Posts for 2020-07

Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 01 2020 09:22:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चीन भारत से काफी शक्तिशाली देश है, फिर वो सीमा से पीछे क्यों हट रहा है?
.
(1) निर्भरता
.
निर्भरता , निर्भरता , निर्भरता .....
.
क्योंकि भारत युद्ध लड़ने के लिए अमेरिकी हथियारों पर बुरी तरह से निर्भर है। यदि अमेरिकी भारत के प्रधानमंत्री को "आगे बढ़ो" (Go ahead) बोल देते है तो भारत के नेता+पेड मीडियाकर्मी जोश में आ जायेंगे। और यदि अमेरिका भारत के नेताओ को "अभी नही" (Stop) बोल देता है तो भारत नर्म रवैया अपनाकर पीछे हटने लगेगा।
.
यदि भारत एवं चीन में युद्ध होता है और यदि अमेरिका भारत को देरी हथियार देता है तो भारत की सेना चीनियों को 2 हफ्ते से ज्यादा रोक पाने में सक्षम नहीं है। यह लिखते हुए मुझे अच्छा नहीं लगता, और जाहिर है, आपको भी यह पढ़ते हुए अच्छा नहीं लगेगा। लेकिन यह एक तथ्य है !!
.
भारत लड़ाकू विमान नहीं बनाता
.
मिलिट्री ड्रोन नहीं बनाता
.
SSN एवं SSBN सबमरीन नहीं बनाता
.
एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं बनाता
.
लड़ाकू हैलिकोप्टर नहीं बनाता
.
हम टैंक भी नहीं बनाते
.
और यहाँ तक कि हम होवित्जर एवं तोपे तक नहीं बनाते !!
.
हम लेसर गाईडेड बम नहीं बनाते
.
और लेसर गाईडेड मिसाइले भी नहीं बनाते
.
हम ये सभी उपकरण आयात करते है !! और जो कुछ हथियार हम भारत में बनाते है वे असेम्बल्ड है। मतलब उनके इंजन, कंट्रोल पेनल एवं कोर कोम्पोनेंट आयातित है। और ये कोम्पोनेंट आयातित इसीलिए है, क्योंकि हमें ये बनाने नहीं आते !!
.
चीन अपने सभी हथियार खुद से बनाता है, और उसके पास हथियारों का उत्पादन करने का बहुत बड़ा ढांचा है। अत: भारत चीन के खिलाफ युद्ध में सिर्फ तब जाएगा जब अमेरिका इसकी अनुमति दे। भारत अपने दम पर इसका फैसला लेने की स्थिति में नहीं है।
.
---------
.
(2)
.
मैं और मेरे अलावा भी और मुझसे भी पहले से भारत के कई रिकालिस्ट कार्यकर्ता पिछले 20 वर्षो से भारत के नागरिको को लगातार यह सूचित कर रहे है कि – हमें निकट भविष्य में युद्ध से गुजरते हुए भारत का इराकीकरण हो जाने या इसके एक विशाल फिलिपिन्स में बदल जाने का भय है। और अपने ज्यादातर जवाबो में मैंने लिखा है कि किन कानूनों को गेजेट में छापने से हम ऐसे प्रशासन की रचना कर सकते है जिससे सिर्फ 5 साल में हम चीन का मुकाबला करने लायक स्वदेशी तकनीक आधारित हथियार बना सके।
.
और हमने इन जवाबो में से ज्यादातर में इस तथ्य को दर्ज किया है -
.
(2.1) कि भारत युद्ध लड़ने के लिए पेड मीडिया के प्रायोजको (अमेरिका+ब्रिटेन+फ़्रांस की हथियार निर्माता कम्पनियों के मालिको) पर बुरी तरह से निर्भर है।
.
(2.2) कि अमेरिका चीन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है, और जैसे जैसे भारत में अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का नियंत्रण बढ़ रहा है वैसे वैसे युद्ध नजदीक आ रहा है।
.
(2.3) कि अमेरिका के हथियार निर्माता चीन को तोड़ने के लिए भारत का इस्तेमाल उसी प्रकार ऊंट की तरह करेंगे जिस तरह उन्होंने भारत का किला तोड़ने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल ऊंट की तरह कारगिल युद्ध में किया था।
.
तो मेरे पास इस विषय पर कहने के लिए नया कुछ नहीं है। घूम फिर कर बात फिर से वही है कि, भारत पूरी तरह से अमेरिकी हथियार निर्माताओं के ट्रेप में आ चुका है। जैसा कि कारगिल युद्ध के बाद से वे करते आये है, आगे भी पेड मीडिया के प्रायोजक निम्न तरीके से भारत के पीएम की बांह मरोड़ेंगे :
.
(2a) अमेरिकी कम्पनियां “चीन से बचाने” के एवज में पीएम को मजबूर करेगी कि वे भारत में ऍफ़डीआई की सीमाएं और भी बढाएं और भारत के खनिज+जमीन+प्राकृतिक संसाधन+सरकारी उपक्रम चिल्लर दामो में अमेरिकी कम्पनियों के हवाले कर दें।
.
(2b) भारत चीनी कम्पनियों को बाजार से बाहर करें ताकि अमेरिकी कम्पनियों का हिस्सा बढ़ सके। और इस तरह भारत की निर्भरता अमेरिकियों पर और भी बुरी तरह से बढ़ जाए।
.
(2c) अगले चरण में अमेरिकी भारत के पीएम को मजबूर कर सकते है कि वे अमेरिकी कम्पनियों को भारत में हथियार निर्माण के कारखाने लगाने एवं हथियारों के उत्पादन के लिए मुफ्त के खनिज लेने की अनुमति दे।
.
(2d) फिर वे पीएम को बाध्य कर सकते है कि, वे अमेरिकी सेनाओं को भारत में अपने सैन्य अड्डे बनाने की अनुमति दें।
.
(2e) और फिर अमेरिकी+फ़्रांस+ब्रिटिश भारत की जमीन, सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल करके चीन को ख़त्म करेंगे।
.
यदि युद्ध हुआ तो भारत का इराकीकरण हो जाएगा और यदि युद्ध टल गया तो अमेरिकी कम्पनियां धीरे धीरे भारत को एक विशाल फिलिपिन्स* में बदल देगी।
.
(*) फिलिपिन्स – जिसे पेड मीडिया के प्रायोजको (अमेरिकी हथियार निर्माता) ने 100% ईसाई देश में बदल दिया !! जिसके सभी प्राकृतिक संसाधनों का अमेरिकी कम्पनियों ने अधिग्रहण किया, उनके स्थानीय कारखानों को तबाह कर दिया, विज्ञान-गणित के ढांचे को तोड़ दिया, और पूरे देश को आयात पर निर्भर बना दिया !! और ऐसा उन्होंने एक भी गोली चलाये बिना किया !! सिर्फ पेड मीडिया की सहायता से !!!
.
-----------
.
(3)
.
तो अब भारत के नागरिको को निम्नलिखित स्थितियों पर विचार करते हुए अपने रूख पर फैसला लेना चाहिए :
.
(3a) अमेरिका चीन को तोडना चाहता है, और चीन का किला तोड़ने के लिए वह भारत का इस्तेमाल ऊंट की तरह करेगा। अमेरिका भारत में इतना ताकतवर हो चुका है कि भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका का ऊंट बनने से इनकार करने की स्थिति में नहीं है। किन्तु यदि भारत के नागरिक पीएम पर दबाव बनाते है तो पीएम को बाध्य किया जा सकता है कि वे अमेरिकी शर्तो को मानने से इनकार कर दें।
.
(3b) अब यहाँ समस्या यह है कि, लेकिन यदि भारत अमेरिका का ऊंट बनने से इनकार कर देता है और सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी हथियारों का उत्पादन नहीं करता तो चीन भारत के बाजार एवं संसाधनों पर कब्ज़ा करने के लिए भारत में घुसता जाएगा। क्योंकि अभी हम चीन से सिर्फ इसीलिए बचे हुए है क्योंकि अमेरिका हमारी पीठ पर सवार है। (और अमेरिकी हमसे इसकी कीमत वसूल रहे है, और आगे भी वसूलेंगे)
.
दुसरे शब्दों में, यदि हम अमेरिका का ऊंट बनने से इनकार करते है तो चीन हमें निगल जाएगा, और यदि हम अमेरिका का ऊंट बनने को राजी हो जाते है, तो चीन से युद्ध में हम आधे तबाह हो जायेंगे, और युद्ध में चीन को तबाह करने के बाद अमेरिका भारत का अधिग्रहण कर लेगा।
.
(3.1) पेड मीडिया का स्टेंड : भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियां एवं पेड मीडिया नेता ख़ुशी ख़ुशी अमेरिका के लिए भारत को ऊंट बनाने के लिए राजी है। और यही वजह है कि वे कभी भी इस पंक्ति का उच्चारण नहीं करते कि – भारत चीन से युद्ध लड़ने के लिए अमेरिकी हथियार कम्पनियों पर बुरी तरह से निर्भर है, और हम इस निर्भरता की कीमत निरंतर रूप से चुका रहे है, और आगे भी बहुत बड़ी कीमत चुकायेंगे। और इसीलिए आप पेड मीडिया में नजर आने वाले किसी भी चेहरे के मुहँ से यह बात नहीं सुनेंगे कि भारत को हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कौनसे कानून गेजेट में छापने चाहिए !!
.
और इसीलिए पेड मीडिया से फीडिंग लेकर सोशल मीडिया पर अपने आप को अभिव्यक्त करने वाले किसी भी कार्यकर्ता को यह चर्चा करते नहीं पायेंगे कि - भारत को हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कौनसे कानून गेजेट में छापने चाहिए !!
.
दुसरे शब्दों में, चुनाव जीतने के लिए पेड मीडिया पर निर्भर ये सभी शीर्ष नेता एवं पेड मीडिया से “बौद्धिक फीडिंग” लेकर “जागरूकता” की अफीम बांटने वाले इनके समर्थक एवं बुद्धिजीवी भारत को हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के बिंदु पर जानबूझकर खामोश रहकर भारत को अमेरिका का ऊंट बनाने के समर्थक है।
.
(3.2) मेरा स्टेंड : मेरे पास इस समस्या से बचने के 2 प्रस्ताव है
.
3.2.1. त्वरित समाधान :
.
प्रत्येक सज्जन नागरिक के लिए बंदूक रखना अनिवार्य करने का क़ानून बनाकर हम सिर्फ 1 वर्ष में अमेरिका एवं चीन के दबाव से बाहर आ सकते है। यदि नागरिको के पास हथियार आ जाते है तो चीन एवं अमेरिका भारत को सैन्य शक्ति द्वारा दबाव में लाने की क्षमता तुरंत रूप से खो देंगे।
.
3.2.2. दीर्घकालिक समाधान :
.
फिलहाल, भारत में निजी कम्पनियों को हथियार बनाने की अनुमति नहीं है। यदि वोइक क़ानून (WOIC – Wholly Owned by Indian Companies) गेजेट में छाप दिया जाता है तो भारत में बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन करने का रास्ता साफ़ हो जायेगा। किन्तु सिर्फ WOIC आने से हम हथियार नहीं बना सकेंगे। जब तक हम जमीन की कीमतें कम करके पुलिस-जजों का भ्रष्टाचार दूर नहीं करते तब तक बड़े पैमाने पर उच्च तकनीक वाले हथियारों का उत्पादन करना संभव नहीं है। जमीन की कीमतें कम करने के लिए मेरा प्रस्ताव GST हटाकर ELT (ELT = Empty Land Tax) लाने का है। और पुलिस-जजों को ठीक करने के लिए मेरा सुझाव है कि, प्रस्तावित जूरी कोर्ट गेजेट में छापा जाए।
.
यदि निचे दिए गए प्रस्तावित क़ानून गेजेट में छाप दिए जाते है तो हम क्रमिक रूप से 1 वर्ष एवं 5 वर्ष में भारत की सेना को इतना आत्मनिर्भर बना सकते है कि चीन एवं अमेरिका को सैन्य दृष्टी से खुद के बूते टक्कर दे सके।
.
Woic
Empty Land Tax
Jury Court
Right to Bear Gun for Law Abide Citizens
.
मेरा मानना है कि यदि भारत के कार्यकर्ता उपरोक्त कानूनों को गेजेट में छपवाने में सफल नहीं होते है तो भारत को निश्चित रूप से निचे दी गयी किसी स्थिति या सभी स्थितियों से गुजरना पड़ेगा :
.
जैसा कि अमेरिका अभी कर रहा है, चीन का भय दिखाकर भारत के प्राकृतिक संसाधनों, खनिज संपदाओ, राष्ट्रीय सम्पत्तियों का शांतिप्रिय ढंग से और भी तेजी से अधिग्रहण करेगा।
.
अमेरिका भारत का इस्तेमाल चीन+ईरान+पाकिस्तान+उत्तरकोरिया को तोड़ने में करेगा, और इस युद्ध में भारत पूरी तरह टूट जाएगा।
.
युद्ध के बाद अमेरिकी कम्पनियां बचे खुचे भारत को लूट लेगी।
.
अमेरिका एवं चीन में यदि समझौता हो जाता है तो ये दोनों देश भारत के संसाधनों एवं बाजार को आपस में बाँट लेंगे, और भारत के स्थानीय कारखानों का बचा खुचा आधार भी पूरी तरह से तोड़ देंगे।
.
कैसे उपरोक्त कानूनों के गेजेट में आने से भारत स्वदेशी तकनीक आधारित (Made in India Made by Indians) फाइटर प्लेन जैसे आधुनिक हथियारों का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकता है, इस बारे में विस्तृत रूप से मैंने अन्य जवाबो में बताया है। उन्हें पढ़ें।
.
-------

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 02 2020 08:20:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत में टिक टॉक सहित 58 चीनी एप पर प्रतिबंध क्यों लगा?
.
भारत सरकार का कहना है कि – इससे हमारी संप्रभुता और अखंडता, रक्षा, राज्य की सुरक्षा को खतरा है।
.
मेरा हमेशा से यह रूख रहा है कि मॉस मीडिया (Paid Media) में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हथियार कम्पनियों के बाद मॉस मीडिया कम्पनियां किसी भी देश की संप्रभुता के लिए सबसे अधिक खतरनाक होती है। अत: मैं सरकार के इस फैसले से सहमत हूँ, और समर्थन करता हूँ।
.
टिक टोक वगेरह मॉस मीडिया कम्पनियां नहीं है। यह सोशल मीडिया कम्पनियां है। किन्तु सोशल मीडिया कम्पनियों की प्रकृति इतनी लचीली है कि ताकतवर होने के साथ ही ये मॉस मीडिया की तरह व्यवहार करने लगती है / करने लगेगी। और इस आधार पर सरकार का फैसला सही है।
.
अब असली समस्या पर आइये :
.
फेसबुक एवं व्हाट्स एप असली समस्या है। “सुरक्षा एवं संप्रभुता को खतरा” लिहाज से टिक टोक फेसबुक-व्हाट्स एप के सामने मच्छर है। फेसबुक अगले कुछ ही वर्षो में इतना ताकतवर हो जाएगा कि यह मॉस मीडिया की तरह पूरे समुदाय को गिरफ्त में ले लेगा। जहाँ तक डेटा की बात है, टिक टोक के पास फेसबुक की तुलना में नगण्य डेटा है। और व्हाट्स एप पर भेजा गया प्रत्येक मेसेज CIA की पहुँच में है !! और हमारे सैन्य अधिकारी तक कमांड देने के लिए व्हाट्स एप का इस्तेमाल कर रहे है !!
.
मेल सर्विस इंटरनेट का खून है। और जासूसी करने एवं डेटा जुटाने में जी मेल फेसबुक एवं व्हाट्स एप का बाप है। और इसी वजह से चीन में जी मेल, फेसबुक, व्हाट्स एप, गूगल और यू ट्यूब पर प्रतिबन्ध है !! रूस ने भी एंड्रॉयड को अनौपचारिक रूप से बेन कर दिया है और स्मार्टफोन्स के लिए स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम को बढ़ावा दे रहा है।
.
जो भी देश अपने आप को किसी अन्य देश पर पूरी तरह से निर्भर नहीं कर देना चाहता वह ऐसा ही करेगा। वह गूगल, एंड्रॉयड, फेसबुक, व्हाट्स एप एवं जीमेल को बेन कर देगा और इनके विकल्प के रूप में स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित करेगा.
.
सिंगापुर बेस्ड कम्पनी Broadcomm अमेरिकी संचार कम्पनी Qualcomm का अधिग्रहण करना चाहती थी। किन्तु ट्रम्प ने अधिग्रहण को "सुरक्षा के लिए खतरा" बताते हुए इस पर रोक लगा दी थी.
.
लेकिन यहाँ भारत में हमारे पास पेड मीडिया द्वारा खड़े किये गए सोनिया जी, मोदी साहेब एवं केजरीवाल जी जैसे नगीने है जो पूरे देश को फेसबुक, एंड्रॉयड एवं गूगल की गिरफ्त में दे देना चाहते है !! सिर्फ एक बटन दबाकर अमेरिका गूगल के माध्यम से एंड्रॉइड एप्लिकेशन पर चल रहे भारत के पूरे या आंशिक नेटवर्क को बंद कर सकता है और इसका इल्जाम पाकिस्तान या चाइना पर डाल सकता है !!
.
दूसरे शब्दो में अमेरिकी धनिको ने हम भारतियों को कैशलेस सिस्टम में भुगतान के उस सिस्टम को स्वीकार करने के लिए बाध्य/ राजी कर लिया है जिसे अमेरिका किसी भी समय बंद कर सकता है !!!
.
इतना ही नहीं हमारे नेता पेड मीडिया के प्रायोजको को खुश करने के लिए इससे भी एक कदम आगे गए !! उन्होंने कोमकासा एग्रीमेंट साइन किया !! यह एग्रीमेंट 2018 में मोदी साहेब ने साइन किया था और सोनिया जी एवं केजरीवाल जी ने इसका पूरा समर्थन किया था !!
.
Comcasa एग़्रिमेंट अमेरिका की सेना को भारतीय सेना के आपसी सामरिक संवाद , युद्ध पोत , विमान आदि की स्थिति की जानकारी से अपडेट रहना सम्भव बनाता है। यह एग्रीमेंट होने से भारत की सेना की सामरिक महत्त्व की कोई भी जानकारी ख़ुफ़िया / कोनफ़िडेंसीयल नही रहेगी। सूचना , स्थिति के अलावा भारतीय युद्ध पोतो, पनडुब्बी , जहाज़ , विमान , रडार आदि के संचालन पर भी अमेरिकियों का नियंत्रण रहेगा।
.
भारत का पेड मीडिया (Paid Media) पहले से ही अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माताओ के कब्जे में है। अत: पेड मीडियाकर्मी इस बिंदु को कभी नहीं छूते कि हमें फेसबुक एवं व्हाट्स एप पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए। यदि हम फेसबुक-व्हाट्स एप को निकाल बाहर कर देते है तो जल्दी ही इस वैक्यूम को कवर करने के लिए भारतीय कम्पनियां सामने आएगी और पनपने लगेगी। और इस तरह हम क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर' होना शुरू कर देंगे।
.
चाइनीज एप पर बेन लगाने की मांग कई कार्यकर्ता वर्षो से कर रहे है। लेकिन पेड मीडिया से फीडिंग लेने वाले बुद्धिजीवियों को यह खतरा नजर नहीं आता था। क्योंकि वे किसी भी चीज को खतरे के रूप में सिर्फ तब देखने के आदि है जब उन्हें यह जानकारी पेड मीडिया द्वारा दी जाए !!
.
और इसीलिए उन्होंने कभी भी पीएम को ट्विट / पोस्टकार्ड भेजकर चाइनीज एप पर बेन लगाने की मांग नहीं की !! लेकिन जैसे ही पेड मीडिया ने उन्हें बताया कि – “अरे चाइनीज एप तो देश की संप्रभुता एवं सुरक्षा के लिए खतरा है” , और तुरंत उनमे देशभक्ति का ज्वार उठ खड़ा होता है !!
.
[इसी को मैं पेड मीडिया की चपेट कहता हूँ। नागरिक अपने सहज बोध (Common Sense) से कोई निर्णय नहीं लेते, बल्कि उनके स्टेंड लेने के समय (Timing) एवं रुख का फैसला पेड मीडिया की फीडिंग करती है !!]
.
तो फेसबुक, व्हाट्स एप आदि भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता के लिए खतरा क्यों नहीं है ?
.
क्योंकि पेड मीडिया ने अभी तक इसे खतरे के रूप में नहीं बताया है ?
.
और जब पेड मीडिया ने अभी तक इसे खतरे के रूप में नहीं बताया है तो पेड मीडिया की फीडिंग पर निर्भर व्यक्ति का दिमाग अभ्यस्त तरीके से उन तर्कों का जाल बुनने लगता है जो उसे संतुष्ट कर सके कि, यह हमारी सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है !!
.
बहरहाल, मैं इसे खतरे के रूप में देखता हूँ, और मेरा मानना है कि, हमें फेसबुक एवं व्हाट्स एप पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहीये। मैंने कल ही प्रधानमंत्री को इसके लिए कह दिया था, कि वे फेसबुक एवं व्हाट्स एप पर बेन लगाए।
.
यदि आप भी इसे भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता के लिए खतरा मानते है तो पीएम को ट्विट भेजकर कह सकते है। और यदि आप इसे खतरे के रूप में नहीं देखते तो बात यहीं पर ख़त्म हो जाती है !!
.
प्रधानमंत्री जी को यह ट्विट करें :
.
@PmoIndia , सिर्फ 100% भारतीयों के स्वामित्व वाली सोशल मीडिया कम्पनियों को संचालन की अनुमति दें - #बैन_व्हाट्सएप , #बेन_फेसबुक , #बेन_ट्विटर , #सिर्फ_भारतीयों_के_पूर्णत_स्वामित्व_वाली_सोशल_मीडिया_कम्पनियों_को_अनुमति_दें
.
@PmoIndia #BanWhatsApp #BanFacebook #AllowOnly100percentIndianSmMessagingOnly WhatsApp sends all messages to CIA. And so does FB. Pls allow ONLY 100% owned by and 100% operated by messaging/SM in India. Ban foreign messaging/SM like FB / WhatsApp etc
.
========

Read full post →




Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jul 03 2020 21:26:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पाकिस्तान में किसका शासन है? मौलवियों का , इमरान खान का या सेना का?
.
आजादी के समय सेना के जनरलों को ब्रिटिश-अमेरिकन एलिट का समर्थन प्राप्त था, अत: पाकिस्तानी जनरलों एवं जमींदारो ने आपस में गठजोड़ बनाकर सत्ता सूत्र अपने हाथ में ले लिए थे. अमेरिकी हथियार निर्माताओं से गठजोड़ होने के कारण वहां सेना ताकतवर होती चली गयी और राजनेता कभी पनप नहीं पाए. 1947 के बाद से पाकिस्तान का सारा इतिहास राजनैतिक इतिहास राजनेताओ एवं सेना के बीच घर्षण का इतिहास है.
.
अभी हाल ही में पाकिस्तान के किसी रिटायर्ड जनरल ने कहा था कि, 1947 से आज तक सेना में जनरल की नियुक्ति हमेशा अमेरिका की अनुमति से ही होती रही है.
.
2010 से पाकिस्तान की सेना में चीन का दखल बढ़ने लगा, और अब पाकिस्तान की सेना के जनरल हथियारों के लिए दोनों देशो (चीन+अमेरिका) पर निर्भर है. समय गुजरने के साथ पाकिस्तान की सेना का झुकाव चीन की तरफ बढ़ता जा रहा है. जैसे जैसे भारत-चीन के बीच विवाद बढेगा वैसे वैसे पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों को फैसला करना पड़ेगा कि उन्हें किस तरफ जाना है – चीन की तरफ या अमेरिका की तरफ. और ज्यादातर सम्भावना है कि वे चीन की तरफ चले जायेंगे.
.
(1) पाकिस्तान की सेना का प्रभाव क्षेत्र
.
पाकिस्तान के सामरिक मामलो में निर्णायक फैसला सेना ही करती है. यदि राजनेता सेना को नियंत्रित करने की कोशिश करता है तो सेना और नेता में घर्षण बढ़ जाता है, और हमेशा सेना की ही चलती है. 1947 में जब पाकिस्तान की सेना ने (कबिलाइयो के नाम पर) कश्मीर पर हमला किया था तो खुद जिन्ना को इसके बारे में जानकारी नहीं थी !!
.
1965 में भी हमले की योजना जनरल अयूब ने बनायी थी और कारगिल घुसपैठ का फैसला भी मुशर्रफ ने किया था. नवाज शरीफ को मालूम तक नहीं था कि पाकिस्तान की फौजे कारगिल पर चढ़ाई कर रही है.
.
पाकिस्तान का पेड मीडिया सेना के नियंत्रण में है, और अमेरिकी धनिकों का सेना के माध्यम से इस पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण है. अब इस पर चीन का नियंत्रण भी बढ़ रहा है.
.
पाकिस्तान के आम नागरिको में सेना की कद्र है. और कद्र इसीलिए है क्योंकि पेड मीडिया के माध्यम से उनके दिमाग में यह बात डाली गयी है कि भारत का एक मात्र उद्देश्य पाकिस्तान को तबाह करना है, और सिर्फ सेना के कारण ही पाकिस्तान अब तक बचा हुआ है !! लेकिन पाकिस्तान के राजनैतिक रूप से सूचित कार्यकर्ताओ का वर्ग इस बात से परिचित है कि पाकिस्तान की सेना ने शासन के सूत्र अपने हाथ में रखने के लिए भारत के डर का हव्वा खड़ा किया हुआ है, और सेना की इस नीति ने पाकिस्तान को बर्बाद कर दिया है.
.
(2) पाकिस्तान में मौलवियों का प्रभाव :
.
इस्लाम में गेदरिंग की प्रक्रिया होने के कारण वहां पर समुदाय के आपसी संवाद का एक व्यवस्थित ढांचा (Network) बना हुआ है, और गेदरिंग की प्रक्रिया के कारण वहां पर मौलवी धार्मिक-सामाजिक-राजनैतिक स्तर पर काफी शक्तिशाली है. इस तरह वहां पर आंतरिक मामलो में नागरिको की राय को मोटे तौर पर 2 फेक्टर प्रभावित करते है :
.
(a) पेड मीडिया
(b) गेदरिंग
.
गेदरिंग का विकेन्द्रित नेटवर्क होने के कारण वहां पर जिन मुद्दों पर पेड मीडिया एवं मौलवियों में मतभेद होता है, वहां पर पेड मीडिया नागरिको को प्रभावित नहीं कर पाता.
.
(2.1) इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि, नागरिको के पास सम्प्रेषण का एक अतरिक्त नेटवर्क होने के कारण पाकिस्तान में पेड मीडिया कम ताकतवर है. और यह एक बड़ी वजह है कि पाकिस्तान का लगभग प्रत्येक नागरिक एंटी-अमेरिका है, और इस सच्चाई से वाकिफ है कि उन्हें अमेरिका की सेना से खतरा है.
.
(2.2) नकारात्मक पक्ष यह है कि, वहां के मौलवी इतने अतार्किक एवं धर्मांध है कि पाकिस्तान के नागरिको को अतिरिक्त दुश्मनों की जरूरत नहीं है. मौलवियों की अतार्किकता एवं कट्टरता ने नागरिको को खड्डे में डाला हुआ है.
.
तो इस तरह पाकिस्तान में सामरिक एवं अंतराष्ट्रीय मामलों में सेना का शासन है, और आंतरिक-सामाजिक-धार्मिक-सामुदायिक फैसलो को मौलवी एवं धार्मिक गुरु प्रभावित करते है.
.
[ इस्लामिक देशो में गेदरिंग की प्रक्रिया होने के कारण पेड मीडिया नागरिको को गिरफ्त में नहीं ले पाता और इस वजह से अमेरिका को जब भी इस्लामिक देशो के प्राकृतिक संसाधनों का अधिग्रहण करना हो तो उन्हें सेना की जरूरत होती है !! ईराक, ईरान, अफगानिस्तान से लेकर लीबिया और सीरिया तक इसके उदाहरण है.]
.
(3) पाकिस्तान में राजनेताओ एवं सरकार का प्रभाव :
.
पाकिस्तान में राजनेता हमेशा कमजोर स्थिति में रहे है. इसकी निम्न वजहें है :
.
(a) निरंतर चुनाव न होने की वजह से नेता के उभरने एवं जनाधार (Network) बनाने के अवसर सिकुड़ जाते है.
.
(b) राजनेताओ को लगातार मौलवियों के नेटवर्क से निपटना होता है. और मौलवियों के पास नागरिको से संवाद स्थापित करने के लिए गेदरिंग के रूप में ज्यादा प्रभावी और व्यवस्थागत नेटवर्क है.
.
(c) पेड मीडिया पर राजनेताओं का नियंत्रण नहीं है.
.
(d) पाकिस्तान की सेना के जनरल सीधे अमेरिकी धनिकों को रिपोर्ट करते है, अत: राजनेता सैन्य अधिकारियों को टेक ओवर नहीं कर पाते
.
इस स्थिति में वहां पर सत्ता में वही नेता टिक पाता है जिसे या तो सेना का समर्थन प्राप्त हो या फिर वह सीधे अमेरिकी धनिकों की गुड बुक में हो. और यदि नेता अपनी सीमा से बाहर जाता है तो सेना टेक ओवर कर लेती है. इमरान खान भी सेना के नियंत्रण में है, और महत्त्वपूर्ण फैसले लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है. इस समय की सरकार एवं सेना के बीच कोई टकराव नहीं है.
.
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि, वहां की सरकार / राजनेता एवं सेना मिलकर भी अवाम को पूर्ण रूप से नियंत्रित नहीं करते. क्योंकि वहां पर मौलवियों की सत्ता काफी मजबूत है. पाकिस्तान में लॉकडाउन इसीलिए असफल रहा.
.
अमेरिकी धनिक भारत की तरह पाकिस्तान में भी लॉकडाउन चाहते थे, और उन्होंने सेना, सरकार और मीडिया की सहायता से लॉकडाउन डालने के प्रयास किये. किन्तु मौलवियों के नेटवर्क ने लॉकडाउन की बेंड बजा दी. इसके उलट भारत में पेड मीडिया नागरिको को लॉकडाउन के पक्ष में कन्विंस करने में सफल रहा, और यह भी समझाने में कामयाब रहा कि, लॉकडाउन डालकर कई जानें बचा ली गयी है !!! ( यह पेड मीडिया की ताकत है.)
.
भारत :
.
भारत में पेड मीडिया शुरू से काफी ताकतवर रहा है. अत: अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक पेड मीडिया की सहायता से नागरिको की राय को नियंत्रित करते है और यह सुनिश्चित करते है कि कौन नेता सत्ता में आएगा. 73 साल में से इंदिरा जी एवं शास्त्री जी के कार्यकाल को निकाल दें तो शेष 55 वर्षो तक सभी नेता पेड मीडिया की सहायता से ही सत्ता में आये है, और पेड मीडिया की सहायता से ही टिके रहे है.
.
1990 से पहले तक भारत में पेड मीडिया का नियंत्रण अप्रत्यक्ष था, और 2001 में ऍफ़डीआई आने के बाद यह प्रत्यक्ष हो गया है. आज भारत में पेड मीडिया सबसे ताकतवर है, और वे ही भारत के राजनेताओं एवं नागरिको की राय को पूर्ण रूप से नियंत्रित करते है. इस तरह भारत में सत्ता पूरी तरह केंद्रीकृत है, और इसके सूत्र पेड मीडिया के प्रायोजको के पास है.
.
=========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jul 04 2020 04:28:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Yaxit Patel:

🇺🇸1930s के दौरान, अमरीका में एक भारी वित्तीय संकट / मंदी (ग्रेट डिप्रेशन) का सामना कर रहा था, आम आदमी के पास खाने के लिए भोजन नहीं था और न ही पहनने के लिए कपड़े थे और न ही रहने के लिए घर। वहां के राजवर्ग ने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं, एक कराधान प्रणाली बनाई गई जो केवल वहां के धनिकों से ज्यादा कर वसूले जो कि धन गरीबों के लाभ के लिए काम आए।🇮🇳1940s में इसी अवधि के विपरीत, भारत (बंगाल प्रांत) भीषण अकाल का सामना कर रहा था और किसी भी प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं को न तो ब्रिटिश और न ही भारतीय राज वर्ग ने लागू किया , ~50 लाख भारतीयों की मृत्यु हुए थी । ऐसा क्यों ? 70% अमेरिकी आम जनता के पास बंदूकें थीं(भारतीय नागरिको के विपरीत)।

इतिहास में हमेशा आम नागरिकों का हथींयारिकरण ही कल्याणकारी राज्य एवं सच्चे लोकतंत्र का मूल कारण साबित हुआ है।

>>>🇺🇸During 1930s , USA was facing a Great depression/Huge financial crises/recession , common man didn't have food to eat nor cloths to wear or home to live. The elites there started numerous welfare schemes , created a taxation system were only the rich need to pay higher taxes for the benefit of the poor there. In the contrary around same period in 1940s ,🇮🇳India(Bengal province) was facing a severe famine and no welfare schemes of any sort were implemented by neither British nor Indian elites,hence ~50 lakh Indians died. WHY SO ? The main reason was over 70% of US commons had guns contrary to the Indian common citizen. WEAPONISATION of commons has always proved to be the mother of welfare state/ True Democracy in the history of mankind.

<https://youtu.be/EMg0AF_B_es>;

#weaponization_of_commons #Indians_for_guns #aatmanirbhar #threat_of_war #GUNS_SAVES_LIVES #GunLawIndia

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jul 04 2020 04:33:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रविवार 5 जुलाई को हथियार रखने के अधिकार पर होने वाली चर्चा की एक स्लाइड।
साड़ी बनी मौत की वजह।

Kushagra Yadav Salonup:

रविवार 5 जुलाई को हथियार रखने के अधिकार पर होने वाली चर्चा की एक स्लाइड।
साड़ी बनी मौत की वजह।

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jul 04 2020 11:08:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सभी नागरिको से आग्रह है कि, कल यानी 5 जुलाई को नागरिक कर्तव्य दिवस पर खनिजो की लूट रोकने के लिए धनवापसी पासबुक जारी करने की मांग का पोस्टकार्ड पीएम को भेजे.
.
पोस्टकार्ड में यह इबारत लिखें :'प्रधानमंत्री जी, कृपया हमें धनवापसी पासबुक जारी करें - #DhanVapsiPassbook
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jul 04 2020 19:12:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

धनवापसी पासबुक और जूरी कोर्ट में से कौनसा क़ानून देश के लिए ज़्यादा ज़रूरी है ?
.
मेरे विचार में, धनवापसी पासबुक जूरी कोर्ट की तुलना में ज्यादा जरुरी क़ानून है। यह इतना जरुरी है कि यदि इन दोनों में से कोई एक क़ानून गेजेट में छापना हो पहले धनवापसी पासबुक को छापा जाना चाहिए। जूरी कोर्ट का इसके बाद में आता है। यदि जूरी कोर्ट देश में लागू हो जाता है, किन्तु धनवापसी पासबुक गेजेट में नहीं आता है तो जूरी कोर्ट निष्फल हो जाएगा।
.
कैसे ?
.
(1) हमें जूरी कोर्ट क्यों चाहिए ?
.
जूरी कोर्ट पुलिस, जजों, सरकारी अधिकारियों एवं नेताओं के भ्रष्टाचार में कमी लाएगा।
.
(1.1) हमें पुलिस एवं जजों का भ्रष्टाचार दूर करने की जरूरत क्यों है ?
ताकि हम भारत में बड़े पैमाने पर कम लागत में बेहतर तकनिकी उत्पादन करने वाले छोटे एवं मझौले कारखानों की श्रंखला* खड़ी कर सके.
.
(*) इसके लिए हमें जीएसटी हटाकर रिक्त भूमि कर लाने की भी जरूरत होगी। रिक्त भूमि कर आये बिना जमीन सस्ती नहीं होगी और कारखाने नहीं लग पायेंगे। और यदि जीएसटी नहीं हटाया गया तो जीएसटी छोटी इकाईयो को बाजार से बाहर कर देगा।
.
(1.2) हमें भारत में कम लागत में बेहतर तकनिकी उत्पादन करने वाले छोटे एवं मझौले कारखानों की श्रंखला क्यों चाहिए ?
.
ताकि हम भारत में बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक आधारित आधुनिक हथियारों का उत्पादन कर सके। तकनिकी उत्पादन करने वाले ये छोटे कारखाने हथियार निर्माण का आधार बनायेंगे।
.
(1.3) हमें बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक आधारित आधुनिक हथियारों का उत्पादन करने की जरूरत क्यों है ?
.
ताकि हम दुश्मन देश की सेना को अपने खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन लूटने से रोक सके। यदि हमने खुद के हथियारों का उत्पादन नहीं किया तो निम्नलिखित में से कोई एक या सभी स्थितियां घटित होगी :
.
(i) या तो चीन हमारे प्राकृतिक संसाधन, खनिज लूट लेगा और हमारी अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा कर लेगा।
.
(ii) या "चीन से बचाने" के एवज में अमेरिका हमारे प्राकृतिक संसाधन, खनिज लूटकर हमारी अर्थव्यवस्था कब्ज़ा लेगा।
.
(iii) या चीन एवं अमेरिका दोनों मिलकर हमारे खनिज एवं अर्थव्यवस्था को शांति प्रिय तरीके से आपस में बाँट लेंगे।
.
लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि, बड़े पैमाने पर तकनिकी उत्पादन करने वाले कारखानो का ढांचा खड़ा करने के लिए हमें कच्चा माल यानी खनिज की जरूरत होती है। यदि कोई देश खनिज के लिए आयात पर निर्भर हो जाता है तो कारखानों को कच्चा माल महंगा मिलेगा, और लागत बढ़ जाएगी।
.
लागत बढ़ने से माल नहीं बिकेगा, और धीरे धीरे कारखाने बंद हो जायेंगे। अब जूरी कोर्ट इन कारखानों को बचा नहीं सकता। क्योंकि जूरी कारखाना मालिको की रक्षा पुलिस एवं जजों से कर सकती है, न्याय दे सकती है, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का ढांचा मुहैया करा सकती है, किन्तु जूरी कारखाना मालिको को सस्ते में कच्चा माल लाकर नहीं दे सकती !!
.
और यहाँ धनवापसी पासबुक की भूमिका आती है
.
(2) धनवापसी पासबुक आने का क्या प्रभाव होगा ?
.
धनवापसी पासबुक भारत में जारी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोक देती है। इस क़ानून के गेजेट में आने से भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज, प्राकृतिक संसाधन, जमीन आदि 135 करोड़ भारतीय नागरिको की संपत्ति घोषित हो जायेगी।
.
जब भारत आजाद हुआ था तो जवाहर लाल के नेतृत्व में सरकार ने हमारी इस संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया था। तब से नागरिको की यह संपत्ति सरकार के नियंत्रण में है, और वे पिछले 70 वर्षो ने इसे चिल्लर दामों बेच बेचकर पैसा बना रहे है। धनवापसी पासबुक नागरिको के हाथ में आने से हमारे खनिज बच जायेंगे। और जब हमारे खनिज बचेंगे तभी हम इतनी ताकतवर सेना खड़ी कर पायेंगे कि चीन एवं अमेरिका की सेनाओं का मुकाबला कर सके।
.
(2a) तो हमें सेना चाहिए ताकि हम अपने प्राकृतिक संसाधनो को लुटने से बचा सके।
.
(2b) और सेना खड़ी करने के लिए हमें खनिज चाहिए। और धनवापसी पासबुक हमारे खनिज बचाती है, ताकि हम अपनी सेना खड़ी कर सके।
.
खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होती है। यदि हमारी रीढ़ टूट गयी तो जूरी कोर्ट, रिक्त भूमि कर आदि क़ानून कोई निर्णायक बदलाव नहीं ला पायेंगे। मतलब यदि हमें खनिज गँवा दिए तो भारत अफ़्रीकी देशो की तरह हमेशा के लिए कंगाल हो जायेगा।
.
(3) यदि जूरी कोर्ट आता है, किन्तु धनवापसी पासबुक नहीं आ पाती है, तो क्या हम अपने खनिज बचा पायेंगे ?
.
खनिज बचाने के संघर्ष का रास्ता बहुधा युद्ध की और जाता है। जूरी कोर्ट आने के बावजूद खनिजो की लूट जारी रह सकती है, क्योंकि धनवापसी पासबुक के अभाव में नागरिक संघर्ष करने या युद्ध में जाने से इंकार कर सकते है। उदाहरण के लिए :
.
(3.1) 1951 में ईरान का तेल अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियां चिल्लर दामों में खोद रही थी। मूसादेक (Musaddeq) ने इस लूट को रोकने के लिए मुहीम चलायी गयी और 1951 में खनिज के राष्ट्रीयकरण का आदेश गेजेट में भी छाप दिया गया था। मूसादेक ईरान के प्रधानमंत्री बने। और उन्हें हटाने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश कंपनियों द्वारा सैन्य विद्रोह करवाया गया।
.
इस तरह ईरान में ही कार्यकर्ताओ / नेताओं के दो गुट बन गए थे। एक गुट अमेरिकियों की तरफ था और एक मूसादेक की तरफ। किन्तु नागरिको ने मूसादेक का साथ देने यानी अपने तेल को बचाने के लिए लोड उठाने से इनकार कर दिया था। नतीजा यह हुआ कि मूसादेक को बल प्रयोग द्वारा अपदस्थ करके जेल में डाल दिया गया और ईरान का तेल फिर से अमेरिकी-ब्रिटिश कंपनियों के कब्जे में चला गया !!
.
तो ईरान के नागरिको ने लोड उठाने से इनकार क्यों कर दिया था ?
.
क्योंकि उन्हें लगता था कि, इस तेल की लड़ाई से हमारा क्या लेना देना है !! मूसादेक की सरकार निकाले या अमेरिकी कम्पनियां निकाल ले। इससे हमें कौनसा लाभ-हानि होने वाला है। हमें तो अपना रोजगार देखना है। यदि खनिज को ईरान के नागरिको की संपत्ति घोषित कर दी जाती तो स्थिति पलट जाती। तब एक आम ईरानी नागरिक यह साफ़ तौर पर देख सकता था कि यदि हमने अपना तेल बचा लिया तो मुझे निजी तौर पर फायदा होगा, वर्ना मुझे वास्तविक वित्तीय नुकसान होगा।
.
(3.2) इसी तरह जब इंडोनेशिया में 70 के दशक में सुकर्णो ने खनिजो का राष्ट्रीयकरण करके अमेरिकी कम्पनियों को देश से बाहर कर दिया तो सीआईए के सहयोग से इंडोनेशिया के जनरल ने सैन्य विद्रोह किया। तब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने इंडोनेशिया की सेना की मदद से 1965 से 1966 के बीच सुकर्णो की पार्टी के 10 लाख लोगो का कत्ले आम किया। पार्टी के सभी नेताओं, कार्यकर्ताओ और समर्थको को ढूंढ ढूंढ कर मौत के घाट उतारा गया। वे ऐसा कर पाए क्योंकि इण्डोनेशिया के आम नागरिको ने खनिज बचाने के लिए लोड उठाने से इनकार कर दिया था !!
.
आम नागरिको का मानना था कि इस सब लड़ाई झगड़े से हमें क्या नफा-नुकसान है। खनिज ये नहीं खोदेंगे तो वो खोद लेंगे। इससे हमें क्या फर्क आता है !! ये खनिज सरकार के है, मेरे नहीं। मुझे इस झगड़े में क्योकर जाना चाहिए।
.
(3.3) ब्रिटिश भारत को इतने लम्बे समय तक क्यों लूट पाए ?
.
इसकी एक वजह यह भी थी कि आम नागरिको को लगता था कि पहले राजा का राज था और अभी कम्पनी का। हमें इधर भी लगान देना है, और उधर भी, और जो खनिज वे निकाल रहे है, उससे हमारा क्या लेना देना है। ये लड़ाई तो राजा की है। और जब लगान ज्यादा बढ़ा और दमन होने लगा तो उन नागरिक समूहों ने आवाज उठाना शुरू किया जिन्हें नुकसान हो रहा था। उदाहरण के लिए 57 के विद्रोह में सैनिक और किसान आंदोलनों में किसान शामिल हो रहे थे। आम नागरिको की सहभागिता काफी कम थी।
.
और इसी स्थिति को आप आज भी देख सकते हो। नागरिक रोज खबरों में देखते है कि सरकार लगातार देश की राष्ट्रिय संपत्तियां एवं खनिज संसाधन (विनिवेश, निजीकरण, आर्थिक सुधार, कड़ा कदम, कठोर फैसला आदि के टेग लगाकर) बेच रही है। लेकिन आम नागरिक को इससे कोई लेना देना नहीं होता। आम नागरिक इस बात को साफ़ तौर पर समझ नहीं पाता कि सरकार ने घूस खाकर उसका सामान बेच दिया है।
.
इस पासबुक के हाथ में आने के बाद जब नागरिक को मालूम होगा कि कोयले का भाव 2000 रू टन है और टाटा झारखंड में 1 रू प्रति एकड़ की रोयल्टी की रेट पर असीमित कोयला खोद रहा है तो उसे निजी तौर पर नुकसान होगा। क्योंकि तब हर महीने आने वाली राशि में से कुछ राशि कम हो जाएगी !! और तब खनिजो की लूट रोकने के लिए प्रत्येक नागरिक संघर्ष करने के लिए तैयार होगा।
.
किसी भी देश में राजनैतिक समस्याओं पर ध्यान देने वाले कार्यकर्ताओ की संख्या 2-3% से ज्यादा नहीं होती। हालांकि यह संख्या भी कोई भी बदलाव लाने के लिए काफी होती है। किन्तु खनिजो को बचाने की लड़ाई का पैमाना इतना बड़ा है, और प्रतिद्वंदी इतने ताकतवर है कि बिना नागरिकों के सहयोग से किसी देश के खनिज बचा ले जाना काफी दुष्कर कार्य है। कार्यकर्ता तभी इन्हें बचा सकेंगे जब नागरिक भी यह लोड उठाने को तत्पर। और नागरिक राजनैतिक मामलो में सिर्फ तब लोड लेने को तैयार होते है जब इससे उनका नफा-नुकसान सीधे तौर पर जुड़ा हो।
.
जहाँ तक भारत के कार्यकर्ताओ की बात है, यह बात साफ़ है कि भारत के कार्यकर्ता धनवापसी पासबुक के कानून को उतनी गंभीरता से नहीं ले रहे है, जितना कि उन्हें लेना चाहिए। बहरहाल, मेरा मानना है कि भारत के सूचित कार्यकर्ताओ को खनिजो की लूट को गंभीरता से लेना शुरू कर देना चाहिए। जो कार्यकर्ता गरीबी कम करने एवं भुखमरी ख़त्म करने की समस्याओं पर काम कर रहे है, उन्हें भी इस क़ानून को गेजेट में छपवाने के लिए प्रयास करने चाहिए। क्योंकि इस क़ानून का एक प्रभाव यह है कि इससे गरीबी तेजी से कम होगी।
.
(4) धनवापसी पासबुक जारी हो जाती है, लेकिन जूरी कोर्ट लागू नहीं होता तो क्या हम अपने खनिज बचा पायेंगे ?
.
हाँ, बिलकुल बचा सकते है। एक बार यदि भारत के प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में धनवापसी पासबुक आ जाती है, तो खनिज रोयल्टी एवं सरकारी भूमि से आने वाला किराया प्रतिमाह उनके खाते में सीधे जमा होने लगेगा। और तब यदि अपने खनिज बचाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ता है तो उनके पास इसकी वाजिब वजह होगी।
.
यदि युद्ध की नौबत आती है तो नागरिक एवं कार्यकर्ता त्वरित उपाय के तौर पर हथियारबंद सज्जन नागरिक समाज (Weaponnization of Law Abide Citizens) जैसे क़ानून छपवाकर खुद को हथियारबंद कर सकते है, ताकि वे खनिज बचाने की लड़ाई लड़ सके।
.
किन्तु यदि नागरिको के पास धनवापसी पासबुक नहीं हुयी तो हथियार होने के बावजूद उनके पास लड़ाई लड़ने की कोई जायज वजह नहीं होगी।
.
अत: मेरे विचार में धनवापसी पासबुक का कानून जूरी कोर्ट, रिक्त भूमि कर, वोट वापसी पासबुक आदि सभी कानूनों से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि यदि धन वापसी ही नहीं रही तो तो वोट वापसी करके क्या हासिल होने वाला है !!
.
(5) धनवापसी पासबुक क़ानून का सार :
.
(5.1) इस कानून के गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही भारत के नागरिक देश की सभी खदानों, स्पेक्ट्रम, IIM अहमदाबाद को शामिल करते हुए सभी IIM के भू-खंडो, जेएनयू के भू-खंडो, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों जिनका स्वामित्व निजी कंपनियों या ट्रस्टो के पास नहीं है, के भू-खंडो को संयुक्त और समान रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व की संपत्ति घोषित करते है।
.
अब से ये भू-खंड भारत की राज्य सरकार या भारत की केंद्र सरकार या किसी अन्य सरकारी पक्ष या निजी पक्ष की संपत्ति नहीं है। भारत के सभी अधिकारीयों, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशो से विनती की जाती है कि, भारत के नागरिको के उपरोक्त फैसले के विरुद्ध कोई भी याचिका स्वीकार ना करे ।
.
(5.2) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी। तब भारत की केंद्र सरकार को होने वाली खनिज रॉयल्टी, स्पेक्ट्रम रॉयल्टी और केंद्र सरकार द्वारा अधिगृहीत जमीनों के किराये से प्राप्त राशि का 65% हिस्सा भारत के नागरिकों में समान रूप से बांटा जायेगा, और हर महीने यह धनराशि सीधे आपके बैंक खाते में जमा होगी। शेष 35% हिस्से का उपयोग सिर्फ सेना में सुधार के लिए खर्च होगा। जब आप राशि प्राप्त करेंगे तो इसकी एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी।
.
(5.3) यह कानून ऐसा कोई वादा नहीं करता कि आपको प्रति महीने 500 रू या 1000 रू या कोई स्थिर राशि प्राप्त होगी। यदि खनिजों / स्पेक्ट्रम का या जमीनों का बाजार मूल्य बढ़ता है तो आमदनी और किराया बढ़ सकता है। लेकिन यदि खनिज आमदनी और किराया घटता है तो नागरिकों को हर महीने मिलने वाली यह राशि भी घटेगी। लेकिन इस कानून के लेखको का मानना है कि मौजूदा खनन एवं अंतराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से प्रत्येक नागरिक को लगभग 400 से 500 रू मासिक की प्राप्ति हो सकती है।
.
(5.4) राष्ट्रीय खनिज अधिकारी (NMRO=National Mineral Royalty Officer) के पास खनिज रॉयल्टी और सरकारी जमीनों का किराया तय करने, इकठ्ठा करने और सभी नागरिकों के बैंक खातों में जमा करने हेतु आवश्यक कर्मचारी एवं अधिकार होंगे।
.
NMRO की नियुक्ति प्रधानमन्त्री करेंगे, किन्तु यदि यह धनराशि आपको समय पर नही मिल रही है या अन्य किसी वजह से आप NMRO को नौकरी से निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को इस पद लाने के लिए अपनी राय दर्ज करना चाहते है तो आप धन वापसी पासबुक के साथ पटवारखाने में जाकर अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दे सकेंगे।
.
(5.5) इस कानून के पारित होने के बाद यदि राष्ट्रीय खनिज अधिकारी या उसका स्टाफ कोई गबन-घपला-लापरवाही भ्रष्टाचार करता है या अन्य किसी मामले में उनकी कोई भी शिकायत आती है और यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य-सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
.
(5.6) यह कानून सिर्फ केंद्र सरकार के अधीन आने वाली खदानो, स्पेक्ट्रम और जमीनों पर लागू होगा। किन्तु केंद्र सरकार के अधीन जल संसाधन इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेगें। यह कानून राज्य, नगरपालिकाओं, जिले, तहसील, ग्राम पंचायतों के अधिकार में आने वाली खदानों और जमीनों पर भी लागू नहीं होगा।
.
------------
.
सभी नागरिको से आग्रह है कि धनवापसी पासबुक जारी करने की मांग का पोस्टकार्ड पीएम को भेजे.
.
पोस्टकार्ड में यह इबारत लिखें :'प्रधानमंत्री जी, कृपया हमें धनवापसी पासबुक जारी करें - #DhanVapsiPassbook
.
------------

Read full post →















Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jul 13 2020 19:12:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नगर परिषद भीलवाड़ा के वार्ड संख्या 12 से पार्षद पद के लिए राइट टू रिकॉल पार्टी से संभावित उम्मीदवार —- योगेश कुमार

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jul 13 2020 19:17:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नगर परिषद भीलवाड़ा के वार्ड संख्या 34 से पार्षद पद के लिए राइट टू रिकॉल पार्टी से वोट वापसी पासबुक के मुद्दे पर संभावित उम्मीदवार — जितेंद्र कुमार बंजारा
.

Read full post →




Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jul 19 2020 07:10:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Topic: वोट वापसी पासबुक (जिला शिक्षा अधिकारी)

Time: Jul 19, 2020 03:00 PM India

Zoom Meeting ऑनलाइन वेबिनार लिंक

<https://us02web.zoom.us/j/89673730495>;

===

Kushagra Yadav Salonup:

आज 19 जुलाई दुपहर 3 बजे इस बहुत ही महत्वूर्ण ऑनलाइन वेबिनार में जानिए कैसे जिला शिक्षा अधिकारी को वोट वापसी के दायरे में ला के भारत के हर जिले का शिक्षा का स्तर सुधारा जा सकता है। क्यो अत्यधिक मंहगी शिक्षा होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत शिक्षा में हंग्री जैसे एक छोटी सी आबादी वाले देश से भी कहीं पीछे है?

क्यो भारत मैथ्स एवम् साइंस की प्रतियोगिताओं जैसे ओलंपियाड, पिसा आदि में पिछले कई दशकों में कोई स्थान हासिल नहीं कर पाया है।

शिक्षा का असली आधार क्या है और आने बच्चों के लिए इसे कैसे मजबूत किया जा सकता है।

Topic: वोट वापसी पासबुक (जिला शिक्षा अधिकारी)

Time: Jul 19, 2020 03:00 PM India

Zoom Meeting ऑनलाइन वेबिनार लिंक

<https://us02web.zoom.us/j/89673730495>;

===

Read full post →






Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jul 20 2020 13:16:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

ड्राफ्ट में लिखी गयी इबारत पर स्पष्टीकरण के बारे में
.
कुछ कार्यकर्ताओ द्वारा यह प्रश्न पुछा गया है कि जूरी कोर्ट ड्राफ्ट में लिखी गयी किसी धारा को लेकर अस्पष्टता हो तो इसकी व्याख्या करने का अधिकार किसके पास है, या स्पष्टीकरण के बारे में ड्राफ्ट लेखक द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण किस सीमा तक मूल्य रखता है ?
.
जवाब :
.
सामान्य रूप से, कोई भी ड्राफ्ट अपने आप में स्वतंत्र मसौदा होता है, और ड्राफ्ट पब्लिश करने के बाद ड्राफ्ट में लिखी गयी धारा का स्पष्टीकरण देने का 'अधिकार' ड्राफ्ट के लेखको के पास नहीं होता। यदि किसी धारा को लेकर अस्पष्टता है तो ड्राफ्ट के लेखक से इस बारे में स्पष्टीकरण लिया जा सकता है। किन्तु यह स्पष्टीकरण निर्णायक नहीं हो सकता। लेखक द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण एक "राय" या व्याख्या (Interpretation) है। कोई कार्यकर्ता ड्राफ्ट लेखक के अमुक स्पष्टीकरण को स्वीकार कर सकता है या खारिज भी कर सकता है। किसी धारा का वही स्पष्टीकरण चलन में रहेगा जिसे जन सामान्य द्वारा सहज बोध द्वारा स्वीकार्य किया जाता है।
.

जूरी कोर्ट ड्राफ्ट के बारे में :
.
जब तक जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट गेजेट में प्रकाशित नहीं होता, तब तक इसमें लिखी गयी किसी भी धारा की व्याख्या करने का अधिकार कार्यकर्ताओ एवं नागरिको के पास है, ड्राफ्ट के लेखको के पास नहीं। ड्राफ्ट के लेखको द्वारा दी गयी व्याख्या सिर्फ एक "राय" या "दृष्टिकोण" है। कोई कार्यकर्ता अमुक व्याख्या को मान भी सकता है और नहीं भी मान सकता है।
.
जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट में यह प्रावधान किया गया है कि गेजेट में आने के बाद इसमें दी गयी धाराओं की व्याख्या करने का अधिकार नागरिको की जूरी के पास होगा। अत: जूरी ही बहुमत द्वारा इसकी व्याख्या करेगी।
.
========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jul 20 2020 13:26:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जूरी कोर्ट एवं अन्य प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट में संशोधन के लिए सुझाव देने के बारे में :
.
यदि कोई कार्यकर्ता जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट में कोई संशोधन या सुझाव प्रस्तावित करना चाहता है तो वह अपना प्रस्तावित सुझाव गिट हब (Git Hub) पर रख सकता है। निचे राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट का गिट हब लिंक दिया गया है।

<https://github.com/righttorecallparty/ProposedLawDrafts?fbclid=IwAR1blQUH1WxfGFiX1OleWYV-VaipnGrX1iFF3OveILbcoi2wLT_jHkYaA9s>;
.
कोई भी कार्यकर्ता यदि यदि कोई सुझाव देना चाहता है तो वह अपना सुझाव एवं उसकी वजह उपरोक्त लिंक पर जाकर रख सकता है। गिट हब पर रखने के बाद यूजर अपने सुझाव को फेसबुक पर भी रख सकता है।
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 21 2020 13:19:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नगर परिषद भीलवाड़ा के वार्ड संख्या 12 से राइट टू रिकॉल पार्टी से वोट वापसी पासबुक व धनवापसी पासबुक के मुद्दे पर संभावित उम्मीदवार - अंकित टाक

Ankit Tak Jury BhilwaraRj:

मैं अंकित टाक नगर परिषद भीलवाड़ा के वार्ड संख्या 12 से पार्षद पद 2020 के लिए राइट टू रिकॉल पार्टी से वोट वापसी पासबुक व धनवापसी पासबुक के मुद्दे पर संभावित उम्मीदवार हु।
आगामी भीलवाड़ा नगर परिषद चुनाव 2020 वार्ड संख्या 12 से जिले की सरकारी स्कूलों , सरकारी हॉस्पिटल, पुलिस थाने, अदालते आदि को सुधारने, भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए जनता को वोट वापसी पासबुक दिलवाने के मुद्दे पर राइट टू रिकॉल पार्टी से अंकित टांक सम्भावित प्रत्याशी है ।

अंकित टांक की फेसबुक वॉल का लिंक
<https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=3340856129301610&id=100001317686153>;

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 21 2020 17:46:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

केन्द्रीय मंत्रियो पर वोट वापसी लागू करने का प्रस्ताव
.
(Vote Vapsi over Central ministers)
.
इस कानून का सार : यह कानून प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के लिए लिखा गया है। इस कानून को लोकसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। #RRP08
.
यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
.
“प्रधानमंत्री जी, कृपया केन्द्रीय मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के आदेश जारी करें - #VvpCentralMinister
.
====क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
.
टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
.
(01) यह कानून गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री एवं नाभिकीय ऊर्जा मंत्री पर लागू नहीं होगा।
.
(02) इस कानून में "मंत्री" शब्द से आशय है, धारा (1) दिए गए 5 मंत्रालयों के अतिरिक्त केंद्र सरकार के अधीन आने वाले सभी मंत्रालयों के केन्द्रीय मंत्री।
.
(03) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। । धारा (1) में बताये गए 5 मंत्रियो को छोड़ते हुए केन्द्रीय सरकार के अधीन सभी केन्द्रीय मंत्री इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे। तब यदि आप किसी केन्द्रीय मंत्री के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
.
(04) मंत्री बनने के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा आवेदन करना :
.
30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि केन्द्रीय मंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, और एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
.
(05) मतदाताओ द्वारा स्वीकृति दर्ज करना :
.
(5.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी सार्वजनिक करेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
.
(5.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
.
(5.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
.
(5.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
.
[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
.
रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
.
(06) केन्द्रीय मंत्रीयों की नियुक्ति एवं निष्कासन : यदि किसी मंत्रालय के मंत्री पद के किसी प्रत्याशी को 30 करोड़ से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां अमुक मंत्रालय के पदासीन मंत्री से 1 करोड़ अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री मौजूदा मंत्री को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले व्यक्ति को अमुक मंत्रालय में मंत्री नियुक्त कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। मंत्री की नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा।
.
(07) जनता की आवाज :
.
(7.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
.
(7.2) यदि कोई मतदाता धारा (7.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
.
======ड्राफ्ट का समापन=====

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 21 2020 17:48:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राज्य के मंत्रियो पर वोट वापसी लागू करने का प्रस्ताव
.
(Vote Vapsi over State Ministers)
.
इस कानून का सार : यह कानून राज्य के मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के लिए लिखा गया है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। #RRP09
.
यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
.
“मुख्यमंत्री जी, कृपया राज्य के मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के आदेश जारी करें - #VvpStateMinister
.
====क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
.
टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
.
(01) यह कानून राज्य के गृह मंत्री, सुरक्षा मंत्री, वित्त मंत्री एवं नाभिकीय ऊर्जा मंत्री पर लागू नहीं होगा।
.
(02) इस कानून में मंत्री शब्द से आशय है, धारा (1) दिए गए 4 मंत्रालयों के अतिरिक्त राज्य सरकार के अधीन आने वाले सभी मंत्रालयों के मंत्री।
.
(03) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। धारा (1) में बताये गए 4 मंत्रियो को छोड़ते हुए राज्य के सरकार के अधीन सभी राज्य के मंत्री इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे। तब यदि आप किसी राज्य के मंत्री के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
.
(04) मंत्री बनने के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा आवेदन करना :
.
30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि राज्य मंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, और एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
.
(05) मतदाताओ द्वारा स्वीकृति दर्ज करना :
.
(5.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी सार्वजनिक करेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
.
(5.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
.
(5.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
.
(5.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
.
[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
.
रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
.
(06) राज्य मंत्रीयों की नियुक्ति एवं निष्कासन : यदि किसी मंत्रालय के मंत्री पद के किसी प्रत्याशी को 30 करोड़ से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां अमुक मंत्रालय के पदासीन मंत्री से 1 करोड़ अधिक भी है, तो मुख्यमंत्री मौजूदा मंत्री को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले व्यक्ति को अमुक मंत्रालय में मंत्री नियुक्त कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। मंत्री की नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री का ही होगा।
.
(07) जनता की आवाज :
.
(7.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
.
(7.2) यदि कोई मतदाता धारा (7.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
.
======ड्राफ्ट का समापन=====

Read full post →




Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jul 21 2020 20:42:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगाने का आसान तरीका क्या है जिसमें कि उस याचिका पर अवश्य सुनवाई हो?
.
मोटा मोटी इसके 4 तरीके है :
1. पैसा
2. पहुँच
3. पेड मीडिया
4. एडवेंचर
.
(1) पैसा : यदि आपके पास सुप्रीम कोर्ट के जजों को देने के लिए पैसा है तो वे आपकी याचिका ले लेंगे. और फिर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह मुद्दा जनहित से जुड़ा हुआ है या नहीं !!
.
'इधर रमेश प्लेटफोर्म पर पंहुचा और उधर रेलगाड़ी चल दी' की तर्ज पर जैसे ही सुप्रीम कोर्ट जज के पास पैसा पहुचेंगा वैसे ही तुरंत वह याचिका स्वीकार कर लेगा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज आपसे सीधे पैसा नहीं लेंगे. इसके लिए आपको सुप्रीम कोर्ट के किसी जमे हुए यानी नामी वकील के माध्यम से पैसा देना पड़ेगा.
.
लेकिन नामी वकील भी आपसे “जज को घूस” देने के नाम पर पैसा नहीं लेगा. वह घूस की यह राशि अपनी फ़ीस में जोड़ता है. मतलब वह आपसे जो 15 लाख लेगा उसमें से 10 लाख जज को देगा, और 5 लाख उसके पास रहेंगे.
.
सभी “बड़े वकील” इसी तरह बड़े वकील बनते है. जज के साथ उनकी सेटिंग होती है, और इसीलिए वे मोटी फ़ीस लेते है. बाद में इस याचिका पर क्या फैसला आएगा वह भी दिए गए पैसे यानी घूस की राशि पर निर्भर करता है.
.
उदाहरण के लिए, यदि आपने याचिका किसी “मोटी पार्टी” के खिलाफ लगाई है तो याचिका स्वीकार करने के लिए तो जज आपसे पैसा लेगा, लेकिन मामला स्वीकार करने के बाद सामने वाली पार्टी से और भी मोटी घूस लेकर याचिका ख़ारिज कर देगा !!
.
इस तरह जज दोनों पार्टियों से पैसा बनाता है. और दोनों पार्टियों को कभी भी पता नहीं चलेगा कि उन्होंने जज को घूस दी है !! क्योंकि अगली पार्टी भी जज को सीधे पैसा नहीं देगी. वह भी वकील को ही देगी. मतलब कोई और भी बड़ा वकील यह केस लड़ने के लिए 2 करोड़ लेगा, और इसमें से 1.5 करोड़ जज को दे देगा !!
.
(2) पहुंच : यदि आपका सम्पर्क किसी रसूखदार मंत्री, वरिष्ठ नौकरशाह, हाई कोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के जज आदि के साथ है, और यदि आपकी याचिका पेड मीडिया के प्रायोजको या किसी रसूखदार व्यक्ति के खिलाफ नहीं है तो भी सुप्रीम कोर्ट के जज आपकी याचिका स्वीकार कर सकते है.
.
(3) पेड मीडिया : यदि आपकी याचिका पेड मीडिया के प्रायोजको यानी अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माताओ के हित में है तो बिना कोई पैसा चुकाए आपकी याचिका स्वीकार भी हो जायेगी, और फैसला भी जल्दी आ जाएगा. और इसे पेड मीडिया में काफी सकारात्मक कवरेज भी मिलेगा !!
.
(4) एडवेंचर : कभी कभी जज कोई रोचक मामला देखते है तो एडवेंचर एवं सुर्खियों में आने के लिए मामला स्वीकार कर लेते है. किन्तु ऐसा एडवेंचर अनिवार्य रूप से पेड मीडिया के प्रायोजको के हितो के खिलाफ नहीं होना चाहिए. वरना जज को एडवेंचर महंगा पड़ सकता है. यदि याचिका पेड मीडिया के प्रायोजको के हितो के खिलाफ नहीं है, और इसमें रोचकता है तो 1-2% मामलो में याचिका स्वीकार हो सकती है.
.
मेरी जानकारी में, सुप्रीम कोर्ट में बहुधा ऊपर दिए गए 4 तरीको से ही याचिकाए स्वीकार की जाती है !!
.
समाधान ?
.
प्रस्तावित जूरी कोर्ट के क़ानून ड्राफ्ट की धारा (36) में हायर जूरी कोर्ट एवं सुप्रीम जूरी कोर्ट में जनहित याचिकाएं स्वीकार करने की शक्ति राष्ट्रीय महाजूरी मंडल को दी गयी है. धारा (36) कहती है कि –
.
(36) जनहित याचिकाएं : उच्चतर एवं उच्चतम महाजूरी मंडल में महत्त्वपूर्ण एवं तात्कालिक विषयों पर सीधे जनहित याचिकाएं भी दायर की जा सकेगी। याचिका स्वीकार करने या खारिज करने का फैसला राष्ट्रीय महाजूरी मंडल करेगा। यदि याचिका स्वीकृत हो जाती है तो राष्ट्रीय महाजूरी मंडल फ़ीस के रूप में जमा की गयी राशि लौटाने का निर्णय ले सकती है। जनहित याचिकाओं की सुनवाई की प्रक्रिया भी उसी तरह से होगी जैसा जिला जूरी मंडल के खंड में बताया गया है।
.
महाजूरी मंडल के गठन की प्रक्रिया धारा (11) में बतायी गयी है.
.
(11) महाजूरी मंडल का गठन :
.
(11.1) महाजूरी मंडल का गठन : राष्ट्रिय जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में दिल्ली की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
.
(11.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महाजूरी मंडल में से जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला/ राज्य /भारत की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा। इस तरह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा.
.
(12) महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
.
(12.1) मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा
.
(12.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
.
(12.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
.
(12.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
.
(12.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
.
(12.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
.
(12.7) महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा व्यय आदि का अतिरिक्त भुगतान किया जायेगा.
.
(12.8) राष्ट्रीय महाजूरी मंडल के सदस्यों को यात्रा व्यय एवं भत्ते वगेरह दूरी के आधार पर मिलेंगे, और इसकी प्राथमिक दरें राष्ट्रीय जूरी प्रशासक तय करेगा। यदि दरें कम या ज्यादा है तो राष्ट्रिय महाजूरी मंडल बहुमत से इनमे बदलाव कर सकता है। इसके बाद ये दरें मुद्रा स्फीति या महंगाई दर के अनुसार समायोजित की जा सकेगी। आवागमन की दरें द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित शायिका ( Second Class AC Sleeper ) की दरों के समकक्ष होगी।
.
-----------
.
यदि प्रधानमंत्री प्रस्तावित जूरी कोर्ट का क़ानून गेजेट में छाप देते है तो जनहित याचिका स्वीकार करने की शक्ति महाजूरी मंडल को मिल जाएगी, और तब बिना कोई पैसा दिए और बिना पेड मीडिया के सहयोग से वास्तविक जनहित याचिकाओ के स्वीकार होने की सम्भावना काफी बढ़ जाएगी.
.
प्रस्तावित जूरी कोर्ट का पूरा ड्राफ्ट यहाँ देखा जा सकता है - <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/909604579412620/>;
.
————
.
भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियों एवं सभी पेड बुद्धिजीवियों का मानना है कि, जनहित याचिकाओ को स्वीकार करने का अंतिम अधिकार सिर्फ और सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के जजों के पास ही होना चाहिए और नागरिको की जूरी के पास किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिये.
.
उनका दावा है कि एक आम भारतीय अशिक्षित, जाहिल, भ्रष्ट, निकम्मा, लालची, मूर्ख, जातिवादी, सांप्रदायिक है, और उसकी राजनैतिक संस्कृति परिपक्व नहीं है. आम भारतीय शासित होने की मानसिकता की ग्रस्त है, अत: आम भारतीयों को जनहित याचिकाएं स्वीकार करने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए.
.
इन पेड बुद्धिजीवियों से मेरा कहना है कि – "तुम अपनी बुद्धिमता के साथ दफा हो जाओ !! हमें तुम्हारी बौद्धिकता की कोई जरूरत नहीं है !!"
.
दरअसल, जज सिस्टम का डिजाइन इस तरह का होता है कि पैसा फेंकने से काम हो जाता है. अत: धनिक वर्ग, नेता, नौकरशाह, रसूखदार एवं पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में जज सिस्टम जारी रखना चाहते है, जूरी कोर्मेंट के सख्त खिलाफ है.
.
और इसीलिए उन्होंने पेड मीडिया के माध्यम (पाठ्य पुस्तकें+समाचार पत्र+टीवी+फ़िल्में) से यह गलत धारणा भारतीय जनमानस में ठांस दी है, कि चूंकि आम भारतीय जाहिल है इसीलिए उन्हें जूरी राइट्स नहीं दिए जाने चाहिए.
.
( जूरी कोर्ट का विरोध करने के लिए ये पेड बुद्धिजीवी किन पैंतरों एवं गलत तर्कों का इस्तेमाल करते है जल्दी ही मैं इस पर एक विस्तृत जवाब लिखूंगा.)
.
.
==========

Read full post →



Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 22 2020 09:46:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट में पुलिस प्रमुख पद के लिए आवेदन करने की धारा के बारे में स्पष्टीकरण :
.
प्रस्तावित जूरी कोर्ट की धारा (37) विभिन्न अधिकारियों के आवेदन करने की प्रक्रिया बताती है। धारा (37.1) कहती है कि --
.
(37.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
.
(जूरी कोर्ट का पूरा ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/909604579412620/>;)
.
--------
.
इस धारा के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :
.
(1) क्या जूरी कोर्ट आने के बाद आईपीएस की परीक्षाएं बंद हो जायेगी ?
.
यह क़ानून आने के बाद भी आईपीएस की परीक्षाएं जारी रहेगी और परीक्षा पास करके आने वाले अभ्यर्थीयों को पुलिस विभाग में नियुक्ति मिलेगी। लेकिन वे पुलिस प्रमुख के पद पर तब तक ही रह सकेंगे जब तक नागरिको का बहुमत उन्हें पुलिस प्रमुख बनाए रखना चाहता है.
.
यदि नागरिको के बहुमत ने उन्हें निकालने के लिए स्वीकृति दे दी है तो उनका पद जिला पुलिस प्रमुख या पुलिस प्रमुख नहीं होगा। सरकार उन्हें डिप्टी पुलिस प्रमुख या सहायक पुलिस अधीक्षक बना सकती है या किसी
अन्य विभाग में भेज सकती है, या नौकरी से भी निकाल सकती है। इस बारे में फैसला सरकार को करना है, कि वे ख़ारिज किये गए व्यक्ति का क्या करना चाहती है.
.
पुलिस प्रमुख वही बना रह सकेगा जिसे नागरिको के बहुमत ने अनुमोदित किया है। शेष पूरी पुलिस व्यवस्था उसी तरह से काम करेगी जिस तरह आज करती है।
.
---------
.
(2) क्या बिना किसी प्रशिक्षण के पुलिस प्रमुख जिले की पुलिस व्यवस्था चला पायेगा ?
.
प्रशासन या संचालन की किसी भी प्रणाली में 2 स्तर होते है।
.
(i) स्टाफ : किसी विभाग में कार्मिको या स्टाफ का काम दिए गए निर्देशों का पालन करना एवं व्यवस्था को संचालित करना होता है। और इस स्तर पर कुछ मामलों में आपको प्रशिक्षित व्यक्तियों की जरूरत हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी विभाग में अकाउंटिंग का काम है तो यह जरुरी है कि कार्मिको के पास वाणिज्य या कम्प्यूटर का अनुभव हो। इस स्तर पर कर्मचारी दिए गए निर्देशों का पालन करते है, और उनके पास विवेकाधिकार शक्तियां नहीं होती।
.
(ii) मुखिया : किसी विभाग के मुखिया का काम सही एवं गलत के आधार पर फैसले लेने होते है, और इसके पास काफी विवेकाधिकार शक्तियां होती है। जब किसी अधिकारी को विवेकाधिकार शक्तियां दी जाती है तो प्रशिक्षण गौण हो जाता है, और नीयत मायने रखती है। किसी विभाग का मुखिया वह होना चाहिए जो अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल न करें।
.
इसी वजह से दुनिया के किसी भी देश में मंत्री या प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी भी प्रकार के प्रशिक्षण / डिग्री / शिक्षा आदि की अर्हता (योग्यता) नहीं रखी जाती। और इन्हें जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाता है। और प्रधानमंत्री या मंत्री को प्रशिक्षित स्टाफ दिया जाता है ताकि वह निर्देशों का पालन करके व्यवस्था चलाये। और पुलिस प्रमुख के पास काफी विवेकाधीन शक्तियां होती है।
.
दरअसल , ज्यादातर मामलों में पुलिस प्रमुख के लिए वे ही लोग आवेदन करेंगे जो पहले से ही पुलिस विभाग में काम कर रहे है। उदाहरण के लिए कोई सहायक पुलिस अधीक्षक (D.S.P.) या थानेदार (S.H.O.) , वृत निरीक्षक (C.I.) आदि इसके लिए आवेदन कर सकते है, और जनता उन्हें सामान्य आवेदक की तुलना में इसीलिए तरजीह देगी क्योंकि उनके पास कार्य अनुभव होगा. इसके अलावा सेना में काम कर चुके अधिकारी (जिन्होंने इस्तीफा दे दिया हो या सेवानिवृत हो गए हो) भी आवेदन कर सकेंगे. इन सभी आवेदकों को हथियार चलाने एवं प्रशासन में काम करने का पहले से अनुभव होता है.
.
----------
.
(3) पार्षद का चुनाव जीतने वाले एवं प्रशासनिक सेवाओं की लिखित परीक्षा पास करने वाले व्यक्ति को आवेदन करने की अनुमति क्यों दी गयी है ?
.
(i) यदि किसी जिले में पुलिस विभाग में कार्यरत 10-12 शीर्ष / वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आपस में गठजोड़ बना लेते है, तो पुलिस विभाग में से अन्य कोई अधिकारी पुलिस प्रमुख बनने के लिए आवेदन नहीं करेगा और यदि अमुक क्षेत्र में कोई सैन्यकर्मी भी नहीं है तो नागरिको के विकल्प सिकुड़ जायेंगे, और पुलिस में भ्रष्टाचार फैल जाएगा. इसीलिए राज नेताओ को भी आवेदन करने का रास्ता दिया गया है. जब राजनेता प्रत्याशी बन सकेंगे तो वे पुलिस प्रमुख के गलत काम काज पर पैनी नजर रखेंगे और जनता को इस बारे में सूचित करेंगे.
.
(ii) प्रशासनिक परीक्षाओं की लिखित परीक्षा पास करने वाले बहुधा छात्र साक्षात्कार में इसीलिए फ़ैल कर दिए जाते है क्योंकि उनके पास लोक सेवा आयोग के सदस्यों को घूस देने के लिए पैसा नहीं होता. और इस तरह वे पुलिस प्रमुख बनने से वंचित हो जाते है या फिर किसी कमतर विभाग में नियुक्त किये जाते है. अत: उनके लिए भी आवेदन करने का विकल्प खुला रखा गया है.
.
-----------
.
(4) जूरी कोर्ट आने के बाद उस व्यक्ति का क्या होगा, जो परीक्षा पास करके मौजूदा स्थिति में पुलिस प्रमुख की नौकरी कर रहा है ?
.
इस कानून में यह प्रावधान है कि नागरिक मौजूदा पुलिस प्रमुख को भी स्वीकृति दे सके. तो यह क़ानून आने के बाद भी मौजूदा पुलिस प्रमुख की नौकरी चालू रहेगी, और उसकी नौकरी सिर्फ तब जायेगी जब नागरिक उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को पुलिस प्रमुख बनाने की स्वीकृति दें.
.
दरअसल जूरी कोर्ट के गेजेट में आने के साथ ही विभिन्न जिलो में काम कर रहे मौजूदा पुलिस प्रमुखो पर अपना काम सुधारने का दबाव बन जाएगा. वे जान जायेंगे कि यदि हमने व्यवस्था नाह सुधारी तो अब नागरिक मुझे निकालने के लिए स्वीकृति दर्ज करवा सकते है, और मंत्री जी मेरी नौकरी बचा नहीं पायेंगे. अत: ज्यादातर मामलों में वे अपना काम काज तेजी से सुधारना शुरू करेंगे. और जो अपना काम नहीं सुधरेगी उन्हें जिले के नागरिक निकाल देंगे.
.
मौजूदा व्यवस्था में नागरिको के पास पुलिस प्रमुख को बदलने की कोई प्रक्रिया नहीं है. और नागरिक निकम्मे पुलिस प्रमुख को निकालकर अच्छे व्यक्ति को पुलिस प्रमुख पद पर तब ही ला सकेंगे जब उनके पास पर्याप्त विकल्प होंगे. तो यह धारा नागरिको को पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के लिए कई विकल्प मुहैया कराती है. ताकि नागरिक मौजूदा पुलिस प्रमुख को कह सके कि – यदि तुमने काम नहीं सुधारा तो हम किसी अन्य व्यक्ति को पुलिस प्रमुख बना देंगे. और हमारे पास इसके लिए काफी विकल्प है.
.
===========

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 22 2020 13:22:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क्या जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छपवाने के लिए क्या आम पब्लिक को बंदूक उठानी होगी….? इन्कलाब लाना होगा ?
.
जब तक वोटिंग राइट्स और चुनावी प्रक्रिया चालू है तब तक बंदूक उठाने का नंबर नहीं आता.
.
मेरा मानना है कि यदि भारत के 51% नागरिक यानी लगभग 46 करोड़ मतदाता पीएम को पोस्टकार्ड / ट्विट भेजकर जूरी कोर्ट छापने के लिए कहते है तो 2 चीजे होगी

(1) या तो पीएम जूरी कोर्ट गेजेट में छाप देंगे, या
.
(2) पीएम से मिलने के लिए अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी सक्रीय हो जायेंगे.
.
और यदि उधम सिंह जी सक्रीय हो जाते है तो पीएम जूरी कोर्ट गेजेट में छाप देंगे.
.
और ज्यादा से ज्यादा नागरिक पीएम को पोस्टकार्ड भेजे इसके लिए कार्यकर्ताओ को क्या कदम उठाने चाहिए ?

इसके लिए यदि ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओ को जूरी कोर्ट क़ानून की मांग को लेकर चुनाव लड़ना चाहिए. क्योंकि जितने ज्यादा कार्यकर्ता चुनाव लड़ेंगे उतनी ही तेजी से जूरी कोर्ट की जानकारी लोगो तक पहुंचेगी और पोस्टकार्ड भेजने / ट्विट करने वालो की संख्या बढ़ेगी.
.
तो चुनाव लड़ना मांग को बूस्ट करता है. मेरा मानना है कि जब तक ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ता जूरी कोर्ट के मुद्दे पर चुनावी मैदान में नहीं आते तब तक जूरी कोर्ट की मांग खड़ी नहीं की जा सकती. किसी भी तरह से नहीं.
.
तो बंदूक उठाने का नंबर सिर्फ तब आता है जब कार्यकर्ता निम्नलिखित चरण पूरे कर चुके हो :
.
(1) पीएम को 45 करोड़ नागरिक पोस्टकार्ड / ट्विट के माध्यम से जूरी कोर्ट छापने के लिए कह चुके हो
.
(2) यह बात कॉमन नोलेज में आ चुकी हो कि, नागरिको का बहुमत पीएम से जूरी कोर्ट गेजेट में छापने की मांग कर रहा है
.
और फिर भी यदि पीएम जूरी कोर्ट गेजेट में छापने से मना कर देता है, तब और सिर्फ तब अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी पीएम से मुलाकात करेंगे.
.
======

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 22 2020 13:27:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस वीडियो में बीजेपी के शीर्ष नेता मोहन भागवत कहते पाए गए है कि -- "मैं कुछ बोलूंगा तो मेरी नौकरी चली जाएगी" !!! 30 सेकेण्ड का यह वीडियो देखें। (Re posted - पुराना पोस्ट )

जब मोदी जी ने गौ रक्षकों को गुंडा कहा था तब पत्रकार ने भागवत से यह प्रश्न किया था
.
मुझे नहीं पता कि यह वीडियो वास्तविक है या इसके साथ छेड़छाड़ की गयी है !!
.
यह वीडियो मेरे जैसे उन लोगो के लिए भी एक झटके कि तरह है जो यह बात वर्षो से जानते है कि संघ=बीजेपी, आपा , कोंग्रेस आदि पार्टियों के सभी शीर्ष नेता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के लिए काम करते है।
.
क्योंकि अब तक हम यह मानते थे कि ये सभी लोगो एक "अनुबंध" के तहत उनकी मातहती में है, न कि "वेतनभोगी कर्मचारी" !!!
.
इस वीडियो की विश्वसनीयता मालूम करने के लिए इसे अपने फेसबुक एवं व्हाट्स एप एकाउंट पर साझा करें ताकि स्पष्टीकरण सामने आ सके।

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

इस वीडियो में बीजेपी के शीर्ष नेता मोहन भागवत कहते पाए गए है कि -- "मैं कुछ बोलूंगा तो मेरी नौकरी चली जाएगी" !!! 30 सेकेण्ड का यह वीडियो देखें।

जब मोदी जी ने गौ रक्षकों को गुंडा कहा था तब पत्रकार ने भागवत से यह प्रश्न किया था
.
मुझे नहीं पता कि यह वीडियो वास्तविक है या इसके साथ छेड़छाड़ की गयी है !!
.
यह वीडियो मेरे जैसे उन लोगो के लिए भी एक झटके कि तरह है जो यह बात वर्षो से जानते है कि संघ=बीजेपी , आपा , कोंग्रेस आदि पार्टियों के सभी शीर्ष नेता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के लिए काम करते है। लेकिन अब तक हम यह मानते थे कि ये सभी लोगो एक "अनुबंध" के तहत उनकी मातहती में है , न कि "वेतनभोगी कर्मचारी" !!!
.
इस वीडियो की विश्वसनीयता मालूम करने के लिए इसे अपने फेसबुक एवं व्हाट्स एप एकाउंट पर साझा करें ताकि स्पष्टीकरण सामने आ सके।
.
============

Read full post →



Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 23 2020 11:45:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

@PmoIndia को ट्विट करें कि सार्वजनिक बैंक का निजीकरण न करें -
.
सरकारी बैंको को बेचना देशद्रोह है।
.
बैंक पैसे छापते है। अत: निजी बैंक और वह भी विदेशी बैंको को पैसा छापने की अनुमति देना एक तरह से देशद्रोही कदम है। और हमारे प्रधानमंत्री जी इसी दिशा में कदम उठाने की योजना पर काम कर रहे। साथ ही पेड मीडिया के प्रायोजको पर निर्भर पेड मीडिया पार्टियों के नेता सोनिया जी, केजरीवाल जी और उनके अंधभगत भी सरकारी बैंको को बेच दिए जाने के फैसले का समर्थन कर रहे है !!!
.
संघ के सभी कार्यकर्ताओ का भी कहना है कि वे मोदी साहेब के सभी फैसलों में उनके साथ साथ गले गले पानी तक खड़े है !! अत: संघ के सभी कार्यकर्ता भी सरकारी बैंको को बेचने के समर्थन में है !!
.
यदि आप सरकारी बैंको को विदेशियों को बेच देने का विरोध करते है तो पीएम को ट्विट करके यह कदम नहीं उठाने को कहें.
.
मेरा ट्वीट -
.
@PmoIndia #DoNotPrivatizeGovtBanks #DoNotPrivatizeGovtInsuranceCompanies सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण न करें। सरकार के स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों का निजीकरण भी न करें। सरकारी बैंको का निजीकरण देशद्रोह है। Privatizing PSU banks and money creation is TREASON.
.
मेरा ट्वीट - <https://twitter.com/PawanJury/status/1286268083842117632>;
.
=====

Read full post →





Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jul 26 2020 07:52:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आज का वेबिनार विषय:
कार्यकर्ता संदेह समाप्ति सत्र

आज के वेबिनार के लिए लिंक शाम 3 बजे -- > <https://us02web.zoom.us/j/83200222810>;

मीटिंग आईडी: 832 0022 2810

Kushagra Yadav Salonup:

Today's webinar Topic:

Activist Doubt Clearing Session

Link for today's webinar at 3 PM --> [<https://us02web.zoom.us/j/83200222810>;](<https://us02web.zoom.us/j/83200222810?fbclid=IwAR1HtdiDA_nduThBtiQUEZY7TgrFGQYf8akG3vs-TYmhlQExMx7IXHDUYAw>;)

Meeting ID: 832 0022 2810

Read full post →



Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jul 26 2020 21:50:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मैं राईट टू रिकॉल आन्दोलन से कैसे जुड़ सकता हूँ ?
.
भारत में पिछले 21 वर्षो से अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरणा लेने वाले कार्यकर्ता जूरी कोर्ट, वोट वापसी पासबुक, रिक्त भूमि कर एवं धनवापसी पासबुक क़ानून ड्राफ्ट्स के नेतृत्व में जन आन्दोलन खड़ा करने के लिए प्रयासरत है। राईट टू रिकॉल पार्टी इसी जन आन्दोलन का एक हिस्सा है।
.
(i) इस आन्दोलन के कार्यकर्ता अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरणा लेते है।
.
(ii) इस आन्दोलन का नेता कोई व्यक्ति नहीं है, बल्कि क़ानून ड्राफ्ट है। सभी कार्यकर्ता क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में काम करते है।
.
(iii) यह कार्यकर्ता निर्देशित जन आन्दोलन है। मतलब इस आन्दोलन को दिशा देने का काम पेड मीडिया या कोई व्यक्ति नहीं करता है। कई कार्यकर्ता करते है.
.
---------
.
राईट टू रिकॉल पार्टी ने कुल 25 क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है जिनकी सूची यहाँ देखी जा सकती है - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3076382355813313>;
.
यदि आप उपरोक्त 25 कानूनों में से किन्ही 3 कानूनों को गेजेट में छापने की मांग प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री से करते है तो आप राईट टू रिकॉल आन्दोलन से स्वत: जुड़ जाते है।
.
---------
.
इसके लिए कृपया निम्नलिखित कदम उठाए :
.
(1) मान लीजिये आप जूरी कोर्ट का समर्थन करते है तो जूरी कोर्ट का पोस्टकार्ड भेज सकते है।
.
पोस्टकार्ड में यह लिखे :
.
"प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें - #JuryCourt , #VoteVapsiPassbook "
.
(1.1) ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले।
.
(1.2) "प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" (My Letters to Pm) नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
.
(1.3) चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें। अन्य दिवसों पर नहीं.
.
(2) यदि आप फेसबुक पर है तो अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर "प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग" (My Letters to Pm) नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
.
(3) यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री जी को यह ट्विट करें :
.
@Pmoindia , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #JuryCourt , #VoteVapsiPassbook
.
(3.1) "प्रधानमंत्री को भेजे गए ट्विट" (Tweet I have sent to Pm) नाम से एक फेसबुक एल्बम बनाए और ट्विट का लिंक इस एल्बम में रखें।
.
(4) Law Draft I asked Pm to Print नाम से एक फेसबुक बनाए और जिन कानूनों का आप समर्थन करते है उनके ड्राफ्ट इस एल्बम में रखें।
.
---------
.
यह पूरी प्रक्रिया एकदम एक ही दिन में करने की जरूरत नहीं है। जैसे जैसे आपको समय मिले वैसे वैसे आप ऊपर दिए गए कदम उठाते जाए।
.
उपरोक्त कदम उठाने से आप राईट टू रिकॉल पार्टी के मेंबर बन जाते है। इतना करने के बाद आप कभी भी पार्टी का फोर्मल्टी का फॉर्म भर सकते है। आप फॉर्म नहीं भी भरते है तब भी आप उपरोक्त कदम उठाने के बाद खुद को राईट टू रिकाल पार्टी या राईट टू रिकॉल जनआन्दोलन का सदस्य कह सकते है !!
.
----------
.
उपरोक्त कदम उठाने के लिए आपको एल्बम पिक्चर, ड्राफ्ट, अन्य विवरणों एवं सूचनाओं की जरूरत पड़ेगी। उसके लिए आप मेरी या राईट टू रिकॉल के किसी भी कार्यकर्ता की फेसबुक प्रोफाइल का इस्तेमाल कर सकते है। मेरे फेसबुक एल्बम के कुछ लिंक निचे दिए गए है :
.
(1) मेरे द्वारा प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट्स आप इस एल्बम में देख सकते है। एल्बम में रखे गए सभी ड्राफ्ट्स देखने के लिए कृपया फीड व्यू क्लिक करके स्क्रोल करें --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/media_set?set=a.1450971748354390&type=3>;
.
(2) मेरे द्वारा लिखे गए कुछ महत्त्वपूर्ण आलेख आप इस ग्रुप में पढ़ सकते है। सम्बंधित पोस्ट पढ़ने के लिए टॉपिक सेलेक्ट करें –
<https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/>;
.
(3) पार्टी मेनिफेस्टो के अध्याय पढ़ने के लिए कृपया मेरे नोट्स सेक्शन में जाए। वहां प्रत्येक अध्याय का अलग से नोट मिलेगा।
.
(4) यदि आप मुझसे कोई प्रश्न करना चाहते है तो अपना प्रश्न निचे दिए गए पोस्ट के कमेन्ट बॉक्स में रख सकते है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1810964342355127>;
.
(5) जूरी कोर्ट का क़ानून ड्राफ्ट इस लिंक से कॉपी करें -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2297657633685793>;
.
(6) मेरे द्वारा भेजी गयी चिट्ठियों का एल्बम देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/media_set?set=a.1967116523406574&type=3>;
.
=====

Read full post →




Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jul 27 2020 11:37:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टु रिकॉल पार्टी की तरफ से आगामी भीलवाड़ा नगर परिषद चुनाव 2020 के लिये वार्ड संख्या 46 से संभावित प्रत्याशी — अनिल जी छापरवाल

Anil Chhaperwal:

मै भीलवाड़ा जिले के सरकारी स्कुलों सरकारी अस्पतालों की दशा को सुधारने तथा पुलिस व अदालतों के भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये जनता को वोट वापसी पासबुक जारी करवाने के मुद्दे पर राईट टु रिकॉल पार्टी की तरफ से आगामी भीलवाड़ा नगर परिषद चुनाव 2020 के लिये वार्ड संख्या 46 से संभावित प्रत्याशी हूँ...

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 29 2020 09:35:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

विदेशी निवेश में कटौतियां
.
संवेदनशील क्षेत्रो में FDI पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित क़ानून
.
इस कानून में 2 खंड है। पहला खंड भारत के संवेदनशील क्षेत्रो में विदेशी निवेश (FDI) पर निर्बन्धन लगाकर सिर्फ “सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कंपनियों” को कारोबार करने की अनुमति देता है। तथा दुसरा खंड भारत में भारतीयों द्वारा स्वदेशी हथियारों के उत्पादन (Made in India Made by Indians) के लिए आवश्यक शासन की रचना करता है।
.
इस क़ानून को संसद से साधारण बहुमत द्वारा पारित करके गेजेट में छापा जा सकता है। यदि यह कानून विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) के किसी समझौते का उलंघन करता है तो W.T.O. भारत को समझौते से बाहर कर सकता है, या प्रधानमंत्री भारत को W.T.O. समझौते से अलग करने के लिए आवश्यक अधिसूचना जारी कर सकते है।
.
#Rrp06 , #ReduceFDI
.
यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
.
“प्रधानमंत्री जी, विदेशी निवेश में कटौतियां क़ानून गेजेट में छापें - #ReduceFDI
.
-----ड्राफ्ट का प्रारम्भ----
.
खंड – अ ; महत्त्वपूर्ण क्षेत्रो में विदेशी कम्पनियों पर निर्बन्धन के प्रावधान
.
(01) कोई भी कंपनी अपने आप को वोइक यानी ‘सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनी’ (Woic = Wholly Owned by Indian citizens Company) के रूप में पंजीकृत करवा सकती है। वोइक कम्पनी से आशय ऐसी किसी कम्पनी से है जिसके 100% अंश (Share) भरतीय नागरिको या भारतीय सरकार या किसी अन्य वोइक कंपनी के पास हों, और अमुक कम्पनी के कोई भी शेयर विदेशियों के पास न हों।
.
(02) निचे दिए गए व्यष्टियों (Individuals) के अतिरिक्त कोई भी व्यष्टि किसी भी वोइक (WOIC) कंपनी के शेयर नहीं खरीद सकेंगे :
.
(2.1) 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक (Indian Citizen)
.
(2.2) 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी अस्थायी निवासी भारतीय नागरिक (NRI = Non Resident Indian)
.
(2.3) कोई भी कम्पनी जो वोइक के रूप में पंजीकृत है
.
(2.4) भारत की केंद्र राज्य या स्थानीय सरकार
.
(03) सिर्फ भारतीय नागरिक ही किसी वोइक कम्पनी का निदेशक, अध्यक्ष या साझेदार हो सकेगा।
.
(04) यदि किसी वोइक कम्पनी का कोई साझेदार किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है, तो उसे 3 महीनों के भीतर अपने शेयर बेच देने होंगे, या अवधि बीत जाने पर वोइक रजिस्ट्रार उन शेयर को नीलाम करेगा और नीलामी शुल्क काट कर नीलामी से मिले रूपये अमुक नागरिक को दे देगा। वोइक कम्पनी प्रत्येक माह वोइक रजिस्ट्रार को कंपनी के स्वामित्व का सम्पूर्ण ब्यौरे की अद्यतन सूचना देगी।
.
(05) प्रत्येक मंत्री, सांसद, विधायक, जज, एवं सरकारी कर्मचारी यह घोषणा करेगा कि उसके पास किन वोइक या गैर वोइक कम्पनियों का कितना स्वामित्व (Sharing) है।
.
(06) वोइक कम्पनियों का क्षेत्राधिकार एवं गैर वोइक कम्पनियों पर निर्बन्धन :
.
(6.1) गैर वोइक कम्पनी भारत में कोई भी भूमि एवं निर्माण नहीं खरीद सकेगी और न ही इन्हें 25 साल से अधिक अवधि के लिए किराये पर ले सकेगी।
.
(6.2) गैर वोइक कम्पनी न तो खदानें एवं कृषि भूमि खरीद सकेगी और न ही इन्हें किराये पर ले सकेगी।
.
(6.3) गैर वोइक कम्पनी को भारत में बैंक खोलने या ऐसी कोई भी वित्तीय कम्पनी खोलने की अनुमति नहीं होगी जो जमाएं (Deposits) स्वीकार करती है।
.
(6.4) सिर्फ वोइक कम्पनियाँ ही खाने पीने की चीजे (जो दवा ना हो) बना सकेगी।
.
(6.5) राष्ट्रीयकृत बैंक सिर्फ वोइक कम्पनी को ही कर्ज दे सकेंगे।
.
(6.6) सिर्फ वोइक कम्पनी को ही खनन जैसे कच्चे तेल की खुदाई एवं ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने की अनुमति होगी।
.
(6.7) सिर्फ वोइक कम्पनियों को ही शैक्षिक निकाय, शिक्षा बोर्ड, विद्यालय एवं विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति होगी।
.
(6.8) सिर्फ वोइक कम्पनियां ही संचार, मीडिया, रेलवे, सेटेलाईट, रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में काम कर सकेगी और गैर वोइक कम्पनियों को इन क्षेत्रो में कारोबार की अनुमति नहीं होगी। संचार एवं मीडिया में सभी दृश्य, श्रव्य माध्यम जैसे सभी प्रकार के अख़बार, मैगजीन, चैनल्स, फ़िल्में, इंटरनेट सेवाएं, सोशल मीडिया, टेलिकॉम शामिल है। रक्षा उत्पादन में सभी प्रकार के हथियारों का निर्माण एवं सैन्य उपकरण शामिल है।]
.
[ टिप्पणी : यदि इस खंड की कोई धारा विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) के किसी समझौते का उलंघन करता है तो W.T.O. भारत को समझौते से बाहर कर सकता है, या प्रधानमंत्री भारत को W.T.O. समझौते से अलग करने के लिए आवश्यक अधिसूचना जारी कर सकते है।]
.
-------
.
खंड – ब ; स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान
.
(07) रक्षा मंत्री निम्नलिखित हथियारों की परिभाषाएं प्रकाशित करेगा :
.
1. छोटी बंदूके।
2. मध्यम आकार की बंदूके।
3. बड़ी बंदूके।
4. होवित्ज़र तथा होवित्ज़र किस्म के अन्य प्रकार।
5. टेंक तथा टेंक के अन्य प्रकार।
6. कारतूस, गोले तथा कारतूस व गोलों के अन्य प्रकार।
7. प्रक्षेपास्त्र तथा प्रक्षेपास्त्र के अन्य प्रकार।
8. लड़ाकू विमान तथा लड़ाकू विमानो के अन्य प्रकार।
9. सेना द्वारा उपयोग किये जाने वाले अन्य उपकरण तथा उनके प्रकार।
10. आणविक हथियार एवं उनके प्रकार।
11. रासायनिक हथियार एवं उनके प्रकार।
12. जैविक हथियार एवं उनके प्रकार।
.
(08) रक्षा मंत्री हथियारों की निम्नलिखित तीन श्रेणियां निर्धारित करके प्रकाशित करेंगे -
.
(8.1) श्रेणी प्रथम : हथियार जिनके लिए पंजीकरण करवाना आवश्यक नहीं है।
.
(8.2) श्रेणी द्वितीय : ऐसे हथियार जिनके लिए पंजीकरण आवश्यक हो किन्तु लाइसेंस नहीं।
.
(8.3) श्रेणी तृतीय : ऐसे हथियार जिनके लिए लाइसेंस आवश्यक हो।
.
(09) रक्षा मंत्री निम्नलिखित हथियारों को 'श्रेणी द्वितीय' = 'पंजीकरण आवश्यक परंतु लाइसेंस जरूरी नहीं' सूची के अंतर्गत रखेंगे :
.
1. छोटी बंदूके
2. मध्यम आकार की बंदूके
3. बड़ी बंदूके
.
भारत सरकार इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेगी। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसंस के, केवल पंजीकरण करवाकर, बंदूक या बन्दुक के पुर्जे या बंदूक की गोलियाँ बनाने की फैक्ट्री शुरू कर सकता है। कोई भी नागरिक गोली-रोक (बुलेट-प्रूफ) जैकेट भी बना सकता है।
.
(10) रक्षा मंत्री उन हथियारों की एक सूची जारी करेंगे जिनके लिए पंजीकरण या लाइसेंस की आवश्यकता न हो। रक्षा मंत्री निम्नलिखित हथियारों को श्रेणी तृतीय = लाइसेंस जरूरी की सूची के अंतर्गत रखेंगे :
.
1. अनुमति मिले होवित्ज़र एवं उनके प्रकार ।
2. अनुमति मिले टेंक एवं उनके प्रकार ।
3. अनुमति मिले प्रक्षेपास्त्र एवं उनके प्रकार ।
4. अनुमति मिले कारतूस, गोले एवं उनके प्रकार ।
5. अनुमति मिले लड़ाकू विमान एवं उनके प्रकार ।
6. सेना द्वारा स्वीकृत और उपयोग में लाये जाने वाले अन्य श्रेणी के हथियार 7. आणविक हथियार एवं उनके प्रकार ।
8. जैविक हथियार एवं उनके प्रकार ।
9. रासायनिक हथियार एवं उनके प्रकार ।
.
(11) जिन हथियारों के लिए सिर्फ पंजीकरण अनिवार्य है, ऐसे हथियारों के उत्पादन के लिए रक्षा मंत्री भारतीय नागरिकों के सम्पूर्ण स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) के लिए आवश्यक निर्देश जारी करेंगे।
.
रक्षा मंत्री सुनिश्चित करेंगे कि इन कम्पनियों द्वारा कौनसी जानकारीयां सार्वजनिक की जायेगी तथा कौनसी जानकारियाँ रक्षा मंत्रालय के पास गुप्त रहेंगीं। रक्षा मंत्री यह भी निर्देशित करेंगे कि कौनसी जानकारियाँ इन कम्पनियों को प्रकाशित करनी होंगी तथा कौनसी जानकारियाँ कम्पनियां स्वयं के पास गुप्त रख सकेंगी।
.
(12) जो कम्पनियां भारतीय नागरिकों के पूर्ण स्वामित्व वाली नहीं है, ऐसी कम्पनियों को तीनों श्रेणियों तथा अन्य किसी भी श्रेणी के हथियारों के उत्पादन हेतु पंजीकरण तथा लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
.
(13) हथियारों का उत्पादन कर रही कंपनियों के बीच कोई विवाद हो या कोई नागरिक या सरकारी अफसर को ये लगता है कि किसी फैक्ट्री का मालिक किसी कानून को तोड़ रहा है, तो कोर्ट मामले का निपटारा जज द्वारा नहीं, बल्कि जिले के मतदाताओं की जूरी द्वारा होगा। ज्यूरी सदस्यों का चयन जिले की वोटर लिस्ट में से 30 और 55 के आयुवर्ग में से किया जाएगा। मामले की अपील राज्य जूरी और राष्ट्रिय जूरी में की जा सकती है।
.
[ टिप्पणी : जूरी के गठन एवं संचालन की प्रक्रिया उसी तरह की रहेगी जैसी प्रस्तावित जूरी कोर्ट के कानून ड्राफ्ट में दी गयी है ]
.
(14) जनता की आवाज
.
(14.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
.
(14.2) यदि कोई मतदाता धारा 14.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
.
[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा (14.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यदि 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है। ]
.
-----ड्राफ्ट की समाप्ति----
.

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 29 2020 19:30:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जिला जूरी कोर्ट – थानों-अदालतों को सुधारने के लिए जिला जूरी कोर्ट
.
Jila Jury Court – Proposal to Enact Lower Jury Courts
.
यह क़ानून जिले के थानों, अदालतों, सरकारी स्कूलों, अस्पतालों आदि का काम-काज सुधारने के लिए लिखा गया है। यह कानून उस जिले में लागू होगा जिस जिले के लिए मुख्यमंत्री ने राजपत्र अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री चाहे तो इसे राज्य के अन्य जिलो में या पूरे प्रदेश में भी लागू कर सकते है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। #RRP05
.
-------
.
यदि आप अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
.
मुख्यमंत्री जी, कृपया जिला जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छापें — #JilaJuryCourt #VoteVapsiPassBook
.
भारत के अन्य जिलो के नागरिको के लिए :
.
यदि आप भी अपने जिले में जूरी कोर्ट चाहते है तो मुख्यमंत्री से आपके जिले में भी इस क़ानून को लागू करने की मांग कर सकते है.
.
--------
.
==== ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
.
भाग (I) : नागरिकों एवं अधिकारियों के लिए निर्देश :
.
(01) यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :

.
1.1. हत्या, हत्या के प्रयास , मारपीट, हिंसा , अप्राकृतिक मानव मृत्यु , दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
.
1.2. अपहरण , बलात्कार , छेड़छाड़ , कार्यस्थल पर उत्पीड़न , दहेज़ , घरेलू हिंसा , डिवोर्स , वैवाहिक झगड़े ।
.
1.3. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारणों से सम्बंधित सभी मामले एवं सम्बंधित सभी आपत्तियां ।
.
1.4. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
.
(02) यह क़ानून गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
.
01. जिला पुलिस प्रमुख
02. जिला शिक्षा अधिकारी
03. जिला चिकित्सा अधिकारी
04. जिला मिलावट रोक अधिकारी
05. जिला जज
06. जिला जूरी प्रशासक
.
तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है ।
.
[ टिपण्णी : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है , अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए – अमुक जिले के नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके।
.
बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है। इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि – भारत के नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है – अमुक जिले के अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे। ]
.
यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दे सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इस शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
.
(II) अधिकारियों के लिए निर्देश :
.
टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी , मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है ।
.
(04) जिले के न्याय क्षेत्र में घटित होने वाले अपराधो के सम्बन्ध में यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :
.
4.1. हत्या, हत्या के प्रयास, दुर्घटना या लापरवाही जनित मानव मृत्यु या किसी भी प्रकार की अप्राकृतिक मानव मृत्यु।
.
4.2. ऐसे सभी अपराध जिसमे हिंसा, जान लेवा धमकी, दुर्घटना एवं ऐसी लापरवाही जिससे शरीर को क्षति कारित हो, या गंभीर चोट कारित होने की संभावना हो, दलित उत्पीड़न, Sc-St Act के मामले ।
.
4.3. अपहरण-बलात्कार-छेड़छाड़-उत्पीड़न , महिला का पीछा करना , दहेज़ , घरेलू हिंसा, डिवोर्स, वैवाहिक झगड़े।
.
4.4. सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जिसमें- फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है - से सम्बंधित सभी प्रकार के मामले व आपत्तियां।
.
4.5. किरायेदार-मकान मालिक विवाद, 2 करोड़ से कम मूल्य की सभी प्रकार की जमीन, प्रोपर्टी, सम्पत्तियों आदि के विवाद । मृत्यु भोज से सम्बंधित शिकायतें एवं आपत्तियां।
.
4.6. सभी प्रकार के ऐसे अपराध या नागरिक विवाद जिन्हे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने इस सूची में शामिल किया हो।
.
4.7. ऐसे अपराध या विवाद जिन्हें नागरिको के बहुमत ने इस क़ानून की धारा (34) द्वारा एवं प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया हो
.
(05) जिला सहायक निदेशक अभियोजन (A.D.P.) को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 6 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक वोट वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। इन अधिकारीयों के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (31) देखें।
.
(06) मुख्यमंत्री जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (31) का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
.
[ टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी। ]
.
(07) जिले में दर्ज सभी मतदाताओं की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिलने पर मुख्यमंत्री ऊपर दी गयी सभी धाराओं को निलंबित कर सकते है, और जिले में अपनी पसंद का जिला जूरी प्रशासक 4 वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते है।
.
(08) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :
.
सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
.
(8.1) जिले की मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
.
(8.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में दर्ज है।
.
(8.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
.
(8.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
.
(8.5) यदि किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो डॉक्टर जूरी ड्यूटी पर न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
.
(8.6) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन में से काट सकता है।
.
(09) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :
.
(09.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
.
(09.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
.
(10) क्रमरहित तरीके ( लॉटरी ) से मतदाताओं को चुनने का तरीका :
.
(10.1) जूरी प्रशासक किसी अंक को क्रमरहित विधि से चुनने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा। यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने किसी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया है तो वह नीचे बताये तरीके का प्रयोग करेगा :
.
(10.2) मान लीजिये जूरी प्रशासक को 1 और 4 अंको वाली संख्या जैसे ABCD के मध्य की कोई संख्या चुननी है । तब वह हर अंक के लिए 4 दौर के लिए पांसे फेकेगा। पहले दौर में यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0 से 5 के मध्य का है, तब वह केवल 1 पांसे का इस्तेमाल करेगा और यदि उसे ऐसा अंक चुनना है जो 0-9 के मध्य है, तब वह 2 पांसों का प्रयोग करेगा।
.
(10.3) चुनी गयी संख्या उस संख्या से 1 कम होगी जो एक अकेला पांसा फेकने पर आएगी, और दो पांसे फेकने की स्थिति में यह 2 से कम होगी। यदि पांसे फेकने पर आई संख्या जरुरत की सबसे बड़ी संख्या से बड़ी है तो वह पांसे दोबारा फेकेगा।
.
(10.3.1) मान लीजिये जूरी प्रशासक को एक किताब जिसमे 3693 पेज है, में से एक पेज का चयन करना है। तब जूरी प्रशासक 4 दौर ( राउंड ) के पासें फेंकेगा। पहले दौर में वह एक ही पांसे का प्रयोग करेगा, क्योंकि उसे 0-3 के बीच की संख्या का चयन करना है। यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता हैं तो वह पांसा दोबारा फेकेगा।
.
यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी हुई संख्या 3-1=2 होगी। अब जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जायेगा। इस दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्या चुननी है, इसलिए वह दो पांसे फेकेगा। यदि उनका जोड़ 8 से अधिक हो जाता है तो वह पांसे दुबारा फेकेगा। यदि जोड़ का मान 6 आया तो चुनी हुई संख्या 6-2=4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिये चार दौरों में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है। तब जूरी प्रशासक (3-1) , (5-2) , (10-2) और (2-1) अर्थात पेज संख्या 2381 चुनेगा।
.
(10.3.2) जूरी प्रशासक सभी मतदाताओं की सूची तैयार कर सकता है और क्रमरहित तरीके से किन्ही दो बड़ी प्रधान संख्याओ को चुन सकता है। मान लीजिये सूची में N मतदाता है। तब वह N/2 और 2N के बीच दो प्रधान संख्या जिन्हें ‘n और m’ मान लेते है, चुन सकता है। चुने हुए मतदाता हो सकते है - ( n mod N ) , ( n +m ) mod N , ( n+2m ) mod N से (n+ ( k-1 )*m ) mod N , जहाँ k का आशय चुने जाने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
.
(11) महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 30 दिनों बाद दी जाएगी।
.
(12) यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 30 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।
.
(13) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :
.
(13.1) यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी संस्था का किसी और व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप है और यह आरोप यदि धारा (4) या उसके आधार पर जारी किये गए किसी गेजेट नोटीफिकेशन के अंतर्गत है, तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में सूचित कर सकते है, अथवा धारा (34.1) के अंतर्गत अपनी शिकायत मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास या मृत्युदंड का सुझाव दे सकते है।
.
(13.2) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य यदि किसी गवाह, शिकायतकर्ता या अभियुक्त को बुलावा देते है तो वे उनके समक्ष हाजिर हो सकते है। वे किसी वकील या विशेषज्ञ को बोलने की अनुमति दे सकते है या नहीं भी दे सकते है।
.
(13.3) यदि महाजूरी मंडल के 15 से अधिक सदस्य किसी मामले को विचार योग्य मानते हैं तो मामले के विचार के लिए जिला जूरी प्रशासक 15 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा जिनकी उम्र 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच होगी । यदि 15 से अधिक महा जूरी मंडल के सदस्य कहते हैं कि मामला विचार योग्य नहीं है तो मामले को निरस्त कर दिया जाएगा।
.
(13.4) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना लगा सकते है। महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और सबके द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की मध्यराशि (median) जुर्माने की राशि मानी जाएगी। महाजूरी मंडल के सदस्य ये भी तय करेंगे कि झूठे आरोप की क्षतिपूर्ति के रूप में अभियुक्त को जुर्माने की राशि में से कितनी राशि दी जाएगी। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय , सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
.
(14) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
.
महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :
.
(14.1) यदि अभियुक्त के पास अधिक आर्थिक या राजनैतिक हैसियत है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
.
(14.2) यदि अपराध जघन्य है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए यदि मामला 100,000 रूपए या उससे कम धन राशि की चोरी का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 15 हो सकती है। पर यदि चुराई धन राशि इससे अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा होगी। यदि मामला हत्या का है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है।
.
(14.3) यदि कोई व्यक्ति अतीत में एकाधिक अपराधों का अभियुक्त रहा है, और महाजूरी मंडल के सदस्य ज्यादातर मामलों को विचार योग्य मानते है तो वे जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सकते है।
.
(14.4) यदि मामला ज्यादा पैसों का है तो जूरी सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है। न्यूनतम संख्या 15 होगी और हर 1 करोड़ की राशि के लिए 1 अतिरिक्त सदस्य जोड़ा जाएगा। किन्तु जूरी का आकार 1500 से अधिक नहीं होगा।
.
(15) जूरी सदस्यों का चयन :
.
(15.1) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में पिछले 10 वर्षों में किसी सरकारी पद पर रहे नागरिक भी जूरी से बाहर रहेंगे। शेष लोगों में से बिना किसी इंटरव्यू के जूरी प्रशासक लाटरी द्वारा आवश्यक संख्या के जूरी सदस्य चुनेगा। किसी व्यक्ति को जूरी में शामिल नहीं करने का निर्णय जूरी प्रशासक द्वारा लिया जाएगा और उसे सिर्फ महाजूरी मंडल के बहुमत द्वारा बदला जा सकेगा।
.
(15.2) जिला जूरी प्रशासक जूरी सदस्यों को प्रत्येक जूरी सदस्य की शिक्षागत योग्यता, पेशा और संपत्ति अथवा आय के बारे में सूचित करेगा। जिन जूरी सदस्यों के पास कम जानकारी है या तर्क या गणित में कम दक्षता है वे उन जूरी सदस्यों से सहायता ले सकते है, जिनके पास ज्यादा जानकारी है या जो तर्क या गणित में ज्यादा दक्ष हैं।
.
(15.3) जिला जूरी प्रशासक जिला मुख्य न्यायधीश से मामले की सुनवाई में जूरी सदस्यों को आवश्यक सलाह देने और मामले के संचालन के लिए एक या अधिकतम 3 न्यायधीशों की नियुक्ती करने के लिए कहेगा। न्यायधीशों के संख्या के बारे मे जिला मुख्य न्यायधीश का निर्णय अंतिम होगा। जिला जूरी प्रशासक एक ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त करेंगे और ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर मामले पर विचार करने की प्रक्रिया एवं जूरी ट्रायल का संचालन करेगा।
.
(16) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना : सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
.
(17) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।
.
(18) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।
.
(19) जुर्माने का निर्धारण : प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा।
.
अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।
.
(20) कारावासीय दंड : ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा।
.
अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।
.
(21) मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।
.
(22) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
.
(23) यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।
.
(24) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना - यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो तीन महीने बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।
.
(25) यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा।
.
किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है।
.
(26) जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।
.
(27) जिला जूरी प्रशासक जिले की सभी तहसीलों में भी तहसील स्तर पर तहसील जूरी प्रशासको की नियुक्ति करेगा। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। तहसील जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील महाजूरी मंडलों का गठन करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।
.
[ टिपण्णी : यदि वादी गण को लगता है कि जिला जज ने अनुचित फैसला दिया है तो वे इस क़ानून के वोट वापसी खंड की धारा (31) का इस्तेमाल करके जिले के नागरिको से विनती कर सकते है कि नागरिक जिला जज को नौकरी से निकालने की स्वीकृति दें। या वे इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34.1) के तहत जिले के नागरिको के समक्ष पुनर्विचार (Riview) का एक शपथपत्र भी दाखिल कर सकते है।
.
(28) इसी क़ानून की धारा (04) में वर्णित मामलो या धारा (04) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना जिले के किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा।
.
किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (34) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (34) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिले के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।
.
(29) जिला स्तर के अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
.
(29.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
.
(29.2) जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 8 वर्ष हो चुके हो या वह सहायक लोक अभियोजक ( APP = Assistance Public Prosecutor ) के रूप में 3 वर्ष तक सेवाएं दे चुका हो तो वह जिला जज, जिला जूरी प्रशासक एवं सहायक निदेशक अभियोजन ( ADP = Additional Director of Prosecution ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
.
(29.3) जिला चिकित्सा अधिकारी : 32 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए वांछित डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
.
(29.4) जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिलावट रोकथाम अधिकारी पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
.
(30) धारा (29) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
.
(31) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
.
(31.1) जिले का कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या वोटर आई डी के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिला वेबसाईट पर भी सार्वजनिक करेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृति दे सकता है।
.
(31.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
.
(31.3) यदि मतदाता सहमती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा
.
(31.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियों का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
.
[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
.
रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
.
(32) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
.
(32.1) जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने सहमती दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या नही भी कर सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।
.
(32.2) जिला जूरी प्रशासक, मिलावट रोक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जिला सहायक निदेशक अभियोजन : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है, और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जूरी प्रशासक या सहायक निदेशक अभियोजन की नौकरी दे सकते है ।
.
(32.3) जिला जज : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जिला जज से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है। जिला जज की नियुक्ति का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
.
(32.4) जिला शिक्षा अधिकारी : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन शिक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी दे सकते है।
.
(32.4.1) जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावक एवं आम नागरिक दोनों अपनी स्वीकृतियां दे सकेंगे। 35% अभिभावकों की सहमती से मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है, और यदि आम नागरिक शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक स्वीकृतियां दे देते है तो नागरिको की मंशा को उच्च माना जायेगा।
.
(32.4.2) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा जिले में - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, जिले का प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस क़ानून के लिए अभिभावक माना जायेगा।
.
(32.4.3) यदि मुख्यमंत्री इस क़ानून को अन्य जिलो में भी लागू करते है तो मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृतियों से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह अधिक से अधिक 5 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
.
(33) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
.
(33.1) मुख्यमंत्री एवं जिले के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
.
(33.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने गुप्त स्वीकृतियों के लिए मतदान किया है) के 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक गुप्त स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
.
(33.3) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे। किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त स्वीकृति की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
.
(33.4) राज्य के सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपनी पसंद का नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री शिक्षा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक एवं चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
.
(34) जनता की आवाज :
.
(34.1) यदि जिले का कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
.
(34.2) यदि जिले का कोई मतदाता धारा (34.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
.
[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (34.1) के तहत एक शपथपत्र दिया जा सकेगा, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि जिले के 51% नागरिक शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
.
====जिला जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन====
.
इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
.
1. कृपया " मुख्यमंत्री कार्यालय " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “ मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित जिला जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें --- #JilaJuryCourt , #VoteVapsiPassbook "
.
2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
.
3. "मुख्यमंत्री / प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम या सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
.
4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
.
4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।
.
4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी।
.
और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
.
4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए । वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
.
5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें। यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें : " @Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #JilaJuryCourt , #VoteVapsiPassbook
.
6. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए।
.
इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
.
7. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (34) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है।
.
इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
.
============

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jul 29 2020 21:07:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Amit Upadhyay RrpMhulhasnagar MhUlhasnagar:

Dhiraj Batade Recallist का बहुत-बहुत धन्यवाद सारे ड्राफ्ट को मराठी में ट्रांसलेट करने के लिए।

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jul 30 2020 19:48:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हमेशा की तरह नयी शिक्षा निति भी विदेशियो का दखल बढ़ाती है। और विदेशियों के इस नए दखल को छिपाने के लिए पेड मिडिया द्वारा क्रांतिकारी नाटक किया जा रहा है :
.
(1) अब से सभी विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने स्वतंत्र शिक्षा बोर्ड स्थापित कर सकेंगे।
.
(2) निजी शिक्षा बोर्डों की स्थापना का रास्ता साफ़ कर दिया गया है।
.
(3) अंग्रेजी शिक्षा के स्तर को बदतर बनाने के लिए आवश्यक बदलाव किये गए है।
.
मतलब, गणित-विज्ञान के साथ अब अगली नस्ल का अंग्रेजी के स्तर भी गिरेगा, और विदेशी विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम को और भी तबाह कर देंगे !!
.
समाधान -
.
जिला शिक्षा अधिकारी एवं शिक्षा मंत्री को वोट वापसी पासबुक एक दायरे में लाने के लिए जूरी कोर्ट क़ानून ड्राफ्ट को गैजेट में छापा जाना चाहिए। जूरी कोर्ट बिना स्थिति इसी तरह बाद से बदतर होती चली जायेगी। और पेड मीडिया में इस बदतर स्थिति को ही सुधारो के नाम में दिखाया जाएगा।
.
=======
.
#JuryCourt , #VoteVapsiPassbook
.

Read full post →



Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jul 31 2020 13:22:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सूचना : tiny url ने मेरे तथा राहुल भाई के काफी लिंक डिलीट कर दिए है। अत: अब से पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए निचे दिये लिंक इस्तेमाल करें
.
(1) सभी क़ानून ड्राफ्ट्स के पीडीऍफ़ यहाँ से डाउनलोड कर सकते है : <https://www.rtr.party/drafts>;
.
(2) पार्टी का मेनिफेस्टो यहाँ से डाउनलोड करें : <https://www.rtr.party/manifesto>;
.
कुछ कार्यकर्ता वेबसाईट बनाने पर कार्य कर रहे है। जब ड्राफ्ट इन वेबसाइट्स पर रख दिए जायेंगे तो आप इन्हें सीधे वेबसाईट से डाउनलोड कर सकेंगे, और गूगल ड्राइव की जरूरत नहीं रह जायेगी।
.
पार्टी की एक से अधिक कई वेबसाइट्स होगी और इन्हें विभिन्न कार्यकर्ता ऑपरेट करते रहेंगे। ताकि किसी न किसी वेबसाईट पर ड्राफ्ट उपलब्ध बने रहे।
.
कोई भी कार्यकर्ता चाहे तो अपनी वेबसाईट पर ये ड्राफ्ट्स एवं मेनिफेस्टो रख सकता है, या नयी वेबसाईट बना सकता है।
.
जिन कार्यकर्ताओ को पार्टी की केन्द्रीय वेबसाईट की जरूरत है वे इन्तजार न करें. यदि आप कर सकते है, तो खुद ही वेबसाईट शुरू कर सकते है. राईट टू रिकॉल पार्टी की वेबसाईट कोई भी कार्यकर्ता बना सकता है, और इसे ऑपरेट कर सकता है.
.
======

Read full post →