केन्द्रीय मंत्रियो पर वोट वापसी लागू करने का प्रस्ताव

(Vote Vapsi over Central ministers)

इस कानून का सार :

यह कानून प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के लिए लिखा गया है। इस कानून को लोकसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। #RRP08

यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :

“प्रधानमंत्री जी, कृपया केन्द्रीय मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के आदेश जारी करें - #VvpCentralMinister

====क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====

टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।

(01)

यह कानून गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री एवं नाभिकीय ऊर्जा मंत्री पर लागू नहीं होगा।

(02)

इस कानून में "मंत्री" शब्द से आशय है, धारा (1) दिए गए 5 मंत्रालयों के अतिरिक्त केंद्र सरकार के अधीन आने वाले सभी मंत्रालयों के केन्द्रीय मंत्री।

(03)

इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। । धारा (1) में बताये गए 5 मंत्रियो को छोड़ते हुए केन्द्रीय सरकार के अधीन सभी केन्द्रीय मंत्री इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे। तब यदि आप किसी केन्द्रीय मंत्री के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।

(04) मंत्री बनने के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा आवेदन करना :

30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि केन्द्रीय मंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, और एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।

(05) मतदाताओ द्वारा स्वीकृति दर्ज करना :

(5.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी सार्वजनिक करेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।

(5.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी

(5.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।

(5.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।

[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।

रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]

(06) केन्द्रीय मंत्रीयों की नियुक्ति एवं निष्कासन :

यदि किसी मंत्रालय के मंत्री पद के किसी प्रत्याशी को 30 करोड़ से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां अमुक मंत्रालय के पदासीन मंत्री से 1 करोड़ अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री मौजूदा मंत्री को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले व्यक्ति को अमुक मंत्रालय में मंत्री नियुक्त कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। मंत्री की नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा।

(07) जनता की आवाज :

(7.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।

(7.2) यदि कोई मतदाता धारा (7.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।

======ड्राफ्ट का समापन=====