Posts for 2024-04







Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Apr 15 2024 07:38:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Aditya Prakash Sharma:

मेरी लोकसभा क्षेत्र में वोट वापसी पासबुक के बारे में जनता को बताते हुए

#जयपुरग्रामीण

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 16 2024 12:07:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

केंचुआ=केन्द्रीय चुनाव आयोग द्वारा काले कांच के मुद्दे को हाशियें पर धकेलने की कोशिश :
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चुनाव आयोग ने मेरे वीडियो का चित्र पोस्ट करते हुए अपने ट्विटर हेंडल पर लिखा है कि – इस व्यक्ति का दावा फेक है, क्योंकि डेमो में इस्तेमाल की गयी मशीन चुनाव आयोग की नहीं है !!
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चुनाव आयोग के ट्विट का लिंक - <https://x.com/ECISVEEP/status/1779066701587661262?t=a301H0pQ9p_qVoVHgc--lQ&s=09>;
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मेरी प्रतिक्रिया : हमने कभी भी नहीं कहा कि यह चुनाव आयोग की मशीन है, और न ही हमने इस मशीन का डिजाइन इस तरह से बनाया है कि दर्शक को ऐसा भ्रम हो कि यह चुनाव आयोग की मशीन है। हमने अब तक लाखों लोगो को यह डेमो दिया है, किन्तु कभी भी किसी को यह नहीं लगा कि यह चुनाव आयोग की मशीन है, और न ही कभी किसी ने हमसे यह प्रश्न किया कि - क्या यह मशीन चुनाव आयोग की है ?
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दरअसल हमारा मुद्दा Evm का काला कांच है। चुनाव आयोग की मशीन में काला कांच है, और हम इस मशीन द्वारा डेमो देकर सिर्फ यही तथ्य दर्शाते है कि, यदि किसी प्रकार की मशीन में (जो कि वोटर को पर्ची दिखाने के लिए इस्तेमाल होती है) यदि कांच काला है, तो कागज़ के वोटो में हेराफेरी की जा सकती है।
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और चूंकि केंचुआ द्वारा इस्तेमाल की जा रही मशीनों का कांच भी काला है, अत: इन मशीनों में भी काले कांच का इस्तेमाल करके कागज के वोटो में हेराफेरी की जा सकती है। और यदि कागज़ के वोटो में हेराफेरी हो जाती है, तो इलेक्ट्रोनिक वोटो का मिलान कागज़ के वोटो से हो जाएगा, और यह चोरी कभी भी पकड़ी नहीं जा सकेगी। इस तरह काला कांच कागज के वोटो की हेराफेरी को छिपाने का काम कर सकता है।
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पर चूंकि केंचुआ काले कांच के मूल मुद्दे पर जवाब देने से बचना चाहता है, अत: उन्होंने "असली मशीन-नकली मशीन" के ऐसे मुद्रदे को उठाया जो कि मुद्दा ही नहीं है।
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नोट : साथ ही हमने कभी भी यह दावा नहीं किया है कि Evm में इस तरीके से वोटो की हेराफेरी की जा रही है। हम सिर्फ Evm के लूप होल को देश के मतदाताओं एवं चुनाव आयोग के सामने रख रहे है। और डेमो की माध्यम से यह बता रहे है कि, काले कांच का इस्तेमाल करके कागज़ के वोटो में हेराफेरी की जा सकती है।
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हमारी मांग :
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(1) हमें 1 Evm अवलोकन के लिए दी जाए : चुनाव आयोग को हमने 40 हजार का DD भेजा है, और उनसे एक Evm देने का आग्रह किया है। किन्तु केंचुआ से अपनी मशीन देने से इंकार किया। यदि केंचुआ हमें अपनी मशीन दे देता है तो हम उनकी मशीन में भी इस तरीके से कागज़ के वोट बदल कर दिखा सकते है।
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(2) पोलिंग बूथ में बेलेट पेपर भी रखें : एक मतदाता के रूप में मैं चुनाव आयोग को यह पत्र कई बार लिख चूका हूँ कि पोलिंग बूथ में Evm के साथ बेलेट पेपर भी रखें। अब एक प्रत्याशी के रूप में भी मैं चुनाव आयोग को इस आशय का पत्र लिखूंगा कि पोलिंग बूथ में बेलेट पेपर भी रखें जाएं।
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अन्य राजनैतिक पार्टियों के उम्मीदवारों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों से भी आग्रह है कि वे अपने RO को इस आशय का पत्र दें कि पोलिंग बूथ में बेलेट पेपर भी रखें जाएं।
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पवन कुमार शर्मा
सांसद प्रत्याशी : भीलवाड़ा लोकसभा
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 30 2024 01:41:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रेस वार्ता : बनारस प्रेस क्लब, पढ़ारकर भवन
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विषय : कैसे VVPAT के काले काँच का इस्तेमाल करके काग़ज़ के वोट भी चोरी किए जा सकते है का डिमोन्स्ट्रेशन
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समय : 1 Pm
दिवस : मंगलवार , 30 April 2024
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आयोजक : Evm हटाओ सेना एवं सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया
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#EvmBlackGlass
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 30 2024 01:43:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Mahesh Kumar Jamshedpur LsCandidate:

जमशेदपुर लोकसभा सीट से राईट टू रिकॉल पार्टी की और से नामांकन दाखिल
#VoteVapsiPassbook
#JuryCourt

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 30 2024 12:46:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चिकन टिक्का मसाला लोगो को बीमार करने के लिए बनाया गया था मारने के लिए नहीं, ताकि लंबे समय तक दवाइयाँ खाने वाले व्यक्तियों की संख्या बढ़े।
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चिकन टिक्का खाकर जो लोग मर रहे है, वो चिकन टिक्का का साइड इफ़ेक्ट है, मेन इफ़ेक्ट नहीं। मेन इफ़ेक्ट को साइड में करने के लिए साइड इफ़ेक्ट को उछाला जा रहा है ।
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न्यू वर्ल्ड ऑर्डर थ्योरी के प्रायोजकों ने बीमार करने के असली इफ़ेक्ट से ध्यान हटाने के लिए इसे डी-पापुलेशन (आबादी कम करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर होने वाली मृत्यु) से जोड़ा। और अब वे इसे अधिकृत जामा पहना रहे है।
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आदमी के मर जाने से धंधा नहीं बढ़ता। धंधा मरीजो की संख्या बढ़ने से बढ़ता है। ताकि व्यक्ति सालों साल तक दवाइयाँ खाता रहे।
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कुछ 1000 व्यक्तियों ने यदि चिकन टिक्का खाया है तो 20 लोगो को BP, शुगर, ब्रेन स्ट्रोक, लैंगिक पहचान असमंजस (Zender Identity Confusion), किडनी फेलियर, थकान, स्टेमिना में कमी, कैंसर, प्रतिरोधक क्षमता में कमी, बाँझपन, नपुंसकता, पेरेलाईसिस जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है, और एवज़ में उन्हें शेष जीवन में चिकित्सा की मद में निरंतर एवं मोटा पैसा चुकाते रहना होगा। औचक मृत्यु तो इन 1000 में से से 2 की होगी !!
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तो इसे मूल रूप से बीमार करने के लिए बनाया गया है, मारने के लिए नहीं। किंतु कुछ लोगो का शरीर इसे झेल नहीं पा रहा है, और वे अचानक से मर भी रहे है।
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