Pawan Jury BhilwaraRj
(1) यदि पीएम से मेरी कोई मांग है तो मुझे किससे कहना चाहिए ?
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पीएम से !!
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यदि आपके पास पीएम के लिए कोई सुझाव या कोई शिकायत है तो आपको कम से कम पीएम से तो "कहना" ही चाहिए। यदि आप पीएम से कोई मांग कर रहे है और पीएम से ही नहीं "कह" रहे है तो मेरे विचार में आप दूरी तय करने की जगह गोल गोल घूम रहे है।
यह उसी तरह की बात है कि यदि बिजली की लाइन में फाल्ट आ जाए तो हम बिजली बोर्ड की जगह पूरे मुहल्ले में बिजली चले जाने के बारे में बताते फिरे।
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इसी तरह यदि आप लॉकडाउन हटाना चाहते है तो आपको पीएम से "कहना" चाहिए, क्योंकि लॉकडाउन का आदेश पीएम /सीएम ने दिया है, राम नारायण अजमेरा ने नहीं।
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(2) कहने का तरीका क्या होना चाहिए ?
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इस बारे में आप खुद फैसला करें की आप किस तरीके से पीएम तक अपनी बात पहुंचा सकते है। जो भी तरीका आपको ठीक लगता है उस तरीके से आप पीएम / सीएम को कह सकते है। आप किस तरीके से पीएम को "कहते" है या द्वितीयक विषय है, प्राथमिक विषय यह है कि -- आप कम से कम पीएम से कहें तो सही !!
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(3) मैं पीएम तक अपनी बात पहुँचाने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल करता हूँ ?
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हमें ऐसे तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए जिसमे ज्यादा से ज्यादा नागरिक पीएम को सन्देश भेज सके। क्योंकि पीएम किस मांग पर विचार करेंगे यह सिर्फ इस पर निर्भर करता है कि कितने "मतदाताओ" ने उनसे यह मांग की है !!
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पीएम को के लिए हमारे पास दो तरह के विकल्प उपलब्ध है :
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(3.1) ऑनलाइन तरीके : मैं इसके लिए सोशल मीडिया के सभी तरीको जैसे मेल, फेसबुक, कोरा, यू ट्यूब, इन्स्टाग्राम आदि को तरजीह नहीं देता। ये सभी मंच नागरिको से संवाद करने के लिए है, पीएम से संवाद करने के लिए नहीं।
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हालांकि, ट्विटर का इस्तेमाल किया जा सकता है, किन्तु यदि ट्विटर किसी दिन मेरा कोई ट्विट डिलीट कर देता है, या मेरी आई डी ही उड़ा देता है, तो मेरे द्वारा भेजे गए ट्विट-अभिलेख आदि व्यर्थ हो जायेंगे। इसीलिए ट्विटर को भी मैं विश्वसनीय विकल्प नहीं मानता। ट्विटर एवं सहायक विकल्प हो सकता है, मुख्य नहीं !!
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(3.2) ऑफलाइन तरीके :
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(3.2.1) पीएम / सीएम से रूबरू मुलाकात करना : पीएम से मिलना काफी जटिल प्रक्रिया है, और समय, खर्च एवं दूरी जैसी समस्याओ के कारण भारत के ज्यादातर नागरिक इस तरीके का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
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(3.2.2) जुलुस, धरना , प्रदर्शन : इन सभी तरीको में मजमा लगाना होता है, और ध्यान आकर्षित करने के लिए एक झुण्ड की आवश्यकता होती है। एक साधारण नागरिक के पास न तो इतना समय होता है, और न ही इतनी ऊर्जा। इस तरह के जमाव के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति की भी जरूरत होती है।
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इसके अलावा विधि विरुद्ध जमाव, अनाधिकृत संख्या आदि के कारण हिंसा होने की सम्भावना भी होती है। इन तरीको का इस्तेमाल नागरिको का ध्यान आकृष्ट करने के लिए तो किया जा सकता है, किन्तु पीएम तक सन्देश भेजने के लिए मेरे विचार में यह सही तरीका नहीं है।
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(3.2.3) पत्र : यह सबसे निरापद, सबसे सस्ता, सबसे आसान तरीका है। यह तरीका अधिकृत भी है, और इसका रिकॉर्ड भी रखा जा सकता है। पत्र भेजने वाला भी इसका रिकॉर्ड रख सकता है, और प्रधानमन्त्री कार्यालय तो खैर प्राप्त होने वाले सभी पत्रों का रिकॉर्ड रखता ही है।
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पत्र भेजने के कई तरीके हो सकते है -- आप लिफाफा भेज सकते है, अंतर्देशीय पत्र भेज सकते है, बुक पोस्ट भेज सकते है, रजिस्ट्री करवा सकते है, या पोस्टकार्ड भी भेज सकते है।
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मैं पोस्टकार्ड एवं बुक पोस्ट को ज्यादा बेहतर तरीका मानता हूँ। वजह यह है कि ये दोनों प्रपत्र "खुले" होते है। खुले होने के कारण कोई भी नागरिक यह देख सकता है, कि मैंने पीएम को क्या लिखकर भेजा है।
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पोस्टकार्ड बुकपोस्ट से ज्यादा सस्ता एवं ज्यादा सहजता से उपलब्ध है। देश के किसी भी गाँव / कस्बे में रहने वाला व्यक्ति स्थानीय पोस्ट ऑफिस जाकर सिर्फ 50 पैसे में पोस्टकार्ड खरीद कर पीएम / सीएम को भेज सकता है।
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तो इसीलिए मैं पोस्टकार्ड का इस्तेमाल करता हूँ, और पीएम को भेजे गए पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी रिकॉर्ड के लिए "My Letters to Pm" नाम से बनाए गए रजिस्टर में रख लेता हूँ।
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(4) सार :
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(4.1) यदि आपकी पीएम / सीएम से कोई मांग ही नहीं है तो इस झंझट में अपना सिर न खपाए कि पीएम / सीएम को "कहने" का क्या तरीका होना चाहिए !! इससे आपकी ऊर्जा बचेगी और आप अन्य उत्पादक कार्य में अपनी ऊर्जा खर्च कर सकेंगे।
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(4.2) यदि आप पीएम / सीएम से कुछ मांग कर रहे है सिर्फ तब ही आपको इस विषय पर विचार करना चाहिए कि पीएम / सीएम को "कहने" का तरीका क्या होना चाहिए।
(4.3) और फिर आपको जो भी तरीका सूट करता हो आप उसका इस्तेमाल कर सकते है। और यदि आप चाहते है कि अन्य लोग भी अमुक तरीके का इस्तेमाल करें तो आपको उस तरीके का चुनाव करना चाहिए जिस तरीके का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा नागरिक या एक साधारण नागरिक कर सके।
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क्योंकि बकौल इकबाल -
जम्हूरियत इक तर्जे हूकूमत है कि जिसमें,
बन्दों को गिना करते है, तौला नहीं करते !!
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जम्हूरियत : लोकतंत्र, डेमोक्रेसी
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