Posts for 2020-08

Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 01 2020 05:35:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Gram Raj:

फिल्म में यदि हीरो चोर हो, तो दर्शक चाहते हैं कि वो पकड़ा ना जाए और चोरी भी अच्छी लगती है!

बस यही चल रहा है देश में..

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Aug 02 2020 08:05:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि धावक नेताजी है तो कैमरामेन उनका अंधभगत — चाय से ज़्यादा केतली गरम है !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Aug 02 2020 20:11:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Thank you America ... Thank you France
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(1) 1967 की बात है, तब अमेरिका ने भारत को आने वाली गेंहू की सप्लाई को बाधित कर दिया था। भारत को यह गेंहू Public Law-480 के तहत आता था, और अमेरिका इसे बिना किसी वाजिब कारण के रोक नहीं सकता था। अत: उन्होंने परिवहन प्रक्रिया के झमेले डालकर इसकी सप्लाई तोड़ दी जिससे भारत में गेंहू की कमी हो गयी।
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दरअसल, इस समय अमेरिका विएतनाम पर बम गिरा रहा था, और इंदिरा जी हनोई पर बमबारी करने की आलोचना की थी। और इंदिरा जी के इस बयान से अमेरिकी हथियार निर्माता नाराज हो गये थे !!.
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जब इंदिरा जी ने कहा कि, भारत वही कह रहा है जो पोप एवं यूएन महासचिव कह रहे है, तो अमेरिका ने जवाब दिया कि – पोप एवं यूएन को अपने देश के नागरिको को खिलाने के लिए हमारे गेंहू की जरूरत नहीं है !!
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Public Law-480 के तहत भारत को ये गेंहू लेने के लिए रूपये में भुगतान करना होता था, डॉलर में नहीं। आज की तरह तब भी भारत के पास डॉलर नहीं थे। अत: भारत को अपमान का घूँट पीना पड़ा - Swallowing the humiliation - <http://archive.indianexpress.com/news/swallowing-the-humiliation/645168/>;
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ध्यान देने वाली बात यह है कि, यदि तब यह खबर मीडिया में नहीं आती तो भारत को पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा नहीं होना पड़ता। इस तरह पेड मीडिया किसी देश के प्रधानमंत्री को अपने देशवासियों और पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा होने से बचा लेता है !!
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पाकिस्तान को भी गेंहू अमेरिका ही देता था, और जब शिपयार्ड से गेंहू ऊँट गाड़ियों पर लादकर ले जाया जाता था, तो ऊँटो के गले में तख्तियां लटकायी जाती थी। इस तख्तियों पर बड़े अक्षरों में लिखा होता था – Thank you America !!
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(2) भारत का चीन से युद्ध होता है तो हमें फाइटर प्लेन्स की जरूरत होगी। यदि डॉलर हो तो गेंहू ख़रीदे जा सकते है किन्तु फाइटर प्लेन्स नहीं। क्योंकि फाइटर प्लेन्स गेंहू नहीं है। रूस के अलावा सिर्फ अमेरिकी+ब्रिटिश+फ्रेंच को ही ये बनाने आते है। और ये तीनो देश एक ही ब्लॉक है।
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पेड मीडिया के प्रायोजको ने रफाल पर Thank you America & Thank you France की तख्ती न लटकाकर हमें सार्वजनिक शर्मिंदगी से बचा लिया है। और बदले में पेड मीडिया के प्रायोजक (अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक) हमसे इसकी बड़ी कीमत वसूल रहे है।
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रफाल के साथ 3 समस्याएं है
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(i) रफाल End Use Monitoring Agreement (EUMA) के साथ आया है : मतलब अमेरिकी-फ्रेंच हथियार निर्माता हमें किसी समय किसी देश पर इसके इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देते है तो हम इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
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(ii) रफाल में kill Switch (KS) है : यदि कोई आयातक देश EUMA का उलंघन करता है तो निर्माता देश KS का इस्तेमाल करके हथियार को बंद कर देते है। और फिर रफाल काम नहीं करेगा !!
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(iii) स्पेयर पार्ट्स पर निर्भरता : अगले चरण में वे रफाल के स्पेयर पार्ट्स भेजना बंद कर देंगे, और रफाल पार्किंग स्टेंड में खड़ा रहेगा और कभी उड़ान नहीं भर सकेगा !!
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किसी देश की सेना को नियंत्रित करने का यह सबसे अच्छा तरीका है –
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उनकी सेना में अपने फाइटर प्लेन्स, रडार, हैलिकोप्टर आदि इंस्टाल कर दो। और फिर आप अमुक देश को अपनी उँगलियों पर नचा सकते हो !! दुसरे शब्दों में, रफाल आने के बाद हमारी निर्भरता अमेरिकी-फ्रेंच हथियार निर्माताओं पर और भी बढ़ गयी है !!
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(3) समाधान :
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जैसा कि आप पिछले कुछ दिनों से अपने आस पास देख ही रहे है कि बीजेपी-कोंग्रेस-आपा के शीर्ष नेताओं एवं उनके अंधभगत ऊपर दी गयी समस्या को समस्या की तरह नहीं देखते है। इसीलिए वे EUMA , Kill Switch और Spare Parts की समस्या पर जानबूझकर खामोश है।
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और ठीक है, अभी हमारे पास प्लेन्स नहीं है, और चीन हम पर चढ़ा हुआ है, अत: हम चाहे या न चाहे हमें अमेरिका या रूस में से किसी देश से तो तत्काल में फाइटर प्लेन्स लेने ही पड़ेंगे। तो इस स्थिति में रफाल खरीदने को लेकर मेरा विरोध नहीं।
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लेकिन कोंग्रेस-बीजेपी-आम आदमी पार्टी के नेता एवं उनके समर्थक उन आवश्यक कानूनों की चर्चा को क्यों टाल रहे है, जिन्हें लागू करके हम स्वदेशी हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर सके !! उलटे वे नागरिको में यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे है, कि रफाल के आने से भारत की सेना मजबूत हो गयी है। और वे यह जानबूझकर छिपा रहे है कि, इसी के साथ हम अमेरिकी-फ्रेंच हथियार निर्माताओ पर और भी निर्भर हो गए है।

बहरहाल, यदि आप इसे समस्या के रूप में देखते है तो इसका समाधान प्रस्तावित वोइक (WOIC) क़ानून द्वारा किया जा सकता है। यदि वोइक एवं जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छाप दिया जाता है तो भारत Made in India & Made by Indians की नीति पर चलते हुए अगले कुछ ही वर्षो में स्वदेशी तकनीक आधारित लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता जुटा लेगा।
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EUMA , Kill Switch और Spare Parts की समस्या के बारे में विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है, कृपया इसे पढ़ें -
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<https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/860309497675462/>;
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#WOIC , #JuryCourt
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 03 2020 20:07:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जूरी कोर्ट एवं वोट वापसी पासबुक की मांग सिर्फ 3 स्थितियों में आगे बढ़ेगी :
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(1) जब जूरी कोर्ट क़ानून के ज्यादा से ज्यादा समर्थक 5 तारीख को 5 बजे पीएम को पोस्टकार्ड भेजेंगे, और इसकी फोटोकॉपी अपने रजिस्टर में रखेंगे।
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(2) जब जूरी कोर्ट क़ानून के ज्यादा से ज्यादा समर्थक चुनावों में आयेंगे
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(3) जब जूरी कोर्ट क़ानून के प्रत्याशीयों का वोट काउंट बढ़ेगा।
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यदि उपरोक्त 3 में से कोई एक संख्या बढ़ रही है, तो इसका मतलब है कि मांग आगे बढ़ रही है। यदि उपरोक्त 3 बिन्दुओ की संख्या स्थिर है तो इसका आशय है कि, मांग आगे नहीं बढ़ रही है। वैसे व्यवहारिक रूप से देखा जाए तो इनमें से किसी एक संख्या के बढ़ने से शेष 2 संख्याएँ अपने आप बढ़ने लगेगी।
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5 अगस्त 2020 को सांय 5 बजे पीएम को पोस्टकार्ड भेजे। मैं 2 पोस्टकार्ड भेजूंगा :
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(1) लॉकडाउन समाप्त करें
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(2) भीलवाड़ा में बिजली का काम सिक्योर कम्पनी से लेकर पुन: RSEB को दिया जाए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Aug 05 2020 06:58:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास की शुभकामनाएं
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हमारा प्रस्ताव है कि प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड का गठन करके यह मंदिर राष्ट्रिय हिन्दू बोर्ड के नियंत्रण में दे देना चाहिए। यदि प्रधानमंत्री यह मंदिर हिन्दू बोर्ड को सौंप देते है तो मंदिर की संपत्ति एवं आने वाले दान का प्रबंधन ज्यादा बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।
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(और हमारा यह प्रस्ताव नया नहीं है. 2003 में ही हमने यह प्रस्ताव सार्वजनिक कर दिया था)
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अन्यथा, आगे चलकर इस मंदिर के भी सरकारी नियंत्रण में जाने की सम्भावना बढ़ जायेगी। और सरकारी नियंत्रण में जाते ही सरकारें मंदिर की संपत्ति उसी तरह लूटना शुरू कर देगी जैसे आज अन्य संपत्तिशाली मंदिरों को लूट रही है।
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हिन्दू बोर्ड एक प्रस्तावित ट्रस्ट है, जिसका मुखिया "संघ प्रधान" होगा और हिन्दू धर्म के मंदिरों में आने वाले दान का प्रबंधन करेगा। प्रत्येक हिन्दू (लगभग 90 करोड़) इस बोर्ड का मतदाता सदस्य होगा।
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यदि हिन्दू संघ प्रधान ठीक से काम नहीं कर रहा है तो हिन्दू नागरिको को यह अधिकार होगा कि वे उसे बदल सके। इसके अलावा हिन्दू बोर्ड के गठन के बाद मंदिरों की संपत्ति या स्वामित्व को लेकर कोई भी विवाद होता है तो मामले की सुनवाई हिन्दू नागरिको की जूरी करेगी जज नहीं।
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हिन्दू बोर्ड का पूरा ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2241776019273955>;
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हिन्दू बोर्ड से सम्बंधित अन्य पोस्ट के लिए यह एल्बम देखें - <https://www.facebook.com/groups/860298764343202/post_tags/?post_tag_id=1099827697056973&ref=rhc_tag>;
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#HinduBoard

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Aug 05 2020 18:22:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

5-8-2020 ; आज मुख्यमंत्री को 2 पोस्टकार्ड भेजे गए :
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(1) लॉकडाउन सम्पूर्णतया समाप्त करें - #EndLockdownTotally
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(2) सिक्योर कम्पनी का अनुबंध रद्द करके भीलवाड़ा बिजली बोर्ड (AVNL) का राष्ट्रीयकरण करें - #ExpelSecureCompany , #NationaliseAvnlBhilwara
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 07 2020 08:59:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 07 2020 18:12:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

90 सेकेंड वीडियो देखें :
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मुझे लगता है कि महिला किसी अपराध आदि की आरोपी नहीं है।
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लेकिन शायद कोरोना योद्धाओ को यह शुबहा है कि वह कोरोना पॉजिटिव है। लेकिन वह ठीक ठाक नजर आ रही है और अस्पताल नहीं जाना चाहती।
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ध्यान देने वाली बात यह है कि, पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी सिर्फ उन कानूनों के पालन कर रहे है जो क़ानून सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने गेजेट में छापे है और इन नेताओं के सभी अंधभगत, कोंग्रेस-बीजेपी-आपा के सभी नेता एवं कार्यकर्ता पूरा दम लगाकर इन कानूनों के समर्थन में है।
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तो इस तरह सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभगतो द्वारा समर्थित कानूनों का इस्तेमाल करके पुलिसकर्मी और कोरोना योद्धा उसे अस्पताल ले जा रहे हैं। वह और उसके बच्चे चिल्ला रहे हैं, लेकिन कोरोना योद्धा उसे अस्पताल में घसीट रहे है !!
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मेरे अनुमान में यह हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र होना चाहिए। क्योंकि मुस्लिम क्षेत्रों में, ज्यादातर सम्भावना है कि मुस्लिम इन कोरोना योद्धाओ को घेर लेते और जबरिया इस तरह घसीट कर अस्पताल में ले जाने का विरोध करते।
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( Gathering Vs Paid Media )
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 07 2020 18:51:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कोरोना का सारा ज्ञान इस निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए है कि --
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(1) कोरोना को रोकने का लॉकडाउन से उतना ही सम्बन्ध है, जितना काला धन रोकने का नोटबंदी से था।
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(2) असली समस्या लॉकडाउन है न कि कोरोना। और लॉकडाउन मानव जनित समस्या है, दैवीय नहीं।
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(3) लॉकडाउन सिर्फ इसीलिए है क्योंकि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री लॉकडाउन चाहते है।
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(4) अभी तक लोगो ने जो भी नुकसान उठाया है उसकी वजह लॉकडाउन है न कि कोरोना।
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(5) वे कोरोना को लॉकडाउन द्वारा रोकने का बहाना बनाकर इकोनॉमी को तोड़ रहे है, जिससे छोटी इकाइयां बाजार से बाहर हो जायेगी, और बड़ी कम्पनियो (विदेशियों) का हिस्सा बढ़ जाएगा। और वे ऐसा जानबूझकर कर रहे है !!
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और शेष वैक्सीन, मास्क, डी पोपुलेशन आदि की बहस जाया तौर पर लॉकडाउन से ध्यान हटाने का काम कर रही है. क्योंकि वे चाहते है कि कार्यकर्ताओ का ध्यान कोरोना पर रहे, न कि लॉकडाउन पर !!
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और जब आप इस बात को समझ जाते है तो आपको प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री को लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने के लिए कहना चाहिए।
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यदि आप लॉकडाउन समाप्त करने के लिए पीएम / सीएम को कहना नहीं चाहते तो कोरोना का जितना भी ज्ञान आप भकोस रहे है या लोगो को बाँट रहे है उसके कोई मायने नहीं है।
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पीएम / सीएम को कहने का क्या तरीका होना चाहिए ?
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इस बारे में आप खुद तय कर सकते है। मेरा सुझाव है कि आपको प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड भेजना चाहिए। और लॉकडाउन समाप्त करने का पोस्टकार्ड 'किसी भी दिन' भेजा जा सकता है. यदि आप पोस्टकार्ड भेजने में सक्षम नहीं है तो कम से कम ट्विट भेजें।
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( किन्तु सबकुछ जानते हुए भी यदि आप पीएम / सीएम को लॉकडाउन समाप्त करने के लिए नहीं कहते तो यह तय है कि आपकी निष्क्रियता लॉकडाउन की अवधि में इजाफा कर रही है !! क्योंकि वे लॉक डाउन को ज्यादा से ज्यादा लम्बा खींचने की पूरी कोशिश करेंगे। )
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#EndLockDownTotally
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#लॉक_डाउन_पूर्णतया_समाप्त_करें
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#लॉकडाउन_पूर्णतया_समाप्त_करें
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 08 2020 08:05:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

विज्ञान-गणित-तकनिक-लेखे-हुनर विषयों को छोड़ दिया जाए तो सरकारी शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य छात्रों को "नागरिक अधिकारों में वृद्धि की खिलाफत" करने के लिए तैयार करना है !!

Kushagra Yadav Salonup:

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 08 2020 09:27:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

BrMb Chaitanya Kumar BrActivist:

मेरा नागरिक कर्तव्य

मैंने प्रधानमंत्री जी को पोस्टकार्ड लिखकर राष्ट्रीय हिंदू बोर्ड कानून लाने की मांग की यह कानून सरकार के द्वारा हथियाये गये मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करता है तथा सरकारी लूट से मुक्ति देता है यह कानून हिंदू और हिंदू धर्म के उत्थान के लिए कार्य करता है राष्ट्रीय हिंदू बोर्ड कानून ड्राफ्ट डाउनलोड लिंक
Tinyurl.com/HinduBoard

मैंने प्रधानमंत्री जी को सज्जन नागरिकों को बंदूक गोली रखने और बनाने का अधिकार दिया जाए उसके लिए कानून ड्राफ्ट भेजा यह कानून सज्जन नागरिकों को बंदूक गोली रखने और बनाने का अधिकार देता है यह कानून आ जाने से देश की सुरक्षा बढ़ जाएगी और कोई भी देश भारत पर हमला करने का साहस नहीं जुटा पाएगा यह कानून देश के भीतर भी बहुत सारी समस्याओं का समाधान करती है जैसे- चोरी, डकैती, हत्या, अपहरण, फिरोती, बलात्कार, भुखमरी, गरीबी, सरकारी दमन, नक्सली, आतंकवाद आदि कई समस्याओं का समाधान करती है सज्जन नागरिकों को बंदूक रखना अनिवार्य का कानून प्राप्त डाउनलोड लिंक
Tinyurl.com/GunLawIndia

मैंने प्रधानमंत्री जी से लॉकडाउन संपूर्णतया समाप्त करने की मांग की जैसे जनवरी फरवरी के महीने में जैसा हालात था ऐसा हालात कायम करने की मांग की

मैंने मुख्यमंत्री बिहार सरकार को पोस्टकार्ड भेजकर बिहार जूरी कोर्ट कानून बिहार में लाने की मांग की यह कानून बिहार के थानों, अदालतों सरकारी स्कूलों सरकारी अस्पताल और अन्य सरकारी संस्थानों के कामकाज को सुधारने का कार्य करती है यह कानून मुख्यमंत्री जी के द्वारा सीधे बिहार के राजपत्र में छाप कर लाया जा सकता है इसे विधानसभा से पास कराने की जरूरत नहीं है यह कानून आ जाने से बिहार के मतदाताओं को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी और उस वोट वापसी पासबुक में जिस अधिकारी का नाम होता उनके कामकाज से संतुष्ट नहीं है तो उनको नौकरी से निकालने के लिए अपना मत दे सकते हैं बिहार जूरी कोर्ट कानून प्राप्त डाउनलोड लिंक
Tinyurl.com/StateJuryCourt

देश के जिम्मेदार नागरिकों का कर्तव्य होता है कि देश मैं सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपना मांग, सुझाव, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जी को भेजना चाहिए मैंने अपना कर्तव्य निभाया।
पत्र पोस्ट बॉक्स में गिराते हुए एक वीडियो लिंक
<https://youtu.be/LrsKcat7scU>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 10 2020 16:41:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत रूस और अमेरिका के बीच किसे चुने, और क्यों?
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इस समय भारत 2 देशो के निशाने पर है :
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(i) चीन (+/रूस)
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(ii) अमेरिका (+ब्रिटेन-फ़्रांस)
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[A]
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(1) यदि हम अमेरिका से बचने के लिए रूस की शरण में जाते है तो रूस एवं चीन अमेरिका को रोक देंगे, किन्तु इसके एवज में रूस एवं चीन हमारा आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण कर लेंगे !! (किन्तु धार्मिक नहीं)
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(2) यदि हम अमेरिका की शरण में जाते है (जो कि 30 साल पहले ही जा चुके है) तो आर्थिक-सामरिक के साथ साथ अमेरिका हमारा धार्मिक अधिग्रहण भी करेगा। यानी अमेरिका पूरे भारत को ईसाई देश में भी कन्वर्ट कर देगा।
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(3) यदि अमेरिका, चीन एवं रूस में भारत को लेकर समझौता हो जाता है तो भारत को एक दुसरे से बचाने के एवज में ये तीनो देश भारत का बाजार एवं प्राकृतिक संसाधन आपस में बाँट लेंगे।
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(3.1) आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण से मायने है कि अमुक देश (अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस+रूस+चीन) :
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(3.2) हमारी स्थानीय इकाइयों को तबाह कर देंगे ताकि अमुक देश की कम्पनियां हमारे बाजार पर कब्ज़ा कर सके।
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(3.3) वे हमारी गणित-विज्ञान के स्तर को तोड़ देंगे, ताकि तकनिकी वस्तुओं के उत्पादन में आवश्यक मानव संसाधन में कमी आये।
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(3.4) वे जमीन की कीमतों को बढ़ाते जायेंगे ताकि स्थानीय इकाइयों की स्थापना करना मुश्किल हो जाए।
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(3.5) और सबसे महत्त्वपूर्ण - वे सरकारी विभागों, अदालतों एवं पुलिस का डिजाइन इस तरह का बनाकर रखेंगे कि यदि रसूखदार / अमीर आदमी क़ानून तोड़ता है तो वह पैसा फेंककर क़ानून को बुत्ता दे सके, और जजों-नेताओं का इस्तेमाल करके छोटी इकाइयों को बंद करवा सके।
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(3.6) वे भारत की स्वदेशी हथियार निर्माण इकाइयों का बचा खुचा बेस तोड़ देंगे और यहाँ पर हथियार निर्माण इकाईयां लगायेंगे, ताकि भारत सैन्य रूप से अमुक देश पर पूरी तरह से निर्भर हो जाए।
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तो हम चाहे चीन से बचने के लिए अमेरिका की शरण में जाए या अमेरिका से बचने के लिए रूस+चीन की शरण में जाए, दोनों ही स्थितियों में अमुक देश हमें बचाने के एवज में हमारा आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण करेगा। मतलब कोई देश हमें मुफ्त में नहीं बचाएगा, हमें बचने के एवज में यह कीमत चुकानी ही होगी।
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(4) इन देशो का जो इतिहास रहा है उस आधार पर हम कह सकते है कि यदि हम रूस+चीन की शरण में जाते है तो वे हमारा धार्मिक अधिग्रहण नहीं करेंगे। अमेरिका या रूस+चीन जब किसी देश का अधिग्रहण करते है तो इससे निम्नलिखित अंतर आता है :
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(4.1) धर्म : रूस एवं चीन जिस देश का अधिग्रहण करते है उनके धर्म के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करते, किन्तु अमेरिकी जिस देश पर आर्थिक-सामरिक नियंत्रण बना लेते है, वहां पर धार्मिक नियंत्रण भी अवश्य बनाते है। मतलब वे स्थानीय धर्म को ख़त्म करके ईसाई धर्म थोप देते है।
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(4.2) जातीय, वर्गीय, धार्मिक, लैंगिक अलगाव : अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार कम्पनियां समाज को बांटने में माहिर है, और वे इस तरीके का इस्तेमाल पिछले 200 सालों से कर रहे है। अत: अमेरिकी कम्पनियों का प्रभुत्व बढ़ने से भारत में जातीय, वर्गीय, साम्प्रदायिक अलगाव में वृद्धि होगी। इसके अलावा नारीवाद आदि के नाम पर लैंगिक संघर्ष भी बढ़ेगा। रूस एवं चीन समाज / परिवार को काटने की दिशा में काम नहीं करते।
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(4.3) संस्कृति : अमरीकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार निर्माता जिस भी देश में जाते है वहां की संस्कृति का रूपांतरण करने में काफी निवेश करते है, ताकि कन्वर्जन की जमीन तैयार की जा सके। तो पेड मीडिया द्वारा अपसंस्कृति को सार्वजनिक बढ़ावा मिलेगा, और इसे “सामाजिक स्वीकार्यता” भी मिलेगी। AIB , बिग बॉस, सेकेर्ड गेम्स आदि इसी कड़ी के हिस्से है। पारिवारिक धारावारिको में भी अश्लीलता, नग्नता, फूहड़ता, समलैंगिकता, गाली गलौज का स्तर बढ़ेगा और इन्हें “सामाजिक स्वीकार्यता” मिलेगी। किन्तु रूस एवं चीन संस्कृति को नष्ट करने के लिए व्यवस्थित रूप से काम नहीं करते।
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अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार निर्माताओ के एजेंडे के बारे में अन्य विवरण के लिए ये जवाब पढ़ें – <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1074199619619781/>;
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[B]
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वैसे यह प्रश्न 67 वर्ष पुराना है, और यह प्रश्न लगातार सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण एवं सबसे ज्यादा प्रासंगिक बना रहा है।
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(1) जब भारत आजाद हुआ तो जवाहर लाल के पास 2 विकल्प थे :
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(1.1) भारत पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करे ताकि हम अमेरिका एवं चीन को रोक सके।
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(1.2) हम खुद को बचाने के लिए ऐसे किसी देश की शरण में जाए जो निर्णायक हथियारों ले उत्पादन में आत्मनिर्भर हो। (यानी या तो रूस या अमेरिका)
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यदि जवाहर लाल ने बिंदु (1) की नीति पर काम करते तो रूस एवं अमेरिका से उनका संघर्ष बढ़ जाता और वे उन्हें अपदस्थ कर देते। अत: उन्होंने पेड मीडिया के माध्यम से “गुट निरपेक्षता, पंचशील, समाजवाद” आदि के रैपर लगाकर चिंगमें लांच की और अगले 15 वर्षो तक भारत के कार्यकर्ताओ / नागरिको / बुद्धिजीवियों को ये चिंगमें चबाने के काम में उलझाए रखा।
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1962 तक चीन भारत की तुलना में काफी ज्यादा हथियार बनाना सीख चुका था अत: उन्होंने भारत पर हमला कर दिया। तब अगले 24 घंटे में ही भारत को अमेरिका के सामने अपने घुटने तोड़ कर बैठना पड़ा। अमेरिका की शरण में जाने के कारण चीन ने बढ़ना रोक दिया और हम बच गए -- <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/965603120479432/>;
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(2) बाद में इंदिरा जी ने सैन्य दृष्टी से भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक आधारित हथियारों का उत्पादन करने के प्रयास किये, और इसमें उन्हें आंशिक सफलता भी मिली। इंदिरा जी और पेड मीडिया के प्रायोजको से टकराव के बारे में विवरण आप इस जवाब में पढ़ सकते है -<https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1047932098913200/>;
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परमाणु बम एवं मिसाइले बनाने में हम सफल हुए किन्तु टैंक एवं फाइटर प्लेन का इंजन बनाने में हम फ़ैल हो गए। प्लेन एवं टैंक के इंजन बनाने में हम क्यों असफल रहे, इस बारे में मैंने इस जवाब में बताया है - <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/916131638759914/>;
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(3) 1990 में सोवियत रूस के टूटने के बाद भारत की सभी मुख्यधारा पार्टियों एवं शीर्ष नेताओ ने अपनी खाल बचाने एवं राजनैतिक कैरियर बनाए रखने के लिए अमेरिका की शरण में जाने का फैसला कर लिया था। 1991 से अमेरिका ने भारत का अधिग्रहण करना शुरू किया और कारगिल के बाद 2001 के बाद से इसमें बेहद तेजी से इजाफा हुआ।
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आज हमारा पूरा देश अमेरिकी ही चला रहे है। यदि हमें रूस की तरफ जाना है तो हमें पहले संवेदनशील क्षेत्रो में काम कर रही अमेरिकी कम्पनियों को भारत से निकालना पड़ेगा। भारत की मुख्यधारा की सभी पार्टियाँ अमेरिकियों द्वारा पोषित है, और भारत की किसी भी राजनैतिक पार्टी के किसी नेता में इतना साहस नहीं है कि वह इस बारे में सोच भी सके। यदि हम अमेरिकी धनिकों से प्रतिरोध लेने जायेंगे तो अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच भारत में इतने ज्यादा ताकतवर हो चुके है कि वे बिना युद्ध लड़े ही हमें हरा देंगे।
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यहाँ तक कि कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भी पिछले 20 वर्षो से उन सभी कानूनों का समर्थन कर रहे है जिससे अमेरिकी कम्पनियों का नियंत्रण भारत में बढ़े। कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओ ने 2004 में अमेरिकियों के पाले में जाना शुरू कर दिया था, और 2014 आते आते वे पूरी तरह अमेरिकियों के हाथो बिक चुके थे।
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जहाँ कार्यकर्ताओ की बात है, चूंकि भारत का पेड मीडिया पूरी तरह अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियों के नियंत्रण में है अत: पेड मीडिया द्वारा दी गयी फीडिंग पर निर्भर भारत के ज्यादातर में से ज्यादातर कार्यकर्ता / नागरिक अब पूरी तरह इस बात पर सहमत है कि हमें अपना देश अमेरिकियों के हवाले कर देना चाहिए।
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[C]
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समाधान ?
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(1) यदि भारत को अमेरिका / चीन से बचना है तो हमारे पास सिर्फ 1 रास्ता है -- भारत पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करने की क्षमता जुटाने के लिए आवश्यक कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करें।
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मेरा सुझाव इन 4 कानूनों को गेजेट में छपवाने का है :
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(1.1) धनवापसी पासबुक
(1.2) रिक्त भूमि कर
(1.3) जूरी कोर्ट
(1.4) वोइक
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यदि उपरोक्त क़ानून गेजेट में आ जाते है तो मेरा आकलन है कि हम अगले 5-6 वर्षो में इतने ताकतवर हथियार बना सकते है कि अमेरिका एवं चीन की सेनाओं को अपने बूते पर रोक सकेंगे और हमें किसी की शरण में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन कानूनों के गेजेट में आने से कैसे हम अमेरिका की सेना से लड़ने की सैन्य क्षमता जुटा लेंगे इस बारे में विस्तृत विवरण मैंने अन्य जवाबो में लिखा है, उन्हें पढ़ें।
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यदि हम ऊपर दिए गए क़ानून देश में लागू करते है तो एक संभावना यह है कि अमेरिका/चीन/रूस आदि देश मिलकर हम पर सीधा हमला कर दें या पाकिस्तान / बांग्लादेश का इस्तेमाल करके हमें युद्ध में घसीटे।
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उस स्थिति से निपटने के लिए हमें एक क़ानून की और जरूरत होगी – सज्जन नागरिको को बंदूक रखने का अधिकार देने के लिए जनमत संग्रह। तब सिर्फ यह क़ानून ही हमें बचा सकेगा। और यदि हम यह क़ानून भी लागू कर देते है तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि अमेरिका-चीन-पाकिस्तान आदि हम पर हमला करने का जोखिम नहीं उठाएंगे।
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(2) भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियाँ (बीजेपी-कोंग्रेस-आपा-सपा-बसपा-कम्युनिस्ट) एवं इनके सभी शीर्ष नेताओ (सोनिया जी, केजरीवाल जी एवं मोदी साहेब) का स्टेंड :
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(2.1) पेड मीडिया पर निर्भर ये सभी नेता उपरोक्त कानूनों के खिलाफ है
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(2.2) साथ ही वे अपनी तरफ से भी इस बिंदु पर हमेशा खामोश रहते है कि, भारत को स्वदेशी पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करने में सक्षम बनाने के लिए वे किन कानूनों का सुझाव देते है।
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(2.3) और अमुक बिंदु पर खामोश रहते हुए वे लगातार ऐसे क़ानून छाप रहे है जिससे भारत की निर्भरता लगातार अमेरिकी कंपनियों पर बढती जाए।
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उदाहरण के लिए अभी महीने भर पहले मोदी साहेब ने रक्षा में विदेशी निवेश की सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% किया था, और अब रास्ता साफ़ होने के बाद बड़े पैमाने पर अमेरिकी-ब्रिटिश-कम्पनियां भारत में हथियार निर्माण के कारखाने लगाएगी। और सोनिया जी एवं केजरीवाल ने मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन किया !! और यहाँ तक कि कोंग्रेस-आपा के कार्यकर्ताओ ने भी मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन किया। इससे हमें निम्नलिखित नुकसान होंगे :
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(2a) 74% स्टेक के बाद अब हथियार निर्माण कम्पनियों पर विदेशियों का स्वामित्व निर्णायक हो जाएगा। अत: भारत में स्थापित होने वाले हथियार कारखानों पर उनका उनका नियंत्रण होगा।
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(2b) वे नेताओं को धमका कर / उन्हें ब्राइब / म्राइब देकर सरकारी हथियार कम्पनियों का बचा खुचा बेस भी तोड़ देंगे। हथियार निर्माण की सरकारी कम्पनियों को अब धीरे धीरे या तो बंद कर दिया जाएगा या विदेशी इनका अधिग्रहण कर लेंगे।
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(2c) हथियार कंपनियों के भारत में सीधे घुस आने के बाद पेड मीडिया की शक्ति विस्फोटक रूप से बढ़ेगी, जिससे भारत के नेताओ की निर्भरता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों पर और भी बुरी तरह से बढ़ जायेगी।
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(2d) हथियार कम्पनियों का मुख्य धंधा खनिज लूटना है। अत: अब वे भारत के नेताओं से ऐसे क़ानून छपवाएंगे जिससे वे लगभग मुफ्त में भारत के मिनरल्स लूट सके। तो अभी भारत के प्राकृतिक संसाधन की बहुत बड़े पैमाने पर लूट होने वाली है। और यह लूट पूरी तरह से कानूनी होगी।
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(2e) ये कम्पनियां जितना मुनाफा बनाएगी उसके बदले हमें डॉलर चुकाने होंगे। पहले हम हथियार लेने के लिए सीधे डॉलर चुका रहे थे, और अब रिपेट्रीएशन के रूप में डॉलर चुकायेंगे। मतलब हमारा डॉलर संकट में इजाफा होगा।
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अब पेड मीडिया के प्रायोजक भारत के खनिज, संसाधन, जमीन का इस्तेमाल करके भारत में हथियार बनायेंगे। दरअसल, वे बनायेंगे नहीं, बल्कि असेम्बल करेंगे। उसके बाद 5 गुना दाम में वे ये हथियार भारत की सेना को बेचेंगे। इसके बाद वे भारत के पीएम (उस समय जो भी पीएम होगा) को धमकाएंगे कि वे चीन / पाकिस्तान पर हमला करें, और पेड मीडिया का इस्तेमाल करके नागरिको को चीन / पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में जाने के लिए तैयार किया जाएगा।
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भारत की सेना एवं जमीन का इस्तेमाल करके वे चीन / ईरान को ख़त्म करेंगे और फिर उनकी सेनाएं भारत में तब तक रहेगी जब तक वे भारत के मिनरल्स नहीं लूट लेते। जब भारत के मिनरल्स ख़त्म हो जायेंगे तो वे भारत के 5-7 टुकड़े करके हमें एक अफ़्रीकी देश से बदतर देश बनाकर निकल जायेंगे।
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यदि युद्ध टल जाता है तो पेड मीडिया के प्रायोजक हमारे मिनरल्स लूटते हुए भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में बदल देंगे। पिछले 200 साल में पेड मीडिया के प्रायोजक ऐसा पचासों देशो के साथ कर चुके है। यही उनका बिजनेस मॉडल है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Aug 11 2020 17:28:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत ने कुछ हथियारों की आयात पर रोक लगाई है, इससे क्या फायदा-नुकसान होगा?
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(1) पेड इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा लगाईं गई जुलाई, 2018 की खबर बताती है कि, लॉकहिड मार्टिन भारत में बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमान बनाने का कारखाना लगाने वाली है। यदि लॉकहीड 2018 में कारखाना लगाती तो कारखाने में लॉकहीड मार्टिन का स्वामित्व नहीं हो सकता था।
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क्योंकि तब रक्षा उत्पादन में विदेशी निवेश की सीमा 49% ही थी !! और स्वामित्व के लिए आपके पास 51% स्टेक होना चाहिए। किन्तु अभी पिछले महीने ही मोदी साहेब ने रक्षा उत्पादन में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 74% कर दी है !!
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<https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/make-in-india-boost-lockheed-martin-ready-to-manufacture-f-16-jets-in-india/articleshow/51037000.cms?from=mdr&fbclid=IwAR0nULiHMSB3FU5_gj2b_e4OXplqyBo1u8wgSoHHRbORHqhbcj5HwDaiVSo>;
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खबर कहती है कि लॉकहीड मार्टिन यहाँ पर गारंटीड मार्किट के साथ आएगी। मतलब वह भारत से यह अनुबंध करेगी कि भारत को उससे इतने उतने विमान खरीदने होंगे !!
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"The making of F-16, which will be among the largest projects under the Make in India initiative, will be conditional to the Indian government making contractual commitment to buy the fighter jets for its armed forces, said the source."
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(2) इससे क्या अंतर आएगा ?
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(2.1) अभी भारत फ़्रांस, रशिया आदि से विभिन्न विमान लेता रहा है,। चूंकि अब लॉकहीड मार्टिन भारत में फाइटर प्लेन बनाएगी और भारत ने लड़ाकू विमान के आयात पर रोक लगा दी है, अत: भारत को सिर्फ F-16 ही लेने होंगे !! इस तरह अब भारत विमान खरीदने को लेकर भारत के विकल्प बेहद सिकुड़ जायेंगे और नेगोशिएशन पॉवर भी घटेगी !!
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(2.2) और ये सभी प्लेन हमें EUMA (End Use Monitoring Agreement) के साथ मिलेंगे, और अमेरिकी कम्पनियों का EUMA काफी कठोर होता है, और आप अमेरिकियों से पूछे बिना ये F-16 हिला भी नहीं सकेंगे !!
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(2.3) लॉकहीड जितना भी मुनाफा बनाएगी उसके बदले में हमें डॉलर चुकाने होंगे !!
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(2.4) लॉकहीड सिर्फ प्लेन ही नहीं बनाती, बल्कि कई तरह के हथियार बनाती है। अब से भारत ये सभी हथियार लॉकहीड मार्टिन से लेगा !!
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और इसी तरह लॉकहीड मार्टिन की तरह कई सारी विदेशी कम्पनियां विभिन्न अनुबंधों के साथ गारंटीड मार्किट के साथ भारत आएगी। ये कम्पनियां लगातार भारत के पीएम पर विदेशी निवेश में सीमा बढ़वाने के लिये दबाव बना रही थी। और क्योंकि वे हथियारों के कारखानों में किसी को साझेदार नहीं बनाना चाहते। तो पहले उन्होंने रक्षा में ऍफ़डीआई की सीमा बढ़वाई और उसके बाद यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत उनके द्वारा बनाया गया माल ही खरीदेगा, उन्होंने आयात पर रोक लगवाई !!
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(3) भारत अपने 70% हथियार आयात करता है। और जो 30% हथियार हम बनाते है वे भी कमतर है, और उनके जटिल पुर्जे भी हम विदेशियों से आयात करते है। और हम ये आयात इसीलिए करते है क्योंकि हमारे पास इन्हें बनाने की तकनीक नहीं है। और तकनीक इसीलिए नहीं है क्योंकि हमारे पास हथियारों का उत्पादन करने वाले कारखानों की विशाल श्रुंखला नहीं है। विशाल श्रुंखला न होने की 2 वजहें है :
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(3.1) 1990 तक भारत में परमिट राज था। हथियारों के निर्माण में न तो निजी कम्पनियों को मुक्त रूप से उत्पादन करने की छूट थी, और न ही विदेशी कम्पनियों को। किन्तु WTO समझौते के बाद जब लाइसेंस राज ख़त्म किया गया तो हथियारों के निर्माण में लाइसेंस सिस्टम को कायम रखा गया और राष्ट्रिय सुरक्षा का विषय होने के कारण हथियारों के उत्पादन में विदेशी निवेश पर भी प्रतिबन्ध जारी रहा।
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(3.2) जमीन की ऊँची कीमतें और पुलिस-नेताओं-जजों का भ्रष्टाचार होने के कारण भारत में किसी क्षेत्र में तकनिकी उत्पादन का आधार नहीं है, और इस वजह से हम तकनीक के क्षेत्र में स्वदेशी इकाइयां खड़ी नहीं कर पाए।
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जो 30% हथियार हम बना रहे है उसमें से ज्यादातर हिस्सा सरकारी कम्पनियों द्वारा बनाया जाता है, निजी क्षेत्र द्वारा नहीं। यदि हमें स्वदेशी हथियार बनाने है तो हमें लाइसेंस राज ख़त्म करने, जज-पुलिस-नेताओं का भ्रष्टाचार एवं जमीन की कीमतें कम करने की जरूरत है । और सबसे महत्वपूर्ण हमें हथियारों के निर्माण में विदेशी निवेश पर पूर्णतया रोक लगानी होगी।
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यदि हम हथियार निर्माण में विदेशी निवेश को पूरी तरह से नहीं रोकते है तो अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कंपनियां सही-गलत तरीको का इस्तेमाल करके स्वदेशी इकाइयों को ख़त्म करवा देंगे, और पूरे बाजार पर उनका कब्ज़ा हो जाएगा।
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(4) पर मोदी साहेब ने ठीक इसके उलट किया :
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(4.1) उन्होंने पिछले 6 साल में उन कानूनों को गेजेट में छापने से इनकार किया जिससे भारत Made in India & Made by Indians नीति पर चलते हुए स्वदेशी हथियारों के निर्माण की तकनीक जुटा सके।
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(4.2) उन्होंने हथियारों के क्षेत्र में लाइसेंस राज कायम रखा।
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(4.3) उन्होंने नेताओं-पुलिस-जजों का भ्रष्टाचार एवं जमीन की कीमतें कम करने के लिए कोई क़ानून नहीं छापा।
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(4.5) और इसके बाद अब उन्होंने हथियारों निर्माण में विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाकर 74% किया ताकि विदेशी भारत में हथियार निर्माण के कारखाने लगा सके।
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(4.6) और अब चूंकि भारत को उन कम्पनियों से ही हथियार लेने है जो यहाँ आकर कारखाने लगाने वाले है, अत: उन्होंने पेड मीडिया का इस्तेमाल करके आयात पर रोक लगाने के फैसले को स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में क्रन्तिकारी कदम के रूप में प्रस्तुत किया।
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और जैसा कि पेड मीडिया के प्रायोजक हमेशा करते है, यहाँ भी वे गलत लेबल का इस्तेमाल करके नागरिको को भ्रमित कर रहे है। और उनका गलत लेबल है – स्वदेशी / आत्मनिर्भरता !!
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(6) भारत में काफी पहले से Made in India स्लोगन का इस्तेमाल होता आया है, और नागरिक इस लेबल का मतलब भारत में भारतीय कम्पनियों द्वारा बनी चीज से लगाते है। लगभग 5 वर्ष पहले से उन्होंने एक नए लेबल Make in India का इस्तेमाल एवं इसका प्रचार करना शुरू किया।
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यह साफ़ नजर आ रहा था कि वे स्वदेशी का नया अर्थ गढ़ रहे है, और जल्दी ही प्रक्रिया की अवहेलना करके सिर्फ स्वदेशी नामक लेबल का अनुसरण करने वाले ज्यादातर कार्यकर्ता इस नये स्वदेशी = Make in India द्वारा भ्रमित कर दिए जायेंगे।
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(6.1) असल में Make in India वह योजना है जिसमें - विदेशी भारत में आकर कारखाने लगायेंगे !! ठीक वैसे ही जैसे ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत में आकर बंदूक बनाने की फैक्ट्रियां खोली थी, (और भारतीयों की बंदूक फैक्ट्रियो को या तो बंद करवा दिया था या उनका अधिग्रहण कर लिया था)
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(6.2) जबकि Made in India का अर्थ है – भारत में भारतीय कंपनियों द्वारा भारतीय तकनीक का इस्तेमाल करके भारतीयों द्वारा बनी वस्तुएं (Made in India & Made by Indians)
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यह उसी तरह की बात है जब हम फेसबुक को स्वदेशी कहने लगे क्योंकि फेसबुक ने अपने कुछ सर्वर भारत में लगाए है, या हम कोका कोला को स्वदेशी मानने लगे क्योंकि उसने अपना प्लांट भारत में लगा रखा है !! और इस तरह अब से मेक्डोनाल्ड भी स्वदेशी है और हम बर्गर बनाने में आत्मनिर्भर हो गए है, क्योंकि मेक डी हेमबर्गर भारतीय रेस्टोरेंट में बना रहा है, अमेरिका से आयात नहीं कर रहा है !! और इस तरह सभी कुछ विदेशी न होकर अब स्वदेशी हो गया है !!
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और अब जब लॉकहिड मार्टिन भारत में f-16 “असेम्बल” करेगा तो यह स्वदेशी होगा !! और साथ ही हम फाइटर प्लेन बनाने में आत्मनिर्भर हो जायेंगे !!
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यह एक बेहतरीन शोर्ट कट है – जहाँ आप सिर्फ लेबल बदलकर चीजो को स्वदेशी बना देते है !! और पेड मीडिया नागरिको को यह विश्वास भी दिला देता है कि हथियारों के आयात पर रोक लगाकर सरकार स्वदेशी हथियारो को बढ़ावा भी दे रही है !!
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बहरहाल, अब जब विदेशी कम्पनियां सीधे भारत में आकर हथियार बनाएगी तो हमें सभी तरह से गंभीर नुकसान होने वाला है। क्योंकि लॉकहीड मार्टिन या बोईंग जैसे कम्पनियां कोक या पेप्सी नहीं है !! जल्दी ही ये कम्पनियां भारत पर राजनैतिक-सामरिक नियंत्रण बना लेगी और भारत के हथियार निर्माण के बचे खुचे कारखानों (वे सरकारी / निजी कारखाने जो 30% सामान बनाते है) को निगल जायेगी !!
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हथियार कम्पनियों को भारत में कारखाने लगाने की अनुमति देना एंटी नेशनल स्टेप है !! और हमें इसका खामियाजा हमेशा के लिए भुगतना पड़ेगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 13 2020 20:07:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(1) यदि पीएम से मेरी कोई मांग है तो मुझे किससे कहना चाहिए ?
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पीएम से !!
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यदि आपके पास पीएम के लिए कोई सुझाव या कोई शिकायत है तो आपको कम से कम पीएम से तो "कहना" ही चाहिए। यदि आप पीएम से कोई मांग कर रहे है और पीएम से ही नहीं "कह" रहे है तो मेरे विचार में आप दूरी तय करने की जगह गोल गोल घूम रहे है।

यह उसी तरह की बात है कि यदि बिजली की लाइन में फाल्ट आ जाए तो हम बिजली बोर्ड की जगह पूरे मुहल्ले में बिजली चले जाने के बारे में बताते फिरे।
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इसी तरह यदि आप लॉकडाउन हटाना चाहते है तो आपको पीएम से "कहना" चाहिए, क्योंकि लॉकडाउन का आदेश पीएम /सीएम ने दिया है, राम नारायण अजमेरा ने नहीं।
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(2) कहने का तरीका क्या होना चाहिए ?
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इस बारे में आप खुद फैसला करें की आप किस तरीके से पीएम तक अपनी बात पहुंचा सकते है। जो भी तरीका आपको ठीक लगता है उस तरीके से आप पीएम / सीएम को कह सकते है। आप किस तरीके से पीएम को "कहते" है या द्वितीयक विषय है, प्राथमिक विषय यह है कि -- आप कम से कम पीएम से कहें तो सही !!
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(3) मैं पीएम तक अपनी बात पहुँचाने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल करता हूँ ?
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हमें ऐसे तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए जिसमे ज्यादा से ज्यादा नागरिक पीएम को सन्देश भेज सके। क्योंकि पीएम किस मांग पर विचार करेंगे यह सिर्फ इस पर निर्भर करता है कि कितने "मतदाताओ" ने उनसे यह मांग की है !!
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पीएम को के लिए हमारे पास दो तरह के विकल्प उपलब्ध है :
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(3.1) ऑनलाइन तरीके : मैं इसके लिए सोशल मीडिया के सभी तरीको जैसे मेल, फेसबुक, कोरा, यू ट्यूब, इन्स्टाग्राम आदि को तरजीह नहीं देता। ये सभी मंच नागरिको से संवाद करने के लिए है, पीएम से संवाद करने के लिए नहीं।
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हालांकि, ट्विटर का इस्तेमाल किया जा सकता है, किन्तु यदि ट्विटर किसी दिन मेरा कोई ट्विट डिलीट कर देता है, या मेरी आई डी ही उड़ा देता है, तो मेरे द्वारा भेजे गए ट्विट-अभिलेख आदि व्यर्थ हो जायेंगे। इसीलिए ट्विटर को भी मैं विश्वसनीय विकल्प नहीं मानता। ट्विटर एवं सहायक विकल्प हो सकता है, मुख्य नहीं !!
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(3.2) ऑफलाइन तरीके :
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(3.2.1) पीएम / सीएम से रूबरू मुलाकात करना : पीएम से मिलना काफी जटिल प्रक्रिया है, और समय, खर्च एवं दूरी जैसी समस्याओ के कारण भारत के ज्यादातर नागरिक इस तरीके का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
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(3.2.2) जुलुस, धरना , प्रदर्शन : इन सभी तरीको में मजमा लगाना होता है, और ध्यान आकर्षित करने के लिए एक झुण्ड की आवश्यकता होती है। एक साधारण नागरिक के पास न तो इतना समय होता है, और न ही इतनी ऊर्जा। इस तरह के जमाव के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति की भी जरूरत होती है।
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इसके अलावा विधि विरुद्ध जमाव, अनाधिकृत संख्या आदि के कारण हिंसा होने की सम्भावना भी होती है। इन तरीको का इस्तेमाल नागरिको का ध्यान आकृष्ट करने के लिए तो किया जा सकता है, किन्तु पीएम तक सन्देश भेजने के लिए मेरे विचार में यह सही तरीका नहीं है।
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(3.2.3) पत्र : यह सबसे निरापद, सबसे सस्ता, सबसे आसान तरीका है। यह तरीका अधिकृत भी है, और इसका रिकॉर्ड भी रखा जा सकता है। पत्र भेजने वाला भी इसका रिकॉर्ड रख सकता है, और प्रधानमन्त्री कार्यालय तो खैर प्राप्त होने वाले सभी पत्रों का रिकॉर्ड रखता ही है।
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पत्र भेजने के कई तरीके हो सकते है -- आप लिफाफा भेज सकते है, अंतर्देशीय पत्र भेज सकते है, बुक पोस्ट भेज सकते है, रजिस्ट्री करवा सकते है, या पोस्टकार्ड भी भेज सकते है।
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मैं पोस्टकार्ड एवं बुक पोस्ट को ज्यादा बेहतर तरीका मानता हूँ। वजह यह है कि ये दोनों प्रपत्र "खुले" होते है। खुले होने के कारण कोई भी नागरिक यह देख सकता है, कि मैंने पीएम को क्या लिखकर भेजा है।
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पोस्टकार्ड बुकपोस्ट से ज्यादा सस्ता एवं ज्यादा सहजता से उपलब्ध है। देश के किसी भी गाँव / कस्बे में रहने वाला व्यक्ति स्थानीय पोस्ट ऑफिस जाकर सिर्फ 50 पैसे में पोस्टकार्ड खरीद कर पीएम / सीएम को भेज सकता है।
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तो इसीलिए मैं पोस्टकार्ड का इस्तेमाल करता हूँ, और पीएम को भेजे गए पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी रिकॉर्ड के लिए "My Letters to Pm" नाम से बनाए गए रजिस्टर में रख लेता हूँ।
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(4) सार :
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(4.1) यदि आपकी पीएम / सीएम से कोई मांग ही नहीं है तो इस झंझट में अपना सिर न खपाए कि पीएम / सीएम को "कहने" का क्या तरीका होना चाहिए !! इससे आपकी ऊर्जा बचेगी और आप अन्य उत्पादक कार्य में अपनी ऊर्जा खर्च कर सकेंगे।
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(4.2) यदि आप पीएम / सीएम से कुछ मांग कर रहे है सिर्फ तब ही आपको इस विषय पर विचार करना चाहिए कि पीएम / सीएम को "कहने" का तरीका क्या होना चाहिए।

(4.3) और फिर आपको जो भी तरीका सूट करता हो आप उसका इस्तेमाल कर सकते है। और यदि आप चाहते है कि अन्य लोग भी अमुक तरीके का इस्तेमाल करें तो आपको उस तरीके का चुनाव करना चाहिए जिस तरीके का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा नागरिक या एक साधारण नागरिक कर सके।
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क्योंकि बकौल इकबाल -

जम्हूरियत इक तर्जे हूकूमत है कि जिसमें,
बन्दों को गिना करते है, तौला नहीं करते !!
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जम्हूरियत : लोकतंत्र, डेमोक्रेसी
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 14 2020 15:07:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(1) पिछले कई वर्षो से AK-47 भारत में राइफल बनाने की फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रही है। काल्श्निकोव प्रथम चरण में यहाँ पर 20 लाख राइफले बनाएगा, और ये सभी राइफल हमारी सेना को बेची जायेगी। यहाँ तक कि सरकार AK-47 को भारतीय सेना की मानक राइफल बनाने पर विचार कर रही है।
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यदि मोदी साहेब ने ऍफ़डीआई की सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% नहीं किया होता तो कलाश्निकोव का इस फैक्ट्री में स्टेक 49% से अधिक नहीं हो सकता था !! किन्तु अब इस फैक्ट्री में 74% स्वामित्व काल्श्निकोव का होगा !!
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फरवरी 2019 की यह खबर पढ़ें — <https://www.timesnownews.com/india/article/ak-47-factory-russian-assault-rifle-narendra-modi-might-soon-inaugurate-russian-ak-47203-rifle-manufacturing-factory-in-uttar-pradesh/362042>;
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काल्श्निकोव प्रथम चरण में यहाँ पर 20 लाख राइफले बनाएगा, और ये सभी राइफल हमारी सेना को बेची जायेगी। यहाँ तक कि सरकार AK-47 को भारतीय सेना की मानक राइफल बनाने पर विचार कर रही है। यदि मोदी साहेब ने पिछले महीने ऍफ़डीआई की सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% नहीं किया होता तो कलाश्निकोव का इस फैक्ट्री में स्टेक 49% से अधिक नहीं हो सकता था !! किन्तु अब इस फैक्ट्री में 74% स्वामित्व काल्श्निकोव का होगा !!
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(2) भारत की तरह ही पाकिस्तान में भी बंदूक बनाने की फैक्ट्री खोलने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है, किन्तु वहां पर सरकार द्वारा इस क़ानून को जानबूझकर लागू नहीं किया जाता। बंदूक बनाने के कुटीर उद्योग की श्रुंखला होने के कारण पाकिस्तान 5000 रू में बड़े पैमाने पर AK-47 की कॉपी बनाता है।
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यदि वोइक क़ानून लागू कर दिया जाए और हम अदालतों-पुलिस-कर अधिकारियों का भ्रष्टाचार ख़त्म कम कर दें तो भारत में बड़े पैमाने पर बंदूक / रायफल बनाने की फैक्ट्रियां लगनी शुरू होगी, और हम सिर्फ 3-4 साल में पाकिस्तान से बेहतर AK-47 कानूनी रूप से बनाने लगेंगे। और शायद कुछ वर्षो बाद हम AK-47 को टक्कर देनी वाली या उससे भी बेहतर बंदूके बनाने लगे।
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किन्तु सरकार ने स्वदेशी तकनीक आधारित स्थानीय हथियार निर्माण इकाइयों का आधार खड़ा करने के लिए आवश्यक क़ानून लागू करने की जगह पहले विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई और फिर आयात पर रोक लगाकर उन्हें गारंटीड मार्केट देने की दिशा में कदम उठाया !! और मोदी साहेब के इस फैसले का सोनिया जी एवं केजरीवाल जी ने भी समर्थन किया !!
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(3) तो अब विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने और गारंटीड मार्किट मिलने के बाद भारत में कलाश्निकोव आकर राइफल “असेम्बल” करने वाला है, और इससे हमें निम्न नुकसान होंगे :
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(3.1) कलाश्निकोव जो बंदूके बनाएगा हमें वे ऊँचे दामो में खरीदनी होगी। उदाहरण के लिए यदि हम खुद से राइफल बनाते है तो कानूनी रूप से सिर्फ 10 हजार रू तक में AK-47 जैसी रायफल बना सकते है। किन्तु हमें अब कलाश्निकोव से लगभग 1 से 1.50 लाख रू में राइफल खरीदनी पड़ेगी !!
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(3.2) कलाश्निकोव भारत में राइफले बनाएगा नहीं, बल्कि असेम्बल करेगा !! वे जटिल पुर्जे आयात करेंगे और चिल्लर कोम्पोनेंट यहाँ बनाकर राइफल असेम्बल करेंगे !! इस तरह 20 लाख राइफले भारत में बनने के बावजूद भारतीयों में इसका हुनर नहीं पनपेगा। यदि भारत में निजी क्षेत्र की कई सारी फैक्ट्रियां ये राइफल बनाएगी तो उनमे प्रतिस्पर्धा होगी और 20 लाख राइफल बनाने के दौरान भारतीयों में राइफल बनाने की इंजीनियरिंग का विकास होगा।
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3.3) कलाश्निकोव भारत में जितना भी मुनाफा बनाएगी उसके हमें डॉलर चुकाने होंगे !! इस तरह काल्श्निकोव हमारे डॉलर दायित्व को असीमित रूप से बढ़ाता है !!
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(4.4) कलाश्निकोव राइफल में एकाधिकार बनाने के लिए सही-गलत तरीको का इस्तेमाल करेक भारत की बची खुची बंदूक / राइफल बनाने के कारखानों को बंद करवा देगा !!
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(4) जब भी मुझसे पूछा जाता था / है कि, भारत बेहतर राइफल (इंसास वगेरह) क्यों नहीं बना पा रहा है, और भारत की स्वदेशी राइफल इंसास क्यों पिछड़ रही है, तो मेरा कहना होता था / है कि, विदेशी हथियार कम्पनियां इंसास की बेंड बजाने के लिए हमारे नेताओं / मंत्री / प्रधानमंत्री / सांसदों पर काफी निवेश करती है। यदि भारत में राइफल बनने लगी तो विदेशी भारत में आकर कारखाने नहीं लगा पायेंगे !! तो इसके लिए हथियार निर्माता निम्न प्रक्रिया का इस्तेमाल करते है :
(4.1) पहले वे निजी क्षेत्र को हथियार बनाने की अनुमति नहीं देते, ताकि निजी क्षेत्र पनप न सके।
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(4.2) हथियार बनाने वाली सरकारी कंपनियों को तोड़ने के लिए वे मंत्रियो एवं प्रधानमंत्री का इस्तेमाल करते है।
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(4.3) इसके बाद वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करके नागरिको के दिमाग में इस तरह की कीले ठोकते है जिससे उनमे यह सन्देश जाए कि भारत में राइफल बनाने की काबलियत नहीं है।
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(4.4) फिर हथियार निर्माता पेड मीडिया के माध्यम से यह माहौल खड़ा करते है कि देखो भारत काम आने लायक एक अदद राइफल नहीं बना पा रहा है, और इसीलिए हमें विदेशियों को भारत में आकर फैक्ट्रियां लगाने के लिए कहना चाहिए !!
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(4.5) और इसके बाद वे मंत्रियो एवं प्रधानमंत्री से कहते है कि अब आप रक्षा में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाओ ताकि हम गारंटीड मार्किट के साथ यहाँ पर कारखाने लगा सके !!
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(4.6) और फिर हमारे मंत्री एवं प्रधानमन्त्री ठीक वैसा ही करते है !! क्योंकि मंत्री एवं प्रधानमंत्री बनने के लिए पेड मीडिया का समर्थन चाहिए होता है। जनता आपको सिर्फ सांसद ही बना सकती है, मंत्री नहीं !!
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और यह एक बड़ी वजह है कि, पेड मीडिया के प्रायोजक मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के क़ानून से अत्यंत घृणा करते है !! क्योंकि वोट वापसी पासबुक के लागू होने के बाद सांसद मंत्री बनने के लिए पेड मीडिया की जगह मतदाताओ पर निर्भर हो जायेंगे !!
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(5) समाधान ?
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मेरे विचार में , हमें इस प्रक्रिया को रोकने एवं Made in India & Made by Indian की नीति पर चलते हुए हथियार बनाने की काबलियत जुटाने के लिए मुख्य रूप से 3 कानूनों की जरूरत है :
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(5.1) वोइक : इस क़ानून के आने से भारत में बड़े पैमाने पर हथियार निर्माण के कारखानों की श्रुंखला खड़ी होनी शुरू होगी। यह क़ानून हथियार निर्माण में विदेशी निवेश पर भी रोक लगाता है।
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(5.2) रिक्त भूमि कर : इस क़ानून के आने से रुकी हुयी जमीन (Hoarded Land) बाजार में आनी शुरू होगी और शहरी क्षेत्र में जमीन की कीमतें लगभग 5 से 10 गुना तक गिर जायेगी। यदि हम जमीन की कीमतें कम नहीं करते है तो बड़े पैमाने अपर कारखाने नहीं लग पायेंगे।
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(5.3) जूरी कोर्ट : जब बंदूके / रायफल बनने लगेगी तो कलाश्निकोव एवं हथियार निर्माता भारत के जजों / कर अधिकारियों / पुलिस / मंत्रियो को घूस देकर ऐसे कदम उठाने को कहेंगे जिससे इन फैक्ट्रियो के लिए काम करना मुश्किल हो जाए और लागत बढ़ने से वे धड़ाधड़ बंद होने लगे। और जूरी कोर्ट फैक्ट्री मालिको की इन शिकारियों से रक्षा करेगा !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 14 2020 21:30:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अगर आप को मोदी जी का फोन आए तो आप क्या कहोगे?
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मुझे प्रधानमंत्री का फोन कभी आने वाला नहीं है। क्योंकि मोदी साहेब एवं उनका कार्यालय यह बात जानता है कि मुझे पीएम से जो भी कहना होता है उसके लिए मैं उन्हें ख़त भेजा करता हूँ, उनके फोन का इंतजार नहीं करता।
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उदारहण के कुछ महीनो पहले मैं पीएम से कहना चाहता था कि, उन्हें लॉकडाउन समाप्त कर देना चाहिए, तो मैंने उन्हें इसके लिए पोस्टकार्ड लिख दिया था, और ट्विट भी कर दिया था।
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और मुझे मुख्यमंत्री का भी कभी फोन नहीं आने वाला है। क्योंकि मुख्यमंत्री को भी मैं आवश्यक निर्देश ख़त / ट्विट द्वारा भेजता रहता हूँ। अभी 10 दिन पहले ही मैंने उन्हें ख़त भेजा है कि लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करें।
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इस तरह मुझे पीएम को जो भी निर्देश भेजने होते है मैं हर महीने की 5 तारीख (नागरिक कर्तव्य दिवस) को ख़त भेजकर उन्हें अवगत करवाता रहता हूँ।
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फिर भी मान लीजिये कि, देवयोग से यदि मोदी साहेब मुझे फोन कर देते है और मुझसे पूछते है कि देश में बदलाव लाने के लिए मैं उन्हें क्या सुझाव देना चाहता हूँ, तो उनसे मेरा वार्तालाप निम्नवत होगा :
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मोदी साहेब : हैलो, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोल रहा हूँ। यदि आप मुझसे कुछ कहना चाहते है तो अगले 5 मिनिट में आप अपनी बात रख सकते है।
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मैं : नमस्कार प्रधानमंत्री जी, अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद। मैं आपका ज्यादा समय नहीं लूँगा। मैं आपको जो भी सुझाव देना चाहता हूँ उनसे अवगत होने के लिए कृपया निम्नलिखित कदम उठाएं :
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(1) कृपया अपने दफ्तर में "प्राप्त चिट्ठियों" की सूची देखें। इस अभिलेख में भीलवाड़ा जिले के दस्ते में आप मेरे द्वारा भेजी गयी चिट्ठियां देख सकते है। मुझे आपको जो भी निर्देश देने है, मैं स्पष्ट रूप से इन चिट्ठियों में लिखकर आपको भेज चुका हूँ। अथवा
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(2) मैं आपको जब भी चिट्ठी भेजता हूँ तो साथ ही अमुक निर्देश आपको ट्विट भी करता हूँ। अत: कृपया अपने स्टाफ से कहें कि वे आपके ट्विटर हेंडल में @Pawan Jury सर्च करें। इस तरह आप मेरे द्वारा भेजे गए निर्देश अपने ट्विटर हेंडल से भी प्राप्त कर सकते है। अथवा
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(3) कृपया अपने स्टाफ से कहे कि, मेरी फेसबुक प्रोफाइल पर जाकर “Law Drafts I Asked Pm to Print” शीर्षक से एल्बम सर्च करें। इस एल्बम में आप उन सभी निर्देशों को देख सकते है जो निर्देश / सुझाव मैंने आपको भेजे है। अथवा
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(4) मैं जब भी आपको कोई ख़त भेजता हूँ तो ख़त की फोटोकॉपी करवा कर “My Citizen Duty ; My Letters to Pm” शीर्षक से बनाये गए रजिस्टर में रखता हूँ। और इस रजिस्टर के सभी पेज की फोटो मैंने “My Letters to Pm” नाम से बनाये गए अपने फेसबुक एल्बम में रखे हुए है। आप ये निर्देश यहाँ से भी प्राप्त कर सकते है। अथवा
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(4) कृपया अपने स्टाफ से कहें कि कोरा पर “जूरी कोर्ट” मंच सर्च करें। सभी नहीं, किन्तु कुछ महत्त्वपूर्ण क़ानून ड्राफ्ट्स जिन्हें गेजेट में प्रकाशित करने की मैं आपसे मांग करता हूँ इस मंच पर देखें जा सकते है। अथवा
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(5) कृपया Mygov के अपने स्टाफ से कहें कि वे newindia डॉट in पर अपलोड किये गए पीडीऍफ़ आपको उपलब्ध करवाए। आपके स्टाफ ने कुछ साल भर पहले ये सभी पीडीऍफ़ डिलीट करके newindia पोर्टल बंद कर दिया है। किन्तु मुझे विश्वास है कि, उनके पास यह डेटा अभी भी उपलब्ध होगा।
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तो प्रधानमंत्री जी, आप ऊपर दिए गए किसी भी विकल्प का इस्तेमाल करके मेरे द्वारा भेजे गए निर्देश प्राप्त कर सकते है।
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मोदी साहेब : अच्छी बात है। यदि आप और भी कुछ कहना चाहते है तो आप कह सकते है। क्योंकि इस चर्चा के लिए मैंने 5 मिनिट आवंटित किये थे, किन्तु अभी आपके पास 2 मिनिट और शेष है।
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मैं : धन्यवाद महोदय, किन्तु मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है। न मुझे आपसे कोई प्रश्न करना है, और न ही अन्य कोई सुझाव देना है। मैं आपका और वक्त नहीं लेना चाहता। नमस्कार !!
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(1) My Letters to Pm एल्बम का लिंक - <https://www.facebook.com/pawan.jury/media_set?set=a.1967116523406574&type=3>;
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(2) Law Drafts I Asked PM to Print एल्बम का लिंक - <https://www.facebook.com/pawan.jury/media_set?set=a.1450971748354390&type=3>;
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(3) सबूत - पी एम को लिखी गयी सभी चिट्ठियाँ पढ़ी जाती है ।
<https://www.jagran.com/uttar-pradesh/banda-the-couple-who-sent-the-letter-to-the-pm-on-the-construction-of-ram-temple-18855482.html?fbclid=IwAR0LdsUm5M9uNc6QnE-Z-koDhMNmW2QIIstPsekAXTn-V1Gx_NLKDk6YC1A>;
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यदि प्रधानमंत्री कार्यालय को पोस्ट कार्ड भेजा जाए तो क्या उन्हें कोई पढ़ता है ? जवाब है - हाँ । प्रधानमंत्री कार्यालय में एक पूरे विभाग का यही काम है । वे आने वाली सभी डाक पढ़ते है और पी एम को इसकी रिपोर्ट करते है ।
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(4) Temple Law का ड्राफ्ट का newindia पोर्टल का लिंक, जिसे अब डिलीट कर दिया गया है - newindia .in/TempleLaw5
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प्रधानमंत्री के स्टाफ द्वारा इसे एवं ऐसे अन्य 22 प्रस्तावों के पीडीऍफ़ बिना किसी सूचना के डिलीट कर दिए गए थे, हमने दुबारा अपलोड किये किन्तु इन्हें फिर से डिलीट कर दिया गया। हमने तीसरी बार अपलोड किये, और जब इन पर वोटिंग काउंट बढ़ने लगा तो प्रधानमंत्री के स्टाफ ने mygov के इस पोर्टल को ही बंद कर दिया। उल्लेखनीय है कि इस पोर्टल के प्रस्तावों पर मतदाताओं द्वारा वोटिंग की व्यवस्था भी थी !!
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सबक यह है कि, यदि आपके पास पीएम को देने के लिए कोई सुझाव है, या आप पीएम से कोई मांग कर रहे है, या उन्हें कोई निर्देश भेजना चाहते है तो उन्हें ख़त / ट्विट या जो भी तरीका आपक समझ आये उस तरीके का इस्तेमाल करके उन्हें सूचित कर सकते है.
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क्योंकि हो सकता है कि आपके पास उनका फोन कभी न आये !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 17 2020 19:08:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

फेसबुक, एंड्राइड, यू ट्यूब आदि सॉफ्ट पोर्न क्लिपिंग्स, मूवीज़ आदि को बूस्ट कर रहे है। वे यूजर्स की फोन स्क्रीन पर अश्लील वीडियोज इस तरह फेंक रहे है कि यूजर्स को इससे बचने के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते है। मोबाइल फोन यूज करने वाले बच्चे जल्दी ही इसके आदि हो जायेंगे।
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जैसे जैसे ऍफ़डीआई आएगी वैसे वैसे नंगई, अश्लीलता, फूहड़ता आदि का स्तर बढ़ता जाएगा और इसे "सामाजिक स्वीकार्यता" मिलेगी !!
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके सभी अंधभगत ऍफ़डीआई के हमेशा से समर्थक रहे है, और वे उन सभी कानूनों का विरोध कर रहे है, जिन्हें गेजेट में छापकर सॉफ्ट पोर्न एवं फूहड़ता को "सामाजिक स्वीकार्यता" मिलने की प्रक्रिया को रोका जा सके।
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हम जल्दी ही सोशल मीडिया को नियंत्रित करने और इसे साफ़ सुथरा बनाने के लिए क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तुत करेंगे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Aug 18 2020 17:32:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आरक्षण समायोजन के लिए कानूनी ड्राफ्ट
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Modified Reservation
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यह क़ानून अगड़ा-पिछड़ा में बढ़ रहे घर्षण की समस्या का बिना किसी प्रतिरोध के समाधान करता है।
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प्रस्तावित क़ानून दलितों की सहमती से आरक्षण का इस तरह पुनर्वितरण करता है कि जिन वंचित दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है, उन्हें भी इसका लाभ मिले, और जिन दलितों को आरक्षण की आवश्यकता नहीं है वे स्वेच्छा से किसी समयावधि अस्थायी रूप से आर्थिक विकल्प का चयन कर सके। और जितने व्यक्ति आर्थिक विकल्प चुन लेंगे उस अनुपात में आरक्षण कोटे में आनुपातिक रूप से अस्थायी कमी आ जायेगी।
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इस कानून में 4 खंड है। प्रधानमन्त्री इस क़ानून का एक या एक से अधिक या सभी खंड गेजेट में प्रकाशित कर सकते है।
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#Rrp27 , #ModifiedReservation
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“प्रधानमंत्री जी, कृपया आरक्षण में आर्थिक विकल्प का क़ानून गेजेट में छापें - #ModifiedReservation , #Rrp27
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-----ड्राफ्ट का प्रारम्भ ----
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खंड – अ ; दलितों के लिए आर्थिक विकल्प के प्रावधान
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(1) प्रधानमन्त्री आरक्षित वर्ग के नागरिको के लिए 'आर्थिक विकल्प' चुनने की प्रक्रिया के संचालन तथा प्रबंधन के लिए एक सचिव की नियुक्ति करेंगे।
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(2) SC/ST/OBC वर्ग का कोई भी नागरिक तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर 'आर्थिक विकल्प' के लिए खुद को पंजीकृत करवा सकेगा। यदि प्रार्थी कि आयु 18 वर्ष से कम है तो 'आर्थिक विकल्प' चुनने का निर्णय उसकी माता करेगी। कोई व्यक्ति किसी भी दिन अपने आर्थिक विकल्प की पात्रता को बिना कोई शुल्क दिए रद्द कर सकेगा ।
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(3) यदि किसी व्यक्ति ने आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी प्राप्त की है, तो वह आर्थिक विकल्प चुनने का पात्र नही होगा। किन्तु यदि किसी व्यक्ति ने शिक्षा के लिए आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह लाभ लेने के 4 वर्ष बीतने के पश्चात् आर्थिक विकल्प चुन सकेगा ।
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(4) यदि कोई व्यक्ति आर्थिक विकल्प चुनता है, तो वह हर महीने के अंत में 50 रू प्राप्त करेगा, जब तक कि वह अपने आर्थिक विकल्प के दर्जे को रद्द नहीं कर देता। इस राशि को मुद्रा स्फीति के अनुसार समय समय पर समायोजित किया जाता रहेगा। रूपये का भुगतान हर 3 महीने में किया जाएगा।
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(5) चतुर्थ श्रेणी की सेवाओं को छोड़ते हुए, केंद्र सरकार / राज्य सरकारों या उनकी इकाइयों के अधीन ऐसी नियुक्तियों/परीक्षाओं के लिए, जिनमे चयन का आधार लिखित परीक्षा या/और शारीरिक दक्षता परीक्षा या/और अन्य कोई वस्तुनिष्ठ परीक्षा है, के लिए SC/ST/OBC वर्ग के आरक्षित कोटे के प्रतिशत का निर्धारण करने के लिए, SC/ST/OBC वर्ग के नागरिको द्वारा चुने गए आर्थिक विकल्पों के प्रतिशत को SC/ST/OBC वर्ग के कोटे की अधिकतम सीमा में से घटा दिया जाएगा।
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किन्तु घटायी गयी यह सीमा आरक्षित कोटे के लिए तय अधिकतम सीमा के एक चौथाई से कम नही होगी। तथा चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों / नियुक्तियों में आरक्षित कोटे की रिक्तियों की संख्या बिलकुल भी नहीं घटायी जायेगी।
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स्पष्टीकरण-1 : मान लीजिये कि किसी राज्य में ST वर्ग की जनसँख्या 1 करोड़ तथा इस वर्ग के लिए आरक्षित कोटे की अधिकतम सीमा 14% है । यदि इस राज्य के 1 करोड़ ST वर्ग के नागरिको में से 45 लाख नागरिक आर्थिक विकल्प चुनते है, तो अमुक राज्य के लिए ST वर्ग के लिए लागू आरक्षित कोटा (14 -14×0.45 = 7.7%) 7.7 प्रतिशत होगा । किन्तु यदि 1 करोड़ में से 90 लाख नागरिक आर्थिक विकल्प चुनते है, तब भी आरक्षित कोटा अधिकतम सीमा (14%) का एक चौथाई (14÷4=3.5%) यानी 3.5 प्रतिशत बना रहेगा ।
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स्पष्टीकरण-2 : अनुच्छेद (4) उन पदों की चयन प्रक्रिया पर लागू नही होगा जिन पदों पर नियुक्ति के लिए साक्षात्कार और/या अन्य किसी व्यक्तिनिष्ठ मूल्यांकन को आधार बनाया गया हो।
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(6) यदि व्यक्ति ने अपने आर्थिक विकल्प को रद्द कर दिया है तो वह आरक्षण का लाभ लेने के लिए फिर से आवेदन कर सकेगा । किन्तु यदि उसने आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी हासिल की है तो उसका नाम आर्थिक विकल्प सूची से हमेशा के लिए हटा दिया जाएगा ।
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(7) चुने हुए आर्थिक विकल्पों के लिए भुगतान की व्यवस्था हेतु आवश्यक धन रिक्त भूमि कर से अर्जित किया जाएगा, अन्य किसी स्त्रोत से नहीं ।
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दलित क्यों इस प्रक्रिया का समर्थन करेंगे ?
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क्योंकि 80% से अधिक दलित गरीब है और 12 वी कक्षा पास भी नहीं है, अत: उनके लिए आरक्षण की कोई उपयोगिता नही है । एक 5 सदस्यीय परिवार यदि आर्थिक विकल्प चुनता है तो उसे बिना किसी हानि के 3000 रू का लाभ प्राप्त होगा। इस तरह ज्यादा से ज्यादा दलित आर्थिक विकल्प चुनेंगे, और उसी अनुपात में आरक्षित सीटों में कमी हो जायेगी। जब कोई दलित आरक्षण का लाभ लेना चाहेगा, तो आर्थिक विकल्प को त्याग कर फिर से आरक्षण के लिए आवेदन कर सकेगा। इस तरह व्यावहारिक रूप से आरक्षित कोटे में दलितों की सहमती से कमी आ जायेगी।
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लागत : भारत में SC/ST/OBC वर्ग के नागरिको की संख्या 80 करोड़ है । यदि इन वर्गो के सभी नागरिक आर्थिक विकल्प चुन लेते है, तब भी यह राशि 50 हजार करोड़ होती है, जो कि भारत की जीडीपी का सिर्फ 0.5% है। हमारा प्रस्ताव है कि यह राशि सिर्फ रिक्त भूमि कर से ही एकत्र की जानी चाहिए, अन्य किसी स्त्रोत से नही ।
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खंड - ब ; अति पिछड़े वर्ग तथा संपन्न वर्ग में आरक्षण का पुनर्वितरण
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[ टिप्पणी : यह खंड अति पिछड़े व संपन्न वर्ग में आरक्षण के असमान वितरण की समस्या का समाधान करता है। आरक्षण के वर्तमान प्रावधानों से दलित वर्ग के अति पिछड़े वर्ग को पर्याप्त लाभ नही मिल पा रहा है, जबकि संपन्न वर्ग (क्रीमीलेयर) आरक्षण के लाभों का ज्यादा उपयोग कर रहा है ।
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उदाहरण के लिए ST वर्ग में 10 उप जातियां जैसे भील तथा मीणा शामिल है। यदि ST वर्ग में भीलो की आबादी 50% तथा मीणा की आबादी 30% है तो भीलो को भी इसी अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए । किन्तु यदि ST वर्ग में आरक्षण का लाभ लेकर मीणा जाति ने 60% प्रतिनिधित्व प्राप्त कर लिया है तो इसका दुष्प्रभाव यह होगा कि ST वर्ग की अन्य जातियां पिछड़ी हुयी ही रहेगी, जबकि पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त कर चुकी जातियों का प्रतिनिधित्व बढ़ता जाएगा । इसी तरह SC/ST/OBC वर्ग में जो व्यक्ति संपन्न हो चुके है, उनके लाभों को घटाकर उसी वर्ग के शेष पिछड़े हुए व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए ।
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इस व्यवस्था को लागू करने के लिए हमें सबसे पहले एक जातिय जनगणना की आवश्यकता है, ताकि प्राप्त आंकड़ो के आधार पर न्यायोचित व्यवस्था बनायी जा सके । इस ड्राफ्ट में जातिगत आधार पर जनगणना के लिए भी निर्देश शामिल किये गए है। ]
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(8) देश के सभी हिन्दू, सिख, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियो के बारे में निम्नलिखित ब्यौरा एकत्र करने के लिए प्रधानमन्त्री जातिय जनगणना करवाएंगे -- व्यक्ति का नाम, पहचान संख्या, जाति, उपजाति, सम्बंधित SC/ST/OBC वर्ग, उसके स्वामित्व की अकृषि भूमि का ब्यौरा एवं इस भूमि का सर्कल मूल्य, पिछले तीन वर्षो में प्रस्तुत आयकर प्रतिवेदन के आधार पर या सरकारी अभिलेखों में उसके द्वारा घोषित की गयी उसकी औसत आय ।
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(8.1) यदि कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ ले चुका है तो उसे अपनी सही/सच्ची जाति की घोषणा करनी होगी । यदि वह ऐसा नही करता है तो ज्यूरी मंडल उसे 6 माह के कारावास की सजा सुना सकेगा ।
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(8.2) यदि कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ लेना चाहता है तो उसे अपनी सही/सच्ची जाति की घोषणा करनी होगी । यदि वह ऐसा नही करता है तो उसे भविष्य में कभी आरक्षण का लाभ नही मिलेगा ।
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(8.3) यदि कोई व्यक्ति अपनी जाति की घोषणा नही करता है तो उसे सामान्य वर्ग में माना जाएगा ।
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(9) इस खंड की धारा (15) में दी गयी तालिका के अनुसार प्रधानमन्त्री व्यक्तियों को अंक आवंटित करेंगे तथा प्रत्येक जाति एवं उपजाति के लिए औसत अंको की गणना करेंगे ।
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(10) प्रधानमन्त्री SC, ST एवं OBC वर्ग की सभी जातियों को आवंटित अंको के आधार पर घटते हुए क्रम में सूचीबद्ध करेंगे । वे SC, ST तथा OBC वर्ग की सूचियों को निम्नांकित विधि से 4 भागो में विभाजित करेंगे –
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समूह-1 : अमुक जाति के अंको के मध्य बिन्दु के बराबर या अधिक का औसत।
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समूह-2 : अमुक जाति के अंको के मध्य बिंदु और मध्य बिंदु के 0.75 के गुणन के बीच का औसत।
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समूह-3 : अमुक जाति के अंको के मध्य बिंदु के 0.25 तथा 0.5 के गुणन के बीच का औसत।
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समूह-4 : अमुक जाति के अंको के मध्य बिन्दु के 0.25 के गुणन से कम का औसत।
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(11) आरक्षित कोटे से अर्हित (क्वालीफाई) उम्मीदवारों की 4 वरीयता सूचियाँ बनायी जायेगी तथा चौथे समूह से 4 उम्मीदवार, तीसरे समूह से 3 उम्मीदवार, दुसरे समूह से 2 उम्मीदवार तथा पहले समूह से एक उम्मीदवार का चयन किया जाएगा।
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(12) प्रधानमंत्री SC, ST तथा OBC वर्ग की जातियों के लिए इसी प्रकार की समूह आधारित सूचियाँ तैयार करेंगे, तथा आरक्षण के लिए उम्मीदवारों को उपरोक्त वर्णित विधि के अनुसार वरीयता देंगे।
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(13) यदि किसी जाति के अंको का औसत देश के अंको के औसत से अधिक हो जाता है तो उस जाति को SC/ST/OBC की श्रेणी से हटा दिया जाएगा।
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(14) अंक सूचियों को हर वर्ष अद्यतन एवं समायोजित किया जाएगा।
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(15) अंक निर्धारक सूचकांक तालिका
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(15.01) प्रधानमन्त्री, उच्चतम न्यायलय के न्यायधीश, उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश, केंद्र सरकार में नियामक, रिजर्व बेंक गवर्नर एवं डिप्टी गवर्नर, बेंक चेयरमेन - 50 लाख अंक
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(15.02) उच्च न्यायलय के न्यायधीश, मुख्य सत्र न्यायधीश, केंद्र सरकार के अधीन उप सचिव, राज्य सरकारों के नियामक तथा मुख्यमंत्री - 40 लाख अंक
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(15.03) सत्र न्यायधीश एवं केंद्र सरकार के मंत्री - 10 लाख अंक
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(15.04) अन्य निचली अदालतों के न्यायधीश एवं राज्य सरकारों के मंत्री - 5 लाख अंक
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(15.05) सांसद एवं अधिनस्थ सचिव पद से ऊपर पदक्रम के अधिकारी - 1 लाख अंक
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(15.06) विधायक एवं पंचायत सरपंच - 15 हजार अंक
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(15.07) सार्वजनिक उपक्रमो (PSU) को छोड़ते हुए केंद्र तथा राज्य के सभी विभागों के प्रथम श्रेणी के अधिकारी - 20 हजार अंक
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(15.08) केंद्र तथा राज्यों के अधीन सभी द्वितीय श्रेणी के अधिकारी - 10 हजार अंक
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(15.09) केंद्र तथा राज्य सरकारों के अधीन सभी तृतीय श्रेणी के अधिकारी - 5 हजार अंक
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(15.10) उपरोक्त वर्णित सभी अधिकारियों को सम्मिलित करते हुए केंद्र, राज्य एवं सार्वजनिक उपक्रमों के सभी श्रेणी के अधिकारी - वार्षिक आय÷100
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(15.11) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 10 लाख गुना अधिक संपत्ति धारण करने वाले व्यक्ति - 1 करोड़ अंक
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(15.12) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 1 लाख गुना अधिक मूल्य की संपत्ति धारण करने वाला व्यक्ति - 10 लाख अंक
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(15.13) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 10 हजार गुना अधिक मूल्य की संपत्ति धारण करने वाला व्यक्ति - 1 लाख अंक
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(15.14) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 1 हजार गुना अधिक मूल्य की संपत्ति धारण करने वाला व्यक्ति - 10 हजार अंक
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(15.15) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 100 गुना अधिक मूल्य की संपत्ति धारण करने वाला व्यक्ति - 1 हजार अंक
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खंड – स ; उच्चतम न्यायलय में साक्षात्कार के आधार पर नियुक्तियों के प्रावधान
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[ टिप्पणी : यह खंड उच्चतम न्यायलय में न्यायधीशों की नियुक्ति के बारे में है । यह खंड जिन पदों की नियुक्ति लिखित परीक्षा के माध्यम से की जाती है, उनमे SC/ST/OBC वर्ग के लिए अनिवार्य आरक्षण सुनिश्चित करता है। यदि नियुक्ति साक्षात्कार के माध्यम से की जाती है तो प्रधानमन्त्री सरकारी आदेश से ऐसे पदों पर आरक्षण लागू कर सकेंगे। ]
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(16) सैन्य विभाग के अलावा यह कानून संघीय सरकार द्वारा वित्त पोषित तथा संघीय सरकार के अधीन कार्यरत सभी संस्थाओं /विभागों / इकाइयों , सभी न्यायालयों तथा विश्वविद्यालयों पर लागू होगा।
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(17) यदि कोई संस्था किन्ही पदों पर नियुक्ति के लिए सामान्य चुनावी प्रक्रिया के स्थान पर साक्षात्कार या व्यक्तिनिष्ठ प्रक्रिया या किसी अवस्तुनिष्ठ प्रक्रिया का प्रयोग करती है तो प्रधानमन्त्री को यह अधिकार होगा कि वे अमुक पदों की चयन प्रक्रिया के लिए जातिगत आधार पर SC/ST/OBC वर्ग हेतु आरक्षण लागू करने के लिए सरकारी आदेश जारी कर सकेंगे ।
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(18) अब से उच्चतम न्यायलय में 7% पद SC के लिए, 14% पद ST के लिए तथा 25% पद OBC के लिए आरक्षित रहेंगे । प्रतिशत द्वारा निर्धारित पदों का पूर्णांक प्राप्त करने के लिए प्रथम 5 वर्षो तक छोटी संख्या तथा अगले 5 वर्षो तक बड़ी संख्या को आधार बनाया जाएगा । यदि उच्चतम न्यायलय में न्यायधीशों की नियुक्ति का आधार अवस्तुनिष्ठ चयन होता है तो यह अधिनियम ऐसी नियुक्तियों पर लागू होगा । यदि नियुक्ति का आधार सामान्य चुनाव है तो आरक्षण जारी रहेगा । यदि चयन का आधार वस्तुनिष्ठ है, तो आरक्षण लागू नहीं होगा।
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खंड – द ; गैर हिन्दू धर्मावलंबियो के आरक्षण लाभों पर रोक के लिए प्रावधान
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[ टिप्पणी : यह खंड अहिंदू धर्मावलम्बियों को आरक्षण के लाभ से वंचित करता है। ड्राफ्ट में उत्पत्ति के आधार पर जैन, बौद्ध तथा सिक्ख धर्मावलंबियो को हिन्दू धर्म की श्रेणी में ही रखा गया है। ]
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(19) SC, ST तथा OBC वर्ग के नागरिको को प्राप्त आरक्षण के लाभ सिर्फ हिन्दू, जैन, बौद्ध एवं सिक्ख धर्म के SC, ST एवं OBC वर्ग के नागरिको के लिए ही उपलब्ध रहेंगे ।
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(20) SC, ST तथा OBC वर्ग के नागरिको को प्राप्त आरक्षण के लाभ हिन्दू, जैन, बौद्ध एवं सिक्ख धर्म के SC, ST एवं OBC वर्ग के नागरिको के अलावा अन्य किसी भी धर्म के नागरिको के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे ।
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(21) जनता की आवाज
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(21.1) यदि कोई मतदाता इस कानून के किसी भी खंड की किसी भी धारा में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(21.2) यदि कोई मतदाता धारा 21.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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-----ड्राफ्ट की समाप्ति----

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Aug 19 2020 09:05:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि पीएम / सीएम मॉस्क का क़ानून निकाल देते है और लॉकडाउन चालू रखते है तो क्या हमारी समस्या का समाधान होगा ? नहीं !!
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"मॉस्क अनिवार्य" एक गलत क़ानून है। और मॉस्क नहीं पहनने पर पेनल्टी वसूल करना और भी ज्यादा अन्यायपूर्ण है। किन्तु तब भी असली समस्या लॉकडाउन है !!
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कारोबार और नागरिको को लॉकडाउन तोड़ रहा है, मास्क नहीं !! लॉकडाउन जितना ज्यादा लम्बा चलेगा, स्थानीय कारोबार टूटेगा और बड़ी / विदेशी कंपनियों का बाजार में हिस्सा बढ़ जायेगा। दुसरे शब्दों में, पेड मीडिया के प्रायोजक लॉकडाउन से पैसा बना रहे है, मास्क के क़ानून से नहीं।
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यदि आप मॉस्क के खिलाफ है किन्तु पीएम / सीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए नहीं "कह" रहे है, तो इसका अर्थ है कि, आप सिर्फ मास्क का विरोध कर रहे है लॉकडाउन का नही।
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और तब पीएम / सीएम मास्क का क़ानून निकाल देंगे और लॉकडाउन जारी रखेंगे !! बल्कि शायद वे लॉकडाउन की अवधि और भी बढ़ा दें, क्योंकि उनके पास यह मानने की पर्याप्त वजह होगी कि -- लोग मास्क के खिलाफ है, लॉकडाउन के नहीं !!
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अत: यदि आप "मास्क अनिवार्य" क़ानून के खिलाफ है तब भी आपको पहले पीएम / सीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए कहना चाहिए, मास्क का नंबर इसके बाद आता है।
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यदि कोई कार्यकर्ता मास्क के कानून की खिलाफत पूरे जोर शोर से कर रहा है, किन्तु पीएम / सीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने को "नहीं" कह रहा है तो सम्भावना है कि -- अमुक कार्यकर्ता "जानबूझकर" नागरिको का ध्यान लॉकडाउन से हटाने के लिए उन्हें "सिर्फ मास्क का विरोध" करने की और ठेल रहा है, ताकि लॉकडाउन जारी रहे।
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कृपया पीएम / सीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने को कहें। "कहने" का तरीका क्या होना चाहिए इस बारे में आप फैसला करें। किन्तु तरीका ऐसा होना चाहिए जिसका इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा नागरिक कर सके और उन्हें न्यूनतम असुविधा हो।
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मेरा सुझाव पोस्टकार्ड एवं ट्विट भेजने का है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 20 2020 20:10:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नमस्कार , Aditya Prakash
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यह स्तम्भ आपके प्रश्न तथा टिप्पणियों के लिए बनाया गया है।
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[ सभी के लिए : यह पोस्ट सिर्फ़ 'आदित्य प्रकाश' के प्रश्न और टिप्पणियों के लिए है। अन्य यूजर्स के प्रश्न और टिप्पणियाँ डिलीट कर दी जायेगी। यदि अन्य कोई व्यक्ति प्रश्न करना चाहता है तो इस पोस्ट के पहले कमेन्ट में दिए गए लिंक के कमेन्ट बॉक्स में अपना प्रश्न रख सकता है। ]
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प्रश्नकर्ता से निम्नलिखित नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है :
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(1) हिन्दी भाषा के लिए हिन्दी लिपि और अंग्रेजी भाषा के लिए अंग्रेजी लिपि का प्रयोग करें। रोमन भाषा का प्रयोग नहीं करे ।
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(2) दो पेराग्राफ के बीच '.' चिन्ह का प्रयोग करे ।
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(3) लेखन में अनावश्यक चिन्हों जैसे '.......', '!!!!!!!', '//////', '####', '„„„„„„', '??????' आदि का तथा अनावश्यक 'केपिटल लेटर्स' का प्रयोग नहीं करें ।
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(4) एक बार में एक ही कमेन्ट करे । यदि आपने दो कमेन्ट एक साथ किये है तो निम्नलिखित कदम उठाए -
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अ) पहले कमेन्ट को एडिट करें
ब) दुसरे कमेन्ट को कोपी करके पहले वाले कमेन्ट में पेस्ट करे
स) फिर दुसरे कमेन्ट को डिलीट कर दें ।
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(5) कमेन्ट क्रमिक/सिलसिलेवार ढंग से करे, अक्रमिक रूप से नही ।
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क्रमिक कमेन्ट क्या है ?
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मान लीजिये कि -
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अ) आपने 'पहला' कमेन्ट किया है,
ब) मैंने 'दूसरा' कमेन्ट किया है,
स) आपने 'तीसरा' कमेन्ट किया है,
द) आपने चौथा कमेन्ट किया है ।
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तो यहाँ पहला, दूसरा और तीसरा क्रमिक जबकि चौथा कमेन्ट अक्रमिक है । अक्रमिक कमेन्ट को बिन्दु 4 में बताये तरीके से संपादित कर पिछले कमेन्ट में जोड़ दें ।
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(6) अपने प्रश्नों तथा टिप्पणियों को डिलीट नहीं करे । ताकि अन्य कार्यकर्ता भी इन्हें पढ़ सके ।
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(7) कृपया मेरी फेसबुक प्रोफाइल के एल्बम में जाए और मेरे द्वारा प्रस्तावित कानूनों के लिए बनाए गए विभिन्न एल्बम देखें. इन एलबम्स में से कुछ एल्बम में ड्राफ्ट रखे है. इन्हें पढ़े.
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(8) अन्य विषयों पर मेरे पोस्ट देखने के लिए सम्बंधित एल्बम देखें और इंडेक्स पोस्ट तक स्क्रोल करें. इंडेक्स पोस्ट में आपको पोस्ट्स की सूचियाँ मिलेगी.
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(9) इस स्तम्भ का लिंक देखने के लिए एल्बम में जाकर 'आपसी संवाद स्तम्भ' या 'two person conversation thread' शीर्षक से एल्बम देखें और फीड व्यू क्लिक करें। इस स्तम्भ का लिंक वहां दर्ज किया गया है ।
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(10) कृपया कमेंट्स के लिए liner कमेंट्स बॉक्स का प्रयोग करें। "reply caption" का इस्तेमाल न करें।
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(11) राईट टू रिकॉल पार्टी का घोषणा पत्र इस पोस्ट के पहले कमेन्ट में देखें.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 21 2020 13:26:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(पोस्ट - 01) : लेटर-रजिस्टर सिस्टम पर ये वीडियो देखें।
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यदि आपकी पीएम से कोई मांग है तो पीएम को चिट्ठी भेजकर उनसे कहें। इससे फायदा यह होता है कि पीएम को पता चल जाता है कि -- आप पीएम से कोई मांग कर रहे है !!
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यह बहुत सीधी और सरल बात है और इस वजह से जटिल चीजो को समझने किन्तु सरल चीजो की अवहेलना करने वाले लोग इसे आसानी से नहीं समझ पाते। उन्हें यह अभ्यास हो जाता है कि, महत्त्वपूर्ण चीजे जटिल होती है, और उन्हें समझने के लिए दिमाग भिड़ाना पड़ता है !! और इस वजह से वे काम की बात की अज्ञात रूप से अवहेलना कर देते है।
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ऐसे कई कार्यकर्ता है जो कई महीनो एवं वर्षो पहले यह बात समझ चुके है कि, जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में आने से देश की कई समस्याओ का हल हो जाएगा। किन्तु उनमें से सिर्फ कुछ ही यह बात को समझ पाए है कि जूरी कोर्ट गेजेट में लाने के लिए उन्हें कम से कम पीएम को तो बोलना पड़ेगा होता है !!
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Hitesh ji ने जिस दिन जूरी कोर्ट का क़ानून -पढ़ा उसके अगले हफ्ते ही उन्होंने पीएम को चिट्टी भेज दी थी कि -- जूरी कोर्ट गेजेट में छापो !!
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और काफी कम लोग ऐसी (सरल एवं महत्त्वपूर्ण) बात इतनी तेजी से समझ पाते है कि जब तक हम पीएम को जूरी कोर्ट गेजेट में छापने को नहीं बोलेंगे तब तक पीएम ये क़ानून छापने वाले नहीं है !!

<https://www.youtube.com/watch?v=UoCwagHijsI&feature=youtu.be&fbclid=IwAR3N-aTemPXDFROU-kHHLO5Zk-q6zS0Mthpt6s0dO76Kv7CjyA5JFlZZk4Y>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 22 2020 18:24:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मुझे लगता है कि, विश्वरूप राय चौधरी (मोजाम्बिक से डाईट प्लान में डॉक्टरेट) यदि अपने सभी वीडियो में नागरिको को यह सूचना देते कि – उन्हें पीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए “कहना” चाहिए तो शायद अब तक लॉकडाउन पूरी तरह से ख़त्म हो जाता !!
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(1) यदि विश्वरूप चौधरी अपने वीडियो के दर्शको से कहते कि – वे लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए @PmoIndia पर #EndLockdownTotally ट्विट करें तो लॉकडाउन शायद काफी पहले ख़त्म हो जाता, और भारत के लाखों कारोबारी घाटा उठाने से बच जाते !!
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(2) यदि विश्वरूप चौधरी अपने दर्शको से प्रत्येक वीडियो में कहते कि – उन्हें शहर के प्रत्येक सोमवार को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए पोस्टकार्ड / अंतर्देशीय / लिफाफा / रजिस्ट्री आदि पीएम को भेजना चाहिए, तो लॉक डाउन “और भी पहले ख़त्म हो जाता” और भारत के करोड़ो नागरिक वह नुकसान उठाने से बच जाते जो उन्हें लॉकडाउन की वजह से उठाना पड़ा है !!
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(3) और यदि विश्वरूप चौधरी के दर्शको में से कुछ दर्शक भी यदि विश्वरूप चौधरी से यह सवाल करते कि – आप अपने दर्शको को यह निर्देश क्यों नहीं दे रहे हो कि, उन्हें पीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए ट्विट / पोस्टकार्ड / ख़त भेजना चाहिये तो विश्वरूप चौधरी को इसके लिए बाध्य किया जा सकता था !! (अंधभगत नही। क्योंकि अन्य नेताओं के अंधभगतो की तरह विश्वरूप के अंधभगत भी अपने नेता से कोई सवाल नहीं करते)
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(4) बहरहाल, विश्वरूप चौधरी कार्यकर्ताओ का लॉकडाउन से ध्यान बंटा कर जितना नुकसान कर सकते थे, उतना कर चुके, किन्तु विश्वरूप चौधरी के दर्शको को इस प्रश्न पर विचार करना चाहिए (उनके अंधभगतो को नहीं। क्योंकि अन्य नेताओं के अंधभगतो की तरह विश्वरूप चौधरी के अंधभगत भी अपनी तरफ से कोई विचार नहीं करते) कि, आखिर -- विश्वरूप राय चौधरी ने अपने दर्शको को यह निर्देश क्यों नहीं दिए कि – वे पीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए ट्विट या पोस्टकार्ड भेजे ?
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मैं इस बारे में अलग से लिखूंगा कि, क्यों विश्वरूप लॉकडाउन जारी रखना चाहते थे, और कई बार आग्रह करने के बावजूद क्यों उन्होंने अपने दर्शको को यह निर्देश देने से इनकार कर दिया था कि – उन्हें पीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए पोस्टकार्ड या ट्विट भेजने चाहिए !!
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सूचना : मैं मानता हूँ कि, किसी भी व्यक्ति को किसी रोग आदि के बारे में अपनी “राय” व्यक्त करने के लिए डॉक्टर होना जरुरी नहीं है। किन्तु विश्वरूप राय चौधरी Mbbs डॉक्टर नहीं होने के बावजूद जानबूझकर फोटो खिंचवाते समय स्टेथोस्कोप गले में लटका लेते है, ताकि अपनी बात में प्रभाव पैदा किया जा सके। यह नैतिक व्यवहार नहीं है। चूंकि दर्शको का एक बड़ा वर्ग उन्हें Mbbs डॉक्टर मानकर चल रहा है, अत: यह सूचना दी गयी है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Aug 23 2020 12:26:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस एल्बम में उन गतिविधियों एवं तरीको के बारे में विवरण रखें जायेंगे जिनका इस्तेमाल करके शीर्ष कार्यकर्ता / नेता आदि व्यवस्थित ढंग का प्रयोग करके पर्याप्त रूप से सूचित एवं समर्पित कार्यकर्ताओ एवं नागरिको का समय बर्बाद कर देते है, ताकि उनका ध्यान मूल मुद्दे से हटाया जा सके !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Aug 23 2020 12:57:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

विश्वरूप राय चौधरी जी से अपील :
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श्रीमान , यदि आप लॉकडाउन को पूर्णतया समाप्त करने का समर्थन करते है तो कृपया 2 से 5 मिनिट अवधि का एक वीडियो बनाएं, जिसमें नागरिको के लिए अपील जारी करे कि – वे पीएम को लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने को “कहें” !!
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(A) कृपया निम्नलिखित बिन्दुओ पर भी विचार करें
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(a1) कृपया वीडियो की अवधि यथासंभव छोटी रखे, ताकि कार्यकर्ता इसे डाउनलोड करके अपनी फेसबुक वाल पर रख सके. इससे यह वीडियो तब भी उपलब्ध रहेगा, जब यू ट्यूब इसे डिलीट कर देगा।
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(a2) कृपया वीडियो का थम्ब नेल / टाइटल इस तरह का रखें जिससे बिना वीडियो को खोले भी यह स्पष्ट हो कि यह वीडियो पीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के बारे में है कोरोना के बारे में नहीं।
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(a3) कृपया इस वीडियो को अपनी फेसबुक वाल पर भी “अपलोड” करें ताकि वीडियो फेसबुक के सर्वर पर भी रहे।
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(a4) कृपया फेसबुक लाइव आकर भी ठीक यही अपील जारी करें।
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(B) नागरिको को पीएम को “कहने” के लिए किस तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए इस बारे में आप स्वयं तय करें। आपको जो भी तरीका ठीक लगता है उस तरीका इस्तेमाल करने के लिए आप कह सकते है। किन्तु आपसे अनुरोध है कि, नागरिको को ऐसे तरीके का इस्तेमाल करने को कहें जिसका इस्तेमाल भारत के ज्यादा से ज्यादा नागरिक कर सके, और यह तरीका विकेन्द्रित हो।
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क्योंकि सरकार को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए सिर्फ तब ही बाध्य किया जा सकता है जब ‘करोड़ो’ नागरिक पीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने को कहें। मेरा सुझाव है पोस्टकार्ड भेजने का है। पोस्टकार्ड क्यों बेहतर है, इसकी निम्नलिखित वजहें है :
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(b1) पोस्टकार्ड पूरे भारत में सभी गाँव / कस्बे / शहरो में उपलब्ध है। यदि पोस्टकार्ड ना हो तो नागरीक इनलेंड लेटर / लिफाफा / bookpost आदि भी भेज सकते।
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(b2) यह काफी सस्ता है (50 पैसे) और गरीब से गरीब आदमी भी इसका इस्तेमाल कर सकता है।
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(b3) पोस्टकार्ड डालने के लिए नागरिको को पोस्ट बॉक्स तक आना होगा और इस तरह कानूनी रूप से एक स्ट्रीट मॉस मूवमेंट शुरू होगी, और सभी शहरो / कस्बो / गाँवों मे विकेन्द्रित होने के कारण इसे रोका नहीं जा सकेगा।
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(b4) यदि आप पोस्टकार्ड वाले तरीके का इस्तमाल करते है तो कृपया 5 तारीख तय करें। क्योंकि भारत में कई कार्यकर्ता पहले से ही 5 तारीख को पोस्टकार्ड भेज रहे है । अत: समूह बड़ा होने से सरकार पर ज्यादा दबाव बनेगा।
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(b5) आप चाहे तो लॉकडाउन का पोस्टकार्ड डालने के लिए सप्ताह में एक दिन (जैसे प्रत्येक सोमवार आदि) तय कर सकते है । और नागरिक प्रत्येक सोमवार तब तक पोस्टकार्ड डालेंगे जब तक कि लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त नहीं हो जाता।
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(b6) आप चाहे तो लॉकडाउन के लिए #EndLockdownTotally एवं #लॉकडाउन_पूर्णतया_समाप्त_करें हेश का इस्तेमाल कर सकते है, या नयी हेश जारी कर सकते है।
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(C) विश्वरूप राय चौधरी जी के दर्शको / समर्थको के लिए :
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(c1) कृपया विश्वरूप राय चौधरी जी को सार्वजनिक रूप से कहें कि वे नागरिको के लिए इस तरह की अपील जारी करे - नागरिक लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए पीएम को कहें !!
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(c2) मेरा मानना है कि, यदि विश्वरूप राय चौधरी जी के समर्थक / दर्शक उन्हें सार्वजनिक रूप से यह कहते है तो विश्वरूप राय चौधरी जी को यह अपील जारी करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
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(D) सूचना : मैंने विश्वरूप राय चौधरी पर एक पोस्ट लिखा था जिसमें यह कहा था कि : यदि वे अपने सभी वीडियो में नागरिको को यह सूचना देते कि – उन्हें पीएम को लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए “कहना” चाहिए तो शायद अब तक लॉकडाउन पूरी तरह से ख़त्म हो जाता ---<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=3159319737519574&set=a.2750812211703664&type=3>;
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अमुक पोस्ट में कुछ कार्यकर्ताओ द्वारा कहा गया कि, हो सकता है कि विश्वरूप जी को यह पता न हो कि, लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए पीएम को कहना चाहिए। इसीलिए यह सार्वजनिक अपील जारी की गयी है। (वैसे उन्हें इस बारे में पूरी सूचना है)
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बहरहाल, देर आयद दुरुस्त आयद। यदि अब भी विश्वरूप राय चौधरी लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए नागरिको के पक्ष में यह अपील जारी कर देते है तो मैं उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करूँगा। क्योंकि विश्वरूप राय चौधरी जी से मेरा ऐतराज सिर्फ इतना है कि वे अपने दर्शको / समर्थको को यह नहीं कह रहे है कि वे लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए पीएम को कहें।
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और यह एक बड़ी वजह है कि लॉकडाउन विरोधी मूवमेंट खड़ी नहीं हो पा रही है। पिछले 5 महीने से सारी बहस मास्क, कोरोना, वैक्सीन आदि के इर्द गिर्द घूम रही है, और लॉकडाउन की वजह से लाखो लोग बर्बाद होते जा रहे है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Aug 23 2020 21:34:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पीएम को चिट्ठी भेजना जनआन्दोलन (Mass Movement) खड़ा करने का सबसे प्रभावी एवं निरापद तरीका है। इस तरीके का इस्तेमाल करके कार्यकर्ता पीएम को किसी भी मांग को मानने के लिए आसानी से बाध्य कर सकते है। इस पोस्ट में मैंने लेटर-रजिस्टर मेथड की कई विशेषताओ में से कुछ के बारे में बताया है।
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(1) पीएम जब चिट्ठी पढ़ते ही नहीं है तो चिट्ठी भेजने से क्या लाभ है ?
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इक्का दुक्का लोग यदि चिट्ठी भेजेंगे तो जाहिर है कि प्रधानमंत्री कार्यालय पीएम को इस बारे में सूचित भी करने वाला नहीं है। लेकिन यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक (46 करोड़ मतदाता) पीएम को चिट्ठी भेजते है तो पीएम को अमुक मांग मानने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
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लॉकडाउन के उदाहरण से इसे समझते है :
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भारत में 550 जिले (संसदीय क्षेत्र) , 4000 कस्बे (विधानसभा क्षेत्र) और लगभग 2 लाख गाँव (ग्राम पंचायत) है।
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एक जिले में लगभग 20 लाख नागरिक रहते है। अब मान लीजिये कि, किसी जिले में सिर्फ 1% नागरिक यानी 20 हजार नागरिक 5 तारीख को 5 बजे शहर के पोस्ट बॉक्स पर पहुँच कर पोस्टकार्ड / बुकपोस्ट / लिफाफे / अंतर्देशीय पत्र आदि भेजने के लिए पहुँचते है। और मान लीजिये कि ऐसा भारत के 100 जिलो में होता है।
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तो पहले चरण में 5 तारीख को सड़को पर कितने लोग होंगे ?
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20,000*100 = 20,00,000 ( 20 लाख !!)
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अब अगले पूरे सप्ताह कार्यकर्ता ट्विटर, फेसबुक, यू ट्यूब, इन्स्टाग्राम आदि की सहायता से नागरिको में प्रचार करते है कि वे भी चिट्ठी डालने आये। तो अगली बार जब ये लोग चिट्ठी डालने जायेंगे तो कितने लोग होंगे ?
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मेरा अनुमान है कि यदि किसी समय चिट्ठी डालने वालो की संख्या 20 लाख पहुँच जाती है तो अगले दफा यह संख्या लगभग 5 गुना तक बढ़ जाएगी !! 20 लाख*5 = 1 करोड़ !! और अगले प्रत्येक चरण में ये संख्या इसी अनुपात में बढती रहेगी जब तक कि सरकार लॉकडाउन को पूर्णतया समाप्त न कर दें !!
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तो सरकार कितनी संख्या सड़को पर सह सकती है ?
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मेरा अनुमान है कि, 1 से 5 करोड़ की संख्या को सड़को पर सहना सरकार की शक्ति से बाहर है। और यदि सरकार फिर भी इसकी अवहेलना करती है तो यह संख्या लगातार बढती जाएगी।
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सार यह है कि, जो कार्यकर्ता कहते है कि पोस्टकार्ड भेजने से कुछ नहीं होता वे जानबूझकर या अनजाने में इस बिंदु की अवहेलना करते है कि, जब करोड़ो नागरिक पीएम को चिट्ठी भेजेंगे तो डाकखानो को चिट्ठियां पीएम तक पहुँचाने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी, पीएम द्वारा चिट्ठी पढ़ना तो बहुत आगे की बात है !!
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पीएम सीधा यह पूछेंगे कि लोगो का ये हुजूम सड़को क्यों है ?
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और जवाब होगा - लॉकडाउन ख़त्म करो !!
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यदि 1 करोड़ नागरिक चिट्ठी भेजने के लिये निकल आते है तो बिना किसी प्रयास के फेसबुक पर लगभग 5 गुना, यानी 5 करोड़ वाल पर 'EndLockdownTotally' के पोस्ट घूम रहे होंगे, ट्विटर पर यह हेश निरंतर ट्रेंड कर रहा होगा और देश के विभिन्न क्षेत्रो से हजारो की संख्या में पोस्टकार्ड डालने वाले समूहों के असीमित फोटो अपलोड हो रहे होंगे !!
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और सबसे जरुरी बात, इस प्रक्रिया को किसी भी तरह से रोका नहीं जा सकेगा। क्योंकि यह मूवमेंट पूरी तरह से विकेन्द्रित होगी और इसका स्विच न तो किसी नेता के हाथ में होगा और न ही पेड मिडिया के पास !! मतलब एक बार शुरू होने के बाद यह रुकेगा नहीं !! ( A Leader less Media Less Mass Movement )
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और यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी होगी। सरकार एवं नागरिको के बीच कोई घर्षण नहीं होगा !! यदि यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है तो पेड मीडिया के प्रयोजको के पास इसे रोकने का कोई तरीका नहीं है। सरकार पोस्टकार्ड आदि की सप्लाई रोक देगी, किन्तु इस मामूली समस्या का समाधान 50 पैसे के बुकपोस्ट छपवाकर किया जा सकता है। और बुक पोस्ट पर डाक टिकेट लगा दिए जायेंगे !!
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दुसरे शब्दों में, मॉस मूवमेंट खड़ा करने की अब तक खोजे गए तरीको में यह सबसे प्रभावी तरीका है।
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(2) क्या यह सब होना इतना आसान है ?
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यह सब उससे भी ज्यादा आसान है, जितना आप सोच रहे है। किसी भी कार्य को करने में 2 प्रकार की चुनौतियाँ हो सकती है :
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(2.1) व्यवहारिक समस्या
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(2.2) मनोवैज्ञानिक समस्या
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(2.1) व्यवहारिक समस्याएं : यहाँ कोई व्यवहारिक समस्या नहीं है। चिट्ठी भेजने के लिए किसी व्यक्ति को अपन नजदीकी पोस्ट ऑफिस जाकर सिर्फ 50 पैसे का एक पोस्टकार्ड खरीदना है। यदि पोस्टकार्ड न हो तो इनलेंड लेटर, या लिफाफा भी खरीद सकता है। पूरे भारत में यह उपलब्ध है !!
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पोस्टकार्ड में आपको सिर्फ एक लाइन लिखनी है -- प्रधानमंत्री जी, लॉकडाउन_पूर्णतया_समाप्त_करें
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और अपना नाम, दिनांक एवं वोटर नम्बर लिखकर इसे पोस्ट बॉक्स में गिरा देना है। यदि फोटो कॉपी की सुविधा उपलब्ध हो तो इसकी एक फोटोकॉपी करवा ले या अपने मोबाइल से इसकी एक साफ़ फोटो ले ले, ताकि आप इसे रिकॉर्ड के लिए रख सके। बस हो गया। क्या इसमें आपको किसी विशेष प्रशिक्षण, अतिरिक्त धन, अतिरिक्त ऊर्जा या अतिरिक्त समय की आवश्यकता है ? नहीं है !! तो चिट्ठी भेजने में कोई व्यवहारिक समस्या नहीं है।
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(2.2) मनोविज्ञानिक समस्याएं :
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(a) फेसबुक स्क्रोल करते हुए बेतरबीब ढंग से कमेन्ट करने की तुलना में पोस्ट बॉक्स तक की दूरी तय करने में मनुष्य को जो साधारण तकलीफ उठानी पड़ती है, कार्यकर्ता यथासंभव उससे बचना चाहते है।
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(b) कुछ कार्यकर्ता यह सोचते है कि जब काफी सारे लोग चिट्ठी भेजेंगे तो मैं भी भेजूंगा। अमुक व्यक्ति बहुधा किसी कार्य को सिर्फ तब करते है, जब काफी सारे लोग उसे करना शुरू करें, या यह ट्रेंड में आ जाए। और इस तरह शुरुआत ही नहीं हो पाती।
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(c) कई कार्यकर्ता किसी ब्रांडेड व्यक्ति या पेड मीडिया द्वारा दी गई दिशा में बढ़ने के आदि होकर ब्रेन डेड हो जाते है। अत: वे उन सभी कदमो को उठाने से बचते है जो पेड मीडिया द्वारा बताए गए तरीको में शुमार न हो।
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और इसी तरह के दर्जनों मनोवैज्ञानिक कारक इसमें और भी जोड़े जा सकते है। यदि किसी कदम को उठाने में व्यवहारिक समस्या है तो यह एक वाजिब कारण है, किन्तु मनोवैज्ञानिक कारणों का कोई हल नहीं होता। इसे व्यक्ति को स्वयं ही हल करना होता है। मतलब कोई व्यक्ति आपको कंधे पर लादकर पोस्ट ऑफिस नहीं ले जा सकता। जाना तो आपको स्वयं ही पड़ेगा।
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और जब तक कुछ कार्यकर्ता यह तकलीफ उठाकर आगे कदम नहीं बढ़ाते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। और शुरुआत कार्यकर्ताओ को ही करनी होगी, नागरिक इसमें काफी बाद में जुड़ना शुरू होंगे। और जितने ज्यादा कार्यकर्ता कदम उठाना शुरू करेंगे उतनी तेजी से नागरिको तक यह सूचना पहुंचेगी, और एक बार यदि नागरिक इससे सूचित हो जाते है तो वे तेजी से इसमें भागीदार बनना शुरू कर देंगे।
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और यदि आपको लगता है कि पीएम को "कहने" के लिए चिट्ठी भेजना एक कमतर तरीका है, तो कृपया हमें कोई बेहतर तरीका बताइये, जिससे हम भी पीएम को "कहने" में उसका इस्तेमाल कर सके। सिर्फ "पोस्टकार्ड भेजने से कुछ नहीं होता" का एलान पर्याप्त नहीं है। आपको इसका विकल्प भी बताना चाहिए।
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बहरहाल, यदि आप पीएम को चिट्टी भेजेंगे ही नहीं तो पीएम द्वारा आपकी चिट्ठी पढ़ने की सम्भावना शून्य है। और यदि आप पीएम को चिट्ठी भेज देते है तो पीएम इसे पढ़ भी सकते है और नहीं भी पढ़ सकते है। इसीलिए यदि आप पीएम को चिट्ठी भेजते है तो इसे पढ़ने की सम्भावना बढ़ जाती है।
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पीएम के दफ्तर में भेजी गयी सभी चिट्ठियों को पढ़ा जाता है, और इनका रिकॉर्ड रखा जाता है। आज के 10 वर्ष पहले भी यदि किसी व्यक्ति ने कोई चिट्ठी भेजी है तो आपको प्रधानमंत्री कार्यालय में इसका रिकॉर्ड मिल जायेगा। आप चाहे तो सीधे पीएम को ट्विट करके पूछ सकते है, या आरटीआई लगाकर पता कर सकते है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 24 2020 16:07:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रधानमन्त्री से मांग करने के लिए पोस्टकार्ड भेजने का तरीका :
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(1) दिवस : पोस्टकार्ड नागरिक कर्तव्य दिवस यानी महीने की 5 तारीख को ही भेजा जाना चाहिए। यदि आपने किसी अन्य तारीख को पोस्टकार्ड भेजा है तब भी ठीक वही पोस्टकार्ड 5 तारीख को भी फिर से भेजें। यदि आपने अन्य दिन पोस्टकार्ड भेजा है, किन्तु 5 को नहीं भेजा है तो मांग आगे नहीं बढ़ेगी।
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(2) समय : पोस्टकार्ड सांय 5 बजे ही भेजा जाना चाहिए। आप 4:30 बजे से 5:30 बजे के बीच किसी भी समय पोस्ट बॉक्स तक पहुँच सकते है। किन्तु मानक समय 5 बजे का ही रहेगा।
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(3) सन्देश लेखन : पोस्टकार्ड के पीछे वाला हिस्सा खाली रहेगा और इस पर कोई संदेश न लिखें। लिखने को आप इस पर कुछ भी लिख सकते है, किन्तु इस पर आप जो भी लिखेंगे उसके कोई मायने नहीं है। जो भी सन्देश है उसे सिर्फ पोस्टकार्ड के उसी हिस्से की तरफ लिखना है, जिधर एड्रेस लिखा जाता है। [नमूना पोस्टकार्ड सलंग्न का चित्र देखें]
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(3.1) सबसे पहले आपकी मांग की हेश लिखे। यही हेश आपकी मांग होनी चाहिए, लम्बी इबारत नहीं। उदाहरण के लिए, यदि आपकी मांग लॉकडाउन समाप्त करने की है तो सबसे ऊपर #EndLockdownTotally लिखे।
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यदि आपकी मांग जूरी कोर्ट है तो #JuryCourt गेजेट में छापें लिखे।
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पोस्टकार्ड की यह हेश आपके फेसबुक पोस्ट, ट्विटर आदि पर रखी गयी मांग को पोस्टकार्ड से कनेक्ट करेगी। और यह हेश ऑनलाइन प्लेटफोर्म पर उन सभी नागरिको को भी आपस में कनेक्ट करेगी जिन्होंने पोस्टकार्ड भेजा है और इस हेश का प्रयोग ऑनलाइन किया है।
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(3.2) इसके बाद निचे अपना नाम, दिनांक एवं वोटर आई डी नंबर लिखें। यदि आपको वोटर नंबर याद नहीं है तो अपना ड्राइविंग लाइसेंस नम्बर या आधार नंबर भी लिख सकते है।
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[ यदि पोस्ट ऑफिस में पोस्टकार्ड उपलब्ध नहीं है तो आप इन्लेंड लेटर (अंतर्देशीय पत्र) ले सकते है। इसे फोल्ड करके एक तरफ पीएम का पता लिखे और दूसरी तरफ सन्देश लिखे।]
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(4) चिट्ठीयों का रिकॉर्ड रखना : अब इस पोस्टकार्ड की एक फोटोकॉपी कराएं एवं अपने मोबाईल से इसकी एक फोटो निकाले।
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(4.1) My Letters to Pm(*) नाम से एक रजिस्टर बनाए, और इस फोटोकॉपी को इस रजिस्टर के अंदर पेज पर चिपका कर रख ले।
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(*) भेजे गए पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी रजिस्टर में रखना सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण कदम है। यदि आप सिर्फ पोस्टकार्ड भेजते है किन्तु फोटोकॉपी नहीं रखते है तो मांग आगे नहीं बढ़ सकती। यदि आपने फोटोकॉपी का रिकॉर्ड नहीं रखा है तो पोस्टकार्ड भेजना न भेजना बराबर है।
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(4.2) यदि आप फेसबुक पर है तो My Letters to Pm नाम से एक फेसबुक एल्बम बनाएं और पोस्टकार्ड का फोटो इस एल्बम में पोस्ट करें।
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(4.3) यदि आप ट्विटर पर है तो जो हेश आपने पोस्टकार्ड भी लिखी है, वही हेश @PmoIndia पर ट्विट कर दें।
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(i) यदि आपकी मांग सीएम से है तो ठीक इसी तरह का पत्र सीएम को भी लिख सकते है।
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(ii) जब तक आपकी मांग पूरी न हो प्रत्येक महीने की 5 तारीख को निरंतर चिट्ठी डालते रहे, और अन्य नागरिको को भी पोस्टकार्ड भेजने के लिए कहें। एक मांग के लिए एक ही पोस्टकार्ड डालें। यदि आपकी 2 मांगे है तो 2 पोस्टकार्ड प्रयोग करें।
.
(iii) पीएम का पता –
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श्री नरेंद्र मोदी ,
प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली
.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 24 2020 20:15:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

NRC has started . Modiji is checking PAPERS submitted by the peacock.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 24 2020 20:20:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस तरह पेड मिडिया ने लॉकडाउन को कोरोना के साथ मिक्स करके कार्यकर्ताओं का ध्यान बंटाया :
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(1a) कोरोना की वजह से कारोबार तबाह हो गया
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सच - कोरोबार को लॉकडाउन ने तबाह किया कोरोना ने नहीं !!
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(1b) कोरोना की वजह से अर्थव्यवस्था टूट गयी
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सच - अर्थव्यवस्था को लॉकडाउन ने तोड़ा कोरोना ने नहीं।
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और पिछले 6 महीने में उन्होंने इसी तरह लगातार गलत रिपोर्टिंग की।
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लॉकडाउन डालने का फैसला प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्रियों ने किया था। और पेड मिडिया के प्रायोजक हमेशा से जानते थे कि -- कोरोना को रोकने का लॉकडाउन से कोई लेना देना नहीं है। किन्तु लॉकडाउन जारी रखने के लिए पेड मिडिया कर्मियों ने लॉकडाउन के समस्त दुष्प्रभाव कोरोना के खाते में डाल दिए।
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इससे कार्यकर्ताओ का ध्यान असली समस्या (लॉकडाउन) से हट गया और वे "कोरोना असली / कोरोना फर्जी" की टाइम पास बहस में उलझ गए।
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(2) जिन सूचित कार्यकर्ताओ को पेड मीडिया द्वारा इतनी आसानी से मामू नहीं बनाया जा सकता था उन्हें पेड मीडिया कर्मियों ने बिल गेट्स दे दिया !! यदि कार्यकर्ता बिल गेट्स के कपडे फाड़ने में खुद को व्यस्त न कर लेते तो उनके दिमाग में यह बात आती कि -
.
(2a) अर्थव्यवस्था को लॉकडाउन तोड़ रहा है, कोरोना नहीं !!
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(2b) और लॉकडाउन डालने के आदेश पर हस्ताक्षर पीएम ने किये है बिल गेट्स ने नहीं
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(2c) और लॉकडाउन हटवाने के लिए पीएम पर दबाव बनाना होगा बिल गेट्स पर नहीं। क्योंकि बिल गेट्स कभी चुनाव में नहीं आने वाला है !!
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कार्यकर्ता इस बात को समय रहते समझ जाते तो लॉकडाउन हटवाने के लिए पीएम पर दबाव बनाने के लिए कार्य करना शुरू करते, और लॉकडाउन ख़त्म होने की सम्भावना बढ़ जाती। किन्तु उन्होंने अपनी सारी ऊर्जा बिल गेट्स और उसके "भविष्य लक्षी" एजेंडे को "एक्सपोज" करने में लगा दी और लॉकडाउन ख़त्म करने की मुहीम पर काम नहीं कर पाए !!
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और कृपया इस बात को नोट करें कि जिस दिन लॉकडाउन डाला गया था उसके उस दिन भी भारत के 70% नागरिक लॉकडाउन के विरोध में थे !!
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तो बिल गेट्स और उसकी वैक्सीन को चेस करने वाले कार्यकर्ताओ को इस बात पर विचार करना चाहिए कि -- पिछले 6 महीनो में भारत में जो लाखों कारोबारी तबाह हुए है, और करोडो नागरिको को जो आर्थिक / मानसिक परेशानी उठानी पड़ी है उसकी वजह वैक्सीन रही है या लॉकडाउन !! कहने की जरूरत नहीं कि, तबाही लॉकडाउन ने दी है।
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बंदगी हालत से जाहिर है, खुदा हो या न हो !!
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बहरहाल, उनका स्ट्रोक लॉकडाउन था, वैक्सीन नहीं। उन्होंने वैक्सीन-चिप को खतरे के रूप में बताया ताकि कार्यकर्ता बड़े और असली खतरे यानी लॉकडाउन पर ध्यान न दे सके !!
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(2) लॉकडाउन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ पेड मीडिया के प्रायोजकों ने इसका डिजाइन बदल दिया है। और नया डिजाइन ज्यादा घातक है।
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(a) पहले उन्होंने औचक लॉकडाउन डालकर लोगो को जाया तौर पर नुकसान पहुँचाया। यदि लॉकडाउन की पूर्व सूचना दे दी जाती तो काफी लोग नुकसान उठाने से बच जाते।
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(b) जब उन्होंने देखा कि लोग आजिज आ चुके है और अब सम्पूर्ण लॉक डाउन जारी रखना मुश्किल है तो उन्होंने यह कहना शुरू किया कि, हमें कोरोना के साथ रहने की आदत डालनी होगी।
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(c) किन्तु उन्होंने लॉकडाउन पूरी तरह से नहीं खोला। बल्कि इस तरह के निर्बंधन लगाए है जिससे कारोबार पूरी क्षमता से काम नहीं कर सके। उन्होंने अलग अलग शहरो में कारोबार के कार्य घंटे सीमित कर दिए। ट्रेन, परिवहन आदि को नहीं खोला। कभी एक शहर में ढील देते है पर दूसरे शहर में प्रतिबन्ध बढ़ा देते है।
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अर्थव्यवस्था आंशिक रूप से नहीं चल सकती। अर्थव्यस्था सिर्फ तब ही पटरी पर आएगी जब लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करके सभी निर्बंधन हटा लिए जाए।
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आधी क्षमता से काम करने के कारण कारोबार में अब भी घाटा हो रहा है। क्योंकि धंधा करने की एक स्थायी लागत होती है। जिसमें बिजली, भाड़ा, वेतन, मेंटेनेंस आदि शामिल है। यदि कारोबार पूरी क्षमता से काम नहीं करेगा तो बिक्री कम होगी और स्थायी लागत बढ़ने के कारण घाटा होगा।
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इस समय ज्यादातर कारोबारी इसी वजह से घाटा बना रहे है। जब अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगेगी तब वे फिर से प्रतिबन्ध बढ़ाकर कारोबार को तोड़ेंगे। और इस तरह का सर्कस वे अगले 1 वर्ष तक चलाएंगे !! और लगभग साल भर बाद जब लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त होगा तब न तो लोगो के पास पैसा बचेगा, न कारोबार करने की हिम्मत रहेगी !! और तब बड़ी एवं विदेशी कंपनियों का हिस्सा बाजार में बढ़ जायेगा !!
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समाधान - आने वाली 5 तारीख को 5 बजे प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजें। और अपने आस पास के कारोबारियों को सूचित करें कि यदि वे लॉकडाउन को पूर्णतया समाप्त करना चाहते है तो वे भी पीएम को पोस्टकार्ड भेजकर लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने की मांग करें।

<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=3162715910513290&set=a.2186274401490784&type=3&theater>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 24 2020 20:50:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

3 मिनट का यह वीडियो बताता है कि कैसे Evm में बड़े पैमाने पर वोटो की हेराफेरी की जा सकती है। केंचुआ ने 2019 के आम चुनाव से ठीक पहले Evm के पारदर्शी कांच को अंधे कांच (Mirror Glass) से बदल दिया था।
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यदि कांच को बदला नहीं जाता तो यह हेराफेरी नै की जा सकती थी !!
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यह वीडियो 26 दिसंबर 2019 को फेसबुक लाइव में बनाया गया था। लाइव वीडियो का लिंक पहले कमेन्ट में देखें।
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यदि आप Evm विरोधी है तो यह फेसबुक ग्रुप जॉइन करें - <https://www.facebook.com/groups/CancelEvm/permalink/622242408632500/>;
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Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

3 मिनट में EVM समर्थकों को ये विश्वास्त करना कि evm के कागज के वोटों में गड़बड़ी की जा सकती है!!!

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Convince Evm supporter in 3 minutes that EVM paper votes can be manipulated !!!!

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[<https://www.facebook.com/groups/CancelEvm/permalink/622242408632500/>;](<https://www.facebook.com/groups/CancelEvm/permalink/622242408632500/>;)

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video was made LIVE on 26-dec-2019. The link to live video made is first comment below.

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if you are anti-EVM, then pls joing this FB group.

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To download above video , pls use link - <https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10156543995696922>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 24 2020 21:28:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इतिहास की पाठ्यपुस्तकों के पुनरीक्षण के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया :
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Proposed Notification to revise history Text books
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इतिहास के लेखन के साथ समस्या यह है कि जो भी व्यक्ति इसे लिखता है, वह जाने अनजाने अपना आशय एवं दृष्टिकोण इसमें समाहित कर देता है। और इस वजह से इतिहास की पाठ्यपुस्तकें कभी भी निष्पक्ष नहीं होती। इसमें उस राजनैतिक दल की विचारधारा का मिश्रण हो जाता है, जो दल इतिहास की पाठ्यपुस्तकों के लेखको की नियुक्ति करता है। कोई अपवाद नहीं !! यह प्रस्तावित कानून पाठ्यपुस्तकों में सही इतिहास लिखने की प्रक्रिया देता है। प्रधानमंत्री हस्ताक्षर करके इस कानून को गेजेट में छाप सकते है, इसके लिए संसद की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो पीएम को पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखें –
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प्रधानमन्त्री जी, इतिहास की पाठयपुस्तको के पुनरीक्षण का क़ानून गेजेट में छापें - #HistoryRevise , #Rrp26
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टिप्पणियाँ इस कानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अन्य अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है । टिप्पणियाँ किसी भी मंत्री, अधिकारी या जज आदि पर बाध्यकारी नहीं है।
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सैक्शन – A
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कमेटियों का गठन :
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(01) पाठ्यपुस्तको के पुनरीक्षण के लिए केन्द्रीय कमेटी : शिक्षा मंत्री केन्द्रीय स्तर पर इतिहासकारों की एक कमेटी बनाएगा। शिक्षा मंत्री इस कमेटी के अध्यक्ष एवं इसके सदस्यों की नियुक्ति अपनी पसंद से करेगा। इस कमेटी को केन्द्रीय पुनरीक्षण कमेटी कहा जायेगा।
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(1.1) अध्यक्ष का कार्यकाल 1 वर्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष होगा।
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(1.2) शिक्षा मंत्री तय करेगा कि इस कमेटी का आकार क्या होगा, तथा सदस्यों एवं अध्यक्ष को मासिक / वार्षिक / प्रति उपस्थिति कितना भुगतान किया जायेगा।
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(1.3) यदि इस कमेटी के अध्यक्ष या सदस्यों के खिलाफ पक्षपात आदि की कोई शिकायत आती है, तो मामले की सुनवाई इतिहासकारों की जूरी करेगी। जूरी का चयन इतिहासकारों की सूची से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। (धारा 5 देखें)
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(1.4) यह कमेटी तब तक निरंतर कार्य करेगी जब तक पुनरीक्षण का कार्य पूरा नहीं हो जाता।
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(02) पाठ्यपुस्तको के पुनरीक्षण के लिए राज्य कमेटी : राज्यों के शिक्षा मंत्री भी अपने अपने राज्यों में इसी तरह की कमेटी बनायेंगे। इन कमेटियो को राज्य पुनरीक्षण कमेटी कहा जायेगा।
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(03) संसदीय पुनरीक्षण समिती : शिक्षा मंत्री केन्द्रीय कमेटी बनाने के लिए स्पीकर से कहेगा कि, वे अपनी पार्टी के सांसदों को मिले वोटो के अनुसार अपना प्रतिनिधि भेजें। मान लीजिये कि पार्टी X को लोकसभा में 10% वोट मिले है, तो उसके 10 सांसद कमेटी में जायेंगे। यदि किसी रजिस्टर्ड एवं गैर मान्यता प्राप्त पार्टी के प्रत्याशी या निर्दलीय प्रत्याशी ने सांसद के चुनाव में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है तो ऐसे गैर सांसदों को भी इस कमेटी में सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
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(3.1) गैर सांसद सदस्यों को प्रति उपस्थिति भुगतान एवं यात्रा भत्ते आदि दिए जायेंगे।
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(3.2) पार्टी चाहे तो सांसद की जगह पर अपने किसी अन्य प्रतिनिधि जैसे इतिहासकार आदि को भी कमेटी में भेज सकती है।
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(3.3) सदस्य का कार्यकाल 2 वर्ष होगा, और 2 वर्ष बाद वह अपने आप कमेटी से बाहर हो जाएगा। पार्टी चाहे तो उसे फिर से नियुक्त कर सकती है, या अन्य किसी सांसद को भेज सकती है। किन्तु किसी भी सांसद को 3 बार से अधिक नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।
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(3.4) गैर सांसद सदस्य का की सदस्यता तब तक जारी रहेगी, जब तक कि अमुक लोकसभा का कार्यकाल समाप्त नहीं हो जाता।
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(04) विधानसभा पुनरीक्षण समिती : प्रत्येक राज्य के शिक्षा मंत्री भी अपने अपनी विधानसभाओ से प्राप्त हुए वोटो के हिसाब से विधायको को चुनकर इसी तरह की राज्य कमेटी बनायेंगे। यदि किसी रजिस्टर्ड एवं गैर मान्यता प्राप्त पार्टी के प्रत्याशी या निर्दलीय प्रत्याशी ने विधायक के चुनाव में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है तो ऐसे गैर गैर विधायको को भी इस कमेटी में सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
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(05) इतिहासकारो की केन्द्रीय सूची : शिक्षा मंत्री ऐसे लोगो की सूची बनाएगा जिन्होंने इतिहास के किसी विषय आदि पर शोध पत्र प्रकाशित किये हो। इस सूची में मानद डॉक्टरेट, पीएचडी, प्रोफेसर, व्याख्याता आदि होंगे, जिनके पास इतिहास के पर्याप्त अध्ययन / अध्यापन की प्रमाणिकता है। इस सूची में ऐसे व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाएगा जिसने इतिहास में सिर्फ स्नातकोत्तर किया है, एवं उसके पास अन्य कोई अर्हता नहीं है। शिक्षा मंत्री इसके लिए चिन्हित की जा सकने वाली पात्रता निर्धारित करेंगे।
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(5.1) ऐसे लोगो की सूची देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, ऐतिहासिक शोध संस्थानों, पुरातात्विक संस्थानों आदि से मांगी जा सकती है।
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(5.2) यदि किसी व्यक्ति का नाम इस सूची में शामिल होने से रह गया है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में अपने प्रमाण पत्रों के साथ आवेदन कर सकता है। यदि दावा प्रमाणिक पाया जाता है तो उसका नाम जोड़ दिया जाएगा।
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(5.3) यदि कोई व्यक्ति अपना नाम इस सूची से हटाना चाहता है तो वह इसके लिए आवेदन कर सकेगा। यह इतिहासकारों की कमेटी नहीं है, बल्कि सूची है।
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(06) इतिहासकारो की राज्य सूची : इसी तरह के इतिहासकारों की एक सूची राज्य स्तर पर भी बनाई जायेगी। इस तरह प्रत्येक राज्य मंउ भी इतिहासकारों की एक सूची रहेगी। किसी व्यक्ति का नाम इतिहासकारों की दोनों सूचियों (राज्य एंव केंद्र) में हो सकता है।
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[ टिप्पणी : सैक्शन A के बारे में स्पष्टीकरण
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6a. जितना भी इतिहास लिखा जाता है, वह सरकारों एवं उनके प्रयोजको के दृष्टिकोण को व्यक्त करता है। इस समस्या से बचने के लिए शिक्षा मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में किया गया है। यदि शिक्षा मंत्री इतिहास को अपनी पार्टी के एजेंडे के दृष्टिकोण से लिखता है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे निष्काषित कर सकेंगे। पाठ्यक्रम पुनरीक्षण कमेटी का अध्यक्ष वोट वापसी पासबुक के दायरे नहीं आएगा किन्तु यह कमेटी एवं इसके सदस्य जूरी के दायरे में होंगे। (धारा 1)
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6b. 5 वर्ष के लिए चुनी गयी किसी सरकार को यह निर्णायक अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वे इतिहास का दृष्टिकोण तय करें। इसीलिए सरकार पुनरीक्षण संसदीय समिती का गठन वोटो के प्रतिशत के आधार पर किया गया है। साथ ही उन लोगो को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जो एक बड़ी संख्या के मतदाता वर्ग का प्रतिनिधत्व करते है, किन्तु मामूली अंतर के कारण संसद में नहीं पहुंचे। (धारा 3) ]
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सैक्शन – B
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पुनरीक्षण की प्रक्रिया :
[ टिप्पणी 7a : इतिहास के पुनरीक्षण का पैमाना बहु आयामी एवं काफी विस्तृत हो सकता है। इसमें कक्षा 5 से स्नातकोतर की पाठ्यपुस्तकें शामिल है। यहाँ इतिहास के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का प्रारूप दिया गया है, पुनर्लेखन का नहीं। पुनर्लेखन की प्रक्रिया कई सालों तक चल सकती है, और इसमें काफी संसाधन लगेंगे। अत: हमारे विचार में हमें पहले चरण में पुनरीक्षण करना चाहिए। और पुनरीक्षण के बाद सरकार चाहे तो पुनर्लेखन की प्रक्रिया के आदेश भी जारी कर सकती है। ]
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(07) पुनरीक्षण के प्रारूप को स्वीकृत करना : पुनरीक्षण कमेटी का अध्यक्ष पुनरीक्षण का प्रारूप तय करेगा। यह प्रारूप बहुमत द्वारा पास करके संसदीय समिति को भेजा जाएगा।
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(7.1) पुनरीक्षण के लिए प्रस्तावित प्रारूप :
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7.1.1. पुस्तको के नाम में कोई बदलाव नहीं किये जायेंगे।
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7.1.2. जहाँ तक हो सके, अध्यायों के नामों में भी बदलाव नहीं किया जाएगा, जब तक कि, अध्याय में इतना बड़ा बदलाव न आ गया हो कि अध्याय का नाम संदर्भ से कट न जाए।
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7.1.3. किसी भी पुस्तक की पृष्ठ संख्या में 10% से अधिक बदलाव नहीं किया जाएगा।
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7.1.4. किसी भी पुस्तक के पाठ्यक्रम के विषय में 25% से अधिक बुनियादी* बदलाव नहीं किया जायेगा। (अध्यक्ष चाहे तो इस सीमा को बढ़ाकर 40% तक कर सकता है)
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(*) स्पष्टीकरण : विषय एवं बुनियादी बदलाव से आशय : किसी अध्याय को पूरी तरह से हटा देना बुनियादी बदलाव की श्रेणी में आएगा। मान लीजिये कि, स्वतंत्रता आन्दोलन के किसी अध्याय में असहयोग आन्दोलन का बिंदु है, और इस बिंदु के अंतर्गत 10 पंक्तियाँ लिखी है। अब यदि असहयोग आन्दोलन के बिंदु एवं इन सभी 10 पंक्तियों को हटा दिया जाता है तो यह विषय में बुनियादी बदलाव है। किन्तु यदि 10 पंक्तियों में से 6 पंक्तियाँ काट दी जाती है, या इनके विवरण बदल दिए जाते है तो यह बुनियादी बदलाव नहीं है।
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(7.2) ऊपर दिए गए 4 बिंदु अपरिवर्तनीय रहेंगे। किन्तु अध्यक्ष चाहे तो इसमें कुछ अन्य बिंदु भी जोड़ सकते है। किन्तु यह आवश्यक होगा कि जोड़े गए बिंदु उपरोक्त 4 बिन्दुओ का अतिक्रमण एवं उलंघन न करते हो।
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(7.3) जब भी पुनरीक्षण कमेटी कोई प्रस्ताव संसदीय समिती को भेजेगी तो इसे अनिवार्य रूप से सार्वजनिक करेगी। संसदीय समिती को 60 कार्य दिवसो के भीतर इन्हें स्वीकृत या ख़ारिज करना होगा। यदि संसदीय समिती 60 दिनों में कोई जवाब नहीं देती है, तो सभी प्रस्तावों को स्वीकृत मान लिया जाएगा।
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7.3.1. संसदीय समिती जब इसे स्वीकृत करेगी, तब वोटिंग खुली होगी। यह जानकारी सार्वजनिक रहेगी कि, किस सदस्य ने किस बिंदु को स्वीकृत किया है, और किस ने इसे ख़ारिज किया है।
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7.3.2. प्रस्तुत किये गए प्रत्येक बिंदु पर वोटिंग होगी।
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7.3.3. यदि संसदीय समिती इसमें कोई सुझाव जोड़ना चाहती है तो अपना सुझाव जोड़ कर भेज सकती है।
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(7.4) यदि पुनरीक्षण संसदीय समिती द्वारा कोई प्रस्ताव 2 बार ख़ारिज कर दिया जाता है, तो यह ख़ारिज माना जायेगा और लागू नहीं होगा। तब इस प्रस्ताव को लोकसभा एवं राज्यसभा के दोनों सदनों से 2/3 बहुमत द्वारा पास कराना होगा। इन्हें दोनों सदनों से अलग अलग पास किया जाएगा, संयुक्त अधिवेशन द्वारा नहीं। सदन में इसकी वोटिंग खुली होगी और यह जानकरी सार्वजनिक रहेगी कि किस सांसद ने किस प्रस्ताव को स्वीकृत एवं खारिज किया है।
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(7.5) पुनरीक्षण कमेटी एवं पुनरीक्षण संसदीय समिती की मीटिंग्स के मिनिट्स के पीडीऍफ़ शिक्षा मंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेंगे। यदि कोई व्यक्ति इनकी सत्यापित प्रति प्राप्त करना चाहता है, कर सकता है।
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(08) अध्यायों में बदलाव के लिए भाषा एवं भूमिका का प्रारूप :
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(8.1) पुस्तक की भूमिका : भूमिका में निम्नलिखित बिन्दुओ की समझ बढ़ाने वाले विवरण प्रमुखता से शामिल होंगे कि,
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8.1.1. इतिहास से आशय है - घट चुकी भौतिक घटनाओं के सिलसिले को दर्ज करना, या फैक्ट शीट तैयार करना।
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8.1.2. फैक्ट / तथ्य घटने वाली ऐसी भौतिक घटनाएँ है जिन पर कोई विवाद नहीं है, या न्यूनतम विवाद है।
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8.1.3. घटनाओ के अतिरिक्त शेष विवरण इतिहासकारों की राय है, और यह राय इतिहास का हिस्सा नहीं होती है।
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8.1.4. यह पुस्तक सिर्फ प्रमाणिक इतिहास बताती है, और इस वजह से इतिहासकारों की निजी राय को इसमें दर्ज नहीं किया गया है। विभिन्न इतिहासकारों की राय जानने के लिए कृपया सन्दर्भ पुस्तकें पढ़ें।
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(8.2) पुस्तक की भाषा :
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8.2.1. पुस्तक में धारणा एवं राय बनाने वाले शब्दों का इस्तेमाल किसी भी स्थिती में नहीं किया जाएगा।
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8.2.2. किसी भी घटना एवं व्यक्ति को परिभाषित करने के लिए किसी भी विशेषण का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
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8.2.3. यदि कोई क्रांतिकारी गोरो के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हुआ था तो उनके आगे ‘महात्मा’ एवं पीछे ‘जी’ लगाया जाएगा।
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[ टिप्पणी 8a : मोहन दास गाँधी के आगे से महात्मा निकाल दिया जाएगा, और उन्हें मोहन दास गांधी या मोहन दास जी गाँधी लिखा जाएगा। इसी तरह से रविन्द्र नाथ के आगे से भी गुरुदेव हटा दिया जाएगा। अकबर एवं अशोक के पीछे से भी महान निकाला जायेगा। हेमचन्द्र विक्रमादित्य को हेमू लिखा गया है। इसे हेमचन्द्र विक्रमादित्य किया जायेगा। भगत सिंह को महात्मा भगत सिंह जी लिखा जाएगा। इसी तरह से महात्मा राजगुरु जी, महात्मा मदन लाल जी धींगरा एवं महात्मा अशफाकुल्ला खान आदि।
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शहीद हुए क्रांतिकारियों के अलावा यदि कमेटी किसी विशिष्ट श्रेणी के क्रन्तिकारी के लिए कोई विशेषण प्रयुक्त करना चाहती है तो इसके लिए अलग से प्रस्ताव लेना होगा। किन्तु ऐसे प्रस्ताव को टीसीपी द्वारा ही लागू किया जा सकेगा, संसद द्वारा नहीं। और यह प्रस्ताव सिर्फ क्रांतिकारी के लिए लिया जा सकेगा। टीसीपी की प्रक्रिया के लिए धारा (14) देखें।
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किसी भी व्यक्ति के चारित्रिक गुणों एवं स्वभाव के बारे में कोई भी राय नहीं लिखी जायेगी। उदाहरण के लिए अमुक राजा कला मर्मग्य था, अमुक वीर था, अमुक दयालु था, क्रूर था, ऐयाश था, सहिष्णु था, धर्मांध था, कायर था, महत्त्वाकांक्षी था, कुशल सेनापति था, रणनीतिकार था, आदि कदापि नहीं लिखा जाएगा। ]
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(09) अध्याय का प्रारूप :
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अध्यायों की भिन्न भिन्न प्रकृति के अनुसार इसके भिन्न प्रारूप बनाने पड़ सकते है। कमेटी का अध्यक्ष इस बारे में विस्तृत नियम बनाएगा। आधारभूत निर्देश के लिए निचे माध्यमिक स्तर की पुस्तक में अकबर के अध्याय का एक प्रारूप दिया गया है :
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(9.1) पहले खंड में अकबर के जीवन काल की घटनाएं होंगी। अध्याय की प्रकृति के अनुसार इसका आकार घटाया या बढ़ाया जा सकेगा। इसका सिलसिला इस तरह से होगा - अकबर का जन्म 1542 ईस्वी में हुआ था। वह 1555 में गद्दी पर बैठा। उसकी मृत्यु 1605 में हुयी, उसने अमुक अमुक लड़ाइयां लड़ी, अमुक लड़ाइयां जीती, अमुक हारी, अमुक धर्म चलाया, अमुक अमुक से शादी की आदि। जब गद्दी पर आया तो कितना साम्राज्य था और जब मरा तो कितना था। इस तरह यह खंड इतिहास की सिलसिलेवार घटनाओ पर चलेगा। बीच में कोई राय नहीं, कोई विश्लेषण नहीं।
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(9.2) अब इसके बाद जब उसके कार्यो के बारे में लिखा जाएगा तो सबसे पहले उसके द्वारा निकाले गए आदेशों ( राजपत्र अधिसूचनाओ ) का जिक्र होगा। और इन आदेशों को हमेशा निचे दिए गए क्रम में ही लिखा जाएगा :
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9.2.1. अदालतें : अकबर के शासन में दंड देने की सर्वोच्च शक्ति किसके पास थी। अकबर ने इसमें बदलाव लाने के लिए कौन कौन से आदेश निकाले, न्याय एवं सुनवाई के लिए व्यवस्था क्या थी आदि। किन्तु वाक्य इस तरह से नहीं लिखा जाएगा कि, अकबर ने न्याय सुधार किये या वह न्याय प्रिय था आदि। सिर्फ इस तथ्य को दर्ज किया जायेगा कि काजियों / न्यायधिशो की नियुक्ति कैसे होती थी, और सुनवाई की प्रक्रिया क्या थी। यदि अकबर ने न्याय प्रणाली के सम्बन्ध में कोई छोटा से छोटा आदेश भी निकाला है, तो इसे अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा। किन्तु यह राय यहाँ कभी दर्ज नहीं की जायेगी कि, अमुक आदेश से न्याय व्यवस्था ठीक हुई थी या बदतर हुयी थी।
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9.2.2. सेना : इसके बारे में पूरे विवरण होंगे। वह कितनी बड़ी सेना चला रहा था। उसके पास कौनसे हथियार थे। इन्हे कौन बनाता था। सैनिको का वेतन, जंगी घोड़ो की संख्या, घोड़ो की नस्ल, तलवारो आदि के बारे उल्लेखनीय जानकारियां। सेना का बजट कितना था। उसने कब कब सेना का बजट बढ़ाया था, क्या वह अन्य राजाओ से भी हथियार मंगवाता था, क्या उसने कभी हथियार निर्माण में निवेश किया था आदि।
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9.2.3. पुलिस : ठीक इसी तरह से पुलिस के बारे में लिखा जाएगा। उस समय पुलिस शब्द नहीं था। अत: इतिहासकार इसके समान अर्थ करने वाला कोई अन्य शब्द ढूंढ सकते है। या सीधे पुलिस भी लिख सकते है। पुलिस यानि, क़ानून तोड़ने वालो को पकड़ने वाले कर्मचारी।
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9.2.4. कर प्रणाली : इसके बाद टैक्स की दरों एवं टेक्स के कानूनों के बारे में लिखा जाएगा। जैसे अकबर ने जजिया खत्म किया और इससे उसे लगभग कितना राजस्व मिल रहा था। और इसे कवर करने के लिए उसने कौनसा टेक्स डाला था। और उसने नया टेक्स नहीं डाला तो किन खर्चो में कटौती की थी।
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9.2.5. युद्ध : इसके बाद उसके द्वारा लड़े गए युद्धों के बारे में लिखा जायेगा। जब भी किसी युद्ध का विवरण आएगा तो सबसे पहले दोनों सेनाओ की तुलना रखी जायेगी। यदि ज्यादा विवरण डालने है तो तालिका का प्रयोग किया जा सकता है। इसमें हथियारों का विवरण मुख्य रूप से शामिल किया जायेगा। अमुक के पास कौनसे और कितने हथियार थे, और सामने वाले के पास क्या हथियार थे, इस तथ्य को दर्ज किया जाएगा। किन्तु कौन राजा किस वजह से निरंतर जीत रहा था या हार गया था, इसके बारे में कोई राय व्यक्त नहीं की जायेगी।
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(9.3) समान कालखंड की अन्य सभ्यताओं से तुलना : इस खंड में अकबर के कालखंड के किसी यूरोपीय राजा की तुलना की जायेगी। तुलना के बिंदु सिर्फ 4 ही होंगे। सेना-हथियार, अदालतें, पुलिस एवं टेक्स। इस बारे में संक्षिप्त विवरण लिखा जाएगा कि, उस समय यूरोपीय राजा किन हथियारों का इस्तेमाल कर रहे थे, उनकी अदालत-पुलिस किस तरह से काम करती थी, और टेक्स का ढांचा क्या था। इस बारे में सिर्फ तथ्य रखे जायेंगे। यूरोप की इस तुलना को शामिल करना इसीलिए औचित्यपूर्ण है, क्योंकि जहाँगीर के समय से ही ब्रिटिश-फ्रांसिस भी भारत के इतिहास में जुड़ने लगेंगे। तो छात्रों को अचानक से यह न लगे कि ये सब कहाँ से आ गए है।
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(9.4) समीक्षा : इस खंड में राजा की एवं उपरोक्त घटनाक्रम की समीक्षा होगी। समीक्षा तथ्यों पर आधारित होगी, तुलनात्मक होगी एवं निर्विवाद होगी। इसे इस तरह लिखा जाएगा -- अकबर के पास मुगलों की सबसे बड़ी सेना थी। अकबर ने कुल 18 लड़ाइयाँ लड़ी। इसमें से 2 हारी। इसमें से कितनी लड़ाइयो में स्वयं मौजूद था, उसका साम्राज्य औरंगजेब के बाद सबसे बड़ा था आदि। समीक्षा हमेशा गणनात्मक एवं मात्रात्मक होगी, गुणात्मक नहीं।
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(9.5) इसके बाद अकबर की व्यापारिक / कारोबारी फैसलों के बारे में लिखा जाएगा। इसमें कला, स्थापत्य, संगीत आदि के बारे में होगा। इसमें उन निर्माणों को दर्ज किया जाएगा जो कारोबार से सम्बंधित है, और उत्पादकता बढ़ाते है। आशय यह कि, फतेहपुर सिकरी एवं सड़को को एक ही श्रेणी नहीं रखा जाएगा। पहले उत्पादक निर्माण जैसे, सड़के, पुल, मंडियां, तालाब आदि के बारे में, और बाद वाले खंड में अनुत्पादक निर्माण जैसे मूर्तियाँ, स्तम्भ, महल आदि के बारे में आएगा। यदि यह प्रमाणित है कि शेरशाह की तुलना में अकबर की सड़के टिकाऊ नही थी तो इसे दर्ज किया जाएगा।
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(9.6) शिक्षा मंत्री पुनरीक्षण अध्यक्ष को अध्यायों का इस तरह का खाका बनाने के लिए निर्देश देगा। पुस्तक को इस प्रारूप में लिखा जाएगा और स्वीकृत करने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुस्तक प्रकाशित कर दी जायेगी। और इसी क्रम में सभी पाठ्यपुस्तकों का इसी प्रारूप में पुनरीक्षण कर दिया जायेगा।
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(10) पुनरीक्षण के प्रस्तावों को स्वीकृत करने की प्रक्रिया :
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(10.1) पुनरीक्षित किये गए अध्याय को कमेटी द्वारा पुनरीक्षण संसदीय समिती को भेजा जाएगा। प्रत्येक अध्याय अलग अलग खंडो में विभाजित होगा। प्रत्येक खंड के लिए वोटिंग की जायेगी, और स्वीकृत प्रस्ताव कमेटी को भेज दिए जायेंगे।
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(10.2) स्वीकृत किये गए प्रस्तावों को इतिहासकारो की जूरी के पास भेजा जाएगा। यदि इन्हें जूरी द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है, तो इन्हें शिक्षा मंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी करेंगे।
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(11) जूरी का गठन एवं अनुमोदन की प्रक्रिया :
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(11.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : पुनरीक्षण कमेटी का अध्यक्ष जूरी के संचालन के लिए एक जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेगा। जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में दिल्ली राज्य की मतदाता सूचियों में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद अध्यक्ष किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला/ राज्य /भारत की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा। महाजुरी सदस्यों प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय प्राप्त करेंगे।
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(11.3) इतिहासकारों की जूरी का गठन : जूरी प्रशासक जूरी के गठन के लिए इतिहासकारों की केन्द्रीय सूची का इस्तेमाल करेगा।
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11.3.1 जूरी का चयन लॉटरी द्वारा किया जाएगा, एवं इसकी बैठक दिल्ली में होगी।
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11.3.2. जूरी का आकार कम से कम 50 सदस्य होगा। महाजूरी मंडल चाहे तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकता है।
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11.3.3. जूरी सदस्यों को यात्रा व्यय एवं भत्ते वगेरह दूरी के आधार पर मिलेंगे, और इसकी प्राथमिक दरें महा जूरी मंडल जूरी तय करेगा। आवागमन की दरें द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित शायिका ( Second Class AC Sleeper ) की दरों के समकक्ष होगी।
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11.3.4. जूरी सदस्यों को आवागमन के लिए सरकारी परिवहन जैसे ट्रेन आदि में आपातकालीन कोटे की आरक्षित सीटो का इस्तेमाल करने की सुविधा रहेगी तथा जब ये जूरी ड्यूटी पर आयेंगे / जायेंगे तो इस कोटे का इस्तेमाल करना इनका प्राथमिक विशेषधिकार होगा। यदि जूरी सदस्य ने फ्लाईट का इस्तेमाल किया है तो उन्हें फ्लाईट की दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
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11.3.5. जूरी सदस्य को यात्रा सुविधा के लिए एक अतिरिक्त सहयोगी को साथ लेकर आने के लिए यात्रा व्यय, भत्ते वगेरह के लिए दोगुना भुगतान मिलेगा।
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11.3.6. इतिहासकारों की जूरी के सदस्य को प्रति उपस्थिति 1,000 रू भुगतान किया जाएगा। महाजुरी मंडल चाहे तो इसमे बदलाव कर सकते है।
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(11.4) जूरी द्वारा सुनवाई : सुनवाई के दिन एवं स्थान की घोषणा कम से कम 30 दिन पूर्व कर दी जायेगी, एवं प्रस्तुत किये जाने वाला पाठ्य भी सार्वजनिक रहेगा।
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11.4.1. यदि किसी व्यक्ति / पक्षकार को कुछ कहना है तो वह महाजूरी मंडल को लिखित में अपना प्रतिवेदन भेज सकता है। ये प्रतिवेदन इतिहासकारों की जूरी के समक्ष विचार के लिए रखे जायेंगे।
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11.4.2. यदि कोई पक्षकार जूरी के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना चाहता है, तो वह महाजूरी मंडल की अनुमति से ऐसा कर सकता है।
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11.4.3. सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों। 2 बजे से 3 बजे के मध्य भोजनावकाश रहेगा ।
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11.4.4. यदि जूरी सदस्य विवाद के किसी बिंदु या विषय पर अन्य जानकार इतिहासकारों की सलाह लेना चाहते है तो सलाह के लिए 3 से 5 नामचीन इतिहासकारों का पैनल बनाने का आदेश कर सकते है।
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11.4.5. सलाहकारी पैनल का गठन महाजूरी मंडल द्वारा लॉटरी से किया जाएगा। पहले महाजूरी मंडल द्वारा इसके लिए सूची बनायी जायेगी और फिर सार्वजनिक रूप से लॉटरी द्वारा सदस्यों को चुना जाएगा।
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11.4.6. यह विशेषग्य पैनल विवादित बिंदु के बारे में अपनी राय लिखित में रखेगा। पैनल का प्रत्येक सदस्य अपनी राय अलग से रखेगा। यदि जूरी सदस्य उन्हें व्यक्तिश: सुनना चाहते है तो उन्हें उपस्थित होने के लिए कह सकते है ।
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(11.5) इतिहासकारों की जूरी द्वारा जो प्रस्ताव 2/3 बहुमत द्वारा अनुमोदित कर दिए जायेंगे, उन्हें शिक्षा मंत्री केन्द्रीय शिक्षा के पाठ्यक्रम में लागू करने के आदेश जारी करेंगे।
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(12) राज्यों द्वारा पाठ्यक्रम स्वीकृत करने की प्रक्रिया :
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(12.1) जिस पाठ्यक्रम को केन्द्रीय कमेटी द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है, उन्हें राज्यों की पुनरीक्षण समिती एवं राज्यों के जूरी मंडल द्वारा स्वीकृत करके आंशिक या पूर्ण रूप से लागू किया जा सकता है।
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(12.2) राज्य सरकारें अपने स्थानीय पाठ्यक्रम के पुनरीक्षण के लिए इसी प्रक्रिया का पालन करेगी। राज्यों की जूरी का गठन करने के लिए राज्यों के इतिहासकारों की सूची का इस्तेमाल किया जाएगा, तथा जूरी द्वारा सुनवाई राज्य की राजधानी में की जायेगी।
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[ टिप्पणी 12a. राज्य के मुख्यमंत्री चाहे तो अपने राज्य के जिला शिक्षा अधिकारियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे लाने के लिए नोटिफिकेशन निकाल सकते है। यदि शिक्षा अधिकारी को वोट वापसी पासबुक के दायरे में कर दिया जाता है, तो राज्य द्वारा स्वीकृत पाठ्यक्रम को जिले में लागू करने का अंतिम फैसला जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला जूरी करेगी। किन्तु केन्द्रीय पाठ्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी का कोई दखल नहीं करेगा। वोट वापसी पासबुक के दायरे में आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी निम्नलिखित कदम उठा सकता है :
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12b. शिक्षा अधिकारी अनुत्पादक विषयों जैसे इतिहास, सामाजिक विज्ञान, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र आदि में प्राप्तांक प्रणाली ख़त्म कर सकता है। तब छात्र को उपरोक्त विषयों में सिर्फ पास होना होगा, एवं इन विषयों में अंक नहीं दिए जायेंगे। छात्र को इन विषयों में सिर्फ पास होना होगा, एवं इन विषयों के परिणाम का अंक तालिका पर कोई प्रभाव नहीं होगा।
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12c. गणित विज्ञान जैसे उत्पादक विषयों की शिक्षा को बेहतर करने के लिए शिक्षा अधिकारी सात्य प्रणाली लागू कर सकता है।
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12d. शिक्षा अधिकारी इतिहास की पुस्तकों को “हथियारो का ऐतिहासिक महत्त्व” के दृष्टिकोण से लिखवा सकता है, या हथियारों का इतिहास एवं विज्ञान नाम से पुस्तक पाठ्यक्रम में शामिल कर सकता है। ]
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(13) शिक्षा मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने की प्रक्रिया :
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(13.1) भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से शिक्षा मंत्री बनने के लिए शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में ली जाने जमानत राशि के बराबर शुल्क लेकर शपथपत्र को स्वीकार करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। जिला कलेक्टर इस शपथपत्र को स्कैन करके पीएम की वेबसाईट पर रखेगा, ताकि कोई भी मतदाता इसे बिना लोग इन के देख सके ।
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[ टिप्पणी 13a. आवेदन करने वाला व्यक्ति सत्ताधारी पार्टी या विपक्षी पार्टी का कोई भी सांसद हो सकता है। यदि वह सांसद नहीं है तो उसे बाद में चुनाव जीतना होगा, एवं प्रवृत नियमो के अनुसार मंत्री बनने की अर्हता पूरी करनी होगी।]
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(13.2) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
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(13.3) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(13.4) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
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(13.5) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। केन्द्रीय अधिकारियो की स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिप्पणी 13B : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के आदेश से कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को (-)100 से (+)100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(13.6) यदि किसी उम्मीदवार को देश की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं की 35% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन शिक्षा मंत्री से 1% अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले प्रत्याशी को शिक्षा मंत्री की नौकरी दे भी सकते है और नहीं भी दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा।
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(14) टीसीपी के प्रावधान :
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(14.1) यदि कोई मतदाता इस कानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव, शिकायत आदि के रूप में कोई अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(14.2) यदि कोई मतदाता धारा (14.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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(14.3) यदि देश की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 35% मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमंत्री अमुक शपथपत्र पर कार्यवाही करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते है, और नहीं भी उठा सकते है। इस बारे में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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---क़ानून ड्राफ्ट का समापन--
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मौजूदा पेड पाठ्यपुस्तकों के बारे में कुछ विवरण
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इतिहास की पाठ्य पुस्तकें टीवी एवं अख़बार की तरह ही पेड मीडिया का ही एक अंग है। इनमे झूठ कम एवं चयनात्मक सच ज्यादा लिखा जाता है। और इस चयनात्मक सच का प्रभाव / निष्कर्ष विपरीत होता है। जो आदमी ये पुस्तकें लिखवाने के लिए इतिहासकारों को नियुक्त करता है, वह इतिहासकारों को अपने दृष्टिकोण से अवगत कराता है। और पेड इतिहासकार उस दृष्टिकोण के हिसाब से चयनित हिस्सों को उभारकर लिखते है।
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भारत का इतिहास ब्रिटिश इतिहासकारों के मार्गदर्शन में लिखा गया था, और आज भी इतिहास उन्ही के मार्गदर्शन में लिखा जाता है। भारत की मुख्यधारा की सभी पार्टियाँ जानती है, कि हम छात्रों को एकपक्षीय इतिहास पढ़ा रहे है, किन्तु वे इसे बदलने का साहस नहीं जुटा पाते !!
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वजह – भारत का मीडिया अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माताओ के नियंत्रण में है और भारत की मुख्यधारा की सभी राजनैतिक पार्टियाँ एवं नेता चुनाव जीतने एवं टिके रहने के लिए पेड मीडिया पर बुरी तरह से निर्भर करते है। अत: वे अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के खिलाफ नहीं जाना चाहते !!
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धनिक वर्ग नागरिको को हथियार विरोधी एवं शान्ति समर्थक बनाए रखना चाहते है। अत: इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में से हथियारों के महत्त्व की जानकारी को बिलकुल गायब कर दिया जाता है, या 2-4 लाइनों में समेट दिया जाता है। छात्रों के दिमाग में यह बात डालने की कोशिश रहती है कि, युद्ध में रणनीति, शौर्य, साहस, वीरता आदि का बहुत महत्त्व होता है, व जीत हार का निर्णायक फैसला मानवीय गुणों पर निर्भर करता है।
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उदाहरण के लिए आपको इतिहास की किताबों में यह लिखा हुआ नहीं मिलेगा कि, सिकन्दर के पास 18 फुट के भाले थे, उसके घोड़ो पर जीन थी, किलो में घुसने के लिए उनके पास 4 मंजिला मचान थे आदि, और इस वजह से उसकी सेना जीतती जा रही थी। इसकी जगह पर वे लिखेंगे कि सिकंदर साहसी एवं वीर था !! और पेड इतिहासकार इस बात पर खामोश रहेंगे कि जूरी सिस्टम आने के कारण कारखाना मालिको पर राजवर्ग द्वारा होने वाले दमन में कमी आयी और इस वजह से ग्रीक उन्नत हथियारों का निर्माण करने की क्षमता जुटा पाए !! और उन्नत हथियारों के कारण ही सिकंदर पूरी इतना बड़ा युद्ध अभियान चला पाया !!
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और इसी तरह जब ब्रिटिश की बात आएगी तो वे इस तथ्य को मुख्य रूप से दर्ज नहीं करते कि गोरो के पास बंदूके थी, जबकि भारतीय राजाओं के पास बंदूके नहीं थी, और इस वजह से गोरे भारत का अधिग्रहण कर पाए। साथ ही वे इस तथ्य को बेहद सफाई से छिपा लेते है कि, गोरे बेहतर बंदूके इसीलिए बना पा रहे थे क्योंकि उनके पास जूरी सिस्टम था।
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दरअसल, वोट वापसी कानूनों के अलावा जूरी कोर्ट होना सबसे बड़ी वजह रही कि अमेरिका-ब्रिटेन जैसे देश भारत जैसे देशो से तकनीक के क्षेत्र में आगे, काफी आगे निकल गए। जूरी मंडल ने वहां के छोटे-मझौले कारखाना मालिको की जज-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार से रक्षा की और वे तकनिकी रूप से उन्नत विशालकाय बहुराष्ट्रीय कम्पनियां खड़ी कर पाए !!
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अब इस पूरी जानकारी को छिपाने के लिए पेड इतिहास कार मानवीय गुणों आदि की थ्योरी गढ़ते है। उनका जोर छात्रों के दिमाग में यह बात डालने पर रहता है कि भारतीय राजाओ की हार का मुख्य कारण आपसी फूट एवं गद्दारी थी। वे संगठित नहीं थे, उनमे एकता नहीं थी, वे अपने निहित स्वार्थो में डूबे हुए थे आदि आदि। और युद्ध में बेहतर हथियारों / बन्दूको आदि की भूमिका नगण्य होती है !!
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आपसी फूट एवं गद्दारी आदि को युद्ध का निर्णायक बिंदु बनाना क्यों एक कमजोर तर्क है :
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(i) तथ्य यह है कि ऐसा दुनिया भर के सभी देशो एवं सभी राजवंशो में होता था और आज भी होता है। तो गद्दारी करना, या दल बदल लेना एक सार्वभौमिक वास्तविकता है, और इसे सिर्फ भारतीयों के साथ जोड़कर नहीं देखा जा सकता। दुसरे शब्दों में यह मानवीय स्वभाव है।
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(ii) इसके अलावा, वे यह बात हमेशा छुपा लेते है कि जज प्रणाली बड़े पैमाने पर गद्दारों का उत्पादन करती है। भारत में हमेशा से जज सिस्टम रहा और राजा के पास ही दंड देने की निर्णायक शक्ति होती थी। तो उच्च पदस्थ राजवर्ग अन्याय करके लोगो का शोषण करता था, और इस वजह से कुछ लोगो में राज्य के प्रति रोष पनपता था। फिर जब भी उन्हें मौका मिलता वे राजा एवं उसकी सत्ता को गिराने के लिए पाला बदल लेते थे।
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(iii) दरअसल, वफ़ादारी एवं गद्दारी को न्यायिक प्रक्रियाएं प्रभावित करती है। यदि राजवर्ग न्याय करेगा और किसी का जाया उत्पीड़न नहीं होगा तो राज्य एवं राजा के प्रति वफादारो की संख्या में इजाफा होगा, वर्ना असंतोष बढ़ने से गद्दारों की संख्या बढती जायेगी।
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ब्रिटेन में 12 वीं शताब्दी में ही जूरी सिस्टम आ चुका था, अत: वहां राजवर्ग द्वारा किये जा रहे अन्याय एवं दमन में भारी गिरावट आई। जब नागरिको की जूरी सुनवाई करती है, तो राजा या राजवर्ग के खिलाफ रोष इससे पृथक हो जाता है। गद्दारी या फूट का दूसरी वजह सत्ता हथियाने की महत्त्वकांक्षा वगेरह है, जो कि दुनिया भर में समान रूप से लागू है।
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इतिहास की तरह की राजनीती विज्ञान एवं समाज शास्त्र आदि की पाठयपुस्तकें भी पेड मीडिया का अंग है, और इनमें भी चयनात्मक सच लिखकर छात्रों को भ्रमित किया जाता है। ये पुस्तकें घूमा फिरा कर इस बात को स्थापित करती है कि, भारत के लोग भ्रष्ट है, लोकतंत्र परिपक्व नहीं है, शिक्षित नहीं है, उनकी राजनैतिक संस्कृति घटिया है, उनमे जागरूकता नहीं है आदि आदि, और इस तरह भारत की ज्यादातर समस्याओं की जड़ में खुद भारतीयों की सोच या फितरत है।
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क्यों यह एक बकवास तर्क है -
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पूरी दुनिया में कमोबेश एक जैसे लोग पाए जाते है। किन्तु अलग अलग देशो की क़ानून व्यवस्थाएं वहां के न नागरिको के सार्वजनिक व्यवहार को प्रभावित करती है। राजनैतिक / सामाजिक समस्याओ का निदान क़ानून व्यवस्थाओ में परिवर्तन करके किया जा सकता है। किन्तु पेड मीडियाकर्मी प्रशासनिक प्रक्रियाओ की जानबूझकर अवहेलना करना चाहते है, और इसीलिए ये समस्या का दोष नागरिको के चरित्र पर थाप देते है।
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ये पाठ्यपुस्तकें बताती है कि भारत का आम आदमी बदमिजाज, जातिवादी और एक सांप्रदायिक व्यक्ति है। उसमें राष्ट्रिय चरित्र नहीं है, उसके कोई नैतिक मूल्य नहीं हैं, और वह यौन रूप कुंठित भी है आदि आदि। शिक्षित लोग ये सब उटपटांग पाठ्यपुस्तकों एवं समाचार पत्र स्तंभों में पढ़ते है, और हमेशा के लिए जनसाधारण-विरोधी हो जाते है।
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पेड मीडिया ने समाचार पत्र के स्तंभों और पाठ्यपुस्तकों द्वारा आज के शिक्षित युवा के दिमाग में इतना जहर भर दिया है, कि अब एक औसत शिक्षित व्यक्ति भी जनसाधारण-विरोधी हो गया है। जितनी अधिक शिक्षा उसके पास है, उतनी अधिक संभावनाएं हैं कि वो उतना अधिक समय उन्हें पढने में लगाता है जो रद्दी ये बुद्धिजीवी लिखते हैं, और उतनी ही अधिक संभावनाएं हैं कि वो ज्यादा जनसाधारण विरोधी बन जायेगा।
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शिक्षा व्यक्ति को जनसाधारण से नफरत नहीं सिखाती। लेकिन पेड मीडिया के माध्यम से वे विद्यार्थियों के मन में जनसाधारण-विरोधी दृष्टिकोण पैदा कर रहे हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि विद्यार्थी लोकतांत्रिक सोच के बनें। असल में वे विद्यार्थियों को अल्पजन-तंत्र (बुद्धिमानों का शासन) का समर्थक बनाना चाहते है।
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भारत में लगातार कुछ राजनैतिक पार्टियों, नेताओ द्वारा इतिहास के पुनरीक्षण की मांग एवं वादा किया जाता रहा है। हालांकि आज तक किसी भी राजनैतिक दल एवं नेता ने इस बारे में कोई खाका नहीं दिया है कि, वे इतिहास की पाठयपुस्तको को औचित्यपूर्ण बनाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाएंगे।
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उनकी रुचि सिर्फ इस बात का प्रचार करने में रहती है कि, भारत की पाठयपुस्तको में लिखा इतिहास झूठा है !! प्रधानमंत्री के पास यह शक्ति है कि वे किसी भी समय सिर्फ एक नोटिफिकेशन निकालकर नयी पाठ्यपुस्तक कमेटीयों का गठन कर सकते है।
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बहरहाल, यदि यह प्रक्रिया यदि गेजेट में छाप दी जाती है, इतिहास की पाठयपुस्तको में सुधार आना शुरू हो जाएगा।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया " प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “ प्रधानमंत्री जी, कृपया इतिहास के पुनरीक्षण का क़ानून गेजेट में छापे - #HistoryRevised , #Rrp26 ,
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. "प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए । वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें : " @Pmoindia , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #HistoryRevised , #Rrp26
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6. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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7. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (14) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Aug 25 2020 20:15:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जब लाखों-करोड़ो लोग चिट्ठियां भेजेंगे तो प्रधानमंत्री कार्यालय इन्हें कैसे पढ़ेगा ?
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यदि भारत भर से 5 तारीख को 5 बजे देश के कुल मतदाताओं में से सिर्फ 1% मतदाता यानी 1 करोड़ नागरिक चिट्ठी (पोस्टकार्ड, इन्लेंड लेटर, बुक पोस्ट, लिफाफे आदि) भेजते है तो लगभग 10 तारीख को दिल्ली के मुख्य पोस्टऑफिस में जो 1 करोड़ चिट्ठियां इकट्ठा होगी उनका वजन लगभग 25 टन होगा।
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और इन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय पहुँचाने के लिए लगभग 25 ट्रको की जरूरत होगी !! और यदि प्रधानमंत्री कार्यालय इन चिट्ठियों पर कार्यवाही नहीं करता है तो अगले महीने 4 गुना नागरिक चिट्ठियां भेजेंगे और तब इन्हें ढ़ोने के लिए 100 ट्रको की जरूरत होगी !!!
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इस स्थिति में यदि प्रधानमंत्री कोई कदम नहीं उठाते तो 4 करोड़ लोगो के सड़को पर आ जाने से सभी जिलो के कलेक्टर, पुलिस, ट्रेफिक कर्मचारी, डाक कर्मचारीयों, लदान परिवहन आदि के लिए व्यवस्था बनाए रखना और काम करना मुश्किल हो जाएगा। और अगले महीने यह संख्या फिर से बढ़ेगी, या कम से कम उतनी संख्या तो बनी ही रहने वाली है, जितनी पिछले महीने थी !!
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यदि पीएम इन सभी चिट्ठियों को प्रधानमंत्री कार्यालय में आने की अनुमति देंगे तो उनके पास अपने दफ्तर में इतने कर्मचारी ही नहीं है जो ये चिट्ठियां पढ़ सके !! इस स्थिति में वे देश के सभी कलेक्टर्स / डाक विभाग को निम्नलिखित आदेश दे सकते है :
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(a) प्रत्येक डाक विभाग में लाल डिब्बे के साथ एक नीले / हरे कलर का अतिरिक्त डब्बा लगाया जाए जिस पर “Letter to Pm” या “पीएम के लिए ख़त इस डिब्बे में डालें” लिखा हो।
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(b) वे प्रत्येक जिले के हेड पोस्ट ऑफिस में एक “Letters to Pm cell” या “प्रधानमन्त्री कार्यालय पत्र प्रकोष्ठ” का गठन करके एक अधिकारी नियुक्त कर सकते है।
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(c) यह विभाग पीएम की चिट्ठियों को पढ़कर इनका रिकॉर्ड रखेगा और पीएम को यह रिपोर्ट (मेल, एक्सेल या स्पीड पोस्ट द्वारा) भेजेगा कि इस जिले से कुल 1 लाख चिट्ठी प्राप्त हुयी है।
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इसमें अमुक गाँव / कस्बे से इतनी उतनी चिट्ठियां है। इन 2 लाख चिट्ठियों में से 1,90,000 चिट्ठियों में #EndLockdownTottaly या #JuryCourt की हेश है !!
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अधिकारी स्थानीय स्तर पर यह भी डेटा रखेगा कि किस मतदाता संख्या एवं मतदाता द्वारा चिठ्ठी भेजी गयी है। (इसीलिए आपको अपनी मांग एक दो शब्दों यानी हेश के रूप में लिखनी है)
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और इस तरह 10 तारीख तक पीएम के दफ्तर में देश भर के सभी जिलो से डेटा पहुंचे जायेगा। यह सब तब की बात है जब पीएम को चिट्ठी भेजने वालो की संख्या लाखों-करोड़ो तक पहुंचेगी। जहाँ तक कुछ हजार चिट्ठियों की बात है तो तथ्य यह है कि – पीएम के दफ्तर में भेजी जाने वाली सभी चिट्ठियां पढ़ी जाती है, और इनका रिकॉर्ड भी रखा जाता है ।
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उदाहरण के लिए , 2019 की घटना है जब एक दम्पत्ति ने पी एम को चिट्ठी भेजी थी कि यदि अमुक दिवस तक राम मंदिर निर्माण न हुआ तो वे आत्म हत्या कर लेंगे । प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा उसे गिरफ़्तार करने के आदेश दिए गए और उसे गिरफ़्तार किया गया। यदि पीएम के दफ्तर में चिट्ठियां नहीं पढ़ी जाती तो उन्हें कभी मालूम न होता था कि दम्पत्ति ने आत्मदाह की धमकी दी है !!
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ख़बर का लिंक - <https://www.jagran.com/uttar-pradesh/banda-the-couple-who-sent-the-letter-to-the-pm-on-the-construction-of-ram-temple-18855482.html?fbclid=IwAR36pqC97ow7o1FRgr52dWLq260cL_3lGCt9g3YwXrtGRr1kqPmFdwfyjm4&utm_expid=.EV9lrgB0QnKoaDL62_wZVQ.0&utm_referrer=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2F>;
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तो क्या हमेशा इसी तरह चलेगा कि, नागरिको को अपनी हर मांग पहुँचाने के लिए हमेशा चिट्ठियां भेजनी पड़ेगी ?
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नहीं !! तब पीएम के पास सिर्फ एक रास्ता होगा – कि वे टीसीपी क़ानून गेजेट में छापने के आदेश जारी करें !! ताकि मतदाता अपनी मांग/ सुझाव / शिकायत पारदर्शी एवं अधिकृत तरीके से पीएम-सीएम के सम्मुख रख सके !!
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प्रस्तावित टीसीपी क़ानून का लिंक - Facebook.com/pawan.jury/posts/2785178204933731
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बहरहाल, यदि भारत में टीसीपी क़ानून होता तो न तो लॉकडाउन होता था और न ही वैक्सीन-चिप का सर्कस चल पाता था !! मतलब यदि एक बार भारत के नागरिक चिट्ठी भेजने के लिए सड़को पर आना शुरू कर देते है तो टीसीपी आ जाएगा, और टीसीपी आने के बाद नागरिको को कोई मांग करने के लिए कभी सड़को पर नहीं आना पड़ेगा !!
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टीसीपी का पीडीऍफ़ यहाँ से डाउनलोड करें - tinyurl .com/NationalTcp
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 27 2020 09:24:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राज्य स्तरीय जनमत संग्रह ; सज्जन नागरिको के लिए बंदूक रखने का प्रस्ताव
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( State Wide Referendum ; Right to Bear Gun to Law Abide Citizens )
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इस क़ानून का सार : मुख्यमंत्री यह क़ानून सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में राज्य के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इसे लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह क़ानून राज्य के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा।
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इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं, एवं जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 कारतूस रखना अनिवार्य होगा। प्रधानमंत्री किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून किसी राज्य या किसी जिले में लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री भी यह क़ानून अपने राज्य के एक या अधिक जिलो में लागू कर सकते है।
#StateGunLawReferendum , #RRP16
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यदि आप बंदूक रखने के कानून पर जनमत संग्रह कराना चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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‘ मुख्यमंत्री जी, कृपया बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #StateGunLawReferendum
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही राज्य में एक देश जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए “हाँ” दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
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(1.1) जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ हाँ या ना दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले मुख्यमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद गुजरात राज्य का कोई भी मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
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(1.2) कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
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(1.3) यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।
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(1.4) मुख्यमंत्री या प्रधानमन्त्री राज्य के 51% मतदाताओं की स्वीकृति से किसी जिले में, एवं प्रधानमंत्री भारत के 51% मतदाताओं की स्वीकृति से गुजरात में यह क़ानून 4 वर्ष के लिए निलम्बित कर सकते है।
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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है – ऐसा नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून अवयस्क नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद राज्य का कोई भी सज्जन वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत बन्दूक रख सकेगा।
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(3.1) बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
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(3.2) राज्य का कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की दो बंदूके अपने पास रख सकेगा।
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(3.3) दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) यदि कोई सज्जन वयस्क नागरिक 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित मात्रा में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
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(4.1) 10 लाख से अधिक संपत्ति – एक छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.2) 20 लाख से अधिक संपत्ति – एक मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.3 ) 30 लाख से अधिक संपत्ति – एक बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.4) संपत्ति में 1 घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी, एवं जूरी मंडल का चयन जिले की वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश
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(06) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीन गन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
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(7.1) छोटी बंदूको के प्रकार।
(7.2) मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
(7.3) बड़ी बंदूको के प्रकार।
(7.4) कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों के लिए बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक टेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
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(8.1) अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
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(8.2) DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएँगी।
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(8.3) जिला शस्त्र अधिकारी प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। जिला शस्त्र अधिकारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) प्रधानमंत्री की अनुमति से रक्षा मंत्री इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेंगे। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसेन्स के, केवल पंजीकरण करवाकर बंदूक, बन्दुक के पुर्जे, कारतूस, बुलेट प्रूफ जेकेट आदि बनाने की फैक्ट्री राज्य में शुरू कर सकता है।
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(10) राज्य में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
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(10.1) यह क़ानून लागू होने के बाद राज्य में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व की कम्पनियां / फर्म आदि ही राज्य में बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महा जूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो धारा (14) में दी गयी वोट वापसी प्रक्रियाओ का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महाजूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(11.4) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 600 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(11.5) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(11.6) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.7) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार :
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(12.1) जूरी मंडल किसी असज्जन नागरिक को हथियार रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेंगे। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.3) यदि कोई सज्जन नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.4) कोई व्यक्ति सज्जन है या असज्जन, इस बारे में अंतिम निर्णय करने का अधिकार जूरी के पास होगा। जूरी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड, चाल चलन, आरोप, दोष सिद्धि आदि के आधार पर इस बारे में अपने विवेक से फैसला लेगी।
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(12.5) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी एवं उनके खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई जूरी मंडल करेगा।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना (इस संपत्ति में 1 करोड़ का घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।

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(14) वोट वापसी : जिला शस्त्र अधिकारी ( DGO )
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी मतदाता जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ।
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(14.2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(14.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(14.4) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(14.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग – मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]

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--------- ड्राफ्ट का समापन---------
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बंदूकधारी भारतीय समाज के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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(1) यह क़ानून मेरे राज्य में कैसे लागू होगा ?
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इस क़ानून की धारा (1) में जनमत संग्रह का प्रावधान दिया गया है। मुख्यमंत्री इस क़ानून पर हस्ताक्षर करके इसे गेजेट में निकालेंगे और गेजेट में आने के साथ ही इस पर जनमत संग्रह शुरू हो जाएगा। तब राज्य का कोई भी नागरिक चाहे तो पटवारी कार्यालय में जाकर या अपने रजिस्टर्ड मोबाइल द्वारा SMS भेजकर इस कानून पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकता। यदि राज्य के कुल मतदाताओं के 55% नागरिक इस पर अपनी सहमती दर्ज करवा देते है, तब सिर्फ तब ही यह क़ानून राज्य में लागू होगा। जब तक 55% मतदाता इस पर अपनी सहमती दर्ज नहीं करते है, तब तक जनमत संग्रह जारी रहेगा। यदि किसी मतदाता ने इस क़ानून पर अपनी सहमती दर्ज करवा दी है, और वह अपनी सहमती रद्द करना चाहता है तो वह किसी भी दिन अपनी स्वीकृति को रद्द भी कर सकता है। इस तरह यह क़ानून नागरिको का स्पष्ट बहुमत प्राप्त करने के बाद ही राज्य में लागू होगा अन्यथा नहीं।
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(2) क्या मुख्यमंत्री यह क़ानून बिना जनमत संग्रह के लागू कर सकते है ?
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यदि मुख्यमंत्री चाहे तो इस कानून की धारा 1 में से जनमत संग्रह का प्रावधान निकाल कर इसे सीधे अपने राज्य में लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री चाहे तो बिना जनमत संग्रह के इस क़ानून को राज्य के कुछ या किसी एक जिले में भी लागू कर सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि, यह क़ानून 55% नागरिको की स्पष्ट सहमती प्राप्त करने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए अन्यथा नहीं।
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(3) हमें इस क़ानून की जरूरत क्यों है ?
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3.1. बाह्य आक्रमण : हथियारबंद नागरिक समाज लोकतंत्र की जननी है। प्रत्येक नागरिक का शस्त्रधारी होना राज्य को इतनी शक्ति प्रदान कर देता है कि सेना के हारने के बावजूद वे खुद की एवं अपने राज्य की रक्षा कर पाते है।
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(3.1.1) हिटलर ने स्विट्जर्लेंड पर हमला करने की योजना को इसीलिए स्थगित कर दिया था, क्योंकि तब सभी स्विस नागरिको के पास बंदूक थी। जब प्रत्येक नागरिक के पास बंदूक होती है तो इसे सेना द्वारा हराया नहीं जा सकता, और न ही राज्य पर पूरी तरह से कंट्रोल लिया जा सकता है।
(3.1.2) प्रत्येक अफगान के पास बंदूक होने के कारण अमेरिका, ब्रिटेन और रूस भी कई वर्षो तक चली लड़ाइयो के बावजूद अफगानिस्तान पर कभी भी पूरी तरह से नियंत्रण नहीं बना सके।
(3.1.3) विएतनाम अमेरिका से 20 वर्षो तक लड़ने में इसीलिए कामयाब रहा क्योंकि सेना के हारने के बाद यह युद्ध वहां के नागरिक लड़ रहे थे। सोवियत रूस ने नागरिको को हथियार भेजे और वे अपने देश की रक्षा कर पाए।
(3.1.4) ब्रिटिश भारत पर 200 वर्षो तक इसीलिए शासन कर पाए क्योंकि भारत के नागरिक हथियार विहीन थे। गोरो के पास सिर्फ 1 लाख बंदूके थे, और इन 1 लाख बन्दूको के माध्यम से उन्होंने 60 करोड़ नागरिको पर शासन किया। यदि सिर्फ 1% यानी 60 लाख भारतीयों के पास बंदूक होती तो ब्रिटिश भारत को नियंत्रित नहीं कर पाते थे।
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यदि आज भारत का चीन से युद्ध हो जाता है, और अमेरिका हमें हथियारों की मदद देने से इनकार कर देता, या हमें देरी से हथियार भेजता है, तो हथियारो के अभाव में ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि हमारी सेना रूपी दीवार दीवार टूट जायेगी। और एक बाद यदि हमारी सीमाओं में सेना घुस आती है तो नागरिको के पास प्रतिरोध करने के लिए कोई हथियार नहीं है। तब हमारी अवस्था ईराक जैसी हो जायेगी। ऐसे संभावित संकट से बचने के लिए यह क़ानून जरुरी है।
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3.2. आंतरिक आक्रमण : प्रत्येक नागरिक के पास बंदूक होने से आन्तरिक स्तर पर भी देश काफी हद तक सुरक्षित हो जाता है, और विभिन्न अपराधो में कमी आती है।
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(3.2.1) कसाब दर्जनों नागरिको को इसीलिए मार सका था क्योंकि नागरिको के पास हथियार नहीं थे। यदि मुम्बई वासियों के पास बंदूक होती तो कसाब आता नहीं था, और आ भी जाता तो 5-7 लोगो से ज्यादा को नहीं मार पाता। और आगे भी यदि इस तरह के हमले बड़े पैमाने पर होने लगते है तो हमारे पास कोई उपाय नहीं है।
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(3.2.2) सिर्फ 2000 हथियारबंद इस्लामिक आतंकियों के दस्ते ने 2 लाख कश्मीरी पंडितो को घाटी से खदेड़ दिया था। यदि कश्मीरी पंडितो के पास बंदूके होती थी, तो उन्हें कभी पलायन नहीं करना पड़ता था।
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(3.2.3) 2012 में असम के कोकराझार में सिर्फ 4000 हथियारबंद मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपेठियो ने हमला करके 2 लाख हिन्दु नागरिको को अपनी जमीन, संपत्ति आदि छोड़कर पलायन करने पर मजबूर कर दिया था। यदि सभी नागरिको के पास बंदूक होती तो उन्हें अपना घर बार छोड़कर भागना नहीं पड़ता।.
(3.2.4) 1947 में विभाजन के दौरान भी 20 लाख हथियार विहीन हिन्दू नागरिको को अपनी जान-माल गंवाना पड़ा था। वजह यह थी कि सीधी कार्यवाही करने वाले पक्ष के पास हथियार थे, जबकि दुसरे पक्ष के नागरिक हथियार विहीन थे। चूंकि सिक्खों के पास हथियार थे, अत: वे कुछ हद तक इसका प्रतिरोध कर पाए।
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(3.2.5) भारत में निरंतर चुनाव होने, जनता का लोकतंत्र में विश्वास होने और सैनिको का सरकार पर भरोसा होने के कारण अब तक कभी तख्ता पलट नहीं हुआ है। किन्तु कोई विदेशी ताकत जैसे अमेरिका आदि भारत में तख्ता पलट करवाना चाहे तो वे कुछ ही महीनो में गृह युद्ध छिडवाकर, आतंकवादी हमले करवाकर, असुरक्षा का भाव उत्पन्न करके एवं राजनैतिक विकल्प हीनता दर्शा कर ऐसे हालात पैदा कर सकते है कि जनरल तख्ता पलट कर सकता है।
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(4) इस क़ानून के गेजेट में आने से क्या परिवर्तन आयेंगे ?
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4.1. नकारात्मक प्रभाव : प्रथम चरण में गन क्राइम जैसे क्रोध जनित हमले आदि में वृद्धि होगी और बन्दुक से होने वाली मौतों में इजाफा होगा। लेकिन जैसे जैसे प्रत्येक नागरिक के पास बन्दुक पहुंचेगी वैसे वैसे दुसरे चरण में इस हिंसा में थोड़ी कमी आने लगेगी। इस क़ानून में किसी व्यक्ति को बंदूक रखने की अनुमति देने का अधिकार नागरिको की जूरी को दिया गया है। अत: जूरी मंडल गन क्राइम करने वाले नागरिको को हथियारों से वंचित कर देगा, और अपराध में गिरावट आने लगेगी। यदि पुलिस प्रमुख को वोट वापसी पासबुक के दायरे में कर दिया जाता है तो पुलिस प्रमुख यह सुनिश्चित करेगा कि अपराधी बंदूक से वंचित बने रहे।
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4.2. सकारात्मक प्रभाव :
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(4.2.1) नक्सलवाद एवं संगठित अपराध की समस्या साल छह महीने में लगभग 70% तक कम हो जायेगी
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(4.2.2) बलात्कार , लूट , डकैती , अपहरण आदि अपराधो में लगभग 70% की गिरावट आएगी।
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(4.2.3) कसाब जैसे आतंकी हमलो में कमी आ जायेगी। और हमले होते भी है तो कम जनहानि होगी।
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(4.2.4) सांप्रदायिक तनाव, एवं दंगो से सम्बधित हिंसा में कमी आएगी।
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(4.2.5) भारत को अमेरिका, चीन या पाकिस्तान से होने वाले युद्ध का सामना नहीं करना पड़ेगा। और तब भी युद्ध होता है और यदि हमारी सेना रुपी दीवार टूट जाती है तो दुश्मन सेना कभी हमारी भूमि का अधिग्रहण नहीं कर पाएगी।
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(4.2.6) भारत में बंदूक निर्माण की तकनीक का विकास होगा और हम इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जायेंगे।
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(4.2.7) सरकारी अधिकारियो / नेताओं के व्यवहार में सुधार आएगा और दमन में भी कमी आएगी। सुदूरवर्ती एवं रिमोट एरिया में पुलिस द्वारा किये जा रहे दमन में कमी आएगी।
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(4.2.8) भारत में कभी भी अन्य देशो की तरह तख्ता पलट न हो सकेगा।
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(4.2.9) किसी दुश्मन देश के हमले की स्थिति में देश टोटल लोस से बच जाएगा।
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तो हमारे विचार में, प्रत्येक नागरिक को बन्दुक देना ऐसा क़ानून नहीं है जिससे सारे लाभ ही हो। इससे कई आयामों में देश को फायदे होंगे, किन्तु एक आयाम में मामूली नुकसान भी होगा। सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों पक्ष होने के कारण हमने इस क़ानून को सीधे लागू करने की जगह जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव किया है।
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(5) बंदूके काफी महंगी है, लोग इन्हें खरीदेंगे कैसे ?
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ब्रिटिश बंदूके देखकर भारतीय तकनीशियनों ने ऐसे डिजाइन का अविष्कार कर लिया था जो ब्रिटिश बन्दूको से बेहतर था। तब 1800 ई. में गोरो ने भारत के सभी बंदूक कारखानों का अधिग्रहण किया और बंदूक बनाने पर लाइसेंस नीति डाल दी। और लाइसेंस वे कभी देते नहीं थे। 1857 की क्रांति के बाद गोरो ने आर्म्स एक्ट बनाकर भारतीयों को हथियार धारण करने से भी प्रतिबंधित कर दिया था। इस कानून में बंदूक लगाने के कारखानों को लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया है, अत: बड़े पैमाने पर कारखाने लगना शुरू होंगे जिससे बेहतर एवं सस्ती बंदूके बनने लगेगी।
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(6) क्या भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार नहीं देंगे ?

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यह गलत धारणा पेड मीडिया द्वारा खड़ी की गयी है ताकि नागरिको को हथियार विहीन रखने के लिए कन्विंस किया जा सके। वे एक तरफ़ा एवं चयनात्मक सूचनाओ का इस्तेमाल करके यह भ्रम खड़ा करते है। जब बंदूक की वजह से किसी की जान जाती है तो इसे बड़े पैमाने पर कवरेज दिया जाता है, किन्तु उन घटनाओ को छिपा लिया जाता है जब बंदूको ने नागरिको की रक्षा की। बहुधा पेड मीडिया अपराध की वजह को गलत तरीके से बंदूक से जोड़ देता है, जबकि अपराध की मूल वजह भिन्न होती है।
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उदाहरण के लिए, कर्नाटक के कूर्ग जिले में लगभग 80% नागरिको के पास बंदूके है, किन्तु वहां पर गन क्राइम रेट सबसे कम कम है। कर्नाटक भी भारत में ही है, और यदि भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार देंगे तो अब तक कूर्ग में लोगो ने एक दुसरो को मार क्यों नहीं दिया। यह एक वास्तविक उदाहरण है जो यह सिद्ध करता है कि - "भारतीयों को बंदूक रखने का अधिकार देने से वे एक दुसरे को मार देंगे" नामक धारणा पूरी तरह से झूठ है, और पेड मीडिया द्वारा भारतीयों के दिमाग में डाली गयी है। और ज्यादातर भारतीय इस धारणा के शिकार इसीलिए है क्योंकि पेड मीडिया इस सूचना को छिपाता है कि, कूर्ग जिले के 80% नागरिको के पास पंजीकृत बंदूके है !! और इसी तर्ज पर बंदूक के बारे में सही सूचना देने वाली कई खबरें छिपायी जाती है, और भ्रमित करने वाली खबरों को उछाला जाता है !!
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(6.1) बंदूक नहीं रखने का अधिकार देने का मतलब है अपराधीयों को बंदूक रखने की छूट देना। क्योंकि कानून में नहीं मानने वाले लोग अवैध रूप से बंदूक ले आयेंगे और क़ानून में मानने वाले लोग क़ानून का पालन करने के कारण बंदूक रखने से वंचित हो जाते है। और इस तरह अपराधी प्रवृति के लोगो की शक्ति बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए दाउद या छोटा राजन जैसे लोगो ने बंदूके जुटाई और पूरी मुंबई को गन पॉइंट पर नाचने लगे। बंदूक के अलावा उनके पास कुछ नहीं था। यदि सभी मुंबई निवासियों के पास बंदूक होती तो दाउद की बढ़त ख़त्म हो जाती है, और वह इतना बड़ा गैंग खड़ा नहीं कर पाता।
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(6.2) बंदूक अच्छी या बुरी नहीं होती, बल्कि इसे चलाने वाला व्यक्ति अच्छा या बुरा होता है। आप अपने घर-परिवार एवं मोहल्ले में देखिये कि कितने लोग अपराधी मानसिकता के है, और कितने लोग कानून में मानने वाले है। 99% लोग क़ानून में मानने वाले होते है। और जब क़ानून में मानने वाले लोगो के हाथ में बंदूक जाती है तो यह अपराध नहीं करती, बल्कि अपराधियो से रक्षा करती है।
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(6.3) यह एक तथ्य है कि अपराध गैर कानूनी बन्दूको से होते है, वैध बन्दूको से नहीं। यदि व्यक्ति के पास वैध बंदूक होगी तो वह उनसे अपराध नहीं कर पायेगा। यदि वह रजिस्टर्ड बंदूक से अपराध करता है तो तुरंत पकड़ा जाएगा।
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(6.4) दूसरा सबसे बड़ा खतरा* जिसका हम सामना कर रहे है : हमारे विचार में, अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत में हिन्दू मुस्लिम गृह युद्ध शुरू करना चाहते है। इसके लिए वे उसी ट्रेक का इस्तेमाल कर रहे है जिसका इस्तेमाल उन्होंने 1947 में और 1990 में कश्मीर पंडितो के निष्कासन में किया था। और इसके लिए वे पेड मीडिया पार्टियों और पेड मीडिया नेताओं का इस्तेमाल करके लगातार तनाव भड़का रहे है।
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2 करोड़ अवैध बंगलादेशीयों का देश में बने रहना एक वास्तविक वजह है, जो भारत में हिन्दू-मुस्लिम गृह युद्ध को शुरू कर सकतीहै। CAA को NRC से मिक्स करके भ्रम फ़ैलाने का एक उद्देश्य यह था कि असम NRC से बाहर रह गए अवैध बंगलादेशीयों को हथियार पकड़ने के लिए तैयार किया जा सके। इसीलिए असम के NRC में यह प्रावधान नहीं रखा गया कि जो अवैध बंगलादेशी NRC से बाहर रह जायेंगे, उन्हें भारत से कैसे निष्कासित किया जायेगा। अब यदि वे असम में रोहिंग्यो, अवैध बंगलादेशी निवासियों, घुसपेठियो और कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों को हथियार (AK-47, ग्रेनेड आदि) भेजना शुरु करे तो असम में बड़े पैमाने पर कत्ले आम शुरू हो सकता है, और लाखो हिन्दू उसी तरह भारत की और पलायन करेंगे जैसे कश्मीरी पंडितो ने किया था।
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इसके बाद वे भारत के अन्य राज्यों में भी हथियार भेजना शुरू कर सकते है, और पूरा देश चपेट में आ जाएगा। एक बार यह सब शुरू होने के बाद कई सालों तक रुकने वाला नहीं है। वे अलग अलग गुटों को हथियार भेजते रहेंगे और पेड मीडिया का इस्तेमाल करके दंगा भड़काते रहेंगे। यदि वे हथियार भेजना तय करते है तो प्रत्येक नागरिक को बंदूक दिए बिना उन्हें रोकने का हमारे पास अन्य कोई उपाय नहीं है।
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(*) पहले नंबर का सबसे बड़ा खतरा यह है कि हमारी सेना आयातित हथियारों पर बुरी तरह से निर्भर है।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया मुख्यमंत्री कार्यालय के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे - मुख्यमंत्री जी, कृपया बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - # StateGunLawReferendum
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम / सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी।
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और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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@Cmo.. , कृपया बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #StateGunLawReferendum
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है।
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2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा। यदि कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर कोई रेली वगेरह करना चाहते है तो महीने के 4th Sunday को सांय 4 बजे रेली कर सकते है.
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (14) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इसकी बुकलेट अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है।
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इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm / Cm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 27 2020 09:31:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जिला स्तरीय जनमत संग्रह ; सज्जन नागरिको के लिए बंदूक रखना अनिवार्य करने का प्रस्ताव
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( District Level Referendum ; Right to bear Gun to Law Abide Citizens)
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इस क़ानून का सार : मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री यह क़ानून सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में जिले के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इसे लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह क़ानून जिले के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं, एवं जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 कारतूस रखना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री यह क़ानून पूरे राज्य में या कुछ जिलो में भी लागू कर सकते है। प्रधानमंत्री भी किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून देश के किसी भी राज्य या किसी जिले में लागू कर सकते है।
#DistrictGunLawReferendum #RRP17
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यदि आप बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, बंदूक रखने के क़ानून पर जिले में जनमत संग्रह कराएं - #DistrictGunLawReferendum
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही जिले में एक जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए “हाँ” दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
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(1.1) जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ हाँ या ना दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले मुख्यमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद सुरत जिले का कोई भी मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
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(1.2) कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
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(1.3) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।
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(1.4) मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री राज्य के 51% मतदाताओं की स्वीकृति लेकर या प्रधानमंत्री भारत के 51% मतदाताओ की स्वीकृति से जिले में इस क़ानून को 4 वर्ष के लिए निलम्बित कर सकते है।
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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है – ऐसा नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून अवयस्क नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद जिले का कोई भी सज्जन वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत बन्दूक रख सकेगा।
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(3.1) बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
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(3.2) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की दो बंदूके अपने पास रख सकेगा।
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(3.3) दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) यदि कोई सज्जन वयस्क नागरिक 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित मात्रा में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
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(4.1) 10 लाख से अधिक संपत्ति – एक छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.2) 20 लाख से अधिक संपत्ति – एक मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.3) 30 लाख से अधिक संपत्ति – एक बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.4) संपत्ति में 1 घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी, एवं जूरी मंडल का चयन जिले की वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश
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(06) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीन गन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
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(7.1) छोटी बंदूको के प्रकार।
(7.2) मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
(7.3) बड़ी बंदूको के प्रकार।
(7.4) कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों के लिए बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक टेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
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(8.1) अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
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(8.2) DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएँगी।
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(8.3) जिला शस्त्र अधिकारी प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। जिला शस्त्र अधिकारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) प्रधानमंत्री की अनुमति से रक्षा मंत्री इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेंगे। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसेन्स के, केवल पंजीकरण करवाकर बंदूक, बन्दुक के पुर्जे, कारतूस, बुलेट प्रूफ जेकेट आदि बनाने की फैक्ट्री सुरत में शुरू कर सकता है।
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(10) जिले में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
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(10.1) यह क़ानून लागू होने के बाद जिले में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व की कम्पनियां / फर्म आदि ही सुरत में बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महा जूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो धारा (14) में दी गयी वोट वापसी प्रक्रियाओ का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महाजूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(11.4) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 600 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(11.5) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(11.6) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.7) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार :
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(12.1) जूरी मंडल किसी असज्जन नागरिक को हथियार रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेंगे। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.2) यदि कोई सज्जन नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.3) कोई व्यक्ति सज्जन है या असज्जन, इस बारे में अंतिम निर्णय करने का अधिकार जूरी के पास होगा। जूरी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड, चाल चलन, आरोप, दोष सिद्धि आदि के आधार पर इस बारे में अपने विवेक से फैसला लेगी।
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(12.4) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी एवं उनके खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई जूरी मंडल करेगा।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना (इस संपत्ति में 1 करोड़ का घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।

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(14) वोट वापसी : जिला शस्त्र अधिकारी ( DGO )
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी मतदाता जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ।
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(14.2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(14.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(14.4) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(14.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग – मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]

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--------- ड्राफ्ट का समापन---------
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बंदूकधारी भारतीय समाज के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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(1) यह क़ानून मेरे जिले में कैसे लागू होगा ?
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इस क़ानून की धारा (1) में जनमत संग्रह का प्रावधान दिया गया है। मुख्यमंत्री इस क़ानून पर हस्ताक्षर करके इसे गेजेट में निकालेंगे और गेजेट में आने के साथ ही इस पर जनमत संग्रह शुरू हो जाएगा। तब जिले का कोई भी नागरिक चाहे तो पटवारी कार्यालय में जाकर या अपने रजिस्टर्ड मोबाइल द्वारा SMS भेजकर इस कानून पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकता। .
यदि जिले के कुल मतदाताओं के 55% नागरिक इस पर अपनी सहमती दर्ज करवा देते है, तब सिर्फ तब ही यह क़ानून जिले में लागू होगा। जब तक 55% मतदाता इस पर अपनी सहमती दर्ज नहीं करते है, तब तक जनमत संग्रह जारी रहेगा। यदि किसी मतदाता ने इस क़ानून पर अपनी सहमती दर्ज करवा दी है, और वह अपनी सहमती रद्द करना चाहता है तो वह किसी भी दिन अपनी स्वीकृति को रद्द भी कर सकता है। इस तरह यह क़ानून नागरिको का स्पष्ट बहुमत प्राप्त करने के बाद ही जिले में लागू होगा अन्यथा नहीं।
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(2) क्या मुख्यमंत्री यह क़ानून बिना जनमत संग्रह के लागू कर सकते है ?
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यदि मुख्यमंत्री चाहे तो इस कानून की धारा 1 में से जनमत संग्रह का प्रावधान निकाल कर इसे सीधे लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री चाहे तो बिना जनमत संग्रह के इस क़ानून को राज्य के कुछ या किसी एक जिले में भी लागू कर सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि, यह क़ानून 55% नागरिको की स्पष्ट सहमती प्राप्त करने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए अन्यथा नहीं।
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(3) हमें इस क़ानून की जरूरत क्यों है ?
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3.1. बाह्य आक्रमण : हथियारबंद नागरिक समाज लोकतंत्र की जननी है। प्रत्येक नागरिक का शस्त्रधारी होना राज्य को इतनी शक्ति प्रदान कर देता है कि सेना के हारने के बावजूद वे खुद की एवं अपने राज्य की रक्षा कर पाते है।
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(3.1.1) हिटलर ने स्विट्जर्लेंड पर हमला करने की योजना को इसीलिए स्थगित कर दिया था, क्योंकि तब सभी स्विस नागरिको के पास बंदूक थी। जब प्रत्येक नागरिक के पास बंदूक होती है तो इसे सेना द्वारा हराया नहीं जा सकता, और न ही राज्य पर पूरी तरह से कंट्रोल लिया जा सकता है।
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(3.1.2) प्रत्येक अफगान के पास बंदूक होने के कारण अमेरिका, ब्रिटेन और रूस भी कई वर्षो तक चली लड़ाइयो के बावजूद अफगानिस्तान पर कभी भी पूरी तरह से नियंत्रण नहीं बना सके।
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(3.1.3) विएतनाम अमेरिका से 20 वर्षो तक लड़ने में इसीलिए कामयाब रहा क्योंकि सेना के हारने के बाद यह युद्ध वहां के नागरिक लड़ रहे थे। सोवियत रूस ने नागरिको को हथियार भेजे और वे अपने देश की रक्षा कर पाए।
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(3.1.4) ब्रिटिश भारत पर 200 वर्षो तक इसीलिए शासन कर पाए क्योंकि भारत के नागरिक हथियार विहीन थे। गोरो के पास सिर्फ 1 लाख बंदूके थे, और इन 1 लाख बन्दूको के माध्यम से उन्होंने 60 करोड़ नागरिको पर शासन किया। यदि सिर्फ 1% यानी 60 लाख भारतीयों के पास बंदूक होती तो ब्रिटिश भारत को नियंत्रित नहीं कर पाते थे।
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यदि आज भारत का चीन से युद्ध हो जाता है, और अमेरिका हमें हथियारों की मदद देने से इनकार कर देता, या हमें देरी से हथियार भेजता है, तो हथियारो के अभाव में ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि हमारी सेना रूपी दीवार दीवार टूट जायेगी। और एक बाद यदि हमारी सीमाओं में सेना घुस आती है तो नागरिको के पास प्रतिरोध करने के लिए कोई हथियार नहीं है। तब हमारी अवस्था ईराक जैसी हो जायेगी। ऐसे संभावित संकट से बचने के लिए यह क़ानून जरुरी है।
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3.2. आंतरिक आक्रमण : प्रत्येक नागरिक के पास बंदूक होने से आन्तरिक स्तर पर भी देश काफी हद तक सुरक्षित हो जाता है, और विभिन्न अपराधो में कमी आती है।
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(3.2.1) कसाब दर्जनों नागरिको को इसीलिए मार सका था क्योंकि नागरिको के पास हथियार नहीं थे। यदि मुम्बई वासियों के पास बंदूक होती तो कसाब आता नहीं था, और आ भी जाता तो 5-7 लोगो से ज्यादा को नहीं मार पाता। और आगे भी यदि इस तरह के हमले बड़े पैमाने पर होने लगते है तो हमारे पास कोई उपाय नहीं है।
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(3.2.2) सिर्फ 2000 हथियारबंद इस्लामिक आतंकियों के दस्ते ने 2 लाख कश्मीरी पंडितो को घाटी से खदेड़ दिया था। यदि कश्मीरी पंडितो के पास बंदूके होती थी, तो उन्हें कभी पलायन नहीं करना पड़ता था।
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(3.2.3) 2012 में असम के कोकराझार में सिर्फ 4000 हथियारबंद मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपेठियो ने हमला करके 2 लाख हिन्दु नागरिको को अपनी जमीन, संपत्ति आदि छोड़कर पलायन करने पर मजबूर कर दिया था। यदि सभी नागरिको के पास बंदूक होती तो उन्हें अपना घर बार छोड़कर भागना नहीं पड़ता।
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(3.2.4) 1947 में विभाजन के दौरान भी 20 लाख हथियार विहीन हिन्दू नागरिको को अपनी जान-माल गंवाना पड़ा था। वजह यह थी कि सीधी कार्यवाही करने वाले पक्ष के पास हथियार थे, जबकि दुसरे पक्ष के नागरिक हथियार विहीन थे। चूंकि सिक्खों के पास हथियार थे, अत: वे कुछ हद तक इसका प्रतिरोध कर पाए।
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(3.2.5) भारत में निरंतर चुनाव होने, जनता का लोकतंत्र में विश्वास होने और सैनिको का सरकार पर भरोसा होने के कारण अब तक कभी तख्ता पलट नहीं हुआ है। किन्तु कोई विदेशी ताकत जैसे अमेरिका आदि भारत में तख्ता पलट करवाना चाहे तो वे कुछ ही महीनो में गृह युद्ध छिडवाकर, आतंकवादी हमले करवाकर, असुरक्षा का भाव उत्पन्न करके एवं राजनैतिक विकल्प हीनता दर्शा कर ऐसे हालात पैदा कर सकते है कि जनरल तख्ता पलट कर सकता है।
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(4) इस क़ानून के गेजेट में आने से क्या परिवर्तन आयेंगे ?
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4.1. नकारात्मक प्रभाव : प्रथम चरण में गन क्राइम जैसे क्रोध जनित हमले आदि में वृद्धि होगी और बन्दुक से होने वाली मौतों में इजाफा होगा। लेकिन जैसे जैसे प्रत्येक नागरिक के पास बन्दुक पहुंचेगी वैसे वैसे दुसरे चरण में इस हिंसा में थोड़ी कमी आने लगेगी। इस क़ानून में किसी व्यक्ति को बंदूक रखने की अनुमति देने का अधिकार नागरिको की जूरी को दिया गया है। अत: जूरी मंडल गन क्राइम करने वाले नागरिको को हथियारों से वंचित कर देगा, और अपराध में गिरावट आने लगेगी। यदि पुलिस प्रमुख को वोट वापसी पासबुक के दायरे में कर दिया जाता है तो पुलिस प्रमुख यह सुनिश्चित करेगा कि अपराधी बंदूक से वंचित बने रहे।
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4.2. सकारात्मक प्रभाव :
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(4.2.1) नक्सलवाद एवं संगठित अपराध की समस्या साल छह महीने में लगभग 70% तक कम हो जायेगी
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(4.2.2) बलात्कार , लूट , डकैती , अपहरण आदि अपराधो में लगभग 70% की गिरावट आएगी।
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(4.2.3) कसाब जैसे आतंकी हमलो में कमी आ जायेगी। और हमले होते भी है तो कम जनहानि होगी।
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(4.2.4) सांप्रदायिक तनाव, एवं दंगो से सम्बधित हिंसा में कमी आएगी।
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(4.2.5) भारत को अमेरिका, चीन या पाकिस्तान से होने वाले युद्ध का सामना नहीं करना पड़ेगा। और तब भी युद्ध होता है और यदि हमारी सेना रुपी दीवार टूट जाती है तो दुश्मन सेना कभी हमारी भूमि का अधिग्रहण नहीं कर पाएगी।
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(4.2.6) भारत में बंदूक निर्माण की तकनीक का विकास होगा और हम इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जायेंगे।
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(4.2.7) सरकारी अधिकारियो / नेताओं के व्यवहार में सुधार आएगा और दमन में भी कमी आएगी। सुदूरवर्ती एवं रिमोट एरिया में पुलिस द्वारा किये जा रहे दमन में कमी आएगी।
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(4.2.8) भारत में कभी भी अन्य देशो की तरह तख्ता पलट न हो सकेगा।
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(4.2.9) किसी दुश्मन देश के हमले की स्थिति में देश टोटल लोस से बच जाएगा।
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तो हमारे विचार में, प्रत्येक नागरिक को बन्दुक देना ऐसा क़ानून नहीं है जिससे सारे लाभ ही हो। इससे कई आयामों में देश को फायदे होंगे, किन्तु एक आयाम में मामूली नुकसान भी होगा। सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों पक्ष होने के कारण हमने इस क़ानून को सीधे लागू करने की जगह जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव किया है।
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(5) बंदूके काफी महंगी है, लोग इन्हें खरीदेंगे कैसे ?
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ब्रिटिश बंदूके देखकर भारतीय तकनीशियनों ने ऐसे डिजाइन का अविष्कार कर लिया था जो ब्रिटिश बन्दूको से बेहतर था। तब 1800 ई. में गोरो ने भारत के सभी बंदूक कारखानों का अधिग्रहण किया और बंदूक बनाने पर लाइसेंस नीति डाल दी। और लाइसेंस वे कभी देते नहीं थे। 1857 की क्रांति के बाद गोरो ने आर्म्स एक्ट बनाकर भारतीयों को हथियार धारण करने से भी प्रतिबंधित कर दिया था। इस कानून में बंदूक लगाने के कारखानों को लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया है, अत: बड़े पैमाने पर कारखाने लगना शुरू होंगे जिससे बेहतर एवं सस्ती बंदूके बनने लगेगी।
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(6) क्या भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार नहीं देंगे ?

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यह गलत धारणा पेड मीडिया द्वारा खड़ी की गयी है ताकि नागरिको को हथियार विहीन रखने के लिए कन्विंस किया जा सके। वे एक तरफ़ा एवं चयनात्मक सूचनाओ का इस्तेमाल करके यह भ्रम खड़ा करते है। जब बंदूक की वजह से किसी की जान जाती है तो इसे बड़े पैमाने पर कवरेज दिया जाता है, किन्तु उन घटनाओ को छिपा लिया जाता है जब बंदूको ने नागरिको की रक्षा की। बहुधा पेड मीडिया अपराध की वजह को गलत तरीके से बंदूक से जोड़ देता है, जबकि अपराध की मूल वजह भिन्न होती है।
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उदाहरण के लिए, कर्नाटक के कूर्ग जिले में लगभग 80% नागरिको के पास बंदूके है, किन्तु वहां पर गन क्राइम रेट सबसे कम कम है। कर्नाटक भी भारत में ही है, और यदि भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार देंगे तो अब तक कूर्ग में लोगो ने एक दुसरो को मार क्यों नहीं दिया। यह एक वास्तविक उदाहरण है जो यह सिद्ध करता है कि - "भारतीयों को बंदूक रखने का अधिकार देने से वे एक दुसरे को मार देंगे" नामक धारणा पूरी तरह से झूठ है, और पेड मीडिया द्वारा भारतीयों के दिमाग में डाली गयी है। और ज्यादातर भारतीय इस धारणा के शिकार इसीलिए है क्योंकि पेड मीडिया इस सूचना को छिपाता है कि, कूर्ग जिले के 80% नागरिको के पास पंजीकृत बंदूके है !! और इसी तर्ज पर बंदूक के बारे में सही सूचना देने वाली कई खबरें छिपायी जाती है, और भ्रमित करने वाली खबरों को उछाला जाता है !!
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(6.1) बंदूक नहीं रखने का अधिकार देने का मतलब है अपराधीयों को बंदूक रखने की छूट देना। क्योंकि कानून में नहीं मानने वाले लोग अवैध रूप से बंदूक ले आयेंगे और क़ानून में मानने वाले लोग क़ानून का पालन करने के कारण बंदूक रखने से वंचित हो जाते है। और इस तरह अपराधी प्रवृति के लोगो की शक्ति बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए दाउद या छोटा राजन जैसे लोगो ने बंदूके जुटाई और पूरी मुंबई को गन पॉइंट पर नाचने लगे। बंदूक के अलावा उनके पास कुछ नहीं था। यदि सभी मुंबई निवासियों के पास बंदूक होती तो दाउद की बढ़त ख़त्म हो जाती है, और वह इतना बड़ा गैंग खड़ा नहीं कर पाता।
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(6.2) बंदूक अच्छी या बुरी नहीं होती, बल्कि इसे चलाने वाला व्यक्ति अच्छा या बुरा होता है। आप अपने घर-परिवार एवं मोहल्ले में देखिये कि कितने लोग अपराधी मानसिकता के है, और कितने लोग कानून में मानने वाले है। 99% लोग क़ानून में मानने वाले होते है। और जब क़ानून में मानने वाले लोगो के हाथ में बंदूक जाती है तो यह अपराध नहीं करती, बल्कि अपराधियो से रक्षा करती है।
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(6.3) यह एक तथ्य है कि अपराध गैर कानूनी बन्दूको से होते है, वैध बन्दूको से नहीं। यदि व्यक्ति के पास वैध बंदूक होगी तो वह उनसे अपराध नहीं कर पायेगा। यदि वह रजिस्टर्ड बंदूक से अपराध करता है तो तुरंत पकड़ा जाएगा।
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(6.4) दूसरा सबसे बड़ा खतरा* जिसका हम सामना कर रहे है : हमारे विचार में, अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत में हिन्दू मुस्लिम गृह युद्ध शुरू करना चाहते है। इसके लिए वे उसी ट्रेक का इस्तेमाल कर रहे है जिसका इस्तेमाल उन्होंने 1947 में और 1990 में कश्मीर पंडितो के निष्कासन में किया था। और इसके लिए वे पेड मीडिया पार्टियों और पेड मीडिया नेताओं का इस्तेमाल करके लगातार तनाव भड़का रहे है।
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2 करोड़ अवैध बंगलादेशीयों का देश में बने रहना एक वास्तविक वजह है, जो भारत में हिन्दू-मुस्लिम गृह युद्ध को शुरू कर सकतीहै। CAA को NRC से मिक्स करके भ्रम फ़ैलाने का एक उद्देश्य यह था कि असम NRC से बाहर रह गए अवैध बंगलादेशीयों को हथियार पकड़ने के लिए तैयार किया जा सके। इसीलिए असम के NRC में यह प्रावधान नहीं रखा गया कि जो अवैध बंगलादेशी NRC से बाहर रह जायेंगे, उन्हें भारत से कैसे निष्कासित किया जायेगा।
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अब यदि वे असम में रोहिंग्यो, अवैध बंगलादेशी निवासियों, घुसपेठियो और कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों को हथियार (AK-47, ग्रेनेड आदि) भेजना शुरु करे तो असम में बड़े पैमाने पर कत्ले आम शुरू हो सकता है, और लाखो हिन्दू उसी तरह भारत की और पलायन करेंगे जैसे कश्मीरी पंडितो ने किया था।
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इसके बाद वे भारत के अन्य राज्यों में भी हथियार भेजना शुरू कर सकते है, और पूरा देश चपेट में आ जाएगा। एक बार यह सब शुरू होने के बाद कई सालों तक रुकने वाला नहीं है। वे अलग अलग गुटों को हथियार भेजते रहेंगे और पेड मीडिया का इस्तेमाल करके दंगा भड़काते रहेंगे। यदि वे हथियार भेजना तय करते है तो प्रत्येक नागरिक को बंदूक दिए बिना उन्हें रोकने का हमारे पास अन्य कोई उपाय नहीं है।
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(*) पहले नंबर का सबसे बड़ा खतरा यह है कि हमारी सेना आयातित हथियारों पर बुरी तरह से निर्भर है।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया मुख्यमंत्री कार्यालय के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे - मुख्यमंत्री जी, बंदूक रखने के क़ानून पर जिले में जनमत संग्रह कराएं - #StateGunLawReferendum
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम / सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी।
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और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo.. , मुख्यमंत्री जी, बंदूक रखने के क़ानून पर जिले में जनमत संग्रह कराएं - #DistrictGunLawReferendum
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है।
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2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा। यदि कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर कोई रेली वगेरह करना चाहते है तो महीने के चतुर्थ रविवार 4th Sunday को सांय 4 बजे रेली वगेरह कर सकते है.
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (14) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इसकी बुकलेट अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है।
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इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm / Cm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 27 2020 09:50:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जिला जूरी कोर्ट – थानों-अदालतों को सुधारने के लिए जिला स्तरीय जूरी अदालतें
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Jila Jury Court – Proposal to Enact Lower Jury Courts
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यह क़ानून जिले के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, अस्पतालों आदि का काम-काज सुधारने के लिए लिखा गया है। यह कानून उस जिले में लागू होगा जिस जिले के लिए मुख्यमंत्री ने राजपत्र अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री चाहे तो इसे राज्य के अन्य जिलो में या पूरे प्रदेश में भी लागू कर सकते है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। #RRP05
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यदि आप अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, कृपया जिला जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छापें — #JilaJuryCourt #VoteVapsiPassBook
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है.
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==== ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश :
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(01) यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :

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1.1. हत्या, हत्या के प्रयास , मारपीट, हिंसा , अप्राकृतिक मानव मृत्यु , दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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1.2. अपहरण , बलात्कार , छेड़छाड़ , कार्यस्थल पर उत्पीड़न , दहेज़ , घरेलू हिंसा , डिवोर्स , वैवाहिक झगड़े ।
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1.3. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारणों से सम्बंधित सभी मामले एवं सम्बंधित सभी आपत्तियां ।
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1.4. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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(02) यह क़ानून गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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01. जिला पुलिस प्रमुख
02. जिला शिक्षा अधिकारी
03. जिला चिकित्सा अधिकारी
04. जिला मिलावट रोक अधिकारी
05. जिला जज
06. जिला जूरी प्रशासक
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
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[ टिपण्णी : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है , अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए – अमुक जिले के नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके।
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बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है। इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है – अमुक जिले के अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे। ]
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यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दे सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इस शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(II) अधिकारियों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी , मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है ।
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(04) जिले के न्याय क्षेत्र में घटित होने वाले अपराधो के सम्बन्ध में यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
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4.1. हत्या, हत्या के प्रयास, दुर्घटना या लापरवाही जनित मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु।
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4.2. ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो, या गंभीर चोट कारित होने की संभावना हो, दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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4.3. अपहरण-बलात्कार-छेड़छाड़-उत्पीड़न , महिला का पीछा करना , दहेज़ , घरेलू हिंसा, डिवोर्स, वैवाहिक झगड़े।
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4.4. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जिसमें- फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है - से सम्बंधित सभी प्रकार के मामले व आपत्तियां।
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4.5. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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4.6. सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने इस सूची में शामिल किया हो।
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4.7. ऐसे अपराध या विवाद जिन्हें नागरिको के बहुमत ने इस क़ानून की धारा (34) द्वारा एवं प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो
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(05) जिला सहायक निदेशक अभियोजन (A.D.P.) को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 6 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक वोट वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। इन अधिकारीयों के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (31) देखें।
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(06) मुख्यमंत्री जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (31) का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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[ टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी। ]
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(07) जिले में दर्ज सभी मतदाताओं की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर दी गयी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और जिले में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 4 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है।
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(08) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :
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सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(8.1) जिले की मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(8.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
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(8.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(8.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(8.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
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(8.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(09) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :
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(09.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(09.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(10) क्रमरहित तरीके ( लॉटरी ) से मतदाताओं को चुनने का तरीका :
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(10.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रमरहित विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
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(10.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या जैसे ABCD के मध्य की कोई संख्या चुननी है । तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा। पहले दौर में यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का इस्तेमाल करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है, तब वह 2 पांसों का प्रयोग करेगा।
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(10.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी, और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी। यदि पांसे फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा।
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(10.3.1) मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज है, में से एक पेज का चयन करना है। तब जूरी प्रशासक 4 दौर ( राउंड ) के पासें फेंकेगा। पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है। यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी। अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा। इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है, इसलिए वह दो पांसे फेकेगा। यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा। यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है। तब जूरी प्रशासक (3-1) , (5-2) , (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा।
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(10.3.2) जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान संख्याओ को चुन सकता है। मान लीजिये सूची में N मतदाता है। तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें ‘n और m’ मान लेते है, चुन सकता है। चुने हुए मतदाता हो सकते है - ( n mod N ) , ( n +m ) mod N , ( n+2m ) mod N से (n+ ( k-1 )*m ) mod N , जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
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(11) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 30 दिनों बाद दी जाएगी।
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(12) यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 30 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।
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(13) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :
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(13.1) यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और यह आरोप यदि धारा (4) या उसके आधार पर जारी किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में सूचित कर सकते है, अथवा धारा (34.1) के अंतर्गत अपनी शिकायत मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास या मृत्युदंड का सुझाव दे सकते है।
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(13.2) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य यदि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते है तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते है। वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते है या नहीं भी दे सकते है।
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(13.3) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच होगी । यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा।
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(13.4) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना लगा सकते है। महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) जुर्माने की राशि मानी जाएगी। महाजूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(14) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
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महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :
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(14.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(14.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है। पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी। यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है।
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(14.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा है, और महाजूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते है तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते है।
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(14.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है। न्यूनतम संख्या 15 होगी और हर 1 करोड़ की राशि के लिए 1 अतिरिक्त सदस्य जोड़ा जाएगा। किन्तु जूरी का आकार 1500 से अधिक नहीं होगा।
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(15) जूरी सदस्यों का चयन :
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(15.1) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे नागरिक भी जूरी से बाहर रहेंगे। शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेगा। किसी व्यक्ति को जूरी में शामिल नहीं करने का निर्णय जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महाजूरी मंडल के बहुमत द्वारा बदला जा सकेगा।
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(15.2) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता, पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते है, जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं।
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(15.3) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक एक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया एवं जूरी ट्रायल का संचालन करेगा।
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(16) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना : सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(17) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।
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(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।
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(19) जुर्माने का निर्धारण : प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
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(20) कारावासीय दंड : ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
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(21) मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।
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(22) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
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(24) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
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(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
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(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।
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(27) जिला जूरी प्रशासक जिले की सभी तहसीलों में भी तहसील स्तर पर तहसील जूरी प्रशासको की नियुक्ति करेगा। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। तहसील जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील महाजूरी मंडलों का गठन करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
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[ टिपण्णी : यदि वादी गण को लगता है कि जिला जज ने अनुचित फैसला दिया है तो वे इस क़ानून के वोट वापसी खंड की धारा (31) का इस्तेमाल करके जिले के नागरिको से विनती कर सकते है कि नागरिक जिला जज को नौकरी से निकालने की स्वीकृति दें। या वे इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत जिले के नागरिको के समक्ष पुनर्विचार (Riview) का एक शपथपत्र भी दाखिल कर सकते है।
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(28) इसी क़ानून की धारा (04) में वर्णित मामलो या धारा (04) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना जिले के किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा। किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (34) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिले के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
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(29) जिला स्तर के अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(29.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(29.2) जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 8 वर्ष हो चुके हो या वह सहायक लोक अभियोजक ( APP = Assistance Public Prosecutor ) के रूप में 3 वर्ष तक सेवाएं दे चुका हो तो वह जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन ( ADP = Additional Director of Prosecution ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.3) जिला चिकित्सा अधिकारी : 32 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए वांछित डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.4) जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(30) धारा (29) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(31) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(31.1) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी सार्वजनिक करेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
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(31.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(31.3) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
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(31.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(32) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(32.1) जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने सहमती दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या नही भी कर सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।
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(32.2) जिला जूरी प्रशासक, मिलावट रोक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जिला सहायक निदेशक अभियोजन : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जूरी प्रशासक या सहायक निदेशक अभियोजन की नौकरी दे सकते है ।
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(32.3) जिला जज : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जिला जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है। जिला जज की नियुक्ति का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(32.4) जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन शिक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी दे सकते है।
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(32.4.1) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(32.4.2) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा जिले में - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, जिले का प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस क़ानून के लिए अभिभावक माना जायेगा।
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(32.4.3) यदि मुख्यमंत्री इस क़ानून को अन्य जिलो में भी लागू करते है तो मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृतियों से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह अधिक से अधिक 5 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(33) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(33.1) मुख्यमंत्री एवं जिले के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(33.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने गुप्त स्वीकृतियों के लिए मतदान किया है) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
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(33.3) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे। किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(33.4) राज्य के सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपनी पसंद का नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री शिक्षा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक एवं चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(34) जनता की आवाज :
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(34.1) यदि जिले का कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(34.2) यदि जिले का कोई मतदाता धारा (34.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दिया जा सकेगा, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि जिले के 51% नागरिक शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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====जिला जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया " मुख्यमंत्री कार्यालय " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “ मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित जिला जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें --- #JilaJuryCourt , #VoteVapsiPassbook "
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. "मुख्यमंत्री / प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम या सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए । वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें : " @Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #JilaJuryCourt , #VoteVapsiPassbook
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6. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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7. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (34) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 27 2020 09:53:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राज्य टी सी पी ; पारदर्शी शिकायत प्रणाली
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( State TCP ; Transparent Complaint Procedure )
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इस क़ानून का सार : भारत में शासन एवं नागरिको के बीच यदि संवाद करने की अधिकृत एवं पारदर्शी प्रक्रिया नहीं होने के कारण नागरिक अपनी मांग, सुझाव आदि पीएम या सीएम तक नहीं पहुंचा पाते, और विभिन्न अनाधिकृत एवं बेतरबीब तरीको का सहारा लेने के लिए बाध्य होते है। यह क़ानून गेजेट में आने के बाद नागरिक अधिकृत रूप से अपनी मांग सरकार एवं जनता के सामने रख सकेंगे, और मतदाता किसी भी मांग पर अपनी सहमती या सहमती दर्ज कर सकेंगे। #StateTcp , #RRP19
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यदि आप टीसीपी क़ानून चाहते है तो अपने सीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, राज्य टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #StateTcp
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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[ टिप्पणी : यह कानून ड्राफ्ट राजपत्र में छापकर मुख्यमंत्री द्वारा सीधे लागू किया जा सकता है। इसके लिए विधानसभा से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। ]
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) यह कानून आपको (यहाँ आप से आशय है – राज्य का मतदाता) को यह अधिकार देता है कि वे अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सकेंगे।
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(1.1) यह शपथपत्र आपके द्वारा प्रस्तुत कोई शिकायत, सुझाव या आरटीआई आवेदन या प्रस्तावित कानून या अन्य कोई याचनात्मक समाधान हो सकता है।
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(1.2) आप शपथपत्र जमा करते समय 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क अदा करेंगे।
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(1.3) कलेक्टर कार्यालय प्रस्तुत शपथपत्र को चिन्हित करने के लिए एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(1.4) कलेक्टर कार्यालय आपके द्वारा दिए शपथपत्र को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर इस तरह अपलोड करेगा कि कोई भी व्यक्ति यह शपथपत्र बिना लॉग-इन (Log in) के देख सके।
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(2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पर पटवारी ( तलाटी, ग्रामीण अधिकारी ) कार्यालय जाकर धारा 1 के तहत प्रस्तुत शपथपत्र के नंबर का उल्लेख करते हुए अमुक शपथपत्र पर अपनी हाँ / ना दर्ज करवा सकता है।
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(2.1) कलेक्टर कार्यालय मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को मतदाता के नाम एवं मतदाता संख्या को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से दर्ज करेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को देख सके।
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(2.2) किसी शपथपत्र पर हाँ / नहीं दर्ज करने या उसे बदलने के लिए मतदाता को शुल्क देना होगा। बीपीएल कार्ड धारकों के लिए यह शुल्क 1 रू तथा अन्य नागरिको के लिए यह 3 रू होगा।
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(2.3) मतदाता किसी शपथपत्र पर दर्ज की गयी अपनी हाँ / ना को किसी भी दिन कितनी भी बार बदल भी सकते है।
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(3) सभी के लिए महत्वपूर्ण जानकारी : किसी शपथपत्र पर दर्ज की गयी हाँ / ना की यह गिनती मुख्यमंत्री या किसी मंत्री या किसी अधिकारी या किसी अदालत पर बाध्यकारी नहीं होगी। फिर भी, यदि राज्य के 51% से अधिक मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दर्ज किये गए कार्यों की पालना के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। या मुख्यमंत्री चाहे तो अपना इस्तीफ़ा भी दे सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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(4) धारा 1 में शपथपत्र देने के लिए कलेक्टर आपसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड लाने के लिए कह सकता है, एवं आपकी फोटो और फिंगरप्रिंट भी ले सकता है। कलेक्टर आपसे शून्य से लेकर पांच गवाह तक, जो कि आपको निजी रूप से जानते हो, लाने के लिए भी कह सकता है।
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(4.1) यदि आप एक बार शपथपत्र फ़ाइल कर देते है तो फिर आप इसे हटा नहीं सकेंगे। अदालत के आदेश को छोड़कर किसी भी अधिकारी को आपका शपथपत्र हटाने की अनुमति नहीं होगी।
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(4.2) आपको सूचित किया जाता है कि - शपथपत्र में अनुचित जानकारी या मानहानि कारक, या निन्दात्मक कथन के लिए आप पर किसी भी पक्षकार द्वारा अदालत में वाद दायर किया जा सकता है, और दोष सिद्ध होने पर अदालत आपको सजा दे सकती है।
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(5) आपको भारत भर में दर्ज सभी शपथपत्रो पर हाँ / ना दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है। ये आपकी इच्छा पर निर्भर है कि आप किस शपथपत्र पर विचार करना चाहते और किस शपथपत्र को नकारना चाहते है। जिस भी शपथपत्र पर आप हाँ / ना दर्ज करना चाहते है, उन पर अपनी राय दर्ज करवा सकते है। किसी भी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करने पर आपको कोई भी सजा नहीं होगी, तब भी जबकि अमुक शपथपत्र में कोई अनुचित या निन्दात्मक कथन है।
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(6) आप अपना मोबाइल नंबर मतदाता सूची का रखरखाव करने वाले क्लर्क को दर्ज करवा सकते है। अमुक फ़ोन नंबर आपके नाम पर या आपके नजदीकी पारिवारिक सदस्य के नाम पर होना चाहिए। यदि आप अपना मोबाईल नंबर दर्ज करवाते है तो जब भी आप कोई शपथपत्र फ़ाइल करेंगे या किसी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करेंगे तो आपको फीडबैक के लिए एक SMS प्राप्त होगा। यह SMS उसी तरह का होगा जैसा ATM आदि से नकदी निकालने पर खाताधारक को प्राप्त होता है। और यदि कोई अन्य व्यक्ति छल द्वारा आपके नाम पर शपथपत्र फ़ाइल करने का प्रयास कर रहा है या आपके नाम से हाँ / ना दर्ज करवा रहा है, तब भी आपको ऐसा SMS प्राप्त होगा। इस स्थिति में आप पुलिस में शिकायत कर सकते है।
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(7) आपको वोटर कार्ड जैसा एक मैगनेटिक कार्ड (एटीएम कार्ड के समान) भी दिया जा सकता है, और तलाटी कार्यालय के पास एटीएम जैसी मशीन भी लगवायी जा सकती है, ताकि आप मशीन में किसी शपथपत्र का नंबर डाल कर उस पर अपनी हाँ / ना दर्ज कर सके। उपलब्ध होने पर आप इस सुविधा का उपयोग कर सकते है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद प्रत्येक हाँ / ना दर्ज करने या बदलने पर आपको 1 रू शुल्क चुकाना होगा।
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(8) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे आप अपनी हाँ / ना SMS या मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज करवा सके। यदि आप किसी शपथपत्र SMS या मोबाइल एप के माध्यम से हाँ / ना दर्ज करते है तो इसके लिए शुल्क का निर्धारण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।
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भाग-II: अधिकारीयों के लिए निर्देश
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(09) नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर (National Informatics Centre) के प्रभारी सचिव को आदेश जारी किये जाते है कि वे ऐसी आवश्यक वेबसाइट आदि की रचना करे जिससे कलेक्टर, पटवारी आदि ऊपर दी गयी धाराओं में दर्ज प्रक्रिया को लागू कर सके।
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(10) मेयर, जिला / तहसील / ग्राम सरपंचों के लिए अबाध्यकारी निर्देश : आप इस कानून में वांछित बदलाव करके ( जैसे मुख्यमंत्री शब्द को मेयर आदि से बदलकर और अन्य आवश्यक परिवर्तन करके ) पारित कर सकते है, एवं नगर / जिला / तहसील / ग्राम स्तर पर यह टीसीपी क़ानून लागू कर सकते है।
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टीसीपी कानून किस तरह से काम करेगा ?
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(1) हम कलेक्टर को अपनी मांग का ज्ञापन दे सकते है, फिर टीसीपी की क्या जरूरत है ?
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जब आप ज्ञापन देते हो कलेक्टर आपकी मांग को बंद लिफाफे में रखकर पीएम को भेज देता है। आपके ज्ञापन को अख़बार ने नहीं छापा है तो आपके ज्ञापन के बारे में सिर्फ 3 लोग जानते है - जिला कलेक्टर, पीएम एवं आप। यदि आप अपने साथ 10-15 लोग साथ में लेकर गए हो तो भी इसके बारे में सिर्फ 100-50 लोगो से ज्यादा को जानकारी नहीं हो पाएगी। सीमित व्यक्तियों द्वारा रखी गयी इस तरह की व्यक्तिगत मांग में पीएम / सीएम का ध्यान आकृष्ट करने का बल नहीं होता। किन्तु टीसीपी में आपकी मांग पीएम के साथ साथ देश के करोड़ो नागरिको के सामने भी दृश्यमान रहेगी।
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शपथपत्र फ़ाइल करने के बाद आप अपनी मांग का प्रचार नागरिको में कर सकते है। अपनी मांग के पेम्पलेट बाँट सकते है, इसके बारे में व्हाट्स एप, फेसबुक, यू ट्यूब आदि सोशल मीडिया मंचो का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा नागरिको से आग्रह कर सकते है, कि वे आपकी मांग का समर्थन करें। यदि उन्हें आपकी मांग ठीक लगती है, और वे इसका समर्थन करना चाहते है तो वे इस पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकेंगे। यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक आपके शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवाते है तो आपकी मांग के समर्थको की संख्या बढती जाएगी और पीएम / सीएम पर इसे लागू करने का दबाब बनने लगेगा। इस तरह टीसीपी में यह व्यवस्था है कि यह अन्य नागरिको को किसी मांग का संगठित रूप से समर्थन करने का अवसर देता है, जो कि ज्ञापन में संभव नहीं है।
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(2) हम अपनी मांग सोशल मीडिया द्वारा भी तो सरकार तक पहुँचा सकते है, फिर टीसीपी की जरूरत क्यों ?
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सोशल मीडिया निजी कम्पनियां है, जबकि टीसीपी एक सरकारी व्यवस्था है। यदि आपकी मांग आगे बढ़ती है तो निजी कम्पनियां आपके प्रस्ताव को हटा सकती है, या इसका सर्कुलेशन रोक सकती है। जबकि टीसीपी में एक बार कोई प्रस्ताव दर्ज होने के बाद इसे न्यायालय के आदेश बिना हटाया नहीं जा सकता। इसके अलावा सोशल मीडिया में कोई भी आई टी सेल या व्यक्ति हजारों छद्म आई डी बनाकर कुछ भी लिखता रह सकता है, अत: अधिकृत नहीं होने कारण इसके कोई मायने नहीं है। पारदर्शी एवं अधिकृत प्रक्रिया होने के कारण टीसीपी विश्वसनीय है।
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(3) पेड मीडियाकर्मी एवं पेड राजनैतिक पार्टियाँ टीसीपी के समर्थन में क्यों नहीं है ?
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दरअसल , पेड मीडिया पार्टियों एवं पेड मीडिया द्वारा समर्थित नेताओं के पास सड़को पर मजमा लगाने का संख्या बल एवं संसाधन होते है। अत: ये 5-10 शहरो में कुछ हजार लोगो को इकट्ठा करके यह स्थापित कर देते है कि जनता अमुक फैसले का विरोध / समर्थन कर रही है। और फिर पेड मीडिया यह मजमा पूरे देश को दिखाकर माहौल बनाता है कि – पूरा देश अमुक विषय का विरोध / समर्थन कर रहा है !! दुसरे शब्दों में वे जनता की मंशा की व्याख्या अपनी मर्जी से कर पाते है।
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उदाहरण के लिए, भारत में 90 करोड़ मतदाता है। लेकिन पेड मीडिया रामलीला मैदान में द अन्ना के कुछ हजार लोगो को को बार बार दिखाकर यह भ्रम खड़ा कर सकते है कि पूरा देश जनलोकपाल की मांग कर रहा है !! इसी तरह वे पेड मीडिया की सहायता से अपनी मर्जी के मुद्दों पर जनसमर्थन दिखाने का गलत भ्रम खड़ा करते है !! टीसीपी जनता की राय की व्याख्या करने का अधिकार पेड मीडिया, पेड मीडिया पार्टियों एवं राजनेताओ से छीन लेता है !! वे जनमत की व्याख्या करने का अधिकार अपने पास चाहते है अत: इस कानून की खिलाफत करते है।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे - मुख्यमंत्री जी, राज्य टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #StateTcp
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , मुख्यमंत्री जी, राज्य टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #StateTcp
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7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (10) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इसकी बुकलेट अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 27 2020 09:55:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जिला स्तरीय टी सी पी ; पारदर्शी शिकायत प्रणाली
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( District TCP ; Transparent Complaint Procedure )
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इस क़ानून का सार : भारत में शासन एवं नागरिको के बीच यदि संवाद करने की अधिकृत एवं पारदर्शी प्रक्रिया नहीं होने के कारण नागरिक अपनी मांग, सुझाव आदि पीएम या सीएम तक नहीं पहुंचा पाते, और विभिन्न अनाधिकृत एवं बेतरबीब तरीको का सहारा लेने के लिए बाध्य होते है। यह क़ानून गेजेट में आने के बाद नागरिक अधिकृत रूप से अपनी मांग सरकार एवं जनता के सामने रख सकेंगे, और मतदाता किसी भी मांग पर अपनी सहमती या सहमती दर्ज कर सकेंगे। #DsitrictTcp , #RRP20
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यदि आप टीसीपी क़ानून चाहते है तो अपने सीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, राज्य टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #DistrictTcp
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---क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ-----
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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[ टिप्पणी : यह कानून ड्राफ्ट राजपत्र में छापकर मुख्यमंत्री द्वारा सीधे लागू किया जा सकता है। इसके लिए विधानसभा से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। ]
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भाग - I : नागरिकों के लिए निर्देश
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(1) यह कानून आपको (यहाँ आप से आशय है – जिले का मतदाता) को यह अधिकार देता है कि वे अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सकेंगे।
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(1.1) यह शपथपत्र आपके द्वारा प्रस्तुत कोई शिकायत, सुझाव या आरटीआई आवेदन या प्रस्तावित कानून या अन्य कोई याचनात्मक समाधान हो सकता है।
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(1.2) आप शपथपत्र जमा करते समय 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क अदा करेंगे।
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(1.3) कलेक्टर कार्यालय प्रस्तुत शपथपत्र को चिन्हित करने के लिए एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(1.4) कलेक्टर कार्यालय आपके द्वारा दिए शपथपत्र को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर इस तरह अपलोड करेगा कि कोई भी व्यक्ति यह शपथपत्र बिना लॉग-इन (Log in) के देख सके।
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(2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पर पटवारी ( तलाटी, ग्रामीण अधिकारी ) कार्यालय जाकर धारा 1 के तहत प्रस्तुत शपथपत्र के नंबर का उल्लेख करते हुए अमुक शपथपत्र पर अपनी हाँ / ना दर्ज करवा सकता है।
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(2.1) कलेक्टर कार्यालय मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को मतदाता के नाम एवं मतदाता संख्या को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से दर्ज करेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को देख सके।
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(2.2) किसी शपथपत्र पर हाँ / नहीं दर्ज करने या उसे बदलने के लिए मतदाता को शुल्क देना होगा। बीपीएल कार्ड धारकों के लिए यह शुल्क 1 रू तथा अन्य नागरिको के लिए यह 3 रू होगा।
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(2.3) मतदाता किसी शपथपत्र पर दर्ज की गयी अपनी हाँ / ना को किसी भी दिन कितनी भी बार बदल भी सकते है।
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(3) सभी के लिए महत्वपूर्ण जानकारी : किसी शपथपत्र पर दर्ज की गयी हाँ / ना की यह गिनती मुख्यमंत्री या किसी मंत्री या किसी अधिकारी या किसी अदालत पर बाध्यकारी नहीं होगी। फिर भी, यदि जिले के 51% से अधिक मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दर्ज किये गए कार्यों की पालना के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। या मुख्यमंत्री चाहे तो अपना इस्तीफ़ा भी दे सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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(4) धारा 1 में शपथपत्र देने के लिए कलेक्टर आपसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड लाने के लिए कह सकता है, एवं आपकी फोटो और फिंगरप्रिंट भी ले सकता है। कलेक्टर आपसे शून्य से लेकर पांच गवाह तक, जो कि आपको निजी रूप से जानते हो, लाने के लिए भी कह सकता है।
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(4.1) यदि आप एक बार शपथपत्र फ़ाइल कर देते है तो फिर आप इसे हटा नहीं सकेंगे। अदालत के आदेश को छोड़कर किसी भी अधिकारी को आपका शपथपत्र हटाने की अनुमति नहीं होगी।
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(4.2) आपको सूचित किया जाता है कि - शपथपत्र में अनुचित जानकारी या मानहानि कारक, या निन्दात्मक कथन के लिए आप पर किसी भी पक्षकार द्वारा अदालत में वाद दायर किया जा सकता है, और दोष सिद्ध होने पर अदालत आपको सजा दे सकती है।
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(5) आपको भारत भर में दर्ज सभी शपथपत्रो पर हाँ / ना दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है। ये आपकी इच्छा पर निर्भर है कि आप किस शपथपत्र पर विचार करना चाहते और किस शपथपत्र को नकारना चाहते है। जिस भी शपथपत्र पर आप हाँ / ना दर्ज करना चाहते है, उन पर अपनी राय दर्ज करवा सकते है। किसी भी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करने पर आपको कोई भी सजा नहीं होगी, तब भी जबकि अमुक शपथपत्र में कोई अनुचित या निन्दात्मक कथन है।
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(6) आप अपना मोबाइल नंबर मतदाता सूची का रखरखाव करने वाले क्लर्क को दर्ज करवा सकते है। अमुक फ़ोन नंबर आपके नाम पर या आपके नजदीकी पारिवारिक सदस्य के नाम पर होना चाहिए। यदि आप अपना मोबाईल नंबर दर्ज करवाते है तो जब भी आप कोई शपथपत्र फ़ाइल करेंगे या किसी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करेंगे तो आपको फीडबैक के लिए एक SMS प्राप्त होगा। यह SMS उसी तरह का होगा जैसा ATM आदि से नकदी निकालने पर खाताधारक को प्राप्त होता है। और यदि कोई अन्य व्यक्ति छल द्वारा आपके नाम पर शपथपत्र फ़ाइल करने का प्रयास कर रहा है या आपके नाम से हाँ / ना दर्ज करवा रहा है, तब भी आपको ऐसा SMS प्राप्त होगा। इस स्थिति में आप पुलिस में शिकायत कर सकते है।
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(7) आपको वोटर कार्ड जैसा एक मैगनेटिक कार्ड (एटीएम कार्ड के समान) भी दिया जा सकता है, और तलाटी कार्यालय के पास एटीएम जैसी मशीन भी लगवायी जा सकती है, ताकि आप मशीन में किसी शपथपत्र का नंबर डाल कर उस पर अपनी हाँ / ना दर्ज कर सके। उपलब्ध होने पर आप इस सुविधा का उपयोग कर सकते है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद प्रत्येक हाँ / ना दर्ज करने या बदलने पर आपको 1 रू शुल्क चुकाना होगा।
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(8) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे आप अपनी हाँ / ना SMS या मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज करवा सके। यदि आप किसी शपथपत्र SMS या मोबाइल एप के माध्यम से हाँ / ना दर्ज करते है तो इसके लिए शुल्क का निर्धारण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।
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भाग-II: अधिकारीयों के लिए निर्देश
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(09) नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर (National Informatics Centre) के प्रभारी सचिव को आदेश जारी किये जाते है कि वे ऐसी आवश्यक वेबसाइट आदि की रचना करे जिससे कलेक्टर, पटवारी आदि ऊपर दी गयी धाराओं में दर्ज प्रक्रिया को लागू कर सके।
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(10) मेयर, जिला / तहसील / ग्राम सरपंचों के लिए अबाध्यकारी निर्देश : आप इस कानून में वांछित बदलाव करके ( जैसे मुख्यमंत्री शब्द को मेयर आदि से बदलकर और अन्य आवश्यक परिवर्तन करके ) पारित कर सकते है, एवं नगर / जिला / तहसील / ग्राम स्तर पर यह टीसीपी क़ानून लागू कर सकते है।
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टीसीपी कानून किस तरह से काम करेगा ?
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(1) हम कलेक्टर को अपनी मांग का ज्ञापन दे सकते है, फिर टीसीपी की क्या जरूरत है ?
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जब आप ज्ञापन देते हो कलेक्टर आपकी मांग को बंद लिफाफे में रखकर पीएम को भेज देता है। आपके ज्ञापन को अख़बार ने नहीं छापा है तो आपके ज्ञापन के बारे में सिर्फ 3 लोग जानते है - जिला कलेक्टर, पीएम एवं आप। यदि आप अपने साथ 10-15 लोग साथ में लेकर गए हो तो भी इसके बारे में सिर्फ 100-50 लोगो से ज्यादा को जानकारी नहीं हो पाएगी। सीमित व्यक्तियों द्वारा रखी गयी इस तरह की व्यक्तिगत मांग में पीएम / सीएम का ध्यान आकृष्ट करने का बल नहीं होता। किन्तु टीसीपी में आपकी मांग पीएम के साथ साथ देश के करोड़ो नागरिको के सामने भी दृश्यमान रहेगी।
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शपथपत्र फ़ाइल करने के बाद आप अपनी मांग का प्रचार नागरिको में कर सकते है। अपनी मांग के पेम्पलेट बाँट सकते है, इसके बारे में व्हाट्स एप, फेसबुक, यू ट्यूब आदि सोशल मीडिया मंचो का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा नागरिको से आग्रह कर सकते है, कि वे आपकी मांग का समर्थन करें। यदि उन्हें आपकी मांग ठीक लगती है, और वे इसका समर्थन करना चाहते है तो वे इस पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकेंगे। यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक आपके शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवाते है तो आपकी मांग के समर्थको की संख्या बढती जाएगी और पीएम / सीएम पर इसे लागू करने का दबाब बनने लगेगा। इस तरह टीसीपी में यह व्यवस्था है कि यह अन्य नागरिको को किसी मांग का संगठित रूप से समर्थन करने का अवसर देता है, जो कि ज्ञापन में संभव नहीं है।
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(2) हम अपनी मांग सोशल मीडिया द्वारा भी तो सरकार तक पहुँचा सकते है, फिर टीसीपी की जरूरत क्यों ?
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सोशल मीडिया निजी कम्पनियां है, जबकि टीसीपी एक सरकारी व्यवस्था है। यदि आपकी मांग आगे बढ़ती है तो निजी कम्पनियां आपके प्रस्ताव को हटा सकती है, या इसका सर्कुलेशन रोक सकती है। जबकि टीसीपी में एक बार कोई प्रस्ताव दर्ज होने के बाद इसे न्यायालय के आदेश बिना हटाया नहीं जा सकता। इसके अलावा सोशल मीडिया में कोई भी आई टी सेल या व्यक्ति हजारों छद्म आई डी बनाकर कुछ भी लिखता रह सकता है, अत: अधिकृत नहीं होने कारण इसके कोई मायने नहीं है। पारदर्शी एवं अधिकृत प्रक्रिया होने के कारण टीसीपी विश्वसनीय है।
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(3) पेड मीडियाकर्मी एवं पेड राजनैतिक पार्टियाँ टीसीपी के समर्थन में क्यों नहीं है ?
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दरअसल , पेड मीडिया पार्टियों एवं पेड मीडिया द्वारा समर्थित नेताओं के पास सड़को पर मजमा लगाने का संख्या बल एवं संसाधन होते है। अत: ये 5-10 शहरो में कुछ हजार लोगो को इकट्ठा करके यह स्थापित कर देते है कि जनता अमुक फैसले का विरोध / समर्थन कर रही है। और फिर पेड मीडिया यह मजमा पूरे देश को दिखाकर माहौल बनाता है कि – पूरा देश अमुक विषय का विरोध / समर्थन कर रहा है !! दुसरे शब्दों में वे जनता की मंशा की व्याख्या अपनी मर्जी से कर पाते है।
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उदाहरण के लिए, भारत में 90 करोड़ मतदाता है। लेकिन पेड मीडिया रामलीला मैदान में द अन्ना के कुछ हजार लोगो को को बार बार दिखाकर यह भ्रम खड़ा कर सकते है कि पूरा देश जनलोकपाल की मांग कर रहा है !! इसी तरह वे पेड मीडिया की सहायता से अपनी मर्जी के मुद्दों पर जनसमर्थन दिखाने का गलत भ्रम खड़ा करते है !! टीसीपी जनता की राय की व्याख्या करने का अधिकार पेड मीडिया, पेड मीडिया पार्टियों एवं राजनेताओ से छीन लेता है !! वे जनमत की व्याख्या करने का अधिकार अपने पास चाहते है अत: इस कानून की खिलाफत करते है।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे - मुख्यमंत्री जी, जिला टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #DistrictTcp
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , मुख्यमंत्री जी, जिला टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #DistrictTcp
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7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (10) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इसकी बुकलेट अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 27 2020 18:26:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

वोट वापसी सरपंच के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Vote Vapsi over Sarpanch
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RSS समर्थित हरियाणा सरकार राईट टू रिकॉल सरपंच नामक क़ानून ला रही है। दुःख का विषय है कि हरियाणा सरकार ने अभी तक (2 सितम्बर 2020) क़ानून का ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया से जो विवरण सामने आये है उससे मालूम होता है कि यह एक बैठक या हस्ताक्षर आधारित नकारात्मक (Negative) राईट टू रिकॉल क़ानून है।
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सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण जब रिकॉल होगा तो सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी, और सरपंच की कुर्सी तब तक खाली रहेगी जब तक अगला चुनाव नहीं होता !! हमारे विचार में, मतदाताओं के पास सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तावित यह क़ानून आने से अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे प्रशासन और भी बदतर हो जाएगा।
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निचे राईट टू रिकॉल पार्टी (RRP – Right to Recall Party) द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच का एक सकारात्मक क़ानून ड्राफ्ट दिया गया है। हमारे द्वारा प्रस्तावित क़ानून वोट वापसी पासबुक पर आधारित है, और इसमें सरपंच तब तक निष्काषित नहीं किया जाएगा जब तक मतदाताओ का बहुमत किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच के रूप में चुन न ले। इस तरह RRP द्वारा प्रस्तावित क़ानून प्रशासन में अस्थिरता नहीं लाएगा, बल्कि सुधार लाएगा।
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वोट वापसी सरपंच नामक क़ानून RRP द्वारा प्रस्तावित किया गया है, जबकि राईट टू रिकॉल सरपंच नामक क़ानून RSS की हरियाणा सरकार द्वारा लाया जा रहा है। इन दोनों कानूनों का तुलनात्मक विवरण देखने के लिए इस पोस्ट का पहला कमेन्ट देखें।
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#SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRrpRtrSarpanch , #Rrp28
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[ पंचायतो का प्रशासन बेहतर बनाने के लिए हमने “जूरी पंचायत” नामक क़ानून भी प्रस्तावित किया है। कृपया जूरी पंचायत क़ानून भी पढ़ें। यदि जूरी पंचायत गेजेट में आता है तो इस क़ानून की जरूरत नहीं रह जाएगी। क्योंकि जूरी पंचायत क़ानून में भी सरपंच को वोट वापसी पासबुक के दायरे में किया गया है।]
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे : मुख्यमंत्री जी, वोट वापसी सरपंच क़ानून गेजेट में छापें - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRrpRtrSarpanch
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----क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ----
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश।
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टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। ग्राम पंचायत का मुखिया यानी सरपंच इस पासबुक के दायरे में आएगा।
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तब यदि आप सरपंच के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी दिन स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम राज्य की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (8.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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(03) सरपंच के प्रत्याशी द्वारा आवेदन : यदि पंचायत का कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो सरपंच का चुनाव ख़त्म होने के बाद वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार सरपंच के लिए तय जमानत राशि के बराबर शुल्क लेकर लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा।
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(3.1) आवेदन जमा होने के बाद यदि प्रत्याशी किसी समय अपना आवेदन वापिस ले लेता है तो यह शुल्क लौटाया नहीं जाएगा।
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(3.2) तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा और प्रत्याशी को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(04) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(4.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी सार्वजनिक करेगा। मतदाता अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृती दे सकता है।
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(4.2) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रु होगी। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा।
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(4.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। SMS / APP द्वारा स्वीकृति रद्द करने पर भी कोई शुल्क नहीं देना होगा।
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(4.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त सभी प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को (-)100 से (+)100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(05) सरपंच के वोट वापसी चुनाव की शर्तें :
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यदि सरपंच पद के किसी प्रत्याशी को इतनी स्वीकृतियां मिल जाती है जो कि :
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(5.1) वर्तमान सरपंच को प्राप्त स्वीकृतियों से अधिक हो , तथा
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(5.2a) यह स्वीकृतियां वर्तमान सरपंच को पिछले चुनावो में प्राप्त होने वाले मतो से अधिक हो तथा यह आधिक्य उस पंचायत क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 10% के बराबर हो।
अथवा
(5.2b) यह स्वीकृतियॉं अमुक पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 51% से अधिक हो।
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यदि उपरोक्त शर्त पूरी हो जाती है तो मुख्यमंत्री वोट वापसी चुनाव कराने के आदेश जारी करेंगे।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये किसी पंचायत में कुल 5000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 1500 वोट प्राप्त हुए थे तो वोट वापसी चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 1500+500=2000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। क्योंकि यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 1500 में जोड़ा गया है। यदि किसी प्रत्याशी को 2000 से अधिक स्वीकृतियां मिलती है, तो वोट वापसी चुनाव होगा। किन्तु यदि किसी भी प्रत्याशी को 2000 से अधिक स्वीकृतियां नही मिलती है तो चुनाव नहीं होगा।
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(06) वोट वापसी चुनाव की प्रक्रिया :
यदि धारा (5) में बतायी गयी शर्त पूरी हो जाती है, तो वोट वापसी चुनाव आयोजित किये जायेंगे। वोट वापसी चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(6.1) मतपत्र पर कुल 11 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर पदासीन (वर्तमान) सरपंच का नाम रहेगा। शेष 10 प्रत्याशी (+NOTA) वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 10 प्रत्याशीयों को मतपत्र पर वरीयता क्रम में रखा जाएगा। जिसे ज्यादा स्वीकृतियां मिली है उसका नाम मतपत्र पर क्रमिक रूप से ऊपर एवं जिसे कम स्वीकृतियां मिली है, उसका नाम निचे रहेगा। एक बार वोट वापसी चुनावो की घोषणा होने के बाद प्रत्याशी अपना नाम वापस नहीं ले सकेगा।
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(6.2) यदि वोट वापसी चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी दो में से कोई एक शर्त पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(6.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है) के 51% वोट प्राप्त हो जाते है। अथवा
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(6.2.2a) यदि किसी प्रत्याशी को सबसे अधिक वोट प्राप्त होते है, एवं
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(6.2.2b) यदि किसी प्रत्याशी को वर्तमान सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक वोट प्राप्त होते है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण 1 : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 1500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 1500+500=2,000 वोट लाने होंगे। क्योंकि यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 1500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि वोट वापसी चुनाव में कोई प्रत्याशी 1800 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को वोट वापसी चुनाव में 1400 वोट मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा। (धारा 6.1)
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स्पष्टीकरण 2 : मान लीजिये कि किसी पंचायत में 5000 हजार मतदाता है, और मौजूदा सरपंच को पिछले चुनाव में 3500 वोट प्राप्त हुए थे। किन्तु परिक्षण चुनाव में यदि किसी प्रत्याशी को 2600 वोट प्राप्त होते है और मौजूदा सरपंच को 2400 हजार वोट मिलते है तो मौजूदा सरपंच निष्काषित हो जाएगा। क्योंकि (6.2.1) में दी गयी 51% से अधिक मत प्राप्त करने की शर्त पूरी हो चुकी है।
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(07) सरपंच के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(7.1) जब भी जिले में कोई भी पंचायत चुनाव होगा तो इन चुनावों के साथ सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखी जायेगी, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच को जारी रखना चाहते है या नहीं। मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि जब भी सांसद या विधायक का चुनाव हो तो भी वे सरपंच के लिए भी एक अलग से पेटी मतदान कक्ष में रखने दें।
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(7.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (6.2) में वोट वापसी चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 11 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 10 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। जीत हार का समीकरण फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा वोट वापसी चुनाव में बताया गया है।
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(08) जनता की आवाज :
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(8.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(8.2) यदि कोई मतदाता धारा (8.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 8.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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----ड्राफ्ट का समापन---
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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(1) कृपया “मुख्यमंत्री कार्यालय” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच क़ानून गेजेट में छापे - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRrpRtrSarpanch
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(2) ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र, लिफाफा आदि भी भेज सकते है।
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(3) प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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(4) आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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(4.1) यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने मंh भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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(4.2) शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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(4.3) आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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(5) यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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(6) यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRrpRtrSarpanch
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(7) Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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(8) अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (08) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 27 2020 18:38:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित सभी क़ानून ड्राफ्ट्स के हेश टेग, फेसबुक लिंक एवं पीडीऍफ़ लिंक की सूची (Updated Version)
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(01) धनवापसी पासबुक
(02) रिक्त भूमि कर
(03) जूरी कोर्ट
(04) राज्य जूरी कोर्ट
(05) जिला जूरी कोर्ट
(06) वोइक
(07) वोट वापसी दूरदर्शन अध्यक्ष
(08) वोट वापसी केन्द्रीय मंत्री
(09) वोट वापसी राज्यमंत्री
(10) हिन्दू बोर्ड
(11) गौ नीति
(12) जूरी पंचायत
(13) टू चाइल्ड लॉ
(14) NRCI
(15) गन लॉ इण्डिया
(16) स्टेट गन लॉ
(17) डिस्ट्रिक्ट गन लॉ
(18) टीसीपी इण्डिया
(19) स्टेट टीसीपी
(20) डिस्ट्रिक्ट टीसीपी
(21) वोट वापसी सांसद
(22) रेडो
(23) रेगो
(24) वोट वापसी सीएम
(25) वोट वापसी पीएम
(26) इतिहास पुनरीक्षण
(27) आरक्षण समायोजन
(28) राईट टू रिकॉल सरपंच
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पाठको के लिए निर्देश :
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(i) इस सूची में कुल 28 क़ानून ड्राफ्ट्स है। जो 3 क़ानून ‘हमारे विचार में’ सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है उन्हें वरीय क्रम से शीर्ष 3 में रखा गया है। प्राथमिक 3 कानूनों के बाद वरीय क्रम का पालन नहीं किया गया है।
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(ii) इस सूची में सभी क़ानून ड्राफ्ट्स के पीडीऍफ़ डाउनलोड करने के लिंक दिए गए है। लिंक ओपन करने के लिए कृपया बीच का स्पेस हटाकर ब्राउजर में सर्च करें। प्रत्येक क़ानून का पीडीऍफ़ का लिंक क्लिक करने पर आपको 2 पीडीऍफ़ फाइल्स मिलेगी। एक फाइल कम्प्यूटर पर पढ़ने एवं पेम्पलेट छपवाने के लिए है, एवं दूसरी फाइल मोबाइल पर पढने के लिए है।
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(iii) बेहतर फोर्मेट में पढ़ने के लिए कृपया पेम्पलेट वर्जन का पीडीऍफ़ देखें।
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(iv) प्रत्येक क़ानून का फेसबुक लिंक भी दिया गया है। लिंक पर जाने के लिए कृपया बीच का स्पेस हटा दें।
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(v) इस पोस्ट का लिंक मेरे फेसबुक कवर पिक्चर एवं फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर के डिस्क्रिप्शन में रखा गया है। आप मेरे फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर को क्लिक करके इस पोस्ट के लिंक पर जा सकते है।
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(vi) पाठको से आग्रह है कि अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर “Law drafts I asked Pm to print” नाम से एक एल्बम बनाये और इस सूची में दिए गए कानूनों में से जिन कानूनों का आप समर्थन करते है, उनके क़ानून ड्राफ्ट्स इस एल्बम में रखें और इसी तरह की सूची बनाकर अपने सूची पोस्ट का लिंक अपनी प्रोफाइल पिक के डिस्क्रिप्शन में रखें।
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(vii) प्रत्येक क़ानून ड्राफ्ट्स के अंत में क़ानून के प्रचार एवं प्रधानमंत्री से मांग करने का तरीका भी दिया गया है ।
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(01) #Rrp01 , #DhanVapsiPassbook , #धनवापसी_पासबुक
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विवरण : भारत में देशी तथा विदेशी धनिक बड़े पैमाने पर खनिजो को लूट रहे है। यह क़ानून खनिजो की इस लूट को रोक देगा। इस कानून के लागू होने के बाद सभी खदानों+सरकारी जमीनों को सिर्फ लीज / किराए पर दिया जा सकेगा और इन्हें हमेशा के लिए बेचा नहीं जा सकेगा।
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साथ ही भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज एवं सरकारी भूमि देश के नागरिको की संपत्ति घोषित हो जाएगी। तब देश के समस्त खनिज +स्पेक्ट्रम +सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी एवं किराया ‘135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता’ नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इस राशि का 65% हिस्सा सभी भारतीयों में बराबर बांटा जाएगा और 35% हिस्सा सेना के खाते में जाएगा।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD01
(b) tinyurl. com/DhanVapsiPassbook
(c) www.Rtr .Party/DhanVapsiPassbook
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facebook .com/pawan.jury/posts/2212549868863237
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टिप्पणी : यह राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित सबसे महत्त्वपूर्ण क़ानून है।
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(02) #Rrp02 , #EmptyLandTax , #रिक्त_भूमि_कर
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विवरण : यह क़ानून अकार्यशील एवं अनुपयोगी जमीन पर कर लगाता है। इस क़ानून के गेजेट में छपने के बाद जीएसटी रद्द हो जाएगा। जिन नागरिको के पास एक निश्चित सीमा से अधिक भूमि है उन्हें वर्ष में एक बार जमीन के कीमत पर 1% की दर से रिक्त भूमि कर चुकाना होगा।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD02
(b) tinyurl .com/EmptyLandTax
(c) www.Rtr .Party/EmptyLandTax
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facebook .com/pawan.jury/posts/2391504844301071
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टिप्पणी : यह दुसरे नंबर का सबसे महत्त्वपूर्ण क़ानून है। इस क़ानून को बेहतर ढंग से समझने के लिए कृपया इसे पीडीऍफ़ वर्जन में ही पढ़ें। (पीडीऍफ़ फाइल में कुल पृष्ठ 32)
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(03) #Rrp03 , #JuryCourt , #जूरी_कोर्ट
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यह कानून अदालतों, थानों , स्कूलों, अस्पतालों, बैंक, मीडिया, अन्य केन्द्रीय, राज्य एवं जिला स्तरीय सरकारी विभागों का भ्रष्टाचार दूर करेगा। यह कानून प्रधानमन्त्री द्वारा लागू किया जायेगा। यदि प्रधानमंत्री यह क़ानून गेजेट में छाप देते है तो स्टेट जूरी कोर्ट, जिला जूरी कोर्ट, रेडो, एवं रेगो क़ानून को लागू करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। क्योंकि इन चारो कानूनों की सभी धाराएं जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून में शामिल है।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD03
(b) tinyurl. com/JuryCourt
(c) www.Rtr .Party/JuryCourt
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facebook. com/pawan.jury/posts/2297657633685793
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(04) #Rrp04 , #StateJuryCourt , #राज्य_जूरी_कोर्ट
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इस कानून से राज्य स्तर पर थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों एवं अन्य सरकारी विभागों के भ्रष्टाचार में कमी आयेगी। यह कानून मुख्यमंत्री राज्य में लागू कर सकते है।
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पीडीऍफ़ –
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(c) tinyurl .com/RrpD04
(b) tinyurl. com/StateJuryCourt
(c) www.Rtr .Party/StateJuryCourt
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facebook .com/pawan.jury/posts/2298624793589077
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(05) #Rrp05 , #JilaJuryCourt , #जिला_जूरी_कोर्ट
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यह कानून जिला स्तर पर लागू होगा और इससे जिले के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों के भ्रष्टाचार में गिरावट आएगी।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD05
(b) tinyurl. com/JilaJuryCourt
(c) www.Rtr .Party/JilaJuryCourt
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facebook .com/pawan.jury/posts/3173085952809619
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(06) #Rrp06 , #Woic , #वोइक
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यह कानून भारत के संवेदनशील क्षेत्रो में विदेशी निवेश (FDI) पर निर्बन्धन लगाकर सिर्फ ‘सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कंपनियों’ को कारोबार करने की अनुमति देता है, तथा भारत में भारतीयों द्वारा स्वदेशी हथियारों के उत्पादन (Made in India Made by Indians) के लिए आवश्यक शासन की रचना करता है।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD06
(b) tinyurl. com/WoicRrp
(c) www.Rtr .Party/Woic
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facebook .com/pawan.jury/posts/3088232837961598
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(07) #Rrp07 , #VvpDdChairman #वोट_वापसी_दूरदर्शन_अध्यक्ष
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यह कानून मीडिया को सुधारने के लिए लिखा गया है। इस कानून के आने से सभी प्राइवेट और सरकारी सार्वजनिक प्रसारणों में अश्लीलता, फूहड़ता, नग्नता एवं फेक न्यूज आदि में कमी आएगी। ( यह क़ानून अभी लिखा जाना है )
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD07
(b) tinyurl. com/VvpDdChairman
(c) www.Rtr .Party/ VvpDdChairman
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(08) #Rrp08 , #VvpCentralMinister , #वोट_वापसी_केन्द्रीय_मंत्री
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इस कानून के आने से भारत के नागरिक प्रधानमन्त्री को यह सुझाव दे सकेंगे कि वे किस सांसद को किसी विभाग का केन्द्रीय मंत्री बनाना चाहते है एवं किस मंत्री को नौकरी से निकालना चाहते है। यदि वोट वापसी प्रधानमंत्री का क़ानून गेजेट में आ जाता है तो इस क़ानून को लागू करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। क्योंकि इस क़ानून की सभी धाराएं वोट वापसी प्रधानमंत्री क़ानून में शामिल है ।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD08
(b) tinyurl .com/VvpCentralMinister
(c) www.Rtr .Party/ VvpCentralMinister
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facebook .com/pawan.jury/posts/3066182976833251
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(09) #Rrp09 , #VvpStateMinister , #वोट_वापसी_राज्य_मंत्री
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इस कानून के आने से भारत के नागरिक मुख्यमन्त्री को यह सुझाव दे सकेंगे कि वे किस विधायक को किसी विभाग का राज्य मंत्री बनाना चाहते है एवं किस मंत्री को नौकरी से निकालना चाहते है। यदि वोट वापसी मुख्यमंत्री का क़ानून गेजेट में आ जाता है तो इस क़ानून को लागू करने की जरूरत नहीं रह जाएगी।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD09
(b) tinyurl .com/VvpStateMinister
(c) www.Rtr .Party/ VvpStateMinister
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facebook .com/pawan.jury/posts/3066184993499716
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(10) #Rrp10 , #HinduBoard , #हिन्दू_बोर्ड
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यह कानून हिन्दू धर्म के प्रशासन को बेहतर बनाने एवं धर्मान्तरण को रोकने के लिए लिखा गया है। यह क़ानून पिछले 1000 वर्षो से जारी हिन्दू धर्म के सिकुड़ने की प्रक्रिया को रोक देगा।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD10
(b) tinyurl. com/HinduBoard
(c) www.Rtr .Party/HinduBoard
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facebook .com/pawan.jury/posts/2241776019273955
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(11) #Rrp11 , #GauNiti , #गौ_नीति
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इस कानून के गेजेट में आने से गौ हत्या रूक जाएगी और देशी नस्ल के गौ वंश का सरंक्षण होगा।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD11
(b) tinyurl. com/GauNiti
(c) www.Rtr .Party/GauNiti
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facebook .com/pawan.jury/posts/2343503319101224
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(12) #Rrp12 , #JuryPanchayat , #जूरी_पंचायत
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यह कानून पंचायत एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारेगा। इस कानून में ऐसी प्रक्रियाएं है जो स्थानीय / ग्रामीण प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में कमी लाएगी। इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD12
(b) tinyurl .com/JuryPanchayat
(c) www.Rtr .Party/JuryPanchayat
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facebook .com/pawan.jury/posts/2347698935348329
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(13) #Rrp13 , #TwoChildPolicy , #टू_चाइल्ड_पॉलिसी
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जनसँख्या नियंत्रण का यह प्रस्तावित कानून दो से अधिक संतान रखने वाले नागरिको पर कुछ निर्बन्धन लगाता है। परन्तु जिन अभिभावकों के 1 या 2 या 3 पुत्रियाँ है किन्तु कोई भी पुत्र नहीं है, उन्हें कुछ अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी मिलेंगे, एवं उन्हें किसी आर्थिक दंड का सामना भी नहीं करना होगा। इस कानून से लड़का-लड़की का लिंगानुपात (Sex Ratio) नहीं बिगड़ेगा
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD13
(b) tinyurl .com/TwoChildPolicy
(c) www.Rtr .Party/TwoChildPolicy
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facebook .com/photo. php?fbid=2682632228521663&set=a. 1450971748354390&type=3
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(14) #Rrp14 , #Nrci , #एनआरसी_इण्डिया
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इस कानून में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register for Citizens of india) बनाने की प्रक्रिया है। यह कानून अवैध आर्थिक विदेशीयों (illegal economic migrant) को चिन्हित करके उन्हें भारत से निष्कासित करेगा और प्रताड़ित शर्णार्थियो (Persecuted refugee) को शरण देगा।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD14
(b) tinyurl .com/NrcIndia
(c) www.Rtr .Party/NrcIndia
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facebook .com/pawan.jury/posts/2694929377291948
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(15) #Rrp15 , #GunLaw , #गन_लॉ_इंडिया
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प्रधानमंत्री यह कानून सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में भारत के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता यह कानून लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह कानून प्रत्येक भारतीय को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 कारतूस रखना अनिवार्य होगा। जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD15
(b)tinyurl. com/GunLawIndia
(c) www.Rtr .Party/GunLawIndia
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facebook .com/pawan.jury/posts/2790516097733275
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(16) #Rrp16 , #StateGunLaw , #स्टेट_गन_लॉ
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जनमत संग्रह में अपने राज्य के 55% नागरिको की सहमती लेकर मुख्यमंत्री यह कानून लागू कर सकते है। जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह कानून अमुक राज्य के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD16
(b) tinyurl .com/StateGunLaw
(c) www.Rtr .Party/StateGunLaw
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facebook .com/pawan.jury/posts/3173038446147703
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(17) #Rrp17 , #DistrictGunLaw , #डिस्ट्रिक्ट_गन_लॉ
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जनमत संग्रह में किसी जिले के 55% नागरिको की स्पष्ट सहमती लेने के बाद मुख्यमंत्री यह कानून अमुक जिले में लागू कर सकते है। यह कानून अमुक जिले के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD17
(b) tinyurl .com/DistrictGunLaw
(c) www.Rtr .Party/DistrictGunLaw
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facebook .com/pawan.jury/posts/3173049442813270
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(18) #Rrp18 , #TcpIndia , #टीसीपी_इंडिया
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यह कानून गेजेट में आने के बाद भारत के नागरिक अधिकृत रूप से अपनी मांग सरकार एवं जनता के सामने पारदर्शी ढंग से रख सकेंगे, और मतदाता किसी भी मांग / सुझाव / प्रस्ताव पर अपनी सहमती या असहमती दर्ज करवा सकेंगे। यह कानून प्रधानमंत्री द्वारा पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpTcp
(b) tinyurl .com/NationalTcp
(c) www.Rtr .Party/ NationalTcp
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facebook .com/pawan.jury/posts/2785178204933731
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(19) #Rrp19 , #StateTcp , #स्टेट_टीसीपी
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यह कानून किसी राज्य के मतदाता को यह अधिकार देता है कि वे अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सके, तथा दर्ज किये गए किसी भी शपथपत्र पर अपनी स्वीकृति दर्ज कर सके।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD19
(b) tinyurl .com/StateTcp
(c) www.Rtr .Party/StateTcp
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Facebook .com/pawan.jury/posts/3173090739475807
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(20) #Rrp20 , #DistrictTcp , #डिस्ट्रिक्ट_टीसीपी
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मुख्यमंत्री यह कानून किसी जिले में लागू कर सकते है। तब अमुक जिले का कोई भी नागरिक अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सकेगा, तथा दर्ज किये गए किसी भी शपथपत्र पर अपनी स्वीकृति दर्ज कर सकेगा।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD20
(b) tinyurl .com/DistrictTcp
(c) www.Rtr .Party/DistrictTcp
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Facebook .com/pawan.jury/posts/3173094346142113
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(21) #Rrp21 , #VvpMp , #वोट_वापसी_सांसद
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इस कानून के आने के बाद यदि आप अपने विधायक / सांसद के काम काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निष्काषित करके किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD21
(b) tinyurl. com/VvpMp
(c) www.Rtr .Party/VvpMp
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facebook .com/pawan.jury/posts/2542090435909177
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(22) #Rrp22 , #Redo , #रेडो
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यह कानून सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों, थानों, अदालतों की दशा सुधारने एवं मिलावट की समस्या कम करने के लिए लिखा गया है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप कर अपने राज्य में लागू कर सकते है। यदि रेगो, राज्य जूरी कोर्ट या जूरी कोर्ट गेजेट में आ जाता है तो इस क़ानून की जरूरत नहीं रह जाएगी ।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD22
(b) tinyurl .com/RedoPdf
(c) www.Rtr .Party/Redo
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facebook. com/pawan.jury/posts/2339863452798544
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(23) #Rrp23 , #Rego , #रेगो
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यह कानून स्कूलो-अस्पतालो-थानों-अदालतों-बैंक, मीडिया, राज्य एवं केन्द्रीय सरकारी विभागों का काम काज सुधारेगा। प्रधानमंत्री द्वारा गेजेट में प्रकाशित होने के बाद यह पूरे देश में लागू होगा। यदि जूरी कोर्ट गेजेट में आ जाता है तो इस क़ानून की जरूरत नहीं रह जायेगी।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD23
(b) tinyurl .com/RegoPdf
(c) www.Rtr .Party/Rego
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facebook .com/pawan.jury/posts/2340635649387991
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(24) #Rrp24 #VvpCm , #वोट_वापसी_सीएम
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इस कानून के आने के बाद राज्य के नागरिक विधायको को यह सुझाव दे सकेंगे कि क्या वे पदासीन मुख्यमंत्री को पद पर बनाए रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना चाहते है।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD24
(b) tinyurl. com/VvpCm
(c) www.Rtr .Party/VvpCm
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facebook .com/pawan.jury/posts/2980176852100531
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(25) #Rrp25 #VvpPm , #वोट_वापसी_पीएम
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यह कानून के आने के बाद देश के नागरिक सांसदों को यह सुझाव दे सकेंगे कि क्या वे पदासीन प्रधानमंत्री को पद पर बनाए रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाना चाहते है।
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(a) tinyurl .com/RrpD25
(b) tinyurl. com/VvpPm
(c) www.Rtr .Party/VvpPm
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facebook .com/pawan.jury/posts/2867848606666690
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(26) #Rrp26 , #HistoryRevised , #इतिहास_पुनरीक्षण
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यह कानून इतिहास की पुस्तकों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करेगा, ताकि पाठयपुस्तको में सही एवं प्रमाणिक इतिहास लिखा जा सके।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD26
(b) tinyurl. com/HistoryRevised
(c) www.Rtr .Party/HistoryRevised
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facebook .com/pawan.jury/posts/3165761576875390
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(27) #Rrp27 , #ReservationModified , #आरक्षण_समायोजन
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यह क़ानून दलितों की सहमती से आरक्षण का पुनर्संयोजित करता है।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD27
(b) tinyurl .com/ReservationModified
(c) www.Rtr .Party/ReservationModified
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facebook .com/pawan.jury/posts/3147315058720042
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(28) #Rrp28 , #RrpVvpSarpanch , #RrpRtrSarpanch
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इस कानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने की प्रक्रिया दी गयी है। इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। यदि जूरी पंचायत गेजेट में आता है तो इस क़ानून की जरूरत नहीं रह जाएगी। क्योंकि जूरी पंचायत क़ानून में भी सरपंच को वोट वापसी पासबुक के दायरे में किया गया है।
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पीडीऍफ़ –
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(a) tinyurl .com/RrpD28
(b) tinyurl. com/VvpSarpanch
(c) www.Rtr .Party/VvpSarpanch
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facebook .com/pawan.jury/posts/3174296922688522
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सभी कानूनों के पीडीऍफ़ इस लिंक से डाउनलोड कर सकते है :
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tinyurl .com/RrpAllDrafts
www.Rtr .Party/Drafts
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राईट टू रिकॉल पार्टी का पूरा घोषणा पत्र यहाँ से डाउनलोड करें –
www.Rtr .Party/manifesto
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 27 2020 21:41:13 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हरियाणा सरकार राईट टू रिकॉल के नाम पर नागरिको के साथ छल कर सकती है !!
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हम रिकालिस्ट्स पिछले 20 सालों से सरकार से राईट टू रिकॉल का क़ानून लागू करने के लिए कह रहे है। हमने इसका ड्राफ्ट लिखकर सरकारों को हजारों बार सैकड़ो तरीको से भेजा है, राईट टू रिकॉल ड्राफ्ट्स के लाखों पर्चे नागरिको में बाँटें है, और राइट टू रिकॉल के क़ानून ड्राफ्ट्स पर चुनाव लड़े है।
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2 दशको के निरंतर प्रयासों से सरकार पर दबाव बना और अब वे नागरिको को भ्रमित करने के लिए एक छद्म राईट टू रिकॉल लाने का मंसूबा बना रहे है !!
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मिडिया रिपोर्ट्स से यह जानकारी मिल रही है कि सरकार विधानसभा में जो ड्राफ्ट रखने वाली है, उसमें उन्होंने "राईट टू रिकॉल सरपंच" के ड्राफ्ट में वोट वापसी पासबुक एवं स्वीकृति दर्ज करने के सिस्टम को शामिल नहीं किया है !!
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मतलब हरियाणा सरकार जो राईट टू रिकॉल क़ानून लागू कर रही है, उसके लागू होने के बाद भी न तो हरियाणा के प्रत्येक मतदाता को वोट वापसी पासबुक मिलेगी, और न ही मतदाता पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दर्ज / रद्द करवा सकेंगे !!
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साफ़ नजर आ रहा है कि, हरियाणा सरकार की मंशा ठीक नहीं है। वे नागरिको को बुत्ता देने के लिए राईट टू रिकॉल सरपंच का ऐसा ड्राफ्ट लागू करने की कोशिश कर रहे है जिससे नागरिको में यह धारणा खड़ी की जा सके कि :
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(a) राईट टू रिकॉल अस्थिरता लाता है
(b) राईट टू रिकॉल से प्रशासन में कोई अच्छे बदलाव नहीं आते।
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अभी तक हरियाणा सरकार ने अपना ड्राफ्ट पब्लिक नहीं किया है। किन्तु मीडिया रिपोर्ट्स कहती है कि :
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(1) उनके ड्राफ्ट में वोट वापसी पासबुक नहीं है। इसकी जगह वे मतदाताओं के हस्ताक्षर लेने टाइप की किसी प्रणाली पर विचार कर रहे है।
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सरकार के पास मतदाताओ के हस्ताक्षर का कोई डेटा नहीं होता है, और गाँवो में कई लोग हस्ताक्षर करना जानते भी नहीं है। अत: न तो कभी हस्ताक्षर इकट्ठे होंगे, न इन्हें कभी सत्यापित किया जा सकेगा, और न ही कभी सरपंच का रिकॉल प्रोसीजर काम करेगा !!
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(2) वे रिकॉल पोल की सीमा भी नीची रख सकते है, ताकि उस सरपंच को भी रिकॉल का सामना करना पड़े जिसे किसी समय पंचायत में दर्ज कुल मतदाताओं के 51% मतदाताओं का समर्थन हासिल है।
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(3) उनके राईट टू रिकॉल ड्राफ्ट में मतदाता को यह सुविधा नहीं रहेगी कि मतदाता किस भी दिन प्रत्याशी को अपनी स्वीकृति दे सके या किसी भी दिन अपनी स्वीकृति रद्द कर सके।
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<https://timesofindia.indiatimes.com/city/chandigarh/right-to-recall-bill-to-be-brought-in-legislative-assembly-haryana-deputy-cm/articleshow/77744757.cms>;
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राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सरपंच के ड्राफ्ट में प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी, और नागरिक किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेगा। मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, मोबाइल एप या ATM द्वारा भी दर्ज करवा सकेंगे। किन्तु हरियाणा सरकार ने अपने ड्राफ्ट में जानबूझकर इन प्रावधानों को शामिल नहीं किया है, ताकि ड्राफ्ट को कमजोर करके राईट टू रिकॉल प्रणाली को नागरिको में बदनाम किया जा सके !!
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राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी पासबुक वाला क़ानून ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3174296922688522>;
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सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि, वे हरियाणा के मुख्यमंत्री एवं पंचायती राज मंत्री को ट्विट करें कि 'वोट वापसी पासबुक' वाले राईट टू रिकॉल सरपंच का क़ानून लागू करें।
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साथ ही आने वाली 5 तारीख को हरियाणा के नागरिक #EndLockdownTotally के साथ साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री को एक अतिरिक्त पोस्टकार्ड राइट टू रिकॉल सरपंच के लिए भी भेजें। वोट वापसी पासबुक वाले राईट टू रिकॉल सरपंच के ड्राफ्ट के लिए इस हेश का इस्तेमाल करें - #RrpRtrSarpanch
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 31 2020 17:27:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Simple Economics : रुपया चलाने की ताक़त हथियारों से आती है, प्रिंटिंग प्रेस से नही !! (अमेरिका —>हथियार —> डॉलर)
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रॉथ्स्चायल्ड पूरी दुनिया में बैंक इसीलिए चला पा रहा है, क्योंकि उसके पास हथियार निर्माण करने वाली कम्पनियों की होल्डिंग है। इसमें कोई मायाजाल नही है। एकदम सीधी बात है। और सीधी बातों को समझना कभी भी सीधा नही होता ।

Kushagra Yadav Salonup:

शत्रुघ्न सिन्हा (रूपा भैया) = अमेरिका
100 रूपा = डॉलर
होटल मालिक = दुनिया के कमजोर देश (जिनमे भारत भी शामिल है)

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