Posts for 2022-01

Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jan 01 2022 21:39:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों पर मल्टी लेवल नेटवर्क बनाने का प्रतिबन्ध :
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28 दिसंबर 2021 को केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष बिक्री के मॉडल पर काम करने वाली कंपनियों के लिए एक गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस अधिसूचना के तहत अब से प्रत्यक्ष बिक्री मॉडल के अंतर्गत काम करने वाली कंपनियां वितरकों का बहु स्तरीय नेटवर्क (Multi Level Network) नहीं बना सकेगी।
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यह नोटिफिकेशन लगभग 2 करोड़ लोगो को प्रत्यक्ष / अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा, और लाखों लोगो को बेरोजगार कर देगा।
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डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों द्वारा पिछले कई वर्षो से सरकार से यह मांग कर रही थी कि इस मॉडल को अधिनियमित करने के लिए एक गाइड लाइन जारी की जाए ताकि धोखाधड़ी एवं मनी सर्कुलेशन करने वाली कम्पनियां उपभोक्ताओं के साथ फ्रॉड न कर सके। किन्तु सरकार ने इसे रेगुलेट करने की जगह प्रतबंधित कर दिया। मतलब पैर में हुए फोड़े का इलाज करने का हवाला देकर उन्होंने फिर से टांग ही काट दी है !!!
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और कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के नेता भी इस नोटिफिकेशन के समर्थन में है !!
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यदि आप इस कानून का विरोध करते है तो प्रधानमंत्री को यह ट्विट करें, एवं आने वाली 5 तारीख को पीएम को खुला आदेश पत्र भी भेजें -
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@Pmoindia , #CancelDirectSellingLaw2021, उपभोक्ता संरक्षण (प्रत्यक्ष बिक्री) नियम, 2021 को रद्द करें।
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निचे वह 2 धाराएं दी गयी है जो बहु स्तरीय नेटवर्क बनाने पर प्रतिबन्ध लगाने का प्रावधान करती है :
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3.1. (ज) : "पिरामिड स्किम" से किसी स्किम में अतिरिक्त अभिदाता (ओ) के नामांकन या कार्य या प्रदर्शन के परिणामस्वरूप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त करने के लिए एक या एक से अधिक अभिदाताओं को नामांकित करते हुए अभिदाताओं द्वारा बनायी गयी स्किम के लिए अभिदाताओं का एक बहुस्तरीय नेटवर्क अभिप्रेत है, जिसमें अतिरिक्त अभिदाता (ओ) को नामांकित करने वाले अभिदाता उच्च स्थान पर कब्ज़ा प्राप्त है और नामांकित अभिदाता निचले स्थान पर कब्ज़ा प्राप्त है, जिससे क्रमिक नामांकन के जरिये अभिदाताओं का बहु-स्तरीय नेटवर्क बनता है।
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5.1.(ग) : प्रत्यक्ष बिक्री इकाई इस आशय की स्व घोषणा करेगी कि इसने इन नियमो के उपबंधों का अनुपालन किया है तथा किसी पिरामिड स्किम या धन परिचालन स्किम में सम्मिलित नहीं है।
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पूरा नोटिफिकेशन हिंदी में यहां पढ़ सकते है - <https://tinyurl.com/DirectSellingLaw>;
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प्रस्तावित समाधान : डायरेक्ट सेलिंग मॉडल के अंतर्गत कई कम्पनियां एवं वितरक उपभोक्ताओ के साथ धोखा धड़ी कर देते है। उपभोक्ताओं को इससे सरंक्षित करने के लिए आपको जूरी सिस्टम की और आना होगा। बिना जूरी सिस्टम के इस मॉडल के अंतर्गत किये जाने वाले फ्रोड को सिर्फ कानून लिखकर रोका नहीं जा सकता। जब तक आप जूरी के ऑर्बिट में नहीं आते इस तरह की धोखा धड़ी को रोकना मुमकिन नहीं है।
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अत: हमारा प्रस्ताव है कि, डायरेक्ट सेलिंग मॉडल के तहत काम करने वाली कम्पनियों / वितरको के खिलाफ आने वाली उपभोक्ता शिकायतों का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाना चाहिए।
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लेकिन यदि आपको जज सिस्टम में ही रहना है तो दो ही चीजे होगी -
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(1) भ्रष्ट पुलिस एवं भ्रष्ट अदालतों के कारण उपभोक्ताओ के साथ धोखा धड़ी होगी, और
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(2) फिर वे उपभोक्ता सरंक्षण के नाम पर पूरे कारोबार को ही बंद कर देंगे। और इस तरह कायदे से काम करने वाले कारोबारी एवं वितरक भी अपना कारोबार खो देंगे।
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और इस पूरी कवायद से अमेजन का हिस्सा / नियंत्रण बाजार में बढ़ जाएगा।
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#RightToRecallParty
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jan 02 2022 22:32:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

डायरेक्ट सेलिंग को रेगुलेट करने के लिए जो क़ानून लागू किया गया है उसके परिणामस्वरूप छोटी कंपनियों की लागत अतिरिक्त रूप से बढ़ेगी जिससे छोटी कंपनियां बाजार खो देगी, और बड़ी कम्पनियों का हिस्सा बाजार में बढ़ जाएगा।
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इस कानून की प्रायोजक Amway है। इस कानून में जानबूझकर बहु स्तरीय नेटवर्क (पिरामिड) को प्रतिबंधित करने वाली 2 धाराएं जोड़ी गयी है। ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि पिरामिड नेटवर्क पर प्रतिबन्ध लगाने वाली इन 2 धाराओं को अद्यतन नोटिफिकेशन में से निकाल दिया जाएगा, या इन्हे लागू नहीं किया जाएगा।
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यदि ये धाराएं नहीं जोड़ी जाती तो छोटी कंपनियों द्वारा इस कानून का विरोध किया जाता और पूरा क़ानून ही रद्द करना पड़ सकता था। अत: Amway ने इस कानून में पिरामिड स्किम को प्रतिबंधित करने वाली धाराएं जोड़ी। इन धाराओं के कारण सभी कंपनियों / वितरकों को अपना धंधा पूरी तरह से बंद होने की आशंका है।
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अब यदि Amway ये दो धाराएं निकलवा देती है तो इस कानून की शेष धाराएं लागू होगी और ये शेष धाराएं लागू होने का सबसे बड़ा फायदा Amway को होगा। साथ ही Amway को यह क्रेडिट भी मिलेगा कि उन्होंने भारत में नटवर्क मार्केटिंग को बेन होने से बचा लिया है !!
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पूरा कानून पढ़ने के लिए लिंक कमेंट बॉक्स में देखें।
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(हमारा प्रस्ताव है कि, डायरेक्ट सेलिंग सिस्टम में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। क्योंकि विदेशी कम्पनियां एकाधिकार बनाने के लिए यह टारगेट लेकर काम करती है कि छोटी इकाइयों को बाजार से बाहर किया जा सके। और इसके लिए वे हमेशा क़ानून का इस्तेमाल करते है। जल्दी ही प्रस्तावित वोइक कानून में इस आशय की धारा जोड़ी जायेगी।)
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 04 2022 08:59:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

If I am on jury to decide fine on Dr Devendra Balhara , I would order policemen to release him within minute without any fine or punishment
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I am against forced mask law since day-01. And I have been also against lockdown, forced medication, forced hospitalization and forced vax since day one. So any person accused of not wearing mask or opposing forced vax etc is innocent as per me
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Its another matter that Dr Devendra Balhar himself opposes jury system and supports judge system ( pls ask him for proof ) . And we were working to defeat forced mask parties like congress rss aap akali in Chandigarh municipal elections and campaign for candidates who oppose forcedmask and forcedvax. But Dr Devendra Balhar himself showed zero interest in campaigning for antiforcedvax candidates !! And thus, Dr Devendra Balhar indirectly supported congress rss aap in Chandigarh municipal elections
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I hope now Dr Devendra Balhar will either himself contest elections to defeat forcedvax parties like congress rss aap akali in 10-jan-2022 Punjab assembly elections or at least campaign for forcedvax candidates
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We will order PmoIndia to end all corona restrictions ( we have already tweeted once ). And this may result into release of Dr Devendra Balhara.
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But given that Dr Devendra Balhar himself indirectly supports congress rss aap akali, our efforts to defeat congress rss aal akali will become weak. But his choice. He is a free citizen of india. He has all moral rights to directly or indirectly support forcedmask parties like congress rss aap akali.
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I would request all to work to defeat all forcedmask forcedvax parties such as Congress RSS aap akali SP BSP in coming 10-jan-2022 punjab Uttrakhand UP elections. Anyone who is not working to defeat these parties is just another rothschilde agents

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 04 2022 09:00:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Senioriit Baba:

Postcard आन्दोलन / वोट वापसी आंदोलन से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर यहाँ देखें -
superiorsociety.org/rtr

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jan 06 2022 12:16:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बंदूक रखने का अधिकार : भीलवाड़ा जिले पर भी वही कानून लागू होना चाहिए जो कर्नाटक के कूर्ग जिले में लागू है. ज्ञातव्य है कि कूर्ग जिले के नागरिको को बंदूक खरीदने के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती. वे बिना लाइसेंस के भी बंदूक रख सकते है.
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मनी राजम के हाथ पैर तोड़ने वाला था, लेकिन राजम की बंदूक ने हिंसा को रोक दिया. शक्ति का संतुलन शान्ति लाता है.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jan 06 2022 13:24:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

देश पेड मीडिया, राजनीतिक आइ टी सेल की इतनी गिरफ़्त में आ चुका है कि “पीएम की सुरक्षा को ख़तरा” टाइप का ड्रामा स्टेज कराकर देश / राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा शुरू करवाई जा सकती है। और किसने क्या कैसे शुरू किया, किसी को पता नही चलेगा। सब घटना पर अपना अपना वर्ज़न गाते रहेंगे, और आग भड़काते रहेंगे।
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बहरहाल, रेली स्थल पर विशाल स्क्रीन्स लगे हुए थे। अतः airport पहुँचने के बाद मोदी साहेब विडियो कॉल द्वारा अपने श्रोताओं को सम्बोधित कर सकते थे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jan 07 2022 11:32:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जिस अफसर ने पीएम के “जिन्दा लौटने” के बयान को सार्वजनिक किया है उसे 50 नागरिको की जूरी के समक्ष पेश किया जाए और उससे जूरी यह पूछेगी कि – पीएम के जिन्दा लौटने वाला बयान सार्वजनिक करने के निर्देश उसे किसने दिए थे !! यदि वह अफसर सच नहीं बताता है तो जूरी उसका सार्वजनिक नार्को टेस्ट ले.
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पीएम इस तरफ की सौ बातें अपने स्टाफ / अधिकारियो से कहता है. इनमें से कई गंभीरता से कही जाती है, और कई लाईट ह्यूमर में. लेकिन इस तरफ की बात का मीडिया में आना बेहद खतरनाक है. सामान्यतया, कोई अफसर पीएम द्वारा कही गयी किसी बात को मीडिया में कहने की हिम्मत नहीं दिखा सकता. वह मिनिट से सस्पेंड होगा और उसे जेल तक हो सकती है. प्रधानमंत्री ने अब तक अमुक अधिकारी को सस्पेंड नहीं किया है.
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इसका सीधा आशय यह है कि – पीएम का मानना है कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने पीएम को जान से मारने की साजिश की थी !! और यह बयान पेड मीडिया पीएम के नाम से हेडलाइन के रूप में चला रहा है !!!
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और अमुक अफसर का जूरी के सामने नार्को टेस्ट लिए बिना यह बात कभी भी सामने नहीं आएगी कि उसे यह बयान सार्वजनिक करने के निर्देश किसने दिए थे. पेड मीडिया ने अमुक अफसर का नाम नहीं छापा है. ANI से भी पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने पीएम का यह बयान किस अफसर के हवाले से प्रकाशित किया है.
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हमें नहीं पता कि ये ड्रामा कैसे और किसने स्टेज किया. अनुमान के आधार पर इसकी निम्न संभावनाएं है :
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(1) पेड मीडिया के प्रायोजको ने पंजाब के मुख्यमंत्री को यह ड्रामा स्टेज करने को कहा.
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(2) पेड मीडिया के प्रायोजको ने पीएम को ऐसा करने के निर्देश दिए. पेड मीडिया के प्रायोजको ने प्रधानमंत्री को निर्देश दिए कि वे अफसरों से कहे कि – सीएम को शुक्रिया कहना कि मैं “जिन्दा” लौट रहा हूँ. साथ ही पीएम ने अफसरों को यह भी निर्देश दिए कि वे उनके जिन्दा लौटने वाली बात को मीडिया में भी लीक करें.
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(3) मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री दोनों को इस बारे में जानकारी नहीं थी, और वे भी घटनाक्रम को घटने हुए देख रहे थे. पेड मीडिया के प्रायोजक इतने ताकतवर है कि वे मुख्यमंत्री या प्रधानमन्त्री को सूचित किये बिना उनके अधीनस्थ प्रशासन को निर्देश भेजकर इस तरह की घटना को संचालित एवं नियंत्रित कर सकते है.
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पेड मीडिया के प्रायोजको ने मीडिया कर्मियों को “जिन्दा लौटने” वाले बयान को हैडलाइन बनाने के निर्देश दिए. और इस तरह बिना किसी जांच के इसे मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री के क़त्ल की साजिश की शक्ल दे दी गयी !!
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फिर पेड मीडिया के प्रायोजको ने आई टी सेल से ऐसा मेटेरियल सर्कुलेट करने को कहा जिसका आउटपुट यह निकलकर आये कि पंजाब, कोंग्रेस, सिक्ख, खालिस्तानी आदि भारत के प्रधानमंत्री की हत्या करने की साजिश कर रहे है. और इन्हें सबक सिखाना जरुरी है !! दरअसल, पेड मीडिया के प्रायोजक इत्मिनान कर रहे है कि यदि वे 1984 से भी अधिक हिंसक और बड़े पैमाने पर दंगे करवाना चाहते है तो क्या वे उतनी पकड़ बना चुके है.
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अभी ये ड्रामा ख़त्म हो गया है, या 2-3 दिनों में सोशल मीडिया पर विष वमन के बाद समाप्त हो जाएगा. लेकिन आने वाले समय में आप ऐसी ही किसी घटना के गवाह बनेंगे जिसमें ऐसी ही कोई घटना हिंसक दंगो की शुरुआत करेगी.
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पंजाब पेड मीडिया के निशाने पर है. वे पंजाब को तोडना चाहते है. यह घटना पंजाब एवं शेष भारत के बीच बन रही खाई को और चौड़ा करने के लिए प्लांट की गयी.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jan 07 2022 19:57:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Jury Court:

ओमिक्रोण का प्रभाव किस प्रकार से भारत पर होगा।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jan 07 2022 20:05:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Sumit Gurgaon HrActivist:

1. Photo - These are list of vaccines a child in India receives ( got it from a friend).

2. Govt official lists -

<Https://main.mohfw.gov.in/sites/default/files/5628564789562315.pdf>;

<http://www.nrhmhp.gov.in/content/immunisation>;

3. List by FirstCry website

<https://parenting.firstcry.com/articles/optional-and-mandatory-vaccines-for-children-in-india/?ref=SEM_GSN_Parenting_Dynamic-3_Baby_CAT&gclid=Cj0KCQiA_c-OBhDFARIsAIFg3exEynpt2vukTH1inQny9M-GApQ81rk00FJghZNc_bccikr41Xd3T0saAkZAEALw_wcB>;

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List ( from photo ) -
From birth till around age 15-16

1 BCG
2 Polio
3 Hepatitis B
4 DPT , DTaP
5 Pneumoccocal conjugate
6 rota virus
7 human influenza virus
8 measles
9 Hepatitis A
10 Varicella
11 MMR measles mumps rubella
12 Typhoid
13 Meningococcal
14 HPV

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Right to Recall Party
manifesto -
www.RightToRecall.com/301.pdf

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jan 08 2022 10:57:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jan 08 2022 11:28:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jan 09 2022 08:41:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

उत्तर प्रदेश, पंजाब एवं उत्तराखंड राज्यों में विधानसभा चुनावों की अधिसूचना जारी हो चुकी है।
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कार्यकर्ताओं से आग्रह है कि पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित NWO की समर्थक पार्टियों (Bjp, Cong, Aap, Sp etc) को चुनौती देने के लिए चुनावी मैदान में उतरे।
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यदि आप राईट टू रिकॉल पार्टी के एजेंडे का समर्थन करते है तो राईट टू रिकॉल पार्टी की और से चुनाव लड़े, अथवा निर्दलीय उम्मीदवारी करे। किंतु चुनाव लड़ने का प्रयास अवश्य करे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jan 09 2022 21:21:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अन्य वर्षो की तुलना में वर्ष 2021 में 70% यानि 65 लाख अधिक मौतें हुयी है !!
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यदि भारत सरकार पिछले वर्ष मरने वाले लोगो की मृत्यु पंजिका (Death Registry) सार्वजनिक कर दें तो सरकारी आंकड़ो को आधार बनाकर यह जाना जा सकता है कि अतिरिक्त मौतों की वजह क्या थी - सरकारी अमृत या वायरस
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मृत्यु पंजिका में निम्नलिखित आंकड़े शामिल होंगे :
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(1) मृतक का नाम, उम्र, पता, एवं मतदाता पहचान संख्या
(2) मृतक ने क्रमश: सरकारी अमृत का पहला एवं दूसरा घूँट कब पिया था
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भारत में NWO लाने के लिए काम कर रही पेड मीडिया पार्टियों (बीजेपी, कोंग्रेस, सपा, आपा, सीपीएम आदि) के नेता एवं कार्यकर्ता भी मृत्यु पंजिका को सार्वजनिक किये जाने का विरोध कर रहे है !!
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और Awaken & BRC ने न तो पीएम से मृत्यु पंजिका सार्वजनिक करने की मांग की है, और न ही वे पेड मीडिया पार्टियों को फाईट देने के लिए चुनावों में उम्मीदवार उतार रहे है !!
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यदि आप मृत्यु पंजिका को सार्वजानिक कराना चाहते है तो पीएम को यह ट्विट करें :
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#PublishAgeWiseDeathCountsEachMonthPastFourYears #PublishVoterIdNameAge
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jan 09 2022 21:46:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनावी समर - राइट टू रिकॉल पार्टी के उत्तराखंड के विधायक उम्मीदवार आकाश नेगी
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jan 09 2022 22:46:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

श्री श्री रविशंकर, स्वामी रामदेव, जग्गी वासुदेव एवं आचार्य प्रशांत ने पीएम को कभी सार्वजनिक रूप से नहीं कहा कि वे लॉकडाउन एवं फ़ोर्स वैक्सीनेशन को बंद करें। न ही उन्होंने अपने अनुयायियों को कभी यह निर्देश दिए कि वे पीएम को End Lockdown एवं End Force Vaccination का ट्विट भेजें।
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इस तरह इन सज्जनों ने लॉकडाउन एवं फ़ोर्स वैक्सीनेशन के प्रधानमंत्री के फैसले का समर्थन किया !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jan 10 2022 19:33:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित भारत की सभी मुख्यधारा की पार्टियाँ (भाजपा, कोंग्रेस, आपा, सपा, बसपा आदि) भारत में न्यू वर्ल्ड ऑर्डर को थोपने के लिए सक्रीय रूप से काम कर रही है। इन सभी पार्टियों ने लॉकडाउन, अनिवार्य टीकाकरण, अनिवार्य मास्क आदि कानूनों का समर्थन करके देश एवं देश के नागरिको को हानि पहुँचाने में कोई कसर नहीं रखी।
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पेड मीडिया के प्रायोजको का मुख्य लक्ष्य था कि – भारत के कार्यकर्ताओ को कैसे चुनावी राजनीति में आने से रोका जाए, ताकि नागरिको के पास उनकी पार्टियों (भाजपा, कोंग्रेस, आपा, सपा, बसपा आदि) को वोट करने के आलावा कोई विकल्प नहीं रहे। अवेकन इण्डिया मूवमेंट, BRC, इण्डिया अंगेस्ट न्यू वर्ल्ड आर्डर, डॉ विशाल जगदाले, सोनू सूद एवं इस तरह के सैंकड़ो संगठनो / नेताओ ने न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के खिलाफ लड़ाई के नाम पर पेड मीडिया के प्रायोजको के लिए यह काम किया !!
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कथित न्यू वर्ल्ड ऑर्डर का प्रचार कर रहे उपरोक्त लोगो / संगठनों का मुख्य लक्ष्य था – न्यू वर्ल्ड ऑर्डर का झांसा देकर भारत के कार्यकर्ताओ को नया चुनावी राजनैतिक विकल्प खड़ा करने से रोकना। इन्होने कार्यकर्ताओ को न्यू वर्ल्ड ऑर्डर की साजिश को “बेनकाब” करने और उन्हें “जगाने” के नाम पर लाखों वीडियो दिखाए, करोड़ो पोस्ट पढाए, जनहित याचिकाएं लगवाई और इस तरह उनका टाइम पास किया कि भारत के कार्यकर्ता पेड मीडिया पार्टियों को चुनौती देने के लिए राजनैतिक विकल्प खड़ा न कर सके !!
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और ये लोग ऐसा करने में सफल रहे !!
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और जैसा कि न्यू वर्ल्ड ऑर्डर एवं पेड मीडिया के प्रायोजक चाहते थे, लॉकडाउन, अनिवार्य टीकाकरण एवं अनिवार्य मास्क का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओ के पास फिर से पेड मीडिया के प्रायोजको द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों को वोट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा !!
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ये नियंत्रित विपक्ष या फेक ओपोजिशन का बेहतरीन उदाहरण है !!!
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Best way to control opposition is to lead it – Vladimir Lenin
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भारत के राईट टू रिकॉल पार्टी एक मात्र पार्टी है जिसने शुरुआत से ही लॉकडाउन, अनिवार्य मास्क, अनिवार्य टीकाकरण का विरोध किया, और हम पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित पार्टियों (भाजपा, कोंग्रेस, आपा, सपा, बसपा आदि) के खिलाफ चुनाव लड़ रहे है.
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यूपी, उत्तराखंड एवं पंजाब में राईट टू रिकॉल पार्टी कम से कम 15 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
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कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि यदि वे पेड मीडिया पार्टियों के एकाधिकार को ख़त्म करके न्यू वर्ल्ड ऑर्डर को रोकना चाहते है तो राईट टू रिकॉल पार्टी की और से यूपी, पंजाब, उत्तराखंड में चुनाव लड़ें.
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इस बारे में एक पुराना पोस्ट यह भी पढ़ें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/4274307229354147>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 11 2022 19:20:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मधुबाला एवं अशोक कुमार अभिनीत फिल्म महल (1949) में जूरी ट्रायल दिखाया गया है। क्लाइमेक्स में अशोक कुमार का पात्र मुलजिम है, जिसका मुकदमा इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ 10 आदमियों की जूरी मुकदमा सुनती है। जज फैसला देता है कि - जूरी की राय में मुलजिम कुसूरवार है, और अदालत उसे सजाए मौत तजवीज़ करती है।
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नाटकीय घटनाक्रम के दौरान फांसी के एन पहले पुलिस अधिकारी को एक ख़त प्राप्त होता है, जो मुलजिम को बेकसूर साबित करने की निशानदेही है। रात में ही जूरी सदस्यों पुलिस थाने में बुलाया जाता है। जूरी सदस्य सबूत देखकर अपना फैसला पलट देते है। और जूरी की राय पर जज मुलजिम को रिहा करने के आदेश जारी करता है।
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लिंक -- <https://youtu.be/uaP2h-ZIPBQ?t=7434>;
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(नोट : फिल्म संस्पेंस थ्रिलर है। अत: यदि आप फिल्म देखने की मंशा रखते है तो लिंक में दी गयी क्लाइमेक्स क्लिप देखने के बाद फिल्म का रहस्य खुल जाएगा।)
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 11 2022 19:47:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कजाकिस्तान संकट --- पुतिन और कजाख सरकार द्वारा जबरन टीके लगाने का नतीजा !!!
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पुतिन रूसियों और कज़ाकों पर ज़बरदस्ती टीकाकरण लागू कर रहे हैं। रूसियों के पास लोकतान्त्रिक तरीके से विद्रोह करने का कोई तंत्र नहीं है। लेकिन कज़ाख में मस्जिदें और शुक्रवार की गेदरिंग होने के कारण यह विद्रोह के वैकल्पिक तंत्र के रूप में काम कर रही है। अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता पेड मीडिया का इस्तेमाल करके पूरी दुनिया पर बाध्यकारी टीकाकरण थोप रहे हैं। लेकिन साथ ही अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता और सीआईए कज़ाकी लोगों की बाध्यकारी टीकाकरण विरोधी भावनाओं का फायदा भी उठा रहे हैं, और मस्जिदो की गेदरिंग का इस्तेमाल वे पुतिन विरोधी लहर पैदा करने में कर रहे है।
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कज़ाख दंगे भारत के उन लोगो के लिए सबक है जो भारत में बाध्यकारी टीकाकरण के समर्थक है। भारत के ये लोग मानते है कि वे पुलिस के डंडे से बाध्यकारी टीकाकरण का विरोध करने वाले लोगों को हरा सकते है, और उन्हें दोनों खुराक एवं बूस्टर लेने के लिए मजबूर कर सकते है। खैर, डंडा कुछ समय के लिए काम कर सकता है। लेकिन इससे विद्रोह की संभावना ही बढ़ेगी। और नतीजे में टीकाकरण विरोधी कई लोग अन्य धर्म में धर्मान्तरित हो सकते है। वे ऐसे धर्म में शामिल हो सकते हैं जो बाध्यकारी टीकाकरण आंदोलन को मजबूत करता है।
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हम बाध्यकारी टीकाकरण विरोधी कार्यकर्ताओ से अपील कर रहे है कि वे भारत में बाध्यकारी टीकाकरण का समर्थन करने वाली पेड मीडिया पार्टियों (बीजेपी, कोंग्रेस, आपा, सपा आदि) के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरें। लेकिन BRC एवं अवेकन जैसे नियंत्रित विपक्ष सभी कार्यकर्ताओं को चुनाव से दूर रहने के लिए मनाने में सफल रहे हैं। और यह सबसे बड़ी वजह है कि नागरिको के पास बाध्यकारी टीकाकरण थोपने वाली पार्टियों को वोट देने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहा है।
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इसलिए अगर जॉर्ज सोरोस जैसी कोई विदेशी शक्ति भारत में धार्मिक कट्टरपंथियों या नक्सलियों जैसे प्रतिक्रियावादी समूहों को फंडिंग करना शुरू करता है, तो बाध्यकारी टीकाकरण का विरोधी असहाय वर्ग उनका हथियार बन सकता है। और यह भारत में भारी अस्थिरता पैदा कर सकता है।
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प्रस्तावित समाधान --- कार्यकर्ताओं को बीआरसी और अवेकन आदि की चपेट में न आकर भारत में पेड मीडिया पार्टियों को परास्त करने के लिए राजनैतिक विकल्प खड़ा करने के लिए काम कारण चाहिए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 11 2022 20:38:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यह मेरी सबसे महत्वपूर्ण पोस्ट है - कृपया इसे ध्यान से पढ़ें। [ EVM & FDI ]
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(1) कृपया (Evm वीडियो + कुछ पंक्तियां) एक फेसबुक पोस्ट करें, जो आपको लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। और उस पोस्ट को अपने PROFILE पर PINNED पोस्ट के रूप में पिन करें।
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(2) पोस्ट के अंत में 2-3 लाइनें हो सकती हैं जैसे "अन्य महत्वपूर्ण पोस्ट देखें --- (लिंक आदि)
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(3) मैंने सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दे के रूप में Evm Black Glass का वीडियो डाला है, क्योंकि मेरे विचार में #EvmHatao और #EvmBlackGlassHatao भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।
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विदेशी ताकतें हम पर बाध्यकारी टीकाकरण इसीलिए थोप पा रही है क्योंकि Evm एवं FDI ने उन्हें हमारे नेताओं पर फौलादी पकड़ दे दी है। तो आप तय करें कि आपकी राय में कौन सा मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। और कृपया अमुक मुद्दे के पोस्ट को अपनी प्रोफाइल पर पिन करें।
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यह वीडियो बताता है कि - चुनाव आयोग ने जून 2017 में Vvpat के पारदर्शी रंगहीन कांच को गहरे काले रंग के फ्रंट साइड मिरर में इसीलिए बदल दिया था ताकि Vvpat पर्चियों में भी वोटो की हेराफेरी की जा सके।
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अब अंधे कांच के कारण जब तक Vvpat के अंदर की लाईट नहीं जलती तब तक तक मतदाता या पीठासीन अधिकारी या कलेक्टर को कागज की पर्ची दिखाई नहीं देती है।
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और इसलिए जब वोटिंग के 7 दिन पहले चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की डिटेल की प्रोग्राम फाइल Evm में इंस्टाल की जाती है तो प्रोग्राम में यह निर्देश (Code) जोड़ा जा सकता है कि अमुक प्रोग्राम अन्य उम्मीदवारों को मिले वोट कम करके ये वोट किसी निर्दिष्ट नंबर के उम्मीदवार के खाते में भेज सकता है, और इस हेराफेरी को Vvpat की पर्चियों के मिलान द्वारा भी पकड़ा नहीं जा सकता !!
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4 मिनट के इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे वीवीपैट प्रोग्राम Vvpat की पर्चियों में की गयी हेराफेरी को छुपा सकता है !!!
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मेरा दूसरा महत्त्वपूर्ण मुद्दा FDI है। FDI पर रोक लगाने के लिए मेरे द्वारा प्रस्तावित क़ानून WOIC का ड्राफ्ट यहाँ देखें --- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3088232837961598>;
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प्रस्तावित वोइक क़ानून भारत के संवेदनशील क्षेत्रो जैसे मीडिया, खनन, बेंकिंग, उर्जा, रेल, संचार, रक्षा आदि में विदेशी निवेश पर पूर्णतया रोक लगाता है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jan 12 2022 18:20:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Amit Upadhyay RrpMhulhasnagar MhUlhasnagar:

श्री विभोर शर्मा जी विधानसभा क्षेत्र मथुरा विधानसभा क्रमांक 84 उत्तर प्रदेश से राइट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्याशी है, कृपया इनका प्रचार करें।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jan 12 2022 19:29:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पेड मीडिया के प्रायोजको (अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रांसिस हथियार निर्माता) का नियंत्रण भारत पर लगातार बढ़ रहा है। और उनके बढ़ते हुए नियंत्रण की मूल वजह है संवेदनशील क्षेत्रो में विदेशी निवेश की अनुमति, यानि FDI !!
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पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित भारत की सभी मुख्य धारा की राजनैतिक पार्टियाँ घोषित रूप से FDI के समर्थन में है, और इसी वजह से पेड मीडिया के प्रायोजक उन्हें पेड मीडिया में सकारात्मक कवरेज देते है। पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में बाध्यकारी टीकाकरण एवं बाध्यकारी लॉकडाउन इसीलिए लागू करवाने में सफल रहे है, क्योंकि FDI के कारण भारत में पेड मीडिया के प्रायोजको की शक्ति काफी बढ़ी हुई है।
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जो कार्यकर्ता भारत में विदेशियों के बढ़ते हुए नियंत्रण को कम करना चाहते है, उन्हें पेड मीडिया पार्टियों (बीजेपी, कोंग्रेस, आपा, सपा, बसपा, सीपीआई आदि) के खिलाफ चुनावों में आना चाहिए। जब तक चुनावी मैदान में ऐसी पार्टियाँ / उम्मीदवार नहीं आयेंगे जो पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे के खिलाफ हो तब तक विदेशियों के बढ़ते नियंत्रण को रोका नहीं जा सकता।
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जागरुक करने के नाम पर भारत के कार्यकर्ताओ ने अपने 20 साल बेकार दिए और वे पेड मीडिया के प्रायोजको द्वारा पोषित पार्टियों के खिलाफ कोई राजनैतिक विकल्प खड़ा नहीं कर पाए.
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बहरहाल, यूपी, पंजाब, उत्तराखंड के कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे विधानसभा चुनावों में उतरने का प्रयास करें। हम रिकालिस्ट्स उन सभी निर्दलीय उम्मीदवारों / पार्टियों का समर्थन करेंगे जो पेड मीडिया के एजेंडे के खिलाफ चुनाव में उतरता है। यदि आप निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ना चाहते और न ही आपके पास कोई पार्टी है तो आप राईट टू रिकॉल पार्टी की और से चुनाव लड़ सकते है। हम आपको पूरा सहयोग करेंगे।
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राईट टू रिकॉल पार्टी ने पेड मीडिया के प्रायोजको के बढ़ते नियंत्रण को समाप्त करने के लये 31 क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है। राईट टू रिकॉल पार्टी यूपी, पंजाब, उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में कम से कम 15 सीटो पर चुनाव लड़ रही है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jan 12 2022 21:53:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

देवेंद्र बल्हारा जी , आपसे अपील है कि -
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(1) कृपया भारत के नागरिको को जनमत संग्रह का अधिकार दिलाने की प्रक्रियाओं का समर्थन करें एवं जनमत संग्रह प्रक्रियाओ को गैजेट में प्रकाशित करने के लिए मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री को खुला निर्देश पत्र भेजें।
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(1.1) मेरा प्रस्ताव : जनमत संग्रह प्रक्रियाओ के लिए मैंने टीसीपी नामक क़ानून का प्रस्ताव किया है। टीसीपी 3 धाराओं का एक प्रस्तावित कानून है जिसे किसी एक जिले या एक राज्य या पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
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टीसीपी क़ानून आने के बाद अमुक जिले / राज्य के मतदाता SMS भेजकर या पटवारी कार्यालय में जाकर अपनी हाँ / ना दर्ज करवा सकेंगे कि वे अपने जिले / राज्य में बाध्यकारी टीकाकरण, बाध्यकारी लॉकडाउन एवं बाध्यकारी मास्क का क़ानून या कोई ऐसा अन्यायपूर्ण क़ानून चाहते है या नहीं।
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(1.2) अत: इस क़ानून के आने से अमुक जिले / राज्य के नागरिक बहुमत का प्रयोग करके बाध्यकारी टीकाकरण, बाध्यकारी लॉकडाउन एवं बाध्यकारी मास्क का कानून लोकतांत्रिक रूप से रद्द करवा सकेंगे।
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(1.3) यदि किसी जिले के 4 विधायक चाहे तो जिला स्तरीय टीसीपी क़ानून को अपने जिले में लागू करवा सकते है। और मुख्यमंत्री चाहे तो इसे अपने राज्य में लागू कर सकते है.
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टीसीपी क़ानून किस तरह काम करेगा यह जानने के लिए पूरा ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3228983700553177>;
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(2) मृत्यु पंजिका को सार्वजानिक करना
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(2.1) अन्य वर्षो की तुलना में वर्ष 2021 में 70% यानि 65 लाख अधिक मौतें हुयी है !!
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(2.2) यदि भारत सरकार पिछले वर्ष मरने वाले लोगो की मृत्यु पंजिका (Death Registry) सार्वजनिक कर दें तो सरकारी आंकड़ो को आधार बनाकर यह जाना जा सकता है कि अतिरिक्त मौतों की वजह क्या थी - सरकारी अमृत या वायरस
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मृत्यु पंजिका में निम्नलिखित आंकड़े शामिल होंगे :
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(a) मृतक का नाम, उम्र, पता, एवं मतदाता पहचान संख्या
(b) मृतक ने क्रमश: सरकारी अमृत का पहला एवं दूसरा घूँट कब पिया था
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(2.3) यदि आप मृत्यु पंजिका को सार्वजानिक कराने का समर्थन करते है तो कृपया पीएम को इसके लिए खुला निर्देश पत्र भेजें एवं पीएम को ट्विट करें।
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(3) कृपया मोरिशस ट्रीटी को रद्द करने का समर्थन करें।
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(3.1) उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा की गयी मोरीशश ट्रीटी के कारण
मोरिशस, फिजी, सिंगापुर आदि टेक्स हेवन देशो के माध्यम से निवेश करने वाली विदेशी कम्पनियों को भारत में आयकर नहीं चुकाने होते है।
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(3.2) अत: आपसे अपील है कि विदेशियों को अतिरिक्त मुनाफा देने वाली इस ट्रीटी को समाप्त करने के लिए कृपया पीएम को एक खुला निर्देश पत्र भेजे।
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(4) कृपया फार्मा एवं चिकित्सा क्षेत्र में विदेशी निवेश (FDI) को रोकने के प्रस्तावित क़ानून प्रक्रिया का समर्थन करें।
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(4.1) मीडिया के प्रायोजको (अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रांसिस हथियार निर्माता) का नियंत्रण भारत पर लगातार बढ़ रहा है। और उनके बढ़ते हुए नियंत्रण की मूल वजह है संवेदनशील क्षेत्रो में विदेशी निवेश की अनुमति, यानि FDI !!
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(4.2) FDI पर रोक लगाने के लिए मैंने वोइक नामक क़ानून प्रस्तावित किया है। मेरे द्वारा प्रस्तावित क़ानून WOIC का ड्राफ्ट यहाँ देखें --- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3088232837961598>;
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प्रस्तावित वोइक क़ानून भारत के संवेदनशील क्षेत्रो जैसे मीडिया, खनन, बेंकिंग, उर्जा, रेल, संचार, रक्षा आदि में विदेशी निवेश पर पूर्णतया रोक लगाता है।
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(4.3) आपसे अपील है कि विदेशियों के बढ़ते नियंत्रण को कम करने के लिए प्रस्तावित वोइक क़ानून का समर्थन करें एवं इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करने के लिए पीएम / सीएम को खुला निर्देश पत्र भेजें।
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(5) कृपया Vvpat के अंधे मिरर कांच को पुन: पारदर्शी कांच में बदले जाने का समर्थन करें
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(5.1) विदेशी ताकतें हम पर बाध्यकारी टीकाकरण इसीलिए थोप पा रही है क्योंकि Evm ने उन्हें हमारे नेताओं पर फौलादी पकड़ दे दी है। चुनाव आयोग ने जून 2017 में Vvpat के पारदर्शी रंगहीन कांच को गहरे काले रंग के फ्रंट साइड मिरर में इसीलिए बदल दिया था ताकि Vvpat पर्चियों में भी वोटो की हेराफेरी की जा सके।
.
(5.2) अब अंधे कांच के कारण जब तक Vvpat के अंदर की लाईट नहीं जलती तब तक तक मतदाता या पीठासीन अधिकारी या कलेक्टर को कागज की पर्ची दिखाई नहीं देती है।
.
और इसलिए जब वोटिंग के 7 दिन पहले चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की डिटेल की प्रोग्राम फाइल Evm में इंस्टाल की जाती है तो प्रोग्राम में यह निर्देश (Code) जोड़ा जा सकता है कि अमुक प्रोग्राम अन्य उम्मीदवारों को मिले वोट कम करके ये वोट किसी निर्दिष्ट नंबर के उम्मीदवार के खाते में भेज सकता है, और इस हेराफेरी को Vvpat की पर्चियों के मिलान द्वारा भी पकड़ा नहीं जा सकता !!

(5.3) 4 मिनट के इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे वीवीपैट प्रोग्राम Vvpat की पर्चियों में की गयी हेराफेरी को छुपा सकता है ---<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/4633839493400917>;
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(5.4) आपसे अपील है कि Vvpat के अंधे काले मिरर को पुन: पारदर्शी कांच से प्रतिस्थपित करने के लिए पीएम को खुला निर्देश पत्र भेजें।
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अपेक्षा है कि आप उपरोक्त मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए अपेक्षित कदम उठाएंगे।
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धन्यवाद
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नोट : उपरोक्त कानूनों का समर्थन करना राईट टू रिकॉल पार्टी का समर्थन करना नहीं है। ये प्रस्तावित क़ानून स्वतंत्र दस्तावेज है, और किसी भी विचारधारा का कोई भी व्यक्ति किसी अन्य राजनैतिक पार्टी में रहते हुए भी इन कानूनों का मुक्त रूप से समर्थन, मांग एवं प्रचार कर सकता है।
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Pawan Jury BhilwaraRj:

यह मेरी सबसे महत्वपूर्ण पोस्ट है - कृपया इसे ध्यान से पढ़ें। [ EVM & FDI ]
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(1) कृपया (Evm वीडियो + कुछ पंक्तियां) एक फेसबुक पोस्ट करें, जो आपको लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। और उस पोस्ट को अपने PROFILE पर PINNED पोस्ट के रूप में पिन करें।
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(2) पोस्ट के अंत में 2-3 लाइनें हो सकती हैं जैसे "अन्य महत्वपूर्ण पोस्ट देखें --- (लिंक आदि)
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(3) मैंने सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दे के रूप में Evm Black Glass का वीडियो डाला है, क्योंकि मेरे विचार में #EvmHatao और #EvmBlackGlassHatao भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।
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विदेशी ताकतें हम पर बाध्यकारी टीकाकरण इसीलिए थोप पा रही है क्योंकि Evm एवं FDI ने उन्हें हमारे नेताओं पर फौलादी पकड़ दे दी है। तो आप तय करें कि आपकी राय में कौन सा मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। और कृपया अमुक मुद्दे के पोस्ट को अपनी प्रोफाइल पर पिन करें।
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यह वीडियो बताता है कि - चुनाव आयोग ने जून 2017 में Vvpat के पारदर्शी रंगहीन कांच को गहरे काले रंग के फ्रंट साइड मिरर में इसीलिए बदल दिया था ताकि Vvpat पर्चियों में भी वोटो की हेराफेरी की जा सके।
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अब अंधे कांच के कारण जब तक Vvpat के अंदर की लाईट नहीं जलती तब तक तक मतदाता या पीठासीन अधिकारी या कलेक्टर को कागज की पर्ची दिखाई नहीं देती है।
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और इसलिए जब वोटिंग के 7 दिन पहले चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की डिटेल की प्रोग्राम फाइल Evm में इंस्टाल की जाती है तो प्रोग्राम में यह निर्देश (Code) जोड़ा जा सकता है कि अमुक प्रोग्राम अन्य उम्मीदवारों को मिले वोट कम करके ये वोट किसी निर्दिष्ट नंबर के उम्मीदवार के खाते में भेज सकता है, और इस हेराफेरी को Vvpat की पर्चियों के मिलान द्वारा भी पकड़ा नहीं जा सकता !!
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4 मिनट के इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे वीवीपैट प्रोग्राम Vvpat की पर्चियों में की गयी हेराफेरी को छुपा सकता है !!!
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मेरा दूसरा महत्त्वपूर्ण मुद्दा FDI है। FDI पर रोक लगाने के लिए मेरे द्वारा प्रस्तावित क़ानून WOIC का ड्राफ्ट यहाँ देखें --- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3088232837961598>;
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प्रस्तावित वोइक क़ानून भारत के संवेदनशील क्षेत्रो जैसे मीडिया, खनन, बेंकिंग, उर्जा, रेल, संचार, रक्षा आदि में विदेशी निवेश पर पूर्णतया रोक लगाता है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jan 14 2022 20:39:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Kushagra Yadav Salonup:

क्यों अमेरिका का संविधान नागरिकों को बंदूकें रखने का "अधिकार" देता है, जबकि भारतीय संविधान इसका उल्लेख भी नहीं करता है?
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संविधान, संवैधानिक अधिकार, और मौलिक अधिकार जैसे शब्द अमीर वर्ग (elite class) द्वारा लोगों से बंदूकें छीनने के लिए बनाई गई बकवास कल्पनाएं हैं, ताकि जनता को मूर्ख बनाने के लिए यह विश्वास दिलाया जा सके कि "देखो, आपको हमारी बंदूकों से बचने के लिए बंदूकों की आवश्यकता नहीं है — यह पुस्तक जिसे 'संविधान' कहा जाता है, और 'मौलिक अधिकार' कहे जाने वाले ये शब्द हमारी बंदूकों-तोपों से आपकी रक्षा करेंगे"!!!
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अमीर वर्ग के लोगों के पास बंदूकें हैं, और उनके पास आम लोगों पर किसी भी "कानून" को थोपने के लिए डंडो-बंदूकों का उपयोग करने के वाले लिए वेतनधारी पुलिसकर्मी हैं। और वे आपको विश्वास दिलाना चाहते हैं कि जनता, बिना बंदूक के, कुछ जादू मंत्र, या पवित्र शब्दों का उपयोग करते हुए, जैसे "आबरा-का-डाबरा" या "खुल-जा-सिम-सिम", अमीर वर्ग के बंदूकों-हथियारों से अपनी रक्षा कर सकती है !!!
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अमीरों और उनके मंत्रियों/आईएएस/न्यायाधीशों ने न केवल पुलिसकर्मियों को बंदूकें दी हैं, बल्कि वेतन, पेंशन और कानूनी लाभ भी दिए हैं, और साथ ही जनता को लूटने का (अवैध) मौका भी दिया है !!!
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और इन अमीरों और उनके वेतनभोगी बुद्धिजीवियों के अनुसार, इन कुलीनों, और उनके मंत्रियों/आईएएस/न्यायाधीशों की सनक से खुद को बचाने के लिए आम लोगों को किसी बंदूक या किसी तलवार या यहां तक ​​​​कि नेलकटर की भी जरूरत नहीं है। आम लोग "मौलिक अधिकार", "अनुच्छेद 13", "अनुच्छेद 14", "अनुच्छेद 20" आदि जैसे जादुई शब्द बोल सकते हैं, और अत्याचार और लूट से बचने के लिए अगले जन्म का इंतजार कर सकते हैं !!!
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अगर भारत के नागरिको को खुद को सरकार के दमन से बचाना है और आने वाले संभावित अमेरिका-चीन के युद्ध से बचना है तो जूरी कोर्ट, वोट वापसी, धन वापसी आदि कानूनों के साथ साथ हर-हाथ-हथियार कानून को भी लागू कराना होगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jan 15 2022 20:17:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सूचना : राईट टू रिकॉल पार्टी का राष्ट्रिय घोषणा पत्र अब अमेजन, फ्लिपकार्ट एवं नोशन प्रेस पर पेपर बेक संस्करण में उपलब्ध है :
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पुस्तक का नाम - "वोट वापसी धन वापसी"
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भाग - 1 ; 192 पृष्ठ , भाग - 2 ; 200 पृष्ठ
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(1) Notion press store :
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Discount coupon code : RECALLIST
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वोट वापसी धन वापसी भाग -1
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<https://notionpress.com/read/vote-vapsi-dhan-vapasi-part-1>;
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वोट वापसी धन वापसी भाग - 2
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<https://notionpress.com/read/vote-vapasi-dhan-vapasi-part-2>;
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(2) अमेजन :
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भाग -1 : <https://www.amazon.in/dp/B09NM3L3MG/ref=cm_sw_r_apan_glt_i_XGRT0J3BJ68G2XJTVWD0?fbclid=IwAR3I-AoOMea5Ox891B4UMOUuDvnkcCZfA91LJeoVJS_2CMfOw_HTWu4GpF8>;
.
भाग - 2 : <https://www.amazon.in/dp/B09NM6MK6J/ref=cm_sw_r_apan_glt_i_7XC3G3J5BJCGS472Z1FX?fbclid=IwAR1WwF5er71QB7X1BGSIKiO6aP_u2j3UtbdqHwC_81XNN_5XTiGNVc2fxDs>;
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फ्लिपकार्ट :
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भाग 1 : <https://dl.flipkart.com/s/WKEjIiNNNN>;
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भाग 2 : <https://dl.flipkart.com/s/lMwrEpuuuN>;
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पीडीऍफ़ डाउनलोड - www.Rtr.Party/Manifesto
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jan 17 2022 19:28:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कृपया शशांक (जो खुद को "सखा" कहकर पुकारते है) द्वारा दी गयी गालियों की अवहेलना करें। उल्लेखनीय है कि शशांक ने राईट टू रिकॉल पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओ एवं पूरी राईट टू रिकॉल पार्टी के लिए अपशब्दों का प्रसारण किया है।
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कृपया उन्हें कोई प्रत्युत्तर न दें।
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कोई व्यक्ति किसी शालीन प्रश्न के एवज में गालियाँ कब देता है ?
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जब उसके पास सवाल का तार्किक जवाब न हो।
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शशांक का दावा है कि -- राईट टू रिकॉल पार्टी के अध्यक्ष ने उन्हें 2 वर्ष पहले क़ानून ड्राफ्ट्स भेजे थे। हालाँकी राईट टू रिकॉल पार्टी के अध्यक्ष ने किसी भी मायने में उनसे कभी कोई संपर्क नहीं किया है। यह बात समझ से परे है कि शशांक राईट टू रिकॉल पार्टी के अध्यक्ष के बारे में इस तरह की गलतबयानी क्यों कर रहे है।
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बहरहाल, एक तरफ शशांक के अनुयायी राईट टू रिकॉल पार्टी के विभिन्न कार्यकर्ताओ को बार बार 8 Pm क्रांति से जुड़ने का निमंत्रण भेजते है, और आग्रह करते है कि वे शशांक के शो में आकर उनसे कोई भी प्रश्न पूछ सकते है। और जब कोई कार्यकर्ता शालीन ढंग से कोई सवाल पूछता है तो शशांक उन्हें सवाल पूछने के एवज में स्त्रीअपमान सूचक गालियां देते है !!
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एक सामान्य तरीका यह है कि, यदि कोई व्यक्ति प्रश्न का जवाब नहीं देना चाहता तो वह सीधे शब्दों में कह सकता है कि - मैं इस प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता। किन्तु शालीन सवाल के एवज गालियां देना एक मर्यादित व्यवहार नहीं है। और सार्वजानिक जीवन में तो कतई नहीं।
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हम शशांक को एवं उसके अनुयायीयों को प्रत्युत्तर में कोई अपशब्द नहीं कहेंगे। न ही उन्हें कोई गाली देंगे। सार्वजनिक विषयों पर संवाद के दौरान गालियां देना उनकी संस्कृति हो सकती है। यह हमारी संस्कृति नहीं।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 18 2022 21:49:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पेड मीडिया के प्रायोजको के लिए किसी प्रभावशाली व्यक्ति का मूल्य है कि --- अमुक व्यक्ति कितने रोथ्सचाइल्ड+रोकेफेलर विरोधी कार्यकर्ताओ को पेड मीडिया पार्टियों जैसे आरएसएस, कोंग्रेस, आपा, सपा, बसपा आदि के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का प्रचार करने से रोक सकता है !!
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यू ट्यूब एवं फेसबुक उन सभी प्रभावशाली व्यक्तियों को प्रमोट करता है जो व्यक्ति पेड मीडिया पार्टियों को प्रमोट करते है, या फिर वे युवाओं को चुनावों में न उतरने का ज्ञान देते है। तो रोथ्सचाइल्ड+रोकेफेलर उन प्रभावशाली लोगो को बढ़ावा क्यों देते है जो लोगो को चुनावो से दूर रहने की नसीहत देते हैं?
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दरअसल, ये प्रभावशाली लोग अब रोथ्सचाइल्ड+रोकेफेलर विरोधी कार्यकर्ताओ को यह कन्विंस करने में असमर्थ हैं कि उन्हें आरएसएस, कांग्रेस, आपा, सपा, बसपा अकाली आदि पेड मीडिया पार्टियों को वोट देना चाहिए।
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अब यदि रोथ्सचाइल्ड विरोधी कार्यकर्ता चुनावों में आते हैं या रोथ्सचाइल्ड विरोधी पार्टियों के लिए प्रचार करते हैं, तो धीरे-धीरे भारत में एक रोथ्सचाइल्ड विरोधी “चुनावी विकल्प” सामने आ आएगा। चुनावी विकल्प !!
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और इसीलिए रोथ्सचाइल्ड+रोकेफेलर अपनी सोशल मीडिया कम्पनियों का इस्तेमाल करके उन लोगो को बढ़ावा दे रहे है जो अपने भाषण चातुर्य के माध्यम से कार्यकर्ताओ को चुनावी गतिविधियों से दूर रखने में अच्छा प्रदर्शन कर रहे है !!
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तो अगर कोई प्रभावशाली व्यक्ति, अपने 1000 अनुयायियों को घंटे भर की ज्ञान गंगा में नहलाने के बाद अंत में कहता है कि --
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(i) आने वाले जनवरी 2022 के पंजाब, यूपी, उत्तराखंड में चुनाव मत लड़ो,
(ii) और न ही उन छोटी पार्टियों / निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रचार करों जो पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे है,
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तो आपके दिमाग में संदेह के बादल तुरंत घुमड़ने चाहिए !!
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यहां तक कि राष्ट्रपिता महात्मा सुभाषचंद्र बोस ने भी कई चुनाव लड़े और वह भी अंग्रेजों के जमाने में !!
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जब तक देश में चुनाव लागू है और इनका निलम्बन नहीं हुआ है तब तक चुनाव लड़ना ही रोथ्सचाइल्ड द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों को हराने का एकमात्र तरीका है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 18 2022 22:15:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि आप बाध्यकारी टीकाकरण, बाध्यकारी लॉकडाउन के विरोधी है तो आपको सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि -- आगामी पंजाब, यूपी, उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में आप किस प्रत्याशी का प्रचार कर रहे है, और यदि आप अमुक राज्यों के मतदाता है तो आप किस प्रत्याशी को वोट करने वाले है !!
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और यही सवाल आपको उन नेताओं / बाबाओं को भी पूछना चाहिए जो सोशल मीडिया NWO का विरोध कर रहे है। उनसे पूछिए कि आगामी विधानसभा चुनावों में हम किस प्रत्याशी का प्रचार करें ?
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कृपया इस बात पर ध्यान दें कि वोट सबसे महत्वपूर्ण है। 1947 में जब देश आजाद हुआ तो गुलाम भारत एवं आजाद भारत में सिर्फ एक ही फर्क था - आपको वोट देने का अधिकार मिला था। अत: राजनैतिक रूप से वोटर होना ही आपकी ताकत है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 18 2022 22:40:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनावो की ताकत ; केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा -- टीकाकरण अनिवार्य नहीं है !!!
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और सरकार ने यह वक्तव्य देने में पूरा एक वर्ष क्यों लिया ?
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लक्ष्य -
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(1) बाध्यकारी टीकाकरण का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओ को मामू बनाना, और उन्हें चुनाव प्रचार और चुनाव लड़ने से दूर रखना, ताकि रॉथ्सचाइल्ड की पार्टियों जैसे कांग्रेस, आरएसएस, आपा, सपा, बसपा, अकाली आदि को बाध्यकारी टीकाकरण विरोधी कार्यकर्ताओ के कम चुनावी प्रतिरोध का सामना करना पड़े ( मैं खुद भी बाध्यकारी टीकाकरण के खिलाफ हूँ)
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(2) कार्यकर्ताओ को मूर्ख बनाकर इस बात पर आश्वस्त रखना कि बाध्यकारी टीकाकरण जैसे राजनैतिक फैसलों को रोकने के लिए चुनावों में आने की जरूरत नहीं है, और इन्हें जनहित याचिकाओ जैसे टटून्दर से रोका जा सकता है। और आश्वस्त होने के बाद कार्यकर्ता पेड मीडिया पार्टियों को चुनौती देने के लिए राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम नहीं करेंगे !!
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(3) जनहित याचिकाओ का सर्कस चलाने वाले फेक ओपोजिशन को वास्तविक विपक्ष के रूप में स्थापित करना – इन लोगो ने जनहित याचिका लगाने, लोगो को जागरूक करने आदि के नाम पर लोगो का 2 साल तक टाइम पास किया, और इस तरह उन्होंने टीका विरोधी कार्यकर्ताओ को रोथ्सचाइल्ड पार्टियों के खिलाफ चुनाव न लड़ने और रोथ्सचाइल्ड पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे छोटे उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार न करने के लिए तैयार किया !!
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और एवज में पेड मीडिया के प्रायोजकों को अपने इस नियंत्रित विपक्ष की छवि टिकाए रखने के लिए उन्हें कुछ सकारात्मक क्रेडिट देनी थी।
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बहरहाल, अभी आप यूपी चुनाव निकल जाने दीजिए। और तब आप यह देख पायेंगे कि कैसे इन AIM, BRC, और ऐसे ही अन्य लोगो ने कैसे टीका विरोधी कार्यकर्ताओं भ्रमित करके पेड मीडिया के प्रायोजको को फायदा पहुँचाया है। AIM, BRC आदि ने टीका विरोधी कार्यकर्ताओ को चुनाव न लड़ने / और पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ताओ का प्रचार करने से रोककर टीका विरोधी कार्यकर्ताओ को गंभीर नुक्सान पहुँचाया है।
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( पुनश्च: AIM और BRC ही नहीं, बल्कि यहाँ दर्जनों नकली विपक्ष हैं, जो ईवीएम के अंधे कांच का समर्थन करते हैं, मॉरीशस संधि का समर्थन करते हैं, एफडीआई का समर्थन करते हैं, विदेशी सोशल मीडिया के निष्कासन का विरोध करते हैं, और कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने / प्रचार करने से दूर रहने के लिए प्रेरित करते है )
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jan 19 2022 21:28:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मथुरा विधानसभा : विभोर भारद्वाज जी ने राईट टू रिकॉल पार्टी की और से नामांकन दाखिल किया है. कृपया उन्हें समर्थन दें.
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फेसबुक प्रोफाइल - <https://www.facebook.com/vibhor.b.sharma>;
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उनके 2 पेज के पेम्पलेट का टेक्स्ट निचे दिया गया है :
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माननीय मतदाताओं, मैं विभोर भारद्वाज मथुरा विधानसभा के नागरिकों को वोट वापसी पासबुक जारी करवाने के लिए चुनाव लड़ रहा हूँ। पश्चिमी देशों में वोट वापसी क़ानून एवं जूरी सिस्टम होने की वजह से वहां जज-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार में कमी आयी और वे तकनीकी विकास में अन्य देशों से आगे निकल गए।
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मथुरा विधानसभा में जितने भी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, उन्होंने वोट वापसी कानून को अपने एजेंडे में शामिल करने से इंकार कर दिया है, अत: मैं इस क़ानून की जानकारी आप तक पहुँचाने के लिए चुनावी मैदान में हूँ। यदि आप वोट वापसी क़ानून लागू करवाना चाहते हैं तो कृपया इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए मेरा समर्थन करें।
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जिला जूरी कोर्ट कानून क्या है ?
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जिला जूरी कोर्ट 34 धाराओं का एक प्रस्तावित क़ानून है जिसे मुख्यमंत्री गेजेट में छाप देते हैं तो मथुरा जिले के प्रत्येक नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। जिला जूरी कोर्ट का प्रस्तावित क़ानून पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएँ - facebook.com/pawan.jury/posts/3173085952809619
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jan 19 2022 21:35:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

गाजियाबाद सदर विधानसभा : राकेश जी सूरी ने राईट टू रिकॉल पार्टी की और से नामांकन दाखिल किया है. कृपया उन्हें समर्थन दें.
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फेसबुक प्रोफाइल - <https://www.facebook.com/rakeshsuri.rtr>;
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उनके 2 पेज के पेम्पलेट का टेक्स्ट निचे दिया गया है :
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माननीय मतदाताओ, मैं गाजियाबाद सदर विधानसभा से राईट टू रिकॉल पार्टी का प्रत्याशी हूँ। मैं इस विधानसभा से एक मात्र उम्मीदवार हूँ जिसने वोट वापसी पासबुक को अपने एजेंडे में शामिल किया है। यदि आपको वोट वापसी पासबुक मिल जाती है, तो आप अपना वोट वापिस ले सकेंगे।
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तब यदि कोई नेता या अधिकारी अपना काम ठीक से काम नहीं कर रहा है तो आप उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को वह पद देने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे। इस तरह मैं एक अकेला उम्मीदवार हूँ जो वोट लेने के लिए नहीं, बल्कि मैं आपको वोट वापिस लेने का अधिकार दिलाने के लिए मैदान में है।
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राईट टू रिकॉल पार्टी का मुख्य एजेंडा संक्षेप में :
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(1) Evm हटाकर बैलेट पेपर वापस लाना। #EvmHatao
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(2) वोट वापसी मुख्यमंत्री का प्रस्तावित क़ानून गेजेट में छपवाना। इस क़ानून के आने बाद यदि मुख्यमंत्री जबरदस्ती टीकाकरण एवं जबरदस्ती लॉकडाउन जैसे गलत कानून लाते है, तो राज्य के मतदाता बहुमत का प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री को बदल सकेंगे। #VvpCm
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(3) सरकार द्वारा छापा गया 1963 का नोटिफिकेशन कर्नाटक के कूर्ग जिले के प्रत्येक नागरिक को बिना लाइसेंस बंदूक रखने का अधिकार देता है। इस नोटिफिकेशन में गाज़ियाबाद जिले का नाम छपवाना, ताकि हमारे जिले के नागरिक कानूनन बिना लाइसेंस बंदूक रख सके।
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(4) खनिजों की लूट रोकने के लिए सरकार प्रत्येक नागरिक को धनवापसी पासबुक देगी। धनवापसी पासबुक कानून के गेजेट में छपने से देश के सारे खनिज+स्पेक्ट्रम+सरकारी भूमि से आने वाली रॉयल्टी एवं किराया ‘135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता’ नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इस रूपये का 65% प्रत्येक माह सभी भारतीयों में बराबर बंटेगा, और 35% हिस्सा सेना पर खर्च होगा। #DhanVapsiPassbook
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(5) सरकारी अस्पतालों, सरकारी स्कूलों, थानों एवं अदालतों को सुधारने के लिए प्रस्तावित जूरी कोर्ट क़ानून गैजेट में छापना। #JuryCourt
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(6) WTO एग्रीमेंट को निष्प्रभावी बनाने, मोरिशस ट्रीटी रद्द करने, संवेदनशील क्षेत्रो जैसे मीडिया, फार्मा, बैंकिंग, हथियार आदि में विदेशी निवेश पर रोक लगाने एवं स्वदेशी इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित वोइक (WOIC) क़ानून गेजेट में छापना। #Woic
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(7) स्वदेशी कारखानों / दुकानदारों को बचाने के लिए GST हटाकर रिक्त भूमि कर लागू करना।
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जिला जूरी कोर्ट कानून क्या है ?
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जिला जूरी कोर्ट 34 धाराओं का एक प्रस्तावित क़ानून है जिसे मुख्यमंत्री गेजेट में छाप देते हैं तो मथुरा जिले के प्रत्येक नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। जिला जूरी कोर्ट का प्रस्तावित क़ानून पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएँ - facebook.com/pawan.jury/posts/3173085952809619
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jan 19 2022 21:59:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

गाजियाबाद एवं मथुरा के नागरिको के लिए जरुरी सूचना :
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यदि आप बाध्यकारी टीकाकरण एवं बाध्यकारी लॉकडाउन के खिलाफ है, और यदि आप फ़ोर्स वैक्सीनेशन एवं फ़ोर्स लॉकडाउन थोपने का समर्थन करने वाली पेड मीडिया पार्टियों (कोंग्रेस, आरएसएस, सपा, बसपा आपा आदि) को वोट नहीं करना चाहते है तो अब आपके पास राईट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देने का विकल्प मौजूद है।
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बाध्यकारी टीकाकरण एवं बाध्यकारी लॉकडाउन के विरोध में गाजियाबाद विधानसभा से राकेश जी सूरी एवं मथुरा से विभोर जी भारद्वाज चुनाव लड़ रहे है।
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कृपया इन्हें समर्थन दें।
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उल्लेखनीय है कि, राईट टू रिकॉल पार्टी एक मात्र राष्ट्रिय पार्टी है जिसने प्रारंभ से ही बाध्यकारी टीकाकरण एवं बाध्यकारी लॉकडाउन का विरोध किया था, और आज भी हम इसके विरोध में है।
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और इसीलिए राईट टू रिकॉल पार्टी ने अपने एजेंडे में वोट वापसी मुख्यमंत्री के क़ानून को शामिल किया है ताकि यदि मुख्यमंत्री इस तरह के अन्यायपूर्ण कानून छापता है तो राज्य के मतदाता वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे किसी भी समय बदल सके।
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अत: यूपी, पंजाब एवं उत्तराखंड के मतदाताओ से आग्रह है कि, राईट टू रिकॉल पार्टी के अन्य प्रत्याशियों का सर्मथन करें, एवं सोशल मीडिया पर उनका प्रचार करें।
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(1) राकेश जी सूरी का फेसबुक लिंक - <https://www.facebook.com/rakeshsuri.rtr>;
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(2) विभोर जी भारद्वाज का फेसबुक लिंक - <https://www.facebook.com/vibhor.b.sharma>;
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#JuryCourt , #VoteVapsi , #VoteVapsiPassbook

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jan 22 2022 08:54:40 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बाध्यकारी वैक्सीनेशन, लॉकडाउन आदि का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओ को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर सीधे शब्दों में यह स्पष्ट करना चाहिए कि -- वे यूपी, पंजाब, उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में किस पार्टी को वोट करने / और किस पार्टी को वोट न करने की सलाह देते है।
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इस बारे में मेरा स्टेण्ड निम्नवत है :
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(1) कृपया पेड मीडिया पार्टियों (आरएसएस, कांग्रेस, आपा, सपा, बसपा, अकाली आदि) को वोट न करें। इन पार्टियों के नेताओ एवं कार्यकर्ताओ ने पिछले 2 वर्षो से कोरोना के नाम पर थोपे गए सभी गलत कानूनों का समर्थन किया है।
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(2) कृपया ऐसी छोटी पार्टियों के उम्मीदवारो को वोट करें जो कम से कम पिछले 1 वर्ष से स्पष्ट रूप से लॉकडाउन एवं बाध्यकारी टीकाकरण के खिलाफ रही है, और उन्होंने लॉकडाउन एवं बाध्यकारी टीकाकरण खत्म करने के लिए पीएम / सीएम को खुला निर्देश दिया है।
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(3) कृपया ऐसे निर्दलीय उम्मीदवारों को वोट करें जो लॉकडाउन एवं बाध्यकारी टीकाकरण के खिलाफ है और उन्होंने पीएम / सीएम को खुला निर्देश दिया है।
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अतिरिक्त :
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कृपया राईट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवारों को वोट करें। राईट टू रिकॉल पार्टी प्रारम्भ से ही लॉकडाउन एवं बाध्यकारी टीकाकरण के खिलाफ रही है, और राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ता पिछले 2 वर्षो से लगातार पीएम / सीएम को इस बारे में खुला निर्देश भेज रहे है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jan 22 2022 10:13:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

1920 के पहले तक गोरों को सबसे बड़ा भय यह था कि -- भारत के युवा अंग्रेजो पर सशस्त्र हमले करने के लिए बम बनाने एवं बन्दुक जुटाने जैसी गतिविधियों की तरफ न मुड़ जाए। और उन्हें इस रास्ते पर जाने से रोकने का काम उन्होंने दुरात्मा गांधी को दे रखा था।
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लेकिन 1920 के बाद गोरो के सामने दूसरी समस्या खड़ी हो चुकी थी -- चुनावी राजनीति !!
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1919 से भारत में चुनाव शुरू होने के बाद गोरे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि भारत के कम से कम युवा चुनावी राजनीती में भाग ले।
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और युवाओ को चुनावी राजनीती से दूर रखने के लिए उन्होंने 1923 से 1925 के बीच कई गैर राजनैतिक समूहों की स्थापना करवाई जिनका मुख्य उद्देश्य "राजनैतिक विमर्श में रुचि रखने वाले युवाओ को चुनावी राजनीति से दूर रखना" था !!
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गोरो एवं देशी राजाओं द्वारा इंस्टाल किये गए इन कई गैर राजनैतिक संगठनों में से कुछ मुख्य निम्न थे :
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(1) आरएसएस ( संस्थापक : हेडगेवार)
(2) सेवा दल (संस्थापक : जवाहर लाल एवं कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेता)
(3) खुदाई खिदमतगार (संस्थापक : अब्दुल गफ्फार खान)
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ये संगठन सुबह से शाम तक युवाओं को यह चाबी देते थे कि उन्हें लोगो को जागरूक करना है, उनमें चेतना लानी है, लोगो को उद्वेलित करना है, क्रांति लानी है आदि आदि, किन्तु उनेह "चुनावी राजनीती" से दूरी बनाकर रखनी है।
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इस तरह इन संघठनो ने यह सुनिश्चित किया था कि सभी वोट गोरो द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों (कांग्रेस, मुस्लिम लीग आदि) को ही मिले, और राजनीती में रुचि रखने वाले कार्यकर्ता मतदाताओं को नया राजनैतिक विकल्प देने की दिशा में काम न कर सके।
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यह एक बड़ी वजह रही कि कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग 1947 तक सबसे बड़ी पार्टियां बनी रही, और प्रतिस्पर्धी पार्टियों के न होने के कारण गोरे अपनी इन पार्टियों को बिना किसी प्रतिरोध के आसानी सत्ता हस्तांतरित करके जा सके।
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क्या आप जानते है 1947 में आरएसएस के पास कितने सक्रीय सदस्य थे -- 8 लाख !!
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मतलब राजनीती में रुचि रखने वाले 8 लाख कार्यकर्ताओ को आरएसएस ने भोट कर दिया था। न तो इन कार्यकर्ताओ ने गोरो को बम / बन्दुक द्वारा खदेड़ने के लिए क्रांतिकारियों को जॉइन किया, और न ही गोरों द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों (कांग्रेस, मुस्लिम लीग) के खिलाफ नया राजनैतिक विकल्प बनाने की दिशा में काम किया !!
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इस तरह इन संगठनों ने युवाओ को "चुनावी राजनीती" से दूर रहने की चाबी देकर यह सुनिश्चित किया था कि सभी वोट पेड मीडिया पार्टियों (कांग्रेस, मुस्लिम लीग आदि) को मिले।
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BRC, AIM और इसी तरह के दर्जनों संगठन / नेता पिछले 2 वर्षो से NWO से लड़ने के नाम पर यही काम कर रहे है। वे "NWO को एक्सपोज करने, लोगो को जागरूक करने और क्रांति लाने" की टर्म का इस्तेमाल करके आपका टाइम पास कर रहे है, ताकि बाध्यकारी वैक्सीनेशन विरोधी कार्यकर्ता पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ नया "चुनावी विकल्प" खड़ा करने की दिशा में काम न कर सके।
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और इस तरह बाध्यकारी टीकाकरण एवं लॉकडाउन का विरोध करने वाले मतदाता भी फिर से पेड मीडिया पार्टियों (आरएसएस, कांग्रेस, आपा, सपा, बसपा, अकाली आदि) को ही वोट करने के लिए बाध्य होंगे, और इस तरह पेड मीडिया पार्टियों का दबदबा बना रहेगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jan 22 2022 14:11:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क्यों वैक्सीन सर्टिफिकेट नाम की बकवास यूएसए में लागू नहीं हुई, और यूके में जल्दी ही समाप्त हो गयी, और भारत में क्यों अभी भी यह सर्कस चल रहा है ?
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उत्तर : जनता का शस्त्रीकरण, राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं एवं जूरी सिस्टम
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ब्रिटेन में जूरी उन लोगों को दंडित करने से इनकार कर रही थी, जिन्होंने वैक्सीन कानूनों का उल्लंघन किया, और जूरी ने उन प्रदर्शनकारियों को दंडित करने से भी इनकार किया जो वैक्सीन वगेरह का विरोध कर रहे थे। और वजह से सरकार को पीछे हटना पड़ा।
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जब जूरी किसी क़ानून को गलत मानती है और अमुक गलत क़ानून के तहत बनाए गए आरोपी को सजा देने से इंकार कर देती है, तो जूरी के इस कदम को Jury Nullification कहा जाता है।
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तो जूरी सिस्टम की वजह से ब्रिटेन में जबरिया वैक्सीनेशन का अंत हो गया। और इसीलिए कांग्रेस, आरएसएस, आपा, अकाली, एसपी आदि भारत में जूरी सिस्टम लाने के प्रस्ताव का विरोध करते है। क्योंकि तब वे पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल करके डंडे से जोर से वैक्सीन नहीं दे सकेंगे।
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BRC, AIM और इसी तरह के अन्य संगठन / नेता भी जूरी सिस्टम के विरोध में इसीलिए है क्योंकि यदि भारत में बाध्यकारी टीकाकरण एवं लॉकडाउन आदि सपाप्त हो जाता है तो ये लोग "NWO को एक्सपोज करने एवं लोगो को जगाने" के नाम पर अपनी दुकान नहीं चला सकेंगे।
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और बाध्यकारी वैक्सीनेशन की बकवास अमेरिका में कभी शुरू भी नहीं हुई। क्योंकि अमेरिका में सैनिकों और पुलिसकर्मियों के पास 40+40 = 80 लाख के लगभग बंदूकें हैं, जबकि अमेरिकी नागरिकों के पास 40 करोड़ (50 गुना अधिक) बंदूके है। इसके अलावा, वहां के नागरिको के पास पुलिस प्रमुख और मुख्यमंत्री को बदलने के लिए राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं है। और राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं के अधीन होने के कारण मुख्यमंत्री एवं पुलिस प्रमुख जबरन टीकाकरण के लिए डंडे के इस्तेमाल की हिम्मत नहीं दिखा सके।
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यूके में वैक्सीन सर्टिफिकेट और बाध्यकारी टीकाकरण की बकवास कुछ महीनों तक इसीलिए चल पायी, क्योंकि यूके में पुलिस प्रमुख एवं पीएम पर राईट टू रिकॉल नहीं है, और एमपी पर राईट टू रिकॉल की बेहद कमजोर प्रक्रियाएं है। और साथ ही यूके के बहुत कम नागरिको के पास बंदूकें हैं
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तो भारत के लिए समाधान है ---
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(1) सभी के लिए बंदूक के स्वामित्व को अनिवार्य बनाने पर जनमत संग्रह
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(2) पुलिस प्रमुखों, सीएम, पीएम, एमपी, एमएलए को वोट वापसी के अधीन लाना
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(3) जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करना
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(4) सार्वजनिक रूप से नारको टेस्ट
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jan 23 2022 20:15:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनाव न लड़ने के सम्बन्ध में बतायी जाने वाली गलत एवं मनोवैज्ञानिक वजहें :
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(1) मेरे पास चुनाव लड़ने का समय नहीं है !!
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यह एक गलत वजह है। यदि नामांकन पत्र भरने की अवधि को शामिल न किया जाए तो व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम 3*3 = 6 घंटे की जरूरत होती है। इसमें मैंने नामांकन पत्र भरने में लगने वाले समय को शामिल नहीं किया है। क्योंकि किसी व्यक्ति को नामांकन पत्र भरने में 3 घंटे भी लग सकते है, और किसी को 10 घंटे। किन्तु यदि आपके हाथ में भरा हुआ नामांकन पत्र है तो फिर फॉर्म जमा करने से लेकर पूरा चुनाव लड़ने तक आपको सिर्फ 6 घंटे ही चाहिए।
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(1.1) 3 घंटे आपके उस दिन खर्च होते है जब आप कलेक्टर को फॉर्म सबमिट करने जाते हो।
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(1.2) 3 घंटे आपको तब चाहिए जब आपको वोटिंग के बाद खर्चे का रजिस्टर जमा करने जाना होता है।
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यदि आपके पास 2 किश्तों में 6 घंटे का टाइम है तो यह कहना एक गलत वजह है कि -- मेरे पास चुनाव लड़ने का टाइम नहीं है।
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जहाँ तक चुनाव प्रचार में लगाने वाले समय की बात है तो यदि आपके पास समय नहीं है तो आप प्रचार पर बिलकुल भी समय खर्च न करें। चुनाव प्रचार करने से अतिरिक्त फायदा है, किन्तु प्रचार न करने से कोई अतिरिक्त नुकसान नहीं होता।
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(2) मेरे पास चुनाव लड़ने का पैसा नहीं है !!
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यह भी गलत वजह है। विधायक का चुनाव लड़ने के लिए कुल 12,000 रूपये की जरूरत होती है।
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(2.1) 10,000 रू नामांकन पत्र के साथ जमानत राशि के रूप में कलेक्टर कार्यालय में जमा करानी होती है।
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(2.2) 2,000 रू नोटेरी, जेरोक्स आदि जैसे स्टेशनरी खर्चे एवं 2 बार कलेक्ट्री जाने का पेट्रोल खर्च आदि ।
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यदि आपके पास 12,000 रू है तो चुनाव लड़ने के लिए यह काफी है। हाँ, आपको चुनाव जीतना है तो फिर 12 करोड़ भी कम पड़ेगा। पर हम यहाँ चुनाव लड़ने की बात कर रहे है, चुनाव जीतने की नहीं। और जहाँ तक चुनाव लड़ने की बात है तो आप 12 हजार में बहुत आसानी से चुनाव लड़ सकते है।
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और यदि आप अच्छे मुद्दों पर चुनाव लड़ते है तो 10 -12 हजार का आर्थिक सहयोग तो आपको मिल ही जाता है। उदाहरण के लिए वोट वापसी एवं जूरी कोर्ट के मुद्दों पर जो भी प्रत्याशी चुनाव लड़ते है उन्हें जमानत राशि के बराबर आर्थिक सहयोग तो हमेशा ही मिल जाता है।
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तो यदि आपके पास 12,000 रू है तो चुनाव न लड़ने की यह एक गलत वजह है कि – मेरे पास पैसा नहीं है। और यदि आप वोट वापसी जैसे जनहित के मुद्दे पर चुनाव लड़ते है तो 12 हजार न होना भी समस्या नहीं है।
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(3) मैं अकेला हूँ । चुनाव लड़ने के लिए मेरे पास टीम नहीं है !!
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चुनाव लड़ने के लिए किसी टीम की जरूरत नहीं होती। आदमी अकेला ही चुनाव लड़ सकता है। उसे अकेले नामांकन फॉर्म लेकर कलेक्टर कार्यालय जाना है और फॉर्म जमा करके आ जाना है। हाँ, सहयोग के लिए आपके साथ यदि एक व्यक्ति को साथ ले जा सको तो थोड़ी आसानी रहेगी । किन्तु यदि आप के साथ कोई भी नहीं है तब भी आप अकेले चुनाव लड़ सकते है।
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आपको बस फॉर्म जमा कराना है। फॉर्म भरने के बाद आप कुछ भी न करो तब भी कलेक्टर आपको चुनाव लड़ाने का काम करता रहेगा। वह आपका नाम सभी Evm मशीनों पर लगाएगा और सभी बूथों पर मशीने पहुंचाएगा। हाँ, यदि आपके पास वक्त है तो आप अपने संसाधनों के अनुरूप चुनाव प्रचार कर सकते है। पर यह एच्छिक है, अनिवार्य नहीं।
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तो पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान आपको किसी व्यक्ति की जरूरत नहीं होती। अत: चुनाव लड़ने की यह एक गलत वजह है कि – मेरे पास टीम नहीं है।
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(4) मेरी जमानत जब्त हो जायेगी !!
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जमानत जब्त नहीं होती है, जमानत राशि जब्त होती है। और हम तो यह पहले से ही मानकर चल रहे है कि, हमारी जमानत राशि जब्त होने वाली है। इसीलिए हमनें जमानत राशि को खर्चे की मद में जोड़ दिया है। जमानत राशि बचाने के लिए 25 लाख रू का बजट चाहिए। 10 हजार की जमानत राशि बचाने के लिए 25 लाख रू प्रचार पर खर्च करने की कोई तुक नहीं। अत: छोटे स्तर पर चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को जमानत राशी बचाने पर विचार नहीं करना चाहिए।
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अत: जमानत राशि न बचने का हवाला देकर चुनाव न लड़ना एक गलत वजह है।
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(5) मुझे वोट कम आयेंगे तो लोग मेरा मजाक उड़ायेंगे !!
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यह एक गलत मनोवैज्ञानिक वजह है। यथार्थ स्थिति यह है कि जब आप अत्यंत सीमित बजट में, छोटी पार्टी या स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में, सीमित संसाधनों में चुनाव लड़ते है तो आपको कम वोट ही आते है। आपने कम संसाधन खर्च किये इसलिए आपको कम वोट मिले। संसाधनों के अनुपात में वोट आना स्वाभाविक है। यह अक्षमता का पर्याय नहीं।
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जहाँ तक लोगो के मजाक उड़ाने की बात है तो यह आपके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि आप “लोग क्या कहेंगे” को कितना महत्त्व देते है। मैं मनोविज्ञान का विशेषग्य नहीं, इसलिए इस मनोवैज्ञानिक समस्या का कोई समाधान भी नहीं कर सकता। मेरे मानना है कि, इस तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याएं जिनमें कोई तत्व न हो, विचार से शुरू होती है, और जैसे जैसे आदमी इन पर विचार करता जाता है, ये समस्या व्यक्ति पर अपनी पकड़ मजबूत बनाती जाती है। अत: तत्व रहित ऐसी मनोवैज्ञानिक समस्याओं पर विचार ही नहीं किया जाना चाहिए।
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[ दरअसल, यह गलत मनोवैज्ञानिक समस्या ही सबसे बड़ी बाधा है जो व्यक्ति को चुनाव लड़ने से रोकती है। वह “लोग क्या कहेंगे” के फोबिया से उबर नहीं पाता। उसे लगता है कि, कम वोट आने पर उसका मजाक बनाया जाएगा, और उसकी प्रतिष्ठा गिर जायेगी। और इसी चक्कर में वह चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाता]
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(6) यदि मैं चुनाव लडूंगा तो अन्य पार्टी वाले मेरे दुश्मन हो जायेंगे !!
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कुछ हद तक यह एक वाजिब समस्या हो सकती है। लेकिन ज्यादातर से भी ज्यादातर मामलो में यह अतिशियोक्ति पूर्ण होती है, और इस वजह से यह भी एक गलत वजह है।
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(6.1) मान लीजिये आप किसी X नामक ब्रांडेड पार्टी के बागी उम्मीदवार है, और आपकी सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक हैसियत इतनी अधिक है कि आप लगभग 10 से 15 हजार वोट लाने वाले है। अब मान लिजिये कि अमुक विधानसभा क्षेत्र से X पार्टी की और से मिस्टर A चुनाव लड़ रहा है। इस स्थिति में इस बात की पूरी सम्भावना है कि A आपके पीछे आएगा, और A आपको बिठाने का प्रयत्न करेगा। क्योंकि A का यह सोचन सही है कि यदि आप 15 हजार वोट ले जाते है तो इसमें से निश्चित ही 12 हजार वे वोट है, जो उसे मिलने वाले थे।
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(6.2) मान लीजिये कि आप किसी जाति विशेष के उम्मीदवार है, और सामाजिक-जातीय गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के कारण आपकी हैसियत इतनी बढ़ी हुई है कि आप अमुक जाति के 10 से 15 हजार वोट लाने वाले है। और मान लीजिये कि मिस्टर B भी आपकी ही जाति का उम्मीदवार है, और वह किसी ब्रांडेड पार्टी के टिकेट पर चुनाव लड़ रहा है। इस स्थिति में मिस्टर B आपके पीछे आएगा। क्योंकि उसका यह सही मानना है कि, यदि आप चुनाव नहीं लड़ते है तो अमुक जाति के 10 हजार में से 8 हजार वोट मिस्टर B को मिल जायेंगे।
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यदि आप ऊपर दी गयी स्थिति में से किसी एक या ऐसी ही किसी विशेष स्थिति में फिट हो रहे है तो आपका ऐतराज जायज है। किन्तु इसका समाधान भी सरल है। सीधा रास्ता यह है कि – यदि आपको ऐसी स्थिति का सामना कारण पड़ता है तो जैसे ही आपका फॉर्म स्वीकृत होगा वैसे ही मिस्टर A या मिस्टर B आपके पास आ जायेंगे और आपको पर्चा वापिस लेने को कहेंगे। और तब आप यह फैसला कर सकते है कि आपको फॉर्म उठाना चाहिए या नहीं। दुसरे शब्दों में, यदि आप ऐसी परिस्थिति में पड़ जाते है तो आपके पास इससे बाहर आने का पर्याप्त समय एवं अवसर होता है।
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असल में सिर्फ चुनाव लड़ने से कोई आपका दुश्मन नहीं हो जाता। आपके चुनाव लड़ने से इस तरह का समीकरण बैठना चाहिए कि किसी ब्रांडेड पार्टी के प्रत्याशी को साफ़ तौर पर सीधे नुकसान हो रहा हो, और यह नुकसान निर्णायक भी हो।
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किन्तु यदि आपकी सामाजिक हैसियत इतनी नहीं है कि आप 10 -15 हजार वोट लाने वाले है, तो आपका यह बिंदु सिरे से ही ख़ारिज हो जाता है कि, आपके चुनाव लड़ने से अन्य पार्टी वाले आपके दुश्मन हो जायेंगे। और इस बात को नोट करे कि विधानसभा चुनाव में 15 हजार वोट आप तब ही ला पाते है जब चुनाव लड़ने से पहले ही आधा शहर आपको जानता हो या आपके पास 20-30 लाख का बजट हो, या आपको सक्रीय सार्वजनिक जीवन में एक दशक से अधिक हो गया हो।
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किन्तु यदि आप सीमित संसाधनों में चुनाव लड़ रहे है तो आपको 1000-2000 वोट से ज्यादा मिलते नहीं है। और ऐसी स्थिति में कोई आपसे दुश्मनी लेने नहीं आता। क्योंकि आपके चुनाव लड़ने से किसी प्रत्याशी को प्रत्यक्ष नुकसान नहीं होता।
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ये ऊपर मैंने चुनाव न लड़ने की कुछ गलत वजहें बतायी है। यदि आप इन गलत वजहों की वजह से चुनाव लड़ने की अवहेलना कर कर रहे है तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप चुनाव लड़ें। क्योंकि उपरोक्त सभी वजहें गलत है, और आप इन्हें बढ़ा चढ़ा कर आँक रहे है।
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(7) तो यदि आप चुनाव लड़ने का फैसला करते है तो इसके बाद कुछ अन्य सही-गलत-मनोवैज्ञानिक वजहों का नम्बर आता है। ये वजहे है – पारिवारिक सदस्य, मित्रगण, पड़ौसी, रिश्तेदार !!
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(7.1) पारिवारिक सदस्य : यह लगभग तय है कि यदि आप चुनाव लड़ते है तो आपको पारिवारिक सदस्यों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन्हें इस बारे में कैसे समझा सकते है। इस बारे में परिस्थिति के अनुरूप आपको ही फैसला करना होगा। क्योंकि कोई व्यक्ति किस तरह के और किस स्तर के पारिवारिक प्रतिरोध का सामना कर रहा है, इसका अनुमान अन्य व्यक्ति द्वारा नहीं लगाया जा सकता।
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(7.2) मित्रगण, पड़ौसी, रिश्तेदार : मेरे विचार में आपको इन लोगो से चुनाव लड़ने या न लड़ने के बारे में कभी मशविरा करना ही नहीं चाहिए। और फिर भी यदि आप इनसे इस बारे में बात करते है तो यह मानकर ही चले कि ये सभी आपको चुनाव न लड़ने की सलाह ही देने वाले है।
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यदि आप चुनाव में खड़े हो जाते है तो इनमें से ज्यादातर लोग आपके चुनाव लड़ने के फैसले समर्थन करेंगे। किन्तु यदि आपने फॉर्म भरने से पहले मशविरा किया तो ये लोग इनकार ही करने वाले है। अत: मेरे विचार में फॉर्म भरने से पहले अपने मित्रो, पडौसियों, रिश्तेदारों से आपको इस बारे में पूछना नहीं चाहिए। उन्हें सिर्फ सूचित कारण चाहिए कि, आप चुनाव लड़ने वाले है।
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यदि ऊपर दी गयी वजहों में कुछ वजहें अब भी rah गयी हो जो आपको चुनाव लड़ने से रोक रही है, तो कमेन्ट में लिखे। मैं उसका निराकरण भी इसमें शामिल करूँगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jan 23 2022 21:36:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रेम Vs विवाह ; राजनीति Vs चुनावी राजनीति
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सभी प्रेम कहानियों के साहित्यों में एक गलत बात को बार बार दोहराया गया है कि -- जमाना प्यार का दुश्मन है !!
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यह बात ठीक नहीं है कि - ज़माना प्रेम का दुश्मन है। जमाने (जिसमें परिवार, समाज आदि शामिल है) को किसी भी व्यक्ति के प्रेम से कोई सख्त ऐतराज नहीं रहा है। जमाने को असली ऐतराज विवाह से होता है।
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और जब जमाना किसी के प्रेम पर ऐतराज कर भी रहा होता है तो उसका यह ऐतराज इस वजह से होता है कि कहीं प्रेमी युगल प्रेम करते करते विवाह न कर बैठे !!
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सलीम और मुगले आजम में इसीलिए ठन गयी थी कि सलीम अनारकली से निकाह करने पर अड़ गया था। यदि सलीम सिर्फ प्रेम तक सीमित रहता तो अकबर को कोई दिक्कत न थी। चाहे सलीम रोज नई अनारकली से प्रेम करें।
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और सभी लैला-मजनूओं की दास्तानों का सार यही है। जब तक बात प्रेम तक सीमित है, तब तक जमाना अनदेखी करता है। पर जैसे ही जमाने को विवाह का अंदेशा होता, जमाना बीच में कूद जाता है।
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यदि ज़माने को यह मुतमइन कर दिया जाए कि अमुक व्यक्ति सिर्फ प्रेम ही करेगा, और अपने प्रेमी से विवाह नहीं करेगा तो जमाना उसके प्रेम में बाधा नहीं बनता। उसे वह प्रेम करने की छूट दे देता है।
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क्योंकि जमाना आपको अपनी सम्पत्ति के रूप में देखता है, और प्रेम से जमाने कोई साम्पत्तिक हानि नहीं होती। ज़माना चाहता है कि आप प्रेम किसी से भी करो और कितनो से भी करो, और करते रहो, किन्तु विवाह सिर्फ वहां करो जहाँ जमाना चाहता है। क्योंकि यदि आप जमाने के खिलाफ जाकर विवाह कर लेते है तो जमाने को लगता है कि उसने नियंत्रण खो दिया है।
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यही शर्त "राजनीति एवं चुनावी राजनीति" पर लागू होती है।
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राजनीति में रुचि लेना, राजनैतिक विमर्श करना, जुलुस, प्रदर्शन, आन्दोलनो में हिस्सा लेना, सोशल मीडिया पर सरकार एवं राजनैतिक पार्टियों को कोसना आदि को जमाना (पेड मीडिया के प्रायोजक) निरापद प्रेम के रूप में देखता है। और जमाने को आपकी इस प्रेमल राजनैतिक रुचि से कोई ऐतराज नहीं।
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जमाना सिर्फ इतना चाहता है कि -- जब चुनाव आये तो आप उनके द्वारा खड़ी की गयी पेड मीडिया पार्टियों (आरएसएस, कोंग्रेस, सपा, आपा, बसपा, अकाली आदि) को वोट देकर आ जाओ। बस !!
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और वोट देने के बाद अगले 5 साल तक आप फिर से अपने अपने राजनैतिक प्रेम में खुद को व्यस्त कर सकते है। और ज़माना आपको कभी डिस्टर्ब करने नहीं आएगा।
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जमाना (पेड मीडिया के प्रायोजक) सिर्फ इतना चाहता है कि आप जमाने द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों के वोट काटने के लिए कोई नया राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम न करें।
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यदि आपको नया राजनैतिक विकल्प चाहिए तो जमाना आपको नया राजनैतिक विकल्प (नवीनतम उदाहरण "आपा") बनाकर दे देगा। किन्तु कार्यकर्ता खुद से कोई राजनैतिक विकल्प खड़ा करने पर काम करे तो जमाने को ऐतराज है।
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क्योंकि यदि मतदाताओं को पेड मीडिया पार्टियों के एजेंडे के खिलाफ काम करने वाला राजनैतिक विकल्प मिल जाता है तो जमाने द्वारा खड़ी पेड मीडिया पार्टियों को वोटो की हानि होगी। और वोट ही राजनैतिक जगत की वास्तविक सम्पत्ति है।
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इस वजह से पेड मीडिया युवाओं को "चुनावी राजनीती" में आने से हतोत्साहित करता है।
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राजनीती में रुचि लेने वाले ज्यादा से ज्यादा युवा यदि "चुनावी राजनीति" में आने लगेंगे तो चुनाव लड़ने वाले लोगो की संख्या बढ़ जाएगी। तब राजनीति से चुनावी राजनीति में शिफ्ट हुए ये कार्यकर्ता पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ नया राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम करने लगेंगे।
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और युवाओं को चुनावी राजनीती में आने रोकने के लिए उन्होंने कितने कानूनी, सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक लेंड माइन्स बिछा कर रखे है, इसे मैं लिखने जाऊँगा तो 1000 पृष्ठों में भी इसे समेटा नहीं जा सकता।
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सार यह है कि -- कार्यकर्ताओ को "राजनीती एवं चुनावी राजनीति" के बीच के फर्क को समझना चाहिए। वे आपको राजनीति में रुचि लेने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करेंगे किन्तु चुनावी राजनीति में रुचि लेने से हतोत्साहित !!
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और इस बात को अच्छे से नोट कर लें कि, जब भी कोई देश, समाज, राजनीति आदि की बात करने वाला कोई व्यक्ति या समूह इस मंशा से आपके पास आएगा कि आप राजनीती में रुचि ले किन्तु "चुनावी राजनीति" से दूरी बनाकर रखे तो वह हमेशा "जागरूक करने" की टर्म का इस्तेमाल करेगा !!
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दरअसल, जब कोई व्यक्ति यह कहता है कि - मैं लोगो को जागरूक कर रहा हूँ तो उसका उद्देश्य राजनीती में रुचि रखने वाले कार्यकर्ताओ को चुनावी राजनीति में आने से रोकना होता है।
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और राजनीती में रुचि रखने वाले लोगो को चुनावी राजनीती में आने से रोकने की प्रक्रिया को कुछ भी कह कर नहीं पुकारा जा सकता। इसीलिए इसे वह "जागरूक करने की प्रक्रिया" कह कर पुकारता है।
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जिस प्रेम को विवाह से इनकार है वह क्या है ?
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मुहब्बत जो डरती है -- अय्याशी है, गुनाह है : सलीम उवाच, मुगले आजम
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सलीम अनारकली से मुहब्बत को मुगले आजम से छिपाने से इनकार कर देता है। क्योंकि सलीम अनारकली से शादी करना चाहता था। और इसीलिए वह जानता था कि वह कोई गुनाह नहीं कर रहा। विवाह गुनाह नहीं है। किन्तु वे सभी अपने प्रेम को गुनाह की तरह इसीलिए छिपाते है क्योंकि विवाह को लेकर उनमें संशय होता है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jan 24 2022 22:12:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

White Collar Mafia ;
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एक यू ट्यूब-फेसबुक सेलिब्रिटी किस प्रश्न पर “खामोश” रहकर यह सुनिश्चित करता है कि --
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(a) कार्यकर्ता नया चुनावी राजनैतिक विकल्प खड़ा करने के लिए काम न करें, और
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(b) विकल्प के अभाव में मतदाता फिर से पेड मीडिया पार्टियों (आरएसएस, कोंग्रेस, आपा, सपा, बसपा, अकाली आदि) को ही वोट करें।
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(1) मान लीजिये कि X एक यू ट्यूबर है जिसके 50,000 सब्सक्राईबर है। X अपने चेनल पर कोरोना एक षड्यंत्र है, कोरोना फर्जी है, वैक्सीन, चिप, मास्क, फार्मा कम्पनियों का षड्यंत्र एवं NWO आदि के विषय पर दसियों वीडियो अपलोड करता है। और अपने दर्शको से कहता है कि वे उसके वीडियो को शेयर करके जन जन पर पहुँचा कर लोगो को “जागरूक” करें।
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जब आप उससे पूछेंगे कि आप क्या कर रहे हो, और इस पूरी कवायद के पीछे आपका उद्देश्य क्या है ? तो आपको निम्न जवाब मिलेंगे :
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(1.1) मैं लोगों को कोरोना / NWO के बारे में जागरूक कर रहा हूँ !!
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(1.2) मैं कोरोना / NWO को एक्सपोज कर रहा हूँ !!
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(1.3) मैं लोगो में चेतना ला रहा हूँ !!
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(1.4) मैं क्रांति लाने की तैयारी कर रहा हूँ !!
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[OKAY... now let’s figure out his silence on – whom to VOTE !!]
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(2) और चुनावो के सम्बन्ध में X निम्नलिखित कदम उठाएगा :
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(2.1) वह अपने अनुयायियों से नहीं कहेगा कि - पेड मीडिया पार्टियों को वोट करें।
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(X को पता है कि, उसके सभी अनुयायियों को पता है कि - पेड मीडिया पार्टियों ने बाध्यकारी वैक्सीनेशन एवं लॉकडाउन का समर्थन किया था !! अब यदि X पेड मीडिया पार्टियों को वोट करने को कहता है तो X अपने कई दर्शक खो देगा।)
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(2.2) X अपने अनुयायियों से यह नहीं कहेगा कि – उन निर्दलीय उम्मीदवारों / छोटी पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट करें जो बाध्यकारी वैक्सीनेशन एवं लॉकडाउन के खिलाफ है।
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(यदि X ऐसा कहता है तो उसके कई अनुयायी अमुक उम्मीदवारों का प्रचार करने लगेंगे, और उन्हें वोट दे देंगे। और आगे चलकर ये छोटे उम्मीदवार पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ एक वाजिब “चुनावी राजनैतिक विकल्प” बन सकते है।)
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(2.3) X न तो खुद बाध्यकारी वैक्सीनेशन, लॉकडाउन आदि के मुद्दे पर पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ेगा, और न ही पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ कोई चुनावी उम्मीदवार उतारेगा।
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(X जानता है कि यदि उसने पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ “चुनावी राजनैतिक विकल्प” खड़ा करने की दिशा में काम किया तो यू ट्यूब-फेसबुक के प्रायोजक उसके वीडियो वगेरह के डिस्ट्रीब्युशन को सीमित कर देंगे।)
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(2.4) X अपने दर्शको से यह भी नहीं कहेगा कि – पेड मीडिया पार्टियों को वोट “न” करें !!!
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(यदि X अपने दर्शको से पेड मीडिया पार्टियों को वोट “नहीं” करने को कहता है तो उसे इस प्रश्न का सामना कारण पड़ेगा कि -- तब हम किसे वोट करें !! और एक बार यह प्रश्न विमर्श में आ जाता है तो विमर्श इसी जवाब पर ख़त्म होगा कि, पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ कार्यकर्ताओ को एक नया राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम करना चाहिए।)
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(3) अब हम देखते है की, कैसे “वोट किसे दें” प्रश्न पर अपनी ख़ामोश रहकर X यह सुनिश्चित करता है कि, कार्यकर्ता पेड मीडिया पार्टियों को चुनौती देने के लिए राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम न कर सके, और नतीजे में सभी वोट पेड मीडिया पार्टियों को ही मिले।
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(3.1) X यह बात जानता है कि, मेरे 99% फ़ॉलोअर्स ने पिछले चुनावों में पेड मीडिया पार्टियों को ही वोट किया है। पर चूंकि अब उनमें से कई लोग पेड मीडिया पार्टियों की नीतियों से क्षुब्द है, अत: X उन्हें बिंदु (2.1) में कही गयी सूचना नहीं देता।
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(3.2) X जानता है कि यदि अपने अनुयायियों को बिंदु (2.2 एवं 2.3) में बतायी गयी सूचना देगा तो उसके अनुयायियों तक उन उम्मीदवारों के बारे में सूचना पहुँच जायेगी जो पेड मीडिया पार्टियों को नुकसान देने के लिए राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम कर रहे है।
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(3.3) और चूंकि X के ये सभी अनुयायी पहले से पेड मीडिया पार्टियों के वोटर है, अत: यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसके ये अनुयायी फिर से पेड मीडिया पार्टियों को ही वोट करें, X को सिर्फ बिंदु (2.2 एवं 2.3) पर अमल करना होता है। और चूंकि X ने अपने अनुयायियों तक नए राजनैतिक विकल्प की सूचना को पहुँचने से रोक दिया है, अत: उसके अनुयायीयों के पास फिर से पेड मीडिया पार्टियों को वोट देने का विकल्प शेष रह जाता है।
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(3.4) और X द्वारा बिंदु (2.4) में कही गयी सूचना न देने के बावजूद उसके ज्यादातर अनुयायी फिर से पेड मीडिया पार्टियों को वोट करेंगे, या कुछ लोग या तो वोट करने ही नहीं जायेंगे या नोटा दबा देंगे। वोट न करने या नोटा दबाने की स्थिति में इन मतदाताओं का वोट मतदान गणना से बाहर हो जाएगा। और पेड मीडिया पार्टियों की ताकत बनी रहेगी।
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(4) तो यहाँ X “वोट किसे दें” प्रश्न पर जानबूझकर खामोश रहकर मुख्य रूप से निम्नलिखित काम सक्रीय रूप से कर रहा है :
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(4.1) वह कार्यकर्ताओ को सरकार / अन्य स्थापित पार्टियों के खिलाफ बोलकर उन्हें अपनी और बुलाता है। ताकि कार्यकर्ता किसी ऐसे कार्यकर्ता समूह की और न चले जाए जो समूह पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ “चुनावी राजनैतिक विकल्प” खड़ा करने पर काम कर रहा है।
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(4.2) वह अपने अनुयायियों को व्यस्त रखने के लिए उन्हें सैंकड़ो घंटो के वीडियो/ ऑडियो/दस्तावेज/ पोस्ट्स आदि उपलब्ध कराता है, ताकि वे “नया राजनैतिक विकल्प” खड़ा करने की दिशा में काम न कर सके।
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(4.3) वह अपने अनुयायीयो को पेड मीडिया के खिलाफ चुनाव में आने वाले उम्मीदवारों के बारे में सूचित नहीं करता, ताकि उसके अनुयायी अमुक उम्मीदवारों को वोट न कर सके। और अमुक उम्मीदवारों को कम वोट मिलेंगे तो पेड मीडिया के खिलाफ लड़ने की उनकी राजनैतिक ताकत भी नहीं बढ़ पाएगी।
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(5) और यह पूरा राजनैतिक सर्कस चलाने के लिए उसे बिंदु (1.1, 1.2, 1.3, 1.4) में दी गयी टर्म का इस्तेमाल करने की जरूरत होती है।
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यदि X कहेगा कि – मैं राजनीती कर रहा हूँ, तो उस पर वाजिब प्रश्न उठेगा कि जब आप राजनीति कर रहे है, तो चुनावों में आइये, या बताइये कि किसे वोट देना है, या किसे नहीं देना है ?
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और चूंकि X “वोट किसे दें” प्रश्न का सामना करने से बचना चाहता है, अत: वह खुद को अराजनैतिक दिखाने के लिए अपने इस पूरे सर्कस को “जागरूकता, चेतना, क्रांति शब्दों पर थपा देता है। यदि वह जागरूकता एवं क्रांति आदि शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेगा तो उसके पास अपनी गतिविधियों को अराजनैतिक ठहराने का कोई तरीका नहीं है। और तब उसे इस यक्ष प्रश्न का जवाब देना होगा कि – वोट किसे दें ? और X के लिए यह प्रश्न के अंगारे की तरह है, जिसे वह छूना नहीं चाहता।
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(6) X को इससे क्या फायदा होता है ?
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इस तरीके का सर्कस चलाने से होने वाले लाभों के कई आयाम है। हैसियत एवं नेटवर्क के अनुसार अलग अलग प्रकार के X अवसर देखकर इससे अलग अलग तरह के फायदे ले लेते है।
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(6.1) जैसे राजनेता की खुराक वोट है, वैसे ही यू ट्यूबरो की गिज़ा है – व्यू काउंट एवं सब्सक्राइबर। और पेड मीडिया के प्रायोजक यू ट्यूब पर ऐसे X को काफी प्रमोट करते है जो राजनीती में रुचि लेने वाले कार्यकर्ताओ को “चुनावी राजनैतिक विकल्प” खड़ा करने की दिशा में काम करने से रोकता हो। इसीलिए सभी X क्रांति लाने या जागरूक करने का सबसे आसान तरीका यह बताते है कि – इस वीडियो को जन जन तक पहुंचा दीजिये !!
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(6.2) चूंकि इन्होने कभी किसी पेड मीडिया पार्टी को वोट करने या न करने के लिए नहीं कहा होता है, अत: हाईट बढ़ने पर ये लोग किसी न किसी पेड मीडिया पार्टी में घुस जाते है।
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सार : मेरा कार्यकर्ताओ से आग्रह यह है कि, आप अपनी यू ट्यूब / फेसबुक फीड में NWO के खिलाफ लड़ने वाले जितने भी क्रन्तिकारी सेलेब्रिटीज को देख रहे है, उनसे यह प्रश्न पूछिए कि – यूपी, पंजाब, उत्तराखंड चुनावों में हम वोट किसे दें ?
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इस प्रश्न को टालने के लिए या तो वे उत्तर नहीं करेंगे या फिर वे कोई रोमांटिक सा जवाब दे देंगे, जिसमें निचे दिए वाक्यों का कई तरह से घुमाव-फिराव-दोहराव होगा :
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हम राजनीति से दूर रहते है।
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वोट आप किसे भी दे दो हमें इससे कोई मतलब नहीं।
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वोट से क्रांति नहीं आती, क्रांति जागरूकता से आएगी।
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सभी पार्टियाँ एक जैसी है। आदि आदि
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यदि अमुक व्यक्ति या तो जवाब नहीं देता, या गोल गोल जवाब देता है तो समझ जाइए कि आपका पाला एक प्रकार के X से पड़ चुका है। और जब आप इस कसौटी पर उन्हें कसना शुरू करेंगे तो आपको मालूम होगा कि आप इस तरह के दर्जनों X से घिरे हुए है, और उनकी न्यूज फीड निरंतर आपका समय चूस रही है।
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जब तक आप इनसे छुटकारा नहीं पाते तब तक पेड मीडिया पार्टियों की ताकत बढती रहेगी। क्योंकि इनका मुख्य लक्ष्य आपको नया चुनावी राजनैतिक विकल्प को खड़ा करने की दिशा में काम करने से रोकना है। और इसके एवज में पेड मीडिया के प्रायोजक अपनी सोशल मीडिया कम्पनियों का इस्तेमाल करके इन्हें प्रमोट कर रहे है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 25 2022 19:17:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनावों में अंशदान देने वाले योगदानकर्ताओ के लिए सुझाव।
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यदि आप राईट टू रिकॉल पार्टी के किसी उम्मीदवार को अंशदान भेजना चाहते है तो निचे दिए गए निर्देशों का पालन करें :
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(1) उन प्रत्याशियों को राशि भेजे जिनकी नामांकन फॉर्म उठाने की तारीख (Withdrawal date) निकल चुकी है। अथवा
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(2) उन प्रत्याशियों को राशि भेजे जिन्हे मॉडरेटर ने अनुमोदित किया है। अथवा
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मॉडरेटर :
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आदित्य प्रकाश जी - <https://www.facebook.com/AdityaPrakash.rfa>;
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रामेश्वर जी जाट - <https://www.facebook.com/Rameshwarjatjury>;
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आप जो भी राशी भेजने वाले है वह राशि इस पोस्ट के कमेन्ट में लिखे। और मॉडरेटर आपको रिप्लाई केप्शन में बताएँगे कि आपको किसे कितनी राशी भेजनी है। जब आप राशी भेज देंगे तो अपने कमेन्ट के रिप्लाई में जाकर यह सूचना देंगे कि आपने अमुक प्रत्याशी को राशी भेज दी है।

जो योगदानकर्ता पहले से ही किसी प्रत्याशी को राशि भेज चुके है वे भी इस पोस्ट के कमेन्ट में अपनी राशि लिखें। ताकि हमें यह सुनिश्चित करने में सुविधा रहे कि सभी प्रत्याशियों को लगभग समान आनुपात में राशि मिले।
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Aditya Prakash , Rameshwar Jat Jury
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 25 2022 20:43:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सुश्री अनिमा जी ओझा साहिबाबाद विधानसभा से राईट टू रिकॉल पार्टी की और से प्रत्याशी है। उनके पेम्पलेट का पाठ्य निचे दिया गया है।
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राईट टू रिकॉल पार्टी का मुख्य एजेंडा संक्षेप में :
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(1) Evm हटाकर बैलेट पेपर वापस लाना #EvmHatao
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(1.1) चुनाव आयोग ने जून 2017 में Evm के पारदर्शी रंगहीन कांच को गहरे काले रंग के फ्रंट साइड मिरर से बदल दिया था। अब काले कांच के कारण जब तक Evm के अंदर की लाईट नहीं जलती तब तक तक मतदाता या पीठासीन अधिकारी को कागज की पर्ची दिखाई नहीं देती है।
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(1.2) अब वोटिंग के 7 दिन पहले चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की डिटेल की प्रोग्राम फाइल Evm में इंस्टाल की जाती है तो प्रोग्राम में यह निर्देश (Command) जोड़ा जा सकता है कि अमुक तारीख एवं अमुक समय के बाद होने वाले मतदान में प्रोग्राम अन्य उम्मीदवारों को मिले वोट कम करके ये वोट किसी निर्दिष्ट नंबर के उम्मीदवार के खाते में भेज सकता है, और इस हेराफेरी को Evm की पर्चियों के मिलान द्वारा भी पकड़ा नहीं जा सकता !!
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(1.3) 4 मिनट के इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे Evm प्रोग्राम कागज की पर्चियों में की गयी हेराफेरी को काले कांच की मदद से छुपा सकता है। वीडियो इस लिंक पर देखा जा सकता है – Tinyurl.com/EvmHatao5
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(2) वोट वापसी मुख्यमंत्री का क़ानून गेजेट में छपवाना #VvpCm
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2 पेज के इस प्रस्तावित कानून में 9 धाराएं है इस क़ानून के आने बाद मुख्यमंत्री वोट वापसी के दायरे में आएगा। तब यदि मुख्यमंत्री जबरदस्ती टीकाकरण एवं जबरदस्ती लॉकडाउन जैसे गलत कानून लाते है, तो राज्य के मतदाता वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके मुख्यमंत्री को बदल सकेंगे।
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(3) प्रत्येक निरपराध भारतीय नागरिक को कानूनन बंदूक दिलाना
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(3.1) सरकार द्वारा छापा गया 1963 का नोटिफिकेशन कर्नाटक के कूर्ग जिले के प्रत्येक नागरिक को बिना लाइसेंस बंदूक रखने का अधिकार देता है। इस नोटिफिकेशन में हमारे जिले का नाम छपवाना, ताकि हमारे जिले के नागरिक कानूनन बिना लाइसेंस बंदूक रख सके।
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(3.2) उल्लेखनीय है कि, अमेरिका में पुलिस के पास 40 लाख, एवं सेना के पास 45 लाख बंदूके है, लेकिन वहां आम नागरिको के पास 40 करोड़ बंदूके है। अमेरिका में कुल 13 करोड़ परिवार है, और उनमें सबसे गरीब 2 करोड़ परिवारों में से 1.5 करोड़ से ज्यादा परिवारों के पास बंदूके है। और यह सबसे बड़ी वजह रही कि वहां पर सरकार डंडे के जोर से फ़ोर्स वैक्सीनेशन एवं लॉकडाउन लागू करने में सफल नहीं हो सकी।
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(4) धन वापसी पासबुक का कानून गेजेट में छपवाना #DhanVapsiPassbook
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(4.1) यह क़ानून खनिजो की लूट पर रोक लगाता है। इस क़ानून के आने के बाद सभी खदानों एवं सरकारी जमीनों को सिर्फ लीज / किराए पर दिया जा सकेगा और इन्हें हमेशा के लिए बेचा नहीं जा सकेगा।
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(4.2) देश के समस्त खनिज+स्पेक्ट्रम+सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी एवं किराया ‘135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता’ नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इस रूपये का 65% प्रत्येक माह सभी भारतीयों में बराबर बंटेगा, और 35% हिस्सा सेना पर खर्च होगा। प्रत्येक नागरिक को मिलने वाली यह राशि 500 रू से 1000 रू के बीच हो सकती है।
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(4.3) केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले सभी सार्वजनिक उपक्रमो को होने वाले शुद्ध लाभ (इसमें अमुक PSUs के स्वामित्व वाले सभी शेयर, बांड आदि से उपार्जित आय भी शामिल है) का 65% हिस्सा भी मासिक भारतीय नागरिको में बराबर रूप से प्रतिमाह वितरित किया जायेगा।
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(5) प्रस्तावित वोइक (WOIC) क़ानून गेजेट में छपवाना #WoicRrp
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(5.1) 16 धाराओं के इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में आने से संवेदनशील क्षेत्रो जैसे मीडिया, फार्मा, बैंकिंग, हथियार, रेलवे, कृषि, खनन आदि में विदेशी निवेश पर रोक लग जायेगी।
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(5.2) यह क़ानून मॉरिशस ट्रीटी को भी रद्द करता है। उल्लेखनीय है कि, मॉरिशस ट्रीटी के कारण टेक्स हेवन देशो के माध्यम से निवेश करने वाली विदेशी बैंकिंग कंपनियों को भारत में बेहद कम आयकर (अधिकतम 7.5%) चुकाने होते है।
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(5.3) इस क़ानून के गेजेट में आने से WTO एग्रीमेंट निष्प्रभावी हो जाएगा।
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(6) स्वदेशी कारखानों / दुकानदारों को बचाने के लिए GST हटाकर रिक्त भूमि कर लागू करना। #EmptyLandTaxRrp
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(6.1) इस क़ानून के आने के बाद माल बनाने, माल खरीदने, माल बेचने, स्टॉक रखने, ट्रांसपोर्ट करने आदि पर न तो कोई टेक्स चुकाना होगा, और न ही कारोबारी को इसका हिसाब सरकार को देना होगा। करदाता साल में 1 बार सिर्फ रिक्त भूमि कर का रिटर्न भरेगा। यदि वह आयकर के दायरे में आता है, तो आयकर रिटर्न उसे अलग से भरना होगा। चुकाए गये आयकर को देय रिक्त भूमि कर में से घटा दिया जाएगा।
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(6.2) यह क़ानून भूमि पर कर नहीं लगाता, बल्कि अनुपयोगी एवं अकार्यशील पड़ी भूमि को कर के दायरे में लेता है। यदि आपके या आपके परिवार के पास अतिरिक्त अकार्यशील भूमि नहीं है तो आपको यह कर नहीं चुकाना होगा। रिक्त भूमि कर की दर सालाना 1% होगी। रिक्त भूमि कर से इतना राजस्व आ जाएगा कि GST की जरूरत नहीं रह जायेगी।
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(7) देशी नस्ल के गौ वंश को बचाने के लिए प्रस्तावित गौ नीति #GauNitiRrp
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(7.1) मुख्यमंत्री एक गौ कल्याण मंत्री की नियुक्ति करेंगे। गौ मंत्री राज्य में देशी भारतीय नस्ल की गाय के सरंक्षण एवं देशी गाय के सभी उत्पादों आदि को बढ़ावा देने के लिए नीति-निर्धारण, प्रबंधन एवं नियमन करेगा। गौ कल्याण मंत्री वोट वापसी के दायरे में होगा और यदि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है तो राज्य के नागरिक वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे निकालने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे।
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(7.2) यदि गौ हत्या, गौ तस्करी, गौ उत्पादों में हानिकर रसायनों की मिलावट आदि शिकायतें आती है तो मामले की सुनवाई जज की जगह नागरिको की जूरी करेगी। आरोपी की हैसियत एवं अपराध की गंभीरता के अनुसार जूरी में 12 से 1500 तक जूरी सदस्य हो सकेंगे। गौ कल्याण मंत्री एवं स्टाफ के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई भी जूरी ही करेगी।
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(8) हिन्दू धर्म के प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए प्रस्तावित हिन्दू बोर्ड #HinduBoardRrp
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(8.1) यह प्रस्तावित क़ानून सरकार द्वारा हथियाये जा चुके सभी देवालयों को सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करता है।
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(8.2) यह कानून शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की तर्ज पर हिन्दुओ के लिए एक राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड नामक धार्मिक ट्रस्ट का गठन करेगा। इस ट्रस्ट का अध्यक्ष हिन्दू बोर्ड प्रधान कहलायेगा। भारत में निवास करने वाला प्रत्येक हिन्दू इस बोर्ड का वोटिंग मेम्बर बन सकेगा।
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(8.3) यदि बोर्ड प्रधान या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले को सुनने और दंड देने की शक्ति जजों की जगह हिन्दू नागरिको की जूरी के पास रहेगी। इस क़ानून में विभिन्न हिन्दू एवं सनातन संप्रदाय भी अपनी मौजूदा पहचान बनाये रखते हुए “स्वैच्छिक रूप से” पंजीकृत हो सकेंगे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jan 25 2022 21:12:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल ही एक मात्र पोलिटिकल पार्टी हे जो आप तक यह जानकारी पहुँचा रही है कि - क्यों अमरीका में सरकारी द्वारा कोरोना के नाम पर आम नागरिको पर ना के बराबर उत्पीड़न हुआ है ?
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क्योंकि अमेरिका में सैनिकों और पुलिसकर्मियों के पास 40+40 = 80 लाख के लगभग बंदूकें हैं, जबकि अमेरिकी नागरिकों के पास 40 करोड़ (50 गुना अधिक) बंदूके है।
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और इसके अलावा उनके पास सरकारी अधिकारियों, नेताओं एवं पुलिस कर्मियों को नियंत्रित करने के लिए जूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल एवं जनमत संग्रह जैसी प्रक्रियाएं है।
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तो भारत के लिए समाधान है - सभी आम भारतीय नागरिको ( अपराधियों को छोड़कर) को कानूनन बंदूक रखने के मुद्दे पर जनमत संग्रह करवाना।
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#JuryCourt , #VoteVapsiPassbook
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jan 27 2022 18:14:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

उत्तर प्रदेश विभंसभा चुनावों के पहले चरण में राईट टू रिकॉल पार्टी के 3 उम्मीदवारो का नामांकन स्वीकृत हो गया है। यदि आप लॉकडाउन, जबरन टीकाकरण, जबरन मास्क आदि कानूनों के खिलाफ है तो सोशल मीडिया पर इन प्रत्याशियों का प्रचार करें।
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(1) गाजियाबाद विधानसभा से - राकेश जी सूरी
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(2) मथुरा विधानसभा से - विभोर जी भारद्वाज
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(3) साहिबाबाद विधानसभा से - अनीमा ओझा
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राईट टू रिकॉल पार्टी पहले दिन से ही जबरन वैक्सीन, लॉकडाउन, मास्क आदि कानूनों के खिलाफ रही है। यदि आप कोरोना के नाम पर चलाये जा रहे सर्कस को ख़त्म करना चाहते है तो राईट टू रिकॉल पार्टी का समर्थन करें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jan 28 2022 19:14:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rakesh Suri Ghaziabad UpActivist:

जनता तक वोट वापसी पासबुक, ग़ाज़ियाबाद जूरी कोर्ट की जानकारी पहुचाने के उद्देश्य से हम वोटर से उमीदवारके रूप में परिवर्तित हुए हैं।

राकेश सूरी
मोबाइल नंबर 9560354335
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jan 28 2022 19:18:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आज राईट टू रिकॉल पार्टी की और से 2 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया।
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(1) अमृतसर दक्षिण से - रितिश जी खन्ना
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(2) उत्तराखंड के कपकोट से - गोविन्द लाल जी
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jan 28 2022 19:35:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस एल्बम में विधानसभा चुनाव से सम्बंधित विवरण रखें जायेंगे.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Jan 28 2022 20:20:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Vibhor Bhardwaj Sharma VrindavanUp:

मैं भाजपा समर्थकों के परिवार से आता हूं। मेरे पिता, जब वे जीवित थे तो भाजपा के खिलाफ बोलने वाले किसी भी व्यक्ति से लड़ जाते थे। जैसा बाप वैसा बेटा। 😁

मेरे परिवार ने 2014 में बीजेपी को वोट दिया था क्योंकि हमें वास्तव में विश्वास था कि मोदी जी वह बदलाव लाएंगे जिसकी इस देश को जरूरत है। यह वह व्यक्ति है जो पूरे देश को बदल देगा। पहली बार मैंने सोचा, यह एक हिंदुवादी सरकार है जो वास्तव में हिंदुओं और पूरे देश के लिए काम करती है क्योंकि मैंने कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति को देखा है। मुझे ऐसा लगा था की अब पूरी दुनिया हमें देखेगी और कहेगी की ये लोग फिर से विश्वगुरु बन गए।

लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

पहले नोटबंदी आई, फिर जीएसटी और फिर अपने अमरीकी आकाओं के आदेश पर इन्होंने बेकार के लॉकडाउन लगा दीए जिसने कि पूरी अर्थव्यवस्था को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया। हम सब यह बात जानते हैं की भारत जैसे भीड़ भाड़ वाले देश में तो लॉकडाउन वैसे भी सफल नहीं हो सकता। ऊपर से लॉकडाउन से कोरोना से हुई मौतों में भी कोई कमी नहीं आई। लेकिन इनके जबरन लगाए लॉकडाउन से छोटा व्यापारी ज़रूर असफल हो गया और कुछ औद्योगिक घरानों की मौज आ गई।

आज लोग पहले से भी कहीं अधिक रूप से सरकारी सहायता पर निर्भर हैं।

इसके अलावा बीजेपी ने हिंदू मंदिरों के लिए कुछ नहीं किया। वे अभी भी अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल की तरह स्वतंत्र नहीं हैं। फिर उन्होंने प्रतिष्ठित काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रशासन ब्रिटेन की एक विदेशी कंपनी अर्न्स्ट एंड यंग को दे दिया।

<https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/varanasi/story-london-company-will-operate-vishwanath-dham-4895690.html>;

ऐसे हिंदू हैं ये? ये बचाएंगे हिंदुत्व को? विदेशियों को अपने मंदिर हवाले करके?

सनातन धर्म की रीढ़ को तोड़ने के लिए भाजपा लगातार अधार्मिक कदम उठा रही है। वे हिंदुवादी दिखने के लिए पेड मीडिया और भावुक भाषणों का उपयोग करते हैं लेकिन इनके कर्म पूरी तरह से अधार्मिक हो चुके हैं।

यह एक महत्त्वपूर्ण समय है जब हिंदूओं भाजपा/संघ का तिरस्कार कर देना चाहिए और अपने लिए एक बेहतर राजनीतिक विकल्प का निर्माण करना चाहिए जो हिंदुओं को अधिक शक्ति प्रदान करने के लिए हिंदू बोर्ड की स्थापना करे।

मैं विभोर भारद्वाज शर्मा, मथुरा-84 विधान सभा क्षेत्र से एकमात्र प्रत्याशी हूं जो कानूनी माध्यम से आपको हिंदू बोर्ड दिलाने की मांग उठा रहा है। आज धर्म की रक्षा करने के लिए हमें सनातन धर्म को बेहतर व्यवस्थित करना होगा और उसके लिए हमें हिंदू बोर्ड की स्थापना करनी होगी जिसके अंतर्गत सभी हिंदू एक छत के नीचे इकट्ठे हो सकें। यह कानून हिन्दू धर्म के प्रशासन को बेहतर बनाने एवं धर्मान्तरण को रोकने के लिए लिखा गया है। यह क़ानून पिछले 1000 वर्षो से जारी हिन्दू धर्म के सिकुड़ने की प्रक्रिया को रोक देगा। हिंदू बोर्ड की स्थापना से हिंदूओं की शक्ति में इजाफा होगा। और मन्दिरों में आने वाले धन का सरकारी अफसरों द्वारा दुरपोयोग खत्म होगा। इस धन का प्रयोग हिंदूओं की उन्नती में लगाया जाएगा।

हिंदू बोर्ड की स्थापना के लिए आप अपने भाई का समर्थन करें क्योंकि देश भाषणों से नहीं कानूनों से चलता है।

जय हिंद जय भारत 🙏🏻🕉️🙏🏻

हिंदू बोर्ड के ड्राफ्ट का लिंक 👇
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(a) tinyurl.com/RrpD10
(b) tinyurl.com/HinduBoard
(c) www.Rtr.Party/HinduBoard

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jan 30 2022 20:31:13 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि आप जबरन वैक्सीनेशन एवं लॉकडाउन जैसे गलत कानूनों को रोकने के लिए वोट वापसी मुख्यमंत्री क़ानून चाहते है तो राईट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करें।
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(1) राकेश जी सूरी - गाजियाबाद विधानसभा से
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(2) विभोर जी भारद्वाज - मथुरा विधानसभा से
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(3) अनीमा जी ओझा - साहिबाबाद विधानसभा से
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चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
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मतदान दिवस - 10:02:2022
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#JuryCourt , #VoteVapsiPassbook

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jan 31 2022 10:11:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Amit Kumar Swain:

Any one before transferring money to any RRP election candidate please contact me via whatsapp 8820904591 or facebook messenger . I will respond within an hour to your messege and do transfer money only after I confirm . We need to do this so that each candidate gets minimum 20000 each .

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Mon Jan 31 2022 21:06:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

उत्तराखंड चुनावों में RRP प्रत्याशी :
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यदि आप जबरन वैक्सीनेशन एवं लॉकडाउन जैसे गलत कानूनों को रोकने के लिए वोट वापसी मुख्यमंत्री क़ानून चाहते है तो राईट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करें।
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(1) प्रेमदत्त जी सेमवाल - टिहरी विधानसभा से
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(2) राकेश जी बडथ्वाल - रायपुर विधानसभा से
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(3) अजय कुमार जी कौशिक - डोईवाला विधानसभा से
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चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
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मतदान दिवस - 14:02:2022
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#JuryCourt , #VoteVapsiPassbook

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