> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-07-01

Pawan Jury BhilwaraRj

चीन भारत से काफी शक्तिशाली देश है, फिर वो सीमा से पीछे क्यों हट रहा है?
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(1) निर्भरता
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निर्भरता , निर्भरता , निर्भरता .....
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क्योंकि भारत युद्ध लड़ने के लिए अमेरिकी हथियारों पर बुरी तरह से निर्भर है। यदि अमेरिकी भारत के प्रधानमंत्री को "आगे बढ़ो" (Go ahead) बोल देते है तो भारत के नेता+पेड मीडियाकर्मी जोश में आ जायेंगे। और यदि अमेरिका भारत के नेताओ को "अभी नही" (Stop) बोल देता है तो भारत नर्म रवैया अपनाकर पीछे हटने लगेगा।
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यदि भारत एवं चीन में युद्ध होता है और यदि अमेरिका भारत को देरी हथियार देता है तो भारत की सेना चीनियों को 2 हफ्ते से ज्यादा रोक पाने में सक्षम नहीं है। यह लिखते हुए मुझे अच्छा नहीं लगता, और जाहिर है, आपको भी यह पढ़ते हुए अच्छा नहीं लगेगा। लेकिन यह एक तथ्य है !!
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भारत लड़ाकू विमान नहीं बनाता
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मिलिट्री ड्रोन नहीं बनाता
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SSN एवं SSBN सबमरीन नहीं बनाता
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एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं बनाता
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लड़ाकू हैलिकोप्टर नहीं बनाता
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हम टैंक भी नहीं बनाते
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और यहाँ तक कि हम होवित्जर एवं तोपे तक नहीं बनाते !!
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हम लेसर गाईडेड बम नहीं बनाते
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और लेसर गाईडेड मिसाइले भी नहीं बनाते
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हम ये सभी उपकरण आयात करते है !! और जो कुछ हथियार हम भारत में बनाते है वे असेम्बल्ड है। मतलब उनके इंजन, कंट्रोल पेनल एवं कोर कोम्पोनेंट आयातित है। और ये कोम्पोनेंट आयातित इसीलिए है, क्योंकि हमें ये बनाने नहीं आते !!
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चीन अपने सभी हथियार खुद से बनाता है, और उसके पास हथियारों का उत्पादन करने का बहुत बड़ा ढांचा है। अत: भारत चीन के खिलाफ युद्ध में सिर्फ तब जाएगा जब अमेरिका इसकी अनुमति दे। भारत अपने दम पर इसका फैसला लेने की स्थिति में नहीं है।
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(2)
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मैं और मेरे अलावा भी और मुझसे भी पहले से भारत के कई रिकालिस्ट कार्यकर्ता पिछले 20 वर्षो से भारत के नागरिको को लगातार यह सूचित कर रहे है कि – हमें निकट भविष्य में युद्ध से गुजरते हुए भारत का इराकीकरण हो जाने या इसके एक विशाल फिलिपिन्स में बदल जाने का भय है। और अपने ज्यादातर जवाबो में मैंने लिखा है कि किन कानूनों को गेजेट में छापने से हम ऐसे प्रशासन की रचना कर सकते है जिससे सिर्फ 5 साल में हम चीन का मुकाबला करने लायक स्वदेशी तकनीक आधारित हथियार बना सके।
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और हमने इन जवाबो में से ज्यादातर में इस तथ्य को दर्ज किया है -
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(2.1) कि भारत युद्ध लड़ने के लिए पेड मीडिया के प्रायोजको (अमेरिका+ब्रिटेन+फ़्रांस की हथियार निर्माता कम्पनियों के मालिको) पर बुरी तरह से निर्भर है।
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(2.2) कि अमेरिका चीन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है, और जैसे जैसे भारत में अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का नियंत्रण बढ़ रहा है वैसे वैसे युद्ध नजदीक आ रहा है।
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(2.3) कि अमेरिका के हथियार निर्माता चीन को तोड़ने के लिए भारत का इस्तेमाल उसी प्रकार ऊंट की तरह करेंगे जिस तरह उन्होंने भारत का किला तोड़ने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल ऊंट की तरह कारगिल युद्ध में किया था।
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तो मेरे पास इस विषय पर कहने के लिए नया कुछ नहीं है। घूम फिर कर बात फिर से वही है कि, भारत पूरी तरह से अमेरिकी हथियार निर्माताओं के ट्रेप में आ चुका है। जैसा कि कारगिल युद्ध के बाद से वे करते आये है, आगे भी पेड मीडिया के प्रायोजक निम्न तरीके से भारत के पीएम की बांह मरोड़ेंगे :
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(2a) अमेरिकी कम्पनियां “चीन से बचाने” के एवज में पीएम को मजबूर करेगी कि वे भारत में ऍफ़डीआई की सीमाएं और भी बढाएं और भारत के खनिज+जमीन+प्राकृतिक संसाधन+सरकारी उपक्रम चिल्लर दामो में अमेरिकी कम्पनियों के हवाले कर दें।
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(2b) भारत चीनी कम्पनियों को बाजार से बाहर करें ताकि अमेरिकी कम्पनियों का हिस्सा बढ़ सके। और इस तरह भारत की निर्भरता अमेरिकियों पर और भी बुरी तरह से बढ़ जाए।
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(2c) अगले चरण में अमेरिकी भारत के पीएम को मजबूर कर सकते है कि वे अमेरिकी कम्पनियों को भारत में हथियार निर्माण के कारखाने लगाने एवं हथियारों के उत्पादन के लिए मुफ्त के खनिज लेने की अनुमति दे।
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(2d) फिर वे पीएम को बाध्य कर सकते है कि, वे अमेरिकी सेनाओं को भारत में अपने सैन्य अड्डे बनाने की अनुमति दें।
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(2e) और फिर अमेरिकी+फ़्रांस+ब्रिटिश भारत की जमीन, सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल करके चीन को ख़त्म करेंगे।
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यदि युद्ध हुआ तो भारत का इराकीकरण हो जाएगा और यदि युद्ध टल गया तो अमेरिकी कम्पनियां धीरे धीरे भारत को एक विशाल फिलिपिन्स* में बदल देगी।
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(*) फिलिपिन्स – जिसे पेड मीडिया के प्रायोजको (अमेरिकी हथियार निर्माता) ने 100% ईसाई देश में बदल दिया !! जिसके सभी प्राकृतिक संसाधनों का अमेरिकी कम्पनियों ने अधिग्रहण किया, उनके स्थानीय कारखानों को तबाह कर दिया, विज्ञान-गणित के ढांचे को तोड़ दिया, और पूरे देश को आयात पर निर्भर बना दिया !! और ऐसा उन्होंने एक भी गोली चलाये बिना किया !! सिर्फ पेड मीडिया की सहायता से !!!
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(3)
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तो अब भारत के नागरिको को निम्नलिखित स्थितियों पर विचार करते हुए अपने रूख पर फैसला लेना चाहिए :
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(3a) अमेरिका चीन को तोडना चाहता है, और चीन का किला तोड़ने के लिए वह भारत का इस्तेमाल ऊंट की तरह करेगा। अमेरिका भारत में इतना ताकतवर हो चुका है कि भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका का ऊंट बनने से इनकार करने की स्थिति में नहीं है। किन्तु यदि भारत के नागरिक पीएम पर दबाव बनाते है तो पीएम को बाध्य किया जा सकता है कि वे अमेरिकी शर्तो को मानने से इनकार कर दें।
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(3b) अब यहाँ समस्या यह है कि, लेकिन यदि भारत अमेरिका का ऊंट बनने से इनकार कर देता है और सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी हथियारों का उत्पादन नहीं करता तो चीन भारत के बाजार एवं संसाधनों पर कब्ज़ा करने के लिए भारत में घुसता जाएगा। क्योंकि अभी हम चीन से सिर्फ इसीलिए बचे हुए है क्योंकि अमेरिका हमारी पीठ पर सवार है। (और अमेरिकी हमसे इसकी कीमत वसूल रहे है, और आगे भी वसूलेंगे)
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दुसरे शब्दों में, यदि हम अमेरिका का ऊंट बनने से इनकार करते है तो चीन हमें निगल जाएगा, और यदि हम अमेरिका का ऊंट बनने को राजी हो जाते है, तो चीन से युद्ध में हम आधे तबाह हो जायेंगे, और युद्ध में चीन को तबाह करने के बाद अमेरिका भारत का अधिग्रहण कर लेगा।
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(3.1) पेड मीडिया का स्टेंड : भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियां एवं पेड मीडिया नेता ख़ुशी ख़ुशी अमेरिका के लिए भारत को ऊंट बनाने के लिए राजी है। और यही वजह है कि वे कभी भी इस पंक्ति का उच्चारण नहीं करते कि – भारत चीन से युद्ध लड़ने के लिए अमेरिकी हथियार कम्पनियों पर बुरी तरह से निर्भर है, और हम इस निर्भरता की कीमत निरंतर रूप से चुका रहे है, और आगे भी बहुत बड़ी कीमत चुकायेंगे। और इसीलिए आप पेड मीडिया में नजर आने वाले किसी भी चेहरे के मुहँ से यह बात नहीं सुनेंगे कि भारत को हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कौनसे कानून गेजेट में छापने चाहिए !!
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और इसीलिए पेड मीडिया से फीडिंग लेकर सोशल मीडिया पर अपने आप को अभिव्यक्त करने वाले किसी भी कार्यकर्ता को यह चर्चा करते नहीं पायेंगे कि - भारत को हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कौनसे कानून गेजेट में छापने चाहिए !!
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दुसरे शब्दों में, चुनाव जीतने के लिए पेड मीडिया पर निर्भर ये सभी शीर्ष नेता एवं पेड मीडिया से “बौद्धिक फीडिंग” लेकर “जागरूकता” की अफीम बांटने वाले इनके समर्थक एवं बुद्धिजीवी भारत को हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के बिंदु पर जानबूझकर खामोश रहकर भारत को अमेरिका का ऊंट बनाने के समर्थक है।
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(3.2) मेरा स्टेंड : मेरे पास इस समस्या से बचने के 2 प्रस्ताव है
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3.2.1. त्वरित समाधान :
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प्रत्येक सज्जन नागरिक के लिए बंदूक रखना अनिवार्य करने का क़ानून बनाकर हम सिर्फ 1 वर्ष में अमेरिका एवं चीन के दबाव से बाहर आ सकते है। यदि नागरिको के पास हथियार आ जाते है तो चीन एवं अमेरिका भारत को सैन्य शक्ति द्वारा दबाव में लाने की क्षमता तुरंत रूप से खो देंगे।
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3.2.2. दीर्घकालिक समाधान :
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फिलहाल, भारत में निजी कम्पनियों को हथियार बनाने की अनुमति नहीं है। यदि वोइक क़ानून (WOIC – Wholly Owned by Indian Companies) गेजेट में छाप दिया जाता है तो भारत में बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन करने का रास्ता साफ़ हो जायेगा। किन्तु सिर्फ WOIC आने से हम हथियार नहीं बना सकेंगे। जब तक हम जमीन की कीमतें कम करके पुलिस-जजों का भ्रष्टाचार दूर नहीं करते तब तक बड़े पैमाने पर उच्च तकनीक वाले हथियारों का उत्पादन करना संभव नहीं है। जमीन की कीमतें कम करने के लिए मेरा प्रस्ताव GST हटाकर ELT (ELT = Empty Land Tax) लाने का है। और पुलिस-जजों को ठीक करने के लिए मेरा सुझाव है कि, प्रस्तावित जूरी कोर्ट गेजेट में छापा जाए।
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यदि निचे दिए गए प्रस्तावित क़ानून गेजेट में छाप दिए जाते है तो हम क्रमिक रूप से 1 वर्ष एवं 5 वर्ष में भारत की सेना को इतना आत्मनिर्भर बना सकते है कि चीन एवं अमेरिका को सैन्य दृष्टी से खुद के बूते टक्कर दे सके।
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Woic
Empty Land Tax
Jury Court
Right to Bear Gun for Law Abide Citizens
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मेरा मानना है कि यदि भारत के कार्यकर्ता उपरोक्त कानूनों को गेजेट में छपवाने में सफल नहीं होते है तो भारत को निश्चित रूप से निचे दी गयी किसी स्थिति या सभी स्थितियों से गुजरना पड़ेगा :
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जैसा कि अमेरिका अभी कर रहा है, चीन का भय दिखाकर भारत के प्राकृतिक संसाधनों, खनिज संपदाओ, राष्ट्रीय सम्पत्तियों का शांतिप्रिय ढंग से और भी तेजी से अधिग्रहण करेगा।
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अमेरिका भारत का इस्तेमाल चीन+ईरान+पाकिस्तान+उत्तरकोरिया को तोड़ने में करेगा, और इस युद्ध में भारत पूरी तरह टूट जाएगा।
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युद्ध के बाद अमेरिकी कम्पनियां बचे खुचे भारत को लूट लेगी।
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अमेरिका एवं चीन में यदि समझौता हो जाता है तो ये दोनों देश भारत के संसाधनों एवं बाजार को आपस में बाँट लेंगे, और भारत के स्थानीय कारखानों का बचा खुचा आधार भी पूरी तरह से तोड़ देंगे।
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कैसे उपरोक्त कानूनों के गेजेट में आने से भारत स्वदेशी तकनीक आधारित (Made in India Made by Indians) फाइटर प्लेन जैसे आधुनिक हथियारों का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकता है, इस बारे में विस्तृत रूप से मैंने अन्य जवाबो में बताया है। उन्हें पढ़ें।
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