Pawan Jury BhilwaraRj
कजाकिस्तान संकट --- पुतिन और कजाख सरकार द्वारा जबरन टीके लगाने का नतीजा !!!
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पुतिन रूसियों और कज़ाकों पर ज़बरदस्ती टीकाकरण लागू कर रहे हैं। रूसियों के पास लोकतान्त्रिक तरीके से विद्रोह करने का कोई तंत्र नहीं है। लेकिन कज़ाख में मस्जिदें और शुक्रवार की गेदरिंग होने के कारण यह विद्रोह के वैकल्पिक तंत्र के रूप में काम कर रही है। अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता पेड मीडिया का इस्तेमाल करके पूरी दुनिया पर बाध्यकारी टीकाकरण थोप रहे हैं। लेकिन साथ ही अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता और सीआईए कज़ाकी लोगों की बाध्यकारी टीकाकरण विरोधी भावनाओं का फायदा भी उठा रहे हैं, और मस्जिदो की गेदरिंग का इस्तेमाल वे पुतिन विरोधी लहर पैदा करने में कर रहे है।
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कज़ाख दंगे भारत के उन लोगो के लिए सबक है जो भारत में बाध्यकारी टीकाकरण के समर्थक है। भारत के ये लोग मानते है कि वे पुलिस के डंडे से बाध्यकारी टीकाकरण का विरोध करने वाले लोगों को हरा सकते है, और उन्हें दोनों खुराक एवं बूस्टर लेने के लिए मजबूर कर सकते है। खैर, डंडा कुछ समय के लिए काम कर सकता है। लेकिन इससे विद्रोह की संभावना ही बढ़ेगी। और नतीजे में टीकाकरण विरोधी कई लोग अन्य धर्म में धर्मान्तरित हो सकते है। वे ऐसे धर्म में शामिल हो सकते हैं जो बाध्यकारी टीकाकरण आंदोलन को मजबूत करता है।
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हम बाध्यकारी टीकाकरण विरोधी कार्यकर्ताओ से अपील कर रहे है कि वे भारत में बाध्यकारी टीकाकरण का समर्थन करने वाली पेड मीडिया पार्टियों (बीजेपी, कोंग्रेस, आपा, सपा आदि) के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरें। लेकिन BRC एवं अवेकन जैसे नियंत्रित विपक्ष सभी कार्यकर्ताओं को चुनाव से दूर रहने के लिए मनाने में सफल रहे हैं। और यह सबसे बड़ी वजह है कि नागरिको के पास बाध्यकारी टीकाकरण थोपने वाली पार्टियों को वोट देने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहा है।
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इसलिए अगर जॉर्ज सोरोस जैसी कोई विदेशी शक्ति भारत में धार्मिक कट्टरपंथियों या नक्सलियों जैसे प्रतिक्रियावादी समूहों को फंडिंग करना शुरू करता है, तो बाध्यकारी टीकाकरण का विरोधी असहाय वर्ग उनका हथियार बन सकता है। और यह भारत में भारी अस्थिरता पैदा कर सकता है।
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प्रस्तावित समाधान --- कार्यकर्ताओं को बीआरसी और अवेकन आदि की चपेट में न आकर भारत में पेड मीडिया पार्टियों को परास्त करने के लिए राजनैतिक विकल्प खड़ा करने के लिए काम कारण चाहिए।
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