Pawan Jury BhilwaraRj
(1) किसानो के जो 30-40 नेता सरकार से बातचीत करने जा रहे है, क्या उनका आंदोलन में शामिल किसानो पर पूर्ण नियंत्रण है ?
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(1.1) यदि हाँ , तो मामला बातचीत से तय हो जाना चाहिए ।
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(1.2) यदि नही, तो जितनी भी मीटिंग वगेरह हो रही है, वह रस्मी और टाइम पास है। बात सरकार के हाथ से बाहर जाती नज़र आ रही है ।
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(2) यदि किसान सरकार को तीनो क़ानून रद्द करने के लिए बाध्य कर देते है, तो ऐसा भारत में पहली बार होगा जब पूर्ण बहुमत वाली सरकार को फ़ैसला पलटना पड़ा हो। उस स्थिति में सरकार इक़बाल खो देगी।
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यदि अमुक 30-40 यूनियन नेताओ का आंदोलन पर पूर्ण नियंत्रण नही है तो मोदी साहेब के सामने पहली बार असली चुनौती है।
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मतलब ऊँट के सामने पहाड़ आ चुका है।
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(3) प्रस्तावित समाधान : यदि TCP क़ानून होता तो किसानो को अपना प्रतिभाव रखने के लिए दिल्ली नही आना पड़ता।
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और यदि पी एम अभी भी TCP गेजेट में छाप दे तो इस आंदोलन का शांतिप्रिय समाधान हो सकता है। TCP आने से यह अधिकृत रूप से मालूम हो सकेगा कि देश के कितने मतदाता अमुक 3 कृषि कानूनो के समर्थन में है, और कितने विरोध में है।
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मैंने कल ही पी एम को चिट्ठी भेजकर TCP को गेजेट में छापने को कहा है ।
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#TCPindia
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