भारतीय राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर
NRCI ; प्रस्तावित भारतीय राष्ट्रिय नागरिकता रजिस्टर अधिनियम
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( Proposed NRCI ; National Register for Citizens of india )
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NRCI का सार : इस क़ानून में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर ( National Register for Citizens of india) बनाने की प्रक्रिया दी गयी है। गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही नागरिकता रजिस्टर बनने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अनुसार भारत में लगभग 2 करोड़ अवैध आर्थिक विदेशी ( illegal migrant ) निवास कर रहे है। इन अवैध विदेशियों में प्रताड़ित शरणार्थी भी है, और आर्थिक अवसरों की तलाश में आये विदेशी ( illegal economic migrant ) भी है। इस प्रस्तावित क़ानून में, कौन अवैध आर्थिक विदेशी है और कौन प्रताड़ित शरणार्थी है, इस बारे में अंतिम फैसला नागरिको की जूरी करेगी। यह क़ानून ड्राफ्ट निम्नलिखित कार्य करेगा :
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(1) अवैध आर्थिक विदेशीयों ( illegal economic migrant ) को चिन्हित करके उन्हें भारत से निष्कासित करेगा।
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(2) प्रताड़ित शर्णार्थियो ( Persecuted refugee ) को शरण देगा।
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(3) देश व्यापी नागरिकता रजिस्टर बनाएगा ।
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गृह मंत्री श्री अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि जल्दी ही वे देश व्यापी NRC का ड्राफ्ट लायेंगे। किन्तु जब तक सरकार देश व्यापी NRC का ड्राफ्ट सामने नहीं रखती, तब तक हम इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगा सकते कि इसमें क्या प्रावधान होंगे। असम में NRC का जो ड्राफ्ट लागू किया गया था उसमें असम राज्य के लिए विशेष प्रावधान थे, अत: असम का NRC ड्राफ्ट पूरे भारत में लागू नहीं किया जा सकता है। प्रस्तावित NRCI इस कमी को पूरा करता है। इस क़ानून को मनी बिल / धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पास करके गेजेट में छापा जा सकता है। #NRCI , #P20180436121
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यदि आप NRCI बनाने का समर्थन करते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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प्रधानमंत्री जी, कृपया राष्ट्रिय नागरिकता रजिस्टर बनाने के लिए प्रस्तावित NRCI क़ानून गेजेट में छापे - #NRCI , #P20180436121
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
(iii) टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) यह क़ानून गेजेट में आने साथ ही पूरे भारत में लागू होगा।
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स्पष्टीकरण : असम के NRC में काफी विसंगितियाँ एवं कमियां थी, अत: असम में भी यह रजिस्टर बनाया जायेगा। उदाहरण के लिए असम का NRC न तो अवैध रूप से रह रहे आर्थिक विदेशियों को चिन्हित करता है, और न ही उन्हें डिपोर्ट करने की कोई व्यवस्था देता है।
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(2) इस क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद आपको पटवारी कार्यालय में जाकर एक NRCI फॉर्म भरना होगा। फॉर्म में आप निम्नलिखित जानकारियां देंगे – अपना एवं अपने रिश्तेदारों का वोटर आई डी नंबर, आधार नंबर एवं जन्म का वर्ष। राष्ट्रिय नागरिकता रजिस्ट्रार एक मोबाईल एप भी जारी करेगा ताकि आप NRCI फॉर्म ऑनलाइन भी भर सके।
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(2.1) यदि आपके पास वोटर आई डी एवं आधार नंबर नहीं है तो आप राशन कार्ड नंबर, पैन कार्ड नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस या मनरेगा कार्ड नंबर लिखकर भी फॉर्म भर सकते है।
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(2.2) रिश्तेदारो में शामिल है - आपके माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, सगे भाई-बहन एवं संताने। यदि आपके किसी रिश्तेदार की मृत्यु हो चुकी है, तब भी आप इस बारे उतनी जानकारी देंगे जितनी आपको ज्ञात है।
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(2.3) यदि आपको अपने अन्य रिश्तेदारों की वोटर आई डी मालूम नहीं है तो आप सिर्फ अपना वोटर आई डी नंबर लिखकर भी फॉर्म भर सकते है।
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(2.4) फॉर्म जमा करते समय आपको वोटर आई डी या आधार कार्ड में से किसी एक कार्ड की फोटो कॉपी फॉर्म के साथ देनी होगी।
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(2.5) अवयस्क संतानों का नाम जब फॉर्म में लिखा जाएगा तो अवयस्क संतान का आधार कार्ड नंबर लिखना अनिवार्य होगा। यदि अवयस्क का आधार कार्ड नहीं है, तो आप आधार कार्ड बनवा सकते है।
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(3) NRCI फॉर्म में दी गयी किसी भी जानकारी के बारे में यदि कोई विवाद है तो मामले की सुनवाई नागरिको की जूरी द्वारा की जायेगी। जूरी मंडल का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा । यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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(4) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है, और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून की धारा (15.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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[ टिप्पणी 1 : NRCI के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :
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1a. क्या NRCI फॉर्म भरना अनिवार्य होगा ?
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हाँ। यह प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्य होगा। यदि आप NRCI फॉर्म नहीं भरते है तो आपका नाम “सत्यापित नहीं” की सूची में डाला जा सकता है, और बाद में यह संदिग्धों की सूची में भी जा सकता है। यदि आपका नाम संदिग्धों की सूची में आ जाता है तो आपको नागरिको के जूरी मंडल के सामने पेश होना पड़ सकता है।
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1b. यदि मेरे पास वोटर आई डी एवं आधार कार्ड नहीं है तो मेरे पास क्या विकल्प है ?
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तब आप वोटर कार्ड या आधार कार्ड बनवा कर नागरिकता रजिस्टर में अपना नाम जुड़वा सकते है, या लाइसेंस नंबर, मनरेगा कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड के आधार पर भी NRCI फॉर्म भर सकते है ।
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1c. क्या रिश्तेदारों के वोटर कार्ड नंबर आदि के बारे जानकारी देना अनिवार्य है ?
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आपको उतनी ही जानकारी देनी है, जितनी जानकारी आपके पास है। यदि आपके पास जानकारी नहीं है तो आप NRCI फॉर्म के कॉलम में “जानकारी नहीं है” लिख सकते है। जानकारी नहीं देने पर आप पर कोई मामला नहीं बनाया जाएगा, किन्तु यदि आप जानबूझकर गलत जानकारी देते है, तो जूरी आपको समन भेज सकती है, और दोषी पाए जाने पर आप पर दंड भी लगा सकती है।
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1d. नागरिकता रजिस्टर में आने के लिए मुझे कौनसे कागज दिखाने होंगे ?
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NRCI की प्रक्रिया वोटर आई डी नंबर एवं आधार कार्ड पर आधारित है । अत: आपको NRCI फॉर्म के साथ अपनी वोटर आई डी / आधार कार्ड / राशन कार्ड में से किसी दस्तावेज की फोटो कॉपी देनी होगी। किन्तु आपको अपने रिश्तेदारों आदि के सिर्फ नाम, वोटर आई डी नंबर आदि लिखकर देने है, किन्तु अपने रिश्तेदारों की वोटर आई डी की फोटो कॉपी आदि नहीं देनी होगी।
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1e. यदि मुझे पढना लिखना नहीं आता है तो मैं NRCI फॉर्म कैसे जमा करूँगा ?
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इसके लिए NRCI एजेंट होंगे। NRCI एजेंट को 1 फॉर्म भरने के लिए सरकार 30 रू देगी। अत: वे स्वयं आप तक पहुंचेंगे और आपका फॉर्म भरवाकर पटवारी कार्यालय में दाखिल कर देंगे।
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1f. NRCI की जरूरत क्यों है ?
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भारत में लगभग 2 करोड़ के लगभग अवैध आर्थिक विदेशी निवासी (illegal economic imigrant) रह रहे है। असम, बंगाल, पूर्वोत्तर के अलावा ये पूरे भारत में फैले हुए है। इनमे से ज्यादातर अवैध विदेशी निवासी पिछले 30 सालों के दौरान भारत में आये है। इस वजह से भारत के संसाधनों पर भार बढ़ रहा है, और ये हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा है। इन अवैध विदेशी निवासीयों में से कई समूह हिंसक अपराधो एवं तस्करी आदि में भी लिप्त है। यदि पाकिस्तान एवं चीन इन्हें बंगलादेशी सीमा के माध्यम से हथियार भेजना शुरु कर देते है तो ये अवैध विदेशी निवासी भारत में एक हिंसक गृह युद्ध शुरू कर सकते है। अत: इन्हें चिन्हित करके भारत से बाहर भेजना देश की सुरक्षा के लिए बहुत जरुरी है। CAA एवं असम में किये गए NRC ने इस समस्या का समाधान नहीं किया है, बल्कि इस तरह की धारणा खड़ी कर दी है, कि इस समस्या को सुलझा लिया गया है। अत: INRC को लागू अविलम्ब लागू किया जाना बेहद जरुरी है। ]
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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(5) प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेंगे, जिसे राष्ट्रिय नागरिकता रजिस्टर अधिकारी ( NCRO ) कहा जाएगा। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सभी राज्यों में राज्य नागरिकता रजिस्ट्रारों (SNRO) की नियुक्ति करेगा। राष्ट्रिय रजिस्ट्रार प्रधानमंत्री की अनुमति से जिला कलेक्टरों को जिला रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त कर सकता है, या इच्छित जिलो में अलग से जिला रजिस्ट्रारो की नियुक्ति भी कर सकता है। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अस्थायी तौर पर अधिकतम 2 वर्षों के लिए केंद्र / राज्य सरकार से वांछित अधिकारियों को डेपुटेशन पर नियुक्त कर सकते है, या प्रति नियुक्ति पर केंद्र या राज्य सरकार से अधिकारी ले सकते है। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। ( वोट वापसी की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया धारा 14 देखें )
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(6) दसवीं कक्षा पास किया हुआ कोई भी मतदाता जिला कलेक्टर कार्यालय में NRCI एजेंट बनने के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(6.1) NRCI एजेंट को 3 दिवसीय शिविर में NRCI फॉर्म भरने आदि की जानकारी का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वह अन्य नागरिको को फॉर्म भरने में सहायता कर सके। जिला कलेक्टर तहसील पंचायत समिती में इसका शिविर आयोजित कर सकता है।
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(6.2) NRCI एजेंट नागरिको के फॉर्म भरकर पटवारी कार्यालय में जमा करवा सकेगा, एवं NRCI एजेंट को जमा कराये गए प्रत्येक फॉर्म के लिए राष्ट्रिय रजिस्ट्रार की तरफ से 30 रू की दर से भुगतान किया जाएगा।
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[ टिप्पणी 2 : NRCI रजिस्टर बनाने का कार्य पूरी कार्यकुशलता एवं इमानदारी से से हो इसके लिए राष्ट्रीय नियंत्रण अधिकारी एवं उसके अधिकारी को वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में किया गया है। यदि नागरिक यह पाते है कि NCRO पक्षपातपूर्ण ढंग से काम कर रहा है तो तो वोट वापसी प्रकिया का प्रयोग करके उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को यह पद देने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे। ]
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(7) NRCI फॉर्म की स्क्रूटिनी एवं सत्यापन :
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(7.1) रजिस्ट्रार NRCI फॉर्म में दी गयी जानकारियों को नत्थी करके नागरिकता रजिस्टर सूची का निर्माण करेगा, और इसे सार्वजनिक करेगा। जो सूची सार्वजनिक की जायेगी उसमें नागरिक के सिर्फ वोटर आई डी नंबर होंगे, आधार नंबर नहीं। किसी भी नागरिक का आधार नंबर सार्वजनिक नहीं किया जायेगा। सूची में व्यक्ति के रिश्तेदारों के नाम एवं उनके वोटर आई डी नंबर आदि को इस तरह समूहीकृत( ग्रुपिंग) किया जाएगा कि, व्यक्ति के रिश्तेदारों को आसानी से चिन्हित किया जा सके। यह सूची निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत हो सकेगी :
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(7.1.1) प्रमाणिक सूची : जिन नागरिको के रिश्तेदारों का मिलान हो चुका है, एवं उपलब्ध जानकारी पूर्ण एवं पर्याप्त है, सूची में उनके नाम के आगे प्रमाणित या सत्यापित या Verified चिन्हित किया जायेगा।
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(7.1.2) अप्रमाणिक सूची : जिन नागरिको ने गलत जानकारी दी है, या रजिस्ट्रार द्वारा मांगे जाने पर भी सही जानकारी नहीं दी है, या रजिस्ट्रार को प्रथम दृष्टया लगता है कि जानकारी पर्याप्त नहीं है, तो रजिस्ट्रार सूची में उन नागरिको के आगे “सत्यापित नहीं” या “Unverified” शब्द अंकित करेगा।
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[ टिप्पणी 3 : मान लीजिये कि, X ने अपने फॉर्म में अपने माता-पिता, भाई एवं पत्नी का वोटर आई डी नंबर / आधार नंबर दर्ज किया है, तो रजिस्ट्रार यह मिलान करेगा कि क्या X के भाई ने भी अपने फॉर्म में X के बारे में यही सूचना दी है। इस तरह फॉर्म में रिश्तेदारों के बारे में दी गयी सभी जानकारियों का आपस में मिलान करके प्रमाणिक श्रेणी बनायी जायेगी।]
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(7.2) जिन नागरिको के रिश्तेदारों का मिलान नहीं हुआ है, या उनके द्वारा दी गयी जानकारी अधूरी होने के कारण उनके नाम प्रमाणित सूची में आने से रह गए है, रजिस्ट्रार उन्हें नोटिस भेजेगा कि वे फिर से NRCI फॉर्म भरकर अपने पटवारी कार्यालय में जमा करे। नागरिक इस फॉर्म में अपने एवं अपने रिश्तेदारों के बारे में वे सूचनाएं भी दे सकता है, जो उसने पूर्व में नहीं दी थी।
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(8) यदि कोई नागरिक पाता है कि सार्वजनिक की गयी सूची में किसी नागरिक एवं उनके रिश्तेदारों के बारे में गलत जानकारी रखी गयी है, तो वह इसकी सूचना या शिकायत रजिस्ट्रार को दे सकता है। सूची में जिन नागरिको के नाम के सामने Unverified दर्ज किया गया है वे जिला कलेक्टर कार्यालय, तहसील कार्यालय या पटवारी कार्यालय में फिर से NRCI फॉर्म भरकर दे सकते है, ताकि उन्हें सत्यापित करके प्रमाणिक सूची में डाला जा सके।
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(9) अवैध आर्थिक विदेशीयों (illegal economic migrant) को चिन्हित करना :
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(9.1) प्रधानमंत्री दूरसंचार विभाग को आदेश करेंगे कि वह राष्ट्रीय रजिस्ट्रार को पिछले 2 वर्षों में बांग्लादेश से किये गए, और बांग्लादेश को किये गए सभी फ़ोन कॉल्स की सूची दे। इस विवरण का उपयोग करके राष्ट्रीय रजिस्ट्रार संदिग्धों की सूची बनाएगा।
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(9.2) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार बांग्लादेश में एजेंटों की नियुक्ति करेगा। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अपने एजेंटों से भारत में रह रहे संदिग्धों के बांग्लादेश में निवास कर रहे रक्त संबंधियों के ब्लड ग्रुप और डीएनए नमूनों की जानकारी जुटाने के लिए कहेगा। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एजेंटों से ऐसे दस्तावेज जुटाने के लिए भी कहेगा, जो संदिग्धों के बांग्लादेशी मूल का होना प्रमाणित करें।
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(9.3) कोई भी भारतीय नागरिक भारत में रह रहे अवैध आर्थिक विदेशी संदिग्धों की सूची राष्ट्रिय रजिस्ट्रार को निजी या सार्वजनिक रूप से दे सकता है, और उसे ये सूची संदेह के आधार पर घटते क्रम में बनाकर प्रस्तुत करनी होगी। यदि व्यक्ति द्वारा दी गयी जानकारी सही पायी जाती है, तो राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उस व्यक्ति की इच्छानुसार उसे निजी या सार्वजनिक रूप से पारितोषिक दे सकता है।
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(9.4) यदि कोई बांग्लादेशी या पाकिस्तानी यह दावा करता है कि अमुक संदिग्ध उसका रिश्तेदार है, और यदि वह सत्यता की जांच करने के लिए अपना डीएनए सेम्पल देता है, और यदि डीएनए मिलान द्वारा यह सिद्ध हो जाता है कि, भारत में अवैध रूप से रह रहा अमुक विदेशी निवासी उसका रिश्तेदार है, तो राष्ट्रिय रजिस्ट्रार डीएनए मिलान के लिए रक्त नमूना देने वाले व्यक्ति को 1 लाख रूपये का पारितोषिक देगा।
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(9.5) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार संदिग्धों के नाम, चित्र और अन्य जानकारी सरकारी वेबसाइट पर रखेगा, और उनके बांग्लादेशी रिश्तेदारों के नाम और अन्य जानकारी देने के लिए सभी से निवेदन करेगा।
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(9.6) उपरोक्त प्रक्रिया का पालन करके राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उन संदिग्धों की सूची तैयार करेगा, जिनके अवैध विदेशी निवासी होने पर वह आश्वस्त है।
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(10) जूरी द्वारा सुनवाई ; अवैध विदेशी निवासी एवं प्रताड़ित शरणार्थी का निर्णयन
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(10.1) प्रत्येक संदिग्ध की सुनवाई के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रार 30 से 55 वर्ष की आयु के मध्य के 100 मतदाताओं को 5 विभिन्न जिलो से चुनेगा । प्रथम जिला वह होगा जो उस जिले से सबसे निकट है, जहाँ से संदिग्ध पकड़ा गया है और जहाँ बांग्लादेशी जनसँख्या 10% से कम भी है। किसी जिले में अवैध विदेशी निवासियों की संख्या का प्रतिशत राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अपनी जानकारी के आधार पर तय करेगा । अन्य 4 जिलें प्रथम जिले के निकटतम 4 जिलों में से होंगे और प्रत्येक जिले में अवैध आर्थिक विदेशी निवासीयों की जनसँख्या 10% से कम होनी चाहिए ।
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(10.1.1) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार हर जिले से यादृच्छिक रूप से ( लॉटरी द्वारा ) 20 मतदाताओं को चुनेगा। मतदाताओ को चुनने के लिए मतदाता सूचियों का इस्तेमाल किया जाएगा।
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(10.1.2) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार जिलों की संख्या 10 तक बढ़ा सकता है, और ऊपर दी गयी प्रक्रिया का प्रयोग करके प्रत्येक जिले से 20 मतदाताओं को क्रमरहित तरीके से चुन सकता है। जिलों की संख्या के संबंध में अंतिम निर्णय राष्ट्रीय रजिस्ट्रार का होगा।
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(10.2) आरोपी जूरी सदस्यों को बताएगा कि, क्या वह भारत में पैदा हुआ था या फिर अन्य किस देश में पैदा हुआ था। यदि वह भारत में पैदा हुआ था तो किस शहर या गाँव में पैदा हुआ था, तथा उसकी स्कूली शिक्षा कहाँ हुयी थी। वह अपने माता-पिता, भाई-बहन, सगे संबंधियों इत्यादि के बारे में भी विवरण देगा। यदि वह भारत के बाहर पैदा हुआ था, तो फिर वह भारत में रहने क्यों और कब आया था।
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(10.3) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के अधिकारी भी जूरी सदस्यों को यह जानकारी देंगे कि क्या अमुक व्यक्ति भारत में या भारत के बाहर पैदा हुआ था, और क्या वह एक अवैध आर्थिक विदेशी निवासी है या फिर वह एक प्रताड़ित शरणार्थी है।
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(10.4) यदि 50 से अधिक जूरी सदस्य आरोपी का सार्वजनिक रूप से पॉलीग्राफ टेस्ट, ब्रैनमैपिंग और / या सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने की सलाह देते है, तब ये टेस्ट लिए जायेंगे। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना प्रश्न सुझाएगा और प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक प्रश्न को 0-100 के बीच अंक देगा। सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रश्नों को पहले पुछा जायेगा। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सार्वजनिक नार्को-टेस्ट और ब्रेन-मैपिंग के लिए डॉक्टर का चयन करेगा। किन्तु यदि 67 से अधिक जूरी सदस्य किसी अन्य डॉक्टर को स्वीकृत करते है, तो उसी डॉक्टर को चुना जाएगा, जिसे जूरी सदस्यों ने स्वीकृत किया है। चुने हुए डॉक्टर के पास राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बताई गयी डिग्रीयां होनी चाहिए ।
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(10.5) सभी पक्षों को सुनने के बाद, प्रत्येक जूरी सदस्य अपनी राय बताएगा कि उसके विचार में आरोपी एक प्रमाणित भारतीय नागरिक है, या अवैध आर्थिक विदेशी निवासी है या फिर वह एक प्रताड़ित शरणार्थी है । प्रत्येक जूरी सदस्य यह भी बतायेगा कि यदि आरोपी एक अवैध आर्थिक विदेशी निवासी है तो भारत में अनुचित तरीके से प्रवेश करने के लिए उसे कितने वर्षों के लिए कारावास होना चाहिए, और कितना जुर्माना उस पर लगाना चाहिए, और यदि आरोपी एक प्रताड़ित शरणार्थी या भारतीय नागरिक है, तो उसे हुयी असुविधा के लिए मुआवजे की राशि कितनी होनी चाहिए। मुआवजे की राशि न्यूनतम 0 से अधिकतम 1,00,000 के मध्य होगी।
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(11) दंड एव कारावास का निर्णयन :
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(11.1) यदि 67% से अधिक जूरी सदस्य आरोपी को अवैध आर्थिक विदेशी निवासी घोषित कर देते हैं तो राष्ट्रीय रजिस्ट्रार प्रत्येक जूरी सदस्य द्वारा सुझाई गयी कारावास महीनो की मध्यस्थ संख्या को चुनेगा और उसे उतने महीनों के लिए जेल में डाल देगा। कारावास की अधिकतम अवधि 3 वर्ष होगी। रिहा होने पर राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उसे उसके देश डिपोर्ट / डिटेंशन सेंटर भेज देगा।
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(11.2) यदि 50% से अधिक लेकिन 67% से कम जूरी सदस्य राय देते हैं कि वह अवैध आर्थिक विदेशी निवासी है, तब उसे कारावास नहीं होगा एवं उसे भारत में रहने दिया जायेगा। किन्तु उसके रहने का जिला राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा तय किया जाएगा।
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(11.3) यदि 50% या उससे कम जूरी सदस्य तय करते हैं कि वह अवैध आर्थिक विदेशी है, तो उसे कोई सजा नहीं होगी।
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(11.4) यदि 50% से अधिक जूरी सदस्य उसे भारतीय नागरिक घोषित करते हैं, तब उसके विरुद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं होगी और उसके विरुद्ध कोई प्रतिबंध लागू नहीं होंगे, तथा राष्ट्रीय रजिस्ट्रार ज्यूरी सदस्यों द्वारा सुझायी गयी राशियों की मध्यस्थ राशि के बराबर मुआवज़ा देगा।
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(11.5) यदि 50% से अधिक जूरी सदस्य उसे गैर-भारतीय नागरिक पर एक प्रताड़ित शरणार्थी घोषित करते हैं, तब राष्ट्रिय रजिस्ट्रार उसे NRCI सूची में शरणार्थी के रूप में वर्गीकृत करके शामिल कर लेगा और वह भारत में एक निवासी के रूप में राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बताये गए किसी जिले में रह सकता है।
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. [ टिप्पणी 4 : अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न . 4a. क्या मुझे अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी ? . आप नागरिक नहीं हो यह साबित करने का भार राष्ट्रिय रजिस्ट्रार पर होगा, और इस बारे में अंतिम फैसला जूरी करेगी। यदि आपकी नागरिकता के बारे में कोई शिकायत आती है, या कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि आप भारत के नागरिक नहीं है, तो राष्ट्रिय रजिस्ट्रार को नागरिको की जूरी के सामने इसे साबित करना पड़ेगा। जब तक रजिस्ट्रार जूरी के सामने यह साबित नही करता तब तक आपका नाम NRCI में बना रहेगा। . 4b. नागरिकता रजिस्टर में से मेरा नाम हटाने का अंतिम फैसला कौन करेगा ? . रजिस्ट्रार जूरी के सामने जुटाए गए साक्ष्य रखेगा, और आपको भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। अंतिम फैसला नागरिको की जूरी करेगी, और इसकी अपील हाईकोर्ट जूरी और सुप्रीम कोर्ट जूरी में की जा सकेगी। ] .
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(12) याचिकाएँ :
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(12.1) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार या अपराधी, जूरी सदस्य के फैसले की अपील कर सकते है। यह अपील जिस जूरी मंडल के सामने की जायेगी उस जूरी में प्राथमिक जूरी मंडल के दोगुने जिलो से जूरी मंडल चुना जाएगा, तथा प्रत्येक जिले में से राष्ट्रीय रजिस्ट्रार 20 जूरी सदस्य क्रमरहित तरीके से चुनेगा।
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(12.2) द्वितीयक जूरी के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जा सकेगी।
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(12.3) कारावास / सज़ा में कटौती : राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के अधिकारी अपराधी से सगे-संबंधियों के नाम और पते बताने के लिए कहेंगे। यदि वह अपने सगे संबंधियों या अन्य अवैध आर्थिक प्रवासीयों के बारे में जानकारी एवं सबूत दे देता है तो राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उसकी सजा में कटौती करने की अनुशंषा कर सकता है। यदि जूरी अनुमति दे देती है तो सजा में कटौती कर दी जायेगी।
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(13) शरणार्थियों का भार पूरे भारत में विभाजित करने के लिए जिलो का निर्धारण :
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राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उन जिलो की सूची तैयार करेगा जहाँ शरणार्थियों की जनसँख्या कम है। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सीमावर्ती जिलो एवं ऐसे जिलो को जहाँ आर्थिक अवसर कम है, सूची में से हटा देगा। शरणार्थियों को उन जिलो में ही निवास करना होगा जिन्हें सूची में दर्ज किया गया है।
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[ टिप्पणी 5 : इस तरह असम, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर पूर्व राज्य, मुंबई, गुडगाँव, नॉएडा, आदि इलाको के जिलों के नाम इस सूची में नहीं आयेंगे। क्योंकि ये क्षेत्र पहले ही अपने हिस्से के शरणार्थियों को शरण दे चुके है। सीमावर्ती जिले सुरक्षा की दृष्टी से संवेदनशील होते है, तथा कम आर्थिक अवसरो वाले शहर शरणार्थियों को जीवन यापन के लिए पर्याप्त अवसर नही दे सकेंगे।
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(14) वोट वापसी : राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर अधिकारी (NCRO)
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी नागरिक जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से NCRO बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ।
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(14.2) कोई भी नागरिक किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर NCRO के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(14.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(14.4) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(14.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
रेंज वोटिंग – प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(15) जनता की आवाज
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा 15.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय मंट 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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--------- NRCI ड्राफ्ट का समापन---------