> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-03-16

Pawan Jury BhilwaraRj

कोयला खदानों का निजीकरण यानी इन्हे विदेशियों के हवाले करना --- सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके अंधभगतो का यह फैसला आगे चलकर भारत के विदेशी मुद्रा कोष को बर्बाद कर देने की हद तक नुकसान पहुंचाएगा।
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने भारत की कोयला खदाने निजी कम्पनियों को देने का फैसला किया है , लेकिन उन्होंने इसमें इस तरह का प्रस्ताव शामिल करने से इनकार कर दिया है कि, सिर्फ सम्पूर्ण रूप से भारतीय कम्पनियां ही ये ठेके ले सकेगी !!! वजह -- वे भारत की खदाने विदेशियों के हवाले करना चाहते है।
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मान लिजिये कि , अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत में एक कोयला खदान खरीदता है। अब वह खनन करके कोयला देश में बेच सकता है। कोयले के खनन की लागत लगभग 200 रूपये टन से 800 रुपये प्रति टन के आस पास होती है, एवं इसे लगभग 2000 से 8000 रूपये प्रति टन के भाव से बेचा जाता है। इस पर रोयल्टी 1000 से 3000 रूपये प्रति टन के हिसाब से सरकार में जमा करनी होती है। विक्रय मूल्य में से खनन एवं रोयल्टी की मदों को घटाने से जो राशि शेष रहती है , वह कम्पनी को मुनाफा बचता है।
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अब यदि अमरीकी-ब्रिटिश धनिक यह निवेश मोरिशस की कम्पनी के माध्यम से भारत में लाते है, तो अगस्त 2015 में मोदी साहेब द्वारा लागू किये गए एवं सोनिया-केजरीवाल द्वारा समर्थित संशोधन के अनुसार उन्हें अपनी आय पर अधिकतम 7.5% टेक्स ही चुकाना होगा !!! लेकिन यह कम्पनी यदि भारत की है तो भारतीय कम्पनी को 25% ( आयकर ) + 10% ( लाभांश कर ) = 35% टेक्स चुकाना होगा। जाहिर है , भारतीय कम्पनियां विदेशियों के मुकाबले घाटा बनाकर बाजार से बाहर हो जायेगी।
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और सबसे बड़ा पहलु यह है कि ब्रिटिश-अमेरिकी धनिक रुपयों में कमाए गए इस मुनाफे के बदले में कभी भी हमसे डॉलर की मांग कर सकते है !! और हमें उन्हें डॉलर चुकाने होंगे।
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दुसरे शब्दों में, ब्रिटिश-अमेरिकी धनिक भारत की खदानों से कोयला निकालकर भारत में भी बेचेंगे और उनके द्वारा कमाए गए मुनाफे के बदले हम उन्हें डॉलर चुकायेंगे !!! सोनिया-केजरीवाल एवं इनके सभी अंध भगत भी इस फैसले के समर्थन में है !! और मोदी साहेब के सभी अंध भगत एवं संघ के कार्यकर्ता तो खैर इसके समर्थन में है ही।
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और फिर भी यदि कोई व्यक्ति सोनिया-मोदी-केजरीवाल में कोई अंतर नहीं देखता तो मेरे विचार में उसे अपने दिमाग का परीक्षण करवाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह तय है कि ऐसे व्यक्ति का दिमाग असाधारण रूप से विकास कर चुका है। उसकी खोपड़ी में दिमाग की इतनी प्रचुरता है कि उसे अपना ब्रेन डोनेट करते रहना चाहिए।
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समाधान -- कोल इण्डिया के चेयरमेन पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं एवं उसके स्टाफ पर ज्यूरी सिस्टम। DDMRCM क़ानून के आने से भी खनन में व्याप्त भ्रस्टाचार में ख़त्म हो जाएगा , एवं खनन विभाग की कार्यकुशलता बढ़ेगी।
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