Pawan Jury BhilwaraRj
जनमत संग्रह ; सज्जन नागरिको के लिए बंदूक रखने का अधिकार
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( Referendum ; Right to Bear Gun for Law Abide Citizens )
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इस क़ानून का सार : प्रधानमंत्री यह क़ानून सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में भारत के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता यह क़ानून लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। प्रधानमंत्री किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून किसी राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री भी यह क़ानून अपने राज्य के कुछ जिलो या पूरे राज्य में लागू कर सकते है।
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इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं, एवं जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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जनमत संग्रह से पास होने के बाद यह क़ानून प्रत्येक सज्जन नागरिक को बंदूक रखने का अधिकार देगा। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले सज्जन नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 कारतूस रखना अनिवार्य होगा।
#GunLawReferendum #P20180436107
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यदि आप बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराना चाहते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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प्रधानमंत्री जी, कृपया बंदूक रखने के क़ानून पर जनमत संग्रह कराएं - #GunLawReferendum
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही भारत में एक देश व्यापी जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि भारत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए “हाँ” दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
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(1.1) जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ हाँ या ना दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले प्रधानमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद भारत का कोई मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
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(1.2) कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
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(1.3) यदि देश की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो प्रधानमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।
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(1.4) प्रधानमंत्री राज्य के 51% मतदाताओं की स्वीकृति लेकर अमुक राज्य के किसी जिले में, एवं भारत के 51% मतदाताओ की स्वीकृति से किसी राज्य में इस क़ानून को 4 वर्ष के लिए निलम्बित कर सकते है।
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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है – ऐसा नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून अवयस्क नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद भारत का कोई भी सज्जन वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत बन्दूक रख सकेगा।
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(3.1) बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
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(3.2) कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की दो बंदूके अपने पास रख सकेगा।
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(3.3) दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) यदि कोई सज्जन वयस्क नागरिक 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित मात्रा में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
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(4.1) 10 लाख से अधिक संपत्ति – एक छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.2) 20 लाख से अधिक संपत्ति – एक मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.3 ) 30 लाख से अधिक संपत्ति – एक बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
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(4.4) संपत्ति में 1 घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी, एवं जूरी मंडल का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
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(06) प्रधानमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीन गन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
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(7.1) छोटी बंदूको के प्रकार।
(7.2) मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
(7.3) बड़ी बंदूको के प्रकार।
(7.4) कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों के लिए बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक टेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
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(8.1) अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
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(8.2) DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएँगी।
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(8.3) जिला शस्त्र अधिकारी प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। जिला शस्त्र अधिकारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) भारत सरकार इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेगी। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसेन्स के, केवल पंजीकरण करवाकर बंदूक या बन्दुक के पुर्जे या बंदूक की गोलियाँ बनाने की फैक्ट्री शुरू कर सकता है। कोई भी नागरिक बुलेट-प्रूफ जैकेट भी बना सकता है।
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(10) भारत में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
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(10.1) यह क़ानून लागू होने के बाद भारत में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व की कम्पनियां / फर्म आदि ही बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महा जूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो धारा (14) में दी गयी वोट वापसी प्रक्रियाओ का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(11.4) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 600 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(11.5) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
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(11.6) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.7) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार :
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(12.1) जूरी मंडल किसी असज्जन नागरिक को हथियार रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेंगे। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.3) यदि कोई सज्जन नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.4) कोई व्यक्ति सज्जन है या असज्जन, इस बारे में अंतिम निर्णय करने का अधिकार जूरी के पास होगा। जूरी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड, चाल चलन, आरोप, दोष सिद्धि आदि के आधार पर इस बारे में अपने विवेक से फैसला लेगी।
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(12.5) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी एवं उनके खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई जूरी मंडल करेगा।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना (इस संपत्ति में 1 करोड़ का घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।
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(14) वोट वापसी : जिला शस्त्र अधिकारी ( DGO )
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी नागरिक जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ।
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(14.2) कोई भी नागरिक किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(14.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(14.4) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(14.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
रेंज वोटिंग – प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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--------- ड्राफ्ट का समापन---------
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