Sat Dec 05 2020 06:46:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
5 दिसम्बर 2020 : आज नागरिक कर्तव्य दिवस है। यदि आपकी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री से कोई माँग है तो Cm/Pm को चिट्ठी भेजे।
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मैं आज पी एम को दो चिट्ठी भेजूँगा ।
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(1) टीसीपी की चिट्ठी : यदि टीसीपी क़ानून होता तो किसानो को अपना प्रतिभाव प्रकट करने के लिए दिल्ली तक आने की ज़रूरत नही पड़ती। #TcpIndia
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(2) एक देश एक चुनाव का प्रस्ताव ख़ारिज करे।
#NoOneNationOneElection
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Sat Dec 05 2020 18:49:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#TcpIndia
#NoOneNationOneElection
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Sun Dec 06 2020 16:10:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Sun Dec 06 2020 16:17:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
ShivrajJat AsindRj AssemblyCandidate:
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Sun Dec 06 2020 16:17:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Sun Dec 06 2020 18:07:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
(1) किसानो के जो 30-40 नेता सरकार से बातचीत करने जा रहे है, क्या उनका आंदोलन में शामिल किसानो पर पूर्ण नियंत्रण है ?
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(1.1) यदि हाँ , तो मामला बातचीत से तय हो जाना चाहिए ।
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(1.2) यदि नही, तो जितनी भी मीटिंग वगेरह हो रही है, वह रस्मी और टाइम पास है। बात सरकार के हाथ से बाहर जाती नज़र आ रही है ।
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(2) यदि किसान सरकार को तीनो क़ानून रद्द करने के लिए बाध्य कर देते है, तो ऐसा भारत में पहली बार होगा जब पूर्ण बहुमत वाली सरकार को फ़ैसला पलटना पड़ा हो। उस स्थिति में सरकार इक़बाल खो देगी।
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यदि अमुक 30-40 यूनियन नेताओ का आंदोलन पर पूर्ण नियंत्रण नही है तो मोदी साहेब के सामने पहली बार असली चुनौती है।
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मतलब ऊँट के सामने पहाड़ आ चुका है।
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(3) प्रस्तावित समाधान : यदि TCP क़ानून होता तो किसानो को अपना प्रतिभाव रखने के लिए दिल्ली नही आना पड़ता।
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और यदि पी एम अभी भी TCP गेजेट में छाप दे तो इस आंदोलन का शांतिप्रिय समाधान हो सकता है। TCP आने से यह अधिकृत रूप से मालूम हो सकेगा कि देश के कितने मतदाता अमुक 3 कृषि कानूनो के समर्थन में है, और कितने विरोध में है।
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मैंने कल ही पी एम को चिट्ठी भेजकर TCP को गेजेट में छापने को कहा है ।
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#TCPindia
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Tue Dec 08 2020 05:35:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Tue Dec 08 2020 19:01:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
यदि राजवर्ग (नेता+अधिकारी+जज) को वोट वापसी पासबुक के अधीन नही किया गया तो वे ग़लत कानूनो का इस्तेमाल करके प्रजा को लूट लेंगे और राष्ट्र का विनाश होगा !! #JuryCourt
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#VoteVapsiPassbook
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Fri Dec 11 2020 17:36:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
भीलवाड़ा पार्षद चुनाव ; वार्ड नंबर 10 से पुरुषोत्तम जी सुथार राईट टू रिकॉल पार्टी से प्रत्याशी है।
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पश्चिम में वोट वापसी क़ानून एवं जूरी प्रक्रियाएं होना सबसे बड़ी वजह रही कि अमेरिका एवं ब्रिटेन भारत जैसे देशो से आगे, काफी आगे निकल गए। जूरी मंडल ने वहां के छोटे-मझौले कारखाना मालिको एवं कारोबारियों की जज-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार से रक्षा की और वे तकनिकी रूप से उन्नत विशालकाय कम्पनियां खड़ी करने में सफल हो पाए।
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यदि आप वोट वापसी पासबुक चाहते है तो पुरुषोत्तम जी सुथार का समर्थन करें।
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#VoteVapsiPassboook
#JuryCourt
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Sat Dec 12 2020 20:11:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
प्रजा अधीन राजा :
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यदि राजवर्ग (नेता+पुलीस+जज) को वोट वापसी पासबुक के अधीन नही किया गया तो वे ग़लत कानूनो का इस्तेमाल करके प्रजा को लूट लेंगे और राष्ट्र का विनाश होगा !! #JuryCourt
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#VoteVapsiPassbook
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Thu Dec 17 2020 16:49:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
आज से 10 वर्ष पहले कांग्रेस पार्टी इन बिलों को लागू करना चाहती थी तो भाजपा और नरेंद्र मोदी इन तीनों कानूनों का खुलकर विरोध करते थे आज नरेंद्र मोदी इन कानूनों को लागू कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी विरोध कर रही है
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<https://www.facebook.com/lakshaysaini/posts/10217210403324397>
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और अरविन्द गांधी भी पहले इन कानूनों के समर्थक थे किन्तु अब उन्होंने पाला बदल लिया है !!
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वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाये बिना इनका मिजाज किसी तरह ठिकाने नहीं लाया जा सकता !! #JuryCourtjury , #VoteVapsiPassbook.
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Thu Dec 17 2020 17:17:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सिक्खों ने 1923 में कृपाण दा मोर्चा आन्दोलन चलाकर शस्त्र रखने का अधिकार ले लिया था। और उन्होंने 1925 में फिर गोरो को SGPC एक्ट लागू करने के लिए भी बाध्य किया !!
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शस्त्र रखने का अधिकार एवं गुरूद्वारो का प्रबंधन - ये दो बड़ी वजहें है कि अभी तक सरकार ने बल प्रयोग में नंगई नहीं दिखाई है। शक्ति संतुलन से हिंसा की सम्भावना घटती है, और दोनों पक्ष संयम बरतते है।
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धर्म की आवश्यकता क्यों है ?
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धर्म की आवश्यकता हो या न हो किन्तु हमें धार्मिक संस्थाओं की जरूरत हर काल में रही है।
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(i) धर्म - प्रवचन, ज्ञान, दर्शन, मीमांसा, नैतिक उपदेश आदि धर्म है, जिसमें आध्यात्मिक तत्व है, भौतिक नहीं। कौन धर्म बचेगा और कौन नष्ट हो जायेगा इसमें इस प्रकार के धार्मिक ज्ञान की भूमिका लगभग शून्य नहीं बल्कि एकदम शून्य होती है !!
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(ii) धार्मिक संस्थाएं : संस्थाएं भौतिक है। यदि किसी धर्म की संस्थाओ का प्रशासन मजबूत है तो अमुक धर्म की संस्थाएं ताकतवर हो जाती है। और यही संस्थाएं आपत्तिकाल में अमुक धर्म के अनुयायियों को आश्रय प्रदान करती है।
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जब भी आपका सामना सरकार नामक संस्था से हो तो संघर्ष में टिके रहने के लिए आपको किसी ताकतवर संस्था की जरूरत होती है। और पिछले 10,000 वर्षो से धर्म एक मात्र संस्था रही है जो इतनी ताकतवर होती है कि राजा / सरकार / दुश्मन देश की सेना आदि से आपकी रक्षा कर सके !!
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हिन्दू धर्म की संस्थाओ का निरंतर क्षरण होने के कारण हिन्दू धर्म लगातार सिकुड़ रहा है। प्रस्तावित #HinduBoard क़ानून के गेजेट में आने से हिन्दू धर्म की संस्थाओ का प्रशासन मजबूत होना शुरू होगा और हिन्दू धर्म के सिकुड़ने की प्रक्रिया रूक जाएगी।
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हिन्दू बोर्ड का प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट यहाँ देखें - facebook.com/pawan.jury/posts/2241776019273955
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Sun Dec 20 2020 19:02:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कृपया आरएसएस के केंद्रीय मंत्री डॉ सत्यपाल से गंगा में अस्थि विसर्जन के खिलाफ बयान वापस लेने के लिए कहें।
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दीवाली की आतिशबाजी को प्रदुषण का जिम्मेदार बताने के बाद अब RSS के मंत्री गंगा के प्रदुषण को अस्थि विसर्जन से जोड़ रहे है !!
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डॉ सत्यपाल ने 3 वर्ष पहले एक बयान दिया कि गंगा में अस्थि विसर्जन से प्रदूषण होता है और इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
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कृपया आरएसएस के केंद्रीय मंत्री डॉ सत्यपाल से गंगा में अस्थि विसर्जन के खिलाफ बयान वापस लेने के लिए कहें
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यह ट्विट करें - @dr_satyapal ,
#PlsWithdrawStatementOnAstthiVisarjan कृपया गंगा में अस्थि विसर्जन के खिलाफ अपना बयान वापस लें। वर्ना मैं पीएम से कहूंगा कि आपको अपना बयान वापस लेने को कहें।
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( क्या फेसबुक ने एल्बम में फोटो विहीन पोस्ट जोड़ने की सुविधा हटा दी है ? मैं एल्बम में सिर्फ टेक्स्ट पोस्ट नहीं कर पा रहा हूँ !! )
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Sun Dec 20 2020 19:35:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
किसान यदि तीनो क़ानून रद्द करवा भी देते है (जिसकी सम्भावना बेहद कम है) तो भी 2-4 साल बाद घूमा फिर कर कुछ संशोधनो के साथ वे ये कानून फिर से डाल देंगे। और किसानो को फिर से इतना लाव लश्कर लेकर आना पड़ेगा, जिसकी सम्भावना भी बेहद कम है !!
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(a) यदि किसान चाहते है कि सरकार तीनो कृषि कानून रद्द करे तो सबसे आसान तरीका यह है कि आन्दोलन कारी तुरंत प्रभाव से एक राजनैतिक पार्टी रजिस्टर्ड कराएं। जैसे ही वे पार्टी बनाने की घोषणा करेंगे वैसे ही सभी राजनैतिक दलों में हलचल मच जायेगी, और उनकी मांगे मानने की सम्भावना बढ़ जायेगी !!
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(b) स्थायी समाधान कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री एवं मंडी अध्यक्ष को वोट वापसी पासबुक एवं जूरी ट्रायल के दायरे में लाना है। अत: आन्दोलन कारियों को वोट वापसी पासबुक की मांग अपने एजेंडे में शामिल करनी चाहिए !! क्योंकि रोकेफेलर, रोथ्स्चैल्ड एवं उनके एजेंटो (टाटा, अम्बानी, अडानी) की गाड़ी रुकने वाली नहीं है
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(1) कैसे 3 नए कृषि क़ानून किसानों के साथ साथ उपभोक्ताओं को भी बर्बाद कर सकते हैं ?
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ये कृषि क़ानून RRGBE (RRGBE=रोकेफेलर, रोथ्स्चाइल्ड़, जॉर्ज सोरोस, बिल गेट्स इत्यादि, लगभग 2000 अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता, अभिजात वर्ग) एवं उनके एजेंटो जैसे TaBiAmAd (टाटा, बिरला, अंबानी, अडानी एवं लगभग 200 भारतीय औद्योगिक घरानों) को असीमित अनाज दालें एवं अन्य खाद्य जिंसों की जमाखोरी के लिए बैंक के पैसे का उपयोग करने में सक्षम करेगा।
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इन कृषि कानूनों के आने के बाद RRGBE एवं उनके एजेंट (TaBiAmAd) खाद्य जिंसों की कृत्रिम कमी पैदा करके उपभोक्ताओं को ऊँची कीमते चुकाने के लिए मजबूर कर सकते है। जब फसल आएगी तो RRGBE & TaBiAmAd अपना जमा किया हुआ अनाज बहुत कम कीमतों पर बेचना शुरू कर सकते है, जिससे कीमतों में फौरी तौर पर काफी गिरावट आएगी, और तब किसानों को अपनी फसल कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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इस तरह वे कीमतें गिराकर किसानो से कम दाम में फसलें खरीद लेंगे और फिर अगले चरण में वे उपभोक्ताओं से दोगुने दाम वसूल करेंगे !! दूसरे शब्दों में, कृषि कानूनों में असीमित जिंसे जमा करने की धारा यह सुनिश्चित करती है कि किसान एवं उपभोक्ता दोनों RRGBE एवं उनके एजेंटो TaBiAmAd की दया पर रहेंगे !! समाधान यह है कि, अमुक तीनो कृषि क़ानून रद्द किये जाए, कृषि में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को तत्काल प्रभाव से रोका जाए एवं बैंकिंग नियमो को संशोधित किया जाए।
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(2) कैसे वोट वापसी किसानों की आय बढ़ाती है और उपभोक्ता को भी लाभ पहुंचाती है ?
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अक्सर किसानों को टमाटर, आलू, प्याज आदि के लिए 3 से 5 रू प्रति किलो का भाव मिलता है, लेकिन आम तौर पर शहर में थोक कीमतें 30 रू प्रति किलो है !! परिवहन लागत सिर्फ कुछ रुपये प्रति किलोग्राम होने के बावजूद कीमतों में इतना बड़ा अंतर क्यों है ?
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कीमतों के इस अंतर में दो कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है :
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(2.1) मंडी अध्यक्ष अनुज्ञाधारी खरीदारों के साथ सांठगांठ बनाकर रखता है, अत: मंडी अध्यक्ष उन खरीदारों को मंडी में अनुमति नहीं देता जो किसानो को अधिक मूल्य की पेशकश करना चाहते है। वोट वापसी प्रक्रिया मंडी अध्यक्ष को उन खरीदारों को अनुमति देने के लिए बाध्य करेगी जो किसानो को मंडी में ऊँची कीमतों की पेशकश कर रहे है। इससे मंडी में खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, और ज्यादा विकल्प सामने आने से किसानों को मंडी में उचित दाम मिलने लगेंगे।
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(2.2) दूसरा कारक है, पुलिसिया भ्रष्टाचार !! जब टमाटर, आलू आदि जैसे प्रमुख खाद्य पदार्थ लेकर बड़े ट्रक शहर मंऔ प्रवेश करते है, और यदि ट्रक का मालिक अम्बानी-अडानी है तो पुलिसकर्मी ट्रक को नहीं रोकेंगे। लेकिन अगर ट्रक किसी कम रसूख वाले व्यक्ति का है, तो पुलिसकर्मी कोरोना परीक्षणों जैसे झूठे बहाने बनाकर या अन्य किसी कागजी खानापूर्ति का हवाला देकर ट्रक को रोक देते है।
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इस तरह अम्बानी-अडानी बिचौलियों के तौर पर मोटा मुनाफा बनाने में सफल हो जाते है। पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री के अधीन है, और पुलिसकर्मी इस तरह की धांधली मुख्यमंत्री के अनुमति / आदेश से ही करते है।
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यदि मुख्यमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में कर दिया जाए सीएम पुलिस कर्मियों का दुरुपयोग करने की क्षमता खो देंगे। इससे मंडी के खरीदार पूरे भारत के थोक बाजारों में अपना माल भेजकर बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकेंगे और इसलिए वे मंडी में किसानो को भी ऊँची कीमतों की पेशकश कर पायेंगे। थोक बाजार में ज्यादा विक्रेताओ के आने से थोक बाजार की कीमतों में कमी आएगी और उपभोक्ता को भी कम दाम चुकाने होंगे।
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इस प्रकार मुख्यमंत्री एवं मंडी अध्यक्ष पर वोट वापसी इस समस्या का समुचित ढंग से समाधान करता है।
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किसान आन्दोलन के लिए वोट वापसी पासबुक का पीडीऍफ़ यहाँ से डाउनलोड करें -- tinyurl .com/VvpFarmer
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Mon Dec 21 2020 19:58:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Tue Dec 22 2020 18:07:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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