> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2021-02-21

Pawan Jury BhilwaraRj

Kushagra Yadav Salonup:

इतिहास या/और राजनीति में रूचि रखने वाले कार्यकर्ताओं को एक बार हॉलीवुड फिल्म The Last Samurai (2003) (दि लास्ट समुराई) जरूर देखनी चाहिए। यह फिल्म जापान में विदेशी ताकतों के घुसने के सम्बन्ध में है।
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फिल्म में उस सत्य को दिखाया गया है जिसे भारत और दुनिया भर के बिकाऊ इतिहासकार, बिकाऊ अर्थशास्त्री, बिकाऊ संपादक आदि छिपाते हैं।

फिल्म में जापान का 1870-1880 का दशक दिखाया है। जापान में अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनिया अपना साम्राज्य फ़ैलाने के जुगाड़ में है। लोगों को पश्चिमी सभ्यता की ओर धकेलने के लिए कानून बनाये जा रहे हैं। ऐसा दिखाया गया है कि वहां के राजा (राजा मेइजी) देश को आधुनिकता की ओर ले जाना चाहते हैं, इसलिए वे विदेशी कंपनियों को देश में न्योता दे रहे हैं। हालाँकि फिल्म के एक हिस्से में इस चीज को दिखा दिया जाता है कि विदेशी कम्पनिया जापान के राजा को युद्ध का भय दिखा के राजी करती हैं।
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आधुनिकता की आड़ में देश के संसाधनों पर कब्ज़ा करने की निति को फिल्म में नहीं दिखाया गया है, लेकिन जिस बात को बखूबी दिखाया गया है वह है कि बेहतरीन हथियारों के बिना देश गुलाम बन जाता है।
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जापान के राजा की रक्षा की जिम्मेदारी पिछले 900 वर्षो से 'समुराई' वर्ग के लोग करते आ रहे हैं। समुराई का काम युद्ध में लड़ना और राजा की रक्षा करना है। समुराई आज भी (फिल्म में) 900 साल पुराने हथियारों से लड़ते हैं। उनके पास तीर, तलवार, आदि है। वे आधुनिक हथियार नहीं उठाना चाहते हैं। उनका मानना है कि युद्ध जीतने के लिए जोश, हिम्मत, देशभक्ति, सेवाभाव, वगैरह वगैरह की जरूरत है।
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जापान के राजा युद्ध भय से विदेशी कंपनियों के पक्ष में रहते हैं जबकि जापान के शीर्ष सेना और प्रसाशनिक अधिकारी विदेशी कंपनियों के हाथों बिक चुके होते हैं। इस कारण जापान की सेना को अमेरिका से बंदूके, तोप, मशीन गन, आदि लाकर दी जाती हैं। देश में अब दो गुट बन चुके हैं — पहला समुराई, जो विदेशी ताकतों के खिलाफ हैं, और दूसरा जापान के अंदर विदेशी कम्पनिया जो जापान के शीर्ष राजवर्ग को रिश्वत देकर जापान में अमेरिकी हथियारों की मदद से जापानी सेना का इस्तेमाल करती है।
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समुराई अपने तीर-कमान-भाले से लड़ते हैं और जापान के राजा की सेना अमेरिकी हथियारों से। क्यूंकि फिल्म 'समुराई' की महानता दिखाने के लिए बनी है इसलिए युद्ध की शुरुआत में समुराई को बढ़त मिलते दिखती है। फिर जब अमेरिकी मशीन गन चलती है तो समुराईओं को युद्ध हारना पड़ता है।
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इस फिल्म को भारत सन्दर्भ में समझा जाये तो जापान के राजा की तुलना भारत के किसी भी हिन्दू/मुस्लिम राजा से की जा सकती है जिन्होंने विदेशी हथियारों के सामने घुटने तक दिए थे। जबकि भारत के बिकाऊ इतिहासकार और बिकाऊ अर्थशास्त्री भारत के राजाओं की हार की वजह 'ब्रिटिश हथियारों की महानता' के सिवा सब कुछ बता देते हैं।
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फिल्म का सार यही निकल के आता है कि अगर आपने अपने अंदर की देशभक्ति, साहस, ईमानदारी, पराक्रम, अनुशाशन, वगैरह वगैरह हथियारों की फैक्ट्री-इंडस्ट्री में न दिखा के सिर्फ युद्ध के मैदान में दिखाया तो आपका अंत निश्चित है।
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{इस तरह की फिल्म अमेरिका के प्रोडूसर बना सकते हैं लेकिन भारत के नहीं, इसकी वजह ?
इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका की अदालतों में कम भ्रष्टाचार जबकि भारत की अदालतो का भ्रष्टाचार है। }