> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2023-05-28

Pawan Jury BhilwaraRj

महिला ओलम्पिक खिलाड़ियों को पुलिस द्वारा अरेस्ट करने के तरीके पर आप क्या कहेंगे ?
.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि, महिला पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करने के दौरान अनावश्यक रूप से पकड़ कर घसीटा है, और धक्का मुक्की की है।
.
सभी को पता है कि पुलिस अब भी इन्हे VIP ट्रीटमेंट ही दे रही है। क्योंकि सभी जानते है कि हमारी पुलिस इस तरह से सिर्फ तब पेश आती है, जब मामला VIPs का हो।
.
(1) यदि ये महिलाएं ओलम्पिक खिलाडी न होकर सामान्य महिलाएं होती,
(2) यदि यह दिल्ली न होकर कोई अन्य छोटा शहर / क़स्बा / गाँव होता
(3) और यदि वहां पर मीडिया के कैमरे नहीं होते
.
तो जैसा कि ज्यादातर होता है -- इन्हे पहले पुरुष पुलिस (महिला पुलिस नहीं) घटना स्थल पर ही कई झापड़ लगाते, और फिर इन्हे माँ बहन की गालियां देते हुए उठाकर स्टेशन लाते। और थाने में जाने के बाद भी जितना ही इनका प्रतिरोध बढ़ता उतना ही तरह तरह का दमन भी बढ़ता जाता।
.
देश में इस तरह की घटनाएं हजारों नहीं तो सैंकड़ो की संख्या में रोजाना घटती ही रहती है। इसमें नया क्या है, मुझे समझ नहीं आ रहा !! अच्छा, ये ओलम्पिक खिलाडी है, इसीलिए पुलिस को इनसे तमीज से पेश आना चाहिए यूं !!
.
क्या इन ओलम्पियनों ने अपनी जिंदगी में कभी पुलिस को कॉमन मेन के साथ दुर्व्यवहार करते नहीं देखा होगा ? क्या इन्हे पता नहीं कि हमारी पुलिस नागरिको के साथ कैसे पेश आती है ? क्या ये सब इन्हे पता नहीं है ? कौनसे देश से है क्या लोग ? इंग्लैंड या अमेरिका से ? या भारत से ?
.
क्या इन्होने अपनी पूरी जिंदगी में 5 मिनिट भी भारत की पुलिस व्यवस्था को सुधारने पर खर्च किये ? जब लॉकडाउन में 10 करोड़ लोगो को सैंकड़ो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था, और जब रास्ते में पुलिस मिल जाती थी तो उन्हें पीटती भी थी, तब क्या इन खिलाड़ियों ने अपने सोशल मिडिया एकाउंट पर इसका विरोध करने हुए कोई ट्वीट किया था ?
.
जब पुलिस लोगो को पकड़ पकड़ कर डंडे के जोर से उन्हें चिकेन टिक्का मसाला दे रही थी, तब क्या इन्होने विरोध किया था ?
.
--------------
.
बहरहाल, मैं पुलिस-प्रशासन द्वारा किये गए सभी अमानवीय दुर्व्यवहार के खिलाफ हूँ। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि दुर्व्यवहार किया गया कुछ का कहना है कि, उनके प्रतिरोध के चलते आवश्यक न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।
.
यदि उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया है तो मैं पुलिस द्वारा किये गए इस दुर्व्यवहार का भी समर्थन नहीं करता। किन्तु मेरे पास इनके लिए कोई संवेदनाएं नही। क्योंकि मेरी संवेदनाए इन्क्लूसिव है, एक्सक्लूसिव नहीं।
.
भारत की पुलिस व्यवस्था को सुधारने के लिए मैंने जिला पुलिस प्रमुख को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया है। यदि पुलिस प्रमुख वोट वापसी पासबुक के अधीन होता तो वह इनसे इस तरह कतई पेश नहीं आता। वह इन्हें गिरफ्तार करने के दौरान मानवीय तरीका अपनाता।
.
ये पहलवान लोग पुलिस प्रमुख को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने का कभी समर्थन नहीं करेंगे। क्योंकि यदि ये ऐसा करते है तो -
.
(1) इन्हें आइन्दा के लिए सरकार ओलम्पिक में कभी नहीं भेजेगी।
.
(2) इन्हें मैडल जीतने के एवज में जितनी भी सरकारी सुविधाएँ, भत्ते, मुफ्त आवास, सरकारी मेहमान नवाजी आदि मिल रही है, वो सब बंद हो जायेगी।
.
(3) सबसे बड़ी समस्या इनके साथ यह होगी कि फिर कभी आप इनकी शक्लें टीवी आदि पर नहीं देख पायेंगे !!
.
दरअसल ये लोग अपनी व्यक्तिगत लड़ाई लड़ रहे है, व्यवस्था सुधारने में इन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है।
.
[ और एक बात -- मैं खेलकूद, फ़िल्में, किताबें, गायन, नर्तन आदि टाइप की अनुत्पादक उपलब्धियों को देश की उपलब्धि नहीं मानता। ये सभी व्यक्तिगत उपलब्धियों के खाते की उपल्बधियां होती है। देश को इससे कुछ लाभ नहीं होता।
.
इस तरह की व्यक्तिगत या आभासी अनुत्पादक उपलब्धियों के महिमा मंडन से देश को सिर्फ नुकसान ही होता है। क्योंकि इससे उत्पादकता बढ़ने की जगह उल्टे गिरती है। अत: इस तरह की व्यक्तिगत उपल्बधियों का महिमा मंडन का परिणाम नकारात्मक है। ]
.
यदि आप भारत की अदालतें एवं पुलिस को सुधारना चाहते है तो वोट वापसी पासबुक जारी करवाने के लिए कार्य करें।
.
#VoteVapsiPassbook
.
#VoteVapsiSp