Sat Sep 01 2018 18:20:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
GST --- e-way बिल पर ट्रक का नंबर लिखना भूल जाने पर पेनेल्टी चुकाइए। पेनल्टी की राशि है -- सिर्फ 1.32 करोड़ !!
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मध्य प्रदेश का ट्रांसपोर्टर eWay बिल में ट्रक नंबर डालना भूल गया था। उस पर विभाग ने 1.32 करोड़ की पेनल्टी लगा दी। शिपमेंट की लागत 1.20 करोड़ है !! ट्रक की कीमत 15 लाख है !! और हाई कोर्ट ने मामला सुनने के बाद पेनल्टी चुकाने के आदेश दिए है !!! अब वादी सुप्रीम कोर्ट में धक्के खा रहे है।
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न्यूज लिंक -- <https://goo.gl/rna4Jy>
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने GST एवं e-way बिल को इस तरह से डिजाइन किया है जिससे छोटे कारोबारियों को बाजार से बाहर किया जा सके। और उनका यह तरीका काम भी कर रहा है !!
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बड़ी कम्पनियों का सारा कारोबार कम्प्यूटराइज्ड है , अत: उनमे इस तरह की गड़बड़ी होने की सम्भावना लगभग नगण्य है। लेकिन अकेले आदमी की कम्पनी या सिर्फ कुछ व्यक्तियों द्वारा संचालित की जाने वाली कम्पनी में एकाउंटिंग की गड़बड़ी होने से वे अपना बिजनेस खड़े खड़े गवां देंगे !! इनके बाजार से बाहर हो जाने पर छोटी कम्पनियों का कारोबार बड़ी कम्पनियों के कब्जे में चला जाएगा। और इन बड़ी कम्पनियों में ज्यादातर कम्पनियां या तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों की है या फिर उनकी कठपुतलियां है।
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समाधान ?
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हमारे द्वारा प्रस्तावित समाधान -- GST को रद्द करके वेल्थ टेक्स लागू किया जाए।
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यदि आप वेल्थ टेक्स का समर्थन करते है तो न्यू इण्डिया के इस लिंक पर जाकर इस क़ानून के पक्ष में वोट करें -- <https://newindia.in/causes/WealthTax>
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Mon Sep 03 2018 07:11:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Mon Sep 03 2018 20:43:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Mon Sep 03 2018 23:03:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Tue Sep 04 2018 17:54:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सभी रिकालिस्ट्स के लिए महत्त्वपूर्ण सूचना ;
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राईट टू रिकॉल के नाम पर कुछ छद्म कार्यकर्ता नागरिको को फोन करके उनसे अपनी निजी वेबसाइट पर sms करने या मिस कॉल करने को कहते है, और इनसे इनका वोटर नंबर भी मांगते है। राजनैतिक रूप से सक्रीय लोगो का डेटा इकट्ठा करके ये छद्म कार्यकर्ता ये जानकारी कांग्रेस / बीजेपी / आम आदमी पार्टी को बेच देते है !!!
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हमें कुछ नागरिको ने रिपोर्ट किया है कि उन्हें अचानक अपने फोन पर आम आदमी पार्टी के मेसेज आने लगे एवं उनके घर पर आम आदमी पार्टी के पर्चे भी पोस्ट किये गए। मालूम करने पर पता चला कि जिस वेबसाइट पर उन्होंने राइट टू रिकॉल, जूरी सिस्टम कानूनों को सपोर्ट करने के लिए sms भेजा था एवं अपना वोटर नंबर दिया था उन्होंने कुछ हजार रूपये में यह डेटा आम आदमी पार्टी की स्थानीय इकाई को बेच दिया था। चुनाव करीब आने के साथ ही अब उन्होंने डेटा इकट्ठी करने की अपनी गतिविधियां तेज कर दी है।
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ये छद्म कार्यकर्ता ज्यादातर निम्न तरीके एवं चरणों का इस्तेमाल करते है --
१) ज्योंही वे आपको फेसबुक पर राइट टू रिकॉल कानूनों का समर्थन करते देखेंगे , वे आपको इनबॉक्स में आकर मोबाइल नंबर मांगेंगे और आपसे फोन पर बात करने की कोशिश करेंगे।
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२) वे आपको कानूनों का लिंक देंगे उनमे अपनी प्राइवेट वेबसाइट का लिंक होगा और वे जो आपको फेसबुक पोस्ट भेजेंगे उनमे भी उनकी प्राइवेट वेबसाइट का लिंक होगा। इस तरह वो जानकारी देने के नाम पर आपको अपनी वेबसाइट पर धकेलने की कोशिश करेंगे।
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३) अंत में उनका लक्ष्य यह रहेगा कि आप उनकी वेबसाइट पर पाने वास्तविक नंबर से एक sms भेजे।
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४) अंतिम चरण में वे आपसे आपका वोटर नंबर मांगेंगे और उसे अपनी वेबसाइट पर रखेंगे।
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इस तरह वे आपको कानूनों की जानकारी देने के नाम पर आपको अपनी प्राइवेट वेबसाइट पर भेजेंगे कर आपसे आपका वास्तविक फोन नंबर , वोटर नंबर निकलवा लेंगे। जब उनको आपके वोटर नंबर मिल जाएंगे तो वे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर इससे आपका पता निकाल लेते है।
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ये राजनैतिक रूप से बेहद छांटा हुआ डेटा है। क्योंकि यह "राजनैतिक रूप से सक्रीय" उन लोगो का डेटा है जो अभी किसी भी पार्टी से संबद्ध नहीं है , और विकल्प की तलाश में है। इस वजह से राजनैतिक पार्टियां इस डेटा को हाथो हाथ खरीद लेती है। साथ ही इनके वेबसाइट पर राजनैतिक विषय पर sms , miss call , एवं सर्च ट्रेफिक , विजिटर बढ़ने से इनकी वेबसाइट का मूल्य बढ़ता जाता है। जब इनकी वेबसाइट पर ट्रेफिक बेहद बढ़ जाएगा तो ये लोग अपनी पूरी वेबसाइट किसी राजनैतिक पार्टी को बेचकर रवाना हो जाएंगे। गौर तलब बात यह है कि इन वेबसाइटों पर मालिक का नाम नहीं लिखा हुआ होता है। वे अपनी पहचान छुपा कर रखते है और दूसरा व्यक्ति बनकर आप से बात करते है।
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जल्दी ही मैं राईट टू रिकॉल के नाम पर इस तरह का डेटा इकट्ठा करके बेचने के धंधे में लगे हुए छद्म कार्यकर्ताओ की सूची एवं उनकी वेबसाइट्स के लिंक सार्वजनिक करूँगा।
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कार्यकताओ से मेरा आग्रह है कि -- यदि कोई कार्यकर्ता आपसे इनबॉक्स में या सार्वजनिक रूप से आपके नंबर मांगता है तो उससे चौकन्ने रहे। एवं यदि वह राइट टू रिकॉल कानूनों का समर्थन बनने के ढोंग करता है आपसे किसी भी प्राइवेट वेबसाइट पर sms करने को कहता है , तो right to recall india के एडमिन्स को रिपोर्ट करें।
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राइट टू रिकॉल इंडिया ग्रुप का लिंक --- <https://www.facebook.com/groups/rtrindia/>
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उल्लेखनीय है कि राइट टू रिकॉल ग्रुप एक विकेन्द्रित व्यवस्था के तहत काम करता है एवं हमारे कार्यकर्ता कभी भी नागरिको को किसी निजी वेबसाइट पर sms भेजने को नहीं कहते है। हम अपने सभी ड्राफ्ट सिर्फ फेसबुक एवं सरकारी वेबसाइट newindia पर रखते है। कुछ दो साल पहले जब राइट टू रिकॉल के एक छद्म कार्यकर्ता ने राइट टू रिकॉल के विभिन्न कार्यकर्ताओ के माध्यम से नागरिको का डेटा इकट्ठा करवाकर बेच दिया था , तब से हमने किसी भी प्राइवेट वेबसाइट का इस्तमाल करना छोड़ दिया। लेकिन जो छद्म रिकालिस्ट इस कारोबार में है , वे आज भी यह धंधा कर रहे है।
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Thu Sep 06 2018 17:58:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
मोदी साहेब हम नागरिको से पूछ रहे है कि आखिर रुपया क्यों गिर रहा है ?
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मेरा जवाब -- जीएसटी , अंधाधुंध एफडीआई , मोरिशस रूट के कारण रुपया गिर रहा है . वेल्थ टेक्स , MRCM एवं जूरी सिस्टम लागू करने से रुपया मजबूत होने लगेगा . इन कानूनों के ड्राफ्ट्स देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पेज को क्लिक करके डिस्क्रिप्शन देखें .
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Thu Sep 06 2018 20:50:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
धारा 377 - यदि भारत में "राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायधीश" का कानून होता था तो भ्रष्ट जजों के इस फैसले से क्षुब्ध नागरिक सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालने की जगह मुख्य न्यायधीश को लात मारकर(*) नौकरी से बाहर निकाल सकते थे।
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दूसरा पहलु यह है कि यदि भारत के नागरिको के पास राईट टू रिकॉल जज का क़ानून होता था तो सुप्रीम कोर्ट के जजों में इतनी हिम्मत न आती कि वे मिशनरीज के आदेश पर इस तरह का फैसला दें। क्योंकि वे इस बात को अच्छी तरह से समझते है कि यदि जनता के पास हमे नौकरी से निकालने का अधिकार हुआ तो हमें ऐसे फैसले देने पर अगले 24 घंटे में नौकरी गंवानी पड़ सकती है। तो इस तरह राईट टू रिकॉल क़ानून बिना कोई हरकत किये अधिकारीयों को तमीजदार बनाये रखता है।
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कार्यकर्ताओ को अपनी भड़ास निकालने के साथ साथ इस बात पर विचार करने में अपना समय लगाना चाहिए कि जब तक भारत में राईट टू रिकॉल जज का क़ानून नहीं आता तब तक सुप्रीम कोर्ट के जज इस तरह के फैसले देते रहेंगे। कार्यकर्ताओ को यह तय करना चाहिए कि उन्हें सिर्फ अपनी भड़ास निकाल कर विरोध प्रदर्शित करना है , या वे जजों को जवाबदेह बनाना चाहते है। मेरे विचार में राईट टू रिकॉल के अलावा जजों को किसी भी तरह से काबू नहीं किया जा सकता।
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नोटा कोई विकल्प नहीं है , लेकिन विडंबना यह है कि भारत के नागरिको के पास जजों के खिलाफ नोटा जैसा भोटा अस्त्र भी नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट के जजों को लात मारकर बाहर निकालने के लिए प्रस्तावित राईट टू रिकॉल क़ानून का ड्राफ्ट यहाँ देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860420858820>
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(*) लात मारकर नौकरी से बाहर निकालना -- इस टर्म के आविष्कारक हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र जी मोदी है। मोदी साहेब पहले व्यक्ति है जिन्होंने निष्कासन के लिए इस भाषा का प्रयोग किया। शायद वे किसी व्यक्ति को पद से हट दिए जाने को लात मारकर बाहर कर दिया जाना कहना ज्यादा पसंद करते है।
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धारा 377 पर रुख को लेकर मेरा प्रस्ताव है कि - भारत में सभी मुकदमो की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी द्वारा की जानी चाहिए। नागरिको का ज्यूरी मंडल किसी भी अपराध के लिए फैसला दे सकता है कि कितना और क्या दंड दिया जाना चाहिए या कब दंड नहीं दिया जाना चाहिए। इस तरह नागरिक समुदाय यह तय कर सकेगा कि वे अपने देश एवं समाज में किसी हरकत को किस सीमा तक वाजिब एवं गैर वाजिब ठहरना चाहते है। यदि अमुक मामले कि सुनवाई नागरिको की ज्यूरी कर रही होती तो इस तरह का फैसला आता ही नहीं।
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ज्यूरी सिस्टम का प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट यहाँ देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/829456537232542>
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Sat Sep 08 2018 09:29:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सब से बड़ा ख़तरा जिसकी हम लगातार अनदेखी कर रहे है !!
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Comcasa एग़्रिमेंट अमेरिका की सेना को भारतीय सेना के आपसी सामरिक संवाद , युद्ध पोत , विमान आदि की स्थिति की जानकारी से अपडेट रहना सम्भव बनाता है । यह अमेरिकी फ़ौज द्वारा भारत की सेना को टेक ओवर करने की दिशा में एक और क़दम है । अब से भारत की सेना की सामरिक महत्त्व की कोई भी जानकारी ख़ुफ़िया / कोनफ़िडेंसीयल नही रहेगी । सूचना , स्थिति के अलावा भारतीय युद्ध पोतो, पनडुब्बी , जहाज़ , विमान , रडार आदि के संचालन पर भी अमेरिकियों का नियंत्रण रहेगा ।
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कुल मिलाकर भारत की सेना पूरी तरह से अमेरिकी हाथो में जा रही है । यह अमेरिका की चीन के विरुद्ध युद्ध की तैयारी है, जिसमें वह भारत की सेना , ज़मीन एव संसाधनों का इस्तेमाल करेगा ।
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Wed Sep 12 2018 23:11:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Wed Sep 12 2018 23:55:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कोंग्रेस + बीजेपी + RBI गवर्नर मिली भगत बनाकर बेंको का पैसा लगातार लूट रहे है । और पैड रविश कुमार नागरिकों से यह जानकारी छुपा रहे है कि “राईट टू रिकॉल गवर्नर” क़ानून के बिना इस लूट को रोका नही जा सकता । ये क़ानून न आने तक यह लूट जारी रहेगी । हालाँकि बिल माल्या , चौकसी , नीरव मोदी आदि के नाम पर फाड़ दिए जाते है ।
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Sat Sep 15 2018 21:02:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Sun Sep 16 2018 10:49:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
फर्जिकल स्ट्राइक की पटकथा में मौजूद कई छेदों में से एक छेद ,"कुत्तो को इसकी भनक क्यों नहीं लगी" पर पैबंद लगाने के लिए पटकथा लेखको ने नया स्पष्टिकरण जारी किया है --- तेंदुएं का पेशाब !!!
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सबसे पहले पेड मीडिया ने एक बेहद चुस्त एवं सटीक पटकथा जारी करके बताया कि , हमारे सैनिको ने "नीची उड़ान" भरने वाले हैलीकोप्टर का इस्तेमाल करके पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश किया , वे रस्सो से उतरे , 70 आतंकियों को मारा , रस्सो से वापिस हेलीकोप्टर में चढ़े और भारत में लौट आये। किन्तु एक जन्मजात अंध भगत के लिए भी यह बात पचाना मुश्किल हो रहा था , क्योंकि ऐसी "नीची उड़ान" भरने वाले हेलीकोप्टर को सैनिक एंटी हेलीकोप्टर रोकेट और यहाँ तक कि रायफल से भी निशाना बना सकते है।
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बाद में जब यह सवाल ज्यादातर लोगो के हाजमे खिलाफ पड़ने लगा तो केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन को अधिकृत रूप से यह कहने को बाध्य होना पड़ा कि , "इस स्ट्राइक में भारतीय सेना ने हेलीकोप्टर्स का प्रयोग नहीं किया था, बल्कि बिना हेलीकोप्टर्स के ही सर्जिकल स्ट्राइक की गयी थी" !!
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यह स्पष्टीकरण सामने आने के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के पटकथा लेखको ने आनन फानन में नयी पटकथा जारी की। इस पटकथा में यह बताया गया कि , हमारे 50 सैनिको ने कुछ 1500-2000 मीटर तक रेंगते हुए बोर्डर पार की , 70 आतंकियों को मारा और वापिस लौट आये। स्क्रिप्ट में यह खुलासा नहीं किया गया था कि वे वापिस लौटते हुए दौड़ रहे थे या रेंग रहे थे।
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पर अगले दिन हमें इस पटकथा में एक नया छेद नजर आया --- कुत्ते। केम्प में रहने वाले कुत्ते केम्प के मुखिया एवं केम्प के अन्य लोगो के आदी होते है। केम्प में मौजूद सभी लोगो को समय समय पर एक लाइन में खड़ा किया जाता है , एवं कुत्तो को उनका निरिक्षण कराया जाता है। ये कुत्ते प्रत्येक व्यक्ति को एक एक करके सूंघते है। इस प्रकार के केम्प्स में यह एक रूटीन प्रोसेस है। इससे कुत्ते उन सभी लोगो की गंध को पहचानते है जो केम्प में रह रहे है। अब जैसे ही नया व्यक्ति केम्प में आता है , कुत्ते उसे बाहरी समझ कर भौंकने लगते है। इन्हें इसे तरह से प्रशिक्षित किया हुआ होता है। और जब कई सारे कुत्ते एक साथ भौंकने लगेंगे तो केम्प के लोग सतर्क हो जायेंगे कि कोई अनजान व्यक्ति केम्प में प्रवेश कर रहा है। और जाग हो जाने पर यह मुमकिन नहीं है कि कोई दस्ता जवाबी हमला झेले बगैर 70 आतंकियों को मार कर सुरक्षित लौट आये। क्योंकि केम्प में रह रहे आतंकियों के पास हथियार है , प्रशिक्षण है , सीमेंट बेग से बने हुये बंकर है जिनमे छिप कर उनमे बनाए गए सूराखो से गोलियां चलाई जा सकती है।
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तो इस तरह कुत्तो की वजह से पटकथा में फिर से एक बड़ा छेद दिखाई देने लगा !! किन्तु अब तक पटकथा लेखको ने इस छेद को भरने के लिए कोई संशोधित पटकथा जारी नहीं की थी !!
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अब उन्होंने इस छेद पर पैबंद लगाने के लिए पटकथा का नया वर्जन रिलीज किया है।
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नयी पटकथा कहती है कि , हमारे सैनिक अपने साथ तेंदुए का पेशाब लेकर गए थे। और इसकी वजह से कुत्ते डर गए !!! तेंदुए गाँवों में जाकर कुत्तो को मार कर खा जाते है, अत: कुत्ते तेन्दुओ से डरते है।
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अच्छी बात है। लेकिन यह इस बात का स्पष्टीकरण नहीं देता कि कुत्तो को भूँकने से किसने रोका था !!! अगर कुत्तो के नाक में तेंदुए के पेशाब की गंध जाएगी तो वे और भी ऊँची आवाज में भौंकेंगे। असल में तेंदुएं की गंध से रात में भी सो कर पड़ा रहने वाला आलसी कुत्ता भी पूरी ताकत लगाकर भौंकना शुरू कर देगा। यदि तेंदुए की गंध से कुत्ते खामोश होकर भौंकना बंद कर देते थे तो दुनिया के सारे चोर अपने साथ हर समय तेंदुए का पेशाब जरुर रखते थे।
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सच्चाई यह है कि -- तेंदुए का पेशाब होने के बावजूद कुत्ते तेंदुएं के साथ साथ नए आदमी की गंध भी सूघ लेंगे। क्योंकि कुत्ते दर्जनो प्रकार की गंध को एक साथ सूंघ कर उनमे अंतर कर सकते है। इस तरह कुत्ते नए आदमियों की गंध को सूंघ कर भौंकना शुरू कर देंगे। और जब इसके साथ तेंदुए की गंध भी होगी तो कुत्ते और भी ज्यादा दम लगाकर भौकेंगे , और तब तक नहीं रुकेंगे जब तक पूरे केम्प को जगा न दे। और जाग जाने पर जवाबी हमला झेले बिना दस्ता लौट नहीं सकता।
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तो ये पेबंद छेद को कवर करने के लिए नाकाफी है। फर्जिकल स्ट्राइक के पटकथा लेखको को अपनी पटकथा को फुलप्रूफ बनाने के लिए और भी ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है। उम्मीद है , अगली बार वे एक बेहतर पैबंद पेश करेंगे।
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मेरे विचार में , इस पैबंद ने और भी ज्यादा कबाड़ा कर दिया है। अब तक अंध भगत कुत्तो वाले छेद को "कुछ भी" कह कर खारिज कर दे रहे थे। अब वे भी यह बात मान रहे है कि पटकथा में ये एक बड़ा एवं गहरा छेद है। और इनमे से कई अंध भगत मानते है कि इस गड्ढे को भरना बहुत जरुरी है। तो इस तरह तेंदुए की स्टोरी ने अंध भगतो के विश्वास को भी विचलित कर दिया है।
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Mon Sep 17 2018 09:05:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
रिकालिस्ट्स को जहाँ तक हो सके “राईट टू रिकॉल” शब्द का स्वतंत्र प्रयोग करने से बचना चाहिए । राईट टू रिकॉल सिर्फ़ एक लेबल है । राईट टू रिकॉल की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि अमुक राईट टू रिकॉल की प्रक्रिया क्या है , एवं यह किस पद पर लागू हुआ है ।
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उदाहरण के लिए यदि आप सिर्फ़ यह माँग करते है कि हमें “राईट टू रिकॉल” चाहिए , तो वे आपको कहेंगे कि राजस्थान में राईट टू रिकॉल पहले से मौजूद है !! जबकि सच्चाई यह है कि राजस्थान में जो राईट टू रिकॉल है वह स्थानीय निकायो के पदों पर है एवं इसकी प्रक्रिया बेहद कमज़ोर है ।
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तो जब भी राईट टू रिकॉल लफ़्ज़ का प्रयोग करे तो इसके साथ पद भी इंगित करे । उदाहरण के लिए , राईट टू रिकॉल-पी एम , राईट टू रिकॉल-सी एम , राईट टू रिकॉल-एस पी , राईट टू रिकॉल-जज आदि लिखे । और सबसे ज़रूरी बात इसका ड्राफ़्ट है । क्योंकि यदि ड्राफ़्ट कमज़ोर होगा तो यह प्रक्रिया कोई नतीजा नही देगी । चाहे इसे किसी भी पद पर लागू कर दिया जाए ।
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उल्लेखनीय है कि , जब राईट टू रिकॉल आंदोलन फैलना शुरू हुआ तो इसके समर्थकों को बुत्ता देने के लिए राजस्थान सरकार ने 2012 में स्थानीय निकायो के चुनावों में राईट टू रिकॉल के प्रावधान जोड़े थे । यह नक़ली राईट टू रिकॉल है एवं राईट टू रिकॉल के विरोधी मूवमेंट को तोड़ने के लिए इस तरह की हरकतें करते रहते है ।
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Mon Sep 17 2018 17:05:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
जूरी सिस्टम की कुंजी
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यह कानून पारित होने के बाद हत्या, अपहरण, बलात्कार, मारपीट जैसे अपराधिक मामलो की सुनवाई करने और सजा सुनाने का अधिकार जज की जगह नागरिको की जूरी के पास रहेगा। जूरी का चयन जिले की मतदाता सूचियों में से रेंडमली किया जाएगा। जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा व जूरी मंडल में 15 से 1500 तक जूरी सदस्य हो सकेंगे।
( इस कानूनी ड्राफ्ट को संसद से साधारण बहुमत से पास करके लागू किया जा सकता है। इसके लिए संविधान संशोधन की जरुरत नहीं है। )
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1) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने पर आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य और बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई तय करनी होगी।
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2) प्रत्येक जिले में एक जूरी प्रशासक होगा, जिसकी नियुक्ति मुख्यमंत्री करेंगे। राईट टू रिकॉल प्रक्रिया का प्रयोग करके मतदाता उसे किसी भी दिन बदल सकेंगे।
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3) प्रत्येक जिले में एक 30 सदस्यीय महा जूरी मंडल होगा। प्रथम महाजूरी मंडल का गठन करने के लिए जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक बुलाएगा और मतदाता सूची से 25 वर्ष और 55 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं को रेंडमली चुनेगा। जूरी प्रशासक इनमे से किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। शेष 30 मतदाता महा-जूरी मंडल के सदस्य होंगे। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से रेंडमली कर लिया जाएगा। इस तरह यह महा जूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महा जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रूपये एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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4) कोई भी वादी अपने मामले की शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है , अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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5) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल यह तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से रेंडमली सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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6) तब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों एवं गवाहों आदि को सुनकर इस मामले में फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु मृत्यु दंड में 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा। पक्षकार चाहे तो जूरी मंडल के फैसले की अपील हायर जूरी में कर सकते है।
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7) यदि किसी जिले में तहसील स्तर के न्यायालय हैं तो जूरी प्रशासक तहसील स्तर पर भी महा जूरी मंडल का गठन कर सकता है।
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पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/829456537232542>
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Wed Sep 19 2018 17:17:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
है ख़्वाब में हनोज , जो जागे है ख़्वाब में !!
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Thu Sep 20 2018 09:20:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
बदला लेने के लिए सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भगत क्रिकेट मेच आयोजन की कोशिश में है !!
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Fri Sep 21 2018 13:40:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
प्रश्न -- कभी कभी लोग पूछ लेते है कि आप खुद भ्रष्ट हो या नहीं ? अगर अपने कभी भ्रष्टाचार नहीं किया तो ही बोलो। नहीं तो आपको बोलने का कोई हक नहीं !!!
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स्पष्टिकरण -
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ईमानदारी का सबसे बड़ा शत्रु अवसर है। अत: कोई व्यक्ति भ्रष्ट है या नहीं है , इसकी परीक्षा सिर्फ तब होती है जब अमुक व्यक्ति को इसका अवसर मिलता है। अवसर जितना बड़ा होगा और व्यक्ति जितने बड़े अभाव में होगा भ्रष्ट आचरण करने की सम्भावना उतनी बढती जायेगी। इस लिहाज से कोई भी व्यक्ति हमेशा के लिए न तो भ्रष्ट होता है और न ही ईमानदार। कोई भी ईमानदार व्यक्ति किसी भी समय भ्रष्ट हो सकता है। कोई अपवाद नहीं।
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यदि किसी व्यक्ति ने अपने जीवन का अधिकाँश ईमानदारी से बिता दिया है और वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों में है तब भी उसके भ्रष्ट होने की सम्भावनाए उतनी ही प्रबल होती है। क्योंकि ख्याति लाभ की आकांक्षा व्यक्ति मरणासन्न स्थिति में भी नहीं छोड़ता। इस तरह से भ्रष्टाचार करने का अवसर एक परीक्षा है , और जिन्हें ये अवसर निरंतर मिलते रहते है उन्हें ये परीक्षा निरंतर पास करनी होती है। एक बार भी फ़ैल हो जाने पर अमुक व्यक्ति को भ्रष्ट ही कहा जाता है।
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सभी की तरह मैं भी सामान्य मनुष्य हूँ और मानव स्वभाव के अधीन हूँ। अत: अवसर मिलने पर मैं भी उतना ही भ्रष्ट हो सकता हूँ , जितना कि हुआ जा सकता है। असल में ईमानदारी का बर्ताव एक प्रकार का निवेश है। कई लोग लम्बे समय तक इमानदारी इसीलिए बरतते है ताकि अवसर मिलने पर इसे भुनाया जा सके। कोई अपवाद नहीं।
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मैं प्रत्येक व्यक्ति को भ्रष्ट मानकर ही चलता हूँ। जिसे जब अवसर मिलता जाता है वह उस अनुपात में भ्रष्ट होता जाता है। तो हम किसी व्यक्ति को भ्रष्ट होने से रोक नहीं सकते , किन्तु ऐसे कानूनों की स्थापना कर सकते है, जिससे भ्रष्ट आचरण करने वाले व्यक्ति को त्वरित दंड मिले। इस बात से कोई फर्क नहीं आता कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए आवश्यक कानूनों की मांग करने वाला व्यक्ति भ्रष्ट है या नहीं। क्योंकि एक भ्रष्ट व्यक्ति भी उस समय भ्रष्ट नहीं है बल्कि ईमानदार आचरण कर रहा है जब वह भ्रष्टाचार ख़त्म करने वाले कानूनों को लागू करने की मांग कर रहा है।
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इसीलिए मैं ऐसे सभी व्यक्तियों को संदेह की दृष्टी से देखता हूँ जो भ्रष्टचार कम करने के लिए आवश्यक क़ानूनो का विरोध करते है या समर्थन नहीं करते। तब मैं इस बात पर विचार नहीं करता कि अमुक व्यक्ति भ्रष्ट है या ईमानदार है या वह ऐतिहासिक रूप से ईमानदार रहा है या भ्रष्ट।
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Mon Sep 24 2018 07:37:13 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
रिकालिस्ट्स के लिए सूचनार्थ :
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रिकालिस्ट राहुल चिमनभाई मेहता ने कुछ “कथित रिकालिस्ट्स” को प्रस्तावित क़ानूनी ड्राफ़्ट्स को कोपी करने और उनके साथ छेड़ छाड़ करके सरक़ुलेट करने के एवज़ मे कोपीराइट एक्ट के तहत क़ानूनी नोटिस भेजा है । नोटिस व्हट्स एप पर भेजा गया है । कपट एवं चौर्य कर्म जारी रहने पर नोटिस उन्हें विधिवत रूप से बाय पोस्ट भी भेजा जाएगा ।
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नोटिस :-
“मेरे विचार में, आपके कई पोस्ट्स / पीडीएफ मेरे पोस्ट्स से copy किए गए है । कृपया इन्हें डिलिट करें । अतः मैं कोपीराईट एक्ट के तहत आपको नोटिस भेजूँगा । इसके एवज़ में आपको लाखों रुपए क्षतिपूर्ति के साथ साथ क़ानूनी कार्यवाही पर हुए व्यय आदि भी चुकाने पड़ सकते है । और चूँकि आपने इन्हें मेरी प्रोफ़ाइल से कोपी किया है, एवं मैं अहमदाबाद में निवास करता हूँ , अतः आपको अहमदाबाद कोर्ट में उपस्थित होना होगा” — राहुल चिमनभाई मेहता ।
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नोटिस उन लोगों को भेजे गए है जिन्होंने ड्राफ़्ट के साथ छेड़ छाड़ की एवं इन्हें अपनी निजी वेबसाइट पर रखकर इन ड्राफ़्ट्स के माध्यम से पैसा कमाया । उन्हें रोका गया । किंतु उन्होंने मानने से इंकार कर दिया । इस तरह ऐसे लोगों को रोका जा रहा है जो ड्राफ़्ट्स का व्यावसायिक करण कर रहे है ।
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( ड्राफ़्ट के साथ छेड़छाड़ किए बिना ड्राफ़्ट को copy करना एवं इसका किसी भी तरीक़े से प्रचार करना , जायज़ है, और कोई भी व्यक्ति इन ड्राफ़्ट में छेड़ छाड़ किए बिना इनका उपयोग / प्रचार कर सकता है । )
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Tue Sep 25 2018 18:57:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Wed Sep 26 2018 06:27:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Wed Sep 26 2018 08:52:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Thu Sep 27 2018 05:40:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Thu Sep 27 2018 13:54:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Thu Sep 27 2018 18:06:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Thu Sep 27 2018 19:10:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Thu Sep 27 2018 19:45:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Fri Sep 28 2018 08:38:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
प्रस्तावित “धन वापसी” क़ानून — एफ डी आई का बाप !!
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विदेशी धनिक भारत की सभी सरकारी जमीने एव खदाने हमेशा के लिए ख़रीद लेना चाहते है । बार बार रॉयल्टी व लीज़ चुकाना उन्हें मंज़ूर नही है । वे अब ऐसा क़ानून लागू करवाने की कोशिश में है जिससे देश की सरकारी जमीनो को बड़े पैमाने पर नीलाम करवाया जा सके ।
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कोई भी पार्टी इतने एंटी नेशनल क़ानून को ख़ुद से आगे बढ़ाने में घबरा रही है । अतः वे इस क़ानून के पक्ष में एक देश व्यापी “छद्म जन आंदोलन” का भ्रम खड़ा करने की तैयारी कर रहे है । लोगों का समर्थन लेने के लिए उन्होंने इसमें यह प्रावधान रखा है कि - जो जमीने बेची जाएगी उसका कुछ हिस्सा कमीशन के रूप में जनता में बाँट दिया जाएगा । उनके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को लगभग 20,000 सालाना मिल जाएँगे । 3-4 साल में देश की सभी जमीने एवं खदाने निजी कम्पनियाँ ख़रीद लेगी । फिर न हमारे पास पैसा बचेगा न ही ज़मीन !!!
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यह पैंतरा प्रस्तावित MRCM क़ानून की माँग को तोड़ने के लिए लाया गया है । MRCM में यह प्रावधान है कि सभी सरकारी जमीनो एवं खदानों को लीज़ पर दिया जाएगा और प्राप्त आय ( किराया + रोयल्टी ) सभी नागरिकों में बराबर बँटती रहेगी । इस तरफ़ हमारी राष्ट्रीय सम्पत्ति का मालिकाना हक़ बना रहेगा और जनता को हर महीने पैसा भी मिलता रहेगा ।
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यदि धन वापसी क़ानून पास हो जाता है तो देश / सरकार / हम पूरी तरह से बर्बाद होकर हमेशा के लिए कंगाल हो जाएँगे ।
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Fri Sep 28 2018 09:36:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
धारा 497 का निरसन - सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों को सुधारने के लिए हमें "राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज" का क़ानून चाहिए। ताकि बदतमीजी करने पर जनता इन्हे लात मार कर बाहर कर सके। यदि आप भारत के जजों को कोस रहे हो लेकिन ऐसे किसी क़ानून की मांग नहीं कर रहे हो जिससे इन भ्र्ष्ट जजों को सुधारा जा सके तो अल्टीमेटली इससे कोई बदलाव नहीं आएगा। आपको इतना सोचने की जहमत तो उठानी ही पड़ेगी कि किस तरह का कानून न होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट के जज छुट्टे सांडो की तरह व्यवहार कर रहे है , और किस तरह का क़ानून आने से ये तमीज से पेश आने लगेंगे।
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भारत में तलाक लेने के लिए वर्षो लग जाते है। अब जजों ने इस धारा को तो समाप्त कर दिया , लेकिन इस तरह का कोई प्रावधान नहीं दिया कि विवाहेतर सम्बन्ध सामने आने या स्वीकार करने पर पीड़ित यदि चाहे तो वह तुरंत तलाक ले सकेगा। तो अभी इस तरह के संबध जाहिर होने के बाद भी दम्पत्ति को वर्षो साथ रहने की पीड़ा भुगतनी पड़ेगी !!
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मेरा प्रस्ताव है कि - सभी मुकदमो की सुनवाई जूरी करे। जूरी मामले के हिसाब से यह तय कर सकती है , कि क्या फैसला दिया जाना चाहिए। ज्यूरी सिस्टम एवं राइट टू रिकॉल जज का ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें -- <https://www.facebook.com/527176697460529/posts/563544197157112/>
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Fri Sep 28 2018 09:39:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Fri Sep 28 2018 09:42:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Fri Sep 28 2018 10:45:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सभी के लिए संवाद स्तम्भ - 4
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यह स्तम्भ देश की राजनेतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक प्रशासन से सम्बंधित समस्याओं और उनके समाधान को लेकर पूछे जाने वाले प्रश्नों और टिप्पणियों के लिए बनाया गया है ।
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कोई भी व्यक्ति इन विषयों के सम्बन्ध में यदि कोई प्रश्न रखना चाहता है, तो वह कमेन्ट बॉक्स में अपना प्रश्न या टिपण्णी रख सकता है । मैं समय की अनुकूलता के अनुसार इन प्रश्नों के उत्तर दूंगा ।
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यह तीसरा 'सम्वाद स्तम्भ' है। अन्य दो संवाद स्तम्भों का लिंक इस पोस्ट के पहले कमेन्ट में दिया गया है।
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प्रश्नकर्ताओं से निम्नलिखित नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है :
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(1) हिन्दी भाषा के लिए हिन्दी लिपि और अंग्रेजी भाषा के लिए अंग्रेजी लिपि का प्रयोग करें। रोमन भाषा का प्रयोग नहीं करे ।
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(2) दो पेराग्राफ के बीच '.' चिन्ह का प्रयोग करे ।
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(3) लेखन में अनावश्यक चिन्हों जैसे '.......', '!!!!!!!', '//////', '####', '„„„„„„', '??????' आदि का तथा अनावश्यक 'केपिटल लेटर्स' का प्रयोग नहीं करें ।
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(4) एक बार में एक ही कमेन्ट करे । यदि आपने दो कमेन्ट एक साथ किये है तो,
अ) पहले कमेन्ट को एडिट करें
ब) दुसरे कमेन्ट को कोपी करके पहले वाले कमेन्ट में पेस्ट करे
स) फिर दुसरे कमेन्ट को डिलीट कर दें ।
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(5) कमेन्ट अक्रमिक रूप से करे। निरंतर कमेंट्स न करें ।
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निरंतर कमेन्ट क्या है ?
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मान लीजिये कि
अ) आपने 'पहला' कमेन्ट किया है,
ब) मैंने 'दूसरा' कमेन्ट किया है,
स) आपने 'तीसरा' कमेन्ट किया है,
द) आपने चौथा कमेन्ट किया है ।
तो यहाँ पहला, दूसरा और तीसरा अक्रमिक जबकि चौथा कमेन्ट निरंतर है । निरंतर कमेन्ट को बिन्दु 4 में बताये तरीके से संपादित कर पिछले कमेन्ट में जोड़ दें ।
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(6) अपने प्रश्नों तथा टिप्पणियों को डिलीट नहीं करे । ताकि अन्य कार्यकर्ता भी इन्हें पढ़ सके ।
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(7) कृपया मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर को क्लिक करे तथा डिस्क्रिप्शन देखें। वहां उन आदेशो की सूची दी गयी है जो मैंने अपने प्रधानमंत्री को भेजे है। इस सूची में दिए गए क़ानून ड्राफ्ट्स को पढ़ें।
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(8) नोट्स सेक्शन में ही 'विशेष आलेख-01' शीर्षक से दर्ज स्तम्भ में राईट टू रिकाल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कुछ मुख्य कानूनी ड्राफ्ट्स की सूची तथा उनके लिंक देखे जा सकते है ।
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(9) इस स्तम्भ का लिंक देखने के लिए नोट्स सेक्शन में जाकर 'आपसी संवाद स्तम्भ' या 'two person conversation thread' शीर्षक से रखे गए स्तम्भ को देखें । इस स्तम्भ का लिंक वहां दर्ज किया गया है ।
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(10) हम देश में व्यवस्था परिवर्तन के लिए आवश्यक जूरी सिस्टम/राईट टू रिकाल कानूनों का मुक्त रूप से प्रचार करते है ताकि करोड़ो नागरिको की सहमति से इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित कराया जा सके । आप से अपेक्षा की जाती है कि प्रश्न/कमेंट्स पठनीय भाषा में रखें ।
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(11) कृपया रिप्लाय केप्शन में कमेंट्स न करे। सभी कमेंट्स liner कमेन्ट बॉक्स में ही करें
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(12) कोई भी कमेंट करने से पहले कृपया इस स्तम्भ का पहला कमेन्ट पढ़ें।
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