> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-09-04

Pawan Jury BhilwaraRj

सभी रिकालिस्ट्स के लिए महत्त्वपूर्ण सूचना ;
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राईट टू रिकॉल के नाम पर कुछ छद्म कार्यकर्ता नागरिको को फोन करके उनसे अपनी निजी वेबसाइट पर sms करने या मिस कॉल करने को कहते है, और इनसे इनका वोटर नंबर भी मांगते है। राजनैतिक रूप से सक्रीय लोगो का डेटा इकट्ठा करके ये छद्म कार्यकर्ता ये जानकारी कांग्रेस / बीजेपी / आम आदमी पार्टी को बेच देते है !!!
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हमें कुछ नागरिको ने रिपोर्ट किया है कि उन्हें अचानक अपने फोन पर आम आदमी पार्टी के मेसेज आने लगे एवं उनके घर पर आम आदमी पार्टी के पर्चे भी पोस्ट किये गए। मालूम करने पर पता चला कि जिस वेबसाइट पर उन्होंने राइट टू रिकॉल, जूरी सिस्टम कानूनों को सपोर्ट करने के लिए sms भेजा था एवं अपना वोटर नंबर दिया था उन्होंने कुछ हजार रूपये में यह डेटा आम आदमी पार्टी की स्थानीय इकाई को बेच दिया था। चुनाव करीब आने के साथ ही अब उन्होंने डेटा इकट्ठी करने की अपनी गतिविधियां तेज कर दी है।
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ये छद्म कार्यकर्ता ज्यादातर निम्न तरीके एवं चरणों का इस्तेमाल करते है --

१) ज्योंही वे आपको फेसबुक पर राइट टू रिकॉल कानूनों का समर्थन करते देखेंगे , वे आपको इनबॉक्स में आकर मोबाइल नंबर मांगेंगे और आपसे फोन पर बात करने की कोशिश करेंगे।
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२) वे आपको कानूनों का लिंक देंगे उनमे अपनी प्राइवेट वेबसाइट का लिंक होगा और वे जो आपको फेसबुक पोस्ट भेजेंगे उनमे भी उनकी प्राइवेट वेबसाइट का लिंक होगा। इस तरह वो जानकारी देने के नाम पर आपको अपनी वेबसाइट पर धकेलने की कोशिश करेंगे।
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३) अंत में उनका लक्ष्य यह रहेगा कि आप उनकी वेबसाइट पर पाने वास्तविक नंबर से एक sms भेजे।
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४) अंतिम चरण में वे आपसे आपका वोटर नंबर मांगेंगे और उसे अपनी वेबसाइट पर रखेंगे।
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इस तरह वे आपको कानूनों की जानकारी देने के नाम पर आपको अपनी प्राइवेट वेबसाइट पर भेजेंगे कर आपसे आपका वास्तविक फोन नंबर , वोटर नंबर निकलवा लेंगे। जब उनको आपके वोटर नंबर मिल जाएंगे तो वे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर इससे आपका पता निकाल लेते है।
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ये राजनैतिक रूप से बेहद छांटा हुआ डेटा है। क्योंकि यह "राजनैतिक रूप से सक्रीय" उन लोगो का डेटा है जो अभी किसी भी पार्टी से संबद्ध नहीं है , और विकल्प की तलाश में है। इस वजह से राजनैतिक पार्टियां इस डेटा को हाथो हाथ खरीद लेती है। साथ ही इनके वेबसाइट पर राजनैतिक विषय पर sms , miss call , एवं सर्च ट्रेफिक , विजिटर बढ़ने से इनकी वेबसाइट का मूल्य बढ़ता जाता है। जब इनकी वेबसाइट पर ट्रेफिक बेहद बढ़ जाएगा तो ये लोग अपनी पूरी वेबसाइट किसी राजनैतिक पार्टी को बेचकर रवाना हो जाएंगे। गौर तलब बात यह है कि इन वेबसाइटों पर मालिक का नाम नहीं लिखा हुआ होता है। वे अपनी पहचान छुपा कर रखते है और दूसरा व्यक्ति बनकर आप से बात करते है।
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जल्दी ही मैं राईट टू रिकॉल के नाम पर इस तरह का डेटा इकट्ठा करके बेचने के धंधे में लगे हुए छद्म कार्यकर्ताओ की सूची एवं उनकी वेबसाइट्स के लिंक सार्वजनिक करूँगा।
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कार्यकताओ से मेरा आग्रह है कि -- यदि कोई कार्यकर्ता आपसे इनबॉक्स में या सार्वजनिक रूप से आपके नंबर मांगता है तो उससे चौकन्ने रहे। एवं यदि वह राइट टू रिकॉल कानूनों का समर्थन बनने के ढोंग करता है आपसे किसी भी प्राइवेट वेबसाइट पर sms करने को कहता है , तो right to recall india के एडमिन्स को रिपोर्ट करें।
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राइट टू रिकॉल इंडिया ग्रुप का लिंक --- <https://www.facebook.com/groups/rtrindia/>;
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उल्लेखनीय है कि राइट टू रिकॉल ग्रुप एक विकेन्द्रित व्यवस्था के तहत काम करता है एवं हमारे कार्यकर्ता कभी भी नागरिको को किसी निजी वेबसाइट पर sms भेजने को नहीं कहते है। हम अपने सभी ड्राफ्ट सिर्फ फेसबुक एवं सरकारी वेबसाइट newindia पर रखते है। कुछ दो साल पहले जब राइट टू रिकॉल के एक छद्म कार्यकर्ता ने राइट टू रिकॉल के विभिन्न कार्यकर्ताओ के माध्यम से नागरिको का डेटा इकट्ठा करवाकर बेच दिया था , तब से हमने किसी भी प्राइवेट वेबसाइट का इस्तमाल करना छोड़ दिया। लेकिन जो छद्म रिकालिस्ट इस कारोबार में है , वे आज भी यह धंधा कर रहे है।
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