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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Sep 04 2019 18:45:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस एल्बम में सिर्फ वे क़ानून ड्राफ्ट्स रखे जायेंगे जिन्हें मुख्यमंत्री जिला स्तर पर लागू कर सकते है. जो नागरिक अपने जिले में पंचायत , पार्षद , विधायक एवं सांसद चुनाव लड़ने के इच्छुक है वे इन कानूनों के पर्चे स्थानीय नागरिको में बाँट सकते है.
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यदि आपके जिले का कानून इस एल्बम में नहीं है तो कमेन्ट बॉक्स में इसे दर्ज करने से आपके जिले का क़ानून भी यहाँ रख दिया जाएगा.
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यदि आपको इनके पीडीऍफ़ एवं मोबाईल वर्जन चाहिए तो इस फेसबुक ग्रुप से डाउनलोड करें --
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Sep 04 2019 18:59:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चित्तौड़गढ़ जूरी पंचायत – चित्तौड़गढ़ की पंचायतो एवं स्थानीय प्रशासन को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Chittorgarh Jury Panchayat - Proposal to Improve Panchayat & Local Administration
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कानून का सार : यह कानून चित्तौड़गढ़ जिले की पंचायतो एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। इस कानून में ऐसी कई प्रक्रियाएं है जो स्थानीय प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है और ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे अधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी। इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री भी लोकसभा से पारित कर सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित चित्तौड़गढ़ जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापें - #ChittorgarhJuryPanchayat , #VoteVapsiPassBook , #P20180436110
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर चित्तौड़गढ़ जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम चित्तौड़गढ़ जिले की वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के अलावा धारा (01) में दिए गए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी मंडल में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको इन 11 अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप अमुक आरोपी पर जुर्माना लगा सकते है :
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1. पटवारी
2. गिरदावर
3. ग्राम विकास अधिकारी ( पंचायत सचिव )
4. तहसीलदार
5. जिला परिषद सचिव
6. नगर परिषद सचिव
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(03) यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, या उपरोक्त में से किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते है तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा ( 20.1 ) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे जिला / मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिपण्णी : इस क़ानून में जिले शब्द का आशय है राजस्थान का चित्तौड़गढ़ जिला। इस क़ानून में जहाँ भी पार्षद शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है - नगर पालिका , नगर परिषद का पार्षद। इस क़ानून में सभापति शब्द से आशय है - नगर पालिका, नगर परिषद का सभापति। इस क़ानून में प्रधान शब्द से आशय है - तहसील पंचायत समिती का प्रधान। इस क़ानून में जिला प्रमुख से आशय है - जिला पंचायत का प्रमुख। ]
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(04) पटवारी कार्यालयों को सुचारू एवं व्यवस्थित करने के लिए यह क़ानून पारित होने के बाद मुख्यमंत्री निम्नलिखित कार्यो को दी गयी समय सीमा में पूरा किया जाना सुनिश्चित करेंगे :
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(4.1) जिले के खाली पड़े पटवारी के सभी पदों पर पटवारियों की नियुक्ति की जायेगी। यदि नयी भर्ती की आवश्यकता है तो भर्ती की प्रक्रिया अगले 180 दिनों में पूर्ण कर ली जानी चाहिए।
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(4.2) यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर प्रत्येक पटवार खाने का अनिवार्य रूप से कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कम्प्यूटर में दक्ष लिपिकों की नियुक्ति करके पटवारी के स्टाफ का दायरा बढाया जायेगा। पटवारी को शामिल करते हुए पटवारी कार्यालय का न्यूनतम स्टाफ 4 व्यक्तियों का होगा। यह सभी नियुक्तियां यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर कर ली जानी चाहिए।
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(4.3) जब पटवारी फील्ड में है तब भी पटवारी कार्यालय अनिवार्य रूप से 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुला रहेगा।
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(4.4) जिन पटवार खानो में पर्याप्त कमरे इत्यादि नहीं है उनके लिए आवश्यक भवन निर्माण किया जाएगा एवं यह निर्माण इस क़ानून के पारित होने के 3 वर्षो के अंदर कर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस क़ानून के गेजेट में आने के 6 माह के भीतर सभी पटवार खानों को उन्नत किये जाने का प्रोजेक्ट विधानसभा में रखेंगे जिसमें यह ब्यौरा होगा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए कितने पटवारी कार्यालयो को किस क्रम से उन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट के साथ ही अनिवार्य रूप से इसके लिए बजट भी पास करेंगे।
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(4.5) पटवारी एक मोबाईल एप / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया एकाउंट / व्हाट्स एप नंबर सार्वजनिक करेगा, ताकि उसके क्षेत्र के मतदाता अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करवा सके।
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(4.6) यदि कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में या धारा 01 एवं 02 में लिखे गए अधिकारियों / जनप्रतिनिधियों को किसी कार्य के लिए कोई एप्लीकेशन देता है और यदि एप्लीकेशन पर सार्वजनिक करें दर्ज करता है, तो यह प्रार्थना पत्र सार्वजनिक किया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहा है तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक की गयी जो नागरिक शिकायतें पेंडिंग है और जो कार्य पूर्ण हो चुके है, उनकी अद्यतन जानकारी व्यवस्थित रूप से कार्यालय के सूचना पट्ट पर बिना मांगे उपलब्ध रहेगी एवं इसे प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी। यदि यह जानकारी स्वत: सार्वजनिक नहीं की जाती है तो यह माना जायेगा कि, इन्हें छिपाया गया है।
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(4.7) धारा 02 में दिए गए अधिकारी सभी नागरिक शिकायतों एवं नागरिक प्रार्थना पत्रों का निपटान सिलसिलेवार करेंगे। यदि वे क्रम का उलंघन करते है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण लिखित में देना होगा। उदाहरण के लिए , मान लीजिये कि पटवारी या तहसीलदार के पास सोमवार को एक व्यक्ति A नकल निकलवाने का प्रार्थना पत्र देता है, तथा B नक़ल निकलवाने का प्रार्थना पत्र मंगलवार को देता है। चूंकि इन दोनों अर्जियों की प्रकृति एक जैसी है अत: अधिकारी पहले सोमवार को लगाई गयी अर्जी का निस्तारण करेगा। यदि अधिकारी A से पहले B की नकल निकाल देता है तो उसे अनिवार्य रूप से यह दर्ज करना होगा कि क्यों B की अर्जी पर पहले काम किया गया।
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(05) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा, जो कि उसके क्षेत्र की मतदाता संख्या पर निर्भर करेगा। सरपंच अधिकतम 5 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 3 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 2 पंचायत से जीत जाता है तो वह 80,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(06) इस क़ानून के पारित होने के बाद नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 मासिक से 25,000 होगा। पार्षद किन्ही 3 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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(07) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 एवं अधिकतम 80,000 होगा।
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[ सरपंच का वेतन बढाने का स्पष्टीकरण 1* : इस क़ानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक, परीक्षण चुनाव एवं सह चुनाव के दायरे में लाया गया है। इस वजह से सरपंच की भ्रष्टाचार से होने वाली संभावित आय में भारी गिरावट आएगी। यदि वह गलत तरीके से काम कर रहा है तो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेगा, और उसके क्षेत्र के मतदाता वोट वापसी का प्रयोग करके 5 वर्ष से पहले ही उसे निकाल कर किसी दुसरे को सरपंच बना सकेंगे। इसके अलावा यदि उसके खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी और जूरी उस पर जुर्माना लगा सकती है।

तो जब हम सरपंच पर ऐसे क़ानून डाल रहे है कि वह अवैध रूप से पैसा नहीं बना सके, तो हमें वेतन बढाने की जरूरत है। वर्ना यह सरपंच प्रत्याशीयों के साथ अन्याय होगा। यदि वेतन नहीं बढ़ाया गया तो हमें ऐसे उम्मीदवार नहीं मिलेंगे जो ईमानदारी से कार्य करना चाहते है। वे सोचेंगे कि यदि मैं जीत भी जाता हूँ तो मुझ पर जिम्मेदारी आ जायेगी और जिम्मेदारी निभाने के एवज में मुझे कोई आर्थिक व्यय भी नहीं मिलेगा। और ठीक यही स्थिति पार्षद एवं सभापति के साथ होगी। इसीलिए इनके वेतन में इजाफा किया गया है। राज्य के अन्य जिलो के सरपंचो एवं पार्षदों का वेतन वही रहेगा जो उन्हें आज मिल रहा है।
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5 जगह का सरपंच बनने की छूट देने का स्पष्टीकरण 2* : यदि हमें सरपंच के पद के लिए बेहतर उम्मीदवार चाहिए तो इसके पदोन्नति के अवसर खोलने होंगे। सरपंच एवं विधायक के बीच काफी फासला होता है। यदि सरपंच के पास आस पास के 5 गाँवों का सरपंच बनने का अवसर होगा तो वह ज्यादा बेहतर ढंग से काम करना शुरू करेगा ताकि अन्य गाँवों में भी उसकी ख्याति जाए और वह वहां से भी चुना जा सके। और तब उसे वेतन भी 5 पंचायतो के बराबर मिलेगा। इससे सरपंच इस तरह का सिस्टम खड़ा करने की दिशा में काम करना शुरू करेंगे कि नागरिको की शिकायतों का तुरंत निपटान हो और उन्हें धक्के खाने की जरूरत नहीं रहे। और ऐसे भी यदि किसी पंचायत क्षेत्र के मतदाता यह पाते है कि अमुक सरपंच ने उसकी पंचायत में काफी बेहतर काम किया है, तो वे अमुक सरपंच को अपनी पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दे सकते है। ]
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(08) पार्षद अपने वार्ड में प्रत्येक दुसरे एवं चौथे रविवार ( 2nd & 4th Sunday ) को सांय 4 बजे एक नागरिक सभा का आयोजन करेगा। सभापति इसके लिए वार्ड में स्थित किसी सार्वजानिक कम्युनिटी सेंटर, स्कूल आदि में स्थान की व्यवस्था कराएगा। यदि वार्ड में नगर परिषद के क्षेत्राधिकार का भवन मौजूद है तो सभा इसी स्थल पर आयोजित होगी, और स्थान व समय किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाएगा।
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(8.1) किसी व्यक्ति को यदि नगर परिषद के क्षेत्राधिकार एवं अपने वार्ड से सम्बंधित कोई शिकायत या सुझाव पार्षद के सम्मुख रखना है तो वह सभा में उपस्थित होकर अपनी शिकायत या सुझाव आदि पार्षद को लिखकर दे सकता है। शिकायतकर्ता अनिवार्य रूप से अपने मतदाता पहचान पत्र की फोटो कॉपी अपनी एप्लीकेशन के साथ सलंग्न करेगा।
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(8.2) इस सभा में जितनी भी शिकायतें / सुझाव आयेंगे उन्हें पार्षद एक सीरियल नंबर देगा और उन्हें स्वीकार करके नगर परिषद द्वारा जारी (Allote) किये गए अपने रजिस्टर में क्रम से दर्ज कर लेगा। पार्षद एप्लीकेशन लेने के बाद अपनी छाप लगाकर हस्ताक्षर युक्त एक पावती ( Receiving ) भी देगा। पार्षद अगली सभा से पहले पूर्व सभा के ब्यौरे सभापति कार्यालय में अग्रेषित कर देगा।
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(8.3) नागरिक यह एप्लीकेशन सभापति कार्यालय में भी दे सकता है। सभापति द्वारा नियुक्त क्लर्क 5 रू प्रति पृष्ठ की दर से इसे स्कैन करके सभापति की वेबसाईट पर नागरिक शिकायतों के सेक्शन में रख देगा। सभापति इस तरह का सिस्टम बना सकते है कि नगर के मतदाता अपने वार्ड या नगर के लिए दी गयी किसी एप्लीकेशन पर अपनी सहमति दर्ज कर सके।
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(9) अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) सरपंच एवं पार्षद : यदि कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार अमुक पद के लिए तय जमा राशि लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा। तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर अपलोड करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। पार्षद अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करेगा।
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(9.2) प्रधान, सभापति एवं जिला प्रमुख : यदि कोई मतदाता प्रधान, सभापति या जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किसी भी दिन अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। प्रधान एवं सभापति के लिए जमानत राशि विधायक के बराबर एवं जिला प्रमुख के लिए यह राशि सांसद की जमानत राशि के बराबर होगी। कलेक्टर शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाईट पर रखेगा और प्रत्याशियों को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक : जिले का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद का आवेदन करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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(10) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(10.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(10.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा
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(10.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(11) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परिक्षण -चुनाव की शर्तें :
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(11.1) यदि कोई प्रत्याशी निचे लिखी गयी 3 शर्तें पूरी कर लेता है तो सरपंच इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री से विनती कर सकता है कि वे अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव ( Test-Election ) आयोजित करें । यदि सरपंच 7 दिनों के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है, या नहीं भी ले सकते है।
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(11.1.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(11.1.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(11.1.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सरपंच के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% से अधिक भी है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण-चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 2000+500=2500 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 2400 स्वीकृतियां मिल जाती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा और मौजूदा सरपंच को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । किन्तु यदि किसी प्रत्याशी को 2500 से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो सरपंच इस्तीफा दे सकता है या मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है।
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(11.2) नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी शर्तें यही होगी जो धारा (11.1) में सरपंच के लिए बतायी गयी है।
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(12) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण-चुनाव की प्रक्रिया :
यदि धारा (11.1) में बतायी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है, तो परिक्षण-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। परिक्षण चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(12.1) मतपत्र पर कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को इस चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 5 प्रत्याशियों को जमानत राशि देकर नामांकन पत्र दाखिल करना होगा।
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(12.2) यदि परिक्षण-चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी शर्तें पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(12.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक वोट प्राप्त हो जाते है।
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(12.2.2) यदि ये वोट सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2,500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 2,500+500=3,000 वोट लाने होंगे। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2,500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि सह-चुनाव में कोई प्रत्याशी 2,500 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को 1,500 वोट ही मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा।
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(12.3) नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परीक्षण चुनाव : पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी ठीक उसी समीकरण ( फार्मूले ) का पालन किया जाएगा जो धारा 12.2 में सरपंच के लिए बताया गया है।

(13) प्रधान, जिला प्रमुख एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(13.1) तहसील प्रधान के लिए : यदि किसी पंचायत समिती की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता प्रधान के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा प्रधान की स्वीकृतियों से 5% अधिक भी है तो मौजूदा प्रधान इस्तीफा दे सकता है । यदि प्रधान 7 दिवस में इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृतियां पाने वाले प्रत्याशी की नियुक्ति प्रधान के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.2) जिला प्रमुख के लिए : यदि किसी जिले की समस्त पंचायत समितियों की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला पंचायत प्रमुख के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जिला प्रमुख की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी की नियुक्ति जिला प्रमुख के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.3) जिला जूरी प्रशासक : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक व्यक्ति को जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(14) सभापति की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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सभापति को बदलने के लिए किसी प्रत्याशी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होगी -
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(14.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(14.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति को चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(14.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सभापति के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 2% से अधिक भी है।
यदि सभापति का कोई प्रत्याशी उपरोक्त तीनो शर्तें पूरी कर लेता है तो सभापति इस्तीफा दे सकता है। यदि सभापति 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकालकर परिक्षण चुनाव करवाने का आदेश जारी कर सकते है। परिक्षण चुनाव की प्रक्रिया एवं उसमे जीत हार का समीकरण वही रहेगा जैसा धारा (12.2) में बताया गया है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी किसी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 2,00,000 मतदाता है, और चुनाव में मौजूदा सभापति को 70,000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण चुनाव सिर्फ तब संचालित किया जाएगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 70,000+4,000=74,000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 2 लाख है अत: इसका 2% = 4,000 को 70,000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 72,000 स्वीकृतियां मिलती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा।
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(15) सरपंच एवं पार्षद के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(15.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है।
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(15.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (12.2) में सरपंच के परिक्षण चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को सह-चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। सह चुनाव में भी पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। जीत हार का समीकरण ( फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा परिक्षण चुनाव में बताया गया है।
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16. पार्षद के लिए सह-चुनाव की प्रक्रिया : जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त पार्षद के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा वार्ड पार्षद की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है। इस प्रक्रिया का संचालन वैसे ही किया जाएगा जैसा सरपंच के लिए बताया गया है।
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(17) शिकायतों की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों का गठन
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 20.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(17.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 25 से 50 आयु वर्ग के 60 लोगो को चुनेगा और इसमें से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक प्रत्येक तहसील के लिए एक तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति भी करेगा। तहसील जूरी प्रशासक अपनी तहसील में 20 सदस्यीय तहसील महाजूरी मंडल का गठन करेंगे। तहसील महाजूरी मंडल के गठन के लिए तहसील की मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाएगा । जूरी मंडल के गठन एवं बैठको की शेष प्रक्रिया जिला महाजूरी मंडल के समान ही रहेगी।
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(17.3) यदि धारा धारा 01 एवं धारा 02 में दिए गए किसी भी अधिकारी / जनप्रतिनिधि या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई नागरिक शिकायत है तो वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित तहसील / जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है।
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(17.4) तहसील स्तर के अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों की शिकायतें तहसील के महाजूरी मंडल में की जायेगी, तथा इसकी अपील जिला महाजूरी मंडल में होगी। तहसील स्तर की जूरी का गठन तहसील की मतदाता सूचियों से एवं अपील की जूरी का गठन जिले की मतदाता सूचियों से किया जाएगा।
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(18) जूरी मंडल द्वारा शिकायतों की सुनवाई :
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(18.1) यदि किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ महाजूरी मंडल द्वारा एक से अधिक शिकायतें स्वीकृत कर ली जाती है, महाजूरी मंडल सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ जितनी शिकायतें आई है उनकी सुनवाई 15 दिन में एक बार ही होगी। उदाहरण के लिए यदि पटवारी या तहसीलदार के खिलाफ 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जितनी शिकायतें है उनकी सुनवाई 16 तारीख को और 16 तारीख के बाद में आई शिकायतों की सुनवाई महीने के आखिरी दिन होगी।
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(18.2) जब वादीगण शिकायत लिखेंगे तो अनिवार्य रूप से इसमें यह भी दर्ज करेंगे कि उन्हें इसका क्या समाधान चाहिए। साथ ही वे अधिकारी / जनप्रतिनिधि पर कोई आर्थिक दंड लगाने की मांग भी इसमें लिख सकते है। जुर्माने या क्षतिपूर्ति की मांग करने पर वे इसकी सीमा भी अपनी शिकायत में लिखेंगे।
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(18.3) मामला सुनने के बाद महाजूरी मंडल बहुमत से अपना फैसला देगा। यदि जुर्माना लगाया गया है तो यह जुर्माना अधिकारी / जनप्रतिनिधि के वेतन से काट लिया जायेगा। यदि जुर्माने की राशि अमुक अधिकारी के वेतन के 50% से अधिक है तो कम से कम दो तिहाई जूरी सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी । अधिकारी को नौकरी से निकालने एवं ट्रांसफर करने का फैसले को कम से कम 75% जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
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(18.4) यदि सुनवाई के दौरान महाजूरी मंडल के सदस्य यह पाते है कि वादीगण ने झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किया है, या शिकायत एकदम मनगड़ंत एवं फर्जी थी तो समय खराब करने के एवज में जूरी सदस्य शिकायतकर्ताओ पर भी जुर्माना लगा सकते है।
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(18.5) महाजूरी मंडल के फैसले के खिलाफ यदि कोई भी पक्षकार अपील दायर करता है तो जिला महाजूरी मंडल जिले की मतदाता सूचियों में से एक नयी जूरी का गठन करेगा। इस जूरी का आकार उस जूरी मंडल से बड़ा होगा जिस जूरी मंडल ने इस मामले की सुनवाई करके फैसला दिया था वह जूरी प्रशासक के सामने अपील दायर कर सकता है। जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(18.6) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। अपील की जूरी में दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(19) जूरी मंडलों के फैसलों का पालन : जूरी मंडल के फैसले परामर्श कारी होंगे । मुख्यमंत्री या सम्बंधित विभाग का मंत्री जूरी मंडल द्वारा दिए गए किसी फैसले में संशोधन कर सकते है, उसमे बदलाव कर सकते है, या उसे पूरी तरह से पलट सकते है। किन्तु मंत्री स्तर से कम का कोई भी अधिकारी जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले में बदलाव नहीं कर सकेगा। जूरी द्वारा यदि किसी अधिकारी को दोषी ठहराया जाता है तो इसे अधिकारी का मूल्यांकन करने वाली सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा, तथा पदोन्नति, स्थानांतरण आदि के मूल्यांकन में इस तथ्य को आधार माना जाएगा।
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(20) जनता की आवाज :
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(20.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(20.2) यदि कोई मतदाता धारा 20.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 20.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित चित्तौड़गढ़ जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापे - #ChittorgarhJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - # ChittorgarhJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले समान सोच वाले कर्तव्यनिष्ठ नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। निजी इमारतों में सभाएं रखने से मीटिंग के आयोजन पर वे नेता नुमा कार्यकर्ता नियन्त्रण बना लेंगे जो स्थान आदि की व्यवस्था करेंगे। और तब वे सच्चे कार्यकर्ताओ को अलग-थलग करने में सफल हो जायेंगे।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (20) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Sep 04 2019 20:16:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हिसार जूरी पंचायत – हिसार की पंचायतो एवं स्थानीय प्रशासन को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Hisar Jury Panchayat - Proposal to Improve Panchayat & Local Administration
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कानून का सार : यह कानून हिसार जिले की पंचायतो एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। मुख्यमंत्री इस क़ानून को हरियाणा के अन्य जिलों में भी लागू कर सकते है , या पूरे प्रदेश में भी लागू कर सकते है
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इस कानून में ऐसी कई प्रक्रियाएं है जो स्थानीय प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है और ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे अधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी। इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री भी लोकसभा से पारित कर सकते है।
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हिसार जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप हिसार में जूरी पंचायत क़ानून चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित हिसार जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापें - #HisarJuryPanchayat , #VoteVapsiPassBook , #P20180436110
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है.
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर हिसार जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम हिसार जिले की वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के अलावा धारा (01) में दिए गए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी मंडल में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको इन 11 अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप अमुक आरोपी पर जुर्माना लगा सकते है :
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1. पटवारी
2. गिरदावर
3. ग्राम विकास अधिकारी ( पंचायत सचिव )
4. तहसीलदार
5. जिला परिषद सचिव
6. नगर परिषद सचिव
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(03) यदि आपका नाम हिसार जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, या उपरोक्त में से किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते है तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा ( 20.1 ) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे जिले / मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिपण्णी : इस क़ानून में जिले शब्द का आशय है हरियाणा का हिसार जिला। इस क़ानून में जहाँ भी पार्षद शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है - नगर पालिका , नगर परिषद का पार्षद। इस क़ानून में सभापति शब्द से आशय है - नगर पालिका, नगर परिषद का सभापति। इस क़ानून में प्रधान शब्द से आशय है - तहसील पंचायत समिती का प्रधान। इस क़ानून में जिला प्रमुख से आशय है - जिला पंचायत का प्रमुख। ]
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(04) पटवारी कार्यालयों को सुचारू एवं व्यवस्थित करने के लिए यह क़ानून पारित होने के बाद मुख्यमंत्री निम्नलिखित कार्यो को दी गयी समय सीमा में पूरा किया जाना सुनिश्चित करेंगे :
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(4.1) जिले के खाली पड़े पटवारी के सभी पदों पर पटवारियों की नियुक्ति की जायेगी। यदि नयी भर्ती की आवश्यकता है तो भर्ती की प्रक्रिया अगले 180 दिनों में पूर्ण कर ली जानी चाहिए।
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(4.2) यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर प्रत्येक पटवार खाने का अनिवार्य रूप से कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कम्प्यूटर में दक्ष लिपिकों की नियुक्ति करके पटवारी के स्टाफ का दायरा बढाया जायेगा। पटवारी को शामिल करते हुए पटवारी कार्यालय का न्यूनतम स्टाफ 4 व्यक्तियों का होगा। यह सभी नियुक्तियां यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर कर ली जानी चाहिए।
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(4.3) जब पटवारी फील्ड में है तब भी पटवारी कार्यालय अनिवार्य रूप से 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुला रहेगा।
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(4.4) जिन पटवार खानो में पर्याप्त कमरे इत्यादि नहीं है उनके लिए आवश्यक भवन निर्माण किया जाएगा एवं यह निर्माण इस क़ानून के पारित होने के 3 वर्षो के अंदर कर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस क़ानून के गेजेट में आने के 6 माह के भीतर सभी पटवार खानों को उन्नत किये जाने का प्रोजेक्ट विधानसभा में रखेंगे जिसमें यह ब्यौरा होगा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए कितने पटवारी कार्यालयो को किस क्रम से उन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट के साथ ही अनिवार्य रूप से इसके लिए बजट भी पास करेंगे।
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(4.5) पटवारी एक मोबाईल एप / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया एकाउंट / व्हाट्स एप नंबर सार्वजनिक करेगा, ताकि उसके क्षेत्र के मतदाता अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करवा सके।
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(4.6) यदि कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में या धारा 01 एवं 02 में लिखे गए अधिकारियों / जनप्रतिनिधियों को किसी कार्य के लिए कोई एप्लीकेशन देता है और यदि एप्लीकेशन पर सार्वजनिक करें दर्ज करता है, तो यह प्रार्थना पत्र सार्वजनिक किया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहा है तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक की गयी जो नागरिक शिकायतें पेंडिंग है और जो कार्य पूर्ण हो चुके है, उनकी अद्यतन जानकारी व्यवस्थित रूप से कार्यालय के सूचना पट्ट पर बिना मांगे उपलब्ध रहेगी एवं इसे प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी। यदि यह जानकारी स्वत: सार्वजनिक नहीं की जाती है तो यह माना जायेगा कि, इन्हें छिपाया गया है।
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(4.7) धारा 02 में दिए गए अधिकारी सभी नागरिक शिकायतों एवं नागरिक प्रार्थना पत्रों का निपटान सिलसिलेवार करेंगे। यदि वे क्रम का उलंघन करते है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण लिखित में देना होगा। उदाहरण के लिए , मान लीजिये कि पटवारी या तहसीलदार के पास सोमवार को एक व्यक्ति A नकल निकलवाने का प्रार्थना पत्र देता है, तथा B नक़ल निकलवाने का प्रार्थना पत्र मंगलवार को देता है। चूंकि इन दोनों अर्जियों की प्रकृति एक जैसी है अत: अधिकारी पहले सोमवार को लगाई गयी अर्जी का निस्तारण करेगा। यदि अधिकारी A से पहले B की नकल निकाल देता है तो उसे अनिवार्य रूप से यह दर्ज करना होगा कि क्यों B की अर्जी पर पहले काम किया गया।
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(05) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा, जो कि उसके क्षेत्र की मतदाता संख्या पर निर्भर करेगा। सरपंच अधिकतम 5 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 3 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 2 पंचायत से जीत जाता है तो वह 80,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(06) इस क़ानून के पारित होने के बाद नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 मासिक से 25,000 होगा। पार्षद किन्ही 3 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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(07) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 एवं अधिकतम 80,000 होगा।
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[ सरपंच का वेतन बढाने का स्पष्टीकरण 1* : इस क़ानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक, परीक्षण चुनाव एवं सह चुनाव के दायरे में लाया गया है। इस वजह से सरपंच की भ्रष्टाचार से होने वाली संभावित आय में भारी गिरावट आएगी। यदि वह गलत तरीके से काम कर रहा है तो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेगा, और उसके क्षेत्र के मतदाता वोट वापसी का प्रयोग करके 5 वर्ष से पहले ही उसे निकाल कर किसी दुसरे को सरपंच बना सकेंगे। इसके अलावा यदि उसके खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी और जूरी उस पर जुर्माना लगा सकती है। तो जब हम सरपंच पर ऐसे क़ानून डाल रहे है कि वह अवैध रूप से पैसा नहीं बना सके, तो हमें वेतन बढाने की जरूरत है। वर्ना यह सरपंच प्रत्याशीयों के साथ अन्याय होगा।
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यदि वेतन नहीं बढ़ाया गया तो हमें ऐसे उम्मीदवार नहीं मिलेंगे जो ईमानदारी से कार्य करना चाहते है। वे सोचेंगे कि यदि मैं जीत भी जाता हूँ तो मुझ पर जिम्मेदारी आ जायेगी और जिम्मेदारी निभाने के एवज में मुझे कोई आर्थिक व्यय भी नहीं मिलेगा। और ठीक यही स्थिति पार्षद एवं सभापति के साथ होगी। इसीलिए इनके वेतन में इजाफा किया गया है। राज्य के अन्य जिलो के सरपंचो एवं पार्षदों का वेतन वही रहेगा जो उन्हें आज मिल रहा है।
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5 जगह का सरपंच बनने की छूट देने का स्पष्टीकरण 2* : यदि हमें सरपंच के पद के लिए बेहतर उम्मीदवार चाहिए तो इसके पदोन्नति के अवसर खोलने होंगे। सरपंच एवं विधायक के बीच काफी फासला होता है। यदि सरपंच के पास आस पास के 5 गाँवों का सरपंच बनने का अवसर होगा तो वह ज्यादा बेहतर ढंग से काम करना शुरू करेगा ताकि अन्य गाँवों में भी उसकी ख्याति जाए और वह वहां से भी चुना जा सके। और तब उसे वेतन भी 5 पंचायतो के बराबर मिलेगा।
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इससे सरपंच इस तरह का सिस्टम खड़ा करने की दिशा में काम करना शुरू करेंगे कि नागरिको की शिकायतों का तुरंत निपटान हो और उन्हें धक्के खाने की जरूरत नहीं रहे। और ऐसे भी यदि किसी पंचायत क्षेत्र के मतदाता यह पाते है कि अमुक सरपंच ने उसकी पंचायत में काफी बेहतर काम किया है, तो वे अमुक सरपंच को अपनी पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दे सकते है। ]
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(08) पार्षद अपने वार्ड में प्रत्येक दुसरे एवं चौथे रविवार ( 2nd & 4th Sunday ) को सांय 4 बजे एक नागरिक सभा का आयोजन करेगा। सभापति इसके लिए वार्ड में स्थित किसी सार्वजानिक कम्युनिटी सेंटर, स्कूल आदि में स्थान की व्यवस्था कराएगा। यदि वार्ड में नगर परिषद के क्षेत्राधिकार का भवन मौजूद है तो सभा इसी स्थल पर आयोजित होगी, और स्थान व समय किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाएगा।
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(8.1) किसी व्यक्ति को यदि नगर परिषद के क्षेत्राधिकार एवं अपने वार्ड से सम्बंधित कोई शिकायत या सुझाव पार्षद के सम्मुख रखना है तो वह सभा में उपस्थित होकर अपनी शिकायत या सुझाव आदि पार्षद को लिखकर दे सकता है। शिकायतकर्ता अनिवार्य रूप से अपने मतदाता पहचान पत्र की फोटो कॉपी अपनी एप्लीकेशन के साथ सलंग्न करेगा।
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(8.2) इस सभा में जितनी भी शिकायतें / सुझाव आयेंगे उन्हें पार्षद एक सीरियल नंबर देगा और उन्हें स्वीकार करके नगर परिषद द्वारा जारी (Allote) किये गए अपने रजिस्टर में क्रम से दर्ज कर लेगा। पार्षद एप्लीकेशन लेने के बाद अपनी छाप लगाकर हस्ताक्षर युक्त एक पावती ( Receiving ) भी देगा। पार्षद अगली सभा से पहले पूर्व सभा के ब्यौरे सभापति कार्यालय में अग्रेषित कर देगा।
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(8.3) नागरिक यह एप्लीकेशन सभापति कार्यालय में भी दे सकता है। सभापति द्वारा नियुक्त क्लर्क 5 रू प्रति पृष्ठ की दर से इसे स्कैन करके सभापति की वेबसाईट पर नागरिक शिकायतों के सेक्शन में रख देगा। सभापति इस तरह का सिस्टम बना सकते है कि नगर के मतदाता अपने वार्ड या नगर के लिए दी गयी किसी एप्लीकेशन पर अपनी सहमति दर्ज कर सके।
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(9) अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) सरपंच एवं पार्षद : यदि कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार अमुक पद के लिए तय जमा राशि लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा। तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर अपलोड करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। पार्षद अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करेगा।
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(9.2) प्रधान, सभापति एवं जिला प्रमुख : यदि कोई मतदाता प्रधान, सभापति या जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किसी भी दिन अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। प्रधान एवं सभापति के लिए जमानत राशि विधायक के बराबर एवं जिला प्रमुख के लिए यह राशि सांसद की जमानत राशि के बराबर होगी। कलेक्टर शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाईट पर रखेगा और प्रत्याशियों को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक : जिले का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद का आवेदन करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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(10) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(10.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(10.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा
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(10.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(11) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परिक्षण -चुनाव की शर्तें :
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(11.1) यदि कोई प्रत्याशी निचे लिखी गयी 3 शर्तें पूरी कर लेता है तो सरपंच इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री से विनती कर सकता है कि वे अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव ( Test-Election ) आयोजित करें । यदि सरपंच 7 दिनों के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है, या नहीं भी ले सकते है।
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(11.1.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(11.1.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(11.1.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सरपंच के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% से अधिक भी है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण-चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 2000+500=2500 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 2400 स्वीकृतियां मिल जाती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा और मौजूदा सरपंच को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । किन्तु यदि किसी प्रत्याशी को 2500 से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो सरपंच इस्तीफा दे सकता है या मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है।
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(11.2) नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी शर्तें यही होगी जो धारा (11.1) में सरपंच के लिए बतायी गयी है।
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(12) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण-चुनाव की प्रक्रिया :
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यदि धारा (11.1) में बतायी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है, तो परिक्षण-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। परिक्षण चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(12.1) मतपत्र पर कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को इस चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 5 प्रत्याशियों को जमानत राशि देकर नामांकन पत्र दाखिल करना होगा।
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(12.2) यदि परिक्षण-चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी शर्तें पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(12.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक वोट प्राप्त हो जाते है।
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(12.2.2) यदि ये वोट सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2,500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 2,500+500=3,000 वोट लाने होंगे। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2,500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि सह-चुनाव में कोई प्रत्याशी 2,500 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को 1,500 वोट ही मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा।
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(12.3) नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परीक्षण चुनाव : पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी ठीक उसी समीकरण ( फार्मूले ) का पालन किया जाएगा जो धारा 12.2 में सरपंच के लिए बताया गया है।
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(13) प्रधान, जिला प्रमुख एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(13.1) तहसील प्रधान के लिए : यदि किसी पंचायत समिती की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता प्रधान के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा प्रधान की स्वीकृतियों से 5% अधिक भी है तो मौजूदा प्रधान इस्तीफा दे सकता है । यदि प्रधान 7 दिवस में इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृतियां पाने वाले प्रत्याशी की नियुक्ति प्रधान के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.2) जिला प्रमुख के लिए : यदि किसी जिले की समस्त पंचायत समितियों की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला पंचायत प्रमुख के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जिला प्रमुख की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी की नियुक्ति जिला प्रमुख के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.3) जिला जूरी प्रशासक : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक व्यक्ति को जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(14) सभापति की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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सभापति को बदलने के लिए किसी प्रत्याशी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होगी -
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(14.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(14.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति को चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(14.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सभापति के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 2% से अधिक भी है।
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यदि सभापति का कोई प्रत्याशी उपरोक्त तीनो शर्तें पूरी कर लेता है तो सभापति इस्तीफा दे सकता है। यदि सभापति 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकालकर परिक्षण चुनाव करवाने का आदेश जारी कर सकते है। परिक्षण चुनाव की प्रक्रिया एवं उसमे जीत हार का समीकरण वही रहेगा जैसा धारा (12.2) में बताया गया है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी किसी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 2,00,000 मतदाता है, और चुनाव में मौजूदा सभापति को 70,000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण चुनाव सिर्फ तब संचालित किया जाएगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 70,000+4,000=74,000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 2 लाख है अत: इसका 2% = 4,000 को 70,000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 72,000 स्वीकृतियां मिलती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा।
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(15) सरपंच एवं पार्षद के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(15.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है।
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(15.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (12.2) में सरपंच के परिक्षण चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को सह-चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। सह चुनाव में भी पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। जीत हार का समीकरण ( फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा परिक्षण चुनाव में बताया गया है।
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16. पार्षद के लिए सह-चुनाव की प्रक्रिया : जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त पार्षद के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा वार्ड पार्षद की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है। इस प्रक्रिया का संचालन वैसे ही किया जाएगा जैसा सरपंच के लिए बताया गया है।
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(17) शिकायतों की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों का गठन
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 20.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(17.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 25 से 50 आयु वर्ग के 60 लोगो को चुनेगा और इसमें से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक प्रत्येक तहसील के लिए एक तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति भी करेगा। तहसील जूरी प्रशासक अपनी तहसील में 20 सदस्यीय तहसील महाजूरी मंडल का गठन करेंगे। तहसील महाजूरी मंडल के गठन के लिए तहसील की मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाएगा । जूरी मंडल के गठन एवं बैठको की शेष प्रक्रिया जिला महाजूरी मंडल के समान ही रहेगी।
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(17.3) यदि धारा धारा 01 एवं धारा 02 में दिए गए किसी भी अधिकारी / जनप्रतिनिधि या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई नागरिक शिकायत है तो वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित तहसील / जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है।
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(17.4) तहसील स्तर के अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों की शिकायतें तहसील के महाजूरी मंडल में की जायेगी, तथा इसकी अपील जिला महाजूरी मंडल में होगी। तहसील स्तर की जूरी का गठन तहसील की मतदाता सूचियों से एवं अपील की जूरी का गठन जिले की मतदाता सूचियों से किया जाएगा।
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(18) जूरी मंडल द्वारा शिकायतों की सुनवाई :
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(18.1) यदि किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ महाजूरी मंडल द्वारा एक से अधिक शिकायतें स्वीकृत कर ली जाती है, महाजूरी मंडल सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ जितनी शिकायतें आई है उनकी सुनवाई 15 दिन में एक बार ही होगी। उदाहरण के लिए यदि पटवारी या तहसीलदार के खिलाफ 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जितनी शिकायतें है उनकी सुनवाई 16 तारीख को और 16 तारीख के बाद में आई शिकायतों की सुनवाई महीने के आखिरी दिन होगी।
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(18.2) जब वादीगण शिकायत लिखेंगे तो अनिवार्य रूप से इसमें यह भी दर्ज करेंगे कि उन्हें इसका क्या समाधान चाहिए। साथ ही वे अधिकारी / जनप्रतिनिधि पर कोई आर्थिक दंड लगाने की मांग भी इसमें लिख सकते है। जुर्माने या क्षतिपूर्ति की मांग करने पर वे इसकी सीमा भी अपनी शिकायत में लिखेंगे।
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(18.3) मामला सुनने के बाद महाजूरी मंडल बहुमत से अपना फैसला देगा। यदि जुर्माना लगाया गया है तो यह जुर्माना अधिकारी / जनप्रतिनिधि के वेतन से काट लिया जायेगा। यदि जुर्माने की राशि अमुक अधिकारी के वेतन के 50% से अधिक है तो कम से कम दो तिहाई जूरी सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी । अधिकारी को नौकरी से निकालने एवं ट्रांसफर करने का फैसले को कम से कम 75% जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
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(18.4) यदि सुनवाई के दौरान महाजूरी मंडल के सदस्य यह पाते है कि वादीगण ने झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किया है, या शिकायत एकदम मनगड़ंत एवं फर्जी थी तो समय खराब करने के एवज में जूरी सदस्य शिकायतकर्ताओ पर भी जुर्माना लगा सकते है।
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(18.5) महाजूरी मंडल के फैसले के खिलाफ यदि कोई भी पक्षकार अपील दायर करता है तो जिला महाजूरी मंडल जिले की मतदाता सूचियों में से एक नयी जूरी का गठन करेगा। इस जूरी का आकार उस जूरी मंडल से बड़ा होगा जिस जूरी मंडल ने इस मामले की सुनवाई करके फैसला दिया था वह जूरी प्रशासक के सामने अपील दायर कर सकता है। जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(18.6) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। अपील की जूरी में दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(19) जूरी मंडलों के फैसलों का पालन : जूरी मंडल के फैसले परामर्श कारी होंगे । मुख्यमंत्री या सम्बंधित विभाग का मंत्री जूरी मंडल द्वारा दिए गए किसी फैसले में संशोधन कर सकते है, उसमे बदलाव कर सकते है, या उसे पूरी तरह से पलट सकते है। किन्तु मंत्री स्तर से कम का कोई भी अधिकारी जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले में बदलाव नहीं कर सकेगा। जूरी द्वारा यदि किसी अधिकारी को दोषी ठहराया जाता है तो इसे अधिकारी का मूल्यांकन करने वाली सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा, तथा पदोन्नति, स्थानांतरण आदि के मूल्यांकन में इस तथ्य को आधार माना जाएगा।
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(20) जनता की आवाज :
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(20.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(20.2) यदि कोई मतदाता धारा 20.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 20.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित हिसार जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापे - #HisarJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :

@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - # HisarJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले समान सोच वाले कर्तव्यनिष्ठ नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। निजी इमारतों में सभाएं रखने से मीटिंग के आयोजन पर वे नेता नुमा कार्यकर्ता नियन्त्रण बना लेंगे जो स्थान आदि की व्यवस्था करेंगे। और तब वे सच्चे कार्यकर्ताओ को अलग-थलग करने में सफल हो जायेंगे।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (20) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 06 2019 15:25:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

और बचाव में सिपाही जज की अच्छी ख़ासी मरम्मत कर सकता था

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 06 2019 22:17:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

आज नागरिक कर्तव्य दिवस ( हर महीने के 5 तारीख ) के उपलक्ष पर देश के सरकारी स्कूलों , सरकारी हॉस्पिटलों, पुलिस थानों, मीडिया, सेंसरबोर्ड अध्यक्ष, सीबीआई, सेना को मजबूत करने व भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री जी को #रिगो कानून के ड्राफ्ट की चिट्ठी भेजी ।

यह कानून का गैजेट नोटिफिकेशन जारी होने से देश की लगभग 50 % समस्या ही खत्म हो जाएगी ।

अतः हर जिम्मेदार नागरिक को देश मे व्यवस्था परिवर्तन के लिए जो कानून लागू करवाने होते है उसका प्रधानमंत्री जी को चिट्ठी या पोस्टकार्ड लिख कर भेजना चाहिए ।

आप #रिगो कानून की अधिक जानकारी इस लिंक से प्राप्त करे ।

<https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1229724353853400&id=100004475405849>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 06 2019 22:25:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत ने जब अपनी सेना अमेरिका के हवाले की थी तब यह कार्टून बनाया गया था. मोदी साहेब के अब तक के पूरे कार्यकाल पर यह सबसे सटीक टिप्पणी है. इससे आगे कहने को कुछ रह नहीं जाता. कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य ने सारे प्रोपेगेंडा को एक ही चित्र से ध्वस्त कर दिया है.

Kistura Ram Choudhary:

जो बात बात पर बोलते है कि हमारी सैना मजबुत है वो जरा इस सच्चाई को समझने कि कोशिश करे

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Sep 07 2019 19:17:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राइट टू रिकॉल पार्टी - सदस्यता आवेदन फॉर्म :
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सदस्यता आवेदन फॉर्म छपवाने का पीडीऍफ़ इस लिंक से डाउनलोड किया जा सकता है - <https://www.facebook.com/groups/RtrFiles/permalink/2410127799271739/>;
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कुछ ही हफ्तों में इसका ऑनलाइन वर्जन भी आ जाएगा। तब आप ऑनलाइन फॉर्म भरकर भी सदस्यता ले सकते है। ये ऑफलाइन वर्जन है, प्रिंट आउट निकालने और छपवाने के लिए है।
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राइट टू रिकॉल पार्टी - सदस्यता आवेदन फॉर्म :
Rg. No : 56/436/2018-2019/PPS1
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F1A, Supath-2 Complex , Opp Juna Vadaj Bus Stand, Ashram Road, Ahmedabad – 380013.
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स्थानीय इकाई या कार्यकर्ता का संपर्क सूत्र :
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(1) राईट टू रिकॉल पार्टी का एजेंडा :
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1.1. राईट टू रिकॉल पार्टी का मुख्य एजेंडा उन क़ानून ड्राफ्ट्स को गेजेट में छपवाना है जिससे देश की विभिन्न सम्स्स्याओ का समाधान आये। इसमें से कुछ मुख्य बिंदु निम्न है -
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1. थानों एवं अदालतों को सुधारने के लिए "जूरी कोर्ट" की स्थापना करना
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2. सरकारी स्कूलों एवं सरकारी अस्पतालों को बेहतर करने के लिए "रिगो" क़ानून लागू करवाना।
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3. हथियारों के उत्पादन में सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए "वोइक" क़ानून गेजेट में निकलवाना
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4. खनिजों की लूट रोकने के लिए प्रत्येक नागरिक को "धनवापसी पासबुक" जारी करवाना।
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5. फैक्ट्रियों में उत्पादन की गति बढ़ाने के लिए जीएसटी हटाकर "संपत्ति कर" लागू करना
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6. हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने के लिए "हिन्दू बोर्ड" का क़ानून गेजेट में निकलवाना
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भारत में पिछले 20 वर्षो से कई कार्यकर्ता इन कानून ड्राफ्ट्स को गेजेट में छपवाने के लिए जन आन्दोलन चला रहे है। अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरणा लेने वाला यह एक विकेन्द्रित आन्दोलन है और राईट टू रिकॉल पार्टी इसी जन आन्दोलन का एक हिस्सा है। पार्टी के मेनिफेस्टो का प्रथम संस्करण 2008 में जारी किया गया था।
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1.2. राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ता किसी भी प्रकार की घोषणाओं एवं अस्पष्ट वादों में नहीं मानते है, बल्कि सिर्फ कानून ड्राफ्ट में मानते है। अत: पार्टी के मेनिफेस्टो में सिर्फ क़ानून ड्राफ्ट है, और क़ानून ड्राफ्ट के अलावा कुछ नहीं है। राईट टू रिकॉल पार्टी किसी भी प्रकार की विचारधारा में भी नहीं मानती है, सिर्फ क़ानूनड्राफ्ट धारा में मानती है। पार्टी के कार्यकर्ताओ एवं पार्टी का मूल उद्देश्य इन क़ानून ड्राफ्ट्स की जानकारी नागरिको तक पहुँचाना है ताकि इन्हें गेजेट में छपवाने के लिए मांग खड़ी की जा सके।
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1.3. नागरिको से विनती : पाठको से आग्रह है कि वे पार्टी द्वारा प्रस्तावित प्रमुख ड्राफ्ट्स का अध्ययन करें। आपको जिस भी कार्यकर्ता ने यह फॉर्म दिया है आप उनसे इसका प्रिंट वर्जन भी मांग सकते है, वे आपको क़ानून ड्राफ्ट का छपा हुआ पेम्पलेट उपलब्ध करवाएंगे।
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(2) प्रचार का तरीका
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पार्टी के कार्यकर्ता प्रचार के लिए विकेन्द्रित तरीको का प्रयोग करते है, अत: प्रचार में पेड मीडिया का इस्तेमाल नहीं किया जाता। पेड मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ विज्ञापन देने में किया जाता है। विकेन्द्रित तरीको में पर्चे बांटना, बैनर लगाना, नागरिक सभाएं करना, सोशल मीडिया आदि शामिल है। यदि आप राईट टू रिकॉल पार्टी के बारे में किसी भी टीवी/ अख़बार आदि में कोई खबर/ सूचना /विश्लेष्ण आदि देखें और यदि यह विज्ञापन के रूप में नहीं है, तो हमारा सुझाव है कि इसे गंभीरता से न ले और इसकी अवहेलना करें।
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पार्टी के सदस्य अपनी गतिविधियों आदि के बारे में सूचनाएं प्रकाशित कराने के लिए समाचार पत्रों के दफ्तरों में जाकर लॉबीइंग नहीं करते है। अत: यदि पेड मीडिया पार्टी के बारे में अच्छी खबरें प्रकाशित करता है, तब भी इस पर ध्यान न दें। हम नागरिको तक पहुँचने और संवाद करने के लिए कार्यकर्ताओं के विकेन्द्रित नेटवर्क का ही इस्तेमाल करते है। हालांकि यह तरीका धीमा है, पर हम इसी तरीके में मानते है।
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(3) प्रधानमंत्री जी से मांग करना :
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भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह Pm / Cm को चिट्ठी भेजकर उन कानूनों की मांग करें, जिनका वे समर्थन करते है। साथ ही My Letters To Pm नाम से एक नोटबुक बनाए और भेजी गयी चिट्ठियों की फोटो कॉपी का इसमें रिकॉर्ड भी रखें। पार्टी के सदस्यों से यह आशा की जाती है कि वे अपना नागरिक कर्तव्य अनिवार्य रूप से पूरा करेंगे। हमारा सुझाव है कि चिठ्ठी महीने की 5 तारीख को भेजी जानी चाहिए।
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(4) निष्कासन सम्बन्धी नियम :
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राईट टू रिकॉल पार्टी में सदस्यता स्वैच्छिक है, और एक बार सदस्य बनने के बाद पार्टी आपको किसी भी तरह से निष्काषित नहीं कर सकती है। पार्टी के पास अनुशासन सम्बन्धी कार्यवाही करने के भी कोई अधिकार नहीं है। यदि आप पार्टी के टिकेट पर लड़ रहे उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करते है, या पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष आदि के खिलाफ किसी भी स्तर की आलोचना या खुला विरोध करते है, तब भी आपको पार्टी से निकाला नही जा सकता। पार्टी के मतदाता सदस्यों के पास वोटिंग राइट्स होते है, ताकि वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को शामिल करते हुए अन्य पदाधिकारियों को बदलने के लिए वोट कर सके।
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(5) पार्टी की कार्य शैली :
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5.1. पार्टी में सभी सदस्यों की हैसियत समान है, और सीनियर-जूनियर के आधार पर किसी भी व्यक्ति को कोई भी अतिरिक्त तवज्जो नहीं दी जाती। पार्टी या पार्टी के पदाधिकारीयों द्वारा सिर्फ सुझाव जारी किये जाते है, निर्देश नहीं। पार्टी द्वारा जारी सुझावो को पार्टी सदस्य मान भी सकते है, और नहीं भी मान सकते है। पार्टी का नेता क़ानून ड्राफ्ट है। और क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में ही सभी कार्यकर्ता काम करते है।
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5.2. पार्टी के कार्यकर्ता आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी 2nd Sunday को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। यह मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही रखी जानी चाहिए। इसके लिए कोई मंदिर / रेलवे-बस स्टेशन परिसर आदि चुना जा सकता है। दुसरे रविवार के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय और दिवस भी अपरिवर्तनीय है। पार्टी केन्द्रीय स्तर पर मीटिंग वगेरह करने के फोर्मेट पर काम नहीं करती है।
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(6) सदस्यता शुल्क एवं सहयोग :
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6.1. पार्टी की सदस्यता नि:शुल्क है। अत: पार्टी केन्द्रीय स्तर पर कोई सदस्यता शुल्क नहीं लेती है। स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार, स्थानीय प्रभारी या क़ानून ड्राफ्ट्स का प्रचार करने वाले कार्यकर्ता स्थानीय नागरिको से सहायता ले सकते है, और इसका ब्यौरा फेसबुक आदि पर रख सकते है। स्थानीय स्तर पर नागरिको से सहायता ग्रहण करने वाले कार्यकर्ता पार्टी के नाम से कोई रसीद वगेरह नहीं देते है।
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6.2. यदि आप पार्टी को कोई सहयोग देना चाहते है तो स्थानीय स्तर पर जो कार्यकर्ता पार्टी की और से चुनाव लड़ते है या कानूनों का प्रचार करते है उन्हें सहयोग कर सकते है। स्थानीय कार्यकर्ता प्रचार की गतिविधियाँ संचालित करने के लिए अपने स्तर पर एवं अपनी जिम्मेदारी पर नागरिको से सहायता ग्रहण कर सकते है । यदि कोई व्यक्ति पार्टी के टिकेट पर चुनाव लड़ता है तो पार्टी न तो किसी भी रूप में उसे कोई आर्थिक सहायता देती है, और न ही किसी भी रूप में कोई आर्थिक सहायता लेती है। नागरिको से आशा की जाती है कि वे ऐसे कार्यकर्ताओं को सहयोग दें जो संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर रहे है, और आय व्यय का व्यवस्थित ब्यौरा पारदर्शी तरीके से फेसबुक आदि सार्वजनिक मंचो पर रखते है।

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राइट टू रिकॉल पार्टी - सामान्य सदस्यता आवेदन फॉर्म
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Rg. No : 56/436/2018-2019/PPS1 , Serial No. :
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राष्ट्रिय महासचिव महोदय ,
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मैं राइट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित मुख्य क़ानून ड्राफ्ट्स का समर्थन करता हूँ और स्वैच्छिक रूप से सदस्य बन कर पार्टी द्वारा प्रस्तावित कानूनों का प्रचार करने का इच्छुक हूँ ।
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(कृपया निम्नलिखित जानकारी अंग्रेजी या हिन्दी में स्वच्छ अक्षरों में भरें)
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1. Name :
2. Father’s Name
3. Voter ID no.
4. Part no.
5. Serial no.
6. Address :
7. Tehsil :
8. Ward no.
9. District :
10. Pin code
11. State :
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यदि आप इंटरनेट या स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते है तो निम्नलिखित जानकरियां दें :
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1. Email :
2. Facebook :
3. Twitter
4. Quora :
5. WhatsApp ( optional )
6. Telegram
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(i) घोषणा : मैं निम्न प्रस्तावित कानूनों का समर्थन करता हूँ तथा मैंने ख़त भेजकर प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से इसकी मांग की है
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[ जिन क़ानून ड्राफ्ट्स की मांग करने के लिए आपने प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी को पोस्टकार्ड भेजा है उसके सामने (✔) का निशान लगाए। कम से कम 2 या 2 से अधिक कानूनों को चिन्हित करें। ]
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1. धनवापसी पासबुक #DhanVapsiPassbook
2. इवीएम हटाओ #CancleEvm
3. जूरी कोर्ट #JuryCourt
4. हिन्दू बोर्ड #HinduBoard
5. वोइक #Woic
6. गौ-नीति #GauNeeti
7. रिगो #Rego
8. संपत्ति कर #WealthTax
9. जूरी पंचायत #JuryPanchayat
10.
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1. क्या आपने My Letters to Pm / Cm नाम से रजिस्टर बनाया है ? (✔) का निशान लगाए

हाँ / नहीं
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2. क्या आपने भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड My Letters to Pm नामक नोटबुक में रखा है ? (✔) का निशान लगाए

हाँ / नहीं
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3. यदि आप फेसबुक पर है तो क्या आपने My Letters to Pm नामक फेसबुक एल्बम बनाया है ? (✔) का निशान लगाए

हाँ / नहीं
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4. रेफरेंस : उस कार्यकर्ता के बारे में निम्नलिखित जानकारी दें जिसने आपको उपरोक्त कानूनों के बारे में सूचना दी :
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1. कार्यकर्ता का नाम :
2. कार्यकर्ता का जिला :
3. कार्यकर्ता का राज्य :
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5. आपने कभी कोई चुनाव लड़ा है तो (✔) का निशान लगाए

हाँ / नहीं
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6. यदि आप भविष्य में पार्टी की और से चुनाव लड़ने के इच्छुक है तो निचे दिए किसी एक या एक से अधिक विकल्पों पर (✔) का निशान लगाए
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(a) सरपंच
(b) पार्षद
(c) विधायक
(d) सांसद
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(ii) घोषणा : राईट टू रिकॉल पार्टी की सदस्यता लेने के लिए ऊपर दी गयी जानकारी मैंने स्वैच्छिक रूप से प्रेषित की है, तथा मैं भारतीय संविधान द्वारा स्थापित मूल्यों का पालन करूँगा

………………………. ( आवेदक के हस्ताक्षर )

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_______________________
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निचे वाला कॉलम सदस्यता फॉर्म भरवाने वाले पार्टी के कार्यकर्ता द्वारा भरा जाएगा । फॉर्म भरवाने वाला कार्यकर्ता अपने बारे में निम्नलिखित जानकारियाँ दें :

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1. सदस्यता फार्म भरवाने वाले कार्यकर्ता का नाम :
2. सदस्यता फार्म भरवाने वाले का Voter ID no :
3. सदस्यता फार्म भरवाने वाले कार्यकर्ता का जिला :
4. सदस्यता फार्म भरवाने वाले कार्यकर्ता का राज्य :
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Sep 07 2019 19:35:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अहमदनगर जूरी पंचायत – पंचायतो एवं स्थानीय प्रशासन को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Ahmednagar Jury Panchayat - Proposal to Improve Panchayat & Local Administration
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कानून का सार : यह कानून अहमदनगर जिले की पंचायतो एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। मुख्यमंत्री यह क़ानून राज्य के एक से अधिक जिलो में लागू कर सकते है या पूरे प्रदेश के भी लागू कर सकते है। इस कानून में ऐसी कई प्रक्रियाएं है जो स्थानीय प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है और ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे अधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी।
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इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री भी लोकसभा से पारित कर सकते है।
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अहमदनगर जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप अहमदनगर में जूरी पंचायत क़ानून चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित अहमदनगर जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापें - #AhmednagarJuryPanchayat #VoteVapsiPassBook, #P20180436110
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस तरह का क़ानून लागू करने की मांग कर सकते है.
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर अहमदनगर जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम अहमदनगर जिले की वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के अलावा धारा (01) में दिए गए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी मंडल में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको इन 11 अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप अमुक आरोपी पर जुर्माना लगा सकते है :
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1. पटवारी
2. गिरदावर
3. ग्राम विकास अधिकारी ( पंचायत सचिव )
4. तहसीलदार
5. जिला परिषद सचिव
6. नगर परिषद सचिव
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(03) यदि आपका नाम अहमदनगर जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, या उपरोक्त में से किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते है तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा ( 20.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिपण्णी : इस क़ानून में जिले शब्द का आशय है महाराष्ट्र का अहमदनगर जिला।
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इस क़ानून में जहाँ भी पार्षद शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है - नगर पालिका , नगर परिषद एवं नगर निगम का पार्षद। इस क़ानून में सभापति शब्द से आशय है - नगर पालिका, नगर परिषद एवं नगर निगम का सभापति। इस क़ानून में प्रधान शब्द से आशय है - तहसील पंचायत समिती का प्रधान। इस क़ानून में जिला प्रमुख से आशय है - जिला पंचायत का प्रमुख। ]
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(04) पटवारी कार्यालयों को सुचारू एवं व्यवस्थित करने के लिए यह क़ानून पारित होने के बाद मुख्यमंत्री निम्नलिखित कार्यो को दी गयी समय सीमा में पूरा किया जाना सुनिश्चित करेंगे :
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(4.1) जिले के खाली पड़े पटवारी के सभी पदों पर पटवारियों की नियुक्ति की जायेगी। यदि नयी भर्ती की आवश्यकता है तो भर्ती की प्रक्रिया अगले 180 दिनों में पूर्ण कर ली जानी चाहिए।
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(4.2) यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर प्रत्येक पटवार खाने का अनिवार्य रूप से कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कम्प्यूटर में दक्ष लिपिकों की नियुक्ति करके पटवारी के स्टाफ का दायरा बढाया जायेगा। पटवारी को शामिल करते हुए पटवारी कार्यालय का न्यूनतम स्टाफ 4 व्यक्तियों का होगा। यह सभी नियुक्तियां यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर कर ली जानी चाहिए।
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(4.3) जब पटवारी फील्ड में है तब भी पटवारी कार्यालय अनिवार्य रूप से 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुला रहेगा।
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(4.4) जिन पटवार खानो में पर्याप्त कमरे इत्यादि नहीं है उनके लिए आवश्यक भवन निर्माण किया जाएगा एवं यह निर्माण इस क़ानून के पारित होने के 3 वर्षो के अंदर कर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस क़ानून के गेजेट में आने के 6 माह के भीतर सभी पटवार खानों को उन्नत किये जाने का प्रोजेक्ट विधानसभा में रखेंगे जिसमें यह ब्यौरा होगा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए कितने पटवारी कार्यालयो को किस क्रम से उन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट के साथ ही अनिवार्य रूप से इसके लिए बजट भी पास करेंगे।
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(4.5) पटवारी एक मोबाईल एप / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया एकाउंट / व्हाट्स एप नंबर सार्वजनिक करेगा, ताकि उसके क्षेत्र के मतदाता अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करवा सके।
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(4.6) यदि कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में या धारा 01 एवं 02 में लिखे गए अधिकारियों / जनप्रतिनिधियों को किसी कार्य के लिए कोई एप्लीकेशन देता है और यदि एप्लीकेशन पर सार्वजनिक करें दर्ज करता है, तो यह प्रार्थना पत्र सार्वजनिक किया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहा है तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक की गयी जो नागरिक शिकायतें पेंडिंग है और जो कार्य पूर्ण हो चुके है, उनकी अद्यतन जानकारी व्यवस्थित रूप से कार्यालय के सूचना पट्ट पर बिना मांगे उपलब्ध रहेगी एवं इसे प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी। यदि यह जानकारी स्वत: सार्वजनिक नहीं की जाती है तो यह माना जायेगा कि, इन्हें छिपाया गया है।
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(4.7) धारा 02 में दिए गए अधिकारी सभी नागरिक शिकायतों एवं नागरिक प्रार्थना पत्रों का निपटान सिलसिलेवार करेंगे। यदि वे क्रम का उलंघन करते है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण लिखित में देना होगा। उदाहरण के लिए , मान लीजिये कि पटवारी या तहसीलदार के पास सोमवार को एक व्यक्ति A नकल निकलवाने का प्रार्थना पत्र देता है, तथा B नक़ल निकलवाने का प्रार्थना पत्र मंगलवार को देता है। चूंकि इन दोनों अर्जियों की प्रकृति एक जैसी है अत: अधिकारी पहले सोमवार को लगाई गयी अर्जी का निस्तारण करेगा। यदि अधिकारी A से पहले B की नकल निकाल देता है तो उसे अनिवार्य रूप से यह दर्ज करना होगा कि क्यों B की अर्जी पर पहले काम किया गया।
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(05) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा, जो कि उसके क्षेत्र की मतदाता संख्या पर निर्भर करेगा। सरपंच अधिकतम 5 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 3 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 2 पंचायत से जीत जाता है तो वह 80,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(06) इस क़ानून के पारित होने के बाद नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 मासिक से 25,000 होगा। पार्षद किन्ही 3 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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(07) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 एवं अधिकतम 80,000 होगा।
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[ सरपंच का वेतन बढाने का स्पष्टीकरण 1* : इस क़ानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक, परीक्षण चुनाव एवं सह चुनाव के दायरे में लाया गया है। इस वजह से सरपंच की भ्रष्टाचार से होने वाली संभावित आय में भारी गिरावट आएगी। यदि वह गलत तरीके से काम कर रहा है तो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेगा, और उसके क्षेत्र के मतदाता वोट वापसी का प्रयोग करके 5 वर्ष से पहले ही उसे निकाल कर किसी दुसरे को सरपंच बना सकेंगे। इसके अलावा यदि उसके खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी और जूरी उस पर जुर्माना लगा सकती है।
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तो जब हम सरपंच पर ऐसे क़ानून डाल रहे है कि वह अवैध रूप से पैसा नहीं बना सके, तो हमें वेतन बढाने की जरूरत है। वर्ना यह सरपंच प्रत्याशीयों के साथ अन्याय होगा। यदि वेतन नहीं बढ़ाया गया तो हमें ऐसे उम्मीदवार नहीं मिलेंगे जो ईमानदारी से कार्य करना चाहते है। वे सोचेंगे कि यदि मैं जीत भी जाता हूँ तो मुझ पर जिम्मेदारी आ जायेगी और जिम्मेदारी निभाने के एवज में मुझे कोई आर्थिक व्यय भी नहीं मिलेगा। और ठीक यही स्थिति पार्षद एवं सभापति के साथ होगी। इसीलिए इनके वेतन में इजाफा किया गया है। राज्य के अन्य जिलो के सरपंचो एवं पार्षदों का वेतन वही रहेगा जो उन्हें आज मिल रहा है।
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5 जगह का सरपंच बनने की छूट देने का स्पष्टीकरण 2* : यदि हमें सरपंच के पद के लिए बेहतर उम्मीदवार चाहिए तो इसके पदोन्नति के अवसर खोलने होंगे। सरपंच एवं विधायक के बीच काफी फासला होता है। यदि सरपंच के पास आस पास के 5 गाँवों का सरपंच बनने का अवसर होगा तो वह ज्यादा बेहतर ढंग से काम करना शुरू करेगा ताकि अन्य गाँवों में भी उसकी ख्याति जाए और वह वहां से भी चुना जा सके। और तब उसे वेतन भी 5 पंचायतो के बराबर मिलेगा।
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इससे सरपंच इस तरह का सिस्टम खड़ा करने की दिशा में काम करना शुरू करेंगे कि नागरिको की शिकायतों का तुरंत निपटान हो और उन्हें धक्के खाने की जरूरत नहीं रहे। और ऐसे भी यदि किसी पंचायत क्षेत्र के मतदाता यह पाते है कि अमुक सरपंच ने उसकी पंचायत में काफी बेहतर काम किया है, तो वे अमुक सरपंच को अपनी पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दे सकते है। ]
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(08) पार्षद अपने वार्ड में प्रत्येक दुसरे एवं चौथे रविवार ( 2nd & 4th Sunday ) को सांय 4 बजे एक नागरिक सभा का आयोजन करेगा। सभापति इसके लिए वार्ड में स्थित किसी सार्वजानिक कम्युनिटी सेंटर, स्कूल आदि में स्थान की व्यवस्था कराएगा। यदि वार्ड में नगर परिषद के क्षेत्राधिकार का भवन मौजूद है तो सभा इसी स्थल पर आयोजित होगी, और स्थान व समय किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाएगा।
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(8.1) किसी व्यक्ति को यदि नगर परिषद के क्षेत्राधिकार एवं अपने वार्ड से सम्बंधित कोई शिकायत या सुझाव पार्षद के सम्मुख रखना है तो वह सभा में उपस्थित होकर अपनी शिकायत या सुझाव आदि पार्षद को लिखकर दे सकता है। शिकायतकर्ता अनिवार्य रूप से अपने मतदाता पहचान पत्र की फोटो कॉपी अपनी एप्लीकेशन के साथ सलंग्न करेगा।
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(8.2) इस सभा में जितनी भी शिकायतें / सुझाव आयेंगे उन्हें पार्षद एक सीरियल नंबर देगा और उन्हें स्वीकार करके नगर परिषद द्वारा जारी (Allote) किये गए अपने रजिस्टर में क्रम से दर्ज कर लेगा। पार्षद एप्लीकेशन लेने के बाद अपनी छाप लगाकर हस्ताक्षर युक्त एक पावती ( Receiving ) भी देगा। पार्षद अगली सभा से पहले पूर्व सभा के ब्यौरे सभापति कार्यालय में अग्रेषित कर देगा।
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(8.3) नागरिक यह एप्लीकेशन सभापति कार्यालय में भी दे सकता है। सभापति द्वारा नियुक्त क्लर्क 5 रू प्रति पृष्ठ की दर से इसे स्कैन करके सभापति की वेबसाईट पर नागरिक शिकायतों के सेक्शन में रख देगा। सभापति इस तरह का सिस्टम बना सकते है कि नगर के मतदाता अपने वार्ड या नगर के लिए दी गयी किसी एप्लीकेशन पर अपनी सहमति दर्ज कर सके।
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(9) अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) सरपंच एवं पार्षद : यदि कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार अमुक पद के लिए तय जमा राशि लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा। तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर अपलोड करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। पार्षद अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करेगा।
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(9.2) प्रधान, सभापति एवं जिला प्रमुख : यदि कोई मतदाता प्रधान, सभापति या जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किसी भी दिन अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। प्रधान एवं सभापति के लिए जमानत राशि विधायक के बराबर एवं जिला प्रमुख के लिए यह राशि सांसद की जमानत राशि के बराबर होगी। कलेक्टर शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाईट पर रखेगा और प्रत्याशियों को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक : जिले का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद का आवेदन करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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(10) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(10.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(10.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा
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(10.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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टिप्पणी : रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(11) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परिक्षण -चुनाव की शर्तें :
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(11.1) यदि कोई प्रत्याशी निचे लिखी गयी 3 शर्तें पूरी कर लेता है तो सरपंच इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री से विनती कर सकता है कि वे अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव ( Test-Election ) आयोजित करें । यदि सरपंच 7 दिनों के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है, या नहीं भी ले सकते है।
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(11.1.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(11.1.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(11.1.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सरपंच के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% से अधिक भी है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण-चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 2000+500=2500 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 2400 स्वीकृतियां मिल जाती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा और मौजूदा सरपंच को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । किन्तु यदि किसी प्रत्याशी को 2500 से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो सरपंच इस्तीफा दे सकता है या मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है।
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(11.2) नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी शर्तें यही होगी जो धारा (11.1) में सरपंच के लिए बतायी गयी है।
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(12) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण-चुनाव की प्रक्रिया :
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यदि धारा (11.1) में बतायी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है, तो परिक्षण-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। परिक्षण चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(12.1) मतपत्र पर कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को इस चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 5 प्रत्याशियों को जमानत राशि देकर नामांकन पत्र दाखिल करना होगा।
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(12.2) यदि परिक्षण-चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी शर्तें पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(12.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक वोट प्राप्त हो जाते है।
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(12.2.2) यदि ये वोट सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2,500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 2,500+500=3,000 वोट लाने होंगे। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2,500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि सह-चुनाव में कोई प्रत्याशी 2,500 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को 1,500 वोट ही मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा।
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(12.3) नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परीक्षण चुनाव : पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी ठीक उसी समीकरण ( फार्मूले ) का पालन किया जाएगा जो धारा 12.2 में सरपंच के लिए बताया गया है।
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(13) प्रधान, जिला प्रमुख एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(13.1) तहसील प्रधान के लिए : यदि किसी पंचायत समिती की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता प्रधान के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा प्रधान की स्वीकृतियों से 5% अधिक भी है तो मौजूदा प्रधान इस्तीफा दे सकता है । यदि प्रधान 7 दिवस में इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृतियां पाने वाले प्रत्याशी की नियुक्ति प्रधान के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.2) जिला प्रमुख के लिए : यदि किसी जिले की समस्त पंचायत समितियों की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला पंचायत प्रमुख के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जिला प्रमुख की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी की नियुक्ति जिला प्रमुख के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.3) जिला जूरी प्रशासक : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक व्यक्ति को जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(14) सभापति की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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सभापति को बदलने के लिए किसी प्रत्याशी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होगी -
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(14.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(14.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति को चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(14.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सभापति के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 2% से अधिक भी है।
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यदि सभापति का कोई प्रत्याशी उपरोक्त तीनो शर्तें पूरी कर लेता है तो सभापति इस्तीफा दे सकता है। यदि सभापति 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकालकर परिक्षण चुनाव करवाने का आदेश जारी कर सकते है। परिक्षण चुनाव की प्रक्रिया एवं उसमे जीत हार का समीकरण वही रहेगा जैसा धारा (12.2) में बताया गया है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी किसी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 2,00,000 मतदाता है, और चुनाव में मौजूदा सभापति को 70,000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण चुनाव सिर्फ तब संचालित किया जाएगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 70,000+4,000=74,000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 2 लाख है अत: इसका 2% = 4,000 को 70,000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 72,000 स्वीकृतियां मिलती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा।
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(15) सरपंच एवं पार्षद के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(15.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है।
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(15.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (12.2) में सरपंच के परिक्षण चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को सह-चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। सह चुनाव में भी पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। जीत हार का समीकरण ( फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा परिक्षण चुनाव में बताया गया है।
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16. पार्षद के लिए सह-चुनाव की प्रक्रिया : जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त पार्षद के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा वार्ड पार्षद की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है। इस प्रक्रिया का संचालन वैसे ही किया जाएगा जैसा सरपंच के लिए बताया गया है।
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(17) शिकायतों की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों का गठन
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 20.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(17.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 25 से 50 आयु वर्ग के 60 लोगो को चुनेगा और इसमें से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक प्रत्येक तहसील के लिए एक तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति भी करेगा। तहसील जूरी प्रशासक अपनी तहसील में 20 सदस्यीय तहसील महाजूरी मंडल का गठन करेंगे। तहसील महाजूरी मंडल के गठन के लिए तहसील की मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाएगा । जूरी मंडल के गठन एवं बैठको की शेष प्रक्रिया जिला महाजूरी मंडल के समान ही रहेगी।
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(17.3) यदि धारा धारा 01 एवं धारा 02 में दिए गए किसी भी अधिकारी / जनप्रतिनिधि या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई नागरिक शिकायत है तो वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित तहसील / जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है।
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(17.4) तहसील स्तर के अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों की शिकायतें तहसील के महाजूरी मंडल में की जायेगी, तथा इसकी अपील जिला महाजूरी मंडल में होगी। तहसील स्तर की जूरी का गठन तहसील की मतदाता सूचियों से एवं अपील की जूरी का गठन जिले की मतदाता सूचियों से किया जाएगा।
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(18) जूरी मंडल द्वारा शिकायतों की सुनवाई :
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(18.1) यदि किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ महाजूरी मंडल द्वारा एक से अधिक शिकायतें स्वीकृत कर ली जाती है, महाजूरी मंडल सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ जितनी शिकायतें आई है उनकी सुनवाई 15 दिन में एक बार ही होगी। उदाहरण के लिए यदि पटवारी या तहसीलदार के खिलाफ 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जितनी शिकायतें है उनकी सुनवाई 16 तारीख को और 16 तारीख के बाद में आई शिकायतों की सुनवाई महीने के आखिरी दिन होगी।
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(18.2) जब वादीगण शिकायत लिखेंगे तो अनिवार्य रूप से इसमें यह भी दर्ज करेंगे कि उन्हें इसका क्या समाधान चाहिए। साथ ही वे अधिकारी / जनप्रतिनिधि पर कोई आर्थिक दंड लगाने की मांग भी इसमें लिख सकते है। जुर्माने या क्षतिपूर्ति की मांग करने पर वे इसकी सीमा भी अपनी शिकायत में लिखेंगे।
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(18.3) मामला सुनने के बाद महाजूरी मंडल बहुमत से अपना फैसला देगा। यदि जुर्माना लगाया गया है तो यह जुर्माना अधिकारी / जनप्रतिनिधि के वेतन से काट लिया जायेगा। यदि जुर्माने की राशि अमुक अधिकारी के वेतन के 50% से अधिक है तो कम से कम दो तिहाई जूरी सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी । अधिकारी को नौकरी से निकालने एवं ट्रांसफर करने का फैसले को कम से कम 75% जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
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(18.4) यदि सुनवाई के दौरान महाजूरी मंडल के सदस्य यह पाते है कि वादीगण ने झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किया है, या शिकायत एकदम मनगड़ंत एवं फर्जी थी तो समय खराब करने के एवज में जूरी सदस्य शिकायतकर्ताओ पर भी जुर्माना लगा सकते है।
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(18.5) महाजूरी मंडल के फैसले के खिलाफ यदि कोई भी पक्षकार अपील दायर करता है तो जिला महाजूरी मंडल जिले की मतदाता सूचियों में से एक नयी जूरी का गठन करेगा। इस जूरी का आकार उस जूरी मंडल से बड़ा होगा जिस जूरी मंडल ने इस मामले की सुनवाई करके फैसला दिया था वह जूरी प्रशासक के सामने अपील दायर कर सकता है। जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(18.6) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। अपील की जूरी में दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(19) जूरी मंडलों के फैसलों का पालन : जूरी मंडल के फैसले परामर्श कारी होंगे । मुख्यमंत्री या सम्बंधित विभाग का मंत्री जूरी मंडल द्वारा दिए गए किसी फैसले में संशोधन कर सकते है, उसमे बदलाव कर सकते है, या उसे पूरी तरह से पलट सकते है। किन्तु मंत्री स्तर से कम का कोई भी अधिकारी जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले में बदलाव नहीं कर सकेगा। जूरी द्वारा यदि किसी अधिकारी को दोषी ठहराया जाता है तो इसे अधिकारी का मूल्यांकन करने वाली सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा, तथा पदोन्नति, स्थानांतरण आदि के मूल्यांकन में इस तथ्य को आधार माना जाएगा।
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(20) जनता की आवाज :
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(20.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(20.2) यदि कोई मतदाता धारा 20.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 20.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित अहमदनगर जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापे - #AhmednagarJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - # AhmednagarJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (20) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Sep 07 2019 20:04:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

महासमुंद जूरी पंचायत – महासमुंद की पंचायतो एवं स्थानीय प्रशासन को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Mahasamund Jury Panchayat - Proposal to Improve Panchayat & Local Administration
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कानून का सार : यह कानून महासमुंद जिले की पंचायतो एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। मुख्यमंत्री यह क़ानून राज्य के एक से अधिक जिलो में लागू कर सकते है या पूरे प्रदेश के भी लागू कर सकते है। इस कानून में ऐसी कई प्रक्रियाएं है जो स्थानीय प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है और ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे अधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी।
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इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री भी लोकसभा से पारित कर सकते है।
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महासमुंद जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप महासमुंद में जूरी पंचायत क़ानून चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित महासमुंद जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापें - #MahasamundJuryPanchayat #VoteVapsiPassBook, #P20180436110
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस तरह का क़ानून लागू करने की मांग कर सकते है.
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर महासमुंद जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम महासमुंद जिले की वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के अलावा धारा (01) में दिए गए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी मंडल में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको इन 11 अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप अमुक आरोपी पर जुर्माना लगा सकते है :
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1. पटवारी
2. गिरदावर
3. ग्राम विकास अधिकारी ( पंचायत सचिव )
4. तहसीलदार
5. जिला परिषद सचिव
6. नगर परिषद सचिव
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(03) यदि आपका नाम महासमुंद जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, या उपरोक्त में से किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते है तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा ( 20.1 ) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिपण्णी : इस क़ानून में जिले शब्द का आशय है छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला।
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इस क़ानून में जहाँ भी पार्षद शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है - नगर पालिका , नगर परिषद एवं नगर निगम का पार्षद। इस क़ानून में सभापति शब्द से आशय है - नगर पालिका, नगर परिषद एवं नगर निगम का सभापति। इस क़ानून में प्रधान शब्द से आशय है - तहसील पंचायत समिती का प्रधान। इस क़ानून में जिला प्रमुख से आशय है - जिला पंचायत का प्रमुख। ]
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(04) पटवारी कार्यालयों को सुचारू एवं व्यवस्थित करने के लिए यह क़ानून पारित होने के बाद मुख्यमंत्री निम्नलिखित कार्यो को दी गयी समय सीमा में पूरा किया जाना सुनिश्चित करेंगे :
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(4.1) जिले के खाली पड़े पटवारी के सभी पदों पर पटवारियों की नियुक्ति की जायेगी। यदि नयी भर्ती की आवश्यकता है तो भर्ती की प्रक्रिया अगले 180 दिनों में पूर्ण कर ली जानी चाहिए।
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(4.2) यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर प्रत्येक पटवार खाने का अनिवार्य रूप से कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कम्प्यूटर में दक्ष लिपिकों की नियुक्ति करके पटवारी के स्टाफ का दायरा बढाया जायेगा। पटवारी को शामिल करते हुए पटवारी कार्यालय का न्यूनतम स्टाफ 4 व्यक्तियों का होगा। यह सभी नियुक्तियां यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर कर ली जानी चाहिए।
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(4.3) जब पटवारी फील्ड में है तब भी पटवारी कार्यालय अनिवार्य रूप से 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुला रहेगा।
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(4.4) जिन पटवार खानो में पर्याप्त कमरे इत्यादि नहीं है उनके लिए आवश्यक भवन निर्माण किया जाएगा एवं यह निर्माण इस क़ानून के पारित होने के 3 वर्षो के अंदर कर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस क़ानून के गेजेट में आने के 6 माह के भीतर सभी पटवार खानों को उन्नत किये जाने का प्रोजेक्ट विधानसभा में रखेंगे जिसमें यह ब्यौरा होगा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए कितने पटवारी कार्यालयो को किस क्रम से उन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट के साथ ही अनिवार्य रूप से इसके लिए बजट भी पास करेंगे।
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(4.5) पटवारी एक मोबाईल एप / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया एकाउंट / व्हाट्स एप नंबर सार्वजनिक करेगा, ताकि उसके क्षेत्र के मतदाता अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करवा सके।
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(4.6) यदि कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में या धारा 01 एवं 02 में लिखे गए अधिकारियों / जनप्रतिनिधियों को किसी कार्य के लिए कोई एप्लीकेशन देता है और यदि एप्लीकेशन पर सार्वजनिक करें दर्ज करता है, तो यह प्रार्थना पत्र सार्वजनिक किया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहा है तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक की गयी जो नागरिक शिकायतें पेंडिंग है और जो कार्य पूर्ण हो चुके है, उनकी अद्यतन जानकारी व्यवस्थित रूप से कार्यालय के सूचना पट्ट पर बिना मांगे उपलब्ध रहेगी एवं इसे प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी। यदि यह जानकारी स्वत: सार्वजनिक नहीं की जाती है तो यह माना जायेगा कि, इन्हें छिपाया गया है।
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(4.7) धारा 02 में दिए गए अधिकारी सभी नागरिक शिकायतों एवं नागरिक प्रार्थना पत्रों का निपटान सिलसिलेवार करेंगे। यदि वे क्रम का उलंघन करते है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण लिखित में देना होगा। उदाहरण के लिए , मान लीजिये कि पटवारी या तहसीलदार के पास सोमवार को एक व्यक्ति A नकल निकलवाने का प्रार्थना पत्र देता है, तथा B नक़ल निकलवाने का प्रार्थना पत्र मंगलवार को देता है। चूंकि इन दोनों अर्जियों की प्रकृति एक जैसी है अत: अधिकारी पहले सोमवार को लगाई गयी अर्जी का निस्तारण करेगा। यदि अधिकारी A से पहले B की नकल निकाल देता है तो उसे अनिवार्य रूप से यह दर्ज करना होगा कि क्यों B की अर्जी पर पहले काम किया गया।
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(05) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा, जो कि उसके क्षेत्र की मतदाता संख्या पर निर्भर करेगा। सरपंच अधिकतम 5 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 3 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 2 पंचायत से जीत जाता है तो वह 80,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(06) इस क़ानून के पारित होने के बाद नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 मासिक से 25,000 होगा। पार्षद किन्ही 3 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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(07) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 एवं अधिकतम 80,000 होगा।
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[ सरपंच का वेतन बढाने का स्पष्टीकरण 1* : इस क़ानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक, परीक्षण चुनाव एवं सह चुनाव के दायरे में लाया गया है। इस वजह से सरपंच की भ्रष्टाचार से होने वाली संभावित आय में भारी गिरावट आएगी। यदि वह गलत तरीके से काम कर रहा है तो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेगा, और उसके क्षेत्र के मतदाता वोट वापसी का प्रयोग करके 5 वर्ष से पहले ही उसे निकाल कर किसी दुसरे को सरपंच बना सकेंगे। इसके अलावा यदि उसके खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी और जूरी उस पर जुर्माना लगा सकती है।
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तो जब हम सरपंच पर ऐसे क़ानून डाल रहे है कि वह अवैध रूप से पैसा नहीं बना सके, तो हमें वेतन बढाने की जरूरत है। वर्ना यह सरपंच प्रत्याशीयों के साथ अन्याय होगा। यदि वेतन नहीं बढ़ाया गया तो हमें ऐसे उम्मीदवार नहीं मिलेंगे जो ईमानदारी से कार्य करना चाहते है। वे सोचेंगे कि यदि मैं जीत भी जाता हूँ तो मुझ पर जिम्मेदारी आ जायेगी और जिम्मेदारी निभाने के एवज में मुझे कोई आर्थिक व्यय भी नहीं मिलेगा। और ठीक यही स्थिति पार्षद एवं सभापति के साथ होगी। इसीलिए इनके वेतन में इजाफा किया गया है। राज्य के अन्य जिलो के सरपंचो एवं पार्षदों का वेतन वही रहेगा जो उन्हें आज मिल रहा है।
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5 जगह का सरपंच बनने की छूट देने का स्पष्टीकरण 2* : यदि हमें सरपंच के पद के लिए बेहतर उम्मीदवार चाहिए तो इसके पदोन्नति के अवसर खोलने होंगे। सरपंच एवं विधायक के बीच काफी फासला होता है। यदि सरपंच के पास आस पास के 5 गाँवों का सरपंच बनने का अवसर होगा तो वह ज्यादा बेहतर ढंग से काम करना शुरू करेगा ताकि अन्य गाँवों में भी उसकी ख्याति जाए और वह वहां से भी चुना जा सके। और तब उसे वेतन भी 5 पंचायतो के बराबर मिलेगा।
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इससे सरपंच इस तरह का सिस्टम खड़ा करने की दिशा में काम करना शुरू करेंगे कि नागरिको की शिकायतों का तुरंत निपटान हो और उन्हें धक्के खाने की जरूरत नहीं रहे। और ऐसे भी यदि किसी पंचायत क्षेत्र के मतदाता यह पाते है कि अमुक सरपंच ने उसकी पंचायत में काफी बेहतर काम किया है, तो वे अमुक सरपंच को अपनी पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दे सकते है। ]
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(08) पार्षद अपने वार्ड में प्रत्येक दुसरे एवं चौथे रविवार ( 2nd & 4th Sunday ) को सांय 4 बजे एक नागरिक सभा का आयोजन करेगा। सभापति इसके लिए वार्ड में स्थित किसी सार्वजानिक कम्युनिटी सेंटर, स्कूल आदि में स्थान की व्यवस्था कराएगा। यदि वार्ड में नगर परिषद के क्षेत्राधिकार का भवन मौजूद है तो सभा इसी स्थल पर आयोजित होगी, और स्थान व समय किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाएगा।
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(8.1) किसी व्यक्ति को यदि नगर परिषद के क्षेत्राधिकार एवं अपने वार्ड से सम्बंधित कोई शिकायत या सुझाव पार्षद के सम्मुख रखना है तो वह सभा में उपस्थित होकर अपनी शिकायत या सुझाव आदि पार्षद को लिखकर दे सकता है। शिकायतकर्ता अनिवार्य रूप से अपने मतदाता पहचान पत्र की फोटो कॉपी अपनी एप्लीकेशन के साथ सलंग्न करेगा।
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(8.2) इस सभा में जितनी भी शिकायतें / सुझाव आयेंगे उन्हें पार्षद एक सीरियल नंबर देगा और उन्हें स्वीकार करके नगर परिषद द्वारा जारी (Allote) किये गए अपने रजिस्टर में क्रम से दर्ज कर लेगा। पार्षद एप्लीकेशन लेने के बाद अपनी छाप लगाकर हस्ताक्षर युक्त एक पावती ( Receiving ) भी देगा। पार्षद अगली सभा से पहले पूर्व सभा के ब्यौरे सभापति कार्यालय में अग्रेषित कर देगा।
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(8.3) नागरिक यह एप्लीकेशन सभापति कार्यालय में भी दे सकता है। सभापति द्वारा नियुक्त क्लर्क 5 रू प्रति पृष्ठ की दर से इसे स्कैन करके सभापति की वेबसाईट पर नागरिक शिकायतों के सेक्शन में रख देगा। सभापति इस तरह का सिस्टम बना सकते है कि नगर के मतदाता अपने वार्ड या नगर के लिए दी गयी किसी एप्लीकेशन पर अपनी सहमति दर्ज कर सके।
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(9) अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) सरपंच एवं पार्षद : यदि कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार अमुक पद के लिए तय जमा राशि लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा। तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर अपलोड करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। पार्षद अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करेगा।
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(9.2) प्रधान, सभापति एवं जिला प्रमुख : यदि कोई मतदाता प्रधान, सभापति या जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किसी भी दिन अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। प्रधान एवं सभापति के लिए जमानत राशि विधायक के बराबर एवं जिला प्रमुख के लिए यह राशि सांसद की जमानत राशि के बराबर होगी। कलेक्टर शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाईट पर रखेगा और प्रत्याशियों को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक : जिले का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद का आवेदन करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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(10) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(10.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(10.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा
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(10.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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टिप्पणी : रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(11) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परिक्षण -चुनाव की शर्तें :
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(11.1) यदि कोई प्रत्याशी निचे लिखी गयी 3 शर्तें पूरी कर लेता है तो सरपंच इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री से विनती कर सकता है कि वे अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव ( Test-Election ) आयोजित करें । यदि सरपंच 7 दिनों के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है, या नहीं भी ले सकते है।
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(11.1.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(11.1.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(11.1.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सरपंच के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% से अधिक भी है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण-चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 2000+500=2500 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 2400 स्वीकृतियां मिल जाती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा और मौजूदा सरपंच को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । किन्तु यदि किसी प्रत्याशी को 2500 से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो सरपंच इस्तीफा दे सकता है या मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है।
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(11.2) नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी शर्तें यही होगी जो धारा (11.1) में सरपंच के लिए बतायी गयी है।
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(12) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण-चुनाव की प्रक्रिया :
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यदि धारा (11.1) में बतायी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है, तो परिक्षण-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। परिक्षण चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(12.1) मतपत्र पर कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को इस चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 5 प्रत्याशियों को जमानत राशि देकर नामांकन पत्र दाखिल करना होगा।
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(12.2) यदि परिक्षण-चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी शर्तें पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(12.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक वोट प्राप्त हो जाते है।
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(12.2.2) यदि ये वोट सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2,500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 2,500+500=3,000 वोट लाने होंगे। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2,500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि सह-चुनाव में कोई प्रत्याशी 2,500 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को 1,500 वोट ही मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा।
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(12.3) नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परीक्षण चुनाव : पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी ठीक उसी समीकरण ( फार्मूले ) का पालन किया जाएगा जो धारा 12.2 में सरपंच के लिए बताया गया है।
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(13) प्रधान, जिला प्रमुख एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(13.1) तहसील प्रधान के लिए : यदि किसी पंचायत समिती की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता प्रधान के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा प्रधान की स्वीकृतियों से 5% अधिक भी है तो मौजूदा प्रधान इस्तीफा दे सकता है । यदि प्रधान 7 दिवस में इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृतियां पाने वाले प्रत्याशी की नियुक्ति प्रधान के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.2) जिला प्रमुख के लिए : यदि किसी जिले की समस्त पंचायत समितियों की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला पंचायत प्रमुख के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जिला प्रमुख की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी की नियुक्ति जिला प्रमुख के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.3) जिला जूरी प्रशासक : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक व्यक्ति को जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(14) सभापति की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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सभापति को बदलने के लिए किसी प्रत्याशी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होगी -
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(14.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(14.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति को चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(14.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सभापति के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 2% से अधिक भी है।
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यदि सभापति का कोई प्रत्याशी उपरोक्त तीनो शर्तें पूरी कर लेता है तो सभापति इस्तीफा दे सकता है। यदि सभापति 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकालकर परिक्षण चुनाव करवाने का आदेश जारी कर सकते है। परिक्षण चुनाव की प्रक्रिया एवं उसमे जीत हार का समीकरण वही रहेगा जैसा धारा (12.2) में बताया गया है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी किसी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 2,00,000 मतदाता है, और चुनाव में मौजूदा सभापति को 70,000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण चुनाव सिर्फ तब संचालित किया जाएगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 70,000+4,000=74,000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 2 लाख है अत: इसका 2% = 4,000 को 70,000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 72,000 स्वीकृतियां मिलती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा।
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(15) सरपंच एवं पार्षद के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(15.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है।
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(15.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (12.2) में सरपंच के परिक्षण चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को सह-चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। सह चुनाव में भी पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। जीत हार का समीकरण ( फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा परिक्षण चुनाव में बताया गया है।
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16. पार्षद के लिए सह-चुनाव की प्रक्रिया : जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त पार्षद के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा वार्ड पार्षद की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है। इस प्रक्रिया का संचालन वैसे ही किया जाएगा जैसा सरपंच के लिए बताया गया है।
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(17) शिकायतों की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों का गठन
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 20.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(17.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 25 से 50 आयु वर्ग के 60 लोगो को चुनेगा और इसमें से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक प्रत्येक तहसील के लिए एक तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति भी करेगा। तहसील जूरी प्रशासक अपनी तहसील में 20 सदस्यीय तहसील महाजूरी मंडल का गठन करेंगे। तहसील महाजूरी मंडल के गठन के लिए तहसील की मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाएगा । जूरी मंडल के गठन एवं बैठको की शेष प्रक्रिया जिला महाजूरी मंडल के समान ही रहेगी।
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(17.3) यदि धारा धारा 01 एवं धारा 02 में दिए गए किसी भी अधिकारी / जनप्रतिनिधि या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई नागरिक शिकायत है तो वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित तहसील / जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है।
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(17.4) तहसील स्तर के अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों की शिकायतें तहसील के महाजूरी मंडल में की जायेगी, तथा इसकी अपील जिला महाजूरी मंडल में होगी। तहसील स्तर की जूरी का गठन तहसील की मतदाता सूचियों से एवं अपील की जूरी का गठन जिले की मतदाता सूचियों से किया जाएगा।
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(18) जूरी मंडल द्वारा शिकायतों की सुनवाई :
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(18.1) यदि किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ महाजूरी मंडल द्वारा एक से अधिक शिकायतें स्वीकृत कर ली जाती है, महाजूरी मंडल सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ जितनी शिकायतें आई है उनकी सुनवाई 15 दिन में एक बार ही होगी। उदाहरण के लिए यदि पटवारी या तहसीलदार के खिलाफ 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जितनी शिकायतें है उनकी सुनवाई 16 तारीख को और 16 तारीख के बाद में आई शिकायतों की सुनवाई महीने के आखिरी दिन होगी।
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(18.2) जब वादीगण शिकायत लिखेंगे तो अनिवार्य रूप से इसमें यह भी दर्ज करेंगे कि उन्हें इसका क्या समाधान चाहिए। साथ ही वे अधिकारी / जनप्रतिनिधि पर कोई आर्थिक दंड लगाने की मांग भी इसमें लिख सकते है। जुर्माने या क्षतिपूर्ति की मांग करने पर वे इसकी सीमा भी अपनी शिकायत में लिखेंगे।
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(18.3) मामला सुनने के बाद महाजूरी मंडल बहुमत से अपना फैसला देगा। यदि जुर्माना लगाया गया है तो यह जुर्माना अधिकारी / जनप्रतिनिधि के वेतन से काट लिया जायेगा। यदि जुर्माने की राशि अमुक अधिकारी के वेतन के 50% से अधिक है तो कम से कम दो तिहाई जूरी सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी । अधिकारी को नौकरी से निकालने एवं ट्रांसफर करने का फैसले को कम से कम 75% जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
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(18.4) यदि सुनवाई के दौरान महाजूरी मंडल के सदस्य यह पाते है कि वादीगण ने झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किया है, या शिकायत एकदम मनगड़ंत एवं फर्जी थी तो समय खराब करने के एवज में जूरी सदस्य शिकायतकर्ताओ पर भी जुर्माना लगा सकते है।
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(18.5) महाजूरी मंडल के फैसले के खिलाफ यदि कोई भी पक्षकार अपील दायर करता है तो जिला महाजूरी मंडल जिले की मतदाता सूचियों में से एक नयी जूरी का गठन करेगा। इस जूरी का आकार उस जूरी मंडल से बड़ा होगा जिस जूरी मंडल ने इस मामले की सुनवाई करके फैसला दिया था वह जूरी प्रशासक के सामने अपील दायर कर सकता है। जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(18.6) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। अपील की जूरी में दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(19) जूरी मंडलों के फैसलों का पालन : जूरी मंडल के फैसले परामर्श कारी होंगे । मुख्यमंत्री या सम्बंधित विभाग का मंत्री जूरी मंडल द्वारा दिए गए किसी फैसले में संशोधन कर सकते है, उसमे बदलाव कर सकते है, या उसे पूरी तरह से पलट सकते है। किन्तु मंत्री स्तर से कम का कोई भी अधिकारी जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले में बदलाव नहीं कर सकेगा। जूरी द्वारा यदि किसी अधिकारी को दोषी ठहराया जाता है तो इसे अधिकारी का मूल्यांकन करने वाली सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा, तथा पदोन्नति, स्थानांतरण आदि के मूल्यांकन में इस तथ्य को आधार माना जाएगा।
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(20) जनता की आवाज :
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(20.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(20.2) यदि कोई मतदाता धारा 20.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 20.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित महासमुंद जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापे - #MahasamundJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - # MahasamundJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (20) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Sep 07 2019 20:19:13 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जमशेदपुर जूरी पंचायत – जमशेदपुर जिले की पंचायतो एवं स्थानीय प्रशासन को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Jamshedpur Jury Panchayat - Proposal to Improve Panchayat & Local Administration
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कानून का सार : यह कानून जमशेदपुर जिले की पंचायतो एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। मुख्यमंत्री यह क़ानून राज्य के एक से अधिक जिलो में लागू कर सकते है या पूरे प्रदेश के भी लागू कर सकते है। इस कानून में ऐसी कई प्रक्रियाएं है जो स्थानीय प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है और ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे अधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी।
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इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री भी लोकसभा से पारित कर सकते है।
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जमशेदपुर जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप जमशेदपुर में जूरी पंचायत क़ानून चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित जमशेदपुर जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापें - #JamshedpurJuryPanchayat #VoteVapsiPassBook, #P20180436110
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस तरह का क़ानून लागू करने की मांग कर सकते है.
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर जमशेदपुर जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम जमशेदपुर जिले की वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के अलावा धारा (01) में दिए गए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी मंडल में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको इन 11 अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप अमुक आरोपी पर जुर्माना लगा सकते है :
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1. पटवारी
2. गिरदावर
3. ग्राम विकास अधिकारी ( पंचायत सचिव )
4. तहसीलदार
5. जिला परिषद सचिव
6. नगर परिषद सचिव
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(03) यदि आपका नाम जमशेदपुर जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, या उपरोक्त में से किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते है तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा ( 20.1 ) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिपण्णी : इस क़ानून में जिले शब्द का आशय है झारखण्ड का जमशेदपुर जिला।
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इस क़ानून में जहाँ भी पार्षद शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है - नगर पालिका , नगर परिषद एवं नगर निगम का पार्षद। इस क़ानून में सभापति शब्द से आशय है - नगर पालिका, नगर परिषद एवं नगर निगम का सभापति। इस क़ानून में प्रधान शब्द से आशय है - तहसील पंचायत समिती का प्रधान। इस क़ानून में जिला प्रमुख से आशय है - जिला पंचायत का प्रमुख। ]
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(04) पटवारी कार्यालयों को सुचारू एवं व्यवस्थित करने के लिए यह क़ानून पारित होने के बाद मुख्यमंत्री निम्नलिखित कार्यो को दी गयी समय सीमा में पूरा किया जाना सुनिश्चित करेंगे :
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(4.1) जिले के खाली पड़े पटवारी के सभी पदों पर पटवारियों की नियुक्ति की जायेगी। यदि नयी भर्ती की आवश्यकता है तो भर्ती की प्रक्रिया अगले 180 दिनों में पूर्ण कर ली जानी चाहिए।
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(4.2) यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर प्रत्येक पटवार खाने का अनिवार्य रूप से कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कम्प्यूटर में दक्ष लिपिकों की नियुक्ति करके पटवारी के स्टाफ का दायरा बढाया जायेगा। पटवारी को शामिल करते हुए पटवारी कार्यालय का न्यूनतम स्टाफ 4 व्यक्तियों का होगा। यह सभी नियुक्तियां यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर कर ली जानी चाहिए।
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(4.3) जब पटवारी फील्ड में है तब भी पटवारी कार्यालय अनिवार्य रूप से 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुला रहेगा।
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(4.4) जिन पटवार खानो में पर्याप्त कमरे इत्यादि नहीं है उनके लिए आवश्यक भवन निर्माण किया जाएगा एवं यह निर्माण इस क़ानून के पारित होने के 3 वर्षो के अंदर कर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस क़ानून के गेजेट में आने के 6 माह के भीतर सभी पटवार खानों को उन्नत किये जाने का प्रोजेक्ट विधानसभा में रखेंगे जिसमें यह ब्यौरा होगा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए कितने पटवारी कार्यालयो को किस क्रम से उन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट के साथ ही अनिवार्य रूप से इसके लिए बजट भी पास करेंगे।
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(4.5) पटवारी एक मोबाईल एप / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया एकाउंट / व्हाट्स एप नंबर सार्वजनिक करेगा, ताकि उसके क्षेत्र के मतदाता अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करवा सके।
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(4.6) यदि कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में या धारा 01 एवं 02 में लिखे गए अधिकारियों / जनप्रतिनिधियों को किसी कार्य के लिए कोई एप्लीकेशन देता है और यदि एप्लीकेशन पर सार्वजनिक करें दर्ज करता है, तो यह प्रार्थना पत्र सार्वजनिक किया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहा है तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक की गयी जो नागरिक शिकायतें पेंडिंग है और जो कार्य पूर्ण हो चुके है, उनकी अद्यतन जानकारी व्यवस्थित रूप से कार्यालय के सूचना पट्ट पर बिना मांगे उपलब्ध रहेगी एवं इसे प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी। यदि यह जानकारी स्वत: सार्वजनिक नहीं की जाती है तो यह माना जायेगा कि, इन्हें छिपाया गया है।
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(4.7) धारा 02 में दिए गए अधिकारी सभी नागरिक शिकायतों एवं नागरिक प्रार्थना पत्रों का निपटान सिलसिलेवार करेंगे। यदि वे क्रम का उलंघन करते है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण लिखित में देना होगा। उदाहरण के लिए , मान लीजिये कि पटवारी या तहसीलदार के पास सोमवार को एक व्यक्ति A नकल निकलवाने का प्रार्थना पत्र देता है, तथा B नक़ल निकलवाने का प्रार्थना पत्र मंगलवार को देता है। चूंकि इन दोनों अर्जियों की प्रकृति एक जैसी है अत: अधिकारी पहले सोमवार को लगाई गयी अर्जी का निस्तारण करेगा। यदि अधिकारी A से पहले B की नकल निकाल देता है तो उसे अनिवार्य रूप से यह दर्ज करना होगा कि क्यों B की अर्जी पर पहले काम किया गया।
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(05) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा, जो कि उसके क्षेत्र की मतदाता संख्या पर निर्भर करेगा। सरपंच अधिकतम 5 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 3 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 2 पंचायत से जीत जाता है तो वह 80,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(06) इस क़ानून के पारित होने के बाद नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 मासिक से 25,000 होगा। पार्षद किन्ही 3 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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(07) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 एवं अधिकतम 80,000 होगा।
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[ सरपंच का वेतन बढाने का स्पष्टीकरण 1* : इस क़ानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक, परीक्षण चुनाव एवं सह चुनाव के दायरे में लाया गया है। इस वजह से सरपंच की भ्रष्टाचार से होने वाली संभावित आय में भारी गिरावट आएगी। यदि वह गलत तरीके से काम कर रहा है तो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेगा, और उसके क्षेत्र के मतदाता वोट वापसी का प्रयोग करके 5 वर्ष से पहले ही उसे निकाल कर किसी दुसरे को सरपंच बना सकेंगे। इसके अलावा यदि उसके खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी और जूरी उस पर जुर्माना लगा सकती है।
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तो जब हम सरपंच पर ऐसे क़ानून डाल रहे है कि वह अवैध रूप से पैसा नहीं बना सके, तो हमें वेतन बढाने की जरूरत है। वर्ना यह सरपंच प्रत्याशीयों के साथ अन्याय होगा। यदि वेतन नहीं बढ़ाया गया तो हमें ऐसे उम्मीदवार नहीं मिलेंगे जो ईमानदारी से कार्य करना चाहते है। वे सोचेंगे कि यदि मैं जीत भी जाता हूँ तो मुझ पर जिम्मेदारी आ जायेगी और जिम्मेदारी निभाने के एवज में मुझे कोई आर्थिक व्यय भी नहीं मिलेगा। और ठीक यही स्थिति पार्षद एवं सभापति के साथ होगी। इसीलिए इनके वेतन में इजाफा किया गया है। राज्य के अन्य जिलो के सरपंचो एवं पार्षदों का वेतन वही रहेगा जो उन्हें आज मिल रहा है।
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5 जगह का सरपंच बनने की छूट देने का स्पष्टीकरण 2* : यदि हमें सरपंच के पद के लिए बेहतर उम्मीदवार चाहिए तो इसके पदोन्नति के अवसर खोलने होंगे। सरपंच एवं विधायक के बीच काफी फासला होता है। यदि सरपंच के पास आस पास के 5 गाँवों का सरपंच बनने का अवसर होगा तो वह ज्यादा बेहतर ढंग से काम करना शुरू करेगा ताकि अन्य गाँवों में भी उसकी ख्याति जाए और वह वहां से भी चुना जा सके। और तब उसे वेतन भी 5 पंचायतो के बराबर मिलेगा।
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इससे सरपंच इस तरह का सिस्टम खड़ा करने की दिशा में काम करना शुरू करेंगे कि नागरिको की शिकायतों का तुरंत निपटान हो और उन्हें धक्के खाने की जरूरत नहीं रहे। और ऐसे भी यदि किसी पंचायत क्षेत्र के मतदाता यह पाते है कि अमुक सरपंच ने उसकी पंचायत में काफी बेहतर काम किया है, तो वे अमुक सरपंच को अपनी पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दे सकते है। ]
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(08) पार्षद अपने वार्ड में प्रत्येक दुसरे एवं चौथे रविवार ( 2nd & 4th Sunday ) को सांय 4 बजे एक नागरिक सभा का आयोजन करेगा। सभापति इसके लिए वार्ड में स्थित किसी सार्वजानिक कम्युनिटी सेंटर, स्कूल आदि में स्थान की व्यवस्था कराएगा। यदि वार्ड में नगर परिषद के क्षेत्राधिकार का भवन मौजूद है तो सभा इसी स्थल पर आयोजित होगी, और स्थान व समय किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाएगा।
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(8.1) किसी व्यक्ति को यदि नगर परिषद के क्षेत्राधिकार एवं अपने वार्ड से सम्बंधित कोई शिकायत या सुझाव पार्षद के सम्मुख रखना है तो वह सभा में उपस्थित होकर अपनी शिकायत या सुझाव आदि पार्षद को लिखकर दे सकता है। शिकायतकर्ता अनिवार्य रूप से अपने मतदाता पहचान पत्र की फोटो कॉपी अपनी एप्लीकेशन के साथ सलंग्न करेगा।
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(8.2) इस सभा में जितनी भी शिकायतें / सुझाव आयेंगे उन्हें पार्षद एक सीरियल नंबर देगा और उन्हें स्वीकार करके नगर परिषद द्वारा जारी (Allote) किये गए अपने रजिस्टर में क्रम से दर्ज कर लेगा। पार्षद एप्लीकेशन लेने के बाद अपनी छाप लगाकर हस्ताक्षर युक्त एक पावती ( Receiving ) भी देगा। पार्षद अगली सभा से पहले पूर्व सभा के ब्यौरे सभापति कार्यालय में अग्रेषित कर देगा।
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(8.3) नागरिक यह एप्लीकेशन सभापति कार्यालय में भी दे सकता है। सभापति द्वारा नियुक्त क्लर्क 5 रू प्रति पृष्ठ की दर से इसे स्कैन करके सभापति की वेबसाईट पर नागरिक शिकायतों के सेक्शन में रख देगा। सभापति इस तरह का सिस्टम बना सकते है कि नगर के मतदाता अपने वार्ड या नगर के लिए दी गयी किसी एप्लीकेशन पर अपनी सहमति दर्ज कर सके।
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(9) अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) सरपंच एवं पार्षद : यदि कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार अमुक पद के लिए तय जमा राशि लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा। तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर अपलोड करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। पार्षद अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करेगा।
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(9.2) प्रधान, सभापति एवं जिला प्रमुख : यदि कोई मतदाता प्रधान, सभापति या जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किसी भी दिन अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। प्रधान एवं सभापति के लिए जमानत राशि विधायक के बराबर एवं जिला प्रमुख के लिए यह राशि सांसद की जमानत राशि के बराबर होगी। कलेक्टर शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाईट पर रखेगा और प्रत्याशियों को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक : जिले का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद का आवेदन करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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(10) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(10.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(10.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा
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(10.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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टिप्पणी : रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(11) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परिक्षण -चुनाव की शर्तें :
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(11.1) यदि कोई प्रत्याशी निचे लिखी गयी 3 शर्तें पूरी कर लेता है तो सरपंच इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री से विनती कर सकता है कि वे अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव ( Test-Election ) आयोजित करें । यदि सरपंच 7 दिनों के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है, या नहीं भी ले सकते है।
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(11.1.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(11.1.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(11.1.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सरपंच के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% से अधिक भी है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण-चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 2000+500=2500 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 2400 स्वीकृतियां मिल जाती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा और मौजूदा सरपंच को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । किन्तु यदि किसी प्रत्याशी को 2500 से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो सरपंच इस्तीफा दे सकता है या मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है।
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(11.2) नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी शर्तें यही होगी जो धारा (11.1) में सरपंच के लिए बतायी गयी है।
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(12) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण-चुनाव की प्रक्रिया :
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यदि धारा (11.1) में बतायी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है, तो परिक्षण-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। परिक्षण चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(12.1) मतपत्र पर कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को इस चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 5 प्रत्याशियों को जमानत राशि देकर नामांकन पत्र दाखिल करना होगा।
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(12.2) यदि परिक्षण-चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी शर्तें पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(12.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक वोट प्राप्त हो जाते है।
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(12.2.2) यदि ये वोट सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2,500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 2,500+500=3,000 वोट लाने होंगे। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2,500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि सह-चुनाव में कोई प्रत्याशी 2,500 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को 1,500 वोट ही मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा।
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(12.3) नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परीक्षण चुनाव : पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी ठीक उसी समीकरण ( फार्मूले ) का पालन किया जाएगा जो धारा 12.2 में सरपंच के लिए बताया गया है।
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(13) प्रधान, जिला प्रमुख एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(13.1) तहसील प्रधान के लिए : यदि किसी पंचायत समिती की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता प्रधान के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा प्रधान की स्वीकृतियों से 5% अधिक भी है तो मौजूदा प्रधान इस्तीफा दे सकता है । यदि प्रधान 7 दिवस में इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृतियां पाने वाले प्रत्याशी की नियुक्ति प्रधान के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.2) जिला प्रमुख के लिए : यदि किसी जिले की समस्त पंचायत समितियों की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला पंचायत प्रमुख के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जिला प्रमुख की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी की नियुक्ति जिला प्रमुख के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.3) जिला जूरी प्रशासक : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक व्यक्ति को जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(14) सभापति की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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सभापति को बदलने के लिए किसी प्रत्याशी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होगी -
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(14.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(14.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति को चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(14.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सभापति के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 2% से अधिक भी है।
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यदि सभापति का कोई प्रत्याशी उपरोक्त तीनो शर्तें पूरी कर लेता है तो सभापति इस्तीफा दे सकता है। यदि सभापति 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकालकर परिक्षण चुनाव करवाने का आदेश जारी कर सकते है। परिक्षण चुनाव की प्रक्रिया एवं उसमे जीत हार का समीकरण वही रहेगा जैसा धारा (12.2) में बताया गया है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी किसी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 2,00,000 मतदाता है, और चुनाव में मौजूदा सभापति को 70,000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण चुनाव सिर्फ तब संचालित किया जाएगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 70,000+4,000=74,000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 2 लाख है अत: इसका 2% = 4,000 को 70,000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 72,000 स्वीकृतियां मिलती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा।
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(15) सरपंच एवं पार्षद के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(15.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है।
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(15.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (12.2) में सरपंच के परिक्षण चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को सह-चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। सह चुनाव में भी पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। जीत हार का समीकरण ( फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा परिक्षण चुनाव में बताया गया है।
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16. पार्षद के लिए सह-चुनाव की प्रक्रिया : जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त पार्षद के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा वार्ड पार्षद की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है। इस प्रक्रिया का संचालन वैसे ही किया जाएगा जैसा सरपंच के लिए बताया गया है।
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(17) शिकायतों की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों का गठन
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 20.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(17.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 25 से 50 आयु वर्ग के 60 लोगो को चुनेगा और इसमें से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक प्रत्येक तहसील के लिए एक तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति भी करेगा। तहसील जूरी प्रशासक अपनी तहसील में 20 सदस्यीय तहसील महाजूरी मंडल का गठन करेंगे। तहसील महाजूरी मंडल के गठन के लिए तहसील की मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाएगा । जूरी मंडल के गठन एवं बैठको की शेष प्रक्रिया जिला महाजूरी मंडल के समान ही रहेगी।
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(17.3) यदि धारा धारा 01 एवं धारा 02 में दिए गए किसी भी अधिकारी / जनप्रतिनिधि या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई नागरिक शिकायत है तो वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित तहसील / जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है।
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(17.4) तहसील स्तर के अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों की शिकायतें तहसील के महाजूरी मंडल में की जायेगी, तथा इसकी अपील जिला महाजूरी मंडल में होगी। तहसील स्तर की जूरी का गठन तहसील की मतदाता सूचियों से एवं अपील की जूरी का गठन जिले की मतदाता सूचियों से किया जाएगा।
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(18) जूरी मंडल द्वारा शिकायतों की सुनवाई :
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(18.1) यदि किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ महाजूरी मंडल द्वारा एक से अधिक शिकायतें स्वीकृत कर ली जाती है, महाजूरी मंडल सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ जितनी शिकायतें आई है उनकी सुनवाई 15 दिन में एक बार ही होगी। उदाहरण के लिए यदि पटवारी या तहसीलदार के खिलाफ 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जितनी शिकायतें है उनकी सुनवाई 16 तारीख को और 16 तारीख के बाद में आई शिकायतों की सुनवाई महीने के आखिरी दिन होगी।
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(18.2) जब वादीगण शिकायत लिखेंगे तो अनिवार्य रूप से इसमें यह भी दर्ज करेंगे कि उन्हें इसका क्या समाधान चाहिए। साथ ही वे अधिकारी / जनप्रतिनिधि पर कोई आर्थिक दंड लगाने की मांग भी इसमें लिख सकते है। जुर्माने या क्षतिपूर्ति की मांग करने पर वे इसकी सीमा भी अपनी शिकायत में लिखेंगे।
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(18.3) मामला सुनने के बाद महाजूरी मंडल बहुमत से अपना फैसला देगा। यदि जुर्माना लगाया गया है तो यह जुर्माना अधिकारी / जनप्रतिनिधि के वेतन से काट लिया जायेगा। यदि जुर्माने की राशि अमुक अधिकारी के वेतन के 50% से अधिक है तो कम से कम दो तिहाई जूरी सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी । अधिकारी को नौकरी से निकालने एवं ट्रांसफर करने का फैसले को कम से कम 75% जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
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(18.4) यदि सुनवाई के दौरान महाजूरी मंडल के सदस्य यह पाते है कि वादीगण ने झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किया है, या शिकायत एकदम मनगड़ंत एवं फर्जी थी तो समय खराब करने के एवज में जूरी सदस्य शिकायतकर्ताओ पर भी जुर्माना लगा सकते है।
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(18.5) महाजूरी मंडल के फैसले के खिलाफ यदि कोई भी पक्षकार अपील दायर करता है तो जिला महाजूरी मंडल जिले की मतदाता सूचियों में से एक नयी जूरी का गठन करेगा। इस जूरी का आकार उस जूरी मंडल से बड़ा होगा जिस जूरी मंडल ने इस मामले की सुनवाई करके फैसला दिया था वह जूरी प्रशासक के सामने अपील दायर कर सकता है। जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(18.6) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। अपील की जूरी में दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(19) जूरी मंडलों के फैसलों का पालन : जूरी मंडल के फैसले परामर्श कारी होंगे । मुख्यमंत्री या सम्बंधित विभाग का मंत्री जूरी मंडल द्वारा दिए गए किसी फैसले में संशोधन कर सकते है, उसमे बदलाव कर सकते है, या उसे पूरी तरह से पलट सकते है। किन्तु मंत्री स्तर से कम का कोई भी अधिकारी जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले में बदलाव नहीं कर सकेगा। जूरी द्वारा यदि किसी अधिकारी को दोषी ठहराया जाता है तो इसे अधिकारी का मूल्यांकन करने वाली सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा, तथा पदोन्नति, स्थानांतरण आदि के मूल्यांकन में इस तथ्य को आधार माना जाएगा।
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(20) जनता की आवाज :
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(20.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(20.2) यदि कोई मतदाता धारा 20.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 20.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित जमशेदपुर जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापे - #JamshedpurJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - # JamshedpurJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (20) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Sep 07 2019 20:31:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इसरो की रिसर्च और उपग्रह प्रोजेक्ट्स ने भारत की मिसाइलो की जमीन तैयार की है -
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<https://www.facebook.com/groups/860298764343202/permalink/916131638759914/>;

Pawan Jury BhilwaraRj:

## [**विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया?**](<https://hi.quora.com/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%94%E0%A4%B0>;)

**.**

यह एक कीमती सवाल है, और पेड मीडिया द्वारा भारत में इसका गलत जवाब बहुत बड़े पैमाने पर फैलाया गया है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक इस तरह के महत्तवपूर्ण सवालों के गलत जवाब फैलाने में काफी निवेश करते है। यदि इसका सही जवाब लोगो तक पहुंचेगा तो भारत के स्वदेशी हथियारों का निर्माण करने की क्षमता जुटाने की सम्भावना बढ़ जायेगी। और यदि भारत हथियारों के निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल कर लेता है तो **हथियार निर्माता** कम्पनियां भारत नाम का अपना ग्राहक खो देगी।
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तो पेड मीडियाकर्मी, पेड बुद्धिजीवी और अखबारों-टीवी में आकर डायलॉग मारने वाले ज्ञानी पिछले कई दशको से इस प्रश्न के गलत जवाब फैला रहे है, ताकि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के भारत में आने का रास्ता साफ़ करने के लिए माहौल बनाया जा सके। सही जवाब के साथ ही इस उत्तर में उन 3 कानूनों के बारे में भी बताया गया है जिन्हें गेजेट में छापने से भारत फाइटर प्लेन का इंजन बनाने की क्षमता जुटा सकता है।
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यह उत्तर निम्नलिखित प्रश्नों के जवाब भी देता है :
* भारत चंद्रयान बना देता है लेकिन टैंक का इंजन क्यों नहीं बना पाता ?
* भारत ने मंगल मिशन भेज दिया लेकिन एक काम में आने वाली रायफल क्यों नही बना सका ?
* भारत रेल के इंजन, सोनोग्राफी / एमआरआई / X-ray मशीने / कम्पुटर / मोबाईल क्यों नहीं बना पाता ?

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विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया ?
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इस प्रश्न में कई सवाल आपस में गुंथे हुए है, और यह आवश्यक है कि सही जवाब पाने के लिए इन्हें अलग अलग करके उत्तरित किया जाए। पहले मैं इस सवाल में से मिसाईल प्रोग्राम को निकाल देता हूँ। भारत मिसाईल बनाने में कैसे सफल हो गया इसकी वजह मैं अगले खंड में बताऊंगा।
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अब हमारे सामने पहला सवाल है कि -

**(1) भारत अन्तरिक्ष प्रोग्राम में इतना सफल होने के बावजूद तेजस का इंजन क्यों नहीं बना पाया ?**

तकनीकी वस्तुओ की 2 श्रेणियां है।
* ऐसे मिशन जिन्हें बंद इमारतों यानी लैब आदि में चलाया जा जा सकता है।
* ऐसे प्रोजेक्ट जिनमे खुले बाजार की जरूरत होती है।

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पहली श्रेणी में वे वस्तुएं आती है जिनका अविष्कार / विकास / उत्पादन एक बंद इमारत में 50-100 लोगो की प्रतिभाशाली टीम द्वारा किया जा सकता है। इन वस्तुओं का आविष्कार एवं विकास करना अपेक्षाकृत आसान है। इसके लिए आप देश भर में से 1000-500 प्रतिभाशाली इंजीनियरों का चयन करिए और उन्हें सभी सुविधाओ से युक्त लेब दे दीजिये। ये सभी वैज्ञानिक समर्पित होते है, इनमे अनुशासन का स्तर उच्च होता है, इन्हें आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा मुहैया होती है, और इस वजह से ये अपना 100% अपने काम में लगाते है।

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1.1. अन्तरिक्ष प्रोग्राम लेब में चलाया जा सकता है !!
**.
अन्तरिक्ष प्रोग्राम इसी श्रेणी की तकनीक है। तो यदि सरकार अन्तरिक्ष प्रोग्राम चलाना चाहती है इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू कर सकती है। परमाणु कार्यक्रम भी इसी श्रेणी की तकनीक है। अत: इसमें भी यह मॉडल सफलतापूर्वक काम करेगा।

इस मॉडल का नुकसान :
* इस मॉडल में एकाधिकार होने के कारण प्रतियोगिता नही होती।
* सारा ज्ञान 500-1000 व्यक्तियों एवं 1-2 संस्थाओ में केंद्रीकृत रहता है।

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परमाणु कार्यक्रम तो सिर्फ सरकार द्वारा ही चलाये जाने चाहिए किन्तु यदि प्राइवेट कम्पनीयों को अन्तरिक्ष कार्यक्रम चलाने की अनुमति दी जाए तो वे ज्यादा बेहतर नतीजे देंगे। इससे दो तरह के फायदे होंगे
1. सरकारी सेट अप को प्रतियोगिता का सामना नहीं करना पड़ता। अत: उनकी लागत ज्यादा होती है। निजी कम्पनी का मूल उद्देश्य मुनाफा कमाना होता है, और वे लागत कम करने में काफी दिमाग भिड़ाते है। इस वजह से प्राइवेट कम्पनी कम लागत में ज्यादा तेजी से तकनिकी अविष्कार कर लेगी।

उदाहरण के लिए - यदि किसी सरकारी कम्पनी को कोई पुर्जा चाहिए और इसकी कीमत 1000 रू है तो वे इसे बिना दाएं बाएँ देखें खरीद लेंगे। लेकिन निजी कम्पनी इसे 700 रू में खरीदने की कोशिश में सभी विकल्प तलाशेगी। सरकारी कम्पनी इस तरह की कोई कोशिश नहीं करती।
1. इस तरह की सरकारी कम्पनियां जिन प्रोजेक्ट पर काम करती है, वह ज्ञान आसानी से नष्ट किया जा सकता है। उदाहरण के लिए मान लीजिये कि किसी देश की कम्पनी X में 500 आला दर्जे के वैज्ञानिक काम करते है और X किसी वस्तु S का उत्पादन करती है। अब यदि कम्पनी X पर मिसाईल दाग दी जाए या उसके शीर्ष 50 वैज्ञानिको की हत्या कर दी जाए तो अमुक देश हमेशा के लिए यह तकनीक खो देगा।

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[ भारत का अन्तरिक्ष कार्यकम सस्ता नहीं है। यह काफी महंगा है। दरअसल इसकी कीमत हमें ISRO ही बताता है। उन्हें सरकार द्वारा यह निर्देश दिए जाते है कि वे इसकी लागत कम करके दिखाए। तो वे काफी सारे खर्चो को अन्य मदों में दिखाते है। इससे राष्ट्र में एक गौरव का भाव बना रहता है कि हमारी नीतियाँ एकदम ठीक है और हम सही दिशा में काम कर रहे है।

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और मैं इस नीति को गलत भी नहीं मानता। कीमत कम करके दिखाने की एक वजह यह भी होती है कि इसरो को अन्य देशो से काम मिले। इससे डॉलर कक आय होती है, और काम मिलने से तकनिकी कुशलता में वृद्धि होती है। अत: अन्तरिक्ष प्रोग्राम जैसा प्रोजेक्ट घाटे में भी मुनाफा ही देता है। यह एक तरह का निवेश है, जो तकनीक के अवसर खोलता है। ]

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1.2. इंजन वगेरह लेब में नहीं बनाए जा सकते, इसका विकास खुले बाजार में होता है !!
**.
एक इंजन में कई प्रकार की इंजीनियरिंग का इस्तेमाल होता है। और विमान बनाने में तो दुनिया का ऐसा कोई भी विज्ञान / तकनीक नहीं है, जिसका इस्तेमाल न होता हो। और सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए निरंतर वातावरणीय परीक्षणों की जरूरत होती है। यदि आप इसे लेब में बनाने जायेंगे तो इसे कभी भी नहीं बनाया जा सकता। यदि आपने इसे बना भी लिया तो यह प्रभावी नहीं होगा। उदाहरण के लिए अमेरिका के लड़ाकू विमान चीन से ज्यादा उन्नत है। वजह यह है कि अमेरिका में रक्षा उपकरणों में निजी क्षेत्र की भागीदारी है।

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भारत में कोई भी निजी कम्पनी विमानों का इंजन बनाने पर काम नहीं करती !! इस वजह से यह एक नियंत्रित कार्यक्रम है। मतलब आपने 100-200 वैज्ञानिको को पकड़ कर उन्हें इस मिशन पर लगाया हुआ है कि वे इंजन बनाकर दें। भारत में वैमानिक इंजीनियरिंग की क्षमता रखने वाले लाखों इंजीनियर्स है किन्तु उनके पास इसके लिए प्रयास करने का कोई अवसर नहीं है।

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1.3. तो क्या भारत विमान का इंजन बनाने में असफल रहा है ?
**.
नही !! भारत इंजन बनाने में असफल नहीं हुआ है। हद से हद हम यह कह सकते है कि असफल वे 100-200 इंजीनियर हुए है जिन्हें हमने पिछले 45 सालो से जबरदस्ती इंजन बनाने पर लगा कर रखा हुआ है। और मैं इन्हें भी असफल इसीलिए नहीं कहूँगा क्योंकि हमने इन्हें एक गलत मॉडल पर काम करने के लिए बाध्य किया हुआ है। लैब में इंजन !!! लैब में इंजन बना लेना चांस लेने वाली बात है !! इसका सही मेथड है कि इसे खुले बाजार में ही बनाया जा सकता है।

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और ये 100-200 इंजीनियर्स भारत नहीं है !! भारत में ऐसे हजारी इंजीनियर्स है जो सफलतापूर्वक विमान का इंजन बना सकते है। किन्तु भारत में निजी क्षेत्र के लोगो को विमान का इंजन बनाने का प्रयास करने की अनुमति नहीं है !!

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भारत में टाटा, अम्बानी, जिंदल, अडानी, महिंद्रा से लेकर ऑटो मोबाईल एवं तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाली सैंकड़ो कम्पनियां है, जो इंजन बनाने का प्रयास कर सकती है। ऐसे हजारो भारतीय निवेशक है जो इंजन बनाने के प्रोजेक्ट पर पैसा लगा सकते है। ऐसे लाखों इंजीनियर्स है, जो इसके लिए कोशिश कर सकते है। लेकिन सरकार ने गेजेट में यह इबारत छापी हुयी है कि -- भारत में कोई भी निजी व्यक्ति विमान का इंजन बनाने पर काम नहीं करेगा !!!

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लेकिन यदि किसी निजी व्यक्ति को इंजन बनाने के प्रोजेक्ट पर काम करना है तो उसे पहले सरकार से लाइसेंस लेना होता है !! लाइसेंस वे कभी देते नहीं है। और लाइसेंस देने से पहले ही कम्पनी के पूरे प्राण पी लेते है। जाहिर है कभी किसी निजी कम्पनी ने इसके लिए प्रयास नहीं किये !!

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दुसरे शब्दों में भारत में इंजन बनाने की कम्पनी खोलना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है !! सिर्फ सरकार ही यह कम्पनी खोल सकती है। इंदिरा गाँधी जी ने 1980 के आस पास यह सोचना शुरु कर दिया था कि हमें इंजन बनाने की दिशा में काम करना चाहिये। लेकिन उन्होंने इसे निजी क्षेत्र के लिए नहीं खोला !! नतीजा - खरबों डॉलर फूंकने के बाद भी हम 45 साल में इंजन नहीं बना पाए। पर चूंकि परमाणु कार्यक्रम लेब में चलाया जा सकता है अत: हम परमाणु तकनीक जुटाने में सफल हो गए !!

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(2) भारत चंद्रयान बना देता है लेकिन टैंक का इंजन क्यों नहीं बना पाता ?
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टैंक से लेकर सेना के इस्तेमाल में काम आने लायक सभी साजो सामान एवं उपकरण हम नहीं बनाते। और जो भी बनाते है वह काम में लाने लायक नहीं बल्कि काम निकालने लायक होती है। और इसकी एक मात्र और एक मात्र वजह यह है कि निजी क्षेत्र को इसे बनाने की अनुमति नहीं दी गयी है।

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अर्जुन टैंक का प्रोजेक्ट भी हमने 1980 के आस पास ही शुरू किया था। इस पर भी खरबों रुपया फूंके गए और कच्चा पक्का इंजन बनाकर परिक्षण भी किया गया। लेकिन अत: में हमें जर्मनी से इंजन लेने पड़े !!

*वजह -* *इंजन लैब में नहीं बनाया जा सकता !!*

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**(3) भारत ने मंगल मिशन भेज दिया लेकिन एक काम में आने वाली रायफल क्यों नही बना सका ?
**.

इंसास रायफल की भी यही दशा है। हमने सेना को 20 साल तक बाध्य किया कि वह इस कमतर रायफल का इस्तेमाल करें। लेकिन एक सीमा के बाद सेना के 2013 में सेना ने हाथ खड़े कर दिए और अब इंसास को हटाया जा रहा है। हम अब फिर से विदेशी रायफलों पर अपनी सेना चलाने वाले है !!

*वजह -* *रायफल लैब में नहीं बनायी जा सकती !!*

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मेरा बिंदु है कि :

भारत में निजी कम्पनियों एवं व्यक्तियों को टैंक एवं बंदूक या उसके पुर्जे बनाने की अनुमति नहीं है !! —- यह इबारत हमारे नेताओं ने गेजेट में छापी हुयी है !!

और इस वजह से हम रायफल और टैंक के इंजन नहीं बना पा रहे है !!

और ऐसे में आप 500 लोगो को पकड़ कर कहते है कि —

*तुम इंजीनियरिंग की दुनिया का सबसे बड़ा चमत्कार यानी फाइटर प्लेन का इंजन बनाकर दिखाओ !!*

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———————
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**अब अगले चरण का प्रश्न है कि -**

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यदि भारत में हथियारों के निर्माण के लिए लाइसेंस का क़ानून ख़त्म करके सिर्फ **रजिस्ट्रेशन अनिवार्य** का क़ानून बना दिया जाए तो क्या निजी कम्पनियां फाइटर प्लेन या टैंक का इंजन बना सकेगी ?

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नहीं !!** **भारत तब भी ये इंजन नहीं बना सकेगा। तब निजी कम्पनियां विदेशो से महत्त्वपूर्ण पुर्जे आयात करेगी और इन्हें असेम्बल करके सरकार को बेच देगी !!

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खुद से वे तब भी नहीं बना पायेंगे !! फायटर प्लेन या आला दर्जे का तकनीकी उत्पादन तब भी नहीं किया जा सकता। क्योंकि हमने कारखाना मालिको के पांवो में पत्थर बाँध कर रखे है। यदि भारत में तकनिकी उत्पादन करने वाले लोगो के पांवो में पत्थर नहीं बाँध दिए जाते तो हम निचे दिए सवालों का सामना नहीं कर रहे होते :
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**(4) भारत सोनोग्राफी / एमआरआई / X-ray मशीने / कम्पुटर / मोबाईल क्यों नहीं बना पाता ?**
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दरअसल तकनिकी उत्पादन में गुणवत्ता लाने के लिए हमें भारत में ढेर सारी छोटी छोटी उत्पादन इकाइयाँ चाहिए।
* ढेर सारी छोटी इकाईया क्यों ?
* कुछ बड़ी इकाईया क्यों नहीं ?

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क्योंकि कोई भी विशिष्ट उत्पाद कई प्रकार के पार्ट्स को मिलाकर बनाया जाता है। सभी पार्ट्स यदि उच्च गुणवत्ता वाले होंगे तो ही उत्पाद बेहतर बनेगा। एक भी पुर्जा कमतर होने से उत्पाद अपनी गुणवत्ता खो देगा। उदाहरण के लिए एक मोबाईल फोन डिस्प्ले स्क्रीन, बेटरी, माइक्रोफोन, सेमी कंडकटर चिप, स्पीकर आदि जैसे कई पुरजो को जोड़कर बनाया जाता है। डिस्प्ले स्क्रीन बनाने की सैंकड़ो कम्पनियां हो सकती है। उनमे आपसी प्रतिस्पर्धा होने से कोई दो-चार कम्पनी सबसे बेहतर डिस्प्ले बना पायेगी। और यही प्रक्रिया अन्य पुरजो के साथ होगी।

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मोबाइल बनाने वाली कम्पनी इन कम्पनियो से ये पुर्जे खरीदती है, और इन्हें फिट करके एक डिजाइन तैयार करती है। हवाई जहाज से लेकर कारो तक और कंप्यूटर तक इसी तरह प्रोडक्ट तैयार किया जाता है। दुनिया में ऐसी कोई कम्पनी नहीं जो अपने जटिल प्रोडक्ट के सभी पुर्जो का उत्पादन स्वयं करती हो। वह केवल महत्तवपूर्ण एवं जटिल पुर्जो का उत्पादन स्वयं करती है, और शेष पुर्जे अन्य छोटी छोटी कम्पनियों से लेती है।

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यदि वह सभी पार्ट्स का उत्पादन स्वयं करेगी तो उसके अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता गिर जायेगी। अत: किसी देश में एक बड़ी तकनिकी उत्पादक कम्पनी खड़ी करने के लिए यह जरुरी है कि वहां पर छोटी छोटी कई इकाइयों हो जो बेहतर तकनिकी वस्तुओ का उत्पादन करें।

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अमेरिका-फ़्रांस-ब्रिटेन में जूरी सिस्टम होने के कारण वहां पर कारखाना मालिको को सुरक्षा मिली हुयी है और उनका सारा तकनिकी विकास निजी कम्पनियों द्वारा किया गया है। और चाइना में तकनीकी पुर्जे बनाने वाली छोटी इकाइयों का विशाल आधार होने के कारण सरकारी कम्पनियों को निजी क्षेत्र का सपोर्ट है। भारत में न तो तकनिकी उत्पादन का आधारभूत ढांचा है और न ही निजी कम्पनियों को उत्पादन करने की छूट है। और जिन क्षेत्रो में निजी कम्पनियों को छूट है उन्हें जज-पुलिस-नेता पनपने नहीं देते !!

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(5) तो भारत में बड़े पैमाने पर कारखाने क्यों नही है ? या जो है वे भी कम कीमत में बेहतर उत्पाद क्यों नहीं बना रहे ?
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इसकी दो मुख्य वजहें है :
* जमीन के क़ानून
* जज-पुलिस-नेता का भ्रष्टाचार

भारत के नेताओं ने गेजेट में ऐसा क़ानून छापा हुआ है कि कोई भी व्यक्ति खरबों रूपये की किलोमीटरो के हिसाब से जमीन खरीद सकता है और के बार जमीन खरीदने के बाद उसे पूरी जिन्दगी इस जमीन पर कोई टेक्स नहीं चुकाना होगा !!

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इस वजह से जो जिन लोगो के पास ज्यादा आय है वे जमीन खरीदते है और भूल जाते है। इस वजह से जमीन निरंतर महंगी होती जाती है। आज भारत में जमीन इतनी महंगी हो चुकी है कि जमीन खरीद कर कोई कारोबार शुरू करना प्रेक्टिकली पोसिबल नहीं है। आपके पास यदि पुश्तैनी जमीन है तो बात और है। और कारखाने लगाने के लिए सस्ती जमीन की उपलब्धता पहली जरूरत है। तो जमीन की कीमतें बेहद ऊँची होने कारण कारखाने शुरू करना ही बहुत मुश्किल है।

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और कारखाने चलाने में सबसे बड़ा रोड़ा जज-पुलिस-नेता होते है। यदि आप कारखाना मालिको को इन 3 शिकारियों से बचा पायेंगे तो तो कारखाने चलेंगे वर्ना नहीं चलेंगे। और इसमें भी सबसे खतरनाक शिकारी जज है। जजों का काम है यह है कि जिसका धंधा बढ़ने लगे उससे हफ्ता वसूलना शुरू करो। तो जब तब हम कारखाना मालिको के पैरो में पड़े ये 3 पत्थर नहीं खोलेंगे तब तक भारत में बड़े पैमाने पर तकनिकी उत्पादन नहीं किया जा सकता।

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पाठक इस बात पर ध्यान दें कि इसमें भी सबसे बड़ी बाधा जज है। आप पुलिस एवं नेताओं को कितना भी ईमानदार बना दें, इससे कोई फर्क नहीं आएगा। जज अकेले ही पूरे देश की तकनिकी इकाइयों को पीसने के लिए काफी है। नेता और पुलिस उतने बड़े शिकारी नहीं है जितने बड़े शिकारी जज है। हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का भ्रष्ट जज एक ही फैसले से देश की लाखों छोटी इकाइयों को निगल जाता है। और उसे किसी भी तरह से रोका नहीं जा सकता। आप नेता को बाध्य कर सकते है, पुलिस की शिकायत कर सकते हो लेकिन जज सबका बाप है। उनके खिलाफ प्रदर्शन भी करोगे तो वे सीधा गोली चलाने का आदेश देते है, लाठी चार्ज का नहीं।

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**5.1. कैसे जज-पुलिस-नेता गठजोड़ कारखाना मालिकों का शोषण करते है ? **
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जो भी लोग मन्युफेक्चरिंग से जुड़े है वे आपको इस बारे में बताएँगे कि कैसे और कितने तरीको से उनसे घूस वसूल की जाती है। किन्तु वे अपने अनुभव बताने के लिए उपलब्ध नहीं होते। इसकी कई वजहें है। अव्वल तो वे कोरा फेसबुक जैसो मंचो होते नहीं है और यदि होते भी है तो लगभग नहीं के बराबर इसका इस्तेमाल करते है। और इस पर भी वे लिखते नहीं। उन्हें समय मिला तो ज्यादा से ज्यादा थोडा पढ़ लेंगे।

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दूसरी बड़ी वजह यह है कि, जब आदमी कारोबार करता है, तो इस बात को समझ लेता है कि चुपचाप रहकर अपना काम करने में फायदा है। तो वह खुद को जाहिर नहीं करता। जितना ज्यादा वह जाहिर होगा उतना ज्यादा नेता-जज-पुलिस माफिया की नजरो में आएगा और घूस की राशि बढ़ जायेगी। दुसरे शब्दों में वे डरे हुए रहते है, और राजनैतिक मामलों में दखल नहीं देते। वे चुपचाप मार खा लेंगे और घूस दे देंगे। यदि वे लड़ने जायेंगे तो उनका धंधा बंद हो जाएगा।

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दुसरे शब्दों में **एक देश एक कर** का नारा लगाकर जीएसटी का समर्थन करने वाले ज्यादातर लोग वे होते है जिन्हें कभी जीएसटी के रिटर्न नहीं भरने पड़े है। वे 25–50 हजार की नौकरी करते है और अपना समय काटने के लिए सोशल मीडिया पर वे डायलोग दोहराता है, जो इन्हें पेड मीडिया पकड़ा रहा है। और ऐसे में यदि कोई कारोबारी कहता है कि जीएसटी गलत क़ानून है तो ये उसे कहते है कि — तू टेक्स चोर है !!
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जब आप कारखाने के लिए जमीन लेने जाते है तो पैसा देते है। इसके बाद उसके व्यावसायिक अंतरण के लिए लाखों की घूस देते है। इसके बाद पर्यावरण विभाग की अनुमति , बिजली कनेक्शन के लिए घूस देते है। और इसी तरह की आधा दर्जन मदों में घूस देने के बाद आप काम शुरू करते है। और जैसे ही आप प्रोडक्शन शुरू करते है और आपका कारोबार चलने लगता है वैसे ही लगभग 4-5 विभागो की नजरो में आप आ जाते हो, और वे विभिन्न कानूनों के उलंघन करने के आपको नोटिस भेजने लगते है।

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अब या तो आप उन्हें हफ्ता देना शुरू कर दो या फिर अपना धंधा छोड़कर उनके विभागों के चक्कर लगाते रहो। और जैसे ही आप शिकायत लेकर अदालत में जाते हो वैसे ही आप अब जज के ग्राहक बन जाते हो !! इस तरह आप लगातार तावान चुकाते हो और आपका धंधा टूटने लगता है !!

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यदि ऊपर के विवरण गड्ड मड्ड हो गए हो तो मैं इसका सार यहाँ फिर से दोहरा रहा हूँ , और तब आगे की बात कहूँगा :
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**(A) भारत सभी प्रकार के तकनिकी उत्पादन में बुरी तरह से पिछड़ा हुआ क्यों है ?**

इसकी दो वजहें है :
* जमीनों के गलत क़ानून
* जज-पुलिस-नेता का भ्रष्टाचार

उपरोक्त दो वजहों ने ऐसी व्यवस्था की रचना की है कि तकनिकी उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर कारखाने लगाना संभव नहीं है !!

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(B) और भारत सैन्य उपकरण एवं हथियारों का निर्माण क्यों नहीं कर पाता ?**

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क्योंकि निजी क्षेत्र को इसके उत्पादन की अनुमति नहीं है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका में यदि आपको बंदूक या टैंक बनाने की कम्पनी खोलनी है तो लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होती है। सिर्फ रजिस्ट्रेशन करवाकर आप ये कम्पनी खोल सकते हो !! जितने भी नियम है वे बेचने पर है। बनाने के लिए कोई नियम नही है। और वहां पर जूरी सिस्टम होने के कारण जजों को हफ्ता नहीं देना पड़ता।

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(C) फिर भारत अन्तरिक्ष मिशन एवं परमाणु कार्यक्रम में कामयाब कैसे हुआ ?**

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क्योंकि ये दोनों कार्यक्रम नियंत्रित दशाओं यानी लैब वगेरह में चलाये जा सकते है। सरकारी कार्यक्रम को संचालित करने वाले शीर्ष अधिकारीयों को जमीन खरीदने का सरदर्द नहीं लेना है, और न ही जज-पुलिस उनसे हफ्ता वसूलने आने वाले है।

**(D) भारत तेजस और अर्जुन का इंजन बनाने में असफल क्यों हुआ ?**

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क्योंकि इंजन जैसा जटिल उपकरण लैब में नहीं बनाया जा सकता है, और बाजार इसका उत्पादन न करें इसके लिए नेताओं ने काफी सारे क़ानून छाप कर रखें हुए है।

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अब हम अगले प्रश्न पर आते है :
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**(6) फिर भारत मिसाइलें बनाने में कैसे सफल हुआ ?**

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जैसा कि मैंने बताया कि हथियारों का निर्माण करने का मेथड यह है कि इसका विकास बाजार में किया जाता है , लेब में नहीं। यदि आप लैब में इसका उत्पादन करने की कोशिश कर रहे है तो यह चांस लेने वाली बात है। तो कभी आपकी लॉटरी लग जाती है, और कभी नहीं लगती !!

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निचे मैंने बताया है कि कैसे रोकेट बनाने की तकनीक हम तक पहुंची और कैसे हमने इसका इस्तेमाल करके मिसाइले खड़ी की। और कैसे यह मेथड नहीं बल्कि शुद्ध रूप से एक लॉटरी यानी किस्मत थी !! या दुसरे शब्दों में कहे तो वक्त हमारे साथ था !!

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1960 की बात है जब अमेरिका को भारत के थुम्बा***** से एक सेटेलाइट लांच करना था। भारत के इंजीनियरों को शुरूआती चरणों की ट्रेनिंग देने के लिए कुछ इंजीनियरों को नासा ने अमेरिका बुलाया। और इस दल में डॉ कलाम भी थे। ये लोग 4 महीने नासा में रुके, ताकि अमेरिकी सेटेलाइट की उड़ान के लिए भारत में प्राथमिक तैयारियां कर सके। 1963 में अमेरिका ने अपना सेटेलाईट थुम्बा से छोड़ा।

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और इसके बाद फ़्रांस, सोवियत रूस आदि देशो ने भी अपने कई सेटेलाईट थुम्बा से प्रक्षेपित किये।

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[ (*****) चुंबकीय भूमध्य रेखा के बेहद समीप होने के कारण थुम्बा अंतरिक्ष प्रक्षेपण के लिए आदर्श स्थल है। तो भारत को प्रकृति ने थुम्बा दिया और अमेरिका समेत कई देशो को भारत को अन्तरिक्ष कार्यक्रम में सहयोगी बनाना पड़ा !! ]

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1965 में होमी जहांगीर भाभा ने भारत में सेटेलाईट लांचर विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया, और इसी क्रम में भारत ने नासा से इसका एक प्रोटोटाइप माँगा। अमेरिका ने इसकी तकनीक देने से इंकार कर दिया। इसी बीच डॉ कलाम* ने भारत सरकार को बताया कि उन्होंने नासा में रहते हुए वे तमाम बारीकियां पकड़ ली है जिससे हम अपना व्हीकल बनाने का प्रोजेक्ट शुरू कर सकते है !!

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[ (*****) कलाम इस प्रोजेक्ट की चाबी थे। यदि वे भारत न लौटते या देश छोड़ देते तो उनका कैरियर ज्यादा चमकदार होता। उन्होंने देश चुना। मेरे मानने में ऐसा बहुत कम होता है कि इस स्तर का कोई प्रतिभाशाली इंजिनियर निजी क्षेत्र के अपने कैरियर को लात मारकर सरकारी प्रोजेक्ट पर काम करें। यह एक दुर्लभ उदाहरण है। ऐसे लोग बहुत मुश्किल से पैदा होते है। यह हमारी किस्मत थी कि इस दल में कलाम मौजूद थे।]
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डॉ कलाम ने भारत आकर इस पर काम करना शुरू किया और भारत ने अपना पहला सेटेलाईट व्हीकल बनाकर सफलता पूर्वक प्रक्षेपण किया। डॉ कलाम द्वारा बनाया गया यह व्हीकल हूबहू अमेरिका के व्हीकल के समान था। तकनीक, आकार, वजन से लेकर लम्बाई भी ( 23 मीटर )।

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ऐसी कई तकनीक होती है जिन्हें शान्ति कार्यो जैसे सेटेलाईट आदि के लिए साझा किया जाता है, किन्तु सैन्य तकनीके किसी भी रूप में साझा नहीं की जाती और इन पर काफी कठोर प्रतिबन्ध रहते है।

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6.1. और कैसे डॉ कलाम ने सेटेलाईट तकनीक का इस्तेमाल भारत में मिसाइले खड़ी करने में किया ?**
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इसी दौरान फ़्रांस द्वारा भी भारत से एक व्हीकल लांच किया गया था। फ़्रांस के प्रोजेक्ट से डॉ कलाम ने राकेट में तरल इंधन का इस्तेमाल करने की तकनीक पकड़ी। बाद में तरल इंधन की इस तकनीक का प्रयोग पहले पृथ्वी एवं बाद में अग्नि मिसाइलो में किया गया।

[India's Missiles - With a Little Help from Our Friends](<https://www.wisconsinproject.org/indias-missiles-with-a-little-help-from-our-friends/#note-1-ref>;)

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जर्मन के साथ 1976 में सेटेलाईट प्रोजेक्ट पर काम करते हुए डॉ कलाम ने कंपोजिट मेटल और गाइडेंस सिस्टम की बारीकियां पकड़ी और बाद में इनका इस्तेमाल मिसाइलो को बनाने में किया गया। और अंत में जर्मनी के साथ सेटेलाईट प्रोजेक्ट पर काम करते हुए भारत को APC-Rex ( Motorola 68000 microprocessor ) मिला जिसने हमारी मिसाइल तकनीक की अंतिम जरूरत पूरी की।

[Bulletin of the Atomic Scientists](<https://books.google.co.in/books?dq=indian+satellite+and+missile+system+foreign+assistance+thumba+kalam+motorola&hl=en&id=6AUAAAAAMBAJ&lpg=PA31&ots=9EI9Q-42Hr&pg=PA31&sa=X&sig=ACfU3U0AbzrkoorGNm1enrNy76FJ_bMUvw&source=bl&ved=2ahUKEwid982jsI_jAhWQV30KHR-mADIQ6AEwDnoECAgQAQ#v=onepage&q&f=false>;)

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डॉ भाभा थोरियम के परमाणु रिएक्टर की तकनीक पर काफी बढ़ चुके थे। अंतत: सीआईए ने उनकी हत्या करवा दी। लेकिन वे कलाम तक नहीं पहुँच सके और हमारा मिसाईल मिशन आगे बढ़ता रहा।

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परमाणु बम के लिए भारत को तकनीक अमेरिका और कनाड़ा से मिली। कनाड़ा ने भारत को एक रिएक्टर और अमेरिका ने हेवी वाटर दिया था। ये हस्तांतरण पीस प्रोजेक्ट यानी पॉवर प्लांट आदि के लिए था। इंदिरा जी ने इसका इस्तेमाल परमाणु बम की तकनीक विकसित करने में किया और परमाणु धमाके किये।

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अमेरिका तब से इंदिरा जी को गिराने के प्रयास में लग गया था, और उसने भारत के तमाम विपक्षी नेताओं-जजों-अधिकारियों एवं कोंग्रेस के अन्य नेताओं के आगे टुकड़े फेंके। अंत में अमेरिका इंदिरा जी को सब तरफ से घेरने में कामयाब रहा और उन्हें आपातकाल लगाना पड़ा। दरअसल भारत के पास आज जो भी अपना है और जिसकी वजह से भारत आज तक टिका हुआ है उसमे इन 4 लोगो को योगदान काफी महत्त्वपूर्ण है — डॉ भाभा , डॉ कलाम, डॉ साराभाई एवं इंदिरा जी !!

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1990 के बाद हमें जितने भी नेता मिले उन्होंने हमारे देश में अमेरिकी कम्पनियों का नियंत्रण बढाने में कोई कसर नहीं रखी। और आज अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का स्वर्ण काल चल रहा है। विकास के नाम पर देश की सभी राष्ट्रीय संपत्तियां OLX पर है। जिसे जितना चाहिए खरीद सकता है।

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**(7)** **ऊपर दिए गए प्रश्न के जो गलत एवं अस्पष्ट जवाब चलन में है।
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**7.1. भारत में R&D नहीं है।**

जो लोग कहते है कि भारत में R&D नहीं है। वे इस बारे में कभी कुछ नहीं कहते है कि R&D क्यों नहीं है !! उनका कहना होता है - बस R&D नहीं है। बात ख़त्म। और इस सवाल को वे टाल देते है कि R&D बढे इसके लिए गेजेट में कौनसे क़ानून छापने चाहिए।
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मेरा जवाब है कि -** **जब हथियार बनाने की अनुमति ही नहीं है तो R&D किस पर करेंगे ? हवा में ? पैसा कौन लगाएगा ? और कहाँ लगाएगा। और यदि आपने करोड़ो रूपये घूस खिलाकर लाइसेंस ले भी लिया तो जजों को हफ्ता दोगे या R&D पर निवेश करोगे !! तो R&D वही कर सकता है जिसके पास नेता-पुलिस-जज को कंट्रोल करने की क्षमता हो। सिर्फ बहुराष्ट्रीय कम्पनियां ही ऐसा कर सकती है। और जब वे आते है तो जीएसटी जैसे क़ानून छपवाकर मार्केट में से सभी कम्पनियों को साफ़ कर देते है।

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7.2. भारत के लोगो में देशप्रेम नहीं है, इसीलिए काबिल लोग देश छोड़ देते है। मतलब Brain Drain !!
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ब्रेन ड्रेन क्यों है, और इसे रोकने के लिए कौनसे क़ानून छापने है — यह सवाल वे लेते नहीं है।

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मेरा जवाब है कि — हर आदमी बेहतर अवसर और बेहतर जगह की तलाश में रहता है। भारत में विमान के इंजन , टैंक के इंजन, रायफल आदि बनाने की कितनी कम्पनियां है ? जीरो !! तो टेलेंटेड इंजीनियर्स इधर बैठकर क्या करेंगे !! तुम लोग मोबाइल और पंखो के केपिसिटर बनाने की कम्पनियां नी पनपने दे रहे हो जटिल इंजीयरिंग की तो बात ही दूर है। मतलब इधर बैठकर क्या तलेंगे वो ? अपना देश कोई नहीं छोड़ना चाहता !! पर तुमने क़ानून ही ऐसे छापे है कि अपने आप ही देश छूट जाता है।

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एक जमीन खरीद कर 3–4 साल तक उधर न जाओ तो कोई भी इस पर कब्ज़ा कर लेता है, और इसे वापिस हासिल करने में दशको तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते है !! ये दशा है क़ानून व्यवस्था की !! तो ब्रेन ड्रेन तो होना वाजिब है !! गलत क्या है इसमें !! अमेरिका-फ़्रांस-रूस से कितना ब्रेन ड्रेन हो रहा है यहाँ पर ? पर तुमने अदालतों और थानों को सुधारने के कानूनों पर तो बात करनी नहीं है, 5 किलोमीटर लम्बा भाषण ब्रेन ड्रेन पर देना है !!

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7.3. भारत में राजनैतिक भ्रष्टाचार है, नौकरशाही सुस्त है, राजनैतिक संस्कृति निम्न है आदि
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मेरा जवाब - राजनैतिक संस्कृति नाम की तो कोई चीज होती ही नही है। और जहाँ तक शासकीय सुस्ती एवं भ्रष्टाचार का सवाल है, भारत की अदालतों ने देश का कबाड़ा किया हुआ है। देश में सारा भ्रष्टाचार और अपराध सिर्फ इसीलिए है क्योंकि हमारे जज भ्रष्ट है। वे पैसा खाकर अपराधियों को या तो छोड़ देते है या तारीख पर तारीख देते रहते है। और जिस देश में जज भ्रष्ट हो जाते है, वहां क़ानून नाम की कोई चीज नहीं होती है। तब चयनात्मक न्याय होता है। यदि जेब में पैसा और रसूख है तो क़ानून आपकी जेब में है। और जजों के भ्रष्टाचार पर ये ज्ञानी और बुद्धिजीवी लोग बात नहीं करना चाहते। और यदि बात करते भी है तो यह बिंदु कभी नहीं उठाने देते कि गेजेट में क्या छापने से अदालतें ठीक होगी।

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**(8) **समाधान ?**
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**8.1. फर्जी और आत्मघाती समाधान : **अमेरिकी** **बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को भारत में आकर हथियारों का उत्पादन करने की अनुमति देना एक आत्मघाती समाधान है। मतलब मैं इसे सीधे सीधे एंटी नेशनल स्टेप कहने से गुरेज नहीं करूँगा। जिस तरह अभी पूरे देश का सोशल मीडिया नेटवर्क सिर्फ 3 अमेरिकन कम्पनियों के हाथ में है और किसी भारतीय कम्पनी की हैसियत ही नहीं है कि वे इसमें घुसने की कोशिश भी कर सके तो इससे भी बदतर हालत हथियारों के क्षेत्र में होने वाली है। एक बार यदि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने आकर यहाँ हथियार बनाने शुरू किये तो इसका अवश्यम्भावी नतीजा है — भारत की सेना उन पर बुरी तरह से निर्भर हो जायेगी। और सेना की निर्भरता दुसरे देश पर होने का मतलब क्या होता है कहने की जरूरत नहीं है।
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मतलब 70 साल तक तुमने भारत के लोगो को हथियार नहीं बनाने दिए , और पेड मीडिया के माध्यम से नागरिको के दिमाग में यह कीले ठोकते रहे कि भारत हथियार नहीं बना पा रहा है, भारत में कैपेसिटी नहीं है आदि आदि । और अब अमेरिकी कम्पनियों को भारत में आकर हथियार बनाने को कह रहे हो !!
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सीधे सीधे अमेरिकी जनरल ही नियुक्त क्यों नहीं कर देते भारतीय सेना में। जिस तरह जुकेरबर्ग हमारा सोशल मीडिया चला रहा है, वो हमारी सेना भी चला लेंगे। बहरहाल, मैं इस कदम के सख्त खिलाफ हूँ, और जो आदमी इस कदम का समर्थन करता है मैं उसे समझाने की कोशिश भी नहीं करता। क्योंकि इस कदम का समर्थन करने वालो में जिस लेवल का आई क्यू होता है, उन्हें मैं मीट नहीं कर सकता। गोरो के चले जाने से इनमे छटपटाहट है। जब तक फिर से गोरो को बुलाकर ये अपनी सेना उन्हें नहीं सौंप देते ये रुकने वाले नहीं है।

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**8.2. वास्तविक समाधान : **मैं इस समस्या के समाधान के लिए 3 क़ानून ड्राफ्ट गेजेट में प्रकाशित करने का सुझाव देता है। एक क़ानून स्वदेशी हथियारों के निर्माण को लाइसेंस मुक्त करता है। और दूसरा क़ानून अदालतों-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट लाएगा।
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**8.2.1. भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट**

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*==== ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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1. यह क़ानून सिर्

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Sep 08 2019 12:43:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रेडो - जिला स्तर के अधिकारीयों को प्रजा के अधीन करने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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(REDO - Proposed Notification for Right to Expel District level Officers )
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( इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है। )
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कानून का सार : यह कानून सरकारी स्कूलों , सरकारी अस्पतालों, थानों, अदालतों की दशा सुधारने एवं मिलावट की समस्या कम करने के लिए लिखा गया है। इस कानून को लोकसभा या विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित रेडो क़ानून को गेजेट में छापें - #Redo , #P20180436105 , #VoteVapsiPassBook ,
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. जिला पुलिस प्रमुख
2. जिला शिक्षा अधिकारी
3. जिला चिकित्सा अधिकारी
4. जिला जज
5. जिला मिलावट रोक अधिकारी
6. जिला जूरी प्रशासक
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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(02) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। ऊपर दिए गए 6 अधिकारी एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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(03) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (16.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश :
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(04) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस राजपत्र अधिसूचना के लिए अभिभावक माना जायेगा। अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी चालू रखने या निकाल दिए जाने के लिए "हाँ" दर्ज कर सकेंगे।
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(05) अधिकारियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(5.1) पुलिस प्रमुख के लिए : यदि 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(5.2) चिकित्सा अधिकारी के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए आवश्यक जैसे MBBS, BAMS या इसके समकक्ष डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष पूर्ण हो चुके हो, तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(5.3) जिला जज के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला जज पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(5.4) शिक्षा अधिकारी, मिलावट रोक अधिकारी, एवं जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह वह शिक्षा अधिकारी, मिलावट रोक अधिकारी एवं जूरी प्रशासक के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(06) धारा 5 में दी गयी योग्यता धारण वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(07) मतदाता द्वारा "हाँ" दर्ज करना
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(7.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, मिलावट रोक अधिकारी , जिला जज, जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(7.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(7.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
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(7.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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टिप्पणी : रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(08) अधिकारीयों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(8.1) पुलिस प्रमुख एवं शिक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है। इस बारे में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक स्वीकृति प्राप्त कर लेता है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(8.2) जिला चिकित्सा अधिकारी, जिला मिलावट रोक अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में "हाँ" दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियाँ पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री सम्बंधित पद पर उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(8.3) जिला जज के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियाँ पदासीन जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति की विनती के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(8.4) जिला शिक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियाँ पदासीन शिक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(09) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल
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(9.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि जिले के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(9.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(10) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे । किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त मतदान की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(11) विशिष्ट परिस्थितियों में राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री किसी जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया एवं उसके स्टाफ पर ज्यूरी ट्रायल को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपने विवेकाधिकार से उस जिले में नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी, जिला जज एवं जिला चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(12) मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृति से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का, और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(13) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(14) शिकायतो का नागरिको की जूरी द्वारा निपटान
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 15.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(14.1) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने पर आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई तय करनी होगी।
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(14.2) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महा जूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महा जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(14.3) यदि पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, चिकित्सा अधिकारी या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(14.4) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(14.5) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने एवं नार्क्को टेस्ट का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(15) जिला शिक्षा अधिकारी : सात्य प्रणाली के लिए निर्देश
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[ टिप्पणी : सात्य प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे हम गणित-विज्ञान के अध्यापन में उन लोगो को मुक्त रूप से आकर्षित कर सके जिनमे प्रतिभा एवं शिक्षण तत्व (टीचिंग मेटेरियल) है। साथ ही यह ज्यादा से ज्यादा प्रतिभाशाली छात्रों को गणित विज्ञान में कुशलता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करती है।]
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(15.1) कोई भी व्यक्ति DEO ऑफिस में 200 रू जमा करके खुद को गणित-विज्ञान के शिक्षक के रूप में पंजीकृत करने के लिए एक शपथपत्र दे सकेगा। शिक्षा अधिकारी उसे पंजीकृत करेगा और एक रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करेगा। इस शपथपत्र के साथ वह अपनी शिक्षा सम्बन्धी डिग्रियां, अनुभव आदि के दस्तावेज सलंग्न कर सकता है। यह शपथपत्र सार्वजनिक रहेगा ताकि अभिभावक इसे देख सके।
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(15.2) कोई भी छात्र शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जाकर खुद को एक छात्र के रूप में पंजीकृत करवा सकेगा।
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(15.3) पंजीकृत शिक्षक छात्रों को आकर्षित करेंगे और उन्हें स्वतन्त्र रूप से पढ़ायेंगे। पढ़ाने की जगह, ब्लेक बोर्ड, फर्नीचर आदि की व्यवस्था शिक्षक को स्वयं करनी होगी।
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(15.3.1) स्पष्टीकरण - यदि शिक्षक के पास 20 से अधिक छात्र हो जाते है तो DEO उसे किसी नजदीकी सरकारी स्कूल का कक्षा कक्ष आवंटित कर सकता है। अमुक शिक्षक अनुमति प्राप्त समय में अपने छात्रों को यहाँ पढ़ा सकता है। यदि निजी स्कूल अनुमति देता है तो DEO किसी निजी स्कूल का कक्ष भी शिक्षक को आवंटित कर सकता है।
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(15.4) शिक्षा अधिकारी शिक्षको को कोई भी वेतन नहीं देगा। यदि अभिभावक चाहे तो शिक्षक को उसके शिक्षण की गुणवत्ता एवं नतीजो के आधार पर फ़ीस दे सकते है।
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(15.5) यदि छात्र को पाठ समझ नहीं आ रहा है तो छात्र अपना शिक्षक किसी भी समय बदल सकता है। छात्र जब किसी एक शिक्षक के पास से अपना नाम कटवाएगा तो किसी अन्य शिक्षक के पास खुद को पंजीकृत करवाएगा।
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(15.6) शिक्षा अधिकारी सिलेबस / पाठ्यक्रम की एक प्रश्नमाला पहले से प्रकाशित करेगा। प्रश्नमाला में 10,000 से कम प्रश्न नहीं होंगे और ये प्रश्न 25,000 या उससे ज्यादा भी हो सकते है।
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(15.7) शिक्षा अधिकारी अनिवार्य रूप से मासिक, त्रेमासिक, अर्ध वार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाएं आयोजित करवाएगा। इन सभी परीक्षाओं के प्रश्न अनिवार्य रूप से बहु वैकल्पिक प्रकार के होंगे।
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(15.8) DEO जिले के परीक्षा परिणाम के आधार पर ग्रेडिंग करेगा तथा प्रदर्शन के अनुरूप शिक्षको को पुरूस्कार देगा। जितना पुरूस्कार शिक्षक को मिलेगा, उतना ही पुरूस्कार अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी दिया जाएगा।
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(15.8.1) स्पष्टीकरण- मान लीजिये कोई शिक्षक 30 छात्रों को पढाता है। इनमे से 3 छात्र "अ, ब एवं स” वरीयता सूची में स्थान पाते है, एवं 1 छात्र ‘द’ जिले में 100 वीं रेंक हासिल करता है। यदि वरीयता सूची के लिए DEO 25,000 रू एवं 100 वी रेंक के लिए 5000 रू पारितोषिक तय करता है तो शिक्षक 25,000*3 = 75,000 + 5000 =80,000 रू प्राप्त करेगा एवं इन छात्रों को भी क्रमश: 25,000 एवं 5,000 रू का पुरूस्कार देंगे।
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(15.9) गणित-विज्ञान के अतिरिक्त इतिहास, सामाजिक विज्ञान, भूगोल आदि विषयों से ग्रेड का निर्धारण नहीं होगा, एवं इन विषयों में छात्र को सिर्फ पास होना होगा। छात्र उपरोक्त विषयों में 100 में से 100 अंक लाता है तब भी मार्कशीट में सिर्फ पास अंकित किया जाएगा।
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(16) जनता की आवाज :
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(16.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(16.2) यदि कोई मतदाता धारा 16.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 16 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित रेडो क़ानून को गेजेट में छापे - #Redo , #VoteVapsiPassbook “
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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“ @Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #Redo , #VoteVapsiPassbook “
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (16) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Sep 08 2019 21:45:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रेगो – जिला एवं केन्द्रीय अधिकारीयों को प्रजा अधीन करने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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( REGO ; Proposal for Right to Expel Central & Disst Level Officers )
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( इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है। )
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इस कानून का सार : यह क़ानून स्कूलो-अस्पतालो-थानों-अदालतों-बैंक एवं मीडिया को सुधारने के लिए लिखा गया है। यह क़ानून 10 अधिकारीयों को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाता है। इस क़ानून को संसद से पास करने की जरूरत नही है। इसे प्रधानमंत्री सीधे गेजेट में छाप सकते है। #P20180436106
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे । पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित रेगो क़ानून को गेजेट में छापे - #VoteVapsiPassbook , #Rego
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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[ टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। ]
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर आपको यानी प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित 10 अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. जिला पुलिस प्रमुख
2. जिला शिक्षा अधिकारी
3. जिला चिकित्सा अधिकारी
4. जिला जज
5. मिलावट रोक अधिकारी
6. DD चेयरमेन
7. RBI गवर्नर
8. CBI डायरेक्टर
9. BSNL चेयरमेन
10. सेंसर बोर्ड चेयरमेन
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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(02) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। ऊपर दिए गए 10 अधिकारी एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश
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(03) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस राजपत्र अधिसूचना के लिए अभिभावक माना जायेगा। अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी चालू रखने या निकाल दिए जाने के लिए हाँ दर्ज कर सकेंगे।
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(04) पुलिस प्रमुख, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षा अधिकारी, जिला जज एवं जूरी प्रशासक के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(4.1) पुलिस प्रमुख के लिए : यदि 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(4.2) चिकित्सा अधिकारी के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए आवश्यक जैसे MBBS, BAMS या इसके समकक्ष डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष पूर्ण हो चुके हो, तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(4.3) जिला जज के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो एवं उसे वकालत की शिक्षा पूर्ण किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला जज पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(4.4) शिक्षा अधिकारी एवं जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला न्यायवादी ( जूरी प्रशासक ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(4.5) DD चेयरमेन, RBI गवर्नर, CBI डायरेक्टर एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक DD चेयरमेन , RBI गवर्नर , CBI डायरेक्टर या सेंसर बोर्ड चेयरमेन के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(05) धारा 4 में दी गयी योग्यता धारण वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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(06) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(6.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर धारा 01 में दिए गए पदों के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(6.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(6.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
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(6.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। धारा (4.5) में वर्णित केन्द्रीय स्तर के अधिकारियो की स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(07) पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(7.1) पुलिस प्रमुख एवं शिक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है। इस बारे में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक स्वीकृति प्राप्त कर लेता है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(7.2) जिला चिकित्सा अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में "हाँ" दर्ज कर देते है और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है, तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(7.3) जिला जज के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन जज से 1% अधिक भी है, तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति की विनती के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(7.4) जिला शिक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है, तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(7.5) DD चेयरमेन , RBI गवर्नर , CBI डायरेक्टर , एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन के लिए : यदि किसी उम्मीदवार को देश की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) की 35% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री मौजूदा अधिकारी को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति सम्बंधित पद पर कर सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा।
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(08) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्विकृतियोँ की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(8.1) प्रधानमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि जिले के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(8.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक स्वीकृति प्राप्त कर लेता है, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(09) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे । किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(10) विशिष्ट परिस्थितियों में राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री किसी जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया एवं उसके स्टाफ पर ज्यूरी ट्रायल को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपने विवेकाधिकार से उस जिले में नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी, जिला जज एवं जिला चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(11.1) मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृति से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का, और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(11.2) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(12) पुलिस, शिक्षा, न्यायालय एवं चिकित्सा विभाग के मामलो का नागरिको की जूरी द्वारा निपटान
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[ टिप्पणी : प्रधानमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। प्रधानमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 15.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(12.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महा जूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महा जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(12.2). यदि पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, चिकित्सा अधिकारी या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(12.3) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(12.4) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने एवं नारको टेस्ट का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(12.5) यदि DD चेयरमेन , RBI गवर्नर , CBI डायरेक्टर, सेंसर बोर्ड चेयरमेन या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत दिल्ली राज्य के महाजूरी मंडल में कर सकते है। यदि मामला किसी अन्य राज्य या जिले का है और महा जूरी मंडल उचित समझता है तो महा जूरी मंडल अमुक मामले को सम्बंधित जिले में स्थानांतरित करने का फैसला ले सकते है।
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(13) जिला शिक्षा अधिकारी : सात्य प्रणाली के लिए निर्देश
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[ टिप्पणी : सात्य प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे हम गणित-विज्ञान के अध्यापन में उन लोगो को मुक्त रूप से आकर्षित कर सके जिनमे प्रतिभा एवं शिक्षण तत्व (टीचिंग मेटेरियल) है। साथ ही यह ज्यादा से ज्यादा प्रतिभाशाली छात्रों को गणित विज्ञान में कुशलता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करती है।]
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(13.1) कोई भी व्यक्ति DEO ऑफिस में 200 रू जमा करके खुद को गणित-विज्ञान के शिक्षक के रूप में पंजीकृत करने के लिए एक शपथपत्र दे सकेगा। शिक्षा अधिकारी उसे पंजीकृत करेगा और एक रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करेगा। इस शपथपत्र के साथ वह अपनी शिक्षा सम्बन्धी डिग्रियां, अनुभव आदि के दस्तावेज सलंग्न कर सकता है। यह शपथपत्र सार्वजनिक रहेगा ताकि अभिभावक इसे देख सके।
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(13.2) कोई भी छात्र शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जाकर खुद को एक छात्र के रूप में पंजीकृत करवा सकेगा।
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(13.3) पंजीकृत शिक्षक छात्रों को आकर्षित करेंगे और उन्हें स्वतन्त्र रूप से पढ़ायेंगे। पढ़ाने की जगह, ब्लेक बोर्ड, फर्नीचर आदि की व्यवस्था शिक्षक को स्वयं करनी होगी।
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(13.3.1) स्पष्टीकरण - यदि शिक्षक के पास 20 से अधिक छात्र हो जाते है तो DEO उसे किसी नजदीकी सरकारी स्कूल का कक्षा कक्ष आवंटित कर सकता है। अमुक शिक्षक अनुमति प्राप्त समय में अपने छात्रों को यहाँ पढ़ा सकता है। यदि निजी स्कूल अनुमति देता है तो DEO किसी निजी स्कूल का कक्ष भी शिक्षक को आवंटित कर सकता है।
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(13.4) शिक्षा अधिकारी शिक्षको को कोई भी वेतन नहीं देगा। यदि अभिभावक चाहे तो शिक्षक को उसके शिक्षण की गुणवत्ता एवं नतीजो के आधार पर फ़ीस दे सकते है।
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(13.5) यदि छात्र को पाठ समझ नहीं आ रहा है तो छात्र अपना शिक्षक किसी भी समय बदल सकता है। छात्र जब किसी एक शिक्षक के पास से अपना नाम कटवाएगा तो किसी अन्य शिक्षक के पास खुद को पंजीकृत करवाएगा।
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(13.6) शिक्षा अधिकारी सिलेबस / पाठ्यक्रम की एक प्रश्नमाला पहले से प्रकाशित करेगा। प्रश्नमाला में 10,000 से कम प्रश्न नहीं होंगे और ये प्रश्न 25,000 या उससे ज्यादा भी हो सकते है।
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(13.7) शिक्षा अधिकारी अनिवार्य रूप से मासिक, त्रेमासिक, अर्ध वार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाएं आयोजित करवाएगा। इन सभी परीक्षाओं के प्रश्न अनिवार्य रूप से बहु वैकल्पिक प्रकार के होंगे।
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(13.8) DEO जिले के परीक्षा परिणाम के आधार पर ग्रेडिंग करेगा तथा प्रदर्शन के अनुरूप शिक्षको को पुरूस्कार देगा। जितना पुरूस्कार शिक्षक को मिलेगा, उतना ही पुरूस्कार अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी दिया जाएगा।
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(13.8.1) स्पष्टीकरण- मान लीजिये कोई शिक्षक 30 छात्रों को पढाता है। इनमे से 3 छात्र "अ, ब एवं स” वरीयता सूची में स्थान पाते है, एवं 1 छात्र ‘द’ जिले में 100 वीं रेंक हासिल करता है। यदि वरीयता सूची के लिए DEO 25,000 रू एवं 100 वी रेंक के लिए 5000 रू पारितोषिक तय करता है तो शिक्षक 25,000*3 = 75,000 + 5000 =80,000 रू प्राप्त करेगा एवं इन छात्रों को भी क्रमश: 25,000 एवं 5,000 रू का पुरूस्कार देंगे।
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(13.9) गणित-विज्ञान के अतिरिक्त इतिहास, सामाजिक विज्ञान, भूगोल आदि विषयों से ग्रेड का निर्धारण नहीं होगा, एवं इन विषयों में छात्र को सिर्फ पास होना होगा। छात्र उपरोक्त विषयों में 100 में से 100 अंक लाता है तब भी मार्कशीट में सिर्फ पास अंकित किया जाएगा।
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(14) दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए निर्देश
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(14.1) राष्ट्रिय स्तर पर दूरदर्शन को 5 स्वतंत्र चेनलो में विभाजित किया जाएगा। एक चैनल प्रधानमन्त्री के सीधे नियंत्रण में होगा, तथा अन्य 4 अपने अपने स्तर पर स्वतंत्र होंगे। इन सभी चेनल्स के अध्यक्ष वोट वापसी पासबुक के दायरे में होंगे, ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे, और खबरों को दबाया न जा सके। निजी चेनल्स भी मुक्त रूप से प्रसारण के लिए स्वतंत्र होंगे।
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(14.2) प्रत्येक राज्य के पास दो चैनल अलग से होंगे। एक फ्री टू एयर तथा एक केबल के माध्यम से प्रसारित होने वाला। राज्यों के दूरदर्शन अध्यक्ष भी वोट वापसी के दायरे आयेंगे।
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(14.3) राष्ट्रीय और राज्यों के दूरदर्शन विभाग एक दैनिक समाचार पत्र तथा साप्ताहिक पत्रिका भी प्रकाशित करेंगे। इनका पीडीएफ वर्जन भी वेबसाइट पर रखा जाएगा, तथा कोई भी व्यक्ति या समाचार पत्र इस सामग्री को प्रकाशित करने के लिए स्वतंत्र होगा।
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(14.4) दूरदर्शन स्टाफ के सभी पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया सिर्फ लिखित परीक्षा के माध्यम से की जायेगी तथा स्टाफ के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई जूरी करेगी।
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(14.5) यदि दूरदर्शन के स्टाफ या अध्यक्ष द्वारा घूस खाकर खबरे दिखाना पाया जाता है तो नागरिको की ज्यूरी उनका सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट ले सकेगी, उन्हें नौकरी से निकाल सकेगी तथा जेल में भेज सकेगी। जिन कर्मचारियों को यह शर्ते मंजूर नहीं होगी, वे अपना इस्तीफा दे सकते है।
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(15) जनता की आवाज
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा 15.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी मौद्रिक पारितोषिक के रूप में या स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है। ]

----------ड्राफ्ट का समापन---------
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित रेगो क़ानून को गेजेट में छापे - #VoteVapsiPassbook , #Rego ,
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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@Pmoindia , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #Rego #VoteVapsiPassbook
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7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (15) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Sep 10 2019 13:29:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

गौ नीति : भारतीय नस्ल के गौ-धन को सरंक्षित करने के लिए प्रस्तावित क़ानून
(Gau Neeti : Proposed Notification to Protect Indian Cow )
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(इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।)
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इस कानून का सार : इस क़ानून के गेजेट में आने से देशी गाय की हत्या में कमी आएगी और गौ वंश का सरंक्षण होगा। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित गौ रक्षा क़ानून को गेजेट में छापें - #GauNeeti , #P20180436111 #VoteVapsiPassBook,
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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(I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निचे दिए गए अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. गौ रक्षा अधिकारी ( Dy S.P. - Cow Protection Cell Incharge )
2. गौ कल्याण मंत्री ( Cow Welfare Minister )
3. जूरी प्रशासक ( Jury Administrator )
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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(02) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निचे दिए गए मामले जूरी ड्यूटी के दायरे में आयेंगे :
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(2.1) गौ रक्षा अधिकारी, गाय मंत्री, जूरी प्रशासक एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित सभी प्रकार की नागरिक शिकायतें।
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(2.2) गौ वंश की तस्करी, गौ हत्या एवं देशी गाय से संबधित सभी प्रकार के मुकदमें।
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(2.3) देशी गाय के उत्पादों में जर्सी या अन्य नस्लों की गायों के उत्पादों की मिलावट को रोकने वाले कानूनों का उलंघन करने की शिकायतें।
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जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, मुकदमे की गंभीरता को देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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(03) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (15.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिप्पणी 1 : इस क़ानून में गाय शब्द से आशय है देशी गाय एवं उसका वंश। इस क़ानून में गौ रक्षा अधिकारी से आशय है, वह जिले का वह पुलिस अधिकारी जिसके पास गौ प्रकोष्ठ ( Cow Protection Cell ) का चार्ज है। ]
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टिप्पणी 2 : गौ कल्याण मंत्री / मुख्यमंत्री यह क़ानून पास होने के 180 दिनों के भीतर निम्नलिखित बिन्दुओ का निष्पादन करने के लिए नोटिफिकेशन निकालेंगे जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जाएगा ]
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(4.1) मुख्यमंत्री एक गौ कल्याण मंत्री की नियुक्ति करेंगे। गाय मंत्री राज्य में देशी गाय या भारतीय नस्ल की गाय के सरंक्षण एवं देशी गाय के सभी उत्पादों आदि को बढ़ावा देने के लिए नीति-निर्धारण, प्रबंधन एवं नियमन करेगा।
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(4.2) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक गौ प्रकोष्ठ ( Cow Protection Cell ) की स्थापना करेंगे। इस प्रकोष्ठ का मुखिया पुलिस उप अधीक्षक या सहायक अधीक्षक स्तर का पुलिस अधिकारी होगा, जो कि गौ रक्षा अधिकारी कहलायेगा। मामलों की संख्या को देखते हुए किसी जिले में इसके लिए अलग से अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है, या फिर किसी उप अधीक्षक को इसका अतिरिक्त चार्ज दिया जा सकता है। किन्तु यदि गौ रक्षा अधिकारी नागरिको की स्वीकृति से नियुक्त किया गया है तो वह सिर्फ गौ प्रकोष्ठ का कार्य ही करेगा।
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(4.3) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। जूरी प्रशासक गौ वंश से सम्बंधित शिकायतों एवं मुकदमो की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों के गठन एवं संचालन का कार्य करेगा।
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(05) गौ वंश का परिवहन
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(5.1) गायो के परिवहन के लिए सिर्फ जालीदार वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा। इन वाहनों पर गौ परिवहन यान लिखा रहेगा और सिर्फ इन्ही वाहनों में गायो को ले जाया जा सकेगा।
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(5.2) गौ वंश को किसी निचे दिए गए राज्यों में ले जाने पर पाबंदी रहेगी :
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5.2.1. यदि अमुक राज्य में गौ कशी कानूनी है
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5.2.2. यदि अमुक राज्य में इस तरह का कोई क़ानून नहीं है जो ऐसे राज्यों में गौ परिवहन पर प्रतिबन्ध लगाता है जिन राज्यों में गौ कशी कानूनी है।
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यदि कोई व्यक्ति ऐसे राज्यों में गौ वंश को ले जाता पाया जाता है तो मुख्यमंत्री अभियुक्त को पाँच वर्षों तक की सजा देने का क़ानून बना सकते है।
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(6) गौ शालाओं की स्थापना एवं उनका संचालन :
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(6.1) गौ कल्याण मंत्री तहसील स्तर पर गौ-शालाओ के संचालन के लिए नीति बनाएगा एवं यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक तहसील में गौ शालाओ का विधिवत संचालन हो। आवश्यकता अनुसार शहरों में 10,000 से 30,000 आबादी की प्रत्येक बस्ती में एवं पंचायत स्तर पर भी गौ शालाए खोली जा सकती है। इन गौ शालाओं को जो भी दान देगा उसे टेक्स में कोई छूट नहीं मिलेगी। गौ शालाएं बूढ़ी गायों को एक निर्धारित कीमत पर खरीदेगी।
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(6.2) राज्य सरकार भारतीय नस्ल की गायों का निषेचन जर्सी सांडो से करने के लिए चलायी गयी सभी योजनाओ को बंद करेगी तथा भारतीय नस्ल की गायों का गर्भाधान देशी नस्ल के उन्नत सांडो से करवाने को प्रोत्साहन देगी। यदि प्राइवेट कम्पनियां या निजी व्यक्ति जर्सी सांडो का इस्तेमाल देशी गायों के गर्भाधान में करते है तो इस पर कोई रोक नहीं होगी। सरकार शुक्राणु-विभाजन की प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिये पूंजी निवेश करेगी ताकि सांड की पैदावार कम की जा सके।
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(6.3) मुख्यमंत्री मंदिरों को राज्य सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए नोटिफिकेशन निकालेंगें ।
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(7) गौ उत्पादों को प्रोत्साहन एवं सरंक्षण
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(7.1) डेयरी उद्योगों एवं दूध विक्रेताओ को अपने दूध के डिब्बे या बोतल पर स्पष्ट रूप से यह अंकित करना होगा कि इसमें जो दूध है वह देशी गाय का है या वर्ण संकर प्रजाति का । दूध विक्रेता अपनी गायों की नस्ल की शुद्धता के लिए विभाग से सर्टिफिकेट ले सकेंगे एवं छोटे पशुपालक अपनी गायों की नस्ल की शुद्धता का सेल्फ सर्टिफिकेट जारी कर सकेंगे। गाय मंत्री इन स्व घोषित सर्टिफिकेट को अनुमोदित करेगा।
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(7.2) यदि कोई विक्रेता अपने दूध पर देशी गाय के दूध का चिन्ह अंकित करता है और उसमे 5% से अधिक मिलावट पायी जाती है तो उस पर आर्थिक दंड या लाइसेंस का रद्दीकरण किया जाएगा। देशी गाय के उत्पादों से सम्बंधित सभी मामलो में मिलावट आदि की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी। देशी गाय के दूध के अन्य उत्पादों जैसे पनीर, घी आदि पर भी यही नियम लागू होंगे।
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(08) गाय का चमड़ा बेचने पर प्रतिबन्ध लगाया जाएगा। मृत गाय को दफनाया जायेगा या जलाया जायेगा। जूतों / बेग आदि के निर्माता अपने उत्पादों पर हरा गो-हत्या मुक्त लेबल लगा सकेंगे, जिसका मतलब होगा कि चमड़ा जिस पशु से आया है, उसकी प्राकृतिक मृत्यु हुई है और उसका मांस खाने के लिए प्रयोग नहीं किया गया था।
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(09) अधिकारियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) गौ रक्षा अधिकारी के लिए : यदि 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति गौ रक्षा अधिकारी के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(9.2) गौ कल्याण मंत्री के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक राज्य का गौ कल्याण मंत्री बनने के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(10) धारा 09 में दी गयी योग्यता धारण वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(11) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए "हाँ" दर्ज करना
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(11.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर गौ रक्षा अधिकारी गाय मंत्री एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(11.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(11.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
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(11.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। गाय मंत्री की स्वीकृतियों का प्रदर्शन राज्य के कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(12) गौ कल्याण मंत्री एवं गौ रक्षा अधिकारी की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(12.1) गौ रक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन गौ रक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए गौ रक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है।
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(12.2) गौ कल्याण मंत्री के लिए : यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन गौ कल्याण मंत्री से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को गौ कल्याण मंत्री नियुक्त कर सकते है।
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(12.3) जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जूरी प्रशासक से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(13) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन
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(13.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(13.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(13.3) यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(14) शिकायतों एवं मुकदमो का जूरी द्वारा निपटान
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 15.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(14.1) धारा 02 में दिए गए सभी मामले जूरी मंडल द्वारा सुने जायेंगे। वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना भी लगा सकते है।
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(14.2) यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है। मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(14.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने एवं नार्क्को टेस्ट का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील प्रवृत कानूनों के अनुसार उच्च जूरी मंडल या उच्च न्यायालय में कर सकते है।
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(15) जनता की आवाज :
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा 15.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित जिला जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापे - #GauNeeti, #P20180436111 , #VoteVapsiPassbook ,
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम / सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #GauNeeti , #P20180436111 , #VoteVapsiPassbook ,
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (15) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Sep 10 2019 19:42:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रस्तावित रेडो क़ानून के गेजेट में छपने के अगले दिन से भारत में इस तरह की एक भी घटना नहीं घटेगी !! और वर्ना इस तरह की घटनाएं रुकेगी नहीं !! पीएम मोदी हो या मनमोहन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता !! इस स्थिति में बदलाव सिर्फ रेडो क़ानून ला सकता है !!

Rajguru Mastana:

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Sep 12 2019 21:04:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जूरी पंचायत – पंचायतो एवं स्थानीय प्रशासन को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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VoteVapsi Passbook - Proposal to Improve Panchayat & Local Administration
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(इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।)
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कानून का सार : यह कानून पंचायत एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। इस कानून में ऐसी कई प्रक्रियाएं है जो स्थानीय प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है और ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे अधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी। इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री भी लोकसभा से पारित कर सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापें - #JuryPanchayat #VoteVapsiPassBook, #P20180436110
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
6. मुख्यमंत्री
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के अलावा धारा (01) में दिए गए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी मंडल में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको इन 12 अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप अमुक आरोपी पर जुर्माना लगा सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री जूरी मंडल के दायरे से बाहर रहेंगे :
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1. पटवारी
2. गिरदावर
3. ग्राम विकास अधिकारी ( पंचायत सचिव )
4. तहसीलदार
5. जिला परिषद सचिव
6. नगर परिषद सचिव
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(03) यदि आपका नाम राज्य की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, या उपरोक्त में से किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते है तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा ( 20.1 ) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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(04) पटवारी कार्यालयों को सुचारू एवं व्यवस्थित करने के लिए यह क़ानून पारित होने के बाद मुख्यमंत्री निम्नलिखित कार्यो को दी गयी समय सीमा में पूरा किया जाना सुनिश्चित करेंगे :
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(4.1) राज्य के खाली पड़े पटवारी के सभी पदों पर पटवारियों की नियुक्ति की जायेगी। यदि नयी भर्ती की आवश्यकता है तो भर्ती की प्रक्रिया अगले 180 दिनों में पूर्ण कर ली जानी चाहिए।
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(4.2) यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर प्रत्येक पटवार खाने का अनिवार्य रूप से कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कम्प्यूटर में दक्ष लिपिकों की नियुक्ति करके पटवारी के स्टाफ का दायरा बढाया जायेगा। पटवारी को शामिल करते हुए पटवारी कार्यालय का न्यूनतम स्टाफ 4 व्यक्तियों का होगा। यह सभी नियुक्तियां यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर कर ली जानी चाहिए।
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(4.3) जब पटवारी फील्ड में है तब भी पटवारी कार्यालय अनिवार्य रूप से 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुला रहेगा।
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(4.4) जिन पटवार खानो में पर्याप्त कमरे इत्यादि नहीं है उनके लिए आवश्यक भवन निर्माण किया जाएगा एवं यह निर्माण इस क़ानून के पारित होने के 3 वर्षो के अंदर कर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस क़ानून के गेजेट में आने के 6 माह के भीतर सभी पटवार खानों को उन्नत किये जाने का प्रोजेक्ट विधानसभा में रखेंगे जिसमें यह ब्यौरा होगा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए कितने पटवारी कार्यालयो को किस क्रम से उन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट के साथ ही अनिवार्य रूप से इसके लिए बजट भी पास करेंगे।
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(4.5) पटवारी एक मोबाईल एप / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया एकाउंट / व्हाट्स एप नंबर सार्वजनिक करेगा, ताकि उसके क्षेत्र के मतदाता अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करवा सके।
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(4.6) यदि कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में या धारा 01 एवं 02 में लिखे गए अधिकारियों / जनप्रतिनिधियों को किसी कार्य के लिए कोई एप्लीकेशन देता है और यदि एप्लीकेशन पर सार्वजनिक करें दर्ज करता है, तो यह प्रार्थना पत्र सार्वजनिक किया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहा है तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक की गयी जो नागरिक शिकायतें पेंडिंग है और जो कार्य पूर्ण हो चुके है, उनकी अद्यतन जानकारी व्यवस्थित रूप से कार्यालय के सूचना पट्ट पर बिना मांगे उपलब्ध रहेगी एवं इसे प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी। यदि यह जानकारी स्वत: सार्वजनिक नहीं की जाती है तो यह माना जायेगा कि, इन्हें छिपाया गया है।
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(4.7) धारा 02 में दिए गए अधिकारी सभी नागरिक शिकायतों एवं नागरिक प्रार्थना पत्रों का निपटान सिलसिलेवार करेंगे। यदि वे क्रम का उलंघन करते है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण लिखित में देना होगा। उदाहरण के लिए , मान लीजिये कि पटवारी या तहसीलदार के पास सोमवार को एक व्यक्ति A नकल निकलवाने का प्रार्थना पत्र देता है, तथा B नक़ल निकलवाने का प्रार्थना पत्र मंगलवार को देता है। चूंकि इन दोनों अर्जियों की प्रकृति एक जैसी है अत: अधिकारी पहले सोमवार को लगाई गयी अर्जी का निस्तारण करेगा। यदि अधिकारी A से पहले B की नकल निकाल देता है तो उसे अनिवार्य रूप से यह दर्ज करना होगा कि क्यों B की अर्जी पर पहले काम किया गया।
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(05) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा, जो कि उसके क्षेत्र की मतदाता संख्या पर निर्भर करेगा। सरपंच अधिकतम 5 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 3 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 2 पंचायत से जीत जाता है तो वह 80,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(06) इस क़ानून के पारित होने के बाद नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 मासिक से 25,000 होगा। पार्षद किन्ही 3 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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(07) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 एवं अधिकतम 80,000 होगा।
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[ टिप्पणी : इस क़ानून में जहाँ भी पार्षद शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है - नगर पालिका , नगर परिषद एवं नगर निगम का पार्षद। इस क़ानून में सभापति शब्द से आशय है - नगर पालिका, नगर परिषद एवं नगर निगम का सभापति। इस क़ानून में प्रधान शब्द से आशय है - तहसील पंचायत समिती का प्रधान। इस क़ानून में जिला प्रमुख से आशय है - जिला पंचायत का प्रमुख।]
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(08) पार्षद अपने वार्ड में प्रत्येक दुसरे एवं चौथे रविवार ( 2nd & 4th Sunday ) को सांय 4 बजे एक नागरिक सभा का आयोजन करेगा। सभापति इसके लिए वार्ड में स्थित किसी सार्वजानिक कम्युनिटी सेंटर, स्कूल आदि में स्थान की व्यवस्था कराएगा। यदि वार्ड में नगर परिषद के क्षेत्राधिकार का भवन मौजूद है तो सभा इसी स्थल पर आयोजित होगी, और स्थान व समय किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाएगा।
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(8.1) किसी व्यक्ति को यदि नगर परिषद के क्षेत्राधिकार एवं अपने वार्ड से सम्बंधित कोई शिकायत या सुझाव पार्षद के सम्मुख रखना है तो वह सभा में उपस्थित होकर अपनी शिकायत या सुझाव आदि पार्षद को लिखकर दे सकता है। शिकायतकर्ता अनिवार्य रूप से अपने मतदाता पहचान पत्र की फोटो कॉपी अपनी एप्लीकेशन के साथ सलंग्न करेगा।
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(8.2) इस सभा में जितनी भी शिकायतें / सुझाव आयेंगे उन्हें पार्षद एक सीरियल नंबर देगा और उन्हें स्वीकार करके नगर परिषद द्वारा जारी (Allote) किये गए अपने रजिस्टर में क्रम से दर्ज कर लेगा। पार्षद एप्लीकेशन लेने के बाद अपनी छाप लगाकर हस्ताक्षर युक्त एक पावती ( Receiving ) भी देगा। पार्षद अगली सभा से पहले पूर्व सभा के ब्यौरे सभापति कार्यालय में अग्रेषित कर देगा।
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(8.3) नागरिक यह एप्लीकेशन सभापति कार्यालय में भी दे सकता है। सभापति द्वारा नियुक्त क्लर्क 5 रू प्रति पृष्ठ की दर से इसे स्कैन करके सभापति की वेबसाईट पर नागरिक शिकायतों के सेक्शन में रख देगा। सभापति इस तरह का सिस्टम बना सकते है कि नगर के मतदाता अपने वार्ड या नगर के लिए दी गयी किसी एप्लीकेशन पर अपनी सहमति दर्ज कर सके।
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(9) अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) सरपंच एवं पार्षद : यदि कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार अमुक पद के लिए तय जमा राशि लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा। तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर अपलोड करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। पार्षद अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करेगा।
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(9.2) प्रधान, सभापति, जिला प्रमुख एवं मुख्यमंत्री : यदि कोई मतदाता प्रधान, सभापति या जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किसी भी दिन अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। प्रधान एवं सभापति के लिए जमानत राशि विधायक के बराबर एवं जिला प्रमुख के लिए यह राशि सांसद की जमानत राशि के बराबर होगी। कलेक्टर शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाईट पर रखेगा और प्रत्याशियों को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक : जिले का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद का आवेदन करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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(10) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(10.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति, जूरी प्रशासक एवं मुख्यमंत्री के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(10.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा
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(10.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। मुख्यमंत्री की स्वीकृतियों का प्रदर्शन राज्य के मुख्य सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(11) सरपंच एवं पार्षद के लिए परिक्षण -चुनाव की शर्तें :
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(11.1) यदि कोई प्रत्याशी निचे लिखी गयी 3 शर्तें पूरी कर लेता है तो सरपंच इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री से विनती कर सकता है कि वे अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव ( Test-Election ) आयोजित करें । यदि सरपंच 7 दिनों के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है, या नहीं भी ले सकते है।
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(11.1.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(11.1.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
(11.1.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सरपंच के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% से अधिक भी है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण-चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 2000+500=2500 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 2400 स्वीकृतियां मिल जाती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा और मौजूदा सरपंच को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । किन्तु यदि किसी प्रत्याशी को 2500 से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो सरपंच इस्तीफा दे सकता है या मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है।
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(11.2) नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी शर्तें यही होगी जो धारा (11.1) में सरपंच के लिए बतायी गयी है।
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(12) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण-चुनाव की प्रक्रिया :
यदि धारा (11.1) में बतायी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है, तो परिक्षण-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। परिक्षण चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(12.1) मतपत्र पर कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को इस चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 5 प्रत्याशियों को जमानत राशि देकर नामांकन पत्र दाखिल करना होगा।
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(12.2) यदि परिक्षण-चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी शर्तें पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(12.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक वोट प्राप्त हो जाते है।
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(12.2.2) यदि ये वोट सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2,500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 2,500+500=3,000 वोट लाने होंगे। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2,500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि सह-चुनाव में कोई प्रत्याशी 2,500 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को 1,500 वोट ही मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा।
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(12.3) नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परीक्षण चुनाव : पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी ठीक उसी समीकरण ( फार्मूले ) का पालन किया जाएगा जो धारा 12.2 में सरपंच के लिए बताया गया है।

(13) प्रधान, जिला प्रमुख एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(13.1) तहसील प्रधान के लिए : यदि किसी पंचायत समिती की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता प्रधान के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा प्रधान की स्वीकृतियों से 5% अधिक भी है तो मौजूदा प्रधान इस्तीफा दे सकता है । यदि प्रधान 7 दिवस में इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृतियां पाने वाले प्रत्याशी की नियुक्ति प्रधान के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.2) जिला प्रमुख के लिए : यदि किसी जिले की समस्त पंचायत समितियों की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला पंचायत प्रमुख के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जिला प्रमुख की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी की नियुक्ति जिला प्रमुख के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.3) जिला जूरी प्रशासक : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक व्यक्ति को जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(14) मुख्यमंत्री की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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यदि मुख्यमंत्री का कोई प्रत्याशी निम्नलिखित शर्तें पूरी कर लेता है :
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(14.1) वह मौजूदा मुख्यमंत्री से 1% अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है।
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(14.2) यदि ये स्वीकृतियां राज्य की मतदाता सूचियों में दर्ज कुल मतदाताओ के 35% से भी अधिक है।
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(14.3) यदि स्वीकृतियों की यह संख्या उन विधायको को मिले वोटो से भी अधिक है, जितने विधायको का समर्थन मुख्यमंत्री को प्राप्त है।
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यदि ऊपर दी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है तो मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकता है। यदि मुख्यमंत्री 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो विधायक मौजूदा मुख्यमंत्री को नौकरी से निकाल कर किसी अन्य विधायक को मुख्यमंत्री की नौकरी दे सकते है या नहीं भी दे सकते है, अथवा अपने इस्तीफे देकर नए विधानसभा चुनाव घोषित कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है, अथवा प्रधानमंत्री राष्ट्रपति शासन लगाकर राज्य में नए चुनावों की घोषणा कर सकते है या नहीं भी कर सकते है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी राज्य में
(1) कुल 3 करोड़ मतदाता तथा 200 विधानसभा सीट है ,
(2) राज्य का मुख्यमंत्री X है, और X की स्वीकृतियों की संख्या 1 करोड़ है,
(3) सदन में X को 120 विधायको का समर्थन हासिल है,
(4) इन 120 विधायको को चुनाव में मिले कुल मतों योग 1 करोड़ 20 लाख है,
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और ऐसे में यदि Y को 1 करोड़ 30 लाख स्वीकृतियां मिल जाती है तो धारा 14 में दी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जायेगी।
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(15) सभापति की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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सभापति को बदलने के लिए किसी प्रत्याशी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होगी -
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(15.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(15.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति को चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(15.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सभापति के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 2% से अधिक भी है।
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यदि सभापति का कोई प्रत्याशी उपरोक्त तीनो शर्तें पूरी कर लेता है तो सभापति इस्तीफा दे सकता है। यदि सभापति 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकालकर परिक्षण चुनाव करवाने का आदेश जारी कर सकते है। परिक्षण चुनाव की प्रक्रिया एवं उसमे जीत हार का समीकरण वही रहेगा जैसा धारा (12.2) में बताया गया है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी किसी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 2,00,000 मतदाता है, और चुनाव में मौजूदा सभापति को 70,000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण चुनाव सिर्फ तब संचालित किया जाएगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 70,000+4,000=74,000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 2 लाख है अत: इसका 2% = 4,000 को 70,000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 72,000 स्वीकृतियां मिलती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा।
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(16) सरपंच एवं पार्षद के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(16.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है।
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(16.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (12.2) में सरपंच के परिक्षण चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को सह-चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। सह चुनाव में भी पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। जीत हार का समीकरण ( फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा परिक्षण चुनाव में बताया गया है।
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(16.3) पार्षद के लिए सह-चुनाव की प्रक्रिया : जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त पार्षद के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा वार्ड पार्षद की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है। इस प्रक्रिया का संचालन वैसे ही किया जाएगा जैसा सरपंच के लिए बताया गया है।
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(17) शिकायतों की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों का गठन
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 20.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(17.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 25 से 50 आयु वर्ग के 60 लोगो को चुनेगा और इसमें से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक प्रत्येक तहसील के लिए एक तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति भी करेगा। तहसील जूरी प्रशासक अपनी तहसील में 20 सदस्यीय तहसील महाजूरी मंडल का गठन करेंगे। तहसील महाजूरी मंडल के गठन के लिए तहसील की मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाएगा । जूरी मंडल के गठन एवं बैठको की शेष प्रक्रिया जिला महाजूरी मंडल के समान ही रहेगी।
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(17.3) यदि धारा धारा 01 एवं धारा 02 में दिए गए किसी भी अधिकारी / जनप्रतिनिधि या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई नागरिक शिकायत है तो वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित तहसील / जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है।
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(17.4) तहसील स्तर के अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों की शिकायतें तहसील के महाजूरी मंडल में की जायेगी, तथा इसकी अपील जिला महाजूरी मंडल में होगी। तहसील स्तर की जूरी का गठन तहसील की मतदाता सूचियों से एवं अपील की जूरी का गठन जिले की मतदाता सूचियों से किया जाएगा।
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(18) जूरी मंडल द्वारा शिकायतों की सुनवाई :
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(18.1) यदि किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ महाजूरी मंडल द्वारा एक से अधिक शिकायतें स्वीकृत कर ली जाती है, महाजूरी मंडल सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ जितनी शिकायतें आई है उनकी सुनवाई 15 दिन में एक बार ही होगी। उदाहरण के लिए यदि पटवारी या तहसीलदार के खिलाफ 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जितनी शिकायतें है उनकी सुनवाई 16 तारीख को और 16 तारीख के बाद में आई शिकायतों की सुनवाई महीने के आखिरी दिन होगी।
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(18.2) जब वादीगण शिकायत लिखेंगे तो अनिवार्य रूप से इसमें यह भी दर्ज करेंगे कि उन्हें इसका क्या समाधान चाहिए। साथ ही वे अधिकारी / जनप्रतिनिधि पर कोई आर्थिक दंड लगाने की मांग भी इसमें लिख सकते है। जुर्माने या क्षतिपूर्ति की मांग करने पर वे इसकी सीमा भी अपनी शिकायत में लिखेंगे।
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(18.3) मामला सुनने के बाद महाजूरी मंडल बहुमत से अपना फैसला देगा। यदि जुर्माना लगाया गया है तो यह जुर्माना अधिकारी / जनप्रतिनिधि के वेतन से काट लिया जायेगा। यदि जुर्माने की राशि अमुक अधिकारी के वेतन के 50% से अधिक है तो कम से कम दो तिहाई जूरी सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी । अधिकारी को नौकरी से निकालने एवं ट्रांसफर करने का फैसले को कम से कम 75% जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
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(18.4) यदि सुनवाई के दौरान महाजूरी मंडल के सदस्य यह पाते है कि वादीगण ने झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किया है, या शिकायत एकदम मनगड़ंत एवं फर्जी थी तो समय खराब करने के एवज में जूरी सदस्य शिकायतकर्ताओ पर भी जुर्माना लगा सकते है।
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(18.5) महाजूरी मंडल के फैसले के खिलाफ यदि कोई भी पक्षकार अपील दायर करता है तो जिला महाजूरी मंडल जिले की मतदाता सूचियों में से एक नयी जूरी का गठन करेगा। इस जूरी का आकार उस जूरी मंडल से बड़ा होगा जिस जूरी मंडल ने इस मामले की सुनवाई करके फैसला दिया था वह जूरी प्रशासक के सामने अपील दायर कर सकता है। जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(18.6) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। अपील की जूरी में दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(19) जूरी मंडलों के फैसलों का पालन : जूरी मंडल के फैसले परामर्श कारी होंगे । मुख्यमंत्री या सम्बंधित विभाग का मंत्री जूरी मंडल द्वारा दिए गए किसी फैसले में संशोधन कर सकते है, उसमे बदलाव कर सकते है, या उसे पूरी तरह से पलट सकते है। किन्तु मंत्री स्तर से कम का कोई भी अधिकारी जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले में बदलाव नहीं कर सकेगा। जूरी द्वारा यदि किसी अधिकारी को दोषी ठहराया जाता है तो इसे अधिकारी का मूल्यांकन करने वाली सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा, तथा पदोन्नति, स्थानांतरण आदि के मूल्यांकन में इस तथ्य को आधार माना जाएगा।
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(20) जनता की आवाज :
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(20.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(20.2) यदि कोई मतदाता धारा 20.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 20.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापे - #JuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #JuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (20) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Sep 12 2019 21:39:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राष्ट्रवाद बचकाना रोग है !! और यह मानव जाति के लिए एक महामारी की तरह है - E = MC2

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Sep 17 2019 13:30:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रस्तावित सभी क़ानून ड्राफ्ट्स के पीडीऍफ़ यहाँ से डाउनलोड करें :
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( लिंक प्राप्त करने के लिए url एवं dot com के बीच से स्पेस हटा दें )
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00. सभी ड्राफ्ट्स - <https://tinyurl>; .com/RrpAllDrafts
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01. रेडो - <https://tinyurl>; .com/RedoPdf
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02. रेगो - <https://tinyurl>; .com/RegoPdf
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03. जूरी कोर्ट - <https://tinyurl>; .com/JuryCourt
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04. जिला जूरी कोर्ट - <https://tinyurl>; .com/JilaJuryCourt
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05. हिन्दू बोर्ड - <https://tinyurl>; .com/HinduBoard
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06. गौ नीति - <https://tinyurl>; .com/GauNeeti
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07. धनवापसी पासबुक - <https://tinyurl>; .com/DhanVapsiPassbook
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08. जूरी पंचायत - <https://tinyurl>; .com/JuryPanchayat
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09. जिलो के लिए ड्राफ्ट्स - <https://tinyurl>; .com/DistrictDrafts
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10. दिल्ली के ड्राफ्ट - <https://tinyurl>; .com/DelhiRrp
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11. दिल्ली मेनिफेस्टो - <https://tinyurl>; .com/DelhiManifesto
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जिलो के ड्राफ्ट्स :
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01. अहमदनगर
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<https://tinyurl>; .com/AhmednagarRrp
<https://tinyurl>; .com/AhmednagarJuryPanchayat
<https://tinyurl>; .com/AhmednagarJuryCourt
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02. भरतपुर
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<https://tinyurl>; .com/BharatpurRrp
<https://tinyurl>; .com/BharatpurJuryCourt
<https://tinyurl>; .com/BharatpurJuryPanchayat
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03. भीलवाड़ा
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<https://tinyurl>; .com/BhilwaraRrp
<https://tinyurl>; .com/BhilwaraJuryCourt
<https://tinyurl>; .com/BhilwaraJuryPanchayat
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04. चित्तोड़गढ़
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<https://tinyurl>; .com/ChittorgarhRrp
<https://tinyurl>; .com/ChittorgarhJuryCourt
<https://tinyurl>; .com/ChittorgarhJuryPanchayat
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05. हिसार
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<https://tinyurl>; .com/HisarRrp
<https://tinyurl>; .com/HisarJuryCourt
<https://tinyurl>; .com/HisarJuryPanchayat
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06. जमशेदपुर
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<https://tinyurl>; .com/JamshedpurRrp
<https://tinyurl>; .com/JamshedpurJuryCourt
<https://tinyurl>; .com/JamshedpurJuryPanchayat
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07. महासमुंद
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<https://tinyurl>; .com/MahasamundRrp
<https://tinyurl>; .com/MahasamundJuryCourt
<https://tinyurl>; .com/MahasamundJuryPanchayat

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Sep 21 2019 17:23:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

शहरों में यातायात को नियंत्रित करने के अन्य तरीके क्या हो सकते हैं?
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<https://www.facebook.com/groups/860298764343202/permalink/935080363531708/>;

Pawan Jury BhilwaraRj:

[**शहरों में यातायात को नियंत्रित करने के अन्य तरीके क्या हो सकते हैं?**](<https://hi.quora.com/%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%8B>;)

**.**

*( **टिप्पणी -* ***यह जवाब अन्य तरीको के बारे में नहीं है। ट्रेफिक कम करने के मुख्य तरीको के बारे में है।इस जवाब में 2 खंड है। पहले खंड में ट्रेफिक की समस्या का मूल कारण, और दुसरे खंड में इसका समाधान है। दूसरा खंड महत्त्वपूर्ण है, और आप चाहे तो सीधे दूसरा खंड पढ़ सकते है।* *)*
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जंगल राज बनाने के लिए कोई व्यवस्था कायम नहीं करनी होती। जरखेजी हो तो बारिश आने से घास पात उग आते है, फिर पहले शाकाहारी और बाद में उनका शिकार करने के लिए माँसाहारी जानवर आ जाते है, और सब जानवर मिलकर अपने अपने कायदे से रहना शुरू कर देते है। बस हो गया जंगल।

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आदमी भी प्राकृतिक रूप से जंगल में ही रहता था। लेकिन आदमी ने संतुलन बनाने के लिए समाज में सार्वजानिक बर्ताव के कायदे बनाने शुरू किये और चीजे व्यवस्थित होने लगी। जिन समाजो / देशो ने बेहतर कायदे बनाये वहां बेहतर व्यवस्था कायम हुयी, और जिन देशो ने व्यवस्था नहीं बनायी उनके यहाँ नरक बनता गया। ट्रेफिक की समस्या भी कुछ जंगल की तरह ही है। मतलब यह बिना किसी प्रयास के बढ़ते रहता है और इसे कंट्रोल करने के लिए कुछ कायदे-क़ानून चाहिए। ट्रेफिक का नरक आपको सभी विकासशील / पिछड़े देशो में मिलेगा। और बहुराष्ट्रीय कम्पनियां इन देशो में यह नरक रचती है।

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भारत में धनिकों एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के दबाव में हमारे नेताओं ने गेजेट में ऐसे क़ानून छापें है जिसके साइड इफेक्ट के रूप में ट्रेफिक की समस्या और भी तेजी से बढ़ती है, और उन्होंने कुछ ऐसे कानूनों की जान बूझकर अवहेलना की है जिससे ट्रेफिक की समस्या कम होती है।
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## **वजह पैसा है !! दरअसल ट्रेफिक की समस्या कुछ लोगो को पैसा बनाकर देती है !!!**

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मुख्य रूप से दो समूह ऐसे है जिनका मुनाफा ट्रेफिक बढ़ने के अनुपात में बढ़ता है :
* तेल कम्पनियों के मालिक (Rockefeller Family & others)
* जमीन जमाखोर (Land hoarders including Tata , Godrej etc)

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इसके अलावा ऑटो मोबाईल एवं बैंकिंग कंपनियां भी इस समस्या की लाभार्थी है। परन्तु ये आगे चलकर ऐसे क़ानून नहीं छपवाते जिससे विशेष रूप से ट्रेफिक बढ़े।
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**खंड – अ**
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## **गेजेट का इस्तेमाल करके भारत में उन्होंने ये नरक कैसे रचा ?**

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**(1) सड़को को जाया तौर पर वाहनों से पाट देना :**
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1991, तब भारत में 2 करोड़ वाहन थे। तेल कंपनियों के मालिकों ने तेल की खपत 10 गुणा करने के लिए वाहनों की संख्या को 10 गुणा करने का लक्ष्य बनाया। आज भारत में लगभग 25 करोड़ वाहन दौड़ रहे है !! भारत दुनिया का सबसे बड़ा वाहन उत्पादक देश है और यह इंडस्ट्री 2 करोड़ वाहन प्रति वर्ष बाजार में फेंक रही है। तो तेल कम्पनियों को ट्रेफिक बढ़ाने में रुचि नहीं थी, लेकिन वे भारत के हर आदमी की जांघो के निचे इंजन देखना चाहते है। और इस चक्कर में यदि ट्रेफिक बढ़ता है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।
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और जब तक प्रत्येक व्यक्ति के पास एक निजी वाहन नहीं होगा तब तक उनकी गाड़ी रुकने वाली नहीं है। पर वे इससे भी आगे बढ़ेंगे और odd-even जैसे क़ानून भी लेकर आयेंगे, ताकि जिनके पास पर्याप्त पैसा हो उन्हें 2-2 गाड़ियाँ थमाई जा सके – एक odd नम्बर की और एक even नम्बर की !!

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*क्या इन 30 वर्षो के दौरान भारत की जनसँख्या 10 गुना हो गयी थी ?
*.

नहीं। भारत की जनसख्याँ वृद्धि दर 20% के आसपास थी। किन्तु वाहनों की वृद्धि दर 10 गुणा यानी कि 1000% रही।
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*क्या भारतीय अचानक इतनी तेजी से समृद्ध हो गए थे ?*

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नहीं। दरअसल उन्होंने भारत के बाजार को वाहनों से पाटने के लिए प्रत्येक मिडिल क्लास घर के प्रत्येक सदस्य को एक वाहन बेचने का लक्ष्य बनाया। और इसके लिए उन्होंने बैंकिंग के कानूनों का इस्तेमाल किया :
* असीमित चेकबुक जारी करना।
* चेक बाउंस को क्रिमिनल ऑफेन्स बनाना।
* वाहन लोन पर 90% फायनेंस।
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**यह एक Debt Trap था।**

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अब यदि आपके पास 25 हजार रूपये भी है तो आप 5 लाख का वाहन खरीद सकते थे। इस तरह चेकबुक के एवज में अंधाधुंध वाहनों की बिक्री शुरू हुयी और ट्रेफिक बढ़ने लगा।

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**प्रचलित गलत तर्क :** चेक आने से व्यापार करना आसान हुआ, और लोगो को नकदी का विनिमय करने का जोखिम उठाने से मुक्ति मिली। यदि चेक की प्रतिष्ठा बनाकर रखनी है तो क्रिमिनल ऑफेंस बनाने में गलत बात क्या है ? और हर आदमी के पास वाहन हो तो इसमें गलत बात क्या है ? इससे विकास होता है, और लोगो की सुविधा में वृद्धि होती है।
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इस प्रकार के तर्कों में संतुलन की अवहेलना कर दी जाती है, और ज्यादातर लोग व्यवस्था पर विचार करने के दौरान यह गलती करते है। व्यवस्थाओं की निस्बत आप ब्लेक एडं व्हाईट स्टेंड नहीं ले सकते। सभी व्यवस्थाएं एक संतुलन बनाने का काम करती है, और वही व्यवस्था टिकेगी जो संतुलन लाती है।
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**1.1. गलत तर्क :** चेक आने से व्यापार करना आसान हुआ, और लोगो को नकदी का विनिमय करने का जोखिम उठाने से मुक्ति मिली। यदि चेक की प्रतिष्ठा बनाकर रखनी है तो क्रिमिनल ऑफेंस बनाने में गलत बात क्या है ?

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उल्लेखनीय है कि अमेरिका में चेकबुक असीमित संख्या में जारी नहीं की जाती और चेक की वैधता अवधि सिर्फ 3 से 6 माह होती है। मतलब जिस दिन बैंक ने आपको चेक जारी किया है जारी करने की तिथि के अगले 90 से 120 दिन में चेक स्वत: ही एक्सपायर हो जाता है।
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अत: आप हद से हद सिर्फ 90 दिन आगे का चेक काट कर दे सकते हो इससे ज्यादा नहीं। और यदि चेक बाउंस भी हो जाता है और चेक भविष्य के वादे पर दिया गया है तो आपको और कोई सजा नहीं होती !! तब केवल आपसे पैसा वसूला जाएगा, लेकिन सजा नही होगी !! अमेरिका में पहले चेक बाउंस होने पर सजा का प्रावधान था। किन्तु वहां पर जूरी सिस्टम होने के कारण चेक बाउंस का मुकदमा जूरी के पास जाता था और जूरी भविष्य का वादा होने पर चेक बाउंस होने पर कोई सजा नहीं करती थी।

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चेक बाउंस पर जूरी मंडल का स्टेंड रहता था कि, किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का कोई भरोसा नहीं होता है, और कोई व्यक्ति यदि भविष्य के वादे पर चेक काटकर देता है तो यह फौजदारी अपराध नहीं है। अत: यदि उसने भविष्य के वादे पर चेक काटकर दे दिया है तो उससे पैसा तो वसूल किया जा सकता है किन्तु उसे जेल नहीं भेजा जा सकता। उसे जेल सिर्फ तब भेजा जा सकता है जब चेक काटते समय व्यक्ति के खाते में पैसा था !! वाहन लोन, होम लोन आदि भविष्य के वादे है।

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और इस तरह गलत क़ानून होने के कारण जूरी मंडलों ने चेक बाउंस के आरोपियों को कभी भी सजा नहीं दी और धीरे धीरे यह क़ानून सिर्फ कागज में रह गया !! भारत में असीमित चेकबुक जारी करने, 90% फायनेंस करने और असीमित अवधि आगे के चेक काटने के कानूनों ने तेजी से वाहन बिक्री का रास्ता साफ़ किया।

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इस क़ानून ने जरूरतमंद लोगो को सूदखोरों के पंजे में फंसने की और भी धकेला और इस गलत क़ानून का एक अन्य दुष्परिणाम यह है कि आज लाखों लोगो की टाँगे चेक बाउंस के मामलो में अदालत में फंसी हुयी है। और इनमे से ज्यादातर मामले फर्जी है !! और ये लाखों पीड़ित यह बात कभी नहीं जान पायेंगे कि वे जो मुकदमे भुगत रहे है वह एक गलत क़ानून की वजह से है !!

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**1.2. गलत तर्क :** हर आदमी के पास वाहन हो तो इसमें गलत बात क्या है ? इससे विकास होता है, और लोगो की सुविधा में वृद्धि होती है।

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वाहन टीवी की तरह घर पर नहीं रखा जाता, यह बाजार में दौड़ता है। और इस तरह जब आप वाहन खरीदते है तो यह सार्वजनिक परिवहन पर भार बढ़ाता है। यदि परिवहन के ढाँचे एवं पार्किंग में पर्याप्त निवेश किये बिना अंधाधुंध वाहनों को खरीदने की अनुमति दी जाएगी तो वाहन सड़को को पूरी तरह कब्जे में ले लेंगे और अन्य लोगो को परेशानी होनी शुरू हो जायेगी। इसीलिए वाहनों की संख्या को प्रबंधित करने की जरूरत होती है। आपको एक संतुलन बनाना होता है - सड़को का, फुटपाथ का, तेल की खपत आदि का। वर्ना एक आयामी विस्तार करने से असंतुलन पैदा होगा और शेष आयामों से आपको समस्याएं आने लगेगी।
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**(2) उन्होंने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को तोड़ा और तेल की खपत बढाने वाले इनफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया :
**.

पहले चरण में उन्होंने ऐसे क़ानून छापे जिससे हर आदमी के पास गाड़ी पहुंची, और फिर ये सुनिश्चित किया है कि लोग निजी वाहनों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करे। वाहन खरीद लेने भर से तेल की खपत नहीं बढती है। तेल की खपत बढ़ाने के लिए ऐसी परिस्थितियां रचना जरुरी है कि आदमी ज्यादा से ज्यादा निजी वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य हो :

* पब्लिक ट्रांसपोर्ट को खच्चर बनाना
* शहरो में फुटपाथ नहीं बनाने देना
* छोटे छोटे प्लेटफ़ॉर्म बनाकर अतिक्रमियों को आमंत्रित करना
* लम्बे सफर को आसान बनाना
* सड़को पर कुत्तो और गायों की भीड़ बढ़ाना

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**2.1. पब्लिक ट्रांसपोर्ट : **उन्होंने ऐसे क़ानून छापने की निरंतर अवहेलना की जिससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर बने। यदि पब्लिक ट्रांसपोर्ट बढेगा तो निजी वाहनों का उपयोग कम होगा और तेल की खपत कम होगी। आप जिस भी शहर में रहते है उसमे इसे आजमा सकते है। यदि आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे तो भूत बनकर घर आयेंगे। अख़बार और बुद्धिजीवियों के कॉलम भकोसने वाले लोगो को लग सकता है कि ऐसा बढती हुई जनसँख्या एवं जगह की कमी के कारण है। पर यह बकवास तर्क है। एक वातानुकुलित बस आरामदायक स्थिति में भी 50 सवारियों को ढो लेती है। निजी वाहन इस्तेमाल करने वाले 50 लोग यदि Low Flore वातानुकुलित बस का इस्तेमाल करते है तो रोड़ पर से 50 वाहनों की भीड़ कम हो जायेगी। रोड़ से भी और पार्किंग स्लॉट से भी !!

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और शहर में ऐसे कई लोग होते है या उनका काम इस ढंग का होता है कि वे कई बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प होने पर निजी वाहन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। किन्तु उन्हें निजी वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य करने के लिए सरकारे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प क्षीण कर देती है या फिर इसे इस ढंग का बना देती है कि आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल सिर्फ तक करेंगे जब आपको पास और कोई विकल्प ही न रहे।

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लेकिन पब्लिक ट्रासपोर्ट को तोड़ने और निजी वाहनों को बढ़ावा देने के कई क़ानून छापने के कारण सड़को पर ज्यादा वाहन दौड़ने लगे। यहाँ तक कि निजी वाहनों को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह ने रोड़वेज को बंद ही कर दिया था। और फिर शिवराज सिंह जब सत्ता में आये तो उन्होंने भी इसे फिर से शुरू करने से इनकार कर दिया !!

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इसी क्रम में ट्रेनों की बेंड बजाना भी शामिल है, ताकि एक तरफ ज्यादा से ज्यादा नागरिको को निजी वाहनो में यात्रा करने के लिए धकेला जा सके और बाद में भारतीय रेल विदेशियों को बेची जा सके। यदि ट्रेने सुधार दी जायेगी तो इन्हें बेचने पर नागरिक सड़को पर उतर आयेंगे और उन्हें फैसला पलटना पड़ेगा। तो पहले ऐसे क़ानून छापो जिससे ट्रेने बदतर बने और बाद में बदतर होने का हवाला देकर घूस खाकर इन्हें विदेशियों के हवाले कर दो !! ट्रेन एक पूरा अलग विषय है, इसीलिए इस बारे में फिर किसी जवाब में अलग से लिखा जाएगा।

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2.2. फुटपाथ तोडना:**

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अमेरिका के शहरो में लगभग 95% सड़को के साथ फुटपाथ है। जबकि भारत के शहरो में फुटपाथ का प्रतिशत 5% से भी कम है !! क्या फुटपाथ बनाने के लिए किसी तकनीक की जरूरत होती है ? या इनके पास पैसे या जमीन नहीं है ?

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अगर आप ध्यान दें तो पायेंगे कि ज्यादातर क्षेत्र में फुटपाथ के लिए जगह खाली पड़ी है, किन्तु नगर निगम / परिषद इन पर फुटपाथ नहीं बनाते। वे इस जगह को खाली छोड़ देते है, ताकि लॉरी-ठेले-केबिन लगाने वाले इस खाली पड़ी जमीन पर अपना कारोबार लगाना शुरू कर दें !!

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अखबार और बुद्धिजीवियों की किताबें चाटने वाले समझदार लोग आपको बताएँगे कि भारत के लोगो में अनुशासन नहीं है, वे अशिक्षित है, उनमे राष्ट्र प्रेम नहीं है, शउर नहीं है, और इसीलिए वे अतिक्रमण कर लेते है। और मैं इन समझदार लोगो से कहता हूँ – कि तुम अपनी समझदारी के साथ दफा हो जाओ। ये ज्यादा पढ़े लिखे लोग सरकार को कवर देने और भारतीयों का तिरस्कार करने के लिए इस तरह की बातें कहते है।

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दरअसल सरकार तेल कंपनियों के दबाव में फुटपाथो का इनफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं करना चाहती, और इसीलिए वह ज्यादातर जमीन को खाली छोड़ देती है, और सांकेतिक रूप से बीच बीच में छोटे छोटे *प्लेटफोर्म* बना देती है। और सिर्फ इस वजह से अतिक्रमण करने वाले प्रोत्साहित होते है।

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2.2.1. फुटपाथ और प्लेटफ़ॉर्म में क्या फर्क है ?**

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फुटपाथ निरंतर जबकि प्लेटफ़ॉर्म टुकड़ो में होता है। 100-200 फुट के टुकड़े को प्लेटफ़ॉर्म कहते है, इसे फुटपाथ नहीं कहते। फुटपाथ सड़को के साथ निरंतर होता है, जितनी लम्बी सड़क होगी उतना ही लम्बा फुटपाथ होगा। उसमे कोई व्यवधान नहीं आएगा। जहाँ पर क्रोसिंग आएगी वहां पर पैदल पार पथ होगा और फिर से सडक के साथ फुटपाथ शुरू हो जायेगा। फुटपाथ के इन्फ्रास्ट्रक्चर का मतलब है कि शहरो में जहाँ जहाँ भी डामर बिछा हुआ है, वहां वहां अनिवार्य रूप से फुटपाथ होता है। यदि फुटपाथ निरंतर होगा तो लोग इनका इस्तेमाल पैदल चलने में करने लगेंगे और इस पर कभी भी अतिक्रमण नहीं होगा। मैंने भारत में ऐसी दर्जनों कोलोनियाँ देखी है जहाँ पर कई किलोमीटर के निरंतर फुटपाथ है, और इस वजह से वहां पर कभी कोई अपनी केबिन-ठेला वगेरह नहीं रखता।

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2.2.2. तो तेल कम्पनियों की नीति क्या है ?**

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उनकी नीति है कि शहरो में ज्यादा से ज्यादा प्लेटफ़ॉर्म के बेतरबीब टुकड़े बनाए जाए। वे इन बेतरबीब टुकडो की लम्बाई कम रखते है, ताकि लोग इनका इस्तेमाल पैदल चलने में न कर सके। यदि आप इन पर चलेंगे तो आपको बार बार रोड़ पर उतरना पड़ेगा और अंत में आप फुटपाथ छोड़ देंगे। और चूंकि लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे है, अत: जल्दी ही Street Vendors इन प्लेटफ़ॉर्म पर कब्ज़ा कर लेंगे।

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ये वेंडर्स रोड़ के एकदम किनारे पर खड़े होते है, अत: इनके ग्राहक रोड़ पर खड़े रहते है, और इस तरह 100 फिट रोड़ में से 20-20 फुट रोड़ दोनों तरफ से गायब हो जाती है, और रोड़ की वास्तविक चौड़ाई 60 फिट रह जाती है। इसी 60 फिट में से वाहनो को भी निकलना है, वेंडर्स के ग्राहकों को रोड़ के किनारे खड़ा रहना है, और इन ग्राहकों को अपने वाहन भी यही खड़े करने है, और इसी सब के बीच में से पैदल जाने वाले यात्रियों को भी निकलना है। और फिर वे ऐसे क़ानून भी छापते है जिससे रोड़ पर आवारा गायों और कुत्तो की संख्या निरंतर बढती जाए !!

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और फिर पुलिस कर्मियों को निर्देश दिए जाते है कि वे इन्हें हटाए नहीं। तो पुलिस वाले इनसे हफ्ता वसूलना शुरू कर देते है। और कोई सभापति यदि फुटपाथ का इनफ्रास्ट्रक्चर सुधारेगा तो सीएम उसे नौकरी से निकाल देगा।
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> *दरअसल सभापति का काम शहर के ट्रेफिक को बदतर से बदतर बनाए रखना और साथ ही ऐसे नाटकीय फैसले लेने का ढोंग करते रहना जिससे ऐसा लगे कि कुछ किया जा रहा है !!*
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**मतलब आप जो नरक झेल रहे है, उसे उन्होंने जानबूझकर रचा गया है !! और यह काफी इंटेलिजेंट डिजाइन है !!**

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उन्होंने पैदल चलने वालो के लिए कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। पूरे शहर में डामर बिछा हुआ है, और डामर का मतलब है उस पर पहला राईट वाहन का है। तो शहरो में सिर्फ डामर है, डामर के किनारे कच्ची जमीन है या फिर प्लेटफ़ॉर्म है। लेकिन फुटपाथ नहीं है। फुटपाथ बिलकुल भी नहीं है। यदि आप पैदल निकलेंगे तो जान जायेंगे कि भारत में पैदल चलने वालो के लिए कोई जगह नहीं है। उन्हें उसी डामर पर चलना होता है, जिस पर वाहन दौड़ते है।

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और जब भी आप डामर पर चलते है तब वाहन के रूट का अतिक्रमण कर रहे होते है। तो वे आपको हॉर्न देते है, आपको साइड में चलने को कहते है, कभी आपको टल्ला मारकर या छू कर निकलते है, और आपको पैदल चलते हुए बार बार पीछे मुड़कर देखना पड़ता है। जाहिर है आप इससे असुरक्षित महसूस करेंगे और वाहन लेकर निकलेंगे। मतलब सरकार की policy है कि यदि आपको घर से निकलना है तो वाहन लेकर ही निकलो, वर्ना न निकलो !!

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फुटपाथ पर चलने से व्यक्ति सुरक्षित महसूस करता है, और उसकी पैदल चलने की हैबिट बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए कोलकाता के Salt Lake में लगभग 90% फुटपाथ है। और इलाका भी काफी बड़ा है। लगभग 5-7 किलोमीटर में फैला हुआ। मैं वहां लगभग 2 साल रहा और इस दौरान मैं ज्यादातर पैदल ही आता जाता था। और मेरे अलावा अन्य लोग भी 2-3 किलोमीटर तक का फासला होने पर फुटपाथ का प्रयोग ही करते थे। तो मेरा यह व्यवहारिक अनुभव है कि जहाँ फुटपाथ का इन्फ्रास्ट्रक्चर है, वहां लोग छोटी दूरी तय करने में वाहनों का इस्तेमाल बेहद कम करते है। और इससे तेल की खपत कम होने लगती है !!

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**2.3. पार्किंग :**
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जो दशा फुटपाथ की है वही दशा पार्किंग की है। इसे अच्छे से समझने के लिए आप अपने शहर के नगर परिषद कार्यालय में जाइए और वहां से यह आंकड़े मांगिये कि पिछले 15 वर्षो में मुनिसिपल्टी ने कितनी भूमि पर सार्वजनिक पार्किंग बनायी है, और पार्किंग की समस्या को हल करने के लिए व्यवसायिक कोम्प्लेक्स / दुकाने आदि का निर्माण करने पर पार्किंग प्लेस का प्रतिशत तय करने के लिए कितने क़ानून छापें है, और उनमे से कितनो का पालन हुआ है। और फिर आप अपने जिले के RTO कार्यालय से यह डेटा ले सकते है कि पिछले 15 वर्षो में कितने नए वाहनों का पंजीयन हुआ है !!

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और तब आपको मालूम होगा कि पार्किंग प्लेस उतना ही है जितना 15 साल पहले था, लेकिन वाहनो की संख्या 20 गुना बढ़ चुकी है। प्रत्येक वाहन 6 फुट चौड़ा और 7 फुट लम्बा स्पेस लेता है। उन्होंने सड़को पर ये वाहन फेंक दिए किन्तु इन्हें खड़े करने के लिए पार्किंग के कोई क़ानून जानबुझकर नहीं छापे। नतीजा , सड़को के किनारे लगातार आप खड़े वाहनों की कतार देखेंगे, और इसकी वजह से सड़को की चौड़ाई अस्थायी रूप से और भी घट जाती है।

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इस वजह से ट्रेफिक और भी बढ़ता है। और ट्रेफिक जितना बढेगा, वाहन उतने धीरे चलेंगे या रेंगने लगेंगे और इससे तेल की खपत बढ़ जाती है !!

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**2.4. लम्बे सफर को आसान बनाना :**
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उन्होंने वाजपेयी के शासन के दौरान फोर लेन-सिक्स लेन आदि बनाने के प्रोजेक्ट मंजूर करवाए थे। इन सभी प्रोजेक्ट्स के ठेके भी विदेशियों के दिए गए। हालांकि हाई वे बनाने को लेकर मेरा विरोध नहीं है। और मेरा मानना है कि हमें लम्बी दूरी तय करने के लिए हाई वे बनाने की जरूरत है, ताकि ट्रांसपोर्टेशन की लागत कम हो।

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किन्तु मेरा बिंदु यह है कि उन्होंने सारा निवेश सिर्फ लम्बे सफर को आसान बनाने के लिए किया और शहरो में यातायात सुधारने के क़ानून छापने की जान बुझकर अवहेलना की।

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इसकी वजह से दोनों और से तेल की खपत बढ़ी। वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण शहरो में ट्रेफिक बढ़ गया जिससे तेल की खपत बढ़ी और हाई वे बेहतर होने के कारण ज्यादा से ज्यादा वाहन धारी लम्बी दूरी तय करने के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल करने लगे। और इससे भी तेल की खपत बढ़ी।

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मिसाल के लिए मेरा उदारहण देखिये – मैंने 2007 में एल्टो खरीदी थी। मैंने इसके लिए 3,30,000 का भुगतान किया और इस कार को अगले 10 महीने में 90 हजार किलोमीटर चला लिया था। जब 2008 में मैंने इसका हिसाब निकाला तो मालूम हुआ कि मैं सिर्फ 1 वर्ष के भीतर 4 लाख रू का पेट्रोल फूंक चुका था !! मतलब मैंने वाहन खरीदने के लिए 3,30,000 रू का भुगतान किया था लेकिन तेल कम्पनियों को 4 लाख दे दिए थे !! और सरकार इस तेल के बदले में डॉलर भी चुका रही थी !!

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2008 में मैंने फिएस्टा ली और अगले 1 वर्ष में मैंने फिर से तेल कम्पनियों को 3 लाख चुकाए !! मतलब सिर्फ एक कार ने सरकार पर 7 लाख रूपये के डॉलर चुकाने का भार बढ़ा दिया था !! और 2011 के बाद से मैंने जब भी वाहन का इस्तेमाल किया है तब ज्यादातर बार मुझे ऐसा इसीलिए करना पड़ा क्योंकि तेल कम्पनियों ने भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नारकीय बनाकर रखा हुआ है। तो मेरे पास निजी वाहन इस्तेमाल करने के सिवा कोई विकल्प नही था !!

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**2.5. सड़को पर आवारा कुत्तो एवं गायों की संख्या बढ़ाना :**
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1. **कुत्ते :** वाजपेयी ने 2001 में सड़को पर कुत्तो की आबादी बढ़ाने के लिए क़ानून छापा था। इस क़ानून ने कुत्तो को पकड़ने पर प्रतिबन्ध लगा दिया, और तब से कुत्ते बढ़ते जा रहे है, और इनकी संख्या लगातार बढती जायेगी !! इसके बाद जितने भी पीएम आये उनमे से किसी ने भी इस क़ानून को ख़त्म नहीं किया। कुत्तो की समस्या से दिल्ली वाले ढंग से वाकिफ है, और सबसे नजदीक से उन्ही पर ये मार पड़ रही है। कुत्तो की संख्या बढ़ने से एक तरफ तो रात को आदमी असुरक्षित महसूस करते है, और वाहन लेकर ही निकलते है, और दिन में ये ट्रेफिक में व्यवधान डालते है। इसमें एक दूसरी वजह भी है -- सरकारें आवारा कुत्तो की संख्या इसीलिए भी बढ़ाती है ताकि रात्री कालीन गेदरिंग को तोड़ा जा सके।
1. **गायें :** गायों को सड़को पर धकेलने के पीछे कई सारे कारण है। मैंने इस विषय पर अलग से एक जवाब में लिखा है। इसमें एक वजह सड़को पर ट्रेफिक भी बढ़ाना है। आप जिस भी शहर में रहते है, कल सुबह वाहन लेकर निकलिए और 2-5 किलोमीटर की राइड में सड़को पर घूमती / पसरी आवारा गायों की संख्या गिनिये। आपको अंदाजा हो जाएगा कि आवारा गायें किस तरह ट्रेफिक को बढ़ाती है।

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**खंड – ब**
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**समस्या का मूल कारण और सार -
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1. उन्होंने जानबूझकर शहरो में इस तरह का इन्फ्रास्त्रक्चर खड़ा किया है कि पैदल, साईकिल, दुपहिया, चार पहिया, गायें, कुत्ते, बसें, ट्रक, सभी एक ही रोड़ का इस्तेमाल करें।
1. और साथ ही उन्होंने जानबूझकर यह व्यवस्था की बनायी है कि इस रोड़ पर स्ट्रीट वेंडर्स यदि अपनी जगह बना लेते है तो उन्हें कोई हटा नहीं सके।
1. और उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि पार्किंग भी इसी रोड़ पर हो !!
1. और साथ ही उन्होंने देश में भर बुद्धिजीवियों को भी यह तर्क देने के लिए तैयार किया है कि इस पूरी अव्यवस्था के जिम्मेदार खुद भारतीय है !!

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**समाधान :**

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**(1) छद्म समाधान : **फर्जी समाधान की पहचान है कि उन्हें लागू नहीं किया जा सकता। फर्जी समाधान में नारे , डायलॉग, दर्शन , उपदेश , सलाह, प्रवचन, बौद्धिकता और जागरूकता फैलाने के टोटके होते है, और अंत में इसमें यह कतगा जरुर लगाया जाता है कि भारत के लोग ही जाहिल, अशिक्षित, बे-शउर, अनुशासन हीन, स्वार्थी है और इसीलिए सभी प्रकार की व्यवस्थागत दुर्दशा के लिए जिम्मेदार खुद भारतीय है।

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इस तरह का वैचारिक प्रदुषण फैलाने का धंधा टीवी-अखबार में आने वाले सभी बुद्धिजीवी करते है। और जो लोग इन बुद्धिजीवियों की चपेट में रहते है वे भी यथाशक्ति आपको सोशल मीडिया पर इसी तरह का बौद्धिक ज्ञान बाँटते हुए मिल जायेंगे। दरअसल इन्हें समाधान नहीं देना होता है, बल्कि बहस करके लोगो का टाइम बर्बाद करना होता है, ताकि उन्हें सही समाधान से दूर धकेला जा सके। और इसीलिए इनके समाधान में गेजेट / क़ानून लफ्ज का प्रयोग नहीं होता। और भारतीयों का इस तरह तिरस्कार करने से इन्हें एक मानसिक संतुष्टि मिलती है। भारतीयों को कोस कर ये खुद में ज्यादा समझदार और बुद्धिजीवी होने का उच्च भाव बनाए रखते है।

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**(2) स्थिति को और भी बदतर बनाने वाले समाधान : **सरकार इसका जो भी समाधान लाएगी वह समस्या को और भी बदतर बनाएगा। इसका कोई अपवाद नहीं है। सरकार एवं नेताओं का काम ही है समस्याओ को बदतर बनाना है। चाहे odd-even हो या नए ट्रेफिक रूल्स हो। सरकार और नेता कोई भी हो उनसे आप सिर्फ बदतर की उम्मीद ही रख सकते है। यह बात और है कि आपको इसका नतीजा समझने में 10-20 साल लगेंगे। तो यदि आपको इसका समाधान चाहिए तो मेरा सुझाव है कि कम से कम टीवी पर नजर आने वाले तमाम नेताओं से इस मामले में उम्मीद न पालें। वे सभी अभिनेता है और उनके प्रयोजको द्वारा दी गयी स्क्रिप्ट पर अपना अपना पार्ट अदा कर रहे है। जो भी आपको फर्क नजर आता है, वह नेता की अभिनय क्षमता का है।
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**(3) वास्तविक समाधान :** वास्तविक समाधान गेजेट से आते है। निचे मैंने कुछ इबारतें और कुछ क़ानून ड्राफ्ट्स के बारे में जानकारी दी है, जिन्हें गेजेट में निकालने से बदलाव आएगा :

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3.1. नए वाहनों की बिक्री कम करना :**

1. सरकारी बैंक वाहनों की खरीद के लिए कोलेटरल फ्री लोन नहीं देंगे। व्यावसायिक लदान में काम आने वाले वाहनों के लिए 50% तक का फायनेंस मोर्गेज प्रोपर्टी पर किया जा सकेगा, किन्तु निजी एवं सवारी वाहनों के लिए 0% फायनेंस होगा !!
1. निजी बैंक अपने जोखिम पर वाहनों के लिए लोन दे सकते है। किन्तु किश्त बाउंस होने पर क्रिमिनल ऑफेंस नहीं होगा।
1. चेक बाउंस के सभी मामलों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी।
1. बैंक सिर्फ 90 से 120 दिन की वेलिडिटी के चेक जारी करेंगे।
1. सभी प्रकार के आयातित वाहनों पर 100% इम्पोर्ट ड्यूटी। जिसे भी विदेशी वाहन खरीदना है वह दुगने दाम चुका सकता है।

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**3.2. पब्लिक ट्रांसपोर्ट इम्प्रूव करना : **पब्लिक ट्रांसपोर्ट इम्प्रूव करने के लिए कई सारे गेजेट नोटिफिकेशन छापने की जरूरत है। इसमें रेल से लेकर सड़क परिवहन तक सब शामिल है। फिलहाल सरकार की नीति है कि सरकारी परिवहन को खच्चर बनाओ और घाटे / बदहाली का हवाला देकर परिवहन का क्षेत्र विदेशियों को बेच दो। और एक बार जब विदेशी परिवहन पर एकाधिकार बना लेंगे तो वो पब्लिक को सूतना शुरू कर देंगे।

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यदि रेल मंत्री और सड़क परिवहन मंत्री को वोट वापसी और जूरी के दायरे लाया जाए तो वे अपने आप पब्लिक ट्रासंपोर्ट को सुधारने के लिए नीतियाँ बनाना शुरू कर देंगे। यदि फिर भी वे इसमें सुधार नहीं लाते है तो जनता अमुक मंत्री को लात मार कर**(*)** नौकरी से निकाल सकती है। वोट वापसी एवं जूरी कोर्ट के आये बिना इस पार्टी का मंत्री रहे या उस पार्टी का, हर हाल में वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बैंड बजाना जारी रखेंगे।
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***(*) **वोट वापसी को लात मारकर बाहर निकालने का अधिकार कह कर पुकारने की खोज मैंने नहीं की है। इस टर्म का सुझाव सबसे पहले मोदी साहेब ने दिया था। और मुझे काफी हद तक यह टर्म ठीक लगी। तो कृपया इसमें भाषाई असभ्यता न खोजें। हालांकि मोदी साहेब ने इस अधिकार का सिर्फ मौखिक समर्थन किया लेकिन लात मारने का अधिकार देने के लिए कभी नोटिफिकेशन नही निकाला !!
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3.3. फुटपाथ एवं पार्किंग :** शहरो का प्रशासन सभापति के हाथ में है। अभी सभापति काफी मुख्तलिफ कार्यो में व्यस्त रहता है। उसे ठेके देकर पैसे बनाने होते है, अपने आदमियों को प्रशासन में फिट करना होता है ताकि उनके माध्यम से पैसा खींचा जा सके, सीएम और पार्टी के आला अधिकारियों की चमचई करनी होती है, ताकि अगला टिकेट पक्का करके अपने राजनैतिक भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके। और सबसे जरुरी काम उसे यह करना होता है कि जो अवैध पैसा वो बना रहा है, उसे व्हाईट करके ठिकाने लगाना होता है। तो इन सब जरुरी कामो में सभापति का दिमाग इतना व्यस्त रहता है, कि उसे फुटपाथ ट्रेफिक आदि जैसे चिल्लर मुद्दों पर सोचने का टाइम ही नहीं मिलता।
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मेरा प्रस्ताव है सभापति को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने का है। इस क़ानून के आने के अगले दिन से ही सभापति निम्नलिखित कदम उठाना शुरु कर देगा ;
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1. वो शहर में सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाएगा और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए चौपाटियां बनाकर उन्हें एलोट करेगा।
1. यथासंभव सड़को के साथ निरंतर फुटपाथ बनाएगा और यह भी सुनिश्चित करेगा कि इन फुटपाथ पर अतिक्रमण 24 घंटे से ज्यादा टिके नहीं।
1. वह सार्वजनिक पाकिंग बनाना शुरू करेगा, और व्यस्त इलाको के हिसाब से प्रति घंटा के हिसाब से पार्किंग दरें निर्धारित करेगा।
1. सभापति सभी पार्किंग प्लेस को पीले रंग एवं फुटपाथ को लाल रंग की बोर्डर से चिन्हित करेगा ताकि यह बात एकदम स्पष्ट रूप से निकलकर आये कि अमुक स्थान फुटपाथ या पार्किंग के लिए आरक्षित है। (*)
1. सभापति शहरो के व्यस्त रूट्स पर लो फ्लोर वातानुकूलित एवं सामान्य बसों का “पर्याप्त” नेटवर्क खड़ा करेगा, ताकि जो व्यक्ति पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना चाहते है वे प्रोत्साहित हो।
1. सभापति अपने शहर में नए वाहनों की बिक्री पर पार्किंग / ट्रेफिक टेक्स लेना शुरू करेगा। यह टेक्स वाहन के आकार के आधार पर होगा, कीमत के आधार पर नहीं। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 4 सीटर पासिंग कार लेता है तो उसे 5,000 रू अतिरिक्त चुकाने होंगे और दुपहिया पर 2,000. इस पैसे का इस्तेमाल सार्वजनिक पार्किंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट डेवलप करने में किया जाएगा।
1. सभापति प्रत्येक वर्ष में नए वाहनो की बिक्री सीमा भी निर्धारित कर सकता है। यह अनुपात इस आधार पर निर्धारित किया जायेगा कि शहर का इन्फ्रास्त्रक्चर कितने नए वाहनों को झेलने में सक्षम है।

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मैं पिछले 20 साल से राजनीती को देख रहा हूँ, और जितना मुझे अनुभव है मेरा यह पक्के तौर पर मानना है कि पूरा शहर चमगादड़ की तरह उल्टा भी लटक जाए तो किसी भी सभापति को ऊपर दिए गए कदम उठाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसकी चाबी सिर्फ वोट वापसी पासबुक और जूरी कोर्ट है। मैंने इसके लिए जूरी पंचायत नामक क़ानून ड्राफ्ट का प्रस्ताव किया है। इस क़ानून के आने के अगले दिन से ही सभापति शहर का प्रबंधन वैसे ही करने लगेगा जैसे वह अपने घर का प्रबंधन करता है।

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**सरकार के पास इसका एक बदतर समाधान है - **उनकी योजना भारत के सभी बड़े शहरो को विदेशियों के हाथो बेचने की है। वे इसके लिए इस पर स्मार्ट सिटी या इसी टाइप के नारे चिपकाकर जनता को कन्विंस करेंगे और फिर कुछ स्मार्ट शहर की तस्वीरें दिखाकर एक के बाद एक शहरो का प्रबंधन विदेशियों को देते जायेंगे। और जब भी ये किसी विदेशी कम्पनी को प्रोजेक्ट देते है, बदले में नेताओं के स्विस एकाउंट में डॉलर बढ़ते जाते है।

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मैं उनके इस समाधान के खिलाफ हूँ। क्योंकि इससे हम पर डॉलर का बोझ बढ़ता है, और डॉलर का यह बोझ निरंतर बढ़ता है। क्योंकि मेंटेनेंस के लिए हमें हर महीने डॉलर चुकाने होंगे। भ्रष्ट एवं निकम्मे नेता इसी तरह की स्मार्ट तकनीको का इस्तेमाल करते है, क्योंकि एक तरफ तो उन्हें पैसा बनाना होता है, और दूसरी तरफ वे निकम्मे होते है।

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उनकी स्कीम है कि --- हमारे शहरो को साफ़ सुथरा रखने का काम भी विदेशी करें। उनसे पैसा खाओ और उन्हें ऊँचे दामो पर प्रबंधन का ठेका पकड़ा दो। हमें काम करने की जरूरत क्या है !! और इससे डॉलर का बोझ बढ़ता है तो बढने दो, हमें कौनसा जेब से देना है। जब कमी होगी तब देश की कोई न कोई कोल माइंस या खनिज या और कोई जमीन संपत्ति बेचकर उन्हें डॉलर चुका देंगे !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Sep 23 2019 08:10:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कार्यकर्ताओ को हरियाणा, महाराष्ट्र , झारखंड में विधानसभा चुनावो में भाग लेने के लिए प्रयास करने चाहिए. यदि आप विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए 15,000 रू का खर्चा है. यदि आप इतना पैसा खर्च कर सकते है, कृपया जूरी कोर्ट और वोट वापसी पासबुक के मुद्दे पर चुनाव लड़ने का प्रयास करें.
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जो कार्यकर्ता कतिपय कारणों से चुनाव नहीं लड़ पा रहे है, उनसे आग्रह है कि जूरी कोर्ट, वोट वापसी पासबुक कानूनों के मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे कार्यकर्ताओ को आर्थिक सहयोग करने का प्रयास करें.
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अब प्रत्येक जिले के लिए अलग से क़ानून ड्राफ्ट भी उपलब्ध है, जिन्हें गेजेट में छापने से अमुक जिले में जूरी कोर्ट और वोट वापसी क़ानून लागू किये जा सकते है. यदि आप चुनाव लड़ते है तो अपने जिले में जूरी कोर्ट-वोट वापसी लाने के क़ानून का पेम्पलेट भी छपवा सकते है.
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जिस भी जिले में यह क़ानून आयेंगे उन जिलो की अदालतें, थाने, सरकारी स्कूल एवं सरकारी अस्पतालों की दशा अन्य जिलो के मुकाबले तेजी से सुधरने लगेगी.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Sep 23 2019 10:32:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हरियाणा, महाराष्ट्र , झारखंड के विधानसभा चुनावो में जो कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के इच्छुक है वे अपना बैंक एकाउंट खुलवाकर अपना एकाउंट नंबर फेसबुक पर रखें, ताकि जो कार्यकर्ता आर्थिक अंशदान देने चाहते है वे उन्हें राशि भेज सके। खाता खुलवाने के साथ ही चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ता अपना paytm नंबर भी सार्वजनिक करें।
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राईट टू रिकॉल पार्टी में केन्द्रीय स्तर पर चंदा लेने की व्यवस्था नहीं है। कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि जो भी कार्यकर्ता जूरी कोर्ट, वोट वापसी के मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे है, उन्हें पैसा सीधे उनके खाते में भेज दें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Sep 26 2019 17:55:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सिरसा जूरी कोर्ट – सिरसा के थानों-अदालतों को सुधारने के लिए जिला स्तरीय जूरी अदालतें
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Sirsa Jury Court – Proposed Notification to Enact Lower Jury Courts in Sirsa
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यह क़ानून सिरसा जिले के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, अस्पतालों आदि का काम-काज सुधारने के लिए लिखा गया है। यह क़ानून हरियाणा के अन्य जिलो पर लागू नहीं होगा। किन्तु मुख्यमंत्री चाहे तो इसे राज्य के अन्य जिलो में या पूरे प्रदेश में भी लागू कर सकते है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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सिरसा जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप सिरसा में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, कृपया सिरसा जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छापें — #SirsaJuryCourt #VoteVapsiPassBook #P20180436103
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है.
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====सिरसा जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : इस क़ानून में जहाँ भी जिला शब्द का इस्तेमाल किया गया है, उसका आशय है हरियाणा का सिरसा जिला ।
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(01) यदि आपका नाम सिरसा जिले की वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :

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1.1. हत्या, हत्या के प्रयास , मारपीट, हिंसा , अप्राकृतिक मानव मृत्यु , दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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1.2. अपहरण , बलात्कार , छेड़छाड़ , कार्यस्थल पर उत्पीड़न , दहेज़ , घरेलू हिंसा , डिवोर्स , वैवाहिक झगड़े ।
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1.3. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारणों से सम्बंधित सभी मामले एवं सम्बंधित सभी आपत्तियां ।
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1.4. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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(02) यह क़ानून गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर सिरसा जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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01. जिला पुलिस प्रमुख
02. जिला शिक्षा अधिकारी
03. जिला चिकित्सा अधिकारी
04. जिला मिलावट रोक अधिकारी
05. जिला जज
06. जिला जूरी प्रशासक
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
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[ टिपण्णी : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है , अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए – सिरसा के नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके।
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बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है। इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है – सिरसा के अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे। ]
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यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दे सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इस शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(II) अधिकारियों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी , मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है ।
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(04) जिले के न्याय क्षेत्र में घटित होने वाले अपराधो के सम्बन्ध में यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
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4.1. हत्या, हत्या के प्रयास, दुर्घटना या लापरवाही जनित मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु।
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4.2. ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो, या गंभीर चोट कारित होने की संभावना हो, दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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4.3. अपहरण-बलात्कार-छेड़छाड़-उत्पीड़न , महिला का पीछा करना , दहेज़ , घरेलू हिंसा, डिवोर्स, वैवाहिक झगड़े।
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4.4. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जिसमें- फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है - से सम्बंधित सभी प्रकार के मामले व आपत्तियां।
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4.5. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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4.6. सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने इस सूची में शामिल किया हो।
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4.7. ऐसे अपराध या विवाद जिन्हें नागरिको के बहुमत ने इस क़ानून की धारा (34) द्वारा एवं प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो
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(05) जिला सहायक निदेशक अभियोजन (A.D.P.) को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 6 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक वोट वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। इन अधिकारीयों के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (31) देखें।
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(06) मुख्यमंत्री जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (31) का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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[ टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी। ]
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(07) जिले में दर्ज सभी मतदाताओं की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर दी गयी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और जिले में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 4 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है।
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(08) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :
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सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(8.1) जिले की मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(8.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
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(8.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(8.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(8.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
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(8.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(09) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :
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(09.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(09.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(10) लॉटरी से मतदाताओं को चुनने का तरीका :
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(10.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रमरहित विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
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(10.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या जैसे ABCD के मध्य की कोई संख्या चुननी है । तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा। पहले दौर में यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का इस्तेमाल करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है, तब वह 2 पांसों का प्रयोग करेगा।
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(10.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी, और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी। यदि पांसे फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा।
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(10.3.1) मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज है, में से एक पेज का चयन करना है। तब जूरी प्रशासक 4 दौर ( राउंड ) के पासें फेंकेगा। पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है। यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी। अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा। इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है, इसलिए वह दो पांसे फेकेगा। यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा। यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है। तब जूरी प्रशासक (3-1) , (5-2) , (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा।
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(10.3.2) जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान संख्याओ को चुन सकता है। मान लीजिये सूची में N मतदाता है। तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें ‘n और m’ मान लेते है, चुन सकता है। चुने हुए मतदाता हो सकते है - ( n mod N ) , ( n +m ) mod N , ( n+2m ) mod N से (n+ ( k-1 )*m ) mod N , जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
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(11) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 30 दिनों बाद दी जाएगी।
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(12) यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 30 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।
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(13) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :
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(13.1) यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और यह आरोप यदि धारा (4) या उसके आधार पर जारी किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में सूचित कर सकते है, अथवा धारा (34.1) के अंतर्गत अपनी शिकायत मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास या मृत्युदंड का सुझाव दे सकते है।
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(13.2) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य यदि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते है तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते है। वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते है या नहीं भी दे सकते है।
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(13.3) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच होगी । यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा।
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(13.4) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना लगा सकते है। महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) जुर्माने की राशि मानी जाएगी। महाजूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(14) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
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महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :
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(14.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(14.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है। पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी। यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है।
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(14.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा है, और महाजूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते है तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते है।
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(14.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है। न्यूनतम संख्या 15 होगी और हर 1 करोड़ की राशि के लिए 1 अतिरिक्त सदस्य जोड़ा जाएगा। किन्तु जूरी का आकार 1500 से अधिक नहीं होगा।
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(15) जूरी सदस्यों का चयन :
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(15.1) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे नागरिक भी जूरी से बाहर रहेंगे। शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेगा। किसी व्यक्ति को जूरी में शामिल नहीं करने का निर्णय जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महाजूरी मंडल के बहुमत द्वारा बदला जा सकेगा।
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(15.2) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता, पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते है, जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं।
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(15.3) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक एक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया एवं जूरी ट्रायल का संचालन करेगा।
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(16) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना : सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(17) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।
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(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।
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(19) जुर्माने का निर्धारण : प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
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(20) कारावासीय दंड : ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
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(21) मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।
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(22) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
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(24) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
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(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
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(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।
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(27) जिला जूरी प्रशासक जिले की सभी तहसीलों में भी तहसील स्तर पर तहसील जूरी प्रशासको की नियुक्ति करेगा। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। तहसील जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील महाजूरी मंडलों का गठन करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
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[ टिपण्णी : यदि वादी गण को लगता है कि जिला जज ने अनुचित फैसला दिया है तो वे इस क़ानून के वोट वापसी खंड की धारा (31) का इस्तेमाल करके जिले के नागरिको से विनती कर सकते है कि नागरिक जिला जज को नौकरी से निकालने की स्वीकृति दें। या वे इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत जिले के नागरिको के समक्ष पुनर्विचार (Riview) का एक शपथपत्र भी दाखिल कर सकते है।
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(28) इसी क़ानून की धारा (04) में वर्णित मामलो या धारा (04) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना जिले के किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा। किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (34) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिले के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
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(29) जिला स्तर के अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(29.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(29.2) जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 8 वर्ष हो चुके हो या वह सहायक लोक अभियोजक ( APP = Assistance Public Prosecutor ) के रूप में 3 वर्ष तक सेवाएं दे चुका हो तो वह जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन ( ADP = Additional Director of Prosecution ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.3) जिला चिकित्सा अधिकारी : 32 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए वांछित डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.4) जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(30) धारा (29) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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(31) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(31.1) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
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(31.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(31.3) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
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(31.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(32) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(32.1) जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने सहमती दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या नही भी कर सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।
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(32.2) जिला जूरी प्रशासक, मिलावट रोक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जिला सहायक निदेशक अभियोजन : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जूरी प्रशासक या सहायक निदेशक अभियोजन की नौकरी दे सकते है ।
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(32.3) जिला जज : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जिला जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है। जिला जज की नियुक्ति का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(32.4) जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन शिक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी दे सकते है।
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(32.4.1) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(32.4.2) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा जिले में - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, जिले का प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस क़ानून के लिए अभिभावक माना जायेगा।
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(32.4.3) यदि मुख्यमंत्री इस क़ानून को अन्य जिलो में भी लागू करते है तो मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृतियों से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह अधिक से अधिक 5 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(33) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(33.1) मुख्यमंत्री एवं जिले के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(33.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने गुप्त स्वीकृतियों के लिए मतदान किया है) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
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(33.3) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे। किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(33.4) राज्य के सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपनी पसंद का नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री शिक्षा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक एवं चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(34) जनता की आवाज :
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(34.1) यदि जिले का कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(34.2) यदि जिले का कोई मतदाता धारा (34.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दिया जा सकेगा, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि जिले के 51% नागरिक शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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==== सिरसा जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया " मुख्यमंत्री कार्यालय " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“ मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित सिरसा जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें --- #SirsaJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103 "
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. "मुख्यमंत्री / प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम या सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए । वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें : " @Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #SirsaJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103
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6. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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7. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (34) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 27 2019 07:53:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Vishal Dhokale AmbegaonMh:

योगदान कर्ता से अनुरोध,

मैं महाराष्ट्र में पूना जिले के आंबेगाव विधानसभा से वोट वापसी पासबुक, ज्यूरी कोर्ट, ज्यूरी पंचायत, धनवापसी, इन कानूनों का प्रचार करने के लिए चुनाव लड़ रहा हूँ।
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यदि आप चुनाव लड़ने हेतु योगदान देने के इच्‍छुक है तो मेरे चुनावी बैंक खाते मे योगदान राशी भेजें । यह मेरा (उम्मीदवार) का चुनावी बैंक खाता हैं।

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आवेदन जमा करने की प्रारम्भिक दिनांक - 27 सेप्टेंबर

आवेदन जमा करने की अंतिम दिनांक - 4 ऑक्टोबर 2019

नामंकन फॉर्म की स्क्रूटिनी की दिनांक:- 5 ऑक्टोबर 2019

आवदेन वापिस लेने की अंतिम दिनांक - 7 ऑक्टोबर 2019

मतदान - 21 ऑक्टोबर 2019

काउंटिंग - 24 ऑक्टोबर 2019
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चुनावी खाते की डिटेल :

नाम:- Vishal Popat Dhokale
बैंक का नाम:- State Bank of India
ब्रांच:- Vadgaon-Sheri
IFSC code - - SBIN0016818
बैंक खाता नम्बर:- 38801648155

Paytm नं.- 8378990454

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 27 2019 11:17:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

महेंद्रगढ़ जूरी कोर्ट – महेंद्रगढ़ के थानों-अदालतों को सुधारने के लिए जिला स्तरीय जूरी अदालतें
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Mahendragarh Jury Court – Proposed Notification to Enact Lower Jury Courts in Mahendragarh
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यह क़ानून हरियाणा राज्य के महेंद्रगढ़ जिले के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, अस्पतालों आदि का काम-काज सुधारने के लिए लिखा गया है। यह क़ानून हरियाणा के अन्य जिलो पर लागू नहीं होगा। किन्तु मुख्यमंत्री चाहे तो इसे राज्य के अन्य जिलो में या पूरे प्रदेश में भी लागू कर सकते है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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महेंद्रगढ़ जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप महेंद्रगढ़ में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, कृपया महेंद्रगढ़ जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छापें — #MahendragarhJuryCourt #VoteVapsiPassBook #P20180436103
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है.
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====जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : इस क़ानून में जहाँ भी जिला शब्द का इस्तेमाल किया गया है, उसका आशय है हरियाणा का महेंद्रगढ़ जिला ।
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(01) यदि आपका नाम महेंद्रगढ़ जिले की वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :

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1.1. हत्या, हत्या के प्रयास , मारपीट, हिंसा , अप्राकृतिक मानव मृत्यु , दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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1.2. अपहरण , बलात्कार , छेड़छाड़ , कार्यस्थल पर उत्पीड़न , दहेज़ , घरेलू हिंसा , डिवोर्स , वैवाहिक झगड़े ।
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1.3. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारणों से सम्बंधित सभी मामले एवं सम्बंधित सभी आपत्तियां ।
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1.4. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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(02) यह क़ानून गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर महेंद्रगढ़ जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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01. जिला पुलिस प्रमुख
02. जिला शिक्षा अधिकारी
03. जिला चिकित्सा अधिकारी
04. जिला मिलावट रोक अधिकारी
05. जिला जज
06. जिला जूरी प्रशासक
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
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[ टिपण्णी : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है , अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए – महेंद्रगढ़ के नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके। बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है। इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है – महेंद्रगढ़ के अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे। ]
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यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दे सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इस शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(II) अधिकारियों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी , मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है ।
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(04) जिले के न्याय क्षेत्र में घटित होने वाले अपराधो के सम्बन्ध में यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
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4.1. हत्या, हत्या के प्रयास, दुर्घटना या लापरवाही जनित मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु।
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4.2. ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो, या गंभीर चोट कारित होने की संभावना हो, दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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4.3. अपहरण-बलात्कार-छेड़छाड़-उत्पीड़न , महिला का पीछा करना , दहेज़ , घरेलू हिंसा, डिवोर्स, वैवाहिक झगड़े।
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4.4. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जिसमें- फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है - से सम्बंधित सभी प्रकार के मामले व आपत्तियां।
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4.5. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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4.6. सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने इस सूची में शामिल किया हो।
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4.7. ऐसे अपराध या विवाद जिन्हें नागरिको के बहुमत ने इस क़ानून की धारा (34) द्वारा एवं प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो
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(05) जिला सहायक निदेशक अभियोजन (A.D.P.) को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 6 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक वोट वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। इन अधिकारीयों के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (31) देखें।
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(06) मुख्यमंत्री जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (31) का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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[ टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी। ]
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(07) जिले में दर्ज सभी मतदाताओं की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर दी गयी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और जिले में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 4 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है।
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(08) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :
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सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(8.1) जिले की मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(8.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
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(8.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(8.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(8.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
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(8.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(09) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :
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(09.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(09.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(10) क्रमरहित तरीके ( लॉटरी ) से मतदाताओं को चुनने का तरीका :
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(10.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रमरहित विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
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(10.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या जैसे ABCD के मध्य की कोई संख्या चुननी है । तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा। पहले दौर में यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का इस्तेमाल करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है, तब वह 2 पांसों का प्रयोग करेगा।
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(10.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी, और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी। यदि पांसे फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा।
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(10.3.1) मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज है, में से एक पेज का चयन करना है। तब जूरी प्रशासक 4 दौर ( राउंड ) के पासें फेंकेगा। पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है। यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी। अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा। इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है, इसलिए वह दो पांसे फेकेगा। यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा। यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है। तब जूरी प्रशासक (3-1) , (5-2) , (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा।
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(10.3.2) जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान संख्याओ को चुन सकता है। मान लीजिये सूची में N मतदाता है। तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें ‘n और m’ मान लेते है, चुन सकता है। चुने हुए मतदाता हो सकते है - ( n mod N ) , ( n +m ) mod N , ( n+2m ) mod N से (n+ ( k-1 )*m ) mod N , जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
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(11) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 30 दिनों बाद दी जाएगी।
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(12) यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 30 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।
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(13) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :
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(13.1) यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और यह आरोप यदि धारा (4) या उसके आधार पर जारी किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में सूचित कर सकते है, अथवा धारा (34.1) के अंतर्गत अपनी शिकायत मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास या मृत्युदंड का सुझाव दे सकते है।
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(13.2) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य यदि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते है तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते है। वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते है या नहीं भी दे सकते है।
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(13.3) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच होगी । यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा।
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(13.4) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना लगा सकते है। महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) जुर्माने की राशि मानी जाएगी। महाजूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(14) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
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महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :
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(14.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(14.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है। पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी। यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है।
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(14.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा है, और महाजूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते है तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते है।
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(14.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है। न्यूनतम संख्या 15 होगी और हर 1 करोड़ की राशि के लिए 1 अतिरिक्त सदस्य जोड़ा जाएगा। किन्तु जूरी का आकार 1500 से अधिक नहीं होगा।
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(15) जूरी सदस्यों का चयन :
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(15.1) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे नागरिक भी जूरी से बाहर रहेंगे। शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेगा। किसी व्यक्ति को जूरी में शामिल नहीं करने का निर्णय जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महाजूरी मंडल के बहुमत द्वारा बदला जा सकेगा।
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(15.2) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता, पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते है, जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं।
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(15.3) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक एक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया एवं जूरी ट्रायल का संचालन करेगा।
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(16) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना : सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(17) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।
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(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।
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(19) जुर्माने का निर्धारण : प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
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(20) कारावासीय दंड : ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
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(21) मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।
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(22) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
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(24) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
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(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
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(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।
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(27) जिला जूरी प्रशासक जिले की सभी तहसीलों में भी तहसील स्तर पर तहसील जूरी प्रशासको की नियुक्ति करेगा। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। तहसील जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील महाजूरी मंडलों का गठन करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
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[ टिपण्णी : यदि वादी गण को लगता है कि जिला जज ने अनुचित फैसला दिया है तो वे इस क़ानून के वोट वापसी खंड की धारा (31) का इस्तेमाल करके जिले के नागरिको से विनती कर सकते है कि नागरिक जिला जज को नौकरी से निकालने की स्वीकृति दें। या वे इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत जिले के नागरिको के समक्ष पुनर्विचार (Riview) का एक शपथपत्र भी दाखिल कर सकते है।
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(28) इसी क़ानून की धारा (04) में वर्णित मामलो या धारा (04) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना जिले के किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा। किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (34) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिले के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
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(29) जिला स्तर के अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(29.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(29.2) जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 8 वर्ष हो चुके हो या वह सहायक लोक अभियोजक ( APP = Assistance Public Prosecutor ) के रूप में 3 वर्ष तक सेवाएं दे चुका हो तो वह जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन ( ADP = Additional Director of Prosecution ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.3) जिला चिकित्सा अधिकारी : 32 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए वांछित डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.4) जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(30) धारा (29) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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(31) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(31.1) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
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(31.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(31.3) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
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(31.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(32) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(32.1) जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने सहमती दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या नही भी कर सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।
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(32.2) जिला जूरी प्रशासक, मिलावट रोक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जिला सहायक निदेशक अभियोजन : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जूरी प्रशासक या सहायक निदेशक अभियोजन की नौकरी दे सकते है ।
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(32.3) जिला जज : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जिला जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है। जिला जज की नियुक्ति का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(32.4) जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन शिक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी दे सकते है।
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(32.4.1) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(32.4.2) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा जिले में - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, जिले का प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस क़ानून के लिए अभिभावक माना जायेगा।
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(32.4.3) यदि मुख्यमंत्री इस क़ानून को अन्य जिलो में भी लागू करते है तो मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृतियों से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह अधिक से अधिक 5 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(33) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(33.1) मुख्यमंत्री एवं जिले के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(33.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने गुप्त स्वीकृतियों के लिए मतदान किया है) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
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(33.3) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे। किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(33.4) राज्य के सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपनी पसंद का नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री शिक्षा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक एवं चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(34) जनता की आवाज :
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(34.1) यदि जिले का कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(34.2) यदि जिले का कोई मतदाता धारा (34.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दिया जा सकेगा, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि जिले के 51% नागरिक शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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==== जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया " मुख्यमंत्री कार्यालय " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “ मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित महेंद्रगढ़ जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें --- #MahendragarhJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103 "
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. "मुख्यमंत्री / प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम या सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए । वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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" @Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #MahendragarhJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103
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6. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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7. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (34) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 27 2019 13:17:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस एल्बम में वे क़ानून ड्राफ्ट्स है जिन्हें मुख्यमंत्री अपने राज्य में लागू कर सकते है. जो नागरिक अपने जिले में पंचायत , पार्षद , विधायक एवं सांसद चुनाव लड़ने के इच्छुक है वे इन कानूनों के पर्चे स्थानीय नागरिको में बाँट सकते है.
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यदि आपके राज्य का कानून इस एल्बम में नहीं है तो कमेन्ट बॉक्स में इसे दर्ज करने से आपके राज्य का क़ानून भी यहाँ रख दिया जाएगा.
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यदि आपको इनके पीडीऍफ़ एवं मोबाईल वर्जन चाहिए तो इस फेसबुक ग्रुप से डाउनलोड करें --
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 27 2019 13:24:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हरियाणा जूरी कोर्ट – हरियाणा के थानों एवं अदालतों को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Haryana Jury Court – Proposed Notification to Enact Jury Courts in Haryana
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( इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।)
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निचे दिया गया क़ानून हरियाणा के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों एवं अन्य सरकारी विभागों का काम काज सुधारने के लिए लिखा गया है। गेजेट में आने के साथ ही यह क़ानून हरियाणा में लागू होगा । अन्य राज्यों के नागरिक भी अपने राज्य के मुख्यमंत्री से इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है। इस कानून को लोकसभा या विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है और अपने राज्य में इसे लागू करना चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड लिखें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित हरियाणा जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें — #HaryanaJuryCourt , #VoteVapsiPassBook , #P20180436103
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====ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है – (i) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (ii) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। इस क़ानून में जहाँ भी राज्य शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है हरियाणा राज्य.
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(i) नागरिकों के लिए निर्देश :
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(01) यदि आपका नाम हरियाणा की वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :
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1.1. हत्या, हत्या के प्रयास , मारपीट, हिंसा , अप्राकृतिक मानव मृत्यु , दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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1.2. अपहरण , बलात्कार , छेड़छाड़ , कार्यस्थल पर उत्पीड़न , दहेज़ , घरेलू हिंसा , डिवोर्स , वैवाहिक झगड़े ।
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1.3. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारणों से सम्बंधित सभी मामले एवं सम्बंधित सभी आपत्तियां ।
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1.4. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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(02) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर हरियाणा के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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01. जिला पुलिस प्रमुख
02. जिला शिक्षा अधिकारी
03. जिला चिकित्सा अधिकारी
04. जिला मिलावट रोक अधिकारी
05. जिला जज
06. राज्य सूचना आयुक्त
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
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[ धारा 2 का स्पष्टीकरण : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि - आम हरियानवी नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है , अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए - नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके। बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है।
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इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि - आम भारतीय नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है - हरियाणा के अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे। ]
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(03) यदि आपका नाम हरियाणा की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(II) अधिकारियों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी , मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है ।
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(04) यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
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4.1. हत्या, हत्या के प्रयास, दुर्घटना या लापरवाही जनित मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु।
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4.2. ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो, या गंभीर चोट कारित होने की संभावना हो, दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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4.3. अपहरण-बलात्कार-छेड़छाड़-उत्पीड़न , महिला का पीछा करना , दहेज़ , घरेलू हिंसा, डिवोर्स, वैवाहिक झगड़े।
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4.4. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जिसमें- फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है - से सम्बंधित सभी प्रकार के मामले व आपत्तियां।
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4.5. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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4.6. सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने इस सूची में शामिल किया हो।
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4.7. ऐसे अपराध या विवाद जिन्हें नागरिको के बहुमत ने इस क़ानून की धारा (42) द्वारा एवं प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो
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(05) जिला सहायक निदेशक अभियोजन (A.D.P.) को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 6 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक वोट वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। इन अधिकारीयों के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (31) देखें।
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(06) जूरी कोर्ट की स्थापना एवं इसका अस्थायी निलंबन :
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मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (31) का प्रयोग करके जूरी प्रशासको को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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[ टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी। ]
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(07) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निलंबन :
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(7.1) किसी राज्य में दर्ज सभी मतदाताओं की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर दी गयी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और किसी एक या अधिक जिलों में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 5 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है। मुख्यमंत्री अमुक जिले के किसी मामले को क्रमरहित तरीके से चुने हुए किसी अन्य जिले में भी भेज सकते है।
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(7.2) भारत के सभी मतदाताओं के 51% मतदाताओ की स्वीकृति लेकर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री एक या अधिक जिलों या राज्यों में ऊपर बतायी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और अमुक जिलों में अपने विवेक से जूरी प्रशासको को 5 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री किसी मामले को पड़ोसी राज्य के क्रम रहित तरीके से चुने हुए जिले में भी भेज सकते है।
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(08) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :
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सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(8.1) मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(8.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
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(8.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(8.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(8.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
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(8.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(09) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :
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(09.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(09.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला/ राज्य /भारत की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(10) क्रमरहित तरीके (लॉटरी) से मतदाताओं को चुनने का तरीका :
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(10.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रमरहित विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
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(10.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या जैसे ABCD के मध्य की कोई संख्या चुननी है । तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा। पहले दौर में यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का इस्तेमाल करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है, तब वह 2 पांसों का प्रयोग करेगा।
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(10.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी, और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी। यदि पांसे फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा।
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(10.3.1) मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज है, में से एक पेज का चयन करना है। तब जूरी प्रशासक 4 दौर ( राउंड ) के पासें फेंकेगा। पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है। यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी। अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा। इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है, इसलिए वह दो पांसे फेकेगा। यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा। यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है। तब जूरी प्रशासक (3-1) , (5-2) , (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा।
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(10.3.2) जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान संख्याओ को चुन सकता है। मान लीजिये सूची में N मतदाता है। तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें ‘n और m’ मान लेते है, चुन सकता है। चुने हुए मतदाता हो सकते है - ( n mod N ) , ( n +m ) mod N , ( n+2m ) mod N से (n+ ( k-1 )*m ) mod N , जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
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(11) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 30 दिनों बाद दी जाएगी।
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(12) यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 30 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।
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(13) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :
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(13.1) यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और यह आरोप यदि धारा (4) या उसके आधार पर जारी किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में सूचित कर सकते है, अथवा धारा (34.1) के अंतर्गत अपनी शिकायत प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास या मृत्युदंड का सुझाव दे सकते है।
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(13.2) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य यदि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते है तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते है। वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते है या नहीं भी दे सकते है।
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(13.3) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच होगी । यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा।
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(13.4) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना लगा सकते है। महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) जुर्माने की राशि मानी जाएगी। महाजूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(14) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
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महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :
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(14.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(14.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है। पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी। यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है।
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(14.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा है, और महाजूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते है तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते है।
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(14.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है। न्यूनतम संख्या 15 होगी और हर 1 करोड़ की राशि के लिए 1 अतिरिक्त सदस्य जोड़ा जाएगा। किन्तु जूरी का आकार 1500 से अधिक नहीं होगा।
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(15) जूरी सदस्यों का चयन :
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(15.1) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे नागरिक भी जूरी से बाहर रहेंगे। शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेगा। किसी व्यक्ति को जूरी में शामिल नहीं करने का निर्णय जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महाजूरी मंडल के बहुमत द्वारा बदला जा सकेगा।
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(15.2) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता, पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते है, जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं।
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(15.3) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक एक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया एवं जूरी ट्रायल का संचालन करेगा।
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(16) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना : सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(17) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।
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(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।
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(19) जुर्माने का निर्धारण : प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
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(20) कारावासीय दंड : ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
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(21) मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।
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(22) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
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(24) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
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(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
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(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।
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(27) यदि किसी जिले में तहसील स्तर के न्यायालय है तो जूरी प्रशासक तहसील स्तर पर भी महाजूरी मंडल का गठन कर सकता। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। जिला जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
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[ टिपण्णी : यदि वादी गण को लगता है कि जिला जज ने अनुचित फैसला दिया है तो वे इस क़ानून के वोट वापसी खंड की धारा (31) का इस्तेमाल करके जिले के नागरिको से विनती कर सकते है कि नागरिक जिला जज को नौकरी से निकालने की स्वीकृति दें। या वे इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत राज्य के नागरिको के समक्ष पुनर्विचार (Riview) का एक शपथपत्र दाखिल कर सकता है।
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(28) इसी क़ानून की धारा (04) में वर्णित मामलो या धारा (04) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा। किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले / राज्य / देश के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (34) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिला / राज्य / देश के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
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(29) जिला स्तर के अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(29.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(29.2) जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 8 वर्ष हो चुके हो या वह सहायक लोक अभियोजक ( APP = Assistance Public Prosecutor ) के रूप में 3 वर्ष तक सेवाएं दे चुका हो तो वह जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन ( ADP = Additional Director of Prosecution ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.3) जिला चिकित्सा अधिकारी : 32 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए वांछित डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.4) जिला शिक्षा अधिकारी, राज्य सूचना आयुक्त एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(30) धारा (29) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(31) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(31.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
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(31.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(31.3) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
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(31.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(32) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(32.1) जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने सहमती दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या नही भी कर सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक स्वीकृति प्राप्त कर लेता है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(32.2) जिला जूरी प्रशासक, मिलावट रोक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जिला सहायक निदेशक अभियोजन : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जूरी प्रशासक या सहायक निदेशक अभियोजन की नौकरी दे सकते है ।
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(32.3) राज्य सूचना आयुक्त : यदि किसी राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति के लिए पीएम को चिट्ठी लिख सकते है।
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(32.4) जिला जज : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जिला जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है। जिला जज की नियुक्ति का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(32.5) जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी दे सकते है।
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(32.5.1) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(32.5.2) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस क़ानून के लिए अभिभावक माना जायेगा।
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(32.5.3) मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृतियों से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का, और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(33) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(33.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि जिले के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(33.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने गुप्त स्वीकृतियों के लिए मतदान किया है) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक गुप्त स्वीकृति प्राप्त कर लेता है, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(33.3) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे। किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(33.4) राज्य के सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री किसी जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया एवं उसके स्टाफ पर ज्यूरी ट्रायल को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपनी पसंद का नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री शिक्षा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक एवं चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(34) जनता की आवाज :
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(34.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(34.2) यदि कोई मतदाता धारा (34.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दिया जा सकेगा, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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====राज्य जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया " मुख्यमंत्री कार्यालय " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“ मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित हरियाणा जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें --- #HaryanaJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103 "
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. "मुख्यमंत्री / प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम या सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए । वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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" @Pmoindia , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #HaryanaJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103
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6. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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7. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (34) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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8. आप इस ड्राफ्ट के पर्चे छपवाकर नागरिको में भी बाँट सकते है। पर्चे छपवाने के लिए इसका पीडीऍफ़ एवं इस क़ानून ड्राफ्ट का मोबाईल वर्जन डाउनलोड करने के लिए कमेन्ट बोक्स में कमेन्ट देखें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 27 2019 13:25:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

गुजरात जूरी कोर्ट – गुजरात के थानों एवं अदालतों को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Gujarat Jury Court – Proposed Notification to Enact Jury Courts in Gujarat
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( इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।)
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निचे दिया गया क़ानून गुजरात के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों एवं अन्य सरकारी विभागों का काम काज सुधारने के लिए लिखा गया है। गेजेट में आने के साथ ही यह क़ानून गुजरात में लागू होगा । अन्य राज्यों के नागरिक भी अपने राज्य के मुख्यमंत्री से इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है। इस कानून को लोकसभा या विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है और अपने राज्य में इसे लागू करना चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड लिखें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित गुजरात जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें — #GujaratJuryCourt , #VoteVapsiPassBook , #P20180436103
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====ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है – (i) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (ii) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। इस क़ानून में जहाँ भी राज्य शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है गुजरात राज्य.
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(i) नागरिकों के लिए निर्देश :
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(01) यदि आपका नाम गुजरात की वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :
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1.1. हत्या, हत्या के प्रयास , मारपीट, हिंसा , अप्राकृतिक मानव मृत्यु , दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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1.2. अपहरण , बलात्कार , छेड़छाड़ , कार्यस्थल पर उत्पीड़न , दहेज़ , घरेलू हिंसा , डिवोर्स , वैवाहिक झगड़े ।
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1.3. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारणों से सम्बंधित सभी मामले एवं सम्बंधित सभी आपत्तियां ।
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1.4. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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(02) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर गुजरात के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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01. जिला पुलिस प्रमुख
02. जिला शिक्षा अधिकारी
03. जिला चिकित्सा अधिकारी
04. जिला मिलावट रोक अधिकारी
05. जिला जज
06. राज्य सूचना आयुक्त
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
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[ धारा 2 का स्पष्टीकरण : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि - आम गुजराती नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है , अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए - नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके। बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है।
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इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि - आम भारतीय नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है - गुजरात के अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे। ]
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(03) यदि आपका नाम गुजरात की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(II) अधिकारियों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी , मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है ।
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(04) यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
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4.1. हत्या, हत्या के प्रयास, दुर्घटना या लापरवाही जनित मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु।
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4.2. ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो, या गंभीर चोट कारित होने की संभावना हो, दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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4.3. अपहरण-बलात्कार-छेड़छाड़-उत्पीड़न , महिला का पीछा करना , दहेज़ , घरेलू हिंसा, डिवोर्स, वैवाहिक झगड़े।
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4.4. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जिसमें- फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है - से सम्बंधित सभी प्रकार के मामले व आपत्तियां।
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4.5. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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4.6. सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने इस सूची में शामिल किया हो।
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4.7. ऐसे अपराध या विवाद जिन्हें नागरिको के बहुमत ने इस क़ानून की धारा (42) द्वारा एवं प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो
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(05) जिला सहायक निदेशक अभियोजन (A.D.P.) को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 6 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक वोट वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। इन अधिकारीयों के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (31) देखें।
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(06) जूरी कोर्ट की स्थापना एवं इसका अस्थायी निलंबन :
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मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (31) का प्रयोग करके जूरी प्रशासको को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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[ टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी। ]
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(07) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निलंबन :
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(7.1) किसी राज्य में दर्ज सभी मतदाताओं की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर दी गयी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और किसी एक या अधिक जिलों में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 5 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है। मुख्यमंत्री अमुक जिले के किसी मामले को क्रमरहित तरीके से चुने हुए किसी अन्य जिले में भी भेज सकते है।
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(7.2) भारत के सभी मतदाताओं के 51% मतदाताओ की स्वीकृति लेकर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री एक या अधिक जिलों या राज्यों में ऊपर बतायी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और अमुक जिलों में अपने विवेक से जूरी प्रशासको को 5 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री किसी मामले को पड़ोसी राज्य के क्रम रहित तरीके से चुने हुए जिले में भी भेज सकते है।
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(08) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :
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सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(8.1) मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(8.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
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(8.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(8.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(8.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
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(8.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(09) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :
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(09.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(09.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला/ राज्य /भारत की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(10) क्रमरहित तरीके (लॉटरी) से मतदाताओं को चुनने का तरीका :
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(10.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रमरहित विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
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(10.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या जैसे ABCD के मध्य की कोई संख्या चुननी है । तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा। पहले दौर में यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का इस्तेमाल करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है, तब वह 2 पांसों का प्रयोग करेगा।
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(10.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी, और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी। यदि पांसे फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा।
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(10.3.1) मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज है, में से एक पेज का चयन करना है। तब जूरी प्रशासक 4 दौर ( राउंड ) के पासें फेंकेगा। पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है। यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी। अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा। इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है, इसलिए वह दो पांसे फेकेगा। यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा। यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है। तब जूरी प्रशासक (3-1) , (5-2) , (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा।
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(10.3.2) जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान संख्याओ को चुन सकता है। मान लीजिये सूची में N मतदाता है। तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें ‘n और m’ मान लेते है, चुन सकता है। चुने हुए मतदाता हो सकते है - ( n mod N ) , ( n +m ) mod N , ( n+2m ) mod N से (n+ ( k-1 )*m ) mod N , जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
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(11) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 30 दिनों बाद दी जाएगी।
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(12) यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 30 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।
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(13) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :
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(13.1) यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और यह आरोप यदि धारा (4) या उसके आधार पर जारी किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में सूचित कर सकते है, अथवा धारा (34.1) के अंतर्गत अपनी शिकायत प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास या मृत्युदंड का सुझाव दे सकते है।
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(13.2) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य यदि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते है तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते है। वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते है या नहीं भी दे सकते है।
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(13.3) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच होगी । यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा।
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(13.4) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना लगा सकते है। महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) जुर्माने की राशि मानी जाएगी। महाजूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(14) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
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महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :
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(14.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(14.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है। पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी। यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है।
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(14.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा है, और महाजूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते है तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते है।
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(14.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है। न्यूनतम संख्या 15 होगी और हर 1 करोड़ की राशि के लिए 1 अतिरिक्त सदस्य जोड़ा जाएगा। किन्तु जूरी का आकार 1500 से अधिक नहीं होगा।
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(15) जूरी सदस्यों का चयन :
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(15.1) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे नागरिक भी जूरी से बाहर रहेंगे। शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेगा। किसी व्यक्ति को जूरी में शामिल नहीं करने का निर्णय जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महाजूरी मंडल के बहुमत द्वारा बदला जा सकेगा।
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(15.2) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता, पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते है, जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं।
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(15.3) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक एक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया एवं जूरी ट्रायल का संचालन करेगा।
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(16) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना : सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(17) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।
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(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।
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(19) जुर्माने का निर्धारण : प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
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(20) कारावासीय दंड : ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
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(21) मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।
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(22) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
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(24) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
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(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
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(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।
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(27) यदि किसी जिले में तहसील स्तर के न्यायालय है तो जूरी प्रशासक तहसील स्तर पर भी महाजूरी मंडल का गठन कर सकता। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। जिला जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
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[ टिपण्णी : यदि वादी गण को लगता है कि जिला जज ने अनुचित फैसला दिया है तो वे इस क़ानून के वोट वापसी खंड की धारा (31) का इस्तेमाल करके जिले के नागरिको से विनती कर सकते है कि नागरिक जिला जज को नौकरी से निकालने की स्वीकृति दें। या वे इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत राज्य के नागरिको के समक्ष पुनर्विचार (Riview) का एक शपथपत्र दाखिल कर सकता है।
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(28) इसी क़ानून की धारा (04) में वर्णित मामलो या धारा (04) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा। किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले / राज्य / देश के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (34) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिला / राज्य / देश के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
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(29) जिला स्तर के अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(29.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(29.2) जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 8 वर्ष हो चुके हो या वह सहायक लोक अभियोजक ( APP = Assistance Public Prosecutor ) के रूप में 3 वर्ष तक सेवाएं दे चुका हो तो वह जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन ( ADP = Additional Director of Prosecution ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.3) जिला चिकित्सा अधिकारी : 32 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए वांछित डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.4) जिला शिक्षा अधिकारी, राज्य सूचना आयुक्त एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(30) धारा (29) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(31) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(31.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
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(31.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(31.3) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
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(31.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(32) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(32.1) जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने सहमती दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या नही भी कर सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक स्वीकृति प्राप्त कर लेता है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(32.2) जिला जूरी प्रशासक, मिलावट रोक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जिला सहायक निदेशक अभियोजन : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जूरी प्रशासक या सहायक निदेशक अभियोजन की नौकरी दे सकते है ।
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(32.3) राज्य सूचना आयुक्त : यदि किसी राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति के लिए पीएम को चिट्ठी लिख सकते है।
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(32.4) जिला जज : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जिला जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है। जिला जज की नियुक्ति का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(32.5) जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी दे सकते है।
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(32.5.1) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(32.5.2) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस क़ानून के लिए अभिभावक माना जायेगा।
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(32.5.3) मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृतियों से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का, और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(33) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(33.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि जिले के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(33.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने गुप्त स्वीकृतियों के लिए मतदान किया है) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक गुप्त स्वीकृति प्राप्त कर लेता है, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(33.3) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे। किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(33.4) राज्य के सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री किसी जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया एवं उसके स्टाफ पर ज्यूरी ट्रायल को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपनी पसंद का नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री शिक्षा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक एवं चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(34) जनता की आवाज :
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(34.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(34.2) यदि कोई मतदाता धारा (34.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दिया जा सकेगा, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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====राज्य जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया " मुख्यमंत्री कार्यालय " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“ मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित गुजरात जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें --- #GujaratJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103 "
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. "मुख्यमंत्री / प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम या सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए । वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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" @Pmoindia , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #GujaratJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103
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6. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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7. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (34) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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8. आप इस ड्राफ्ट के पर्चे छपवाकर नागरिको में भी बाँट सकते है। पर्चे छपवाने के लिए इसका पीडीऍफ़ एवं इस क़ानून ड्राफ्ट का मोबाईल वर्जन डाउनलोड करने के लिए कमेन्ट बोक्स में कमेन्ट देखें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Sep 27 2019 20:35:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अहमदाबाद जूरी कोर्ट – अहमदाबाद के थानों-अदालतों को सुधारने के लिए जिला स्तरीय जूरी अदालतें
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Ahmedabad Jury Court – Proposed Notification to Enact Lower Jury Courts in Ahmedabad
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यह क़ानून अहमदाबाद जिले के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, अस्पतालों आदि का काम-काज सुधारने के लिए लिखा गया है। यह क़ानून गुजरात के अन्य जिलो पर लागू नहीं होगा। किन्तु मुख्यमंत्री चाहे तो इसे राज्य के अन्य जिलो में या पूरे प्रदेश में भी लागू कर सकते है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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अहमदाबाद जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप अहमदाबाद में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, कृपया अहमदाबाद जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छापें — #AhmedabadJuryCourt #VoteVapsiPassBook #P20180436103
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है.
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===== जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : इस क़ानून में जहाँ भी जिला शब्द का इस्तेमाल किया गया है, उसका आशय है गुजरात का अहमदाबाद जिला ।
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(01) यदि आपका नाम अहमदाबाद जिले की वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :

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1.1. हत्या, हत्या के प्रयास , मारपीट, हिंसा , अप्राकृतिक मानव मृत्यु , दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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1.2. अपहरण , बलात्कार , छेड़छाड़ , कार्यस्थल पर उत्पीड़न , दहेज़ , घरेलू हिंसा , डिवोर्स , वैवाहिक झगड़े ।
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1.3. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारणों से सम्बंधित सभी मामले एवं सम्बंधित सभी आपत्तियां ।
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1.4. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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(02) यह क़ानून गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर अहमदाबाद जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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01. जिला पुलिस प्रमुख
02. जिला शिक्षा अधिकारी
03. जिला चिकित्सा अधिकारी
04. जिला मिलावट रोक अधिकारी
05. जिला जज
06. जिला जूरी प्रशासक
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
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[ टिपण्णी : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है , अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए – अहमदाबाद के नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके।
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बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है। इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है – अहमदाबाद के अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे। ]
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यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दे सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इस शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(II) अधिकारियों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी , मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है ।
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(04) जिले के न्याय क्षेत्र में घटित होने वाले अपराधो के सम्बन्ध में यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
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4.1. हत्या, हत्या के प्रयास, दुर्घटना या लापरवाही जनित मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु।
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4.2. ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो, या गंभीर चोट कारित होने की संभावना हो, दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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4.3. अपहरण-बलात्कार-छेड़छाड़-उत्पीड़न , महिला का पीछा करना , दहेज़ , घरेलू हिंसा, डिवोर्स, वैवाहिक झगड़े।
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4.4. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जिसमें- फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है - से सम्बंधित सभी प्रकार के मामले व आपत्तियां।
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4.5. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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4.6. सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने इस सूची में शामिल किया हो।
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4.7. ऐसे अपराध या विवाद जिन्हें नागरिको के बहुमत ने इस क़ानून की धारा (34) द्वारा एवं प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो
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(05) जिला सहायक निदेशक अभियोजन (A.D.P.) को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 6 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक वोट वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। इन अधिकारीयों के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (31) देखें।
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(06) मुख्यमंत्री जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (31) का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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[ टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी। ]
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(07) जिले में दर्ज सभी मतदाताओं की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर दी गयी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और जिले में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 4 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है।
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(08) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :
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सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(8.1) जिले की मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(8.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
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(8.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(8.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(8.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
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(8.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(09) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :
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(09.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(09.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(10) क्रमरहित तरीके ( लॉटरी ) से मतदाताओं को चुनने का तरीका :
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(10.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रमरहित विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
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(10.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या जैसे ABCD के मध्य की कोई संख्या चुननी है । तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा। पहले दौर में यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का इस्तेमाल करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है, तब वह 2 पांसों का प्रयोग करेगा।
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(10.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी, और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी। यदि पांसे फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा।
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(10.3.1) मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज है, में से एक पेज का चयन करना है। तब जूरी प्रशासक 4 दौर ( राउंड ) के पासें फेंकेगा। पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है। यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी। अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा। इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है, इसलिए वह दो पांसे फेकेगा। यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा। यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है। तब जूरी प्रशासक (3-1) , (5-2) , (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा।
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(10.3.2) जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान संख्याओ को चुन सकता है। मान लीजिये सूची में N मतदाता है। तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें ‘n और m’ मान लेते है, चुन सकता है। चुने हुए मतदाता हो सकते है - ( n mod N ) , ( n +m ) mod N , ( n+2m ) mod N से (n+ ( k-1 )*m ) mod N , जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
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(11) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 30 दिनों बाद दी जाएगी।
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(12) यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 30 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।
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(13) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :
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(13.1) यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और यह आरोप यदि धारा (4) या उसके आधार पर जारी किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में सूचित कर सकते है, अथवा धारा (34.1) के अंतर्गत अपनी शिकायत मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास या मृत्युदंड का सुझाव दे सकते है।
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(13.2) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य यदि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते है तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते है। वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते है या नहीं भी दे सकते है।
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(13.3) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच होगी । यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा।
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(13.4) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना लगा सकते है। महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) जुर्माने की राशि मानी जाएगी। महाजूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(14) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
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महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :
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(14.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(14.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है। पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी। यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है।
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(14.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा है, और महाजूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते है तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते है।
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(14.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है। न्यूनतम संख्या 15 होगी और हर 1 करोड़ की राशि के लिए 1 अतिरिक्त सदस्य जोड़ा जाएगा। किन्तु जूरी का आकार 1500 से अधिक नहीं होगा।
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(15) जूरी सदस्यों का चयन :
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(15.1) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे नागरिक भी जूरी से बाहर रहेंगे। शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेगा। किसी व्यक्ति को जूरी में शामिल नहीं करने का निर्णय जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महाजूरी मंडल के बहुमत द्वारा बदला जा सकेगा।
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(15.2) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता, पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते है, जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं।
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(15.3) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक एक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया एवं जूरी ट्रायल का संचालन करेगा।
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(16) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना : सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(17) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।
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(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।
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(19) जुर्माने का निर्धारण : प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
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(20) कारावासीय दंड : ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
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(21) मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।
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(22) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
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(24) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
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(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
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(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।
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(27) जिला जूरी प्रशासक जिले की सभी तहसीलों में भी तहसील स्तर पर तहसील जूरी प्रशासको की नियुक्ति करेगा। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। तहसील जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील महाजूरी मंडलों का गठन करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
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[ टिपण्णी : यदि वादी गण को लगता है कि जिला जज ने अनुचित फैसला दिया है तो वे इस क़ानून के वोट वापसी खंड की धारा (31) का इस्तेमाल करके जिले के नागरिको से विनती कर सकते है कि नागरिक जिला जज को नौकरी से निकालने की स्वीकृति दें। या वे इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत जिले के नागरिको के समक्ष पुनर्विचार (Riview) का एक शपथपत्र भी दाखिल कर सकते है।
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(28) इसी क़ानून की धारा (04) में वर्णित मामलो या धारा (04) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना जिले के किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा। किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (34) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिले के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
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(29) जिला स्तर के अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(29.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(29.2) जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 8 वर्ष हो चुके हो या वह सहायक लोक अभियोजक ( APP = Assistance Public Prosecutor ) के रूप में 3 वर्ष तक सेवाएं दे चुका हो तो वह जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन ( ADP = Additional Director of Prosecution ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.3) जिला चिकित्सा अधिकारी : 32 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए वांछित डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.4) जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(30) धारा (29) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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(31) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(31.1) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
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(31.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(31.3) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
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(31.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(32) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(32.1) जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने सहमती दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या नही भी कर सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।
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(32.2) जिला जूरी प्रशासक, मिलावट रोक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जिला सहायक निदेशक अभियोजन : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जूरी प्रशासक या सहायक निदेशक अभियोजन की नौकरी दे सकते है ।
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(32.3) जिला जज : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जिला जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है। जिला जज की नियुक्ति का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(32.4) जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन शिक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी दे सकते है।
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(32.4.1) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(32.4.2) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा जिले में - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, जिले का प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस क़ानून के लिए अभिभावक माना जायेगा।
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(32.4.3) यदि मुख्यमंत्री इस क़ानून को अन्य जिलो में भी लागू करते है तो मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृतियों से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह अधिक से अधिक 5 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(33) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(33.1) मुख्यमंत्री एवं जिले के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(33.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने गुप्त स्वीकृतियों के लिए मतदान किया है) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
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(33.3) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे। किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(33.4) राज्य के सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपनी पसंद का नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री शिक्षा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक एवं चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(34) जनता की आवाज :
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(34.1) यदि जिले का कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(34.2) यदि जिले का कोई मतदाता धारा (34.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दिया जा सकेगा, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि जिले के 51% नागरिक शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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====भीलवाड़ा जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया " मुख्यमंत्री कार्यालय " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “ मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित अहमदाबाद जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें --- #AhmedabadJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103 "
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. "मुख्यमंत्री / प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम या सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए । वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें : " @Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #AhmedabadJuryCourt , #VoteVapsiPassbook , #P20180436103
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6. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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7. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (34) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Sep 28 2019 09:10:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पलवल जूरी पंचायत – पलवल की पंचायतो एवं स्थानीय प्रशासन को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Palwal Jury Panchayat - Proposal to Improve Panchayat & Local Administration
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कानून का सार : यह कानून पलवल जिले की पंचायतो एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। इस कानून में ऐसी कई प्रक्रियाएं है जो स्थानीय प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है और ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे अधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी। इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री भी लोकसभा से पारित कर सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित पलवल जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापें - #PalwalJuryPanchayat , #VoteVapsiPassBook , #P20180436110
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर पलवल जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम पलवल जिले की वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के अलावा धारा (01) में दिए गए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी मंडल में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको इन 11 अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप अमुक आरोपी पर जुर्माना लगा सकते है :
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1. पटवारी
2. गिरदावर
3. ग्राम विकास अधिकारी ( पंचायत सचिव )
4. तहसीलदार
5. जिला परिषद सचिव
6. नगर परिषद सचिव
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(03) यदि आपका नाम पलवल जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, या उपरोक्त में से किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते है तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा ( 20.1 ) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे जिले / मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिपण्णी : इस क़ानून में जिले शब्द का आशय है हरियाणा का पलवल जिला। इस क़ानून में जहाँ भी पार्षद शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है - नगर पालिका , नगर परिषद एवं नगर निगम का पार्षद। इस क़ानून में सभापति शब्द से आशय है - नगर पालिका, नगर परिषद एवं नगर निगम का सभापति। इस क़ानून में प्रधान शब्द से आशय है - तहसील पंचायत समिती का प्रधान। इस क़ानून में जिला प्रमुख से आशय है - जिला पंचायत का प्रमुख। ]
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(04) पटवारी कार्यालयों को सुचारू एवं व्यवस्थित करने के लिए यह क़ानून पारित होने के बाद मुख्यमंत्री निम्नलिखित कार्यो को दी गयी समय सीमा में पूरा किया जाना सुनिश्चित करेंगे :
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(4.1) जिले के खाली पड़े पटवारी के सभी पदों पर पटवारियों की नियुक्ति की जायेगी। यदि नयी भर्ती की आवश्यकता है तो भर्ती की प्रक्रिया अगले 180 दिनों में पूर्ण कर ली जानी चाहिए।
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(4.2) यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर प्रत्येक पटवार खाने का अनिवार्य रूप से कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कम्प्यूटर में दक्ष लिपिकों की नियुक्ति करके पटवारी के स्टाफ का दायरा बढाया जायेगा। पटवारी को शामिल करते हुए पटवारी कार्यालय का न्यूनतम स्टाफ 4 व्यक्तियों का होगा। यह सभी नियुक्तियां यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर कर ली जानी चाहिए।
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(4.3) जब पटवारी फील्ड में है तब भी पटवारी कार्यालय अनिवार्य रूप से 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुला रहेगा।
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(4.4) जिन पटवार खानो में पर्याप्त कमरे इत्यादि नहीं है उनके लिए आवश्यक भवन निर्माण किया जाएगा एवं यह निर्माण इस क़ानून के पारित होने के 3 वर्षो के अंदर कर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस क़ानून के गेजेट में आने के 6 माह के भीतर सभी पटवार खानों को उन्नत किये जाने का प्रोजेक्ट विधानसभा में रखेंगे जिसमें यह ब्यौरा होगा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए कितने पटवारी कार्यालयो को किस क्रम से उन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट के साथ ही अनिवार्य रूप से इसके लिए बजट भी पास करेंगे।
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(4.5) पटवारी एक मोबाईल एप / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया एकाउंट / व्हाट्स एप नंबर सार्वजनिक करेगा, ताकि उसके क्षेत्र के मतदाता अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करवा सके।
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(4.6) यदि कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में या धारा 01 एवं 02 में लिखे गए अधिकारियों / जनप्रतिनिधियों को किसी कार्य के लिए कोई एप्लीकेशन देता है और यदि एप्लीकेशन पर सार्वजनिक करें दर्ज करता है, तो यह प्रार्थना पत्र सार्वजनिक किया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहा है तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक की गयी जो नागरिक शिकायतें पेंडिंग है और जो कार्य पूर्ण हो चुके है, उनकी अद्यतन जानकारी व्यवस्थित रूप से कार्यालय के सूचना पट्ट पर बिना मांगे उपलब्ध रहेगी एवं इसे प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी। यदि यह जानकारी स्वत: सार्वजनिक नहीं की जाती है तो यह माना जायेगा कि, इन्हें छिपाया गया है।
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(4.7) धारा 02 में दिए गए अधिकारी सभी नागरिक शिकायतों एवं नागरिक प्रार्थना पत्रों का निपटान सिलसिलेवार करेंगे। यदि वे क्रम का उलंघन करते है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण लिखित में देना होगा। उदाहरण के लिए , मान लीजिये कि पटवारी या तहसीलदार के पास सोमवार को एक व्यक्ति A नकल निकलवाने का प्रार्थना पत्र देता है, तथा B नक़ल निकलवाने का प्रार्थना पत्र मंगलवार को देता है। चूंकि इन दोनों अर्जियों की प्रकृति एक जैसी है अत: अधिकारी पहले सोमवार को लगाई गयी अर्जी का निस्तारण करेगा। यदि अधिकारी A से पहले B की नकल निकाल देता है तो उसे अनिवार्य रूप से यह दर्ज करना होगा कि क्यों B की अर्जी पर पहले काम किया गया।
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(05) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा, जो कि उसके क्षेत्र की मतदाता संख्या पर निर्भर करेगा। सरपंच अधिकतम 5 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 3 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 2 पंचायत से जीत जाता है तो वह 80,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(06) इस क़ानून के पारित होने के बाद नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 मासिक से 25,000 होगा। पार्षद किन्ही 3 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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(07) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 एवं अधिकतम 80,000 होगा।
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[ सरपंच का वेतन बढाने का स्पष्टीकरण 1* : इस क़ानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक, परीक्षण चुनाव एवं सह चुनाव के दायरे में लाया गया है। इस वजह से सरपंच की भ्रष्टाचार से होने वाली संभावित आय में भारी गिरावट आएगी। यदि वह गलत तरीके से काम कर रहा है तो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेगा, और उसके क्षेत्र के मतदाता वोट वापसी का प्रयोग करके 5 वर्ष से पहले ही उसे निकाल कर किसी दुसरे को सरपंच बना सकेंगे। इसके अलावा यदि उसके खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी और जूरी उस पर जुर्माना लगा सकती है। तो जब हम सरपंच पर ऐसे क़ानून डाल रहे है कि वह अवैध रूप से पैसा नहीं बना सके, तो हमें वेतन बढाने की जरूरत है। वर्ना यह सरपंच प्रत्याशीयों के साथ अन्याय होगा।
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यदि वेतन नहीं बढ़ाया गया तो हमें ऐसे उम्मीदवार नहीं मिलेंगे जो ईमानदारी से कार्य करना चाहते है। वे सोचेंगे कि यदि मैं जीत भी जाता हूँ तो मुझ पर जिम्मेदारी आ जायेगी और जिम्मेदारी निभाने के एवज में मुझे कोई आर्थिक व्यय भी नहीं मिलेगा। और ठीक यही स्थिति पार्षद एवं सभापति के साथ होगी। इसीलिए इनके वेतन में इजाफा किया गया है। राज्य के अन्य जिलो के सरपंचो एवं पार्षदों का वेतन वही रहेगा जो उन्हें आज मिल रहा है।
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5 जगह का सरपंच बनने की छूट देने का स्पष्टीकरण 2* : यदि हमें सरपंच के पद के लिए बेहतर उम्मीदवार चाहिए तो इसके पदोन्नति के अवसर खोलने होंगे। सरपंच एवं विधायक के बीच काफी फासला होता है। यदि सरपंच के पास आस पास के 5 गाँवों का सरपंच बनने का अवसर होगा तो वह ज्यादा बेहतर ढंग से काम करना शुरू करेगा ताकि अन्य गाँवों में भी उसकी ख्याति जाए और वह वहां से भी चुना जा सके। और तब उसे वेतन भी 5 पंचायतो के बराबर मिलेगा। इससे सरपंच इस तरह का सिस्टम खड़ा करने की दिशा में काम करना शुरू करेंगे कि नागरिको की शिकायतों का तुरंत निपटान हो और उन्हें धक्के खाने की जरूरत नहीं रहे। और ऐसे भी यदि किसी पंचायत क्षेत्र के मतदाता यह पाते है कि अमुक सरपंच ने उसकी पंचायत में काफी बेहतर काम किया है, तो वे अमुक सरपंच को अपनी पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दे सकते है। ]
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(08) पार्षद अपने वार्ड में प्रत्येक दुसरे एवं चौथे रविवार ( 2nd & 4th Sunday ) को सांय 4 बजे एक नागरिक सभा का आयोजन करेगा। सभापति इसके लिए वार्ड में स्थित किसी सार्वजानिक कम्युनिटी सेंटर, स्कूल आदि में स्थान की व्यवस्था कराएगा। यदि वार्ड में नगर परिषद के क्षेत्राधिकार का भवन मौजूद है तो सभा इसी स्थल पर आयोजित होगी, और स्थान व समय किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाएगा।
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(8.1) किसी व्यक्ति को यदि नगर परिषद के क्षेत्राधिकार एवं अपने वार्ड से सम्बंधित कोई शिकायत या सुझाव पार्षद के सम्मुख रखना है तो वह सभा में उपस्थित होकर अपनी शिकायत या सुझाव आदि पार्षद को लिखकर दे सकता है। शिकायतकर्ता अनिवार्य रूप से अपने मतदाता पहचान पत्र की फोटो कॉपी अपनी एप्लीकेशन के साथ सलंग्न करेगा।
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(8.2) इस सभा में जितनी भी शिकायतें / सुझाव आयेंगे उन्हें पार्षद एक सीरियल नंबर देगा और उन्हें स्वीकार करके नगर परिषद द्वारा जारी (Allote) किये गए अपने रजिस्टर में क्रम से दर्ज कर लेगा। पार्षद एप्लीकेशन लेने के बाद अपनी छाप लगाकर हस्ताक्षर युक्त एक पावती ( Receiving ) भी देगा। पार्षद अगली सभा से पहले पूर्व सभा के ब्यौरे सभापति कार्यालय में अग्रेषित कर देगा।
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(8.3) नागरिक यह एप्लीकेशन सभापति कार्यालय में भी दे सकता है। सभापति द्वारा नियुक्त क्लर्क 5 रू प्रति पृष्ठ की दर से इसे स्कैन करके सभापति की वेबसाईट पर नागरिक शिकायतों के सेक्शन में रख देगा। सभापति इस तरह का सिस्टम बना सकते है कि नगर के मतदाता अपने वार्ड या नगर के लिए दी गयी किसी एप्लीकेशन पर अपनी सहमति दर्ज कर सके।
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(9) अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) सरपंच एवं पार्षद : यदि कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार अमुक पद के लिए तय जमा राशि लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा। तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर अपलोड करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। पार्षद अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करेगा।
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(9.2) प्रधान, सभापति एवं जिला प्रमुख : यदि कोई मतदाता प्रधान, सभापति या जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किसी भी दिन अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। प्रधान एवं सभापति के लिए जमानत राशि विधायक के बराबर एवं जिला प्रमुख के लिए यह राशि सांसद की जमानत राशि के बराबर होगी। कलेक्टर शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाईट पर रखेगा और प्रत्याशियों को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक : जिले का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद का आवेदन करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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(10) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(10.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(10.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा
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(10.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(11) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परिक्षण -चुनाव की शर्तें :
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(11.1) यदि कोई प्रत्याशी निचे लिखी गयी 3 शर्तें पूरी कर लेता है तो सरपंच इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री से विनती कर सकता है कि वे अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव ( Test-Election ) आयोजित करें । यदि सरपंच 7 दिनों के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है, या नहीं भी ले सकते है।
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(11.1.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(11.1.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(11.1.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सरपंच के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% से अधिक भी है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण-चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 2000+500=2500 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 2400 स्वीकृतियां मिल जाती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा और मौजूदा सरपंच को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । किन्तु यदि किसी प्रत्याशी को 2500 से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो सरपंच इस्तीफा दे सकता है या मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है।
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(11.2) नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी शर्तें यही होगी जो धारा (11.1) में सरपंच के लिए बतायी गयी है।
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(12) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण-चुनाव की प्रक्रिया :
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यदि धारा (11.1) में बतायी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है, तो परिक्षण-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। परिक्षण चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(12.1) मतपत्र पर कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को इस चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 5 प्रत्याशियों को जमानत राशि देकर नामांकन पत्र दाखिल करना होगा।
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(12.2) यदि परिक्षण-चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी शर्तें पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(12.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक वोट प्राप्त हो जाते है।
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(12.2.2) यदि ये वोट सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2,500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 2,500+500=3,000 वोट लाने होंगे। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2,500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि सह-चुनाव में कोई प्रत्याशी 2,500 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को 1,500 वोट ही मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा।
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(12.3) नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परीक्षण चुनाव : पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी ठीक उसी समीकरण ( फार्मूले ) का पालन किया जाएगा जो धारा 12.2 में सरपंच के लिए बताया गया है।
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(13) प्रधान, जिला प्रमुख एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(13.1) तहसील प्रधान के लिए : यदि किसी पंचायत समिती की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता प्रधान के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा प्रधान की स्वीकृतियों से 5% अधिक भी है तो मौजूदा प्रधान इस्तीफा दे सकता है । यदि प्रधान 7 दिवस में इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृतियां पाने वाले प्रत्याशी की नियुक्ति प्रधान के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.2) जिला प्रमुख के लिए : यदि किसी जिले की समस्त पंचायत समितियों की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला पंचायत प्रमुख के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जिला प्रमुख की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी की नियुक्ति जिला प्रमुख के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.3) जिला जूरी प्रशासक : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक व्यक्ति को जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(14) सभापति की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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सभापति को बदलने के लिए किसी प्रत्याशी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होगी -
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(14.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(14.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति को चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(14.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सभापति के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 2% से अधिक भी है।
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यदि सभापति का कोई प्रत्याशी उपरोक्त तीनो शर्तें पूरी कर लेता है तो सभापति इस्तीफा दे सकता है। यदि सभापति 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकालकर परिक्षण चुनाव करवाने का आदेश जारी कर सकते है। परिक्षण चुनाव की प्रक्रिया एवं उसमे जीत हार का समीकरण वही रहेगा जैसा धारा (12.2) में बताया गया है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी किसी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 2,00,000 मतदाता है, और चुनाव में मौजूदा सभापति को 70,000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण चुनाव सिर्फ तब संचालित किया जाएगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 70,000+4,000=74,000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 2 लाख है अत: इसका 2% = 4,000 को 70,000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 72,000 स्वीकृतियां मिलती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा।
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(15) सरपंच एवं पार्षद के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(15.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है।
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(15.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (12.2) में सरपंच के परिक्षण चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को सह-चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। सह चुनाव में भी पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। जीत हार का समीकरण ( फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा परिक्षण चुनाव में बताया गया है।
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16. पार्षद के लिए सह-चुनाव की प्रक्रिया : जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त पार्षद के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा वार्ड पार्षद की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है। इस प्रक्रिया का संचालन वैसे ही किया जाएगा जैसा सरपंच के लिए बताया गया है।
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(17) शिकायतों की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों का गठन
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 20.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(17.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 25 से 50 आयु वर्ग के 60 लोगो को चुनेगा और इसमें से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक प्रत्येक तहसील के लिए एक तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति भी करेगा। तहसील जूरी प्रशासक अपनी तहसील में 20 सदस्यीय तहसील महाजूरी मंडल का गठन करेंगे। तहसील महाजूरी मंडल के गठन के लिए तहसील की मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाएगा । जूरी मंडल के गठन एवं बैठको की शेष प्रक्रिया जिला महाजूरी मंडल के समान ही रहेगी।
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(17.3) यदि धारा धारा 01 एवं धारा 02 में दिए गए किसी भी अधिकारी / जनप्रतिनिधि या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई नागरिक शिकायत है तो वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित तहसील / जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है।
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(17.4) तहसील स्तर के अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों की शिकायतें तहसील के महाजूरी मंडल में की जायेगी, तथा इसकी अपील जिला महाजूरी मंडल में होगी। तहसील स्तर की जूरी का गठन तहसील की मतदाता सूचियों से एवं अपील की जूरी का गठन जिले की मतदाता सूचियों से किया जाएगा।
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(18) जूरी मंडल द्वारा शिकायतों की सुनवाई :
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(18.1) यदि किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ महाजूरी मंडल द्वारा एक से अधिक शिकायतें स्वीकृत कर ली जाती है, महाजूरी मंडल सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ जितनी शिकायतें आई है उनकी सुनवाई 15 दिन में एक बार ही होगी। उदाहरण के लिए यदि पटवारी या तहसीलदार के खिलाफ 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जितनी शिकायतें है उनकी सुनवाई 16 तारीख को और 16 तारीख के बाद में आई शिकायतों की सुनवाई महीने के आखिरी दिन होगी।
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(18.2) जब वादीगण शिकायत लिखेंगे तो अनिवार्य रूप से इसमें यह भी दर्ज करेंगे कि उन्हें इसका क्या समाधान चाहिए। साथ ही वे अधिकारी / जनप्रतिनिधि पर कोई आर्थिक दंड लगाने की मांग भी इसमें लिख सकते है। जुर्माने या क्षतिपूर्ति की मांग करने पर वे इसकी सीमा भी अपनी शिकायत में लिखेंगे।
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(18.3) मामला सुनने के बाद महाजूरी मंडल बहुमत से अपना फैसला देगा। यदि जुर्माना लगाया गया है तो यह जुर्माना अधिकारी / जनप्रतिनिधि के वेतन से काट लिया जायेगा। यदि जुर्माने की राशि अमुक अधिकारी के वेतन के 50% से अधिक है तो कम से कम दो तिहाई जूरी सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी । अधिकारी को नौकरी से निकालने एवं ट्रांसफर करने का फैसले को कम से कम 75% जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
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(18.4) यदि सुनवाई के दौरान महाजूरी मंडल के सदस्य यह पाते है कि वादीगण ने झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किया है, या शिकायत एकदम मनगड़ंत एवं फर्जी थी तो समय खराब करने के एवज में जूरी सदस्य शिकायतकर्ताओ पर भी जुर्माना लगा सकते है।
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(18.5) महाजूरी मंडल के फैसले के खिलाफ यदि कोई भी पक्षकार अपील दायर करता है तो जिला महाजूरी मंडल जिले की मतदाता सूचियों में से एक नयी जूरी का गठन करेगा। इस जूरी का आकार उस जूरी मंडल से बड़ा होगा जिस जूरी मंडल ने इस मामले की सुनवाई करके फैसला दिया था वह जूरी प्रशासक के सामने अपील दायर कर सकता है। जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(18.6) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। अपील की जूरी में दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(19) जूरी मंडलों के फैसलों का पालन : जूरी मंडल के फैसले परामर्श कारी होंगे । मुख्यमंत्री या सम्बंधित विभाग का मंत्री जूरी मंडल द्वारा दिए गए किसी फैसले में संशोधन कर सकते है, उसमे बदलाव कर सकते है, या उसे पूरी तरह से पलट सकते है। किन्तु मंत्री स्तर से कम का कोई भी अधिकारी जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले में बदलाव नहीं कर सकेगा। जूरी द्वारा यदि किसी अधिकारी को दोषी ठहराया जाता है तो इसे अधिकारी का मूल्यांकन करने वाली सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा, तथा पदोन्नति, स्थानांतरण आदि के मूल्यांकन में इस तथ्य को आधार माना जाएगा।
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(20) जनता की आवाज :
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(20.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(20.2) यदि कोई मतदाता धारा 20.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 20.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित पलवल जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापे - #PalwalJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - # PalwalJuryPanchayat , #VoteVapsiPassbook , #P20180436110
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले समान सोच वाले कर्तव्यनिष्ठ नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (20) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Sep 28 2019 19:55:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

महाराष्ट्र एवं हरियाणा के कार्यकर्ता चुनाव लड़ने का प्रयास करें। जब तक जूरी कोर्ट , वोट वापसी कानूनों को लेकर ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरेंगे तब तक बात आगे नहीं बढ़ेगी। फेसबुक पर की जारी रही गतिविधियों के सिर्फ तब मायने है जब हमारे पास इन कानूनों पर चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ता हो। वर्ना यह ऐसी बिजली फिटिंग है जिसमें विद्युत की सप्लाई नहीं है !! मतलब वायरिंग, लट्टू वगेरह पर काफी खर्चा किया है, लेकिन बिजली का कनेक्शन नहीं है !!!
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नामांकन भरने की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर है। जमानत राशि 10 हजार है, और जो कार्यकर्ता यह राशि वहन कर सकते है उन्हें चुनाव अवश्य लड़ना चाहिए।
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कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ताओ को आर्थिक सहयोग करें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Sep 30 2019 13:08:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

1. विशाल जी ढोकले पूना जिले के आंबेगाव विधानसभा से, और
2. धीरज जी बताडे अहमदनगर के शेगाँव विधानसभा से
3. अतुलभाई कठारिया अहमदाबाद के अमरावाडी विधानसभा से

वोट वापसी पासबुक, ज्यूरी कोर्ट, ज्यूरी पंचायत, धनवापसी कानूनों का प्रचार करने के लिए चुनाव लड़ रहे है। कार्यकर्ताओ से अनुरोध है कि उन्हें योगदान दें।
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चुनावी खाते और Paytm की डिटेल :
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(1)
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नाम:- Vishal Popat Dhokale
बैंक का नाम:- State Bank of India
ब्रांच:- Vadgaon-Sheri
IFSC code - - SBIN0016818
बैंक खाता नम्बर:- 38801648155

Paytm नं.- 8378990454
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(2)
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नाम:- Dhiraj Motilal Batade
बैंक का नाम:- central bank
ब्रांच:- Pathardi
IFSC code - - CBIN 0281934
बैंक खाता नम्बर:- 3776573046
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(3)
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Name: ATULKUMAR NANUBHAI KATHIRIYA
Saraspur Nagrik Co. Op. Bank Ltd.
A/c no.: 012101001001757
IFSC : GSCB0USNCBL
Branch: Nikol, Ahmedabad.
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