> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-08-11

Pawan Jury BhilwaraRj

भारत ने कुछ हथियारों की आयात पर रोक लगाई है, इससे क्या फायदा-नुकसान होगा?
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(1) पेड इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा लगाईं गई जुलाई, 2018 की खबर बताती है कि, लॉकहिड मार्टिन भारत में बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमान बनाने का कारखाना लगाने वाली है। यदि लॉकहीड 2018 में कारखाना लगाती तो कारखाने में लॉकहीड मार्टिन का स्वामित्व नहीं हो सकता था।
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क्योंकि तब रक्षा उत्पादन में विदेशी निवेश की सीमा 49% ही थी !! और स्वामित्व के लिए आपके पास 51% स्टेक होना चाहिए। किन्तु अभी पिछले महीने ही मोदी साहेब ने रक्षा उत्पादन में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 74% कर दी है !!
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<https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/make-in-india-boost-lockheed-martin-ready-to-manufacture-f-16-jets-in-india/articleshow/51037000.cms?from=mdr&fbclid=IwAR0nULiHMSB3FU5_gj2b_e4OXplqyBo1u8wgSoHHRbORHqhbcj5HwDaiVSo>;
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खबर कहती है कि लॉकहीड मार्टिन यहाँ पर गारंटीड मार्किट के साथ आएगी। मतलब वह भारत से यह अनुबंध करेगी कि भारत को उससे इतने उतने विमान खरीदने होंगे !!
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"The making of F-16, which will be among the largest projects under the Make in India initiative, will be conditional to the Indian government making contractual commitment to buy the fighter jets for its armed forces, said the source."
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(2) इससे क्या अंतर आएगा ?
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(2.1) अभी भारत फ़्रांस, रशिया आदि से विभिन्न विमान लेता रहा है,। चूंकि अब लॉकहीड मार्टिन भारत में फाइटर प्लेन बनाएगी और भारत ने लड़ाकू विमान के आयात पर रोक लगा दी है, अत: भारत को सिर्फ F-16 ही लेने होंगे !! इस तरह अब भारत विमान खरीदने को लेकर भारत के विकल्प बेहद सिकुड़ जायेंगे और नेगोशिएशन पॉवर भी घटेगी !!
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(2.2) और ये सभी प्लेन हमें EUMA (End Use Monitoring Agreement) के साथ मिलेंगे, और अमेरिकी कम्पनियों का EUMA काफी कठोर होता है, और आप अमेरिकियों से पूछे बिना ये F-16 हिला भी नहीं सकेंगे !!
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(2.3) लॉकहीड जितना भी मुनाफा बनाएगी उसके बदले में हमें डॉलर चुकाने होंगे !!
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(2.4) लॉकहीड सिर्फ प्लेन ही नहीं बनाती, बल्कि कई तरह के हथियार बनाती है। अब से भारत ये सभी हथियार लॉकहीड मार्टिन से लेगा !!
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और इसी तरह लॉकहीड मार्टिन की तरह कई सारी विदेशी कम्पनियां विभिन्न अनुबंधों के साथ गारंटीड मार्किट के साथ भारत आएगी। ये कम्पनियां लगातार भारत के पीएम पर विदेशी निवेश में सीमा बढ़वाने के लिये दबाव बना रही थी। और क्योंकि वे हथियारों के कारखानों में किसी को साझेदार नहीं बनाना चाहते। तो पहले उन्होंने रक्षा में ऍफ़डीआई की सीमा बढ़वाई और उसके बाद यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत उनके द्वारा बनाया गया माल ही खरीदेगा, उन्होंने आयात पर रोक लगवाई !!
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(3) भारत अपने 70% हथियार आयात करता है। और जो 30% हथियार हम बनाते है वे भी कमतर है, और उनके जटिल पुर्जे भी हम विदेशियों से आयात करते है। और हम ये आयात इसीलिए करते है क्योंकि हमारे पास इन्हें बनाने की तकनीक नहीं है। और तकनीक इसीलिए नहीं है क्योंकि हमारे पास हथियारों का उत्पादन करने वाले कारखानों की विशाल श्रुंखला नहीं है। विशाल श्रुंखला न होने की 2 वजहें है :
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(3.1) 1990 तक भारत में परमिट राज था। हथियारों के निर्माण में न तो निजी कम्पनियों को मुक्त रूप से उत्पादन करने की छूट थी, और न ही विदेशी कम्पनियों को। किन्तु WTO समझौते के बाद जब लाइसेंस राज ख़त्म किया गया तो हथियारों के निर्माण में लाइसेंस सिस्टम को कायम रखा गया और राष्ट्रिय सुरक्षा का विषय होने के कारण हथियारों के उत्पादन में विदेशी निवेश पर भी प्रतिबन्ध जारी रहा।
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(3.2) जमीन की ऊँची कीमतें और पुलिस-नेताओं-जजों का भ्रष्टाचार होने के कारण भारत में किसी क्षेत्र में तकनिकी उत्पादन का आधार नहीं है, और इस वजह से हम तकनीक के क्षेत्र में स्वदेशी इकाइयां खड़ी नहीं कर पाए।
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जो 30% हथियार हम बना रहे है उसमें से ज्यादातर हिस्सा सरकारी कम्पनियों द्वारा बनाया जाता है, निजी क्षेत्र द्वारा नहीं। यदि हमें स्वदेशी हथियार बनाने है तो हमें लाइसेंस राज ख़त्म करने, जज-पुलिस-नेताओं का भ्रष्टाचार एवं जमीन की कीमतें कम करने की जरूरत है । और सबसे महत्वपूर्ण हमें हथियारों के निर्माण में विदेशी निवेश पर पूर्णतया रोक लगानी होगी।
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यदि हम हथियार निर्माण में विदेशी निवेश को पूरी तरह से नहीं रोकते है तो अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कंपनियां सही-गलत तरीको का इस्तेमाल करके स्वदेशी इकाइयों को ख़त्म करवा देंगे, और पूरे बाजार पर उनका कब्ज़ा हो जाएगा।
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(4) पर मोदी साहेब ने ठीक इसके उलट किया :
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(4.1) उन्होंने पिछले 6 साल में उन कानूनों को गेजेट में छापने से इनकार किया जिससे भारत Made in India & Made by Indians नीति पर चलते हुए स्वदेशी हथियारों के निर्माण की तकनीक जुटा सके।
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(4.2) उन्होंने हथियारों के क्षेत्र में लाइसेंस राज कायम रखा।
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(4.3) उन्होंने नेताओं-पुलिस-जजों का भ्रष्टाचार एवं जमीन की कीमतें कम करने के लिए कोई क़ानून नहीं छापा।
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(4.5) और इसके बाद अब उन्होंने हथियारों निर्माण में विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाकर 74% किया ताकि विदेशी भारत में हथियार निर्माण के कारखाने लगा सके।
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(4.6) और अब चूंकि भारत को उन कम्पनियों से ही हथियार लेने है जो यहाँ आकर कारखाने लगाने वाले है, अत: उन्होंने पेड मीडिया का इस्तेमाल करके आयात पर रोक लगाने के फैसले को स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में क्रन्तिकारी कदम के रूप में प्रस्तुत किया।
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और जैसा कि पेड मीडिया के प्रायोजक हमेशा करते है, यहाँ भी वे गलत लेबल का इस्तेमाल करके नागरिको को भ्रमित कर रहे है। और उनका गलत लेबल है – स्वदेशी / आत्मनिर्भरता !!
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(6) भारत में काफी पहले से Made in India स्लोगन का इस्तेमाल होता आया है, और नागरिक इस लेबल का मतलब भारत में भारतीय कम्पनियों द्वारा बनी चीज से लगाते है। लगभग 5 वर्ष पहले से उन्होंने एक नए लेबल Make in India का इस्तेमाल एवं इसका प्रचार करना शुरू किया।
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यह साफ़ नजर आ रहा था कि वे स्वदेशी का नया अर्थ गढ़ रहे है, और जल्दी ही प्रक्रिया की अवहेलना करके सिर्फ स्वदेशी नामक लेबल का अनुसरण करने वाले ज्यादातर कार्यकर्ता इस नये स्वदेशी = Make in India द्वारा भ्रमित कर दिए जायेंगे।
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(6.1) असल में Make in India वह योजना है जिसमें - विदेशी भारत में आकर कारखाने लगायेंगे !! ठीक वैसे ही जैसे ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत में आकर बंदूक बनाने की फैक्ट्रियां खोली थी, (और भारतीयों की बंदूक फैक्ट्रियो को या तो बंद करवा दिया था या उनका अधिग्रहण कर लिया था)
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(6.2) जबकि Made in India का अर्थ है – भारत में भारतीय कंपनियों द्वारा भारतीय तकनीक का इस्तेमाल करके भारतीयों द्वारा बनी वस्तुएं (Made in India & Made by Indians)
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यह उसी तरह की बात है जब हम फेसबुक को स्वदेशी कहने लगे क्योंकि फेसबुक ने अपने कुछ सर्वर भारत में लगाए है, या हम कोका कोला को स्वदेशी मानने लगे क्योंकि उसने अपना प्लांट भारत में लगा रखा है !! और इस तरह अब से मेक्डोनाल्ड भी स्वदेशी है और हम बर्गर बनाने में आत्मनिर्भर हो गए है, क्योंकि मेक डी हेमबर्गर भारतीय रेस्टोरेंट में बना रहा है, अमेरिका से आयात नहीं कर रहा है !! और इस तरह सभी कुछ विदेशी न होकर अब स्वदेशी हो गया है !!
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और अब जब लॉकहिड मार्टिन भारत में f-16 “असेम्बल” करेगा तो यह स्वदेशी होगा !! और साथ ही हम फाइटर प्लेन बनाने में आत्मनिर्भर हो जायेंगे !!
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यह एक बेहतरीन शोर्ट कट है – जहाँ आप सिर्फ लेबल बदलकर चीजो को स्वदेशी बना देते है !! और पेड मीडिया नागरिको को यह विश्वास भी दिला देता है कि हथियारों के आयात पर रोक लगाकर सरकार स्वदेशी हथियारो को बढ़ावा भी दे रही है !!
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बहरहाल, अब जब विदेशी कम्पनियां सीधे भारत में आकर हथियार बनाएगी तो हमें सभी तरह से गंभीर नुकसान होने वाला है। क्योंकि लॉकहीड मार्टिन या बोईंग जैसे कम्पनियां कोक या पेप्सी नहीं है !! जल्दी ही ये कम्पनियां भारत पर राजनैतिक-सामरिक नियंत्रण बना लेगी और भारत के हथियार निर्माण के बचे खुचे कारखानों (वे सरकारी / निजी कारखाने जो 30% सामान बनाते है) को निगल जायेगी !!
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हथियार कम्पनियों को भारत में कारखाने लगाने की अनुमति देना एंटी नेशनल स्टेप है !! और हमें इसका खामियाजा हमेशा के लिए भुगतना पड़ेगा।
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