Mon May 01 2023 20:11:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp13 #टू_चाइल्ड_लॉ (Short Version)
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जनसँख्या नियंत्रण के लिए प्रस्तावित क़ानून
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यह प्रस्तावित क़ानून दो से अधिक संतान रखने वाले नागरिको पर कुछ दंडात्मक प्रावधान लगाता है। परन्तु जिन अभिभावकों के 1 या 2 या 3 पुत्रियाँ है किन्तु कोई भी पुत्र नहीं है, उन्हें इस क़ानून के अनुसार कुछ अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेंगे, एवं उन्हें किसी आर्थिक दंड का सामना भी नहीं करना होगा। किन्तु यदि किसी व्यक्ति के 2 पुत्र या एक पुत्री एक पुत्र है और फिर भी वे एक संतान और पैदा करते है तो उन्हें कुछ आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा।
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यह कानून भारत में जनसँख्या के लगातार बिगड़ रहे धार्मिक संतुलन में भी सुधार लायेगा। इस कानून को धन विधेयक के रूप में लोकसभा से साधारण बहुमत द्वारा पारित किया जा सकता है। इस क़ानून को राज्यसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। यह क़ानून भारतीय संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उलंघन नहीं करता, अत: इसके लिए किसी प्रकार के संवैधानिक संशोधन की भी ज़रूरत नहीं है। प्रस्तावित टू चाइल्ड लॉ के मुख्य बिंदु निचे तालिका में दिए गए है। इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक एवं फेसबुक लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड आदि) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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प्रधानमंत्री जी, टू चाइल्ड लॉ कानून गेजेट में छापें - #TwoChildLaw
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#VoteVapsiPassbook
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Proposed by : #VoteVapsiMovement
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Tue May 02 2023 22:05:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp29 अंतरधर्मी विवाहोपरांत मेरिज एक्ट चुनने की शक्ति (Short Version)
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Power to Decide Marriage Code After Marriage
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भारत में विविध धर्मो के लिए भिन्न विवाह क़ानून लागू है। इनमें कुछ धर्मो के विवाह क़ानून महिलाओं को मजबूत सरंक्षण प्रदान करते है जबकि कुछ धर्मो के विवाह क़ानून में महिलाओं को पर्याप्त सरंक्षण नहीं है, और इस वजह से उन महिलाओं की स्थिति विवाह के बाद कमजोर हो जाती है, जिन्होंने किसी अन्य धर्म के युवक से विवाह किया है और अमुक युवक के धर्म का विवाह क़ानून महिलाओं को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता।
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यह कानून अंतरधर्मी विवाह करने वाली महिलाओं को विवाह के उपरान्त वैवाहिक झगड़ो के निपटान के लिए अपने जन्मना धर्म का क़ानून चुनने की शक्ति देता है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री संसद से साधारण बहुमत द्वारा पास करके गेजेट में छाप सकते है। इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक एवं फेसबुक लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड आदि) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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प्रधानमंत्री जी, महिलाओं को विवाहोपरांत मेरिज एक्ट चुनने की स्वतंत्रता कानून गेजेट में छापें - #DecidingMarriageCode
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इस क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है :
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(1) वैवाहिक विवादों की दशा में विवादों का निपटान किस धर्म के वैवाहिक क़ानून के तहत किया जाएगा इसका फैसला लेने का अंतिम अधिकार विवाहित महिला के पास होगा। महिला विवाह के उपरान्त किसी भी समय अदालत में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगी कि उसके विवाह का निस्तारण निचे दिए गए किस क़ानून के तहत किया जाना चाहिए :
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(1.1) उस धर्म के वैवाहिक क़ानून के तहत जिस धर्म में विवाहित महिला ने जन्म लिया था, या
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(1.2) उस वैवाहिक क़ानून के तहत जिसके तहत दम्पत्ति ने विवाह किया था।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि A एक जन्मना हिन्दू महिला है, जो B नामक मुस्लिम युवक से विवाहित है, तथा विवाह के दौरान या विवाह के उपरांत मुस्लिम धर्म में धर्मान्तरित भी हो चुकी है। तब भी वैवाहिक विवाद होने की स्थिति में A यदि मामले का निपटान हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत चाहती है तो मामला हिन्दू एक्ट के तहत सुना जाएगा। A द्वारा हिन्दू मेरिज एक्ट लागू कर दिए जाने पर मुस्लिम युवक ट्रिपल तलाक द्वारा जन्मना हिन्दू महिला को तलाक नहीं दे सकेगा, और डिवोर्स हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत अदालत के आदेश के अनुसार ही होगा।
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और चूंकि हिन्दू मेरिज एक्ट में बहु विवाह की अनुमति नहीं है, अत: B यदि A को डिवोर्स दिए बिना दूसरी शादी करता है तो B को हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत आपराधिक मुकदमें का सामना करना पड़ सकता है। यदि B, A का उत्पीड़न कर रहा है तो A अदालत में B एवं B के पारिवारिक सदस्यों के खिलाफ धारा 498A के तहत आपराधिक मुकदमें कायम करवा सकेगी।
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(2) यह क़ानून पूर्ववर्ती प्रभाव के साथ लागू होगा। अर्थात इस क़ानून के लागू होने की दिनांक से पूर्व संपन्न हुए सभी विवाह भी इस क़ानून के दायरे में आयेंगे, और सभी अंतरधर्मी विवाहों पर यह क़ानून लागू होगा।
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(3) यदि पहले से मौजूद किसी अन्य प्रवृत्त क़ानून की कोई धारा इस क़ानून में दिए गए किसी प्रावधान का उलंघन करती है, तो इस कानून के गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही अन्य प्रवृत क़ानून की ऐसी समस्त विपरीत आशय दर्शाने वाली धाराएं विधि शून्य मानकर निस्स्त की जाती है।
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#VoteVapsiPassbook
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[Proposed by : #VoteVapsiMovement]
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Wed May 03 2023 10:23:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp10 #राष्ट्रीय_हिन्दू_बोर्ड (Short Version)
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यह कानून शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की तर्ज पर सनातनी हिन्दुओं के लिए एक धार्मिक ट्रस्ट का गठन करता है। इस ट्रस्ट का नाम राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड (R.H.B.) होगा तथा इस ट्रस्ट का अध्यक्ष हिन्दू बोर्ड प्रधान कहलायेगा। राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड की मुख्य कार्यकारिणी में 1 प्रमुख एवं 4 न्यासियो सहित कुल 5 व्यक्ति होंगे।
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यह क़ानून सरकार द्वारा हथियाये जा चुके सभी देवालयों को भी सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करके देवालयों का नियंत्रण अमुक देवालयों के अनुयायियों/दानदाताओ को देता है, ताकि ट्रस्टी कोष का खर्च परोपकारी कार्यो में करें। इस क़ानून को संसद से पास करने की जरूरत नही है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक एवं फेसबुक लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड आदि) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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प्रधानमंत्री जी, राष्ट्रिय हिन्दू बोर्ड का प्रस्तावित कानून गेजेट में छापें - #HinduBoard
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प्रस्तावित राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है :
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(1) प्रधानमंत्री एक अधिसूचना जारी करके राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या का स्वामित्व हिन्दू बोर्ड को सौंपेंगे। इसके अलावा हिन्दू बोर्ड उन सभी देवालयों का भी प्रबंधन करेगा जिन्हें किसी मंदिर के मालिको ने इसे स्वेच्छा से सौंप दिया है।
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(2) बोर्ड उन देवालयों का अधिग्रहण / प्रबंधन नहीं करेगा जिनकी देख-रेख देवालय के मालिक RHB से नहीं कराना चाहते। हिन्दू बोर्ड प्रधान और न्यासी अपने नियंत्रण में मौजूद देवालयो को प्राप्त हुए दान को इस तरह खर्च करेंगे कि सनातन संस्कृति का सरंक्षण हो।
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(3) भारत में निवास करने वाला प्रत्येक हिन्दू इस बोर्ड का वोटिंग मेम्बर बन सकेगा। यहाँ हिन्दू से आशय है - उन सभी समुदायों, पन्थो, सम्प्रदायों के अनुयायी जो स्वयं को हिन्दू या सनातनी या सनातनी हिन्दू कहते है।
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(4) इस्लाम, ईसाई, पारसी, यहूदी एवं अन्य धर्म जो भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर उत्पन्न हुए है, के अनुयायी स्पष्ट रूप से इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे, एवं वे इस बोर्ड के वोटींग मेंबर नहीं बन सकेंगे। सभी प्रकार की मस्जिदे, चर्च, गुरूद्वारे, बौद्ध, जैन तीर्थ स्थल आदि हिन्दू बोर्ड के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(5) यदि आप हिन्दू बोर्ड के सदस्य बनते है तो आपको एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी ताकि आप हिन्दू बोर्ड प्रधान को बदलने के लिए स्वीकृति दे सके।
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(6) यदि हिन्दू बोर्ड प्रधान या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले को सुनने और दंड देने की शक्ति जजों के पास न होकर हिन्दू नागरिको की जूरी के पास रहेगी। प्रत्येक मामले के लिए अलग से जूरी होगी और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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वर्तमान हिन्दू मंदिरों में धन के समाज में बांटने सम्बन्धी निर्णय मंदिर प्रमुख या संप्रदाय प्रमुख द्वारा लिए जाते है, तथा इनका ही मंदिरों की संपत्ति के उपयोग पर पूर्ण नियंत्रण होता है। ट्रस्टी का पद उत्तराधिकार तथा गुरु प्रथा द्वारा हस्तांतरित होता है। मतलब आज का गुरु ही अगला गुरु नियुक्त करता है। आजीवन कार्यकाल होने के कारण यहाँ संपत्ति इकठ्ठा करने की ओर झुकाव होता है, तथा इसका उपयोग तड़क-भड़क, दिखावे एवं ऐशो आराम में भी किया जाता है।
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सिक्खों में अकाल तख़्त के ग्रंथी चुन कर आते है, और सीमित कार्यकाल (4 वर्ष) होने के कारण वे फिर से चुन कर आने के लिए गुरूद्वारो में आए दान को परोपकारी कार्यो में खर्च करने पर अधिक भार देते है। हिन्दू बोर्ड क़ानून के आने से हिन्दू मंदिरों में भी इसी तरह का अपेक्षित सुधार आएगा।
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#VoteVapsiPassbook
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Proposed by : #VoteVapsiMovement
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Thu May 04 2023 00:11:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
ये आदमी मंत्री है। भारत में जूरी कोर्ट होता तो जूरी अगले ही दिन इसे 10 मिनिट की सुनवाई के बाद 3 महीने के लिए जेल में डाल देती। मतलब जूरी को कुछ पूछने सुनने गवाही की ज़रूरत ही नहीं है। जूरी को इससे सिर्फ़ इतना ही पूछना है कि वीडियो में जो आदमी झापड़ मार रहा है वो आदमी आप ख़ुद है या ये वीडियो Forged है। और यदि जाँच मैं यह वीडियो सही पाया गया तो हम सजा बढ़ाकर 6 माह कर देंगे। और इतना सुनने के साथ ही यह आदमी अपनी गलती क़बूल करके 3 माह के लिए जेल चला जाता।
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और यदि वहाँ का पुलिस प्रमुख वोट वापसी पासबुक के दायरे में होता तो इसे पुलिस इसे अगले 30 मिनिट में अरेस्ट भी कर चुकी होती। और यदि यदि यह आदमी कहता की मैं मंत्री हूँ तो दो झापड़ थानेदार इसके वही पे लगाता पब्लिक के सामने। और मंत्री जी को टांगा टोली करके उठाकर ले जाते।
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#JuryCourt
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Thu May 04 2023 19:57:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp14 #राष्ट्रीय_नागरिकता_रजिस्टर (Short Version)
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NRCI – National Register for Citizenship of India
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विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अनुसार भारत में 2 करोड़ के लगभग अवैध आर्थिक विदेशी (illegal economic imigrant) रह रहे है। असम, बंगाल, पूर्वोत्तर के अलावा ये पूरे भारत में फैले हुए है। इन अवैध विदेशियों में प्रताड़ित शरणार्थी भी है, और आर्थिक अवसरों की तलाश में आये विदेशी (illegal economic migrant) भी है।
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इनकी वजह से भारत के संसाधनों पर भार बढ़ रहा है, और ये हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा है। इन अवैध विदेशी निवासीयों में से कई समूह हिंसक अपराधो एवं तस्करी आदि में भी लिप्त है। यदि पाकिस्तान एवं चीन इन्हें बंगलादेशी सीमा के माध्यम से हथियार भेजना शुरु कर देते है तो ये अवैध विदेशी निवासी भारत में एक हिंसक गृह युद्ध शुरू कर सकते है।
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गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सन 2019 में संसद में भरोसा दिलाया था कि जल्दी ही वे देश व्यापी NRC का ड्राफ्ट लायेंगे। किन्तु सरकार ने अभी तक NRC का ड्राफ्ट तक सामने नहीं रखा है। असम में NRC का जो ड्राफ्ट लागू किया गया था, उसमें गंभीर विसंगितियाँ एवं कमियां थी। उदाहरण के लिए असम का NRC न तो अवैध रूप से रह रहे आर्थिक विदेशियों को चिन्हित करता है, और न ही उन्हें डिपोर्ट करने की कोई व्यवस्था देता है।
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दुसरे शब्दों में, CAA एवं असम में किये गए NRC ने इस समस्या का समाधान नहीं किया है, बल्कि इस तरह की प्रोपेगेंडा खड़ा कर दिया है कि इस समस्या को सुलझा लिया गया है। हमारे द्वारा प्रस्तावित NRCI में इस तरह के प्रावधान किये गए है कि यह कानून आने के 1 वर्ष के भीतर सभी अवैध आर्थिक विदेशी या तो डिपोर्ट कर दिए जायेंगे या फिर स्वयं ही अपने मुल्कों में लौट जायेंगे।
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NRCI क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है :
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इस प्रस्तावित क़ानून में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register for Citizens of India) बनाने की प्रक्रिया दी गयी है। गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही नागरिकता रजिस्टर बनने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। इस क़ानून को मनी बिल / धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पास करके गेजेट में छापा जा सकता है। नागरिकता रजिस्टर बनाने की पूरी प्रक्रिया के ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक एवं फेसबुक लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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(1) यह क़ानून निम्नलिखित कार्य करेगा :
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(1a) अवैध विदेशीयों को (illegal immigrant) भारत से निष्कासित करेगा।
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(1b) प्रताड़ित शर्णार्थियो (persecuted refugee) को शरण देगा।
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(1c) नागरिकता रजिस्टर (national citizenship register) बनाएगा।
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(2) प्रस्तावित NRCI क़ानून के अनुसार, ऐसे विवाद की स्थिति में कि कौन अवैध आर्थिक विदेशी है और कौन प्रताड़ित शरणार्थी है, का अंतिम फैसला नागरिको की जूरी करेगी, जज नहीं।
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(3) प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रार (NCRO) की नियुक्ति करेंगे। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सभी राज्यों में राज्य नागरिकता रजिस्ट्रारों एवं जिला रजिस्ट्रारो की नियुक्ति करेगा। राष्ट्रिय रजिस्ट्रार प्रधानमंत्री की अनुमति से जिला कलेक्टरों को जिला रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त कर सकता है, या इच्छित जिलो में अलग से जिला रजिस्ट्रारो की नियुक्ति भी कर सकता है।
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(4) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एवं उसका स्टाफ वोट वापसी पासबुक एवं जूरी मंडल के दायरे में रहेगा। ताकि यदि राष्ट्रिय रजिस्ट्रार अपना काम त्वरित एवं निष्पक्ष ढंग से नहीं कर रहा है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल करके उसे बदल सके।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड आदि) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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प्रधानमंत्री जी, राष्ट्रिय नागरिकता रजिस्टर बनाने के लिए प्रस्तावित NRCI कानून गेजेट में छापें - #NRCI
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#VoteVapsiPassbook #VoteVapsiMovement
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[Proposed by : Khamba Vote Vapsi Movement]
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Sat May 06 2023 17:52:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Amit Upadhyay RrpMhulhasnagar MhUlhasnagar:
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Tue May 09 2023 11:28:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp32 कूर्ग गन लॉ मेरे जिले में लागू करने हेतु जनमत संग्रह
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Referendum to bring Coorg like Gun Law in my district
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सरकार द्वारा छापा गया 1963 का नोटिफिकेशन कर्नाटक के कूर्ग जिले के प्रत्येक मूल निवासी को बिना लाइसेंस बंदूक रखने का अधिकार देता है। भारत के शेष जिलो में रहने वाले नागरिको को यदि अपनी एवं अपने परिवार की सुरक्षा के लिए बंदूक खरीदनी हो तो उन्हें सरकार से लाइसेंस लेने की जरूरत होती है।
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आम तौर पर सरकार द्वारा बंदूक का लाइसेंस सिर्फ चुनिंदा रसूखदार आदमियों को ही दिया जाता है, और इसके लिए 10 लाख से 25 लाख रू तक की घूस भी देनी होती है। किन्तु कूर्गी नागरिक सिर्फ रजिस्ट्रेशन करवा कर बंदूक खरीद सकता है। हमने कूर्ग का क़ानून अन्य जिलो में लागू करने के लिए जनमत संग्रह का प्रस्ताव किया है। हेश कोड़ : #CoorgGunLawReferendum
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(a) मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री यह क़ानून सिर्फ तब लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में किसी जिले की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इसे लागू करने के लिए हाँ (Yes) दर्ज करें।
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(b) यदि किसी जिले के 55% से कम नागरिको ने इस क़ानून को लागू करने की सहमती दी है तो मुख्यमंत्री इस क़ानून को किसी भी स्थिति में लागू नहीं करेंगे।
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(c) यदि कुल मतदाताओं के 55% नागरिको ने कूर्ग के क़ानून को अपने जिले में लागू करने के लिए अपनी सहमती दे दी है, तब भी इसे लागू करने का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। यदि मुख्यमंत्री चाहे तो जनमत के खिलाफ जाने का फैसला ले सकते है।
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मुख्यमंत्री यदि निचे दी गयी धाराओं को गेजेट में प्रकाशित कर देते है तो अमुक जिले में जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री को विधानसभा से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। इस तरह का जनमत संग्रह पूरी तरह से संवैधानिक है, अत: इसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत भी नहीं है।
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असाधारण ; प्रस्तावित राजपत्र अधिसूचना
EXTRAORDINARY ; PROPOSED GAZETTEE NOTIFICATION
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जिला कलेक्टर के लिए निर्देश :
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क्या आपके जिले में कूर्ग में लागू बंदूक का कानून लागू किया जाना चाहिए ? प्रश्न पर जनमत संग्रह कराने के आदेश जारी किये जाते है। निचे दी गयी प्रक्रिया को पालित करने के लिए आवश्यक कदम अविलम्ब उठाए जाएं।
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(1) इस जनमत संग्रह की अवधि 90 दिवस होगी। प्रारंभ होने के 90 दिनों पश्चात् जनमत संग्रह बंद हो जाएगा, तथा नतीजे सार्वजनिक कर दिए जायेंगे।
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(2) नागरिक पटवारी कार्यालय या पंचायत सचिव कार्यालय में जाकर उपरोक्त प्रश्न पर अपनी हाँ या ना दर्ज करवा कर रसीद प्राप्त कर सकेगा।
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(3) पटवारी मतदाताओं की हाँ/ना को जिले की वेबसाईट पर भी सार्वजनिक करेगा।
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(4) हाँ दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। किन्तु यदि मतदाता ना दर्ज करता है, तो उसे कोई शुल्क नहीं देना होगा।
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(5) जनमत संग्रह के दौरान मतदाता अपनी हाँ/ना को कितनी भी बार बदल सकता है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Cm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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मुख्यमंत्री जी, कूर्ग गन लॉ मेरे जिले में लागू करने हेतु जनमत संग्रह कराएं - #CoorgGunLawReferendum
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इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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#VoteVapsiPassbook
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[Proposed by : Vote Vapsi Khamba Movement]
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Wed May 10 2023 09:26:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp25 #वोट_वापसी_प्रधानमंत्री (Short Version)
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यह प्रस्तावित क़ानून प्रधानमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाता है। इस कानून को लोकसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यह क़ानून लागू होने से प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब यदि आप प्रधानमंत्री के काम से संतुष्ट नहीं है, और उसे बदलना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि एक सुझाव है।
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प्रधानमंत्री को बदलने की प्रक्रिया के मुख्य बिंदु निचे दिए है
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(1) प्रधानमंत्री के लिए आवेदन : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि प्रधानमंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर 25,000 रू का शुल्क लेकर उसे प्रधानमंत्री का प्रत्याशी घोषित करेगा, और एफिडेविट को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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(2) पदासीन प्रधानमंत्री निचे दी गयी दो स्थितियों में से अपनी पसंद के अनुसार उच्च संख्या को चुन सकते है :
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2a. नागरिको द्वारा दी गयी स्वीकृतियों की संख्या, अथवा
2b. प्रधानमंत्री का समर्थन करने वाले सांसदो को चुनाव में प्राप्त हुए मतों का कुल योग।
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(3) यदि किसी प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या पदासीन प्रधानमंत्री की स्वीकृतियों या प्रधानमंत्री का समर्थन करने वाले सांसदो को प्राप्त मतों की कुल संख्या से 1 करोड़ से अधिक हो जाती है तो सांसद सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को नया प्रधानमंत्री नियुक्त सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि, X मौजूदा पीएम है, और उसे लोकसभा में 300 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। मान लीजिये कि, इन 300 सांसदों को लोकसभा चुनाव में कुल 33 करोड़ मत प्राप्त हुए थे, और X को नागरिको से सीधे प्राप्त होने वाली स्वीकृतियो की संख्या 30 करोड़ है।
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(a) मान लीजिये, Y पीएम का एक प्रत्याशी है और उसे 32 करोड़ नागरिक स्वीकृतियां दे देते है तो भी X पीएम बना रहेगा, क्योंकि X को जिन सांसदों का समर्थन प्राप्त है, उनके मतों का योग 33 करोड़ है। किन्तु यदि Y को 34 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है तो X अपना इस्तीफा दे सकता है, या नहीं भी दे सकता है।
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(b) अब मान लीजिये, Y को 34 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है, किन्तु यदि X पीएम के रूप में अच्छा काम कर रहा है, अत: X की स्वीकृतियां बढ़कर 35 करोड़ हो जाती है, तो भी X पीएम बना रहेगा।
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इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक कमेंट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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" प्रधानमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने का क़ानून गेजेट में छापें - #VvpPm "
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#VoteVapsiPassbook
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[Proposed by : Vote Vapsi Khamba Movement]
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Wed May 10 2023 14:11:13 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp24 #वोट_वापसी_मुख्यमंत्री (Short Version)
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यह प्रस्तावित क़ानून मुख्यमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाता है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यह क़ानून आने से प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब यदि आप मुख्यमंत्री के काम से संतुष्ट नहीं है, और उसे बदलना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि एक सुझाव है।
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मुख्यमंत्री को बदलने की प्रक्रिया के मुख्य बिंदु निचे दिए है
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(1) मुख्यमंत्री के लिए आवेदन : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि मुख्यमंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर 10,000 रू का शुल्क लेकर उसे मुख्यमंत्री का प्रत्याशी घोषित करेगा, और एफिडेविट को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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(2) पदासीन मुख्यमंत्री निचे दी गयी दो स्थितियों में से अपनी पसंद के अनुसार उच्च संख्या को चुन सकते है :
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2a. नागरिको द्वारा दी गयी स्वीकृतियों की संख्या, अथवा
2b. मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायको को चुनाव में प्राप्त हुए मतों का कुल योग।
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(3) यदि किसी प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या पदासीन मुख्यमंत्री की स्वीकृतियों या मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायको को प्राप्त मतों की कुल संख्या से 10 लाख अधिक हो जाती है तो विधायक सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को नया मुख्यमंत्री नियुक्त सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि, 3 करोड़ आबादी एवं 200 विधानसभा सीटो के राज्य में X मौजूदा सीएम है, और उसे विधानसभा में 120 विधायको का समर्थन प्राप्त है। मान लीजिये, इन 120 विधायको को चुनाव में कुल 1 करोड़ मत मिले थे, और X को नागरिको से सीधे प्राप्त होने वाली स्वीकृतियो की संख्या 80 लाख है।
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(a) मान लीजिये, Y सीएम का एक प्रत्याशी है और उसे 90 लाख नागरिक स्वीकृतियां दे देते है तो भी X सीएम बना रहेगा, क्योंकि X को जिन विधायको का समर्थन प्राप्त है, उनके मतों का योग 1 करोड़ है। किन्तु यदि Y को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है तो X अपना इस्तीफा दे सकता है।
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(b) अब मान लीजिये, Y को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है, किन्तु यदि X सीएम के रूप में संतोषप्रद काम कर रहा है, अत: X की स्वीकृतियां बढ़कर यदि 1.15 करोड़ हो जाती है, तो भी X सीएम बना रहेगा।
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इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक कमेंट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Cm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड) भेजे। पत्र में यह लिखे -
.
" मुख्यमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने का क़ानून गेजेट में छापें - #VvpCm "
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#VoteVapsiPassbook
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[Proposed by : Vote Vapsi Khamba Movement]
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Wed May 10 2023 15:03:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp01 #खनिज_मुनाफा_बँटवारा (Short Version)
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#खम्बा : खनिज मुनाफा सीधे नागरिको के खातों में भेजने का प्रस्ताव
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यह कानून खनिजो की लूट रोकने के लिए लिखा गया है। इस प्रस्तावित क़ानून को देश में लागू करने के लिए संसद से पास करने की जरूरत नही है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। इस प्रस्तावित क़ानून में कुल 22 धाराएं है।
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खम्बा के मुख्य बिंदु निचे दिए है
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(1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के बाद देश के समस्त खनिज एवं सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी/ मुनाफा एवं किराया 135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता नामक बैंक खाते में जमा होगा। इकट्ठा हुयी इस राशि का 65% हिस्सा सभी भारतीयों में बराबर बँटेगा और 35% सेना को मजबूत बनाने में खर्च होगा।
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[स्पष्टीकरण : इस समय खनिज रॉयल्टी का पैसा सरकार के पास जाता है, और सरकार इसे अपने विवेक से खर्च करती है। खनिज, भूमि एवं प्राकृतिक संसाधन देश के नागरिको की संपत्ति है, न कि सरकार की। सरकार की आय टेक्स है और सरकार को अपना खर्चा सिर्फ टेक्स से निकालना चाहिए। अत: देश के खनिजों की बिक्री से आने वाल पैसा हर महीने सभी नागरिको में बराबर बांटा जाना चाहिए।]
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(2) खनिजो की नीलामी करके पैसा इकठ्ठा करने वाला राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में होगा। यदि खनिज अधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहा है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे बदलने के लिए स्वीकृति दे सकेंगे।
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[ स्पष्टीकरण : मौजूदा व्यवस्था में खनिज अधिकारी की नियुक्ति एवं निष्कासन सरकार के हाथ में होने के कारण खनन माफिया सत्ताधारी नेताओं एवं अधिकारीयों के साथ गठजोड़ बनाकर खनिजों को बड़े पैमाने पर लूट रहे है। दरअसल खोदे जा रहे खनिज का लगभग 20% हिस्सा ही रिकॉर्ड पर आता है, एवं शेष 80% उपरोक्त गठजोड़ द्वारा अवैध खनन के रूप में लूट लिया जाता है। इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए खनिज अधिकारी को वोट वापसी पासबुक के दायरे में किया गया है। ]
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(3) यदि खनिज अधिकारी या उसके स्टाफ के खिलाफ घपले आदि की कोई शिकायत आती है तो सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति सरकार के आदमी (जज आदि) के पास न होकर नागरिक समूह (जूरी मंडल) के पास रहेगी। जूरी मंडल में 12 से 1500 तक जूरी सदस्य हो सकेंगे। प्रत्येक मामले के लिए अलग जूरी होगी और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जायेगी। जूरी सिस्टम खनन माफिया एवं जजों के गठजोड़ को तोड़ देगा।
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खनन के मौजूदा आंकड़ो के अनुसार प्रत्येक भारतीय को प्रति माह लगभग 3000 रू तक राशि प्राप्त हो सकती है। खनिजों एवं जमीनों का बाजार भाव बढ़ने या घटने के साथ यह राशि घट या बढ़ सकती है। जूरी मंडल कैसे काम करेगा एवं वोट वापसी की प्रक्रिया क्या होगी आदि के विवरण के लिए खनिज मुनाफा बँटवारा क़ानून का पूरा ड्राफ्ट पढ़ें। पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक कमेंट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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" प्रधानमंत्री जी, खनिजो का मुनाफा सभी नागरिको में सीधे वितरित करने के लिए #खम्बा क़ानून गेजेट में छापें - #KhamBa
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#VoteVapsiPassbook
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[Proposed by : Vote Vapsi Khamba Movement]
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Wed May 10 2023 21:00:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp02 #रिक्त_भूमि_कर (Short Version)
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GST हटाकर रिक्त भूमि कर लाने का प्रस्ताव
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इस क़ानून के गेजेट में छपने के बाद जीएसटी रद्द हो जाएगा। निचे इस क़ानून के मुख्य बिंदु दिए गए है। प्रस्तावित रिक्त भूमि कर क़ानून में कुल 16 धाराएं है। रिक्त भूमि कर क़ानून का पूरे ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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इस क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही जीएसटी क़ानून रद्द होगा, तथा नागरिको द्वारा धारण की गयी अतिरिक्त भूमि 1% सालाना की दर से कर योग्य होगी। यह क़ानून भूमि पर कर नहीं लगाता, बल्कि अनुपयोगी एवं अकार्यशील भूमि को कर के दायरे में लेता है।
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रिक्त भूमि धारण करने वाला भू-स्वामी साल में 1 बार रिक्त भूमि कर का रिटर्न भरेगा। यदि वह आयकर दाता भी है तो चुकाए गये आयकर को देय रिक्त भूमि कर में से घटा दिया जाएगा। रिक्त भूमि कर से सरकार के पास उतना पैसा इकट्ठा हो जायेगा जितना Gst से हो रहा है।
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इस क़ानून के गेजेट में आने से निम्नलिखित बदलाव आयेंगे
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(1) उपभोक्ता के लिए : Gst वस्तुओं एवं सेवाओं के उपभोग पर कर है। आप जो भी वस्तु खरीदते है, उस पर Gst चुकाते है। जब आप बिल नहीं लेते तब भी आप यह कर चुकाते है, क्योंकि यह लागत में जुड़ा होता है। विभिन्न वस्तुओं पर Gst कि दरें 5% से लेकर 28% तक है। अत: आप जीवन यापन के लिए जितना भी खर्च करते है, उसका औसतन 15% सरकार के पास कर के रूप में चला जाता है।
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यदि कोई परिवार घर चलाने के लिए (राशन, बिजली-पानी-फोन के बिल, यात्रा, दवाइयां आदि) पर 20,000 रू मासिक खर्च करता है तो इसमें से 3,000 रू वह Gst के रूप में चुका देता है। रिक्त भूमि कर आने के बाद Gst हट जायेगा अत: वस्तुओं एवं सेवाओं के उपभोग पर उपभोक्ता को कोई कर नहीं चुकाना होगा।
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(2) कारोबारियों के लिए : इस क़ानून के आने के बाद माल बनाने, माल खरीदने, बेचने, स्टॉक रखने, ट्रांसपोर्ट करने आदि पर न तो कोई टेक्स चुकाना होगा, और न ही कारोबारी को इसका हिसाब सरकार को देना होगा। यदि व्यक्ति ऐसी वस्तु का कारोबार कर रहा है जो प्रतिबंधित एवं लाइसेंस शुदा वस्तुओं (जैसे मादक पदार्थ, विस्फोटक आदि) की श्रेणी में नहीं आती तो सरकार का उसके कारोबार में कोई दखल नहीं होगा।
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(3) भारत में धनिक वर्ग एवं नेता-अधिकारी आदि बड़े पैमाने पर जमीनों में निवेश करते है। मतलब वे जमीन खरीद कर छोड़ देते है, और दाम बढ़ने पर इसे बेच कर नयी जमीन ले लेते है। इस तरह कीमती जमीनों कि होर्डिंग (Hoarding) की जाती है। इस क़ानून की केन्द्रीय सरंचना यह है कि इस्तेमाल में न आने वाली भूमि पर कर लिया जाए, ताकि बाजार में जमीन की आवक बढ़े और जमीनों के दाम कम हो।
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इस क़ानून के आने के बाद जमीन के दाम औसतन 60% से 70% तक गिर जायेंगे। जमीन सस्ती होने से कम आय वर्ग वाले व्यक्तियों के लिए घर, कारखाना, कार्यालय आदि बनाने के लिए जमीन खरीदना आसान हो जायेगा।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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प्रधानमंत्री जी, GST हटाकर रिक्त भूमि कर क़ानून गेजेट में छापें - #CancelGst #EmptyLandTax
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#VoteVapsiPassbook
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[Proposed by : Vote Vapsi Khamba Movement]
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Wed May 10 2023 21:42:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#Vvp05 #जिला_जूरी_कोर्ट (Short Version)
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मुकदमों की सुनवाई के लिए विवेकशील नागरिको की जूरी का प्रस्ताव
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दुनिया में अदालतें चलाने की दो प्रणालियाँ मौजूद है – जज सिस्टम एवं जूरी सिस्टम। जज सिस्टम में मुकदमा सुनने और दंड देने की शक्ति सरकार के आदमी (जज आदि) के पास होती है, जबकि जूरी सिस्टम में यह काम नागरिको का समूह (जूरी मंडल) करता है।
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कई देशो जैसे फ़्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी, रूस, आदि में अदालतें चलाने के लिए जूरी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। जिन देशो में जूरी सिस्टम है वहां सरकारी भ्रष्टाचार एवं उत्पीड़न जज सिस्टम वाले देशो की तुलना में बेहद कम है।
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हमने सरल प्रकृति के आपराधिक मामलों में जूरी सिस्टम लागू करने के लिए जूरी कोर्ट नामक क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। इस काननू को लागू करने के लिए विधानसभा से अनुमति की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। #JuryCourt
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इस कानून के गेजेट में आने के बाद मुकदमों की सुनवाई जूरी करेगी, तथा प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। जिला पुलिस प्रमुख (SP) इस पासबुक के दायरे में आएगा। तब यदि आपके जिले की पुलिस ठीक से काम नहीं कर रही है, तो आप वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल करके एसपी को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। जूरी एवं वोट वापसी पासबुक की विस्तृत प्रक्रिया देखने के लिए पूरे ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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यदि आपका नाम जिले की वोटर लिस्ट में है और यदि ग्रैंड जूरी आपमें किसी मुकदमें को सुनने और फैसला देने का विवेक पाती है, तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी के गठन से सम्बंधित मुख्य बिंदु निम्नवत होंगे :
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(1) जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा व उनका चयन मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा किया जायेगा। लॉटरी द्वारा आए इन नागरिको में से विवेकशील नागरिकों का चयन करके जूरी का गठन होगा।
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(2) जूरी में न्यूनतम 12 सदस्य होंगे और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी का आकार 1500 सदस्यों तक बढ़ाया जा सकेगा।
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(3) प्रत्येक मामले के लिए अलग से जूरी होगी, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जायेगी। जो व्यक्ति जूरी ड्यूटी कर चुका है, उन्हें अगले 5 वर्ष तक जूरी ड्यूटी के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
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(4) जूरी ड्यूटी करने वाले नागरिक को 600 रू प्रति उपस्थिति व यात्रा व्यय मिलेगा।
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(5) जूरी सदस्य जज या जूरी प्रशासक की उपस्थिति में मुकदमा सुनेंगे और अपना फैसला बंद लिफाफे में जज को दे देंगे। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा मंजूर फैसला जूरी का फैसला माना जाएगा।
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(6) जूरी का फैसला परामर्श कारी, बाध्यकारी नहीं। जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या इसे पूरी तरह पलट सकता है, या इसे अक्षरश: लागू करने का आदेश दे सकता है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Cm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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मुख्यमंत्री जी, जिला जूरी क़ानून गेजेट में छापें - #JilaJuryCourt
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#VoteVapsiPassbook
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[Proposed by : Vote Vapsi Khamba Movement]
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Thu May 11 2023 15:04:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
#12Vvp #जूरी_पंचायत (Short Version)
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पंचायतो का प्रशासन सुधारने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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यह कानून पंचायत एवं स्थानीय स्तर के प्रशासन को सुधारने के लिए लिखा गया है। इस क़ानून को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे विधानसभा से पास करके राज्य में लागू कर सकते है। इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का लिंक कमेंट बॉक्स में देखें :
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प्रस्तावित जूरी पंचायत कानून के मुख्य बिंदु निचे दिए है :
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(1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. सरपंच
2. तहसील पंचायत समिती प्रधान
3. जिला पंचायत प्रमुख
4. नगर परिषद / नगर निगम पार्षद
5. नगर परिषद सभापति / मेयर
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी जनप्रतिनिधि के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है।
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आप अपनी हाँ SMS से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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(2) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निम्नलिखित 6 अधिकारियों, धारा (1) में दिए जनप्रतिनिधियों एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित नागरिक शिकायतें जूरी ड्यूटी के दायरे में रहेगी।
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जूरी का चयन लॉटरी से किया जाएगा, तथा मामले की हैसियत के अनुसार जूरी में 15 से 1500 नागरिक तक हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको अमुक अधिकारीयों एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज नागरिक शिकायतों की सुनवाई करके फैसला देना होगा। शिकायत की गंभीरता के अनुसार आप निम्न अधिकारियों पर जुर्माना आदि लगा सकते है।
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1. पटवारी
2. ग्राम विकास अधिकारी
3. तहसीलदार
4. गिरदावर
5. नगर परिषद सचिव
6. जिला परिषद सचिव
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(3) इस क़ानून के पारित होने के बाद से सरपंच का सेवा भत्ता न्यूनतम 40,000 रू एवं अधिकतम 50,000 मासिक होगा। सरपंच अधिकतम 8 पंचायत से चुनाव लड़ सकेगा और वह उतनी पंचायतो का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा, जितनी पंचायत में वह सरपंच चुना गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 6 पंचायत से चुनाव लड़ता है, और 5 पंचायत से जीत जाता है तो वह 2,00,000 रू मासिक प्राप्त करेगा।
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(4) इस क़ानून के पारित होने के बाद सभापति का सेवा भत्ता न्यूनतम 60,000 रू एवं अधिकतम 80,000 रू होगा। नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम पार्षद का न्यूनतम सेवा भत्ता 15,000 से 25,000 रू मासिक होगा। पार्षद किन्ही 5 वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा, और वह उतने वार्ड का सेवा भत्ता प्राप्त करेगा जितने वार्ड से वह चुना गया है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Cm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड) भेजे। पत्र में यह लिखे -
मुख्यमंत्री जी, जूरी पंचायत क़ानून गेजेट में छापें #JuryPanchayat
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#VoteVapsiPassbook
[Proposed by : Vote Vapsi Khamba Movement]
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Sun May 14 2023 19:32:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कुकी जनजाति के लोग बर्मा से भारत में घुसे। उनके पास हथियार थे। भारत के लोग हमेशा से इस बात में मानते है कि, यदि कोई हथियारबंद गिरोह या अपराधी उन पर हमला करते है तो भारतीय पुलिस एवं सेना तत्काल रूप से प्रकट होकर उन्हें बचा लेगी। अत: मणिपुर के ज्यादातर भारतीय नागरिको के पास आत्मरक्षा के लिए बंदूके नहीं थी।
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लेकिन पुलिस एवं सेना देर से पहुंची -- काफी देर से !! उनके देरी से पहुँचने की वजह कुछ भी हो सकती है। या तो वे इस तरह की त्वरित प्रतिकिया करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं है, या फिर नेताओ को मिशनरीज / कुकी द्वारा घूस के रूप में मोटी राशि दे दी गयी थी।
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नतीजे में 54 मणिपुरी मारे गए। यह आधिकारिक आंकड़ा है। किन्तु जिस तरह की ख़बरें मिल रही है उस आधार पर अनुमान है कि वास्तविक संख्या इससे काफी ज्यादा हो सकती है -- काफी काफी ज्यादा !! दो प्रशासनिक अधिकारियों (राजस्व) को घर से बाहर घसीट कर लाया गया और उन्हें गोली मार दी गयी। एक विधायक को बुरी तरह से पीटा गया और वह अस्पताल में भर्ती है।
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बर्मा से घुस आए कुकियों ने हजारो घरो को जला दिया है। दस हजार से ज्यादा लोगो को अपना घर बार छोड़कर भागना पड़ा और वे अब उत्तरी मणिपुर के राहत केम्पो में पड़े हुए है। और इनमें से ज्यादातर लोग अब फिर से अपने इलाके में नहीं लौटना चाहते। ये लोग अब अन्य जगहों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, मुंबई आदि में बसना चाहते है, किन्तु मणिपुर नहीं जाना चाहते।
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आप अंदाजा लगा सकते है कि, नागरिको को हथियार विहीन रखने के पक्ष में तर्क रखने वाले लोग कितने बुद्धिमान होते है !! हमें इन हत्याओं का दोषी इन सयाने लोगो को क्यों नहीं ठहराना चाहिए ?
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कुकी नागालेंड की एक जनजाति है जो कि भारत, बर्मा, बांग्लादेश में सदियों से निवास कर रही है। बांगलादेश ने अपने देश से सभी कुकी को खदेड़ दिया है।
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बर्मा के कुकी भारत में घुसे और उन्होंने पहले यहाँ जमीने खरीदी। फिर उन्होंने अपने वोटर कार्ड और आधार कार्ड बनवाए। हालांकि वाजपेयी ने 1998 के चुनाव प्रचार में NRC लाने का वादा किया था, और उन्होंने सरकार भी बनायी।
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आरएसएस ने यह वादा करने के बाद 5 बार सरकार बनायी और आज 7 + 5 + 4 = 16 साल तक सरकार में रहने के बाद भी भारत के एक भी आदमी के पास नागरिकता कार्ड नहीं है !!! (मतलब इस दौरान उन्होंने हिन्दुओ को "जगा जगा कर" 5 बार सरकार बना ली !! और हर बार उन्होंने ज्यादा हिन्दुओ को जगाया और ज्यादा सीटो के साथ सत्ता में आए !!!
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समाधान जागना और जगाना नहीं है !! समाधान नेता और पार्टी भी नहीं है। समाधान क़ानून है। अच्छे क़ानून।
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क़ानून सुधरेंगे तो ही देश सुधरेगा।
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इस समस्या के समाधान के लिए हमारे द्वारा प्रस्तावित क़ानून निम्नलिखित है। इन कानूनों के आने से इस तरह की घटना भारत के सीमावर्ती इलाको में दुबारा नहीं होगी।
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(1) #Vvp14 #राष्ट्रीय_नागरिकता_रजिस्टर
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इस प्रस्तावित क़ानून में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर #NRCI (National Register for Citizens of India) बनाने की प्रक्रिया दी गयी है। गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही नागरिकता रजिस्टर बनने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी।
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असम में NRC का जो ड्राफ्ट लागू किया गया था, उसमें गंभीर विसंगितियाँ एवं कमियां थी। उदाहरण के लिए असम का NRC न तो अवैध रूप से रह रहे आर्थिक विदेशियों को चिन्हित करता है, और न ही उन्हें डिपोर्ट करने की कोई व्यवस्था देता है। दुसरे शब्दों में, CAA एवं असम में किये गए NRC ने इस समस्या का समाधान नहीं किया है, बल्कि इस तरह की प्रोपेगेंडा खड़ा कर दिया है कि इस समस्या को सुलझा लिया गया है।
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हमारे द्वारा प्रस्तावित NRCI में इस तरह के प्रावधान किये गए है कि यह कानून आने के 1 वर्ष के भीतर सभी अवैध आर्थिक विदेशी या तो डिपोर्ट कर दिए जायेंगे या फिर स्वयं ही अपने मुल्कों में लौट जायेंगे।
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(2) #Vvp32 सीमावर्ती इलाको में कूर्ग का गन लॉ लागू करने हेतु जनमत संग्रह कराया जाए।
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सरकार द्वारा छापा गया 1963 का नोटिफिकेशन कर्नाटक के कूर्ग जिले के प्रत्येक मूल निवासी को बिना लाइसेंस बंदूक रखने का अधिकार देता है। भारत के शेष जिलो में रहने वाले नागरिको को यदि अपनी एवं अपने परिवार की सुरक्षा के लिए बंदूक खरीदनी हो तो उन्हें सरकार से लाइसेंस लेने की जरूरत होती है।
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हमारा प्रस्ताव है कि सीमावर्ती इलाको के जिलो में इस आशय का जनमत संग्रह करवाया जाना चाहिए कि क्या उनके जिले में कूर्ग का बंदूक क़ानून लागू किया जाये या नहीं। यदि जनमत संग्रह में किसी जिले के 55% नागरिक हाँ दर्ज कर दें तो पीएम या सीएम अमुक जिले में यह क़ानून लागू करने का फैसला ले सकते है।
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जिन जिन जिलो में यह क़ानून जनमत संग्रह में पास हो जाएगा, यह तय है कि कुकी या बंगलादेशी घुसपेठीए अमुक जिलो के शहरियों पर हमले करने की हिम्मत दिखाने से परहेज करेंगे। #CoorgGunLawReferendum
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उपरोक्त कानूनों के ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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फर्जी विपक्ष (fake opposition) के नेताओं एवं कार्यकर्ताओ से पूछिए कि उपरोक्त समस्या के समाधान के लिए वे किन कानूनों को सुधारने का सुझाव देते है ? या उनके हिसाब से क़ानून सुधारने की कोई जरूरत नहीं है। सिर्फ जागने और जगाने से सब खुद ब खुद ठीक हो जाएगा।
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Mon May 15 2023 14:14:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:
Abhinav Rajasthan joke- if MLA doesnt keep promise, then take his affidavit and file case in court. 10 saal court ke dhakke khao!!
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Mon May 15 2023 17:50:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Amit Upadhyay RrpMhulhasnagar MhUlhasnagar:
मणिपुर के कुर्की जाति के लोग मुस्लिम होते तो RSX इस्लाम को दोष देता, अब कुर्की क्रिश्चन हैं तो RSX क्रिश्चियनिटी को क्यों कुछ नहीं कहता ? RSX क्रिश्चियन मिशनरीज का एजेंट है।
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Wed May 17 2023 19:05:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
वोट वापसी पासबुक जारी कराने हेतु प्रस्तावित क़ानून
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#Vvp33 , #VoteVapsiPassbook
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इस क़ानून के गेजेट में आने के बाद राज्य के प्रत्येक नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला चिकित्सा अधिकारी इस पासबुक के दायरे में आयेंगे। जिस तरह आप वोटर कार्ड का प्रयोग किसी प्रतिनिधि को चुनने में करते है, उसी तरह से आप इस पासबुक का इस्तेमाल करके उपरोक्त 2 अधिकारीयों को बदल सकेंगे।
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इस क़ानून को राज्य में लागू करने के लिए विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में प्रकाशित कर सकते है। किसी जिले के 5 विधायक चाहे तो मुख्यमंत्री से कहकर यह क़ानून अपने जिले में लागू करा सकते है।
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यदि आप वोट वापसी पासबुक चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक खुला निर्देश पत्र भेजे. निर्देश पत्र में यह लिखें -
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मुख्यमंत्री जी, हमें वोट वापसी पासबुक जारी करें - #VoteVapsiPassbook
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-------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारंभ-----
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(1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्न लिखित 2 अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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(a) जिला पुलिस प्रमुख
(b) जिला चिकित्सा अधिकारी
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तब यदि आप अपने जिले के पुलिस प्रमुख या जिला चिकित्सा अधिकारी के काम काज से संतुष्ट नहीं है और इन्हें बदलकर किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS से भी दर्ज करवा सकेंगे।
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(2) पुलिस प्रमुख के लिए आवेदन : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो, अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की मुख्य लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या सरपंच का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(3) जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन : 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए आवश्यक जैसे MBBS, BAMS या इसके समकक्ष डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष पूर्ण हो चुके हो, तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(4) धारा 2 एवं 3 में दी गयी योग्यता वाला कोई भी नागरिक यदि कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति इसे बिना लॉग इन के देख सके।
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(5) मतदाता द्वारा स्वीकृति दर्ज करना : कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवार खाने जाकर पुलिस प्रमुख या चिकित्सा अधिकारी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि एक सुझाव है।
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(5.1) पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाता की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा।
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(5.2) मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(5.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रू फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रू होगी
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(5.4) यदि मतदाता स्वीकृती रद्द करवाता है तो पटवारी एक या अधिक नाम बिना फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(5.5) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[टिप्पणी 1 : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS से भी दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग – मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तो दिए गए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय से प्रतिरक्षा प्रदान करती है]
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(6) पुलिस प्रमुख एवं चिकित्सा अधिकारी का निष्कासन :
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(6.1) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है) के 50% से अधिक मतदाता पुलिस प्रमुख के किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
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(6.2) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला चिकित्सा अधिकारी के किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उसे जिला चिकित्सा अधिकारी नियुक्त कर सकते है।
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[टिपण्णी 2: नागरिको के बहुमत द्वारा सुझाए गए व्यक्ति को पुलिस प्रमुख या जिला चिकित्सा अधिकारी नियुक्त करना है या नहीं इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। यदि मुख्यमंत्री बहुमत के खिलाफ जाने का फैसला लेते है तो नागरिक इसी क़ानून की धारा (08) का इस्तेमाल करके इस पासबुक में मुख्यमंत्री का पेज भी जोड़ने का प्रस्ताव कर सकते है। ताकि नागरिक वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल करके मुख्यमंत्री को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर सके।]
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(7) मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री नागरिक चाहे तो इसी क़ानून की धारा (08) का इस्तेमाल करके निचे दिए गए जिला, राज्य एवं केंद्रीय स्तर के अन्य महत्त्वपूर्ण अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री के पेज भी इस पासबुक में जोड़ सकते है :
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(7.1) जिला शिक्षा अधिकारी
(7.2) जिला जज
(7.3) मिलावट रोक अधिकारी
(7.4) DD चेयरमेन
(7.5) RBI गवर्नर
(7.6) CBI डायरेक्टर
(7.7) BSNL चेयरमेन
(7.8) सेंसर बोर्ड चेयरमेन
(7.9) स्वास्थ्य मंत्री
(7.10) मुख्यमंत्री
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(8) जनता की आवाज
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(8.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके सार्वजनिक रूप से रखेगा।
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(8.2) यदि कोई मतदाता धारा 8.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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---------क़ानून ड्राफ्ट का समापन----------
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निचे वोट वापसी पासबुक की प्रक्रिया के मुख्य बिंदु दिए गए है, ताकि पाठक वोट वापसी पासबुक की प्रक्रिया को ठीक से समझ सके
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(01) वोट वापसी पासबुक की प्रक्रिया में आप अपनी स्वीकृति सुझाव (Suggestion) के रूप में देते है, मत (vote) के रूप में नहीं।
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(02) इस प्रक्रिया में आपकी स्वीकृति गुप्त नहीं रहती। यह देखा जा सकता है कि आपने किसे स्वीकृति दी है।
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(03) आप किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर या SMS द्वारा अपनी स्वीकृति दे सकते है।
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(04) स्वीकृति देने के लिए प्रति स्वीकृति आप 3 रू शुल्क देते है।
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(05) आप कितनी भी बार अपनी स्वीकृति बदल सकते है।
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(06) सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले प्रत्याशी को अमुक पद पर नियुक्त करने का अंतिम फैसला Cm / Pm के पास होता है।
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(07) वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल मुख्य अधिकारियों जैसे जिला पुलिस प्रमुख, जिला शिक्षा अधिकारी, सेंसर बोर्ड चेयरमेन एवं अप्रत्यक्ष प्रतिनिधियों जैसे मुख्यमंत्री एवं मंत्रियो को बलदने में किया जाता है।
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(08) वोट वापसी पासबुक प्रक्रिया Cm / Pm के अधीन काम करती है। चुनाव आयोग की इसमें कोई भूमिका नहीं होती।
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इस क़ानून का पीडीऍफ़ लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें
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Wed May 17 2023 20:51:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Mahesh Kumar Jamshedpur LsCandidate:
Unless all Manipuries are given guns, Burmese aided by CIA will take over Manipur. Soldiers , policemen will NOT be sufficient.
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Sun May 21 2023 20:14:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
(1) व्यवस्था (System) किसे कहते है ?
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नियमों एवं कानूनों के समुच्चय (Set) को व्यवस्था कहते है।
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(2) नियम या क़ानून किसे कहते है ?
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क्या करने की अनुमति है, एवं क्या करने की अनुमति नहीं है की सूचना देने वाले पाठ्य को नियम या क़ानून कहते है। विशिष्ट एवं संक्षिप्त होने के कारण इन्हें हमेशा बिन्दुओ के रूप में लिखा जाता है।
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(3) नियम एवं कानून में क्या अंतर है ?
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(3.1) नियम निजी संस्थाओ द्वारा बनाए जाते है, जबकि क़ानून बनाने की शक्ति सिर्फ सरकार के पास होती है
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(3.2) नियमों को तोड़ने पर आर्थिक या करावासीय दंड का सामना नहीं करना पड़ता, जबकि क़ानून तोड़ने पर हमेशा दंड का सामना करना पड़ता है।
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(4) सरकार किसे कहते है ?
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अमुक क्षेत्र में जिस संस्था के पास सेना रखने की शक्ति होती है, उस संस्था को सरकार कहते है।
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(5) सरकार में कौन लोग होते है ?
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मुख्यत: सांसदो और विधायको के समूह से सरकार बनती है। सांसद संसद में बैठते है, और विधायक विधानसभाओ में।
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(6) सरकार का मुख्य काम क्या है ?
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सरकार का एक मात्र काम क़ानून बनाना है। क़ानून बनाने के अलावा उन्हें कुछ नहीं करना होता। संसद और विधानसभा उनके दफ्तर है, जहाँ बैठकर वे क़ानून बनाते है।
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(7) जो लोग क़ानून तोड़ते है क्या उन्हें पकड़ना सरकार का काम नहीं है ?
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नहीं। सरकार का काम उन्हें पकड़ना नहीं है। सरकार उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस के क़ानून बना देगी और पुलिस वाले कानून तोड़ने वालो को पकड़ते रहेंगे। इसी तरह जो भी काम करना हो सरकार उस काम को करने के लिए क़ानून बनाती है बस। क़ानून बनाने के अलावा सरकार और कुछ नहीं करती, और न ही कुछ कर सकती है।
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(8) क्या सरकार व्यवस्था नहीं बनाती ?
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इसका जवाब ऊपर दिया जा चुका है कि व्यवस्था अपने आप में स्वतन्त्र रूप से कुछ नहीं होता। व्यवस्था का मूल तत्व क़ानून है। सरकार सिर्फ क़ानून बनाती है, और कानूनों के सेट को आप व्यवस्था कहने लगते है। तो दरअसल जब आप कहते है कि, भारत की व्यवस्था (System) खराब है, तो आप कह रहे होते है कि भारत के क़ानून ख़राब है।
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(9) किसी व्यवस्था में परिवर्तन कैसे किया जा सकता है ?
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जैसा कि ऊपर बताया है कि व्यवस्था अपने आप में कानूनों का एक सेट है, अत: जैसे ही कानून में बदलाव किया जायेगा वैसे ही व्यवस्था बदल जायेगी।
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भारत की ट्रेफिक व्यवस्था के उदाहरण से इसे समझते है। भारत में सड़कें बनाने और टोल वसूलने के कुछ कानून है, गाड़ी खरीदने और इसे चलाने के फिर से कुछ क़ानून है। इसी तरह चालको के सड़क पर व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए RTO एवं ट्रेफिक पुलिस विभाग है, और इन विभागों में काम करने वाले अधिकारीयों के लिए सेवा शर्तो के फिर से कुछ क़ानून है।
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इस तरह भारत भर में कुछ 100 से ज्यादा तरह के क़ानून मिलकर भारत में ट्रेफिक व्यवस्था का निर्माण करते है। और इसी तरह से पुलिस व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, बिजली व्यवस्था, जलदाय व्यवस्था आदि सैंकड़ो व्यवस्थाएं है, और प्रत्येक व्यवस्था के पीछे फिर से सैंकड़ो क़ानून है।
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इन सैंकड़ो कानूनों में से आप जैसे ही किसी एक कानून को छेड़ेंगे वैसे ही व्यवस्था बदल जायेगी। उदारहण के लिए ट्रेफिक व्यवस्था का एक क़ानून यह कहता है कि – जब भी आप कोई वाहन सड़क पर लायेंगे तो इसके आगे पीछे वाहन का नंबर लिखा होना चाहिए।
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अब यदि आप इस बिंदु को निकाल देते है, तो सड़क पर अनियंत्रित गति से दौड़ने वाले वाहनों की संख्या बढ़ जायेगी और लोग बेतहाशा ट्रेफिक रूल तोड़ने लगेंगे। क्योंकि अब ट्रेफिक रूल तोड़ने वालो को पकड़ा नहीं जा सकता। इस तरह क़ानून के सिर्फ एक बिंदु में बदलाव करने से पूरी व्यवस्था में दोष आना शुरू हो जाता है।
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इस तरह यदि कानूनों में दोष नहीं है तो व्यवस्था में भी दोष नहीं रहेगा, और यदि कानून दोषपूर्ण है तो व्यवस्था भी दोषपूर्ण हो जाएगी। और एक दोषपूर्ण व्यवस्था हमेशा दोषपूर्ण ढंग से ही काम करगी। क्योंकि प्रक्रिया एवं नतीजो का दोहराव ही व्यवस्था की मुख्य विशेषता है।
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सार : यदि आपको देश का सिस्टम सुधारना है तो आपको क़ानून सुधारने होंगे। जैसे जैसे क़ानून सुधरेंगे वैसे वैसे सिस्टम में सुधार आएगा।
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अत: जब भी आपका सामना किसी ऐसे व्यक्ति से हो जो देश की व्यवस्था में बदलाव लाने की बात कर रहा हो तो उससे पूछे भारत की अमुक व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए वे किन क़ानूनो को बदलने का प्रस्ताव कर रहे है ? और आप देखेंगे कि उसके पास कानूनों में बदलाव की न तो कोई रूप रेखा है और न ही प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट है। वह सिर्फ “व्यवस्था परिवर्तन” शब्द बेचकर तमाशा खड़ा कर रहा है।
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Wed May 24 2023 09:44:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Credit : Atal Bihari Vajpayee !!
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Sun May 28 2023 20:13:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
महिला ओलम्पिक खिलाड़ियों को पुलिस द्वारा अरेस्ट करने के तरीके पर आप क्या कहेंगे ?
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कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि, महिला पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करने के दौरान अनावश्यक रूप से पकड़ कर घसीटा है, और धक्का मुक्की की है।
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सभी को पता है कि पुलिस अब भी इन्हे VIP ट्रीटमेंट ही दे रही है। क्योंकि सभी जानते है कि हमारी पुलिस इस तरह से सिर्फ तब पेश आती है, जब मामला VIPs का हो।
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(1) यदि ये महिलाएं ओलम्पिक खिलाडी न होकर सामान्य महिलाएं होती,
(2) यदि यह दिल्ली न होकर कोई अन्य छोटा शहर / क़स्बा / गाँव होता
(3) और यदि वहां पर मीडिया के कैमरे नहीं होते
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तो जैसा कि ज्यादातर होता है -- इन्हे पहले पुरुष पुलिस (महिला पुलिस नहीं) घटना स्थल पर ही कई झापड़ लगाते, और फिर इन्हे माँ बहन की गालियां देते हुए उठाकर स्टेशन लाते। और थाने में जाने के बाद भी जितना ही इनका प्रतिरोध बढ़ता उतना ही तरह तरह का दमन भी बढ़ता जाता।
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देश में इस तरह की घटनाएं हजारों नहीं तो सैंकड़ो की संख्या में रोजाना घटती ही रहती है। इसमें नया क्या है, मुझे समझ नहीं आ रहा !! अच्छा, ये ओलम्पिक खिलाडी है, इसीलिए पुलिस को इनसे तमीज से पेश आना चाहिए यूं !!
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क्या इन ओलम्पियनों ने अपनी जिंदगी में कभी पुलिस को कॉमन मेन के साथ दुर्व्यवहार करते नहीं देखा होगा ? क्या इन्हे पता नहीं कि हमारी पुलिस नागरिको के साथ कैसे पेश आती है ? क्या ये सब इन्हे पता नहीं है ? कौनसे देश से है क्या लोग ? इंग्लैंड या अमेरिका से ? या भारत से ?
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क्या इन्होने अपनी पूरी जिंदगी में 5 मिनिट भी भारत की पुलिस व्यवस्था को सुधारने पर खर्च किये ? जब लॉकडाउन में 10 करोड़ लोगो को सैंकड़ो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था, और जब रास्ते में पुलिस मिल जाती थी तो उन्हें पीटती भी थी, तब क्या इन खिलाड़ियों ने अपने सोशल मिडिया एकाउंट पर इसका विरोध करने हुए कोई ट्वीट किया था ?
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जब पुलिस लोगो को पकड़ पकड़ कर डंडे के जोर से उन्हें चिकेन टिक्का मसाला दे रही थी, तब क्या इन्होने विरोध किया था ?
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बहरहाल, मैं पुलिस-प्रशासन द्वारा किये गए सभी अमानवीय दुर्व्यवहार के खिलाफ हूँ। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि दुर्व्यवहार किया गया कुछ का कहना है कि, उनके प्रतिरोध के चलते आवश्यक न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।
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यदि उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया है तो मैं पुलिस द्वारा किये गए इस दुर्व्यवहार का भी समर्थन नहीं करता। किन्तु मेरे पास इनके लिए कोई संवेदनाएं नही। क्योंकि मेरी संवेदनाए इन्क्लूसिव है, एक्सक्लूसिव नहीं।
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भारत की पुलिस व्यवस्था को सुधारने के लिए मैंने जिला पुलिस प्रमुख को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया है। यदि पुलिस प्रमुख वोट वापसी पासबुक के अधीन होता तो वह इनसे इस तरह कतई पेश नहीं आता। वह इन्हें गिरफ्तार करने के दौरान मानवीय तरीका अपनाता।
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ये पहलवान लोग पुलिस प्रमुख को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने का कभी समर्थन नहीं करेंगे। क्योंकि यदि ये ऐसा करते है तो -
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(1) इन्हें आइन्दा के लिए सरकार ओलम्पिक में कभी नहीं भेजेगी।
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(2) इन्हें मैडल जीतने के एवज में जितनी भी सरकारी सुविधाएँ, भत्ते, मुफ्त आवास, सरकारी मेहमान नवाजी आदि मिल रही है, वो सब बंद हो जायेगी।
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(3) सबसे बड़ी समस्या इनके साथ यह होगी कि फिर कभी आप इनकी शक्लें टीवी आदि पर नहीं देख पायेंगे !!
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दरअसल ये लोग अपनी व्यक्तिगत लड़ाई लड़ रहे है, व्यवस्था सुधारने में इन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है।
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[ और एक बात -- मैं खेलकूद, फ़िल्में, किताबें, गायन, नर्तन आदि टाइप की अनुत्पादक उपलब्धियों को देश की उपलब्धि नहीं मानता। ये सभी व्यक्तिगत उपलब्धियों के खाते की उपल्बधियां होती है। देश को इससे कुछ लाभ नहीं होता।
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इस तरह की व्यक्तिगत या आभासी अनुत्पादक उपलब्धियों के महिमा मंडन से देश को सिर्फ नुकसान ही होता है। क्योंकि इससे उत्पादकता बढ़ने की जगह उल्टे गिरती है। अत: इस तरह की व्यक्तिगत उपल्बधियों का महिमा मंडन का परिणाम नकारात्मक है। ]
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यदि आप भारत की अदालतें एवं पुलिस को सुधारना चाहते है तो वोट वापसी पासबुक जारी करवाने के लिए कार्य करें।
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#VoteVapsiPassbook
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#VoteVapsiSp
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Tue May 30 2023 05:18:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:
Fake vaccine certificates in Europe rich men
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Injected with a saline solution, Dr Sousa-Faro, president of European pharma giant PharmaMar, is among 2,200 European elites charged with being falsely vaccinated against #Covid-19. Afraid of the jab, the elites paid thousands to be added to the immunization register.
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<https://twitter.com/DietHeartNews/status/1533138263074021377>
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