Posts for 2018-12

Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 20:47:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ratan Jain:

राईट टू रिकाल कानून की जानकारी लेते हुए घनश्याम जी शर्मा उनकी पत्नी वन्दना शर्मा ने कानून को समझते हुए 2/12/18 से 5/12/18 तक अपना अमूल्य समय निकाल कर राईट टू रिकाल पार्टी के जहाज पुर विधानसभा के प्रत्याशी रतन सिंह जैन के साथ प्रचार-प्रसार करने वादा किया

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 20:54:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

भीलवाड़ा के गांधी बाजार में भीलवाड़ा के चुनाव प्रत्याशी पवन कुमार शर्मा के राइट टू रिकॉल जूरी सिस्टम प्रचार में पेंपलेट वितरित करते हुए

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 20:54:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Jitendra Banjara:

राइट टू रिकॉल व जरूरी कानूनों का प्रचार

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 20:55:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

भीलवाड़ा के गांधी बाजार में राइट टू रिकॉल व ज्यूरी सिस्टम की जानकारी देकर पेम्पलेट वितरित करते हुए ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 20:56:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से आज दिनांक 1-12 -2018 शनिवार ~ शहर में विभिन्न नागरिकों को कानून प्रचार के पेम्पलेट वितरित किए व अच्छे कानूनों पर चर्चा करी |
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राइट टू रिकॉल कानून सभी नागरिकों को बहुत पसंद आया | सभी नागरिक एकमत थे कि यह कानून देश में नहीं आ पाएंगे | कोई भी नेता या पार्टी अपने पांव पर कुल्हाड़ी नहीं मारेगी |......
मेरा जवाब रहा :- महात्मा चंद्रशेखर, महात्मा भगत सिंह, महात्मा सान्याल, जैसे क्रांतिकारी पूर्वज भी यह सोच लेते की विश्व की सबसे ताकतवर सेना को भारत से नहीं भगाया जा सकता है तो हम हर कोई पीटर, थॉमस, एंडरसन होते | .....
आज दिन भर मजा रहा |
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जय हिंद

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 21:56:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Mahaveer Regar:

"राइट टू रिकॉल" कानून की जानकारी देते हुए शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र के नागरिको को
<https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=563544197157112&id=527176697460529>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 22:01:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से आज दिनांक 30. 11. 2018 शुक्रवार : आज प्रचार के तीसरे दिन करीब 70 पर्चे बांटे | आज का दिन सरकारी कर्मचारियों के साथ व्यतीत हुआ | उन लोगों से मिलने के बाद जो सकारात्मक प्रतिक्रिया मुझे मिली ,वह बहुत लाजवाब है | आज के अनुभव से यह लगा कि भीलवाड़ा शहर के काफी नागरिकों तक राइट टू रिकॉल, जूरी सिस्टम ,नार्को टेस्ट , डी डीआर सी एम कानून जैसे कानूनों की जानकारी हम लोग अच्छी खासी फैलाने में कामयाब रहे हैं |
फोटो केवल उनके ही लिए जो सरकारी कर्मचारी नहीं है |
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जय श्री राम

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 22:03:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

आज 29/11/2018 गुरूवार मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से ~ राईट टू रिकॉल कानून, ज्यूरी सिस्टम, टीसीपी, हथियार बद्ध नागरिक समाज कानून के प्रचार हेतु चुनावी प्रत्याशी पवन जी शर्मा के पक्ष में भीलवाड़ा शहर के विभिन्न नागरिकों को 24 पेज का पैम्पलैट वितरित की | सभी से आग्रह किया कि इसे पूरा पढ़कर अपने परिचितों तक पहुँचायें व यह मैसेज आगे पहुँचायें |
नागरिकों से बहुत सकारात्मक रेसपोंस मिला है |
वन्दे मातरम्

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 22:06:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से आज दिनांक 28/11/2018 राइट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम , टीसीपी, राइट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी, जैसे कई कानूनों के प्रचार के लिए विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी की तरफ से करीब 50 पंपलेट आज नागरिकों को वितरित किए | उनसे पढ़कर वापस देने का आग्रह किया | साथ ही निवेदन किया कि अपने अपने मित्रों को पढ़वा कर वापस देवें |
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वापस लौट आने की बात पर सबका एक ही सवाल था ......वापस लौट आना क्यों ?
हमारे पास पर्याप्त धन नहीं है हम सीमित साधनों से अधिकतम नागरिकों तक यह कानूनों की जानकारी पहुंचाना चाहते हैं | आपसे सहयोग की अपेक्षा है |
यह जवाब सबको बहुत अच्छा लगा | मुझे लगता है कि प्रत्येक नागरिक जिसको मैंने पेम्पलेट दिया वह कम से कम पांच सात नागरिकों को पढ़वायेगें |
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महिला नागरिकों के पिक नहीं डाल रहा हूं |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 22:08:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ratan Jain:

राईट टू रिकाल पार्टी के प्रत्याशी को इस कानून
की जानकारी देने पर मोहल्ले के नागरिको ने माला पहना कर स्वागत किया

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 22:13:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

आज 30/11/2018 शुक्रवार मैं ईश्वर चौधरी भीलवाड़ा राजस्थान से ~ राईट टू रिकॉल कानून, ज्यूरी सिस्टम, टीसीपी, हथियार बद्ध नागरिक समाज कानून के प्रचार हेतु चुनावी प्रत्याशी पवन जी शर्मा के पक्ष में भीलवाड़ा शहर के विभिन्न नागरिकों को 24 पेज का पैम्पलैट वितरित की | सभी से आग्रह किया कि इसे पूरा पढ़कर अपने परिचितों तक पहुँचायें व यह मैसेज आगे पहुँचायें |
नागरिकों से बहुत सकारात्मक रेसपोंस मिला है |
वन्दे मातरम्

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 01 2018 22:27:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत को राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम क़ानूनो की जरूरत क्यों है ?

भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियो एवं मिशनरीज का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है। मेरे मेरे विचार में, यदि ये क़ानून लागू नहीं किये गये तो भारत में विज्ञान-गणित की शिक्षा का स्तर गिरता जाएगा , बड़े पैमाने पर गरीबी आएगी, बेरोजगारी बढ़ेगी , हम इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पिछड जायेंगे , स्थनीय निर्माण इकाइयां या तो बंद हो जायेगी या विदेशी इनका अधिग्रहण कर लेंगे , हमारी सेना आयातित हथियारों पर निर्भर होकर और भी कमजोर हो जायेगी और भारत में बड़े पैमाने पर इसाई धर्म में धर्मान्तरण होंगे। इन कानूनों के अभाव में हमारी भारत कुछ ही वर्षो में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का एक उपनिवेश बन कर रह जाएगा। यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। यदि कोई उपाय नहीं किया गया तो इसे रोका नहीं जा सकता। क्योंकि इस प्रक्रिया को बढाने वाले क़ानून पहले से ही मौजूद है। और यदि इस दौरान हमारा सामना युद्ध से होता है , जिसकी सम्भावना बेहद ज्यादा है, तो भारत का इराकीकरण हो जाएगा। यदि ये क़ानून लागू नहीं किये गए तो ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि भारत को जातीय एवं धार्मिक आधार पर एक सिविल वॉर का सामना करना पड़ेगा जिसके नतीजे में भारत के भौगोलिक रूप से और भी विभाजित होने की संभावनाएं प्रबल है।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 02 2018 07:35:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बेवक़ूफ़ अपराधी क़ानून तोड़ते है ,
लेकिन चालाक अपराधी वैसा क़ानून बनाकर करते है !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 02 2018 09:50:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ratan Jain:

राईट टू रिकाल कानून की जानकारी देते हुए

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 02 2018 15:14:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ratan Jain:

कोटडी गांव में राईट टू रिकाल कानून की जानकारी दि उससे लोगो में जागरूकता आई उन्होंने ये विशवास दिलाया कि वे वोट देकर इस कानून का समर्थन करेंगे इनका मानना है कि ये कानून बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 02 2018 17:41:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ratan Jain:

राईट टू रिकाल कानून की जानकारी देते समय कोटडी के लोगों को इसकी जानकारी हुई तो इस कानून को समझने के लिए लोगों की भीड़ जमा होने लगी लोग इस कानून को जानने में ज्यादा से ज्यादा रूचि दिखाने लगे इस कानून को लाने के लिए वोट करने का वादा किया

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 02 2018 18:32:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल को लेकर पूछे जाने वाले कुछ सामान्य प्रश्न एवं उनका स्पष्टीकरण :
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१) भारत बहुत बड़ा देश है। राईट टू रिकॉल जैसे क़ानून छोटे देशो के लिए तो उपयुक्त है, किन्तु भारत जैसे देश के लिए ?

देश बड़ा छोटा होने से कुछ नहीं होता। प्रत्येक देश प्रशासन की दृष्टी से छोटी छोटी इकाइयों में विभाजित होता है। देश में राज्य , राज्य में जिले, जिलो में तहसील एवं गाँव आदि होते है। एक जिले में एक पुलिस प्रमुख होता है। भारत का जिला हो या अमेरिका का जिला हो या स्विट्जर्लेंड का जिला हो, जिले की आबादी एवं आकार कमोबेश एक जैसा ही रहता है। पुलिस प्रमुख या किसी जिला अधिकारी को शेष भारत से कोई मतलब नहीं , उसे सिर्फ अपना जिला देखना होता है।
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२) राईट टू रिकॉल आने से रोज रोज चुनाव होने लगेंगे ?

नहीं होंगे। अधिकारी को बदलने का अधिकार सिर्फ आपको नहीं दिया जा रहा है। रिकाल सिर्फ तब होगा जब किसी जिले के नागरिको का बहुमत रिकॉल करना चाहेगा। मान लीजिये किसी जिले में १० लाख मतदाता है, एवं पदासीन जिला पुलिस प्रमुख को ६ लाख अनुमोदन प्राप्त है। तो रिकॉल सिर्फ तब होगा जब किसी उम्मीदवार को पदासीन पुलिस प्रमुख से अधिक अनुमोदन प्राप्त हो एवं यह अनुमोदन ५ लाख से अधिक भी हो। तो कुछ हजार मतदाता के चाहने से रिकॉल होना संभव नहीं है। जब तक जिले के नागरिको का बहुमत नहीं चाहेगा तब तक रिकॉल नहीं होगा। लेकिन जैसे जैसे पुलिस प्रमुख का भ्रष्टाचार एवं निकम्मापन नागरिको के सामने आता जाएगा वैसे वैसे उसके अनुमोदनो की संख्या कम होती जाएगी। और जब उसका प्रदर्शन बेहद घटिया स्तर तक पहुँच जाएगा तो रिकाल होगा।

व्यवहारिक रूप से यह देखने में आया है कि रिकॉल की कभी नौबत ही नहीं आती। क्योंकि अधिकारी रिकॉल होने की सम्भावना देखकर तुरंत अपने व्यवहार में परिवर्तन ले आता है।
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३) राईट टू रिकॉल विदेशी कांसेप्ट है। हम स्वदेशी में मानते है।

पहली बात -- भारत की रेल से लेकर प्लेन एवं आपके मोबाइल से लेकर फेसबुक तक सब विदेशी है , तो पहले आप इन सब का त्याग कीजिये। वोट देने का अधिकार भी विदेश से ही आया है। अत: आप अपना मतदाता पहचान पत्र रद्द करवाइए और घोषणा कीजिये कि आप आइन्दा वोट नहीं करेंगे। क्योंकि वोट देना एवं अपने जनप्रतिनिधियों को चुनना भी एक विदेशी कोंसेप्ट है। पर आप ऐसा नहीं करेंगे। क्योंकि आप वोट करने का अधिकार चाहते है। हमने इसमें बस इतना जोड़ा है कि आपके पास वोट देने के साथ ही अपना वोट फिर से लौटा देने का अधिकार भी हो। इस तरह हम आपके अधिकारों में कानूनी वृद्धि कर रहे है। इसमें स्वदेशी विदेशी कुछ नहीं है।

दूसरी बात - महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने 19वीं शताब्दी में लिखी गयी अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में राजा के प्रजा अधीन होने की अवधारणा प्रस्तुत की थी, और उन्होंने यह विचार वेदों से लिया था। क्या वेद एवं सत्यार्थ प्रकाश विदेशी है ? महात्मा सच्चिन्द्र नाथ सान्याल एवं महात्मा चंदशेखर आजाद ने 1925 में अपनी पार्टी के मेनिफेस्टो में राईट टू रिकॉल कानूनों की मांग की थी। क्या ये क्रांतिकारी भी विदेशी थे ? राजिव भाई दीक्षित भी इन कानूनों की मांग कर रहे थे, क्या आप राजीव भाई को भी विदेशी मानते है ?
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४) महात्मा सच्चिन्द्र नाथ सान्याल एवं महात्मा चंदशेखर आजाद को तब राईट टू रिकॉल कानूनों कैसे सूझ गए थे ?

1920 में भारत में पहली दफा चुनाव हुए थे एवं स्थानीय निकायों में भारतीय जनप्रतिनिधि चुने गए। लेकिन चुनने के तुरंत बाद इनमे से ज्यादातर ने अंग्रेजो से गठजोड़ बना लिए थे। इस घटना से महात्मा सच्चिन्द्र नाथ सान्याल, महात्मा चंदशेखर आजाद एवं अन्य क्रांतिकारी यह बात ताड़ गए थे कि बिना राईट टू रिकॉल के यदि आजादी आ भी जाती है दशा वही रहने वाली है। उन्होंने तात्कालीन परिस्थिति के आधार पर भविष्य का यह आकलन कर लिया था कि यदि "आजाद भारत में राईट टू रिकॉल क़ानून नहीं हुए तो लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जाएगा"। बाद में जब महात्मा भगत सिंह जी इनके सम्पर्क में आये तो उन्होंने भी इन कानूनों का समर्थन किया।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 02 2018 19:44:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनाव आने के साथ ही कु-बुद्धिजीवी और पेड मीडिया कर्मी इस आशय के उपदेश प्रसारित करने लगते है कि -- सोच समझ कर मतदान करें , ईमानदार प्रत्याशी चुने , अपनी सूझ बूझ का इस्तेमाल करें , स्वच्छ छवि के प्रत्याशी को वोट करें , आदि आदि।
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ऐसे उपदेश देने वाले को भी पता है कि वह कोरी बकवास कर रहा है , और सुनने वाले भी जानते है कि वह बकवास कर रहा है। दोनों जानते है कि कितना भी सोच समझ कर ईमानदार आदमी को वोट करने से कोई लाभ होने वाला नहीं है , क्योंकि यदि अमुक ईमानदार व्यक्ति हार गया तो ईमानदार ही बना रहेगा लेकिन जीत गया तो जीतने के अगले दिन ही भ्रष्ट हो जाएगा। और एक बार वह जीत गया तो फिर आपके पास 5 साल तक उस भ्रष्ट व्यक्ति को हटाने की कोई प्रक्रिया नहीं है। और जब इन उपदेशको से पुछा जाता है कि -- ईमानदार आदमी भी यदि जीतने के बाद भ्रष्ट हो जाए तो हम क्या करें ? तो इन उपदेशको का मुंह घोड़े जैसा लटक जाता है। ये लोग यह कभी नहीं बताएँगे कि इस समस्या का समाधान राईट टू रिकॉल है।
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दरअसल , राईट टू रिकॉल ऐसी प्रक्रिया है जो बेईमान आदमी को भी ईमानदार बना देती है , और राईट टू रिकॉल के अभाव में ईमानदार आदमी भी पद पर जाने के साथ ही भ्रष्ट हो जाता है। तो आइन्दा जब आपको इन बुद्धिजीवियों से ऐसी बकवास सुनने को मिले तो उन्हें जरुर बताए कि यह बकवास सुनाने की जगह बेहतर होगा कि नागरिको को राईट टू रिकॉल कानूनों के बारे में बताएं।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Dec 03 2018 18:13:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

इंदिरा मार्केट भीलवाड़ा में राइट टू रिकॉल जूरी सिस्टम के प्रचार में निर्दलीय प्रत्याशी पवन कुमार शर्मा के पेंपलेट बांटे गए

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 04 2018 04:37:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

आज 3-12-2018 सोमवार मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से ~ पिछले 2 दिन से शहर के विभिन्न कॉलोनी में कई नागरिकों के साथ राईट टू रिकॉल कानून पर चर्चा करी व 24 पेज का पैम्पलैट देकर पढ़ने का आग्रह किया |
सभी नागरिकों ने इन कानून के प्रचार करने का भरोसा दिया | मुझसे 2-3 पैम्पलैट एक्सटरा लेकर अपने मित्रों तक पहुँचाने का आश्वासन दिया |
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भारतमाता की जय ||

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 04 2018 12:35:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ratan Jain:

राईट टू रिकाल (वोट वापस लेने का अधिकार)
इस फोटो को देख कर अन्दाजा लगा ओ कि लोग इस कानून को लागू करने की बात कितने ध्यान से सुन रहे हैं
यह एक छोटा सा प्रयास हे
और
जब
आगे
स्थितियां बदलने वाली है
प्रत्याशी जहाज पुर विधानसभा सीट से रतन सिंह जैन
वोट फोर

राईट टू रिकाल

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 04 2018 15:54:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

आज 4 -12- 2018 मंगलवार मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से मेरे शहर के विभिन्न मित्रों तक मैंने राइट टू रिकॉल जानकारी के चुनावी पेंपलेट वितरित किए |
प्रस्तावित कानूनों के फायदे पर चर्चा करी |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 04 2018 16:03:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

आज 4 -12- 2018 मंगलवार भीलवाड़ा राजस्थान से मेरे शहर मैं राइट टू रिकॉल जानकारी के चुनावी पेंपलेट वितरित किए |
प्रस्तावित कानूनों के फायदे पर चर्चा करी |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 04 2018 18:10:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल = वोट वापस लेने का अधिकार
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आपके क्षेत्र के उम्मीदवार आपसे वोट देने को तो कहते है , लेकिन वे आपको वोट वापस लौटा लेने का अधिकार क्यों नहीं देना चाहते ?
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मेरे विचार में यह एक पुख्ता वजह है जिससे उनकी नीयत का पता चलता है। आपके क्षेत्र में जितने भी उम्मीदवार मैदान में है उनसे पूछना शुरू कीजिये कि उन्होंने अपने एजेंडे में राईट टू रिकॉल कानूनों को शामिल क्यों नहीं किया है ?
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मैं राईट टू रिकॉल कानूनों का समर्थक हूँ , और मेरा मानना है कि जिस तरह अमेरिकियों के पास वोट देने के साथ अपना वोट वापिस लेने का भी अधिकार है उसी तरह से हम भारतीयों को भी यह अधिकार मिलना चाहिये कि यदि चुना गया नेता यदि भ्रष्ट हो जाए तो नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उसे नौकरी से निकाल कर किसी दुसरे व्यक्ति को नौकरी पर रख सके।
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मेरा सभी मतदाताओ से आग्रह है कि वे अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों को राईट टू रिकॉल कानूनों को अपने एजेंडे में शामिल करने को कहे , और यदि वे इन्हें शामिल करने से इनकार कर देते है, तो उन्हें वोट न करे। ऐसे किसी उम्मीदवार को वोट करे जिसने राईट टू रिकॉल कानूनों ड्राफ्ट्स को अपने एजेंडे में शामिल किया हो। यदि आप राईट टू रिकॉल के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे छोटे उम्मीदवारों को वोट करना शुरु करेंगे सिर्फ तब ही हम बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को बाध्य कर सकेंगे कि वे इन कानूनों का समर्थन करें। उनके वोट काटने के अलावा अन्य कोई तरीका नहीं है जिससे उन्हें राईट टू रिकॉल कानूनों का समर्थन करने के लिए बाध्य किया जा सके। इस तरह राईट टू रिकॉल कानूनों के समर्थक एक छोटे उम्मीदवार को वोट करने से आपका वोट खराब नहीं होता बल्कि यह बड़े उम्मीदवारों पर दबाव बनाने का काम करता है।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 04 2018 18:25:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल = वोट वापस लेने का अधिकार
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मैं भीलवाड़ा विधानसभा से प्रत्याशी हूँ , और पिछले हफ्ते भर में 2-3 बार मुझसे यह सवाल पूछा गया कि -- आप जीतने वाले तो नहीं है , फिर क्यों चुनाव लड़ रहे है , और एक हारने वाले उम्मीदवार को वोट करने से क्या लाभ होगा ?
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मेरा जवाब -- मैं भीलवाड़ा विधानसभा में 16 प्रत्याशियों के बीच एक मात्र उम्मीदवार हूँ जो राईट टू रिकॉल के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहा हूँ। शेष सभी 15 उम्मीदवारों का मानना है कि भारत के मतदाताओं को सिर्फ वोट देने का अधिकार होना चाहिए किन्तु वोट वापिस लेने का अधिकार कतई नहीं होना चाहिए। जबकि मेरा मानना है कि चुना गया नेता यदि भ्रष्ट हो जाता है तो नागरिको को यह अधिकार होना चाहिए कि वे 5 साल इन्तजार किये बिना अपना वोट वापस लेकर किसी अन्य उम्मीदवार को दे सके। इस तरह मेरा एजेंडा शेष सभी उम्मीदवारों से अलग है। तो जो मतदाता यह मानते है कि उन्हें अपना वोट वापिस लेने का अधिकार भी मिलना चाहिए वे मेरा समर्थन करें , और जैसे जैसे ज्यादा मतदाता मेरा समर्थन करना शुरू करेंगे वैसे वैसे शेष पार्टियों के उम्मीदवारों पर यह दबाव बनने लगेगा कि वे राईट टू रिकॉल के मुद्दों को अपने एजेंडे में शामिल करें। इस तरह मुझे समर्थन देने से राईट टू रिकॉल की मांग आगे बढ़ेगी , किन्तु जिताऊ उम्मीदवार को वोट करने से वो जीत तो जाएगा , किन्तु राईट टू रिकॉल कानूनों की मांग पिछड़ जाएगी , एवं आपको राईट टू रिकॉल के अधिकार से वंचित ही रह जाना पड़ेगा।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 04 2018 20:17:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल = वोट वापस लेने का अधिकार
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यदि आप चाहते है कि देश की किसी समस्या का समाधान आये , तो सबसे सीधा एवं सरल तरीका यह है कि खुद को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा हुआ समझ कर सोचना शुरु कीजिये। जैसे ही आप खुद को पीएम की तरह देखने लगेंगे वैसे ही आपको यह मालूम हो जाएगा कि प्रधानमंत्री कितना काम कर रहा है , और कितना टाइम पास कर रहा है।
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तो मान लीजिये कि आप प्रधानमंत्री है और पीएम की कुर्सी पर बैठे है। अगला प्रश्न है कि प्रधानमंत्री और एक आम व्यक्ति में क्या अंतर है ? तकनिकी रूप से सिर्फ एक अंतर है , जिससे फर्क पड़ता है -- असल में प्रधानमंत्री के पास गेजेट छापने की शक्ति है, जबकि आपके पास नहीं है। इस एक चीज के अलावा पीएम और आपमें कोई उल्लेखनीय अंतर नहीं है , जो कि मायने रखता हो।
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गेजेट क्या है ? गेजेट यानी राजपत्र। राजपत्र यानी जिस पत्र पर राजा की मुहर हो। लोकतंत्र में पीएम राजा है, और राज मुहर है अशोक स्तम्भ। जिस पत्र पर राजा अपना साइन करके अपनी मुहर लगाएगा वह राजाज्ञा है। राजा यानी पीएम का स्टाफ लगभग 1 करोड़ सरकारी कर्मचारी। पीएम को जब भी अपने मातहत अधिकारियो या जनता के लिए कोई आदेश / निर्देश देने होते है तो उन्हें वह गेजेट में निकाल देता है। गेजेट में कुछ भी छापने के लिए पीएम को लोकसभा या राज्यसभा से अनुमति नहीं लेनी पड़ती। पीएम गेजेट में सीधे भी कुछ भी छाप सकता है। पीएम जो भी बात गेजेट में छाप देगा वह देश में तुरंत प्रभाव से लागू हो जायेगी। जो आदमी गेजेट में लिखी गयी बात की अवहेलना करेगा या तो उसकी नौकरी जायेगी या वह जेल जाएगा। इस तरह पीएम राजपत्र यानी एक कागज से पूरा देश चलाता है। भारत की सेना , पुलिस , आई ए एस अधिकारी , बैंक्स सब कुछ राजपत्र के अधीन है। और चूंकि पीएम के पास राजपत्र में कुछ भी छापने की शक्ति है इसीलिए ये सब पीएम के अधीन हो जाते है। जब लोकसभा भंग हो जाती है तो पीएम के हाथ से गेजेट छापने की शक्ति निकल जाती है।
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तो पीएम किस तरह सोचता है ?
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पीएम का काम सिर्फ यह सोचना है कि मैं गेजेट में ऐसा क्या छाप दूँ कि ऐसा हो जाये। और जब पीएम यह सोच लेता है कि यह इबारत गेजेट में छाप देने से ऐसा हो जाएगा, तो पीएम उसे गेजेट में छाप देता है। उदाहरण के लिए , यदि पीएम सोचता है कि देश के प्रत्येक गरीब से गरीब नागरिक का बैंक में खाता होना चाहिए ताकि गरीबो को सुविधा मिले, बैंको की ताकत बढे और अर्थव्यवस्था पर बैंको का ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण हो। तो पीएम सबसे पहले यह सोचेगा कि मैं गेजेट में क्या छाप दूं कि ऐसा हो जाए। फिर पीएम गेजेट उठाता है और उसमे छापता है कि -- सभी राष्ट्रीयकृत बैंको के निदेशको को निर्देश दिए जाते है कि यदि कोई नागरिक सिर्फ आधार कार्ड लेकर आये तो भी वे उसका जीरो बेलेंस एकाउंट तत्काल खोलकर दें। बस हो गया। अब अगले दिन से लोग देश भर के बैंको की ब्रांचो में आधार कार्ड लेकर पहुंचेगे और जन धन योजना लागू हो जाएगी। अब बैंक जीरो बेलेंस एकाउंट खोलने से इनकार नहीं कर सकता। क्योंकि यह आदेश गेजेट में आया है।

फिर पीएम सोचता है , कि अब मैं और क्या करूं कि बैंको की ताकत और भी बढे। तो वह गेजेट में छापता है कि, सभी नागरिक अपने 1000 एवं 500 के नोट अगले 2 महीने के अंदर बैंको में जमा करवा कर नए नोट ले ले, क्योंकि 2 महीने के बाद ये नोट गैर कानूनी हो जायेंगे। पीएम इसी गेजेट में बैंको के लिए यह निर्देश भी छापता है कि यदि कोई व्यक्ति 1000-500 के नोट लेकर आये तो उन्हें नए नोटों से बदल दो। पीएम गेजेट में रिजर्व बैंक गवर्नर के लिए यह भी छापता है कि वह इतने उतने नए नोट छापकर बैंको को दे दे। और इस तरह पीएम गेजेट का इस्तेमाल करके एक घंटे में देश भर को हिला कर रख देता है !!!
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किसी राजनैतिक पार्टी के कार्यकर्ता और एक रिकालिस्ट में क्या बुनियादी अंतर है ? हम रिकालिस्ट इस नजरिये से सोचने के आदी है कि गेजेट में ऐसा क्या छापा जाए कि पुलिस एवं जजों के भ्रष्टाचार में कमी आये , बेरोजगारी एवं महंगाई की समस्या कम हो , शिक्षा का स्तर सुधरें , सरकारी अस्पतालों में सुधार आये आदि। गेजेट में हम ऐसा क्या छाप दें कि राम मंदिर का निर्माण हो , गंगा प्रदुषण मुक्त हो , गौ हत्या में कमी आये , मंदिरों का प्रशासन मजबूत हो , मिशनरीज एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के प्रभाव में कमी आये , भारत की सेना आत्मनिर्भर एवं मजबूत हो जाए आदी आदी। और फिर हम लिखे गए इन गेजेट नोटिफिकेशन के ड्राफ्ट पीएम को भेजते है, और पीएम से कहते है कि इसे गेजेट में छाप दो। हम ये ड्राफ्ट नागरिको कप भी देते है और उनसे कहते है कि वे पीएम से इन्हें गेजेट में छापने को कहे।
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हम रिकालिस्ट्स ने देश की विभिन्न समस्याओ के समाधान के लिए लगभग 200 गेजेट नोटीफिकेशन के ड्राफ्ट दिए है। प्रत्येक ड्राफ्ट को गेजेट में छापने से देश की किसी एक समस्या का समाधान आएगा। कार्यकर्ताओ से हमारा आग्रह है कि वे अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों पर यह दबाव बनाए कि वे अपने ड्राफ्ट सार्वजनिक करें जिन्हें गेजेट में प्रकाशित करने से किसी समस्या का समाधान आएगा। और तब आप पायेंगे कि उन सभी की रूची समस्या के समाधान में नहीं है , वे सिर्फ समस्या को उभारकर वोट इकठ्ठे कर रहे है। लेकिन यदि आप देस की किसी समस्या के समाधान की तलाश में है तो आपको यह सोचना शुरू करना चाहिए कि गेजेट में क्या इबारत छाप देने से इस समस्या का समाधान आएगा।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 05 2018 05:23:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Mahaveer Regar:

#रायला ग्रा.प. में नागरिको को राइट टू रिकॉल,जूरी सिस्टम,नार्को टेस्ट आदि कानूनों की जानकारी देते हुए..
181 शाहपुरा विधान सभा प्रत्याक्षी महावीर रेगर, चुनाव चिन्ह प्रेसर कुकर, EVM पर 9 न.
#घोषणा पत्र लिंक
<https://www.facebook.com/527176697460529/posts/563544197157112/>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 05 2018 14:18:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ratan Jain:

आज मे जहाजपुर राजस्थान विधानसभा चुनाव में राईट टू रिकाल पार्टी की ओर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा क्षेत्र में प्रचार करने गया।।
लोगों को राईट टू रिकाल पार्टी द्वारा प्रस्तावित कानूनों(राईट टू रिकाल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स) की जानकारी दी।।
लोगों ने इन कानूनों की प्रशंसा की
और बोला कि सभी पार्टीया वोट मांगने ही आती है लेकिन इस प्रकार की जानकारी कोई नहीं देता है। बड़े बुजुर्गो ने कहा कि हमारी जिंदगी में पहले व्यक्ति हो जो हमें ऐसी स्टीक जानकारी दे रहे हो
लोगों ने दावा किया है कि राईट टू रिकाल कानून लाने के लिए वोट करगे
प्रत्याशी जहाजपुर विधानसभा
रतन सिंह जैन 9252416131
वोट फोर राईट टू रिकाल

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 05 2018 18:39:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

जहाजपुर राजस्थान विधानसभा के चुनाव में राइट टू रिकॉल के प्रत्याशी रतन सिंह जी जेन के समर्थन में राइट टू रिकॉल ग्रुप के द्वारा प्रस्तावित कानूनों की लोगो को जानकारी देते हुए ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Dec 06 2018 04:47:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

आज 5-12-2018 बुधवार मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से अपने शहर में विभिन्न परिचित नागरिकों को राईट टू रिकॉल कानून, ज्यूरी सिस्टम प्रचार के पैम्पलैट वितरित किये |
आज कुछ नागरिक क्रॉस हुए कि हमें ये पैम्पलैट पहले ही मिल चुके हैं आप यह अच्छी जानकारी अन्य नागरिकों तक पहुँचाये | बहुमत नागरिकों ने इन कानूनों को सराहा है |
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आज मुझे महसूस हुआ कि चुनाव लड़ने के माध्यम से ही अधिकतम नागरिकों तक जानकारी पहुँचायी जा सकती हैं |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Dec 06 2018 11:57:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Jitendra Banjara:

आज दिनांक 6।12।18 राइट टू रिकॉल की जानकारी चंद्रशेखर आज़ाद नगर में लोगो दी साथ ही बताया के जिसको भी आप वोट दे उससे वोट वापस लेने का अधिकार भी ले ताकि उस नेता को हमे 5 साल तक झेलना न पड़े ,अगर वो भ्रष्टाचार करता है,या वो जनता में किये वादों को पूरा नही करता है।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Dec 06 2018 18:17:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हमने 6 विधानसभा क्षेत्रो में राईट टू रिकॉल कानूनों की जानकारी देने के लिए कुल 7 हजार पेम्पलेट वितरित किये है। इनमे 5,000 पेम्पलेट 24 पेज के और 2,000 पेम्पलेट 8 पेज के थे। सभी पेम्पलेट कार्यकर्ताओ द्वारा मतदाताओ को हाथो में दिए गए। ज्यादातर मतदाताओं को यह बात काफी पसंद आयी और उन्होंने कहा कि हमें अपना "वोट वापिस लेने का अधिकार" जरुर मिलना चाहिए। कुछ मतदाताओं ने यहाँ तक कहा कि हमें यह अधिकार आज ही चाहिए।
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यदि आप "वोट वापिस लेने का अधिकार" चाहते है तो राईट टू रिकॉल के प्रत्याशीयों का समर्थन करें। जैसे जैसे राईट टू रिकॉल कानूनों के समर्थको की संख्या बढ़ेगी , वैसे वैसे इन कानूनों की मांग आगे बढ़ेगी।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Dec 06 2018 18:34:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सूचना - सभी दानदाताओ को सूचित किया जाता है कि , हमारा बजट एवं बजट में किया जाने वाला प्रचार पूरा हो चुका है , अत: अब हमें और धन की आवश्यकता नहीं है.

हम सभी प्रत्याशी आर्थिक सहयोग देने वाले सभी दानदाताओ के हार्दिक आभारी है .
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पुन: धन्यवाद
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 07 2018 17:27:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मैं जिन कानूनों का समर्थन करता हूँ, उनके ड्राफ्ट्स यहाँ देखें -- <https://www.facebook.com/notes/pawan-jury/809761655808739>;
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मैं उपरोक्त लिंक में दर्ज कानूनों का नागरिको में प्रचार करने के लिए आगामी लोकसभा चुनावों में जयपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ने का इच्छुक हूँ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 11 2018 15:56:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम
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रिकॉलिस्ट प्रत्याशियों की वोट प्राप्त लिस्ट :-
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1. सुनील जी ओझा - 1647 मत (मांडलगढ़)
2.रतन सिंह जी जैन - 1551 मत (जहाजपुर)
3.विष्णु जी सेन - 1284 मत (चित्तौड़गढ़)
4.महावीर जी रेगर - 784 मत (शाहपुरा)
5.महावीर प्रसाद जी कुमावत - 792 मत (आसींद)
6.पवन जी शर्मा - 607 मत(भीलवाड़ा)
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कुल वोट मिले :- 6665
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 11 2018 18:13:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

ऐसे लोग बड़ी संख्या में है , जो मोदी सरकार की कटु से कटु शब्दों में आलोचना करते है, मोदी साहेब को हिन्दू द्रोही और ग़द्दार तक ठहराते है , किंतु चुनाव आने के साथ ही संघ=बीजेपी के पक्ष में वोट करने की मुहिम चलाने लगते है !!!

दरअसल इन्हें ख़ुद के भीष्म पितामह होने का शुबहा है, जो भरी सभा में द्रोपदी का चीरहरण देखने और साथ साथ दुर्योधन की आलोचना भी करने के लिए अभिशप्त थे। इन्हें ख़ुद को इस रोल से बाहर निकाल कर प्रतिज्ञा मुक्त हो जाना चाहिए ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 12 2018 08:13:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सभी दानदाताओ , समर्थकों और मतदाताओं का हार्दिक धन्यवाद :
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भीलवाड़ा विधानसभा की 5 एवं चित्तोड की 1 सीट को शामिल करते हुए हम रिकालिस्ट्स ने 6 सीट पर चुनाव लड़ा था । हमें कुल 5665 मत प्राप्त हुए । हमने बेहद सीमित संसाधनों और सीमित समय में प्रचार किया एवं सिर्फ़ 5% मतदाताओं तक पहुँच सके । बावजूद इसके इतना अच्छा जन समर्थन यह दिखाता है कि भारत के नागरिक चाहते है कि उन्हें “राईट टू रिकॉल = वोट वापस लेने का अधिकार” मिले । हम आगे भी नागरिकों तक इन कानूनो की जानकारी पहुँचाने के लिए चुनाव लड़ना जारी रखेंगे । हम समर्थन करने वाले सभी नागरिकों और दानदाताओ का हार्दिक धन्यवाद व्यक्त करते है ।

🙏🙏🙏🙏

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Dec 13 2018 17:39:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि सरकार के पास प्रचुर मात्रा में सोना हो तो बेरोज़गारी , क़र्ज़ , महँगाई आदि समस्याओं को आसानी से निपटाया जा सकता है । राजस्थान , मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नागरिकों को लगा कि इस लिहाज़ से एक मौक़ा राहुल गांधी को भी दिया जाना चाहिए । तीनो प्रदेशों में आलू पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है !!!
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और जहाँ तक संघ के नेताओ की बात है , पिछले 5 साल में यह तो साफ़ नज़र आ ही रहा है कि उनकी जानकारी में आलू से सिर्फ़ सब्ज़ी और पराँठे ही बनते है ।
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कुल मिलाकर चुनावी नतीजों से पता चलता है कि संघ शासित राज्यों के नागरिको का एक समूह संघ को सत्ता से बाहर करने के लिए कितना भी बड़ा जोखिम उठाने को तैयार था ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 14 2018 06:13:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

संघ के कार्यकर्ताओं को Rtr-CM क़ानून की माँग करनी चाहिए , ताकी कोंग्रेस यदि अच्छे क़ानून पास न करे तो सी एम को नौकरी से निकाला जा सके ।

Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

Bjp के तथाकथित देशभक्त कार्यकर्ता अभी चुनाव में बीजेपी के हारने से दुखी ना हो , रिकोलिस्ट के दरवाजे आपके लिए हमेशा खुले है । उनसे मिलकर राइट टू रिकॉल मुख्यमंत्री का कानून पास करवाने में सहयोग दे जिससे अगर कांग्रेस का मुख्यमंत्री जन विरोधी, देश विरोधी काम करे तो उसको नोकरी से निकाल सके ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 14 2018 09:17:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जो रिकालिस्ट्स आगामी लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते है, वे अपना नाम कमेंट में लिखें ।
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कृपया ध्यान दें - हो सकता है कि आपको कुछ आर्थिक अनुदान मिले या हो सकता है नही भी मिले । हम आर्थिक सहायता देने का कोई वादा नही कर सकते ।
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लोकसभा में ज़मानत राशि 25,000 रू है , तथा कुछ 15,000 पेंप्लेट आदि पर व्यय होते है ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 14 2018 17:49:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(A109) आम चुनाव 2019 में रिकालिस्ट्स प्रत्याशी
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चुनावों में भाग लेना प्रचार करने का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम , वेल्थ टेक्स आदि कानूनों के प्रचार के लिए आम चुनाव 2019 में कुछ रिकालिस्ट बतौर प्रत्याशी मैदान में है। चूंकि अभी राईट टू रिकॉल पार्टी का पंजीकरण प्रक्रियाधीन है , अत: ये सभी प्रत्याशी "स्वतंत्र उम्मीदवार" के रूप में चुनावों में भाग लेंगे।
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यदि आप राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम कानूनों का समर्थन करते है तो कृपया इन उम्मीदवारों का समर्थन करें एवं इनके एजेंडे का नागरिको में प्रचार करें। चुनावी गतिविधियों के अन्य अद्यतन सूचनाओ के लिए कृपया इस एल्बम को फोलो करें। इस एल्बम में इससे संबधित विवरण रखे जायेंगे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 14 2018 19:28:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

विधानसभा चुनाव 2018 में वितरित किये गए 24 पेज के पेम्पलेट के अंश : भाग - 1 ( पूरा पीडीऍफ़ कमेन्ट बॉक्स में देखें )
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इस पेम्पलेट के अध्यायों की सूची

00. यह पेम्पलेट इतना लम्बा क्यों है ?
01. राईट टू रिकॉल आन्दोलन का लक्ष्य ?
02. राजपत्र अधिसूचना या गेजेट नोटिफिकेशन क्या है ?
03. अमेरिका की पुलिस एवं अदालतें भारत की तुलना में ज्यादा कार्यकुशल एवं ईमानदार क्यों है ? क्योंकि वहां के
नागरिको के पास राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख, राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम प्रक्रियाएं है।
04. राईट टू रिकॉल आन्दोलन 85 वर्ष पुराना होने के बावजूद आज भी पिछड़ा हुआ क्यों है ?
05. राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का क़ानून ड्राफ्ट
06. अन्य पदों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं
07. राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री
08. सबसे जरुरी एवं चुनौती पूर्ण काम – उन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करवाना जिससे भारत की सेना चीन एवं
अमेरिका से युद्ध का सामना करने में आत्मनिर्भर एवं सक्षम हो जाए।
09. दूसरा सबसे जरुरी काम - अदालतों में लंबित सभी 3 करोड़ मुकदमो का निस्तारण 3 वर्ष में करना।
10. तीसरा सबसे जरुरी काम – दीमक की तरह पूरे भारत में फ़ैल रहे 2 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठीयो को देश से बाहर
खदेड़ने के लिए आवश्यक कानूनी ड्राफ्ट्स गेजेट में प्रकाशित करवाना।
11. संविधान के अनुच्छेद 147 में बदलाव करना। इस अनुच्छेद की वजह से भारत की सुप्रीम कोर्ट को ब्रिटेन की प्रिवी
कौंसिल द्वारा दिए गए फैसलों का पालन करना पड़ता है !!!
12. टी सी पी क़ानून लागू करके नागरिको के बहुमत से अहिंसामूर्ती महात्मा सुभाष चन्द्र बोस को भारत का राष्ट्रपिता घोषित करना।
13. आरक्षण - दलितों की सहमती से आरक्षण को कम करना।
14. प्रस्तावित धन वापसी क़ानून नामक खतरे से निपटने के लिए , प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकने एवं गरीबी कम करने के लिए हमारा प्रस्ताव – एम आर सी एम क़ानून ड्राफ्ट
15. चौथा सबसे चुनौतीपूर्ण एवं जरुरी काम – लगातार सिकुड़ते हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट ।

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00. यह पेम्पलेट इतना लम्बा क्यों है ?

अपने क्षेत्र के उम्मीदवार से पूछे कि वे अपने वादे “कैसे” पूरे करेंगे ?
चुनावो के दौरान यदि कोई प्रत्याशी आपसे वादा करता है कि वह ग़रीबी दूर करेगा या भ्रष्टाचार ख़त्म कर देगा तो आप उससे पूछिए कि वह ऐसा “कैसे” करेगा ? दरअसल विधायक का काम सिर्फ़ क़ानून बनाना है। क़ानून विधानसभा में बनते है। इसीलिए हम उम्मीदवार को चुन कर विधानसभा में भेजते है। तो यदि कोई उम्मीदवार आपसे कहता है कि वह ग़रीबी दूर करेगा , तो आपको उससे पूछना चाहिए कि वह ऐसा कौनसा क़ानून पास करने वाला है जिससे ग़रीबी दूर हो जाएगी ? उससे पूछिए कि वह पुलिस विभाग का भ्रष्टाचार कम करने के लिए कौनसा क़ानून पास करने वाला है ? अपने क्षेत्र के उम्मीदवार से उस क़ानून का लिखित ड्राफ्ट मांगिये। और तब आप देखेंगे कि वे उम्मीदवार जो भी वादे कर रहे है , उन्हें पूरा करने के लिए उनके पास कोई निश्चित योजना नहीं है। यह पेम्पलेट इतना लम्बा इसीलिए है क्योंकि इसमें हमने उन कानूनों के ड्राफ्ट एवं उनके संक्षिप्त विवरण दिए है जिन्हें गेजेट में प्रकाशित करने से किसी समस्या का समाधान होगा। विस्तृत विवरण के लिए कृपया यह लिंक देखें – JuryIndia .org
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01. राईट टू रिकॉल क्या है ? ( और द अन्ना एवं श्री अरविन्द केजरीवाल से हमारा कोई लेना देना नहीं है )
राइट टू रिकॉल का मतलब है वोट वापस लेने का अधिकार होना। राईट टू रिकॉल का अर्थ उन क़ानून प्रक्रियाओ से है जिनके गेजेट में छपने के बाद मतदाता यदि अपने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट जज, हाई कोर्ट जज, लोकपाल, जिला पुलिस प्रमुख, जिला शिक्षा अधिकारी, दूरदर्शन चेयरमेन, विधायक, सांसद आदि को किसी भी दिन बदलना चाहे तो अपने बहुमत का प्रदर्शन करके इन्हें सीधे बदल सकेंगे। यदि मतदाता अपने प्रधानमंत्री या सांसद को हटाकर किसी दुसरे व्यक्ति को लाना चाहते है तो उन्हें अगले 5 वर्ष तक इन्तजार नहीं करना होगा। जिला पुलिस प्रमुख , जिला शिक्षा अधिकारी आदि जैसे अधिकारी भी जिले के मतदाताओं के अनुमोदन से नियुक्त होंगे एवं राईट टू रिकॉल के दायरे में रहेंगे। हम ये कानून भारत में लागू करवाने का अभियान 1999 से चला रहे है। हमने द अन्ना ( The Anna ) एवं श्री अरविन्द केजरीवाल से आग्रह किया था कि वे जनलोकपाल के ड्राफ्ट में राईट टू रिकॉल की धाराएं जोड़े। किन्तु द अन्ना एवं श्री अरविन्द केजरीवाल ने जनलोकपाल को चुनने एवं नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको को देने से इनकार कर दिया। अत: द अन्ना एवं श्री अरविन्द केजरीवाल राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओ के छद्म समर्थक है , एवं उनसे हमारा कोई सरोकार नहीं है।
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02. राजपत्र अधिसूचना या गेजेट नोटिफिकेशन क्या है ?

ज्यादातर राजनेता और राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर आदि इस बार पर काफी जोर देते है कि नागरिको को इस तथ्य के बारे में सूचित नहीं किया जाना चाहिए कि देश की व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए गेजेट में छपी हुयी इबारत की कितनी निर्णायक एवं शक्तिशाली भूमिका होती है। हम रिकालिस्ट्स का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्ष्य भारत के नागरिको तक यह बात पहुँचाना है कि – (1) गेजेट नोटिफिकेशन क्या है , और (2) देश की व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए सबसे आसान और सबसे महत्त्वपूर्ण तरीका यह है कि अमुक प्रक्रिया को गेजेट में प्रकाशित किया जाए। और (3) कैसे “क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी केन्द्रित और कार्यकर्ता निर्देशित जन आन्दोलन” के माध्यम से नागरिक प्रधानमंत्री को आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट लागू करने के लिए बाध्य कर सकते है। और एक बार जब भारत के नागरिक गेजेट नोटिफिकेशन की शक्ति से परिचित हो जायेंगे तो वे जान जायेंगे कि देश में व्याप्त किसी भी समस्या का समाधान कितना आसान है। गेजेट नोटिफिकेशन या राजपत्र अधिसूचना एक पुस्तिका है जिसका प्रकाशन केन्द्रीय एवं राज्य मंत्रियो द्वारा हर महीने या समय समय पर जब आवश्यक हो तब किया जाता है। गेजेट में मंत्रियो द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए आदेश जारी किये जाते । कलेक्टर आदि अधिकारी सिर्फ वही कार्य करते है जो गेजेट में लिखा होता है , अधिकारी को इस बात से कोई सरोकार नहीं होता कि अमुक मंत्री ने प्रेस में या पब्लिक रेली के भाषण में क्या कहा था। उदाहरण के लिए यदि कोई मंत्री प्रेस कोंफ्रेंस में, या रेली में या अपने पार्टी के मेनिफेस्टो में यह कहता है कि “प्रत्येक परिवार को 20 लीटर कैरोसिन मिलेगा” , लेकिन यदि मंत्री ने गेजेट में 10 लीटर लिखा है तो कलेक्टर प्रत्येक परिवार को 10 लीटर कैरोसिन ही देगा। क्योंकि कलेक्टर को वही करना होता है जो गेजेट में लिखा गया है , न कि वह करना होता है जो मंत्री अपने भाषण में कह रहा है। क्योंकि यदि कलेक्टर आदि अधिकारी गेजेट की अवहेलना करेंगे तो उनकी नौकरी जा सकती है , उन पर फाइन हो सकता है, पेंशन रुक सकती है और यहाँ तक कि उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है।
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आप देखेंगे कि सभी पार्टियों के नेता घोषणाएं करने एवं भाषण सुनाने में तो बेहद रुचि रखते है, किन्तु वे अपने चुनावी प्रचार के दौरान यह कभी नहीं बताते कि सत्ता में आने के बाद वे कौनसे क़ानून ड्राफ्ट गेजेट में प्रकाशित करने वाले है। यदि आप अधिकारियो को किसी निर्माणधीन इमारत के कारीगरों की तरह देखते है तो गेजेट उस इमारत के निर्माण का ब्लू प्रिंट एवं नक्शा है। जो कार्यकर्ता देश की व्यवस्था में कोई भी बदलाव लाना चाहते है तो उन्हें यह सोचना चाहिए कि गेजेट में क्या छपवाने से यह बदलाव लाया जा सकता है , और तब कार्यकर्ताओ को मंत्रियो से अमुक ड्राफ्ट को गेजेट में तुरंत छपवाने की मांग करनी चाहिए। जब प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट गेजेट में छपेगा , सिर्फ तब ही वास्तविक बदलाव आएगा , अन्यथा नहीं। अत: आप देश की किसी समस्या के समाधान के लिए कम से कम एवं अधिक से अधिक क्या कर सकते है ? आप मंत्रियो से कह सकते है कि अमुक क़ानून ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाये। यदि कोई नेता या कार्यकर्ता देश की किसी समस्या का समाधान करने की बात कर रहा है किन्तु वह अपने श्रोताओं को यह जानकारी नहीं देता कि अमुक समस्या का समाधान करने के लिए वह गेजेट में क्या छपवाने का प्रस्ताव कर रहा है तो यह तय है कि उसकी रुचि समस्या के समाधान में नहीं बल्कि समस्या को उभारकर वोट इकट्ठे करने में है।

और ऐसा वे जानबूझकर करते है। हमारे विचार में मतदाताओं को उम्मीदवारों से यह कहना शुरु करना चाहिए कि , "हमें आपके ओजस्वी भाषणों और आवेशमय नारों में कोई रुचि नहीं है। हमें आप उन कानूनों के ड्राफ्ट दिखाइये जिन्हें जीतने के बाद आप गेजेट में प्रकाशित करने का वादा करते है।"
दिए गए चित्र में राजपत्र अधिसूचना / गेजेट नोटिफिकेशन का एक नमूना दिया गया है :

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यह दुःख का विषय है भारत में बहुत ही कम कार्यकर्ता गेजेट नोटिफिकेशन की शक्ति के बारे में जानते है , और हमारा सबसे पहला लक्ष्य भारत के अधिकतम नागरिको एवं कार्यकर्ताओ तक यह जानकारी पहुँचाना है कि देश को गेजेट चलाता है, और यदि आप देश में कि बदलाव लाना चाहते है तो आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि किस पार्टी या नेता को वोट देने से यह समस्या हल होगी , बल्कि यह सोचना चाहिए कि इस समस्या का समाधान करने के लिए हमें गेजेट में क्या छपवाना चाहिए . इस अध्याय का विस्तुत विवरण इस लिंक पर देखें - JuryIndia .org
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03. अमेरिका की पुलिस एवं अदालतें भारत की तुलना में ज्यादा कार्यकुशल एवं ईमानदार क्यों है ?
आपने अमेरिका के अपने रिश्तेदार, मित्रों से यह अवश्य सुना होगा कि अमेरिका के पुलिस / कोर्ट में भ्रष्टाचार भारत की तुलना में बहुत कम है। भारत के प्रत्येक अनिवासी भारतीय ने भी इस तथ्य पर पहले दिन से ही ध्यान दिया होगा। उदाहरण के लिए अमेरिका में 9 वर्ष रहकर 1999 में भारत लौट आये सोफ्टवेयर डेवलेपर एवं रिकालिस्ट राहुल चिमनभाई मेहता अपने संस्मरण में बताते है कि - "जब मैं अमेरिका में था तो मुझे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर हवलदारों ने 5 बार रोका था। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर हवलदारों ने मुझसे 3 बार जुर्माना लिया और 2 बार मुझे वैसे ही जाने दिया। परन्तु एक बार भी उन्होंने यह संकेत तक नहीं दिया कि घूस लेने में उनकी जरा भी रूचि है। मुझ पर लगाए गए जुर्माने की राशि 1500$ थी , और मैं यह समझ नहीं पा रहा था कि यह पुलिस वाला मुझसे 50$ घूस लेकर मामला यहीं पर रफा दफा करने की कोशिश क्यों नहीं कर रहा है ?" और यह बात आपको भी अजीब लग रही होगी कि आखिर अमेरिका की पुलिस / जज भारत की तरह घूस वसूलने में इतनी माहिर क्यों नहीं है ?
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क्या अमेरिका की पुलिस / जज आदि भारत की पुलिस / जज की तुलना में इतने बेवकूफ है कि वे अपने नागरिकों से घूस वसूलने के तौर तरीके नहीं सोच सकते ? नहीं, वे इतने भी बेवकूफ नहीं है। क्या वे इतने डरपोक है ? नहीं, वे भी घूस वसूलने में उतने ही साहसी है जितने कि भारत के अधिकारी है। तो क्या अमेरिका के पुलिस वाले लालची नहीं है ? नहीं ऐसा भी नहीं है। किसी भी देश में ऐसा नहीं हो सकता कि वहाँ के लाखों व्यक्तियों में सभी संत हो और कोई भी लालची न हो। तो क्या अधिक वेतन प्राप्त करने के कारण वे नागरिको से घूस नही लेते ? अच्छा, मान लीजिये कि यदि हम भारत में अपने अधिकारियों के वेतन इस सप्ताह दोगुने कर दें, तो क्या वे हमें अगले सप्ताह से घूस में 10% की छूट देंगे ? उदाहरण के लिए, वर्ष 2009-2010 में सरकार ने सभी न्यायाधीशों के वेतन तीन गुना कर दिए थे। तो क्या जजों ने अपनी घूस की राशि में अगले दिन 1% की भी छूट दी थी ? मेरा अनुमान है, नहीं दी थी। यदि भारत सरकार का कोई कर्मचारी यह कहता है कि , यदि उसके वेतन को दोगुना कर दिया जाए तो उसे घूस लेने की जरूरत नही होगी, तो आप भी यही कहेंगे कि वह बकवास कर रहा है। क्योंकि उनमें से अधिकतर कभी भी घूस लेना बंद नही करेंगे। इस प्रकार, वेतन अवश्य ही एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, पर भारत और अमेरिका में भ्रष्टाचार के स्तर में बदलाव लाने हेतु यह कोई बड़ा कारक नहीं है। तो वहाँ की पुलिस एवं जजों में भ्रष्टाचार कम होने का और क्या कारण हो सकता है ?
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3.1 क्या संस्कृति इसका कारण है ?

क्या हमारी संस्कृति इसका कारण है ? भारत के बहुत से बुद्धिजीवी (कु-बुद्धिजीवी ?) जिनका बौद्धिक स्तर = IQ level 4 अंको में है, यह कहते है कि भारत में पुलिस वाले इसीलिए भ्रष्ट है, क्योंकि हम भारतीय अनपढ़ है, जागरूक नहीं है, हममें नैतिक सदाचार की कमी है, हमारी राजनीतिक संस्कृति दूषित है आदि आदि। दूसरे शब्दों में , इन बुद्धिजीवियों के अनुसार, हम नागरिक ही भारत की पुलिस एवं जजो के भ्रष्ट होने के लिए जिम्मेदार हैं !!! 4 अंकों के बौद्धिक स्तर वाले इन बुद्धिजीवियों द्वारा "पीड़ितों पर ही आरोप" लगाने वाले इन तर्कों को हम सफ़ेद झूठ कहकर अस्वीकार करते है। यह बात उसी तरह चुभने वाली है जैसे कोई कहे कि "बलात्कार के लिए महिला जिम्मेदार है"। यह तर्क कि "नागरिकों में जागरूकता नहीं है" या "नागरिक असभ्य है" बिलकुल बकवास है। एक अशिक्षित व्यक्ति भी अच्छी तरह जानता है कि भ्रष्टाचार अनैतिक है और यह एक अपराध भी है। और सभी पुलिसवालों, न्यायाधीशों व मंत्रियों को भी यह अच्छी तरह पता है कि भ्रष्टाचार अनैतिक और गैरकानूनी है। यहाँ तक कि जब अमेरिका में 1800 ईस्वी में शिक्षा 5 प्रतिशत से भी कम थी तब भी वहाँ की पुलिस एवं न्यायाधीश इतने भ्रष्ट नहीं थे। तो फिर आखिर अमेरिका की पुलिस में भ्रष्टाचार कम होने का असली कारण क्या है ? इस कारण को समझने के लिए हम पुलिस दल को मोटे तौर पर दो भागो में विभाजित करते है – जूनियर ऑफिसर जैसे हवलदार, उप निरीक्षक , दरोग़ा आदि एवं सीनियर ऑफिसर जैसे जिला पुलिस कमिश्नर।
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3.2 अमेरिकी पुलिस विभाग के जूनियर ऑफिसर भारत की तुलना में कम भ्रष्ट क्यों है ?

अमेरिका में जूनियर पुलिसकर्मी शायद ही कभी घूस मांगते है, क्योंकि अमेरिका में जिला पुलिस कमिश्नर उनको ट्रेप करने के लिए जाल बिछाते हैं !!! हवलदार, पुलिसकर्मी आदि जानते है कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्रत्येक 100 से 500 व्यक्तियों में से कोई एक व्यक्ति जिला पुलिस कमिश्नर का आदमी हो सकता है, और यदि वह घूस मांगेगा तो वह पकड़ा जा सकता है, उसकी नौकरी जा सकती है या जेल भी हो सकती है। तो अमेरिका के जूनियर अफसरों द्वारा घूस न लने का मुख्य कारण यह है कि वे जानते है कि यातायात उल्लंघन करने वाले कुछ 200 व्यक्तियों में से कोई एक व्यक्ति कमिश्नर द्वारा उसे ट्रेप करने के लिए बिछाया गया जाल हो सकता है। और उसे नहीं पता कि क़ानून तोड़ने वाले इन 200 व्यक्तियों में से कौन सा व्यक्ति कमिशनर द्वारा बिछाए गए जाल का हिस्सा है। इसलिए वह 200 मामलों में से एक में भी घूस नहीं लेता। और अमेरिका में बहुत से नोडल अधिकारी जैसे जिला शिक्षा अधिकारी, पब्लिक प्रोसिक्यूटर , मुख्यमंत्री , मंत्री , न्यायाधीश आदि भी अपने जूनियर कर्मचारियों को ट्रेप करने के लिए उनके विरुद्ध जाल बिछाते है। समय-समय पर जाल बिछाना सभी जूनियर स्टाफ को घूस लेने से रोक देता है।
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3.3 किन्तु अमेरिका में पुलिस प्रमुख अपने जूनियर अधिकारियों को घूस लेने से रोकने के लिए जाल क्यों बिछाते है ?

अक्सर ऐसा होता है कि एक सवाल के जवाब से 10 और नए वाजिब सवाल खड़े हो जाते है, और इन्हें उत्तरित करना भी जरुरी होता है। तो अब एक नया एवं वाजिब प्रश्न यह है कि आखिर अमेरिका में पुलिस कमिश्नर अपने जूनियर अफसरों को ट्रेप करने के लिए जाल क्यों बिछाता है जबकि भारत में ज्यादातर पुलिस प्रमुख अपने जूनियर अफसरों को नागरिको से घूस इकट्ठी करने के लिए कहते है ? इस अंतर का कारण क्या है ? आखिर अमेरिका का पुलिस कमिश्नर अपने जूनियर अफसरों को घूस इकट्ठी करने का टार्गेट क्यों नहीं देता ? वह कौनसी चीज है जो उसे ऐसा करने से रोक देती है ? इसकी सिर्फ एक वजह है -- अमेरिका के नागरिको के पास अपने जिले के पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया मौजूद है। दुसरे शब्दों में अमेरिका के नागरिको के पास पुलिस कमिशनर को रिकॉल करने अर्थात वापिस बुलाने का अधिकार होने के कारण, यदि वे यह मानते है कि पुलिस कमिशनर इमानदारी से कार्य नहीं कर रहा है, तो वे किसी भी दिन उसे हटाकर नए व्यक्ति को कमिशनर की नौकरी दे सकते है।
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मतलब, अमेरिका के किसी जिले में यदि नागरिक जिला पुलिस प्रमुख से संतुष्ट नहीं है और वे उसे नौकरी से निकालना चाहते है तो उन्हें डीआईजी या मुख्यमंत्री या गृह मंत्री के पास जाकर शिकायत करने की आवश्यकता नहीं है !! अमेरिका के नागरिकों को उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों के पास जाकर अदालतों में धक्के खाने की भी जरूरत नहीं है। अमेरिका में किसी जिले के नागरिकों को बस यह साबित करने की आवश्यकता है कि जिले के मतदाताओ का बहुमत यह चाहता है कि मौजूदा पुलिस कमिश्नर को नौकरी से निकाल दिया जाए। और यदि किसी जिला पुलिस प्रमुख के विरूद्ध बहुमत साबित हो जाता है तो उसे निकाल दिया जाता है। और तब किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की इतनी हिम्मत नहीं है कि वह अमुक पुलिस प्रमुख के निलम्बन के निर्णय पर कोई रोक या स्टे का कोई आदेश दे सके। तो इस तरह अमेरिका में पुलिस प्रमुख इस बात का ध्यान रखता है कि यदि पुलिस प्रशासन में भ्रष्टाचार फ़ैल गया , अपराधो में वृद्धि हुयी और नागरिको को गलत वजह से उत्पीडन का सामना करना पड़ा तो नागरिको का बहुमत मुझे नौकरी से निकाल देगा , और इसी वजह से अमेरिका में पुलिस प्रमुख इस बात का निरंतर ध्यान रखता है कि उसके अधीन प्रशासन एवं स्टाफ ईमानदारी से कार्य करे। जबकि भारत में पुलिस प्रमुख की नियुक्ति से लेकर निष्कासन का अधिकार नेताओं के पास होने के कारण पुलिस प्रमुख अपने आला अधिकारियो एवं नेताओं को खुश रखने का लक्ष्य लेकर काम करता है। भारत का पुलिस प्रमुख जानता है कि जब तक उसके आला अधिकारी एवं सत्तासीन नेता उससे खुश है तब तक जनता उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकती।
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और यही वजह है कि ज्यादातर ईमानदार व्यक्ति भी सरकारी पदों पर जाने के साथ ही भ्रष्ट हो जाते है । क्योंकि हमारी व्यवस्था ही इस तरह की है कि एक ईमानदार व्यक्ति को भी यदि नौकरी पर बने रहना है तो उन्हें नेताओं के सही गलत सभी प्रकार के आदेशो का पालन करना पड़ता है . जाहिर है कोई भी व्यक्ति नौकरी नहीं खोना चाहता. अत: वे जनता के हितो को तवज्जो देना छोड़ देते है और अपने नेताओं एवं आला अधिकारियो को खुश रखने के लिए काम करने लगते है ।
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हम भारत में ऐसी प्रक्रिया चाहते है जिससे नागरिक अपने जिले के पुलिस प्रमुख को बदल सके। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि देश की किसी भी व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए हमें सबसे पहले उस क़ानून ड्राफ्ट की जरूरत होती है जिसे गेजेट में प्रकाशित करने से यह बदलाव आएगा। हमने इसके लिए “राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख” का क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। यह ड्राफ्ट यदि मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री गेजेट में प्रकाशित कर दे तो भारत के नागरिको को जिला पुलिस प्रमुख को बदलने की प्रक्रिया मिल जायेगी। यदि यह ड्राफ्ट मुख्यमंत्री द्वारा प्रकाशित किया जाता है तो यह क़ानून अमुक राज्य में लागू होगा , और यदि इसे प्रधानमंत्री लागू करते है तो यह पूरे देश में लागू हो जाएगा। भारत का धनिक वर्ग , सभी बड़ी राजनैतिक पार्टियों के नेता , न्यायाधीश , राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर , नामचीन लेखक , समाचार पत्रों के सम्पादक , आदि हमेशा से यह कहते आये है कि भारतियो के पास अपने जिला पुलिस प्रमुख को बदलने की शक्ति नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि जिला पुलिस प्रमुख उनके नियन्त्रण से निकल कर यदि आम नागरिको के हाथ में चला गया तो उन्हें भारी क्षति होगी। मौजूदा व्यवस्था इनकी शक्ति को बढ़ाती और नागरिको की शक्ति घटाती है , अत: ये गठजोड़ मौजूदा व्यवस्था को ही कायम रखना चाहता है। यदि आप चाहते है कि आप नागरिको के पास अपने जिला पुलिस प्रमुख को बदलने का अधिकार हो तो अपने क्षेत्र के उम्मीदवार से कहे कि वह अपने एजेंडे में इस क़ानून ड्राफ्ट को शामिल करे ।
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04. राईट टू रिकॉल आन्दोलन 85 वर्ष पुराना होने के बावजूद आज तक असफल एवं पिछड़ा हुआ क्यों रहा है ?

भारत में राईट टू रिकॉल का अप्रत्यक्ष उल्लेख सबसे पहले महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने किया था। सत्यार्थ प्रकाश के छठे अध्याय के पहले ही पृष्ठ में महर्षि दयानंद राज धर्म की बुनियाद के बारे में बताते हैं। महर्षि ने इसमें 3 शब्द दिए है - "प्रजा अधीन राजा" और इन 3 शब्दों में उन्होंने अच्छी राजनीति पर 10,000 से अधिक प्रस्तावों का सार दे दिया है। आगे वे इन 3 शब्दों का विस्तार करते है -- "राजा को प्रजा के अधीन होना चाहिए, नहीं तो वह नागरिकों को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा"। उन्होंने ये श्लोक अथर्ववेद से लिए है। और भारत के पुलिस कमिश्नर, मंत्री, जजों आदि और अमेरिका के पुलिस कमिश्नर, मंत्री, जजों आदि के बीच सरसरी तौर पर तुलना करने पर यह बात मालूम होती है कि हमारे ऋषि मुनि कितने सत्यदृष्टा एवं दूरदर्शी थे, जिन्होंने अथर्ववेद लिखे है। और हमारे लिए यह एक विडंबना है कि सत्यार्थ प्रकाश के इन 3 शब्दो का महत्व समझाने के लिए हमें अमेरिका का उदाहरण लेना पड़ रहा है !!!
भारत में राईट टू रिकॉल कानूनों की सीधी मांग सबसे पहले अहिंसामूर्ती महात्मा चंद्रशेखर आजाद द्वारा की गयी थी। 1 जनवरी 1925 को अहिंसामूर्ती महात्मा चंद्रशेखर आज़ाद तथा अहिंसामूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल ने HRA = हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन की स्थापना की। यह वही संगठन था जिसमे रहकर अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह तथा उनके सहयोगियों ने पुलिस प्रमुख सैंडर्स के वध की योजना बनायी थी। 1 जनवरी 1925 को जारी हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के घोषणापत्र में कहा गया कि --- In this Republic (that we wish to create) the electors shall have the right to recall their representatives, if so desired, otherwise the democracy shall become a mockery." (source : shahidbhagatsingh .org/index. asp?link=revolutionary ) अर्थात , "जिस गणराज्य की हम स्थापना करना चाहते है, उसमे मतदाताओं के पास यह अधिकार होगा कि वे आवश्यकता होने पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को रिकॉल कर सकें। अन्यथा लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जायेगा" !!
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इस प्रकार वर्षों पूर्व 1925 ई. में ही अहिंसामूर्ती महात्मा चंद्रशेखर आज़ाद तथा अहिंसामूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल आदि ने यह भांप लिया था कि राइट टू रिकॉल प्रक्रियाओं के बिना प्रजातंत्र में चुने गए जनता के प्रतिनिधि बेलगाम हो जाएंगे। 1925 ई. में राइट टू रिकॉल की यह मांग कोई हवा में नही की गयी थी, बल्कि इसके पीछे वास्तविक जीवन के अनुभव थे। 1919 ई. में भारत सरकार अधिनियम 1919 के तहत पहली एवं 1923 में दूसरी बार चुनाव आयोजित किये गये थे, और उसमे निर्वाचित होने वाले अधिकांश भारतीय प्रतिनिधि चुने लिए जाने के अगले ही दिन भ्रष्ट हो गये। इससे सीख लेकर अहिंसामूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल जैसे बुद्धिमान व्यक्तियों ने राइट टू रिकॉल की अनिवार्यता को महसूस किया और वर्षों पूर्व 1925 ई. में इसे अभिव्यक्त किया।
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भारतीय धनिक वर्ग राइट टू रिकॉल कानूनो से अत्यंत घृणा करते है। चूंकि अधिकांश बुद्धिजीवी , पाठ्यपुस्तक लेखक आदि धनिक वर्ग की कृपा पर टिके हुए है, अत: इन सभी बुद्धिजीवियों ने यह सुनिश्चित किया है कि समाचार पत्रों और पाठ्यपुस्तकों में राइट टू रिकॉल पर किसी भी प्रकार की जानकारी बिलकुल नही दी जानी चाहिए।। इस हद तक कि भारत के इन बुद्धिजीवियों ने अपने स्तभों और पाठ्यपुस्तकों में इन तथ्यों को दर्ज करने से भी इनकार कर दिया है कि, अमेरिका के नागरिकों के पास जिला पुलिस प्रमुखों और न्यायधीशों को निकालने की प्रक्रिया है। उन्हें भय है कि भारतीयों को यह जानकारी होने से वे इस दिशा में सोचना प्रारम्भ कर सकते है। इतना ही नहीं राईट टू रिकॉल के इन विरोधियो ने HSRA के ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण दस्तावेज का भी पाठ्यपुस्तक में इसीलिए उल्लेख नहीं किया। आज, शायद ही कोई युवा यह जानता है कि अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी राईट टू रिकॉल कानूनों की मांग कर रहे थे !! और यहां तक कि राजनीति शास्त्र के स्नातकोत्तर छात्र भी इस बात से अनभिग्य है कि अमेरिका के नागरिकों के पास पुलिस प्रमुख और न्यायाधीशों के विरूद्ध राइट टू रिकॉल क़ानून प्रक्रियाएं है।
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तो राईट टू रिकॉल=प्रजा अधीन राजा की अवधारणा भारत में बेहद प्राचीन है। इसका प्रादुर्भाव सबसे पहले अथर्ववेद में हुआ ,और महर्षि दयानंद ने इसका पुन: उल्लेख 1860 में अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में किया। और भारत में सबसे पहले इसकी राजनैतिक मांग करने वाले व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि स्वयं अहिंसामूर्ती महात्मा चंद्रशेखर आजाद थे। लेकिन हमारे विचार में यह लगातार असफल इसीलिए रहा क्योंकि राईट टू रिकॉल के क़ानून ड्राफ्ट्स का निरंतर अभाव बना रहा। रिकालिस्ट्स राईट टू रिकॉल का कानूनी ड्राफ्ट मुहैया नहीं करा पाए , और क़ानून ड्राफ्ट के अभाव में राईट टू रिकॉल के समर्थक देश के नागरिको को यह समझाने में नाकाम रहे कि राईट टू रिकॉल की प्रक्रिया - 1) तेजी से काम करती है , 2) सस्ती है , 3) अस्थिरता से रक्षा करती है , 4) मतदाताओं की खरीद फरोख्त को रोकती है , 5) पेड मीडिया की मतदाताओ को भ्रमित करने की ताकत में कमी लाती है , 6) उम्मीदवारों द्वारा मतदाताओं को धमकाने से प्रतिरक्षा प्रदान करती है , 7) पारदर्शिता होने के कारण इस प्रक्रिया में धोखाधड़ी नहीं की जा सकती । क़ानून ड्राफ्ट के अभाव में राईट टू रिकॉल के विरोधी भारतीयों के दिमाग में यह भ्रम डालने में सफल रहे कि राईट टू रिकॉल आने से अस्थिरता आएगी , यह बहुत महंगा पड़ेगा , मतदाता अपना वोट बेच देंगे , रोज चुनाव होने लगेंगे , मतदाताओं को धमकाया जायेगा आदि आदि। किन्तु ड्राफ्ट सामने आने के बाद अब स्थिति पलट गयी है। जैसे जैसे कार्यकर्ता ड्राफ्ट तक पहुँच रहे है वैसे वैसे राईट टू रिकॉल के विरोधियो की नागरिको को भ्रमित करने की शक्ति घटती जा रही है।
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05. शिक्षा में सुधार के लिए प्रस्ताव - राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी

बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत में गणित एवं विज्ञान का ढांचा तोडना चाहती है , ताकि भारत में इंजीनियरिंग कौशल पिछड़ी दशा में रहे. विज्ञान एवं गणित का पाठ्यक्रम लगातार कमजोर करना , सरकारी स्कूलों को बदहाल बनाए रखना एवं शिक्षा का निजीकरण करना इसी उद्देश्य के चरण है । जिले में सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार है। शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति मंत्रियो द्वारा की जाती है, और हमारे मंत्री बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर बुरी तरह से निर्भर करते है। इस वजह से वे शिक्षा अधिकारी को सरकारी स्कूलों बदतर बनाए रखने के निर्देश देते है। इसके अलावा निजीकरण की वजह से मंत्रियो एवं विधायको को सालाना करोडो की आय होती है। इसमें दूसरा बेहद महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकारी स्कूलो एवं सरकारी अस्पतालों के बदतर होने से बड़े पैमाने पर गरीबी फैलती है और मिशनरीज के लिए धर्मान्तर करना आसान हो जाता है। शिक्षा अधिकारी मंत्रीजी को खुश रखने के लिए काम करता है और शिक्षा का स्तर सुधारने की अवहेलना करता है। यदि जिला शिक्षा अधिकारी को नौकरी से निकालने का अधिकार जिले के अभिभावकों को मिल जाये तो शिक्षा अधिकारी सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने पर ध्यान देना शुरू कर देगा। इसके लिए हमने राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी के क़ानून ड्राफ्ट का प्रस्ताव किया है।
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5.1 राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी RTR DEO (District Education Officer) के क़ानून ड्राफ्ट का सारांश :

1. जरुरी योग्यताएं पूरी करने वाला भारत का कोई भी नागरिक आवश्यक जमानत राशि जमा करके शिक्षा अधिकारी
पद के लिए उम्मीदवारी कर सकेगा।
2. पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर जिले का कोई भी अभिभावक अपने पसंद के अधिकतम 5 उम्मीदवारों को
अनुमोदित कर सकेगा। पटवारी 3 रूपये शुल्क लेकर उसके अनुमोदन को दर्ज करेगा और बदले में एक रसीद देगा।
( बाद में ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है कि अभिभावक अपना अनुमोदन SMS एवं ATM से भी दर्ज करवा सके।)
3. पटवारी अनुमोदनो को अभिभावक के वोटर आई डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
4. अभिभावक पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी दिन अपना अनुमोदन बदल सकेंगे। ( इससे उम्मीदवार मतदाताओं
को खरीद नहीं सकेंगे )
5. यदि किसी उम्मीदवार को कुल अभिभावकों के 35% अनुमोदन मिल जाते है ( जिले में दर्ज सभी मतदाताओं का 35%
न कि उन अभिभावकों का 35% जिन्होंने अनुमोदन दर्ज किया है ) और यह अनुमोदन यदि पदासीन शिक्षा अधिकारी
से 2% अधिक भी है तो अमुक उम्मीदवार नया शिक्षा अधिकारी नियुक्त हो जाएगा।
6. कोई व्यक्ति किसी राज्य में अधिकतम 5 जिलो का शिक्षा अधिकारी बन सकता है, और ऐसी स्थिति में उसका वेतन भी
5 गुना होगा।

धारा 5 अस्थिरता के प्रति प्रतिरक्षा प्रदान करती है , क्योंकि बहुत सारे अभिभावक रोज अपना अनुमोदन नहीं बदलेंगे और बहुत कम अभिभावको के अनुमोदन बदलने से शिक्षा अधिकारी को बदला नहीं जा सकेगा। धारा 4 की वजह से उम्मीदवार अभिभावकों का अनुमोदन पैसे देकर खरीद नहीं सकेंगे , क्योंकि पैसे लेने के बाद अभिभावक अगले ही दिन अपना अनुमोदन बदल भी सकता है , और उम्मीदवार अभिभावको को रोज रोज पैसे नहीं दे सकता। धारा 5 के होने से उम्मीदवार अभिभावको को धमका भी नहीं सकेंगे। क्योंकि किसी जिले में 10 लाख तक मतदाता होते है, और उम्मीदवार को शिक्षा अधिकारी बनने के लिए कम से कम 3.5 लाख मतदाताओं को धमकाना पड़ेगा। लेकिन किसी भी उम्मीदवार के लिए इतने गुंडे पालना मुमकिन नहीं है कि वे 3.5 लाख मतदाताओं को रोज धमका सके।
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5.2 राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी कानून से शिक्षा में सुधार कैसे आएगा ?

भारत में लगभग 700 जिला शिक्षा अधिकारी हैं । सभी बुद्धिमान, काबिल तथा कार्यकुशल है। मान लीजिए कि इनमे से 10-15 शिक्षा अधिकारी ऐसे होंगे जो भ्रष्टाचार में रूचि नहीं रखते है एवं वाकयी व्यवस्था में सुधार लाना चाहते है। उपरोक्त राइट टू रिकॉल -जिला शिक्षा अधिकारी प्रक्रिया में एक खण्ड कहता है कि यदि कोई शिक्षा अधिकारी मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त होता है तो वह केवल एक ही जिले का जिला शिक्षा अधिकारी हो सकता है। लेकिन यदि नागरिकों ने उसे जिला शिक्षा अधिकारी बनाया है तो वह राज्य में 5 जिलों और पूरे भारत में 10 जिलों का भी जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है और वह इन सभी जिलों का वेतन प्राप्त करेगा। अर्थात यदि कोई व्यक्ति 4 जिलों का जिला शिक्षा अधिकारी है और उसे नागरिकों ने नियुक्त किया है तो उसका वेतन 4 गुना होगा। सरकार के लिए भी यह ज्यादा सस्ता पड़ेगा , क्योंकि सिर्फ वेतन ही चार गुना बढ़ेगा लेकिन चिकित्सा लाभ और आजीवन मिलने वाले लाभ 4 गुना नहीं बढ़ेंगे।
इसलिए वर्तमान 700 जिला शिक्षा अधिकारियों में से मान लीजिए 5-15 अधिकारी भ्रष्ट नहीं है। यदि एक बार रॉइट टू रिकॉल लागू हो जाता है तो उन्हें सीधी तरक्की और पदोन्नति का अवसर मिल जायेगा। वे अपने जिले के स्कूलों में अच्छे बदलाव लेकर आएँगे। वे बीच के अधिकारियों को घूस लेने से रोकेंगे। इस बात का ध्यान रखेंगे कि ठेकेदार सही वस्तुएँ जैसे ब्लैकबोर्ड , कुर्सियां आदि स्कूलों को सप्लाई करें। वे ध्यान रखेंगे कि शिक्षक स्कूल में हाजिर रहें, आदि। अब मान लीजिए इन सभी मामलों में मुख्यमंत्री इन अधिकारियों का तबादला कर देते है। तब लगभग 7-15 ऐसे मामलों में से, कम से कम 2-3 मामलों में माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी कानून का उपयोग करके उस तबादला किए गए अधिकारी को वापस ले आएंगे।
इस तरह भारत के 700 जिलों में से 2-5 जिलों में शिक्षा की स्थिति में सुधार आएगा।
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तो शेष जिलों का क्या होगा ? मान लीजिए आप 'A' जिले में रहते है, तथा 'A' जिले का जिला शिक्षा अधिकारी भ्रष्ट और नाकाबिल है। मान लीजिए पास में ही पांच अन्य जिले B, C, D, D और E है और केवल E जिले में ही अच्छा जिला शिक्षा अधिकारी है। तो जिला A के नागरिकों के पास विकल्प होगा कि वे अपने जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को हटा सकते है और E जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को दोहरा कार्यभार दे सकते है। इसी विकल्प और अधिकार के कारण कि "अब नागरिक राईट टू रिकॉल - जिला शिक्षा अधिकारी का उपयोग करके मुझे हटा सकते हैं और मेरे पद पर E जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को ला सकते हैं", अन्य जिलो के जिला शिक्षा अधिकारीयों के मन में एक भय पैदा होगा। अत: या तो वे अगले 2-3 महीनों में सुधर जाएंगे या तो नागरिक उन्हें राइट टू रिकॉल-जिला शिक्षा अधिकारी का प्रयोग करके हटा देंगे। इस तरह इस कानून के गैजेट में प्रकाशित होने के 8-10 महीनों में ही सभी 700 जिला शिक्षा अधिकारी या तो सुधर जाएंगे या निकाल दिए जाएंगे।
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10-20 महीनों के अंदर ही "जल्दी अमीर बनने" और "भाड़ में जाए जनता" की मानसिकता वाले अधिकारी प्रशासन से हटना शुरू होंगे और दुबारा इन प्रशासनिक पदों पर नहीं आ पाएंगे। इससे वास्तव में सेवा करने की इच्छा वाले लोगों को आने का ज्यादा मौका मिलेगा और भ्रष्टाचारी लोग ईमानदार लोगो के काम में कम बाधा डाल सकेंगे। वर्तमान सिस्टम में एक कमी यह है कि यदि कोई ईमानदार व्यक्ति 2 लोगों का काम करता है तो भी उसे 2 व्यक्तियों के बराबर वेतन नहीं मिलता, जबकि व्यापार में ऐसा होना आम बात है। ये बातें ईमानदार लोगों को सरकारी नौकरी में आने से हतोत्साहित करती है। पर इस प्रस्तावित राइट टू रिकॉल प्रक्रिया में अधिकारीयों को एक से अधिक पद मिल सकता है तथा उसके अनुसार वे अधिक वेतन पा सकते है। इससे शासन में ईमानदार और समर्पित व्यक्तियों को आने का ज्यादा मौका मिलेगा।
राईट टू रिकॉल पुलिस अधिकारी का ड्राफ्ट भी ठीक इसी तरह काम करेगा और राईट टू रिकॉल पुलिस अधिकारी क़ानून के लागू होने के बाद कुछ 6 महीने के भीतर ही पुलिस के भ्रष्टाचार में 80% तक की गिरावट आ जायेगी.
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5.3. गेजेट में प्रकाशित करने के लिए राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी का सम्पूर्ण कानूनी ड्राफ्ट

राईट टू रिकॉल कानूनों की मांग हवाई नहीं है , बल्कि हमने वह पूरी प्रक्रिया दी है कि जिले के अभिभावक शिक्षा अधिकारी को कैसे अनुमोदित करेंगे , कैसे उनकी नियुक्ति होगी, भ्रष्ट आचरण करने एवं अकार्यकुशलता दिखाने पर कब और कैसे इन्हें अभिभावकों द्वारा बदला जाएगा आदि। अगले पृष्ठ पर राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी का पूर्ण ड्राफ्ट दिया गया है जिसे गेजेट में प्रकाशित करने से जिले के अभिभावकों को शिक्षा अधिकारी को बदलने का अधिकार मिल जाएगा। इस ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ जो भारत सरकार को भेजा गया है यहाँ देखें – newindia .in/RtrDeo3
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========== ड्राफ्ट का प्रारम्भ=======

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सैक्शन 1 : राइट-टू-रिकॉल-शिक्षा अधिकारी
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1.1. माता/पिता शब्द का अर्थ होगा – 0 से 18 आयुवर्ग के बच्चो के लिए उसका पिता अथवा उसकी माता, जो उस जिले का दर्ज मतदाता भी हो। जब तक माता-पिता की सूची नहीं बनती, हर पंजीकृत मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच में है, उसे इस राजपत्र अधिसूचना के लिए माता-पिता माना जायेगा।
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जिला कलेक्टर शब्द का अर्थ होगा – इस सरकारी आदेश का पालन करने के लिए जिला कलेक्टर अथवा उसके द्वारा नियुक्त कोई अधिकारी।
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जिला शिक्षा अधिकारी का मतलब उस पूरे जिले के शिक्षा सम्बन्धी निर्णय करने वाला और शिक्षा सम्बन्धी व्यवस्था बनाए रखने वाला।
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1.2. [ जिला कलेक्टर के लिए निर्देश ]
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यदि भारत का कोई नागरिक जिला शिक्षा अधिकारी बनना चाहता है, और वह जिला कलेक्टर के पास स्वयं उपस्थित होकर या किसी वकील के माध्यम से इस सम्बन्ध में कोई ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है तो जिला कलक्टर, सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर 'जिला शिक्षा अधिकारी' पद के लिए उसका आवेदन-पत्र स्वीकार कर लेगा।
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1.3. [ पटवारी के लिए निर्देश ]
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यदि कोई व्यक्ति पटवारी कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर 3 रूपए का शुल्क जमा करवा कर अधिक से अधिक 5 व्यक्तियों को जिला शिक्षा अधिकारी पद के लिए अनुमोदित करता है तो, तलाटी उसके अनुमोदनों को कम्प्यूटर में दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद देगा, जिसमें उसकी मतदान पहचान-पत्र संख्या, तारीख, दिन और उसके द्वारा अनुमोदित किए गए व्यक्तियों के नाम होंगे।
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1.4. [ पटवारी के लिए निर्देश ]
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पटवारी माता/पिता के अनुमोदन को अनुमोदित व्यक्ति के नाम तथा अनुमोदक के मतदाता पहचान-पत्र और नाम के साथ जिले की वेबसाईट पर रखेगा।
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1.5. [ पटवारी के लिए निर्देश ]
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यदि कोई नागरिक मतदाता अपना अनुमोदन रद्द करवाने के लिए आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई शुल्क लिए रद्द कर देगा।
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1.6. [ जिला कलेक्टर के लिए निर्देश ]
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प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त किया गया अधिकारी पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्रत्येक उम्मीदवार को प्राप्त अनुमोदनों की गिनती प्रकाशित करेगा।
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1.7. [ मुख्यमंत्री के लिए निर्देश ]
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यदि कोई उम्मीदवार किसी जिले में सभी माता-पिता (सभी, न कि केवल उनका जिन्होंने अपना अनुमोदन दर्ज करवाया है) के 35 प्रतिशत से अधिक माता-पिता का अनुमोदन प्राप्त कर लेता है, और वो प्राप्त अनुमोदन वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी के अनुमोदनों से 5% अधिक है, तो मुख्यमंत्री उसे 'जिला शिक्षा अधिकारी' की नौकरी दे सकता है।
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1.8. [मुख्यमंत्री, जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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कोई भी व्यक्ति माता-पिता का अनुमोदन प्राप्त करके जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह एक से अधिक जिलो का भी जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का, और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का जिला शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिले का जिला शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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1.9. [ मुख्यमंत्री के लिए निर्देश ]
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जब तक किसी जिला शिक्षा अधिकारी को 34 प्रतिशत से अधिक माता-पिता का अनुमोदन प्राप्त है तब तक मुख्यमंत्री को उसे बदलने की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि किसी जिला शिक्षा अधिकारी का अनुमोदन 34 प्रतिशत से नीचे चला जाता है तो मुख्यमंत्री उसे हटाकर अपनी पसंद के किसी अधिकारी को जिला शिक्षा अधिकारी बना सकते है।
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सैक्शन 2 : जिला शिक्षा अधिकारी के कार्य
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2.1. [ जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश ]
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जिला शिक्षा अधिकारी वर्तमान और बाद के संशोधित कानूनों के अनुसार कक्षा 1 से कक्षा 12 वीं वाले विद्यालयों और जिले के परीक्षा केन्द्रों का प्रशासन संभालेगा। जिला शिक्षा अधिकारी शैक्षिक गतिविधियों के विधिवत संचालन के लिए नागरिकों, सांसदों, विधायकों और जिला पंचायत सदस्यों द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला पंचायत प्रमुख से धन प्राप्त करेगा।
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2.2 [ जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश ]
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जिला शिक्षा अधिकारी निम्नलिखित विषयों की शिक्षा का प्रशासन कार्य देखेगा -- गणित, विज्ञान, भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, अंग्रेजी, हिन्दी, स्थानीय भाषा, सेना का इतिहास, कानून एवं प्रशासनिक ढ़ांचा, कानून का इतिहास एवं प्रशासनिक ढ़ांचा, सैन्य प्रशिक्षण और हथियार चलाने की शिक्षा। वह सांसदों, विधायकों आदि द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार शिक्षा देगा।
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2.3. [ जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश ]
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जिला शिक्षा अधिकारी संस्कृत और सामाजिक विज्ञान की शिक्षा जारी रखेगा। लेकिन यदि 51 प्रतिशत से अधिक मतदाता इस पाठ्यक्रम को जारी न रखने की मांग करते है तो जिला शिक्षा अधिकारी उसे अनिवार्य पाठ्यक्रम से हटा सकता है।
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2.4. [ जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश ]
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जिला शिक्षा अधिकारी किसी भी नागरिक को 100 रूपए का शुल्क लेकर “रजिस्टर्ड निजी शिक्षक” बनने की अनुमति दे सकता है।
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2.5. [ जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश ]
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जिला शिक्षा अधिकारी किसी भी माता-पिता को पटवारी के कार्यालय में जाकर नए शिक्षक का नाम दर्ज करने पर उन्हें अपने बच्चे के शिक्षक को बदलने की अनुमति दे सकता है।
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2.6. [ जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश ]
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जिला शिक्षा अधिकारी कक्षा 1 से कक्षा 12 तक के छात्रों के लिए प्रत्येक माह गणित में 1-4 परीक्षा आयोजित करवा सकता है। इसके अलावा वह विज्ञान, कानून और अन्य विषयों में परीक्षाएं करवाएगा। ये परीक्षाएं कम्यूटरीकृत परीक्षाएं हो सकती है। प्रत्येक वर्ष/प्रत्येक तिमाही के लिए उन प्रश्नों की सूची, जो परीक्षा में आ सकते है , में 10,000 से लेकर 100,000 प्रश्न होंगे, और इन्हें परीक्षा पूर्व प्रकाशित किया जाएगा। परीक्षाओं में इस सूची में से 30-100 प्रश्न हो सकते है।
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2.7. [ जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश ]
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जिला शिक्षा अधिकारी उपलब्ध धनराशि में से छात्र और उसके शिक्षक को परीक्षा में किए गए प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कार दे सकते है। शिक्षक को इन भुगतानों के अलावा सरकार से कोई और वेतन नहीं मिलेगा।
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सैक्शन 3 : जनता की आवाज
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3.1. [ जिला कलेक्टर के लिए निर्देश ]
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यदि कोई भी नागरिक इस कानून में परिवर्तन चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में जाकर एक ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है, और जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस ऐफिडेविट को 20 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा, ताकि कोई भी व्यक्ति उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन के देख सके।
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3.2. [ पटवारी के लिए निर्देश ]
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यदि कोई गरीब मतदाता, दलित मतदाता, महिला मतदाता, वरिष्ठ नागरिक मतदाता या कोई भी अन्य नागरिक मतदाता इस कानून अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा उपर के खण्ड में प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का शुल्क जमा कराएगा। तलाटी हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे इसकी रसीद देगा। इस हां/नहीं को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल दिया जाएगा।
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3.3. [ सभी के लिए के लिए निर्देश ]
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यह प्रक्रिया कोई रेफेरेनडम (जनमत-संग्रह) नहीं है। नागरिको द्वारा दर्ज की गयी हाँ या ना अधिकारीयों , मंत्रीयों, जजो, सांसदो, विधायको, आदि पर अनिवार्य रूप से बाध्य नहीं है। लेकिन यदि भारत के 40 करोड़ नागरिक मतदाता, किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमंत्री उस शपथपत्र पर कार्यवाही कर भी सकते है या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। प्रधानमन्त्री का निर्णय अंतिम होगा।
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=====ड्राफ्ट की समाप्ति=====
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06. अन्य पदों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं
शिक्षा अधिकारी एवं पुलिस प्रमुख के अलावा हमने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री , सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट एवं जिला जजों को शामिल करते हुए लगभग 30-50 पदों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाए प्रस्तावित की है। भारत में लगभग 700 जिले है, अत: जिला स्वास्थ्य अधिकारी जो कि सरकारी अस्पतालों के रखरखाव एवं प्रबंधन के लिए उत्तरदायी होता है , जिला रसद अधिकारी आदि समेत केंद्र, राज्य एवं जिला स्तर के लगभग 30 हजार अधिकारी, नेता, जज आदि राईट टू रिकॉल के दायरे में आ जायेंगे। राईट टू रिकॉल लागू होने के 24 घंटे के अंदर इन अधिकारियो में से लगभग 15 हजार अधिकारी तुरंत सुधर जायेंगे , और जब पहले महीने में नागरिको द्वारा कुछ 5-7 अधिकारियों को रिकॉल किया जाएगा तो शेष अधिकारी भी अपना काम काज सुधार लेंगे। आशय यह कि राईट टू रिकॉल क़ानून आने के बाद नागरिको को 30 हजार अधिकारियो में से 50 अधिकारियो को भी नौकरी से नहीं निकालना पड़ेगा। सिर्फ 5-7 भ्रष्ट अधिकारियो को बदलने से ही शेष अधिकारीयों के रवैये में बदलाव आने लगेगा। इस तरह राईट टू रिकॉल प्रशासन में कोई अस्थिरता नहीं लाएगा। सिर्फ 4-5 अधिकारियों को नौकरी से निकालना अन्य अधिकारियों के लिए चेतावनी की तरह काम करेगा और शेष अधिकारी अपनी नौकरी बनाए रखने के लिए तुरंत सुधरना शुरू कर देंगे। इस तरह राईट टू रिकॉल के होने मात्र से अधिकारियो के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है , और बहुधा उन्हें कभी रिकॉल करने की जरूरत नहीं पड़ती।

07. राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया का सारांश
इस प्रक्रिया के गेजेट में प्रकाशित होने से आम नागरिको को यह अधिकार मिला जाएगा कि यदि पीएम भ्रष्ट हो जाता है या जनहित के फैसले नहीं लेता तो नागरिक 5 वर्षों तक इंतजार किए बिना अपने प्रधानमंत्री को बदल सकेंगे।
1. भारत का कोई भी नागरिक जो प्रधानमंत्री बनना चाहता है , कलेक्टर के सामने उम्मीदवारी का शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा।
2. भारत का कोई भी मतदाता पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर 3 रू शुल्क का भुगतान करके अपनी पसंद के अधिक
से अधिक 5 व्यक्तियों को प्रधानमंत्री के पद के लिए अनुमोदित कर सकता है। पटवारी उसे उसके वोटर आईडी,
दिनांक, समय, और जिन व्यक्तियों को उसने अनुमोदित किया है, उनके नाम दर्ज करके रसीद देगा।
3. पटवारी मतदाताओ की प्राथमिकता को सरकारी वेबसाइट पर उनके मतदाता पहचान-पत्र संख्या के साथ रख देगा।
4. मतदाता अपना अनुमोदन 3 रू शुल्क देकर किसी भी दिन बदल सकता है।
5. प्रत्येक महीने की पहली तारीख को मुख्य सचिव उम्मीदवारों के अनुमोदन की गिनती प्रकाशित करेगा।
6. प्रधानमंत्री के अनुमोदनो की संख्या उसे माना जाएगा जो निम्नलिखित दो में से उच्चतर हो –
a) मतदाताओं की संख्या, जिन्होंने उसका अनुमोदन किया है।
b) प्रधानमंत्री का समर्थन करने वाले सांसदों द्वारा प्राप्त किए गए कुल मतों का योग
7. यदि किसी प्रत्याशी के अनुमोदनों की संख्या पदासीन प्रधानमंत्री के अनुमोदनों की संख्या से 1 करोड़ अधिक हो जाती
है तो पदासीन प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकता है और सांसद सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त उम्मीदवार को प्रधानमंत्री
नियुक्त कर सकते है।
आपने देखा होगा कि हमारे नेता दो तरह से पेश आते है – 1) चुनाव जीतने से पहले एवं , 2) चुनाव जीतने के बाद । चुनाव जीतने के साथ ही नेताओं का रवैया बदल जाने की मुख्य वजह यह है कि नागरिको के पास यह अधिकार नहीं है कि वे 5 वर्ष से पहले पीएम को बदल सके। राईट टू रिकॉल पीएम एवं सीएम का क़ानून गेजेट में आने से इनमे इस भय का संचार होगा कि यदि हमने प्रशासनिक सुधार के लिए त्वरित फैसले नहीं लिए तो जनता हमें 5 वर्ष से पूर्व ही अपदस्थ कर सकती है। और इस वजह से नेताओ के व्यवहार एवं काम काज में तुरंत सुधार आने लगेगा।

राईट टू रिकॉल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इस क़ानून के आने के बाद नागरिको को किसी अधिकारी या नेता को रिकॉल करने की जरूरत नहीं होती , क्योंकि वे जानते है कि अब यदि मैंने अपने काम काज में पर्याप्त सुधार नहीं किया तो जनता बहुमत का प्रयोग करके मुझे नौकरी से निकाल सकती है । इस तरह राईट टू रिकॉल बिना अस्थिरता लाये मौजूदा नेताओं एवं अधिकारियो को ईमानदार बना देता है ।

08. सबसे बड़ी चुनौती -- भारत की सेना को चीन / अमेरिका से होने वाले संभावित युद्ध में टिके रहने के लिए तैयार
करना

इस बात की ज्यादातर से ज्यादा सम्भावना है कि अमीरका या चीन भारत पर अप्रत्यक्ष या सीधा हमला कर सकते है। राईट टू रिकॉल मूवमेंट के सभी कार्यकर्ताओ का मानना है कि सबसे बड़े जिस खतरे की हम लगातार अनदेखी कर रहे है , वह भारत की सेना का निरंतर कमजोर होना है। आयातित हथियारों पर निर्भर सेना कभी भी आत्मनिर्भर नहीं होती , क्योंकि युद्ध के दौरान हथियारों की आपूर्ति के लिए अन्य देशो पर निर्भर होना पड़ता है। राईट टू रिकॉल आन्दोलन का मुख्य लक्ष्य भारत की सेना को अमेरिका के बराबर ताकतवर बनाना है, और इसके लिए हमें ऐसा प्रशासन चाहिए जिससे हम “मेड इन इन्डिया मेड बाय इन्डियन” नीति के तहत बड़े पैमाने पर आधुनिक स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करने में सक्षम हो सके। हमारे द्वारा सभी क़ानून इसी आदर्श को सामने रखकर लिखे गए है कि इससे भारत में स्वदेशी हथियारों के निर्माण की गुणवत्ता में इजाफा हो। अमेरिका ने यह बात साफ़ कर दी है कि वह ईरान के तेल के कुँए हडपना चाहता है। तो ज्यादातर सम्भावना है कि चीन , पाकिस्तान , बांग्लादेश , सऊदी अरेबिया और इरान अमेरिका के हमले से बचने के लिए एक वलय की रचना करे। जब अमेरिका पाकिस्तान को भारत पर हमला करने के लिए उकसायेगा तो भारत अपने आप को बचाने के लिए युद्ध में अमेरिका का साथ देने के लिए बाध्य हो जायेगा। और भारत-चीन के युद्ध से भारत जब जर्जर हो जाएगा तो अमेरिका का अगला कदम भारत पर हमला करना होगा। इसके सैंकड़ो पहलू हो सकते है। किन्तु एक बात तय है कि युद्ध निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है , और किसी भी सभ्यता को किसी भी समय युद्ध का सामना करना पड़ सकता है , अत: हम युद्ध में हार जाने का जोखिम नहीं उठा सकते। सेना मजबूत बनने के लिए हमें स्वदेशी आधुनिक हथियारों की निर्माण इकाइयां स्थापित करना जरुरी है। विदेशियों द्वारा दिए गए हथियारों या विदेशियों द्वारा भारत में आकर बनाए गए हथियारों द्वारा युद्ध नहीं लड़ा जा सकता।
स्वदेशी आधुनिक हथियारों का उत्पादन बढाने के लिए हमें राईट टू रिकॉल , ज्यूरी सिस्टम , वेल्थ टेक्स , एम आर सी एम जैसे कानूनों की तत्काल जरूरत है।

सेना को मजबूत बनाने और स्थानीय निर्माण बढाने के लिए हमारे द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव निम्नलिखित है :

1. एम आर सी एम : खनिज से प्राप्त रोयल्टी एवं सरकारी भूमि से प्राप्त किराये को दो भागो में इस तरह विभाजित किया
जाए कि – इसका 1/3 हिस्सा सीधे सेना को एवं 2/3 सीधे भारत के सभी नागरिको को मिले। इससे सेना के बजट में
वृद्धि होगी और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा चलाई जा रही खनिजो की लूट पर लगाम लगेगी। खनन की लूट कम होने
से कच्चे माल की कीमतें गिरेगी एवं निर्माण इकाइयों की लागत में कमी आएगी। सम्पूर्ण ड्राफ्ट एवं विवरण देखने के
लिए लिंक में दी गयी पुस्तक का अध्याय 5 देखें – JuryIndia .org

2. वेल्थ टेक्स लागू करना : सबसे जरुरी एवं मुख्य कदम देश में वेल्थ टेक्स एवं जूरी सिस्टम लागू करना है। वेल्थ टेक्स
एवं जूरी सिस्टम लागू किये बिना हम किसी भी तरह भारत में बड़े पैमाने पर निर्माण इकाइयां लगाने में सफल नहीं
हो पायेंगे। हमने वेल्थ टेक्स का जो प्रस्ताव किया है उसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को 25 वर्ग मीटर अकृषि भूमि एवं 5
एकड़ कृषि भूमि की छूट होगी तथा इससे अधिक भूखंड होने पर भूस्वामी को 1% सालाना की दर से कर चुकाना
होगा। इस ड्राफ्ट का पूरा विवरण अध्याय 25 में दिया गया है।

3. हथियारबंद नागरिक समाज की रचना : नागरिको के लिए बन्दुक एवं एक निश्चित मात्रा में कारतूस रखना अनिवार्य
होगा। ड्राफ्ट एवं अन्य विवरण के लिए अध्याय 29 देखें।

4. सैनिको की संख्या 12,00,000 से बढाकर 40,00,000 करना।

5. सैनको का वेतन बढाकर दो गुना करना।

6. सभी भारतीयों को सैन्य शिक्षा देना : हथियार रखना क्यों अनिवार्य है एवं इससे देश एवं खुद की किस तरह रक्षा
होती है , से सम्बंधित शिक्षा को 10th क्लास के पाठ्यक्रम से शुरू करना। इसके अलावा व्यस्को के लिए हथियार
प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना। जैसे जैसे भारत के नागरिको को हथियारों के महत्त्व के बारे में जानकारी मिलेगी वैसे वैसे
वे उन नेताओं का विरोध करना शुरू कर देंगे जो भारत की सेना को कमजोर बनाये रखने एवं नागरिको को हथियार
विहीन रखने का समर्थन करते है।

7. 500,000 इंजिनियर एवं 10,00,000 कारीगरों को नियुक्त करना ताकि बन्दुक से लेकर टेंक , लड़ाकू विमान,
मिसाइल एवं परमाणु हथियारों तक का उत्पादन बढ़ाया जा सके। हमें स्वदेश निर्मित हथियार चाहिए , आयातित
या विदेशियों के बनाए हथियारों में किल स्विच होने के कारण युद्ध के समय वे हमारे किसी काम नहीं आयेंगे।

8. IITs एवं IISc जैसे प्रोद्योगिकीय शिक्षा संस्थान DRDO के अधीन करना। इन संस्थानों से जो कोई व्यक्ति प्रशिक्षण
लेगा उसे 15 वर्ष तक DRDO एवं इसके अधीन उत्पादन / शोध संस्थानों में काम करना होगा।

9. परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करना : चीन के बराबर परमाणु क्षमता बढाने के लिए परमाणु परिक्षण एवं परमाणु
हथियारों का निर्माण करना : चीन ने 23 ग्राउंड टेस्ट एवं 22 वातावरणीय परिक्षण किये है, जबकि हमने सिर्फ 4
ग्राउंड टेस्ट किये है और एक भी वातावरणीय परिक्षण नहीं किया है। चीन का सबसे शक्तिशाली परिक्षण 4500 किलो
टन का था जबकि हमने अब तक 45 किलो टन से बड़ा परिक्षण नहीं किया है !! इसके अलावा चीन के पास भारत के
मुकाबले कम से कम 20 गुना ज्यादा परमाणु हथियार है। हमें कम से कम 3000 किलो टन के 10 वातावरणीय
परिक्षण करने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के टेक्टिकल परमाणु बम सेना द्वारा इस्तेमाल किये जाने के
लिए तैयार है , जबकि हमने अब तक इनका उत्पादन भी शुरू नहीं किया है। अत: हमें अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से
शुरू करने की जरूरत है।

10) कच्चे माल के अतिरिक्त सभी वस्तुओ पर 300% आयात शुल्क लगाना : स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए यह
जरुरी है कि हम स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रोद्योगिकीय निर्माण इकाइयां लगवाने के लिए निर्मित वस्तुओ का
आयात महंगा करें एवं सिर्फ कच्चा माल आयात होने दे। सम्पूर्ण रूप से स्थानीय उदारीकरण करने पर भारत के
इंजीनियर एवं कारोबारी निर्माण इकाइयों का जोखिम उठाने के लिए तत्पर हो जायेंगे और 300% आयात शुल्क
उन्हें सुरक्षा देगा। जब भारत की निर्माण इकाइयाँ गुणवत्ता में विदेशियों का मुकाबला करने लगे तब हम आयात
शुल्क घटा सकते है। यदि इसमे WTO बाधा बनता है तो हमें संसद में प्रस्ताव पास करके WTO समझौते से बाहर
हो जाना चाहिए।

उपरोक्त कदम उठाने से सेना की ताकत में सुधार आएगा। सेना की ताकत बढने से अमेरिका / चीन द्वारा भारत पर हमला करने की सम्भावना घट जाएगी , और यदि फिर भी हमला होता है तो युद्ध में टिके रहने की हमारी क्षमता बढ़ने से हम अच्छे से मुकाबला कर पायेंगे।
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09. दूसरा सबसे जरुरी एवं चुनौती पूर्ण काम : अदालतों में लटके 3 करोड़ मुकदमो का निपटारा सिर्फ 3 वर्ष के
भीतर करना और यह भी सुनिश्चित करना कि सभी फैसले निष्पक्ष हो :

भारत की सुस्त अदालतों में व्याप्त भाई भतीजा वाद एवं भ्रष्टाचार देश की सबसे बड़ी और सबसे खतरनाक समस्या है। हम देश में कोई भी क़ानून बना दें लेकिन अदालतें न सुधारें तो व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आएगा , क्योंकि हमारी अदालते दर्ज हुए मामलो को वर्षो तक लटका कर क़ानूनो के भय को अप्रभावी कर देती है। लेकिन भारत की कोई भी राजनैतिक पार्टी अदालतों के इस जानलेवा भ्रष्टाचार एवं भाई भतीजावाद के मुद्दे को छूने को तैयार नहीं है। भारत के नेता , बुद्धिजीवी , संपादक , पत्रकार आदि का लगातार यह बात दोहराते रहते है कि हमें भारत की सुस्त अदालतो एवं जजों के भ्रष्टाचार पर कोई चर्चा नहीं करनी चाहिये !! अदालतों का भ्रष्टाचार सुधारना एवं जजों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए हमने विभिन्न क़ानून ड्राफ्ट्स का प्रस्ताव किया है। इसका सारांश निचे दिया गया है -

1. सुप्रीम कोर्ट जज , हाई कोर्ट जज , एवं जिला जजो पर राईट टू रिकॉल जज क़ानून प्रक्रियाएं
2. साक्षत्कार का समापन - निचली अदालतों में जजों की नियुक्ति सिर्फ लिखित परीक्षा द्वारा की जायेगी। साक्षात्कार
सिर्फ भाई भतीजा वाद एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।
3. निचली अदालतों में नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा में गणित का पाठ्यक्रम भी शामिल किया जाए , ताकि
तर्कशक्ति विहीन व्यक्तयों के क़ानून की किताबें रट कर जज बनने की सम्भावना में कमी आये।
4. निचली अदालतों में मुकदमो की सुनवाई के लिए ज्यूरी सिस्टम - ज्यूरी सिस्टम हमारा सबसे मुख्य प्रस्ताव है।
जूरी सिस्टम ऐसा क़ानून है जो लागू होने के 24 घंटो के भीतर व्यवस्था में नाटकीय ढंग से सुधार ले आएगा। इसका विवरण
आगे दिया गया है। ।
5. अपील के लिए हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में जूरी सिस्टम।
6. 1 लाख नयी निचली अदालतों की स्थापना , एवं जजों की संख्या बढ़ाकर 200,000 करना।
7. कक्षा 6 से क़ानून की शिक्षा को पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल करना।
8. व्यस्को को क़ानून की मुफ्त शिक्षा।
9. जजों को शामिल करते हुए सभी सरकारी अधिकारियों एवं उनके बेहद घनिष्ठ रक्त संबंधियों ( माता-पिता-पुत्र-भाई
आदि ) की सम्पत्ति की सार्वजनिक घोषणा। इस घोषणा में उनके सभी बैंक खातो , लॉकर , जमीन आदि शामिल है।
सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि अमुक अधिकारी कितने ट्रस्टो एवं कम्पनियों में है और इन ट्रस्टो एवं कम्पनियों के पास
कितनी जमीन है। यदि किसी सरकारी अधिकारी या जज को यह घोषणा करने में दिक्कत है तो उसे इस क़ानून के तहत
बाध्य नहीं किया जाएगा किन्तु तब वह नौकरी से इस्तीफा दे सकता है।
10. सभी जजों एवं सरकारी अधिकारियो एवं उनके घनिष्ठ रक्त संबंधियों की नागरिकता का ब्यौरा सार्वजनिक करना।
11. मुकदमो के पक्षकारो को मुकदमे की अद्यतन जानकारी की सूचना ईमेल एवं SMS से देना।
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9.1 जूरी सिस्टम क्या है और कैसे यह अदालतों में सुधार ले आएगा ?
भारत में 110 करोड़ नागरिक है, और हमें 20 से 50 लाख फौजदारी मामले हर साल निपटाने है। अब प्रश्न है कि मुकदमो की सुनवाई एवं फैसले देने वाले लोगो का चयन कैसे किया जाए। इसके लिए मोटे तौर पर दो तरीके है -

1. जूरी सिस्टम : किसी मुकदमे की सुनवाई के लिए 25-55 आयुवर्ग के 12-15 नागरिको का चयन जिले की मतदाता सूचियों में से रेंडमली किया जाता है। 12-15 नागरिको का यह समूह ज्यूरी मंडल कहलाता है। नागरिको की यह जूरी मुकदमे की सुनवाई करती है , सबूत देखती है , बयान सुनती है और मुकदमे का फैसला देती है। प्रत्येक मुकदमे के लिए अलग जूरी होती है , और मुकदमे का फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाती है। उदाहरण के लिए 1958 से पहले तक भारत में एक कमजोर जूरी सिस्टम था और मुकदमो की सुनवाई अक्रमत ढंग से चुने गए 12 नागरिको के जूरी मंडल द्वारा की जाती थी , एवं इनके द्वारा ही दंड सुनाया जाता था। बाद में नानावटी मामले का बहाना लेकर श्री जवाहर लाल ने जूरी सिस्टम रद्द कर दिया। हालांकि श्री जवाहर लाल जूरी सिस्टम को ख़त्म करने का मन 1956 में ही बना चुके थे।
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2. जज सिस्टम : करोडो नागरिको के ऊपर सरकार कुछ 200-2000 व्यक्तियों को 20-35 वर्षो के लिए नियुक्त करती है , जिन्हें जज कहकर पुकारा जाता है। नियुक्त किये गए इन मुट्ठी भर व्यक्तियों के समूह को देश के सभी मामलो में दंड देने या रिहा करने की स्थायी शक्ति दे दी जाती है। उदाहरण के लिए भारत में सभी मामलो में दंड देने की शक्ति कुछ 18,000 जजों के पास है।

जज सिस्टम एवं जूरी सिस्टम में बुनियादी अंतर आगे तालिका में दिया गया है :
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जज सिस्टम Vs जूरी सिस्टम

जज सिस्टम में - कुछ 20,000 - 30,000 लोगो का समूह किसी एक वर्ष में दर्ज किये 20-25 लाख मामलों की सुनवाई करता है।

जूरी सिस्टम में - प्रत्येक मामला भिन्न व्यक्तियों के जूरी मंडल को भेजा जाता है। जूरी सदस्यों का चयन जिले /राज्य / देश की मतदाता सूचीयों में से रेंडमली किया जाता है। इस तरह 20-25 लाख मामलों का निपटारा कुछ 3 करोड़ नागरिको द्वारा किया जाता है।
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जज सिस्टम में - ज्यादातर मामले एक ही व्यक्ति के पास जाते है। एक जज अपने सेवा काल में लगभग 5,000 से 20,000 मामलो में फैसला देता है।

जूरी सिस्टम में -प्रत्येक मुकदमे के लिए अलग से जूरी मंडल होता है। जो नागरिक किसी मामले में फैसला दे चुका है , उसे अगले 5 वर्ष तक किसी अन्य मामले में जूरी सदस्य नहीं बनाया जाता।
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जज सिस्टम में - यदि किसी जिले में 5,000 मामले प्रति वर्ष एवं 5 वर्ष में 25,000 मामले दर्ज होते है तो जज सिस्टम में इन सभी मामलो का फैसला कुछ 25-50 जजों द्वारा दिया जाएगा।

जूरी सिस्टम में - ये मामले लगभग 300,000 से 400,000 भिन्न भिन्न नागरिको द्वारा सुने जायेंगे।
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फैसले देने की शक्ति लगातार नए लोगो के हाथो में जाते रहने से जूरी सिस्टम में गठजोड़ बनने , भाई भतीजा वाद एवं भ्रष्टाचार की सम्भावना बेहद कम हो जाती है। जज की तुलना में वकील के लिए सभी जूरी सदस्यों से गठजोड़ बनाना काफी मुश्किल है। जज सिस्टम में वकील आसानी से जज से गठजोड़ बना लेते है और यह गठजोड़ निरंतर जारी रहता है।
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जज सिस्टम में - जज आम तौर पर किसी अदालत में 3-4 वर्ष टिके रहता है। पर्याप्त समय होने के कारण अपराधियों एवं वकीलों द्वारा जज से गठजोड़ बना लेना काफी आसान हो जाता है। और यह गठजोड़ लगातार बना रहता है।

जूरी सिस्टम में - जूरी सदस्यों का चयन जिले के 10 लाख या देश भर के 100 करोड़ नागरिको में से रेंडमली किया जाता है, और कोई नागरिक अगले 5 वर्ष तक दुबारा किसी मुकदमे की सुनवाई नहीं करता। सिर्फ एक मुकदमा सुनने की वजह से 99% मामलो में फैसला 7-15 दिन में आ जाता है। दुनिया में किसी भी वकील के लिए यह निहायत ही दुष्कर काम है कि वह इन 12 सदस्यों में से किन्ही 4 लोगो के रिश्तेदारों को भी खोज निकाले , और यह काम तब और भी मुश्किल हो जाता है, जब वकील को यह काम सिर्फ हफ्ते भर में करना हो।
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जज सिस्टम - कई अदालतों में जज आपस में भी गठजोड़ बनाकर रखते है। जज "A" जज "B" के रिश्तेदार वकील के पक्ष में फैसला सुना देगा और जब जरूरत होगी तो जज "B" जज"A" का काम निकाल देगा। यह भाई भतीजा वाद का परिष्कृत रूप यानी Cross-Nepotism है।

जूरी सिस्टम - ज्यूरी सदस्य अस्थायी होते है और सिर्फ हफ्ते दो हफ्ते के लिए जूरी मंडल में आते है। 5 लाख से 100 करोड़ लोगो के बीच में से रेंडमली चुने गये किसी जूरी मंडल "A" के 12 सदस्यों की रिश्तेदारी जूरी मंडल "B" से होने की सम्भावना होना और इसे हफ्ते भर में ढूंढ निकालना गणितीय रूप से असम्भव है।
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कैसे जज सिस्टम संगठित एवं पेशेवर अपराधियो को पनपने का अच्छा अवसर प्रदान करता है ?

जज सिस्टम और संगठित अपराध Vs जूरी सिस्टम और संघठित अपराध

यदि किसी गैंग एवं उसके सरगना के खिलाफ 4-5 वर्ष के दौरान 1000 मुकदमे दर्ज होते है तो जज सिस्टम में ये सभी मुकदमे 5-10 जजों के पास जायेंगे।

जूरी सिस्टम में प्रत्येक मामला 12-15 नागरिको के अलग अलग जूरी मंडल के पास जाएगा। और जूरी मंडल के इन 15*1000 = 15,000 सदस्यों का चयन करोडो नागरिको में से रेंडमली किया जाता है।
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तो जज सिस्टम में गवाहों को तोड़ने , उन्हें धमकाने , जांच प्रभावित करने और रिहा होने के लिए माफिया सरगना को सिर्फ 5-10 जजों से गठजोड़ बनाना है , ताकि जज उसके मामलो की सुनवाई की रफ़्तार धीमी कर दे।

लेकिन जूरी सिस्टम में मुकदमे को लंबित रखना बहुत ही मुश्किल है, क्योंकि एक जूरी मंडल के पास सिर्फ एक ही मामला होता है। और उन्हें नियमित रूप से सुबह 11 बजे से सायं 4 बजे तक मामले की सुनवाई करनी होती है। जूरी में अगली तारीख का मतलब होता है अगला दिन !! और इसी छोटे अंतराल में सरगना को लगभग 12,000 जूरी सदस्यों से गठजोड़ बनाना होगा।
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दुसरे शब्दों में , भारत की अदालतों में देश भर के मुकदमो की सुनवाई करने और दंड देने का अधिकार स्थायी रूप से मुट्ठी भर लोगो के पास होने के कारण अपराधियों के लिए गठजोड़ बनाना बेहद आसान है। आज 3 करोड़ मुकदमो के माध्यम से भारत के 20-25 करोड़ लोगो की टाँगे अदालतों में फंसी हुयी है। इस तरह हमारी सुस्त अदालतो ने देश की उत्पादकता की गति को तोड़ कर रख दिया है। पश्चिम क्यों भारत से आगे और बहुत आगे निकल गया , इसका सबसे महत्त्वपूर्ण कारण वहां पर ज्यूरी सिस्टम का होना है। जूरी सिस्टम में मुकदमो के फैसले हफ्ते दो हफ्ते में आ जाते है , और अपराधी यह बात जानते है कि यदि उन्होंने अपराध किया है तो उन्हें जल्द जेल भेज दिया जाएगा। त्वरित एवं निष्पक्ष दंड मिलना एक मात्र तत्व है जो अपराध को नियंत्रित करता है। अपराध कम होने एवं मामलो का त्वरित निपटान होने से देश की उत्पादकता बढ़ जाती है। तो राईट टू रिकॉल के अलावा जूरी सिस्टम मुख्य वजह रही कि अमेरिका-ब्रिटेन आदि देश अन्य देशो से आगे काफी आगे निकल गए। जूरी सिस्टम के पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ इस लिंक से डाउनलोड करें – newindia. in/JurySys3 , यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो कृपया पीएम को पोस्टकार्ड लिखे एवं @pmoindia पर ट्विट भी करे कि उपरोक्त लिंक में दर्ज क़ानून ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।
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10. तीसरा सबसे जरुरी काम : देश भर में फैले 2 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठियो की पहचान करना एवं उन्हें देश से
खदेड़ना

बांग्लादेशी घुसपेठिये उत्तर पूर्व भारत से पूरे देश में दीमक की तरह फ़ैल रहे है। असम के 4 बोडो जिलो में बांग्लादेशी घुसपेठियों ने लगभग 50,000 भारतीयों को खदेड़ कर उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाको में अब कई तहसीलों में बांग्लादेशी घुसपेठियो का बहुमत है। हालात इतने बदतर कैसे हुए --

(1) 1991 से पश्चिम बंगाल में कई एनजीओ को सऊदी अरब से अनुदान आने लगे, और ये एनजीओ घुसपेठियों का फर्जी राशन कार्ड , वोटर कार्ड आदि बनाने के लिए तहसीलदार को प्रति व्यक्ति 5,000 से 10,000 रू तक चुकाने लगे, और यह पैसा ऊपर मुख्यमंत्री तक जाने लगा।
(2) बेरोजगारी एवं भुखमरी के कारण बांग्लादेशी घुसपेठिये सस्ते श्रम में काम करने को राजी हो जाते थे ,
(3) बांग्लादेशी घुसपेठिये बोर्डर से कैरोसिन , डीजल एवं गायों की तस्करी करने में भी काम आने लगे ; अत: स्थानीय नेताओं एवं अधिकारियो ने उनका इस्तेमाल इस काम में करके करोड़ो रूपये बनाना शुरू कर दिया। इस तरह बांग्लादेशी घुसपेठिये स्थानीय नेताओं एवं अधिकारियो के लिए काम के लोग बन गए और उन्होंने इन्हें और भी तेजी से बुलाकर भारत में बसाना शुरु किया।
(4) भारत के सभी कु-बुद्धिजीवियों का दावा है कि भाषा एवं कद काठी में साम्य होने के कारण अब उनकी पहचान करना असम्भव है अत: इस मुद्दे पर बात करके समय ख़राब करने की जगह हमें इसे भूल जाना चाहिए !!

इन कु-बुद्धिजीवियों को हमारा कहना है - "तुम अपनी बौद्धिकता के साथ दफा हो जाओ। हमें तुम्हारी बुद्धिजीविता की कोई जरूरत नहीं है"

तो हम साधारण नागरिक इन कु-बुद्धिजीवियों एवं राजनैतिक पार्टियों पर निर्भर हुए बिना सरकारी मशीनरी का उपयोग करके कैसे इन 2 करोड़ बांग्लादेशियों को देश से बाहर खदेड़ सकते है ? यदि भारत के नागरिक प्रधानमंत्री को निचे दी गयी प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करने के लिए बाध्य कर देते है तो सिर्फ 6 माह में सभी 2 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ा जा सकता है। हमें इस बात को गंभीरता से लेने की जरूरत है कि इन घुसपेठियो का गठजोड़ बांग्लादेश के इस्लामिक कट्टरपंथियों एवं नक्सलवादियो से है। यदि हमारा युद्ध चीन या पाकिस्तान से होता है तो वे लोग इन्हें हथियार पहुंचा कर देश को एक भीषण आंतरिक गृह युद्ध की और धकेल सकते है। भारतीय नागरिक हथियार विहीन है, अत: यदि ऐसे हालात बन जाते है तो करोड़ो नागरिको को उत्तर पूर्व से अपनी जमीन , सम्पत्ति आदि छोड़ कर उसी तरह से मध्य भारत की और पलायन करना पड़ेगा जिस तरह 90 के दशक में कश्मीरी पंडितो को करना पड़ा था। और इस पूरे घटनाक्रम के दौरान हम उत्तर पूर्व का पूरा इलाका गँवा देंगे। तो इस तरह ये घुसपेठिये एक टाइम बम की तरह है जो किसी भी समय फट सकता है। यदि हम इन्हें तत्काल नहीं खदेड़ देते है तो हम सुरक्षा की दृष्टी से एक बड़ा एवं निश्चित जोखिम उठा रहे है।

बांग्लादेशी घुसपेठियों को खदेड़ने के लिए जिस प्रक्रिया का हमने प्रस्ताव किया है , उसका सारांश निम्नलिखित है :
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1. जिला पुलिस प्रमुख फोन बिल के आधार पर एवं टेलीकोम कम्पनियों से समन्वय बनाकर उन लोगो को चिन्हित करेगा
जो सामान्यतया बांग्लादेश फोन करते रहते है। संदेह के आधार पर पुलिस प्रमुख इनके नाम एवं छाया चित्र वेबसाईट
पर प्रकाशित कर सकेगा।

2. तब पुलिस प्रमुख बांग्लदेशी घुसपेठिये की पहचान के सबूत जुटाने के लिए 100,000 रू तक की इनामी राशि घोषित
करेगा। यदि बांग्लादेश में रहने वाला उसका कोई रिश्तेदार ब्लड सेम्पल देने को तैयार हो जाता है तो पुलिस प्रमुख
डीएनए पुष्टि के लिए कार्यवाही करेगा। नागरिको की जूरी ब्लड सेम्पल की जांच , सार्वजनिक नारको टेस्ट एवं लाइ
डिक्टेटर टेस्ट के नतीजो के आधार पर यह तय करेगी कि अमुक व्यक्ति घुसपेठिया है या भारत का नागरिक।

3. नागरिको को पीएम पर दबाव बनाना होगा कि वे राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख का ड्राफ्ट गेजेट में प्रकाशित करे।
क्योंकि जब तक पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकलाने का अधिकार नागरिको के पास नहीं होगा तब तक पुलिस प्रमुख
घुसपेठियों को खदेड़ने के काम को गंभीरता से नहीं लेगा। उल्टे वह घुसपेठियो को चिन्हित करेगा और उनसे घूस वसूल
करके उन्हें भारत में ही रहने के लिए छोड़ देगा

4. गेजेट में इस तरह की अधिसूचना प्रकाशित करवाना कि यदि व्यक्ति
घुसपेठिया साबित हो जाता है तो उसे जेल भेजा जा सके।

5. मौजूदा क़ानून कहता है कि , यदि कोई गैर भारतीय नागरिक पासपोर्ट के लिए आवेदन करता है तो यह कारावास से दंडनीय अपराध है। हमें यह प्रावधान राशन कार्ड , वोटर कार्ड एवं आधार कार्ड में भी जोड़े जाने की जरूरत है।

यदि हम 6 महीने के भीतर 5000 घुसपेठियों को भी जेल पहुंचा देते है तो 95% घुसपेठिये देश छोड़कर भाग जायेंगे और वापिस लौट कर नहीं आयेंगे। कृपया इस बारे में विस्तृत विवरण एवं ड्राफ्ट अध्याय 31 से 34 में देखें।
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11. संविधान के अनुच्छेद 147 में बदलाव करना : क्योंकि यह अनुच्छेद ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट को भारत के संविधान में संशोधन करने की शक्ति देता है !!

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 147 कहता है कि , जब सुप्रीम कोर्ट के जज संविधान की व्याख्या करेंगे तो भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 एवं इस अधिनियम में ब्रिटीश संसद द्वारा लाये गए किसी भी संशोधन को आधार में रखेंगे। तो इस तरह अनुच्छेद 147 ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947’ को एवं ब्रिटिश संसद द्वारा आज भी इसमें लाये गए किसी भी संशोधन को भारत के संविधान का हिस्सा बना देता है। हमें इस अनुच्छेद में यह लिखने की जरूरत है कि - "सुप्रीम कोर्ट के जज जब भी संविधान की व्य्खाया करेंगे तो सिर्फ और सिर्फ भारत के नागरिको की इच्छा को आधार में रखेंगे"। उल्लेखनीय है कि जब अंग्रेजो ने भारत को आजादी दी तो ब्रिटिश संसद में ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947’ पास किया था। वे भारत में अपने मन मुताबिक़ संविधान चाहते थे , अत: उन्होंने संविधान निर्माताओ को भारतीय संविधान में अनुच्छेद 147 रखने को कहा। इस तरह भारतीय संविधान का अनुच्छेद 147 भारतीय संविधान को ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947’ से लिंक कर देता है। दरअसल भारतीय संविधान भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 की कार्बन कोपी है। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 एक ब्रिटिश अधिनियम है , और ब्रिटिश संसद यदि आज भी इसमें कोई संशोधन लाती है तो वह भारतीय संविधान का आधार बन जाता है।
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12. महात्मा सुभाष चन्द्र बोस को राष्ट्रपिता घोषित करने एवं राष्ट्र गान को बदलने जैसे विषयों के लिए नागरिको के बहुमत का प्रयोग करना :
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 14 2018 19:46:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

विधानसभा चुनाव 2018 में वितरित किये गए 24 पेज के पेम्पलेट के अंश : भाग - 2 ( पूरा पीडीऍफ़ कमेन्ट बॉक्स में देखें )
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12. महात्मा सुभाष चन्द्र बोस को राष्ट्रपिता घोषित करने एवं राष्ट्र गान को बदलने जैसे विषयों के लिए नागरिको के
बहुमत का प्रयोग करना :

1. नागरिको के बहुमत का प्रयोग करके हमें करेंसी नोट आदि को शामिल करते हुए सभी सरकारी दस्तावेजो से मोहन
दास गांधी के चित्रों को अहिंसा मूर्ती महात्मा सुभाष चन्द्र बोस के चित्रों से बदल देना चाहिए। सरकार तब से अपने
किसी भी दस्तावेज, योजनाओं, इमारतो आदि में मोहन गांधी के नाम एवं चित्रों का इस्तेमाल नहीं करेगी. क्योंकी
मोहन भाई का आजादी की लड़ाई से कोई लेना देना नहीं रहा था। निजी स्तर पर कोई संगठन या व्यक्ति चाहे तो मोहन
भाई का बढ़ावा कर सकता है।

2. हमें नागरिको के बहुमत का प्रयोग करके सरकारी कार्यक्रमों एवं सरकारी परिक्षेत्रो में जन गण मन के गायन पर
प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए। रविन्द्रनाथ ने जन गण मन में ब्रिटिश सम्राट को ईश्वर तुल्य एवं भारत का भाग्य
विधाता बताया है। इस गीत से प्रसन्न होकर बाद में ब्रिटिश साम्राज्य ने रविन्द्र नाथ को नोबेल पुरूस्कार दिलाने में
सहयोग किया और नाईट हुड की उपाधि दी। बाद में नागरिको के बहुमत से वन्दे मातरम गीत को राष्ट्रगान बनाया जा सकता है।

3. महिलाओ के बहुमत से 498A ( दहेज़ वाला क़ानून ) को रद्द करना - देश भर की महिलाओं के बहुमत का प्रयोग
करते हुए इस धारा को रद्द किया जा सकता है। हमारा अनुमान है कि यदि देश की महिलाओं की राय शुमारी की
जाती है तो महिलाओं का बहुमत इस धारा को रद्द करने के पक्ष में अपना मत प्रकट करेगा। एक वैकल्पिक समाधान
जूरी सिस्टम के ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करना है। दहेज़ के सभी मुकदमो की सुनवाई 12-15 महिलाओं के जूरी
मंडल द्वारा की जायेगी। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विवाद के लिए भी हमारा यही प्रस्ताव है ।

4. किसी विषय पर नागरिको के बहुमत की रायशुमारी के लिए आवश्यक टीसीपी क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करना -
भारत के नागरिको के पास ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है जिससे वे अपनी शिकायत या सुझाव सीधे प्रधानमंत्री के सम्मुख
रख सके और यह पता लगाया जा सके कि देश के कितने नागरिक इस सुझाव या शिकायत से सहमत है।

12.1. गैजेट में प्रकाशित करने के लिए टीसीपी = Transparent Complaint Procedure का प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट

1) कलेक्टर : कोई मतदाता यदि कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई शपथपत्र प्रस्तुत करता है तो कलेक्टर शपथपत्र को 20 रूपये प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर दर्ज करेगा और एक सीरियल नंबर जारी करेगा. कलेक्टर इस शपथपत्र को स्कैन करके शपथकर्ता की मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर रखेगा।

2) पटवारी : कोई मतदाता यदि धारा-1 के तहत प्रस्तुत किये गए किसी शपथपत्र पर अपनी हाँ/ ना दर्ज कराने पटवारी कार्यालय आता है तो पटवारी 3 रू शुल्क लेकर मतदाता की हाँ / ना को उसकी मतदाता संख्या के साथ दर्ज करेगा तथा मतदाता की हाँ / ना को उसकी मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर रखेगा।

3) प्रधानमंत्री : ये प्रक्रिया कोई जनमत-संग्रह या रेफेरेंडम नहीं है। मतदाताओ द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना किसी भी अधिकारी, मंत्री, जज, सांसद, विधायक आदि पर बाध्यकारी नहीं है। यदि भारत के कुल मतदाताओं के 51% मतदाता किसी शपथपत्र पर "हाँ" दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री उस शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकते है या प्रधानमंत्री अपना इस्तीफा दे सकते है। इस बारे में प्रधानमन्त्री का निर्णय अंतिम होगा।

12.2 ये 3 धाराएं गेजेट में आने के बाद कैसे काम करेगी ?

मान लीजिये कोई व्यक्ति चाहता है कि धारा 498A ख़त्म की जानी चाहिए। तो वह प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए इस धारा को ख़त्म करने का शपथपत्र कलेक्टर कार्यालय में जाकर प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर अमुक प्रति पेज के 20 रू की दर से शुल्क लेकर अमुक शपथपत्र का एक सीरियल नंबर जारी कर देगा। कलेक्टर यह शपथपत्र जस का तस स्कैन करके पीएम की वेबसाईट पर रखेगा. अब यदि देश का कोई भी नागरिक 498A को ख़त्म करने का समर्थन करता है तो वह पटवारी कार्यालय में जाकर 3 रू देकर इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर सकता है। बाद में पीएम इस तरह का आदेश भी दे सकते है कि नागरिक अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या एटीएम के माध्यम से अपना अनुमोदन दर्ज करवा सके। अब मान लीजिये कि कुछ ही महीनो में 50 करोड़ नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमंत्री जनादेश का सम्मान करते हुए इस धारा को ख़त्म कर सकते है। इस तरह टीसीपी देश के नागरिको को विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज मिलाने का अवसर देगा, और सरकार को भी इस बात की जानकारी रहेगी कि किसी विषय पर देश के कितने प्रतिशत नागरिक क्या बदलाव चाहते है।
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13. दलितों व सामान्य वर्ग की सहमती से आरक्षण का समाधान करना

13.1. भारत में आरक्षण की इतनी मांग क्यों है , और कैसे इस मांग को स्थायी रूप से कम किया जा सकता है ?
सरकारी सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार, घूसखोरी और आरामतलबी के भयंकर अवसरों के कारण इतनी बड़ी तादाद में लोग सरकारी नौकरियों के लिए सड़को पर उतर आते है। अमेरिका में सरकारी नौकरियों में 'रोजगार के समान अवसर' नाम से योजना लागू है जो कि एक प्रकार का आरक्षण है। इस के तहत कुछ अफ़्रीकी अमेरिकन वर्ग के नागरिको को आरक्षण का लाभ दिया जाता है। लेकिन वहाँ न तो इस आरक्षण को मांगने वालो की तादाद ज्यादा है न ही इसका विरोध करने वालो की। क्योंकि इस कोटे के तहत नौकरी पाने वाले को लॉटरी नहीं लगी जा रही है। उन्हें वहाँ जितना वेतन मिलता है उसके अनुसार काम करना पड़ता है, और निकम्मापन दिखाने पर सेवा सुरक्षा खतरे में आ जाती है। इसका कारण है कि कई विभागों जैसे पुलिस, शिक्षा, न्यायपालिका आदि के मुख्य अधिकारियों को नौकरी से निकालने का अधिकार वहाँ की जनता के पास है, तथा सरकारी कर्मचारियों की शिकायत आने पर नागरिको की जूरी इसकी सुनवाई करती है। भारत में भी सरकारी प्रशासन को यदि चुस्त व जवाबदेह बना दिया जाए और निजी क्षेत्र में स्वरोजगार को बढावा देने वाले क़ानून लागू कर दिए जाए तो आरक्षण की मांग में अपने आप गिरावट आ जायेगी।

1. राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम आने से सरकारी पदो पर भ्रष्टाचार घटकर लगभग शून्य तक हो जाएगा और
सरकारी नौकरी की मांग घटेगी।
2. टीसीपी क़ानून आने से सरकारी नौकरियों के मौजूदा वेतनमान में लगभग आधे से ज्यादा कटौती आएगी, जिससे
आरक्षण की मांग घटेगी।
3. वेल्थ टेक्स आने से जमीनो की कीमतो में गिरावट आएगी और स्थानीय इकाइयों को सरंक्षण मिलेगा जिससे
स्वरोजगार में बढ़ोतरी होगी और सरकारी नौकरियों की मांग घटेगी।
4. भ्रष्ट अधिकारियों का जूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट होने से विभागों में घूस खाने की प्रवृति में कमी आएगी। इससे
सरकारी नौकरियों की मांग घटेगी और आरक्षण की मांग में भी कमी आएगी।

हमारे विचार में आरक्षण एक हल्का एवं महत्त्वहीन मुद्दा है , एवं इसका देश की उत्पादकता पर नगण्य प्रभाव है। किन्तु यह इस नजरिये से महत्त्वपूर्ण है कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियां पेड मीडिया एवं नेताओं का इस्तेमाल करके इस मुद्दे को जाया तौर पर उभारकर भारत को एक जातिगत गृह युद्ध की और धकेल सकते है। हमारा मत है कार्यकर्ताओ को राईट टू रिकॉल ज्यूरी सिस्टम क़ानून ड्राफ्ट्स को गेजेट में प्रकाशित करने में अपनी शक्ति लगानी चाहिए , ताकि आरक्षण की मांग स्वत: ही गिर जाए। राईट टू रिकॉल, जूरी सिस्टम के अभाव में देश की उत्पादकता एवं अन्य समस्याएं जस की तस बनी रहेगी। चाहे आरक्षण जारी रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए। बहरहाल हमने आरक्षण की समस्या को दलितों की सहमती से हल करने के लिए “दलितों के लिए आर्थिक विकल्प” का प्रस्ताव किया है। इस कानूनी ड्राफ्ट का विवरण यहाँ देखें - JuryIndia .org

14. प्रस्तावित धन वापसी क़ानून नामक खतरे से निपटने के लिए , प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकने के लिए एवं
गरीबी कम करने के लिए हमारा प्रस्ताव – एम आर सी एम क़ानून ड्राफ्ट :

बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत के प्राकृतिक संसाधन अपने नियन्त्रण में लेना चाहती है। और इसके लिए वे ऐसे क़ानून को लागू करवाने के लिए प्रयासरत है जिससे भारत सरकार के स्वामित्व में मौजूद सभी कीमती जमीनों, खदानों आदि को नीलाम करके बेचा जा सके। जब इन संसाधनों की नीलामी होगी तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत की राष्ट्रीय सम्पत्तियों को खरीद लेगी। नागरिको का समर्थन लेने के लिए उन्होंने इस क़ानून में यह भी प्रावधान जोड़ा है कि बिक्री से प्राप्त इन रुपयों में से एक हिस्सा भारत के लोगो में बाँट दिया जाएगा। इस तरह यह क़ानून आने के बाद अगले 4-5 साल में भारत सरकार के स्वामित्व में मौजूद सभी प्राकृतिक संसाधन हमेशा के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नियन्त्रण में चले जायेंगे और हमारी सरकार हमेशा के लिए कंगाल हो जायेगी. इस तरह नागरिको को पैसे बांटने का लालच देकर इस क़ानून के माध्यम से भारत के नागरिको और देश को हमेशा के लिए कंगाल करने की व्यवस्था बनायी गयी है। ज्यादातर सम्भावना है कि मीडिया इस प्रस्तावित धन वापसी क़ानून को बड़े पैमाने पर कवरेज देने लगेगा, और कवरेज का यह पैमाना जनलोकपाल के तमाशे से भी बड़ा होगा। इस प्रस्तावित क़ानून में यह दावा किया गया है कि इससे गरीबी कम होगी। जबकि सच्चाई यह है कि इससे पहले दौर में गरीबी कम होगी, जबकि दुसरे दौर में गरीबी 5-10 गुणा और भी बढ़ जायेगी।

हमने प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकने एवं गरीबी कम करने के लिए एम आर सी एम क़ानून ड्राफ्ट का प्रस्ताव किया है. प्रस्तावित एम आर सी एम क़ानून का संक्षिप्त विवरण निचे दिया गया है. हमने इस क़ानून में यह प्रस्ताव किया है कि सरकार के स्वामित्व में मौजूद सभी खदानों एवं सरकारी जमीनों को बेचा नहीं जाना चाहिये बल्कि इन्हें सालाना लीज पर ही दिया जाना चाहिए , और इससे प्राप्त रोयल्टी एवं किराया सभी नागरिको के खाते में सीधे जमा किया जाना चाहिए. इसमें से एक हिस्सा सेना के खाते में जाएगा।

गरीबी होने के मुख्य कारण है – जमीनों की ऊँची कीमतें , खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों की बेतहाशा लूट, महंगी होती
शिक्षा एव चिकित्सा, उत्पादन इकाइयों की घटती संख्या, निर्मित वस्तुओ का बढ़ता आयात, प्रतिगामी कर प्रणाली एव
सरकारी संस्थानों में अकूत भ्रष्टाचार। सरकारी स्कूलों, अस्पतालों को सुधारने एवं अन्य विभागों का भ्रष्टाचार दूर करने
के लिए हमने अलग से राईट टू रिकॉल एवं जूरी सिस्टम क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है। इसके अलावा निचे दिए गए
क़ानूनो को लागू करके गरीबी को काफी हद तक कम किया जा सकता है -

1. एम आर सी एम क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाना - इस प्रस्तावित क़ानून का ड्राफ्ट एवं विस्तृत विवरण अध्याय
5 में दिया गया है – JuryIndia .org

इस क़ानून के अनुसार -- आईआईएम ए प्लॉट, जेएनयू प्लॉट, सभी यूजीसी प्लॉट, अहमदाबाद एयरपोर्ट प्लॉट, सभी एयरपोर्टों के प्लॉट और हजारों ऐसे भारत सरकार के प्लॉटों से मिलने वाला जमीन का किराया और भारत के सभी खनिजों, कोयला और कच्चे तेल से मिलने वाली सारी रॉयल्टी हम भारत के नागरिकों और हमारी सेनाओं को जानी चाहिए किसी और को नहीं। और यह रॉयल्टी व किराया सीधे ही मिलना चाहिए किसी योजना या स्कीम के जरिए नहीं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए भारत सरकार के प्लॉटों से मिलने वाला किराया और खनिज रॉयल्टी दिसम्बर, 2008 में 45 हजार करोड़ रूपया थी। तब हमारे द्वारा प्रस्तावित कानून के मुताबिक 15 हजार करोड़ रूपया सेना को जाएगा और लगभग 500 रूपया प्रत्येक भारतीय नागरिक के पोस्ट-आफिस या बैंक खाते में सीधे ही जमा होगा। नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) क़ानून-ड्राफ्ट से होने वाले सीधे धन वितरण से हर साल प्रति व्यक्ति को 6000 रूपए से ज्यादा की आय हो सकती है , अथवा जमीन या घर की कीमत कम हो सकती है। वह भी प्रति व्यक्ति, न कि प्रति परिवार। और इस तरह नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी क़ानून-ड्राफ्ट गरीबी कम कर देगा, आय बढ़ाएगा और वस्तुओ की मांग बढेगी, वस्तुओ की मांग बढ़ने से उधोग-धंधे और रोजगार बढ़ेगा। स्थानीय उद्योग बढ़ने से इंजिनियरिंग कौशल बढ़ेगा तथा हथियार बनाने के काम में भी सुधार होगा।

2. वेल्थ टेक्स गेजेट में प्रकाशित करवाना : प्रत्येक व्यक्ति को शहरी क्षेत्र में 3000 वर्ग फुट निर्माण एवं 1500 वर्ग फुट भूमि की छूट होगी तथा
इससे अधिक भूखंड एवं निर्माण होने पर भूस्वामी को 1% सालाना की दर से कर देना होगा। इस क़ानून के आने से जमीन की कीमतों में
गिरावट आएगी। जमीन की कीमतें गिरने से दूकान / फैक्ट्री/ घर आदि के लिए भूमि ख़रीदना एवं किराए पर लेना सस्ता हो जाएगा, जिससे बड़े
पैमाने पर उत्पादन इकाईयो की स्थापना हो सकेगी। जीएसटी प्रतिगामी कर है , अत: यह छोटी इकाइयों को गैर वाजिब नुकसान एवं बड़ी
इकाइयों को गैर वाजिब फायदा पहुंचाता है। वेल्थ टेक्स आने के बाद जीएसटी की जरूरत नहीं रह जाएगी।
3. नागरिको को राशन कार्ड की दूकान बदलने का अधिकार देना : कंट्रोल की जिंसो का भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए हमें ऐसी प्रक्रिया लागू करने
की जरूरत है जिससे नागरिक अपनी राशन की दूकान बदल सके। इसके अलावा हमें 3 किलोग्राम के गैस सिलेंडर भी जारी करने चाहिये, ताकि
गरीब से गरीब व्यक्ति भी इसका इस्तेमाल कर सके।
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15. चौथा सबसे चुनौतीपूर्ण एवं जरुरी काम – लगातार सिकुड़ते हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने के लिए प्रस्तावित
क़ानून ड्राफ्ट।

300 ईस्वी पूर्व से हिंदू धर्म का विस्तार थम गया था, तथा 700 ई.पू. से यह लगातार सिमटना शुरू हो गया। 300 ई. पू. में हिंदूओ का प्रसार अफगानिस्तान से लेकर फिलीपींस तक था। 1600 ई. तक आते आते लगभग 35% जनसँख्या तथा 50% भूमि दूसरे धर्मों के अधीन चली गयी। सिखों तथा मराठाओ ने इस क्षति को काफी हद तक रोका तथा बहुत सारी भूमि फिर से प्राप्त भी कर ली। लेकिन धर्मान्तरित लोगों को वे फिर से जोड़ नहीं सके। इनकी यह पुनर्विजय स्पेन की धार्मिक पुनर्विजय ( जिसमें पहले ईसाई बहुल रहे स्पेन ने अपनी खोई हुई धार्मिक स्वतंत्रता को मुस्लिमों के हाथों से दोबारा प्राप्त कर लिया था ), की तुलना में काफी कमजोर रही। यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि यह इतनी कमजोर क्यों थी ? फिर 1947 ई. में हिंदुओं ने अपनी भूमि का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के रूप में गवाँ दिया तथा बाद में इसी का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश बना और 1947 से लेकर अब तक उत्तर-पूर्व का कुछ तथा कश्मीर का लगभग आधा हिस्सा हम गँवा चुके है। 1700 ईस्वी से लेकर अब तक हिन्दू धर्म-परिवर्तन करके ईसाई / मुस्लिम बन रहे है। और पिछले 25 वर्षों में धर्म-परिवर्तन की ये प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है।

15.1 हमारे विचार में वर्तमान में मिशनरियों के हाथों हिन्दुत्व की लगातार होती हानि के मुख्य कारण निम्नलिखित है :

1. मिशनरियों का गठबंधन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मालिकों के साथ है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास भारत की तुलना में ज्यादा अच्छी तकनीक तथा सेना है। उनके पास ज्यादा अच्छी तकनीक होने का कारण है पश्चिमी देशों में राइट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख, राइट टू रिकॉल न्यायाधीश, ज्यूरी सिस्टम , संपत्ति कर आदि क़ानून प्रक्रियांए है । जबकि हमारे पास भारत मे ऐसे कानून नहीं है ; इसलिए मिशनरीज बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सहयोग से बढ़त बना रहे है |
2. चर्च में नियुक्तियों तथा धन को सामुदायिक समूहों में बांटने की प्रक्रियाएं मंदिरों की तुलना में ज्यादा अच्छी है। इसके ज्यादा अच्छे होने के निम्नलिखित कारण हैं :
(2a) चर्च ऑफ़ इंग्लैण्ड नामक एक प्रोटेस्टेंट संप्रदाय में चर्च के पैसों के वितरण सम्बन्धी सभी निर्णय पादरी (priests) लेते है। परन्तु ये पादरी प्रधानमंत्री/सांसदों के द्वारा नियुक्त होते है तथा कोई भी आपराधिक कार्य करने पर नागरिकों की ज्यूरी के नियंत्रण में होते है। साथ ही चर्च की संपत्ति पर उनका कोई उत्तराधिकार नही होता।
(2b) अन्य सभी प्रोटेस्टेंट सम्प्रदायों में स्थानीय बुजुर्गों द्वारा पादरी नियुक्त किया जाता है। चर्च के पैसों पर उत्तराधिकार लागू नही होता, और इसलिए प्रोटेस्टेंट चर्चों में धन इकठ्ठा करने की ओर झुकाव नही पाया जाता। अत: वे इस धन का उपयोग समुदाय के निर्माण व विकास में करते है।
(2c) कैथोलिक में चर्च के पैसों के समाज में बांटने सम्बन्धी निर्णय पादरी द्वारा लिए जाते है, जो कि पोप के अधीन होता है। पोप को नौकरी पर रखने के लिए 100-200 सर्वाधिक पुराने पादरी जिन्हें कार्डिनल्स कहते हैं, वोट करते हैं। चूँकि पादरी शादी नहीं कर सकता तथा उनमें गुरु प्रथा भी नही होती, अत: उत्तराधिकार यहाँ भी लागू नही होता। मतलब वर्तमान पादरी द्वारा अगले पादरी की नियुक्ति नहीं की जाती है। इसीलिए कैथोलिक चर्चों में भी संपत्ति संग्रह नही होता, तथा ये भी दान में मिले पैसों को समुदाय के निर्माण व विस्तार पर खर्च करते है।
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15.2 इस्लाम का विस्तार - 600 ईस्वी के बाद इस्लाम ने भी इसीलिए विस्तार करना शुरू किया क्योंकि उनकी मस्जिदों का प्रशासन अन्य धर्मो की तुलना में ज्यादा बेहतर था। मौलवियों की नियुक्ति में उत्तराधिकार की परम्परा नहीं थी, और दान से प्राप्त सम्पत्ति का इस्तेमाल परोपकार के कार्यो में किया जाता था। दूसरी मुख्य वजह इस्लाम में एकत्रीकरण की प्रक्रिया होना है। समुदाय के नागरिको का सप्ताह में किसी एक निश्चित दिन , निश्चित समय पर निश्चित स्थान पर नियमित रूप से एकत्र होना एकत्रीकरण ( Gathering ) कहलाता है। एकत्रीकरण समुदाय को शक्ति प्रदान करता है , और इस वजह से इस्लाम ने विस्तार करना शुरू किया। किन्तु इस्लाम उन क्षेत्रो को अधिग्रहित करने में असफल रहा जहाँ ईसाइयत थी। इसकी मुख्य वजह यह थी कि मिशनरीज के पास जूरी सिस्टम था। जूरी सिस्टम एकत्रीकरण से ज्यादा बेहतर प्रक्रिया है। तो जूरी सिस्टम होने के कारण मिशनरीज ने इस्लाम के विस्तार को रोक दिया और आज भी जहाँ जहाँ पर मिशनरीज जा रहे है वहां वहां पर वे इस्लाम का अधिग्रहण कर रहे है। दरअसल जूरी सिस्टम का हथियारों के निर्माण की तकनीक जुटाने की क्षमता से गहरा सम्बन्ध है। जूरी सिस्टम होने के कारण ही ब्रिटेन एवं अमेरिका बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियारों का निर्माण करने वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियां एवं शक्तिशाली सेना खड़ी कर पाए। और यह व्यवहारिक सच्चाई है कि अंततोगत्वा वही धर्म दुनिया में सबसे ज्यादा विस्तार करेगा जिसके पास सबसे शक्तिशाली सेना होगी।
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15.3. प्राचीन काल में हिंदू धर्म के अंतर्गत "मंदिरों" का प्रशासन :

रामायण एवं महाभारत में एक भी ऐसे मंदिर की चर्चा नही मिलती जिसके पास प्रचुर मात्रा में स्वर्ण और धन हो !! इस सम्बन्ध में जो कुछ भी हमें पढ़ने को मिलता है उससे पता चलता है कि उस समय में मंदिरों की जगह आश्रम होते थे। इन आश्रमों को दान के रूप में मिले धन का उपयोग गायों की सेवा, सबको गायों का दूध उपलब्ध कराने, अमीर-गरीब का भेद किये बिना सभी बच्चों को गणित, विज्ञान, कानून, भाषा तथा अस्त्र-शस्त्र चलाने की शिक्षा देने, गरीबों को दवाई दिलवाने तथा उनके भलाई के लिए किया जाता था। इसलिए आश्रम-प्रमुख को "पुरोहित" कहते थे जो दो शब्दों से बना है- "पर" तथा "हित", अर्थात ऐसा व्यक्ति जो दुसरो के कल्याण की चिंता करे। आश्रम उत्तराधिकार द्वारा नही चलता था। तथा जरूरी नही था कि आश्रम-प्रमुख के पुत्र को ही आश्रम की बागडोर सौंपी जाये। आश्रम की यह बागडोर एक संत से दूसरे ऐसे संत को दी जाती थी जो कि समाज में सम्मानित होते थे। इनका कार्यकाल भी स्थायी नही होता था। संत बहुधा यात्रा पर रहते थे और मुक्त विचरण करते थे। यह व्यवस्था अब बहुत ही कम हिन्दू समुदायों में बची हुई है।
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15.4. वर्तमान हिन्दू मंदिरों का प्रशासन :

वर्तमान हिन्दू मंदिरों में धन के समाज में बांटने सम्बन्धी निर्णय मंदिर प्रमुख या संप्रदाय प्रमुख द्वारा लिए जाते है, तथा इनका ही मंदिरों की संपत्ति के उपयोग पर पूर्ण नियंत्रण होता है। ट्रस्टी का पद उत्तराधिकार तथा गुरु प्रथा द्वारा हस्तांतरित होता है। मतलब आज का गुरु ही अगला गुरु नियुक्त करता है। अतः यहाँ संपत्ति इकठ्ठा करने की ओर झुकाव होता है, तथा इसका उपयोग तड़क-भड़क, दिखावे एवं ऐशो आराम में भी किया जाता है। इसका समाधान सिक्ख गुरुओं ने, खासकर 10 वें सिक्ख गुरु श्री गोविन्द सिंह जी ने ढूंढ निकाला था तथा इसे सभी सिक्ख गुरुद्वारों में लागू किया। किन्तु दुर्भाग्य से यह कभी भारत के सभी मंदिरों में लागू नही हो सका। हमारे विचार से हमें इसे आज ही लागू करवाने के प्रयास करने चाहिए। समस्या का समाधान यह है कि सभी हिन्दू मंदिरों के लिए सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी ( एसजीपीसी ) जैसा कानून बनाया जाये। तथा इस प्रकार इस कानून के माध्यम से हम मंदिरों में संपत्ति को इकठ्ठा करने की प्रवृति को कम करके हिंदूवाद का पतन रोक सकते है।
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15.5. किस प्रकार पूरे जीवन के कार्यकाल और वारिसान व्यवस्था ( उत्तराधिकार ) से मंदिरों में जमाखोरी को बढ़ावा मिलता है ?

पाठक हमसे असहमत होकर यह कह सकते है कि यदि मंदिरों में पूरे जीवन के कार्यकाल तथा उत्तराधिकार प्रणाली है तो इसमें बुराई क्या है ? और गुरू प्रथा में गलत क्या है, जिससे आज के गुरू ही अपने शिष्यों में से किसी एक को अगला गुरू चुनते है ? यह एक जायज प्रश्न है।
आइये, हम दो परिस्थितियों की तुलना करके देखें - पहला, जिसमें मंदिर प्रमुख A का कार्यकाल मात्र 2 वर्षों का है, और दूसरी परिस्थिति जिसमें मंदिर प्रमुख B का कार्यकाल पूरे जीवन का है। मान लीजिये प्रमुख A तथा प्रमुख B दोनों हीं अलग-अलग मामलों में 1-1 करोड़ रूपये प्राप्त करते है। ऐसी स्थिति में B, जिसका कार्यकाल पूरे जीवन का है, उस 1 करोड़ रूपये को खर्च करने की बजाय लम्बे समय तक अपने पास रखना चाहेगा। लेकिन चूंकि A का कार्यकाल कुछ वर्षों के लिए निश्चित है, इसीलिए A इस पैसे को जितना सम्भव हो सकेगा, सामुदायिक कार्यों और धर्म के उत्थान में ही लगाएगा, ताकि उसे नाम मिले और उसके फिर से चुने जाने की सम्भावना भी बढ़ जाये। इस प्रकार पूरे जीवन के कार्यकाल से खर्च की इच्छा घटती है, और जमाखोरी की इच्छा बढ़ती है। जबकि कुछ वर्षों के निश्चित कार्यकाल से जमाखोरी की सम्भावना घटती है, और समाज के कार्यों में खर्च करने की इच्छा बढ़ती है। भारत में मंदिरों के प्रशासन में बहुधा उत्तराधिकार और पूरे जीवन का कार्यकाल दोनों ही साथ-साथ पाये जाते हैं। प्रत्येक ऐसी संस्था जिसमें पूरे जीवन का कार्यकाल होता है, वहाँ उत्तराधिकार भी होता है। इसी प्रकार उत्तराधिकार प्रथा वहीँ होती है जहाँ कि पुरे जीवन का कार्यकाल भी होता है। निश्चित समय का कार्यकाल होने से पूरे जीवन का कार्यकाल तथा गुरु प्रथा दोनों हीं अपने आप रद्द हो जाते है।
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15.6. किस प्रकार मंदिरों में पूरे जीवन के कार्यकाल एवं उत्तराधिकार से समाज की रक्षा पंक्ति कमजोर होती चली जाती है ?

सैक्शन B में दिए गये उदाहरण में प्रमुख B अपने उत्तराधिकारी के लिए धन इकठ्ठा करना चाहेगा और उत्तराधिकारी भी उस पर जितना सम्भव हो कम खर्च करने के लिए दबाव बनाएंगे। इसीलिए जमाखोरी आगे बढ़ते हीं जायेगी, और इस वजह से मंदिरो द्वारा किये जाने वाले परोपकार के कार्यों में गिरावट आएगी। इस तरह समाज के लिए कार्यों में धन खर्च करने की जगह धन इकठ्ठा करने के झुकाव से समाज की रक्षा क्षमता कमजोर पड़ती है।
उदाहरण के लिए मान लीजिये दो समुदाय A तथा B हैं। समुदाय A में मंदिर प्रमुख का कार्यकाल निश्चित है, तथा प्रमुख का चुनाव अनुयायियों द्वारा किया जाता है। समुदाय B में मंदिर प्रमुख का कार्यकाल पूरे जीवन का है, तथा उत्तराधिकार प्रथा भी है। मान लीजिए कि समुदाय B पर कोई बाहरी आक्रमण होता है, जिसमें समुदाय के 1000 में से लगभग 100 सदस्यों ने युद्ध में जाने का निर्णय लिया। मान लीजिये युद्ध में उनमें से 10 मारे गये तथा 10 बुरी तरह घायल हो गये। अब यदि घायलों तथा मारे गये व्यक्तियों के रिश्तेदारों को मंदिर कोई सहायता नही देते, तो अगली बार हमले में बहुत कम व्यक्ति लड़ने जायेंगे। इसका परिणाम ये होगा कि समुदाय का नियंत्रण हमला करने वालों के हाथों में चला जायेगा। यदि समुदाय A के साथ भी समान परिस्थिति की कल्पना करें तो चूँकि यहाँ धन इकठ्ठा करने की प्रवृति नहीं होती इसलिए मंदिर प्रमुख घायलों, मृत तथा घायल व्यक्तियों के रिश्तेदारों की सहायता करेंगे। इसलिए अगली बार भी युद्ध छिड़ने पर बड़ी संख्या में लोग अपनी जान जोखिम में डाल कर लड़ने जायेंगे।
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सिक्ख प्रशासन में उत्तराधिकार परम्परा नहीं होने से गुरूद्वारे प्रमुखों में धन संग्रह की प्रवृति नहीं थी और यही कारण है कि गैर सिक्ख हिन्दू पराजित हुए जबकि सिखों ने आक्रमणकारियों को युद्धों में कड़ी टक्कर दी। गैर सिक्ख हिन्दूओं में मंदिर प्रमुख आजीवन तथा उत्तराधिकार द्वारा नियुक्त होते हैं, इसलिए उनमें धन को इकठ्ठा करने की ओर झुकाव होती है, तथा वे घायलों व मृतकों के परिवार वालों की बहुत कम मदद कर पाते हैं या करते हीं नही। जबकि सिख गुरुद्वारा प्रबंधक का चुनाव निश्चित समय के कार्यकाल के लिए होने से उनमें धन को इकठ्ठा करने की ओर झुकाव नहीं पाया जाता, इसलिए वे घायलों और मरने वालों के रिश्तेदारों की मदद करते है, अत: उनमे धर्म के लिए लड़ने का जोश बना रहता है, तथा लगातार बढ़ता ही जाता है। और इस कारण सिक्ख अपने आप को और हिंदुओं को मुगलों व अफगानों के हिंसक आक्रमणों में सुरक्षा दे पाये।
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15.7. मंदिरों की संपत्ति पर मिशनरियों के कब्जे में उत्तराधिकार प्रथा किस प्रकार सहायक हुई ?

मंदिरों में उत्तराधिकार व्यवस्था ने एक लम्बे समय तक बने रहने वाली समस्या को जन्म दिया। हम यहाँ एक मंदिर का उदाहरण बिना उसका नाम लिए देना चाहेंगे। यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पूर्व बनाया गया था तथा उसका एक महंत था। उसके 5 बेटे थे जो कि उसके बाद महंत बने। उनमें से हरेक कुछ समय के समय के लिए महंत की गद्दी पर बैठता था। फिर उन 5 में से हरेक को 2 या 3 पुत्र हुए, यानी कुल मिलकर लगभग 12 पुत्र। उन पाँचों के मरने के बाद उनके ये 12 पुत्र, यानी प्रथम महंत के पोते वारिस बने। अब ये 12 भी बारी बारी से कुछ समय से चक्रीय क्रम से ( बारी-बारी से ) महंत की गद्दी पर बैठते थे। लेकिन उनकी भागीदारी समान नहीं रहती। जैसे- यदि A के 2 पुत्र A1 तथा A2 थे एवं B के 4 पुत्र B1, B2, B3 तथा B4 थे। ऐसी स्थिति में A1 या A2 की भागीदारी B1, B2, B3 या B4 की तुलना में ठीक दोगुनी हो जायेगी। अक्सर ऐसा भी होता है कि किसी महंत का कोई पुत्र न हो और उसकी मृत्यु हो जाये। अब ऐसे में यदि उसने पुत्र गोद लिया है या पुत्र का जन्म उसकी मृत्यु के बाद हुआ हो तो ऐसे में वह महंत बनेगा या नहीं इस पर कानूनी विवाद चल सकता है। साथ हीं भागीदारी पर भी विवाद हो सकता है। इसलिए इस तरह लगभग 20-30 पीढ़ियों के बाद अमुक मंदिर के लगभग 500 महंत हैं। साथ ही उत्तराधिकार सम्बन्धी 50 से अधिक अनसुलझे मुकदमे भी कोर्ट में चल रहे हैं । इन मुकदमों का बहाना बनाकर भारत सरकार मंदिरों का अधिग्रहण कर सकती है। चूँकि भारत के प्रमुख राजनीतिक दलो ने मिशनरीज के साथ गठजोड़ बनाये हुए है, इसीलिए मंदिरों की दान द्वारा प्राप्त पैसा मिशनरियों द्वारा चलायी जा रही धर्मार्थ संस्थाओं के पास चला जाता है। इस प्रकार मिशनरियों को मंदिरों से पैसे प्राप्त होते हैं जिसका उपयोग वे हिन्दूओं का धर्मपरिवर्तन कर उन्हें ईसाई बनाने में करते है। इस प्रकार मंदिरों में उत्तराधिकार के चलते दर्जनों विवाद खड़े होते हैं जिससे कि सरकार द्वारा मंदिरों की संपत्ति पर कब्ज़ा करना आसान हो जाता है।
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15.8. समाधान : राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट = NHMDT के प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट का सारांश :

मंदिरों के प्रशासन को सुदृढ़ बनाने के लिए हम यहाँ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी ( SGPC ) जैसा एक ढांचा प्रस्तावित कर रहे हैं। प्रत्येक हिन्दू, सिक्ख, जैन, बौद्ध आदि इस ट्रस्ट के जन्म से सदस्य / वोटर होंगे, जब तक कि वे स्वयं अपनी सदस्यता नहीं छोड़ देते। "इन हिन्दू सदस्यों को अध्यक्ष एवं ट्रस्टियो को चुनने एवं किसी भी दिन बदलने का अधिकार भी होगा।" मुस्लिम तथा क्रिश्चियन इस ट्रस्ट के सदस्य नहीं बन सकेंगे।

(1) इस क़ानून के अनुसार यदि एवं जब भारत के मतदाता जनमत संग्रह या ऐसी कोई प्रक्रिया जो 45 करोड़ से अधिक मतदाताओं की मंशा सिद्ध करें, के माध्यम से प्रस्तावित (a) राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या (b) कृष्णा जन्म भूमि देवालय, मथुरा (c) काशी विश्वनाथ देवालय, वाराणसी (d) अमरनाथ देवालय, कश्मीर के भू-खंड NHMDT को सौंप देते है तो NHMDT इन 4 देवालयों का प्रबंधन करेगा।
(2) शुरू में NHDMT उपरोक्त 4 मंदिरों की देख-रेख करेगा। आगे चलकर यदि सम्बंधित संप्रदाय / मंदिर स्वेच्छा से अपने मंदिर सुपुर्द करते है तो यह अन्य मंदिरों की देख-रेख भी कर सकता है।
(3) प्रधानमंत्री प्रथम अध्यक्ष और 4 ट्रस्टियों की नियुक्त प्रधानमंत्री करेंगे। ये पांचो सदस्य हिन्दू होंगे।
(4) NHMDT अध्यक्ष और ट्रस्टी देवालय प्रबंधन के लिए अधीनस्थ कर्मचारियों की भर्ती करेंगे। कर्मचारियों के बीच यदि कोई विवाद होता है या हिन्दुओं व कर्मचारियों के बीच कोई विवाद होता है, तो विवाद के निपटान के लिए जिला या राज्य या भारत की मतदाता सूची में से क्रमरहित तरीके से चुने गए 12 से 1500 हिन्दुओं की जूरी जिनकी आयु 30 वर्ष से 55 वर्ष के मध्य होगी ,बुलाई जा सकती है। जूरी सदस्य दोनों पक्षों को सुनेंगे और अपना निर्णय देंगे। यदि आपका नाम इस जूरी ड्यूटी में चुना गया है, तब आपको जूरी सदस्य के रूप में प्रस्तुत होना पड़ेगा और मामले का फ़ैसला करना होगा।
(5) कोई भी भारतीय हिन्दू नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक है , यदि अध्यक्ष / ट्रस्टी बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर के सामने अपना शपथपत्र जमा करवाकर उम्मीदवार के रूप में पंजीकृत हो सकता है।
(6) मतदाता किसी भी दिन किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकते है। मतदाता पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ / नहीं दर्ज कर सकते है , या मोबाईल एप द्वारा या अपने रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर से SMS करके या ATM से भी अपनी स्वीकृति दर्ज या रद्द करवा सकते है।
(7) यदि किसी उम्मीदवार को 20 करोड़ से अधिक हिन्दू मतदाताओं की स्वीकृति मिल जाती है तो प्रधानमंत्री उसे नए ट्रस्टी के रूप में नियुक्त कर सकते है।
(8) NHDMT उन सभी देवालयो का प्रबंधन भी करेगा जो किसी संप्रदाय ने उसे सौंप दिया है। यदि सम्प्रदाय चाहे तो सौंपे गए देवालय को 5 साल के भीतर वापस ले सकता है। 5 साल बाद, ट्रस्ट औपचारिक रूप से संप्रदाय से पूछेगा कि क्या उसे देवालय वापस चाहिए। यदि सम्प्रदाय के 65% से ऊपर संप्रदाय मालिक "ना" में उत्तर करते है सिर्फ तब और तब ही NHDMT द्वारा देवालय अधिग्रहत किया जायेगा। लेकिन इसके बाद NHDMT संप्रदाय को देवालय वापस नहीं दे सकेगा।
(9) यदि कोई व्यक्ति 1000 दिनों के लिए अध्यक्ष के रूप में सेवाए दे चुका है तो पीएम उसे सबसे अधिक अनुमोदनों वाले व्यक्ति से बदल देंगे। गेजेट में प्रकाशित होने के लिए तैयार पूरा ड्राफ्ट यहाँ देखें -- Newindia
.in/TempleLaw5

हमारा मानना है कि ,यदि भारत के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम , NHDMT , वेल्थ टेक्स , एमआरसीएम क़ानून ड्राफ्ट्स को गेजेट में प्रकाशित करवाने में असफल रहते है, तो यह तय है कि अमेरिका-ब्रिटेन की बहुराष्ट्रीय कम्पनियां जल्द ही हमारे सभी प्राकृतिक संसाधनों का अधिग्रहण करके भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में परिवर्तित कर देगी, और इस प्रक्रिया में करोड़ो की संख्या में धर्मान्तरण होंगे । और यदि वे भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में तब्दील नहीं कर पाए तो हमारी स्थिति और भी बदतर हो जायेगी, क्योंकि तब ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि वे भारत का इराकीकरण करने में सफल हो जायेंगे ।
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इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या कदम उठा सकते है ?

(1) प्रधानमंत्री को निचे दिए गए फोर्मेट में पोस्टकार्ड भेजे -
“प्रधानमंत्री महोदय , मैं विनती करता हूँ कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करें – newindia .in/templelaw5 ,#TempleLaw5
( newindia .in प्रधानमंत्री की अधिकृत वेबसाईट है , जिस पर कोई भी नागरिक अपना सुझाव रख सकता है , और रखे गए किसी सुझाव पर वोट भी कर सकता है। हमने सभी ड्राफ्ट के पीडीऍफ़ newindia .in पर रख दिए है। अत: जब आप पोस्टकार्ड भेजे तो उस क़ानून ड्राफ्ट का लिंक जरुर रखें जिस ड्राफ्ट को आप गेजेट में प्रकाशित करवाना चाहते है।)
(2) यदि आप ट्विटर पर है तो @pmoindia पर यह ट्विट करें - “प्रधानमंत्री महोदय , मैं आपसे विनती करता हूँ कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करें – newindia .in/templelaw5 , #TempleLaw5”
(3) यदि आप स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते है तो newindia .in पर newindia .in/templelaw5 ड्राफ्ट को वोट करें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 15 2018 17:17:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Mahesh Kumar Jamshedpur LsCandidate:

I will contest 2019 loksabha election from jamshedpur

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 15 2018 19:41:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस अल्बम में चुनाव लड़ने से संबधित सूचनाएं रखी जायेगी। जो कार्यकर्ता देश की विभिन्न समस्याओ का समाधान करने के प्रति गंभीर है , उन्हें चुनाव अवश्य लड़ना चाहिए। चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले कार्यकर्ता अद्यतन सूचनाओ के लिए इस एल्बम को फोलो कर सकते है.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 16 2018 13:33:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Dhiraj Batade Ahmednagar LscandidateRrp:

मी धिरज मोतीलाल बताडे राईट टू रिकॉल पार्टी कडून नगर दक्षिण मधून लोकसभा निवडणूक लढण्याची घोषणा करत आहे.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 16 2018 13:33:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Harshadkumar Solanki Rrg:

I will contest 2019 loksabha election from Ahmedabad
#200% Sure

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 16 2018 16:33:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

राईट टू रिकॉल कार्यकर्ताओं की पहली मासिक मिटींग ~ टंकी के बालाजी सुभाष नगर भीलवाड़ा पर हुई |
हम सब ने यह तय किया कि प्रतिमाह पहले रविवार को 3 बजे दोपहर मिटींग रहेगी | नागरिक ड्राफ्ट सम्बन्धित संशय दूर करने के लिए यहाँ आकर चर्चा कर सकते हैं |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 16 2018 19:01:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

विधानसभा चुनाव 2018 में वितरित किये गए 8 पेज का पेम्पलेट : ( पीडीऍफ़ कमेन्ट बॉक्स में देखें )
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00 अपने क्षेत्र के उम्मीदवार से पूछे कि वे अपने वादे “कैसे” पूरे करेंगे ?

चुनावो के दौरान यदि कोई प्रत्याशी आपसे वादा करता है कि वह ग़रीबी दूर करेगा या भ्रष्टाचार ख़त्म कर देगा तो आप उससे पूछिए कि वह ऐसा “कैसे” करेगा ? दरअसल विधायक का काम सिर्फ़ क़ानून बनाना है। क़ानून विधानसभा में बनते है। इसीलिए हम उम्मीदवार को चुन कर विधानसभा में भेजते है। तो यदि कोई उम्मीदवार आपसे कहता है कि वह ग़रीबी दूर करेगा , तो आपको उससे पूछना चाहिए कि वह ऐसा कौनसा क़ानून पास करने वाला है जिससे ग़रीबी दूर हो जाएगी ? उससे पूछिए कि वह पुलिस विभाग का भ्रष्टाचार कम करने के लिए कौनसा क़ानून पास करने वाला है ?

अपने क्षेत्र के उम्मीदवार से उस क़ानून का लिखित ड्राफ्ट मांगिये। और तब आप देखेंगे कि वे उम्मीदवार जो भी वादे कर रहे है , उन्हें पूरा करने के लिए उनके पास कोई निश्चित योजना नहीं है। यह पेम्पलेट इतना लम्बा इसीलिए है क्योंकि इसमें हमने उन कानूनों के ड्राफ्ट एवं उनके संक्षिप्त विवरण दिए है जिन्हें गेजेट में प्रकाशित करने से किसी समस्या का समाधान होगा। विस्तृत विवरण के लिए कृपया यह लिंक देखें – JuryIndia .org
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01. राईट टू रिकॉल क्या है ? ( और द अन्ना एवं श्री अरविन्द केजरीवाल से हमारा कोई लेना देना नहीं है )

राइट टू रिकॉल का मतलब है वोट वापस लेने का अधिकार होना। राईट टू रिकॉल का अर्थ उन क़ानून प्रक्रियाओ से है जिनके गेजेट में छपने के बाद मतदाता यदि अपने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट जज, हाई कोर्ट जज, लोकपाल, जिला पुलिस प्रमुख, जिला शिक्षा अधिकारी, दूरदर्शन चेयरमेन, विधायक, सांसद आदि को किसी भी दिन बदलना चाहे तो अपने बहुमत का प्रदर्शन करके इन्हें सीधे बदल सकेंगे। यदि मतदाता अपने प्रधानमंत्री या सांसद को हटाकर किसी दुसरे व्यक्ति को लाना चाहते है तो उन्हें अगले 5 वर्ष तक इन्तजार नहीं करना होगा। जिला पुलिस प्रमुख , जिला शिक्षा अधिकारी आदि जैसे अधिकारी भी जिले के मतदाताओं के अनुमोदन से नियुक्त होंगे एवं राईट टू रिकॉल के दायरे में रहेंगे। हम ये कानून भारत में लागू करवाने का अभियान 1999 से चला रहे है। हमने द अन्ना ( The Anna ) एवं श्री अरविन्द केजरीवाल से आग्रह किया था कि वे जनलोकपाल के ड्राफ्ट में राईट टू रिकॉल की धाराएं जोड़े। किन्तु द अन्ना एवं श्री अरविन्द केजरीवाल ने जनलोकपाल को चुनने एवं नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको को देने से इनकार कर दिया। अत: द अन्ना एवं श्री अरविन्द केजरीवाल राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओ के छद्म समर्थक है , एवं उनसे हमारा कोई सरोकार नहीं है।
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02. राजपत्र अधिसूचना या गेजेट नोटिफिकेशन क्या है ?

ज्यादातर राजनेता और राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर आदि इस बार पर काफी जोर देते है कि नागरिको को इस तथ्य के बारे में सूचित नहीं किया जाना चाहिए कि देश की व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए गेजेट में छपी हुयी इबारत की कितनी निर्णायक एवं शक्तिशाली भूमिका होती है। हम रिकालिस्ट्स का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्ष्य भारत के नागरिको तक यह बात पहुँचाना है कि – (1) गेजेट नोटिफिकेशन क्या है , और (2) देश की व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए सबसे आसान और सबसे महत्त्वपूर्ण तरीका यह है कि अमुक प्रक्रिया को गेजेट में प्रकाशित किया जाए। और (3) कैसे “क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी केन्द्रित और कार्यकर्ता निर्देशित जन आन्दोलन” के माध्यम से नागरिक प्रधानमंत्री को आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट लागू करने के लिए बाध्य कर सकते है। और एक बार जब भारत के नागरिक गेजेट नोटिफिकेशन की शक्ति से परिचित हो जायेंगे तो वे जान जायेंगे कि देश में व्याप्त किसी भी समस्या का समाधान कितना आसान है।
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गेजेट नोटिफिकेशन या राजपत्र अधिसूचना एक पुस्तिका है जिसका प्रकाशन केन्द्रीय एवं राज्य मंत्रियो द्वारा हर महीने या समय समय पर जब आवश्यक हो तब किया जाता है। गेजेट में मंत्रियो द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए आदेश जारी किये जाते । कलेक्टर आदि अधिकारी सिर्फ वही कार्य करते है जो गेजेट में लिखा होता है , अधिकारी को इस बात से कोई सरोकार नहीं होता कि अमुक मंत्री ने प्रेस में या पब्लिक रेली के भाषण में क्या कहा था। उदाहरण के लिए यदि कोई मंत्री प्रेस कोंफ्रेंस में, या रेली में या अपने पार्टी के मेनिफेस्टो में यह कहता है कि “प्रत्येक परिवार को 20 लीटर कैरोसिन मिलेगा” , लेकिन यदि मंत्री ने गेजेट में 10 लीटर लिखा है तो कलेक्टर प्रत्येक परिवार को 10 लीटर कैरोसिन ही देगा। क्योंकि कलेक्टर को वही करना होता है जो गेजेट में लिखा गया है , न कि वह करना होता है जो मंत्री अपने भाषण में कह रहा है। क्योंकि यदि कलेक्टर आदि अधिकारी गेजेट की अवहेलना करेंगे तो उनकी नौकरी जा सकती है , उन पर फाइन हो सकता है, पेंशन रुक सकती है और यहाँ तक कि उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है।
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आप देखेंगे कि सभी पार्टियों के नेता घोषणाएं करने एवं भाषण सुनाने में तो बेहद रुचि रखते है, किन्तु वे अपने चुनावी प्रचार के दौरान यह कभी नहीं बताते कि सत्ता में आने के बाद वे कौनसे क़ानून ड्राफ्ट गेजेट में प्रकाशित करने वाले है। यदि आप अधिकारियो को किसी निर्माणधीन इमारत के कारीगरों की तरह देखते है तो गेजेट उस इमारत के निर्माण का ब्लू प्रिंट एवं नक्शा है। जो कार्यकर्ता देश की व्यवस्था में कोई भी बदलाव लाना चाहते है तो उन्हें यह सोचना चाहिए कि गेजेट में क्या छपवाने से यह बदलाव लाया जा सकता है , और तब कार्यकर्ताओ को मंत्रियो से अमुक ड्राफ्ट को गेजेट में तुरंत छपवाने की मांग करनी चाहिए। जब प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट गेजेट में छपेगा , सिर्फ तब ही वास्तविक बदलाव आएगा , अन्यथा नहीं। अत: आप देश की किसी समस्या के समाधान के लिए कम से कम एवं अधिक से अधिक क्या कर सकते है ? आप मंत्रियो से कह सकते है कि अमुक क़ानून ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाये। यदि कोई नेता या कार्यकर्ता देश की किसी समस्या का समाधान करने की बात कर रहा है किन्तु वह अपने श्रोताओं को यह जानकारी नहीं देता कि अमुक समस्या का समाधान करने के लिए वह गेजेट में क्या छपवाने का प्रस्ताव कर रहा है तो यह तय है कि उसकी रुचि समस्या के समाधान में नहीं बल्कि समस्या को उभारकर वोट इकट्ठे करने में है। और ऐसा वे जानबूझकर करते है। हमारे विचार में मतदाताओं को उम्मीदवारों से यह कहना शुरु करना चाहिए कि , "हमें आपके ओजस्वी भाषणों और आवेशमय नारों में कोई रुचि नहीं है। हमें आप उन कानूनों के ड्राफ्ट दिखाइये जिन्हें जीतने के बाद आप गेजेट में प्रकाशित करने का वादा करते है।"
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यह दुःख का विषय है भारत में बहुत ही कम कार्यकर्ता गेजेट नोटिफिकेशन की शक्ति के बारे में जानते है , और हमारा सबसे पहला लक्ष्य भारत के अधिकतम नागरिको एवं कार्यकर्ताओ तक यह जानकारी पहुँचाना है कि देश को गेजेट चलाता है, और यदि आप देश में कि बदलाव लाना चाहते है तो आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि किस पार्टी या नेता को वोट देने से यह समस्या हल होगी , बल्कि यह सोचना चाहिए कि इस समस्या का समाधान करने के लिए हमें गेजेट में क्या छपवाना चाहिए . इस अध्याय का विस्तुत विवरण इस लिंक पर देखें - JuryIndia .org
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03. अमेरिका की पुलिस एवं अदालतें भारत की तुलना में ज्यादा कार्यकुशल एवं ईमानदार क्यों है ?

आपने अमेरिका के अपने रिश्तेदार, मित्रों से यह अवश्य सुना होगा कि अमेरिका के पुलिस / कोर्ट में भ्रष्टाचार भारत की तुलना में बहुत कम है। भारत के प्रत्येक अनिवासी भारतीय ने भी इस तथ्य पर पहले दिन से ही ध्यान दिया होगा। उदाहरण के लिए अमेरिका में 9 वर्ष रहकर 1999 में भारत लौट आये सोफ्टवेयर डेवलेपर एवं रिकालिस्ट राहुल चिमनभाई मेहता अपने संस्मरण में बताते है कि - "जब मैं अमेरिका में था तो मुझे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर हवलदारों ने 5 बार रोका था। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर हवलदारों ने मुझसे 3 बार जुर्माना लिया और 2 बार मुझे वैसे ही जाने दिया। परन्तु एक बार भी उन्होंने यह संकेत तक नहीं दिया कि घूस लेने में उनकी जरा भी रूचि है। मुझ पर लगाए गए जुर्माने की राशि 1500$ थी , और मैं यह समझ नहीं पा रहा था कि यह पुलिस वाला मुझसे 50$ घूस लेकर मामला यहीं पर रफा दफा करने की कोशिश क्यों नहीं कर रहा है ?" और यह बात आपको भी अजीब लग रही होगी कि आखिर अमेरिका की पुलिस / जज भारत की तरह घूस वसूलने में इतनी माहिर क्यों नहीं है ?
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क्या अमेरिका की पुलिस / जज आदि भारत की पुलिस / जज की तुलना में इतने बेवकूफ है कि वे अपने नागरिकों से घूस वसूलने के तौर तरीके नहीं सोच सकते ? नहीं, वे इतने भी बेवकूफ नहीं है। क्या वे इतने डरपोक है ? नहीं, वे भी घूस वसूलने में उतने ही साहसी है जितने कि भारत के अधिकारी है। तो क्या अमेरिका के पुलिस वाले लालची नहीं है ? नहीं ऐसा भी नहीं है। किसी भी देश में ऐसा नहीं हो सकता कि वहाँ के लाखों व्यक्तियों में सभी संत हो और कोई भी लालची न हो। तो क्या अधिक वेतन प्राप्त करने के कारण वे नागरिको से घूस नही लेते ? अच्छा, मान लीजिये कि यदि हम भारत में अपने अधिकारियों के वेतन इस सप्ताह दोगुने कर दें, तो क्या वे हमें अगले सप्ताह से घूस में 10% की छूट देंगे ? उदाहरण के लिए, वर्ष 2009-2010 में सरकार ने सभी न्यायाधीशों के वेतन तीन गुना कर दिए थे। तो क्या जजों ने अपनी घूस की राशि में अगले दिन 1% की भी छूट दी थी ? मेरा अनुमान है, नहीं दी थी। यदि भारत सरकार का कोई कर्मचारी यह कहता है कि , यदि उसके वेतन को दोगुना कर दिया जाए तो उसे घूस लेने की जरूरत नही होगी, तो आप भी यही कहेंगे कि वह बकवास कर रहा है। क्योंकि उनमें से अधिकतर कभी भी घूस लेना बंद नही करेंगे। इस प्रकार, वेतन अवश्य ही एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, पर भारत और अमेरिका में भ्रष्टाचार के स्तर में बदलाव लाने हेतु यह कोई बड़ा कारक नहीं है। तो वहाँ की पुलिस एवं जजों में भ्रष्टाचार कम होने का और क्या कारण हो सकता है ?
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क्या संस्कृति इसका कारण है ?

क्या हमारी संस्कृति इसका कारण है ? भारत के बहुत से बुद्धिजीवी (कु-बुद्धिजीवी ?) जिनका बौद्धिक स्तर = IQ level 4 अंको में है, यह कहते है कि भारत में पुलिस वाले इसीलिए भ्रष्ट है, क्योंकि हम भारतीय अनपढ़ है, जागरूक नहीं है, हममें नैतिक सदाचार की कमी है, हमारी राजनीतिक संस्कृति दूषित है आदि आदि। दूसरे शब्दों में , इन बुद्धिजीवियों के अनुसार, हम नागरिक ही भारत की पुलिस एवं जजो के भ्रष्ट होने के लिए जिम्मेदार हैं !!! 4 अंकों के बौद्धिक स्तर वाले इन बुद्धिजीवियों द्वारा "पीड़ितों पर ही आरोप" लगाने वाले इन तर्कों को हम सफ़ेद झूठ कहकर अस्वीकार करते है। यह बात उसी तरह चुभने वाली है जैसे कोई कहे कि "बलात्कार के लिए महिला जिम्मेदार है"। यह तर्क कि "नागरिकों में जागरूकता नहीं है" या "नागरिक असभ्य है" बिलकुल बकवास है। एक अशिक्षित व्यक्ति भी अच्छी तरह जानता है कि भ्रष्टाचार अनैतिक है और यह एक अपराध भी है। और सभी पुलिसवालों, न्यायाधीशों व मंत्रियों को भी यह अच्छी तरह पता है कि भ्रष्टाचार अनैतिक और गैरकानूनी है। यहाँ तक कि जब अमेरिका में 1800 ईस्वी में शिक्षा 5 प्रतिशत से भी कम थी तब भी वहाँ की पुलिस एवं न्यायाधीश इतने भ्रष्ट नहीं थे। तो फिर आखिर अमेरिका की पुलिस में भ्रष्टाचार कम होने का असली कारण क्या है ? इस कारण को समझने के लिए हम पुलिस दल को मोटे तौर पर दो भागो में विभाजित करते है – जूनियर ऑफिसर जैसे हवलदार, उप निरीक्षक , दरोग़ा आदि एवं सीनियर ऑफिसर जैसे जिला पुलिस कमिश्नर।
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3.1 अमेरिकी पुलिस विभाग के जूनियर ऑफिसर भारत की तुलना में कम भ्रष्ट क्यों है ?
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अमेरिका में जूनियर पुलिसकर्मी शायद ही कभी घूस मांगते है, क्योंकि अमेरिका में जिला पुलिस कमिश्नर उनको ट्रेप करने के लिए जाल बिछाते हैं !!! हवलदार, पुलिसकर्मी आदि जानते है कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्रत्येक 100 से 500 व्यक्तियों में से कोई एक व्यक्ति जिला पुलिस कमिश्नर का आदमी हो सकता है, और यदि वह घूस मांगेगा तो वह पकड़ा जा सकता है, उसकी नौकरी जा सकती है या जेल भी हो सकती है। तो अमेरिका के जूनियर अफसरों द्वारा घूस न लने का मुख्य कारण यह है कि वे जानते है कि यातायात उल्लंघन करने वाले कुछ 200 व्यक्तियों में से कोई एक व्यक्ति कमिश्नर द्वारा उसे ट्रेप करने के लिए बिछाया गया जाल हो सकता है। और उसे नहीं पता कि क़ानून तोड़ने वाले इन 200 व्यक्तियों में से कौन सा व्यक्ति कमिशनर द्वारा बिछाए गए जाल का हिस्सा है। इसलिए वह 200 मामलों में से एक में भी घूस नहीं लेता। और अमेरिका में बहुत से नोडल अधिकारी जैसे जिला शिक्षा अधिकारी, पब्लिक प्रोसिक्यूटर , मुख्यमंत्री , मंत्री , न्यायाधीश आदि भी अपने जूनियर कर्मचारियों को ट्रेप करने के लिए उनके विरुद्ध जाल बिछाते है। समय-समय पर जाल बिछाना सभी जूनियर स्टाफ को घूस लेने से रोक देता है।
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3.2 किन्तु अमेरिका में पुलिस कमिश्नर अपने जूनियर अधिकारियों को घूस लेने से रोकने के लिए जाल क्यों बिछाते है ?

अक्सर ऐसा होता है कि एक सवाल के जवाब से 10 और नए वाजिब सवाल खड़े हो जाते है, और इन्हें उत्तरित करना भी जरुरी होता है। तो अब एक नया एवं वाजिब प्रश्न यह है कि आखिर अमेरिका में पुलिस कमिश्नर अपने जूनियर अफसरों को ट्रेप करने के लिए जाल क्यों बिछाता है जबकि भारत में ज्यादातर पुलिस प्रमुख अपने जूनियर अफसरों को नागरिको से घूस इकट्ठी करने के लिए कहते है ? इस अंतर का कारण क्या है ? आखिर अमेरिका का पुलिस कमिश्नर अपने जूनियर अफसरों को घूस इकट्ठी करने का टार्गेट क्यों नहीं देता ? वह कौनसी चीज है जो उसे ऐसा करने से रोक देती है ? इसकी सिर्फ एक वजह है -- अमेरिका के नागरिको के पास अपने जिले के पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया मौजूद है। दुसरे शब्दों में अमेरिका के नागरिको के पास पुलिस कमिशनर को रिकॉल करने अर्थात वापिस बुलाने का अधिकार होने के कारण, यदि वे यह मानते है कि पुलिस कमिशनर इमानदारी से कार्य नहीं कर रहा है, तो वे किसी भी दिन उसे हटाकर नए व्यक्ति को कमिशनर की नौकरी दे सकते है।
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मतलब, अमेरिका के किसी जिले में यदि नागरिक जिला पुलिस प्रमुख से संतुष्ट नहीं है और वे उसे नौकरी से निकालना चाहते है तो उन्हें डीआईजी या मुख्यमंत्री या गृह मंत्री के पास जाकर शिकायत करने की आवश्यकता नहीं है !! अमेरिका के नागरिकों को उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों के पास जाकर अदालतों में धक्के खाने की भी जरूरत नहीं है। अमेरिका में किसी जिले के नागरिकों को बस यह साबित करने की आवश्यकता है कि जिले के मतदाताओ का बहुमत यह चाहता है कि मौजूदा पुलिस कमिश्नर को नौकरी से निकाल दिया जाए। और यदि किसी जिला पुलिस प्रमुख के विरूद्ध बहुमत साबित हो जाता है तो उसे निकाल दिया जाता है। और तब किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की इतनी हिम्मत नहीं है कि वह अमुक पुलिस प्रमुख के निलम्बन के निर्णय पर कोई रोक या स्टे का कोई आदेश दे सके। तो इस तरह अमेरिका में पुलिस प्रमुख इस बात का ध्यान रखता है कि यदि पुलिस प्रशासन में भ्रष्टाचार फ़ैल गया , अपराधो में वृद्धि हुयी और नागरिको को गलत वजह से उत्पीडन का सामना करना पड़ा तो नागरिको का बहुमत मुझे नौकरी से निकाल देगा , और इसी वजह से अमेरिका में पुलिस प्रमुख इस बात का निरंतर ध्यान रखता है कि उसके अधीन प्रशासन एवं स्टाफ ईमानदारी से कार्य करे।

जबकि भारत में पुलिस प्रमुख की नियुक्ति से लेकर निष्कासन का अधिकार नेताओं के पास होने के कारण पुलिस प्रमुख अपने आला अधिकारियो एवं नेताओं को खुश रखने का लक्ष्य लेकर काम करता है। हम भारत में ऐसी प्रक्रिया चाहते है जिससे नागरिक अपने जिले के पुलिस प्रमुख को बदल सके। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि देश की किसी भी व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए हमें सबसे पहले उस क़ानून ड्राफ्ट की जरूरत होती है जिसे गेजेट में प्रकाशित करने से यह बदलाव आएगा। हमने इसके लिए “राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख” का क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। यह ड्राफ्ट यदि मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री गेजेट में प्रकाशित कर दे तो भारत के नागरिको को जिला पुलिस प्रमुख को बदलने की प्रक्रिया मिल जायेगी। यदि यह ड्राफ्ट मुख्यमंत्री द्वारा प्रकाशित किया जाता है तो यह क़ानून अमुक राज्य में लागू होगा , और यदि इसे प्रधानमंत्री लागू करते है तो यह पूरे देश में लागू हो जाएगा।
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राईट टू रिकॉल - पुलिस प्रमुख ( Rtr-SP ) के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट का सारांश :

(1) उम्मीदवारी - 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या राज्य, लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक / सांसद या पार्षद / जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के उम्मी दवार के रूप में अपना आवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करवा सकेगा।
(2) मतदाताओ द्वारा स्वीकृती - जिले का कोई भी मतदाता अपनी पसंद के अधिकतम 5 उम्मीदवारो को SP के लिए स्वीकृत कर सकता है।
(3) स्वीकृति दर्ज करना - मतदाता किसी भी दिन किसी भी उम्मीदवार को स्वीकृत कर सकते है या किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में दी गयी स्वीकृति रद्द कर सकते है।
(4) स्वीकृति दर्ज करने के तरीके - मतदाता पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ / नहीं दर्ज कर सकते है , या मोबाईल एप द्वारा या अपने रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर से SMS करके या ATM से भी अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकते है।
(5) स्वीकृतियों का प्रदर्शन - प्रत्येक मतदाता द्वारा दर्ज हाँ / नहीं को मतदाता संख्या, नाम और उसके द्वारा स्वीकृत उम्मीदवारों के नाम के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा।
(6) SP की नियुक्ति - यदि कोई उम्मी।दवार जिले के सभी मतदाताओं के 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्तन कर लेता है तो मुख्यामंत्री उसे जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला SP नियुक्त कर सकते है , या नहीं भी कर सकते है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
7) राज्यै के सभी नागरिक मतदाताओं के 51 प्रतिशत मतदाताओं के अनुमोदन से मुख्यनमंत्री किसी जिले में इस कानून को 4 वर्षों के लिए हटा सकते है, और अपने विवेक से उस जिले में अपनी पसंद का जिला पुलिस प्रमुख की नियुक्तइ कर सकते है।
प्रभाव - इस प्रक्रिया के आने से मतदाता सीएम को बता सकेंगे कि वे अमुक भ्रष्ट SP को हटाकर अमुक व्यक्ति को SP बनाना चाहते है। इस प्रक्रिया के आने के बाद पुलिस प्रमुख यदि भ्रष्ट आचरण करता है और क़ानून व्यवस्था में सुधार नहीं लाता है तो नागरिक उसे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बदल सकेंगे।
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04. किसी विषय पर नागरिको के बहुमत की रायशुमारी के लिए आवश्यक टीसीपी क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करना : भारत के नागरिको के पास ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है, जिससे वे अपनी शिकायत या सुझाव सीधे प्रधानमंत्री के सम्मुख रख सके और यह पता लगाया जा सके कि देश के कितने नागरिक इस सुझाव या शिकायत से सहमत है। हमने इसके लिए 3 धाराओं का क़ानून टीसीपी प्रस्तावित किया है . इस क़ानून के आने से भारत के नागरिक किसी भी विषय पर अपना बहुमत प्रदर्शित कर सकेंगे।
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04.1. गैजेट में प्रकाशित करने के लिए टीसीपी = Transparent Complaint Procedure का प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट :
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1) कलेक्टर : कोई मतदाता यदि कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई शपथपत्र प्रस्तुत करता है तो कलेक्टर शपथपत्र को 20 रूपये प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर दर्ज करेगा और एक सीरियल नंबर जारी करेगा. कलेक्टर इस शपथपत्र को स्कैन करके शपथकर्ता की मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर रखेगा। ताकि कोई भी व्यक्ति इसे बिना log in के देख सके ।

2) पटवारी : कोई मतदाता यदि धारा-1 के तहत प्रस्तुत किये गए किसी शपथपत्र पर अपनी हाँ/ ना दर्ज कराने पटवारी कार्यालय आता है तो पटवारी 3 रू शुल्क लेकर मतदाता की हाँ / ना को उसकी मतदाता संख्या के साथ दर्ज करेगा तथा मतदाता की हाँ / ना को उसकी मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर रखेगा।

3) प्रधानमंत्री : ये प्रक्रिया कोई जनमत-संग्रह या रेफेरेंडम नहीं है। मतदाताओ द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना किसी भी अधिकारी, मंत्री, जज, सांसद, विधायक आदि पर बाध्यकारी नहीं है। यदि भारत के कुल मतदाताओं के 51% मतदाता किसी शपथपत्र पर "हाँ" दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री उस शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकते है या प्रधानमंत्री अपना इस्तीफा दे सकते है। इस बारे में प्रधानमन्त्री का निर्णय अंतिम होगा।
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04.2 ये 3 धाराएं गेजेट में आने के बाद कैसे काम करेगी ?

मान लीजिये कोई व्यक्ति चाहता है कि राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख के क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाना चाहिए या सुभाष चन्द्र बोस को राष्ट्रपिता घोषित किया जाना चाहिए । तो वह इस प्रस्ताव का शपथपत्र कलेक्टर कार्यालय में जाकर प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर अमुक प्रति पेज के 20 रू की दर से शुल्क लेकर अमुक शपथपत्र का एक सीरियल नंबर जारी कर देगा। कलेक्टर यह शपथपत्र जस का तस स्कैन करके पीएम की वेबसाईट पर रखेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति बिना लोग इन के इसे देख सके। अब यदि देश का कोई नागरिक इस प्रस्ताव का समर्थन करता है तो वह पटवारी कार्यालय में जाकर 3 रू देकर इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर सकता है। बाद में पीएम इस तरह का आदेश भी दे सकते है कि नागरिक अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या एटीएम के माध्यम से अपना अनुमोदन दर्ज करवा सके। अब मान लीजिये कि कुछ ही महीनो में 50 करोड़ नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमंत्री जनादेश का सम्मान करते हुए अमुक प्रस्ताव को लागू कर सकते है। इस तरह टीसीपी देश के नागरिको को विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज मिलाने का अवसर देगा, और सरकार को भी इस बात की जानकारी रहेगी कि किसी विषय पर देश के कितने प्रतिशत नागरिक क्या बदलाव चाहते है।
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05. अन्य पदों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं
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पुलिस प्रमुख , जिला शिक्षा अधिकारी के अलावा हमने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री , सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट एवं जिला जजों को शामिल करते हुए लगभग 30-50 पदों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाए प्रस्तावित की है। केंद्र, राज्य एवं जिला प्रशासन को शामिल करते हुए लगभग 30 हजार अधिकारी, नेता, जज आदि राईट टू रिकॉल के दायरे में आ जायेंगे। राईट टू रिकॉल लागू होने के 24 घंटे के अंदर इन अधिकारियो में से लगभग 15 हजार अधिकारी तुरंत सुधर जायेंगे , और जब पहले महीने में नागरिको द्वारा कुछ 5-7 अधिकारियों को रिकॉल किया जाएगा तो शेष अधिकारी भी अपना काम काज सुधार लेंगे। आशय यह कि राईट टू रिकॉल क़ानून आने के बाद नागरिको को 30 हजार अधिकारियो में से 50 अधिकारियो को भी नौकरी से नहीं निकालना पड़ेगा। सिर्फ 5-7 भ्रष्ट अधिकारियो को बदलने से ही शेष अधिकारीयों के रवैये में बदलाव आने लगेगा। इस तरह राईट टू रिकॉल प्रशासन में कोई अस्थिरता नहीं लाएगा। सिर्फ 4-5 अधिकारियों को नौकरी से निकालना अन्य अधिकारियों के लिए चेतावनी की तरह काम करेगा और शेष अधिकारी अपनी नौकरी बनाए रखने के लिए तुरंत सुधरना शुरू कर देंगे।
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हमारा मानना है कि ,यदि भारत के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम , NHDMT , वेल्थ टेक्स , एमआरसीएम आदि क़ानून ड्राफ्ट्स को गेजेट में प्रकाशित करवाने में असफल रहते है, तो यह तय है कि अमेरिका-ब्रिटेन की बहुराष्ट्रीय कम्पनियां जल्द ही हमारे सभी प्राकृतिक संसाधनों का अधिग्रहण करके भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में परिवर्तित कर देगी, और इस प्रक्रिया में करोड़ो की संख्या में धर्मान्तरण होंगे । और यदि वे भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में तब्दील नहीं कर पाए तो हमारी स्थिति और भी बदतर हो जायेगी, क्योंकि तब ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि वे भारत का इराकीकरण करने में सफल हो जायेंगे । हमारे द्वारा प्रस्तावित जूरी सिस्टम , वेल्थ टेक्स , एम आर सी एम आदि अन्य कानूनों के ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें -- JuryIndia .org
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इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या कदम उठा सकते है ?
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(1) प्रधानमंत्री को निचे दिए गए फोर्मेट में पोस्टकार्ड भेजे -
“प्रधानमंत्री महोदय , मैं विनती करता हूँ कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करें – newindia .in/RtrDeo3 ,# RtrDeo3
( newindia .in प्रधानमंत्री की अधिकृत वेबसाईट है , जिस पर कोई भी नागरिक अपना सुझाव रख सकता है , और रखे गए किसी सुझाव पर वोट भी कर सकता है। हमने सभी ड्राफ्ट के पीडीऍफ़ newindia .in पर रख दिए है। अत: जब आप पोस्टकार्ड भेजे तो उस क़ानून ड्राफ्ट का लिंक जरुर रखें जिस ड्राफ्ट को आप गेजेट में प्रकाशित करवाना चाहते है।)
(2) यदि आप ट्विटर पर है तो @pmoindia पर यह ट्विट करें - “प्रधानमंत्री महोदय , मैं आपसे विनती करता हूँ कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करें – newindia .in/ RtrDeo3 , #RtrDeo3”
(3) यदि आप स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते है तो newindia .in पर newindia .in/templelaw5 ड्राफ्ट को वोट करें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 19 2018 08:39:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रक्षा व्यवस्था पर लिखे गए पोस्ट की सूची। एल्बम - सेना को मजबूत करने के प्रस्ताव
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53) कॉमकासा एग़्रिमेंट :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1787613701356858>;
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52) 4 जुलाई - कारगिल युद्ध में संघर्ष विराम की घोषणा इसी दिन की गयी थी -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1685189551599274>;
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51) पोकरण-2 असफल रहा था -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1623101337808096>;
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50) रूस ने एंड्रॉयड को अनौपचारिक रूप से बेन कर दिया है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1538946272890270>;
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49) अमेरिकी संचार कम्पनी 'Qualcomm' के अधिग्रहण पर रोक -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1566255523492678>;
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48) अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ़ स्टेट द्वारा मोदी साहेब को प्रशिक्षण -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1370596546391911>;
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47) सेना की ताकत आंकने का पैमाना मात्रात्मक नहीं बल्कि गुणात्मक होता है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1344191685699064>;
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46) नेपाल की इंटरनेट सेवा पर अब चीनी का कब्ज़ा -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1344046919046874>;
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45) चीनी सैनिको ने सीमा में प्रवेश करके भारत के दो बंकर नष्ट कर दिए है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1316545518463681>;
.
44) यदि चीन या पाकिस्तान से हमारा युद्ध हो जाता है तो हम किस के भरोसे पर है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1303848113066755>;
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43) क्या भारत के राजा मध्यकाल में लकड़ी के भालो का प्रयोग कर रहे थे ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1290651691053064>;
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42) FDI तो चीन में भी आयी है। फिर उनकी सुरक्षा खतरे में क्यों न पड़ी ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1262334327218134>;
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41) भाषाई शुद्धता का "दुराग्रह" राष्ट्र को सैन्य दृष्टि से निर्बल बना देता है ( हिंदी ) -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1176635692454665>;
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40) पाकिस्तान बन्दुक बनाने वाले कारीगरों को पश्चिम बंगाल में भेज रहा है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1143469205771314>;
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39) अमेरिकी सरकार भारत के पूरे या आंशिक नेटवर्क को बंद कर सकती है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1138858249565743>;
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38) बलूचिस्तान पर मोदी साहेब का रवैया बिलकुल सही है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1016188225166080>;
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37) पाकिस्तान की सीमा पर दीवार बनाना अनुपयोगी है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/980651232053113>;
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36) भारत के पास टेक्टिकल न्यूक्लियर बॉम्ब नहीं है जबकि पाकिस्तान के पास है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1226879420763625>;
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35) भारत को एनएसजी में सदस्यता की इतनी फिक्र नहीं करनी चाहिए :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/970811109703792>;
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34) अमेरिकी धनिको समेत पूरी दुनिया के धनिक अवाम को हथियार विहीन रखना चाहते है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/967602496691320>;
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33) बोइंग यह तय करेगा कि भारत के प्रधानमंत्री का प्लेन लैंड करेगा या क्रेश होगा !!!
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/966583080126595>;
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32) मोदी साहेब ने अमेरिका की फौजो को भारत में सैन्य ठिकाने बनाने की अनुमति दी है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/962980570486846>;
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31) भारत में सिर्फ वही कम्पनियां कारोबार करे जो अपने मालिकों की जानकारी सार्वजनिक करे :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/962296317221938>;
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30) ईरान के साथ चाबहार समझौते पर :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/951745738276996>;
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29) गूगल भारत के सभी एंड्रॉयड फोन्स को मिनिट से पहले बंद कर सकता है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/950585455059691>;
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28) "कारगिल युद्ध में अमेरिका ने भारत को मदद देने से मना कर दिया था" -- दैनिक भास्कर
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/935302839921286>;
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27) भारत के साथ शांति प्रक्रिया बंद हो चुकी है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/921963367921900>;
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26) मोदी साहेब ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले में घोषित रूप से क्लीन चिट दे दी है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/914120722039498>;
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25) सिर्फ एक साल में ही नेपाल लगभग हाथ से फिसल चुका है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/908054622646108>;
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24) क्यों मोदी साहेब अमेरिका से भयभीत है ? और क्यों 'भारत' को भी अमेरिका से डरना चाहिए ?
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/894903663961204>;
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23) डेविड हेडली सिर्फ वही सब सुना रहा है, जो उसे अमेरिका ने बोलने के लिए कहा है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/884818304969740>;
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22) 'यदि भारत ब्रिटिश का गुलाम बना रहता तो हालात ज्यादा बेहतर होते' - मार्क एंडरसन :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/883793865072184>;
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21) पाकिस्तान गिलगित को पाकिस्तान में मिलाने के लिए संविधान में संशोधन करेगा।
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/866174070167497>;
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20) चीन पाक अधिकृत कश्मीर में 1100 मेगावाट की क्षमता का बाँध बना रहा है।
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/865335850251319>;
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19) पाकिस्तान के एटम बम से कुछ भारतीय भयभीत क्यों ?
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/863689090415995>;
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18) पठानकोट एयरबेस हमले जैसी घटनाओं को रोकने के लिए 'दीर्घकालीन' समाधान :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/863642370420667>;
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17) पठानकोट हमले पर 'प्रतिक्रियाएं' !!
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/862749770509927>;
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16) मोदी साहेब पाकिस्तान के साथ व्यापारिक एवं पर्यटन सम्बन्धो का समर्थन कर रहे है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/862742197177351>;
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15) ओबामा बन्दूक कंपनियों के सबसे अच्छे सेल्समेन है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/851528381632066>;
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14) पिछले 18 माह में पड़ोसी देशो के साथ भारत के सम्बन्धो में ये 'वास्तविक' परिवर्तन आये :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/848633078588263>;
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13) फारूक अब्दुल्ला ने सही कहा है की भारत की सेना की हैसियत खुद के बूते आतंकवादियों से लड़ने की भी नहीं है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/844578182327086>;
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12) कारगिल युद्ध में मोदी साहेब की भूमिका :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/834105873374317>;
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11) पाकिस्तान छोटे परमाणु बम बना रहा है, जो कि भारत के लिए वास्तविक खतरा है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/829139083870996>;
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10) सिर्फ सैनिक ही सेना नही है। हमें सैनिको से इतर सेना के महत्त्व को भी समझना चाहिए :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/788885964562975>;
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09) पाकिस्तान और चीन ने भारत के खिलाफ पंजाब में तीसरा मोर्चा खोलने का प्रयास शुरू कर दिया है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/788666811251557>;
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08) चीन ने पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान में 46 अरब डॉलर का निवेश भारत के लिए खतरा है :
<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=746467672138138&set=a.584288358356071.1073741825.100003247365514&type=1&permPage=1>;
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07) भारतीय सेना क्यों कर पायी म्यांमार की सीमा में प्रवेश ? :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/765384533579785>;
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06) पेशावर पर आतंकवादी हमले पर :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/671256162992623>;
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05) हथियार नदारद :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/666125236839049>;
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04) हमें पाकिस्तान और चीन से जंग के लिए तैयार रहना चाहिए :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/660460697405503>;
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03) मंगल मिशन और हथियारो का निर्माण :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/628285763956330>;
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02) युद्ध के लिए तैयार रहिये :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/589000494551524>;
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01) भारत ने 25000 वर्गमील समुद्री सीमा गंवाई :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/583842655067308>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Dec 20 2018 19:49:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

समाधान - #TempleLaw5 = "राष्ट्रीय सनातन देवालय प्रबंधक ट्रस्ट" के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/838551942989668>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Dec 20 2018 21:09:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

संघ द्वारा अचानक से राम मंदिर निर्माण के लिए क़ानून और अध्यादेश लाने की मांग होने लगी है। लेकिन ड्राफ्ट अब तक नदारद है !!
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भाजपा के शीर्ष नेता श्री मोहन भागवत ने सबसे पहले मंदिर निर्माण के लिए क़ानून बनाने की मांग की और अब संघ के कई नेता भी अपने अपने तरीके से अध्यादेश लाने की बात कर रहे है। लेकिन अब तक इन्होने अपना ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया है !!
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हम पिछले 5 साल से संघ के नेताओ और कार्यकर्ताओ को बार बार कह रहे है कि यदि राम मंदिर निर्माण करना है तो उसके लिए गैजेट नोटिफिकेशन निकालना पड़ेगा , और जब तक हमारे पास इसका ड्राफ्ट नहीं है तब तक राम मंदिर निर्माण के लिए क़ानून नहीं बन सकता। और जब उनसे ड्राफ्ट माँगा जाता है तो संघ के अलग अलग कार्यकर्ताओ से अलग अलग जवाब मिलते है। कोई कहता है अभी ड्राफ्ट बन रहा है , कोई कहता है अभी ड्राफ्ट लिखने का राईट टाइम नहीं आया , कभी कहते है बस एक दो हफ्ते में दे देंगे आदि आदि। और जब हमने मंदिर निर्माण का ड्राफ्ट लिखकर उन्हें दिया तो उन्होंने नयी लाइन ले ली -- वे कहने लगे कि, ड्राफ्ट से क्या होगा हम बिना ड्राफ्ट ही मंदिर बना देंगे , और वैसे भी अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में है और राज्यसभा में भी बहुमत नहीं है, आदि आदि।
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और अब चुनाव करीब आने पर जब भागवत जी ने सरकार से क़ानून लाने की मांग की तो हमने कहा कि यही बात हम पिछले 5 साल से कह रहे थे और आप हमे बेवकूफ बता रहे थे। और इस तरफ हमें बेवकूफ बताकर आपने पूरे 5 वर्ष व्यतीत कर लिए। अब जब आप भी कानून लाने की बात कर रहे है तो अब तो कम से कम क़ानून का ड्राफ्ट दीजिये। जब तक आप ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं करेंगे तब तक हमें कैसे मालूम होगा कि आप जो क़ानून लाने वाले है उससे मंदिर निर्माण संभव होगा या नहीं। लेकिन अब तक संघ की तरफ से कोई भी ड्राफ्ट सामने नहीं आया है।
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मेरा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे संघ=बीजेपी के स्वयसेवकों से उस क़ानून का ड्राफ्ट देने के लिए कहे जिसकी मांग श्री मोहन भागवत कर रहे है। लोकसभा चुनाव में सिर्फ 3 माह शेष है। यदि संघ के नेता इन 3 महीनो में भी मंदिर निर्माण का ड्राफ्ट नहीं देते तो यह तय है कि वे फिर से नारे लगाकर मंदिर के नाम पर वोट इकट्ठे करने की योजना बना रहे है। अत: कृपया उनसे मंदिर निर्माण के लिए आवश्यक क़ानून का ड्राफ्ट मांगे।
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और यदि वे फिर से पुराने लाइन लेते है , यानी मामला सुप्रीम कोर्ट में है , राज्य सभा में बहुमत नहीं है, आदि जवाब देते है तो उनसे कहिये कि जब मंदिर अदालत के आदेश से ही बनना है तो फिर आपको हम मंदिर बनाने के लिए वोट क्यों दें !!
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हमारे द्वारा प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट इस लिंक पर देखा जा सकता है -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/838551942989668>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 21 2018 13:59:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

देश के कई बुद्धिजीवियों को , पत्रकारों को, संपादको को , अर्थशास्त्रियो आदि को अचानक से यह ज्ञान प्राप्त हो गया है कि नोटबंदी से तो अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हो गया है , और यह एक गलती थी !! इनमे से ज्यादातर लोग नोटबंदी के समय या तो खामोश थे या फिर इसका समर्थन कर रहे थे।
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पहली बात तो ये कि ये लोग तब भी यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि नोटबंदी एक घोटाला है , जिससे भारत की राष्ट्रवादी पार्टी ने सिर्फ महीने भर में ही हजारो करोड़ रूपये बनाये है , और नोटबंदी से अर्थव्यवस्था गर्त में चली जायेगी। लेकिन तब इन्हें चुप रहने के लिए कहा गया था तो ये चुप बैठे थे , या बोल भी रहे थे तो नोट बंदी के समर्थन में बोल रहे थे। और अब चूंकि जनता के सामने यह बात खुलकर आ चुकी है कि मोदी साहेब ने नोट बंदी को देश भक्ति से जोड़कर पूरे देश को मामू बना दिया है , तो अब ये लोग नोट बंदी के फायदे गिनाने की जगह इस बात को ढकने की कोशिश कर रहे है कि यह एक घोटाला था। वे इस घोटाले को एक गलती या चूक साबित करना चाहते है !!!
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राईट टू रिकॉल ग्रुप ने नोटबंदी के दौरान ही जनता को यह जानकारी देना शुरू कर दी थी कि नोटबंदी एक घोटाला है और राष्ट्रवादी लोग इस घोटाले से हजारो करोड़ बना रहे है , और नोटबंदी देश की अर्थव्यवस्था को हर लिहाज से नुकसान ही पहुंचाएगी। हमने नागरिको तक ये जानकारी पहुँचाने के लिए दैनिक भास्कर में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन भी दिया था। इस विज्ञापन की विषय वस्तु और इस लिंक पर देखें जा सकते है --- <https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1132775560174012&set=a.778193075632264.1073741827.100003247365514&type=3&theater>;
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नोटबंदी पर लिखे गए अन्य लेख देखने के लिए इसी एल्बम के पोस्ट्स देखें।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 21 2018 14:40:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(B021) चुनावों में वोटिंग , नोटा , राईट टू रिजेक्ट , रिकॉल आदि
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इस एल्बम में विभिन्न चुनाव प्रणालियों , वोटिंग करने के पैटर्न को प्रभावित करने वाले तत्व , नोटा , राईट टू रिजेक्ट , राईट टू रिकॉल आदि का चुनावी नतीजो पर पड़ने वाले प्रभावो से सम्बंधित विवरण रखे गए है। और कैसे वोटिंग के तरीको में बदलाव लाकर जातीय आधारित वोटिंग एवं नकारात्मक वोटिंग की व्यवस्था को अप्रभावी किया जा सकता है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 21 2018 14:42:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनाव प्रणाली पर लिखे गए पोस्ट्स की सूची ; एल्बम – चुनावो में वोटिंग : नोटा , राईट टू रिजेक्ट आदि
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(23) रिकालिस्ट्स को ऐसे लोगो को गम्भीरता से 'नही' लेना चाहिए जो अपना वोटिंग स्टेंड क्लियर नहीं करते -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1777964288988466>;
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(22) नॉन ब्रांडेड अच्छे उम्मीदवार को वोट देने से बुरे उम्मीदवारों की ताकत घटती है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1777434562374772>;
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(21) नोटा -- मोदी साहेब का मास्टर स्ट्रोक -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1776394895812072>;
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(20) आगामी चुनावो में "संभावित फ्रोड उम्मीदवार" की पहचान कैसे करे ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1765680633550165>;
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(19) मैंने अब तक किन किन राजनैतिक पार्टीयों को वोट किया है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1776175319167363>;
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(18) नोटा के समर्थन कर रहे कार्यकर्ता नोटा का समर्थन करने पर विवश क्यों हुए है ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1765631736888388>;
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(17) नोटा , राईट टू रिजेक्ट एवं राईट टू रिकॉल ;
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1765599280224967>;
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(16) नोटा दबाने से बेहतर है कार्यकर्ता स्वयं चुनावों में भाग ले -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1764051430379752>;
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(15) सीमांकित वोटिंग आने से मतदाता कोंग्रेस के भय से आजाद हो सकते है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1632596583525238>;
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(14) चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को आर्थिक सहयोग करे अथवा स्वयं चुनावों में हिस्सा लें :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1439058729545692>;
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(13) जो कार्यकर्ता पार्टी बना सकते है अपने स्तर पर पार्टी बनाने के प्रयास करे -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1409140159204216>;
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(12) ज्यादातर संभावनाएं है कि लोकसभा चुनाव 2018 में संपन्न हो जाए
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1388533361264896>;
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(11) ऐसे लोगो की सलाहों पर ध्यान न दें जो चुनाव लड़ने का इच्छुक नहीं है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1290568494394717>;
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(10) चुनाव लड़ने की मौजूदा व्यवस्था में कुछ प्रस्तावित संशोधन :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1218670284917872>;
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(09) इंस्टेंट रन ऑफ़ वोटिंग सिस्टम" से छोटे उम्मदीवारों को लाभ होगा -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1173667689418132>;
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(08) क्यों चुनावो में बड़ी पार्टी के उम्मीदवारों को ही विजय क्यों मिलती है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1160746314043603>;
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(07) समस्या ये है कि वोट किस को दिया जाए :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1150985681686333>;
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(06) यूपी, उत्तराखंड एवं पंजाब विधानसभा में चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओ के लिए :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1149751701809731>;
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(05) जातिवाद को कम करने के लिए इंस्टेंट रन ऑफ वोटिंग सिस्टम :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/847905751994329>;
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(04) राईट टू रिकॉल कानूनो के प्रचार के तरीको में विज्ञापन देना तथा चुनाव लड़ना सबसे महत्त्वपूर्ण है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/801391129979125>;
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(03) इंस्टेंट रन ऑफ वोटिंग सिस्टम किस तरह जातीय आधार पर मतदान में कमी लाता है ?
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/838946086223629>;
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(02) विविध स्तरीय चुनाव (मल्टी इलेक्शन) किस तरहख्व बना देते है ? :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/791254167659488>;
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(01) आतंरिक पार्टी लोकतंत्र पर :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/712516712199901>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 21 2018 16:38:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जब कोई मतदाता नोटा दबाता है तो यह मालूम नहीं हो पाता कि उसने नोटा का बटन किस मुद्दे पर किसके विरोध में दबाया है !! और इस वजह से नोटा सभी पार्टियों को सेफ एक्जिट दे देता है !!! यदि कमजोर विकल्प भी मौजूद है तो मतदाता को विकल्प हीनता का आश्रय नहीं लेना चाहिए।
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मान लो किसी विधानसभा चुनाव में नोटा को 5000 वोट मिलते है, तो यह मालूम नहीं किया जा सकता कि ये 5000 लोगो का मुद्दा क्या है और ये किसी पार्टी से किस तरह के बदलाव की मांग कर रहे है , और किस मुद्दे को यदि कोई पार्टी तवज्जो देने लगे तो ये मतदाता नोटा की जगह किसी पार्टी के पक्ष में वोट करने लगेंगे। तो इस तरह कोई भी राजनैतिक दल या पेड मीडियाकर्मी इसकी व्याख्या अपनी इच्छानुरूप कर सकते है।
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इस स्थिति को एक उदाहरण से समझिये -- मान लीजिये कि कोई बालक किसी खिलोने को पाने के लिए रूठ जाता है। अब यदि बालक को खिलौना चाहिए तो उसे अपने माता-पिता को रोकर या गाकर यह बताना ही पड़ेगा है कि उसे खिलौना चाहिए। और जब अभिभावक को वजह मालूम हो जाती है सिर्फ तब ही वो ये फैसला करते है कि खिलौना खरीदकर देना है या नहीं देना है। लेकिन यदि बालक यह नहीं बतायेगा कि वो क्यों रूठ गया है तो माता पिता के पास अंदाजा लगाने के सिवाय कोई चारा नहीं है।
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नोटा के साथ भी यही समस्या है। इससे यह तो साबित हो जाता है कि मतदाता सभी पार्टियों से नाराज है , किन्तु यह नहीं पता चलता कि उनका मुद्दा क्या है ? मतलब नोटा का प्रतिशत बढ़ने से एक बात तो पता चलती है कि कोई या कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दे ऐसे है जिन्हें किसी भी पार्टी ने तवज्जो नहीं दी है , अत: मतदाता नोटा की और जा रहा है , लेकिन यह पता नहीं चल पाता कि वे मुद्दे कौनसे है , और वे किसी पार्टी से क्या चाहते है।
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मेरे विचार में किसी कार्यकर्ता को नोटा दबाने से पहले निम्नलिखित बिन्दुओ पर क्रमिक रूप से विचार करना चाहिए :
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1) उसे अपने फेसबुक पर यह स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए कि मैं देश में X , Y या Z क़ानून या नीति चाहता हूँ और यदि किसी भी पार्टी ने नीति X को अपने एजेंडे में शामिल नहीं किया तो मैं नोटा को वोट दूंगा।
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2) उसे सभी बड़ी एवं छोटी पार्टी के कार्यकर्ताओ से स्पष्ट रूप से आग्रह करना चाहिए कि वे नीति X को अपने एजेंडे में शामिल करें।
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3) यदि कोई भी बड़ी एवं छोटी पार्टी X को अपने एजेंडे में शामिल नहीं करती है , तो उसे निर्दलीय प्रत्याशियों से कहना चाहिए कि वे X को अपने एजेंडे में शामिल करें।
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4) यदि कोई छोटी पार्टी या निर्दलीय प्रत्याशी इसे अपने एजेंडे में शामिल कर देता है तो नोटा के समर्थक को इन्हें अपना वोट देना चाहिए और अपने फेसबुक पर चुनावों से पूर्व भी यह लिखना चाहिए कि मैं A को वोट करने वाला हूँ , क्योंकि A ने नीति X को अपने एजेंडे में शामिल किया है।
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5) यदि कोई भी उम्मीदवार X को अपने एजेंडे में शामिल नहीं करता है तो नोटा समर्थक को अपने आस पास के कार्यकर्ताओ से कहना चाहिए कि यदि वे नीति X को शामिल करते हुए चुनाव लड़ते है तो मैं उन्हें वोट दूंगा एवं उनका प्रचार भी करूँगा।
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6) यदि तब भी अमुक लोकसभा क्षेत्र में कोई भी उम्मीदवार नीति X को अपने एजेंडे में शामिल नहीं करता है तो नोटा समर्थक को खुद चुनाव लड़ना चाहिए , और इस मुद्दे के समर्थको से कहना चाहिए कि इस मुद्दे को सपोर्ट किसी भी उम्मीदवार ने नहीं किया है अत: मैं इस मुद्दे का प्रचार करने के लिए चुनाव लड़ रहा हूँ। इस तरह नोटा समर्थक अपना मुद्दा आगे बढाने में सफल हो जायेंगे। नोटा दबाने से किसी मुद्दे को आगे नहीं बढाया जा सकता।
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7) यदि नोटा समर्थक चुनाव लड़ने में सक्षम नहीं है , तब उसके पास नोटा दबान के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन अमुक नोटा समर्थक ने अपनी फेसबुक के कवर पेज पर या एल्बम बनाकर यह विवरण नहीं लिखा है कि वह किस मुद्दे पर विकल्प हीनता के कारण नोटा को वोट करने वाला है, तो मेरे विचार में नोटा दबाने वाले मतदाता के पास नोटा दबाने की पर्याप्त वाजिब वजह नहीं है !!
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जाहिर है , नोटा का समर्थक बनना आसान नहीं है। नोटा विकल्पहीनता है। लेकिन यदि विकल्प मौजूद है या फिर आप स्वयं विकल्प बन सकते है तो नोटा की और जाना कोई उपाय नहीं लाएगा। तो नोटा समर्थको से मेरा आग्रह है कि , पहले अपने मुद्दों को लेकर सभी विकल्पों की तलाश करे और तब खुद विकल्प बनने की कोशिश करे। और कैसे भी कोई विकल्प न मिले तो तो ही अंतिम रूप में विकल्प हीनता यानी नोटा का आश्रय ले।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 21 2018 21:49:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राईट टू रिकॉल ड्राफ्ट्स के मराठी अनुवाद यहाँ देखे जा सकते है.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 23 2018 16:35:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

परस्पर चर्चा के लिए लिखे गए पोस्ट्स की सूची ; एल्बम - Two Person Conversation Thread
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(00) सभी से चर्चा के लिए पोस्ट - 1
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/762195007232071>;
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(01) सभी से चर्चा के लिए पोस्ट - 2
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/964076323710604>;
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(02) सभी से चर्चा के लिए पोस्ट - 3
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1395568237228075>;
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(03) सभी से चर्चा के लिए पोस्ट - 4
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1810964342355127>;
.
(04) Anil Ojha --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/755297807921791>;
.
(05) Rakesh Suri --
<https://facebook.com/pawan.jury/posts/729639427154296>;
.
(06) Gourav Singh --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/764221850362720>;
.
(07) Rishikesh Awale --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/768568946594677>;
.
(08) Kulbir Chahal --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/769785656473006>;
.
(09) Varrdhman Saxena --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/776846162433622>;
.
(10) Jordananju Sen --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/801759249942313>;
.
(11) Himanshu Pathak --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/806424452809126>;
.
(12) Mahesh Kumar --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/844200445698193>;
.
(13). Shivani Jain -
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/844525132332391>;
.
(14). Abhishek Kumar -
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/873581489426755>;
.
(15). Taushar Chaudhrary --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/875734692544768>;
.
(16). Suraj Gaud --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/897072753744295>;
.
(17) Krishna automobiles kotri --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/897193533732217>;
.
(18) Harish kumar --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/897214240396813>;
.
(19) Chanakya sadhana --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/921706984614205>;
.
(20) Anup pandey --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/926816830769887>;
.
(21) Dhruv singh --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/927475127370724>;
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(22) Aman sharma --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/930154107102826>;
.
(23) Vishal dhokle --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/959168567534713>;
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(24) Roop solnki jury rrg --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/959170254201211>;
.
(25) Rohit RD --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1090590384392530>;

(26) Raman sharma --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1082025108582391>;
.
(27) Bittoo Suryavanshi --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/981393521978884>;
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(28) Hemant Bindal --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/966888023429434>;
.
(29) Prashant Sidam --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/964070367044533>;
.
(30) Bhudev Sehlangia --
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/962287973889439>;
.
(31) Brijesh Gupta -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1150125401772361>;
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(32) Kalpit Jain -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1150118898439678>;
.
(33) सुहेल देव पाठक -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1142309029220665>;
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(34) Kapil Bishnoi --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1139870159464552>;
.
(35) Dinesh Sharma --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1188136771304557>;
.
(36) Roshan Mishra --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1223306387787595>;
.
(37) Ajay sharma --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1223309597787274>;
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(38) Ashish Mishra --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1226830207435213>;
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(39) Rocky Jaswal --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1226891537429080>;
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(40) Dhiraj Batade Rrg --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1244050759046491>;
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(41) Ramraj chaudhary --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1262746007176966>;
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(42) Gaurang Patel --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1571863809598516>;
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(43) Sourav Meena --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1569841676467396>;
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(44) Chetan Vyas Rrg --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1428101373974761>;
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(45) Tushar Chodhary
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1429675157150716>;
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(46) Suren Verma -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1370726379712261>;
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(47) Mohit Kumar -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1359561157495450>;
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(48) Manish Ataria --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1222076084577292>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Dec 24 2018 12:44:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 28 2018 19:35:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बालीवुड कलाकारों पर पोस्ट्स की सूची ; एल्बम - गैंग्स ऑफ़ बॉलीवुड !!
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(43) अक्षय कुमार ने पेट्रोल प्राइस के अपने पुराने ट्विट डिलीट किये -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1793103867474508>;
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(42) RGV प्रोडक्शन कि फिल्म "शूल" यथार्थ के सबसे करीब है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1715270718591157>;
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(41) 1954 में बनी अकिरा कुरोसोवा की "सेवेन समुराई" -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1713854252066137>;
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(40) सलमान खान की जमानत -- संघ के मंत्रियो ने इस मामले में कितनी घूस खायी होगी ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1589629897821907>;
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(39) सेंसर बोर्ड से पास होने के बावजूद सरकार किसी फिल्म को बेन कर सकती है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1517399828378248>;
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(38) पद्मावती के समर्थन में कनाडाई नागरिक एवं "राष्ट्रवादी" अभिनेता अक्षय कुमार -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1513896438728587>;
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(37) जीसस एवं श्री कृष्ण एक ही है – रजनीकांत
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1495857983865766>;
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(36) अक्षय कुमार -- "भारत की सड़के गन्दी और सकड़ी है।
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1365779520206947>;
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(35) अक्षय कुमार के प्रशंषको / अंधभगतो से सवाल :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1365766860208213>;
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(34) इस वीडियो में अक्षय कुमार यह छुपा रहा है कि वह कनाडा का नागरिक है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1365729586878607>;
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(33) अक्षय कुमार के अंध भगतो से एक मारक सवाल -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1364452583672974>;
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(32) गलत धारणा -- अक्षय कुमार भारतीय सेना के हितेषी है ;
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1363976610387238>;
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(31) अक्षय कुमार जैसे विदेशी जो भारत में कर मुक्त रुपया कमाने आते है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1363188157132750>;
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(30) जितना मैंने सोचा था संघ के नेता उससे कहीं ज्यादा बेशर्म है ( परेश रावल ) -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1297846960333537>;
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(29) सत्या की गालियों को टीवी संस्करण में जोड़ दिया गया है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1291553307629569>;
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(28) जितने ज्यादा लोग "लिटिल बॉय" देख लेंगे उतने ही कम "ट्यूबलाइट" देखेंगे-
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1279544272163806>;
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(27) दंगल के उलट "अखाड़ा" में महावीर जी फोगट शाकाहारी है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1155857877865780>;
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(26) फिल्मो को टेक्स फ्री करो और बदले में घूस खाओ :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1143529465765288>;
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(25) खिलाड़ियों को मांस खाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दंगल को टेक्स फ्री किया :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1143512582433643>;
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(24) मोदी साहेब ने अपने गडकरी को "दंगल" फिल्म का प्रमोशन करने का आदेश दिया है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1141789492605952>;
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(23) दंगल का बहिष्कार करें :
<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1136887469762821&set=a.778193075632264.1073741827.100003247365514&type=3&theater>;
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(22) अनुष्का शर्मा को भी दिवाली की आतिशबाज़ी से तकलीफ़ होने लगी है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1073724076079161>;
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(21) अक्षय कुमार ने इस तथ्य को "छिपाया" कि, वे कनाड़ा की नागरिकता ले चुके है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1066593680125534>;
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(20) अक्षय कुमार ने कनाड़ा की नागरिकता किस ख़ुशी में ले रखी है ?
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1054751284643107>;
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(19) सलमान खान और काला हिरण, जय हो :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/993457444105825>;
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(18) इरफान खान मिशनरीज को खुश करने के लिए उट पटांग बयान दे रहे है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/975516869233216>;
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(17) सिने-विश्लेषक जय प्रकाश चौकसे राईट टू रिकॉल के बारे में अफवाह फैलाते हुए :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/883098891808348>;
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(16) परेश रावल, रवीना टंडन, अक्षय कुमार, अनुपम खेर आदि गौ हत्या के समर्थक है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/913149808803256>;
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(15) बॉलीवुड के सभी 'राष्ट्रवादी' अभिनेताओं के लिए :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/895546860563551>;
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(14) बॉलीवुड का नया कायदा :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/894986860619551>;
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(13) प्रियंका चोपड़ा आदि को पद्म पुरस्कार देने का आदेश देने के विरोध में :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/877636242354613>;
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(12) प्रियंका चोपड़ा और अजय देवगन को पदम् विभूषण :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/876827782435459>;
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(11) पद्म पुरस्कार के लिए राजीव भाई का विरोध और प्रियंका चोपड़ा-अजय देवगन का समर्थन :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/877634785688092>;
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(10) हेमामालिनी को 40 करोड़ की जमीन सिर्फ 70 हजार रूपये में मिली है।
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/876825839102320>;
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(09) सलमान खान को रिहा करने वाले जज पर महाभियोग लगाया जाए :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/869165223201715>;
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(08) मोदी साहेब ने अदनान सामी को नागरिकता दिए जाने की प्रक्रिया गुप्त रखी :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/862736460511258>;
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(07) कांग्रेस ने अदनान की नागरिकता की अर्जी खारिज कर दी थी :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/862198960565008>;
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(06) अदनान सामी पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स अधिकारी और पाकिस्तानी राजदूत के बेटे है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/861063670678537>;
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(05) एवार्डियो की एवार्ड वापसी :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/833208220130749>;
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(04) सांसद परेश रावल तथा सिने सितारे अक्षय कुमार, आमिर खान, अजय देवगन, राजू हिरानी आदि के लिए :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/782162425235329>;
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(03) पेड मिडिया और दूरदर्शन दर्शको से यह जानकारी छिपा रहे है कि दुर्घटना के समय हेमा की कार की स्पीड क्या थी :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/780076755443896>;
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(02) क्यों हेमामालिनी के ड्राइवर का नागरिको की जूरी द्वारा नार्को टेस्ट लिया जाना चाहिए ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/778990498885855>;
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(01) सलमान खान हिट एंड रन :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/750217481763157:0>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 28 2018 19:45:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अक्षय कुमार का ओरिजिनल राष्ट्रवाद समझने के लिए सिर्फ 10 सेकेण्ड का यह वीडियो देखें :

टोरंटो ( कनाडा ) में अपने प्रशंषको से अक्षय कुमार कह रहे है कि -- "टोरंटो मेरा घर है। जब मैं बॉलीवुड से रिटायर हो जाऊँगा तो अपनी सम्पत्ति के साथ यहाँ शिफ्ट हो जाऊंगा !!!
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<https://twitter.com/RealHistoryPic/status/1076910626520420352?fbclid=IwAR2QTB4OUF2qWbSoOV_CZE65SCVi6fRYGbBpfyFML_0vWog83K2hOd-5Z18>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 28 2018 21:12:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब को एक और कार्यकाल दे देने से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को कोई ऐतराज नजर नहीं आता.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 28 2018 21:51:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत में एक सबसे बड़ी समस्या क्या है ? बड़ी समस्या यह है कि भारत की सेना कमजोर है. और सबसे बड़ी समस्या यह है कि भारतीयों को यह बात पता नहीं है.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 29 2018 18:58:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

देश में पिछले 5 साल में सबसे बड़ा भ्रम यह खड़ा किया गया है कि मोदी साहेब मुस्लिमो के खिलाफ है !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 29 2018 20:01:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रफाल आयातित विमान है, और इसमें किल स्विच है।

1) आयतित हथियार के साथ समस्या यह है कि सेना सिर्फ तब और तब तक ही युद्ध लड़ सकती है जब तक कि हमें विदेशी हथियार भेजते रहे। हथियार भेजना बंद , युद्ध बंद !! तो अगhर युद्ध हो जाता है और हमारे 10-20 रफाल नष्ट हो जाते है तो हमें तुरंत और रफाल चाहिए होंगे। और युद्ध के दौरान विमान खरीदने के लिए 10 गुना दाम चुकाने होंगे।

2) किल स्विच - रफाल में किल स्विच भी है। जितने आधुनिक हथियार विदेशियों द्वारा निर्मित है , उनमे विदेशी किल स्विच डालते है। खरीदने वालो को नहीं पता होता कि इसमें कहाँ और कैसा किल स्विच है. इसे खोजा भी नहीं जा सकता। और यदि हथियार बनाने वाली कम्पनी इन्हें एक्टिवेट कर दे तो हथियार काम करना बंद कर देता है। मतलब युद्ध शुरू हुआ तो रफाल के निर्माता इसका किल स्विच एक्टिवेट कर देंगे और यह प्लेन स्टार्ट ही नहीं होगा। उससे भी बदतर यह होगा कि रफाल वाले सीधे चीनियों से संपर्क करके कहेंगे कि भारत के प्लेन हम हवा में बंद कर देंगे इतने उतने पैसे हमें दे दो। चीन उन्हें पैसे दे देगा। फिर जब भारत के प्लेन उड़ान भरेंगे तो उड़ान के दौरान इंजन बंद हो जाएगा और प्लेन गिर जाएगा। चीन इसके बदले में रफाल के निर्माता को 10-20 हजार करोड़ दे देगा। तो इस तरह चीन सिर्फ पैसा खर्च करके भारत के रफाल उडवाते जायेगा। यदि भारत रफाल वालो को कहता है कि प्लेन हवा में जाकर खराब क्यों हो जा रहे है , तो रफाल वाले कहेंगे कि आप 10-20 हजार करोड़ डॉलर भेज दो तो उड़ते रहेंगे !!
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कोंग्रेस को यह जानकारी जनता में पहुँचाने में इंटरेस्ट नहीं है। क्योंकि वे भी हथियारों की खरीद से अरबों रूपये कमाते आये है , और आगे भी कमाने वाले है। संघ के कार्यकर्ता भी यह बात जनता तक नहीं पहुँचाना चाहते। और जहाँ तक मीडिया की बात है तो मीडिया के मालिक और रफाल के मालिक एक ही है। तो आयातित और किल स्विच शुदा रफाल के मुद्दे को साइड में करके ये लोग इसकी कीमत को लेकर बवाल मचा रहे है।
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यह सूचना जनता से छुपाना ही रफाल डील का सबसे बड़ा घोटाला है। और सभी आयातित हथियारों के मामले में यही घोटाला किया जाता है।
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इस समस्या से बचने का सिर्फ एक उपाय है कि भारत अपने हथियार खुद से बनाये — “100% मेड इन इण्डिया , मेड बाय इंडियन्स” पालिसी के तहत. अन्य कोई उपाय नहीं. भारत में स्वदेशी आधुनिक हथियारों का निर्माण संभव बनाने के लिए हमें वेल्थ टेक्स , एम आर सी एम एवं जूरी सिस्टम कानूनों की जरूरत है. यदि ये क़ानून गेजेट में आ जाते है तो भारत अपने हथियारो का उत्पादन स्वयं करने में सक्षम हो जाएगा.

यदि हम प्रधानमन्त्री को 1) वेल्थ टेक्स , 2) एम आर सी एम और 3) जूरी सिस्टम कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करने के लिए बाध्य कर दें तो भारत की सेना को इतना ताकतवर बनाया जा सकता है, कि हम अमेरिका के सामने टिक सके।

इन कानूनों को सिर्फ प्रधानमंत्री ही लागू कर सकते है। लेकिन जब तक प्रधानमंत्री पर रिकॉल नहीं आएगा , तब तक भारत का कोई भी प्रधानमन्त्री वेल्थ टेक्स, जूरी सिस्टम और एम आर सी एम कानूनों को गेजेट में छापने के लिए तैयार नहीं होगा। अत: सेना को मजबूत करने के लिए हमें राईट टू रिकॉल प्रधानमन्त्री का क़ानून चाहिए। राईट टू रिकॉल पीएम का क़ानून आने बाद भी यदि प्रधानमंत्री भारत की सेना को मजबूत बनाने के लिए वेल्थ टेक्स और एम आर सी एम कानूनों को गेजेट में नहीं छापता है तो नागरिक 5 वर्षों तक इंतजार किए बिना उसे नौकरी से निकालकर किसी ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना सकेंगे जो इन कानूनों को गेजेट में छापने की हिम्मत दिखाने को तैयार हो।

राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करने से भारत में यह क़ानून लागू हो जाएगा। इसका ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 30 2018 18:44:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अससुद्दीन औवेसी हिन्दू मतदाताओं को इकठ्ठा करके संघ=बीजेपी के नेताओ की और धकेलने के धंधे में है !!!
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राजनीती में वोट इकट्ठे करने के लिए सबसे कारगर निति ध्रुवीकरण है। भारत में धर्म के आधार पर यदि हिंदू और मुस्लिम का ध्रुवीकरण किया जाए तो यह सबसे बड़ा ध्रुवीकरण होगा। क्योंकि तब 80% हिन्दू एक ध्रुव की और और 15% दूसरे ध्रुव की और चले जाएंगे। संघ=बीजेपी के नेता जब भी हिन्दूओ को बचाने की बात करते है तो वे दरअसल ध्रुवीकरण कर रहे होते है। इससे वे हिन्दू वोटर बीजेपी=संघ की और चले जाते है जो भारत में इस्लाम के बढ़ते हुए गैर वाजिब प्रभाव से वाकिफ है। इस तरह हिन्दू मतदाताओं को अपनी और खींचा जाता है।
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किन्तु ध्रुवीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्रति ध्रुवीकरण भी करना होता है। प्रतिध्रुवीकरण से आशय है , हिन्दु मतदाताओं को संघ=बीजेपी द्वारा बनाये गए ध्रुव की और धकेलना। यह काम ओवैसी जैसे नेताओ को करने के लिए कहा जाता है। तो हिन्दुओ को संघ=बीजेपी की और धकेलने के लिए अकबरुद्दीन औवेसी जैसे नेता भीड़ इकट्ठी करके कैमरों के सामने कहते है कि -- लोग कहते है कि मोडी वजीरे आजम बन जाएगा , देखते है कैसा बनता है !! , 15 मिनिट के लिए पुलिस हटा दो तो हम ये कर देंगे वो कर देंगे आदि" !! ऐसा कहकर औवेसी जैसे लोग हिन्दूओ का खून गरम करते है , ताकि हिन्दू मतदाता आवेश में आकर हिन्दु ध्रुव की और जाएँ और संघ=बीजेपी को वोट करें।
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संघ=बीजेपी के नेता भी मुसलमानो को पाकिस्तान भेज देने , मुस्लिमो को सबक सिखाने आदि ऐसे बयान देते है जिससे मुस्लिम भारत में असुरक्षा महसूस करें और कांग्रेस से निराश मुसलमान संघ=बीजेपी से बचने के लिए औवेसी , मौलाना मुलायम , ममता बानो आदि के पाले में चले जाएँ।
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इस तरह औवेसी साम्प्रदायिक राजनीती का एक ध्रुव है जो संघ=बीजेपी के वोट बढ़ाता है , कर संघ=बीजेपी वह दूसरा ध्रुव है जो औवेसी के वोट बढ़ाता है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 30 2018 20:23:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आजादी की लड़ाई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का क्या योगदान रहा था ?
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आजादी की लड़ाई में संघ का सबसे विशिष्ट योगदान था — जो युवा मोहन गांधी , जवाहर लाल गाज़ी , अब्दुल गफ्फार खान जैसे नेताओं की चपेट में नहीं आ रहे है थे उन्हें अपनी और खींचना ताकि उन्हें हथियार विहीन रखकर महात्मा भगत सिंह एवं महात्मा चंद्रशेखर आजाद की राह पर चलने से रोका जा सके.

कांग्रेस के विभाजन के बाद भारत में गरम दल तेजी से युवाओ को अपनी और खींच रहा था और ज्यादा से ज्यादा युवा ब्रिटिश साम्राज्य से अपने तरीके से लड़ने की योजना बना रहे थे। अंग्रेज नहीं चाहते थे कि आजादी की लड़ाई लड़ने की मंशा रखने वाले युवा क्रन्तिकारी राह पर चले। इन युवाओ को राजनीति से दूर रखने के लिए अंग्रेजो को भारत में ऐसे नेताओ और संगठन की जरूरत थी जो युवाओ को बड़े पैमाने पर अपनी तरफ खींच कर उनकी ऊर्जा और समय बर्बाद कर सके। इसके लिए अंग्रेजो ने निम्नलिखित कदम उठाने शुरू किये :

उन्होंने मोहन गाँधी को समाचार पत्रों में बेतहाशा कवरेज देना शुरू किया म जिससे मोहन गाँधी तेजी से युवाओ को अपनी और खींचने लगे। मोहन ने देश की एक बहुत बड़ी आबादी को चरखा , भजन, अनशन आदि में उलझा लिया।

जो लोग मोहन की चपेट में नहीं आये उन्होंने सावरकर जी के निर्देशन में 1918 में हिन्दू महासभा की स्थापना की। हिन्दू महासभा का एजेंडा था -- १) हिन्दू राष्ट्र की स्थापना , २) हिन्दुओ का शस्त्रीकरण , और ३) चुनावो में भाग लेना। खिलाफत आंदोलन में जब मोहन ने तुर्की की लड़ाई को भारत से लड़ना शुरू किया तो कई हिन्दू कांग्रेस छोड़कर जाने लगे और हिन्दू मुस्लिम हिंसा होने लगी। इससे युवा तेजी से हिन्दू महासभा की और जाने लगे। हिन्दू महसभा हिन्दुओ का शस्त्रीकरण भी चाहती थी और चुनावो में भी भाग लेना चाहती थी। अंग्रेज देश में किसी भी ऐसे संगठन की ताकत नहीं बढ़ने देना चाहते थे , जो राजनीती में भाग ले , और शस्त्र की मांग करें।

अंग्रेजो ने खान अब्दुल गफ्फार खान को एक अराजनैतिक दल गठित करने को कहा ताकि जो मुस्लिम युवा मोहन की चपेट में नहीं आ रहे है उन्हें दूसरे प्रकार के सेवा कार्यो को उलझाया जा सके। खान अब्दुल गफ्फार खान ने 1924 में "खुदाई खिदमतगार" नाम से एक अराजनैतिक संगठन शुरू किया जो कम्बल बांटने , गरीबो को शिक्षा और सेवा देने जैसे चिल्लर काम करता था।

इसी तर्ज पर अंग्रेजो ने जवाहर लाल गाज़ी ( इन्हे नेहरू के नाम से भी जाना जाता है ) को भी आदेश दिए कि वे भी युवाओ का टाइम वेस्ट करने के लिए एक अराजनैतिक संगठन बनाये। जवाहर लाल ने 1925 में "सेवा दल" की स्थापना की।

हिन्दू महासभा में विभाजन डालने के लिए सिंधिया आदि देशी राजाओ ने 1925 में कांग्रेस के नेता श्री केशव बलिराम हेडगेवार को आरएसएस की स्थापना करने के लिए कहा और उन्हें संचालन के लिए फंडिंग दी। देशी राजाओ और मंदिरो का समर्थन मिलने के कारण आरएसएस तेजी से बढ़ने लगा। आरएसएस के नेता युवाओं को इकट्ठे करके उन्हें व्यायाम कराते , लाठी चलाना, ड्रम-शंख बजाना और भजन गाना आदि सिखाते थे। इस तरह आरएसएस का मुख्य काम ब्रिटिश साम्राज्य से टकराव लेने वाले युवाओ को अराजनैतिक गतिविधियों में उलझाकर उनका टाइम पास करना था , ताकि ब्रिटिश को सेफ पैसेज मिले।

जिस देश में अंग्रेजो की हुकूमत हो, उस देश में वही विचारधारा पनप सकती थी जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजो को लाभ पहुंचा रही हो। अत: गांधी, नेहरु, टैगोर, बिडला, बजाज, साराभाई और सिंधिया समेत वे सभी देशी राजा पनपे जो भीतर से अंग्रेजो को फायदा पहुंचा रहे थे। सावरकर, भगत, आजाद, लालाजी, सुखदेव, बटुकेश्वर, उधम सिंह और सुभाष बाबू जैसे सच्चे क्रांतिकारी महात्माओं को दमन का सामना करना पड़ा और अंग्रेजो ने इनमे से किसी को नही बख्शा।

संघ के की स्थापना 1925 में हुयी और 1947 तक संघ के स्वयंसेवको की संख्या लगभग 8 लाख हो चुकी थी। कोंग्रेस की तरह ही संघ को भी अंग्रेजो का मौन समर्थन हासिल था, क्योंकि दोनों ही संघठन कार्यकर्ताओं का टाइम फिजूल गतिविधियों में खपा कर अंग्रेजो को लाभ पहुंचा रहे थे। अत: कभी संघ को किसी प्रकार के दमन का सामना न करना पड़ा और संघ ने 1947 तक अंग्रेजो के खिलाफ कभी कोई आन्दोलन भी नही किया. कुल मिलाकर ब्रिटिश हुकूमत में संघ फूलता फलता रहा।

1857 की क्रान्ति के बाद अन्य किसी सशस्त्र विद्रोह की आशंका को ख़त्म करने के लिए अंग्रेजो ने आर्म्स एक्ट लागू कर के भारतीय नागरिको के सभी हथियार जब्त कर लिए और हथियार रखने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। अंग्रेज जानते थे की 40 करोड़ की आबादी को 70 हजार अंग्रेज सिर्फ तब तक ही काबू में रख सकते है जब तक कि अवाम हथियार विहीन हो। संघ और गांधी दोनों ही भारतीयों को हथियार विहीन बनाए रखने के अंग्रेजो के एजेंडे पर कार्य कर रहे थे l संघ ने अंग्रेजो को भारत से खदेड़ने के लिए मुहीम चलाने की जगह अंग्रेजो का गांधीनुमा सांकेतिक प्रतिरोध किया और लाखों कार्यकर्ताओं को कम्बल बांटने, गायों को चारा खिलाने, खून इकट्ठा करने, भोजन बांटने, राष्ट्र भक्ति के गीत गाने, ड्रम शंख बजाने, हलके व्यायाम करने, पथ-संचलन करने आदि में व्यस्त कर दिया, बदले में अंग्रेजो ने संघ को फलने फूलने दिया।

नीचे संघ द्वारा प्रकाशित हेडगेवार जी की जीवनी में से कुछ अंश दिए गए है , जिससे आप अंदाजा लगा सकते है कि किस तरह हेडगेवार जी युवाओ को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ने से रोक रहे है थे और उनका निःशस्त्रीकरण कर रहे थे :
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जब सुभाष बाबू ब्रिटिश के खिलाफ बाहरी आक्रमण द्वारा विद्रोह की योजना बना रहे थे तो बालाजी हुद्दार और डॉक्टर वी आर संजगिरी सुभाष बाबू का सन्देश लेकर डॉ हेडगेवार के पास पहुंचे। उन्होंने डॉ हेडगेवार को सुभाष बाबू का सन्देश दिया। सुभाष बाबू की योजना थी कि ब्रिटिश के खिलाफ एक देशव्यापी विद्रोह किया जाए तथा उन देशो का भी बाहरी आक्रमण में सहयोग लिया जाए जो ब्रिटिश के खिलाफ है। डॉ हेडगेवार ने जवाब दिया कि, — “यह बात सही है कि देश में विद्रोह होने के हालात है। पर सबसे बड़ा सवाल है कि, आपकी तैयारी कितनी है ? इस योजना पर अमल शुरू करने के लिए हमें कम से कम 50% तैयारी की जरुरत है। इस समय सुभाष बाबू की कमांड में कितने लोग है ? जब तक हम खुद तैयार नहीं होते तब तक अन्य देशो से सहायता लेने से कोई लाभ नहीं होगा'”।

अनुशीलन समिती के उग्र नेता त्रिलोकीनाथ चक्रवर्ती भी ब्रिटिश राज के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विद्रोह की तैयारी कर रहे थे। एक बार चक्रवर्ती खुद नागपुर आये और विद्रोह की योजना के बारे में डॉ हेडगेवार से मिले। लेकिन डॉ हेडगेवार का साफ़ तौर पर मानना था कि लोगो को जगाना और संगठन को मजबूत बनाये बिना सफलता सम्भव नहीं है और इसके लिए अभी और तैयारी करने की जरुरत थी।

(संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 76, Publisher : RSS, लिंक -- <http://goo.gl/LA1RSC>; )

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श्यामा प्रसाद मुकर्जी सीधे बंगाल से आये थे, और उनके पास बंगाल में हिन्दुओ की दुर्दशा से सम्बंधित बुरी खबरे थी। हिन्दुओ की सम्पत्ति को लूटा गया था और उनकी स्त्रियों के साथ मुस्लिम आतताई ज्यादती कर रहे थे। हिन्दू विधवाओं की दशा और भी बदतर थी। मुकर्जी की आवाज में गहरी पीड़ा और गुस्सा भरा हुआ था। उनका कहना था कि बंगाल में हिन्दुओ के एक सशस्त्र दस्ते (मार्शल ग्रुप) को संगठित करने की तत्काल जरुरत है, वरना बंगाल में हिन्दू नहीं बचेंगे। मुकर्जी यह कह रहे थे तो उनकी आवाज भर्रायी हुयी थी। यह सुनकर डॉ हेडगेवार गहराई से विचार करने लगे। तब उन्होंने कहा की — “हमें नहीं भूलना चाहिए कि वहाँ एक मुस्लिम सरकार है। वे हिन्दूओ के सशस्त्र दस्ते को वहां टिकने नहीं देंगे। और ब्रिटिश भी उनका ही समर्थन कर रहे है। उनके लिए हिंदुत्व का उत्कर्ष एक बुरे सपने की तरह है। तब वे तुम्हारी योजना को कैसे सफल होने देंगे” ? यह सुनकर मुकर्जी ने कहा कि, फिर आपके हिसाब से हिन्दुओ कौनसा रास्ता बचा है ?

तब डॉ हेडगेवार ने अपनी गहरी सोच को प्रकट करते हुए बड़े ही सधे हुए अंदाज में कहा कि, —“बात चाहे पंजाब की हो या बंगाल की, हिन्दुओ की दुर्दशा का कारण है कि वे संगठित नहीं है। जब तक हिन्दू संगठित नहीं होते तब तक उनकी दशा ऐसी ही रहेगी। हमें सभी हिन्दुओ को राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत करना होगा, हमें उन्हें एक दूसरे से प्यार करना सिखाना होगा ताकि वे एक दूसरे से संयुक्त होकर पूरे देश को उठ खड़े होने में मदद करे। सिर्फ और सिर्फ इसी तरीके से हिन्दू एक राष्ट्र के रूप में फिर से उठ खड़े हो सकेंगे। और संघ बिलकुल इसी नीति पर काम कर रहा है”

डॉ मुकर्जी हेडगेवार जी के इन अद्भुत विचारों से बेहद प्रभावित हुए और जल्दी ही बंगाल में उन्होंने शाखा लगानी शुरू कर दी !!!

(संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 78, Publisher : RSS, लिंक -- <http://goo.gl/LA1RSC>; )

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"सतारा के ख्यात न्यायविद दादा साहेब करिंदर की मृत्यु के बाद उनके पुत्र विट्ठलराव करिंदर ने डॉ हेडगेवार जी को 100 रूपये के साथ यह सन्देश भेजा था कि दादा साहेब की इच्छा थी कि इन रुपयों से एक शील्ड खरीदकर उस स्वयसेवक को इनाम के रूप में दी जाए जो तीरंदाजी में सबसे कुशल हो। डॉ साहेब ने जवाब भेजा कि, संघ में तीरंदाजी नहीं सिखायी जाती। हमने इसके प्रशिक्षण के बारे में विचार किया था लेकिन इसे लागू करना संभव नहीं हो सका। ऐसी स्थिति में आपकी राशि का इस्तेमाल अमुक मद में नहीं किया जा सकता। यह राशि यहां हमारे पास जमा रहेगी। आगे हम इसका उपयोग आपकी सलाह के अनुसार करेंगे'।

बाद में विट्ठल राव के निर्देशानुसार इस राशि का उपयोग सांगली में संघ कार्यालय के लिए भूमि खरीदने के लिए किया गया था"।

(संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 66, Publisher : RSS, लिंक -- <http://goo.gl/LA1RSC>; )

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और इस तरह महात्मा सुभाष चन्द्र बोस ने खुद को संघ की चपेट में आने से बचा लिया था।

जब डॉ केशव बलिराम हेडगेवार 1928 में कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सालाना अधिवेशन में भाग लेने कलकत्ता गए थे तो उन्होंने सुभाष चन्द्र बोस से मुलाक़ात की थी। सुभाष बाबू तब कलकत्ते के मेयर थे, और उन्होंने मुलाकात के लिए सिर्फ 10 मिनिट का समय दिया था। लेकिन जब इन दोनों हस्तियों ने बातचीत शुरू की तो जैसे घड़ी की सुइयाँ ठहर गयी। उनके बीच में घंटो तक विचारों का आदान प्रदान होता रहा। डॉक्टर साहेब के ठोस और बेबाक जवाबो ने सुभाष बाबू की सभी जिज्ञासाओं को शांत किया और उन्हें गहराई तक प्रभावित किया। और अंत में डॉक्टर साहेब ने सुभाष बाबू से संघ से जुड़ने और इसके लिए सक्रीय रूप से काम करने का आग्रह किया।

सुभाष बाबू ने जवाब दिया कि, डॉक्टर साहेब आपने जो भी कहा उससे मैं पूर्णत सहमत हूँ। इसमें कोई संदेह नहीं कि सिर्फ आप ही है जिसके पास भारत को स्वतंत्र कराने के लिए सबसे प्रभावशाली तरीका है। लेकिन मैं इस कार्य को राजनैतिक रूप से करने में पूरी तरह से जुटा हुआ हूँ, अत: अन्य किसी वैकल्पिक दिशा में कार्य करने की स्थिति में नहीं हूँ। इसीलिए मेहरबानी करके आप मुझे तो माफ़ ही कीजिये"।

सन्दर्भ - Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 46, Publisher : RSS

<http://www.rss.org/…/334_12_29_2>;...

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राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस जानते थे कि संघ युवाओं को गैर राजनैतिक, सामाजिक सेवा कार्यों में खपा कर ब्रिटिश राज के खिलाफ उठ रहे क्रांतिकारियों के आंदोलन को तोड़ रहा है, और इससे सिर्फ अंग्रेजो को ही लाभ होगा। इसीलिए उन्होंने बड़ी सफाई से हेडगेवार जी को टरका दिया। लेकिन मधुकर दत्तात्रेय देवरस -जो कि आगे चलकर 1974 में संघ के तीसरे सर संघसंचालक बने - और अन्य लाखों युवा इतने परिपक्व नहीं थे कि वे इस बात को समझ पाते। उल्लेखनीय है कि देवरस महात्मा भगत सिंह से प्रेरित होकर अंग्रेजो पर इसी तरह का हमला करने की योजना बना रहे थे। लेकिन एन वक्त पर हेडगेवार जी ने उन्हें और उनके साथियो को समझा बुझा कर भगत सिंह जी के रास्ते को छोड़ने और संघ के 'महान और ऊँचे आदर्शो' के लिए काम करने के लिए राजी कर लिया था।
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जब हेडगेवार सुभाष बाबू से मिले तो वे परिपक्व हो चुके थे। यदि वे नवयुवक होते तो सम्भावना थी कि हेडगेवार उन्हें उषा काल में आकर व्यायाम करने, लाठी चलाना सीखने, कम्बल बांटने, ध्वज वंदना करने, पथ संचलन निकालने और नारे लगाने जैसे संघ की 'महान गतिविधियों' में लगा देते। मुझे नहीं पता तब आजाद हिन्द फ़ौज खड़ी करने जैसा 'साधारण' कार्य कौन करता। लेकिन इतना तय है कि तब शायद भारत को आजादी के लिए और भी लम्बा इन्तजार करना पड़ता।
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"जब हम कॉलेज में पढ़ रहे थे तो भगत सिंह जी के क्रांतिकारी विचारों से बहुत प्रभावित थे। हमारे दिमाग में अक्सर बार बार यह ख्याल आता कि हमे भी भगत सिंह जी की तरह या ऐसा ही कुछ बहादुरी का काम करना चाहिए। चूंकि संघ में राजनीति और क्रांतिकारी विचारों पर विमर्श नहीं किया जाता था इसीलिए हम और अन्य हमारे जैसे युवा संघ के कार्यकलापों में कम रुचि लेते थे। जब भगत सिंह जी और उनके साथियों को फांसी की सजा दी गयी तो हमारा दिल साहस से भर उठा और हमने भी कुछ इसी तरह की कार्यवाही करने की शपथ ली। हम इतने उत्तेजित थे कि हमने घर छोड़ने का भी फैसला कर लिया था। लेकिन 'डॉक्टर साहेब' ( हेडगेवार जी ) को सूचित किये बिना ऐसा कुछ भी करना दृष्टता होती इसीलिए हमने अपनी योजना के बारे में 'डॉक्टर साहेब' को बताने का निर्णय किया। इस सम्बन्ध में जब हमने उन्हें सूचित किया तो 'डॉक्टर साहेब' ने मुझे और मेरे साथियों को बुलाया।

हम साहस और उत्साह से भरे हुए 'डॉक्टर साहेब' से मिलने गए और उन्हें अपनी योजना के बारे में बताया। हमारी योजना सुनकर 'डॉक्टर साहेब' ने हमें समझाया कि यह बहुत ही बेवकूफी भरा फैसला है, और ऐसा करके तुम संघ के ऊँचे और महान लक्ष्य की उपेक्षा कर रहे हो। डॉक्टर साहेब' हमें 7 दिनों तक संघ के महान लक्ष्यों के बारे समझाते रहे। हमारी सभा रात को भी 10 बजे से 3 बजे तक चलती थी, जिसमें 'डॉक्टर साहेब' बराबर हमें इस बारे में उपदेश करते थे। 'डॉक्टर साहेब' द्वारा दिए गए "ब्रिलिएन्ट आइडियाज़" और उनके चमत्कारिक नेतृत्व ने जीवन के बारे में मेरी और हमारे अन्य साथियों की विचारधारा को पूरी तरह से बदलकर रख दिया था। बस उसी दिन से मैंने अपने दिमाग से इस तरह के "फितूर" को निकाल फेंका और मैं संघ के लक्ष्यों के लिए पूरी तरह समर्पित हो गया"।

---- बालासाहेब देवरस, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीसरे सरसंघ संचालक, (1973 - 1994)

सन्दर्भ -- पृष्ठ संख्या : 137, <https://books.google.co.in/books…>;,

मूल उद्वरण -- स्मृति कण : परम पूज्य डॉ हेडगेवार जी के जीवन की विभिन्न घटनाओं का संकलन, सम्पादक : एच वी पिंगले, प्रकाशक : आरएसएस प्रकाशक विभाग, संस्करण : 1962.

तो इस तरह संघ ने 1947 तक भारत के 8 लाख युवाओं को 'बचा' लिया था। नियति ने महात्मा भगत सिंह, महात्मा चन्द्र शेखर आजाद, महात्मा उधम सिंह जी आदि क्रांतिकारियों को हेडगेवार जी से मिलने का अवसर नहीं दिया। वरना वे इन्हें भी बचा लेते !!

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भारतीय त्योहारों की प्रथा में मनाये जाने वाले उत्सव दशहरे पर संघ भी शस्त्रों की सांकेतिक पूजा किया करता था। एक दफा ऐसा हुआ कि पंजाब का एक कारोबारी बहुत ही अच्छी तरह से डिजाइन किये हुए खंजर और तलवारे बेचने के लिए वर्धा आया। एक स्थानीय स्वयंसेवक ने सोचा कि हमें पूजा में कम से कम एक तो असली खंजर तो रखना ही चाहिए। उसने खंजर का दाम पूछा और खरीदने की अनुमति लेने के लिए बड़े ही उत्साह में संघ संचालक के घर पहुंचा। दैवयोग से डॉ हेडगेवार भी वही पर बैठे थे और उनकी उपस्थिति में ही इस विषय पर विचार विमर्श शुरू हो गया। डॉक्टर साहेब ने प्रश्न उठाया - 'जबकि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में बेहतर हथियार और युद्ध सामग्री थी आखिर क्यों फिर भी हमारा देश गुलाम हो गया' ? डॉक्टर साहेब ने बोलना जारी रखा और खुद ही जवाब दिया कि, 'आप इस परिस्थिति का किसी भी कोण से आकलन करे, आपको जवाब एक ही मिलेगा कि, हमें हर व्यक्ति के दिल को मातृभूमि के प्रति समर्पण से ओतप्रोत करने की जरूरत है। जब देश इस भावना से सुरभित हो जाएगा तो हमें हथियारों की कोई आवश्यकता नहीं रहेगी और बिना एक पल भी गवाएं हम विदेशी सत्ता से आजाद हो जाएंगे'। उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि, “जब पांडव अज्ञातवास में थे तो उन्होंने अपने शस्त्रों को शमी वृक्ष में छुपा दिया था। इसीलिए हमें हथियारों की चिंता नहीं करनी चाहिए। हमें एकाग्रचित्त होकर अपने आंदोलन को देश भर में फैलाने और अपने संगठन को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए"
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संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 46, Publisher : RSS, लिंक -- <http://goo.gl/LA1RSC>;
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बताइये !!!
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परम पूज्य हेडगेवार जी ने स्वयंसेवक को यह नहीं बताया कि जंग में निर्णायक बढ़त सिर्फ हथियारों से ही मिलती है। जिस पक्ष के पास जितने बेहतर हथियार होंगे जीतने की सम्भावना भी उतनी ही बढ़ जायेगी। 1857 में सैनिक विद्रोह इसीलिए असफल रहा क्योंकि भारतीय सैनिकों के पास हथियार खत्म हो गए थे। और तब भारत को बन्दुके और कारतूस बनाने नहीं आते थे। मुग़ल भी भारत पर इसीलिए कब्ज़ा कर पाये क्योंकि उनके पास बेहतर तोपखाना था। सिर्फ 80 हजार अंग्रेज 40 करोड़ भारतीयों को इसीलिए गुलाम बनाकर रख पाये क्योंकि जहां अंग्र्जो के पास बन्दुके थी पर भारतीयों के पास तलवारे आदि सामान्य अस्त्र भी नहीं थे।
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1857 की क्रान्ति के बाद अंग्रेज घबरा गए थे और अगले सशस्त्र विद्रोह की सम्भावना को ख़त्म करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने 1860 में आर्म्स एक्ट बनाया और सभी भारतीयों के हथियार खींच लिए। लोग चोरी चुपके फिर से हथियार न जुटा ले इसके लिए वायसराय का काम महादुरात्मा गांधी ने सम्भाल लिया था। वे पूरे देश में घूम घूम कर लोगो को यह समझा रहे थे की 'चाकू, तलवार, बन्दुके आदि रखना अच्छी बात नहीं है'। महादुरात्मा गांधी का मानना था कि हथियार सिर्फ अंग्रेजो को ही रखने चाहिए भारतीयों को नहीं। और अंग्रेजो को तो अवश्य ही रखने चाहिए।
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हेडगेवार भी युवाओं को हथियार न रखने का यह सन्देश अपने तरीके से दे रहे थे। जो कोई भी हेडगेवार जी के पास ब्रिटिश साम्राज्य पर हमला करने की रोजना लेकर आता था वे उसे संघ के महान उद्देश्य को पूरा करने में लगा देते थे !! और यह उद्देश्य था — संगठन को मजबूत बनाना , हिन्दुओ को संगठित करना , हिन्दुओ को एक करना , उनमे एकता लाना , हिन्दुओ को जगाना , उनमे राष्ट्रीय भावना डालना आदि आदि . आप नोट करेंगे कि आज भी आप संघ के सामने कोई भी समस्या रखे वे उसका कारण आज भी यही बताते है कि हिन्दू सोया हुआ है इसीलिए यह समस्या है, और इसका इलाज यह है कि हिन्दुओ को जगा कर उन्हें एक किया जाए !!! इस प्रकार भारतीयों को हथियार विहीन बनाये रखने की नीति पर वायसराय के अलावा महादुरात्मा गांधी और हेडगेवार जी भी काम कर रहे थे। बस उनके तरीके अलग थे . जो नागरिक इन उपदेशों की लपेट में आ गए वे हथियार विहीन रहे और विभाजन के दौरान 20 लाख हिन्दुओ को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। लेकिन सिक्खो और मुस्लिम धर्मावलम्बियों ने 'जागने जगाने और संघठित' होने जैसी बकवास पर ध्यान नहीं देकर खुद को हथियारबंद करने को तवज्जो दी और इसीलिए 1947 के दंगो के दौरान उन्हें अपेक्षाकृत कम जन हानि हुयी।
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ज्ञातव्य है कि सिक्खो ने 'कृपाण दा मोर्चा' आन्दोलन करके अंग्रेजो पर दबाव बनाकर तलवार रखने का अधिकार ले लिया था। बाद में सभी वर्गों के लोगो को इसकी अनुमति दे दी गयी। धार्मिक रीति होने के कारण जो सिक्ख 'सोये' हुए थे मतलब जागे हुए नहीं थे वे भी अपने साथ हथियार रखते थे जबकि उल जलूल सिद्धांतो के चक्कर में आकर 'जागे हुए' हिन्दू भी हथियार विहीन थे या लाठियां लेकर घूम रहे थे।
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इसी कारण से राष्ट्रपिता अहिंसा मूर्ती महात्मा सुभाष चन्द्र बोस ने हेडगेवार जी का संघ में कार्य करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया था। वे बात तो टेढ़े तरीके से समझने के आदि नहीं थे। वे इस सीधी बात को समझते थे कि अंग्रेजो के पास हथियार है और भारतीय हथियार विहीन है, इसीलिए इन्हे खदड़ने के लिए हमें अंग्रेजो से ज्यादा सशस्त्र ताकत जुटानी होगी। महात्मा भगत सिंह जी, महात्मा चन्द्रशेखर आजाद, उधम सिंह ही आदि भी इसी बात में मानते थे। लेकिन संघ का शीर्ष नेतृत्व इन्हे न जाने क्यों भटके हुए नौजवान और अंध राष्ट्रवादी कहता था और युवाओं को इन क्रांतिकारियों का अनुसरण न करने के लिए प्रेरित करता था।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 30 2018 20:54:57 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

संघ पर लिखे गए पोस्ट्स की सूची , एल्बम ; संघ=बीजेपी , गंगाधर=शक्तिमान
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32) सबूत - गंगधार एवं शक्तिमान अलग अलग व्यक्ति है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1631817486936481>;
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31) मोहन भागवत यह दावा कर रहे है कि महात्मा राजगुरु संघ के स्वयंसेवक थे !
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1625112974273599>;
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30) क्या हेडगेवार गए थे भगत सिंह जी से मिलने !
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1620629824721914>;
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29) भारत में निवास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है" - विभाजनकारी बयान -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1589711204480443>;
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28) केशव बलिराम हेडगेवार भी गांधी ही थे -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1580215522096678>;
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27) 90 के दशक में तोगड़िया , मोदी साहेब और केशु भाई एक ही टीम में थे -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1506938429424388>;
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26) भाग - 2 ; संघ का शीर्ष नेतृत्व हमेशा से हिन्दू हितो के प्रति उदासीन रहा है।
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1408735749244657>;
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25) भाग - 1 ; संघ का शीर्ष नेतृत्व हमेशा से हिन्दू हितो के प्रति उदासीन रहा है।
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1408734849244747>;
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24) गंगाधर को शक्तिमान की जरूरत क्यों है ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1395694743882091>;
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23) केरल में संघ के मंत्री ने कहा है कि -- बीफ का उपभोग जारी रहेगा !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1382009538583945>;
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22) यह अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ़ स्टेट द्वारा मोदी साहेब को प्रशिक्षण -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1370596546391911>;
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21) खट्टर -- "यदि महिलाओ को आजादी चाहिए तो वे बाजार में नंगी क्यों नहीं घूमती ?"
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1358667790918120>;
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20) सबूत - मोदी साहेब के सभी फैसले संघ के कार्यकर्ताओ द्वारा अनुमोदित होते है !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1351164321668467>;
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19) संघ और महादुरात्मा गांधी :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/955161647935405>;
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18) बजरंग दल का सैन्य प्रशिक्षण शिविर - संघ का ध्रुवीकरण के लिए नया ड्रामा :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/951765971608306>;
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17) सुभाष बाबू, मुकर्जी, त्रिलोकीनाथ, महादुरात्मा गांधी और संघ :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/942764945841742>;
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16) महादुरात्मा गांधी की तरह हेडगेवार जी ने भी नागरिकों को हथियार न रखने के लिए प्रेरित किया था :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/940705099381060>;
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15) महात्मा सुभाष चन्द्र बोस ने खुद को संघ की चपेट में आने से बचा लिया था :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/939996096118627>;
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14) इस तरह डॉक्टर हेडगेवार ने देवरस को 'पथभ्र्ष्ट' होने से बचा लिया था :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/939487806169456>;
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13) मजदूर संघ ने आरएसएस की तर्ज पर R टर्न ले लिया और एफडीआई का समर्थन करने लगा !
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/868740426577528>;
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12) संघ का शीर्ष नेतृत्व कार्यकर्ताओ को बहस के अंधे कुँए में छलांग लगाने को प्रेरित कर रहा है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/832639016854336>;
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11) हिन्दुओ का रिवर्स जिहाद :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/810299615754943>;
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10) संघ के शीर्ष नेता छवि बनाये रखने में सबसे सयाने है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/809222982529273>;
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09) मोदी भगत मीट टू संघ अंध सेवक :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/809259479192290>;
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08) सोनिया भक्तो और संघ के अंध सेवको में अंतर :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/809236685861236>;
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07) पेड मिडिया इस प्रकार की खबरे दिखा रहा है कि बीजेपी के मंत्री संघ को हिसाब दे रहे है !!!
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/807741116010793>;
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06) कैसे संघ मिशनरीज़ को भारत में ईसाइयत फैलाने में सहयोग करता है ? :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/762062970578608>;
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05) संघ की दोगली नीति - विचारधारा बनाम क़ानून धारा :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/761391373979101>;
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04) संघ की हथियार विहीन वैभव की आधारशिला !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/764569910327914>;
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03) भारतीय सेना और संघ के राहत एवं बचाव कार्य !! :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/745312515586987>;
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02) मोदी साहेब और संघ से कुछ हिंदूवादी सवाल :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/680275402090699>;
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01) संघ और उसके आनुषंगिक संगठनो को समर्पित :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/601361219982118>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Dec 30 2018 21:09:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जीएसटी पर पोस्ट्स की सूची ; एल्बम - कर एवं वित्तीय प्रणाली
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(47) GST e-way बिल पेनल्टी की राशि है -- सिर्फ 1.32 करोड़ !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1779768488808046>;
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(46) बजट को नजरंदाज करें व जीएसटी के दुष्प्रभावो पर ध्यान दें -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1522765244508373>;
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(45) GST के बाद बांग्लादेश से होने वाले कपडे के आयात में 56% की वृद्धि हुयी है !
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1492298997554998>;
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(44) FRDI का हिंदी अनुवाद भी नदारद है !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1492314724220092>;
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(43) फाइनेंस बिल ; वीडियो -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1569953983122832>;
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(42) जीएसटी की दरें और बदलाव अस्थायी यानी चुनावी है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1440978629353702>;
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(41) 2016 के मुकाबले 2017 में बिजली की खपत में सिर्फ 4.6% की वृद्धि हुयी :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1425432557574976>;
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(40) जीएसटी में 5 गंभीर समस्याएं है, जो कि वेल्थ टेक्स में नहीं है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1419123688205863>;
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(39) अहमदाबाद में नए फ्लेट्स की कीमतों में 20% की गिरावट दर्ज की गयी है
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1409061399212092>;
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(38) एक और तमाशा -- पर्रीकर का कहना है कि, वे E-Way बिल का विरोध करेंगे
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1409039409214291>;
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(37) जीएसटी में संभावित चकमा ; रिटर्न मासिक की जगह त्रेमासिक किये जा सकते है
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1409010669217165>;
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(36) ये कदम उठाकर 90 दिनों में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है।
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1407082732743292>;
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(35) अमिताभ बच्चन कहते है -- हम सभी को जीएसटी चुकाना चाहिए" ( NRI )
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1365808403537392>;
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(34) संघ ने मोदी साहेब से कहा है कि वे जीएसटी का हिंदी उपलब्ध न करवाए -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1345118285606404>;
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(33) क्या मॉरीशस / सिंगापुर की कम्पनियो को 8% कम जीएसटी चुकाना होगा ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1326701840781382>;
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(32) मोदी साहेब ने Gst का हिंदी अनुवाद जारी न करने के निर्देश क्यों दिए ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1323703337747899>;
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(31) GST में -- MTP, DTSTP और RTP समस्याओ का विवरण एवं समाधान :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1321304907987742>;
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(30) जीएसटी का अधिकृत सरकारी हिन्दी संस्करण उपलब्ध नहीं है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1320682418049991>;
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(29) जीएसटी पर राहुल चिमनभाई मेहता का विज्ञापन -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1312075395577360>;
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(28) इंजीनियर्स ऑटोमेशन की वजह से नौकरियां नहीं गवां रहे है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1278385055613061>;
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(27) "हमें टेक्स का चक्कर समझ नहीं आता। जहां बोलोगे वहां ठप्पा लगा देंगे" - विधायक
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1261084240676476>;
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(26) मोदी साहेब ने जीएसटी की ऑडिट से कैग को वंचित कर दिया है
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1218750421576525>;
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(25) कागजी विकास दर !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1217587181692849>;
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(24) काला धन : नोट बंदी बनाम राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित समाधान :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1113385002113068>;
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(23) जमीनों के लेनदेन में काले धन की रोकथाम हेतु प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1105010919617143>;
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(22) संपत्ति कर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट updeted :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1104992096285692>;
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(21) काले धन का निवेश किस मद में अधिक है ? सोने में या नकदी में ? अनुपात 4:1 का है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1085007461617489>;
.
(20) क्या 500-1000 के नोटों को रद्द करने से जमीनों की कीमतों में कमी आएगी ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1084432781674957>;
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(19) कम्पनी A लगातार आगे बढ़ रही थी :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1016608251790744>;
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(18) करो का संग्रहण तथा उनका नागरिकों में बंटवारा :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/950478895070347>;
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(17) अंग्रेजो ने देश छोड़ने से पहले अपने वफादारों को अकूत जमीने हस्तांतरित की :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/943765892408314>;
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(16) कैसे 1% उत्पाद शुल्क निर्यात व्यापार को सेज धारकों के हाथो में पहुँचा देगा :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/932772183507685>;
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(15) कैसे मॉरीशस रुट ने भारत के ईमानदार उद्योगपतियों को बेईमान बनने पर बाध्य किया :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/932690156849221>;
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(14) मॉरीशस रुट का गढ्ढा :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/931110173673886>;
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(13) सोने पर एक्साइज ड्यूटी क्यों लगाईं गयी ?
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/920022498115987>;
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(12) चिंटू - मास्टर जी, 70 सेकंड का यह वीडियो देखिये :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/929831673801736>;
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(11) जो ज्वेलरी के कारोबार में है, कृपया इसे स्पष्ट करें :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/932694800182090>;
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(10) सोने पर ड्यूटी लगाने का समर्थन करने वालो से सवाल :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/913158875469016>;
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(09) ज्यादातर सर्राफा संघ अपना विरोध प्रदर्शन अरुण जेटली के खिलाफ कर रहे है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/902462289872008>;
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(08) जेटली एक्साइज इंस्पेकटर्स को जारी निर्देशों के बारे में झूठ बोल रहे है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/902455156539388>;
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(07) भारत का निर्यात लगातार गिरने से हमे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/884825854968985>;
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(06) क्या आप इस आर्थिक कानूनी ड्राफ्ट से सहमत है ?
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/875694515882119>;
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(05) मॉरिशस रुट और सेज (SEZ) को दी जा रही कर राहतो की समाप्ति के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/811674415617463>;
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(04) जीएसटी आने से छोटी इकाइया बाजार से बाहर हो जायेगी और बड़ी कम्पनियो को फायदा होगा :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/808437179274520>;
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(03) सबसे ज्यादा शोषण जमीनो की ऊँची कीमतों के कारण हो रहा है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/807769786007926>;
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(02) भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/756061251178780>;
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(01) संपत्ति कर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/745231492261756>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Dec 31 2018 16:40:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि -
1) जीएसटी की दर घटाकर 5% भी कर दी जाए, और
2) जीएसटी के दायरे में आने वाले कारोबार की सीमा की छूट को 20 लाख से बढ़ाकर 60 लाख तक कर दिया जाए ,
तो भी कुछ ही वर्षो में लाखों छोटे और मझौले कारोबारी बाजार से बाहर हो जायेंगे !!
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जीएसटी से होने वाले नुकसान का इसकी दर ज्यादा या कम होने से कोई लेना देना नहीं है। जीएसटी को डिजाइन ही इस तरह से किया गया है कि यह छोटे और मझौले कारोबारियों को नुकसान एवं बड़े कारोबारी को गैर वाजिब फायदा पहुंचाता है। चाहे दर कितनी ही कम क्यों न हो !!
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१) यह "रिग्रेसिव टेक्स" है - रिग्रेसिव टेक्स का ढांचा इस तरह होता है कि गरीब तबके को सबसे ज्यादा और अमीर वर्ग को सबसे कम टेक्स चुकाना होता है। रिग्रेसिव टेक्स गरीब व्यक्ति को और भी गरीब एवं अमीर व्यक्ति को और भी अमीर बनाता है।
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२) इसमें "मिसिंग ट्रेडर प्रॉब्लम" है - मान लीजिये कि लोभ चंद मांगी लाल से 100,000 रू का माल खरीदता है और जीएसटी की दर 20% है तो लोभ चंद मांगी लाल को 1,20,000 रू चुकाएगा। अब यदि मांगी लाल जीएसटी के ये 20,000 रू सरकार को जमा नहीं कराता और फरार हो जाता है तो जीएसटी अधिकारी मांगी लाल के पीछे नहीं जायेंगे। जीएसटी क़ानून के अनुसार तब लोभ चंद को सरकार के खाते में जीएसटी के 20,000 रू फिर से जमा कराने होंगे !!! तो आगे से लोभ चंद और उसके जैसे कई कारोबारी छोटे कारोबारियों से माल लेना बंद कर देंगे और सिर्फ बड़े कारोबारियों से ही माल लेंगे। इस तरह छोटे कारोबारी बाजार से बाहर हो जायेंगे।
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३) इसमें "डबल टेक्सेशन ऑन स्मॉल ट्रेडर" प्रॉब्लम है - यदि कोई अपंजीकृत ट्रेडर जीएसटी में पंजीकृत कारोबारी को माल बेचता है तो जीएसटी में पंजीकृत कारोबारी को इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा। मतलब जीएसटी में पंजीकृत कारोबारी पर डबल जीएसटी आ जाएगा और उसका माल महंगा हो जाएगा। इस वजह से जीएसटी में पंजीकृत ट्रेडर ऐसे कारोबारी से माल नहीं लेंगे, जो जीएसटी में पंजीकृत नहीं है। इससे जो ट्रेडर जीएसटी में पंजीकृत नहीं है उसका धंधा सिकुड़ने लगेगा और वे बाजार से बाहर हो जाएंगे। अब यदि छोटा ट्रेडर जीएसटी में रजिस्टर्ड हो जाता है तो वह "मिसिंग ट्रेडर प्रॉबल्म" का शिकार हो जाएगा।
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४) यह छोटे कारोबारी की लागत बढ़ाता है - बड़ी कम्पनियो के पास अलग से एकाउंट्स डिपार्टमेंट होता है अत: उन्हें बिल, रिटर्न वगैरह भरने में किसी अतिरिक्त लागत का सामना नहीं करना पडेगा। किन्तु छोटे कारोबारी धंधा भी करते है और टेक्स रिटर्न आदि भी खुद ही भरते है। जीएसटी में प्रति माह रिटर्न फ़ाइल करने होंगे। अब वे खुद इसे करेंगे तो उनके कार्य घंटे कम हो जाएंगे और इसके अलावा कई कारोबारी इन सब पचड़ो को समझते नहीं है। वे इसमें उलझ कर अपनी कार्य क्षमता गँवा देंगे। यदि वे इसके लिए स्टाफ रखते है तो उनकी अतिरिक्त लागत बढ़ जायगी और उन्हें नुकसान होगा। यदि रिटर्न फ़ाइल करने की अवधि को मासिक से बदल कर त्रे मासिक कर दिया जाता है तो मिसिंग ट्रेडर प्रॉब्लम तीन गुना तक बढ़ जायेगी !!
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५) e-way बिल - e-way बिल सिस्टम बहुत ही अव्यवहारिक है, किन्तु यदि इसे लागू नहीं किया गया तो जीएसटी काम ही नहीं कर पायेगा और एक समानांतर आपूर्ति श्रृंखला खड़ी हो जायेगी। और यदि इसे लागू किया गया तो छोटे और मझोले कारोबारियों को बड़े पैमाने पर आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा और उनके माल की लागत बढ़ जायेगी !!
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कुल मिलाकर जीएसटी में दरो को लेकर कोई समस्या ही नहीं है। दर 10% रखो या 20% , इससे ऊपर दी गयी समस्याओ का समाधान नही होता। अंततोगत्वा टेक्स तो अंतिम उपभोक्ता यानी कि पब्लिक को ही चुकाना होता है, तो दर के कम ज्यादा होने से कारोबारी को कोई विशेष नुक्सान नहीं है। किन्तु पेड मीडिया, पेड अर्थशास्त्रियों एवं राजनैतिक पार्टियों ने जीएसटी दरो को ही मुख्य समस्या के रूप में उछाला है और ऊपर दी गयी बुनियादी एवं खतरनाक समस्याओ को परिदृश्य से गायब कर दिया है। और अब पूरा देश और कारोबारी जीएसटी की दरो को लेकर बहस कर रहे है !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Dec 31 2018 16:58:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सभी रिकालिस्ट्स चुनाव लड़ने का प्रयास करें। यदि आप चुनाव नहीं लड़ेंगे तो जूरी सिस्टम , वेल्थ टेक्स और एम आर सी एम कानूनों की मांग आगे नहीं बढ़ेगी , यही पर घूमती रहेगी।
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मेरा मानना है कि रिकालिस्ट्स का सबसे पहला लक्ष्य 545 सीटो पर चुनाव लड़ने के लिए कार्यकर्ताओ को तैयार करने का होना चाहिए। जब तक राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम कानूनों की मांग को लेकर कार्यकर्ता चुनावों में नहीं उतरेंगे तब तक इन कानूनों की मांग आगे बढ़ने वाली नहीं है। और यदि कार्यकर्ता 100-50 सीटो पर चुनाव लड़ते है तब भी कोई विशेष बदलाव नहीं आएगा। जब तक कार्यकर्ता कम से कम 500 सीटो पर चुनाव नहीं लड़ते तब तक मतदाता राईट टू रिकॉल पार्टी को एक विकल्प के रूप से स्वीकार करना शुरू नहीं करेगा। यदि राईट टू रिकॉल, जूरी सिस्टम के मुद्दों पर 500 सीटो पर उम्मीदवार चुनाव लड़ते है तो मतदाताओ में यह उम्मीद पैदा होना शुरू हो जायेगी कि भारत में ये क़ानून लागू हो सकते है।
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तो जो भी कार्यकर्ता इन कानूनों की मांग को आगे बढाने के प्रति गंभीर है उन्हें आगामी लोकसभा चुनावों में चुनाव अवश्य लड़ना चाहिए। यदि वे चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है तो वे अपने संसदीय क्षेत्र से किसी अन्य कार्यकर्ता को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करें।
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