Posts for 2020-04

Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 02 2020 08:22:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यह तब्लीगी जमात की हरकत का समर्थन नहीं है। लेकिन यह तथ्य है कि पेड मीडिया वास्तव में ही कोरोना से ज्यादा शक्तिशाली वायरस है।
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सरकार को हफ्ते भर पहले से तब्लीगी जमात की गेदरिंग की जानकारी थी। जमात वालो को तो वायरस फैलाना ही है, पर सरकार ने उन्हें ऐसा करने से रोका नहीं। उन्होंने टाइम पास किया।
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सरकार और जमात दोनों बराबर के भागीदार है। एक फैलाता है, और दूसरा रोकता नहीं।
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मतलब, फसल बोई जमात ने लेकिन काट ली पेड मीडिया पार्टियों ने !!
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Gram Raj:

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 02 2020 16:50:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मुस्लिम मोहल्लों में पुलिस एवं डॉक्टर्स पर हमला ।
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वजह : ऐसे मुस्लिमों की संख्या बढ़ती जा रही है जो सरकारी मशीनरी को ही अब ख़तरे के रूप में देख रहे है। तो आगे भी इस तरह की घटनाएँ बढ़ती जाएगी। अब इन्हें इच्छित दिशा उकसाना आसान हो गया है।
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लॉकडाउन गुज़रने के बाद का समाधान :
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(1) सोशल मीडिया एवं पैड मीडिया पर सर्कुलेट होने वाली सामग्री की शिकायतों को जूरी मंडल के दायरे में लाने के लिए के जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छापा जाए ।
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(2) प्रत्येक नागरिक को बंदूक़ रखने का अधिकार दिया जाए ।
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त्वरित समाधान :
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(1) जो भी इमाम और मौलवी समुदाय को सरकारी मशीनरी के प्रतिकूल जाने के लिए चाबी दे रहे है उन्हें चाहिए कि वे सरकार के साथ सहयोग करने के संदेश प्रसारित करे ।
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(2) सोशल मीडिया पर मौजूद मुस्लिम अपने समुदाय के लोगों को कोरोना के बारे में भ्रमित करने वाले संदेश (फ़ेक न्यूज़+प्रोपेगेंडा) अग्रेषित करना बंद करे ।
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(3) सरकारी मशीनरी पर हमला करना गम्भीर विषय है। सरकार को चाहिए कि मुस्लिम इलाक़ों की स्क्रीनिंग के समय डॉक्टर्स के साथ पर्याप्त पुलिस बल तैनात करे, और आरोपियों पर मुक़दमे दर्ज करे। ताकि लॉकडाउन खुलने पर इन लोगों के ख़िलाफ़ जूरी ट्रायल किया जा सके ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 02 2020 17:02:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

दिल्ली दूरदर्शन पर रात्रि 10 बजे धारावाहिक “चाणक्य” देखे।
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रामायण एवं चाणक्य के पुन प्रसारण के लिए मोदी साहेब का धन्यवाद।
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चाणक्य के लिए विशेष रूप से धन्यवाद ।
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भारत की राजनीति में शायद यह एक मात्र प्रकरण है जब आम नागरिकों ने राज्य सत्ता को उखाड़ दिया था।
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चंदप्रकाश जी द्विवेदी ने काफ़ी यथार्थ फ़िल्मांकन किया है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 03 2020 09:40:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Sunday 9pm , all patriots will know which of their neighbour is a traitor
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By 9.10pm, india will have only patriots in india.
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India will be first country in world with not even one traitor left.

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Sunday 9pm , all patriots will know which of their neighbour is a traitor
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And three minutes after By 9.09 pm, india will have only patriots in india.
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India will be first country in world with not even one traitor left.
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( funhit me jaari ...)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 03 2020 15:11:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कोरोना वायरस क्या इतना खतरनाक है जितना लोग डर रहे हैं?
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कोरोना वायरस (Covid19) की मारक क्षमता का आकलन करने के लिए इसके कई आयामों एवं आंकड़ो का अध्ययन करने की जरूरत है। और अभी कोई भी सरकार मृतको का पूरा डेटा सामने नहीं रख रही है। जहाँ तक पेड मीडिया की बात है वे ओवर रिपोर्टिंग कर रहे है। लेकिन ओवर रिपोर्टिंग कितनी हो रही है, इस बारे में हमारे पास कोई अनुमान नहीं।
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(1) यह वायरस खान-पान, तापमान, औसत आयु, चिकित्सीय सुविधाओ आदि के आधार पर अलग देशो में कम या ज्यादा घातक हो सकता है।
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(1.1) यदि मछली मुख्य भोजन में शामिल है तो मृत्यु दर कम हो सकती है। लाल मांस की तुलना में मछली प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है ।
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(1.2) भोजन में Raw food का ज्यादा इस्तेमाल है तो मृत्यु दर कम होने की सम्भावना है। क्योंकि कच्चे भोजन जैसे शाक-पात-फल आदि के सेवन से प्रतिरोधक क्षमता उच्च बनी रहती है।
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(1.3) यदि धूम्रपान का चलन नहीं है तो मृत्यु दर निम्न रह सकती है। धूम्रपान फेफड़ो की क्षमता कम कर देता है ।
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(1.4) हेल्थ केयर सिस्टम भी मौतों को प्रभावित करेगा।
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(1.5) देश में प्रदुषण ज्यादा है तो मृत्यु दर बढ़ेगी।
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(1.6) कोरोना का सरकारों का निकम्मापन और नीति भी एक मुख्य कारक।
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(1.7) लॉकडाउन का होना / नहीं होना, और उसका निष्पादन।
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(1.8) जिस देश के खाद्य पदार्थो में रसायन एवं मिलावट ज्यादा है, वहां मृत्यु दर बढ़ है।
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(1.9) तापमान ( एवं और भी ऐसे दर्जनों कारण )
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(2) कुछ उदारहण :
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(2.1) जापान एवं दक्षिण कोरिया : रॉ फ़ूड एवं मछली का काफी इस्तेमाल है। हेल्थ केयर सिस्टम भी अच्छा है। जापान में सामुदायिक स्तर पर यूरोपीय देशो की तुलना में स्वच्छता (High Hygiene) का स्तर काफी उच्च है। ज्यादातर नागरिक मास्क पहनने के आदि है। इन दोनों देशो ने समय से पहले कदम उठा लिए थे, अत: लॉकडाउन करने की जरूरत नहीं पड़ी।
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(2.2) अमेरिका : मछली का इस्तेमाल कम है, और लाल मांस ज्यादा खाते है। तापमान 10 से 15 डिग्री। स्मोकिंग भी है। चिकित्सा अच्छी है, लेकिन महंगी है। अमेरिका के साथ एक और समस्या है। अमेरिकी हर साल फ़्लू शॉट लेते है, और कुछ लोगो का मानना है कि, इससे नए वायरस Covid19 के खिलाफ लड़ने की उनकी प्रतिरोधक क्षमता में कमी दृष्टिगोचर हो सकती है।
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(2.3) इटली : हेल्थ केयर सिस्टम काफी अच्छा होने के कारण वहां पर वृद्ध व्यक्ति जीवन रक्षक उपकरणों / दवाईयों के कारण काफी लम्बे समय तक जीवित रहते है, और वृद्धो की संख्या अधिक हो जाने के कारण शायद अब वे कोरोना से मर रहे है। जापान में वृद्ध व्यक्ति इटली की तुलना में ज्यादा स्वस्थ है, और लाइफ सपोर्टिव सिस्टम पर जिन्दा नहीं है। हालांकि, अभी तक इटली के विस्तृत आंकड़े सामने नहीं आये है, अत: निर्णायक रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता।
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(2.4) पंजाब : धूम्रपान कम होने के कारण मृत्यु दर कम हो सकती है, किन्तु वहां पर अनाज में पेस्टिसाईड का इस्तेमाल काफी ज्यादा होने से प्रतिरोधक क्षमता कम हुयी है, और इसके अलावा वहां ड्रग भी चलन में है।
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और इसी तरह अलग अलग देशो, समुदायों में विभिन्न पहलूओ एवं उनके आंकड़ो का अध्ययन करने के बाद यह बात सामने आएगी कि कोरोना वायरस किसके लिए कितना घातक साबित हुआ।
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(3) कुछ संकेत जो बताते है कि पेड मीडिया आंकड़े ओवर रिपोर्ट कर रहा है :
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यदि पहले से बीमार किसी व्यक्ति में कोरोना पॉजिटिव आ जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है तो इसे कोरोना से हुयी मौत के आंकड़ो में दर्ज किया रहा है। इसके अलावा पेड मीडिया जानबूझकर इस तरह से रिपोर्टिंग कर रहा है, जिससे व्यक्ति में पैनिक फैले।
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(3.1) भीलवाड़ा में नारायण सिंह जी सोलंकी की दोनों किडनियां फेल होने से वे डायलिसिस पर थे और उन्हें ब्रेन स्ट्रोक भी था। अस्पताल में रहने के दौरान ही उन्हें कोरोना इन्फेक्शन हुआ और मृत्यु हो गयी। डॉक्टर का कहना है कि मृत्यु किडनी फेलियर से हुयी है, लेकिन चूंकि उसे कोरोना पॉजिटिव था अत: उसे कोरोना के खाते में डाला गया और अख़बार ने हेडलाइन दी - कोरोना से पहली मौत !!
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(3.2) पेड मीडिया ने हेडलाइन बनायी कि स्पेन की राजकुमारी की कोरोना से मृत्यु हो गयी है। लेकिन उन्होंने हेडलाइन में 86 वर्षीय शब्द नहीं जोड़ा !! हेडलाइन पढ़ने से पाठक को लगेगा कि राजकुमारी जवान रही होगी। यह भी गलत रिपोर्टिंग है, और भय फैलाती है।
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(3.3) अमेरिका में अपनी बारी के इंतजार में हॉस्पिटल के वेटिंग रूम में हो रही मृत्यु को भी पेड मीडिया कोरोना से हुयी मौतों के रूप में बता रहा है। यहाँ गलत रिपोर्टिंग की सम्भावना है। क्योंकि Covid19 से मरने में व्यक्ति को 2 हफ्ते तक लगते है। खड़े खड़े कोरोना जान नहीं लेता। सम्भावना है कि अमुक रोगी को हार्ट अटेक हुआ हो या उसमे क्रोनिक डिजीज़ की कोई हिस्ट्री रही हो। और ऐसी ही सम्भावना हायपर टेंशन, हाई डाईबिटिज, हार्ट डिजीज आदि गंभीर बीमारी वाले रोगियों की है।
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और हमें नहीं पता कि देश एवं पूरी दुनिया में ऐसे कितने मामले है, जिन्हें पेड मीडिया द्वारा कोरोना के साथ मिक्स किया जा रहा है। ज्यादा औचित्यपूर्ण आकलन करने के लिए इटली एवं स्पेन में कोरोना से मरने वाले रोगियों के निम्नलिखित आंकड़े चाहिए :
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(i) मृतको के नाम एवं उम्र,
(ii) उनकी अन्य गंभीर बीमारियों का इतिहास
(iii) वर्ष 2019 में जनवरी से मार्च तक अमुक देश में होने वाली मौतों की संख्या
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बहरहाल, कोरोना वायरस भारत के सन्दर्भ में कितना घातक है, और क्या इसे पेड मीडिया द्वारा जाया तौर पर हाइप दी जा रही है, और इसी तरह के कई प्रश्नों के उत्तर हमें पाकिस्तान से मिलेंगे !! काफी साम्यताओ के साथ पाकिस्तान भारत की तुलना में हर तरीके से ज्यादा जोखिमपूर्ण है। अत: पाकिस्तान के आंकड़े महत्त्वपूर्ण है।
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क्योंकि उनके पास पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं है, पर्याप्त ICU यूनिट्स एवं डॉक्टर्स नहीं है, सरकार के पास कंट्रोल नहीं है, और वहां ऑफिशियली लॉकडाउन होने के बावजूद लॉकडाउन पूरी तरह से निष्पादित नहीं है। लेकिन उनके पास कोरोना वायरस भी है, और ऐसे कई समूह भी है जो Covid19 को भुनगा समझते है !!! ( और मेरा अनुमान है कि, पाकिस्तान के कोरोना संक्रमितो में मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम रहेगी।)
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(4) यदि आपको लगता है कि आंकड़े सामने आने से स्थिति साफ़ होगी तो आप प्रधानमंत्री जी को यह ट्वीट भेज सकते है -
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@PmoIndia, #DiscloseNameAgeOtherIllnessesOfCoronaDead कोरोना से मरने वालो के नाम, उम्र, उनकी अन्य बीमारियों का इतिहास एवं मतदाता संख्या सार्वजनिक करें, ताकि इनका अध्ययन किया जा सके। मेरी राय में मृतक को निजता का अधिकार नहीं है। ये आंकड़े छिपाने से अफवाहे फैलेगी एवं नुकसान होगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 05 2020 13:49:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

06 अप्रैल 1980 भाजपा का स्थापना दिवस था !!
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दीपक जनसंघ का चुनाव चिन्ह था।
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भाजपा दीपक को अपना चुनाव चिन्ह बनाना चाहती थी, लेकिन उन्हें यह चिन्ह आवंटित नहीं हुआ।
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तो कोरोना के अलावा यह भाजपा की 40 वीं वर्षगाँठ मनाने के बारे में भी है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Apr 06 2020 09:53:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Brut India:

In this church in the US, you can worship armed with a gun. You can even get your weapon blessed.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 07 2020 08:13:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

कृपया :- रजनीकांत व अक्षय कुमार को देखें |
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कोई कारण बता सकता है कि इन्होनें मोमबत्ती पकड़े है दीया क्यों नहीं. ?
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<https://twitter.com/rajinikanth/status/1246829761353023488>;
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<https://twitter.com/akshaykumar/status/1246828861934854145>;
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अक्षय कुमार ने एक विशेष प्रकार के ग्लास में मोमबत्ती लगा रखी है जो दीये जैसी दिखती है पर दीया नहीं है |
वह मोमबत्ती है |
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तीसरी पिक को ना देखें | यह आपके काम की नहीं है |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 07 2020 11:13:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

गुजरात ; बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह का प्रस्ताव
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(Gujarat ; Referendum for Right to Bear Gun)
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इस क़ानून का सार : मुख्यमंत्री इस क़ानून को सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में गुजरात के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता यह क़ानून लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं। जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह क़ानून गुजरात के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 जिंदा कारतूस रखना अनिवार्य होगा। प्रधानमंत्री भी किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून किसी राज्य या किसी जिले में लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री भी यह क़ानून अपने राज्य के एक या एक से अधिक जिलो में लागू कर सकते है। #GunLawReferendumGuj , #P20180436107
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यदि आप बंदूक रखने के कानून पर जनमत संग्रह कराना चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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‘ मुख्यमंत्री जी, कृपया गुजरात में बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendumGuj '
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही गुजरात में एक देश जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए “हाँ” दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
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(1.1) जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ हाँ या ना दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले मुख्यमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद गुजरात राज्य का कोई भी मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
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(1.2) कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
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(1.3) यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।

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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है – ऐसा नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून अवयस्क नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद राज्य का कोई भी वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत बन्दूक रख सकेगा।
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(3.1) बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
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(3.2) राज्य का कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की दो बंदूके अपने पास रख सकेगा।
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(3.3) दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) यदि कोई वयस्क नागरिक 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित मात्रा में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
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(4.1) 10 लाख से अधिक संपत्ति – एक छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.2) 20 लाख से अधिक संपत्ति – एक मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.3 ) 30 लाख से अधिक संपत्ति – एक बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.4) संपत्ति में 1 घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी, एवं जूरी मंडल का चयन जिले की वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश
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(06) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीन गन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
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(7.1) छोटी बंदूको के प्रकार।
(7.2) मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
(7.3) बड़ी बंदूको के प्रकार।
(7.4) कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों के लिए बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक टेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
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(8.1) अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
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(8.2) DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएँगी।
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(8.3) जिला शस्त्र अधिकारी प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। जिला शस्त्र अधिकारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) प्रधानमंत्री की अनुमति से रक्षा मंत्री इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेंगे। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसेन्स के, केवल पंजीकरण करवाकर बंदूक, बन्दुक के पुर्जे, कारतूस, बुलेट प्रूफ जेकेट आदि बनाने की फैक्ट्री राज्य में शुरू कर सकता है।
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(10) राज्य में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
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(10.1) यह क़ानून लागू होने के बाद गुजरात में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व की कम्पनियां / फर्म आदि ही राज्य में बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महा जूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो धारा (14) में दी गयी वोट वापसी प्रक्रियाओ का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महाजूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(11.4) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 600 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(11.5) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(11.6) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.7) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार :
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(12.1) जूरी मंडल किसी नागरिक को हथियार रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेंगे। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.3) यदि कोई नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.4) यदि किसी बंदूक निर्माण इकाई के खिलाफ कोई शिकायत आती है, या कारखाने के मालिक के खिलाफ टैक्स वगेरह का कोई भी मामला दायर होता है तो सुनवाई जूरी द्वारा की जायेगी, जज द्वारा नहीं।
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(12.5) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी एवं उनके खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई जूरी मंडल करेगा।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना (इस संपत्ति में 1 करोड़ का घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।

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(14) वोट वापसी : जिला शस्त्र अधिकारी ( DGO )
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी मतदाता जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ।
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(14.2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(14.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(14.4) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(14.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग – मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]

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--------- ड्राफ्ट का समापन---------
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया मुख्यमंत्री कार्यालय के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें।
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पोस्टकार्ड में यह लिखे - मुख्यमंत्री जी, कृपया गुजरात में बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendumGuj
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम / सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी।

और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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@Cmo.. , कृपया गुजरात में बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendumGuj
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (14) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इसकी बुकलेट अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm / Cm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 07 2020 11:24:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सुरत ; बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह का प्रस्ताव
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(Surat ; Referendum for Right to bear Gun)
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इस क़ानून का सार : मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री इस क़ानून को सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में सुरत जिले के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं। जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह क़ानून सुरत के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 कारतूस रखना अनिवार्य होगा।
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जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी। मुख्यमंत्री इस क़ानून को पूरे राज्य में या कुछ जिलो में भी लागू कर सकते है। प्रधानमंत्री भी किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून देश के किसी भी राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है। #GunLawReferendumSurat , #P20180436107
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यदि आप बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, सुरत में बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendumSurat
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही सुरत में एक जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए “हाँ” दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
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(1.1) जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ हाँ या ना दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले मुख्यमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद सुरत जिले का कोई भी मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
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(1.2) कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
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(1.3) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।

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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है – ऐसा नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून अवयस्क नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद जिले का कोई भी वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत बन्दूक रख सकेगा।
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(3.1) बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
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(3.2) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की दो बंदूके अपने पास रख सकेगा।
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(3.3) दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) यदि कोई वयस्क नागरिक 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित मात्रा में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
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(4.1) 10 लाख से अधिक संपत्ति – एक छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.2) 20 लाख से अधिक संपत्ति – एक मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.3) 30 लाख से अधिक संपत्ति – एक बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.4) संपत्ति में 1 घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी, एवं जूरी मंडल का चयन जिले की वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश
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(06) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीन गन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
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(7.1) छोटी बंदूको के प्रकार।
(7.2) मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
(7.3) बड़ी बंदूको के प्रकार।
(7.4) कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों के लिए बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक टेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
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(8.1) अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
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(8.2) DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएँगी।
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(8.3) जिला शस्त्र अधिकारी प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। जिला शस्त्र अधिकारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) प्रधानमंत्री की अनुमति से रक्षा मंत्री इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेंगे। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसेन्स के, केवल पंजीकरण करवाकर बंदूक, बन्दुक के पुर्जे, कारतूस, बुलेट प्रूफ जेकेट आदि बनाने की फैक्ट्री सुरत में शुरू कर सकता है।
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(10) सुरत जिले में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
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(10.1) यह क़ानून लागू होने के बाद सुरत जिले में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व की कम्पनियां / फर्म आदि ही सुरत में बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महा जूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो धारा (14) में दी गयी वोट वापसी प्रक्रियाओ का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महाजूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(11.4) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 600 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(11.5) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(11.6) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.7) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार :
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(12.1) जूरी मंडल किसी नागरिक को हथियार रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेंगे। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.2) यदि कोई नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.3) यदि किसी बंदूक निर्माण इकाई के खिलाफ कोई शिकायत आती है, या कारखाने के मालिक के खिलाफ टैक्स वगेरह का कोई भी मामला दायर होता है तो सुनवाई जूरी द्वारा की जायेगी, जज द्वारा नहीं।
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(12.4) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी एवं उनके खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई जूरी मंडल करेगा।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना (इस संपत्ति में 1 करोड़ का घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।
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(14) वोट वापसी : जिला शस्त्र अधिकारी ( DGO )
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी मतदाता जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ।
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(14.2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(14.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(14.4) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(14.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग – मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]

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--------- ड्राफ्ट का समापन---------
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया मुख्यमंत्री कार्यालय के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे - मुख्यमंत्री जी, सुरत में बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendumSurat
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम / सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी।
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और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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@Cmo.. , मुख्यमंत्री जी, सुरत में बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendumSurat
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (14) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इसकी बुकलेट अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm / Cm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 07 2020 12:36:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

1968, "भारतीय असभ्य, गंवार और जाहिल है। अत: उन्हें बंदूक रखने का अधिकार देने से वे एक दुसरे को मार देंगे !!"
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"आरामकुर्सी ही नहीं सभी कुछ मध्य्कालीन था। तख़्त, उसके ऊपर पड़ा हुआ दरी का चिथड़ा, कलमदान, सुखी हई स्याही की दवातें, मुड़े हुए कोनो वाले मटमैले रजिस्टर --- सभी कुछ शताब्दी पुराना दीख रहे थे !!

अभी इस थाने के लिए फाउंटेन पेन नहीं बना था, उस दिशा में कुल इतनी तरक्की हुयी थी कि कलम सरकंडे का नहीं था !! यहाँ के लिए अभी टेलीफोन ईजाद भी नहीं हुआ था !! हथियारों में कुछ प्राचीन राइफलें थी, जो लगता था कि गदर के दिनों में इस्तेमाल हुयी होंगी। वैसे सिपाहियों के साधारण प्रयोग के लिए बांस की लाठी थी, जिसके बारे में एक कवि ने बताया है कि, वह नदी-नाले पार करने और झपट कर कुत्ते को मारने में उपयोगी साबित होती है।

यहाँ के लिए अभी जीप का अस्तित्व नहीं था। उसका काम करने के लिए दो-तीन हवलदारो के प्यार की छांह में पलनेवाली घोडा नाम की एक सवारी थी, जो शेरशाह के जमाने में भी हुआ करती थी !!

थाने में आते ही लगता था कि किसी ने उसे कई सौ साल पीछे फेंक दिया है। अगर उसने अमेरिकी जासूसी उपन्यास पढ़े हो तो वह बिलबिलाकर देखना चाहता कि उँगलियों के निशान देखने वाले शीशे, कैमरे, वायरलेस लगी हुयी गाड़ियाँ -- ये सब कहाँ है !!

बदले में उसे सिर्फ वह दिखता जिसका जिक्र ऊपर किया जा चुका है। साथ ही एक नंग धडंग लंगोटबंद आदमी जो इमली के पेड के निचे भंग घोट रहा होता। बाद में पता चलता कि वह अकेला आदमी 20-25 गाँवों की सुरक्षा के लिए तैनात है, और जहाँ जिस हालत में वो है उसी हालत में वह 20 गाँवो में अपराध रोक सकता है, अपराध हो गया हो तो उसका पता लगा सकता है, और यदि अपराध नहीं हुआ हो तो अपराध करवा भी सकता है !!

कैमरा, शीशे, कुत्ते उसके लिए वर्जित है। इस तरह थाणे का वातावरण बड़ा ही रमणीक, और बीते दिनों के गौरव के अनुकूल था। जिन रोमांटिक कवियों को बीते दिनों की याद सताती है, उन्हें कुछ दिन रोके रखने के लिए यह थाना एक आदर्श स्थान था !!

जनता को दरोगा जी एवं सिपाहियों से बड़ी आशाएं थी। 250-300 गाँवों के उस थाने में यदि 8 मील दूर किसी गाँव में नकब लगे तो विश्वास किया जाता था कि इनमे से कोई न कोई इसे जरुर देख लेगा। 12 मील पर यदि डाका पड़े तो इनसे उम्मीद थी की ये डाकूओ से पहले पहुँच जायेंगे।

और इसी विश्वास पर किसी भी गाँव में इक्का दुक्का बन्दूको को छोड़कर हथियार नहीं दिए गए थे। हथियार देने से डर था कि गाँव में रहने वाले बर्बर और असभ्य आदमी बन्दूको का इस्तेमाल सीख जायेंगे, जिससे वे एक-दुसरे की हत्या करने लगेंगे, खून की नदियाँ बहने लगेगी। जहाँ तक डाकूओ से उनकी सुरक्षा का सवाल था, वह दरोगा जी और उनके दस बारह आदमियों की जादूगरी पर छोड़ दिया गया था.... "
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राग दरबारी से साभार, रचना काल - 1966, लेखक - श्रीलाल शुक्ल।
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मतलब यह है कि, -- "भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार देंगे" थ्योरी नयी नहीं है। पेड मीडिया तब भी नागरिको को यही परोस रहा था, और आज भी यही परोस रहा है। श्री लाल शुक्ल ने पेड मीडिया द्वारा जनमानस में प्लांट की गयी इस थ्योरी को उपरोक्त प्रकरण में बहुत अच्छे ढंग से रेखंकित किया है।
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( दिल्ली दंगो के दौरान कई नागरिको पुलिस बुलाने के लिए फोन किये थे, किन्तु पुलिस उन तक पहुँच नहीं पायी !! और ऐसा ही कश्मीरी पंडितो के साथ 1990 में और 2012 में असमियों के साथ हुआ था, जब सिर्फ 5,000 के हथियारबंद दस्ते ने 4 लाख हिन्दुओ को कोकराझार से पलायन करने को मजबूर कर दिया था। )
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 07 2020 19:52:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जरुरी सूचना :
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अब हमारे पास प्रत्येक जिले के लिए अलग क़ानून उपलब्ध है। इन कानूनों को जिला स्तर पर लागू किया जा सकता है। और यदि भारत के किसी भी जिले में ये 3 कानून लागू हो जाते है तो अनिवार्य रूप से 2 स्थितियां घटित होगी :
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(a) अगले कुछ ही महीनो में ये कानून अमुक राज्य में और फिर पूरे देश में लागू हो जायेंगे।
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(b) यदि ये क़ानून पूरे देश में तुरंत नहीं आ पाते है तब भी अगले 4-5 वर्षो में अमुक जिला तकनिकी उत्पादन एवं हथियार निर्माण में बहुत आगे निकल जायेगा। और नतीजा देखकर पूरे देश में ये कानून लाने की विस्फोटक मांग खड़ी होगी।
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जिला स्तर पर लागू किये जा सकने वाले ये 3 क़ानून निम्नलिखित है :
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(1) जिला जूरी कोर्ट
(2) जिला जूरी पंचायत
(3) जिला स्तर पर बंदूक रखने का क़ानून (Gun Law)
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एक सामान्य जिले की आबादी 20 से 25 लाख है। इसमें एक सांसद एवं 6-7 विधायक होते है। ये सभी क़ानून मुख्यमंत्री छापेगा। और यदि किसी जिले के 5 विधायक इन कानूनों के समर्थन में आ जाए तो मुख्यमंत्री इन्हें गेजेट में छापने से इंकार नहीं कर सकता।
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वजह ?
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विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधि होता है। यदि किसी जिले के सभी विधायक या जिले के कुल विधायको का बहुमत मुख्यमंत्री के सामने ऐसी कोई कानूनी मांग रखता है जो पूरी तरह से संवैधानिक है, उसमे किसी अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं है, और इससे राज्य के शेष विधायको को तकनिकी-कानूनी रूप से कोई समस्या नहीं है तो मुख्यमंत्री इनकार नहीं कर सकता। तब सीएम का स्टेंड अलोकतांत्रिक होगा, और विधायक जिले के नागरिको की मदद से सीएम को बाध्य कर सकते है !!
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यदि किसी जिले के 10% नागरिक इन कानूनों का समर्थन करे तो विधायको को इन कानूनों का समर्थन करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
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और 10% लोगो का समर्थन जुटाने के लिए कार्यकर्ताओ को स्थानीय निकायों के चुनावों में हिस्सा लेना चाहिये। पार्षद एवं पंचायत के चुनावों में जमानत राशि 3 हजार ही होती है। यदि किसी जिले में ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ता स्थानीय चुनाव लड़ेंगे तो प्रत्येक मतदाता तक इन 3 कानूनों के ड्राफ्ट के पर्चे एवं वोट वापसी पासबुक पहुंचाई जा सकती है।
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दुसरे शब्दों में, उपरोक्त योजना पर काम करके अब इन कानूनों को लागू करवाना व्यवहारिक रूप से संभव है। अत: कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि अपने अपने जिले में अमुक क़ानूनो का प्रचार करने पर भार दें
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आप जिस भी जिले के मतदाता है, उस जिले के नाम से एक अलग से एल्बम बनाए और अपने जिले के ये तीनो क़ानून अमुक एल्बम में रखें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 09 2020 09:45:13 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

टी सी पी ; पारदर्शी शिकायत प्रणाली
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( TCP ; Transparent Complaint Procedure )
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इस क़ानून का सार : भारत में शासन एवं नागरिको के बीच यदि संवाद करने की अधिकृत एवं पारदर्शी प्रक्रिया नहीं होने के कारण नागरिक अपनी मांग, सुझाव आदि पीएम या सीएम तक नहीं पहुंचा पाते, और विभिन्न अनाधिकृत एवं बेतरबीब तरीको का सहारा लेने के लिए बाध्य होते है। यह क़ानून गेजेट में आने के बाद नागरिक अधिकृत रूप से अपनी मांग सरकार एवं जनता के सामने रख सकेंगे, और मतदाता किसी भी मांग पर अपनी सहमती या सहमती दर्ज कर सकेंगे। #TCP , #TcpIndia , #P20180436112
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यदि आप टीसीपी क़ानून चाहते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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प्रधानमंत्री जी, टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #TcpIndia #TCP
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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[ टिप्पणी : यह कानून ड्राफ्ट भारतीय राजपत्र में छापकर प्रधानमंत्री द्वारा सीधे लागू किया जा सकता है। इसके लिए लोकसभा या राज्यसभा से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। ]
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भाग - I : नागरिकों के लिए निर्देश
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(1) यह कानून आपको (यहाँ आप से आशय है - भारत का मतदाता) को यह अधिकार देता है कि वे अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सकेंगे।
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(1.1) यह शपथपत्र आपके द्वारा प्रस्तुत कोई शिकायत, सुझाव या आरटीआई आवेदन या प्रस्तावित कानून या अन्य कोई याचनात्मक समाधान हो सकता है।
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(1.2) आप शपथपत्र जमा करते समय 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क अदा करेंगे।
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(1.3) कलेक्टर कार्यालय प्रस्तुत शपथपत्र को चिन्हित करने के लिए एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(1.4) कलेक्टर कार्यालय आपके द्वारा दिए शपथपत्र को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर इस तरह अपलोड करेगा कि कोई भी व्यक्ति यह शपथपत्र बिना लॉग-इन (Log in) के देख सके।
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(2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पर पटवारी ( तलाटी, ग्रामीण अधिकारी ) कार्यालय जाकर धारा 1 के तहत प्रस्तुत शपथपत्र के नंबर का उल्लेख करते हुए अमुक शपथपत्र पर अपनी हाँ / ना दर्ज करवा सकता है।
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(2.1) कलेक्टर कार्यालय मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को मतदाता के नाम एवं मतदाता संख्या को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से दर्ज करेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को देख सके।
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(2.2) किसी शपथपत्र पर हाँ / नहीं दर्ज करने या उसे बदलने के लिए मतदाता को शुल्क देना होगा। बीपीएल कार्ड धारकों के लिए यह शुल्क 1 रू तथा अन्य नागरिको के लिए यह 3 रू होगा।
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(2.3) मतदाता किसी शपथपत्र पर दर्ज की गयी अपनी हाँ / ना को किसी भी दिन कितनी भी बार बदल भी सकते है।
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(3) सभी के लिए महत्वपूर्ण जानकारी : किसी शपथपत्र पर दर्ज की गयी हाँ / ना की यह गिनती प्रधानमंत्री या किसी मंत्री या किसी अधिकारी या किसी अदालत पर बाध्यकारी नहीं होगी। फिर भी, यदि भारत के 45 करोड़ से अधिक मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो प्रधानमंत्री शपथपत्र में दर्ज किये गए कार्यों की पालना के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। या प्रधानमंत्री चाहे तो अपना इस्तीफ़ा भी दे सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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(4) धारा 1 में शपथपत्र देने के लिए कलेक्टर आपसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड लाने के लिए कह सकता है, एवं आपकी फोटो और फिंगरप्रिंट भी ले सकता है। कलेक्टर आपसे शून्य से लेकर पांच गवाह तक, जो कि आपको निजी रूप से जानते हो, लाने के लिए भी कह सकता है।
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(4.1) यदि आप एक बार शपथपत्र फ़ाइल कर देते है तो फिर आप इसे हटा नहीं सकेंगे। अदालत के आदेश को छोड़कर किसी भी अधिकारी को आपका शपथपत्र हटाने की अनुमति नहीं होगी।
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(4.2) आपको सूचित किया जाता है कि - शपथपत्र में अनुचित जानकारी या मानहानि कारक, या निन्दात्मक कथन के लिए आप पर किसी भी पक्षकार द्वारा अदालत में वाद दायर किया जा सकता है, और दोष सिद्ध होने पर अदालत आपको सजा दे सकती है।
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(5) आपको भारत भर में दर्ज सभी शपथपत्रो पर हाँ / ना दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है। ये आपकी इच्छा पर निर्भर है कि आप किस शपथपत्र पर विचार करना चाहते और किस शपथपत्र को नकारना चाहते है। जिस भी शपथपत्र पर आप हाँ / ना दर्ज करना चाहते है, उन पर अपनी राय दर्ज करवा सकते है। किसी भी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करने पर आपको कोई भी सजा नहीं होगी, तब भी जबकि अमुक शपथपत्र में कोई अनुचित या निन्दात्मक कथन है।
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(6) आप अपना मोबाइल नंबर मतदाता सूची का रखरखाव करने वाले क्लर्क को दर्ज करवा सकते है। अमुक फ़ोन नंबर आपके नाम पर या आपके नजदीकी पारिवारिक सदस्य के नाम पर होना चाहिए। यदि आप अपना मोबाईल नंबर दर्ज करवाते है तो जब भी आप कोई शपथपत्र फ़ाइल करेंगे या किसी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करेंगे तो आपको फीडबैक के लिए एक SMS प्राप्त होगा। यह SMS उसी तरह का होगा जैसा ATM आदि से नकदी निकालने पर खाताधारक को प्राप्त होता है। और यदि कोई अन्य व्यक्ति छल द्वारा आपके नाम पर शपथपत्र फ़ाइल करने का प्रयास कर रहा है या आपके नाम से हाँ / ना दर्ज करवा रहा है, तब भी आपको ऐसा SMS प्राप्त होगा। इस स्थिति में आप पुलिस में शिकायत कर सकते है।
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(7) आपको वोटर कार्ड जैसा एक मैगनेटिक कार्ड (एटीएम कार्ड के समान) भी दिया जा सकता है, और तलाटी कार्यालय के पास एटीएम जैसी मशीन भी लगवायी जा सकती है, ताकि आप मशीन में किसी शपथपत्र का नंबर डाल कर उस पर अपनी हाँ / ना दर्ज कर सके। उपलब्ध होने पर आप इस सुविधा का उपयोग कर सकते है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद प्रत्येक हाँ / ना दर्ज करने या बदलने पर आपको 1 रू शुल्क चुकाना होगा।
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(8) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे आप अपनी हाँ / ना SMS या मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज करवा सके। यदि आप किसी शपथपत्र SMS या मोबाइल एप के माध्यम से हाँ / ना दर्ज करते है तो इसके लिए शुल्क का निर्धारण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।
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भाग-II: अधिकारीयों के लिए निर्देश
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(09) नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर (National Informatics Centre) के प्रभारी सचिव को आदेश जारी किये जाते है कि वे ऐसी आवश्यक वेबसाइट आदि की रचना करे जिससे कलेक्टर, पटवारी आदि ऊपर दी गयी धाराओं में दर्ज प्रक्रिया को लागू कर सके।
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(10) मुख्यमंत्री, मेयर, जिला / तहसील / ग्राम सरपंचों के लिए अबाध्यकारी निर्देश : आप इस कानून में वांछित बदलाव करके ( जैसे प्रधानमंत्री शब्द को मुख्यमंत्री या मेयर आदि से बदलकर और अन्य आवश्यक परिवर्तन करके ) पारित कर सकते है, एवं राज्य / नगर / जिला / तहसील / ग्राम स्तर पर यह टीसीपी क़ानून लागू कर सकते है।
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टीसीपी कानून किस तरह से काम करेगा ?
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(1) हम कलेक्टर को अपनी मांग का ज्ञापन दे सकते है, फिर टीसीपी की क्या जरूरत है ?
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जब आप ज्ञापन देते हो कलेक्टर आपकी मांग को बंद लिफाफे में रखकर पीएम को भेज देता है। आपके ज्ञापन को अख़बार ने नहीं छापा है तो आपके ज्ञापन के बारे में सिर्फ 3 लोग जानते है - जिला कलेक्टर, पीएम एवं आप। यदि आप अपने साथ 10-15 लोग साथ में लेकर गए हो तो भी इसके बारे में सिर्फ 100-50 लोगो से ज्यादा को जानकारी नहीं हो पाएगी। सीमित व्यक्तियों द्वारा रखी गयी इस तरह की व्यक्तिगत मांग में पीएम / सीएम का ध्यान आकृष्ट करने का बल नहीं होता। किन्तु टीसीपी में आपकी मांग पीएम के साथ साथ देश के करोड़ो नागरिको के सामने भी दृश्यमान रहेगी।
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शपथपत्र फ़ाइल करने के बाद आप अपनी मांग का प्रचार नागरिको में कर सकते है। अपनी मांग के पेम्पलेट बाँट सकते है, इसके बारे में व्हाट्स एप, फेसबुक, यू ट्यूब आदि सोशल मीडिया मंचो का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा नागरिको से आग्रह कर सकते है, कि वे आपकी मांग का समर्थन करें। यदि उन्हें आपकी मांग ठीक लगती है, और वे इसका समर्थन करना चाहते है तो वे इस पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकेंगे। यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक आपके शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवाते है तो आपकी मांग के समर्थको की संख्या बढती जाएगी और पीएम / सीएम पर इसे लागू करने का दबाब बनने लगेगा। इस तरह टीसीपी में यह व्यवस्था है कि यह अन्य नागरिको को किसी मांग का संगठित रूप से समर्थन करने का अवसर देता है, जो कि ज्ञापन में संभव नहीं है।
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(2) हम अपनी मांग सोशल मीडिया द्वारा भी तो सरकार तक पहुँचा सकते है, फिर टीसीपी की जरूरत क्यों ?
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सोशल मीडिया निजी कम्पनियां है, जबकि टीसीपी एक सरकारी व्यवस्था है। यदि आपकी मांग आगे बढ़ती है तो निजी कम्पनियां आपके प्रस्ताव को हटा सकती है, या इसका सर्कुलेशन रोक सकती है। जबकि टीसीपी में एक बार कोई प्रस्ताव दर्ज होने के बाद इसे न्यायालय के आदेश बिना हटाया नहीं जा सकता। इसके अलावा सोशल मीडिया में कोई भी आई टी सेल या व्यक्ति हजारों छद्म आई डी बनाकर कुछ भी लिखता रह सकता है, अत: अधिकृत नहीं होने कारण इसके कोई मायने नहीं है। पारदर्शी एवं अधिकृत प्रक्रिया होने के कारण टीसीपी विश्वसनीय है।
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(3) पेड मीडियाकर्मी एवं पेड राजनैतिक पार्टियाँ टीसीपी के समर्थन में क्यों नहीं है ?
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दरअसल , पेड मीडिया पार्टियों एवं पेड मीडिया द्वारा समर्थित नेताओं के पास सड़को पर मजमा लगाने का संख्या बल एवं संसाधन होते है। अत: ये 5-10 शहरो में कुछ हजार लोगो को इकट्ठा करके यह स्थापित कर देते है कि जनता अमुक फैसले का विरोध / समर्थन कर रही है। और फिर पेड मीडिया यह मजमा पूरे देश को दिखाकर माहौल बनाता है कि – पूरा देश अमुक विषय का विरोध / समर्थन कर रहा है !! दुसरे शब्दों में वे जनता की मंशा की व्याख्या अपनी मर्जी से कर पाते है।
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उदाहरण के लिए, भारत में 90 करोड़ मतदाता है। लेकिन पेड मीडिया रामलीला मैदान में द अन्ना के कुछ हजार लोगो को को बार बार दिखाकर यह भ्रम खड़ा कर सकते है कि पूरा देश जनलोकपाल की मांग कर रहा है !! इसी तरह वे पेड मीडिया की सहायता से अपनी मर्जी के मुद्दों पर जनसमर्थन दिखाने का गलत भ्रम खड़ा करते है !! टीसीपी जनता की राय की व्याख्या करने का अधिकार पेड मीडिया, पेड मीडिया पार्टियों एवं राजनेताओ से छीन लेता है !! वे जनमत की व्याख्या करने का अधिकार अपने पास चाहते है अत: इस कानून की खिलाफत करते है।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे - प्रधानमंत्री जी, टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #TcpIndia #TCP
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
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@Pmoindia , प्रधानमंत्री जी, टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #TcpIndia #TCP
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7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (10) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इसकी बुकलेट अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 09 2020 16:50:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

लॉकडाउन को आगे बढ़ाना चाहिए या नहीं ?
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हमारा सुझाव है कि सरकार को किसी एक राज्य / या किसी एक मेट्रो सिटी में लॉकडाउन हटा कर डी-क्राउडिंग (DeCrowding) को लागू करना चाहिए। यह प्रस्ताव पूरे देश के नहीं बल्कि किसी एक राज्य या फिर किसी एक मेट्रो सिटी के लिए है। इससे 10 दिन में हमें भारत का एक तुलनात्मक डेटा मिलेगा, और हमें पता लग जाएगा कि वायरस से निपटने की सही नीति क्या है।
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(A)
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डी-क्राउडिंग निष्पादित करने के लिए सरकार निम्नलिखित आदेश जारी करें :
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(1) अमुक राज्य में धारा 144 लागू रहेगी। सार्वजनिक स्थलों पर 3 से अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर पाबंदी होगी। यदि कोई व्यक्ति उलंघन करता है तो पुलिस चालान काट सकती है।
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(2) व्यक्ति जब भी घर से बाहर निकलेगा उसके पास आधार कार्ड / वोटर कार्ड होना अनिवार्य है।
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(3) सभी प्रकार के अनुपादक जमाव ( Unproductive Gathering ) सिनेमा, सर्कस, मेले, मंदिर, मस्जिद, चर्च, उत्सव, स्कूल आदि पर रोक रहेगी।
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(4) सभी प्रकार की फैक्ट्रियां, कार्यालय, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, दुकाने आदि शुरू हो सकेंगे।
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(5) पान के गल्ले, रेस्टोरेंट, चाय-कॉफ़ी हाउस, सभी फ़ास्ट फ़ूड आदि बंद रहेंगे।
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(6) अमुक राज्य की सीमाएं सील रहेगी। ना तो राज्य से कोई बाहर जा सकता है, न आ सकता है।
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(7) बस में जितनी सीट है उसकी आधी सवारी बैठेगी। कंडक्टर के पास अनिवार्य रूप से इन्फ्रारेड थर्मोमीटर होगा। यदि नहीं है तो कंडक्टर+ड्राइवर पर चालान हो सकता है। कंडक्टर सभी का थर्मल टेस्ट करके ही बस में चढ़ने देगा। कंडक्टर यह सुनिश्चित करेगा कि सवारियों के पास मास्क हो। (डबल अस्तर के कॉटन मास्क नागरिक घर पर भी बना सकते है।)
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(8) राज्य के अंतर्गत अवागमन के लिए ट्रेन शुरू हो सकेगी। व्यक्ति को प्लेटफार्म पर आने से पहले अपना टिकेट ऑनलाइन लेना होगा। सिर्फ वही व्यक्ति प्लेटफोर्म में प्रवेश करेगा जिसके पास पहले से आरक्षित टिकेट है। सभी कोच में क्षमता से आधी सवारियों की अनुमति होगी। जनरल बोगी में क्षमता से 1/3 सवारी बैठेगी।
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(9) ऑटो रिक्शा वगेरह शुरू होंगे। ऑटो में 2 सवारी बिठाने की अनुमति होगी। 2 से अधिक नहीं।
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(10) दुपहिया वाहन पर सिर्फ 1 आदमी को बैठने पर छूट होगी।
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(11) यह सुनिश्चित किया जाए कि सर्दी जुकाम या इस तरह के लक्षणों वाले व्यक्ति मास्क का इस्तेमाल करें। (डबल अस्तर के कॉटन मास्क नागरिक घर पर भी बना सकते है।)
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(12) सरकार पूरे देश में फरवरी-मार्च-अप्रेल एवं आगामी महीनो में होने वाली सभी मौतों की पूरी जानकारी जैसे रोगी का नाम, उम्र, उसकी पूर्व बीमारियों का इतिहास आदि सार्वजनिक करें। ताकि पूर्व वर्षो के आंकड़ो से इसकी तुलना की जा सके।
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(13) शराब के ठेके सप्ताह में 3 दिन नियत समय के लिए खुलेंगे। ठेके खुलने के दौरान ठेके पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी रहेगी। (वैकल्पिक)
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(B)
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लॉकडाउन के दौरान अब प्रत्येक व्यक्ति Covid19 के इन्फेक्शन एवं इसके संक्रमण के तरीको से परिचित हो चुका है। उपरोक्त प्रक्रिया लागू होने से कुछ 25% प्रोडक्टिव लोगो ट्रेफिक शुरू हो जाएगा, और शेष 75% घर में बने रहेंगे, और सिर्फ तब बाहर निकलेंगे जब यह बेहद जरुरी हो। और जो भी बाहर निकलेंगे वे अपना काम करके घर पर लौट आयेंगे।
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(1) इस प्रकिया के आने से हमें 3 फायदे होंगे :
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(1.1) हमें मालूम हो जाएगा कि भारतियों की प्रतिरोधक क्षमता के लिहाज से हमारे लिए यह वायरस कितना घातक है। हम लॉकडाउन वाले राज्यों से इसकी तुलना करके व्यवहारिक निष्कर्ष निकाल सकते है।
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(1.2) इतना होने से स्थानीय स्तर पर चलने वाली राज्य की 50% इकॉनोमी खुल जायेगी, और इस वजह से कई जाने बचेगी।
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(1.3) हमें इसे एक युद्ध की तरह मानकर चलना चाहिए। वॉर फेयर में हमें भविष्य में भी इस तरह के और इससे भी मारक वायरसों का सामना करना पड़ सकता है। यदि हमने जन सामान्य को इसका सामना करने के लिए तैयार नहीं किया तो हमें आगे बहुत ज्यादा हानि उठानी पड़ सकती है। क्योंकि हो सकता है कि कुछ वर्षो बाद वास्तव में हम पर ऐसे वायरस का हमला हो जो वाकयी में इतना घातक हो।
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(2) अब जोखिम –
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हाँ, इसमें एक सीमा तक जोखिम है। लेकिन हमें यह जोखिम उठाना चाहिए। क्योंकि जापान, दक्षिण कोरिया, चीन जैसे देशो ने लॉकडाउन की जगह पर DeCrowding का पालन करके इसे आसानी से नियंत्रित कर लिया। यह वायरस अब पूरी दुनिया में फैल चुका है, लॉकडाउन इसका हल नहीं है। ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि अब यह वायरस दुनिया के हर आदमी तक पहुंचेगा। यदि लॉकडाउन जारी रहता है तो लॉकडाउन से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जायेगा। वो बात अलग है, कि न तो लॉकडाउन से होने वाली मौतों को काउंट किया जाएगा और न ही इसकी रिपोर्टिंग होगी।
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पाकिस्तान में भी लॉकडाउन प्रभावी रूप से लागू नहीं है, और वहां डेथ काउंट भारत की तुलना में निम्न है। और मेरा अनुमान है, कि यह भारत की तुलना में निम्न ही रहेगा !!
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(C)
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(1) यदि आपको लगता है कि इस तरह का फैसला लिया जाना चाहिए तो आप प्रधानमंत्री जी को ट्विट कर सकते है कि वे किसी एक इच्छित राज्य का लॉकडाउन हटाकर DeCrowding के आदेश जारी करें।
ट्विट में यह लिखे :
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@Pmoindia , प्रधानमंत्री जी, कृपया एक राज्य में लॉकडाउन हटाकर डी-क्राउडिंग के आदेश जारी करें - #EndLockdownInOneState , #OnlyDecrowdingInOneState ,
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और किस राज्य से लॉकडाउन हटाया जाना चाहिए इसका फैसला पीएम कर सकते है।
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(2) राज्यों में लॉकडाउन हटाने का फैसला मुख्यमंत्री भी कर सकते है। चूंकि मैं राजस्थान का निवासी हूँ, अत: मैंने राजस्थान के मुख्यमंत्री को मेरे राज्य से लॉकडाउन हटाने का ट्विट भी भेज दिया है। यदि आप चाहते है कि जिस एक राज्य से लॉकडाउन हटाया जाए वह आपका राज्य हो तो आप भी अपने सीएम को ट्विट भेज सकते है।
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सीएम के ट्विट में अपने राज्य का नाम लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, कृपया एक राजस्थान में लॉकडाउन हटाकर डी-क्राउडिंग के आदेश जारी करें – #EndLockdownInRajasthan , #OnlyDecrowdingInRajasthan ,
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Apr 11 2020 05:22:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भीलवाड़ा में ज़िला कलेक्टर राजेंद्र जी भट्ट ने उपलब्ध संसाधनों में काफ़ी अच्छा काम किया है। अव्यवस्था की कोई अप्रिय घटना नही ।

Sunil Ojha:

My City view.

Thanks to our District DM 🙏

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Apr 11 2020 20:09:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जनमत संग्रह ; सज्जन नागरिको के लिए बंदूक रखने का अधिकार
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( Referendum ; Right to Bear Gun for Law Abide Citizens )
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इस क़ानून का सार : प्रधानमंत्री यह क़ानून सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में भारत के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता यह क़ानून लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। प्रधानमंत्री किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून किसी राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री भी यह क़ानून अपने राज्य के कुछ जिलो या पूरे राज्य में लागू कर सकते है।
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इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं, एवं जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह क़ानून प्रत्येक सज्जन नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले सज्जन नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 कारतूस रखना अनिवार्य होगा।
#GunLawReferendum #P20180436107
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यदि आप बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराना चाहते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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प्रधानमंत्री जी, कृपया बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendum
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही भारत में एक देश व्यापी जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि भारत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए “हाँ” दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
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(1.1) जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ हाँ या ना दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले प्रधानमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद भारत का कोई मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
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(1.2) कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
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(1.3) यदि देश की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो प्रधानमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।
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(1.4) प्रधानमंत्री राज्य के 51% मतदाताओं की स्वीकृति लेकर अमुक राज्य के किसी जिले में, एवं भारत के 51% मतदाताओ की स्वीकृति से किसी राज्य में इस क़ानून को 4 वर्ष के लिए निलम्बित कर सकते है।
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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है – ऐसा नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून अवयस्क नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद भारत का कोई भी सज्जन वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत बन्दूक रख सकेगा।
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(3.1) बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
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(3.2) कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की दो बंदूके अपने पास रख सकेगा।
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(3.3) दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) यदि कोई सज्जन वयस्क नागरिक 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित मात्रा में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
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(4.1) 10 लाख से अधिक संपत्ति – एक छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.2) 20 लाख से अधिक संपत्ति – एक मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.3 ) 30 लाख से अधिक संपत्ति – एक बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.4) संपत्ति में 1 घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी, एवं जूरी मंडल का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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(06) प्रधानमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीन गन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
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(7.1) छोटी बंदूको के प्रकार।
(7.2) मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
(7.3) बड़ी बंदूको के प्रकार।
(7.4) कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों के लिए बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक टेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
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(8.1) अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
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(8.2) DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएँगी।
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(8.3) जिला शस्त्र अधिकारी प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। जिला शस्त्र अधिकारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) भारत सरकार इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेगी। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसेन्स के, केवल पंजीकरण करवाकर बंदूक या बन्दुक के पुर्जे या बंदूक की गोलियाँ बनाने की फैक्ट्री शुरू कर सकता है। कोई भी नागरिक बुलेट-प्रूफ जैकेट भी बना सकता है।
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(10) भारत में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
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(10.1) यह क़ानून लागू होने के बाद भारत में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व की कम्पनियां / फर्म आदि ही बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महा जूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो धारा (14) में दी गयी वोट वापसी प्रक्रियाओ का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(11.4) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 600 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(11.5) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(11.6) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.7) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार :
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(12.1) जूरी मंडल किसी असज्जन नागरिक को हथियार रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेंगे। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.3) यदि कोई सज्जन नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.4) कोई व्यक्ति सज्जन है या असज्जन, इस बारे में अंतिम निर्णय करने का अधिकार जूरी के पास होगा। जूरी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड, चाल चलन, आरोप, दोष सिद्धि आदि के आधार पर इस बारे में अपने विवेक से फैसला लेगी।
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(12.5) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी एवं उनके खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई जूरी मंडल करेगा।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना (इस संपत्ति में 1 करोड़ का घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।

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(14) वोट वापसी : जिला शस्त्र अधिकारी ( DGO )
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी नागरिक जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ।
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(14.2) कोई भी नागरिक किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(14.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(14.4) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(14.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
रेंज वोटिंग – प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]

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--------- ड्राफ्ट का समापन---------
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 12 2020 20:32:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

महामारी विशेषग्य का कहना है कि लॉकडाउन से बेहतर है कि हम डी क्राउडिंग करें. लॉकडाउन से इसे रोका नहीं जा सकता. लॉकडाउन खुलने के साथ ही, यह फिर से उसे स्पीड से फैलना शुरु करेगा !! पूरा साक्षात्कार पढ़ें.
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An epidemiologist view regarding, should we lift up or continue lockdown?
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Reading is worthy.
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Dr. Jayaprakash Muliyil, former Principal, Christian Medical College, Vellore is one of the country’s one of leading epidemiologists. Serving Indian Council of Medical Research in various advisory committees in the past, his work involves decades of extensive research in the area of infectious diseases. Muliyil tells Somesh Jha that the days of eradicating the disease is over and the country should move towards developing ‘herd immunity’. Edited excerpts:
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After a 21-day lockdown, the government wants the states to frame an ‘exit’ strategy. How should we go about in the second phase?
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The principle of the whole strategy is based on an important recognition, that is, by searching cases and isolating them alone, we will not be able to contain it. So the question of containing the virus is out. What is the next course? The next strategy is to say, ok, infections will continue and we need to take care of people who fall ill and require medical help. However, there is something uncomfortable about this line of thinking because the spread of virus is going up in an exponential fashion so we will not be able to take care of people who need healthcare as the system will be overwhelmed by the number of severely sick who will land up in hospitals. Now we have to ask, given the circumstances, what do we do?
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We have to ask: is there any other way to contain this problem? In 2009, there was an epidemic of H1N1 influenza. What happened to it? It came in and stayed for 2-3 months and spontaneously disappeared. Nothing that we did at the point of time was of help. It went away. Why? It is because of a certain level of herd immunity that was produced by the infection. So, our only hope is that, on its own, this virus is headed line in that way - in a particular way of herd immunity. Unfortunately, we are not sure what percentage of population should be infected before we reach that so-called protective level. From then, it will all come down magically.
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But then the problem would be to determine what should be the right ratio. Let’s say it’s 50-60% but for that we need good data coming from the system and it’s vital. Because in a battle, we cannot fight enemy without information and if it is given to us properly, then we will be able to study. Now that we have said that, we have to ask: but then, by the time 60% of the population is infected, how many will die? That will not be an acceptable proposition. Immediately, you will realise there is another solution and what is that? The interesting thing about this disease is that the virus acts as a mild disease for people in the younger age group and people above the age of 60 years, the mortality is high. If you look at the country’s population statistics, about 12.5% of the people are above 55 years of age.
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It means roughly 87.5% are people whom I call as young people. So if you take care of the elderly and allow the transmission in younger population, but not too fast, just slow down a bit, it can work. Let it happen. Don’t do overcrowding; try to keep distance from each other. Work has to go on, industry has to be restarted, agricultural activities have to start and at the same time, young people will recover from the infection. When the immunity level is attained to the so-called protective level, or herd immunity, we can say that the epidemic has seized. But that doesn’t mean it won’t come back again. It may come back in another year or so but by then, we may have a vaccine.
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But is it plausible for any government to target ‘herd immunity’ to counter such a disease?
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What is the other solution then? Suggest something else?
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Some countries, such as South Korea, did a lot of testing, for instance…
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The cost of testing a person for COVID-19 is Rs 4,500. Then, you test everybody – healthy and unhealthy. Will it be possible to test 1.3 billion people? The disease is going to be there – whether you like it or not even if you ramp up your testing. Remember, most of them are sub-clinical cases.
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The United Kingdom tried to experiment ‘herd immunity’ but didn’t seem to quite succeed. What are your views?
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The more the mobility, the rate of the infection spread will be higher. We have to understand how epidemics normally work. When a new viral epidemic comes, people are not immune to it. There will be lower resistance initially. It goes from person to person and you cannot stop it. And since it’s most sub-clinical, it becomes difficult to isolate that person. But when the virus reaches a particular level of saturation, it automatically stops because it can’t find a host. It depends from virus to virus. For measles, around 90% of the population needs to be vaccinated to achieve herd immunity and for influenza, it is 40%. But one has to stagger the process of reaching the herd immunity and slow down the spread of the infection so that you can handle much more efficiently and not lose too many patients. That’s not what the UK did.
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But in India, where there is a problem of lack of space, will it be possible to protect the elderly from the younger population?
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Keep the elderly in a room and how much distance do we need? Two metres. You don’t need to have social discrimination but only physical distance. In other words, don’t hug your father, keep a distance and let them be there. There is a possibility that they might still get infected but it will try to reduce the spread by maximum. In some areas, it will certainly be a problem, like for the elderly in the slum. But the population in slums is by and large young and middle aged.
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In villages, we do have lack of space and a high number of people still living together under one roof…
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You encourage your old man to sleep under the mango tree. It is about what people have to do to devise ways to protect themselves and their families. Don’t militate. Let them do it. We are a democracy. People have the right to do what they want. Can we stop the disease from spreading? No. Now, it will reach an exponential phase and the fact is that even where you slow it down and you don’t have protection within the community, known to be herd immunity, it will come back.
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The current strategy of a lockdown was to ensure that we 'flatten the curve' and buy time for adequate medical facilities to be in place. Do you think this has helped us?
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We did a short strategy for 3 weeks, advised by some people. We tested it out. During this period, at least people have learned that there is a disease known as the coronavirus that exists and they have learnt how to protect themselves, by keeping a distance. They have realized the crowds are bad. In three weeks, we were able to educate the nation. We have probably bought ourselves a few extra weeks for the disease to exponentially rise. But it will come back when people will start moving and there will be contacts. We can’t do anything about it. We cannot run away to the moon. Can we? There is virus, there are people and the only way to protect is the way you behave to some extent. One more thing, if you get the infection once, you are protected forever.
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When the national lockdown comes to an end, what should we do?
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There will be more cases. We will have to look after them. Even if you don’t have ventilators, we will be able to give some support through oxygen. We need to remember that our health system is not as advanced as the United States. If they are suffering, how much more will we suffer? No wishful thinking. Ventilator, you know, requires a lot of expertise to manage. We will have a problem of training people. I think what’s hindering us is the fear for the disease. For those below the age of 55 years, it’s a mild disease. We will lose a few but that will be a small percentage. In older people, the mortality will be higher. So take care of yourself, your family and your parents. Make sure you don’t get in too close to contact. That’s the basic principle.
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So you are suggesting that the lockdown should be lifted immediately and people be allowed to go back to their lives in the old way?
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I told you a framework. We have to now decide: How crowded can the buses be? Can we have a cricket match? Even when we go back to normal lifestyle, you cannot afford the rush of cases. You need to slow it down. There should be a kind of understanding that there will be a continued infection, however, the days of eradicating it is gone. We have to go to herd immunity to protect us. In building it up, we have to reduce mortality by keeping the elderly away.
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Source:- <https://www.business-standard.com/article/current-affairs/we-cannot-run-away-to-the-moon-need-to-develop-herd-immunity-dr-muliyil-120040601232_1.html?fbclid=IwAR1n8nQI784-tWgq7qgGbVfO1mbAg1PlMtQO-Hkw7TJodmYBczoJ5T9oIJ8>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 12 2020 20:35:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Kunika Kapoor was infected and she came in contact with 1000 people.
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How many of these 1001 died?
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NONE !!!
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In my opinion, that itself is a good proof that corona fear is over hyped by 100 times by paidmediamen.
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Why?
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Another story.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 14 2020 06:55:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

दक्षिण कोरिया में 116 लोग फिर से कोरोनो से संक्रमित पाए गए है।

यह इंगित करता है, कि हम लॉकडाउन जारी रखकर COVID-19 को रोका नहीं जा सकता। जिस दिन लॉकडाउन खुलेगा, उस दिन से फिर संक्रमण फैलने लगेगा। सही समाधान लॉकडाउन नहीं बल्कि कंट्रोल्ड लॉकडाउन या डी-क्राउडिंग है। मतलब सरकार इकोनॉमी को खोलने के लिए 20 से 25% उत्पादक गतिविधियों शुरू करने की अनुमति दे।
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<https://www.sbs.com.au/news/south-korean-patients-cleared-of-coronavirus-test-positive-again?fbclid=IwAR0SbMIc02857W2k3utNUsdgLcXkXjyOF0SCB5sbHOPVUO4k44SHIP-IzB8>;
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3 मई तक का कम्प्लीट लॉकडाउन डी क्राउडिंग की तुलना में ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा। दुनिया भर के नेता अब COVID-19 का इस्तेमाल अपनी आर्थिक नीतियों की असफलता को छिपाने और पैसा बनाने के लिए करने के प्रयास में है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 14 2020 07:07:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सभी के लिए संवाद स्तम्भ : बंदूकधारी भारतीय समाज
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यह पोस्ट सिर्फ बंदूकधारी भारतीय समाज पर पूछे जाने वाले प्रश्नोत्तर के लिए बनाया गया है।
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कोई भी व्यक्ति प्रस्तावित Gun Law के सम्बन्ध में यदि कोई प्रश्न रखना चाहता है, तो वह कमेन्ट बॉक्स में अपना प्रश्न या टिपण्णी रख सकता है। मैं समय की अनुकूलता के अनुसार इन प्रश्नों के उत्तर दूंगा। अन्य विषयों से सम्बंधित प्रश्न / कमेन्ट यहाँ न करे।
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प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट का लिंक -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2790516097733275>;
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प्रश्न करने से पहले कृपया ऊपर दिया गया ड्राफ्ट पढ़ें। ड्राफ्ट पढ़े बिना टिप्पणी न करे।
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प्रश्नकर्ताओं से निम्नलिखित नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है :
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(1) हिन्दी भाषा के लिए हिन्दी लिपि और अंग्रेजी भाषा के लिए अंग्रेजी लिपि का प्रयोग करें। रोमन भाषा का प्रयोग नहीं करे ।
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(2) दो पेराग्राफ के बीच '.' चिन्ह का प्रयोग करे ।
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(3) लेखन में अनावश्यक चिन्हों जैसे '.......', '!!!!!!!', '//////', '####', '„„„„„„', '??????' आदि का तथा अनावश्यक 'केपिटल लेटर्स' का प्रयोग नहीं करें ।
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(4) एक बार में एक ही कमेन्ट करे । यदि आपने दो कमेन्ट एक साथ किये है तो,
अ) पहले कमेन्ट को एडिट करें
ब) दुसरे कमेन्ट को कोपी करके पहले वाले कमेन्ट में पेस्ट करे
स) फिर दुसरे कमेन्ट को डिलीट कर दें ।
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(5) कमेन्ट अक्रमिक रूप से करे। निरंतर कमेंट्स न करें ।
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निरंतर कमेन्ट क्या है ?
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मान लीजिये कि
अ) आपने 'पहला' कमेन्ट किया है,
ब) मैंने 'दूसरा' कमेन्ट किया है,
स) आपने 'तीसरा' कमेन्ट किया है,
द) आपने चौथा कमेन्ट किया है ।
तो यहाँ पहला, दूसरा और तीसरा अक्रमिक जबकि चौथा कमेन्ट निरंतर है । निरंतर कमेन्ट को बिन्दु 4 में बताये तरीके से संपादित कर पिछले कमेन्ट में जोड़ दें।
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(6) अपने प्रश्नों तथा टिप्पणियों को डिलीट नहीं करे । ताकि अन्य कार्यकर्ता भी इन्हें पढ़ सके ।
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(7) कृपया मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर को क्लिक करे तथा डिस्क्रिप्शन देखें। वहां उन आदेशो की सूची दी गयी है जो मैंने अपने प्रधानमंत्री को भेजे है। इस सूची में दिए गए क़ानून ड्राफ्ट्स को पढ़ें।
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(8) इस स्तम्भ का लिंक देखने के लिए नोट्स सेक्शन में जाकर 'आपसी संवाद स्तम्भ' या 'two person conversation thread' शीर्षक से रखे गए स्तम्भ को देखें। इस स्तम्भ का लिंक वहां दर्ज किया गया है ।
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(9) कृपया रिप्लाय केप्शन में कमेंट्स न करे। सभी कमेंट्स liner कमेन्ट बॉक्स में ही करें
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 14 2020 11:41:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जब भारत का पीएम कोई फैसला करता है, और पेड मीडिया भी पीएम के फैसले का समर्थन करता है, तो निर्णायक व्यक्ति कौन होता है ?
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पेड मीडिया के प्रायोजक या पीएम ?
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उदाहरण के लिए जब पीएम ने नोटबंदी की थी तो पूरा पेड मीडिया भी इस फैसले के समर्थन में था। पेड मीडियाकर्मी दिन रात हमें यह समझाने में मेहनत कर रहे थे कि, इससे काला धन ख़त्म हो जाएगा। तब भी देश के कार्यकर्ताओ के बहुत बड़े वर्ग का मानना था कि नोटबंदी का काले धन से कोई लेना देना है। किन्तु पीएम एवं पेड मीडियाकर्मी दोनों का "मानना" था कि इससे काला धन ख़त्म हो जाएगा !!
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तो क्या पीएम एवं पेड मीडिया के प्रायोजक बेवकूफ थे कि उन्हें यह पता नहीं था !!
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तो पहले क्या होता है ?
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(1) पीएम पहले फैसला लेते है और बाद में पेड मीडिया के प्रायोजक उनके फैसले का समर्थन करते है ? अथवा
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(2) पहले पेड मीडिया के प्रायोजक फैसला लेते है, और तब पीएम को वे यह फैसला लेने के लिए कहते है।
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भारत में नागरिको का एक बड़ा वर्ग, और यहाँ तक कि पीएम के धुर विरोधी भी इस गलत धारणा के शिकार है कि पहले भारत का पीएम फैसला करता है, और फिर पेड मीडिया पीएम के फैसले का समर्थन करता है !!
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वे इस गलत धारणा के शिकार इसीलिए है क्योंकि उन्हें दूर दूर तक कोई अंदाजा नहीं है कि भारतीय पेड मीडिया के प्रायोजक कौन है, और उनकी शक्ति का पैमाना क्या है !!
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भारत के पेड मीडिया के प्रायोजक अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता है !! यह बाघ और बकरी की लड़ाई है। मतलब, संघर्ष करने की कोई गुंजाइश ही नहीं है। यदि आप बाघ एवं बकरी को समान सुर में गाते देखते है तो सुर का फैसला हमेशा बाघ ही करेगा।
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तो जब भी आप देखते है कि पीएम ने कोई ऐसा फैसला लिया है जिसका पेड मीडिया समर्थन कर रहा है तो हमेशा ही वह फैसला पेड मीडिया के प्रायोजको द्वारा लिया जाता है, किन्तु इसकी घोषणा पीएम करता है !!
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बूजने है तो इनको मिले इनका जंगल,
और आदमी है, तो मदारी से छुड़ाया जाए
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बूजने - बन्दर
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डमरू पेड मीडिया है, और मदारी बदलते रहते है. बंदर डमरू की थाप पर गुलाटी लगाता है, लेकिन दर्शको को लगता है कि मदारी उन्हें नचा रहा है !! और वे मदारी बदलते रहते है !! दर्शक वही रहते है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 17 2020 16:43:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस एल्बम में भीलवाड़ा जिले में लागू किये जा सकने वाले क़ानून ड्राफ्ट्स रखे गए है.
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सभी कार्यकर्ताओ से निवेदन है कि वे अपने जिले के लिए इसी तरह का एक एल्बम बनाए. आप इसके लिए इस एल्बम के कवर पिक्चर का इस्तेमाल कर सकते है.
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इस एल्बम में जो भी क़ानून रखे जायेंगे उनमे आप भीलवाड़ा की जगह पर अपने जिले का नाम रखें.
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यदि किसी जिले के 10% नागरिक इन कानूनों का समर्थन करने लगते है तो विधायको को इन कानूनों का समर्थन करने के लिए बाध्य किया जा सकता है.
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और यदि किसी जिले के 4-5 विधायक इन कानूनों का समर्थन करने लगते है तो वे मुख्यमंत्री से कहकर इन कानूनों को जिले में लागू करवा सकते है.
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यह काफी महत्त्वपूर्ण एल्बम है, अत: सभी कार्यकर्ता इस तरह का एल्बम बनाए.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 17 2020 16:47:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भीलवाड़ा जूरी पंचायत – पंचायतो एवं स्थानीय प्रशासन को सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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Bhilwara Jury Panchayat - Proposal to Improve Panchayat & Local Administration
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कानून का सार : यह कानून भीलवाड़ा जिले की पंचायतो एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। मुख्यमंत्री यह क़ानून राज्य के एक से अधिक जिलो में लागू कर सकते है या पूरे प्रदेश के भी लागू कर सकते है। इस कानून में ऐसी कई प्रक्रियाएं है जो स्थानीय प्रशासन को चलाने वाले अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है और ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे अधिकारियों की लापरवाही, अकर्मण्यता एवं भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी।
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इस क़ानून को मुख्यमंत्री विधानसभा से पास करके लागू कर सकते है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री भी लोकसभा से पारित कर सकते है।
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भीलवाड़ा जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप भीलवाड़ा में जूरी पंचायत क़ानून चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित भीलवाड़ा जूरी पंचायत क़ानून को गेजेट में छापें - #BhilwaraJuryPanchayat #VoteVapsiPassBook,
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस तरह का क़ानून लागू करने की मांग कर सकते है.
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर भीलवाड़ा जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
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(02) यदि आपका नाम भीलवाड़ा जिले की वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री के अलावा धारा (01) में दिए गए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी। जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी मंडल में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको इन 11 अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप अमुक आरोपी पर जुर्माना लगा सकते है :
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1. पटवारी
2. गिरदावर
3. ग्राम विकास अधिकारी ( पंचायत सचिव )
4. तहसीलदार
5. जिला परिषद सचिव
6. नगर परिषद सचिव
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(03) यदि आपका नाम भीलवाड़ा जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, या उपरोक्त में से किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते है तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा ( 20.1 ) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिपण्णी : इस क़ानून में जिले शब्द का आशय है राजस्थान का भीलवाड़ा जिला।
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इस क़ानून में जहाँ भी पार्षद शब्द का प्रयोग हुआ है उसका आशय है - नगर पालिका , नगर परिषद एवं नगर निगम का पार्षद। इस क़ानून में सभापति शब्द से आशय है - नगर पालिका, नगर परिषद एवं नगर निगम का सभापति। इस क़ानून में प्रधान शब्द से आशय है - तहसील पंचायत समिती का प्रधान। इस क़ानून में जिला प्रमुख से आशय है - जिला पंचायत का प्रमुख। ]
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(04) पटवारी कार्यालयों को सुचारू एवं व्यवस्थित करने के लिए यह क़ानून पारित होने के बाद मुख्यमंत्री निम्नलिखित कार्यो को दी गयी समय सीमा में पूरा किया जाना सुनिश्चित करेंगे :
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(4.1) जिले के खाली पड़े पटवारी के सभी पदों पर पटवारियों की नियुक्ति की जायेगी। यदि नयी भर्ती की आवश्यकता है तो भर्ती की प्रक्रिया अगले 180 दिनों में पूर्ण कर ली जानी चाहिए।
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(4.2) यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर प्रत्येक पटवार खाने का अनिवार्य रूप से कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कम्प्यूटर में दक्ष लिपिकों की नियुक्ति करके पटवारी के स्टाफ का दायरा बढाया जायेगा। पटवारी को शामिल करते हुए पटवारी कार्यालय का न्यूनतम स्टाफ 4 व्यक्तियों का होगा। यह सभी नियुक्तियां यह क़ानून पारित होने के 365 दिनों के भीतर कर ली जानी चाहिए।
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(4.3) जब पटवारी फील्ड में है तब भी पटवारी कार्यालय अनिवार्य रूप से 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुला रहेगा।
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(4.4) जिन पटवार खानो में पर्याप्त कमरे इत्यादि नहीं है उनके लिए आवश्यक भवन निर्माण किया जाएगा एवं यह निर्माण इस क़ानून के पारित होने के 3 वर्षो के अंदर कर लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस क़ानून के गेजेट में आने के 6 माह के भीतर सभी पटवार खानों को उन्नत किये जाने का प्रोजेक्ट विधानसभा में रखेंगे जिसमें यह ब्यौरा होगा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए कितने पटवारी कार्यालयो को किस क्रम से उन्नत किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट के साथ ही अनिवार्य रूप से इसके लिए बजट भी पास करेंगे।
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(4.5) पटवारी एक मोबाईल एप / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया एकाउंट / व्हाट्स एप नंबर सार्वजनिक करेगा, ताकि उसके क्षेत्र के मतदाता अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करवा सके।
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(4.6) यदि कोई भी नागरिक पटवारी कार्यालय में या धारा 01 एवं 02 में लिखे गए अधिकारियों / जनप्रतिनिधियों को किसी कार्य के लिए कोई एप्लीकेशन देता है और यदि एप्लीकेशन पर सार्वजनिक करें दर्ज करता है, तो यह प्रार्थना पत्र सार्वजनिक किया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहा है तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक की गयी जो नागरिक शिकायतें पेंडिंग है और जो कार्य पूर्ण हो चुके है, उनकी अद्यतन जानकारी व्यवस्थित रूप से कार्यालय के सूचना पट्ट पर बिना मांगे उपलब्ध रहेगी एवं इसे प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध रहेगी। यदि यह जानकारी स्वत: सार्वजनिक नहीं की जाती है तो यह माना जायेगा कि, इन्हें छिपाया गया है।
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(4.7) धारा 02 में दिए गए अधिकारी सभी नागरिक शिकायतों एवं नागरिक प्रार्थना पत्रों का निपटान सिलसिलेवार करेंगे। यदि वे क्रम का उलंघन करते है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण लिखित में देना होगा। उदाहरण के लिए , मान लीजिये कि पटवारी या तहसीलदार के पास सोमवार को एक व्यक्ति A नकल निकलवाने का प्रार्थना पत्र देता है, तथा B नक़ल निकलवाने का प्रार्थना पत्र मंगलवार को देता है। चूंकि इन दोनों अर्जियों की प्रकृति एक जैसी है अत: अधिकारी पहले सोमवार को लगाई गयी अर्जी का निस्तारण करेगा। यदि अधिकारी A से पहले B की नकल निकाल देता है तो उसे अनिवार्य रूप से यह दर्ज करना होगा कि क्यों B की अर्जी पर पहले काम किया गया।
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(05) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा, जो कि उसके क्षेत्र की मतदाता संख्या पर निर्भर करेगा। सरपंच अधिकतम 5 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 3 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 2 पंचायत से जीत जाता है तो वह 80,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(06) इस क़ानून के पारित होने के बाद नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 मासिक से 25,000 होगा। पार्षद किन्ही 3 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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(07) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 एवं अधिकतम 80,000 होगा।
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[ सरपंच का वेतन बढाने का स्पष्टीकरण 1* : इस क़ानून में सरपंच को वोट वापसी पासबुक, परीक्षण चुनाव एवं सह चुनाव के दायरे में लाया गया है। इस वजह से सरपंच की भ्रष्टाचार से होने वाली संभावित आय में भारी गिरावट आएगी। यदि वह गलत तरीके से काम कर रहा है तो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेगा, और उसके क्षेत्र के मतदाता वोट वापसी का प्रयोग करके 5 वर्ष से पहले ही उसे निकाल कर किसी दुसरे को सरपंच बना सकेंगे। इसके अलावा यदि उसके खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी और जूरी उस पर जुर्माना लगा सकती है।
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तो जब हम सरपंच पर ऐसे क़ानून डाल रहे है कि वह अवैध रूप से पैसा नहीं बना सके, तो हमें वेतन बढाने की जरूरत है। वर्ना यह सरपंच प्रत्याशीयों के साथ अन्याय होगा। यदि वेतन नहीं बढ़ाया गया तो हमें ऐसे उम्मीदवार नहीं मिलेंगे जो ईमानदारी से कार्य करना चाहते है। वे सोचेंगे कि यदि मैं जीत भी जाता हूँ तो मुझ पर जिम्मेदारी आ जायेगी और जिम्मेदारी निभाने के एवज में मुझे कोई आर्थिक व्यय भी नहीं मिलेगा। और ठीक यही स्थिति पार्षद एवं सभापति के साथ होगी। इसीलिए इनके वेतन में इजाफा किया गया है। राज्य के अन्य जिलो के सरपंचो एवं पार्षदों का वेतन वही रहेगा जो उन्हें आज मिल रहा है।
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5 जगह का सरपंच बनने की छूट देने का स्पष्टीकरण 2* : यदि हमें सरपंच के पद के लिए बेहतर उम्मीदवार चाहिए तो इसके पदोन्नति के अवसर खोलने होंगे। सरपंच एवं विधायक के बीच काफी फासला होता है। यदि सरपंच के पास आस पास के 5 गाँवों का सरपंच बनने का अवसर होगा तो वह ज्यादा बेहतर ढंग से काम करना शुरू करेगा ताकि अन्य गाँवों में भी उसकी ख्याति जाए और वह वहां से भी चुना जा सके। और तब उसे वेतन भी 5 पंचायतो के बराबर मिलेगा।
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इससे सरपंच इस तरह का सिस्टम खड़ा करने की दिशा में काम करना शुरू करेंगे कि नागरिको की शिकायतों का तुरंत निपटान हो और उन्हें धक्के खाने की जरूरत नहीं रहे। और ऐसे भी यदि किसी पंचायत क्षेत्र के मतदाता यह पाते है कि अमुक सरपंच ने उसकी पंचायत में काफी बेहतर काम किया है, तो वे अमुक सरपंच को अपनी पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दे सकते है। ]
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(08) पार्षद अपने वार्ड में प्रत्येक दुसरे एवं चौथे रविवार ( 2nd & 4th Sunday ) को सांय 4 बजे एक नागरिक सभा का आयोजन करेगा। सभापति इसके लिए वार्ड में स्थित किसी सार्वजानिक कम्युनिटी सेंटर, स्कूल आदि में स्थान की व्यवस्था कराएगा। यदि वार्ड में नगर परिषद के क्षेत्राधिकार का भवन मौजूद है तो सभा इसी स्थल पर आयोजित होगी, और स्थान व समय किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाएगा।
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(8.1) किसी व्यक्ति को यदि नगर परिषद के क्षेत्राधिकार एवं अपने वार्ड से सम्बंधित कोई शिकायत या सुझाव पार्षद के सम्मुख रखना है तो वह सभा में उपस्थित होकर अपनी शिकायत या सुझाव आदि पार्षद को लिखकर दे सकता है। शिकायतकर्ता अनिवार्य रूप से अपने मतदाता पहचान पत्र की फोटो कॉपी अपनी एप्लीकेशन के साथ सलंग्न करेगा।
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(8.2) इस सभा में जितनी भी शिकायतें / सुझाव आयेंगे उन्हें पार्षद एक सीरियल नंबर देगा और उन्हें स्वीकार करके नगर परिषद द्वारा जारी (Allote) किये गए अपने रजिस्टर में क्रम से दर्ज कर लेगा। पार्षद एप्लीकेशन लेने के बाद अपनी छाप लगाकर हस्ताक्षर युक्त एक पावती ( Receiving ) भी देगा। पार्षद अगली सभा से पहले पूर्व सभा के ब्यौरे सभापति कार्यालय में अग्रेषित कर देगा।
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(8.3) नागरिक यह एप्लीकेशन सभापति कार्यालय में भी दे सकता है। सभापति द्वारा नियुक्त क्लर्क 5 रू प्रति पृष्ठ की दर से इसे स्कैन करके सभापति की वेबसाईट पर नागरिक शिकायतों के सेक्शन में रख देगा। सभापति इस तरह का सिस्टम बना सकते है कि नगर के मतदाता अपने वार्ड या नगर के लिए दी गयी किसी एप्लीकेशन पर अपनी सहमति दर्ज कर सके।
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(9) अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) सरपंच एवं पार्षद : यदि कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार अमुक पद के लिए तय जमा राशि लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा। तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर अपलोड करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा। पार्षद अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करेगा।
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(9.2) प्रधान, सभापति एवं जिला प्रमुख : यदि कोई मतदाता प्रधान, सभापति या जिला प्रमुख बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किसी भी दिन अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। प्रधान एवं सभापति के लिए जमानत राशि विधायक के बराबर एवं जिला प्रमुख के लिए यह राशि सांसद की जमानत राशि के बराबर होगी। कलेक्टर शपथपत्र को स्कैन करके जिला वेबसाईट पर रखेगा और प्रत्याशियों को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक : जिले का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद का आवेदन करने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
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(10) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(10.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(10.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा
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(10.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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टिप्पणी : रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(11) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परिक्षण -चुनाव की शर्तें :
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(11.1) यदि कोई प्रत्याशी निचे लिखी गयी 3 शर्तें पूरी कर लेता है तो सरपंच इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री से विनती कर सकता है कि वे अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव ( Test-Election ) आयोजित करें । यदि सरपंच 7 दिनों के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में सरपंच का परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है, या नहीं भी ले सकते है।
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(11.1.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(11.1.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(11.1.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सरपंच के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% से अधिक भी है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण-चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 2000+500=2500 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 2400 स्वीकृतियां मिल जाती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा और मौजूदा सरपंच को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । किन्तु यदि किसी प्रत्याशी को 2500 से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है तो सरपंच इस्तीफा दे सकता है या मुख्यमंत्री अमुक पंचायत में परिक्षण-चुनाव कराने का फैसला ले सकते है।
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(11.2) नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी शर्तें यही होगी जो धारा (11.1) में सरपंच के लिए बतायी गयी है।
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(12) सरपंच एवं नगर परिषद वार्ड पार्षद के परिक्षण-चुनाव की प्रक्रिया :
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यदि धारा (11.1) में बतायी गयी तीनो शर्तें पूरी हो जाती है, तो परिक्षण-चुनाव आयोजित किये जायेंगे। परिक्षण चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
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(12.1) मतपत्र पर कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को इस चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 5 प्रत्याशियों को जमानत राशि देकर नामांकन पत्र दाखिल करना होगा।
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(12.2) यदि परिक्षण-चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी शर्तें पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
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(12.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक वोट प्राप्त हो जाते है।
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(12.2.2) यदि ये वोट सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 2,500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 2,500+500=3,000 वोट लाने होंगे। यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 2,500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि सह-चुनाव में कोई प्रत्याशी 2,500 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को 1,500 वोट ही मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा।
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(12.3) नगर परिषद वार्ड पार्षद के लिए परीक्षण चुनाव : पार्षद के परिक्षण चुनाव के लिए भी ठीक उसी समीकरण ( फार्मूले ) का पालन किया जाएगा जो धारा 12.2 में सरपंच के लिए बताया गया है।
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(13) प्रधान, जिला प्रमुख एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(13.1) तहसील प्रधान के लिए : यदि किसी पंचायत समिती की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता प्रधान के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा प्रधान की स्वीकृतियों से 5% अधिक भी है तो मौजूदा प्रधान इस्तीफा दे सकता है । यदि प्रधान 7 दिवस में इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृतियां पाने वाले प्रत्याशी की नियुक्ति प्रधान के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.2) जिला प्रमुख के लिए : यदि किसी जिले की समस्त पंचायत समितियों की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला पंचायत प्रमुख के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जिला प्रमुख की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी की नियुक्ति जिला प्रमुख के रूप में कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है।
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(13.3) जिला जूरी प्रशासक : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां मौजूदा जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक व्यक्ति को जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(14) सभापति की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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सभापति को बदलने के लिए किसी प्रत्याशी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होगी -
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(14.1) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति की वर्तमान स्वीकृतियों से अधिक है।
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(14.2) यदि अमुक प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या सभापति को चुनाव में मिले वोटो की संख्या से भी अधिक है।
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(14.3) स्वीकृतियों का यह आधिक्य यदि सभापति के मतदान क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 2% से अधिक भी है।
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यदि सभापति का कोई प्रत्याशी उपरोक्त तीनो शर्तें पूरी कर लेता है तो सभापति इस्तीफा दे सकता है। यदि सभापति 7 दिनों के भीतर इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे नौकरी से निकालकर परिक्षण चुनाव करवाने का आदेश जारी कर सकते है। परिक्षण चुनाव की प्रक्रिया एवं उसमे जीत हार का समीकरण वही रहेगा जैसा धारा (12.2) में बताया गया है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि किसी किसी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 2,00,000 मतदाता है, और चुनाव में मौजूदा सभापति को 70,000 वोट प्राप्त हुए थे तो परिक्षण चुनाव सिर्फ तब संचालित किया जाएगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 70,000+4,000=74,000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। यहाँ कुल मतदाता 2 लाख है अत: इसका 2% = 4,000 को 70,000 में जोड़ा गया है। आशय यह है कि, यदि किसी प्रत्याशी को 72,000 स्वीकृतियां मिलती है, तो परिक्षण-चुनाव नहीं होगा।
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(15) सरपंच एवं पार्षद के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
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(15.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है।
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(15.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (12.2) में सरपंच के परिक्षण चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 6 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 5 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को सह-चुनाव के लिए न तो फॉर्म भरने की जरूरत होगी और न ही जमानत राशि देनी होगी। सह चुनाव में भी पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। जीत हार का समीकरण ( फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा परिक्षण चुनाव में बताया गया है।
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16. पार्षद के लिए सह-चुनाव की प्रक्रिया : जब भी जिले में कोई भी जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त पार्षद के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा वार्ड पार्षद की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को यह नौकरी देना चाहते है। इस प्रक्रिया का संचालन वैसे ही किया जाएगा जैसा सरपंच के लिए बताया गया है।
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(17) शिकायतों की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों का गठन
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 20.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(17.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 25 से 50 आयु वर्ग के 60 लोगो को चुनेगा और इसमें से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक प्रत्येक तहसील के लिए एक तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति भी करेगा। तहसील जूरी प्रशासक अपनी तहसील में 20 सदस्यीय तहसील महाजूरी मंडल का गठन करेंगे। तहसील महाजूरी मंडल के गठन के लिए तहसील की मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाएगा । जूरी मंडल के गठन एवं बैठको की शेष प्रक्रिया जिला महाजूरी मंडल के समान ही रहेगी।
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(17.3) यदि धारा धारा 01 एवं धारा 02 में दिए गए किसी भी अधिकारी / जनप्रतिनिधि या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई नागरिक शिकायत है तो वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित तहसील / जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है।
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(17.4) तहसील स्तर के अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों की शिकायतें तहसील के महाजूरी मंडल में की जायेगी, तथा इसकी अपील जिला महाजूरी मंडल में होगी। तहसील स्तर की जूरी का गठन तहसील की मतदाता सूचियों से एवं अपील की जूरी का गठन जिले की मतदाता सूचियों से किया जाएगा।
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(18) जूरी मंडल द्वारा शिकायतों की सुनवाई :
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(18.1) यदि किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ महाजूरी मंडल द्वारा एक से अधिक शिकायतें स्वीकृत कर ली जाती है, महाजूरी मंडल सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। किसी अधिकारी / जनप्रतिनिधि के खिलाफ जितनी शिकायतें आई है उनकी सुनवाई 15 दिन में एक बार ही होगी। उदाहरण के लिए यदि पटवारी या तहसीलदार के खिलाफ 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जितनी शिकायतें है उनकी सुनवाई 16 तारीख को और 16 तारीख के बाद में आई शिकायतों की सुनवाई महीने के आखिरी दिन होगी।
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(18.2) जब वादीगण शिकायत लिखेंगे तो अनिवार्य रूप से इसमें यह भी दर्ज करेंगे कि उन्हें इसका क्या समाधान चाहिए। साथ ही वे अधिकारी / जनप्रतिनिधि पर कोई आर्थिक दंड लगाने की मांग भी इसमें लिख सकते है। जुर्माने या क्षतिपूर्ति की मांग करने पर वे इसकी सीमा भी अपनी शिकायत में लिखेंगे।
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(18.3) मामला सुनने के बाद महाजूरी मंडल बहुमत से अपना फैसला देगा। यदि जुर्माना लगाया गया है तो यह जुर्माना अधिकारी / जनप्रतिनिधि के वेतन से काट लिया जायेगा। यदि जुर्माने की राशि अमुक अधिकारी के वेतन के 50% से अधिक है तो कम से कम दो तिहाई जूरी सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी । अधिकारी को नौकरी से निकालने एवं ट्रांसफर करने का फैसले को कम से कम 75% जूरी सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
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(18.4) यदि सुनवाई के दौरान महाजूरी मंडल के सदस्य यह पाते है कि वादीगण ने झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किया है, या शिकायत एकदम मनगड़ंत एवं फर्जी थी तो समय खराब करने के एवज में जूरी सदस्य शिकायतकर्ताओ पर भी जुर्माना लगा सकते है।
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(18.5) महाजूरी मंडल के फैसले के खिलाफ यदि कोई भी पक्षकार अपील दायर करता है तो जिला महाजूरी मंडल जिले की मतदाता सूचियों में से एक नयी जूरी का गठन करेगा। इस जूरी का आकार उस जूरी मंडल से बड़ा होगा जिस जूरी मंडल ने इस मामले की सुनवाई करके फैसला दिया था वह जूरी प्रशासक के सामने अपील दायर कर सकता है। जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(18.6) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। अपील की जूरी में दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(19) जूरी मंडलों के फैसलों का पालन : जूरी मंडल के फैसले परामर्श कारी होंगे । मुख्यमंत्री या सम्बंधित विभाग का मंत्री जूरी मंडल द्वारा दिए गए किसी फैसले में संशोधन कर सकते है, उसमे बदलाव कर सकते है, या उसे पूरी तरह से पलट सकते है। किन्तु मंत्री स्तर से कम का कोई भी अधिकारी जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले में बदलाव नहीं कर सकेगा। जूरी द्वारा यदि किसी अधिकारी को दोषी ठहराया जाता है तो इसे अधिकारी का मूल्यांकन करने वाली सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा, तथा पदोन्नति, स्थानांतरण आदि के मूल्यांकन में इस तथ्य को आधार माना जाएगा।
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(20) जनता की आवाज :
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(20.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(20.2) यदि कोई मतदाता धारा 20.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 20.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 17 2020 16:52:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भीलवाड़ा जूरी कोर्ट – भीलवाड़ा के थानों-अदालतों को सुधारने के लिए जिला स्तरीय जूरी अदालतें
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Bhilwara Jury Court – Proposed Notification to Enact Lower Jury Courts in Bhilwara
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यह क़ानून भीलवाड़ा जिले के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, अस्पतालों आदि का काम-काज सुधारने के लिए लिखा गया है। यह क़ानून राजस्थान के अन्य जिलो पर लागू नहीं होगा। किन्तु मुख्यमंत्री चाहे तो इसे राज्य के अन्य जिलो में या पूरे प्रदेश में भी लागू कर सकते है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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भीलवाड़ा जिले के नागरिको के लिए -
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यदि आप भीलवाड़ा में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, कृपया भीलवाड़ा जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छापें — #BhilwaraJuryCourt #VoteVapsiPassBook #P20180436103
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भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
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यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है.
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==== भीलवाड़ा जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : इस क़ानून में जहाँ भी जिला शब्द का इस्तेमाल किया गया है, उसका आशय है राजस्थान का भीलवाड़ा जिला ।
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(01) यदि आपका नाम भीलवाड़ा जिले की वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :

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1.1. हत्या, हत्या के प्रयास , मारपीट, हिंसा , अप्राकृतिक मानव मृत्यु , दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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1.2. अपहरण , बलात्कार , छेड़छाड़ , कार्यस्थल पर उत्पीड़न , दहेज़ , घरेलू हिंसा , डिवोर्स , वैवाहिक झगड़े ।
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1.3. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारणों से सम्बंधित सभी मामले एवं सम्बंधित सभी आपत्तियां ।
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1.4. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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(02) यह क़ानून गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर भीलवाड़ा जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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01. जिला पुलिस प्रमुख
02. जिला शिक्षा अधिकारी
03. जिला चिकित्सा अधिकारी
04. जिला मिलावट रोक अधिकारी
05. जिला जज
06. जिला जूरी प्रशासक
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
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[ टिपण्णी : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है , अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए – भीलवाड़ा के नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके। बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है।
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इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है – भीलवाड़ा के अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे। ]
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यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दे सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इस शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(II) अधिकारियों के लिए निर्देश :
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टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी , मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है ।
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(04) जिले के न्याय क्षेत्र में घटित होने वाले अपराधो के सम्बन्ध में यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
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4.1. हत्या, हत्या के प्रयास, दुर्घटना या लापरवाही जनित मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु।
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4.2. ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो, या गंभीर चोट कारित होने की संभावना हो, दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
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4.3. अपहरण-बलात्कार-छेड़छाड़-उत्पीड़न , महिला का पीछा करना , दहेज़ , घरेलू हिंसा, डिवोर्स, वैवाहिक झगड़े।
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4.4. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जिसमें- फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है - से सम्बंधित सभी प्रकार के मामले व आपत्तियां।
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4.5. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
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4.6. सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने इस सूची में शामिल किया हो।
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4.7. ऐसे अपराध या विवाद जिन्हें नागरिको के बहुमत ने इस क़ानून की धारा (34) द्वारा एवं प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो
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(05) जिला सहायक निदेशक अभियोजन (A.D.P.) को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 6 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक वोट वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। इन अधिकारीयों के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (31) देखें।
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(06) मुख्यमंत्री जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (31) का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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[ टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी। ]
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(07) जिले में दर्ज सभी मतदाताओं की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर दी गयी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और जिले में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 4 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है।
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(08) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :
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सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(8.1) जिले की मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(8.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
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(8.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(8.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(8.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
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(8.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(09) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :
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(09.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(09.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(10) क्रमरहित तरीके ( लॉटरी ) से मतदाताओं को चुनने का तरीका :
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(10.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रमरहित विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
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(10.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या जैसे ABCD के मध्य की कोई संख्या चुननी है । तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा। पहले दौर में यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का इस्तेमाल करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है, तब वह 2 पांसों का प्रयोग करेगा।
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(10.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी, और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी। यदि पांसे फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा।
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(10.3.1) मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज है, में से एक पेज का चयन करना है। तब जूरी प्रशासक 4 दौर ( राउंड ) के पासें फेंकेगा। पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है। यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी। अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा। इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है, इसलिए वह दो पांसे फेकेगा। यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा। यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है। तब जूरी प्रशासक (3-1) , (5-2) , (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा।
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(10.3.2) जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान संख्याओ को चुन सकता है। मान लीजिये सूची में N मतदाता है। तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें ‘n और m’ मान लेते है, चुन सकता है। चुने हुए मतदाता हो सकते है - ( n mod N ) , ( n +m ) mod N , ( n+2m ) mod N से (n+ ( k-1 )*m ) mod N , जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
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(11) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 30 दिनों बाद दी जाएगी।
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(12) यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 30 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।
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(13) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :
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(13.1) यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और यह आरोप यदि धारा (4) या उसके आधार पर जारी किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में सूचित कर सकते है, अथवा धारा (34.1) के अंतर्गत अपनी शिकायत मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास या मृत्युदंड का सुझाव दे सकते है।
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(13.2) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य यदि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते है तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते है। वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते है या नहीं भी दे सकते है।
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(13.3) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच होगी । यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा।
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(13.4) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना लगा सकते है। महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) जुर्माने की राशि मानी जाएगी। महाजूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(14) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
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महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :
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(14.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(14.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है। पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी। यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है।
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(14.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा है, और महाजूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते है तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते है।
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(14.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है। न्यूनतम संख्या 15 होगी और हर 1 करोड़ की राशि के लिए 1 अतिरिक्त सदस्य जोड़ा जाएगा। किन्तु जूरी का आकार 1500 से अधिक नहीं होगा।
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(15) जूरी सदस्यों का चयन :
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(15.1) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे नागरिक भी जूरी से बाहर रहेंगे। शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेगा। किसी व्यक्ति को जूरी में शामिल नहीं करने का निर्णय जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महाजूरी मंडल के बहुमत द्वारा बदला जा सकेगा।
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(15.2) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता, पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते है, जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं।
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(15.3) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक एक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया एवं जूरी ट्रायल का संचालन करेगा।
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(16) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना : सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(17) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।
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(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।
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(19) जुर्माने का निर्धारण : प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
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(20) कारावासीय दंड : ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
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(21) मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।
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(22) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
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(24) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
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(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
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(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।
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(27) जिला जूरी प्रशासक जिले की सभी तहसीलों में भी तहसील स्तर पर तहसील जूरी प्रशासको की नियुक्ति करेगा। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। तहसील जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील महाजूरी मंडलों का गठन करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
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[ टिपण्णी : यदि वादी गण को लगता है कि जिला जज ने अनुचित फैसला दिया है तो वे इस क़ानून के वोट वापसी खंड की धारा (31) का इस्तेमाल करके जिले के नागरिको से विनती कर सकते है कि नागरिक जिला जज को नौकरी से निकालने की स्वीकृति दें। या वे इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत जिले के नागरिको के समक्ष पुनर्विचार (Riview) का एक शपथपत्र भी दाखिल कर सकते है।
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(28) इसी क़ानून की धारा (04) में वर्णित मामलो या धारा (04) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना जिले के किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा। किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (34) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिले के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
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(29) जिला स्तर के अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(29.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(29.2) जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 8 वर्ष हो चुके हो या वह सहायक लोक अभियोजक ( APP = Assistance Public Prosecutor ) के रूप में 3 वर्ष तक सेवाएं दे चुका हो तो वह जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन ( ADP = Additional Director of Prosecution ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.3) जिला चिकित्सा अधिकारी : 32 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए वांछित डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(29.4) जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(30) धारा (29) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(31) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(31.1) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
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(31.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(31.3) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
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(31.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(32) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(32.1) जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने सहमती दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या नही भी कर सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।
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(32.2) जिला जूरी प्रशासक, मिलावट रोक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जिला सहायक निदेशक अभियोजन : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जूरी प्रशासक या सहायक निदेशक अभियोजन की नौकरी दे सकते है ।
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(32.3) जिला जज : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जिला जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है। जिला जज की नियुक्ति का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(32.4) जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन शिक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी दे सकते है।
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(32.4.1) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
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(32.4.2) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा जिले में - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, जिले का प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस क़ानून के लिए अभिभावक माना जायेगा।
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(32.4.3) यदि मुख्यमंत्री इस क़ानून को अन्य जिलो में भी लागू करते है तो मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृतियों से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह अधिक से अधिक 5 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(33) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(33.1) मुख्यमंत्री एवं जिले के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(33.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने गुप्त स्वीकृतियों के लिए मतदान किया है) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
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(33.3) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे। किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(33.4) राज्य के सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपनी पसंद का नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री शिक्षा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक एवं चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(34) जनता की आवाज :
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(34.1) यदि जिले का कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(34.2) यदि जिले का कोई मतदाता धारा (34.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दिया जा सकेगा, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि जिले के 51% नागरिक शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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====भीलवाड़ा जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन====
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 17 2020 17:04:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भीलवाड़ा ; सज्जन नागरिको के लिए बंदूक रखना अनिवार्य करने के क़ानून पर जनमत संग्रह का प्रस्ताव
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( Bhilwara ; Referendum for Right to bear Gun to Law Abide Citizens)
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इस क़ानून का सार : मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री यह क़ानून सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में भीलवाड़ा जिले के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इसे लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह क़ानून भीलवाड़ा के प्रत्येक सज्जन नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं, एवं जूरी किसी असज्जन नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 कारतूस रखना अनिवार्य होगा।
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मुख्यमंत्री यह क़ानून पूरे राज्य में या कुछ जिलो में भी लागू कर सकते है। प्रधानमंत्री भी किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून देश के किसी भी राज्य या किसी जिले में लागू कर सकते है।
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#GunLawReferendumBhilwara #P2018043610
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यदि आप बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, भीलवाड़ा में बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendumBhilwara
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही भीलवाड़ा में एक जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए “हाँ” दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
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(1.1) जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ हाँ या ना दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले मुख्यमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद भीलवाड़ा जिले का कोई भी मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
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(1.2) कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
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(1.3) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।
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(1.4) मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री गुजरात के 51% मतदाताओं की स्वीकृति लेकर या प्रधानमंत्री भारत के 51% मतदाताओ की स्वीकृति से भीलवाड़ा में इस क़ानून को 4 वर्ष के लिए निलम्बित कर सकते है।
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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है – ऐसा नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून अवयस्क नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद जिले का कोई भी वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत बन्दूक रख सकेगा।
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(3.1) बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
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(3.2) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की दो बंदूके अपने पास रख सकेगा।
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(3.3) दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) कोई वयस्क नागरिक जिसे जूरी ने असज्जन घोषित नहीं किया है, और यदि वह 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित संख्या में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
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(4.1) 10 लाख से अधिक संपत्ति – एक छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.2) 20 लाख से अधिक संपत्ति – एक मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.3) 30 लाख से अधिक संपत्ति – एक बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.4) संपत्ति में 1 घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी, एवं जूरी मंडल का चयन जिले की वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश
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(06) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीन गन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
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(7.1) छोटी बंदूको के प्रकार।
(7.2) मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
(7.3) बड़ी बंदूको के प्रकार।
(7.4) कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों के लिए बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक टेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
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(8.1) अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
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(8.2) DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएँगी।
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(8.3) जिला शस्त्र अधिकारी प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। जिला शस्त्र अधिकारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) प्रधानमंत्री की अनुमति से रक्षा मंत्री इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेंगे। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसेन्स के, केवल पंजीकरण करवाकर बंदूक, बन्दुक के पुर्जे, कारतूस, बुलेट प्रूफ जेकेट आदि बनाने की फैक्ट्री भीलवाड़ा में शुरू कर सकता है।
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(10) भीलवाड़ा जिले में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
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(10.1) यह क़ानून लागू होने के बाद भीलवाड़ा जिले में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व की कम्पनियां / फर्म आदि ही भीलवाड़ा में बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महा जूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो धारा (14) में दी गयी वोट वापसी प्रक्रियाओ का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महाजूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(11.4) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 600 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(11.5) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(11.6) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.7) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार :
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(12.1) जूरी मंडल किसी असज्जन नागरिक को हथियार रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेंगे। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.2) यदि कोई सज्जन नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.3) कोई व्यक्ति सज्जन है या असज्जन, इस बारे में अंतिम निर्णय करने का अधिकार जूरी के पास होगा। जूरी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड, चाल चलन, आरोप, दोष सिद्धि आदि के आधार पर इस बारे में अपने विवेक से फैसला लेगी।
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(12.4) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी एवं उनके खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई जूरी मंडल करेगा।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना (इस संपत्ति में 1 करोड़ का घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।

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(14) वोट वापसी : जिला शस्त्र अधिकारी ( DGO )
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी मतदाता जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ।
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(14.2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(14.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(14.4) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(14.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग – मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]

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--------- ड्राफ्ट का समापन---------
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बंदूकधारी भारतीय समाज के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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(1) यह क़ानून भीलवाड़ा में कैसे लागू होगा ?
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इस क़ानून की धारा (1) में जनमत संग्रह का प्रावधान दिया गया है। मुख्यमंत्री इस क़ानून पर हस्ताक्षर करके इसे गेजेट में निकालेंगे और गेजेट में आने के साथ ही इस पर जनमत संग्रह शुरू हो जाएगा। तब भीलवाड़ा का कोई भी नागरिक चाहे तो पटवारी कार्यालय में जाकर या अपने रजिस्टर्ड मोबाइल द्वारा SMS भेजकर इस कानून पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकता। यदि जिले के कुल मतदाताओं के 55% नागरिक इस पर अपनी सहमती दर्ज करवा देते है, तब सिर्फ तब ही यह क़ानून भीलवाड़ा में लागू होगा। जब तक 55% मतदाता इस पर अपनी सहमती दर्ज नहीं करते है, तब तक जनमत संग्रह जारी रहेगा। यदि किसी मतदाता ने इस क़ानून पर अपनी सहमती दर्ज करवा दी है, और वह अपनी सहमती रद्द करना चाहता है तो वह किसी भी दिन अपनी स्वीकृति को रद्द भी कर सकता है। इस तरह यह क़ानून नागरिको का स्पष्ट बहुमत प्राप्त करने के बाद ही जिले में लागू होगा अन्यथा नहीं।
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(2) क्या मुख्यमंत्री यह क़ानून बिना जनमत संग्रह के लागू कर सकते है ?
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यदि मुख्यमंत्री चाहे तो इस कानून की धारा 1 में से जनमत संग्रह का प्रावधान निकाल कर इसे सीधे लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री चाहे तो बिना जनमत संग्रह के इस क़ानून को राज्य के कुछ या किसी एक जिले में भी लागू कर सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि, यह क़ानून 55% नागरिको की स्पष्ट सहमती प्राप्त करने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए अन्यथा नहीं।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Apr 18 2020 10:02:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जब आप किसी नेता का समर्थन करना "चुनते" हो और पेड मीडिया भी अमुक नेता का समर्थन करना "चुनता" है तो इसमें से पहले क्या होता है ?
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पहले पेड मीडिया अमुक नेता का समर्थन करना शुरू करता है, या पहले आप अमुक नेता को ढूंढ निकालते हो और फिर पेड मीडिया अमुक नेता का समर्थन करता है ?
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नागरिको ने मनमोहन को पसंद करना कब शुरू किया था ?
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पहले पेड मीडिया के प्रायोजको ने मनमोहन को पसंद किया, और यह तय किया कि वे भारत के वित्त मंत्री होंगे !! और तब नागरिको के पास यह विकल्प आया कि मनमोहन को पंसद करना है या नहीं !!
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नागरिको ने मोदी साहेब को कब पंसद करना शुरू किया ? उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले या मुख्यमंत्री बनने के बाद !! (पेड मीडिया के प्रायोजको ने मोदी साहेब को 1994 में ही पसंद कर लिया था !!)
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2004 में मनमोहन सिंह जी को पहले किसने चुना था ? आपने या पेड मीडिया ने ?
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और अब सबसे जरुरी बात यह है कि -- यदि आपके द्वारा चुनना महत्त्वपूर्ण एवं उनके द्वारा चुनना महत्त्वहीन है तो 2009 में मनमोहन सिंह को 210 सीट कैसे मिली ?
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टीवी-अख़बार में आने से पहले भी क्या आप केजरीवाल जी परिचित थे ? यदि वे केजरीवाल को अख़बार-टीवी में नहीं छापते तो भी क्या आप उन्हें मुख्यमंत्री बनाने वाले थे ?
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योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में पहले किसने चुना था ?
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या आपको लगता है कि, देवेन्द्र फड़नवीस एवं मनोहर लाल खट्टर को आप चुनते है ?
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पहले वे टिकेट देते है या पहले आप वोट देते है ?
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और जो सांसद मंत्री बनता है उसे मंत्री कौन बनाता है ? आपका वोट या चुनिन्दा सांसदों में से किसी सांसद को दिया गया मीडिया कवरेज ?
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सभी ड्राइवरो को गाड़ी चलानी आती है, लेकिन रेस में कौन उतरेगा इसका फैसला आप नहीं करते। इसका फैसला पेड मीडिया करता है !! और तब आप यह चुनते हो कि अमुक ड्राइवर गाड़ी अच्छी चला रहा है, अमुक गलत। और पेड मीडिया के प्रायोजक ऐसे किसी ड्राइवर को रेस में नहीं उतारते जो उनके बताए रूट से अलग जा रहा हो।
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यह व्यवस्थागत डिजाइन है कि, अल्टीमेटली नागरिक हमेशा उन्ही नेताओ में से किसी को चुन पाते है, जिसे पेड मीडिया के प्रायोजक चुन चुके है !! यदि किसी नेता को पेड मीडिया ने ख़ारिज कर दिया है, तो वह फर्स्ट राउंड में ही बाहर हो जाता है !!
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समाधान ?
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कई लोगो को इसमें कोई समस्या ही नहीं दिखती है !! तो समाधान भी क्यों चाहिए ?
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पर जो इस व्यवस्था को समस्या की तरह देखते है, उनके लिए सूचना है कि यदि भारत के प्रत्येक मतदाता को वोट वापसी पासबुक मिल जाती है, तो स्थिति पलट जाएगी। तब पेड मीडिया में आये बिना भी कोई नेता मंत्री / मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री बनने के लिए खुद को प्रस्तुत कर सकेगा, और नागरिक किसी उम्मीदवार को पीएम / सीएम / मंत्री बनाने के लिए अपनी सहमती दर्ज करवा सकेंगे। #VoteVapsiPassbook
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वर्ना वोटिंग सिस्टम से इस मैकेनिज्म को तोड़ा नहीं जा सकता। क्योंकि वोट आप सिर्फ उसे कर सकते है जिसे वो टिकेट देते है। और इनमे से मंत्री वही बनता है जिसे वे टीवी-अख़बार में कवरेज देते है।
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और इसी वजह से जिसे मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनना होता है, वह पहले पेड मीडिया के प्रायोजको को खुश करने में अपनी मेहनत लगाता है। क्योंकि जब तक उन्हें पेड मीडिया अपने कंधे पर नहीं चढ़ाएगा तब तक आपको दिखेगा नहीं !!
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और कंधे से उतार दिए जाने पर लॉकेट भी बदल जाते है !! 2024 के लिए लॉकेट उन्होंने अभी से ही बाजार में उतार दिए है !! कुछ उत्साही नागरिको ने पहनने भी शुरू कर दिए है !!
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है गैबे गैब जिसको समझते है हम शहूद
है ख्वाब में हनोज, जो जागे है ख्वाब में
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गैब - छिपा हुआ
शहूद - प्रकट
हनोज - अभी, अब
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 19 2020 07:44:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हमें रिहा करो -- अमेरिका में प्रदर्शनकारी बंदूके लेकर सड़को पर उतर आये है। उनकी मांग है कि -- लॉकडाउन का आदेश निरस्त करें।
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झंडे एवं बंदूकों के साथ इस तरह के प्रदर्शन अमेरिका के कई राज्यों में हो रहे है।
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<https://www.theguardian.com/global/video/2020/apr/16/armed-protesters-demand-an-end-to-michigans-coronavirus-lockdown-orders-video?fbclid=IwAR0-XZo0Oz6euwn0SgEcqCV9gtvjzVmmKqUJHUSFp1RPFQPYyJPOytE-3Wg>;
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भारत के साथ साथ अमेरिका में भी पेड मीडियाकर्मी युद्धरत सैनिको की तरह एक दिन में 48 घंटे नागरिको को यह समझाने के लिए (ब्रेनवॉश?) काम कर रहे है कि लॉकडाउन मानव जाति के लिए राष्ट्र के लिए और सभी के लिए एक बहुत ही अच्छा कदम है। और इस वजह से लॉकडाउन समर्थक देशभक्त और राष्ट्रवादी है जबकि लॉकडाउन का विरोध करने वाले गद्दार है !!
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लेकिन शायद कुछ लोगों की खोपड़ी मोटी होने के कारण उनके भेजे तक पेड मीडिया की यह बात पहुंच नहीं पा रही हैl और या फिर ये लोग ब्रेन डेड है, अत: इनका ब्रेन वाश नहीं किया जा सकता।
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भारत के लिए समाधान -- भारत के सभी FB यूजर्स को अपने पीएम एवं सीएम को यह ट्विट भेजना चाहिए कि वे लॉक डाउन जारी रखना चाहते है, या इसे समाप्त करना चाहते है। मैंने सप्ताह भर पहले ही राजस्थान के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को लॉकडाउन की जगह पर "डी क्राउडिंग" करने का ट्विट भेज दिया था। आप भी भेजिए। आपको लॉकडाउन चालू रखना है तो लॉकडाउन चालू रखने का ट्विट भेज सकते है।
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बाकी अमेरिका का वो जाने और उनका काम जाने।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Apr 20 2020 11:00:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पालघर में साधु-संतो की भीड़ द्वारा लाठियों से पीट पीट कर नियोजित / अनियोजित हत्या :
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समाधान — आरोपियों का जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट का कानून छापकर इस तरह के अपराधों को रोका जा सकता है। शेष सभी निंदा, उपदेश, आलोचना, विश्लेषण आदि टाइम पास समाधान है, और इससे कोई बदलाव नहीं आएगा।
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(1) जो इस घटना को गंभीरता से लेते है उन्हें तत्काल हत्यारो के जूरी ट्रायल एवं नार्को टेस्ट की मांग करनी चाहिए। घटना का वीडियो उपलब्ध है, अपराधी आसानी से पहचाने जा सकते है। यदि मुझे जूरी में जाने का अवसर मिलता है तो मैं इन्हे सार्वजनिक फांसी देने की अनुशंषा करूँगा।
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यदि हत्यारों में कोई अवयस्क (Juvenile) शामिल है तब भी उसके अवयस्क होने या न होने का फैसला का जूरी करेगी।
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पुलिस कर्मीयों की अकार्यकुशलता एवं लापरवाही के आरोप की सुनवाई भी जूरी ही करेगी।
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(2) नार्को टेस्ट इसमें कैसे मदद करेगा ?
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(2.1) इस हत्याकांड के पीछे प्रतिस्पर्धी धर्म या संप्रदाय के शीर्ष लोगो का हाथ हो सकता है। या कोई ऐसा व्यक्ति जिसकी अमुक साधुओ से निजी दुश्मनी थी। यदि जूरी के सामने इनका सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाएगा तो साजिशकर्ता के नाम उछलकर सामने आ जाएंगे।
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(2.2) नार्को टेस्ट का इंजेक्शन लगने के बाद हत्यारे यह खुलासा कर सकते हैं कि उनके कपड़े, लाठियाँ वगेरह कहाँ हैं। लाठियां, हत्यारो के कपडे उन पर मौजूद खून के धब्बे एवं फिंगर प्रिंट आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत का काम करेंगे। यदि मामला जूरी के सामने जाता है तो 2 से 3 हफ्तों में इन्हे सजा हो जायेगी। यदि ये हाई जूरी में अपील के लिए जाते है तब 4 हफ्ते और जोड़ लीजिये। तब भी 3 महीने के भीतर इन्हे फांसी हो जायेगी।
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(2.3) यह तथ्य कि -- "इस तरह के जघन्य अपराधों में अब सार्वजानिक नार्को टेस्ट किया जाता है", अन्य लोगो को इस तरह के अपराध करने से हतोत्साहित करेगा, और अपराध में कमी आएगी। हम पिछले 15 वर्षो से कह रहे है कि इस तरह के जघन्य अपराधों में जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाना चाहिए। यदि कार्यकर्ताओ ने इस मांग को गंभीरता से लिया होता तो ऐसी कई हत्याएं रोकी जा सकती थी।
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(3) हमेशा की तरह पेड मीडिया पार्टियों, पेड मीडिया नेताओं एवं उनके समर्थको का स्टेंड है कि -- चाहे जो हो जाए लेकिन यह मामला भी जज ही सुनेगा !! और इन हत्यारों का जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट किसी भी सूरत में नहीं किया जाना चाहिए !!
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यदि आप कहेंगे कि जज भ्रष्ट है, तो वे कहेंगे कि हमें ईमानदार जजों की भर्ती करनी चाहिए। और जब आप उनसे पूछेंगे कि ईमानदार जजों को छांटने की प्रक्रिया क्या है, तो वे आपको कोई जवाब नहीं देंगे !! कुल मिलाकर वे चाहते है, कि आप जजों पर भरोसा करो !!
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और कुछ अति राष्ट्रवादी कार्यकताओ का यहाँ तक कहना है कि बिना किसी ट्रायल के हत्यारों का एनकाउंटर कर दिया जाए !! ( ताकि हत्याकांड की योजना बनाने वाले मास्टरमाइंड को बचाया जा सके !!)
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(4) इस मामले की सुनवाई जूरी द्वारा करने के आदेश पीएम भी दे सकते है और महाराष्ट्र के सीएम भी दे सकते है।
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यदि आप चाहते है कि मामले की सुनवाई जज ही करे तो आपको पीएम या सीएम से कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है, आप अपनी सोशल मीडिया वाल पर इस घटना की निंदा / आलोचना/ विश्लेषण आदि करने के लिए कुछ भी लिखते रह सकते है। क्योंकि तब मामले की सुनवाई जज ही करेगा, और वे सालों तक मामला लटकाकर रखेंगे, और इससे पॉलिटिकल माइलेज लेने की कोशिश भी करेंगे।
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और यदि आप हत्यारों का जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिए जाने का समर्थन करते है तो पीएम या सीएम को यह ट्विट भेज भी सकते है, और नहीं भी भेज सकते है :
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@PmoIndia , प्रधानमंत्री जी, कृपया पालघर में साधुओ की हत्या के आरोपियों का जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट का आदेश तत्काल रूप से जारी करें - #NarcotestByJuryOnPalgharAccused
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मेरे द्वारा भेजा गया ट्विट - <https://twitter.com/PawanJury/status/1252175963854643200>;
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घटना का 1 मिनिट का वीडियो. (वीडियो विचलित करने वाला है, कृपया देखने न देखने का निर्णय लेने के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करें -- <https://twitter.com/Kumar_7500/status/1252018152545955843?fbclid=IwAR1Ts7vTW1_Dzvo1DG1iJC5niD-DvWGWBRHPgFOWU8xh6rosAQw28Al9SbE>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 21 2020 08:31:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 21 2020 18:58:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Index 1 : क़ानून ड्राफ्ट्स की सूची जिनकी मैंने प्रधानमंत्री से मांग की है
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(18) जनमत संग्रह ; सज्जन नागरिको के लिए बंदूक रखने का अधिकार -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2790516097733275>;
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(17) NRCI ; प्रस्तावित भारतीय राष्ट्रिय नागरिकता रजिस्टर अधिनियम -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2694929377291948>;
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(16) इतिहास की पाठयपुस्तको के पुनरीक्षण की प्रक्रिया -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2609045222547031>;
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(15) सांसद एवं विधायक को वोट वापसी के दायरे में लाने का प्रस्ताव -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2542090435909177>;
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(14) प्रस्तावित रिक्त भूमि कर -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2391504844301071>;
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(13) जूरी पंचायत ; स्थानीय प्रशासन को सुधारने का प्रस्तावित क़ानून -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2347698935348329>;
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(12) गौ नीति : भारतीय नस्ल की गायों को सरंक्षित करने का क़ानून
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2343503319101224>;
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(11) रेगो ; केन्द्रीय अधिकारीयों को प्रजा अधीन करने का क़ानून
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2340635649387991>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 23 2020 11:32:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अर्नब गोस्वामी पर हमला करने वाले गुंडों का जूरी ट्रायल एवं सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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कृपया पीएम को ट्विट करें कि पेड अर्णव पेड गोस्वामी पर हमला करने वाले आरोपियों का जूरी ट्रायल एवं सार्वजानिक नारको टेस्ट का आदेश जारी करें।
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@PmoIndia #NarcoTestInPublic #ArnabAttackers #NaroTestInPublicOnArnabAttackers pls do narcotest in public on goons who attacked journalist Arnab Goswami
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@PmoIndia , अर्नव पर हमला करने वाले आरोपियों का जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट के आदेश जारी करें। #NarcoTestInPublic #ArnabAttackers #NaroTestInPublicOnArnabAttackers
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अतिरिक्त -- आश्चर्य का विषय है कि खुद पेड अर्नव पेड गोस्वामी भी हमला करने वाले आरोपियों के जूरी ट्रायल एवं सार्वजनिक नार्को टेस्ट का विरोध कर रहे है !! और इससे भी ज्यादा हैरत की बात यह है कि पेड अर्नव पेड गोस्वामी के समर्थक भी आरोपियों का जूरी द्वारा ट्रायल एवं सार्वजानिक नार्को टेस्ट के खिलाफ है !!
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मेरा ट्विट -- <https://twitter.com/PawanJury/status/1253285107160539137>;
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