Posts for 2021-02


Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Feb 01 2021 17:30:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जितना बिक सकता है मोदी साहेब विदेशियों को बेच देंगे । जब वे मोदी साहेब की छवि को सूंत लेंगे तो पैड मीडिया का इस्तेमाल करके नया पी एम इंस्टॉल कर देंगे ।
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और बाक़ी का माल (देश के प्राकृतिक संसाधन एवं राष्ट्रीय सम्पत्तियाँ) नया प्रधानमंत्री बेचेगा !!!
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2001 से निरंतर यही चक्र चल रहा है।
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समाधान : वोट वापसी पासबुक बिना यह प्रक्रिया रूकने वाली नही है ।
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#VoteVapsiPassbook

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Feb 04 2021 16:02:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Barkha Jain:

*बस, कुछ थोडे ही दिनो में सिनेमा प्रोजेक्टर व टी वी भी नहीं होंगे , कारण जापानियों के*
*द्वारा बनाया नया मोबाईल आने वाले हैं। देखो। अब देखिए, नई टेक्नोलॉजी का अदभुत कमाल

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 05 2021 06:34:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

5 फ़रवरी ; नागरिक कर्तव्य दिवस
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यदि आप पीएम / सीएम से कोई माँग कर रहे है तो अमुक माँग सीधे पहुँचाने के लिए मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री को चिट्ठी भेजे।
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#VoteVapsiPassbook
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 05 2021 17:30:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

RSS कार्यकर्ताओं का बजट-2020 अभिनेता गोविंदा ने सिर्फ 50 सेकंड में समझाया!!!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Feb 06 2021 15:07:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

हम कार्यकर्ता चुनाव क्यों लड़ते हैं ❓

3 मिनिट 17 सैंकड का विडियो |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Feb 09 2021 15:37:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि RSS के कार्यकर्ता चाहे तो मोदी साहेब से कहकर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को संसद द्वारा निरस्त कर सकते है। पर RSS के सभी कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के समर्थन में है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Feb 16 2021 12:46:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

किसानो को उपज का उचित न्यूनतम मूल्य दिलवाने के लिए कानूनी ड्राफ्ट
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अपूर्ण ( Incomplete )
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इस क़ानून का सार :
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(1) यह क़ानून किसानो को अधिकृत रूप से संगठित करके किसानो में एकता लाता है।
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(2) यह क़ानून किसानो को निजी बाज़ार (private/ open market) में उचित न्यूनतम ख़रीद मूल्य (MBP = Minimum Buying Price) दिलाने के बारे में है।
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(3) यह क़ानून सरकार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP = Minimum Support Price) का भुगतान करने को बाध्यकारी नही बनाता है।
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(4) इस क़ानून के लागू होने से सरकार पर रू 300 करोड़ सालाना से अधिक का भार नही पड़ेगा।
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प्रधानमंत्री इस क़ानून को संसद से साधारण बहुमत द्वारा पारित करके गेजेट में छाप सकते है। मुख्यमंत्री भी विधानसभा से पारित करके यह क़ानून अपने राज्य में लागू कर सकते है।
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#RrgMinBuyingPrice , #RrgMbp, #Rrg30
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “प्रधानमंत्री जी, कृपया न्यूनतम खरीद मूल्य का क़ानून गेजेट में छापें #RrgMbp
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----ड्राफ्ट का प्रारम्भ----
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(01) यदि आप भारत के मतदाता है और कृषि भूमि के स्वामी है तो इस क़ानून के गेजेट में आने के बाद आपको एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब आप कृषि उपज का न्यूनतम खरीद मूल्य (MBP = Minimum Buying Price) निर्धारित करने वाली किसान एकता कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे।
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(02) राज्य राजस्व सचिव कृषि भूमि का स्वामित्व रखने वाले किसान मतदाताओ की एक अलग सूची तैयार करेंगे, ताकि प्रत्येक किसान की स्वीकृति का भार निर्धारित किया जा सके। कृषि भूमि के स्वामित्व एवं स्वीकृति के भार का अनुपात निम्नानुसार होगा :
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(a) 0.5 एकड़ से 01 एकड़ : 1 स्वीकृति
(b) 02 – 05 एकड़ : 2 स्वीकृति
(c) 05 – 10 एकड़ : 3 स्वीकृति
(d) 10 – 20 एकड़ : 4 स्वीकृति
(e) 20 – 30 एकड़ : 5 स्वीकृति
(f) 30 – 40 एकड़ : 6 स्वीकृति
(g) 40 – 50 एकड़ : 7 स्वीकृति
(h) 50 – 60 एकड़ : 8 स्वीकृति
(i) 60 – 70 एकड़ : 9 स्वीकृति
(j) 70 - अधिक : 10 स्वीकृति
(k) 0.5 एकड़ से कम भूमि होने पर शून्य स्वीकृति
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(03) कृषि उपज का मूल्य निर्धारित करने वाली कमेटियों का गठन :
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(3.1) जिला किसान एकता कमेटी : प्रत्येक जिला किसान एकता कमेटी में 5 सदस्य होंगे, जो कि जिले के किसान मतदाताओ द्वारा सीधे अनुमोदित किये जायेंगे।
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(3.2) राज्य किसान एकता कमेटी : प्रत्येक राज्य में एक 5 सदस्यीय राज्य किसान एकता कमेटी होगी, जिसके सदस्य राज्य के किसान मतदाताओं द्वारा सीधे अनुमोदित होंगे।
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(3.3) केन्द्रीय स्तर पर एक राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी होगी जिसमें 5 सदस्य होंगे और वे देश के किसान मतदाताओं द्वारा सीधे अनुमोदित किये जायेंगे।
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(04) किसान एकता कमेटी का सदस्य बनने के लिए आवेदन :
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निचे दी गयी अर्हताएं पूरी करने वाला कोई भी किसान मतदाता यदि किसान एकता कमेटी का सदस्य बनना चाहता है, तो वह कलेक्टर कार्यालय में इस आशय का एक ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है :
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(4.1) यदि वह किसी भी सरकारी या अर्ध सरकारी संस्थान में किसी पद पर न हो
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(4.2) यदि उसने 25 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो
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कलेक्टर विधायक के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को जिला पंचायत / मुख्यमंत्री / पीएम की वेबसाईट पर स्कैन करके सार्वजनिक रूप से रखेगा। आवेदन के साथ जमा किया गया यह शुल्य लौटाया नहीं जाएगा।
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(05) किसान मतदाता द्वारा प्रत्याशियों को स्वीकृत करने की प्रक्रिया :
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(5.1) कोई भी किसान मतदाता किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसान एकता कमेटी के किसी भी सदस्य प्रत्याशी के समर्थन में अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेगा।
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(5.2) पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में किसान मतदाता की स्वीकृति दर्ज करके रसीद देगा।
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(5.3) पटवारी मतदाताओं की स्वीकृति को प्रत्याशीयों के नाम एवं किसान मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला पंचायत / मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर भी रखेगा।
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(5.4) किसान मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 10 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(5.5) स्वीकृति दर्ज करने के लिए किसान मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(5.6) यदि कोई किसान मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(5.7) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(06) किसान एकता कमेटियों में सदस्यों की नियुक्ति एवं प्रतिस्थापन :
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(6.1) जिला किसान एकता कमेटी :
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(6.1.1) सदस्यों की प्रारम्भिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 20% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि कमेटी में पद रिक्त है, तो अमुक प्रत्याशी सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.1.2) सदस्यों का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 20% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि ये स्वीकृतियां किसी पदासीन सदस्य से 3% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन सदस्य की जगह ले लेगा, और सबसे कम स्वीकृतियों वाला सदस्य निष्कासित हो जाएगा।
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(6.1.3) अध्यक्ष की प्रारंभिक नियुक्ति : यदि जिले की किसी प्रत्याशी को 25% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो अमुक प्रत्याशी अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.1.4) अध्यक्ष का प्रतिस्थापन : यदि जिले के किसी प्रत्याशी को 25% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अध्यक्ष से 1% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन अध्यक्ष की जगह ले लेगा।
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(6.1.5) जिला किसान एकता कमेटी के सदस्य को 40,000 रू मासिक एवं अध्यक्ष को 50,000 रू मासिक वेतन राज्य सरकार की और से मिलेगा।
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(6.1.6) कोई भी व्यक्ति अपने जीवन काल में जिला किसान एकता कमेटी के सदस्य एवं अध्यक्ष (सदस्य एवं अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि को जोड़ते हुए) के रूप में 60 माह से अधिक पद पर नहीं रह सकेगा।
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(6.2) राज्य किसान एकता कमेटी
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(6.2.1) सदस्यों की प्रारंभिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 10% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि कमेटी में पद रिक्त है, तो अमुक प्रत्याशी सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.2.2) सदस्यों का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 10% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है, और यदि ये स्वीकृतियां किसी पदासीन सदस्य से 2% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन सदस्य की जगह ले लेगा, और सबसे कम स्वीकृतियों वाला सदस्य निष्कासित हो जाएगा।
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(6.2.3) अध्यक्ष की प्रारंभिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 13% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो अमुक प्रत्याशी अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.2.4) अध्यक्ष का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 25% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अध्यक्ष से 1% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन अध्यक्ष की जगह ले लेगा।
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(6.2.5) वेतन – राज्य किसान एकता कमेटी के सदस्य को 50,000 रू मासिक एवं अध्यक्ष को 60,000 रू मासिक वेतन राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा।
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(6.2.6) कोई भी व्यक्ति अपने जीवन काल में राज्य किसान एकता कमेटी के सदस्य एवं अध्यक्ष (सदस्य एवं अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि को जोड़ते हुए) के रूप में 60 माह से अधिक पद पर नहीं रह सकेगा।
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(6.3) राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी :
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(6.3.1) सदस्यों की प्रारम्भिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 5% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि कमेटी में पद रिक्त है, तो अमुक प्रत्याशी सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.3.2) सदस्यों का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 5% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है, और यदि ये स्वीकृतियां किसी पदासीन सदस्य से 1% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन सदस्य की जगह ले लेगा, और सबसे कम स्वीकृतियों वाला सदस्य निष्कासित हो जाएगा।
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(6.3.3) अध्यक्ष की प्रारंभिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 7% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है, तो अमुक प्रत्याशी अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.3.4) अध्यक्ष का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 7% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अध्यक्ष से 1% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन अध्यक्ष की जगह ले लेगा।
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(6.3.5) वेतन – राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी के सदस्य को 60,000 रू मासिक एवं अध्यक्ष को 75,000 रू मासिक वेतन केंद्र सरकार द्वारा दिया जाएगा।
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(6.3.6) कोई भी व्यक्ति अपने जीवन काल में राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी के सदस्य एवं अध्यक्ष (सदस्य एवं अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि को जोड़ते हुए) के रूप में 60 माह से अधिक पद पर नहीं रह सकेगा।
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(7) न्यूनतम खरीद मूल्य का निर्धारण :
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(7.1) किसान एकता कमेटियां विभिन्न कृषि उपजो (अनाज, दालें, सब्जियां आदि) की जिंसो का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करने के लिए बैठके करेगी। प्रत्येक सदस्य द्वारा प्रत्येक जिन्स के लिए न्यूनतम खरीद मूल्य का प्रस्ताव किया जाएगा, और प्रत्येक सदस्य द्वारा सुझाए गए मूल्यों औसत को नहीं बल्कि के मध्यमान (not the Average, but the median) को स्वीकृत मूल्य माना जाएगा।
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(7.2) कृषि उपजो का मूल्य तय करने के लिए जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी के सदस्यों की बैठके महीने की प्रत्येक 10 तारीख एवं 25 तारीख को होगी। कमेटी का अध्यक्ष या सदस्यों का बहुमत चाहे तो अन्य दिन भी बैठक बुला सकता है। बैठके सार्वजनिक प्रकृति की होगी, और सभी बैठको के मिनिट्स सार्वजनिक किये जायेंगे।
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(7.3) जिला किसान एकता कमेटी अपने जिले में एवं राज्य किसान एकता कमेटी पूरे राज्य के लिए कृषि उपज (अनाज, दालें, सब्जियां आदि) की जिंसो का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करके राज्य कृषि मंत्री को भेजेगी। जिला एवं राज्य किसान एकता कमेटीयों द्वारा तय ये मूल्य परामर्शकारी होंगे एवं राज्य कृषि मंत्री चाहे तो इसमें संशोधन कर सकते है। राज्य कृषि मंत्री द्वारा निर्धारित मूल्य को ही ‘अंतिम खरीद मूल्य’ माना जाएगा।
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(7.4) राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी पूर देश के लिए कृषि उपज (अनाज, दालें, सब्जियां आदि) की जिंसो का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करके केन्द्रीय कृषि मंत्री को भेजेगी। राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी द्वारा तय किये गए ये मूल्य परामर्शकारी होंगे और केन्द्रीय कृषि मंत्री चाहे तो इसमें संशोधन कर सकते है।
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(7.5) राज्य कृषि मंत्री यह तय करेगा कि वह केन्द्रीय कृषि मंत्री द्वारा अनुमोदित मूल्यों को न्यूनतम खरीद मूल्य के रूप में स्वीकृत करना चाहता है या नहीं। किसी राज्य में न्यूनतम खरीद मूल्य का अंतिम फैसला राज्य कृषि मंत्री ही करेगा।
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(7.6) राज्य कृषि मंत्री द्वारा निर्धारित न्यूनतम खरीद मूल्य सिर्फ निजी व्यक्तियों एवं निजी संस्थाओ पर लागू होगा, एवं यह मूल्य सरकारी संस्थाओ पर लागू नहीं होगा। सरकार चाहे तो किसानो से कृषि उपज ख़रीदने के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) तय कर सकती है।
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(7.7) न्यूनतम खरीद मूल्य का नियमन मंडी के भीतर एवं बाहर समान रूप से लागू होगा।
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(8) न्यूनतम खरीद मूल्य के क्रय-विक्रय का नियमन :
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(8.1) यदि कोई व्यक्ति, गैर सरकारी कम्पनी, गैर सरकारी संस्था, गैर लाभकारी निकाय, गैर सरकारी इकाई आदि राज्य कृषि मंत्री द्वारा निर्धारित किये गए ‘न्यूनतम खरीद मूल्य’ से कम कीमत में कृषि उपज की जिंसो को खरीदते पाया जाता है तो क्रेता का यह कृत्य क्रय-विक्रय की राशि का 10 गुना आर्थिक दंड एवं 3 महीने तक के कारावास से दंडनीय होगा।
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(8.2) धारा (8.1) में दिया गया कारावासीय प्रावधान सिर्फ तब लागू होगा जब राज्य कृषि मंत्री द्वारा इसे अनुमोदित किया गया हो। मंत्री द्वारा जारी किया गया यह अनुमोदन 30 दिवस पश्चात् स्वत: अप्रभावी हो जाएगा। राज्य कृषि मंत्री चाहे तो कारावासीय प्रावधान को लागू करने के आदेश फिर से जारी कर सकते है।
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(8.3) कारावासीय प्रावधान के सम्बन्ध में राज्य कृषि मंत्री द्वारा किये गए अनुमोदन को यदि किसी जिले की जिला किसान एकता कमेटी के कम से कम 3 या 3 से अधिक किसान प्रतिनिधि निरस्त कर देते है तो राज्य कृषि मंत्री द्वारा अनुमोदित कारावसीय प्रावधान अमुक जिले में लागू नहीं होंगे।
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टिप्पणी 1 : यदि किसान मतदाता किसान एकता कमेटी द्वारा लिए गए किसी फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वे वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके उन्हें बदल सकते है।
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टिप्पणी 2 : यदि किसान मतदाता राज्य कृषि मंत्री द्वारा लिए गए किसी फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वे राज्य कृषि मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के लिए इस कानून की धारा (10) का इस्तेमाल करके प्रस्तावित वोट वापसी मंत्री के क़ानून #VvpStateMinister में दी गयी धाराएं जुड़वाँ सकते है, ताकि वे वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके कृषि राज्य मंत्री को बदल सके।
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टिप्पणी 3 : किसान इस कानून की धारा (10) का इस्तेमाल करके प्रस्तावित वोट वापसी सीएम कानून #VvpCM एवं वोट वापसी पीएम #VvpPM क़ानून की धाराएं भी इस क़ानून में जुड़वाँ सकते है, ताकि किसान मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके बदल सके।
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(8.4) प्रति व्यक्ति छूट : प्रत्येक व्यक्ति को सालाना 200 किलोग्राम कृषि उपज जिंसो तक का निजी भण्डारण एवं प्रति व्यक्ति 1000 किलोग्राम सालाना की खरीद पर छूट रहेगी, और उपरोक्त सीमा के अंतर्गत क्रय-विक्रय-भण्डारण पर यह कानून लागू नहीं होगा। परिवार में यदि अनेक सदस्य है तो सभी सदस्यों को प्रति व्यक्ति के हिसाब से छूट प्राप्त होगी।
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(8.5) न्यूनतम ख़रीद मूल्य के क्रय-विक्रय व्यवहारों में अन्य सम्बंधित कर जैसे - मंडी कर, सेस आदि चुकाने का भार क्रेता पर रहेगा।
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(09) किसान एकता कमेटियों में कृषि व्यापारियों का प्रतिनिधित्व :
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(9.1) प्रत्येक जिला किसान एकता कमेटी, राज्य किसान एकता कमेटी एवं राष्ट्रिय किसान एकता कमेटी में 2 अतिरिक्त सदस्य होंगे जो कृषि व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करेंगे। कृषि व्यापारियों के प्रतिनिधियों के पास कमेटी में मताधिकार नहीं होंगे, किन्तु वे व्यापारी वर्ग एवं किसानो के मध्य तालमेल बनाने के लिए कमेटी के समक्ष कृषि व्यापारियों की और से सुझाए गए प्रस्ताव रख सकते है।
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(9.2) राज्य कृषि सचिव कृषि व्यापारियों की एक अलग मतदाता सूची तैयार करेंगे ताकि प्रत्येक कृषि व्यापारी की स्वीकृति का भार निर्धारित किया जा सके। कृषि व्यापारी द्वारा कृषि उपज का सालाना खरीद के अनुपात में मत का भार निम्नानुसार होगा :
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(a) 5 से 10 लाख रू तक की सालाना खरीद पर : 1 स्वीकृति
(b) 10 से 50 लाख रू तक की सालाना खरीद पर : 2 स्वीकृति
(c) 50 से 1 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 3 स्वीकृति
(d) 1 से 5 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 4 स्वीकृति
(e) 5 से 10 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 5 स्वीकृति
(f) 10 से 20 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 6 स्वीकृति
(g) 20 से 30 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 7 स्वीकृति
(h) 30 से 40 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 8 स्वीकृति
(i) 40 से 50 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 9 स्वीकृति
(j) 50 करोड़ रू से अधिक की सालाना खरीद पर : 10 स्वीकृति
(k) 5 लाख सालाना से कम ख़रीद पर : शून्य स्वीकृति
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(9.3) व्यापारी प्रतिनिधि के लिए आवेदन : कोई भी कृषि व्यापारी यदि मतदाता किसान एकता कमेटी में व्यापारी प्रतिनिधि बनना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में इस आशय का एक ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर विधायक के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को जिला / मुख्यमंत्री / पीएम की वेबसाईट पर स्कैन करके सार्वजनिक रूप से रखेगा।
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(9.4) स्वीकृति दर्ज करना : कोई भी व्यापारी वर्ग का मतदाता किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर व्यापारी प्रतिनिधि के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेगा।
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(9.5) व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधियों की नियुक्ति : नियुक्ति एवं निष्कासन की प्रक्रिया ठीक वैसी ही रहेगी जैसा धारा (6) में बताया गया है। अंतर यह रहेगा कि किसान एकता कमेटियों के सदस्यों के लिए किसान मतदाता स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे जबकि कृषि व्यापारी प्रतिनिधियों को स्वीकृति कृषि व्यापारी मतदाता देंगे।
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(9.5.1) जिला किसान एकता कमेटी में कृषि व्यापारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एवं निष्कासन की प्रक्रिया के लिए धारा (6.1.1) एवं धारा (6.1.2) देखें।
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(9.5.2) राज्य किसान एकता कमेटी में कृषि व्यापारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एवं निष्कासन की प्रक्रिया के लिए धारा (6.2.1) एवं धारा (6.2.2) देखें।
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(9.5.3) राष्ट्रिय किसान एकता कमेटी में कृषि व्यापारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एवं निष्कासन की प्रक्रिया के लिए धारा (6.3.1) एवं धारा (6.3.2) देखें।
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(9.6) वेतन : कृषि व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधियों का वेतन किसान एकता कमेटियों की सदस्यों के समान ही रहेगा ।
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(10) जनता की आवाज :
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(10.1) यदि कोई किसान मतदाता या कोई भी मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है, या किसी भी सम्बन्ध में कोई सुझाव, मांग प्रस्तुत करना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(10.2) यदि कोई किसान मतदाता या कोई भी मतदाता मतदाता धारा 10.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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----ड्राफ्ट की समाप्ति------

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 19 2021 19:44:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

एक समय की बात है -- जब 2011 में मोदी साहेब ने PM से मांग की थी कि किसानो को MSP मिलना सुनिश्चित करने के लिए क़ानून पास करें !!!
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मोदी साहेब के अंधभगतो तर्क है कि -- जब कांग्रेस सत्ता में थी तो किसानों ने एमएसपी कानून की मांग क्यों नहीं की। वेल, मोदी साहेब के अंधभगतो को यह मालूम होना चाहिए कि किसानो ने तब भी MSP पर क़ानून बनाने की मांग की थी। लेकिन उन्होंने आंदोलन शुरू नहीं किया, क्योंकि कल्कि पुरुष तृतीय ने किसानो से "अप्रत्यक्ष रूप से यह वादा किया था" कि -- सत्ता में आने पर वे एमएसपी पर कानून बनाएंगे !!
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मोदी साहेब ने वर्ष 2011 में पीएम को एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें उन्होंने Working Group on Consumer Affairs की मांग की थी !!
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मोदी साहेब के ट्विट का लिंक - <https://twitter.com/narendramodi/status/42975280519839744>;
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यह मोदी साहेब द्वारा किया गया वर्ष 2011 का ट्वीट है - "Submitted recommendations of Working Group on Consumer Affairs to PM today <http://bit.ly/hFBLZE>";
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कोई आश्चर्य नहीं कि मोदी साहेब ने अपनी वेबसाईट से ट्वीट में दिए गए लिंक और पेज को अब हटा दिया है। किन्तु यह रिपोर्ट सरकार की वेबसाइट पर अब भी प्राप्य है। और इस रिपोर्ट के पेज 7 में कहा गया है ---
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"b.3 एमएसपी लागू करें : चूंकि बिचौलिये बाजार के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है, और कई बार किसानों के साथ उनका अग्रिम अनुबंध होता है। सभी आवश्यक वस्तुओं के संबंध में, हमें वैधानिक प्रावधानों के माध्यम किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसान-व्यापारी के मध्य कोई भी सौदे निर्धारित MSP से कम मूल्य पर न हो"
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रिपोर्ट का लिंक - <https://consumeraffairs.nic.in/sites/default/files/file-uploads/report-of-the-working-group-on-consumer-affairs/Working%20Group%20Report.pdf?fbclid=IwAR0pHKa48JiI4XbxBg4DDGBm5KPag34J6qcbKh5Xrg0jdAwFRj5BY9DemKg#page=7>;
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दुसरे शब्दों में, जब कोई नेता कानून की मांग करता है तो जाहिर तौर पर इसका आशय यह है कि अमुक नेता यह वादा कर रहा है कि यदि उसे पीएम बना दिया जाए तो वह अवश्य ही अमुक क़ानून को पारित करेगा। और कई किसानों ने मोदी साहेब को इसी आशा में वोट किया था। मोदी साहेब 2014 में पीएम बने और 6 साल इंतजार करने के बाद किसानों का धैर्य टूट गया।
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तो मोदी साहेब ने किसानो के वोट बटोरने के लिए MSP पर एक गैर जिम्मेदाराना वादा किया, और मुकर जाने के बाद किसानो के पास MSP पर क़ानून बनवाने के लिए आन्दोलन करने के सिवा कोई रास्ता नहीं रह गया था। तो मोदी साहेब का यह झूठा वादा मुख्य वजह है कि आज किसान सड़को पर है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Feb 20 2021 10:37:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

किसानो को उपज का उचित न्यूनतम मूल्य दिलवाने के लिए कानूनी ड्राफ्ट
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MBP ; Proposal to Enact Minimum Buying Price for Agriculture & Farm Products
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इस क़ानून का सार :
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(1) यह क़ानून किसानो को अधिकृत रूप से संगठित करके किसानो में एकता लाता है।
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(2) इस क़ानून के लागू होने से सरकार पर रू 300 करोड़ सालाना से अधिक का भार नही पड़ेगा।
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(3) यह क़ानून किसानो को निजी / खुला बाज़ार (private/ open market) में उचित न्यूनतम ख़रीद मूल्य (MBP = Minimum Buying Price) दिलाने के बारे में है।
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(4) यह कानून सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP = Minimum Support Price) के भुगतान के बारे में नहीं है।
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प्रधानमंत्री यह क़ानून संसद से साधारण बहुमत द्वारा पास करके गेजेट में छाप सकते है। मुख्यमंत्री भी यह क़ानून अपने राज्य में लागू कर सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “प्रधानमंत्री जी, कृपया न्यूनतम खरीद मूल्य का क़ानून गेजेट में छापें - #Rrg30 , #RrgMinBuyingPrice
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----ड्राफ्ट का प्रारम्भ----
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टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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(01) यदि आप भारत के मतदाता है और कृषि भूमि के स्वामी है तो इस क़ानून के गेजेट में आने के बाद आपको एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब आप कृषि उपज का न्यूनतम खरीद मूल्य (MBP = Minimum Buying Price) निर्धारित करने वाली किसान एकता कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे।
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(02) राज्य राजस्व सचिव कृषि भूमि का स्वामित्व रखने वाले किसान मतदाताओ की एक अलग सूची तैयार करेंगे, ताकि प्रत्येक किसान की स्वीकृति का भार निर्धारित किया जा सके। कृषि भूमि के स्वामित्व एवं स्वीकृति के भार का अनुपात निम्नानुसार होगा :
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(a) 0.5 एकड़ से 01 एकड़ : 1 स्वीकृति
(b) 02 – 05 एकड़ : 2 स्वीकृति
(c) 05 – 10 एकड़ : 3 स्वीकृति
(d) 10 – 20 एकड़ : 4 स्वीकृति
(e) 20 – 30 एकड़ : 5 स्वीकृति
(f) 30 – 40 एकड़ : 6 स्वीकृति
(g) 40 – 50 एकड़ : 7 स्वीकृति
(h) 50 – 60 एकड़ : 8 स्वीकृति
(i) 60 – 70 एकड़ : 9 स्वीकृति
(j) 70 - अधिक : 10 स्वीकृति
(k) 0.5 एकड़ से कम भूमि होने पर शून्य स्वीकृति
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(03) कृषि उपज का मूल्य निर्धारित करने वाली कमेटियों का गठन :
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(3.1) जिला किसान एकता कमेटी : प्रत्येक जिला किसान एकता कमेटी में 5 सदस्य होंगे, जो कि जिले के किसान मतदाताओ द्वारा सीधे अनुमोदित किये जायेंगे।
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(3.2) राज्य किसान एकता कमेटी : प्रत्येक राज्य में एक 5 सदस्यीय राज्य किसान एकता कमेटी होगी, जिसके सदस्य राज्य के किसान मतदाताओं द्वारा सीधे अनुमोदित होंगे।
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(3.3) केन्द्रीय स्तर पर एक राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी होगी जिसमें 5 सदस्य होंगे और वे देश के किसान मतदाताओं द्वारा सीधे अनुमोदित किये जायेंगे।
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(04) किसान एकता कमेटी का सदस्य बनने के लिए आवेदन :
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निचे दी गयी अर्हताएं पूरी करने वाला कोई भी किसान मतदाता यदि किसान एकता कमेटी का सदस्य बनना चाहता है, तो वह कलेक्टर कार्यालय में इस आशय का एक ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है :
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(4.1) यदि वह किसी भी सरकारी या अर्ध सरकारी संस्थान में किसी पद पर न हो
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(4.2) यदि उसने 25 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो
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कलेक्टर विधायक के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को जिला पंचायत / मुख्यमंत्री / पीएम की वेबसाईट पर स्कैन करके सार्वजनिक रूप से रखेगा। आवेदन के साथ जमा किया गया यह शुल्य लौटाया नहीं जाएगा।
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(05) किसान मतदाता द्वारा प्रत्याशियों को स्वीकृत करने की प्रक्रिया :
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(5.1) कोई भी किसान मतदाता किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर जिला / राज्य / राष्ट्रिय किसान एकता कमेटी के किसी भी सदस्य प्रत्याशी के समर्थन में अपनी स्वीकृतियां दर्ज करवा सकेगा।
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(5.2) पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में किसान मतदाता की स्वीकृति दर्ज करके रसीद देगा।
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(5.3) पटवारी मतदाताओं की स्वीकृति को प्रत्याशीयों के नाम एवं किसान मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला पंचायत / मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर भी रखेगा।
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(5.4) किसान मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 10 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(5.5) स्वीकृति दर्ज करने के लिए किसान मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(5.6) यदि कोई किसान मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(5.7) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(06) किसान एकता कमेटियों में सदस्यों की नियुक्ति एवं प्रतिस्थापन :
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(6.1) जिला किसान एकता कमेटी :
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(6.1.1) सदस्यों की प्रारम्भिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 20% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि कमेटी में पद रिक्त है, तो अमुक प्रत्याशी सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.1.2) सदस्यों का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 20% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि ये स्वीकृतियां किसी पदासीन सदस्य से 3% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन सदस्य की जगह ले लेगा, और सबसे कम स्वीकृतियों वाला सदस्य निष्कासित हो जाएगा।
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(6.1.3) अध्यक्ष की प्रारंभिक नियुक्ति : यदि जिले की किसी प्रत्याशी को 25% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो अमुक प्रत्याशी अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.1.4) अध्यक्ष का प्रतिस्थापन : यदि जिले के किसी प्रत्याशी को 25% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अध्यक्ष से 3% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन अध्यक्ष की जगह ले लेगा।
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(6.1.5) कोई भी व्यक्ति अपने जीवन काल में जिला किसान एकता कमेटी के सदस्य एवं अध्यक्ष (सदस्य एवं अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि को जोड़ते हुए) के रूप में 60 माह से अधिक पद पर नहीं रह सकेगा।
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(6.2) राज्य किसान एकता कमेटी
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(6.2.1) सदस्यों की प्रारंभिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 10% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि कमेटी में पद रिक्त है, तो अमुक प्रत्याशी सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.2.2) सदस्यों का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 10% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है, और यदि ये स्वीकृतियां किसी पदासीन सदस्य से 2% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन सदस्य की जगह ले लेगा, और सबसे कम स्वीकृतियों वाला सदस्य निष्कासित हो जाएगा।
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(6.2.3) अध्यक्ष की प्रारंभिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 13% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो अमुक प्रत्याशी अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.2.4) अध्यक्ष का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 13% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अध्यक्ष से 2% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन अध्यक्ष की जगह ले लेगा।
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(6.2.5) कोई भी व्यक्ति अपने जीवन काल में राज्य किसान एकता कमेटी के सदस्य एवं अध्यक्ष (सदस्य एवं अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि को जोड़ते हुए) के रूप में 60 माह से अधिक पद पर नहीं रह सकेगा।
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(6.3) राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी :
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(6.3.1) सदस्यों की प्रारम्भिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 5% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि कमेटी में पद रिक्त है, तो अमुक प्रत्याशी सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.3.2) सदस्यों का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 5% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है, और यदि ये स्वीकृतियां किसी पदासीन सदस्य से 1% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन सदस्य की जगह ले लेगा, और सबसे कम स्वीकृतियों वाला सदस्य निष्कासित हो जाएगा।
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(6.3.3) अध्यक्ष की प्रारंभिक नियुक्ति : यदि किसी प्रत्याशी को 7% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है, तो अमुक प्रत्याशी अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण कर लेगा।
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(6.3.4) अध्यक्ष का प्रतिस्थापन : यदि किसी प्रत्याशी को 7% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अध्यक्ष से 1% अधिक भी है तो अमुक प्रत्याशी पदासीन अध्यक्ष की जगह ले लेगा।
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(6.3.5) कोई भी व्यक्ति अपने जीवन काल में राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी के सदस्य एवं अध्यक्ष (सदस्य एवं अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि को जोड़ते हुए) के रूप में 60 माह से अधिक पद पर नहीं रह सकेगा।
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(7) किसान एकता कमेटी के सदस्यों का वेतन :
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(7.1) जिला किसान एकता कमेटी के सदस्य को 40,000 रू मासिक एवं अध्यक्ष को 50,000 रू मासिक वेतन राज्य सरकार की और से मिलेगा।
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(7.2) राज्य किसान एकता कमेटी के सदस्य को 50,000 रू मासिक एवं अध्यक्ष को 60,000 रू मासिक वेतन राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा।
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(7.3) राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी के सदस्य को 60,000 रू मासिक एवं अध्यक्ष को 75,000 रू मासिक वेतन केंद्र सरकार द्वारा दिया जाएगा।
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(8) न्यूनतम खरीद मूल्य का निर्धारण :
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(8.1) किसान एकता कमेटियां विभिन्न कृषि उपजो (अनाज, दालें, सब्जियां आदि) की जिंसो का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करने के लिए बैठके करेगी। प्रत्येक सदस्य द्वारा प्रत्येक जिन्स के लिए न्यूनतम खरीद मूल्य का प्रस्ताव किया जाएगा, और प्रत्येक सदस्य द्वारा सुझाए गए मूल्यों औसत को नहीं बल्कि के मध्यमान (not the Average, but the median) को स्वीकृत मूल्य माना जाएगा।
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(8.2) कृषि उपजो का मूल्य तय करने के लिए जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी के सदस्यों की बैठके महीने की प्रत्येक 10 तारीख एवं 25 तारीख को होगी। कमेटी का अध्यक्ष या सदस्यों का बहुमत चाहे तो अन्य दिन भी बैठक बुला सकता है। बैठके सार्वजनिक प्रकृति की होगी, और सभी बैठको के मिनिट्स सार्वजनिक किये जायेंगे।
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(8.3) जिला किसान एकता कमेटी अपने जिले में एवं राज्य किसान एकता कमेटी पूरे राज्य के लिए कृषि उपज (अनाज, दालें, सब्जियां आदि) की जिंसो का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करके राज्य कृषि मंत्री को भेजेगी। जिला एवं राज्य किसान एकता कमेटीयों द्वारा तय ये मूल्य परामर्शकारी होंगे एवं राज्य कृषि मंत्री चाहे तो इसमें संशोधन कर सकते है। राज्य कृषि मंत्री द्वारा निर्धारित मूल्य को ही ‘अंतिम खरीद मूल्य’ माना जाएगा।
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(8.4) राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी पूर देश के लिए कृषि उपज (अनाज, दालें, सब्जियां आदि) की जिंसो का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करके केन्द्रीय कृषि मंत्री को भेजेगी। राष्ट्रीय किसान एकता कमेटी द्वारा तय किये गए ये मूल्य परामर्शकारी होंगे और केन्द्रीय कृषि मंत्री चाहे तो इसमें संशोधन कर सकते है।
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(8.5) राज्य कृषि मंत्री यह तय करेगा कि वह केन्द्रीय कृषि मंत्री द्वारा अनुमोदित मूल्यों को न्यूनतम खरीद मूल्य के रूप में स्वीकृत करना चाहता है या नहीं। किसी राज्य में न्यूनतम खरीद मूल्य का अंतिम फैसला राज्य कृषि मंत्री ही करेगा।
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(8.6) राज्य कृषि मंत्री द्वारा निर्धारित न्यूनतम खरीद मूल्य सिर्फ निजी व्यक्तियों एवं निजी संस्थाओ पर लागू होगा, एवं यह मूल्य सरकारी संस्थाओ पर लागू नहीं होगा। सरकार चाहे तो किसानो से कृषि उपज ख़रीदने के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) तय कर सकती है।
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(8.7) न्यूनतम खरीद मूल्य का नियमन एवं इसके प्रावधान मंडी के भीतर एवं बाहर समान रूप से लागू होंगे।
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(9) न्यूनतम खरीद मूल्य के क्रय-विक्रय का नियमन :
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(9.1) यदि कोई व्यक्ति, गैर सरकारी कम्पनी, गैर सरकारी संस्था, गैर लाभकारी निकाय, गैर सरकारी इकाई आदि राज्य कृषि मंत्री द्वारा निर्धारित किये गए ‘न्यूनतम खरीद मूल्य’ से कम कीमत में कृषि उपज की जिंसो को खरीदते पाया जाता है तो क्रेता का यह कृत्य क्रय-विक्रय की राशि का 10 गुना आर्थिक दंड एवं 3 महीने तक के कारावास से दंडनीय होगा।
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(9.2) धारा (8.1) में दिया गया आर्थिक दंड एवं कारावासीय प्रावधान सिर्फ तब लागू होगा जब राज्य कृषि मंत्री द्वारा इसे अनुमोदित किया गया हो। मंत्री द्वारा जारी किया गया यह अनुमोदन 30 दिवस पश्चात् स्वत: अप्रभावी हो जाएगा। राज्य कृषि मंत्री चाहे तो कारावासीय प्रावधान को लागू करने के आदेश फिर से जारी कर सकते है।
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(9.3) कारावासीय प्रावधान के सम्बन्ध में राज्य कृषि मंत्री द्वारा किये गए अनुमोदन को यदि किसी जिले की जिला किसान एकता कमेटी के कम से कम 3 या 3 से अधिक किसान प्रतिनिधि निरस्त कर देते है तो राज्य कृषि मंत्री द्वारा अनुमोदित कारावसीय प्रावधान अमुक जिले में लागू नहीं होंगे।
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टिप्पणी 1 : यदि किसान मतदाता किसान एकता कमेटी द्वारा लिए गए किसी फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वे वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके उन्हें बदल सकते है।
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टिप्पणी 2 : यदि किसान मतदाता राज्य कृषि मंत्री द्वारा लिए गए किसी फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वे राज्य कृषि मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के लिए इस कानून की धारा (11) का इस्तेमाल करके प्रस्तावित वोट वापसी मंत्री के क़ानून #VvpStateMinister में दी गयी धाराएं जुड़वाँ सकते है, ताकि वे वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके कृषि राज्य मंत्री को बदल सके।
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टिप्पणी 3 : किसान इस कानून की धारा (11) का इस्तेमाल करके प्रस्तावित वोट वापसी सीएम कानून #VvpCM एवं वोट वापसी पीएम #VvpPM क़ानून की धाराएं भी इस क़ानून में जुड़वाँ सकते है, ताकि किसान मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके बदल सके।
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टिप्पणी 4 : यदि किसान मतदाता जज के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वे इस कानून की धारा (11) का इस्तेमाल करके प्रस्तावित जूरी कोर्ट #JuryCourt क़ानून को पारित करवा सकते है।
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(9.4) प्रति व्यक्ति छूट : प्रत्येक व्यक्ति को सालाना 200 किलोग्राम कृषि उपज जिंसो तक का निजी भण्डारण एवं प्रति व्यक्ति 1000 किलोग्राम सालाना की खरीद पर छूट रहेगी, और उपरोक्त सीमा के अंतर्गत क्रय-विक्रय-भण्डारण पर यह कानून लागू नहीं होगा। परिवार में यदि अनेक सदस्य है तो सभी सदस्यों को प्रति व्यक्ति के हिसाब से छूट प्राप्त होगी।
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(9.5) न्यूनतम ख़रीद मूल्य के क्रय-विक्रय व्यवहारों में अन्य सम्बंधित कर जैसे - मंडी कर, सेस एवं राज्य / केंद्र / स्थानीय सरकार द्वारा लगाए गए कर आदि चुकाने का भार क्रेता पर रहेगा।
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(10) किसान एकता कमेटियों में कृषि व्यापारियों का प्रतिनिधित्व :
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(10.1) प्रत्येक जिला किसान एकता कमेटी, राज्य किसान एकता कमेटी एवं राष्ट्रिय किसान एकता कमेटी में 2 अतिरिक्त सदस्य होंगे जो कृषि व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करेंगे। कृषि व्यापारियों के प्रतिनिधियों के पास कमेटी में मताधिकार नहीं होंगे, किन्तु वे व्यापारी वर्ग एवं किसानो के मध्य तालमेल बनाने के लिए कमेटी के समक्ष कृषि व्यापारियों की और से सुझाए गए प्रस्ताव रख सकते है।
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(10.2) व्यापारी प्रतिनिधि के लिए आवेदन : कोई भी कृषि व्यापारी यदि मतदाता किसान एकता कमेटी में व्यापारी प्रतिनिधि बनना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में इस आशय का एक ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर विधायक के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को जिला / मुख्यमंत्री / पीएम की वेबसाईट पर स्कैन करके सार्वजनिक रूप से रखेगा।
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(10.3) स्वीकृति दर्ज करना : कोई भी व्यापारी वर्ग का मतदाता किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर व्यापारी प्रतिनिधि के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेगा।
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(10.4) राज्य कृषि सचिव कृषि व्यापारियों की एक अलग मतदाता सूची तैयार करेंगे ताकि प्रत्येक कृषि व्यापारी की स्वीकृति का भार निर्धारित किया जा सके। कृषि व्यापारी द्वारा कृषि उपज का सालाना खरीद के अनुपात में मत का भार निम्नानुसार होगा :
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(a) 5 से 10 लाख रू तक की सालाना खरीद पर : 1 स्वीकृति
(b) 10 से 50 लाख रू तक की सालाना खरीद पर : 2 स्वीकृति
(c) 50 से 1 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 3 स्वीकृति
(d) 1 से 5 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 4 स्वीकृति
(e) 5 से 10 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 5 स्वीकृति
(f) 10 से 20 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 6 स्वीकृति
(g) 20 से 30 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 7 स्वीकृति
(h) 30 से 40 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 8 स्वीकृति
(i) 40 से 50 करोड़ रू तक की सालाना खरीद पर : 9 स्वीकृति
(j) 50 करोड़ रू से अधिक की सालाना खरीद पर : 10 स्वीकृति
(k) 5 लाख सालाना से कम ख़रीद पर : शून्य स्वीकृति
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(10.5) व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधियों की नियुक्ति : नियुक्ति एवं निष्कासन की प्रक्रिया ठीक वैसी ही रहेगी जैसा धारा (6) में बताया गया है। अंतर यह रहेगा कि किसान एकता कमेटियों के सदस्यों के लिए किसान मतदाता स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे जबकि कृषि व्यापारी प्रतिनिधियों को स्वीकृति कृषि व्यापारी मतदाता देंगे।
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(10.5.1) जिला किसान एकता कमेटी में कृषि व्यापारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एवं निष्कासन की प्रक्रिया के लिए धारा (6.1.1) एवं धारा (6.1.2) देखें।
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(10.5.2) राज्य किसान एकता कमेटी में कृषि व्यापारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एवं निष्कासन की प्रक्रिया के लिए धारा (6.2.1) एवं धारा (6.2.2) देखें।
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(10.5.3) राष्ट्रिय किसान एकता कमेटी में कृषि व्यापारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एवं निष्कासन की प्रक्रिया के लिए धारा (6.3.1) एवं धारा (6.3.2) देखें।
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(10.6) वेतन : कृषि व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधियों का वेतन किसान एकता कमेटियों की सदस्यों के समान ही रहेगा ।
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(11) जनता की आवाज :
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(11.1) यदि कोई किसान मतदाता या कोई भी मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है, या किसी भी सम्बन्ध में कोई सुझाव, मांग प्रस्तुत करना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(11.2) यदि कोई किसान मतदाता या कोई भी मतदाता मतदाता धारा (11.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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----ड्राफ्ट की समाप्ति------

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Feb 21 2021 19:57:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Kushagra Yadav Salonup:

इतिहास या/और राजनीति में रूचि रखने वाले कार्यकर्ताओं को एक बार हॉलीवुड फिल्म The Last Samurai (2003) (दि लास्ट समुराई) जरूर देखनी चाहिए। यह फिल्म जापान में विदेशी ताकतों के घुसने के सम्बन्ध में है।
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फिल्म में उस सत्य को दिखाया गया है जिसे भारत और दुनिया भर के बिकाऊ इतिहासकार, बिकाऊ अर्थशास्त्री, बिकाऊ संपादक आदि छिपाते हैं।

फिल्म में जापान का 1870-1880 का दशक दिखाया है। जापान में अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनिया अपना साम्राज्य फ़ैलाने के जुगाड़ में है। लोगों को पश्चिमी सभ्यता की ओर धकेलने के लिए कानून बनाये जा रहे हैं। ऐसा दिखाया गया है कि वहां के राजा (राजा मेइजी) देश को आधुनिकता की ओर ले जाना चाहते हैं, इसलिए वे विदेशी कंपनियों को देश में न्योता दे रहे हैं। हालाँकि फिल्म के एक हिस्से में इस चीज को दिखा दिया जाता है कि विदेशी कम्पनिया जापान के राजा को युद्ध का भय दिखा के राजी करती हैं।
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आधुनिकता की आड़ में देश के संसाधनों पर कब्ज़ा करने की निति को फिल्म में नहीं दिखाया गया है, लेकिन जिस बात को बखूबी दिखाया गया है वह है कि बेहतरीन हथियारों के बिना देश गुलाम बन जाता है।
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जापान के राजा की रक्षा की जिम्मेदारी पिछले 900 वर्षो से 'समुराई' वर्ग के लोग करते आ रहे हैं। समुराई का काम युद्ध में लड़ना और राजा की रक्षा करना है। समुराई आज भी (फिल्म में) 900 साल पुराने हथियारों से लड़ते हैं। उनके पास तीर, तलवार, आदि है। वे आधुनिक हथियार नहीं उठाना चाहते हैं। उनका मानना है कि युद्ध जीतने के लिए जोश, हिम्मत, देशभक्ति, सेवाभाव, वगैरह वगैरह की जरूरत है।
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जापान के राजा युद्ध भय से विदेशी कंपनियों के पक्ष में रहते हैं जबकि जापान के शीर्ष सेना और प्रसाशनिक अधिकारी विदेशी कंपनियों के हाथों बिक चुके होते हैं। इस कारण जापान की सेना को अमेरिका से बंदूके, तोप, मशीन गन, आदि लाकर दी जाती हैं। देश में अब दो गुट बन चुके हैं — पहला समुराई, जो विदेशी ताकतों के खिलाफ हैं, और दूसरा जापान के अंदर विदेशी कम्पनिया जो जापान के शीर्ष राजवर्ग को रिश्वत देकर जापान में अमेरिकी हथियारों की मदद से जापानी सेना का इस्तेमाल करती है।
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समुराई अपने तीर-कमान-भाले से लड़ते हैं और जापान के राजा की सेना अमेरिकी हथियारों से। क्यूंकि फिल्म 'समुराई' की महानता दिखाने के लिए बनी है इसलिए युद्ध की शुरुआत में समुराई को बढ़त मिलते दिखती है। फिर जब अमेरिकी मशीन गन चलती है तो समुराईओं को युद्ध हारना पड़ता है।
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इस फिल्म को भारत सन्दर्भ में समझा जाये तो जापान के राजा की तुलना भारत के किसी भी हिन्दू/मुस्लिम राजा से की जा सकती है जिन्होंने विदेशी हथियारों के सामने घुटने तक दिए थे। जबकि भारत के बिकाऊ इतिहासकार और बिकाऊ अर्थशास्त्री भारत के राजाओं की हार की वजह 'ब्रिटिश हथियारों की महानता' के सिवा सब कुछ बता देते हैं।
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फिल्म का सार यही निकल के आता है कि अगर आपने अपने अंदर की देशभक्ति, साहस, ईमानदारी, पराक्रम, अनुशाशन, वगैरह वगैरह हथियारों की फैक्ट्री-इंडस्ट्री में न दिखा के सिर्फ युद्ध के मैदान में दिखाया तो आपका अंत निश्चित है।
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{इस तरह की फिल्म अमेरिका के प्रोडूसर बना सकते हैं लेकिन भारत के नहीं, इसकी वजह ?
इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका की अदालतों में कम भ्रष्टाचार जबकि भारत की अदालतो का भ्रष्टाचार है। }

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