Posts for 2023-04



Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Apr 08 2023 07:36:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अंतिम आश्रय - सुनियोजित घोटालो को चूक या गलती ठहराने की कोशिश

Deepak Chitransh:

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 11 2023 07:47:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

ट्रंप को ग्रेंड जूरी ने दबोच लिया है। ग्रेंड जूरी से मतलब होता है — अमेरिकी नागरिकों का समूह। और इसमें सरकार का कोई आदमी नहीं होता !!
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यह सबसे बड़ी वजह है कि RSS=BJP, कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के नेता, कार्यकर्ता एवं भारत के सभी ताकतवर लोग जज सिस्टम से प्रेम और जूरी सिस्टम से अत्यंत घृणा करते है।
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ज़ाहिर है, भारत में जूरी सिस्टम आने के साथ ही भारत के मंत्रियों समेत मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायाधीश आदि में से अधिकांश अगली फ्लाईट से देश छोड़ देंगे।
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उन्होंने इतने कांड किए है और रोज़ इतने कांड करते है कि इनमें से ज़्यादातर जूरी सिस्टम को झेल ही नहीं सकते। 24 घंटे के लिए भी नही।
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#JuryCourt
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तो क्या ट्रंप को सजा होगी ?
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हो भी सकती है और नहीं भी !! क्योंकि अमेरिका फेडरल ग्रैंड जूरी के चयन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। ग्रैंड जूरी सदस्यों को लॉटरी द्वारा नही चुना जाता। इनके चयन में जज आदि दख़ल रहता है। इसके अलावा ग्रैंड जूरी सदस्यों का कार्यकाल भी लंबा होता है (लगभग एक वर्ष तक) एवं ट्रायल सार्वजनिक नहीं होता। तो वहाँ की इलीट हाई प्रोफाइल मामलों को मैनिपुलेट करने में सफल हो जाते है।
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हमने जूरी कोर्ट का जो ड्राफ्ट प्रस्तुत किया है उसमें ग्रैंड जूरी का चयन सिर्फ़ लॉटरी से ही किए जाने का प्रावधान है। जज एवं सरकारी अधिकारियों का इसमें कोई दख़ल नही है। एवं ग्रैंड जूरी सदस्यों का कार्यकाल 30 दिनों का होगा। 30 दिनों बाद 10 सदस्य रिटायर होंगे और उनकी जगह नए सदस्य लॉटरी द्वारा आ जाएँगे, तथा सुनवाई हमेशा सार्वजनिक होगी।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 13 2023 10:22:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

फ़्रॉड आदमी की पहचान : ये आदमी जो समस्या बता रहा है उसका उपाय तब भी इसे पता था कि इसका इलाज मुख्यमंत्री पर वोट वापसी है। पर चूँकि यह मुख्यमंत्री पर वोट वापसी पर ख़ामोश था, अत: हमने उस समय ही लोगो को यह बताना शुरू कर दिया था कि यह आदमी फ़्रॉड है, अत: इसके चपेट में आने बचे।
#VvpCm
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और इस आदमी के बग़ल में मसनद का टेका लगाये जो आदमी बैठा है वह डबल फ़्रॉड है। डबल इसीलिए क्योंकि यह कार्यकर्ताओ को यह चूरण भी बाँटता है कि — चुनावी राजनीति से दूर रहना चाहिए। मतलब चुनाव लड़ने का काम बीजेपी-कांग्रेस-आपा पर ही छोड़ दिया जाना चाहिए !!
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<https://www.facebook.com/100006674313724/posts/3555498174682625/?mibextid=SDPelY>;

Chetram Kumawat:

#केजरीवाल #भ्रष्टाचार

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 14 2023 10:36:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मार्च 1974 में जब निक्सन अमेरिका के राष्ट्रपति थे। ग्रैंड जूरी के आदेश पर पुलिस वाले उनके 7 ख़ास आदमियों (पूर्व एटोर्नी जनरल, मुख्य सहायक, विशेष सलाहकार आदि) को उठा कर ले गये थे। ग्रैंड जूरी ने उन पर झूठे साक्ष्य गढ़ने और ग़लत बयानी के आरोप तय किए।
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निक्सन भी आरोपी थे, किंतु वे बच गये। क्योंकि राष्ट्रपति पर जूरी मुक़दमा नही चला सकती है। राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ मामलों को सिर्फ़ सीनेट ही सुनती है। पर निक्सन को इस्तीफ़ा देना पड़ा !! लगभग 40 आरोपियों को सजा हुई। और इनमें से ज़्यादातर निक्सन के करीबी थे। निक्सन उन्हें बचा नहीं पाए। आप इस स्कैंडल को वॉटरगेट नाम से जानते है।
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तब भी बड़ी मछलियाँ इस स्कैंडल से बच गयी। कैसे ?
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वाशिंगटन में ग्रैंड जूरी के चयन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। ग्रैंड जूरी सदस्यों को लॉटरी द्वारा नही चुना जाता। इनके चयन में जज आदि दख़ल रहता है। इसके अलावा ग्रैंड जूरी सदस्यों का कार्यकाल भी लंबा होता है (लगभग एक वर्ष तक) एवं ट्रायल सार्वजनिक नहीं होता। तो वहाँ की इलीट हाई प्रोफाइल मामलों को मैनिपुलेट करने में सफल हो जाते है।
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हमने जूरी कोर्ट का जो ड्राफ्ट प्रस्तुत किया है उसमें ग्रैंड जूरी का चयन सिर्फ़ लॉटरी से ही किए जाने का प्रावधान है। जज एवं सरकारी अधिकारियों का इसमें कोई दख़ल नही है। एवं ग्रैंड जूरी सदस्यों का कार्यकाल 30 दिनों का होगा। 30 दिनों बाद 10 सदस्य रिटायर होंगे और उनकी जगह नए सदस्य लॉटरी द्वारा आ जाएँगे, तथा सुनवाई हमेशा सार्वजनिक होगी।
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#JuryCourt
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See news link in comment box.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Apr 17 2023 22:28:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जज सिस्टम - भारत में एक यू ट्यूबर ने कैडबरी में विषेले रसायन होने का वीडियो बनाया। केडबरी ने उसे लीगल नोटिस भेजकर कोर्ट में घसीटने की धमकी दी। यू ट्यूबर ने सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगते हुए वीडियो डिलीट कर दिया। यू ट्यूबर का कहना है कि — मैंने जो भी वीडियो में कहा वह सच है। किंतु मेरे पास क़ानूनी लड़ाई लड़ने का पैसा नहीं है।
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जूरी सिस्टम - अमेरिका में जूरी ने मोंसेंटो को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को 289 मिलियन का भुगतान करे। क्योंकि अमुक कंपनी के कीटनाशक कैंसर कारक पाए गए !!!
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#JuryCourt

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 18 2023 11:51:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हाल ही में पुलवामा हमले के बारे में क्या कहा?
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(A)
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फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के दौरान मलिक वहां के गवर्नर थे। अब 2023 में Paid The Wire को दिए इंटरव्यू में उन्होंने मोदी साहेब एवं तात्कालीन गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने कहा है कि –
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(1) CRPF ने सिक्योरिटी रिस्क के कारण जवानो को ले जाने के लिए गृह मंत्रालय से हवाई जहाज की मांग की थी। किन्तु उन्हें जहाज देने से मना कर दिया गया था। हाई सिक्योरिटी रिस्क वाले ऐसे इलाके से इतना बड़ा काफिला सड़को द्वारा कभी नहीं भेजा जाता है।
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(2) जिस रास्ते से काफिला जाना था उसके साथ 8-10 लिंक रोड़ थे, किन्तु इनके मर्जिंग पॉइंट्स को खुला छोड़ दिया गया था। न तो मर्जिंग पॉइंट्स पर जवानों की तैनाती की गयी न ही मुख्य सड़क को सेनेटाईज किया गया था।
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(3) फरवरी में ही इंटेलिजेंस द्वारा हमला होने की आंशका का इनपुट होने के बावजूद सुरक्षा एजेंसी ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए थे। नतीजन 300 किलो RDX से लदी हुयी वेन 10 दिनों से सड़को पर खुली घूम रही थी।
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(4) हमले के बाद जब उन्होंने मोदी साहेब से कहा कि यह हमला हमारी लापरवाही की वजह से हुआ है, तो मोदी साहेब और अजीत दोवल ने उन्हें इस मामले पर चुप रहने को कहा। मोदी साहेब ने कहा कि इस मामले को वे उन पर (मोदी साहेब पर) छोड़ दें।
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(5) मोदी साहेब का मानना था कि हम इस मामले को पाकिस्तान पर डाल देंगे और इससे हमें चुनावी फायदा होगा। और उन्होंने ऐसा ही किया। (मई 2019 में लोकसभा चुनाव थे)
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इस साक्षात्कार की पूरी ट्रांसक्रिप्ट आप यहाँ पढ़ सकते है —
<https://thewire.in/politics/satya-pal-malik-full-interview-pulwama-modi>;
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(B)
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वैसे हमने पुलवामा हमले के 2 दिन बाद ही इस बात को मुख्य रूप से रेखांकित कर दिया था, कि हमारे जवानो को यदि आर्म्ड ट्रक मुहैया कराए जाते तो हद से हद 4-5 जवान ही शहीद होते।
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तब पेड मीडिया इस बिंदु पर खामोश बना रहा था। पेड मीडिया यह बात अब 4 साल बाद बता रहा है। पेड मीडिया तब भी यह बात जानता था, किन्तु पेड मीडिया को इस बिंदु पर चुप रहने के लिए पैसा मिल रहा था, और अब उन्हें यह बात बताने के लिए पैसा मिल रहा है तो बता रहे है !!
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इस पूरे मामले में पहली महत्त्वपूर्ण बात यह है कि पेड मीडिया इसी तरह से काम करता है। पेड मीडिया ज्यादातर मामलो में सच ही दिखाता है, किन्तु पेमेंट यह तय करता है कि अमुक सच कब दिखाया जाएगा। इस समय यह सच परोसने की दो वजहें हो सकती है -
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(1) पेड मीडिया के प्रायोजको ने मोदी साहेब को तीसरा कार्यकाल नहीं देना तय किया है। इसी स्थिति में यह मामले से जुड़े और भी तथ्य पेड मीडिया खोद खोद कर पब्लिक डोमेन में डाल सकता है। या इसी तरह की और भी ख़बरें सामने आ सकती है, जिससे मोदी साहेब की छवि को नुकसान होगा।
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(2) हो सकता है कि पेड मीडिया के प्रायोजको का कोई काम मोदी साहेब ने लंबित करके रखा है, और वे उसे पूरा करने में शीघ्रता नहीं दिखा रहे है। तो यह खबर उनके लिए एक वार्निंग है। अब पेड मीडिया उनसे क्या चाहती है, वह मुझे नहीं पता। सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है। शायद उन्हें कश्मीर में जो लिथियम मिला है, उसके एक्सक्लूसिव राइट्स चाहिए। वो भी चिल्लर दाम में। या फिर वे SBI का निजीकरण चाहते है, या और किसी ऐसी ही खदान की मुफ्त लीज या किसी लाभकारी PSU का विनिवेश।
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(C)
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अब आगे क्या ?
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आगे कुछ नहीं होगा !! क्योंकि भारत में जज सिस्टम है। जज सिस्टम में सरकार पर लगाए गए आरोपो की जांच भी खुद सरकार ही करती है। मतलब, अभी जब तक मोदी साहेब Pm है वे खुद यह जांच करवाएंगे कि उनकी सरकार यानि खुद उन्होंने इस मामले में कोई गलती / षडयंत्र किया था या नहीं !!
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और जब कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी या अन्य पार्टी सत्ता में आएगी तो वे बीजेपी के खिलाफ जांच करेंगे और सबूत जुटाने के बाद बीजेपी के साथ जांच और सबूतों को रफा दफा करने के एवज में उनसे डील कर लेंगे। जब तक कोंग्रेस / आम आदमी पार्टी सत्ता में नहीं आयेगी तब तक वे इसे राजनैतिक मुद्दा बनाते रहेंगे कि पुलवामा हमले में सरकार की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए !!
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समाधान – यदि आपको मामले की सच्चाई जानना है तो वोट वापसी एवं जूरी कोर्ट के अलावा इसका कोई इलाज नही है। CBI डायरेक्टर की चोटी अभी पीएम के हाथ में है, अत: CBI या अन्य कोई एजेंसी ऐसी कोई जांच नहीं कर सकती जो पीएम एवं उनके चहेतों को कटघरे में खड़ा करे। यदि वो ऐसा करेगा तो पीएम उसे निकाल कर किसी दुसरे को यह नौकरी दे देगा।
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लेकिन यदि CBI डायरेक्टर को वोट वापसी पासबुक के अधीन कर दिया जाता है तो वह सरकार के आला अधिकारीयों एवं मंत्रियो के खिलाफ जांच खोल सकता है, और पीएम उसे निकाल नहीं पायेगा। यदि फिर भी पीएम उसे निकाल देता है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल करके उसे फिर से ले आयेंगे। CBI डायरेक्टर को वोट वापसी पासबुक एक अधीन करने के साथ ही इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार नागरिको की जूरी को दिया जाए।
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यदि मामला नागरिको की जूरी सुनेगी तो सारा सच सामने आ जाएगा। यदि मोदी साहेब इसमें दोषी है तो ज्यादातर सम्भावना है कि मामला जूरी के सुपुर्द किये जाने के साथ ही मोदी साहेब टीवी पर आकर भर्राए गले से हाथ जोड़ कर देश से माफ़ी मांग लेंगे कि उनसे गलती हुई है !! क्योंकि वे जूरी के सामने पेश होने का जोखिम उठाना कतई पसंद नहीं करेंगे। और यदि मोदी साहेब या उनकी सरकार इसमें दोषी नहीं है तो उनको जूरी के सामने पेश होने से कोई दिक्कत नहीं है।
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और पाठक कृपया इस बात को विशेष रूप से नोट करें कि कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी भी पुलवामा हमले में सरकार की भूमिका की जांच जूरी से कराने के सख्त खिलाफ है। वे भी यही चाहते है कि सरकार के खिलाफ जांच सरकार ही करें !! चोर चोर मौसेरे भाई !!
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जज सिस्टम का अनिवार्य नतीजा यह है कि ताकतवर व्यक्ति को सजा नहीं दी जा सकती, जबकि जूरी सिस्टम में दंड देने की शक्ति किसी एक व्यक्ति के पास न होकर व्यक्तियों के समूह के पास होने से एवं दंड देने की इस शक्ति का निरंतर हस्तांतरण होने के कारण ताकतवर आदमी या ताकतवर संगठित गठजोड़ भी क़ानून की गिरफ्त में आ सकता है।
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#JuryCourt
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Apr 26 2023 09:02:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#Vvp06 #विदेशी_निवेश_में_कटौतियां (Short Version)
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संवेदनशील क्षेत्रो में FDI पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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संवेदनशील क्षेत्रो में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमती दिए जाने के कारण भारत में विदेशियों का नियंत्रण लगातार बढ़ रहा है। यह क़ानून भारत के संवेदनशील क्षेत्रो में FDI पर रोक लगाकर सिर्फ सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कंपनियों को कारोबार करने की अनुमति देता है।
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कृपया ध्यान दें कि यह कानून सभी क्षेत्रो में FDI पर प्रतिबन्ध नहीं लगाता, बल्कि सिर्फ संवेदनशील क्षेत्रो में FDI पर निर्बन्धन लगाता है। इस क़ानून को संसद से साधारण बहुमत द्वारा पारित करके गेजेट में छापा जा सकता है। इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक एवं फेसबुक लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड आदि) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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प्रधानमंत्री जी, प्रस्तावित विदेशी निवेश में कटौतियां कानून गेजेट में छापें - #ReduceFDI
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इस क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है
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कोई भी कंपनी अपने आप को वोइक यानी सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनी (Woic = Wholly Owned by Indian citizens Company) के रूप में पंजीकृत करवा सकती है। वोइक कम्पनी से आशय ऐसी किसी कम्पनी से है जिसके 100% अंश (Share) भरतीय नागरिको या भारतीय सरकार या किसी अन्य वोइक कंपनी के पास हों, और अमुक कम्पनी के कोई भी शेयर विदेशियों के पास न हों। निचे दिए गए क्षेत्रो में सिर्फ वोइक कम्पनियां ही कारोबार करेगी।
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(1) सिर्फ वोइक कम्पनियां ही संचार एवं मीडिया के क्षेत्र में काम कर सकेगी। संचार एवं मीडिया में सभी पाठ्य, दृश्य, श्रव्य माध्यम जैसे अख़बार, मैगजीन, चैनल्स, फ़िल्में, इंटरनेट सेवाएं, सोशल मीडिया एवं टेलिकॉम आदि शामिल है।
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(2) गैर वोइक कम्पनी को भारत में बैंक एवं बीमा कम्पनी खोलने या ऐसी कोई भी वित्तीय कम्पनी खोलने की अनुमति नहीं होगी जो जमाएं (Deposits) स्वीकार करती है। राष्ट्रियकृत बैंक (Nationalised Bank) सिर्फ वोइक कम्पनी को ही कर्ज दे सकेंगे।
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(3) सिर्फ वोइक कम्पनियां ही रेलवे, सेटेलाईट एवं रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में कार्य करेगी। रक्षा उत्पादन में हथियार निर्माण एवं सैन्य उपकरण शामिल है।
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(4) सिर्फ वोइक कम्पनी को ही खनन (Minerals) एवं ऊर्जा (Power) के क्षेत्र में काम करने की अनुमति होगी।
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(5) सिर्फ वोइक कम्पनियां ही शैक्षिक निकाय, शिक्षा बोर्ड, विद्यालय एवं विश्वविद्यालय खोल सकेगी।
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(6) गैर वोइक कम्पनी भारत में कोई भी भूमि एवं निर्माण नहीं खरीद सकेगी, और न ही इन्हें 25 साल से अधिक अवधि के लिए किराये पर ले सकेगी।
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(7) मॉरीशस संधि, फिजी संधि, सिंगापुर संधि एवं इस प्रकार की सभी संधिया जो विदेशी पूँजी पर कम दर से आयकर, या कम दर से पूंजीगत लाभ कर लगाती है, अब से निरस्त की जाती है।
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[टिप्पणी : यदि इस खंड की कोई धारा विश्व व्यापार संगठन (WTO) के किसी समझौते का उलंघन करती है तो WTO भारत को समझौते से बाहर कर सकता है, या प्रधानमंत्री भारत को WTO समझौते से अलग करने के लिए आवश्यक अधिसूचना जारी कर सकते है।]
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#VoteVapsiPassbook
. Proposed by : #VoteVapsiMovement

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 30 2023 21:02:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#Vvp31 #वोट_वापसी_स्वास्थ्य_मंत्री (Short Version)
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Vote Vapsi over Health Minister
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मौजूदा व्यवस्था में स्वास्थ्य मंत्री गेजेट में ऐसे कानून छापता है जिससे फार्मा एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको को मुनाफा हो। कोरोना काल में स्वास्थ्य मंत्रियो ने बाध्यकारी लॉकडाउन, बाध्यकारी मास्क एवं बाध्यकारी टीकाकरण जैसे कई गलत कानूनो की सिफारिश की।
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इस कानून के लागू होने के बाद यदि स्वास्थ्य मंत्री नागरिको को नुकसान देने वाले क़ानून लागू करता है तो राज्य के मतदाता वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे किसी भी समय बदल सकेंगे। इस प्रस्तावित क़ानून के पूरा ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक एवं फेसबुक लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Cm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड आदि) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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मुख्यमंत्री जी, स्वास्थ्य मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने का कानून गेजेट में छापें - #VvpHealthMinister
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स्वास्थ्य मंत्री को बदलने की प्रक्रिया के मुख्य बिंदु निचे दिए है :
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(1) स्वास्थ्य मंत्री के लिए आवेदन : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि स्वास्थ्य मंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर को ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर 10,000 रू का शुल्क‍ लेकर उसे स्वास्थ्य मंत्री का प्रत्याशी घोषित करेगा, और एफिडेविट को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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(2) यह क़ानून आने से प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब यदि आप स्वास्थ्य मंत्री के काम से संतुष्ट नहीं है, और उसे बदलना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह विधायकों को दिया गया आपका एक सुझाव है।
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(3) यदि स्वास्थ्य मंत्री पद के किसी प्रत्याशी को राज्य की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ (कुल मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है) के 25% मतदाताओ की स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन स्वास्थ्य मंत्री से 1% अधिक भी है, तो मुख्यमंत्री मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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[ टिपण्णी : यदि सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाला व्यक्ति मौजूदा विधानसभा / विधान परिषद् का सदस्य नहीं है तो अमुक व्यक्ति मंत्री बनने के बाद आगामी 6 माह में होने वाले किसी भी चुनाव या उपचुनाव में विधायक का चुनाव लड़ कर विधायक बन सकता है ]
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इस क़ानून को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करने की या संसद /विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में प्रकाशित करके सभी राज्यों में लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री चाहे तो इसे अपने राज्य में लागू कर सकते है।
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यह क़ानून आने के बाद विधायकों में स्वास्थ्य मंत्री बनने की प्रतिस्पर्धा शुरू होगी और वे अच्छे एजेंडे जैसे खाद्य सामग्री में बढ़ती रासायनिक मिलावट को रोकना, सरकारी अस्पतालों को बेहतर बनाना आदि जन हित के मुद्दों के साथ नागरिकों के समक्ष आना शुरू करेंगे ताकि नागरिक उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाने के लिए स्वीकृतियां दे सके। इस तरह बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का गठजोड़ स्वास्थ्य मंत्री से टूट जायेंगा।
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#VoteVapsiPassbook
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Proposed by : #VoteVapsiMovement
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