Posts for 2018-03

Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 02 2018 11:40:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

१) सीबीएसई बोर्ड में 10 वीं कक्षा के छात्रों को अब पास होने के लिए अलग अलग विषयो में 33% अंक नहीं लाने होंगे। सभी विषयों को मिलाकर भी यदि छात्र 33% अंक ले आता है तो उसे पास माना जाएगा !!!
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इससे छात्रों पर पड़ रहे पढाई के बोझ में कमी आएगी एवं वे गीत , संगीत , नृत्य एवं क्रिकेट में अपना अधिक समय दे सकेंगे। साथ ही इससे उन्हें यह भी सुविधा मिलेगी कि यदि वे गणित-विज्ञान जैसे जटिल विषयों में फेल होने वाले है तो सामाजिक विज्ञान, इतिहास एवं हिंदी की कहानियाँ पढ़ कर इन विषयों में अधिक अंक लाकर वे गणित-विज्ञान में भी पास हो सकते है। इस तरह उन्हें पास होने के लिए अब गणित-विज्ञान से जूझना नहीं पड़ेगा। पढाई के इसी बोझ को कम करने के लिए 8वी तक न फेल करने का क़ानून बनाया गया, किन्तु फिर भी छात्रों का एक छोटा हिस्सा पुस्तको में रुचि बनाए हुए है , अत: अब वे इसका विस्तार 10वीं क्लास तक कर रहे है।
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न्यूज लिंक -- <http://epaper.bhaskar.com/bhilwara/158/02032018/0/1/>;
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२) राजस्थान बोर्ड में प्रत्येक विषय के 20% अंक स्कूल द्वारा भेजे जाते है जिसका औसत 18 से 20 के बीच रहता है। इस तरह छात्र को उत्तीर्ण होने के लिए 80 में से सिर्फ 15 अंक ही और लाने होते है। इस व्यवस्था से भी छात्रों को राहत मिली है, और वे पढाई के "बोझ" से मुक्त होकर ऊपर दी गयी "अन्य गतिविधियों" में हिस्सा लेते हुए भी पास होते रह सकते है।
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३) पढाई के बढ़ते बोझ से और भी राहत देने के लिए मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में आधी कटौती करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि, पाठ्यक्रम काफी लम्बा है , अत: इसे छोटा किया जाना चाहिये। पूरी उम्मीद है कि वे नए पाठ्यक्रम में से गणित-विज्ञान के हिस्से को और भी कम कर देंगे और इसे और भी ज्यादा सरल भी बनायेंगे।

न्यूज लिंक - <http://www.thehindu.com/news/national/ncert-will-cut-syllabus-by-half-says-javadekar/article22845768.ece?homepage=true&utm_campaign=socialflow>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 02 2018 18:01:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हमारे पास पहले से ही ऐसा क़ानून है जो किसी भगोड़े की सम्पत्ति को अधिगृहित करने की व्यवस्था देता है -- अत: भगोड़े की सम्पत्ति अटेच करने के लिए मोदी साहेब द्वारा प्रस्तावित क़ानून एक ढकोसला है।
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मौजूदा व्यवस्था में ऐसे कई क़ानून मौजूद है जो सरकार को किसी फरार अपराधी की सम्पत्ति जब्त करने का अधिकार देते है। इसके अलावा बैंक भी चाहे तो अदालत से आदेश लेकर भगोड़े की सम्पत्ति की सभी सम्पत्तियों को अटेच कर सकती है।
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लेकिन पेड मीडियाकर्मी नागरिको के सामने यह झूठ परोसेंगे कि मोदी साहेब ने कमाल का क़ानून पास किया है। तो पेड मीडियाकर्मी यह झूठ क्यों बोलेंगे ? क्योंकि उन्हें यह झूठ बोलने के लिए पैसा दिया जा रहा है। उन्हें कौन पैसा दे रहा है ? मोदी साहेब ? नहीं। मोदी साहेब के पास इतना पैसा नहीं है।
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पेड मीडिया कर्मियो को यह पैसा मोदी साहेब के प्रायोजक देते है। यदि प्रायोजक मीडिया कर्मियों को सच बताने का पैसा दें तो मीडिया यह रिपोर्ट करने लगेगा कि ये प्रस्तावित क़ानून नागरिको को बुत्ता देने के लिए मोदी साहेब का नया ड्रामा है। परिणामस्वरूप मोदी साहेब की इज्जत जमीन पर आ जायेगी। तो इसीलिए मोदी साहेब के लिए यह जरुरी है कि वे अपने प्रोयोजको के आदेशो का बिना कोई ना नुकुर किये पालन करते रहे !!
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मोदी साहेब की राजनीती इसी ढंग से चल रही है।
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<http://delhihighcourt.nic.in/writereaddata/upload/CourtRules/CourtRuleFile_85HNCK64.PDF>;
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1. Attachment and sale of property—Sections 87 and 88 of the Code of Criminal Procedure [Sections 81, 82, 83 and 84 of new Code] provide for the attachment and sale of the property of any accused person or witness whose presence is required by a Criminal Court as a last remedy for compelling his attendance. ......

2. Proclamation—No proclamation can issue under Section 87 unless a warrant has issued in the first instance and the Court has reason to believe that the person against whom it was issued has absconded or is concealing himself so that such warrant cannot be executed. .....

3. Consequences of non-appearance of proclaimed person : Sale of property—If the proclaimed person does not appear within the time specified in the proclamation, the property under attachment remains “at the disposal of Government”. It can be sold at once at the discretion of the Court when it is liable to speedy decay if the Court considers that the sale would be for the benefit of the owner. But, otherwise it cannot be sold until the expiration of six months from the attachment and until the disposal of claims of objectors (if any) by the Magistrate.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 05 2018 20:51:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी ने भीलवाड़ा शहर का विद्युत् वितरण निजी कम्पनी "सिक्योर" के हवाले कर दिया है। और अब यह कम्पनी भीलवाड़ा के उपभोक्ताओं से मनमाना पैसा वसूलने की तैयारी कर रही है।
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अपने ट्विटर हेंडल से यह ट्वीट करें - " @PmoIndia , @RajCmo , #CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara , राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में विद्युत् के बीएमसी ( Bill , Meter and Collection ) प्रबंधन के लिए "सिक्योर" कम्पनी के साथ किये गए अनुबंध को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। <https://newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/>; "
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यह बेचान आपको किस तरह भारी नुकसान पहुंचाएगा ?
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१) कम्पनी भीलवाड़ा के सभी 83,000 मीटर बदलना चाहती है। कम्पनी का तर्क है कि मौजूदा मीटर सही रीडिंग नहीं देते, जबकि विभाग में काम करने वाले कई इंजीनियर्स का कहना है कि "सिक्योर" द्वारा जो मीटर लगाए जा रहे है वे 15 से 20% ज्यादा यूनिट दर्ज करेंगे !!
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कुछ दस साल पहले भीलवाड़ा में एनालॉग मीटर लगे हुए थे। विद्युत् निगम का कहना था कि, ये मीटर यूनिट्स की सही गणना नहीं करते , अत: इन मीटरों को इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स द्वारा बदल दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स आने से प्रत्येक मीटर में 10-15% यूनिट की रीडिंग बढ़कर आने लगी। वजह - इलेक्ट्रॉनिक मीटर माइक्रो लेवल पर विद्युत् का मापन करता है, कि ठीक भी है। ये इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स भी "सिक्योर" नामक कम्पनी द्वारा बनाये गए थे।
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गौरतलब है कि भीलवाड़ा विद्युत् निगम के प्रबंधन का ठेका इसी "सिक्योर" नामक कम्पनी को दिया गया है जिसने आज से 10 साल पहले भीलवाड़ा के सभी एनालॉग मीटर्स को इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स द्वारा बदला था , एवं अब यही कम्पनी कह रही है कि हमने 10 साल पहले जो मीटर लगाए थे वे ठीक नहीं है, अत: हम इन्हे फिर से बदलेंगे !! उल्लेखनीय है कि, "सिक्योर" कम्पनी ही इन मीटर्स की निर्माता भी है !! तो यह साफ़ नजर आ रहा है कि, कम्पनी अपना मुनाफा स्थायी रूप से बढ़ाने के लिए तेज गति से मापन करने वाले मीटर इंस्टाल करना चाहती है।
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२) कम्पनी विद्युत् बिल के रिचार्ज के लिए चिप इश्यू करेगी। इसमें बेलेंस होगा। यदि विद्युत् उपभोग आपके चिप में मौजूद बेलेंस से अधिक हो जाता है तो विद्युत् आपूर्ति स्वत: ही बंद हो जायेगी !!
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निम्न एवं निम्न मध्य वर्ग इकोनॉमी काफी छोटी एवं अस्थिर होती है, और वे बहुधा अंतिम तारीख निकलने के बाद भी जैसे तैसे पैसो की व्यवस्था करवाके बिल आदि जमा करवाते है। किन्तु अब उन्हें इस एडजस्टमेंट की छूट नहीं मिलेगी, एवं उन्हें तत्काल रूप से पैसो का बंदोबस्त करना होगा, अन्यथा उनकी बिजली आपूर्ति तत्काल रूप से बंद हो जायेगी। इससे वे ऊँचा सूद वसूलने वाले सूदखोरों के जाल में फंसेंगे।
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३) पूरी सम्भावना है कि, कम्पनी बिल का मिनिमम चार्ज बढ़ाएगी एवं बिल मासिक होंगे। अभी बिल दो माह में आता है। चूंकि कम्पनी का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा मुनाफा बटोरना है अत: इन सब के अलावा भी कम्पनी ऐसी सभी तिकड़में लगाएगी जिससे जनता से रफ्ता रफ्ता पैसा खींचा जा सके।
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भीलवाड़ा जिले का विद्युत् मंडल 5 या 6 उप मंडलो में बंटा हुआ है। 5 ग्रामीण क्षेत्र के है एवं 1 शहरी क्षेत्र का है। ग्रामीण क्षेत्र के लगभग सभी उपमंडल घाटे में है, जबकि भीलवाड़ा शहर का उपमंडल लगातार मुनाफा बना रहा है। इस वर्ष का अब तक का मुनाफा लगभग 170 करोड़ है। मैडम जी ने कहा कि विद्युत् निगम घाटे में जा रहे है, अत: इनका प्रबंधन निजी कम्पनी को दिया जा रहा है। किन्तु उन्होंने घाटे में जाने वाले उपमंडल नहीं दिए जबकि मुनाफे में जाने वाला निगम निजी कम्पनी के हवाले कर दिया !!!
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इस समय भीलवाड़ा में 83,000 कनेक्शन है , एवं इनमे विद्युत् वितरण एवं प्रबंधन का खर्च 73 रूपये प्रति उपभोक्ता की दर से आता है। और इस दर से भी निगम 200 करोड़ सालाना का मुनाफा बना रहा है। किन्तु मेडम जी ने "सिक्योर" कम्पनी को यह ठेका 140 रूपये प्रति कनेक्शन की दर से दे दिया है !! मतलब इस समय प्रबंधन का जो खर्च आ रहा है , उससे भी लगभग दोगुनी दर में !!!
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यह भी उल्लेखनीय है कि, भीलवाड़ा शहर का जो निगम निजी कम्पनी को बेचा गया है उसकी छीजत सिर्फ 6.45% है, जबकि औसतन छीजत की दर 7% के आस पास रहती है !! छीजत की यह दर दर्शाती है कि इस मंडल में बिजली चोरी बेहद कम है। तो आखिर एक मुनाफे चलने वाले सार्वजनिक उपक्रम को कौड़ियों के भाव निजी कम्पनी के हवाले क्यों किया जा रहा है ?
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भीलवाड़ा में यह चर्चा आम है कि "सिक्योर" कम्पनी ने यह ठेका लेने के लिए शीर्ष स्तर से लेकर स्थानीय नेताओ तक को कई सौ करोड़ की घूस दी है। अत: सभी राजनैतिक पार्टियों के स्थानीय नेता एवं इनके कार्यकर्ता इस मुद्दे पर ख़ामोशी बरत रहे है।
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समाधान - हमारी मांग है कि इस अनुबंध को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। ऐसी कोई वजह नजर नहीं आती कि बेहद मुनाफे में चलते हुए निगम को सरकार घाटा खाकर निजी कम्पनी के हवाले कर दे। यह निगम भारत के नागरिको की सम्पत्ति है एवं नागरिको के टेक्स के पैसे से यह खड़ा हुआ है। अत: प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री से हमारी मांग है कि इस अनुबंध को अविलम्ब रद्द किया जाए।
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बिजली विभाग की कार्यकुशलता बढ़ाने , कर्मचारियों की लापरवाही एवं अधिकारियो की घूसखोरी कम करने के लिए हमारा स्थायी प्रस्ताव है कि विभाग के कर्मचारियों की शिकायतों की सुनवाई एवं निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाए। ज्यूरी सिस्टम लागू होने से बिजली विभाग के कर्मचारियों की अकर्मण्यता एवं घूसखोरी हफ्ते दो हफ्ते में ही घटकर लगभग शून्य हो जायेगी। किन्तु सभी राजनैतिक पार्टियों के शीर्ष नेता ज्यूरी सिस्टम का इसीलिए विरोध करते है ताकि प्रशासन में भ्र्ष्टाचार बढे एवं इस भ्रस्टाचार का हवाला देकर वे एक के बाद एक राष्ट्रिय सम्पत्तियाँ घूस खाकर निजी कम्पनियो के हवाले कर सके।
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कृपया प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को ट्वीट भेजकर यह मांग करें कि यह अनुबंध तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। मांग का यह प्रस्ताव मोदी साहेब को भी भेजा गया है, जिसे इस लिंक पर देखा जा सकता है -- <https://newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/>; कृपया इस लिंक को क्लिक करें एवं इस प्रस्ताव पर अपना वोट करें। आप फेसबुक के माध्यम से भी लॉग इन करके वोट कर सकते है।
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#CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 08 2018 10:06:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

त्रिपुरा में निजी दस्ते द्वारा लेनिन की मूर्ती के साथ तोड़ फोड़ करना --- यदि किसी सरकारी भूमि से किसी मूर्ती को हटाया जाना है तो इसे हटाया जा सकता है। लेकिन यह जरुरी है कि सरकार द्वारा ऐसा विधिवत नोटिफिकेशन जारी करके किया जाए।
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संघ ने कार्यकर्ताओ को मूर्ती तोड़ने के लिए भड़काया है। किसी निजी दस्ते को संघ द्वारा हिंसक तोड़फोड़ के लिए उकसाना एक गलत कदम है।
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दिलचस्प बात यह है कि संघ ने अपने कार्यकर्ताओ को भारत में मौजूद ब्रिटिश किंग एवं क्वीन की मूर्तियां तोड़ने के लिए कभी भी नहीं कहा !! और न ही संघ की सरकार ने कभी इन मूर्तियों को हटाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया !! लेकिन वे संघ के कार्यकर्ताओ को लेनिन की मूर्ती तोड़ने के लिए उकसाते है !!!
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और भी शर्मनाक यह है कि, त्रिपुरा के गवर्नर तथागत रॉय एवं राम माधव सरकारी भूमि पर स्थापित मूर्ती को एक निजी दस्ते द्वारा तोड़े जाने के कृत्य की प्रशंसा कर रहे है !!
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उल्लेखनीय है कि, लेनिन / रूस ने भारत को कभी भी कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। अत: इस तरह की हरकत से रूस को बुरा लगेगा। जब कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को मदद दी थी, तब यह रूस ही था जिसने भारत का साथ दिया था ( लेसर गाइडेड बम की आपूर्ति को छोड़ते हुए )। उदाहरण के लिए भारत को असहाय बनाने के लिए कारगिल युद्ध के दौरान जब अमेरिका ने अपनी जीपीएस सेवा बंद कर दी थी तो रूस ने अपना जीपीएस हमें मुहैया कराया था।
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इस हरकत के पीछे मोदी साहेब एवं संघ के कार्यकर्ताओ का मुख्य उद्देश्य रूस एवं भारत के संबंधो के बीच कड़वाहट लाना है।
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यदि इस मूर्ती को गिराना या हटाना जरुरी था तो ऐसा सरकारी आदेश द्वारा किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा करने की जगह मोदी साहेब ने संघ के कार्यकर्ताओ को इसे हिंसात्मक तरीके हटाने के लिए उकसाया। क्योंकि वे रूसीयो को नीचा दिखाना चाहते है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 08 2018 20:45:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पानी के मीटर अनिवार्य करने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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गुजरात, राजस्थान एवं भारत के अन्य राज्य पानी की कमी से जूझ रहे है। इस संकट को दूर करने के लिए, हमारा प्रस्ताव है कि भारत के सभी जल आपूर्ति कनेक्शंस को अनिवार्य रूप से मीटरीकृत किया जाए।
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प्रूफ रीडिंग के बाद हम यह ड्राफ्ट newindia .in पर अपलोड करेंगे एवं इस विषय पर एक विज्ञापन देंगे, जिसमे नागरिको से यह अपील की जायेगी कि वे @pmoindia पर पीएम को एवं अपने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ट्विट करके इस क़ानून को लागू करने की मांग करे।
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इस कानून में जिला जल वितरण अधिकारी = DWDO ( District Water Distribution Officer ) पर राइट टू रिकॉल एवं जल वितरण से सम्बन्धित विवादों के निपटान के लिए ज्यूरी द्वारा सुनवाई का प्रावधान किया गया है।
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जिला जल वितरण अधिकारी ( DWDO ) पद संभालने के बाद इस तरह का कानून लागू करेगा जिससे प्रत्येक पानी कनेक्शन पर मीटर लगाना अनिवार्य हो। प्रत्येक कार्यालय, दूकान या फ्लेट आदि के कनेक्शन पर भी मीटर लगाए जायेंगे। किसी कोम्प्लेक्स आदि में कई फ्लेट्स के लिए एक ही मीटर होने की व्यवस्था समाप्त की जायेगी, तथा प्रत्येक फ्लेट के लिए अलग से मीटर होगा। साथ ही जिला जल वितरण अधिकारी नगर पालिका द्वारा आवंटित किये गए अन्य सभी कनेक्शंस पर भी मीटर लगवाने को सुनिश्चित करेगा।
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व्यावसायिक रूप से प्रत्येक कनेक्शन को मीटरी कृत करना पूरी दुनिया एवं भारत में 1850 में ही संभव हो चुका था !! भारत में हमेशा से जल संकट रहा है , किन्तु आज भी भारत में पानी के मीटर नहीं लगाए गए है। जबकि पानी की प्रचुरता होने के बावजूद अमेरिका में 1910 में ही सभी कनेक्शंस को मीटरीकृत कर दिया गया था !!
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उल्लेखनीय है कि, यदि भारत में सभी पानी के कनेक्शन पर मीटर लगा दिए जाते तो हमें खालिस्तान जैसे आन्दोलन का सामना नहीं करना पड़ता !!
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कृपया इस बात पर भी विशेष रूप से ध्यान दें कि, सोनिया-मोदी-केजरीवाल खुद के राजनितिक / आर्थिक फायदों के लिए हमेशा से ही युनिवर्सल वाटर मीटरिंग के कानून का विरोध करते रहे है। और कोंग्रेस-बीजेपी एवं आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ता भी इस क़ानून के हमेशा से विरोधी रहे है।
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तो यदि आप देश में "युनिवर्सल मीटरिंग क़ानून" चाहते है तो कृपया सोनिया-मोदी-केजरीवाल का समर्थन करके अपना समय एवं उर्जा नष्ट न करे। समाधान के लिए इन नेताओं एवं पार्टियों का समर्थन करने की जगह आप इस क़ानून को लागू करवाने का प्रयास करें।
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युनिवर्सल वाटर मीटरिंग के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट
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[ टिप्पणी : युनिवर्सल वाटर मीटरिंग का यह कानूनी ड्राफ्ट मुख्यमंत्री द्वारा सीधा राज्य के राजपत्र ( गैजेट ) में छापा जा सकता है, मुख्यमंत्री को विधानसभा या लोकसभा से इस प्रस्ताव को पारित करवाने की आवश्यकता नहीं है। ]
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इस ड्राफ्ट के तीन भाग है -
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग- II : ड्राफ्ट में दी गयी प्रक्रिया का सारांश
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भाग- III : अधिकारियों के लिए निर्देश एवं इस सम्बन्ध में टिप्पणियाँ
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इस ड्राफ्ट के महत्वपूर्ण खंड है -
इस कानून-ड्राफ्ट के लेखको की राय में अन्य खंड अति-महत्वपूर्ण नही है और केवल सामान्य समझ के लिए है। ]
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राईट टू रिकॉल जल वितरण अधिकारी को रिकॉल करने की जो प्रक्रिया यहाँ दी गयी है , उसे विस्तृत रूप से समझने के लिए - <https://newindia>; .in/causes/rtr-deo/ पर रखें गए राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का ड्राफ्ट देखें I

इस ड्राफ्ट में दी गयी ज्यूरी ट्रायल की प्रक्रियाओ को विस्तृत रूप से समझने के लिए कृपया - <https://newindia>; .in/causes/jury-sys/ पर रखे गए ड्राफ्ट को देखें I
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) पदासीन जिला जल वितरण अधिकारी को या नये ज़िला जल वितरण अधिकारी की उम्मीदवारी को अनुमोदित करना :
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(1.1) यदि कोई मतदाता अपने जिले के जल वितरण अधिकारी को बदलना चाहता है, तो वह पटवारी कार्यालय में किसी भी दिन उपस्थित होकर किसी उम्मीदवार को अपना अनुमोदन दे सकता है। अनुमोदन दर्ज करवाने की इस प्रक्रिया के लिए समय , दिनांक , अवधि आदि का कोई निर्बन्धन लागू नहीं होगा। इन अनुमोदनों के आधार पर जिले के जल वितरण अधिकारी को बदला जा सकेगा।
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(1.2) जल वितरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि , प्रत्येक बोरिंग , घर, कार्यालयों एवं रिहाइशी / व्यावसायिक कोम्प्लेक्स के प्रत्येक फ्लेट में लिए गए प्रत्येक कनेक्शन को मीटरीकृत किया जाये, तथा पानी के उपभोग का पर्यवेक्षण किया जाए। यदि जल वितरण अधिकारी उपरोक्त कार्यो को कार्यकुशलता से नहीं करता है तो आप मतदाता ऐसे जल अधिकारी को पद से हटाने के लिए अनुमोदन दर्ज करवा सकेंगे।
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(2) आप को ( आशय मतदाता से है ) किसी विवाद के निपटान हेतु ज्यूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से जल का उपभोग किया जाना पाया जाता है या जल विभाग के कर्मचारियों द्वारा कर्तव्य में लापरवाही या अकर्मण्यता दिखायी जाती है तो इन शिकायतों का निपटान करने के लिए ज्यूरी बुलाई जायेगी, एवं यदि ज्यूरी में आपको बुलाया गया है तो आपको नगर परिषद् में उपस्थित होकर विवाद की सुनवाई करनी होगी एवं आरोपियों पर फैसला देना होगा। यदि आप ज्यूरी में उपस्थित होने से इनकार करते है तो ग्रेंड ज्यूरी आप पर दंड लगा सकती है।
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भाग - II : ड्राफ्ट में दी गई प्रक्रिया का सार
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(3) टिप्पणी: सम्पूर्ण ड्राफ्ट का सार
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(3.1) मतदाताओ के पास जल वितरण अधिकारी को बदलने या नौकरी से निकालने की प्रक्रिया होगी एवं उसके स्टाफ के खिलाफ की गयी शिकायतों एवं पानी चोरी आदि के मामलो का निपटान नागरिको की ज्यूरी द्वारा किया जायेगा।
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(3.2) राईट टू रिकॉल जल वितरण अधिकारी की प्रक्रिया को और भी अच्छे से समझने के लिए कृपया राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का ड्राफ्ट देखें। यह ड्राफ्ट ‘newindia dot in / causes/RtrDeo3 ’ पर देखा जा सकता है।
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(3.3) किसी राज्य के मतदाता अमुक राज्य में दर्ज कुल मतदाताओं के स्पष्ट बहुमत का प्रदर्शन करके अमुक राज्य में स्थित किसी जिले में लागू राईट टू रिकॉल जिला जल वितरण अधिकारी एवं ज्यूरी प्रक्रियाओ को 4 साल तक के लिये निरस्त कर सकते है। और भारत देश के मतदाता देश में दर्ज कुल मतदाताओं के स्पष्ट बहुमत का प्रदर्शन करके किसी राज्य या जिले में लागू इन प्रक्रियाओ को 4 साल तक के लिये निरस्त कर सकते है।
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भाग III : अधिकारीयों के लिए निर्देश और टिप्पणीयां
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(4) टिप्पणी क्या है : ये टिप्पणीयां इस कानूनी ड्राफ्ट का वास्तविक हिस्सा नहीं है। कार्यकर्ता और नागरिक ड्राफ्ट को समझने हेतु इसका उपयोग कर सकते है। जूरी सदस्य इन टिप्पणीयों का उपयोग किसी मामले के फैसले के लिए सन्दर्भ के रूप में ले सकते है। किन्तु ये टिप्पणीयां किसी पर भी बाध्यकारी नहीं है।
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(5) शब्द "कर सकते है" का आशय है - किसी भी प्रकार का नैतिक-कानूनी बंधन नहीं। इसका स्पष्ट अर्थ है "कर सकते है" या "ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है"।
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(6) जल वितरण अधिकारी के लिए उम्मीदवारी
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(6.1) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले के लिए जल वितरण अधिकारी की नियुक्ति करेंगे। यदि जिला बड़ा है तो मुख्यमंत्री जिले को दो या अधिक संभागो में बाँट सकते है और प्रत्येक संभाग के लिए अलग से जल वितरण अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है।
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(6.2) यदि किसी व्यक्ति के पास स्नातक डिग्री है तथा वह लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक पात्रता पूरी करता है, तो वह जल वितरण अधिकारी बनने के लिए आवेदन कर सकता है। यदि इन पात्रताओ को धारण करने वाला कोई व्यक्ति जिला कलेक्टर के समक्ष आता है और कार्यरत जल वितरण अधिकारी को प्रतिस्थापित करने के लिए स्वयं को पंजीकृत करने हेतु आवेदन करता है तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में ली जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर उसका आवेदन स्वीकार करेगा। आवेदन स्वीकृत होने पर जिला कलेक्टर एक सीरियल नंबर जारी करेगा और उम्मीदवार का नाम और अन्य सम्बंधित सूचना मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा। यदि उम्मीदवार चाहे तो लिखित में आवेदन करके अपनी उम्मीदवारी वापिस ले सकते है।
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(6.3) जिला कलेक्टर कार्यरत जल वितरण अधिकारी को बिना कोई शुल्क लिए उम्मीदवार के रूप में पंजीकृत करेगा। उम्मीदवारों की सूची में कार्यरत जल वितरण अधिकारी का सीरियल नंबर 1 होगा।
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(7) नागरिको द्वारा प्रतिस्थापक उम्मीदवारो या कार्यरत जल वितरण अधिकारी को अनुमोदित करना :
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(7.1) यदि कोई मतदाता पटवारी कार्यालय आकर मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित शुल्क देता है, और अधिकतम पांच उम्मीदवारों को जल वितरण अधिकारी के पद के लिए अनुमोदित करता है और/ या वह कार्यरत जल वितरण अधिकारी को अनुमोदित करता है तो पटवारी उसकी स्वीकृति को कंप्यूटर में दर्ज करेगा और बदले में उसे रसीद देगा। इस रसीद में नागरिक की मतदाता पहचान पत्र संख्या, दिनांक / समय और उम्मीदवार जिन्हे उसने अनुमोदित किया है दर्ज होंगे।
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(7.2) यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या उससे अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा। इस निरस्तीकरण को भी मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा।
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(7.3) टिप्पणी : अनुमोदनों के बारे में स्पष्टीकरण - (i) मतदाता किसी भी दिन अनुमोदन दर्ज कर सकता है और इसके लिए कोई समय सीमा नहीं है। अपनी सुविधानुसार विभिन्न मतदाता अपने अनुमोदन किसी भी दिन दर्ज कर सकते है। (ii) मान लीजिये, एक मतदाता ने उम्मीदवार A, B और C को अनुमोदित किया है। तब A, B और C की अनुमोदन संख्या 1 से बढ़ जाएगी। (iii) अब मतदाता किसी भी दिन अपना कोई भी अनुमोदन निरस्त कर सकता है। मान लीजिये कि अमुक मतदाता ने C के अनुमोदन को निरस्त किया है, तो C की अनुमोदन संख्या 1 से कम हो जाएगी और A और B के अनुमोदनों की संख्या अपरिवर्तित रहेगी। (iv) मतदाता किसी अन्य उम्मीदवार को भी किसी भी दिन अनुमोदित कर सकता है। मान लीजिये कि अमुक मतदाता D को अनुमोदित करता है, तो ऐसी स्तिथि में D की अनुमोदन संख्या 1 से बढ़ जाएगी और A और B की अनुमोदन संख्या अपरिवर्तित रहेगी।
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(7.4) पटवारी प्रत्येक मतदाता द्वारा दर्ज अनुमोदन को अभिभावक की मतदाता संख्या, नाम और उसके द्वारा अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा।

(7.5) अनुमोदन दर्ज करने की प्रक्रिया खुली और सार्वजानिक होगी। अर्थात प्रत्येक मतदाता द्वारा दर्ज किये गए अनुमोदनों को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा और यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए खुली एवं दृश्य होगी।
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(8) जिला जल वितरण अधिकारी के बदले जाने के लिए शर्त : यदि
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(8.1) किसी नए उम्मीदवार को प्राप्त अनुमोदनों की संख्या अमुक जिले के मतदाताओ की कुल संख्या के 35% (सभी दर्ज मतदाताओ की कुल संख्या के 35%) से अधिक हो, और
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(8.2) उसे मिले अनुमोदनों की संख्या पदासीन जल वितरण अधिकारी को मिले अनुमोदनों की संख्या से उतनी अधिक है जो उस जिले में दर्ज अभिभावको की कुल संख्या के 2% के बराबर हो। और
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(8.3) उसके अनुमोदनों की संख्या सबसे अधिक हो।
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तभी और सिर्फ तभी मुख्यमंत्री पदासीन जल वितरण अधिकारी को पद से हटा सकते है और ऊपर दी गयी शर्ते पूरी करने वाले नए उम्मीदवार को जल वितरण अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(9) टिपण्णी :
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(9.1) ऊपर दी गयी धाराओं में इंगित "35%" और "2%" से आशय है "मतदाता सूचि में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 35% और 2% "। उदाहरण : यदि किसी जिले में 20 लाख मतदाता है तो 35% और 2% का अर्थ क्रमशः 700,000 और 40,000 होगा। यहाँ यह संख्या अनुमोदन दर्ज कराने वाले मतदाताओ की संख्या से अप्रभावित रहेगी। और जल वितरण अधिकारी के प्रतिस्थापन के लिए ऊपर दी गयी तीनो धाराओं (8.1) ,(8.2) ,(8.3) में दी गयी शर्तो का पूरा होना जरुरी होगा।
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(9.2) उदहारण – 1 : मान लीजिए किसी जिले में 20,00,000 मतदाता है ,तथा मान लीजिए कि पदासीन जल वितरण अधिकारी को 500,000 मतदाताओ के अनुमोदन मिले है। तब यदि किसी उम्मीदवार को 20,00,000 के 35% = 700,000 मतदाताओ के अनुमोदन मिलते है, सिर्फ तभी मुख्यमंत्री उस नए उम्मीदवार को जिला जल वितरण अधिकारी नियुक्त कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(9.3) उदहारण – 2 : मान लीजिए किसी जिले में 20,00,000 मतदाता है तथा मान लीजिए कि पदासीन जल वितरण अधिकारी के पास 800,000 मतदाताओ का अनुमोदन है। तब किसी उम्मीदवार के अनुमोदनों की संख्या (800,000 + 2% of 20,00,000) = (800,000 + 40,000) = 840,000, होना जरुरी है। सिर्फ तभी मुख्यमंत्री उसे जल वितरण अधिकारी नियुक्त कर सकेंगे या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(10) कोई नागरिक किसी राज्य में अधिकतम 5 जिलों का और पुरे भारत में अधिकतम 15 जिलों का जल वितरण अधिकारी बन सकता है। यदि कोई जल वितरण अधिकारी मतदाताओ के अनुमोदन द्वारा जल वितरण अधिकारी बना है अर्थात प्रत्येक जिले में उसे 35% मतदाताओ से ज्यादा मतदाताओ के समर्थन प्राप्त है , तो उसका वेतन एवं भत्ते एक जिला जल वितरण अधिकारी के वेतन एवं भत्तों से उतना गुना होगा जितने जिलो में वह जल वितरण अधिकारी के पद पर कार्यरत है। उदाहरण के लिए- यदि कोई व्यक्ति भारत के 7 जिलों में जल वितरण अधिकारी है, और सिर्फ 5 जिलों में ही उसको मिले अनुमोदनों की संख्या 35% से ज्यादा है तो उसे पांच गुणा वेतन मिलेगा न कि सात गुणा। किन्तु यदि कोई व्यक्ति 5 जिलो में जल वितरण अधिकारी है एवं 4 या 5 जिलों में प्रत्येक जिले से उसे मिले अनुमोदनों की संख्या 35% से कम है, तब उसका वेतन सिर्फ एक जिला जल वितरण अधिकारी के वेतनमान के बराबर होगा।
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(11) कार्य अवधि: कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक जिले में अधिकतम 8 साल तक जल वितरण अधिकारी रह सकता है। इसके बाद वह किसी अन्य जिले में जल वितरण अधिकारी बन सकता है या अमुक जिले में किसी अन्य पद पर सेवा दे सकता है।
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(12) कोई भी सेवानिवृत्ति लाभ नहीं : यदि कोई व्यक्ति मतदाताओ के समर्थन द्वारा जल वितरण अधिकारी बना है और वह किसी भी राजकीय सेवा कैडर से नहीं आता है तो कार्य अवधी समाप्त होने पर या हटा दिये जाने पर उसे किसी भी प्रकार की सेवानिवृत्ति राशी एवं पेंशन लाभ आदि नहीं मिलेंगे। जिला / राज्य / भारत सरकार द्वारा पारित किये गए किसी कानून या प्रस्ताव द्वारा उसे सेवानिवृति लाभ दिए जा सकेंगे परन्तु यह कानून जल वितरण अधिकारी को किसी भी प्रकार के सेवानिवृत्ति लाभ के लिए कोई प्रावधान नहीं करता।
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(13) मतदाताओ द्वारा अनुमोदित जल वितरण अधिकारी का वेतनमान एवं भत्ते : मतदाताओ द्वारा अनुमोदित जल वितरण अधिकारी का वेतन एवं भत्ते वरिष्ठता एवं अन्य पात्रताओं की अवहेलना करते हुए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किये जाने वाले जिला कलेक्टर के वेतनमान के समकक्ष होंगे। जल वितरण अधिकारी सरकारी आवास, सरकारी वाहन, ड्राइवर या अपने आवास पर प्राप्त की जाने वाली सेवाओं की पूर्ती के लिए किसी भी प्रकार के अतिरिक्त स्टाफ का पात्र नहीं होगा। किन्तु जल वितरण अधिकारी इन सेवाओं के बराबर निर्धारित राशि भत्ते के रूप में प्राप्त कर करेगा। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा। किन्तु मतदाताओ के अनुमोदन से नियुक्त सभी जल वितरण अधिकारी राज्य सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान के समान वेतन प्राप्त करेंगे। यदि जिले के मतदाता चाहे तो वे बहुमत का प्रदर्शन करके जल वितरण अधिकारी के वेतन में अतिरिक्त वृध्दि कर सकेंगे।
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(14) (14) मतदाताओ द्वारा अनुमोदित व्यक्ति को मुख्यमंत्री द्वारा जल वितरण अधिकारी नियुक्त करना : इस सम्बन्ध में फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। मुख्यमंत्री मतदाताओ द्वारा अनुमोदित व्यक्ति को ओएसडी (OSD = Officer on Special Duty) के रूप में या जल वितरण अधिकारी के रूप में नियुक्ति दे सकते है। मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा।
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(15) सभी पानी के कनेक्शंस को मीटरीकृत करना :
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(15.1) जल वितरण अधिकारी नगर परिषद् या जिला शासन द्वारा दिए गए प्रत्येक कार्यालय, निवास, फ्लेट, एवं प्रत्येक इकाई के पानी कनेक्शन पर अनिवार्य रूप से मीटर लगवाने की व्यवस्था कर सकता है। जल वितरण अधिकारी प्रत्येक निजी बोरिंग को भी मीटरीकृत कर सकेगा।
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(15.1.1) जल वितरण अधिकारी एक सीमा निर्धारित करेगा जिसमे प्रत्येक पानी कनेक्शन को मीटरीकृत किया जाना है। यदि कतिपय इकाइयां अपने कनेक्शन को मीटरीकृत नहीं करती है तो जल वितरण अधिकारी अवहेलना करने वाली इकाइयों पर दंड लगाने के प्रावधान निर्धारित करेगा।
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(15.2) टिपण्णी : जल वितरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक उपभोक्ता का उपभोग कम से कम एक वाटर मीटर द्वारा दर्ज किया जाए। यदि किसी व्यक्ति या इकाई को एक से अधिक मीटर की आवश्यकता है तो वह एक से अधिक मीटर लगा सकता है। .
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(15.3) किसी रिहाइशी या व्यावसायिक कोम्प्लेक्स में यदि N इकाइयाँ है तो ऐसे कोम्प्लेक्स में कम से कम N + 1 मीटर होंगे। प्रत्येक इकाई के लिए एक अलग से मीटर होगा, एवं एक कॉमन कनेक्शन सकल उपभोग के लिए होगा।
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(15.4) प्रत्येक रिहाइशी / व्यावसायिक कोम्प्लेक्स में किये गए बोरवेल एवं वाटर पम्प को बिजली आपूर्ति के लिए भी अलग से बिजली का मीटर लगाना आवश्यक होगा।
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(15.5) जल वितरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक रिहाइशी एवं व्यावसायिक कोम्प्लेक्स एसे विनियम बनाएं जिससे प्रत्येक उपभोक्ता / इकाई को उसके द्वारा उपभोग किये जा रहे पानी एवं पानी के लिए खर्च की जा रही बिजली का बिल ही चुकाना पड़े , अधिक नहीं। ऐसे रिहाइशी / व्यावसायिक कोम्प्लेक्स के कॉमन कनेक्शन के बिल को सभी इकाइयों में बराबर विभाजित किया जा सकेगा।
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(15.6) जल वितरण अधिकारी प्रत्येक पानी के मीटर एवं प्रत्येक पानी के मीटर के लिए इस्तेमाल में आ रहे बिजली के मीटरों की मासिक रीडिंग लेगा एवं इन्हे नगर परिषद् की वेबसाइट पर रखेगा। जल वितरण अधिकारी इसके लिए आवश्यक मोबाइल एप , वेबसाइट आदि भी बना सकेगा।
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(J) जल आवंटन और पानी के मीटर के मामलों पर जूरी प्रक्रिया
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(J.1) टिपण्णी : प्रस्तावित जूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए ‘ newindia dot in /causes/DJSM ‘ देखें
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(J.2) यदि जिला जल वितरण अधिकारी या उनके किसी कर्मचारी व किसी जल उपभोक्ता के बीच कोई विवाद होता है या किसी जल उपभोक्ता पर जुर्माना निर्धारित किया जाना है तो जिला जल वितरण अधिकारी इन विवादों के निपटान के लिए जूरी प्रक्रियाओं का प्रयोग करेंगे। इस भाग में जूरी के गठन से सम्बंधित नियम दिए गए है।
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(J.3) जल वितरण अधिकारी प्रत्येक जिले में एक जूरी प्रशासक नियुक्त करेंगे, जिसे जिला जूरी प्रशासक कहा जाएगा। जिला जल वितरण अधिकारी जूरी प्रशासक को किसी भी दिन बदल सकते है।
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(J.4) विवादों का निपटारा
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(J.4.1) प्रत्येक मामले के लिए जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से रेंडमली 30 से 55 वर्ष की आयु के कुछ उन नागरिक चुनेगा जो कि पिछले 10 वर्षों में कभी जूरी मंडल में ज्यूरर बन कर नहीं आये है एवं अतीत में उनको किसी भी मामले में दोषी नही पाया गया है।
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(J.4.2) जूरी सदस्यों की संख्या : जूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या 12 और अधिकतम 100 हो सकती है। यदि जिला जल वितरण अधिकारी द्वारा लगाए हुए जुर्माने की राशि 1 लाख से कम है तो जूरी सदस्यो की संख्या 12 होगी और उसके बाद हर एक लाख ज्यादा जुर्माने की रकम के लिए एक जूरी सदस्य और बढ़ाया जाएगा। जूरी सदस्यों की संख्या अधिकतम 100 हो सकती है। यदि मामला जुर्माने का नही है , बल्कि किसी अधिकारी के खिलाफ दुर्व्यवहार या भ्रष्टाचार का आरोप है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 होगी ।
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(J.4.3) जूरी सदस्य दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने विवेक एवं कानूनी सीमा के अनुसार जुर्माने की राशि निर्धारित करेंगे । जिला जल वितरण अधिकारी 67% जुरी सदस्यो द्वारा अनुमोदित जुर्माने की राशि को तय किया गया जुर्माना मानेंगे।
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(J.4.4) यदि 67% से अधिक जुरी सदस्य ये घोषित करते है कि, अभियुक्त अधिकारी को पद से निलंबित किया जाना चाहिए तो जिला जल वितरण अधिकारी अभियुक्त कर्मचारी को निलंबित करेंगे ।
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(S) देश अथवा राज्य के नागरिको द्वारा राईट टू रिकॉल जल वितरण अधिकारी के क़ानून को निलंबित करने की प्रक्रिया :
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(S.1) राज्य के मतदाता ( सभी मतदाता, न कि सिर्फ वे मतदाता जिन्होंने वोट किया है ) मुख्यमंत्री द्वारा स्थापित की गयी प्रक्रिया का उपयोग करते हुए इस कानून को किसी जिले / राज्य में 4 वर्ष तक के लिए निलंबित कर सकते है। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित होना चाहिए कि अमुक राज्य के कुल मतदाताओं ( न कि सिर्फ उन मतदाताओं ने जिन्होंने अनुमोदन की प्रक्रिया में भाग लिया है ) का बहुमत स्पष्ट रूप से इस निलंबन का समर्थन करता है। साथ ही राज्य के मतदाता अपने बहुमत का प्रयोग करते हुए इस निलंबन को 4 वर्षो की अवधि में असीमित आवृतियों तक बढ़ा सकेंगे।
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(S.2) देश के मतदाता ( सभी मतदाता, न कि सिर्फ वे मतदाता जिन्होंने वोट किया है ) प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित की गयी प्रक्रिया का उपयोग करते हुए इस कानून को किसी जिले / राज्य में 4 वर्ष तक के लिए निलंबित कर सकते है। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित होना चाहिए कि देश के कुल मतदाताओं ( न कि सिर्फ उन मतदाताओं ने जिन्होंने अनुमोदन की प्रक्रिया में भाग लिया है ) का बहुमत स्पष्ट रूप से इस निलंबन का समर्थन करता है। साथ ही देश के मतदाता अपने बहुमत का प्रयोग करते हुए इस निलंबन को 4 वर्षो की अवधि के लिए असीमित आवृतियों तक बढ़ा सकेंगे।
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(S.3) टिपण्णी : यहाँ "S" सम्प्रभुता ( Sovereignty ) का द्योतक है। आशय यह है कि, किसी भी जिले में लागू प्रक्रिया को राज्य / देश के मतदाता बहुमत का प्रदर्शन करके निलंबित कर सकते है, तथा किसी जिले / राज्य में लागू प्रक्रिया को देश के मतदाताओं का बहुमत निलंबित कर सकता है।
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(RV) [ सीमांकित मतदान या रेंज वोटिंग के लिए टिप्पणी ]
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अबाध्यकारी निर्देश - इस विधेयक के लागू होने के बाद चुनाव आयोग मतदाताओ को यह अनुमति दे सकेगा कि वे किसी उम्मीदवार को 0 से 100 के बीच अंक दे सके या फिर सामान्य रूप से हाँ / नहीं का अनुमोदन कर सके। यदि मतदाता द्वारा सामान्य अनुमोदन किया जाता है तो इस अनुमोदन को 100 अंको के समकक्ष माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता उम्मीदवार को अंक देता है तो मतदाता द्वारा दिए गए अंक ही मान्य होंगे। उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किये गए सभी अंक ही उम्मीदवार के कुल अंको की संख्या मानी जायेगी। पदासीन अधिकारी के कुल अंको की मान्य संख्या दी गयी दोनों परिस्थितियों में से उच्च अंक को निर्दिष्ट करने वाली संख्या को माना जाएगा -- (अ) पदासीन अधिकारी को प्राप्त कुल मत * 67, (ब) चुनाव के बाद पदासीन अधिकारी द्वारा प्राप्त अंक।
प्रतिस्थापक चुनाव तब आयोजित किया जाएगा जब किसी उम्मीदवार के कुल अंको की संख्या ( पदासीन अधिकारी के कुल अंको की संख्या + अमुक निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या * 100 / 10 ) के बराबर हो। तथा पदासीन अधिकारी का प्रतिस्थापन तब होगा जब उम्मीदवार को पदासीन अधिकारी से अधिक वोट मिलते है , और नए उम्मीदवार को पदासीन अधिकारी को पिछले चुनावों में मिले वोटो से 10% अधिक वोट मिलते है, या फिर नए उम्मीदवार को निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ के 51% मतों से ज्यादा मिलते है। इस विधेयक की धारा ( CV.1 ) का उपयोग करते हुए यदि देश के कुल मतदाताओं के 51% नागरिक इस व्यवस्था को लागू करने के "हाँ" दर्ज कर देते है तो चुनाव आयोग इस प्रणाली को लागू कर सकता है या नही भी कर सकता है। यह कथित सीमांकित मतदान प्रणाली या रेंज वोटिंग सिस्टम ऐरो की कथित असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
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(CV) जनता की आवाज (Citizens’ Voice):
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(CV.1 ) [ जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]
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यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस विधेयक की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस विधेयक से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र (फोटो) एवं अन्य विवरण के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2 ) [ तलाटी अथवा पटवारी के लिए निर्देश ]
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किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दी गयी धारा (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो, तो वह मतदाता अपना पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में उपस्थित होगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा । मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा।
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---------- जिला जल वितरण अधिकारी को बदलने के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट का समापन ----------

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Mar 11 2018 11:02:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस एल्बम के सभी पोस्ट देखने के लिए "feed view" क्लिक करें। इस एल्बम में विभिन्न क्षेत्रो में विदेशी निवेश के आने से होने वाले दुष्परिणाम एवं उनके उपायों के बारे में विवरण है। एफडीआई एवं देश की अन्य समस्याओं के समाधान के लिए मेरे द्वारा प्रस्तावित क़ानून देखने के लिए "Law Drafts I support " शीर्षक वाला एल्बम देखें। भारत के सभी कार्यकर्ताओ एवं नागरिको से मेरा आग्रह है कि वे अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर ऐसा ही एक एल्बम तैयार करे।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Mar 11 2018 11:04:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बिजली के मीटर-बिल-कलेक्शन ( MBC ) का ठेका निजी कम्पनियों को देने से उपभोक्ताओ को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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अभी मीटर-बिल-कलेक्शन का काम सरकार द्वारा किया जा रहा है, किन्तु देश में विभिन्न राज्यों की सरकारें घूस खाकर अब यह काम निजी कम्पनियों को देने की फिराक में है। हाल ही में भीलवाड़ा शहर में MBC का ठेका एक निजी कम्पनी के हवाले किया गया है।
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[ अपने ट्वीटर एकाउंट से यह ट्विट करें - " @PmoIndia , @RajCmo , #CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara , मीटर-बिल-कलेक्शन के निजीकरण अनुबंध को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/ " ]
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अभी भीलवाडा में प्रति उपभोक्ता मेंटेनेंस लागत 73 लाख रू मासिक है, एवं इसे आसानी से घटाकर 20 रूपये प्रति उपभोक्ता किया जा सकता है। लागत कम होने से नागरिको को कम बिल चुकाना होगा। लेकिन सरकार ने यह ठेका एक निजी कम्पनी को 1 करोड़ 15 लाख रू में दे दिया !! इस तरह प्रति उपभोक्ता जो मुनाफा नागरिको के बिल में कम होना था, वह राशि कम्पनी एवं नेताओ की जेब में चली गयी।
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मीटर -- भीलवाड़ा में कुल 86,000 कनेक्शन है एवं अभी इनके MBC के प्रबंधन की लागत प्रति कनेक्शन लगभग 73 लाख रूपये आती है। अभी यहाँ इलेक्ट्रोनिक मीटर लगे हुए है। अत: इनकी रीडिंग लेने के लिए स्टाफ को मीटर्स तक आना होता है। यदि इन्हें वाई-फाई एवं सिम कार्ड युक्त मीटर्स से बदल दिया जाए तो इनकी रीडिंग मैनुअली लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी। एक मीटर अपने पास के दुसरे मीटर को डेटा ट्रांसमिट कर सकेगा एवं दूसरा तीसरे को। इस तरह किसी सोसाइटी में लगे 500 मीटर अपना डेटा अपने नजदीकी मीटर को ट्रांसफर करेंगे एवं किसी एक मीटर की रीडिंग लेने से सभी 500 मीटर का डेटा मिल जाएगा।
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मीटर रीडिंग -- रीडिंग लेने वाला कर्मचारी वाई-फाई डेटा रिसीव करने वाला उपकरण लेकर सोसाइटी में से एक राउंड लगाएगा एवं सभी मीटर्स की रीडिंग उपकरण अपने आप नोट कर लेगा। इस तरह 1 कर्मचारी एक दिन में 5 से 10 हजार मीटर्स की रीडिंग नोट कर सकता है। इसके अलावा सिम कार्ड युक्त मीटर अपना डेटा सीधे किसी केन्द्रीय इकाई को ट्रांसमिट कर सकते है। इस तरह नयी तकनीक का उपयोग करके मीटर रीडिंग की लागत काफी हद तक कम की जा सकती है।
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बिल कलेक्शन -- इसी तरह , यदि बिल जमा करने के लिए मोबाइल वॉलेट ( एम-पैसा, भीम एप , पे टीएम आदि ) का इस्तेमाल किया जाए एवं ऑनलाइन जमा कराने पर शुरूआती दौर में डिस्काउंट दिया जाए तो ज्यादा नागरिक इनका उपयोग करने लगेंगे एवं बिल जमा कराने की लागत भी बेहद घट जायेगी। अत: इस तकनीक का उपयोग करके भी लागत में कमी की जा सकती है। ये मीटर लगने से बिजली की चोरी एवं छीजत में भी कमी आएगी
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इन बदलावों के आने से प्रति मीटर रीडिंग एवं कलेक्शन की लागत लगभग 75% तक घटकर 20 लाख रूपये प्रति उपभोक्ता आ जायेगी। सरकार चाहती तो यह बदलाव ला सकती थी। इन तकनिकी बदलावों के आने से उपभोक्ता को कम बिल चुकाना होता। लेकिन उन्होंने यह लाभ जनता को देने की जगह निजी कम्पनी को दिया, एवं मुनाफा आपस में बाँट लिया।
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तो जब तकनीक के आने से सरकार एंव उपभोक्ता को लाभ होता नजर आता है तो वे इन बदलावों को स्वयं लागू नहीं करते। वे इसके लिए किसी निजी कम्पनी को ढूंढते है एवं घूस खाकर बढ़ी हुयी लागत में उन्हें यह काम सौंप देते है।
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यह भी उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा शहर का विद्युत् निगम मुनाफे में चल रहा है एवं सालाना 200 करोड़ का मुनाफा बना रहा है।
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इसीलिए मैं कहता हूँ कि निजीकरण एवं एफडीआई अपने आप में ही सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है, एवं यह भ्रष्टाचार पूरी तरह से कानूनी है। बल्कि सरकार इस भ्रष्टाचार को विकास से जोड़ कर वोट भी जुटाती है। और सभी पार्टियां निजीकरण एवं एफडीआई के इस भ्रष्टाचार में शामिल है। कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी भी हमेशा से एफडीआई के समर्थन में रही है। अत: भीलवाडा के कोंग्रेस एवं आम आदमी के स्थानीय नेता भी वसुंधरा जी के इस कदम का पूरा समर्थन कर रहे है।
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तो जब किसी तकनीक को अपनाने से उपभोक्ता एवं सरकार को मुनाफा होता है तो सरकार ऐसे बदलावों को लागू करने से परहेज क्यों करती है ?
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क्योंकि उर्जा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास नहीं है। राईट टू रिकॉल कानूनों का अभाव होने से उनकी रुचि सिर्फ उन्ही कामो में होती है जिससे उन्हें कमाई होती हो। यदि मुख्यमंत्री पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं होती तो यह बदलाव वर्षो पहले आ गए होते। लेकिन वे इन बदलावों को लंबित करते रहे और अंत में घूस खाकर यह बदलाव लाने का काम निजी कम्पनी को दे दिया।
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समाधान - बिजली विभाग का भ्रष्टाचार दूर करने के लिए हमारा प्रस्ताव है कि राईट टू रिकॉल उर्जा मंत्री एवं बिजली विभाग के कर्मचारियों पर ज्यूरी प्रक्रियाएं लागू की जाएँ। इन कानूनों के आने से बिजली विभाग का भ्रष्टाचार घटकर शून्य तक आ जाएगा एवं उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। नागरिको की सम्पत्ति से खड़े किये गए इन लाभकारी संगठनों को निजी कम्पनियों के हवाले करने की जगह सिर्फ ये 2 क़ानून लाकर बिजली विभाग को दुरुस्त एवं कार्यकुशल बनाया जा सकता है। किन्तु इन कानूनों के आने से विभाग बेहतर ढंग से काम करने लगेगा, जिससे सरकार के हाथ से निजीकरण करने के नाम पर घूस खाने का मौका हाथ से निकल जाएगा। इसीलिए कोंग्रेस-बीजेपी-आम आदमी पार्टी के सभी नेता हमेशा से उर्जा मंत्री एवं मुख्यमंत्री पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओ का हमेशा से विरोधी रहे है।
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अपने ट्वीटर एकाउंट से यह ट्विट करें -

" @PmoIndia , @RajCmo , #CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara , मीटर-बिल-कलेक्शन के निजीकरण अनुबंध को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/ "
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एमबीसी के निजीकरण के खिलाफ वोट करने के लिए यह लिंक क्लिक करें -- newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 13 2018 08:59:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कोंग्रेस , सपा एवं बसपा के पूर्व नेता नरेश अग्रवाल ने हनुमान जी का वास ठर्रे में , सीता जी का जिन में और श्री राम का वास रम में बताया था। हिन्दू देवी-देवताओ का मज़ाक उड़ाने वाला यह बयान उन्होंने संसद में दिया था !! लेकिन यह तब की बात थी। अब वे बीजेपी में है। मतलब आज के बाद इन्हे भी हिंदूवादी कह कर पुकारा जाएगा !!!
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<https://www.youtube.com/watch?v=TCsLGidxXi0>;
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संसद में दिए गए किसी बयान पर अदालत में मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता , किन्तु सरकार चाहे तो संसद से प्रस्ताव पास करके उन्हें दण्डित कर सकती है।
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१) बीजेपी के पास सयुंक्त सत्र में बहुमत है। अत: बीजेपी यदि चाहती तो प्रस्ताव पास करके नरेश अग्रवाल को सांसद की नौकरी से निकाल सकती थी , एवं आज भी निकाल सकती है।
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२) बीजेपी यदि चाहती तो लोकसभा या संयुक्त सत्र में प्रस्ताव पास करके नरेश अग्रवाल को कारावास की सजा भी दे सकती थी एवं आज भी दे सकती है।
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इसीलिए संघ के कार्यकर्ताओ द्वारा किया जा रहा यह प्रचार पूरी तरह से गलत है कि संसद में दिए गए बयान के कारण बीजेपी नरेश अग्रवाल पर कोई कार्यवाही करने में सक्षम नहीं थी। दरअसल बीजेपी सरकार क़ानून के दायरे में अपनी शक्तियों का प्रयोग करके तब भी नरेश अग्रवाल को दण्डित कर सकती थी एवं आज भी कर सकती है। लेकिन तब भी रिकालिस्ट्स ने यह कहा था कि बीजेपी नरेश अग्रवाल पर इसीलिए कार्यवाही नहीं करना चाहती क्योंकि बीजेपी किसी भी समय नरेश अग्रवाल को बीजेपी में शामिल कर सकती है।
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संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा पिछले 10 साल से निरंतर यह झूठ भी फैलाया जा रहा है कि -- "बीजेपी के पास राज्य सभा में बहुमत नहीं होने के कारण वांछित क़ानून पास नहीं हो पा रहे है"
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असल में सच्चाई यह है कि संविधान संशोधन के अतिरिक्त किसी भी प्रकार का क़ानून संसद का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर पास किया जा सकता है। और बीजेपी के पास संयुक्त सत्र में कानून पास करने के लिए आवश्यक बहुमत है। स्पष्ट है, राज्य सभा में बहुमत न होने का हवाला देना सिर्फ एक बहाना है। लेकिन संघ के कार्यकर्ता इतने बड़े झूठे है कि वे पिछले 4 साल से इस सम्बन्ध में नागरिको के बीच यह झूठ फैला रहे है। और इस बारे में पूछे जाने पर बड़े गर्व से कहते है कि यदि आपको भी यदि जनता के आँखों में धुल झोंकने का यह फन सीखना हो तो आप हमारी शाखा में आइये !!!
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बहरहाल, संसद में श्री राम , सीता जी एवं हनुमान जी के बारे में इस तरह के अपशब्द प्रयोग करने वाले व्यक्ति को बीजेपी द्वारा पार्टी में शामिल किये जाते देखना दुखद है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 15 2018 19:03:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

लोकसभा सांसद साधारण बहुमत से प्रस्ताव पास करके सुप्रीम कोर्ट जजों को शामिल करते हुए देश के किसी भी व्यक्ति को सीधे जेल में डाल सकते है। और देश की किसी भी अदालत में इस फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती।
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मिसाल के लिए -- दिसम्बर 1978 में लोकसभा सासंदों ने एक प्रस्ताव पास करके देवी इंदिरा गाँधी की संसद सदस्यता कुछ दिनों के लिए रद्द कर दी थी एवं उन्हें जेल में डाल दिया था। प्रस्ताव साधारण बहुमत से पास किया गया था, और प्रस्ताव के स्वीकृत हो जाने पर देवी इंदिरा गाँधी को जेल भेज दिया गया। बाद में भारी जन विरोध के चलते उन्हें रिहा करना पड़ा।
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न्यूज़ लिंक -- <https://goo.gl/TpQcey>;
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सुप्रीम कोर्ट के जज लोकसभा द्वारा दिए गए ऐसे कारावास को रद्द नहीं कर सकते। क्योंकि , सुप्रीम कोर्ट जज सिर्फ लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ही रद्द कर सकते है , संसद के फैसलों को नहीं। इसके अलावा लोकसभा सांसद प्रस्ताव लाकर सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को जेल में डाल सकते है। इस वजह से भी संसद द्वारा पास किये गए ऐसे प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के जज अड़ंगा नहीं लगाएंगे। और फिर भी यदि वे अड़ंगा लगाते है, तो पीएम सेना को उन्हें जेल में डालने के लिए कह सकते है। सेना सुप्रीम कोर्ट जजो के क्षेत्राधिकार से बाहर है , एवं अदालत सेना के मामलो में सिर्फ तब सुनवाई कर सकती है , जब सेना इसके लिए अनुमति दे।
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जब नरेश अग्रवाल ने श्री राम, सीता जी एवं हनुमान जी का संसद में मजाक उड़ाया तो संघ के सांसद लोकसभा में प्रस्ताव पास करके नरेश अग्रवाल को जेल में डाल सकते थे। लेकिन संघ के सांसदों ने ऐसा नहीं किया।
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उल्लेखनीय है कि, संसद परिसर न्यायलयो के क्षेत्राधिकार से बाहर है , अत: अदालत नरेश अग्रवाल को जेल नहीं भेज सकती थी। किन्तु संघ के सांसदों के पास लोकसभा में बहुमत था एवं वे नरेश अग्रवाल को जेल भेज सकते थे। लेकिन संघ के सांसदों ने ऐसी कोई भी कार्यवाही करने से इनकार कर दिया था। लोकसभा में प्रस्ताव लाकर नरेश अग्रवाल को आज भी जेल भेजा जा सकता है, किन्तु संघ के सांसद आज भी इनकार कर रहे है।
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समाधान - सांसदों पर ज्यूरी ट्रायल। यदि संसद में सांसद कोई अपराध करते है तो देश की मतदाता सूचियों से 1500 नागरिको का चयन कर जूरी बुलाई जानी चाहिए। यह ज्यूरी मामले की सुनवाई करेगी एवं आरोप साबित होने पर सांसदों को जेल भेज सकेगी।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 16 2018 09:22:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सिंगापुर की कम्पनी 'Broadcomm' अमेरिकी संचार कम्पनी 'Qualcomm' का अधिग्रहण करना चाहती थी। किन्तु ट्रम्प ने अधिग्रहण को "सुरक्षा के लिए खतरा" बताते हुए इस पर रोक लगा दी है।
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और यहाँ भारत में हमारे पास सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नगीने है जो ऍफ़डीआई के नाम पार्ट देश की अर्थव्यवस्था का कतरा कतरा अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको को हवाले करने में लगे हुए है !!! और जब हमारे जैसे लोग एफडीआई जनित विकास का विरोध करते है तो संघ के कार्यकर्ता हमें वामपंथी और गद्दार कह कर पुकारते है !!!
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तो प्रत्येक कार्यकर्ता को इस बात पर विचार करना चाहिए कि गद्दार कौन है -- संघ के कार्यकर्ता जो भारत के टेलिकॉम , मीडिया , इंटरनेट, सोशल मीडिया, रक्षा समेत देश की सभी क्षेत्र विदेशियों के हवाले करना चाहते है या हम !!!

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गूगल करें -- "Broadcomm, Qualcomm merger Trump"
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न्यूज लिंक -- <https://goo.gl/CwYYbj>;
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राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि -- "विश्वसनीय सबूतों के आधार पर हमारा यह निष्कर्ष है कि सिंगापुर की Broadcomm कम्पनी द्वारा अमेरिकी संचार कम्पनी Qualcomm का अधिग्रहण किया जाना राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा है।".
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 16 2018 11:23:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कोयला खदानों का निजीकरण यानी इन्हे विदेशियों के हवाले करना --- सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके अंधभगतो का यह फैसला आगे चलकर भारत के विदेशी मुद्रा कोष को बर्बाद कर देने की हद तक नुकसान पहुंचाएगा।
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने भारत की कोयला खदाने निजी कम्पनियों को देने का फैसला किया है , लेकिन उन्होंने इसमें इस तरह का प्रस्ताव शामिल करने से इनकार कर दिया है कि, सिर्फ सम्पूर्ण रूप से भारतीय कम्पनियां ही ये ठेके ले सकेगी !!! वजह -- वे भारत की खदाने विदेशियों के हवाले करना चाहते है।
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मान लिजिये कि , अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत में एक कोयला खदान खरीदता है। अब वह खनन करके कोयला देश में बेच सकता है। कोयले के खनन की लागत लगभग 200 रूपये टन से 800 रुपये प्रति टन के आस पास होती है, एवं इसे लगभग 2000 से 8000 रूपये प्रति टन के भाव से बेचा जाता है। इस पर रोयल्टी 1000 से 3000 रूपये प्रति टन के हिसाब से सरकार में जमा करनी होती है। विक्रय मूल्य में से खनन एवं रोयल्टी की मदों को घटाने से जो राशि शेष रहती है , वह कम्पनी को मुनाफा बचता है।
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अब यदि अमरीकी-ब्रिटिश धनिक यह निवेश मोरिशस की कम्पनी के माध्यम से भारत में लाते है, तो अगस्त 2015 में मोदी साहेब द्वारा लागू किये गए एवं सोनिया-केजरीवाल द्वारा समर्थित संशोधन के अनुसार उन्हें अपनी आय पर अधिकतम 7.5% टेक्स ही चुकाना होगा !!! लेकिन यह कम्पनी यदि भारत की है तो भारतीय कम्पनी को 25% ( आयकर ) + 10% ( लाभांश कर ) = 35% टेक्स चुकाना होगा। जाहिर है , भारतीय कम्पनियां विदेशियों के मुकाबले घाटा बनाकर बाजार से बाहर हो जायेगी।
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और सबसे बड़ा पहलु यह है कि ब्रिटिश-अमेरिकी धनिक रुपयों में कमाए गए इस मुनाफे के बदले में कभी भी हमसे डॉलर की मांग कर सकते है !! और हमें उन्हें डॉलर चुकाने होंगे।
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दुसरे शब्दों में, ब्रिटिश-अमेरिकी धनिक भारत की खदानों से कोयला निकालकर भारत में भी बेचेंगे और उनके द्वारा कमाए गए मुनाफे के बदले हम उन्हें डॉलर चुकायेंगे !!! सोनिया-केजरीवाल एवं इनके सभी अंध भगत भी इस फैसले के समर्थन में है !! और मोदी साहेब के सभी अंध भगत एवं संघ के कार्यकर्ता तो खैर इसके समर्थन में है ही।
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और फिर भी यदि कोई व्यक्ति सोनिया-मोदी-केजरीवाल में कोई अंतर नहीं देखता तो मेरे विचार में उसे अपने दिमाग का परीक्षण करवाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह तय है कि ऐसे व्यक्ति का दिमाग असाधारण रूप से विकास कर चुका है। उसकी खोपड़ी में दिमाग की इतनी प्रचुरता है कि उसे अपना ब्रेन डोनेट करते रहना चाहिए।
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समाधान -- कोल इण्डिया के चेयरमेन पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं एवं उसके स्टाफ पर ज्यूरी सिस्टम। DDMRCM क़ानून के आने से भी खनन में व्याप्त भ्रस्टाचार में ख़त्म हो जाएगा , एवं खनन विभाग की कार्यकुशलता बढ़ेगी।
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यदि आप इन कानूनों का समर्थन करते है तो मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पेज को क्लिक करके डिस्क्रिप्शन देखें। डिस्क्रिप्शन में आप इन कानूनों के प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट देख सकते है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 16 2018 17:52:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

किस किस्म के लोग इस तरह की सलाह देते है कि -- हमें कारो और मोटरसाइकिल्स का उपयोग बंद कर देना चाहिए। घोड़े सबसे उपयुर्क्त सवारी है।
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ऐसी बौद्धिक सलाह वे ही समझदार लोग देते नजर आते है जिनका कहना है कि -- हमें बंदूके नहीं चाहिए। सिर्फ लाठियां एवं तलवारे ही काफी है।
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जाहिर है ऐसे लोगो का आई क्यू लेवल 1500 के पार होता है।
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और 107 अंको का आई क्यू लेवल धारण करने वाले मेरे जैसे सामान्य बुद्धि के व्यक्ति मानते है कि --- घोड़े की सवारी में अच्छा रोमांच है , किन्तु दूरी तय करने के लिए हमें बाइक और कारो का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसी तरह समय काटने एवं मनोरंजन के लिए तलवारे एवं लाठी चलाना अलग बात है , किन्तु जब बात आत्म रक्षा की हो तो यह जरुरी है कि हमारे पास बंदूके हो।
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कोंग्रेस / संघ (*) एवं आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता प्रत्येक भारतीय के लिए बन्दुक रखना अनिवार्य बनाने के क़ानून का विरोध करते है। ( स्विट्जर्लेंड में ऐसा क़ानून 1880 से है )
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( * संघ = संघ + बीजेपी , गंगाधर = गंगाधर + शक्तिमान। और यह मुझे यह बात समझ नहीं आती कि संघ के कार्यकर्ता तब क्यों आपे से बाहर हो जाते है जब उन्हें बीजेपी का कार्यकर्ता कह कर पुकारा जाता है। उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे उन्हें कोई गाली दी जा रही है। भइयो , क्या तुम्हारे हिसाब से बीजेपी इतनी गयी गुजरी पार्टी है ? )
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और इस क्रम में लोगो को मूर्ख बनाने के लिए वे तलवार एवं लाठी को प्रोत्साहित करते है।
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बंगाल एवं देश के अन्य कई हिस्सों में भी बांग्लादेशी घुसपेठीये बन्दुक एवं कारतूस बनाना सीख रहे है।
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लेकिन इन लोगो का आई क्यू लेवल 1500 अंको से भी ज्यादा ऊँचा हो चुका है , अत: ये भारतीयों को बंदूक की जगह सिर्फ लाठी, भाटे एवं तलवारो तक ही सीमित रखना चाहते है !!
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देश में राईट टू रिकॉल पार्टी एक मात्र राजनैतिक पार्टी है जो प्रत्येक भारतीय को बंदूक रखना अनिवार्य करने के क़ानून का समर्थन करती है।
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कोंग्रेस-बीजेपी-आपा के सभी कार्यकर्ता हथियार बंद नागरिक समाज की रचना के लिए आवश्यक क़ानून का विरोध करते है। जाहिर है , वे भारतीयों को कमजोर एवं निहत्था रखना चाहते है। ताकि भारतीय दुश्मनों से बचने के लिए खुद को पश्चिमी देशो के हवाले कर दे। और जब भारत का युद्ध चीन / पाकिस्तान से होगा या हमें गृह युद्ध का सामना करना पड़ेगा तब हमें इस बात का अहसास होगा कि हमने प्रत्येक भारतीय को बंदूक न देकर पूरे देश को दांव पर लगा दिया था।
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हथियार बंद नागरिक समाज की रचना के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/549842378527294>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 19 2018 18:19:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नमस्कार Sourav Meena ,
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यह स्तम्भ आपके प्रश्न तथा टिप्पणियों के लिए बनाया गया है।
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सभी के लिए
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यह पोस्ट सिर्फ़ sourav meena के प्रश्न और टिप्पणियों के लिए है। अन्य के प्रश्न और टिप्पणियाँ डिलीट कर दी जायेगी।
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प्रश्नकर्ता से निम्नलिखित नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है :
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(1) हिन्दी भाषा के लिए हिन्दी लिपि और अंग्रेजी भाषा के लिए अंग्रेजी लिपि का प्रयोग करें। रोमन भाषा का प्रयोग नहीं करे ।
.
(2) दो पेराग्राफ के बीच '.' चिन्ह का प्रयोग करे ।
.
(3) लेखन में अनावश्यक चिन्हों जैसे '.......', '!!!!!!!', '//////', '####', '„„„„„„', '??????' आदि का तथा अनावश्यक 'केपिटल लेटर्स' का प्रयोग नहीं करें ।
.
(4) एक बार में एक ही कमेन्ट करे । यदि आपने दो कमेन्ट एक साथ किये है तो,
अ) पहले कमेन्ट को एडिट करें
ब) दुसरे कमेन्ट को कोपी करके पहले वाले कमेन्ट में पेस्ट करे
स) फिर दुसरे कमेन्ट को डिलीट कर दें ।
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(5) कमेन्ट क्रमिक/सिलसिलेवार ढंग से करे, अक्रमिक रूप से नही ।
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क्रमिक कमेन्ट क्या है ?
.
मान लीजिये कि -
अ) आपने 'पहला' कमेन्ट किया है,
ब) मैंने 'दूसरा' कमेन्ट किया है,
स) आपने 'तीसरा' कमेन्ट किया है,
द) आपने चौथा कमेन्ट किया है ।
तो यहाँ पहला, दूसरा और तीसरा क्रमिक जबकि चौथा कमेन्ट अक्रमिक है । अक्रमिक कमेन्ट को बिन्दु 4 में बताये तरीके से संपादित कर पिछले कमेन्ट में जोड़ दें ।
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(6) अपने प्रश्नों तथा टिप्पणियों को डिलीट नहीं करे । ताकि अन्य कार्यकर्ता भी इन्हें पढ़ सके ।
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(7) कृपया मेरी फेसबुक प्रोफाइल पर नोट्स (Notes) सेक्शन में जाए तथा ' नागरिको को चाहिए कि वे अपने पीएम को ट्विटर पर आदेश भेजे' स्तम्भ को पढ़े। यह हमारे अभियान का केंद्र बिन्दु है ।
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(8) नोट्स सेक्शन में ही 'विशेष आलेख-01' शीर्षक से दर्ज स्तम्भ में राईट टू रिकाल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कुछ मुख्य कानूनी ड्राफ्ट्स की सूची तथा उनके लिंक देखे जा सकते है ।
.
(9) इस स्तम्भ का लिंक देखने के लिए नोट्स सेक्शन में जाकर 'आपसी संवाद स्तम्भ' या 'two person conversation thread' शीर्षक से रखे गए स्तम्भ को देखें । इस स्तम्भ का लिंक वहां दर्ज किया गया है ।
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(10) हम देश में व्यवस्था परिवर्तन के लिए आवश्यक जूरी सिस्टम/राईट टू रिकाल कानूनों का मुक्त रूप से प्रचार करते है ताकि करोड़ो नागरिको की सहमति से इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित कराया जा सके । आप से अपेक्षा की जाती है कि प्रश्न/कमेंट्स पठनीय भाषा में रखें ।
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(11) कृपया कमेंट्स के लिए liner कमेंट्स बॉक्स का प्रयोग करें। "reply caption" का इस्तेमाल न करें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 19 2018 20:26:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

फाइनेंस बिल ; 7 मिनिट तक का यह वीडियो देखें : <https://www.youtube.com/watch?v=SB018p0TD7g>;
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मोदी साहेब ने फायनेंस बिल में संशोधन कर दिया है। अब विदेशी कम्पनियो से अब चंदा लेना गैर कानूनी नहीं रहेगा। कांग्रेस एवं बीजेपी को 2010 में हाई कोर्ट ने विदेशियों से चंदा लेने का दोषी ठहराया था। तब से इस मामले पर कार्यवाही लंबित थी। इस क़ानून को पीछे जाकर 2010 से लागू करने से कांग्रेस एवं बीजेपी इस भ्रष्टाचार की चपेट में आने बच जाती । किन्तु कांग्रेस को उनके अन्य पुराने पापो से बचाने के लिए मोदी साहेब ने इस बिल को और पीछे जाकर 1976 से लागू किया है। मतलब 2010 में कांग्रेस-बीजेपी ने जो अपराध किया था और जो मामला अभी चल रहा है , वह अपराध अब गैर कानूनी नहीं रह गया है , बल्कि कानूनी हो गया है !! और 1976 से पहले के भी किये गए ऐसे सभी अपराध भी अब अपराध नहीं रहेंगे।
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मोदी साहेब के राष्ट्रवाद के जौहर खुलते ही जा रहे है। पर इतनी नंगई की उम्मीद तो नहीं की थी।
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हमारी सभी शीर्ष राजनैतिक पार्टियों को विदेशी ही पाल रहे है। अब विदेशी भारत की राजनैतिक पार्टियों को खुले आम पैसा देंगे। और जो पैसा देगा, धुन भी उसी की बजेगी।
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बीजेपी एवं कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी भी इस क़ानून के समर्थन में है। और इन पार्टियों के सभी कार्यकर्ता भी मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहे है। संघ के कार्यकर्ता इस क़ानून के आने से विशेष रूप से खुश है।
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न्यूज लिंक - <https://goo.gl/PKr6CK>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 20 2018 20:35:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रूस भी ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर ला रहा है !!! कृपया "Russia election ballot paper" पर गूगल करें
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रूस में पिछले चुनावों में कुछ बूथों पर ईवीएम का इस्तेमाल हुआ था। लेकिन इस बार सभी बूथों पर सिर्फ बैलेट पेपर इस्तेमाल किये गए !!
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और कुछ बूथ पर पेपर बैलेट के साथ ही स्कैनर का भी इस्तेमाल किया गया। स्कैनर वोटिंग के दौरान मतों की गिनती करते रहता है , लेकिन मतदान के बाद फिर से मतपत्रों को गिना जाता है।
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तो अब ईवीएम के साथ चिपके हुए देशो में भारत के साथ सिर्फ अफ्रीकन देश और बनाना रिपब्लिक ही बचे है !! और विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत इस झुण्ड का नेता है !!!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Mar 21 2018 19:14:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नमस्कार , Gaurang Patel
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यह स्तम्भ आपके प्रश्न तथा टिप्पणियों के लिए बनाया गया है।
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सभी के लिए
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यह पोस्ट सिर्फ़ gurang patel के प्रश्न और टिप्पणियों के लिए है। अन्य के प्रश्न और टिप्पणियाँ डिलीट कर दी जायेगी।
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प्रश्नकर्ता से निम्नलिखित नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है :
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(1) हिन्दी भाषा के लिए हिन्दी लिपि और अंग्रेजी भाषा के लिए अंग्रेजी लिपि का प्रयोग करें। रोमन भाषा का प्रयोग नहीं करे ।
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(2) दो पेराग्राफ के बीच '.' चिन्ह का प्रयोग करे ।
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(3) लेखन में अनावश्यक चिन्हों जैसे '.......', '!!!!!!!', '//////', '####', '„„„„„„', '??????' आदि का तथा अनावश्यक 'केपिटल लेटर्स' का प्रयोग नहीं करें ।
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(4) एक बार में एक ही कमेन्ट करे । यदि आपने दो कमेन्ट एक साथ किये है तो,
अ) पहले कमेन्ट को एडिट करें
ब) दुसरे कमेन्ट को कोपी करके पहले वाले कमेन्ट में पेस्ट करे
स) फिर दुसरे कमेन्ट को डिलीट कर दें ।
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(5) कमेन्ट क्रमिक/सिलसिलेवार ढंग से करे, अक्रमिक रूप से नही ।
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क्रमिक कमेन्ट क्या है ?
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मान लीजिये कि -
अ) आपने 'पहला' कमेन्ट किया है,
ब) मैंने 'दूसरा' कमेन्ट किया है,
स) आपने 'तीसरा' कमेन्ट किया है,
द) आपने चौथा कमेन्ट किया है ।
तो यहाँ पहला, दूसरा और तीसरा क्रमिक जबकि चौथा कमेन्ट अक्रमिक है । अक्रमिक कमेन्ट को बिन्दु 4 में बताये तरीके से संपादित कर पिछले कमेन्ट में जोड़ दें ।
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(6) अपने प्रश्नों तथा टिप्पणियों को डिलीट नहीं करे । ताकि अन्य कार्यकर्ता भी इन्हें पढ़ सके ।
.
(7) कृपया मेरी फेसबुक प्रोफाइल पर नोट्स (Notes) सेक्शन में जाए तथा ' नागरिको को चाहिए कि वे अपने पीएम को ट्विटर पर आदेश भेजे' स्तम्भ को पढ़े। यह हमारे अभियान का केंद्र बिन्दु है ।
.
(8) नोट्स सेक्शन में ही 'विशेष आलेख-01' शीर्षक से दर्ज स्तम्भ में राईट टू रिकाल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कुछ मुख्य कानूनी ड्राफ्ट्स की सूची तथा उनके लिंक देखे जा सकते है ।
.
(9) इस स्तम्भ का लिंक देखने के लिए नोट्स सेक्शन में जाकर 'आपसी संवाद स्तम्भ' या 'two person conversation thread' शीर्षक से रखे गए स्तम्भ को देखें । इस स्तम्भ का लिंक वहां दर्ज किया गया है ।
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(10) हम देश में व्यवस्था परिवर्तन के लिए आवश्यक जूरी सिस्टम/राईट टू रिकाल कानूनों का मुक्त रूप से प्रचार करते है ताकि करोड़ो नागरिको की सहमति से इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित कराया जा सके । आप से अपेक्षा की जाती है कि प्रश्न/कमेंट्स पठनीय भाषा में रखें ।
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(11) कृपया कमेंट्स के लिए liner कमेंट्स बॉक्स का प्रयोग करें। "reply caption" का इस्तेमाल न करें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 22 2018 19:20:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

फेसबुक डेटा लीक एवं केम्ब्रिज एनालिटिक्स ; बेतुका मुद्दा
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यूजर अपनी इच्छा से अपना डेटा फेसबुक पर रखता है। और इनमे से ज्यादातर राजनैतिक पोस्ट "पब्लिक" होते है, न कि "फ्रेंड्स ओनली"
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तो कोई भी डेटा माइनिंग कम्पनी इसे इकठ्ठा कर सकती है।
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अत: इस तरह इकट्ठे किये गए डेटा का प्रभाव शून्य है। वे सीआईए की तरह ईवीएम हैक नहीं कर रहे है।
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तो इसे राजनैतिक मुद्दा बनाना निरर्थक है।
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मूल मुद्दा यह है कि -- फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके लोगो का राजनैतिक मानस बदल सकती है।
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इसीलिए हमें फेसबुक , ट्विटर , व्हाट्स एप आदि को बेन करना चाहिए एवं पूरी तरह से भारतीय सोशल मीडिया कम्पनियो को बढ़ावा देना चाहिए।
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फेसबुक से डेटा चोरी करके चुनावी नतीजे प्रभावित नहीं किये जा सकते। फेसबुक ज्यादातर यूज व्यावसायिक कम्पनियो को डेटा बेचकर पैसा कमाने में करता है। इसके अलावा इसका प्रयोग जासूसी नजर रखने के लिए भी किया जाता है। लेकिन डेटा का यह इस्तेमाल सिर्फ फेसबुक ही नहीं बल्कि गूगल भी करता है। और गूगल के पास यूजर का डेटा जुटाने की क्षमता फेसबुक से कई गुना अधिक है।
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सोशल मीडीया मुनाफा नहीं बल्कि घाटा बनाने वाला कारोबार है। अत: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म डेटा नहीं बेचेगा तो वह घाटा बनाने लगेगा। लेकिन यदि फेसबुक डेटा बेचता है तो भी वह घाटे में ही रहता है। विज्ञापन आदि से होने वाली आय से फेसबुक का घाटा पूरा नहीं होता। फेसबुक , गूगल आदि कम्पनियाँ घाटा बनाती है, लेकिन इनका राजनैतिक प्रभाव होने के कारण ये टिकी हुयी है। आप फेसबुक पर असीमित पोस्ट, वीडियो फोटो आदि अपलोड कर सकते है, इतना डेटा सुरक्षित रखने के लिए काफी खर्च होता है। तो कोई यूजर अपना एकाउंट बनाने एवं डेटा सुरक्षित रखने के लिए फेसबुक को कितना पैसा चुकाता है ? शून्य !! फिर भी फेसबुक टिकी हुयी है !!! क्योंकि इसे सीआईए का समर्थन हासिल है।
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सबसे बड़ी समस्या है --- फेसबुक नागिरको को एकतरफा खबरें देकर अपने यूजर्स को राजनैतिक रूप से प्रभावित करता है। इसके लिए फेसबुक बूस्टिंग एवं फिलटरिंग का इस्तेमाल करता है।
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फिलहाल स्थिति यह है कि फेसबुक डेटा बेचे या न बेचे, आपको फेसबुक ही यूज करना पड़ेगा। क्योंकि भारत में फेसबुक की एकाधिकार है।
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हमें फेसबुक पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए। किन्तु अभी ऐसा करने की हमारी हैसियत नहीं है। जूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल क़ानून आये बिना फेसबुक पर रोक लगाना मुमकिन नहीं है। जूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल आने से ही भारतीय सोशल मीडिया कम्पनियां खड़ी हो सकेगी।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 23 2018 09:18:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

किस तरह डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने देवरस को भगत सिंह जी के रास्ते पर चलकर "पथभ्र्ष्ट" होने से बचा लिया था -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/939487806169456>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Mar 24 2018 07:49:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

2 मिनिट का मौन उन सज्जनो के लिए जो अब भी यह दावा करते नजर आते है कि EVM के कारण बूथ लूटना आसान नहीं रहा गया है !!!
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कृपया 2 मिनिट का यह वीडियो देखें। वीडियो लगभग 3 वर्ष पुराना है।
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1992 से बूथ लूटने की घटनाओं में कमी कमी आने लगी , क्योंकि चुनावों में पुलिस की संख्या बढाई गयी एवं स्थानीय पुलिस के स्थान पर CRPF जैसे पुलिस बल का इस्तेमाल किया जाने लगा। इसके अलावा 2003 से चुनाव अधिकारियो को कैमरे मुहैया कराए गए। तो बूथ लूटने की घटनाओं में कमी आने की वजह EVM नहीं थी।
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EVM एवं बेलेट बॉक्स का प्रयोग करने या न करने का बूथ लूटने की घटनाओं से कोई सम्बन्ध नहीं। बूथ कैप्चरिंग एक प्रशासनिक विषय है।
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Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

two minute maun for those who still believe that EVM makes booth capturing difficult !!!

Pls see this just 2 minute video. It is over 3 years old.
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Booth capturing reduces from 1992 onwards because police presence increased, non local policemen such as CRPF was used, number of policemen per booth increased and from 2003 onwards, camera were give to ECI staff.
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Ballot box cant prevent a goon from taking over. But neither can EVM.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Mar 24 2018 08:58:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कुछ 500 हिन्दू परिवार पाकिस्तान से भागकर हिन्दुस्तान में शरण लेने आये थे। वे भारत में नागरिकता लेना चाहते थे। लेकिन संघ के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने उनसे घूस की जो राशि मांगी उसे चुकाने में वे अक्षम थे। संघ=बीजेपी के नेताओं को हफ्ता चुकाने के लिए उनके पास कोई पैसा नहीं था। परिणाम -- मोदी साहेब ने उन्हें लात मारकर फिर से पाकिस्तान रवाना कर दिया !!! और अब वे इस्लाम ग्रहण करने के लिए बाध्य हो गए है !!
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न्यूज लिंक -- <https://goo.gl/2Jn7iV>;
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और इधर जून-2014 से पहले कुछ 1 लाख मुस्लिम रोहिंग्ये भारत में घुस आये थे , एवं जून 2014 के बाद आने वाले इन रोहिंग्यो की संख्या में 2 लाख का और इजाफा हो गया। इसके अलावा भारत में 2 करोड़ मुस्लिम बांग्लादेशी जून-2014 से पहले मौजूद थे, और जून-2014 के बाद लगभग 20 लाख बंगलादेशी घुस्पेठीये भारत में और घुस आये है। ये सभी भारत में रह रहे है। इनमे से लगभग 1 लाख रोहिंग्ये जम्मू में रह रहे है। जम्मू में जम्मू के मूल निवासियों के अतिरिक्त कोई व्यक्ति वहां जमीन नहीं खरीद सकता और न ही स्लम बना सकता है। लेकिन जम्मू में रोहिंग्यो ने सरकारी भूमि पर अपनी कई कोलोनियाँ बसा ली है , एवं वे अनाज से लेकर फोन एवं टीवी तक की खरीद फरोख्त करते है !!! वे यह सब इसीलिए कर पा रहे है क्योंकि वे संघ के नेताओं एवं कार्यकर्ताओ को मोटा हफ्ता चुकाते है !!!
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समाधान -- जो कार्यकर्ता बांग्लादेशी घुसपेठियो* एवं रोहिंग्यो को देश से बाहर खदेड़ना चाहते है उन्हें इस बात को समझना चाहिए कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके अंध भगत की रुचि इन्हें देश से बाहर निकालने में नहीं बल्कि इनसे पैसा खींच कर इन्हें भारत में बसाने की है।
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(*) बांग्लादेश से जो हिन्दू भारत में आये है वे घुस्पेठिये न होकर शरणार्थी है। हमारा प्रस्ताव उन्हें नागरिकता देने का है। यदि हम उन्हें नागरिकता नहीं देंगे तो या तो वे क़त्ल कर दिए जायेंगे या फिर उन्हें इस्लाम ग्रहण करना होगा )
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अगला कदम कार्यकर्ताओ का यह होना चाहिए कि वे "EIAR - Expel Immigrants Allow in Refugee" क़ानून का समर्थन करें। इस क़ानून का प्रस्तावित ड्राफ्ट इस लिंक पर देखा जा सकता है -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/828952687282927>;
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कार्यकर्ता इस बात पर भी विशेष ध्यान दें कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके सभी अंध भगत उपरोक्त क़ानून का विरोध कर रहे है। और मोदी साहेब खुद ऐसे किसी भी क़ानून को लागू करने से स्पष्ट इनकार कर चुके है जिससे पाकिस्तान / बांगलादेश आदि से आने वाले हिन्दुओ , सिक्खों बौद्धों आदि को नागरिकता दी जा सके एवं घुसपेठियो एवं रोहिंग्यो को देश से बाहर निकाला जा सके।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Mar 26 2018 22:21:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बीजेपी ने स्वीकार किया है कि - मोदी एप यूजर का डेटा ( नाम , ईमेल , जन्म तिथि , पता आदि ) अमेरिका स्थित कम्पनी को भेजती है।
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प्ले स्टोर में इस एप को "official app of the Prime Minister of India" बताया गया है। जबकि न तो यह एप भारत के प्रधानमंत्री की अधिकृत एप है और न ही यह भारत सरकार द्वारा अधिकृत है। दरअसल यह एप एवं वेबसाइट नरेंद्र मोदी की निजी आई टी सेल द्वारा बनाई गयी है , एवं इस एप / वेबसाइट को चलाने का ठेका मोदी साहेब ने अमेरिकी कम्पनी को दिया हुआ है। इस कम्पनी का दफ्तर अमेरिका के मेसाचुसेट्स में है। वेबसाइट पर एड्रेस भी दिल्ली के बीजेपी कार्यालय में दिया गया है।
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न्यूज लिंक -- <https://goo.gl/5QVMxC>;
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कांग्रेस , बीजेपी एवं आम आदमी पार्टी पूरी तरह से अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको के भरोसे पर है। और देश तो खैर है ही। पूरा संचार एवं इंटरनेट का इंफ्रास्ट्रक्चर एवं संचालन विदेशियों के हाथो में है। गूगल, फेसबुक, व्हाट्स एप , जीमेल , याहू , एंड्रॉइड , आईओएस , विंडोज , मेक मतलब यदि इंटरनेट चलाना है तो डेटा तो विदेशियों को ही देना पड़ेगा। कांग्रेस-बीजेपी यदि डेटा नहीं भेजेंगे तब भी डेटा तो वहीँ जाने वाला है। क्योंकि देश का पूरा मीडिया एवं इंटरनेट विदेशियों की कृपा पर ही है।
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समाधान ?
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एफडीआई की मौजूदा नीति बदले बिना बीजेपी-कांग्रेस-आपा की हैसियत में नहीं है कि वे डेटा अमेरिकी कम्पनियो तक पहुंचने से रोक सके। गुड़ खाकर गुलगुलों से परहेज करने की मक्कारी छोड़ देनी चाहिए। यदि आपको सुरक्षा की फ़िक्र है तो शुरुआत संचार में एफडीआई का विरोध करने से कीजिये। यही बीजेपी कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता लगातार संचार समेत देश की अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र विदेशी कम्पनियो के हवाले करने का समर्थन कर रहे है और इस विकास को उपलब्धि भी बता रहे है, और साथ में ये एक दूसरे पर डेटा चोरी का आरोप भी लगाते है !!! अब जब तुमने हाथी ही बेच दिया है तो अंकुश पर क्यों विवाद कर रहे हो !!
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समाधान -- सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) के लिए कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809743912477180
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Mar 27 2018 11:32:10 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जल संसाधनों पर नागरिको के समान स्वामित्व को सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
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यह क़ानून "युनिवर्सल वाटर मीटर क़ानून" के प्रवृत होने के बाद ही लागू होगा। मीटर अनिवार्य करने के क़ानून में कई प्रश्न अनुत्तरित है , जैसे -- अ) जब पानी को वितरित करने की कीमत पानी के मूल्य से अधिक हो तो जल की कीमतें कैसे निर्धारित की जायेगी। ब) जब राशि बड़ी हो तो , पानी की कीमत में से लागत घटाने पर शेष राशि का वितरण किसे किया जाना चाहिए।
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इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको की राय में यह प्रस्तावित क़ानून मतदाताओ एवं अधिकारियो के बीच न्यूनतम टकराव एवं न्यूनतम भ्रष्टाचार की व्यवस्था के तहत उपरोक्त प्रश्नों के जवाब देता है।
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इस क़ानून के लागू होने का अंतिम नतीजा यह होगा कि -- जो नागरिक बहुत कम पानी का इस्तेमाल कर रहे है , वे उन लोगो से धनराशि प्राप्त करेंगे जो नागरिक बेहद अधिक पानी का इस्तेमाल कर रहे है। क्योंकि यह क़ानून जल संसाधनों पर समान स्वामित्व की रचना करता है , अत: जो व्यक्ति अपने हिस्से से अधिक जल का उपभोग करते है , उन्हें उन व्यक्तियों से जल उपभोग के अधिकार "खरीदने" होंगे जो अपने हिस्से में आये जल की मात्रा का कम उपभोग कर रहे है।
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जब पानी की लागत एवं पानी की कीमत वसूली जाकर नागरिको में वितरित की जाने लगेगी तो उपभोक्ताओ में पानी को व्यर्थ बहाने की प्रवृति में कमी आएगी तथा साथ ही वे वाटर रिसाईक्लिंग प्लांट लगाने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे।
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जैसा कि ऊपर लिखा गया है , यह क़ानून सिर्फ तब ही काम कर सकेगा जब प्रस्तावित "युनिवर्सल वाटर मीटरींग क़ानून" लागू किया जाए। तो यदि आप "युनिवर्सल वाटर मीटर क़ानून" का विरोध करते है तो इस क़ानून को पढ़कर आप अपना समय ही नष्ट करेंगे। किन्तु यदि आप प्रस्तावित "युनिवर्सल वाटर मीटर क़ानून" के समर्थक है तो इस क़ानून को पढना आपके लिए उपयोगी होगा।
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जल संसाधनों पर समान नागरिक स्वामित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट
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[ टिप्पणी : इस प्रस्तावित क़ानून को राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा राज्य के गेजेट में प्रकाशित करके अमुक राज्य में लागू किया जा सकता है। इस क़ानून को लागू करने के लिए विधानसभा या संसद से अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।
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इस ड्राफ्ट के तीन भाग है -
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भाग- I : नागरिको के लिए सामान्य निर्देश
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भाग - II : अधिकारियो के लिए सामान्य निर्देश एवं टिप्पणिया
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इस ड्राफ्ट की महत्त्वपूर्ण धाराएं है – ( 1 , 2 , 3 , 5.1 )

इस क़ानून के लेखको की राय में अन्य धाराएं जटिल नहीं है एवं सामान्य समझ से इन्हें समझा जा सकता है।
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इस क़ानून को "युनिवर्सल वाटर मीटरींग क़ानून" के लागू होने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए। "युनिवर्सल वाटर मीटर क़ानून" का ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1558167890968108>; ]
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) जिला जल वितरण अधिकारी नागरिको के लिए दो तरह के 'जल कोटा" ( पानी का आरक्षित हिस्सा ) की मात्रा निर्धारित करेंगे (a) नगर निगम के जल कनेक्शन द्वारा लिए जा सकने वाले प्रति व्यक्ति प्रति महीने का जल कोटा , (b) बोरिंग द्वारा प्रति व्यक्ति प्रति महीने लिए जा सकने वाले भूगर्भ जल का कोटा।
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(2) प्रत्येक नागरिक अपने लिए आरक्षित जल की मात्रा का समस्त उपभोग कर सकते है या नकद या किसी वस्तु / सेवा का विनिमय के रूप में इस्तेमाल करते हुए किसी भी उपभोक्ता को आंशिक या पूर्ण मात्रा में अपनी जल राशि हस्तांतरित कर सकते हैं। यह विनिमय मूल्य जल क्रेता और आरक्षित जल का धारक आपस में तय करेंगे। सरकार ये मूल्य निर्धारित नहीं करेगी। जल क्रेता सीधे आरक्षित जल के धारक को जल का मूल्य अदा कर सकते है ,और जल धारक सीधे क्रेता से ये मूल्य ले सकते है। नाबलिगो के लिए यह मूल्य उनके माता पिता या अभिभावक तय करेंगे।
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(3) जल वितरण अधिकारी इन दो कीमतों की सार्वजनिक घोषणा कर सकते हैं या नहीं भी कर सकते हैं -- जल वितरण अधिकारी से ख़रीदे जाने वाले जल का सामान्य क्रय मूल्य और जल वितरण अधिकारी को बेचे जाने वाले जल का विक्रय मूल्य।
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(3.1) इस स्थिति में जो भी व्यक्ति अपनी आरक्षित जल की मात्रा से ज्यादा जल का उपभोग करते हैं, उन्हें जल के सामान्य क्रय मूल्य के अनुसार जल का मूल्य अदा करना होगा। और जो व्यक्ति आरक्षित जल की मात्रा से कम जल का उपभोग करेंगे उन्हें जिला जल वितरण अधिकारी जल के सामान्य विक्रय मूल्य के अनुसार मूल्य अदा करेंगे।
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(4) आरक्षित जल की मात्रा को हस्तांतरित करने के लिए नागरिक को नागरिक सेवा केंद्र आकर पूर्ण या आंशिक मात्रा में किसी अन्य पंजीकृत जल उपभोक्ता को जल का हस्तांतरण करना होगा। जल वितरण अधिकारी ऐसी व्यवस्था बना सकते है, जिससे नागरिक ये काम मोबाइल एप्लीकेशन या एस.एम्.एस द्वारा कर सके। यदि नागरिक अपने लिए आरक्षित जल की मात्रा किसी को भी हस्तांतरित नहीं करते है, तो ये मान लिया जाएगा कि उन्होंने अपनी समस्त अतिरिक्त जल की मात्रा जिला जल वितरण अधिकारी को हस्तांतरित कर दी है, और जिला जल वितरण अधिकारी निर्धारित विक्रय मूल्य के अनुसार मूल्य अदा कर करेगा।
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(4.1) जिला जल वितरण अधिकारी सभी हस्तान्तरणों की जानकारी एक सार्वजनिक वेबसाइट पर रखेंगे।
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(4.2) जल केवल नागरिकों के लिए आरक्षित किया जाएगा , किसी ट्रस्ट ,कंपनी ,संस्था , आवासीय सोसाइटी आदि के लिए नहीं। इस प्रकार की संस्थाएं यदि नगर निगम का जल या भूगर्भ जल का उपभोग करना चाहती है, तो उन्हें जिले के नागरिकों से उनके आरक्षित जल की मात्रा में से हस्तांतरण अधिकार लेने होंगे।
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(5) टिप्पणी क्या है : टिप्पणियाँ इस कानूनी ड्राफ्ट की मुख्य धाराओं का हिस्सा नहीं है। ये टिप्पणियाँ कार्यकर्ताओं और नागरिकों को यह ड्राफ्ट समझाने के लिए लिखी गयी है। जूरी सदस्य इन टिप्पणियों का प्रयोग किसी क़ानूनी मामले का निर्णय लेने में कर सकते हैं। किन्तु ये टिप्पणियाँ किसी पर भी बाध्यकारी नही है।
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(5.1) "कर सकता है" का अर्थ है , कर सकता है या नहीं भी कर सकता है। "कर सकता है" किसी पर भी बंधनकारी नहीं है।
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उदाहरण :

(5.1) मान लीजिए कि जिला जल वितरण अधिकारी प्रति व्यक्ति आरक्षित जल की मात्रा 5,000 लीटर प्रति महीना निर्धारित करते है। मान लीजिए एक व्यक्ति के पास 4 लोगों का परिवार है, तो अमुक परिवार के लिए आरक्षित जल की मात्रा 20,000 लीटर प्रति महीना होगी। अमुक परिवार इसमें से 12,000 लीटर जल स्वयं के प्रयोग के लिए रख कर शेष अर्थात अतिरिक्त 8,000 लीटर किसी अन्य क्रेता को हस्तान्तरित कर सकता है। जल क्रेता सीधे अमुक परिवार को इसका मूल्य अदा कर सकते है। यदि जल धारक चाहे तो एक क्रेता को 5,000 लीटर व किसी अन्य क्रेता को 3,000 लीटर जल हस्तांतरित कर सकते है, और उनसे इसकी कीमत ले सकते है।
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(5.2) कोई भी नागरिक किसी भी महीने नागरिक सेवा केंद्र जाकर अथवा जिला जल वितरण अधिकारी द्वारा दिये गए मोबाइल एप्लीकेशन का प्रयोग करते हुए अपने द्वारा किये गए हस्तान्तरणों को बदल सकता है।
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(5.3) मान लीजिए एक कारखाने को प्रति महीने 500,000 लीटर जल की आवश्यकता है। तो कारखाने को उस जिले के नागरिकों से उनके लिए आरक्षित जल में से 500,000 लीटर जल के हस्तांतरण अधिकार लेने होंगे।
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(5.4) मान लीजिए जिला जल वितरण अधिकारी भूगर्भ जल के लिए प्रति व्यक्ति आरक्षित जल की मात्रा 5,000 लीटर प्रति महीना निर्धारित करते है। मान लीजिए एक बोर वेल का मालिक 100,000 लीटर जल प्रति महीना भूगर्भ जल उपभोग करना चाहता है। तो अमुक व्यक्ति को 20 नागरिकों से भूगर्भ जल का पूर्ण हस्तांतरण लेना होगा अथवा उन्हें अनेक नागरिको से आंशिक रूप से हस्तांतरण लेना होगा, जिनका जोड़ 100,000 लीटर हो। बोर वेल का मालिक सीधे उन नागरिकों को मूल्य दे सकता है जिनसे उसे ये हस्तांतरण प्राप्त हुए है।
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(5.5) मान लीजिए एक व्यक्ति उसके लिए आरक्षित जल में से अतिरिक्त मात्रा को जिला जल वितरण अधिकारी को आवंटित करता है। मान लीजिए जिला जल वितरण अधिकारी प्रति व्यक्ति आरक्षित जल की मात्रा को 10,000 लीटर प्रति महीना निर्धारित करते है। मान लीजिए जिला जल वितरण अधिकारी जल का क्रय मूल्य रु 20 प्रति 1000 लीटर और जल का विक्रय मूल्य रु 15 प्रति 1,000 लीटर निर्धारित करते है। और मान लीजिए एक व्यक्ति X उस महीने 30,000 लीटर पानी का उपभोग करता है और एक अन्य व्यक्ति Y उस महीने 5,000 लीटर का उपभोग करता है। तो X को 20,000 लीटर जल का क्रय मूल्य अर्थात ( 20,000 * रु 20 / 1,000 ) = रु 400 उस महीने देने होंगे और Y को उस महीने 5,000 लीटर जल का विक्रय मूल्य अर्थात ( 5,000 * रु 15 / 1,000) = रु 75 प्राप्त होंगे।

(5.6) 1 वर्ष के लिए चिकित्सालय और क्लीनिक वगेरह से जल का कोई भी मूल्य नहीं लिया जाएगा। 1 वर्ष बाद उनसे भी निर्धारित दरों के अनुसार पैसे लिए जाएंगे। चिकित्सालयो के अतिरिक्त सभी को क़ानून लागू होने के तुरंत बाद से निर्धारित दरों के अनुसार मूल्य चुकाना होगा।
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भाग - II :अधिकारियो के लिए निर्देश और टिप्पणी
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(6) जल उपभोक्ताओं का पंजीकरण
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(6.1) जिला जल वितरण अधिकारी जिले के सभी वोटरों को पंजीकृत करेंगे और प्रत्येक वोटर के संतानों की संख्या भी संगृहीत करेंगे।
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(6.2) जिला जल वितरण अधिकारी मुनिसिपल्टी पानी की आपूर्ति के प्रत्येक कनेक्शन के साथ ही सभी भूगर्भ जल का बोरिंग , प्रत्येक फ्लैट / कार्यालय आदि में किये गए पानी के सभी आतंरिक ( उप मीटर) कनेक्शन का भी ब्यौरा रखेगा । जिला जल वितरण अधिकारी जिले में स्थित पानी के प्रत्येक खरीददार को पंजीकृत करेगा।
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(7) जिला जल वितरण अधिकारी अपने कार्यालय में कर्मचारियों को नियुक्त करेगा या नागरिक केंद्र और मौजूदा कर्मचारियों का प्रयोग करेगा।
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(7.1) जिले का कोई भी वयस्क मतदाता किसी भी दिन नागरिक सेवा केंद्र में आकर यह सूचित कर सकता है कि उसके लिए आरक्षित जल की मात्रा में से कितने प्रतिशत मात्रा किसी अन्य पानी कनेक्शन धारक को या जल क्रेता को हस्तांतरित जा सकती है। उदाहरण के लिए कोई मतदाता अपने हिस्से का 30% पानी-A को ,30% पानी-B को , 20% क्रेता-C को एवं 20% पानी जिला जल वितरण अधिकारी को हस्तांतरित कर सकता है। ऐसे सारे हस्तान्तरणों का जोड़ 100% होगा।
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(7.2) क्लर्क 3 रुपये शुक्ल लेकर वोटर द्वारा सूचित किया गया प्रतिशत पंजीकृत करेगा। नागरिक मुनिसिपल्टी के जल के कनेक्शन और भू गर्भ जल के लिए अलग अलग प्रतिशत सूचित कर सकता है। प्रत्येक वोटर द्वारा निर्धारित किये गए जल के हिस्से को एक सार्वजनिक वेबसाइट पर रखा जाएगा।
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(7.3) अगले महीने के लिए भी जल आवंटन की मात्रा वही रहेगी जब तक की नागरिक स्वयं इसे बदल ना दे। जब भी नागरिक इसे बदलता है उसके 3 दिन बाद इसे लागू किया जाएगा। यदि महीने के बीच में कोई बदलाव होता है तो बदलाव अमुक दिवस को उपलब्ध मासिक कोटे के अनुपात में लागू होगा। कोई भी उपभोक्ता उसको उपलब्ध आरक्षित जल की मात्रा किसी अन्य उपभोक्ता को हस्तांतरित या बिक्री कर सकता है। ये सारे हस्तांतरण सार्वजनिक वेबसाइट पर रखें जाएंगे।
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(7.3.1) धारा (7.3 ) का स्पष्टिकरण : मान लीजिये कि A का मासिक जल कोटा 6000 लीटर है। मान लीजिये कि उसने अपना जल कोटा व्यक्ति X को दे दिया था। लेकिन महिना समाप्त होने से पहले महीने की 18 तारीख को A अपना कोटा Y को दे देता है। मान लीजिये कि यह बदलाव 20 तारीख को प्रभावी होता है , एवं इस महीने में 30 दिन है। तब X को कोटे में से 20 दिनों का जल अर्थात 6,000/30 * 20 = 4,000 लीटर पानी ही मिलेगा, तथा शेष 2,000 लीटर पानी Y को दिया जाएगा।
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(7.4) जिला जल वितरण अधिकारी जल हस्तांतरण को सुविधापूर्ण बनाने के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन बना सकते है।
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(7.5) जिला जल वितरण अधिकारी निम्न जानकारियों की घोषणा करेंगे

(i) S = मुनिसिपल्टी के जल का विक्रय मूल्य
(ii) P = मुनिसिपल्टी के जल का क्रय मूल्य
(iii) W = प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रति महीना आरक्षित मुनिसिपल्टी जल की मात्रा
(iv) U = प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रति महीना आरक्षित भूगर्भ जल की मात्रा
(v) R = निर्धारित सीमा से अधिक भूगर्भ जल खींचने पर देय रोयल्टी की राशि
(vi) C = मुनिसिपल्टी के जल का वितरण मूल्य
(vii) भूगर्भ जल के लिए वितरण मूल्य शून्य होगा
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(7.5.1) यदि किसी नागरिक ने W अर्थात म्युनिसिपल्टी द्वारा व्यक्ति के लिए निर्धारित मात्रा में से किसी अन्य उपभोक्ता को की गयी हस्तांतरित मात्रा को घटाने के बाद उपलब्ध जल की मात्रा से कम जल का उपयोग किया है तो , जिला जल वितरण अधिकारी उसे जल के विक्रय मूल्य के अनुसार भुगतान करेंगे, और यदि नागरिक ने इससे अधिक जल का उपयोग किया है तो क्रय मूल्य के अनुसार पैसा वसूलेंगे।
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(7.5.2 ) अतिरिक्त भूगर्भ जल से प्राप्त रोयल्टी को उन नागरिकों के बीच वितरित किया जाएगा जिन्होंने अपने लिए आरक्षित भूगर्भ जल का हस्तान्तरण किसी अन्य उपभोक्ता को नहीं किया है।
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(7.5.3 ) जिला जल वितरण अधिकारी देय राशि को सीधे जिले के नागरिकों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में जमा करवाएंगे या हैंडलिंग चार्ज काट कर उन्हें नकद देंगे।
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(7.6) टिप्पणी : यहाँ दिए हुए सभी उदाहरण सिर्फ विषय को समझाने के लिए दिए गए है, तथा ये उदाहरण किसी भी पक्षकार पर बाध्यकारी नहीं है। मान लीजिये कि :

(i) S = मुनिसिपल्टी के जल का विक्रय मूल्य = रु 20 प्रति 1000 लीटर
(ii) P = मुनिसिपल्टी के जल का क्रय मूल्य = रु 15 प्रति 1000 लीटर
(iii) W = प्रति व्यक्ति के लिए प्रति महीना आरक्षित मुनिसिपल्टी जल की मात्रा = 5000 लीटर
(iv) U = प्रति व्यक्ति के लिए प्रति महीना आरक्षित भूगर्भ जल की मात्रा = 4000 लीटर
(v) R = निर्धारित सीमा से ज्यादा भूगर्भ जल खींचने पर रोयल्टी की रकम = रु 20 प्रति 1000 लीटर
(vi) C = मुनिसिपल्टी के जल का वितरण मूल्य
(vii) भूगर्भ जल के लिए वितरण मूल्य शुन्य होगा
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(7.6.1) मान लीजिए एक व्यक्ति A के पास 4 लोगों का परिवार है। तो उनके परिवार के लिए आरक्षित जल की मात्रा 20,000 लीटर होगी। मान लीजिए वो प्रति माह 8,000 लीटर जल इस्तेमाल करते है एवं उन्होंने अपने लिए आरक्षित जल की मात्रा में से कुछ भी किसी अन्य उपभोक्ता को हस्तांतरित नहीं किया है। तो जिला जल वितरण अधिकारी उनको (12,000 * P ) = 12000 * ( रु 15/1000 ) = रु 180 और इसमें से 8,000 लीटर पर जल वितरण मूल्य 40 रुपये काट कर भुगतान करेगा।
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(7.6.2) मान लीजिए एक व्यक्ति A के पास कोई भी बोर वेल नहीं है, एवं उसके पास 4 लोगों का परिवार है। इसलिए इनके परिवार के लिए भूगर्भ जल की आरक्षित मात्रा उस महीने के लिए 16,000 लीटर होगी। मान लीजिए वो अपनी पूरी आरक्षित जल की मात्रा X को हस्तांतरित कर देता है। तो X सीधे A को इसका मूल्य अदा कर सकता है। इस हतान्तरण का मूल्य A और X आपस में निर्धारित करेंगे , एवं इसमें जिला जल वितरण अधिकारी का कोई क्षेत्राधिकार नहीं होगा।
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(7.6.3) मान लीजिए X के पास एक कारखाना है और X ने 20,00,000 लीटर मुनिसिपल्टी के जल का हस्तांतरण अधिकार हासिल किया हुआ है। मान लीजिए X ने इतनी ही मात्रा में जल का इस्तेमाल किया है। तो जिला जल वितरण अधिकारी उनसे सिर्फ वितरण मूल्य वसूलेंगे अर्थात (20,00,000 * रु 5 /1000) = रु 1000 । किन्तु यदि उन्होंने 30,00,000 लीटर जल इस्तेमाल किया है, तो उन्हें 30,00,000 लीटर जल का वितरण मूल्य और 10,00,000 लीटर का विक्रय मूल्य अर्थात (30,00,000 * रु 5/1000 + 10,00,000 * रु 20 / 10000 = रु 15000 + रु 20000 = रु 35000 रूपये का भुगतान करना होगा।
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(7.6.4) मान लीजिए X के पास एक कारखाना है और X ने 20,00,000 लीटर भूगर्भ जल का हस्तांतरण अधिकार हासिल किया है। मान लीजिए X उतना ही जल इस्तेमाल करता है , तो जिला जल वितरण अधिकारी X पर कोई शुल्क नहीं लगाएंगे। किन्तु यदि X 30,00,000 लीटर जल इस्तेमाल करता है , तो X 10,00,000 लीटर जल राशि पर रोयल्टी अर्थात (10,00,000 * रु 20 /1000 ) = रु 20000 जिला जल वितरण अधिकारी को अदा करेगा।
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(7.7) जिला जल वितरण अधिकारी जल उपभोक्ताओं से मिलने वाले और उनको दिए जाने वाले भुगतान के विषय में विस्तृत कानून बनाएगा।
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(7.8) नागरिक अपने जिले के जल वितरण अधिकारी को राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं का प्रयोग करके बदल सकेंगे, एवं जल अधिकारी / उसके स्टाफ आदि के खिलाफ दर्ज शिकायतों एवं समस्त विवादों का निपटारा नागरिको के ज्यूरी मंडल द्वारा किया जाएगा। राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम प्रक्रियाओं का विवरण "यूनिवर्सल वॉटर मीटरिंग" क़ानून के अंतर्गत दिया गया है।
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=========क़ानून ड्राफ्ट का समापन ========

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 29 2018 18:49:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

ट्रेफिक अनुशासन बनाए रखने के लिए हमारे द्वारा प्रस्तावित सामाधान -- जूरी सिस्टम , वेल्थ टेक्स लागू किया जाए एवं सीसीटीवी कैमरे इंस्टाल किये जाए। लेकिन महाराष्ट्र के सीएम एवं संघ के नेता देवेन्द्र फड़नवीस इसकी जगह सडको पर टायर किलर बिछवा रहे है !!
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न्यूज लिंक -- <https://news.maxabout.com/bikes/tyre-killers-installed-pune/>;
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कृपया यह वीडियो भी देखें -- <https://youtu.be/IHkk35ToWZ0>;
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संघ के नेता देवेन्द्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र के आइपीएस अधिकारियों को आदेश दिए है कि सडको पर टायर किलर बिछाए जाए , ताकि wrong side से आने वाले वाहनों के टायर पंचर हो जाए !! ये हद दर्जे की बेवकूफाना हरकत है। कई बार ऐसा होता है कि ट्रेफिक जाम होने या पानी भर जाने के कारण ट्रेफिक को wrong side से निकालना पड़ता है।
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भारत में ट्रेफिक का अनुशासन लगातार बदतर होता जा रहा है। समाधान यह है कि यातायात नियमो का पालन न करने वाले चालको की सुनवाई नागरिको की जूरी द्वारा की जाए एवं ट्रेफिक पुलिस के सहायक आयुक्त पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं लागू की जाए। राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख का क़ानून लागू करके भी इस समस्या का निदान किया जा सकता है, किन्तु यदि कोई व्यक्ति ट्रेफिक अनुशासन को गंभीरता से लेना चाहता है एवं पुलिस में व्याप्त अकार्यकुशलता / भ्रष्टाचार की अवहेलना करना चाहता है तो, ट्रेफिक पुलिस के सहायक आयुक्त पर राईट टू रिकॉल लागू करके ट्रेफिक व्यवस्था को सुधारा जा सकता है।
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वेल्थ टेक्स के आने से जमीन की कीमतें कम हो जायेगी एवं शहरो की सड़को को चौड़ी करना , फुटपाथ बनाना एवं सडको को सीधा करना आसान हो जाएगा। सडको को सीधा करना एवं फुटपाथ बनाना तब बहुत महंगा पड़ता है जब जमीन की कीमतें अधिक हो , किन्तु जमीन सस्ती होने से यह सस्ता हो जाता है।
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संघ के सभी कार्यकर्ता हमेशा से ही वेल्थ टेक्स , ज्यूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल क़ानून के धुर विरोधी रहे है। उनके अनुसार ये तीनो क़ानून वामपंथी है। और इसीलिए वे इनका विरोध करते है। असल में वे तो सड़क के दोनों और टायर किलर बिछवाने की मंशा रखते है, किन्तु 2019 के चुनावों के कारण उन्होंने अपने इस मंसूबे को फिल वक्त मुल्तवी कर दिया है। सोचने वाली बात यह है कि वे ओवर स्पीडिंग एवं गलत पार्किंग आदि के समाधान के लिए क्या समाधान लेकर आयेंगे !!!
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वेल्थ टेक्स, राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों को लागू करवाने के लिए आप क्या कर सकते है ?
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इन कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर को क्लिक करके डिस्क्रिप्शन देखें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Mar 29 2018 19:36:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बहुत पुरानी बात है -- किसी गाँव में एक सीधा साधा आदमी रहता था।
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वह मुर्गे लड़वाने में माहिर था। दिन भर में वह 2 से 5 बार मुर्गो की लड़ाई कराता।
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लोगो को इसमें मजा आता , और वे खुश होकर कुछ रूपये पैसे उसकी और फेंक देते।
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इन्ही पैसो से वह अपनी गुजर चला रहा था।
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एक दिन पुलिस ने उसे जन्तुओ पर अत्याचार करने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया।
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जज ने उसे इस शर्त पर छोड़ा कि, अब वह कभी मुर्गे नहीं लड़वायेगा।
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वह रोजगार के लिए इधर से उधर भटकने लगा।
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और इस तरह उसने रिपब्लिक चेनल की शुरुआत की।
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( यह सच्ची घटना है। )
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 30 2018 06:51:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

केशव बलिराम हेडगेवार भी गांधी ही थे !!! उनकी चारित्रिक विशेषताओ को ध्यान में रखते हुए उन्हें केशव हेडगेवार गांधी कहकर पुकारा जाना चाहिए !!!
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उन्होंने भी भारतीयों को हथियारबंद करने एवं चुनावी गतिविधियों में भाग लेने का विरोध किया था। अंतर सिर्फ इतना था कि -- (अ) हेडगेवार लाठी लहराने को चरखा चलाने पर तरजीह देते थे , (ब) -- साथ ही उन्हें यह भी लगता था कि "पतित पावन सीताराम" भजन की जगह यदि नियमित रूप से "वन्दे मातरम" की पुकारे लगायी जाए तो नतीजे बेहतर होंगे। (स) -- महादुरात्मा गाँधी ने कभी भी युनिफोर्म के महत्त्व पर कभी जोर नहीं दिया, जबकि केशव हेडगेवार गांधी युनिफोर्म को काफी महत्त्व देते थे।

लेकिन दोनों ही इस बात पर पूर्णत सहमत थे कि हमें ब्रिटिश साम्राज्य से टकराव को टालना चाहिए !! दोनों ही भारत के युवाओं को यह समझाने क मिशन पर थे कि यदि हमें आजादी चाहिए तो इसका सबसे सटीक और सुलभ तरीका समाज सेवा है। अत: आजादी की इच्छा रखने वाले युवानो को हथियार जैसे तलवार , धनुष आदि धारण नहीं करने चाहिए बल्कि अपनी उर्जा सामाजिक सेवाओ में खपानी चाहिए।
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दोनों ने देश के युवाओं के इतिहास की व्याख्या इस तरह से कि , जिससे वे हथियारों के ऐतिहासिक महत्त्व से अनभिग्य बने रहे। कोंग्रेस एवं संघ के इतिहासकारों ने भी इतिहास की व्याख्या करने के दौरान हमेशा से इस बात का ध्यान रखा कि इतिहास को प्रभावित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण घटक "हथियारों की गुणवत्ता" पर कभी डिस्कस नहीं किया जाए !!!
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इस तरह मोहन एवं हेडगेवार जी, दोनों ही गांधी थे।
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हालांकि हेडगवार जी को दुरात्मा के विशेषण से नहीं नवाजा जा सकता , क्योंकि हेडगेवार जी भारत को उतना भयंकर नुकसान पहुँचाने में सफल नहीं हुए थे, जितना कि मोहन ने पहुँचाया। इसकी वजह यह थी कि, हेडगेवार जी के पास मोहन के बराबर फंडिंग नहीं थी, और इस वजह से तब उनके अनुयायियों की संख्या सीमित रही। तो उन्होंने जो क्षति दी, वह अपेक्षाकृत कम थी।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 30 2018 07:17:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

100 सेकेण्ड का यह वीडियो बताता है कि क्यों अमेरिका भारत एवं पूरी दुनिया से बहुत बहुत आगे निकल गया है।
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"प्रत्येक व्यक्ति को हथियारबंद होना चाहिए" -- यह बात पूरी दुनिया एवं भारत ( जैसे गुरु गोविन्द सिंह जी ) में भी कई धार्मिक गुरुओ द्वारा निरंतर कही जाती रही है।
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Brut India:

In this church in the US, you can worship armed with a gun. You can even get your weapon blessed.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Mar 30 2018 07:41:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

दुरात्मा अन्ना अपने अनुयायियों से कह रहे है कि वे इस आशय का शपथपत्र दें कि , वे कभी भी चुनाव नहीं लड़ेंगे -- ऐसे शपथपत्र की विधिक रूप से कोई अहमियत नहीं है , और न ही नैतिक रूप से इसके कोई मायने है। पता नहीं इन लोगो को ऐसी बकवास सूझती कहाँ से है।
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मान लीजिये कि X एक शपथपत्र दाखिल करता है कि वह कभी भी चुनाव नहीं लड़ेगा , लेकिन मान लीजिये कि अगले दिन ही वह चुनाव लड़ने के लिए पर्चा दाखिल कर देता है। और तब Y अदालत में जाकर X का शपथपत्र प्रस्तुत करता है कि X ने वादा किया है कि वह कभी भी चुनाव नहीं लड़ेगा, लेकिन अब X चुनाव लड़ रहा है , अत: X पर दंड लगाकर उसका चुनावी आवेदन निरस्त किया जाना चाहिए। लेकिन जज इस अर्जी को घंटे भर में ही खारिज कर देगा !!!

क्योंकि अदालत में ऐसे शपथपत्र का कोई महत्त्व नहीं है। यह पूरी तरह से रद्दी है। क्योंकि यह शपथपत्र किसी अनुबंध या कॉन्ट्रेक्ट की श्रेणी में नहीं आता। किसी भी कॉन्ट्रेक्ट को वैध होने के लिए यह जरुरी है कि पक्षकारो के बीच किसी धनराशि या अन्य मूलय परक प्रतिभूति का आदान प्रदान किया जाए।
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पर मान लीजिये कि इस शपथपत्र के एवज में Y ने X को एक रूपये का भुगतान किया था। लेकिन तब भी चुनाव लड़ना या न लड़ना ऐसा व्यवहार नहीं है जिसे विधिक रूप से अनुबंध में शामिल किया जा सके। उदाहरण के लिए यदि X 1 लाख रूपये का भुगतान Y को इस शर्त पर करता है कि Y एक महीने बाद उसे 10 मिलीलीटर खून देगा, और यदि एक महीने बाद Y खून देने से मना कर देता है तो X अदलात में Y के खिलाफ दावा नहीं कर सकता। क्योंकि खून का आदान प्रदान या व्यवहार करना कानूनी नहीं है। खून का आदान प्रदान अपनी इच्छा पर आधारित है। और ऐसी चीजो को अनुबंध बनाकर बाध्यकारी नहीं किया जा सकता।
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तो दुरात्मा अन्ना यह हरकत सिर्फ कार्यकर्ताओं को मूर्ख बनाने के लिए कर रहे है। साथ ही वे यह गलत सन्देश भी देना चाहते है कि चुनाव लड़ना एक घटिया गतिविधि है , एवं देश के लिए समर्पित व्यक्तियों को इससे दूर रहना चाहिए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Mar 31 2018 17:20:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब के इस कथ्य को ANI द्वारा ट्विट किया गया है --

"जब मुझे आपके द्वारा भेजे गए पत्र से यह मालूम हुआ की कैसे आसाम के करीमगंज में रिक्शा खींचने वाले अहमद अली ने कक्षा ९ के गरीब बच्चो के लिए स्कूल बनवाया है, तो देश की इच्छाशक्ति को बढाने वाली इस घटना ने मेरे ह्रदय को गदगद कर दिया PM Modi #MannKiBaat"

<https://twitter.com/ANI/status/977787810638901250>;

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मोदी साहेब अब अपनी फर्जी धर्म निरपेक्षता एवं पाखण्ड के चरम बिंदु से भी ऊँचे निकल गए है।
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फर्जी धर्म निरपेक्षता ----- क्योंकि देश में ऐसे सैंकड़ो हिन्दू है , किन्तु मोदी साहेब ने इरादतन उनके नाम की अवहेलना की एवं जानबूझकर एक मुस्लिम का जिक्र किया। लेकिन यह कोई बड़ा मसला नहीं है।
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और पाखण्ड ----- क्योंकि जब मोदी साहेब गुजरात के सीएम थे तो उन्होंने गुजरात के सरकारी स्कूलों को तबाह करने में कोई कसर नही उठा के रखी , और इसी वजह से गरीब बच्चो को भी मजबूरी में निजी स्कूलों की और रूख करना पड़ा !!!
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और जब वे किसी अहमद का जिक्र कर रहे थे, उसी समय उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम डेविड फड़नवीस को आदेश दिया कि वे 7000 स्कूलों को RTE के नियमो का पालन न करने के सम्बन्ध में नोटिस रवाना करें। जाहिर है ये सभी नोटिस स्कूलों से घूस इकट्ठा करने के लिए भेजे गए है। जो स्कूल घूस देंगे उन पर कार्यवाही नहीं होगी, एवं जो नहीं देंगे उन्हें नियमो का हवाला देकर बंद कर दिया जाएगा। जो स्कूल बंद हो जायेंगे उन स्कूलों को फिर मिशनरीज खरीद लेगी, क्योंकि RTE मिशनरीज द्वारा संचालित स्कूलों पर लागू नहीं होता !!!
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मोदी साहेब की अभिनय क्षमता में लगातार सुधार आ रहा है। लेकिन इस बार स्क्रिप्ट कुछ ज्यादा ही नाटकीय बन पड़ी है। पर क्या फर्क पड़ता है -- क्योंकि सोनिया एवं केजरीवाल भी इतना ही बदतर विकल्प है !!
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समाधान -- जो कार्यकर्ता शिक्षा में सुधार लाना चाहते है उन्हें यह बात समझ लेनी चाहिये कि शिक्षा सुधार के लिए सोनिया-मोदी-केजरीवाल कोई विकल्प नहीं है। उन्हें उन कानूनों को लागू करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए जिससे वास्तविक शिक्षा सुधार आये। हमारे द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी का कानून ड्राफ्ट इस लिंक पर देखा जा सकता है -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/821128631398666>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Mar 31 2018 20:22:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(1) मोदी साहेब और संघ के स्वयंसेवको को अब साफ़ तौर पर "विदेशी एजेंट" कह कर पुकारा जा सकता है।
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(2) राजनैतिक पार्टियों को विदेशियों से प्राप्त होने वाले चंदे को इतना गुप्त बनाया गया है कि, बैंक अधिकारियो तक को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं हो सकेगी, कि कौनसी पार्टी किस विदेशी से कितना पैसा खींच रही है !! कैसे ?
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(1) मोदी साहेब और संघ के स्वयंसेवको को अब साफ़ तौर पर "विदेशी एजेंट" कहा जा सकता है।
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खुद मोदी साहेब ने ऐसा कानून लागू किया है जिससे राजनैतिक पार्टी विदेशीयो से चंदा ले सकेगी एवं चंदा देने वाले का नाम भी गुमनाम रहेगा। मतलब , सिर्फ आयकर विभाग एवं बैंक के आला अधिकारी ही इस बारे में जान सकेंगे , लेकिन चुनाव आयोग एवं मतदाताओ को इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं हो सकेगी !! आर टी आई के तहत भी नहीं !!!
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कोंग्रेस / आम आदमी पार्टी ने भी इस क़ानून का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने इस क़ानून को लागू नहीं किया, लागू मोदी साहेब ने ही किया है। और संघ के सभी स्वयंसेवक भी इस क़ानून का समर्थन कर रहे है।
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साफ़ नजर आ रहा है कि मोदी साहेब एवं संघ के स्वयंसेवको ने इस क़ानून को सिर्फ इसीलिए लागू किया है, ताकि वे विदेशियों से गुमनाम पैसा ले सके !! और अब वे विदेशियों से पैसा ले भी रहे है। सबूत ? माफ़ कीजिये, लेकिन उन्होंने क़ानून ही इस तरह से बनाया है कि इसका कभी कोई सबूत नहीं जुटाया जा सकता !!
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बहरहाल, अब मोदी साहेब , श्री मोहन भागवत , बीजेपी=संघ के अन्य नेता एवं संघ के स्वयंसेवको को यदि विदेशी एवं खास तौर पर अमेरिकी एजेंट कहा जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि इन लोगो को पैसा टोगा और बरुंडी से नहीं आने वाला है, बल्कि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक ही सबसे बड़े "दानदाता" होंगे। और सिर्फ एक जीनियस ही यह बात स्थापित कर सकता है कि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत की प्रजा के हित में क़ानून बनाने के लिए चंदा भेजेंगे , खुद के फायदे के क़ानून बनाने के लिए नहीं !!
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(2) राजनैतिक पार्टियों को विदेशियों से प्राप्त होने वाले चंदे को इतना गुप्त बनाया गया है कि, बैंक अधिकारियो तक को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं हो सकेगी कि कौनसी पार्टी किस विदेशी से कितना पैसा ले रही है !! कैसे ?
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मान लीजिये कि एक अमरीकी-ब्रिटिश धनिक SBI से पोलिटिकल डोनेशन बांड ( = घूस बांड ) लेने जाता है, एवं SBI उसे ये बांड जारी कर देता है।
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अब संघ=बीजेपी , जो कि इस प्रकार के दान=घूस की सबसे बड़ी राशि प्राप्त करने की दावेदार है , ये बांड अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक से प्राप्त कर लेती है।
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फिर संघ=बीजेपी अपना एक खाता ऐसे विदेशी निजी बैंक में खोलेगी , जिसकी शाखा भारत में है। संघ ये बांड अमुक निजी विदेशी बैंक में जमा करवा देगा।
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अब SBI इन बांड्स के बदले में अमुक विदेशी बैंक को पैसा चुका देगी, लेकिन SBI के अधिकारी यह कभी नहीं जान पायेंगे कि इन बांड्स के बदले में पैसा किस राजनैतिक दल को गया है !!!
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तो सिर्फ एक बैंक यह जान पायेगा कि संघ अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों से पैसा ले रहा है। लेकिन यह बैंक भी विदेशी है , एवं बहुधा उन्ही अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के नियन्त्रण में है जो संघ को पैसा दे रहे है !! जाहिर है, वे यह सूचना गुप्त रखेंगे !!!
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मोदी साहेब एवं संघ के स्वयंसेवको का यह मास्टर स्ट्रोक है। वे विभिन्न एनजीओ को विदेशो से मिलने वाले चंदे पर लगातार चिल्ला पों मचाते रह रहे है ताकि विदेशी संस्थाओ से आने वाले चंदे का विरोध कर रहे मतदाताओं के वोट खींचे जा सके , और इधर पीछे से उन्होंने खुद के लिए विदेशी चंदे लेने का रास्ता खोल लिया !!
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तो यूँ ही नहीं वे राष्ट्रवादी कहलाते है -- भारत माता की जय , वन्दे मातरम !!!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Mar 31 2018 21:28:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब ने डेविड फडणवीस को आदेश दिया है कि महाराष्ट्र में 7000 बजट स्कूल्स को क्लोजर नोटिस भेजे जाये। बजट स्कूल्स स्लम एवं बेहद पिछड़े हुए इलाको में वंचित तबके के बच्चो को पढ़ाने के लिए खोले गए स्कूलों की श्रेणी में आते है। और यह कार्यवाही कुछ 15 राज्यों में की जा रही है !! संघ के सभी स्वयं सेवक इस फैसले का स्वागत कर रहे है !!!
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न्यूज लिंक -- <https://goo.gl/348PMR>;
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मोदी साहेब एवं फडणवीस इन स्कूलों को धमका कर अच्छी खासी घूस इकट्ठी कर लेंगे , और जो स्कूल हफ्ता नहीं दे पाएंगे उन स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा या मिशनरीज को बेच दिया जाएगा !!!
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स्थिति मनमोहन-सोनिया राज से भी बदतर होती जा रही है। एक समय था जब हमें लगता था कि मोदी साहेब मनमोहन-सोनिया की तुलना में सिर्फ 20% ही भ्रष्ट है। किन्तु 4 साल बीतने के बाद निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि , मोदी साहेब मनमोहन-सोनिया की तुलना में दो गुने ज्यादा भ्रष्ट व्यक्ति है। और उनके इस भ्रष्टाचार में संघ के स्वयं सेवक भी बराबर के हिस्सेदार है।
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मोदी साहेब की कार्य शैली कुछ इस तरह से है :

(1) मान लीजिये कि निजी स्कूलों की कोई संख्या 100,000 है।
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(2) मोदी साहेब इन्हें RTE नियमो का पालन न करने के एवज में नोटिस भेजेंगे एवं बिना कोई घूस खाए 10,000 स्कूलों को बंद करवा देंगे।
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(3) अब बचे हुए 90,000 स्कूलों के मालिक अपनी स्कूल बचाने के लिए 5 गुना घूस देने के लिए तैयार हो जायेंगे !!! ज्यादातर "ईमानदार" आला पुलिस अफसर इसी तरह से काम करते है। वे घूस खाने से इनकार करते हुए 10-15 अपराधियों का एनकाउंटर कर देंगे। और अब बचे हुए 100-200 अपराधी 10 गुना हफ्ता देने के लिए पुलिस अफसर के आगे पीछे चक्कर लगायेंगे !!!
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(4) शेष बचे हुए स्कूलों को बाध्य किया जाएगा कि वे अपने ट्रस्ट में कुछ संघ के स्वयंसेवको एवं नेताओं को ट्रस्टी के रूप में शामिल करें। और कुछ समय बाद संघ के ये नेता स्कूल के असली ट्रस्टियों को ट्रस्ट से बाहर हो जाने का दबाव बनायेंगे। और इस तरह संघ के नेता एवं स्वयंसेवक स्कूलों की जमीन पर कब्ज़ा कर लेंगे !!
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5) जो स्कूल बंद हो जायेंगे उन्हें मिशनरीज औने पौने दामो में खरीद लेगी, क्योंकि मिशनरीज पर RTE क़ानून लागू नहीं होता !!
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उल्लेखनीय है कि मोदी साहेब नकदी छूते भी नहीं है। वे यह पैसा सीधे पेड मीडिया को भुगतान कर देते है , एवं मीडिया इसके एवज में मोदी साहेब को निरंतर सकारात्मक कवरेज देता है। हाँ संघ=बीजेपी के स्वयं सेवको एवं अन्य नेताओ को नकदी लेने से ऐसा कोई गुरेज नहीं है।
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बीजेपी जब सत्ता से बाहर थी तब वह RTE के खिलाफ थी , लेकिन सत्ता में आकर बीजेपी एवं मोदी साहेब इस क़ानून के समर्थन में आ गए है। मोदी साहेब चाहे तो RTE को धन विधेयक की तरह प्रस्तुत करके इसे लोकसभा से ही रद्द कर सकते है। यदि वे चाहे तो इसे संयुक्त अधिवेशन बुलाकर रद्द कर सकते है। कई छोटी पार्टिया ऐसी है जो इस एक्ट को रद्द करने के पक्ष में वोट करेगी। लेकिन मोदी साहेब की मंशा इसे रद्द करने की नहीं है।
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और मंशा इसीलिए नहीं है कि इस क़ानून के माध्यम से वे और संघ के स्वयं सेवक बड़े पैमाने पर पैसा बना रहे है। एक तरफ तो वे इस क़ानून का विरोध करके RTE-विरोधी मतदाताओं के वोट खींचते है , और सत्ता में आकर वे इस क़ानून की सहायता से पैसा बनाते है।
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समाधान ?
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१) RTE एक्ट को तत्काल रद्द किया जाए। अपने ट्विटर हेंडल से पीएम को यह ट्वीट भेजें :

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"@PmoIndia #EndRTE <https://newindia.in/EndRTE>;
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nonsense RTE law is killing small budget private schools. Poor students going there are losing. Pls end this nonsense RTE law using money bill or joint session in Parliament or nationwide referendum."
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मेरे द्वारा भेजा गया ट्वीट -- <https://twitter.com/PawanJury/status/980194153844756480>;
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२) शिक्षा में सुधार के लिए राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी के क़ानून को गैजेट में प्रकशित किया जाए। इस प्रस्तावित क़ानून का ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/821128631398666>;
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