Posts for 2022-08

Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Aug 02 2022 09:31:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि आपको फिर भी “लाल सिंह चड्डा” देखनी है तो इसे टोरेंट पर देखें। इसे देखने के लिए पैसा खर्च न करे।

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Can someone make HINDI as well ?
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BOYCOTT - Lal Singh Chadha movie. Watch on TORRENT if you must. But do NOT buy tickets of this THUG !!!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Aug 04 2022 09:25:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हर महीने खोदे जा रहे खनिज में से अपने हिस्से का पैसा हर महीने अपने बेंक एकाउंट में प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को यह निर्देश भेजे :
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मेरे हिस्से के खनिज का पैसा हर महीने मेरे खाते में भेजना शुरू करने के लिए #खम्बा_क़ानून गेजेट में छापे।
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#DhanVapsiPassbook
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 05 2022 20:57:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आज 5-8-2022 को मुख्यमंत्री को निर्देश भेजा कि - खनिज मुनाफ़ा बँटवारा क़ानून गेजेट में छापकर धन वापसी पासबुक जारी करे ।
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#खम्बा_क़ानून , #KhambaLaw
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#DhanVapsiPassbook

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Aug 07 2022 13:26:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि 2014 में मोदी साहेब खनिज मुनाफ़ा बँटवारा क़ानून गेजेट में छाप देते तो पिछले 8 वर्षों के दौरान भारत के प्रत्येक 5 सदस्यीय परिवार को अब तक 15,00,000 ₹ (पंद्रह लाख रुपए !!) मिल चुका होता !!
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पिछले 100 माह की यह वो नक़द राशि है जिससे मोदी साहेब आपके परिवार को वंचित कर चुके है, और इसमें से अधिकांश हिस्सा पेड मीडिया के प्रायोजकों (रॉकफ़ेलर, रॉथ्स्चायल्ड, टाटाओ, अड़ानीयों और अम्बानीयों) की जेब में गया है !!!
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गणना :
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खनिज मुनाफ़ा बँटवारा क़ानून गेजेट में आने से खोदे जा रहे खनिज का मुनाफ़ा भारत के 135 करोड़ नागरिकों में बराबर बंटेगा।
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आँकड़ो के अनुसार प्रति व्यक्ति यह राशि 3000-4000 Rs है । और यह राशि हर महीने प्रत्येक नागरिक के बेंक एकाउंट में जमा होगी।
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per person- 3000 rs monthly
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5 person family- 3000*5 = 15,000 rs monthly
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15,000*100 = 15,00,000 ₹
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प्रति व्यक्ति यह राशि 3 लाख रू बैठती है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 08 2022 20:58:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अंधभक्ति की क़ीमत जो आप चुका रहे है - 3000 Rs हर महीना !!!
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भारत में हर महीने जितना खनन होता है उसमें से सिर्फ़ 15% ऑन बुक आता है और शेष 85% कहीं दर्ज नही होता।
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यह 15% सरकार के पास जमा होता है और शेष 85% में से अधिकांश पेड मीडिया के प्रायोजकों (रॉकफ़ेलर, रॉथ्स्चायल्ड, टाटाओ , अम्बानीयों, अड़ानीयो, जिंदलो, रेड्डियो) की जेब में और कुछ हिस्सा नेताओं, जजों और अधिकारियों की जेब में चला जाता है।
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यदि खनिज मुनाफ़ा बँटवारा क़ानून गेजेट में आता है तो यह राशि भारत के नागरिकों में बराबर बटेंगी और आपके खाते में हर महीने 3000-4000 Rs महीने जमा होंगे।
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मोदी साहेब, केजरीवाल, और सोनिया गांधी के अंधभग़त चाहते है कि — यह राशि पेड मीडिया के प्रायोजकों की जेब में जानी चाहिए, आपके खाते में नही !!! और इसीलिए इस तिकड़ी के अंधभग़त खनिज मुनाफ़ा बँटवारा क़ानून के ख़िलाफ़ है।
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इस तरह उनकी अंधभक्ति की क़ीमत आप 3000 Rs प्रति माह की दर से चुका रहे है।
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#DhanVapsiPassbook
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#KhanijMunafa
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 08 2022 21:42:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जो नागरिक विगत 5 तारीख़ को पीएम/सीएम को खुला निर्देश पत्र नही भेज सके है वे इस महीने की किसी भी तारीख़ को पत्र भेजे। इसके लिए आपको अगले माह की 5 तारीख़ का इंतज़ार करने की ज़रूरत नही है।
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हमारे क़ानून ड्राफ़्ट में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि यदि आप किसी वजह से महीने की 5 तारीख़ को पीएम को निर्देश पत्र नही भेज पाते है तो अन्य किसी दिन को भी निर्देश पत्र भेज सकते है। किंतु देखने में आया है कि जो नागरिक 5 तारीख़ को पत्र नही भेज पाते वो अगली 5 तारीख़ का इंतज़ार करने लगते है। जो कि ठीक नही है।
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(1) अपना पूरा प्रयास करे कि आप 5 तारीख़ को 5 बजे पत्र भेज सके।
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(2) यदि आप 5 तारीख़ को 5 बजे पत्र नही भेज पाते है तो 5 तारीख़ को किसी भी समय भेज सकते है ।
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(3) और यदि आप 5 तारीख़ को पत्र नही भेज पाते है है तो 5 तारीख़ के बाद महीना ख़त्म होने से पहले किसी भी दिन पत्र भेज दें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 12 2022 07:18:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

फ़ीचर फ़िल्म “लाल सिंह चड्ढा” एवं फ़ीचर फ़िल्म “रक्षाबंधन” का बहिष्कार करे। इसे देखने के लिए पैसे खर्च न करे।
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यदि भारत में जूरी कोर्ट क़ानून लाग़ू होता तो हिंदू धर्म का विद्रूप चित्रण करने के एवज़ में आमिर खान और राजीव भाटिया (उर्फ़ अक्षय कुमार) को कारावास हो चुका होता ।
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और यदि सेन्सर बोर्ड चेयरमेन वोट वापसी के अधीन होता तो पर्दे पर गलाजत परोसने वाली इस तरह की फ़िल्मों में इतने कट लगते कि फ़िल्म मुरब्बा बन जाती।
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#JuryCourt
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#BoycottLalSinghChadda
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 13 2022 14:56:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 15 2022 08:45:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

The first Indian Army General appointed by Jawaharlal Ghazi on 16-aug-1947 was a British, who had killed 12000 unarmed azad hind fauz soldiers, sleeping in custody after surrender. And no congress or communist or RSS MP opposed his appointment !!!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 15 2022 08:48:13 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

स्वतंत्रता आंदोलन की वजह से जो एक मात्र बदलाव आया वह था -- प्रत्येक वयस्क भारतीय को वोट देने का अधिकार होगा और वोट से यह तय होगा कि देश कौन लोग चलाएंगे।
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पूरे देश में चुनाव हुए और भारत के आम नागरिको ने अपनी सरकार चुनी। दिन था - 17 अप्रेल 1952
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मेरे विचार में यह वो दिन है जिसे हर भारतीय को सेलिब्रेट करना चाहिए। इस बात पर भिन्न राय हो सकती है कि इस दिवस को क्या नाम दिया जाना चाहिए। लेकिन इतना तय है पूरे स्वतंत्रता आंदोलन की अंतिम सफलता इसी दिन में निहित है।
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क्योंकि असली स्वतंत्रता आन्दोलन इस बिंदु पर चलाया जा रहा था कि -- भारत के प्रत्येक नागरिक को मताधिकार दिया जाए। (क्रांतिकारियों ने इसमें वोट वापसी की मांग को भी जोड़ दिया था)
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1947 में भारत आजाद हो गया था लेकिन भारतीयों को वोटिंग राइट्स नहीं मिले थे। और जिन्हें सत्ता हस्तांतरित हुई थी वे इस फिराक में थे कि भारत के सभी वयस्कों को मताधिकार नहीं दिए जाने चाहिए। जब भारत में संविधान लागू हुआ तब उसमें यह जोड़ा गया था कि प्रत्येक वयस्क को मत देने का अधिकार होगा। किन्तु इस बारे में क़ानून 1951 में लागू हुआ।
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1952 में पहले आम चुनाव हुए और भारतीयों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके अपने प्रतिनिधि (शासक) चुने।
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1952 से पहले तक भारत का प्रधानमंत्री एवं उसकी केबिनेट को भारतीयों ने नहीं बल्कि गोरो ने चुना था !!
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1949 तक हमारी सेना का जनरल भी गोरा ही था, और अमुक जनरल ने गोवा का विलय करने के लिए सैन्य शक्ति का प्रयोग करने से इंकार कर दिया था !!
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1949 तक भारत का रिजर्व बेंक अधिकृत रूप से ब्रिटिश के अधीन था !!
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1952 तक भारत की पूरी सरकार, सेना आदि गोरो द्वारा नियुक्त थी। आम भारतीय नागरिको का इससे कोई लेना देना नहीं था।
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पहला एवं निर्णायक बदलाव 1952में आया। जब भारत के आम नागरिको ने अपनी सरकार चुनी।
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और वयस्क मताधिकार आने का फायदा यह हुआ कि अब व्यवस्था में वांछित बदलाव हेतु आवश्यक कानूनों लाने की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ताओ को शासन के खिलाफ बन्दुक उठाने की जरूरत नहीं रही है। वे चुनावों में जाकर यह काम कर सकते है।
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मेरा बिदु है कि 1947 को प्राप्त आजादी चाहे धोका है, या धोका नहीं है, यह जो भी है, लेकिन 15 अगस्त के दिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था जिससे शासक वर्ग के खिलाफ आम नागरिको की शक्ति में वृद्धि हुयी हो। दरअसल यह दिन भी स्वतंत्रता आदोलन की प्रक्रिया का हिस्सा था, जिससे हम एक कदम और आगे बढे थे। बस याग इतना ही है, इससे ज्यादा नहीं। और यह आन्दोलन 1952 में जाकर सफल हुआ था।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 27 2022 18:53:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चिकन टिक्का की जगह कोविड छप गया है !!
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(लिंक उपलब्ध नही होने के कारण मुझे नही पता कौनसा चिथड़ा है।)
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 29 2022 08:15:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Twin towers demolition
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इस तरह की इमारतें खड़ी करने के दौरान कई स्तर पर कई क़ानून तोड़ने के एवज़ में नेताओ-अधिकारियों-मीडिया कर्मियों-जजों को घूस देनी होती है। यदि जजों को उनका इच्छित हिस्सा पहुँचा होता तो जज टॉवर नही गिरवाते थे।

संदेश साफ़ है - जजों को उनका हिस्सा दो, वरना भुगतने के लिए तैयार रहो !!

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