Pawan Jury BhilwaraRj
Sat Oct 05 2024 10:17:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Aditya Prakash Sharma:
लोकसभा चुनाव 2024 में VVPAT symbol loading की मीटिंग का अनुभव -
लोकसभा चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट जो मीटिंग रही, वो रही चुनाव आयोग के सिंबल लोडिंग के समय की मीटिंग । उस मीटिंग में देखा कि वहां पर BEL का एक इंजीनियर आया था । उसके पास में एक appratus था जिसका नाम था सिंबल लोडिंग यूनिट, तो मैंने उस इंजीनियर से पूछा कि इसमें सिंबल जो लोड करते हैं तो वह कहां से करते हैं तो उसने बताया कि उसके उसको चुनाव आयोग के द्वारा एक लैपटॉप मिलता है और उस लैपटॉप में एक सॉफ्टवेयर होता है उस सॉफ्टवेयर में फॉर्म 7 यानी फाइनल उम्मीदवारों की एंट्री करने पर एक फाइल जनरेट होती है जिसे सिंबल लोडिंग फाइल कहते हैं । इस फ़ाइल को सिंबल लोडिंग यूनिट में केबल द्वारा डाउनलोड कर दिया जाता है और फिर वो इंजीनयर चुनाव आयोग के सेंटर पर जहा सभी vvpat रखी होती है, वहां इस सिंबल लोडिंग यूनिट को लाकर के एक-एक वीवीपेट में वह सिंबल लोडिंग करना शुरू करता है । उस इंजीनियर के बताए अनुसार यह लैपटॉप से जो सिंबल लोडिंग फाइल जेनरेशन का काम होता है यह उसके रिटर्निंग अफसर के ऑफिस में होता है, तो उसको मैंने उससे पूछा कि भाई है वो लैपटॉप जो है हमको दिखा सकते हो क्या, तो उसने कहा कि नही, हम यहां सिर्फ ये सिंबल लोडिंग यूनिट ही लाते है । फिर वो इंजीनियर सिंबल लोडिंग यूनिट से एक एक करके vvpat को कनेक्ट करने शुरू करता है और प्रत्येक VVPAT कनेक्ट होते ही हो वह आटोमेटिक खुद को चेक करना शुरू करता था । मैने देखा कि VVPAT सेल्फ एवोल्यूशन के दौरान बहुत सी पर्चियां जेनरेट कर रहा था । तो मैंने उन पर्चियों में देखा की इस VVPAT में कई सेंसर लगे हुए हैं और वो प्रत्येक सेंसर को चेक करता है फिर वह सेंसर को चेक करने के बाद में उसकी स्लिप को जनरेट करता है कि अमुक सेंसर ओके है या नहीं है फिर वह टोटल जितने भी जो सेंसर होते हैं उनके उनके बारे में एक फाइनल जेनरेशन निकाल करके दे देता है, एक पर्ची के रूप में । और यह प्रक्रिया कई बार होता है, यदि कोई सेंसर काम नहीं करता है तो vvpat फिर वापस से रिबूट होता है, उसके बाद आटोमेटिक वो सिंबल ले लेता है । इस दौरान जितनी भी जो पर्चियां निकलती है, तो सीक्रेसी का लेवल ये है कि चुनाव आयोग का, कि, उन पर्चियों को सीधे कचरे के डिब्बे में नहीं डालते, पहले उनको पूरी तरह स्क्रैप करते हैं, बिल्कुल पूरी तरह से बारीक कटाई कर देते है, एक एक पर्ची की, एक मशीन रहती है स्क्रेपर मशीन, उसका उपयोग करते है । तो किस लेवल पर काम कर रहे हैं, की किसी के पास कोई इनफार्मेशन नहीं होना चाहिए की, इस मशीन में कौन कौन से सेंसर है, किसी को पता नहीं लगना चाहिए ।
मैने वहा खुला हुआ VVPAT भी देखा तो उसमें एक जो नीले कलर का जो हुड है उसके ऊपर एक ब्लैक ग्लास वहां पर और फिर अंदर जो प्रिंटर की कवरिंग है उसके ऊपर भी एक ब्लैक ग्लास है तो वह काफी ज्यादा ब्लैक है ।
इंजीनियर से और अधिक पूछने पर उसने कहा कि उसको इससे अधिक नही पता ।
तो ब्लैक ग्लास के वजह से EVM में धांधली होने की संभावना है । इसलिए हमारी मांग है वोटर्स को बैलट पेपर का ऑप्शन भी दिया जाए ।
सभी चुनाव लड़ने वाले साथियो को इस तरह की मीटिंग में जरूर जाना चहिये ।
नोट - ये सभी फोटो उस मीटिंग के दौरान मैंने अपने फोन से लिये है ।