Pawan Jury BhilwaraRj
Fri Sep 01 2017 17:49:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:
Fri Sep 01 2017 17:49:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
🤔🤔🤔
Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:
Sun Sep 03 2017 15:09:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
नोटबंदी ; हद तो यह है कि मोदी साहेब के धुर विरोधी भी इस मुग़ालते में है कि, नोटबंदी एक "ग़लती" थी !!! बहुत कम व्यक्ति इस बात को समझ पाए है कि यह ग़लती "नही" थी । शीर्ष "राष्ट्रवादी" नेताओं ने नोटबंदी से लगभग 100,000 करोड़ ( अक्षरे एक लाख करोड़ ) रुपया कमाया !!!
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और पैड मीडिया को इस जादूगरी का श्रेय जाता है कि वे मोदी साहेब के कट्टर विरोधी व्यक्तियों को भी यह समझाने में कामयाब रहे कि नोटबंदी एक "ग़लती" थी !!!
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राष्ट्रवादियों ने कमाए गए इन रुपयों का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में सेकुलर पार्टियों को हराने और रिपब्लिक इत्यादि टीवी चेनल शुरू करवाने जैसे राष्ट्र हित के कामों में किया !!
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और नोटबंदी के दौरान करोड़ों नागरिकों द्वारा सही गयी पीड़ा को देश के प्रति उनका समर्पण और राष्ट्रवाद कह कर बताया गया !!!
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Mon Sep 04 2017 06:29:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:
डेरा सच्चा सौदा का टूटना हिन्दू धर्म की बड़ी क्षति हे । डेरे के अनुयायी जो डेरे पर आश्रित थे उनको अब ईसाई मिशनरियां ट्रेस करने लग गई है । डेरे के जो मरीज पहले अपने केंसर का इलाज निशुल्क डेरे से करवाते थे वो अब ईसाई मिशनरियों के पास चले जायेंगे या अगर वो नही भी गए तो मिशनरियां अपने मकड़ जाल में फंसा ही लेगी । इसी तरीके से डेरे के वो सब दलितों (डेरे के ज्यादातर अनुयायी पंजाब, हरियाणा के दलित है) को ईसाई मिशनरियां ईसाई बना देगी ।
<http://epaper.jagran.com/mpaper/02-sep-2017-169-edition-ambala-Page-3.html#>
मेरा यह कहने का मकशद यह नही है कि दोषी का बचाव या गुरमीत सिंह के प्रति श्रद्धा हो लेकिन इस खेल का असली मकसद यही था कि किसी तरह डेरा टूट जाये तो ईसाई मिश्नरियोँ को आसानी हो जाये क्योकि राम रहीम गुरमीत सिंह वो सब काम कर रहा था जिससे ईसाई मिशनरियों को आपत्ति थी जैसे मरीजो को निशुल्क दवाइयां बाटना, स्कुल चलाना, हॉस्पिटल चलाना, गरीब लोगो को आर्थिक मदद करना । ये वो सब काम हे जो धर्म को मजबूत बनाते है । और धर्म को मजबूत करने वाला जैसे गुरमीत सिंह, आशाराम जी बापू, रामपाल जी महाराज, स्वामी शंकराचार्य जी....आदि इस ईसाई मिशनरियों के निशाने पर रहते है । इन पर जूठे केस लगवाकर कर जजो को घुस खिला कर अपने रास्ते से हटाने में लगी हुई है और हम इनके द्वारा संचालित मिडिया के द्वारा दी गई सूचनाओं पर गालिया दे कर अपने ही पांव कुल्हाड़ी मार रहे है ।
समाधान :-
1 धर्म को मजबूत करने के लिए SGPC की तर्ज पर हिन्दू देवालय बनवाना
2 राईट टू रिकॉल जज
3 पब्लिक में नार्को टेस्ट
4 टीसीपी आदि के कानून पास करवाना ।
इन ये कानून कैसे पास होंगे व् इनकी अधिक् जानकारी के लिए नीचे दिए गए इस लिंक पर जाये ।
<https://web.facebook.com/notes/559862727506236>
Mon Sep 04 2017 18:24:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
दिल्ली एनसीआर में 500 रोहिंग्ये ( बर्मा के बंगलादेशी घुसपेठीये ) रह रहे है !!!
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हरियाणा के फरीदाबाद ( एनसीआर ) में 50 रोहिंग्यो एवं स्थानीय भारतीयों के बीच मारपीट हुयी !!! इन घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने के आदेश देने की जगह संघ के नेता खट्टर व मोदी साहेब ने पुलिस अधिकारी को स्थानीय नागरिको पर कार्यवाही करने के लिए कहा !!!
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<http://indianexpress.com/article/india/rohingyas-attacked-near-delhi-over-eid-slaughter-4825803/>
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तो यदि आप रोहिंग्ये एवं बांग्लादेशी घुसपेठियो को भारत से बाहर खदेड़ने की जगह उनके हाथो भारतीय नागरिको को पिटवाना चाहते है तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल का समर्थन करे। और यदि आप इन्हें भारत से खदेड़ना चाहते है तो इसके लिए आवश्यक कानूनों को लागू करवाने का प्रयास करे।
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Mon Sep 04 2017 19:53:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
मंत्रिमंडल में फेरबदल -- यह मोदी साहेब की प्रदर्शनी है। उनकी जैसी मर्जी हो वे उसे मंत्री बना सकते है। मंत्री अच्छा काम करे या बुरा , श्रेय मोदी साहेब को ही जाएगा। पर इस विस्तार में दो मंत्री काफी दिलचस्प है - निर्मला सीतारमन और आर के सिंह !
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निर्मला सीतारमण - इन्होने स्नातक जे एन यू से और वो भी अर्थशास्त्र विभाग से किया है !! विज्ञान एवं गणित विषयों को छोड़ते हुए जे एन यू के लोग भारत में सबसे ऊँचे दर्जे के राष्ट्र द्रोही है !!! और देश में झूठे फलसफे गढ़ने में जे एन यू का अर्थशास्त्र विभाग तीसरा स्थान रखता है। पहला स्थान स्टीफन और दूसरा आई आई एम का है। मतलब आप जे एन यू के अर्थशास्त्र विभाग से ऐसी कोई भी उम्मीद नहीं कर सकते जिसका सरोकार देश हित से हो।
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दूसरी विडंबना यह है कि इनके पति भी जे एन यू से ही है, और कसर पूरी करने के लिए उन्होंने अर्थशास्त्र की उच्च शिक्षा "लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स" से हासिल की। उन्होंने वहां से पीएचडी किया है !! और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स मिथ गढ़ने और झूठ फैलाने में पूरी दुनिया की सर्वोच्च संस्था है !!! और भी निखार लाने के लिए फिर उन्होंने कोंग्रेस ज्वाइन की। मतलब वे कोंग्रेस के नेता भी रहे है !! बहुत पहले की बात है जब निर्मला सीतारमण कोंग्रेस ज्वाइन करने को ही थी लेकिन उनके परिवार के कुछ प्रबुद्ध वरिष्ठ जनो ने उन्हें सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखने की सलाह दी। क्योंकि तब उनके पति कोंग्रेस में थे अत: अन्डो को अलग अलग टोकरियों में रखने के लिए उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली !!!
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एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा अलग अलग पार्टिया ज्वाइन करना आम बात है, परन्तु पति-पत्नी का ही अलग अलग पार्टियाँ ज्वाइन कर लेने की घटना दुर्लभ होती है।
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इस तरह से निर्मला ने संघ=बीजेपी ज्वाइन की और उनके पति कोंग्रेस में रहे। और 2006 में उनके पति ने प्रजा राज्यम पार्टी ज्वाइन कर ली !!! प्रजा राज्यम पार्टी एक 100% फ्रोड पार्टी थी जिसने एक सुपर फ्रोड नेता चिरंजीवी को रचा और इस पार्टी की स्थापना कोंग्रेस ने सिर्फ इसीलिए की थी ताकि कोंग्रेस से टूट कर बीजेपी / तेदेपा में जाने वाले वोटो को प्रजा राज्यम पार्टी में खींचा जा सके। इस तरह चिरिन्जिवी एक वोट कटुआ और प्रजा राज्यम पार्टी एक वोट कटुआ पार्टी थी। और भी रोचक बात यह है कि आगे चलकर प्रजा राज्यम पार्टी का फिर से कोंग्रेस में विलय हो गया !!! आजकल सीताराम जी किस पार्टी में है, मुझे पता नहीं !! और पता करने का कोई औचित्य भी नहीं है।
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तीसरी विडंबना यह है कि -- निर्मला जी ने बीबीसी में काम किया है !!! मैं इस बात पर शर्त लगा सकता हूँ कि जिसमे भारत के प्रति थोड़ा भी सम्मान एवं अपनत्व बचा है वह बीबीसी में एक सप्ताह से ज्यादा नहीं टिक सकेगा !! बीबीसी ऐसे लोगो से भरा हुआ है जो बुरी तरह से "गोरो की श्रेष्ठता" की अवधारणा में विश्वाश करते है !!! कोई ऐसी संस्था में सिर्फ तब ही काम कर सकता है जब वह इस बात पर विश्वास करता हो कि गोरो के पास "काले और भूरे" लोगो पर शासन करने का स्वाभाविक अधिकार है !!!
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उपरोक्त तीन विडंबनाओ के सिवाय वे हर तरीके से रक्षा मंत्री बनने के काबिल है -- सच्ची !!
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राजकुमार सिंह - इक्का दुक्का ख़ामियो को छोड़ते हुए इस आदमी के पास भी मंत्री बनने की पूरी काबलियत है। एक तो ये साहब कोंग्रेस के शासन में गृह सचिव थे !! फिर इन्होने फरमाया कि, भगवा आतंक एक बढ़ता हुआ खतरा है !!! और फिर इन्होने बताया कि संघ बम धमाके करवाने की गतिविधियों में शामिल रहा है !!! हालांकि इस बात की अवहेलना की जा सकती है कि 1990 में आडवाणी को गिरफ्तार भी इसी आदमी ने किया था, क्योंकि उस समय वे जिला कलेक्टर थे अत: उन्हें पीएम / सीएम के आदेशो का पालन करना था।
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किन्तु भगवा आतंक के किस्से गढ़ना और इसका जिम्मेदार संघ को ठहरा देना अपने आप में यह दर्शाता है कि ये झूठ गढ़ने और कपट करने में कितने माहिर है। मुझे नहीं पता कि क्या चल रहा है , किन्तु इस बात की कतई अवहेलना नहीं की जा सकती कि इस आदमी ने भगवा आतंक की थ्योरी चलायी और संघ को आतंकी गतिविधियों में लिप्त बताया !!!
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बहरहाल, जो भी है , यह मोदी साहेब का विशेषाधिकार है कि वे किन्हें मंत्री बनाते है और किसे नहीं। हमें उनके इस फैसले में ज्यादा दखल नहीं करना चाहिए।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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Wed Sep 06 2017 08:21:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
केरल में संघ के मंत्री ने कहा है कि -- बीफ का उपभोग जारी रहेगा !! ऐसा उन्होंने सूचित करने के लिए नहीं कहा है। बल्कि उनका आशय यह है कि संघ=बीजेपी केरल में बीफ पर पाबंदी के लिए कोई कदम नहीं उठाएगी।
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<http://www.hindustantimes.com/india-news/beef-will-continue-to-be-consumed-in-kerala-alphons-kannanthanam/story-86x7rwqzivZy4xbOc8fLQO.html>
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और यहाँ बीफ से आशय गौ मांस है -- क्योंकि भैंस का मांस कभी भी राजनैतिक मुद्दा नहीं रहा। ये साहेब पहले सीपीएम में थे और 2006 में सीपीएम के समर्थन से ही विधायक बने थे। 2011 में ये संघ में आ गए !!!
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1960-1970 के बीच संघ ने पूरे देश में गौ हत्या प्रतिबंध की मांग उठायी थी। और आन्दोलन इतना तीव्र हुआ कि संघ के नेता देश के हजारो साधुओ को इस मुद्दे पर संसद घेराव करने के लिए तैयार करने में सफल हो गए थे। गफलत की वजह से इनकी तम्बीह नहीं की जा सकी और ये साधू लगभग संसद के दरवाजो तक पहुँच गए। पुलिस को अंतिम समय पर गोली चलानी पड़ी और 100 साधुओ को जान से हाथ धोना पड़ा !!!
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और आज संघ का कहना है -- हम गौ हत्या पर देश व्यापी प्रतिबन्ध का विरोध करते है !!!
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मेरे विचार में जो कार्यकर्ता गौ हत्या पर प्रतिबन्ध लगाना चाहते है उन्हें संघ=बीजेपी / कोंग्रेस / आम आदमी पार्टी से उम्मीद छोड़ देनी चाहिए और इसके लिए आवश्यक कानूनों के प्रचार पर बल देना चाहिए।
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Wed Sep 06 2017 20:06:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कृपया राम रहीम जी के बारे में यह वीडियो देखें :
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1. कथित आरोप 1998 में लगाए गए
2. ऍफ़ आई आर 2002 में दर्ज की गयी !!!
3. 2005 में पीडिता ने बयान दिया कि हमारे साथ कोई बलात्कार नहीं हुआ !!
4. CBI ने दोनों पीडिताओ के बयान 2006 में दर्ज किये, और इनमे यह कहा गया कि बलात्कार किया गया था !!!.
5. राम रहीम जी के वकील को दोनों पीडिताओ के बयानों की कॉपी नहीं दी गयी !!!
6. राम रहीम जी के वकील को पीडिताओ से क्रोस क्वेशचन करने का मौका नहीं दिया गया !!!
7. पीडिताओ ने अपने बयान बदलने की अनुमति मांगी किन्तु उन्हें बयान बदलने की अनुमति नहीं दी गयी !!!
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<https://www.youtube.com/watch?v=XZN97Brf5Oo&feature=youtu.be&app=desktop>
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Sat Sep 09 2017 18:38:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
राम रहीम की 14 कंपनियाें का 800 करोड़ का कारोबार बंद, 8 हजार लोग बेराेजगार
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7-sep-2017
गुरमीत के जेल जाते ही सभी कंपनियाें, 8 स्कूल-कॉलेजों, होटल-रेस्टोरेंट और 52 दुकानों पर ताले, बैंक खाते सील।
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राम रहीम की 14 कंपनियाें का 800 करोड़ का कारोबार बंद, 8 हजार लोग बेराेजगार
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जालंधर. 28 अगस्त को रेप केस में दोषी गुरमीत राम रहीम को 20 साल की सजा होने के बाद 10 दिन के अंदर ही डेरे का करीब 800 करोड़ का कारोबार बंद हो गया है। सिरसा डेरे की 14 कंपनियां, 8 स्कूल-कॉलेज, फाइव स्टार होटल एमएसजी रिजॉर्ट, कशिश रेस्टोरेंट, पुराने डेरे के सामने एसी सुपर मार्केट की 52 दुकानों पर ताले लगे हैं। कई बैंक खाते भी सील कर दिए गए हैं। कारोबार से जुड़े करीब आठ हजार लोग बेरोजगार हो गए हैं और डर के मारे सिरसा छोड़ गए हैं। साथ ही देशभर में 400 के करीब डीलर्स ने एमएसजी स्टोर्स बंद कर दिए हैं। 9 कंपनियां पिछले 4 साल में खड़ी की हैं...
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<https://www.bhaskar.com/news/UT-CHD-HMU-NES-baba-ram-rahim-business-strategy-and-become-business-baba-like-baba-ramdev-5688273-NO.html>
Sun Sep 10 2017 16:38:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
डेरा समर्थक कभी भी किसी प्रकार की हिंसा एवं देश विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं रहे। बावजूद इसके, सोनिया / मोदी / केजरीवाल / भागवत / जज एवं इनके अंध भगत डेरे के व्यवस्थागत ढाँचे को कतरा कतरा तोड़ने के सभी प्रयास कर रहे है। माहौल कुछ इस तरह का बना दिया गया है जैसे डेरा और उनके समर्थक देश विरोधी एवं अलगाव वादी है !!!
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ओह माय गॉड फिल्म कान्हा vs कान्हा नामक नाटक पर लिखी गयी है। परेश रावल ने इसमें मुख्य भूमिका भी निभायी है और वे इसके सह निर्माता भी है। इस नाटक के फायनेंसर संघ के नेता है और यह नाटक के कई शो देश भर में संघ के कार्यकर्ताओ के लिए आयोजित किये गए है। स्वाभाविक रूप से संघ के कार्यकर्ता इस नाटक और इस पर बनी फिल्म के प्रशंसक है !!
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संघ के कार्यकताओ के बीच एक और स्वामी काफी लोकप्रिय है -- स्वामी सच्चिदानंद। उनके लेखन का केंद्रीय सन्देश यही रहता है कि , "विभिन्न सम्प्रदाय हिन्दुओ का विभाजन करके उन्हें कमजोर कर रहे है" !!! अत: मजबूत होने के लिए हिन्दुओ को "एक" हो जाना चाहिए !! इसके अलावा वे यह भी स्थापित करते है कि सभी गुरु वगैरह हिन्दू धर्म को कमजोर कर रहे है !!!
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यदि आप पंक्तियों एवं शब्दों के बीच छुपे हुए निहितार्थ को पढ़ सकते है तो साफ़ तौर पर समझ सकते है कि वे कहना क्या चाहते है।
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ओह माय गॉड फिल्म भी इसी तरह का सन्देश देती है -- सभी हिन्दू गुरु फ्रॉड और ढकोसले बाज है !! और इसीलिए सभी हिन्दू गुरुओ को ठिकाने लगा देना चाहिए !!!
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लेकिन क्यों ? आखिर ये सभी गुरु / संत फ्रॉड और बुरे क्यों है ? क्या ये लोग कश्मीरी आतंकियों की तरह आतंकी गतिविधियां संचालित कर रहे है ? क्या ले लोग नक्सलियों की तरह पुलिस वालो को मार रहे है ? क्या ये लोग दाऊद की तरह लोगो को लूट रहे है और उनकी हत्याएं कर रहे है ? क्या ये लोग अपने आस पास रहने वाले लोगो को कश्मीरी पंडितो की तरह मारकर भगा देते है ?
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नहीं। लेकिन फिर भी सोनिया / मोदी / केजरीवाल जैसे ओह माय गॉड फ़िल्म के प्रशंषको की नजर में ये सभी संत बुरे और फ्रॉड है !!!
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संत आसाराम जी बापू, श्री गुरमीत राम रहीम जी, संत रामपाल जी जैसे संतो ने कभी भी हिंसा को प्रेरित नहीं किया। इन संतो पर कर चोरी या जमीने हड़पने के मामले लगभग नगण्य है। इन्होने कभी भी समाज में शान्ति भंग करने के कृत्य नहीं किये। बावजूद इसके हम देख रहे है कि जज / सोनिया / मोदी / केजरीवाल जैसे नेता और इनके अंध भगत इन संतो के व्यस्थागत ढाँचे को गिराने का समर्थन कर रहे है !!!
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इस पूरी कवायद के नतीजे भयावह होंगे। आज या कल , इन संतो के अनुयायी या तो मिशनरीज / इस्लाम की शरण लेंगे या फिर नक्सली बन जाएंगे। किसी निशस्त्र एवं क़ानून का पालन करने वाले समूह का दमन करना आसान है , लेकिन सिर्फ तब तक जब तक कि वे लोग क़ानून का पालन करते रहने के फैसले पर टिके रहे।
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सिर्फ तब तक जब तक कि वे लोग क़ानून का पालन करते रहने के फैसले पर टिके रहे।
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Sun Sep 10 2017 17:42:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
राम रहीम जी संत नहीं है , वे विलासी है, ऐश्वर्य प्रिय है, उनके पास गुफाएं है, उनके डेरे में स्वीमिंग पूल है, उन्होंने आलिशान महल बना रखा है, उनके पास दो बाज और 5 तीतर है, उनके पास ढेर सारी जमीन है, वे फिल्मे बनाते है, नाचते-गाते है, क्रिकेट खेलते है, कारोबार करते है , रंग बिरंगे कपड़े पहनते है आदि आदि जैसे बकवास आरोपों को पेड मीडिया द्वारा बार बार इसीलिए दोहराया जा रहा है ताकि बलात्कार के मूल मुकदमे पर चर्चा को टाला जा सके।
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यदि इन फर्जी आरोपों पर बहस नहीं चलाई गयी तो जनता का ध्यान बलात्कार के मुकदमे से जुड़े तथ्यों पर चला जाएगा। और तब जनता को यह मालूम होगा कि "सिर्फ बयान" को आधार बनाकर ही राम रहीम जी को दोषी ठहरा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग ने जज को यह तय करने का अधिकार दे दिया था कि वह यदि चाहे तो पीड़िता के बयान को सच मान सकता है !! और जज को इस बात में "सुविधा" थी कि लड़की के बयान को सच मान लिया जाए !! इस तथ्य को चर्चा से बाहर करने के लिए मीडिया ने ऊपर दिए गए फर्जी आरोपों का पलेथन लगा दिया।
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और सुबह शाम अनाज खाने के बावजूद कई लोग इन आरोपों को दोहरा रहे है। उन्हें इस बात पर सोचने का अवकाश ही नहीं है कि गुफाएं, स्वीमिंग पूल, महल आदि बनाना और फिल्मो में अभिनय करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
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समाधान -- हरियाणा के मतदाता सूचियों में से 500 नागरिको की ज्यूरी बुलाकर इस मुकदमे की सुनवाई की जाए। यदि ज्यूरी उन्हें दोषी पाती है तो उन्हें सजा मिले, अन्यथा उन्हें रिहा किया जाए।
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Mon Sep 11 2017 18:18:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Arvind Nigam:
Tue Sep 12 2017 18:37:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
इन्हे भी नॉबेल चाहिए !!
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ये बाबाजी "तर्क" का आश्रय लेकर शनि देव का मजाक उड़ा रहे है !!! भाई अपनी चटनी और अचार बेचो किसी धर्म के धर्मावलम्बियों की आस्था का छिद्रान्वेषण करने का प्रयास न करो तो बेहतर है। तर्क और विज्ञान का धर्म से कोई मेल नहीं है। धर्म पूरब है और विज्ञानं पश्चिम। धर्म आस्था और विश्वास पर टिका हुआ है। धर्म के क्षेत्र में तर्क का कोई स्थान नहीं। यदि किसी की श्री राम , श्री कृष्ण , हनुमान जी या शनि देव में आस्था है और वे मंदिर जाते है तो आपको क्या तकलीफ हो रही है ?
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<https://youtu.be/pBzhbPN5BQU>
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Tue Sep 12 2017 20:33:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
नरेंद्र Vs नरेंद्र
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महात्मा मंगल पांडे ने 1857 में क्रान्ति का सूत्रपात किया था। वजह ? पाण्डे जी गाय की चर्बी वाले कारतूस दाँत से काटने को राजी नहीं थे। उनका कहना था कि -- मैं हिन्दू हूँ, और हिन्दू संस्कृति में गौ मांस भक्षण निषिद्ध है।
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मुग़ल कालीन भारत में गौ कशी निषिद्ध थी। यहाँ तक कि अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफर ने गौ हत्यारे को तोप से उड़ा देने का क़ानून बनाया हुआ था। क्रांति के बाद जफर को बर्मा रवाना कर दिया गया। 1860 से अंग्रेजो ने भारत में गौ हत्या को बढ़ावा देना शुरू किया। लेकिन अंग्रेज यह कतई नहीं चाहते थे कि आगे भी हिन्दू धार्मिक संस्कृति के आधार पर गौ हत्या का विरोध करें।
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इसी समय इत्तिफाक से भारत में एक संत का अवतरण हुआ। इन्होने 1885 में भारत के हिन्दुओ को यह बात "बतानी शुरू की" कि गौ मांस का सेवन हिन्दू धर्म एवं भारतीय संस्कृति का अनिवार्य अंग रहा है। यदि हिन्दूओ को ताकतवर होना है तो उन्हें मांसाहार अवश्य करना चाहिए। वे अन्तराष्ट्रीय संत थे / होना चाहते थे। अत: इस प्रकार की सूचना हिन्दुओ को देने के बाद ये महाशय पश्चिम में निकल गए। और पूरी दुनिया में भी इस आशय का प्रचार किया।
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उन्होंने यह भी बताया कि गीता पढ़ने की जगह यदि हिन्दू फ़ुटबाल खेलेंगे तो उन्हें मुक्ति जल्दी मिलेगी !! ये स्वयं भी माँसाहारी थे और अपने श्रावको को भी मांसाहार करने की सलाह देते थे। बात के साधारण होने के बावजूद इन तथ्यों की टाइमिंग का अपना महत्त्व था। वस्तुत: ब्रिटिश शासन में इन्हे काफी राष्ट्रीय एवं अंतरास्ट्रीय स्तर पर मकबूलियत हासिल हुयी। जाहिर है इन महाशय ने उस समय यह सूचना देकर गौ हत्या के पक्ष में एक वाजिब वजह दे दी थी !!
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सार यह है कि कौन संत है और कौन असंत है, या कौन संत अच्छा है और कौन बुरा है इसकी व्याख्या का अधिकार उनके श्रद्धालुओं पर छोड़ देना चाहिए। सभी संतो की अपनी एक भिन्न शैली होती है। जो उनके नजरिये से सहमत होते है वे उन्हें संत मानते है और जो उनसे सहमत नहीं होते वे उन्हें संत नहीं मानते। इस बात को तय करने का हमारे पास कोई सार्वभौम पैमाना नहीं है कि कौन अलसी संत है और कौन नकली।
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Thu Sep 14 2017 10:32:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
ज्यादातर संभावनाएं है कि लोकसभा चुनाव 2018 में संपन्न हो जाए। प्रस्तावित "एक देश एक चुनाव" नीति के तहत देश की सभी विधानसभाओ के चुनाव भी आम चुनावों के साथ करवाए जा सकते है। संसदीय सीमिति इसे 2 साल पहले ही पास कर चुकी है और ज्यादातर दल इस प्रस्ताव से सहमत है। समय का फैसला मोदी साहेब ने करना है। यदि उन्हें अनुकूल हुआ तो वे 2019 की जगह इसके लिए 2018 भी चुन सकते है।
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नयी व्यवस्था के तहत निम्न फार्मूले सुझाए जा रहे है :
अगर किसी राज्य या केंद्र में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिले तो प्रस्ताव किया जा रहा है कि :
1. सभी दल मिलकर मिलीजुली सरकार बनाए ।
2. सभी दल मिलकर अनिवार्य तौर पर सर्वदलीय सरकार बनाएं
3. या अगले चुनाव तक राष्ट्रपति शासन लगा रहे।
4. बीच में विधानसभा भंग होने पर भी सरकार चलाने की यही व्यवस्था लागू हो।
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सरकार बनाने की कानूनी 'मजबूरी' के चलते कोंग्रेस बीजेपी सपा बसपा लेफ्ट आदि सभी दल मिलकर सरकार बना सकेंगे । जिसके पास जितने विधायक सांसद होंगे उन्हें उस प्रकार से सत्ता में भागीदारी दे दी जायेगी । जवाबदेही में गिरावट आएगी, एजेंडे खुले तौर पर गड्ड मड्ड हो जायेंगे, एक नयी प्रकार की जमात का जन्म होगा जो 5 वर्ष में एक बार जनता को शक्ल दिखाएँगे, और बाकी सब चीजे संसद में आपस में बैठ कर तय कर लेंगे । यह क़ानून नागरिको की भागीदारी चुनावी प्रक्रिया में और भी कम कर देगा।
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एक पहलू यह है कि इस नीति के आने से चुनावी खर्चे की बचत होगी और चुनाव आयोग के कार्य का वजन कम होगा। किन्तु राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं के अभाव में कुल मिलाकर इस व्यवस्था में नेताओ की जवाबदेही और भी घटेगी।
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Mon Sep 18 2017 22:47:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पेड़ रविश कुमार इस समय सबसे ज़्यादा पैसा बना रहा है । इसे सुनकर "राष्ट्रवादियों" के कानो में से धुआँ निकलने लगता है । जिन्हें लगता है कि देश पर मोदी साहेब का कंट्रोल है, वे पेड़ रविश कुमार को सुनकर अपनी ग़लत फ़हमी दूर कर सकते है ।
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( सुधीर तिहाड़ी और रविश के प्रयोजक एक ही है । फिर वे इन्हें परस्पर विरोधी रिपोर्टिंग करने के निर्देश क्यों देते है ? विवरण एक दो दिन में । )
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<https://youtu.be/QQmrsDAmBkM>
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Tue Sep 19 2017 09:49:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
[ Jury System revised ]
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जिला न्यायालय में जूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का "अपडेटेड वर्जन"
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महत्त्वपूर्ण सूचना : राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित जूरी सिस्टम के पुराने ड्राफ्ट को अपडेट किया गया है। नया संशोधित संस्करण निचे देखें। आज से यह ड्राफ्ट ही प्रासंगिक एवं प्रभावी होगा। आज से पहले के सभी पुराने हिन्दी वर्जन अप्रासंगिक है। सभी कार्यकर्ताओ से अनुरोध है कि इसे पढ़ ले एवं अपनी वॉल पर इस अपडेटेड वर्जन को रखें। आगे से सिर्फ यही ड्राफ्ट चलन में रहेगा। चेक करने के लिए sha1 स्ट्रिंग का प्रयोग करे।
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इस ड्राफ्ट की पीडीऍफ़ फाइल, sha1 हैश एवं मूल अंग्रेजी संस्करण का लिंक कमेंट बॉक्स में देखें।
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प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले ट्वीट का प्रारूप :
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@pmoindia I insturct you to print law mentioned in <https://newindia.in/causes/jury-sys/> sha1- 8d6dca244ad6d964509df3f99e04a6adea1787fb #JurySystem
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( कृपया ऊपर दिए गए ट्वीट को कॉपी करे तथा अपने ट्विटर एकाउंट से @pmoindia पर ट्वीट करे। )
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===== हत्या और अन्य हिंसक अपराधों के लिए जिला जूरी सिस्टम ड्राफ्ट का प्रारम्भ ====
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यह कानून पारित होने के बाद हत्या, अपहरण, बलात्कार, मारपीट तथा लापरवाही के कारण होनी वाली मौत आदि जैसे अपराधिक मामलो की सुनवाई करने और सजा सुनाने का अधिकार नागरिको की जूरी के पास रहेगा। इस जूरी मंडल का चयन किसी जिले या किसी राज्य अथवा भारत की मतदाता सूचियों में से क्रम रहित ( रेंडमली ) तरीके से किया जाएगा। जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा तथा इस जूरी मंडल में 15 से 1500 तक जूरी सदस्य हो सकेंगे | बाद मे यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य प्रकार के अपराधों को भी इसमें जोड़ सकते है। इस क़ानून के लागू होने के बाद से इन मुकदमो का फैसला आम नागरिको के जूरी मंडल द्वारा किया जाएगा न कि जजों द्वारा |
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[ टिप्पणी : इस कानूनी ड्राफ्ट को लोकसभा और राज्यसभा में साधारण बहुमत से पास करके देश में लागू किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इस कानून को पारित करने के लिए किसी भी प्रकार के संविधान संशोधन की जरुरत नहीं है |
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इस ड्राफ्ट के 2 भाग है --
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भाग -1: नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग - 2 : अधिकारियों और नागरिकों के लिए अन्य निर्देश व टिप्पणियाँ
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इस क़ानून ड्राफ्ट की महत्त्वपूर्ण धाराएं है -- (1.2) , (2) , (2.1) to (2.5) , (4.1) , (4.2) , (8.1) , (9) , (12) , (13) , (14) , (17) , (19) , (20) , (28) , (28.1)
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इस ड्राफ्ट में लिखी गयी "टिप्पणियां" किसी भी अधिकारी / मंत्री / जज आदि पर बाध्यकारी नहीं है | जूरी सदस्य, नागरिक एवं अन्य अधिकारी इन टिप्पणियो का उपयोग मार्गदर्शन के रूप में कर सकते हैं | वस्तुत: ये टिप्पणियाँ बाध्यकारी नहीं है | ]
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भाग -1: नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) टिप्पणी : कानून का सारांश
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(1.1) टिप्पणी : यह कानून हत्या, अपहरण, बलात्कार, मार-पिटाई, धमकी और अन्य सभी ऐसे अपराधों जिनमे शारीरिक बल या शारीरिक हिंसा का प्रयोग किया गया है, के लिए मजिस्ट्रेट अदालतों, जिला अदालतों और सेशन अदालतों में जूरी सिस्टम की स्थापना करता है |
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(1.2) टिप्पणी : इस कानून के पारित होने बाद आप (आप अर्थात भारत में पंजीकृत मतदाता) को जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है | जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य और बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई तय करनी होगी |
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(1.3) टिप्पणी : किसी जिले में जूरी सिस्टम का पर्यवेक्षण एवं संचालन “जिला जूरी प्रशासक” द्वारा किया जायेगा | जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति मुख्यमंत्री करेंगे तथा आप ( अर्थात अमुक जिले के मतदाता ) जूरी प्रशासक को इस कानून में “राईट टू रिकॉल जिला जूरी प्रशासक” धाराओं में दी गयी प्रक्रिया का प्रयोग करके बदल सकेंगे |
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(1.3.1) टिप्पणी : “राईट टू रिकॉल जिला जूरी प्रशासक” के चयन के लिए आप अधिकतम 5 उम्मीदवारों को किसी भी दिन अनुमोदित कर सकते है, और किसी भी उम्मीदवार का अनुमोदन किसी भी दिन निरस्त कर सकते है | यदि आप अपना अनुमोदन दर्ज नहीं करना चाहते तो आपको अनुमोदन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है |
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(1.3.2) टिप्पणी : जिस उम्मीदवार के अनुमोदनों की संख्या सबसे ज्यादा हो और यह अनुमोदनो की यह संख्या जिले में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक हो , तो ऐसा उम्मीदवार पदासीन जिला जूरी प्रशासक को प्रतिस्थापित करके नया जिला जूरी प्रशासक बनेगा |
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भाग-2 : अधिकारियों और नागरिकों के लिए अन्य निर्देश व टिप्पणियाँ
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(2) यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
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(2.1) हत्या, हत्या के प्रयास, किसी दुर्घटना या लापरवाही के कारण हुई मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु
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(2.2) ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना, एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो या गंभीर चोट कारित होना संभाव्य हो।
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(2.3) अपहरण / बलात्कार / छेड़छाड़ / उत्पीड़न / किसी भी आयु की महिला का पीछा करना, कार्यस्थल पर उत्पीड़न आदि
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(2.4) सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने राजपत्र अधिसूचना द्वारा इस सूची में शामिल किया हो।
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(2.5) कोई भी अपराध या कोई भी नागरिक विवाद जिसे इस क़ानून में वर्णित “जनता की आवाज” धाराओ का उपयोग करके नागरिको के बहुमत ने बताया हो और उसे प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो |
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(3) यदि किसी प्रकार का अपराध या नागरिक विवाद मुख्यमंत्री द्वारा जोड़ा जाता है, तब यह केवल अमुक राज्य के लिए ही लागू होगा | यदि इसे प्रधानमंत्री द्वारा जोड़ा जाता है, तब यह सम्पूर्ण राष्ट्र या राजपत्र अधिसूचना में प्रधानमंत्री द्वारा स्पष्ट किये गए राज्य / राज्यों के लिए लागू होगा | मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री स्पष्ट कर सकते हैं कि क्या जूरी सदस्य जिला / राज्य से या फिर पड़ोसी जिलों / राज्यों से या सम्पूर्ण भारत से चुने जाएंगे |
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(3.1) टिप्पणी : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ अपराधों को शामिल किया गया है ताकि इस तर्क को कि -"जूरी सदस्य 'ऐसे वाले और वैसे वाले' अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते" - नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके | बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों के प्रकार एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी जोड़ सकते हैं। इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि यह तर्क कि -“जूरी सदस्य ऐसे वाले और वैसे वाले' अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते ”- अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जाता है | उदाहरण : गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाई भतीजा वाद , चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी इत्यादि जैसे अपराध प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे |
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(3.2) टिप्पणी : प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री अन्य सामान्य अपराधो जैसे किरायेदार / मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद इत्यादि भी जोड़ सकते हैं। क्योंकि प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाता आदि के सामने यह सिद्ध हो चुका होगा कि अमुक मामले बहुत सरल है तथा जूरी सदस्य इसे आसानी से समझ सकते है तथा ये तर्क कि-“जूरी सदस्य ऐसे-वैसे अपराध के बारे में कानून नहीं समझते ”- अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है |
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(4) किसी जिले में जूरी सिस्टम का अस्थायी निलंबन
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(4.1) किसी राज्य में दर्ज सभी मतदाताओं के 51% से अधिक अनुमोदन मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर बताये सभी खंडो / धाराओं को निलंबित कर सकते है ,और किसी एक या अधिक जिलों में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 5 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है | इन 5 वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री किसी भी समय जिला जूरी प्रशासक को बदल सकते है | मुख्यमंत्री अमुक जिले के किसी मामले को क्रमरहित तरीके से चुने हुए किसी अन्य जिले में भी भेज सकते है |
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(4.2) भारत में सभी मतदाताओं का 51% से अधिक अनुमोदन मिलने पर प्रधानमंत्री भारत में किसी भी एक या अधिक जिलों में ऊपर बताये सभी खंडो को निलंबित कर सकते है, और अमुक जिलों में अपने विवेक से जिला जूरी प्रशासक 5 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है | इन 5 वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री किसी भी समय जिला जूरी प्रशासक को बदल सकते है | प्रधानमंत्री अमुक जिले के किसी मामले को क्रमरहित तरीके से चुने हुए किसी पडोसी राज्य के जिले में भी भेज सकते है |
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(5) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले के लिए एक अधिकारी को जिला जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्त करेंगे, जिसे नागरिक इसी कानून में दिए गए “राईट टू रिकॉल जिला जूरी प्रशासक” की धाराओं का उपयोग करके बदल सकते हैं |
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(6) प्रथम महाजूरी मंडल ( ग्रेंड ज्यूरी ) का गठन - जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में मतदाता सूची से 25 वर्ष और 55 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव क्रमरहित तरीके से करेगा | इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इससे 30 महा-जूरी सदस्य शेष रह जायेंगे | यदि धारा (4) के अंतर्गत जिला जूरी प्रशासक मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किया गया है तब जिला जूरी प्रशासक जिला / राज्य / भारत से 100 नागरिक तक चुन सकता है और 70 को निकाल सकता है |
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(7) अनुगामी ( बाद में आने वाली ) महा जूरी मंडलो का गठन - प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महा-जूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा | पहले महीने के बाद हर महा-जूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने तक होगा और इसलिए 10 महा-जूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे और 10 नए चुने जाएंगे | जैसा कि ऊपर बताया गया है, 10 महा-जूरी सदस्य चुनने के लिए जिला जूरी प्रशासक जिला या राज्य या भारत की मतदाता सूची में से क्रमरहित तरीके से 20 मतदाता चुनेगा, और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छटनी कर देगा।
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(8) क्रमरहित तरीके से मतदाताओं को चुनने का तरीका
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(8.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रम रहित ( रेंडमली ) विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग नहीं करेगा | वह प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा बताई प्रक्रिया का उपयोग करेगा | यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
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(8.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या, जैसे ABCD, के मध्य की संख्या चुननी है | तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा | पहले दौर में, यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का उपयोग करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है तब वह 2 पांसों का उपयोग करेगा |
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(8.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी | यदि पांसों के फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा |
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(8.3.1) उदहारण- मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज हैं, में से एक पेज का चयन करना है| तब जूरी प्रशासक 4 दौर (राउंड) चलायेगा | पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है | यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा | यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी | अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा | इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है | इसलिए वह दो पांसे फेकेगा | यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा | यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी | इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है | तब जूरी प्रशासक (3-1), (5-2), (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा |
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(8.3.2) एक अन्य तरीका यह हो सकता है - जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान (प्राइम) संख्याओ को चुन सकता है | मान लीजिये सूची में N मतदाता हैं | तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें n और m मान लेते हैं, चुन सकता है | चुने हुए मतदाता हो सकते हैं (n mod N), (n +m) mod N, (n+2m) mod N से (n+ (k-1)*m) mod N, जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है |
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(8.3.3) यदि किसी जिले में जूरी सिस्टम निलंबित है और जूरी प्रशासक मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किया गया है, तब जूरी प्रशासक सम्पूर्ण राज्य या भारत से मतदाताओ को चुन सकता है | इनकी आयु 25 वर्ष और 55 वर्ष के बीच होगी |
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(8.4) महा-जूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे | यदि 15 से अधिक महा जूरी सदस्य सहमति देते हैं तो वे अन्य दिनों में भी मिल सकते है | ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महा-जूरी सदस्य उपस्थित हों | यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त कम से कम शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए | महा-जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा | मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री मुद्रास्फीति (या महंगाई) की दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी अन्य परिस्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है | ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 60 दिनों के बाद प्रदान की जाएगी |
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(8.5) यदि कोई महा-जूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा | साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है | जो भी व्यक्ति महा-जूरी सदस्य होंगे, वे 60 दिनों के बाद जुर्माना तय करेंगे |
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(9) यदि किसी व्यक्ति या कंपनी या जिला अभियोजक या कोई भी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और आरोप धारा-२ या उसके आधार पर किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर सूचित कर सकते हैं ,सुनवाई के लिए कह सकते हैं अथवा "जनता की आवाज" धाराओ ( CV ) के अंतर्गत अपनी शिकायत प्रधान मंत्री की वेबसाइट पर दर्ज ( अपलोड ) कर सकते है | अभियोग कर्ता शिकायत के वांछित समाधान के बारे में भी अपना सुझाव दे सकते हैं | समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना , अभियुक्त से आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना ,अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास सजा देना या मृत्युदंड देना हो सकता है | समाधान कानूनी सीमा के अन्दर होने चाहिए और इस कानूनी सीमा का अर्थ वही होगा जो जूरी और महा जूरी मंडल सदस्य कानून की व्याख्या करके निर्धारित करेंगे |
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(10) यदि महा जूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य अपनी किसी सभा में यदि किसी गवाह , शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते हैं तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते हैं | महा जूरी मंडल किसी अभियुक्त , गवाह या शिकायतकर्ता को बुलावा भेज सकते हैं या नहीं भी भेज सकते हैं | वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते हैं या नहीं भी दे सकते हैं |
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(11) यदि महा जूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 55 वर्ष की आयु के बीच हो सकती है | यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा |
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(12) यदि महा जूरी मंडल के अधिकतर सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल आधारहीन है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना कर सकते हैं | महा जूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) को जुर्माने की राशि मानी जाएगी | महा जूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी | झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते हैं |
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(13) किसी मामले के लिए वांछित जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण – महा जूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा | यदि महा जूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे | महा जूरी मंडल के सभी सदस्य 15 से 1500 तक की संख्या के बीच एक संख्या प्रस्तावित करेंगे | महा जूरी मंडल सदस्यों के लिए दिशा निर्देश –
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(13.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(13.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है | उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है | पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी | यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है |
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(13.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा हैं और महा जूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते हैं तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते हैं | उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति पेशेवर अपराधी है और अतीत में बहुत से मारपीट और हत्या जैसे अपराधों में अभियुक्त रह चुका हैं तो आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या 100 या 1500 भी हो सकती है |
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(13.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है | न्यूनतम संख्या 15 होगी और प्रत्येक 1 करोड़ की धन राशि के लिए 1 अतिरिक्त जूरी सदस्य जोड़े जा सकता हैं | जूरी सदस्यों की अधिकतम संख्या 1500 होगी |
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(13.5) जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महा जूरी का फैसला अंतिम होगा |
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(13.6) महा जूरी मंडल ये तय करेगा कि जूरी के सदस्य जिला से होंगे, राज्य भर से होंगे या पूरे देश में से होंगे |
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(14) जूरी सदस्यों का चयन – जिला जूरी प्रशासक मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनेगा | जिला जूरी प्रशासक इन सदस्यो को बुलावा भेजेंगे और उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार ,पडोसी ,सहकर्मी या उनके वकीलों को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं करेंगे | जिला जूरी प्रशासक उनको भी जूरी सदस्यों में शामिल नहीं करेंगे जो जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे हैं | शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जिला जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेंगे | जूरी मंडल में शामिल नहीं करने का निर्णय जिला जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महा जूरी मंडल के अधिकतम सदस्यों द्वारा बदला जा सकेगा |
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(14.1) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता , पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते हैं जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं। जूरी सदस्य अन्य सदस्यों से सलाह लेकर अपने विवेक से अपना पक्ष रखेंगे।
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(15) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर की नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया का संचालन करेंगे।
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(16) विचार प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब सारे जूरी सदस्य उपस्थित हों या चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से ( चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के ) 75% सुनवाई आरम्भ करने के लिए राजी हों। सभी धाराओं में अधिकांश जूरी सदस्य या जूरी सदस्यों के बहुमत का अर्थ चुने गए सभी जूरी सदस्यों के अधिकांश या बहुमत से है, ना कि उपस्थित जूरी सदस्यों से। अधिकांश संख्या, और "x% जूरी सदस्य" का अर्थ "चुने गए सभी जूरी सदस्यो का x%" होगा ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्य संख्या का।
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(17) जिला जूरी प्रशासक के द्वारा नियुक्त ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर अभियुक्त को एक से डेढ़ घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इस तरह ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर एक के बाद एक दोनों पक्षों को बोलने देगा। मध्यान्ह भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और एक घंटे तक रहेगा। इसी तरह मामले की सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा।
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(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी। तीसरे दिन या उसके बाद ,यदि अधिकांश जूरी सदस्य कहते हैं कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन अधिकांश जूरी सदस्य ये कहते हैं कि उन्हें और तर्क सुनना है तो मामले की सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक अधिकांश जूरी सदस्य ये नहीं कहते की सुनवाई अब ख़त्म होनी चाहिए।
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(19) अंतिम दिन दोनों पक्ष एक एक घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते हैं की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों से अपने फैसले को सार्वजनिक करने को कहेगा।
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(20) जुर्माने के निर्धारण हेतु प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि उसके अनुसार उचित हो तथा प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को उनके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की राशि के रूप में दर्ज करेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माने की राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
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(21) कारावासीय दंड के मामले में ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी जूरी सदस्य द्वारा कारवास की अवधि को कानूनी सीमा से अधिक प्रस्तावित किया जाता है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और दो तिहाई जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि को शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित करके मुक्त कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
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(22) मृत्यु दंड के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आये जूरी मंडल के सदस्य ही ये निर्णय करेंगे की मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आया जूरी मंडल भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगा।
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(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। जूरी सदस्य जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जूरी द्वारा मंजूर किसी और व्यक्ति द्वारा सुझाये गए समाधान के प्रस्ताव को विचार के लिए स्वीकार कर सकते हैं। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
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(24) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में महा जूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी का भुगतान करेगा।
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(24) अनुपस्थिति या देर से आने की स्थिति में जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा , जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महा जूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
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(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उतने दिनों के हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। यदि अभियुक्त को इससे ज्यादा मुआवजा चाहिए तो वह इसके लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
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(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने अथवा मामले से सम्बंधित किसी तकनिकी विषय के बारे में जूरी सदस्यों को जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते हैं। जिला जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो कि उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी।
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(27) यदि किसी जिले में तहसील स्तर के न्यायालय हैं तो जूरी प्रशासक तहसील स्तर पर भी महा जूरी मंडल का गठन कर सकता हैं, और तहसील स्तर के न्यायलयों में जूरी व्यवस्था लागू कर सकता हैं। तहसील स्तर की महा जूरी मंडल और तहसील अदालत की जूरी तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगी। जिला जूरी प्रशासक तहसील स्तर की अदालतों के लिए तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे और अदालत की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
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(28) अपील : किसी भी पक्ष को 30 दिन के अन्दर अदालत के फैसले के विरुद्ध राज्य उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में अपील करने का अधिकार होगा। उच्चतर न्यायालयों के फैसले को जिला अदालत के ऊपर प्रभावी माना जाएगा।
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(28.1) टिपण्णी : यह कानून उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में जूरी व्यवस्था या जज प्रणाली होने के ऊपर कोई अनिवार्यता नहीं रखता। यदि मतदाता या सांसद उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में जूरी व्यवस्था चाहते हैं तो इस विषय में अलग से कानून बना सकते हैं।
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(29) यदि जिला या राज्य के या सम्पूर्ण भारत के नागरिक इस क़ानून में दर्ज CV धाराओं के द्वारा जिला मुख्य जज को जिला जूरी अदालत के फैसले को निरस्त करने का आदेश देते हैं तो जिला मुख्य जज जिला अदालत के फैसले को निरस्त कर सकता है।
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(30) जिला पुलिस प्रमुख या उनके द्वारा निर्धारित कोई पुलिस अधिकारी जज द्वारा लिखित और जूरी द्वारा मंजूर किये हुए जुर्माने या कारावास के आदेश को लागू करेंगे।
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(31) इसी क़ानून की धारा 2 में वर्णित मामलो या धारा 2 के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा और न ही जुर्माना लगाया सकेगा। किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती की जरूरत नहीं होगी -- यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून में प्रयुक्त 'जनता की आवाज' ( CV ) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले / राज्य / देश के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महा जूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या इस क़ानून में प्रयुक्त 'जनता की आवाज' ( CV ) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिला / राज्य / देश के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
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(32) मामले के संबध में तथ्यों एवं अभिप्राय का निर्धारण ज्यूरी मंडल करेगा , तथा प्रवृत क़ानून एवं संविधान की व्याख्या का अधिकार भी जूरी मंडल के पास होगा, ताकि जूरी मंडल प्राकृतिक न्याय कर सके। यदि जूरी सदस्यों को लगता है कि प्रवृत क़ानून अव्यवहारिक एवं निष्पादित किये जाने के योग्य नहीं है तो जूरी मंडल अभियुक्त को "निर्दोष" करार दे सकेंगे।
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(RTR) राईट टू रिकॉल जूरी प्रशासक
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(RTR.1) 30 वर्ष की आयु वाला कोई भी भारतीय नागरिक यदि जूरी प्रशासक बनना चाहता है तो वह देश के किसी भी जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित हो कर अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में ली जाने वाली राशि के बराबर जमा राशि लेकर उम्मीदवार का आवेदन स्वीकार करेगा और एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(RTR.2) कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर 3 रूपये शुल्क देकर अधिकतम पांच उम्मीदवारों को जिला जूरी प्रशासक के पद के लिए अनुमोदित कर सकेगा। पटवारी उसके अनुमोदन को कंप्यूटर में दर्ज करेगा और बदले में रसीद देगा। इस रसीद में नागरिक की मतदाता पहचान पत्र संख्या, दिनांक / समय और उम्मीदवार जिन्हे उसने अनुमोदित किया है दर्ज होंगे। पटवारी प्रत्येक नागरिक द्वारा दर्ज अनुमोदनो को अमुक नागरिक की मतदाता संख्या, नाम और उसके द्वारा अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर रखेगा।
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(RTR.3) यदि कोई नागरिक अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या उससे अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा।
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(RTR.4) यदि किसी नए उम्मीदवार को प्राप्त अनुमोदनों की संख्या अमुक जिले में दर्ज मतदाताओ की कुल संख्या के 35% (सभी दर्ज मतदाताओ की कुल संख्या के 35%) से अधिक हो, तथा उसे मिले अनुमोदनों की संख्या पदासीन जिला जूरी प्रशासक को मिले अनुमोदनों की संख्या से 2% भी अधिक हो तो मुख्यमंत्री पदासीन जिला जूरी प्रशासक को पद से हटा सकते है और ऊपर दी गयी शर्ते पूरी करने वाले नए उम्मीदवार को जिला जूरी प्रशासक नियुक्त कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है। इस संबध में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा।
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(RTR.5) यदि पदासीन जूरी प्रशासक के अनुमोदनो की संख्या जिले में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 35% से कम हो जाती है तो मुख्यमंत्री उसे बदल सकते है।
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(RTR.6) प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे नागरिक अपने पंजीकृत मोबाइल से SMS भेजकर या इन्टरनेट द्वारा या एटीएम द्वारा या मोबाइल फ़ोन एप्प द्वारा अपने अनुमोदन दर्ज करवा सके।
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(RTR.7) टिपण्णी : बाद में प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे नागरिक किसी उम्मीदवार को अंक ( -100 से 100 के बीच ) दे सके। यदि मतदाता द्वारा सामान्य अनुमोदन किया जाता है तथा कोई अंक नहीं दिए जाते है तो इस अनुमोदन को 100 अंको के समकक्ष माना जाएगा, तथा यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन दर्ज नहीं करता है तो इसे शून्य अंक माना जाएगा। इस तरह मतदाता के पास दो विकल्प होंगे। या तो वह सामान्य अनुमोदन कर सकता है या अनुमोदन नहीं कर सकता है, अथवा वह उम्मीदवार को अंक दे सकता है। किन्तु यदि मतदाता उम्मीदवार को अंक देता है तो मतदाता द्वारा दिए गए अंक ही मान्य होंगे। यदि किसी उम्मीदवार को जिले में दर्ज कुल मतदाताओ के 33% से अधिक अंक प्राप्त हो जाते है तो अमुक उम्मीदवार के नकारात्मक अंको को खारिज कर दिया जाएगा। प्राप्त किये जाने वाले सबसे अधिक संभाव्य अंको के 51% तथा सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को मुख्यमंत्री जिला जूरी प्रशासक के पद पर नियुक्त कर सकते है।
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(CV) जनता की आवाज (Citizens’ Voice):
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(CV.1 ) [ जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]
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यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस विधेयक की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस विधेयक से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र (फोटो) एवं अन्य विवरण के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2 ) [ तलाटी अथवा पटवारी के लिए निर्देश ]
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किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दी गयी धारा (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो, तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में उपस्थित होगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा । मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा।
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==== जूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का समापन ====
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Tue Sep 19 2017 19:39:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
जो लोग 40 हजार रोहिंग्यों को वापिस भेजने के लिए अभियान चला रहे है वे 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठियो पर खामोश क्यों है ?
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रोहिंग्यों के दो प्रकार है -- १) शरणार्थी एवं २) घुसपैठिये
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शरणार्थी - ये वे लोग है जो पंजीकृत है। भारत सरकार ने इन्हे आने की अस्थायी अनुमति दी है। सरकार को पता है कि इनकी संख्या क्या है, ये लोग कौन है और इन्हे किस शहर में किस जगह अस्थायी तौर पर बसाया गया है। ये लोग शरणार्थी शिविरों में रहते है और भारत सरकार की निगरानी में है। इन्हे महीने के महीने थानों में जाकर रिपोर्ट करनी होती है। ये बिना सरकार को जानकारी दिए इधर से उधर नहीं हो सकते। यदि होते है और कभी पकडे जाते है तो इन पर मुकदमा चलेगा और ये जेल हो जायेगी। कुल मिलाकर ये समस्या उतनी पेचीदा और खतरनाक नहीं है। सिर्फ फैसला लेना है। निष्पादन में कोई तकनिकी बाधा नहीं है। 3 साल पहले ये लोग नहीं थे। मोदी साहेब ने ही इन्हे शरण दी है। और जब भी सरकार चाहेगी इन्हे रवाना कर सकती है।
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पहली बात तो हमें इन्हे आने ही नहीं देना चाहिए था। और अब आ भी गए है तो हमें इन्हे वापिस भेज देना चाहिए। जितना जल्दी हो उतना अच्छा। वहां आग लगी हुयी है। यदि हम इन्हे रवाना नहीं करेंगे तो इनकी आवक बढ़ती जायेगी। मानवीय आधार पर हम इतना कर सकते है कि इन्हें महीने दो महीने की मोहलत दें दे, ताकि ये लोग नया ठिकाना तलाश सके।
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२) घुसपैठिये - ये लोग पंजीकृत नहीं है। मतलब सरकार को पता नहीं है कि ये कितने है, कौन है और कहाँ पर रह रहे है। अत: समस्या इधर से है। वैसे रोहिंग्ये शर्णार्थियो की संख्या कम और घुसपेठियो की संख्या बेहद कम है। इन्हें बाहर करने के लिए पहले हमें इन्हें खोजना होगा। जो कि वाकयी एक मुश्किल काम है। किन्तु यह ज्यादा मुश्किल इसीलिए नहीं है क्योंकि ये अभी तक बसे नहीं है। अभी अभी आये है। भगदड़ में है। इनकी भाषा से भी ये पहचाने जा सकते है। तो खोजने पर नजर में आ जायेंगे।
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तो इस तरह से इस समस्या से निपटने में हमें किसी प्रशासनिक , कानूनी , तकनीकी या निष्पादन से सम्बंधित चुनौती का सामना नही करना पड़ेगा। राजनैतिक निर्णय लेकर इसे आसानी हल किया जा सकता है।
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असली समस्या "बांग्लादेशी घुसपेठिये" है !!
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इनकी संख्या 3 करोड़ है। हमने एक को भी शरण दी है। सभी के सभी घुसपेठिये है। पूरे भारत में फैले हुए है। सभी महानगरो में ये बसे हुए है। पिछले 25 साल से ये लगातार भारत में आ रहे है, और लगातार आकर बसते जा रहे है। ये एक आशय लेकर आये है। इन्हें भारत में घुसाने के लिए सऊदी अरब फायनेंस करता है। नेताओं को पैसा दिया जाता है ताकि वे इन्हें खदेड़ने का कोई क़ानून नहीं बनाए। पिछले कई सालो से यह पैसा कोंग्रेस के सांसद खाते थे जिस पर अब राष्ट्रवादी सांसदों ने कब्ज़ा कर लिया है। पूर्वोत्तर में इनके तार नक्सलियों से जुड़े हुए है और इनका वहां घनत्व ज्यादा है। चीन का भी इन्हें पूरा समर्थन है। ये लोग हिंसक है और हिंसा का इस्तेमाल करके असम / बंगाल में कई इलाको पर पूरा नियंत्रण हासिल कर चुके है। ये बांग्ला बोलते है और इसीलिए इनकी पहचान करना बहुत मुश्किल है। इनमें से कईयों के पास भारत में जमीन है ( जो इन्होने अवैध रूप से हथियाई है ) , घर है, मतदाता पहचान पत्र है , बिजली-पानी के बिल है , राशन कार्ड है, बेंक में खाते है , और अब इनके पास आधार कार्ड भी है !!
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इन्हें खदेड़ने के लिए हमें एक विस्तृत प्रक्रिया और क़ानून चाहिए, ताकि इन्हें पूरे देश से खोज खोज कर निकाला जा सके। इन्हें भारत से खदेड़ना आज सबसे ज्यादा जरुरी है। ये टाइम बम है जो कि किसी भी दिन फट सकता है। और जब ये फटेगा तो हमारे पास कोई भी उपाय नहीं रहेगा। हम ऐसे गृह युद्ध में फंस जायेगें जिसमे लाखों हिन्दुओ को पूर्वोत्तर से अपना घर-कारोबार छोड़ कर रातों रात कश्मीरी पंडितो की तरह जान बचाकर भागना पड़ेगा। जो नहीं भाग पायेंगे वे मारे जायेंगे। ये लोग असम में अब तक ऐसे हमले करके दो तहसीलों पर कब्ज़ा कर चुके है। 2012 में लगभग 1 लाख की आबादी को अपना माल असबाब छोड़कर भागना पड़ा था। वह जायजा लेने का एक छोटा सा प्रयोग था। अगली बार इसका दायरा और भी विस्तृत होगा।
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ये भारत में रेकी करते है और इनके सरगनाओ को रिपोर्ट करते है। जब सऊदी अरब फायनेंस करेगा तो चाइना और पाकिस्तान इन्हें हथियार भेजने लगेंगे। नेटवर्क और जमावट इन्होने पहले से ही बना रखी है। फिर जब हम पर ये हमला करेंगे तो हमारी पुलिस और सेना को पता न होगा कि गोली किस पर चलानी है। आम भारतीय हथियार विहीन है अत: उस समय उनकी हालत वही होगी जो आज रोहिंग्यो की है !! कुल मिलाकर हमारी स्थिति पूर्वोत्तर में बेहद कमजोर हो चुकी है और हम किसी भी समय गृह युद्ध में एक बड़ा हिस्सा गवां सकते है।
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यह समस्या नयी नहीं है। 1998 के आम चुनावों में बीजेपी ने वादा किया था कि वे इन घुसपेठियो को खदेड़ देंगे। आडवाणी गृहमंत्री बने और उन्होंने तब स्वीकार किया था कि भारत में लगभग डेढ़ करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठिये है। लेकिन उन्होंने इन्हें खदेड़ने के लिए क़ानून नहीं बनाया। बल्कि इन्हें रोकने के लिए भी कोई उपाय नहीं किये। कोंग्रेस के 10 साला शासन के दौरान भी ये घुसपेठिये आते रहे, और बीजेपी =संघ ( गंगाधर = शक्तिमान ) के नेता कहते रहे कि यदि हम सत्ता में आये तो इन्हें देश से बाहर खदेड़ने के लिए क़ानून लायेंगे।
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चुनाव प्रचार के दौरान मोदी साहेब ने एलान किया कि 16 मई को बांग्लादेशी घुसपेठियो को जाना पड़ेगा। किन्तु आज 3 साल निकल चुके है। उन्होंने बंगलादेशी घुसपेठियो का घ भी नहीं बोला है। उन्हें खदेड़ने की बात तो छोड़िये उन्होंने आधार कार्ड के फॉर्म में भी इस तरह की घोषणा रखने से साफ़ शब्दों में इंकार कर दिया जो यह कहे कि --"मैं शपथ लेता हूँ कि मैं भारत का नागरिक हूँ। तथा मेरे द्वारा गलत जानकारी दिए जाने पर मुझ पर विधि सम्मत कार्यवाही क जाए" !! इस तरह अब ये घुसपेठिये वैध रूप से अपने आधार कार्ड बनवा रहे है !!
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और यदि आपको राष्ट्रवाद की विडम्बना देखनी हो तो संघ के स्वयं सेवको से मिलिए। वे बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने का जबरदस्त विरोध कर रहे है। आप खुद उनसे बात कर लीजिये। आप किसी भी तरह से उनसे पूछिए, किन्तु आपको विभिन्न तरीको से वे इसी आशय का जवाब देंगे कि अभी इस प्रकार के किसी क़ानून की जरूरत नहीं है !!! यह महंगाई , बेरोजगारी या गाय का मुद्दा नहीं है। यह देश से सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है। लेकिन संघ के सभी कार्यकर्ता इन घुसपेठियो के समर्थन में खड़े है !! क्यों ? इसका जवाब उनसे आप खुद लीजिये।
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अभी तो बच्चा पैदा भी नहीं हुआ, थोडा सब्र रखो, हथेली पर सरसों नहीं उगती, धीरे धीरे सब हो जाएगा, जब कोंग्रेस इन्हें ला रही थी तब तुम कहाँ थे, सारे काम एक ही दिन में नहीं होते, अभी इन्हें खदेड़ने का सही टाइम नहीं आया , इसकी रणनीति बनायी जा रही है , जल्दी ही इन्हें खदेड़ने का क़ानून बनेगा, पहले नोटबंदी और जीएसटी जरूरी था -- पिछले तीन साल से ये लोग इस तरह की कहानीयां एवं कवितायेँ सुना कर समय काट रहे है, ताकि 2019 का चुनाव पकड़ा जा सके।
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और अब इन्होने नया पैंतरा चला है। पहले इन्होने देश में रोहिंग्यो को घुसा दिया और अब इन्हें बाहर निकालने की "बातें" कर रहे है। हालांकि भगा इन्हें भी नहीं रहे है !! इन्होने बांग्लादेशी घुसपेठियो के मुद्दे को किनारे करने के लिए रोहिंग्यो के मुद्दे को इस तरह से उठाना शुरू कर दिया है जैसे मूल मुद्दा रोहिंग्ये हो !!! ध्वनित कुछ इस तरह हो रहा है कि 40 हजार रोहिंग्यो को बाहर करने से 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठियो की समस्या का हल हो जाएगा। मतलब बांग्लादेशी घुसपेठियो को तो खदेड़ना नहीं है, तो पहले रोहिंग्यो को बुला लो और हंगामा मचाकर उन्हें ही फिर से बाहर निकाल दो !!!
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राईट टू रिकॉल ग्रुप ने आज से 9 साल पहले ही बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने के लिए आवश्यक प्रक्रिया का कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित कर दिया था। हमने देश के सभी संगठनों / पार्टियो / नेताओं को बार बार यह ड्राफ्ट गेजेट में छापने का आग्रह किया है। किन्तु आज तक किसी भी पार्टी / नेता ने इसका समर्थन नहीं किया !! सभी राजनैतिक पार्टियाँ ऐसे सभी प्रकार के क़ानून के खिलाफ है जिससे इन्हें खदेड़ा जा सके। हमने संघ=बीजेपी ( गंगाधर = शक्तिमान ) को भी कई दफा ये ड्राफ्ट दिया। किन्तु उन्होंने हमेशा इसका विरोध किया। मुतमईन होने के लिए आप खुद संघ के कार्यकर्ताओ से पूछ सकते है। जहाँ तक सोनिया और केजरीवाल की बात है तो वे भी इन घुसपेठियो के समर्थक है।
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क्यों कोंग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी, तृणमूल , सपा. बसपा आदि पार्टियाँ बांग्लादेशी घुसपेठियो का समर्थन करती है ?
वजह वोट बैंक नहीं है। मेरा अनुमान ( जैसा मुझे कोंग्रेस एवं बीजेपी के कार्यकर्ताओ ने बताया ) है कि वजह वह पैसा है जो इनके सांसदों को सउदी अरब से मिलता है। सऊदी अरब इन घुसपेठियो को न खदेड़ने का क़ानून न बनाने के लिए सालाना कई हजार करोड़ रुपया भेजता है। यह पैसा प्रत्येक पार्टी के सांसदों में बंटता है। जिसके जितने सांसद और विधायक उसको उतना पैसा। इसमें से सांसदों एवं विधायको को इसमें से कितना पैसा पहुँचता है या पहुँचता है भी या नहीं इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। पार्टी के शीर्ष नेता यह पैसा विभिन्न रूपों में प्राप्त कर लेते है। यदि वे ऐसा क़ानून बना देंगे तो यह पैसा आना बंद हो जायेगा। तो वे पैसा लेते रहते है , और इन्हें भारत में रहने देते है।
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समाधान ?
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पिछले 25 सालो में सभी पार्टियो की सत्ता केंद्र एवं राज्यों में रही है। लेकिन किसी भी पार्टी ने इस बारे में कभी भी ऐसा कोई क़ानून नही बनाया है जिससे इन घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ा जा सके। सिर्फ गुजरात एवं दिल्ली में ही लगभग 5 लाख घुसपेठिये रह रहे है। किन्तु न तो मोदी साहेब ने अपने 13 साल के शासन में और न ही केजरीवाल जी ने अपने 2 साल के शासन में इन्हें खदेड़ा। और पीएम बनने के बाद से तो मोदी साहेब इन मुद्दे पर एकदम सुन्न हो गए है।
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यदि आप इन घुसपेठियो को खदेड़ना चाहते है तो सरकार पर ऐसे क़ानून को लागू करने का दबाव बनाए जिससे इन्हें खदेड़ा जा सके। भारत में बसे और घुसे हुए इन घुसपेठियो को चिन्हित करने , खोजने और इन्हें खदेड़ने के लिए जिस क़ानून की जरूरत है उसका अपडेटेड ड्राफ्ट हम जल्द ही उपलब्ध करवाएंगे।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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Wed Sep 20 2017 10:10:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
बांग्लादेशी घुसपैठियो को खदेड़ने को लेकर आवश्यक क़ानून लागू न करने के बचाव में दिए जाने वाला सामान्य तर्क एवं उसका जवाब :
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"सब काम धीरे धीरे होता है। जल्दबाजी न करिये। थोड़ा शान्ति रखिये। सब कुछ होगा।"
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यह मिसाल अप्रासंगिक है, और मामले को किनारे करने के लिए दी जाती है। सभी काम धीरे धीरे या आराम से नहीं किये जाते। किसी काम को कितनी त्वरित गति से करना है यह अमुक कार्य की प्रकृति एवं परिस्थिति पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए सभी शारीरिक व्याधियों का इलाज यदि त्वरित रूप से न किया जाए तो वे जड़ पकड़ लेती है। ये घुसपैठिये पिछले कई सालो से रह रहे है। और इस काम को धीरे धीरे करने के चक्कर में ही इसे पिछले 25 सालों से टाला जा रहा है। और जितना ही हम विलम्ब कर रहे है उतना ही इनकी जड़े मजबूत हो रही है। उदाहरण के लिए यदि इन्हे 2 साल पहले खदेड़ दिया जाता तो इनके पास आधार कार्ड नहीं होते थे। किन्तु धीरे-धीरे का डायलॉग देने वालो ने तीन साल का टाइम पास करवा दिया है और अब ये व्याधि और भी विकट हो गयी है। दरअसल जब आप इस मुद्दे पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि जितनी देरी की जा सकती थी, उससे ज्यादा देरी हो चुकी है। स्थिति हमारे नियंत्रण से बाहर नहीं जा रही है बल्कि यह नियंत्रण से बाहर जा चुकी है !!
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दूसरी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि किसी काम को धीरे या तेज करने का प्रश्न तब खड़ा होता है जब किसी कार्य को "शुरू" किया जाए। यदि आप किसी कार्य की "शुरुआत" को ही टाल देते है तो, न तो काम कभी शुरू होगा और न ही यह कभी पूरा होगा। इन्हे खदेड़ने के लिए हमें जिस क़ानून की जरूरत है पहले हमें उसका ड्राफ्ट चाहिए। सरकार का तरीका यह है कि वह पहले किसी क़ानून का ड्राफ्ट तैयार करती है। फिर यह ड्राफ्ट साल छह महीने तक संसदीय कमेटी, केबिनेट आदि की बैठकों में घूमता है। कभी कभी इस प्रक्रिया में साल-दो साल गुजर जाते है। यदि क़ानून में कोई प्रशासनिक / संवैधानिक / कानूनी त्रुटि है तो इसे फिर से सम्पादित किया जाता है। सम्पादन के बाद पूरी प्रक्रिया का दोहराव होता है। ड्राफ्ट ओके होने के बाद यदि इसे संसद से पास करना है तो सदन की बैठक का इन्तजार करना होता है। फिर लोकसभा से पास होता है और राज्यसभा में जाता है। राज्यसभा के पास फिर से 6 महीने तक टाइम पास करने का पॉवर है। फिर राष्ट्रपति के पास जाता है , और राष्ट्पति भी 6 महीने का टाइम पास कर सकता है !!! मतलब जब किसी काम को धीरे धीरे करना है तो नेता सत्ता में होने के बावजूद पूरी जिंदगी निकाल सकते है। और यदि तेजी से करना है तो भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की तरह सारा काम सप्ताह भर में हो जाता है।
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और क़ानून पास होने के बाद इसके निष्पादन की बारी आती है। निष्पादन में कितना समय लगेगा यह भी ड्राफ्ट देखने से ही मालूम होगा। लेकिन इतना तो तय है कि सवा सौ करोड़ के देश में से 3 करोड़ को ढूंढ कर भगाना आसान नहीं है। क़ानून बन जाने के बाद भी इसके निष्पादन में वक्त लगेगा। यह तो नोटबंदी की तरह नहीं है कि क़ानून आने के अगले दिन में घुसपैठिये लाइन लगा कर निकलना शुरू कर देंगे। पर निष्पादन तो बहुत दूर की कौड़ी है , अभी तो "धीरे धीरे" करने की सलाहें देने वाले कच्चा ड्राफ्ट तक रखने को राजी नहीं है। वे प्रारम्भिक चरण को ही टालना चाहते है !!
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जहां तक हमारी बात है, तो हमने इन घुसपेठियो को खदेड़ने के लिए जो ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है , उसे लोकसभा या राज्यसभा से पास करने की जरूरत ही नहीं है। इस पर प्रधानमंत्री हस्ताक्षर करके सीधे गैजेट में प्रकाशित कर सकते है। गैजेट में आने से यह देश में लागू हो जायेगा। तो जिसकी भी मंशा इन्हे खदेड़ने की है वह सबसे पहले इसका ड्राफ्ट सामने रखेगा। ताकि यह जाना जा सके कि क्या यह क़ानून घुसपेठियो को चिन्हित करने और उन्हें खदेड़ने के लिए पर्याप्त है तथा इस क़ानून को लागू करने के लिए किस प्रक्रिया की आवश्यकता है।
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हम "धीरे धीरे" का तर्क देने वालों से पूछना चाहते है कि क्या उन्होंने या उनका समर्थन प्राप्त किसी पार्टी या किसी संगठन ने अब तक इन्हे खदेड़ने का कानूनी ड्राफ्ट सामने रखा है ? नहीं रखा है !! तो आप उनसे इसका ड्राफ्ट क्यों नहीं मांगते ? संघ=बीजेपी (गंगाधर =शक्तिमान ) से हम पिछले 4 वर्ष से आग्रह कर रहे है कि इसका ड्राफ्ट तो देंवे , ताकि हम प्रक्रिया देख सके। किन्तु ड्राफ्ट की बात आते ही वे इसे सिरे से उड़ा देते है। और कांग्रेस ने तो हमेशा से यही कहा है कि हमारा इस मुद्दे में इंट्रेस्ट ही नहीं है। इस मुद्दे पर बात करनी है तो कोई दूसरी पार्टी पकड़ो।
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तो जो भी लोग इस मुद्दे पर यह सलाहें देते है कि -- "थोड़ा इन्तजार करो" , उन्हें हमारा जवाब है कि बिलकुल हम इन्तजार करने को तैयार है, लेकिन कम से कम वे इसका ड्राफ्ट तो सामने रखें !! जब आप ड्राफ्ट सामने रखेंगे तो हम इस बात से मुतमईन हो जाएंगे कि आपने काम शुरू कर दिया है , और हम यह भी जान सकेंगे कि क्या ड्राफ्ट में सुझाई गयी आपकी प्रक्रिया इन्हे देश से बाहर खदेड़ने के लिए सटीक है या नहीं है। यदि आप तुरंत इसका ड्राफ्ट सामने नहीं रखते तो एक टाइम फ्रेम तो दीजिये कि कब तक आप इसका ड्राफ्ट सामने रखेंगे ? एक सप्ताह, एक महीना, एक साल !!! कब तक ? 25 साल तो हो चुके है !! ड्राफ्ट देने में कितना टाइम और चाहिए आपको ? 50 साल 100 साल ?
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ड्राफ्ट सामने आने बाद ही यह मालूम होगा कि इसे संसद से पास करना है या संविधान संशोधन लाना है या केबिनेट से पास करना है। पर ये सब विषय तब निकलकर आएंगे जब आप ड्राफ्ट सामने रखेंगे। जीएसटी का प्रारंभिक ड्राफ्ट 2012 में सार्वजनिक किया गया था। लागू 2017 में हुआ है। और अभी तक यह सुचारु नहीं हुआ है। इसे और दो वर्ष सुचारु होने में लगेंगे !!
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हमने अपना लिखित ड्राफ्ट 2009 में प्रकाशित कर दिया था। इसे हम फिर से संशोधित कर रहे है। संशोधन करके 2 दिवस के भीतर यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगा। तो मेरा आप कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि आप जिस भी पार्टी / संगठन से सम्बद्ध है , उनसे बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने का ड्राफ्ट सामने रखने को कहें। यदि वे ड्राफ्ट नहीं देते है तो आपको इस बात को समझने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए कि उनकी मंशा इन्हे खदेड़ने की नहीं है। दरअसल वे इस मुद्दे का दोहन दो तरीके से कर रहे है -- चुनावों में वे इससे वोट बटोरते है और सत्ता में आने के बाद वे सऊदी अरेबिया के धनिको से इन्हे न खदेड़ने के एवज में नोट बटोरते है।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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Wed Sep 20 2017 18:32:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पिछले 3 साल में कितने बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ा गया है = शून्य
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पिछले 3 साल में कितने नए बांग्लादेशी घुसपैठिये भारत में घुस गए है = कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं। किन्तु घुसपैठ में गिरावट के कोई संकेत नहीं है।
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पिछले 3 साल में कितने रोहिंग्यो को देश से बाहर निकाला गया है = शून्य
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तो रोहिंग्यो के मुद्दे को इसीलिए उछाला जा रहा है ताकि बांग्लादेशी घुसपेठियो को न खदेड़ने की असफलता को छुपाया जा सके !!
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मतलब ,मोदी साहेब और संघ के नेता कह रहे है कि -- हमें अभी "सिर्फ" रोहिंग्यो की समस्या पर ही ध्यान देना चाहिए , बांग्लादेशी घुसपेठियो पर नहीं !!!
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भारत में लगभग 50 हजार रोहिंग्या है। लगभग 5000 - 10,000 तो सिर्फ दिल्ली एनसीआर में ही है !!
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सभी रोहिंग्यो को कुछ ही हफ्तों में घेर कर देश से बाहर निकाला जा सकता है।
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बांग्लादेशी घुसपेठिये संघ=बीजेपी ( गंगाधर = शक्तिमान ) को वोट नहीं करते। फिर भी क्या वजह है कि मोदी साहेब और संघ के नेता इन्हें खदेड़ने के लिए आवश्यक कानून का विरोध कर रहे है ? अनुमान लगाइए !!
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( संकेत - सऊदी अरब से आने वाला पैसा )
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कृपया ऐसे क़ानून का समर्थन करे जिससे बांग्लादेशी घुसपेठियो को चिन्हित करके खदेड़ा जा सके, और बांग्लादेशी शर्णार्थियो की पहचान करके उन्हें भारत की नागरिकता दी जा सके।
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यदि आपकी रुचि इन घुसपेठियो को खदेड़ने में है तो कृपया कोंग्रेस / संघ / आम आदमी पार्टी से उम्मीद रखकर अपना समय नष्ट न करे, बल्कि सरकार पर दबाव बनाए कि इन्हें खदेड़ने के लिए आवश्यक क़ानून को जल्द से जल्द लागू करें। इसके लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट हम जल्दी ही उपलब्ध करवाएंगे।
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Thu Sep 21 2017 16:54:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सभी के लिए संवाद स्तम्भ - 3 ,
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यह स्तम्भ देश की राजनेतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक प्रशासन से सम्बंधित समस्याओं और उनके समाधान को लेकर पूछे जाने वाले प्रश्नों और टिप्पणियों के लिए बनाया गया है ।
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कोई भी व्यक्ति इन विषयों के सम्बन्ध में यदि कोई प्रश्न रखना चाहता है, तो वह कमेन्ट बॉक्स में अपना प्रश्न या टिपण्णी रख सकता है । मैं समय की अनुकूलता के अनुसार इन प्रश्नों के उत्तर दूंगा ।
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यह तीसरा 'सम्वाद स्तम्भ' है। अन्य दो संवाद स्तम्भों का लिंक इस पोस्ट के पहले कमेन्ट में दिया गया है।
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प्रश्नकर्ताओं से निम्नलिखित नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है :
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(1) हिन्दी भाषा के लिए हिन्दी लिपि और अंग्रेजी भाषा के लिए अंग्रेजी लिपि का प्रयोग करें। रोमन भाषा का प्रयोग नहीं करे ।
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(2) दो पेराग्राफ के बीच '.' चिन्ह का प्रयोग करे ।
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(3) लेखन में अनावश्यक चिन्हों जैसे '.......', '!!!!!!!', '//////', '####', '„„„„„„', '??????' आदि का तथा अनावश्यक 'केपिटल लेटर्स' का प्रयोग नहीं करें ।
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(4) एक बार में एक ही कमेन्ट करे । यदि आपने दो कमेन्ट एक साथ किये है तो,
अ) पहले कमेन्ट को एडिट करें
ब) दुसरे कमेन्ट को कोपी करके पहले वाले कमेन्ट में पेस्ट करे
स) फिर दुसरे कमेन्ट को डिलीट कर दें ।
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(5) कमेन्ट अक्रमिक रूप से करे। निरंतर कमेंट्स न करें ।
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निरंतर कमेन्ट क्या है ?
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मान लीजिये कि
अ) आपने 'पहला' कमेन्ट किया है,
ब) मैंने 'दूसरा' कमेन्ट किया है,
स) आपने 'तीसरा' कमेन्ट किया है,
द) आपने चौथा कमेन्ट किया है ।
तो यहाँ पहला, दूसरा और तीसरा अक्रमिक जबकि चौथा कमेन्ट निरंतर है । निरंतर कमेन्ट को बिन्दु 4 में बताये तरीके से संपादित कर पिछले कमेन्ट में जोड़ दें ।
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(6) अपने प्रश्नों तथा टिप्पणियों को डिलीट नहीं करे । ताकि अन्य कार्यकर्ता भी इन्हें पढ़ सके ।
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(7) कृपया मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर को क्लिक करे तथा डिस्क्रिप्शन देखें। वहां उन आदेशो की सूची दी गयी है जो मैंने अपने प्रधानमंत्री को भेजे है। इस सूची में दिए गए क़ानून ड्राफ्ट्स को पढ़ें।
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(8) नोट्स सेक्शन में ही 'विशेष आलेख-01' शीर्षक से दर्ज स्तम्भ में राईट टू रिकाल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कुछ मुख्य कानूनी ड्राफ्ट्स की सूची तथा उनके लिंक देखे जा सकते है ।
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(9) इस स्तम्भ का लिंक देखने के लिए नोट्स सेक्शन में जाकर 'आपसी संवाद स्तम्भ' या 'two person conversation thread' शीर्षक से रखे गए स्तम्भ को देखें । इस स्तम्भ का लिंक वहां दर्ज किया गया है ।
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(10) हम देश में व्यवस्था परिवर्तन के लिए आवश्यक जूरी सिस्टम/राईट टू रिकाल कानूनों का मुक्त रूप से प्रचार करते है ताकि करोड़ो नागरिको की सहमति से इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित कराया जा सके । आप से अपेक्षा की जाती है कि प्रश्न/कमेंट्स पठनीय भाषा में रखें ।
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(11) कृपया रिप्लाय केप्शन में कमेंट्स न करे। सभी कमेंट्स liner कमेन्ट बॉक्स में ही करें
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(12) कोई भी कमेंट करने से पहले कृपया इस स्तम्भ का पहला कमेन्ट पढ़ें।
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Thu Sep 21 2017 18:01:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
[ बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने के लिए कानूनी ड्राफ्ट ]
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EIAR - बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार आदि से आने वाले घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को शरण देने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट।
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EIAR Act – Expelling Infiltrators and allowing Refugees from Bangladesh, Pakistan, Sri Lanka, Myanmar etc.
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भारत के नागरिको ,
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भारत में लगभग 2 से 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठिये अवैध रूप से रह रहे है। ये पूरे देश में फैले हुए है, और इनके पास आधार कार्ड से लेकर राशन कार्ड, लाइसेंस, बिजली-पानी के बिल आदि सभी दस्तावेज है। मतदाता सूचियों में भी इनके नाम दर्ज है। ये घुसपेठिये पिछले कई वर्ष से निरंतर भारत में आकर मुख्यतया पूर्वोत्तर वे बसते जा रहे है। इससे एक तरफ भारत की धार्मिक जनसँख्या का संतुलन बिगड़ रहा है वहीं दूसरी तरफ ये लोग भारत पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा रहे है। और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि इन्हें चीन, पाकिस्तान, एवं सउदी अरब का समर्थन हासिल है। अत: ये घुसपेठिये भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यदि इन्हें हमारे पडोसी देश हथियारों की मदद पहुँचाने लगेंगे तो भारत को एक भीषण गृह युद्ध का सामना करना पड़ सकता है। निचे वह कानूनी ड्राफ्ट दिया गया है जो पूरे देश में फैले इन घुसपेठियो को चिन्हित करने और इन्हें देश से बाहर निकालने की व्यवस्था करता है।
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इस ड्राफ्ट की पीडीऍफ़ फाइल, sha1 हैश एवं मूल अंग्रेजी संस्करण का लिंक कमेंट बॉक्स में देखें। यदि आप इस कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो कृपया अपने पीएम को ट्विट करके कहें कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।
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प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले ट्वीट का प्रारूप :
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@pmoindia I insturct you to print - <https://newindia.in/causes/eiar-2/> sha1- 760246ad1068aa846f5295f717d6eb8a5f15d7a8 #ExpelBanglaInfiltrators
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( कृपया ऊपर दिए गए ट्वीट को कॉपी करे तथा अपने ट्विटर एकाउंट से @pmoindia पर ट्वीट करे। )
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===== घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को शरण देने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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यह क़ानून निम्नलिखित प्रशासनिक प्रक्रियाओ के निष्पादन की व्यवस्था करेगा :
(a) सरकारी अधिकारी बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार तथा अन्य देशो से आने वाले घुसपैठियों और शरणार्थियों को चिन्हित कर सकेंगे।
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(b) सरकारी अधिकारी और जूरी सदस्य यह तय कर सकेंगे कि कोई व्यक्ति एक घुसपैठिया है या एक शरणार्थी या एक प्रमाणित भारतीय नागरिक है।
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(c) यह क़ानून घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को बसने के लिए आवश्यक प्रक्रिया देता है।
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[ टिप्पणी : यह कानूनी ड्राफ्ट प्रधानमंत्री द्वारा राजपत्र अधिसूचना के रूप में छापा जा सकता है | किन्तु इस अधिसूचना को प्रकाशित करना मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसे देश में लागू करने के लिए लोकसभा या राज्यसभा के अनुमोदन की या संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं है |
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इस ड्राफ्ट के दो भाग है --
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भाग - 1 : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग - 2 : अधिकारियों और नागरिकों के लिए अन्य निर्देश और टिप्पणियाँ
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महत्वपूर्ण खंड है -- (1.2), (1.3) , (5.4) , (6.6) , (6.8) , (6.8.1) to (6.8.5) , (8.1) , (8.2)
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दी गयी टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी या मंत्री या जज पर बाध्यकारी नहीं है | जूरी सदस्य, नागरिक या अन्य पक्षकार इनका उपयोग मार्गदर्शक संकेतों के रूप में कर सकते हैं | किन्तु ये टिप्पणियाँ किसी पर भी बाध्यकारी नहीं है | ]
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भाग-1 : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) टिपण्णी : कानून का सार -
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(1.1) टिपण्णी : ये कानून ऐसी प्रक्रिया देता है जिससे केंद्र सरकार के अधिकारी बांग्लादेशी घुसपैठियों व शरणार्थियों को चिन्हित कर सकेंगे और साक्ष्य एकत्रित कर सकेंगे, ताकि यह साबित / ख़ारिज किया जा सके कि कोई व्यक्ति बांग्लादेशी है या प्रमाणिक भारतीय नागरिक है या वह एक घुसपैठिया है या वह कोई शरणार्थी है |
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(1.2) टिपण्णी : सम्बंधित अधिकारी आरोपी द्वारा बांग्लादेश में उसके रक्त सम्बन्धियों को किये गए फ़ोन कॉल्स की जानकारी, ब्लड ग्रुप की जानकारी और डीएनए नमूनों की जानकारी जुटाएंगे | अधिकारी संबधित देश से ऐसे सभी वांछित दस्तावेज भी जुटाएंगे , जिनसे यह साबित किया जा सके कि आरोपी बांग्लादेशी है या नहीं |
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(1.3) टिपण्णी : अधिकारी सभी उपलब्ध तथ्य एवं साक्ष्य जूरी सदस्यों के सामने रखेंगे | जूरी सदस्य इन तथ्यों, गवाहों, दस्तावेजो आदि का अवलोकन करके और यदि जरूरत हो तो पब्लिक में नार्को टेस्ट का प्रयोग करके यह सुनिश्चित करेंगे कि क्या अमुक आरोपी बांग्लादेशी है या प्रमाणिक भारतीय नागरिक या वह एक घुसपैठिया है या फिर वह एक शरणार्थी है | यदि वह एक घुसपैठिया है, तो जूरी सदस्य इसके लिए सजा निर्धारित करेंगे |
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(2) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एवं राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार
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(2.1) प्रधानमंत्री घुसपैठियों और शरणार्थीयों मामलो के पर्यवेक्षण एवं अनुसन्धान के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेंगे, जिसे राष्ट्रीय रजिस्ट्रार ( NR ) कहा जाएगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार संबंधित कार्य करने के लिए राज्य रजिस्ट्रारों , जिला रजिस्ट्रारों तथा अन्य अधिकारियों की नियुक्ति करेगा |
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(2.2) यदि आप (यहाँ "आप" शब्द से आशय भारत के प्रत्येक पंजीकृत मतदाता से है ) पदासीन राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के कार्य कलापों से असंतुष्ट हैं तो आप अपनी इच्छानुसार अधिकतम 5 वैकल्पिक उम्मीदवारों को इस पद के लिए अनुमोदित कर सकेंगे | यदि किसी उम्मीदवार को भारत के 45 करोड़ से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्त हो जाता है, तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त उम्मीदवार को राष्ट्रीय रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकते हैं | अर्थात आप यानी भारत के मतदाताओं के पास "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार" की प्रक्रिया होगी | इस प्रक्रिया की जानकारी "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार" (RTR) खंड की धाराओं में दी गयी है |
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भाग-2 : अधिकारियों और नागरिकों के लिए अन्य निर्देश और टिप्पणियाँ
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(3) प्रधानमंत्री घुसपैठियों और शरणार्थीयों मामलो के पर्यवेक्षण एवं अनुसन्धान के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेंगे, जिसे राष्ट्रीय रजिस्ट्रार ( NR ) कहा जाएगा | भारत के मतदाता पदासीन राष्ट्रीय रजिस्ट्रार को “राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार” प्रक्रियाओ का प्रयोग करके बदल सकेंगे |
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(4) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार राज्य रजिस्ट्रारों एवं जिला रजिस्ट्रारों की नियुक्ति करेगा और राज्य रजिस्ट्रारों और जिला रजिस्ट्रारों के लिए राईट टू रिकॉल प्रक्रिया को भी लागू करेगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार / राज्य रजिस्ट्रार / जिला रजिस्ट्रार अस्थायी तौर पर अधिकतम 2 वर्षों के लिए केंद्र / राज्य सरकार से वांछित अधिकारियों को डेपुटेशन पर नियुक्त कर सकते है या प्रति नियुक्ति पर केंद्र या राज्य सरकार से अधिकारी ले सकते है |
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(5) प्रथम चरण - फ़ोन कॉल्स और अन्य जानकारी जुटा कर बांग्लादेशियों की सूची तैयार करना
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(5.1) प्रधानमंत्री दूरसंचार विभाग को आदेश करेंगे कि वह राष्ट्रीय रजिस्ट्रार को पिछले 2 वर्षों में बांग्लादेश से किये गए और बांग्लादेश को किये गए सभी फ़ोन कॉल्स की सूची दे | इस विवरण का उपयोग करके राष्ट्रीय रजिस्ट्रार बांग्लादेशी संदिग्धों की सूची बनाएगा |
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(5.2) कोई भी भारतीय नागरिक निजी या सार्वजनिक रूप से बांग्लादेशी संदिग्धों की सूची दे सकता है, और उसे ये सूची संदेह के आधार पर घटते क्रम में बनानी होगी | यदि सूची में 20% से भी कम त्रुटियाँ हुई, तब राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उस व्यक्ति की इच्छानुसार उसे निजी या सार्वजनिक रूप से पारितोषिक दे सकता है |
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(5.3) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अपने विवेक और प्राप्त की गयी श्रेष्ठतम के आधार पर भारत के प्रत्येक जिले में बांग्लादेशियों की अनुमानित संख्या बताएगा |
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(5.4) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार बांग्लादेश में एजेंटों की नियुक्ति करेगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अपने एजेंटों से भारत में रह रहे संदिग्धों के बांग्लादेश में निवास कर रहे रक्त संबंधियों के ब्लड ग्रुप और डीएनए नमूनों की जानकारी जुटाने के लिए कहेगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एजेंटों से ऐसे दस्तावेज जुटाने के लिए भी कहेगा जो संदिग्धों के बांग्लादेशी मूल का होना प्रमाणित करें |
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(5.5) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार संदिग्धों के नाम, चित्र और अन्य जानकारी सरकारी वेबसाइट पर रख सकता है, और उनके बांग्लादेशी संबंधियों के नाम और अन्य जानकारी देने के लिए सभी से निवेदन भी कर सकता है।
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(5.6) दुसरे चरण में राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उन संदिग्धों की सूची तैयार करेगा जिनके बांग्लादेशी होने पर वह आश्वस्त है |
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(6) जूरी द्वारा सुनवाई ; यह सुनिश्चित करने के लिए कि संदिग्ध व्यक्ति घुसपैठिया है या शरणार्थी
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(6.1) प्रत्येक संदिग्ध की सुनवाई के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रार 30 से 55 वर्ष की आयु के मध्य के 100 मतदाताओं को 5 विभिन्न जिलो से चुनेगा | प्रथम जिला वह होगा जो उस जिले से सबसे निकट है, जहाँ से संदिग्ध पकड़ा गया है और जहाँ बांग्लादेशी जनसँख्या 10% से कम भी है। किसी जिले में बांग्लादेशी घुसपेठियो की संख्या का प्रतिशत राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अपनी जानकारी के आधार पर तय करेगा | अन्य 4 जिलें प्रथम जिले के निकटतम 4 जिलों में से होंगे और प्रत्येक जिले की बांग्लादेशी जनसँख्या 10% से कम होनी चाहिए |
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(6.2) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार हर जिले से क्रमरहित ( रेंडमली ) तरीके से 20 मतदाताओं को चुनेगा |
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(6.3) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार जिलों की संख्या 10 तक बढ़ा सकता है, और ऊपर दी गयी प्रक्रिया का प्रयोग करके प्रत्येक जिले से 20 मतदाताओं को क्रमरहित तरीके से चुन सकता है | जिलों की संख्या के संबंध में अंतिम निर्णय राष्ट्रीय रजिस्ट्रार का होगा |
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(6.4) आरोपी जूरी सदस्य को बताएगा कि, क्या वह भारत में पैदा हुआ था या फिर अन्य किस देश में पैदा हुआ था | यदि वह भारत में पैदा हुआ था तो किस शहर या गाँव में पैदा हुआ था तथा उसकी स्कूली शिक्षा कहाँ हुयी थी। वह अपने माता-पिता, भाई-बहन, सगे संबंधियों इत्यादि के बारे में भी विवरण देगा | यदि वह भारत के बाहर पैदा हुआ था, तो फिर वह भारत में रहने क्यों और कब आया था |
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(6.5) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के अधिकारी भी जूरी सदस्यों को यह जानकारी देंगे कि क्या अमुक व्यक्ति भारत में या भारत के बाहर पैदा हुआ था, और क्या वह एक घुसपैठिया है या फिर वह एक शरणार्थी है |
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(6.6) यदि 50 से अधिक जूरी सदस्य आरोपी का सार्वजनिक रूप से पॉलीग्राफ टेस्ट, ब्रैनमैपिंग और / या सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने की सलाह देते हैं, तब ये टेस्ट लिए जायेंगे | प्रत्येक जूरी सदस्य अपना प्रश्न सुझाएगा और प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक प्रश्न को 0-100 के बीच अंक देगा। सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रश्नों को पहले पुछा जायेगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सार्वजनिक नार्को-टेस्ट और ब्रेन-मैपिंग के लिए डॉक्टर का चयन करेगा | किन्तु यदि 67 से अधिक जूरी सदस्य किसी अन्य डॉक्टर को स्वीकृत करते है, तो उसी डॉक्टर को चुना जाएगा, जिसे जूरी सदस्यों ने स्वीकृत किया है | चुने हुए डॉक्टर के पास राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बताई गयी डिग्रीयां होनी चाहिए |
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(6.7) सभी पक्षों को सुनने के बाद, प्रत्येक जूरी सदस्य अपनी राय बताएगा कि उसके विचार में आरोपी एक प्रमाणित भारतीय नागरिक है या घुसपैठिया है या फिर वह एक शरणार्थी है | प्रत्येक जूरी सदस्य यह भी बतायेगा कि यदि आरोपी एक घुसपेठिया है तो भारत में अनुचित तरीके से प्रवेश करने के लिए उसे कितने वर्षों के लिए कारावास होना चाहिए और कितना जुर्माना उस पर लगाना चाहिए, और यदि आरोपी एक शरणार्थी या भारतीय नागरिक है, तो उसको हुयी असुविधा के लिए मुआवजे की राशि कितनी होनी चाहिए। मुआवजे की राशि न्यूनतम 0 से अधिकतम 1,00,000 के मध्य होगी |
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(6.8) नागरिक, शरणार्थी या घुसपैठिया होने का निर्णयन
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(6.8.1) यदि 67% से अधिक जूरी सदस्य आरोपी को घुसपैठिया घोषित कर देते हैं तो राष्ट्रीय रजिस्ट्रार प्रत्येक जूरी सदस्य द्वारा सुझाई गयी कारावास महीनो की मध्यस्थ संख्या को चुनेगा और उसे उतने महीनों के लिए जेल में डाल देगा। कारावास अवधि पूर्ण होने पर राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उसे वापिस उस देश में भेज देगा जहाँ से वह आया था।
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(6.8.2) यदि 50% से अधिक लेकिन 67% से कम जूरी सदस्य राय देते हैं कि वह घुसपैठिया है, तब उसे कारावास नहीं होगा एवं उसे भारत में रहने दिया जायेगा। किन्तु उसके रहने का जिला राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा तय किया जाएगा |
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(6.8.3) यदि 50% या उससे कम जूरी सदस्य तय करते हैं कि वह घुसपैठिया है, तो उसे कोई सजा नहीं मिलेगी |
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(6.8.4) यदि 50% से अधिक जूरी सदस्य उसे भारतीय नागरिक घोषित करते हैं, तब उसके विरुद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं होगी और उसके विरुद्ध कोई प्रतिबंध नहीं होंगे , तथा राष्ट्रीय रजिस्ट्रार ज्यूरी सदस्यों द्वारा सुझायी गयी राशियों की मध्यस्थ राशि के बराबर मुआवज़ा देगा |
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(6.8.5) यदि 50% से अधिक जूरी सदस्य उसे गैर-भारतीय नागरिक पर एक शरणार्थी घोषित करते हैं, तब वह भारत में एक निवासी के रूप में राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बताये गए किसी जिले में रह सकता है, तथा बाद में वह नागरिकता के लिए भी आवेदन दे सकता है |
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(7) याचिकाएँ
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(7.1) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार या अपराधी, जूरी सदस्य के फैसले की अपील कर सकते है। यह अपील जिस ज्यूरी मंडल के सामने की जायेगी उस जूरी में प्राथमिक जूरी मंडल के दोगुने जिलो से जूरी मंडल चुना जाएगा, तथा प्रत्येक जिले में से राष्ट्रीय रजिस्ट्रार 20 जूरी सदस्य क्रमरहित तरीके से चुनेगा |
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(7.2) द्वितीयक जूरी के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जा सकेगी |
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(8) कारावास / सज़ा में कटौती
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(8.1) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के अधिकारी अपराधी से सगे-संबंधियों के नाम और पते बताने के लिए कहेंगे | यदि वह अपने सगे संबंधियों या अन्य घुसपैठियों के बारे में जानकारी एवं सबूत दे देता है तो राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उसकी सज़ा 1 महीने तक घटा देगा |
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(8.2) यदि राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अधिकारीयों को शुबहा हो तो अपराधी से अन्य घुसपैठियों के नाम उगलवाने के लिए वे उसका सार्वजनिक नार्को टेस्ट ले सकते हैं।
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(9) शरणार्थियों का भार पूरे भारत में विभाजित करने के लिए जिलो का निर्धारण
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(9.1) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उन जिलो की सूची तैयार करेगा जहाँ शरणार्थियों की जनसँख्या कम है | ( टिप्पणी : इस तरह असम ,पश्चिम बंगाल , दिल्ली, उत्तर पूर्व राज्य , मुंबई , गुडगाँव , नॉएडा ,आदि इलाको के जिलों के नाम इस सूची में नहीं आयेंगे। क्योंकि ये क्षेत्र पहले ही अपने हिस्से के शरणार्थियों को शरण दे चुके हैं ) |
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(9.2) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सीमावर्ती जिलो एवं ऐसे जिलो को जहाँ आर्थिक अवसर कम है सूची में से हटा देगा | ( टिप्पणी : सीमावर्ती जिले सुरक्षा की दृष्टी से संवेदनशील होते है तथा कम आर्थिक अवसरो वाले शहर शरणार्थियों को जीवन यापन के लिए पर्याप्त अवसर नही दे सकेंगे।)
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(9.3) शरणार्थियों को उन जिलो में ही निवास करना होगा जिन्हें सूची में दर्ज किया गया है।
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(RTR) घुसपैठियों और शरणार्थीयों मामलो के लिए "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार"
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(RTR.1) यदि भारत का कोई मतदाता राष्ट्रीय रजिस्ट्रार बनना चाहता है, तो वह व्यक्तिगत रूप से अपने जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित हो सकता है | जिला कलेक्टर उससे सांसद के चुनाव में जमा होने वाली राशि के बराबर का आवेदन शुल्क लेकर राष्ट्रीय रजिस्ट्रार पद के लिए उसकी उम्मीदवारी स्वीकार करेगा और उसे एक विशिष्ट एक सीरियल नंबर जारी करेगा |
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(RTR.2) कोई भी मतदाता पटवारी कार्यालय में 3 रू शुल्क देकर अधिकतम 5 उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रजिस्ट्रार पद के लिए अनुमोदित कर सकता है | पटवारी उसके अनुमोदनो को कंप्यूटर में डालेगा और उस व्यक्ति का मतदाता पहचान पत्र संख्या, समय / दिनांक और उसके द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नामो को दर्ज करके एक रसीद देगा | पटवारी नागरिक द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर नागरिक के मतदाता पहचान पत्र संख्या के साथ रखेगा |
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(RTR.3) यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा।
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(RTR.4) यदि किसी उम्मीदवार को 43 करोड़ से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्त है और यह अनुमोदन यदि पदासीन राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के अनुमोदनों से 1 करोड़ अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन पाने वाले व्यक्ति को नए राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त कर सकते हैं, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है | इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा |
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(RTR.5) यदि पदासीन राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के पास 35 करोड़ से कम अनुमोदन है तो प्रधानमंत्री उसे बदल सकते है |
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(RTR.6) प्रधानमन्त्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे नागरिक अपने अनुमोदन एस.एम.एस या एटीएम या मोबाइल फ़ोन एप्प के माध्यम से दर्ज / रद्द करवा सके |
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(RTR.7) टिप्पणी : भविष्य में प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है, जहाँ मतदाता किसी उम्मीदवार को (-100 से 100) तक के अंक दे सके | इस तरह मतदाता के पास विकल्प होगा कि वह स्वीकृती या अस्वीकृती के साथ अंक भी दे सके। यदि मतदाता ने अंक नहीं दिए है और सिर्फ स्वीकृति / अस्वीकृति दी है तो अस्वीकृति का अर्थ शून्य अंक तथा स्वीकृति का अर्थ 100 अंक होगा | यदि किसी उम्मीदवार को मिले सकारात्मक अंक सभी दर्ज मतदाताओं के 33% से अधिक है तो उसके नकारात्मक अंको को ख़ारिज कर दिया जाएगा। जिस उम्मीदवार के पास अधिकतम अंक होंगे और जिसके पास संभावित अधिकतम अंको के 51% से अधिक भी अंक होंगे उसे राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया जा सकेगा |
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(CV) जनता की आवाज (Citizens’ Voice):
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(CV.1 ) यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस कानून से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र (फोटो) एवं अन्य विवरण के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2 ) किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो, तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाएगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा । मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा। हाँ / नही की गिनती प्रधानमंत्री या किसी अधिकारी या अन्य पर बाध्यकारी नहीं होगी |
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===== घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को शरण देने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का समापन ====
Thu Sep 21 2017 20:07:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
गंगाधर को शक्तिमान की जरूरत क्यों है ?
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संघ की स्थापना 1925 में हुयी थी। 1947 तक संघ ने अराजनैतिक गतिविधियां संचालित की। किन्तु आजादी के तुरंत बाद से ही संघ ने अपनी राजनैतिक इकाई का निर्माण कर दिया था। 1952 में जनसंघ से लेकर जनता पार्टी और अंत में भारतीय जनता पार्टी। बीजेपी का कैडर संघ की शाखाएं ही है , और यही से उन्हें सबसे ज्यादा बल मिलता है। बीजेपी के ज्यादातर शीर्ष नेता संघ से आते है। मोदी साहेब, आडवाणी, अटल , रमन सिंह, शिवराज, खट्टर, फडणवीस आदि सभी संघी है।
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तो संघ का राजनैतिक चेहरा बीजेपी है। किन्तु क्या वजह है कि संघ खुद को वक्त जरूरत बीजेपी से अलग दिखाने की कोशिस करता है ?
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दरअसल जो भी सत्ता में आएगा वह सभी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकता। सत्ता में आने के बाद संगठन की लोकप्रियता में कमी आती है। ज्यादा बुरा शासन होने से पार्टी की लोकप्रियता इतनी गिर सकती है कि वे कभी भी वापसी नहीं कर पाते। क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे सत्ता में होने के बावजूद बुरे शासन की जिम्मेदारी से बचा जा सके ?
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ब्रूस व्येन और गंगाधर इसी तरीके का इस्तेमाल करते है। वे विकट परिस्थिति में हमेशा बेटमेन / शक्तिमान को आगे कर देते है। इस तरह शक्तिमान पिट जाता है लेकिन गंगधार हमेशा बचा रहता है। लोग मानते है कि शक्तिमान गलती कर सकता है , किन्तु एक न एक दिन गंगाधर शक्तिमान को अवश्य रास्ते पर ले आएगा। इस तरह गंगधार हमेशा सर्वाइव करता है। इस वजह से सपा, बसपा, टीएमसी, माकपा, बीजेपी , कांग्रेस , आपा आदि पार्टियां एक न एक दिन जनता का विश्वास खो देती है। लेकिन संघ हमेशा बचा रहेगा। क्योंकि उन्होंने अपने आप को जवाबदेही से और कसौटी पर कसे जाने से बचा लिया है।
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सार्वजनिक / राजनैतिक जीवन में यह एक बारीक़ और सफल रणनीति है। किन्तु किसी संगठन को यह बात छुपानी नहीं चाहिए कि वह सक्रीय राजनीती में है।
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तो इस तरह गंगधार ( संघ ) राजनीति में 70 वर्षो से इसीलिए टिका हुआ है और हमेशा टिका रहेगा क्योंकि उसके पास शक्तिमान ( बीजेपी ) है। और जब शक्तिमान पिट जाएगा तो गंगाधर पक्तिमान बनकर लोगो को बचाने आएगा !!
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जिस दिन लोगो को यह मालूम होगा कि गंगाधर ही शक्तिमान है , उस दिन लोग गंगाधर को भी खारिज कर देंगे। और यही वजह है कि संघ के नेता लगातार इस बात को दोहराते रहते है कि गंगाधर शक्तिमान नहीं है। दोनों अलग अलग आदमी है।
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Fri Sep 22 2017 19:20:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Demonetization effect !! ( Gst is missing in cartoon, which is more dangerous to weaken economy )
Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:
लगातार पिछले 6 तिमाही से जीडीपी मे गिरावट जारी है सरकार विकास दर को बढाना तो दूर स्थिर तक नहीं कर पा रही।
#JumlaUpEconomyDown
Sun Sep 24 2017 19:29:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
जेएनयू मामले में दिल्ली पुलिस ( दिल्ली पुलिस सीधे मोदी साहेब के नियंत्रण में काम करती है ) ने अब तक चार्ज शीट तक फाइल नहीं की है !! और अब बीएचयू पर समय और ऊर्जा जाया की जा रही है !! हमने तब भी बोला था कि नागरिको की जूरी बुलाओ, सप्ताह भर में मामला फैसल हो जायेगा। पर समाधान सनसनी के रस से वंचित कर देता है। राजनीति करने का आरोप लगाना सबसे आला दर्जे की राजनीति है। अत: जो लोग राजनीति करने का आरोप लगा रहे है वे भी दरअसल राजनीति ही कर रहे है। राजनैतिक दलों पर राजनीति करने का आरोप है !! जल्दी ही हमें धावकों पर दौड़ने का और बीमा एजेंटो पर कमीशन खाने का आरोप भी सुनने को मिलेगा !!
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जेएनयू / बीएचयू जैसे प्रकरणों का समाधान -- 25 से 55 वर्ष के आयु वर्ग की नागरिको की ज्यूरी बुलाकर मामले की सुनवाई की जाए। ज्यूरी नियमित रूप से सुबह से शाम तक मामला सुनेगी और फैसला देगी। किसी को फैसले पर ऐतराज हो तो हायर ज्यूरी में अपील कर सकता है।
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जूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/822033977974798>
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समाधान के इच्छुक नागरिक पीएम को यह ट्वीट भेजें :
@pmoindia , @CMOfficeUP , please order trial by jury on BHU probe. <https://newindia.in/causes/jury-sys/> , #JuryTrialOnBhu ,
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Tue Sep 26 2017 17:55:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Vishal Dhokale AmbegaonMh:
क्या आने वाले समय में हिन्दू धर्म आडम्बर और अपराध के पर्याय के रूप में स्थापित हो सकता है ?
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महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ राज्य में कई जगह कुछ गरबा आयोजको ने “साइलेंट गरबा” नाम की अनोखी मुहीम निकाली है| इसमें गरबा खेलने वाले जोड़े कानों में हैडफ़ोन लगाकर गरबा खेलेंगे |
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ऐसा करने का कारण? नवदुर्गा में गरबा खेलने के दौरान होने वाला ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए|
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कृपया “साइलेंट गरबा” पर गूगल करें | साथ में “नॉइज़ फ्री गणपति” पर भी गूगल करें
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बहुत दूर नहीं है वो दिन जब आप दूधरहित शिवरात्रि, पानी रहित कुम्भ स्नान, बिना घी के दीपक की आरती इत्यादि हिन्दू त्यौहारों के रीति-रिवाज अपराध या पाखंड का पर्याय बना दी जाएगी |
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क्या आज से 20 साल पहले आप हिन्दू त्यौहारों के आते ही ये सब सुना करते थे?--
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दिवाली=वायु प्रदुषण+जीवहत्या+पैसे की बर्बादी,
होली= पानी की बर्बादी+ जल प्रदुषण,
दहीहांड़ी=नाबालिक बच्चों के लिए खतरनाक खेल,
गणेशोत्सव = जल प्रदुषण+ ध्वनि प्रदुषण,
नवरात्री में गरबा=ध्वनि प्रदुषण रोकना,
महाशिवरात्रि = लाखो लीटर दूध की दूध की बर्बादी, आदि |
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हिन्दू धरम की सनातन मान्यताएँ जैसे संथारा को आत्महत्या घोषित किया जा रहा है और तिलक लगाना, फूल चढ़ाना, भगवान् का अभिषेक इत्यादि को अवैज्ञानिक बताकर उन्हें आडम्बर या पाखण्ड का पर्याय बताया जा रहा है|
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पर आज हमारे देश में ये सब क्यूँ सुनाई दे रहा है? कारण---
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(1) एफडीआई के जरिये अमेरिका-ब्रिटेन के धनिकों और मिशनरीज़ का भारत में बढ़ता प्रभाव
(2) सऊदी अरेबिया का इस्लामिक जिहाद
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एफडीआई के जरिये विदेशी धनिक देश के मंत्री, जजों, अधिकारीयों और मीडिया को घूस देकर अपनी मुट्ठी में कर लेते हैं और फिर ऐसे कानून देश में बनवाते है जिससे मिशनरीज़ को ईसाइयत फेलाने और धर्म परिवर्तन करवाने में सहूलियत हो सके और स्थानिक धर्मों को कमजोर किया जा सके या उन्हें ख़त्म कर सके | और फिर ये बिकाऊ मीडिया द्वारा उन स्थानिक धर्मों की मान्यताओं और रीती-रिवाजों को पाखंड और अपराध के रूप में प्रसार करवाते हैं| बहुत से एनजीओ जो इन धनिकों के पैसे पर चलते है, सभी हिन्दू धर्म को कमजोर करने के लिए कार्य करते हैं
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प्रशासन और न्यायपालिका में बैठे लोगो को खरीदकर ये धनिक हिन्दू संतों को झूठे मुकदमों में फंसा देते हैं और फिर इन्हें पाखंडी, बलात्कारी, हत्यारे इत्यादि संज्ञा देकर बिकाऊ मीडिया कर्मी जैसे बिकाऊ अर्नब, बिकाऊ सरदेसाई, बिकाऊ रजत शर्मा आदि के द्वारा दिन रात प्रसारित करवाते है | यदि हिन्दू धर्म की रक्षा करने कोई आता है तो बिकाऊ मीडिया वाले उसे भगवा आतंकवादी घोषित कर देते हैं |
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फिर साथ में परेश रावल (उर्फ़ परेश खिलजी), बिकाऊ आमिर खान आदि बिकाऊ अभिनेता ओह माय गॉड, पीके जैसे फिल्मों से हिन्दू धर्म की खिल्ली उड़ाते हैं |
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सऊदी अरेबिया भी इस्लामिक जिहाद को बढ़ने के लिए अनेको मीडिया चैनल में पैसा निवेश करता है और आमिर खान जैसे बिकाऊ अभिनेताओं की फिल्मों में पैसा लगता हैं | साथ में मंत्री और जजों को हिन्दू धर्म को कमजोर करने वाले कानूनों बनाने के लिए और बढ़ते इस्लामिक जिहाद और आतंकवाद को ना रोकने के लिए भी बहुत सा पैसा भेजता हैं |
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अगर यही सब निरंकुश चलता रहा तो भारत भी दक्षिण कोरिया की तरह 40%मिशनरी हो जायेगा और लोग कोरिया के बौधों की तरह स्वयं को हिन्दू बोलने से भी घबराएंगे | आज जैसे इस्लाम आतंक और जिहाद के पर्याय के रूप में पूरी दुनिया में प्रसारित हो रहा है, वैसे ही अगले ही कुछ वर्षों में हिन्दू धर्म पाखंड, आडंबर, प्रदुषण फ़ैलाने वाले त्यौहारों और भगवा आतंकवाद के रूप में प्रसारित हो जायेगा
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समाधान-- (1) प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सभी केंद्रीय और राज्य मंत्रियों पर राईट टू रिकॉल, जजों पर राईट टू रिकॉल (निचली से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के ), प्रशासनिक और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीयों पर राईट टू रिकॉल, जैसे कानूनों को राजपत्र में छपवाना
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(2) सभी अदालतों में किसी प्रकार के विवाद और अपराध के लिए जूरी द्वारा सुनवाई और निर्णय |
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(3) हिन्दू मंदिरों के प्रशासन को सुधरने के लिए SGPC की तर्ज पर राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंक ट्रस्ट जैसा कानून बनबाना |
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(4) भारत की सेना को मजबूत करने के लिए सभी हथियारों का और उनके छोटे और बड़े पुर्जों का स्वदेशी तकनीक से भारत में ही उत्पादन करना |
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(5) इजराइल, स्विट्ज़रलैंड, अमेरिका जैसे देशो की तरह आत्मरक्षा के लिए हथियारबंद समाज की स्थापना करना |
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(6) बिकाऊ मीडिया के प्रभाव को कम करने के लिए दूरदर्शन प्रमुख पर राईट टू रिकॉल और टी सी पी जैसे मीडिया पोर्टल के कानून लाना |
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सभी प्रस्तावों के कानूनी ड्राफ्ट यहाँ देखें और इनका प्रचार करें-- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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कृपया ध्यान दे -- सोनिया-मोदी-केजरीवाल और कांग्रेस-संघ (=बीजेपी)-आप पार्टी के कार्यकर्ताओं और इनके समर्थकों ने इन सभी कानूनों का विरोध किया है | सबूत के लिए आप उनकी ट्विटर वाल पर इन कानून को लागू करवाने के लिए ट्वीट भेजकर पूछ सकते है और उनके जवाब को सार्वजानिक करें |
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~ राईट टू रिकॉल पार्टी~
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Wed Sep 27 2017 18:30:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सरकार ओएनजीसी एवं ऑइल इण्डिया लिमिटेड के अधिकार में स्थित तेल के कुओ का 60% हिस्सा बेचने की तैयारी कर रही है।
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<http://www.business-standard.com/article/companies/private-firms-may-get-up-to-60-stake-in-psus-producing-oil-gas-fields-117092700683_1.html>
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Wed Sep 27 2017 18:34:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पिछले साल के अगस्त महीने के मुकाबले इस वर्ष के अगस्त महीने में तेल की मांग में 6.1% की गिरावट आयी है !!
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<http://www.financialexpress.com/market/commodities/indias-fuel-demand-falls-6-1-in-august/851830/>
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Wed Sep 27 2017 20:00:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
डर ; यदि लोग कांग्रेस के भय से आजाद नहीं हुए तो बीजेपी की दशा कांग्रेस से भी बदतर हो जायेगी।
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यदि आपको भय है कि -- "कहीं कांग्रेस फिर से सत्ता में न आ जाए" , तो आप एक व्यवस्थित रूप से चलाये गए प्रचार अभियान के शिकार है। और आपके इस भय ने बीजेपी को कुर्सी खोने के डर से आजाद कर दिया है। जब किसी दल / नेता के मन से सत्ता गवांने का डर निकल जाता है तो वह भ्रष्ट, उद्दंड एवं निरंकुश होकर प्रजा हित की अवहेलना करने लगता है।
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Thu Sep 28 2017 16:55:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा पिछले 10 महीने से कहाँ गायब थे !! और अब जब वे नोटबंदी एवं जीडीपी पर बोल रहे है तब भी नागरिको से आवश्यक सूचनाएं छिपा रहे है !!
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१) सिन्हा ने कहा कि, सरकार ने जीडीपी की गणना का तरीका बदल दिया है, एवं इस वजह से जो जीडीपी दिखायी जा रही है वह वास्तविक नहीं है। बल्कि वास्तविक जीडीपी दिखाई जा रही जीडीपी से 2% कम है। लेकिन सिन्हा ने यह नहीं बताया कि मोदी साहेब ने जीडीपी को बढ़ाकर दिखाने के लिए गणना में क्या बदलाव किये है !!
दरअसल यह खबर साल भर पुरानी है। और हमने नागरिको को यह सूचना 7 महीने पहले ही दे दी थी कि मोदी साहेब ने जीडीपी "बढाकर दिखाने के लिए" जीडीपी की गणना का फार्मूला बदल दिया है। पहले उत्पादन की गणना लागत मूल्य पर की जाती थी, और अब इसे बदलकर MRP पर कर दिया गया है। लागत एवं MRP में अमूमन 20 से 30% का फर्क होता है। अत: उतने ही उत्पादन को जब लागत की जगह MRP पर केल्कुलेट किया जाएगा तो उत्पादन 20 से 30% स्वत: ही बढ़ जाएगा, और जीडीपी भी बिना उत्पादन बढे इस अनुपात में बढ़ जायेगी। बिना कुछ किये !! पब्लिक को मामू बनाने के लिए आंकड़ो का खेल !!!
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लेकिन सिन्हा इस जानकारी को साल भर तक दबाकर बैठे रहे। उन्होंने चूं तक नहीं की। जीडीपी पर दर्जन भर प्राइम टाइम कर चुके पेड रविश कुमार ने भी यह जानकारी दर्शको से छुपाई कि जो जीडीपी जीडीपी हम कर रहे है , वह जीडीपी ही फर्जी है !! शेष सभी पेड पत्रकार एवं पेड अर्थशास्त्री भी इस मुद्दे पर चुप्पी मारे बैठे रहे। कोंग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओ ने भी यह जानकारी नागरिको से छुपायी। उन्होंने कभी यह मुद्दा उठाया ही नहीं कि दिखाई जा रही जीडीपी फर्जी है !!
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इस विषय पर मार्च में लिखा गया पोस्ट : कागजी विकास दर --- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1217587181692849>
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सबक यह है कि - यदि आप खबरों के लिए पेड मीडिया एवं राजनैतिक पार्टियों पर निर्भर है तो आप तक ख़बरें नहीं पहुंचेगी। और यदि वे पहुंचेगी तो सिर्फ तब जब उन्हें दबाकर रखना आसान नहीं रह जाएगा।
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२) सिन्हा नोटबंदी पर भी नागरिको को भ्रमित कर रहे है। वे यह साबित करने पर तुले हुए है कि नोटबंदी एक गलत फैसला था !! जबकि सच्चाई यह है कि नोटबंदी किसी भी लिहाज से गलत फैसला नहीं था। बल्कि यह एक घोटाला था। महा घोटाला। इस घोटाले की रूपरेखा संघ ( संघ = बीजेपी , गंगाधर = शक्तिमान ) के शीर्ष नेताओं ने बेहद इत्मीनान से रची थी !! और इस घोटाले से संघ के शीर्ष नेतृत्व ने लगभग 1 लाख करोड़ रुपया बनाया।
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अब संघ के नेता और मीडिया पूरे देश के नागरिको को यह विश्वास दिलाना चाहते है कि, नोटबंदी एक भूल थी !!! भारतीय राजनीति में यह बिलकुल नयी चीज है। पहले घोटाला करो और फिर उसे भूल कह के प्रचारित कर दो !!!
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सिन्हा पिछले 10 महीने से मामले पर खामोश बने रहे। जबकि राईट टू रिकॉल ग्रुप ने दिसम्बर में ही पूरे पृष्ठ का विज्ञापन देकर नागरिको को यह सूचना दे दी थी कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार कम होने का कोई लेना देना नहीं है, तथा इससे सिर्फ भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और अर्थव्यवस्था की कमर टूट जायेगी।
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दिए गए विज्ञापन का विवरण यहाँ देखें -- <https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1132775560174012&set=a.778193075632264.1073741827.100003247365514&type=3&theater>
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( ये वही यशवंत सिन्हा है जिन्होंने मोरिशस रूट पर राजीव भाई द्वारा हाईकोर्ट में जीते गए मुकदमे के फैसले पर पानी फेरने और मोरिशस रूट को जारी रखने के लिए सर्कुलर निकाला था। इस सर्कुलर के आने से हाई कोर्ट का आदेश अप्रभावी हो गया और मोरिशस रूट जारी रहा। और इन्होने ही राजीव भाई की स्वदेशी मूवमेंट को तोड़ने के लिए स्वदेशी जागरण मंच में सक्रीय भूमिका निभायी थी। )
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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Sat Sep 30 2017 06:33:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
<http://epaper.bhaskar.com/detail/1285516/93032749562/0/map/tabs-1/09-30-2017/18/1/image/> ( 30 sep 2017 , udaipur bhaskar , page 15 )
Sat Sep 30 2017 07:00:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
स्वच्छता भारत अभियान ; साइलेंट गरबा, आतिशबाजी मुक्त दिवाली, जल विहीन होली, दही हांडी मुक्त जन्माष्टमी के बाद अब बीजेपी सरकार पेश करती है -- "रावण बर्निंग विद कोल्ड फायर" !!
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रावण दहन के कारण होने वाले धूम्र प्रदुषण से बचने के लिए उदयपुर नगर निगम ने दशहरे पर धुआं मुक्त आतिशबाजी करने का फैसला किया है !! उम्मीद है कि जल्दी ही हमें साइलेंट आतिशबाजी ( विशेष तौर पर दशहरे और दिवाली पर ) भी देखने को मिलेगी !!!
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Sat Sep 30 2017 07:33:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
"रोबोट" से पीछा छुड़ाएँगे तो "झूठे और धूर्त" के चंगुल में फँसेंगे ! धूर्त के चंगुल से निकलने के चक्कर में "मूरख" की शरण ले लेंगे ! मूरख से मुक्ति पाने के लिए फिर किसी "कपटी" के पंजे में आ जाएँगे !!
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ड्राईवरो पर दाँव लगाने से बेहतर है कि हम गाड़ी सुधारने की फ़िक्र करे । नेता ड्राईवर है और व्यवस्था गाड़ी । व्यवस्था की रचना कानूनो से होती है । देश में बेहतर क़ानून लागू होने से व्यवस्था में सुधार आ जाएगा और इन तमाशाइयो पर हमारी निर्भरता कम हो जाएगी ।
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हमें विकल्प की तलाश अच्छे कानूनो में करनी चाहिए अच्छे नेताओं में नही ।
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Sat Sep 30 2017 07:47:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
पहले सरकारी संस्थाओ को बदतर बनाओ और उन सभी कानूनों को लागू करने से इनकार करो जिससे इनमे सुधार आये। फिर इनकी बदहाल हालत का हवाला देकर इन्हें निजी हाथों में "बेच" दो, और इसे पीपीपी मॉडल, विनेवेश, निजीकरण आदि का नाम दे दो । रेल, बस , पॉवर , माइनिंग , शिक्षा, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्र घूस खाकर निजी कम्पनियों को बेचे जा रहे है। क्लीन करप्शन !!! कोई आरोप नहीं , कोई सबूत नहीं !!!
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<http://epaper.bhaskar.com/detail/1285542/93032824234/0/map/tabs-1/09-30-2017/18/1/image/> ( 30 sep 2017 , udaipur bhaskar , page 5 )
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Sat Sep 30 2017 08:15:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
"पेट्रोल और दालों का दाम इतना उतना हो जाएगा तो भी मैं मोदी को ही वोट दूंगा" -- भक्त उवाच
मोदी साहेब बेवकूफ नहीं है। वे जानवर चरा कर पीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंचे है। उन्होंने पूरी जिंदगी इंसानो को ही चराया है। उन्हें इस बात की पहले से खबर है कि कितना भी कुछ होने से "वे" वोट उन्हें ही देंगे। वे जानते है यह अलाप जिस मनो व्यथा से निकलता है, उसके मरीज को जहर भी दवा लगता है ;
तू मसीहा मुहब्बत के मारो का है,
ये तेरा नाम सुनकर चले आये है,
अब दवा दे या दे दे इन्हें तू जहर,
तेरी महफ़िल में ये दिलजले आये है !!
पर तुम्हारा यह स्टेंड प्रजा और देश के हित में नहीं है। तुम्हारे इश्क की सजा अन्य देश वासियों को नहीं मिलनी चाहिए। क्योंकि पेट्रोल के दाम पूरे देश वासियों को चुकाने होते है।
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बहरहाल, जैसा सुना जाता है तुम्हारे उबरने की उम्मीद कम है -
मरीजे इश्क पे रहमत खुदा की ,
दर्द बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की !!
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Get Well Soon.
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