हिंदी ड्राफ्ट्स
यह क़ानून देश के खनिजो की लूट रोकने के लिए लिखा गया है। इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में छपने के तुरंत बाद भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन देश के नागरिको की संपत्ति घोषित हो जायेंगे, और 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी। तब देश के समस्त खनिज+स्पेक्ट्रम+सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी एवं किराया “ 135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता ” नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इकट्ठा हुयी इस राशि का 65% हिस्सा सभी भारतीयों में बराबर बांटा जाएगा और 35% हिस्सा सेना के खाते में जाएगा। प्रत्येक भारतीय के हिस्से में आयी राशि की एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी।
2. रिक्त भूमि कर
यह क़ानून अकार्यशील एवं अनुपयोगी जमीन को कर योग्य बनाता है। इस क़ानून के गेजेट में छपने के बाद जीएसटी रद्द हो जाएगा और नागरिको को वर्ष में एक बार 1% की दर सिर्फ रिक्त भूमि कर चुकाना होगा। इस कानून को प्रधानमन्त्री धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पास करके लागू कर सकते है, और इसे राज्यसभा से अनुमति लेने की जरुरत नहीं है।
3. जूरी कोर्ट
निचे दिया गया क़ानून देश भर के थानों, अदालतों, स्कूलों, अस्पतालों, बैंक, मीडिया, एवं अन्य सरकारी विभागों का काम काज सुधारने के लिए लिखा गया है। इस कानून को लोकसभा और राज्यसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री अपने हस्ताक्षर करके इस अधिसूचना को सीधे गेजेट में छाप सकते है। गेजेट में आने के साथ ही यह क़ानून पूरे देश में लागू होगा। #P20180436102
4. राज्य जूरी कोर्ट
इस कानून से राज्य स्तर पर थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों एवं अन्य सरकारी विभागों के भ्रष्टाचार में कमी आयेगी। यह कानून मुख्यमंत्री राज्य में लागू कर सकते है।
5. जिला जूरी कोर्ट
यह क़ानून जिले के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, अस्पतालों आदि का काम-काज सुधारने के लिए लिखा गया है। यह कानून उस जिले में लागू होगा जिस जिले के लिए मुख्यमंत्री ने राजपत्र अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री चाहे तो इसे राज्य के अन्य जिलो में या पूरे प्रदेश में भी लागू कर सकते है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। #RRP05
6. woic
इस कानून में 2 खंड है। पहला खंड भारत के संवेदनशील क्षेत्रो में विदेशी निवेश (FDI) पर निर्बन्धन लगाकर सिर्फ “सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कंपनियों” को कारोबार करने की अनुमति देता है। तथा दुसरा खंड भारत में भारतीयों द्वारा स्वदेशी हथियारों के उत्पादन (Made in India Made by Indians) के लिए आवश्यक शासन की रचना करता है।
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इस क़ानून को संसद से साधारण बहुमत द्वारा पारित करके गेजेट में छापा जा सकता है। यदि यह कानून विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) के किसी समझौते का उलंघन करता है तो W.T.O. भारत को समझौते से बाहर कर सकता है, या प्रधानमंत्री भारत को W.T.O. समझौते से अलग करने के लिए आवश्यक अधिसूचना जारी कर सकते है।
7. वोट वापसी दूरदर्शन चेयरमैन
यह कानून मीडिया को सुधारने के लिए लिखा गया है। इस कानून के आने से सभी प्राइवेट और सरकारी सार्वजनिक प्रसारणों में अश्लीलता, फूहड़ता, नग्नता एवं फेक न्यूज आदि में कमी आएगी।
8. वोट वापसी केंद्रीय मंत्री
इस कानून के आने से भारत के नागरिक प्रधानमन्त्री को यह सुझाव दे सकेंगे कि वे किस सांसद को किसी विभाग का केन्द्रीय मंत्री बनाना चाहते है एवं किस मंत्री को नौकरी से निकालना चाहते है। यदि वोट वापसी प्रधानमंत्री का क़ानून गेजेट में आ जाता है तो इस क़ानून को लागू करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। क्योंकि इस क़ानून की सभी धाराएं वोट वापसी प्रधानमंत्री क़ानून में शामिल है ।
9. वोट वापसी राज्यमंत्री
इस कानून के आने से भारत के नागरिक मुख्यमन्त्री को यह सुझाव दे सकेंगे कि वे किस विधायक को किसी विभाग का राज्य मंत्री बनाना चाहते है एवं किस मंत्री को नौकरी से निकालना चाहते है। यदि वोट वापसी मुख्यमंत्री का क़ानून गेजेट में आ जाता है तो इस क़ानून को लागू करने की जरूरत नहीं रह जाएगी।
10. राष्ट्रीय हिंदू बोर्ड
(1) यह कानून हिन्दू नागरिको के लिए एक राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड (R.H.B.) का गठन करता है। इस बोर्ड का प्रमुख हिन्दू संघ प्रधान कहलायेगा। भारत में निवास करने वाला प्रत्येक हिन्दू इस बोर्ड का वोटिंग मेम्बर बन सकेगा। यदि आप हिन्दू बोर्ड के सदस्य है तो आपको एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी ताकि आप हिन्दू संघ प्रधान को चुनने या निष्काषित करने के लिए स्वीकृति दे सके।
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(2) इस क़ानून द्वारा (a) कृष्ण जन्म भूमि, मथुरा , (b) विश्वनाथ देवालय, काशी एवं , (c) अमरनाथ देवालय, कश्मीर के भूखंड हिन्दू बोर्ड के स्वामित्व में हस्तांतरित होने की प्रक्रिया शुरू होगी और बोर्ड को इन भूखंडो पर देवालय निर्माण व इनका प्रबंधन करने का कानूनी अधिकार मिल जायेगा।
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(3) इसके अलावा यदि संघ प्रधान या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई शिकायत आती है, तो मामले की सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति जजों के पास न होकर बोर्ड मेम्बर्स की नागरिको की जूरी के पास रहेगी।
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(4) यह क़ानून सरकार द्वारा हथियाये जा चुके सभी देवालयों को भी सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करता है।
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(5) इस क़ानून में विभिन्न हिन्दू संप्रदाय भी अपनी पहचान बनाये रखते हुए ‘स्वैच्छिक रूप से’ पंजीकृत हो सकेंगे। तथा इन सम्प्रदायों के अनुयायियों को यह अधिकार मिल जायेगा कि वे अपने सम्प्रदाय के ट्रस्टियों एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष को बदल सके।
11. गौ नीति
इस क़ानून के गेजेट में आने से देशी गाय की हत्या में कमी आएगी और गौ वंश का सरंक्षण होगा। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
12. जूरी पंचायत
यह कानून पंचायत एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारेगा। इस कानून में ऐसी प्रक्रियाएं है जो स्थानीय / ग्रामीण प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में कमी लाएगी। इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है।
13. टू चाइल्ड लॉ
जनसँख्या नियंत्रण का यह प्रस्तावित कानून दो से अधिक संतान रखने वाले नागरिको पर कुछ निर्बन्धन लगाता है। परन्तु जिन अभिभावकों के 1 या 2 या 3 पुत्रियाँ है किन्तु कोई भी पुत्र नहीं है, उन्हें कुछ अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी मिलेंगे, एवं उन्हें किसी आर्थिक दंड का सामना भी नहीं करना होगा। इस कानून से लड़का-लड़की का लिंगानुपात (Sex Ratio) नहीं बिगड़ेगा
14. भारतीय राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर
इस क़ानून में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर ( National Register for Citizens of india) बनाने की प्रक्रिया दी गयी है। गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही नागरिकता रजिस्टर बनने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अनुसार भारत में लगभग 2 करोड़ अवैध आर्थिक विदेशी ( illegal migrant ) निवास कर रहे है। इन अवैध विदेशियों में प्रताड़ित शरणार्थी भी है, और आर्थिक अवसरों की तलाश में आये विदेशी ( illegal economic migrant ) भी है। इस प्रस्तावित क़ानून में, कौन अवैध आर्थिक विदेशी है और कौन प्रताड़ित शरणार्थी है, इस बारे में अंतिम फैसला नागरिको की जूरी करेगी। यह क़ानून ड्राफ्ट निम्नलिखित कार्य करेगा :
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(1) अवैध आर्थिक विदेशीयों ( illegal economic migrant ) को चिन्हित करके उन्हें भारत से निष्कासित करेगा।
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(2) प्रताड़ित शर्णार्थियो ( Persecuted refugee ) को शरण देगा।
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(3) देश व्यापी नागरिकता रजिस्टर बनाएगा ।
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गृह मंत्री श्री अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि जल्दी ही वे देश व्यापी NRC का ड्राफ्ट लायेंगे। किन्तु जब तक सरकार देश व्यापी NRC का ड्राफ्ट सामने नहीं रखती, तब तक हम इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगा सकते कि इसमें क्या प्रावधान होंगे। असम में NRC का जो ड्राफ्ट लागू किया गया था उसमें असम राज्य के लिए विशेष प्रावधान थे, अत: असम का NRC ड्राफ्ट पूरे भारत में लागू नहीं किया जा सकता है। प्रस्तावित NRCI इस कमी को पूरा करता है। इस क़ानून को मनी बिल / धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पास करके गेजेट में छापा जा सकता है। #NRCI , #P20180436121
15. gun-law
प्रधानमंत्री यह कानून सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में भारत के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता यह कानून लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह कानून प्रत्येक भारतीय को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 कारतूस रखना अनिवार्य होगा। जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी
16. state-gun-law
जनमत संग्रह में अपने राज्य के 55% नागरिको की सहमती लेकर मुख्यमंत्री यह कानून लागू कर सकते है। जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह कानून अमुक राज्य के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
17. dist-gun-law
जनमत संग्रह में किसी जिले के 55% नागरिको की स्पष्ट सहमती लेने के बाद मुख्यमंत्री यह कानून अमुक जिले में लागू कर सकते है। यह कानून अमुक जिले के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
18. पारदर्शी शिकायत प्रणाली - भारत
भारत में शासन एवं नागरिकों के बीच संवाद करने की अधिकृत एवं पारदर्शी प्रक्रिया न होने के कारण नागरिक अपनी मांग, सुझाव आदि पीएम या सीएम तक नहीं पहुंचा पाते, और विभिन्न अनाधिकृत एवं बेतरतीब तरीको का सहारा लेने के लिए बाध्य होते है।
इस कानून के आने के बाद ज्यादातर नागरिकों को किसी फैसले का समर्थन एवं विरोध करने के लिए या अपनी मांग रखने के लिए सड़कों पर आकर मजमा लगाने की जरूरत नहीं रह जायेगी। टीसीपी आने के बाद नागरिक अधिकृत रूप से अपनी मांग सरकार एवं जनता के सामने रख सकेंगे, और मतदाता किसी भी मांग पर अपनी सहमती या असहमती दर्ज कर सकेंगे ।
19. पारदर्शी शिकायत प्रणाली - राज्य
यह कानून किसी राज्य के मतदाता को यह अधिकार देता है कि वे अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सके, तथा दर्ज किये गए किसी भी शपथपत्र पर अपनी स्वीकृति दर्ज कर सके।
20. पारदर्शी शिकायत प्रणाली - जिला
मुख्यमंत्री यह कानून किसी जिले में लागू कर सकते है। तब अमुक जिले का कोई भी नागरिक अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सकेगा, तथा दर्ज किये गए किसी भी शपथपत्र पर अपनी स्वीकृति दर्ज कर सकेगा।
21. वोट वापसी सांसद
इस कानून के आने के बाद यदि आप अपने विधायक / सांसद के काम काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निष्काषित करके किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे।
22. रेडो
यह कानून सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों, थानों, अदालतों की दशा सुधारने एवं मिलावट की समस्या कम करने के लिए लिखा गया है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप कर अपने राज्य में लागू कर सकते है। यदि रेगो, राज्य जूरी कोर्ट या जूरी कोर्ट गेजेट में आ जाता है तो इस क़ानून की जरूरत नहीं रह जाएगी ।
23. रेगो
यह कानून स्कूलो-अस्पतालो-थानों-अदालतों-बैंक, मीडिया, राज्य एवं केन्द्रीय सरकारी विभागों का काम काज सुधारेगा। प्रधानमंत्री द्वारा गेजेट में प्रकाशित होने के बाद यह पूरे देश में लागू होगा। यदि जूरी कोर्ट गेजेट में आ जाता है तो इस क़ानून की जरूरत नहीं रह जायेगी।
24. वोट वापसी मुख्यमंत्री
इस कानून के आने के बाद राज्य के नागरिक विधायको को यह सुझाव दे सकेंगे कि क्या वे पदासीन मुख्यमंत्री को पद पर बनाए रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना चाहते है।
25. वोट वापसी प्रधानमंत्री
यह कानून के आने के बाद देश के नागरिक सांसदों को यह सुझाव दे सकेंगे कि क्या वे पदासीन प्रधानमंत्री को पद पर बनाए रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाना चाहते है।
26. इतिहास पुनरीक्षण
यह कानून इतिहास की पुस्तकों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करेगा, ताकि पाठयपुस्तको में सही एवं प्रमाणिक इतिहास लिखा जा सके।
27. आरक्षण समायोजन
यह क़ानून दलितों की सहमती से आरक्षण का पुनर्संयोजित करता है।
28. वोट वापसी सरपंच
इस कानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने की प्रक्रिया दी गयी है। इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। यदि जूरी पंचायत गेजेट में आता है तो इस क़ानून की जरूरत नहीं रह जाएगी। क्योंकि जूरी पंचायत क़ानून में भी सरपंच को वोट वापसी पासबुक के दायरे में किया गया है।