन्हें क्या सजा मिलेगी या उनका क्या किया जाएगा !!
.
सुप्रीम कोर्ट जज रंजन गोगोई ने कहा है कि -- "We will see if it is fair or not. Then only we will decide. If something needs to be done, we will do it," ( मतलब, फाइनल फैसला हम ही करेंगे। )
.
इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी खामी यह है कि बांग्लादेश में हो रहे दमन के कारण अपनी जान बचाकर भारत में शरण लिए हिन्दुओ के लिए इस लिस्ट में कोई अलग से प्रावधान नहीं है। अत: घुसपेठियो और शर्णार्थियो को एक ही तरह से ट्रीट करता है।
.
हमने जो समाधान प्रस्तावित किया है वह इससे ज्यादा बेहतर है , एवं त्वरित गति से काम करेगा। बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार आदि से आने वाले घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को शरण देने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट यहाँ पढ़ें ---- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1454131491371749>;
.
============

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 31 2018 11:57:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

NRC ड्राफ्ट का बांग्लादेशी घुसपेठियो को "खदेड़ने" से कोई लेना देना नहीं है। यह नाटक देश में 2 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठियो को बसाये रखने और उन्हें न खदेड़ने के लिए पिछले कई दशको से चलाया जा रहा है -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1728863313898564>;
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 31 2018 23:35:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राजस्थान के कवि संपत सरल राईट टू रिकॉल की ज़रूरत बताते हुये । 15 मिनिट से 17 मिनिट तक की अवधी का विडियो देखें ।
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 31 2018 23:35:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राजस्थान के कवि संपत सरल राईट टू रिकॉल की ज़रूरत बताते हुये । 15 मिनिट से 17 मिनिट तक की अवधी का विडियो देखें ।
.

Read full post →