Pawan Jury BhilwaraRj
अससुद्दीन औवेसी हिन्दू मतदाताओं को इकठ्ठा करके संघ=बीजेपी के नेताओ की और धकेलने के धंधे में है !!!
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राजनीती में वोट इकट्ठे करने के लिए सबसे कारगर निति ध्रुवीकरण है। भारत में धर्म के आधार पर यदि हिंदू और मुस्लिम का ध्रुवीकरण किया जाए तो यह सबसे बड़ा ध्रुवीकरण होगा। क्योंकि तब 80% हिन्दू एक ध्रुव की और और 15% दूसरे ध्रुव की और चले जाएंगे। संघ=बीजेपी के नेता जब भी हिन्दूओ को बचाने की बात करते है तो वे दरअसल ध्रुवीकरण कर रहे होते है। इससे वे हिन्दू वोटर बीजेपी=संघ की और चले जाते है जो भारत में इस्लाम के बढ़ते हुए गैर वाजिब प्रभाव से वाकिफ है। इस तरह हिन्दू मतदाताओं को अपनी और खींचा जाता है।
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किन्तु ध्रुवीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्रति ध्रुवीकरण भी करना होता है। प्रतिध्रुवीकरण से आशय है , हिन्दु मतदाताओं को संघ=बीजेपी द्वारा बनाये गए ध्रुव की और धकेलना। यह काम ओवैसी जैसे नेताओ को करने के लिए कहा जाता है। तो हिन्दुओ को संघ=बीजेपी की और धकेलने के लिए अकबरुद्दीन औवेसी जैसे नेता भीड़ इकट्ठी करके कैमरों के सामने कहते है कि -- लोग कहते है कि मोडी वजीरे आजम बन जाएगा , देखते है कैसा बनता है !! , 15 मिनिट के लिए पुलिस हटा दो तो हम ये कर देंगे वो कर देंगे आदि" !! ऐसा कहकर औवेसी जैसे लोग हिन्दूओ का खून गरम करते है , ताकि हिन्दू मतदाता आवेश में आकर हिन्दु ध्रुव की और जाएँ और संघ=बीजेपी को वोट करें।
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संघ=बीजेपी के नेता भी मुसलमानो को पाकिस्तान भेज देने , मुस्लिमो को सबक सिखाने आदि ऐसे बयान देते है जिससे मुस्लिम भारत में असुरक्षा महसूस करें और कांग्रेस से निराश मुसलमान संघ=बीजेपी से बचने के लिए औवेसी , मौलाना मुलायम , ममता बानो आदि के पाले में चले जाएँ।
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इस तरह औवेसी साम्प्रदायिक राजनीती का एक ध्रुव है जो संघ=बीजेपी के वोट बढ़ाता है , कर संघ=बीजेपी वह दूसरा ध्रुव है जो औवेसी के वोट बढ़ाता है।
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