धन वापसी पासबुक

यह क़ानून देश के खनिजो की लूट रोकने के लिए लिखा गया है। इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में छपने के तुरंत बाद भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन देश के नागरिको की संपत्ति घोषित हो जायेंगे, और 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी। तब देश के समस्त खनिज+स्पेक्ट्रम+सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी एवं किराया “ 135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता ” नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इकट्ठा हुयी इस राशि का 65% हिस्सा सभी भारतीयों में बराबर बांटा जाएगा और 35% हिस्सा सेना के खाते में जाएगा। प्रत्येक भारतीय के हिस्से में आयी राशि की एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी।

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धनवापसी पासबुक – खनिज रॉयल्टी सीधे नागरिको के खातों में भेजने का प्रस्ताव

(DhanVapsi Passbook– Directly Deposit Mineral Royalty in Citizens Account)

(इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।)

इस कानून का सार :

यह क़ानून देश के खनिजो की लूट रोकने के लिए लिखा गया है। इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में छपने के तुरंत बाद भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन देश के नागरिको की संपत्ति घोषित हो जायेंगे, और 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी। तब देश के समस्त खनिज+स्पेक्ट्रम+सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी एवं किराया “ 135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता ” नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इकट्ठा हुयी इस राशि का 65% हिस्सा सभी भारतीयों में बराबर बांटा जाएगा और 35% हिस्सा सेना के खाते में जाएगा। प्रत्येक भारतीय के हिस्से में आयी राशि की एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी। खनिजो की नीलामी करके पैसा इकठ्ठा करने वाला राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी धन वापसी पासबुक में दायरे में होगा और नागरिक पटवारी कार्यालय में जाकर उसे नौकरी से निकालने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। यदि खनिज अधिकारी या उसके स्टाफ के खिलाफ घपला करने की या अन्य कोई शिकायत आती है तो सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति जज के पास न होकर आम नागरिको की जूरी के पास रहेगी। यह क़ानून देश की सभी खदानों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है। इस क़ानून को संसद से पास करने की जरूरत नही है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।


यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :

“प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित धनवापसी पासबुक क़ानून गेजेट में छापें - #DhanVapsiPassbook , #P20180436101


टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।

भाग (I) : सभी नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश

  1. इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी।

  2. इस कानून के गेजेट में छपने के बाद भारत की केंद्र सरकार को होने वाली खनिज रॉयल्टी, स्पेक्ट्रम रॉयल्टी और केंद्र सरकार द्वारा अधिगृहीत जमीनों के किराये से प्राप्त राशि का 65% हिस्सा भारत के नागरिकों में समान रूप से बांटा जायेगा, और हर महीने यह धनराशि सीधे आपके बैंक खाते में जमा होगी। शेष 35% हिस्से का उपयोग सिर्फ सेना में सुधार के लिए खर्च होगा। जब आप राशि प्राप्त करेंगे तो इसकी एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी।

  3. यह कानून ऐसा कोई वादा नहीं करता कि आपको प्रति महीने 500 रू या 1000 रू या कोई स्थिर राशि प्राप्त होगी। यदि खनिजों / स्पेक्ट्रम का या जमीनों का बाजार मूल्य बढ़ता है तो आमदनी और किराया बढ़ सकता है। लेकिन यदि खनिज आमदनी और किराया घटता है तो नागरिकों को हर महीने मिलने वाली यह राशि भी घटेगी।

  4. राष्ट्रीय खनिज अधिकारी (NMRO=National Mineral Royalty Officer) के पास खनिज रॉयल्टी और सरकारी जमीनों का किराया तय करने, इकठ्ठा करने और सभी नागरिकों के बैंक खातों में जमा करने हेतु आवश्यक कर्मचारी एवं अधिकार होंगे। NMRO की नियुक्ति प्रधानमन्त्री करेंगे, किन्तु यदि यह धनराशि आपको समय पर नही मिल रही है या अन्य किसी वजह से आप NMRO को नौकरी से निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो आप धन वापसी पासबुक के साथ पटवारखाने में जाकर अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दे सकेंगे।

  5. आप पटवारी कार्यालय में जाकर अपनी स्वीकृति किसी भी दिन रद्द कर सकते है, एवं राष्ट्रिय खनिज अधिकारी के किसी भी अन्य प्रत्याशी को किसी भी दिन स्वीकृत कर सकते है। जब आप किसी प्रत्याशी के लिए हाँ दर्ज करेंगे या अपनी स्वीकृति रद्द करेंगे तो पटवारी इसकी एंट्री आपकी धन वापसी पासबुक में करेगा।

  6. इस कानून के पारित होने के बाद यदि राष्ट्रीय खनिज अधिकारी या उसका स्टाफ कोई गबन-घपला-लापरवाही भ्रष्टाचार करता है या अन्य किसी मामले में उनकी कोई भी शिकायत आती है और यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य-सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।

  7. राष्ट्रीय खनिज अधिकारी सम्पूर्ण भारत में सभी खदानों, स्पेक्ट्रम, सरकारी भूमि की खुली नीलामी आयोजित करेगा। वह केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली जमीनों की रूप रेखा तैयार करेगा और इन सभी जमीनों पर लीज की लम्बाई भी तय करेगा। किन्तु खनिज अधिकारी के पास जल संसाधनों पर कोई अधिकार नहीं होंगे।

  8. राष्ट्रीय खनिज अधिकारी प्रत्येक व्यक्ति या कंपनी जिसके पास खदाने, स्पेक्ट्रम, सरकारी जमीने आदि लीज पर है, से रॉयल्टी और किराया प्रति माह इकठ्ठा करेगा एवं इकट्ठी की गयी राशि को भारत के सभी व्यस्क नागरिकों के बैंक खातों में प्रति माह जमा करवाएगा। सभी नागरिकों को लगभग बराबर राशि मिलेगी लेकिन ये राशि व्यक्ति की आयु, उसके पुत्र या पुत्रियों की संख्या, विकलांगता आदि के आधार पर कम ज्यादा हो सकती है। वितरण अनुपात की जानकारी आगे की धाराओं में दी गयी है।

  9. कुछ मामलों में किसी एक राज्य में निवास कर रहे नागरिकों को उनके राज्य के खनिज और जमीन से प्राप्त राशि में से अतिरिक्त राशि मिल सकती है, लेकिन ये राशि देश के समस्त नागरिकों को मिल रही राशि के दो-गुना से अधिक नहीं होगी। और ऐसे क्षेत्रों में जिनकी सीमा शत्रु देशों से लगी हो या सुदूर क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों को भी बंटने वाली राशि में से अतिरिक्त पैसा मिल सकता है। लेकिन उपरोक्त अपवादों को छोड़कर अन्य सभी नागरिकों को बराबर हिस्सा मिलेगा।

  10. यह कानून सिर्फ केंद्र सरकार के अधीन आने वाली खदानो, स्पेक्ट्रम और जमीनों पर लागू होगा। किन्तु केंद्र सरकार के अधीन जल संसाधन इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेगें। यह कानून राज्य, नगरपालिकाओं, जिले, तहसील, ग्राम पंचायतों के अधिकार में आने वाली खदानों और जमीनों पर भी लागू नहीं होगा। मुख्यमंत्री, महापौर और सरपंच अपने राज्य/ नगर/ जिले/ तहसील / गाँव के स्वामित्व में आने वाले खनिजो एवं जमीनों से प्राप्त आय को अपने राज्य/ नगर/ जिले/ तहसील/ गाँव के नागरिकों में बांटने के लिए ऐसा ही कानून लागू कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यह कानून पानी या पानी के वितरण से मिलने वाली राशि पर लागू नहीं होगा।

भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश

राष्ट्रीय सम्पत्तियों पर नागरिको के स्वामित्व की घोषणा : भारत के नागरिक देश की सभी खदानों, स्पेक्ट्रम, IIM अहमदाबाद को शामिल करते हुए सभी IIM के भू-खंडो, जेएनयू के भू-खंडो, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों जिनका स्वामित्व निजी कंपनियों या ट्रस्टो के पास नहीं है के भू-खंडो को संयुक्त और समान रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व की संपत्ति घोषित करते है। अब से ये भू-खंड भारत की राज्य सरकार या भारत की केंद्र सरकार या किसी अन्य सरकारी पक्ष या निजी पक्ष की संपत्ति नहीं है । भारत के सभी अधिकारीयों, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशो से विनती की जाती है कि, भारत के नागरिको के उपरोक्त फैसले के विरुद्ध कोई भी याचिका स्वीकार ना करे ।

राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी का भू-खंडो पर क्षेत्राधिकार

(12.1) निम्नलिखित मंत्रालयों और विभागों के सभी भू-खंड राष्ट्रीय खनिज अधिकारी के क्षेत्राधिकार में आयेंगे :

  1. विज्ञान, चिकित्सा, गणित और इंजीनियरिंग के शिक्षण संस्थानों को छोड़कर आई.आई.एम, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय।
  2. एयरपोर्ट, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के स्वामित्व वाले सभी भवन
  3. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय
  4. उपभोक्ता मामलें एवं लोक वितरण मंत्रालय
  5. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
  6. लघु उद्योग एवं कृषि एवं ग्राम उद्योग मंत्रालय
  7. कपड़ा उद्योग मंत्रालय
  8. युवा मामलें और खेल मंत्रालय
  9. नीति आयोग
  10. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
  11. मानव संसाधन विकास मंत्रालय
  12. ग्रामीण विकास मंत्रालय
  13. सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय
  14. शहरी विकास एवं गरीबी उपशमन मंत्रालय
  15. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग

(12.2) यह क़ानून देश की सभी खदानों एवं सरकारी भूमि की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है।

(12.3) राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी का निजी व्यक्तियों, कंपनियों, ट्रस्टों, राज्य सरकारो एवं नगर / जिला शासन के स्वामित्व वाले भू-खण्डों पर कोई अधिकार नहीं होगा। सेना, न्यायालयों, जेलों, रेलवे, बस स्टेशनों, कक्षा 12 तक के सरकारी विद्यालयों और कर संग्रहण कार्यालयों द्वारा उपयोग में लिए जा रहे भू-खंड भी खनिज अधिकारी के क्षेत्राधिकार से बाहर होंगे।

(12.4) सभी चिकित्सा महाविद्यालयों, IIT, NIT, इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, IISC, विज्ञान और गणित महाविद्यालयों को स्वास्थ्य मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय या विज्ञान मंत्रालय जैसा प्रधानमंत्री तय करे, का अंग बनाया जायेगा। संबंधित मंत्री इन महाविद्यालयों में दिन-प्रतिदिन के संचालन हेतु अध्यक्ष नियुक्त करेंगे। सभी महाविद्यालय जिनमें चिकित्सा, विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग का शिक्षण कार्य हो रहा है, के भू-खंड खनिज अधिकारी के क्षेत्राधिकार में नहीं आएंगे।

भारत सरकार के स्वामित्व वाले भू-खण्डों से किराया इकठ्ठा करना

(13.1) अनुपयोगी भूमि के लिए - खनिज रॉयल्टी अधिकारी अपने विवेक से किसी भूमि को उचित माप के भू-खंडो में विभाजित करेगा, एवं प्रत्येक भू-खंड के लिए नीलामी करवाएगा। नीलामी के लिए निम्नलिखित शर्तें होगी :

(13.1.1) लीज 5, 10, 15, 20 या 25 वर्षो की होगी। खनिज रॉयल्टी अधिकारी इसमें से कोई अवधि तय करेगा। किन्तु लीज 25 वर्षों से अधिक नहीं हो सकेगी।

(13.1.2) बोली लगाने वाले मासिक किराये और लीज की अवधि के लिए बोलियां लगाएंगे जो कि अधिकतम लीज अवधि से कम हो सकती है। बोली का प्रारूप मासिक किराये व लीज महीने के अनुसार होगा। एक व्यक्ति एक से ज्यादा बोली लगा सकता है। लीज की न्यूनतम अवधि 12 महीने होगी।

(13.1.3) निविदा का भार ( मासिक किराया ) / लॉग ( मासिक लीज ) के अनुसार होगा। अर्थात जितना अधिक किराया उतना अधिक भार और जितनी लम्बी लीज, उतना कम भार।

(13.1.4) निविदाएं पूरी तरह से पारदर्शी एवं सार्वजनिक होगी, तथा सभी निविदाएँ सभी को दिखेगी।

(13.1.5) खनिज अधिकारी निविदाओ के भार के अनुसार भू-खंड देगा। ( मासिक_ किराया ) / लॉग ( मासिक_लीज )

(13.1.6) खनिज रॉयल्टी अधिकारी जमा राशि के रूप में 6 महीने का किराया या इसके समान राशि लेगा।

(13.1.7) अमुक किरायेदार किसी भी दिन भूमि खाली करने के लिए और अदा किये जा रहे किराये को बंद करने के लिए स्वतंत्र होगा।

(13.2) लीज अवधि के दौरान लीज पर दिए गए भू-खंड के आस पास के 1 वर्ग किमी क्षेत्र में जमीन के मूल्य में आने वाले बदलाव के प्रतिशत, जिस दिन लीज पर दिये गए भू-खंड के किराये में संशोधन हुआ है, और प्रचलित प्रभावी ब्याज दर में प्रतिशत बदलाव के आधार पर खनिज रॉयल्टी अधिकारी हर 3 वर्ष में किराये को संशोधित करेगा।

(13.3) लीज अवधि समाप्त होने के बाद खनिज रॉयल्टी अधिकारी एक नयी नीलामी करवाएगा, जिसमे मौजूदा लीज धारक को निम्नलिखित अतिरिक्त लाभ मिलेंगे :

(13.3.1) उसका निविदा भार 1.1 से 1.5 से गुणा हो जायेगा, जो कि इस पर निर्भर करेगा कि उसने कितने वर्षों तक किराया चुकाया है।

(13.3.2) नीलामी समाप्त होने के बाद वह 3 महीने के अन्दर अपनी बोली बढ़ा सकता है।

(13.3.3) नए लीज धारक द्वारा चुकाये गए 6 महीने के अग्रिम किराये में से मौजूदा लीज धारक को 20% से 50% तक की राशि मिलेगी जो इस पर निर्भर करेगी कि मौजूदा लीज धारक ने कितने महीनो तक जमीन ले रखी थी।

(13.3.4) लेकिन यदि मौजूदा लीज धारक नीलामी से चूक जाता है, तब वह उस भूमि से अपनी संपत्ति हटा सकता है या बेच सकता है। लेकिन उसे ये भूमि खाली करनी होगी।

(13.4) यदि मौजूदा लीज धारक लीज शुदा भू-खंड पर बोली लगाता है तो उसे 25% अधिक (25% * लीज महीनो में /300) के साथ अधिकतम 50% तक का बोनस प्राप्त होगा। अर्थात उसकी बोली का भार 1.25 से 1.50 के गुणन में बढ़ जाएगा। किन्तु यह इससे अधिक नहीं होगा।

(13.5) यदि कोई भू-खंड लीज पर है, तो खनिज अधिकारी भू-खण्ड के आस पास के 1 किमी क्षेत्र में पिछले 3 वर्षो में विक्रय की गयी जमीन के विक्रय मूल्य का माध्य निकालकर भू-खंड की कीमत तय करेगा, और अगले 10 वर्षो के लिए (बाजार मूल्य मूल्य * प्रचलित ब्याज दर / 3) के रूप में वार्षिक किराये को निर्धारित करेगा। किराया हर 3 वर्ष में संशोधित होगा। 10 वर्षों के बाद ऐसे भूखंड पर धारा 13.1 में बताये गए नियम लागू होंगे।

(13.6) खनिज रॉयल्टी अधिकारी इकट्ठे हुए किराये का 35% हिस्सा रक्षा मंत्री को सेना मजबूत करने के लिए हथियार उपलब्ध कराने और सभी नागरिकों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए देगा।

भू-खंडो से प्राप्त किराए एवं खनिज रॉयल्टी का नागरिको में बंटवारा

(14.1) खनिज रॉयल्टी अधिकारी इकट्ठे हुए किराये का 35% हर महीने उन नागरिकों को भेजेगा जो पिछले 10 वर्षों से अमुक राज्य में रह रहे है। किन्तु यह राशि पिछले वर्ष में भारत के नागरिकों को प्राप्त राशि के दोगुने से अधिक नहीं होगी। खनिज रॉयल्टी अधिकारी शेष किराया हर महीने भारत के नागरिको को भेजेगा।

(14.2) इस कानून के पारित होने के 1 वर्ष के बाद नागरिको को प्राप्त होने वाला किराया इस प्रकार से बदलेगा :

(14.2.1) यदि उसके (0 पुत्र), (0 पुत्र, 1 पुत्री), (0 पुत्र, 2 पुत्री) है, तब किराया 33% अधिक मिलेगा और यदि उसकी आयु 60 वर्ष है तो किराया 66% अधिक मिलेगा। . (14.2.2) यदि उसके (1 पुत्र, 0 पुत्री), (1 पुत्र, 1 पुत्री), (1 पुत्र, 2 पुत्री) है, तब किराया 15% अधिक मिलेगा और उसकी आयु 60 वर्ष है तो किराया 33% अधिक होगा। . (14.2.3) यदि उसके (2 पुत्र, 0 पुत्री), (2 पुत्र, 1 पुत्री) है तो किराया में कोई बदलाव नहीं होगा - ना बढेगा ना घटेगा।

(14.2.4) यदि उसके (2 पुत्र, 2 पुत्री) या (3 पुत्र, 1 पुत्री) है, तो किराया 33% कम मिलेगा।

(14.2.5) यदि उसके बिंदु 4 से अधिक संतान है तो किराया 66% कम मिलेगा। . (14.2.6) यहाँ जुड़वाँ संतान एक संतान के रूप में गिनी जाएगीं और गोद ली गयी संताने नहीं गिनी जाएगी।

(14.3) 60 वर्ष से ऊपर के पुरुषों और 55 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को मिलने वाला किराया 33% अधिक होगा और 75 वर्ष से ऊपर के पुरुषों और 70 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को मिलने वाला किराया 66% अधिक होगा। . (14.4) 7 वर्ष से कम आयु के बच्चे को कोई भी किराया नहीं मिलेगा। 7 वर्ष से 14 वर्ष के बीच के बच्चों को मिलने वाला किराया सामान्य किराये का एक तिहाई (33%) होगा और 14 वर्ष से 18 वर्ष के बीच के बच्चों को मिलने वाला किराया सामान्य किराये का दो तिहाई (66%) होगा। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को मिलने वाला किराया उसकी माता को दिया जायेगा, जब तक कि जूरी खनिज रॉयल्टी अधिकारी को उस बच्चे के पिता या किसी अन्य संबंधी को देने का आदेश नहीं करती या यदि माता जीवित नहीं है। . (14.5) आगे, यदि जूरी पाती है कि पति एक या उससे अधिक संतान की देखभाल अच्छे से नहीं कर रहा है तो जूरी खनिज अधिकारी को निर्देश दे सकती है कि पिता को मिलने वाले किराए का आधा भाग माता को दिया जाए। ऐसी स्थिति में खनिज रॉयल्टी अधिकारी आधा भाग माता को देगा और आधा भाग पिता को। .

15. खनिज रॉयल्टी इकठ्ठा करना

. खनिज रॉयल्टी अधिकारी 1947 से पहले एवं बाद में लीज पर दी गयी सभी कार्यशील लीज शुदा खदानों की लीज का बाजार भाव से पुनर्मूल्यांकन करके तय करेगा कि क्या अमुक कार्यशील खदान की रॉयल्टी राशि बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं। देश की अन्य सभी खदानों, कच्चे तेल के कुओ आदि से होने वाली आय भी NMRO प्राप्त करेगा। . (15.2) खनिज रॉयल्टी अधिकारी प्राप्त होने वाली खनिज रॉयल्टी एवं भूमि किराया सेना में, राज्यों में और भारत के नागरिकों में उसी अनुपात में बाँटेगा जैसा कि भूमि किराया वितरण से संबंधित धाराओं में वर्णित किया गया है।
.

16. खनिज रॉयल्टी अधिकारी व उसके स्टाफ की शिकायतों का जूरी द्वारा निपटान

. (16.1) खनिज रॉयल्टी अधिकारी प्रत्येक जिले के लिए एक जिला जूरी प्रशासक, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य जूरी प्रशासक और भारत के लिए एक राष्ट्रीय जूरी प्रशासक नियुक्त करेगा। . [ टिपण्णी : जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक धनवापसी पासबुक के दायरे में होंगे और इस पासबुक में दिए गए "वोट वापसी" सेक्शन का उपयोग करके मतदाता उपरोक्त में से किसी अधिकारी को नौकरी से निकालकर किसी दुसरे व्यक्ति को लाने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। इसकी प्रक्रियाएं इसी क़ानून की धारा 19 में दी गयी है।] . (16.2) जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य रिटायर होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर कार्यरत रहेगा। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू व यात्रा-व्यय मिलेगा . (16.3) यदि खनिज रॉयल्टी अधिकारी या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला आता है तो वादी अपने मामले की शिकायत महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, या इस मामले की सुनवाई के लिए 30 से 55 वर्ष आयु वर्ग के नागरिकों के एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है। जूरी मंडल के गठन में निम्नलिखित नियमो का पालन किया जाएगा :

(16.3.1) शिकायत उस जिले में दर्ज होगी जहाँ प्रॉपर्टी स्थित है या नागरिक रहता है। यदि नागरिक या लीज धारक या अधिकारी मामला उसी राज्य में स्थित किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करना चाहते है तो वे राज्य जूरी प्रशासक या राज्य के हाई कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं। यदि पक्षकार मामले को राज्य से बाहर स्थानांतरित करना चाहते है तो वे राष्ट्रीय जूरी प्रशासक या सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं। . (16.3.2) जिले में प्रत्येक विवाद के लिए जिला जूरी प्रशासक लॉटरी से ( रैंडमली ) 3 से 10 गणित, विज्ञान या इंजीनियरिंग में स्नातकों का चयन, मामले में सहायता देने के लिए स्नातकों की तैयार सूची से करेगा। चयनित इंजीनियरों की आयु 30 वर्ष से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उनके पास 5 वर्षों का कार्य अनुभव होना चाहिए। . (16.3.3) जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा 30 से 55 वर्ष आयु वर्ग के उन मतदाताओ को चुनेगा, जो न तो पिछले 5 वर्षों में किसी जूरी में प्रस्तुत हुए हो और न पूर्व में उन्हें किसी अपराध में दोष सिद्ध पाया गया हो। . (16.3.4) जूरी सदस्यों की संख्या न्यूनतम 12 से प्रारम्भ होकर 50, 200, 500 और अधिकतम 1500 तक हो सकेगी। जूरी का आकर आरोपी कर्मचारी के पद एवं हैसियत पर निर्भर करेगा। . (16.3.5) यदि विवाद की राशि 10 लाख से कम है तो जूरी का आकार 12 होगा, और प्रति 10 लाख के लिए एक जूरी सदस्य बढ़ा दिया जायेगा। . (16.3.6) यदि शिकायत में राशि के साथ किसी अधिकारी के विरुद्ध शिकायत भी शामिल है तो जूरी के आकार का निर्धारण ऊपर बताये गए बिंदु (4) या (5) में से जो भी अधिक है, उसके अनुसार होगा। . (16.3.7) जूरी सदस्य उन जिलों से चयनित होंगे जहाँ की जिला अदालतें वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग द्वारा सुनवाई करने वाली जिला अदालत से जुड़ी हो। यदि अमुक जिला वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा किसी अन्य जिले से नहीं जुड़ा है, तो सभी जूरी सदस्य उस जिले से होंगे जहाँ मामला दर्ज किया गया है। . (16.3.8) जूरी सदस्य दोनों पक्षों को 1-1 घंटे के लिए सुनेंगे। 65% से अधिक जूरी सदस्यों के ये कहने के बाद कि वे पर्याप्त सुन चुके है, सुनवाई समाप्त हो जाएगी। . (16.3.9) यदि 75% या अधिक जूरी सदस्य आरोपी कर्मचारी को नौकरी से निकालने या जुर्माना लगाने का निर्णय देते है तो खनिज रॉयल्टी अधिकारी अमुक कर्मचारी को निकाल सकता है या उससे किराया वसूल सकता है, या रॉयल्टी अधिकारी को ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यदि शिकायतकर्ता को लगता है कि रॉयल्टी अधिकारी ने जूरी सदस्यों के निर्णय का ठीक से पालन नहीं किया है, तो वह भारत के मतदाताओं से मांग कर सकता है कि वे धारा 20 में दी गयी वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके उसे नौकरी से निकालने की सहमती दें। . (16.3.10) जिला अदालत के जूरी सदस्यों के निर्णय की अपील राज्य हाई कोर्ट के जूरी सदस्य या जजों के सामने एवं बाद में सुप्रीम कोर्ट के जूरी सदस्य या जजों के सामने की जा सकती है। .

17 खनिज रॉयल्टी अधिकारी एवं जूरी प्रशासक द्वारा आवेदन करने की योग्यताएं

. (17.1 ) राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो वह राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी या राष्ट्रीय जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा। . (17.2) जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला एवं राज्य जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा। . 18 .धारा 17 में दी गयी योग्यता रखने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार करके इसे पीएम की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा। .

19. मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना

. (19.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी धनवापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी, , जिला जूरी प्रशासक, राज्य एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं धनवापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है। . (19.2) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी . (19.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। . (19.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। राष्ट्रीय खनिज अधिकारी एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा। . [ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके। . रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ] .

20. राष्ट्रीय खनिज अधिकारी एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन

. (20.1) राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के लिए : यदि किसी उम्मीदवार को देश की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) की 35% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री मौजूदा अधिकारी को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति सम्बंधित पद पर कर सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा। . (20.2) राज्य जूरी प्रशासक के लिए : यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि स्वीकृतियों की यह संख्या पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी अमुक व्यक्ति को राज्य जूरी प्रशासक के पद पर नियुक्ति कर सकते है। . (20.3) जिला जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि यह संख्या पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी अमुक व्यक्ति को जिला जूरी प्रशासक के पद पर नियुक्ति कर सकते है। .

21. जनता की आवाज

. (21.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा। . (21.2) यदि कोई मतदाता धारा 21.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा। . [ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के लिए प्रयास किये है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]


----------धन वापसी क़ानून ड्राफ्ट का समापन-----------

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हमें इस क़ानून की जरूरत क्यों है ?

कच्चा माल यानी खनिज और जमीन ही दुनिया की असली संपत्ति है । सारी निर्माण इकाइयां, कारखाने, औद्योगिक विकास आदि कच्चे माल की सस्ती उपलब्धता पर निर्भर करता है। दुर्भाग्य से भारत में खनिजो की पहले से कमी है। इसी खनिज को लूटने के लिए ब्रिटिश-फ़्रांसिस साम्राज्य भारत में आये । उन्हें अपनी फैक्ट्रियो को चलाने के लिए सस्ते कच्चे माल यानी खनिज की जरूरत थी। अंग्रेजो ने भारत के खनिजो का बलात रूप से अधिग्रहण किया और 2 सदियों तक मुफ्त में इसे लूटा । . जब भारत आजाद हुआ तो नागरिको ने यह मांग की थी कि भारत के प्राकृतिक संसाधनों को भारत के समस्त नागरिको की संपत्ति घोषित करो। किन्तु जिन लोगो के हाथ में सत्ता आयी थी वे नागरिको की इस संयुक्त संपत्ति को खुद के कब्जे में रखना चाहते थे। अत: उन्होंने इन संसाधनों को अपने अधिकार में ले लिया। और फिर आजादी के बाद से जो भी दल सत्ता में आया उसने उद्योग पतियों से घूस खाकर औने पौने दामो में खदाने खोदने के लाइसेंस दिए। रेत, पत्थर, ताम्बा, जस्ता, लोहा से लेकर सोना , चांदी से हीरे तक सभी प्रकार के खनिज मन मर्जी से खोदकर बेचे जा रहे है। जो भी सरकार सत्ता में आती है सबसे पहले यह देखती है कि कौन कौन से संसाधन विदेशियों को बेचकर कितना माल कमाया जा सकता है । यह लूट वे विनेवेश और निजीकरण के नाम पर चलाते है । . और अब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आने के बाद यह लूट 10 गुना तेजी से हो रही है। विदेशी धनिक हमारे नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए चंदे देते है और बदले में उनसे कीमती खदानों को खोदने के अधिकार कानूनी रूप से ले लेते है। आज सरकारे जिन प्राकृतिक संसाधनों को बेच रही है, वह भारत के समस्त नागरिक की संपत्ति है। यदि हमारे पूर्वजो ने अंग्रेजो से लोहा लेकर उन्हें यहाँ से भागने के लिए बाध्य नहीं किया होता तो आज यह संपत्ति बचती नहीं थी। किन्तु अंग्रेजो के जाने के बाद भी आज तक यह लूट जारी है !! अंग्रेजो ने बलात रूप से इसे मुफ्त में लूटा, जबकि आज यह लूट कानूनी रूप से औने पौने दामो में चलाई जा रही है। सरकारों को कोई हक़ नहीं कि वे हमारी सम्पत्तियों को हमसे बिना पूछे बेचे। . यह क़ानून भारत के सभी प्राकृतिक संसाधनों को देश के 135 करोड़ नागरिको की संपत्ति घोषित करता है। इस क़ानून के आने के बाद भारत में प्राकृतिक संसाधनों की यह लूट बंद हो जायेगी। खनिजो की रॉयल्टी एवं जमीनों के किराए से जो राशि इकट्ठी होगी उसका 65% हिस्सा 135 करोड़ भारतीयों में बराबर बाँट दिया जाएगा और यह राशि हर महीने प्रत्येक भारतीय के खाते में ट्रांसफर होगी। शेष 35% हिस्सा सेना को मजबूत करने के लिए खर्च किया जाएगा। . यदि हम भारत के नागरिक यह क़ानून लाने में सफल नहीं होते है तो जल्दी ही बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत के सभी प्राकृतिक संसाधनों का अधिग्रहण करके भारत को कंगाल कर देगी। और यदि एक बार हमने प्राकृतिक संसाधन गँवा दिए तो भारत औद्योगिक विकास के लिए हमेशा के लिए परजीवी हो जाएगा। क्योंकि जो देश कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हो जाता है उसकी रीढ़ हमेशा के लिए टूट जाती है ।

इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?

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  1. कृपया “ प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित धनवापसी पासबुक क़ानून को गेजेट में छापे - #DhanVapsiPassbook, #P20180436101 .
  2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है। .
  3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा। .
  4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।

**तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ? **

4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें। . 4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे। . 4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती। . 5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। . 6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें : @Pmoindia , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #DhanVapsiPassbook , #P20180436101 . 7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा। . 8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (21) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।