Posts for 2019-06

Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jun 01 2019 12:02:10 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने वसूली करना शुरू कर दिया है । हफ़्ते भर भी नही रुके

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jun 01 2019 20:52:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इस एल्बम में वोट वापसी पासबुक प्राप्त करने के लिए प्रस्तावित क़ानूनो के ड्राफ्ट एवं विवरण रखे गए है.

(1) रिडो : थानों-अदालतों-स्कूलों-अस्पतालों को सुधारने के लिए एक प्रस्तावित क़ानून है
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REDO - Right to Expel & Punish District level Officers
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इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब नागरिक यह बता सकेंगे कि वे मौजूदा एस पी , जिला शिक्षा अधिकारी, जिला चिकित्सा अधिकारी एवं जिला जज की नौकरी चालू रखना चाहते है, या उन्हें निकाल कर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है।
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साथ ही पुलिस-शिक्षा-चिकित्सा विभाग एवं जिला न्यायालय से सम्बंधित मामलो एवं शिकायतों की सुनवाई करने तथा दंड देने की शक्ति जजो के पास नही, बल्कि आम नागरिको की ज्यूरी के पास रहेगी। इस कानून को संसद या विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे अधिसूचना के रूप में राज्य सरकार के गेजेट में सीधे छाप सकते है। इसे प्रधानमंत्री द्वारा भी केंद्र सरकार के गेजेट में छापा जा सकता है।

#Redo105, #VoteWapsiPassBook , #P20180436105
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(2) रिगो - नागरिको द्वारा जिला एवं केन्द्रीय अधिकारीयों को निकालने एवं दण्डित करने का प्रस्तावित क़ानून है
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इस क़ानून के गेजेट में छपने के बाद प्रत्येक नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। जिला स्तर पर एसपी , जिला जज , शिक्षा अधिकारी , चिकित्सा अधिकारी एवं केन्द्रीय स्तर पर DD चेयरमेन , RBI गवर्नर , CBI डायरेक्टर एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन इस पासबुक के दायरे में होंगे। तब नागरिक यदि इनमे से किसी अधिकारी के काम काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे नौकरी से निकाल कर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो वे पटवारी कार्यालय में जाकर अपनी हाँ दर्ज करवा सकेंगे। यदि नागरिको का बहुमत किसी अधिकारी को नौकरी से निकालने के लिए हाँ दर्ज कर देता है, तो अमुक अधिकारी को नौकरी से निकाल दिया जाएगा। बाद में इस वोट वापसी पासबुक में सरपंच, सभापति आदि जन प्रतिनिधियों के पन्ने भी जोड़े जा सकेंगे।
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इसके अलावा उपरोक्त अधिकरियों एवं इनके स्टाफ से सम्बंधित शिकायतों की सुनवाई करने तथा दंड देने की शक्ति जजो के पास नही, बल्कि आम नागरिको की जूरी के पास रहेगी। इस कानून को संसद से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री अपने हस्ताक्षर करके इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
#Rego106, #VoteWapsiPassBook , #P20180436106,

इस एल्बम में इन क़ानूनो से सम्बंधित उन कदमो का विवरण रखा जाएगा जिन्हें उठाकर आप इसे गेजेट में छपवाने में सहयोग कर सकते है.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jun 01 2019 21:48:00 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jun 03 2019 12:54:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सभी कार्यकर्ताओ के लिए सूचना :

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

निकट भविष्य में कोई राष्ट्रीय बैठक (नेशनल मीटिंग) नहीं हैं |
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राईट टू रिकॉल पार्टी में, कोई भी कार्यकर्ता /उम्मीदवार /सदस्य/समर्थक किसी से भी कहीं भी मिलने /कॉल करने /ब्लाक करने के लिए स्वतंत्र हैं | संपर्क पर किसी प्रकार की पाबन्दी नहीं है | लेकिन मैं किसी भी मीटिंग को अटेंड नहीं कर रहा हूँ | मैं फेसबुक/ व्हाट्सएप्प या कभी-कभी फ़ोन पर मिलना ज्यादा पसंद करता हूँ | लेकिन मीटिंग पर कभी नहीं |
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और राष्ट्रीय मीटिंग एक बकवास है जिसमे मैं कभी नहीं पड़ना चाहूँगा |
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बहुत से उम्मीदवार या कार्यकर्ता अंतिम वर्ष के छात्र हैं, नौकरीपेशा हैं, परिवार आदि हैं | तो मेरे विचार ये व्यर्थ है कि उनसे एक स्थान, चाहे अहमदाबाद या दिल्ली या भीलवाडा पर कुछ मात्र 3 घंटे या 10 घंटे की मीटिंग पर आने को कहा जाए | उन्हें यात्रा में 1 से 2 दिन खर्च होंगे और फिर 1 से 2 दिन अहमदाबाद में | यह लगभग 5 से 6 दिन के व्यापार/वेतन का नुक्सान है और वो भी किसके लिए ?
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मीटिंग उन दिनों में कारगार थी जब फ़ोन कॉल 2रु. प्रति मिनट था और दिल्ली से अहमदाबाद का ट्रेन किराया केवल 200 रु. था | आज, वीडियो कॉल असल में फ्री है और ट्रेन किराया खर्च अलग से, समय एक समस्या है |
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मेरे पास टनों से चुनाव आयोग से सम्बंधित कागजीकाम करने को पड़ा है | साथ में अलग से, मेरे पास सॉफ्टवेर जॉब /कॉन्ट्रैक्ट, बहुत सारा निजी कार्य हैं | और बहुत से रिकालिस्ट्स की भी जॉब या व्यापार हैं |
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तो मैंने किसी नेशनल मीट के लिए नहीं बुलाया है | जो लोग मीटिंग करना चाहते हैं वो कहीं भी मिल सकते हैं | मैं केवल फेसबुक/व्हाट्सएप्प और कुछ फ़ोन कॉल्स तक ही सीमित रहूँगा |
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Aside : LOCAL meetings are welcome, particularly for newcomers. National or State level meetings are imo useless. Because too many people have to spend HOURS AND HOURS in travelling, spend money and bear income loss. And so remote meetings should be done by phone calls.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jun 04 2019 22:27:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रिगो - सरकारी अधिकारीयों को प्रजा के अधीन करने के लिए क़ानून
( REGO ; proposal for Right to Expel & punish Govt Officers )
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यह क़ानून स्कूल-अस्पताल-थानों-अदालतों-बैंक-मीडिया को सुधारने के लिए लिखा गया है। इस प्रस्तावित कानून का सार : यदि प्रधानमंत्री इस क़ानून को गेजेट में छाप देते है तो प्रत्येक नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। जिला स्तर पर एसपी , जिला जज , शिक्षा अधिकारी , चिकित्सा अधिकारी एवं केन्द्रीय स्तर पर DD चेयरमेन , RBI गवर्नर , CBI डायरेक्टर एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन इस पासबुक के दायरे में होंगे। तब नागरिक यदि इनमे से किसी अधिकारी के काम काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे नौकरी से निकाल कर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो वे पटवारी कार्यालय में जाकर अपनी हाँ दर्ज करवा सकेंगे। यदि नागरिको का बहुमत किसी अधिकारी को नौकरी से निकालने के लिए हाँ दर्ज कर देता है, तो अमुक अधिकारी को नौकरी से निकाल दिया जाएगा। बाद में इस वोट वापसी पासबुक में सरपंच, सभापति आदि जन प्रतिनिधियों के पन्ने भी जोड़े जा सकेंगे।
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इसके अलावा उपरोक्त अधिकरियों एवं इनके स्टाफ से सम्बंधित शिकायतों की सुनवाई करने तथा दंड देने की शक्ति जजो के पास नही, बल्कि आम नागरिको की जूरी के पास रहेगी। इस कानून को संसद से पास करने की जरूरत नहीं है। इसे प्रधानमंत्री द्वारा सीधे गेजेट में छापा जा सकता है।
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इस क़ानून का हेश टेग : #VoteWapsiPassBook , #Rego106 , #P20180436106,
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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[ टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। ]
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर आपको यानी प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी।
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(02) तब यदि आप जिला या केंद्र स्तर के किसी अधिकारी के काम काज से संतुष्ट नहीं है और उसे नौकरी से निकालकर किसी दुसरे व्यक्ति को नौकरी पर रखना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर अपनी हाँ दर्ज करवा सकेंगे। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दर्ज करवा सकेंगे। ये 9 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे - जिला स्तर पर पुलिस प्रमुख, जिला जज, शिक्षा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जूरी प्रशासक, एवं केन्द्रीय स्तर पर दूरदर्शन चेयरमेन, रिजर्व बैंक गवर्नर, सीबीआई डायरेक्टर एवं सेंसर बोर्ड का चेयरमेन।
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(03) आप अपनी स्वीकृति किसी भी दिन रद्द कर सकते है एवं किसी भी अन्य प्रत्याशी को किसी भी दिन स्वीकृत कर सकते है। जब आप किसी प्रत्याशी के लिए हाँ दर्ज करेंगे या अपनी स्वीकृति रद्द करेंगे तो पटवारी इसकी एंट्री आपकी वोट वापसी पासबुक में करेगा।
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(04) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य-सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश
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(05) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस राजपत्र अधिसूचना के लिए अभिभावक माना जायेगा। अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी चालू रखने या निकाल दिए जाने के लिए हाँ दर्ज कर सकेंगे।
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(06) पुलिस प्रमुख, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षा अधिकारी, जिला जज एवं जूरी प्रशासक के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(6.1) पुलिस प्रमुख के लिए : यदि 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(6.2) चिकित्सा अधिकारी के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए आवश्यक जैसे MBBS, BAMS या इसके समकक्ष डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष पूर्ण हो चुके हो, तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(6.3) जिला जज के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो एवं उसे वकालत की शिक्षा पूर्ण किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला जज पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(6.4) शिक्षा अधिकारी एवं जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला न्यायवादी ( जूरी प्रशासक ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(6.5) DD चेयरमेन, RBI गवर्नर, CBI डायरेक्टर एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक DD चेयरमेन , RBI गवर्नर , CBI डायरेक्टर या सेंसर बोर्ड चेयरमेन के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(07) धारा 6 में दी गयी योग्यता धारण वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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(08) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(8.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(8.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(8.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
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(8.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। धारा (6.5) में वर्णित केन्द्रीय स्तर के अधिकारियो की स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(09) पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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(9.1) पुलिस प्रमुख एवं शिक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है। इस बारे में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक स्वीकृति प्राप्त कर लेता है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(9.2) जिला चिकित्सा अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में "हाँ" दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(9.3) जिला जज के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति की विनती के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(9.4) जिला शिक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(9.5) DD चेयरमेन , RBI गवर्नर , CBI डायरेक्टर , एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन के लिए : यदि किसी उम्मीदवार को देश की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) की 35% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री मौजूदा अधिकारी को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति सम्बंधित पद पर कर सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा।
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(10) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त मतदान की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :
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(10.1) प्रधानमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि जिले के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(10.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक मत प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(11) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे । किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त मतदान की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(12) विशिष्ट परिस्थितियों में राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री किसी जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया एवं उसके स्टाफ पर ज्यूरी ट्रायल को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपने विवेकाधिकार से उस जिले में नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी, जिला जज एवं जिला चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(13) मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृति से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का, और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(14) पुलिस, शिक्षा, न्यायालय एवं चिकित्सा विभाग के मामलो का नागरिको की जूरी द्वारा निपटान
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[ टिप्पणी : प्रधानमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। प्रधानमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 15.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(14.1) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महा जूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महा जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(14.2). यदि पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, चिकित्सा अधिकारी या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(14.3) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(14.4) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु मृत्यु दंड में 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(14.5) यदि DD चेयरमेन , RBI गवर्नर , CBI डायरेक्टर, सेंसर बोर्ड चेयरमेन या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत दिल्ली राज्य के महाजूरी मंडल में कर सकते है। यदि मामला किसी अन्य राज्य या जिले का है और महा जूरी मंडल उचित समझता है तो महा जूरी मंडल अमुक मामले को सम्बंधित जिले में स्थानांतरित करने का फैसला ले सकते है।
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(15) जनता की आवाज
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा 15.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है। ]

----------ड्राफ्ट का समापन---------
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jun 06 2019 08:21:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सोनिया-मोदी-केजरीवाल जी के अंधभगतो को अपने नेता सतह के ऊपर से कुछ ऐसे दिखायी देते है !!

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

about somoke = soga/namo/arke and about coraap = congress/rss/aap workers
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jun 08 2019 06:57:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

बिते कल दिनांक 5/6/2019 बुधवार मैं अशोक कुमार जैन भीलवाड़ा राजस्थान से प्रधानमंत्री जी से (रेडो) कानून को गैजट में छापने के लिये नागरिक होने के नाते मांग करी |
जब तक यह कानून नहीं छपता तब तक हर महिने प्रधानमंत्री जी को यह पत्र भेजता रहूंगा, मेरे परिचित मित्रों से भी यह पत्र भेजने का आग्रह करूंगा |
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jun 08 2019 10:12:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जिन्होंने प्रचार के लिए नोट दिए थे वे वसूल रहे है !! और जिन्होंने इस प्रचार की चपेट में आकर वोट दिए थे वो अगले 5 वर्ष तक टापते रहेंगे !! क्योंकि अब वो अपना वोट वापिस नही ले सकते !!

Mahesh Kumar Jamshedpur LsCandidate:

<http://sangharshsamvad.org/tribals-are-protesting-for-bailadila-mine-to-hand-over-to-adani-group-in-chhattisgarh/>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jun 11 2019 21:51:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सभी नागरिको के लिए जरुरी सूचना : यह सबसे महत्तव्पूर्ण एल्बम है, और भारत के प्रत्येक नागरिक की सिटिजन ड्यूटी के बारे में है। प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि यदि उसे सरकार से कोई शिकायत है, या उसके पास कोई सुझाव है या वह कोई मांग कर रहा है, तो सबसे पहले उसे पीएम को इस बारे में चिट्ठी में भेजनी चाहिए, और उसका विधिवत रिकॉर्ड भी रखना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति राजनैतिक पोस्ट लिखता है, किन्तु पीएम को चिट्ठी नहीं भेजता, तो मैं ऐसे नागरिक को गंभीरता से नहीं लेता। क्योंकि ऐसे व्यक्ति की रुचि सुधारो में नहीं होती।
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रिकॉर्ड रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को एक रजिस्टर बनाना चाहिए और इस रजिस्टर में उन चिट्ठियों की फोटो कॉपी चिपकानी चाहिए जो चिट्ठियां उसने भेजी है। मैं जो चिट्ठियां Pm / Cm को भेजता हूँ, उनका रिकॉर्ड एक रजिस्टर में रखता हूँ। अमुक रजिस्टर मेरी सिटीजन ड्यूटी की हार्ड ड्राइव है, और उसके पृष्ठों की सॉफ्ट कॉपी इस एल्बम में स्कैन करके अपडेट की जायेगी। ताकि यदि कभी यह एल्बम डिलीट हो जाए तो इसे हार्ड कॉपी से फिर से अपडेट किया जा सके।
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इस एल्बम में मेरे रजिस्टर के सभी पृष्ठों के स्कैन रखे जायेंगे, तथा उसका टेक्स्ट भी यहाँ रखा जाएगा। इस तरह आप मेरे नागरिक कर्तव्य का रजिस्टर इस एल्बम में हूबहू पढ़ सकते है।
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इस अल्बम में यह भी बताया जाएगा कि इस तरह का रजिस्टर बनाने से किस तरह के लाभ होंगे और रजिस्टर की विषय वस्तु क्या होनी चाहिए। यदि आप भी इस तरह का रजिस्टर बनाते है तो यह एल्बम आपको रजिस्टर के स्ट्रक्चर को समझने में मदद करेगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jun 16 2019 11:05:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rameshwar Jat Jury BhilwaraRj:

आज भगवानपुरा ( मांडल, भीलवाड़ा ) मे प्रकाश जी चौहान को रेडो कानून की प्रधानमंत्री जी से मांग करने की व रजिस्टर बना कर रिकॉर्ड रखने की जानकारी दी ।

प्रकाश जी को रेडो कानून के 5 पेम्पलेट दे कर हर महीने डाक द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय भेजने को कहा ।

प्रकाश जी ने भी रेडो कानून को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया और कहा कि हम भारतीयों को यह कानून मिल जाता है तो हमारी 80 % समस्याओं का समाधान हो जाएगा ।
उन्होंने व उनके दोस्तों द्वारा यह कानून डाक द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज कर मांग करने का आस्वाशन दिया ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Jun 17 2019 07:56:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

And how come it will manage by Devotee.
Solution : NHDMT = National Hindu Dewalay Management Trust

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jun 18 2019 21:19:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

" वोट वापसी पासबुक " के लिये पत्र टू प्रधानमंत्री जी के लिये सावधानीयाँ व महत्वपूर्ण बात ~
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पार्ट -1 विडियो के लिए ~
<https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2368183193224501&id=100000985302210>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jun 19 2019 14:12:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मैं भारत में मौजूद विभिन्न समस्याओ के समाधान के लिए जो चिट्ठियां Pm एवं Cm को भेजता हूँ, उसका रिकॉर्ड एक रजिस्टर में रखता हूँ। मेरे पास ऐसे 2 रजिस्टर है, जो कि लगभग एक दूसरे की फोटो कॉपी है। एक रजिस्टर घर पर रहता है , ताकि सुरक्षित रहे। एवं एक रजिस्टर मैं अन्य नागरिको को पढ़ने के लिए देता हूँ एवं अपने साथ रखता हूँ। दोनों रजिस्टर के छाया चित्र :
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मेरे विचार में प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि आवश्यक निर्देश चिट्ठी द्वारा Pm एवं Cm k भेजे एवं इसका रिकॉर्ड अपने पास रखने के लिए एक नोटबुक या रजिस्टर रखें.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jun 19 2019 14:21:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

My Letters to Pm रजिस्टर का प्रथम एवं द्वितीय पेज. पेज संख्या (0) एवं पेज संख्या (00)
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पेज संख्या (0) पर कुछ नहीं लिखा गया है.
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पेज संख्या (00) का टेक्स्ट निचे दिया गया है : ( यह विवरण मैंने बाद में जोड़े है इसीलिए इसे पेज संख्या (00) नाम दिया गया है. अन्य नागरिक यदि यह विवरण लिखते है तो इंडेक्स - विषय सूची के बाद में भी रख सकते है )
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शीर्षक : विचारक बनाम कामगार
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Title : Thinker Vs Doers
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नागरिक दो प्रकार के होते है : पहले वे होते है जो अपना नागरिक कर्तव्य पूरा करते है, एवं दुसरे जो नहीं करते है।
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(1) इस श्रेणी में वे नागरिक है जो अपने आस पास के लोगो में व्यवस्था के खिलाफ शिकायत करते है , सुझाव देते है, मांग करते है, किन्तु अपनी शिकायत / सुझाव / मांगे Pm-Cm को कभी नहीं भेजते।
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(2) इस श्रेणी में वो लोग है, जी अपने नागरिक कर्तव्य को पूरा करते है। यदि इनके पास व्यवस्था में कोई सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कोई सुझाव, मांग आदि होती है तो ये प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर उन्हें सूचित करते है।
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मेरा मानना है कि जिस देश में श्रेणी 2 के नागरिको की संख्या बढती है, उस देश में सकारात्मक बदलाव आते है। श्रेणी 1 के नागरिक देश का दायित्व है, जबकि श्रेणी 2 के नागरिक देश की संपत्ति।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jun 19 2019 14:29:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

My Letters to Pm का रिकॉर्ड रखने के लिए बनाए गए रजिस्टर की विषय सूची का टेक्स्ट एवं पेज का चित्र ( पेज नंबर 00A )
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विषय सूची : Index
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01. परिचय – इस रजिस्टर के बारे में
(Introduction – about this notebook )
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02. मेरे राजनैतिक विश्वास
( My political Beliefs )
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03. PM एवं CM को मेरे द्वारा भेजी गयी चिट्ठियों की सूची
( Letters sent to Pm-Cm – index )
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04. Pm एवं Cm को भेजे गए पत्रों की फोटो कॉपी
( Photo copies of letters sent to Pm-Cm )
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05. मेरे शहर के नामी कार्यकर्ता जिन्होंने Pm एवं Cm को चिट्ठियां भेजी / नहीं भेजी है
( Well-known activists of my city who has sent / NOT sent letters to Pm-Cm )
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06. मेरे शहर के परिचित नागरिक जिन्होंने PM एवं CM को चिट्ठियां भेजी / नहीं भेजी है
( My known Citizens of city who has sent / NOT sent letters to Pm )
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07. मेरे शहर से बाहर निवास करने वाले परिचित नागरिक जिन्होंने PM एवं CM को चिट्ठियां भेजी / नहीं भेजी है
( My known Citizens not belongs to my city who has sent / NOT sent letters to Pm-Cm )
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( इंडेक्स : पेज नंबर - 000B )
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08. पार्टी / उम्मीदवार जिन्हें मैंने वोट किया है
( Party / candidates I voted for )
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09. चुनावों के लिए मेरे द्वारा लिया गया / दिया गया चंदा
(Election donations I sent / received )
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10. चुनाव जो मैंने लडे है
( Election I contested )
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11. समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों का ब्यौरा जिनमे मैंने अंशदान किया
(News Paper advertisements I have given )
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( पेज नंबर 00C )
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[ मतदाता के लिए सूचना :

(a) रजिस्टर में शुरुआती पेज पर विषय सूची एवं अध्यायों का पेज नंबर लिखना अनिवार्य है, ताकि पाठक पेज नंबर एवं अध्याय देखकर चयनित विवरण पढ़ सके
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(b) सबसे पहले रजिस्टर पर सभी पृष्ठों पर पेज नंबर डाले उसके बाद इंडेक्स बनाए. पेज नंबर पृष्ठ के ऊपर लिखें निचे नहीं.
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(c) यथा संभव विषय सूची को हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनो भाषाओ में लिखे. यदि आप क्षेत्रीय भाषा इस्तेमाल करते है तो क्षेत्रीय भाषा एवं अंग्रेजी में लिखे. दुसरे शब्दों में विषय सूची अंग्रेजी में होना अनिवार्य है, ताकि दक्षिण भारत के नागरिक भी इसे पढ़ सके.
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(d) रजिस्टर के मुख्य पृष्ठ पर भी अनिवार्य रूप से अंग्रेजी भाषा में Letters to Pm लिखे.
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(e) मैंने इस रजिस्टर में 11 अध्यायों की सूची रखी है. इसमें से शुरूआती 7 अध्याय अनिवार्य प्रकृति है. अत: ये 7 अध्याय आपके रजिस्टर में अवश्य होने चाहिए. इनका क्रम आप ऊपर निचे कर सकते है, और इन 7 अध्यायों के बाद आप अपनी रुचि से अतिरिक्त अध्याय जोड़ सकते है.
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(f) विषय सूची बनाने के लिए दोनों और दो हाशिये बनाए, दाएं वाले हाशिये में अध्याय के पेज नंबर लिखे.
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आप जब रजिस्टर बनाए तो ऊपर दिए गए (a) से (f) तक के बिंदु भी रजिस्टर में लिखे, ताकि रजिस्टर का पाठक इन्हें पढ़ सके. ये निर्देश विषय सूची के अगले पृष्ठ पर लिखे जा सकते है. रजिस्टर में ये निर्देश लिखना अनिवार्य है. ]
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jun 19 2019 21:22:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आवश्यक सूचना : प्रस्तावित रिगो क़ानून को अपडेट किया गया है। Pm को भेजे जाने वाली बुकलेट के पीडीऍफ़ में जो बदलाव किये गए है उनकी सूचना निचे दी गयी है :
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(1) पत्र के शीर्षक में यह पंक्ति जोड़ी गयी है ---

"प्रधानमंत्री जी, कृपया इस खुले पत्र को सरकारी वेबसाईट पर सार्वजनिक करें, तथा निचे दिए पते पर प्राप्ति की सूचना देवें"
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(2) भेजने वाले की सूचना के खंड में एक अतिरिक्त कॉलम यह जोड़ा गया है ---

"इस क़ानून के बारे में आप कैसे सूचित हुए ( रेफेरेंस )................

इसमें मतदाता चाहे तो उस स्त्रोत को इंगित करेगा जिससे उसे इस क़ानून के बारे में जानकारी हुयी। यह स्त्रोत उस कार्यकर्ता का नाम हो सकता है जिसने मतदाता को इस क़ानून के बारे में सूचित किया। या इंटरनेट हो सकता है, फेसबुक / व्हाट्स एप या कुछ और भी हो सकता है।
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(3) चूंकि यह क़ानून सिर्फ Pm ही गेजेट में छाप सकते है Cm नहीं इसीलिए प्रधानमंत्री कार्यालय का पूरा पता जोड़ दिया गया है।
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(4) क़ानून के सार में यह पंक्ति प्रथम पंक्ति के रूप में जोड़ी गयी है -

"यह क़ानून स्कूल-अस्पताल-थानों-अदालतों-बैंक एवं मीडिया को सुधारने के लिए लिखा गया है।"
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(5) धारा 15 में एक यह अतिरिक्त टिपण्णी जोड़ी गयी है -

[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के लिए प्रयास किये है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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यह धारा कार्यकर्ताओ को BBB = Betrayal By Beneficiaries से रक्षा करने में सहयोग करती है।
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(6) FAQ के प्रश्न 6 में जूरी सिस्टम एवं जज सिस्टम के तुलनात्मक अध्ययन की तालिका जोड़ी गयी है।
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(7) अंतिम पेज में "यह आन्दोलन अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी प्रेरित है" जोड़ा गया है।
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(8) अंतिम पेज में अंतिम पैरेग्राफ के रूप में "नागरिक के तौर पर आपका कर्तव्य" जोड़ा गया है।
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(9) अंतिम पृष्ठ पर Author's note जोड़ा गया है जो इस क़ानून एवं चिट्ठी में किसी व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति के किसी भी प्रकार के बदलाव किये जाने पर बंधन लगाता है, किन्तु बिना बदलाव किये कोई भी व्यक्ति लेखको की अनुमति बिना इस क़ानून / बुकलेट को print करवा सकता है, किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफोर्म या किसी भी तरह के प्लेटफोर्म पर इन्हें सर्कुलेट कर सकता है या वितरित कर सकता है।
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4 पेज की बुकलेट के अपडेटेड पीडीऍफ़ का लिंक -- www.facebook.com/groups/VoteWapsiPassbook/844364495962751/
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2 पेज की चिट्ठी के अपडेटेड पीडीऍफ़ का लिंक -- www.facebook.com/groups/VoteWapsiPassbook/844367629295771/
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[ अब से Pm को रिगो ही भेजा जाएगा, रिडो नही भेजा जाएगा। रिडो सिर्फ Cm को भेजा जाएगा। ]
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jun 20 2019 21:16:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

My Letters to Pm रजिस्टर : अध्याय 1 , पेज नंबर 001

परिचय : इस रजिस्टर के बारे में
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1.1. इस रजिस्टर में मेरे द्वारा Pm-Cm को भेजी गयी चिट्ठियों का विवरण है
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मेरा नाम - पवन कुमार शर्मा , वोटर नंबर - XIU0740167
मेरा पता - s-261 प्रताप नगर, भीलवाड़ा ( राजस्थान )
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फेसबुक एल्बम - इस रजिस्टर के सभी पृष्ठों को मेरी फेसबुक प्रोफाइल पर स्कैन करके my letters to Pm नामक एल्बम में रखा जाता है। यदि आप फेसबुक इस्तेमाल करते है तो यह रजिस्टर इस एल्बम में पढ़ सकते है। एल्बम का लिंक -
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1.2. इस रजिस्टर की जरूरत क्यों है ?
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यह रजिस्टर मेरे नागरिक कर्तव्य के बारे में है। 5 वर्ष में एक बार वोट करने से नागरिक की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है। प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक निर्देश अपने प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी को भेजे। देश में व्याप्त विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए मैं Pm-Cm को जो भी निर्देश चिट्ठी द्वारा भेजता हूँ, उसका रिकॉर्ड इस रजिस्टर में रखा जाता है। इस रजिस्टर में भेजी गयी इन चिट्ठियों की फोटो कॉपी रखी जाती है।
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यदि आप देश की विभिन्न समस्याओं के बारे में फेसबुक / व्हाट्स एप / ट्विटर पर लिख रहे है किन्तु यह बात Pm-Cm को नहीं कह रहे है तो मेरे विचार में आपकी गतिविधियों का तब तक कोई मूल्य नहीं है, जब तक आप अपनी बात Pm-Cm को नहीं कहते।
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[ फुटनोट : पाठक के लिए सूचना – यदि आप भारतीय नागरिक है एवं अपना नागरिक कर्तव्य पूरा करते है तो इस तरह का एक रजिस्टर बनाएं एवं इस अध्याय में अपने शब्दों में लिखे कि यह रजिस्टर आपने क्यों बनाया है. यह अध्याय बनाना अनिवार्य है.
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पेज नंबर 002
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आपको अपने आस पास ऐसे कई कार्यकर्ता मिलेंगे जो विभिन्न राजनैतिक-आर्थिक-धार्मिक मसलो पर कई प्रकार की गतिविधियाँ करते है - वे सोशल मीडिया पर दिन में 10 पोस्ट करते है, धरने प्रदर्शन करते है, पुतले जलाते है किन्तु उनमे से बहुधा Pm-Cm को इस बारे में कभी भी सूचित नहीं करते।

मेरा सामना ऐसे कई लोगो से होता है जो कहते है कि भारत को WTO समझौता रद्द कर देना चाहिए, और वे लोग दिन में 4 बार यह बात कहते है। किन्तु जब मैं उनसे कहता हूँ कि क्या आपने यह बात कहने के लिए Pm को चिट्ठी भेजी है ? तो बहुधा उनके पास कोई जवाब नहीं है। मतलब वे सिर्फ 0 ( zero) के पीछे और 0 और 0 के पीछे फिर 0, 0, 0 ....0 लगाते रहते है किन्तु इसके पहले अंक लगाना भूल जाते है !!
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यही स्थिति उन लोगो की है जो दिन में 56 बार कहते है कि जनसँख्या नियन्त्रण के लिए क़ानून बनना चाहिए, रमा मंदिर का अयोध्या में निर्माण होना चाहिए, गौ हत्या बंद होनी चाहिए आदि आदि। किन्तु जब मैं उनसे कहता हूँ कि ये क़ानून तो सिर्फ Pm ही बना सकते है, मैं नहीं बना सकता, तो क्या अपने Pm को चिट्ठी लिखकर "टू चाइल्ड पालिसी" क़ानून को गेजेट में छापने के लिए कहा है तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता।
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दरअसल इनकी स्थिति उस वकील की है जो पान के गल्ले पर मुकदमे से जुड़े सभी सबूत दिखाता है, तर्क करता है, और अपनी बात को सही साबित करने की पूरी कोशिश करता है, किन्तु अदालत में जज के सामने जाते है खामोश हो जाता है।
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तो मेरे विचार में यदि आपको व्यवस्था से कोई शिकायत है तो Pm वे पहले व्यक्ति है जिन्हें आपको यह कहना चाहिए। जमाने को कहने की बात बाद में आती है। पहले Pm से तो कहो !!
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पेज नंबर 003
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1.3 क्यों नागरिको को अपनी मांग सीधे Pm-Cm को भेजनी चाहिए ?

छोटे मोटे संगठन चलाने वाले ज्यादातर कार्यकर्ता एवं नेता हमेशा से यह बात कहते आये है कि नागरिको को अपनी मांग सीधे Pm को नहीं भेजनी चाहिए !!!
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दरअसल उनकी रुचि समस्या के समाधान में नहीं होती, बल्कि समस्या को उभाड़ने में होती है, ताकि नागरिको का ध्यान अपनी और खींच कर अपने संगठन एवं खुद का नाम चमकाया जा सके। इसीलिए उनका मानना होता है कि Pm को कुछ भी कहने से पहले लोगो को उनके संगठन से जुड़ जाना चाहिए। फिर वे लोगो को इकट्ठा करके सड़क पर एक मजमा बनाते है, और यह मजमा दिखाकर वे अन्य नागरिको को भी अपनी और खींचते है। इस तरह वे अपने संगठन को बड़ा करते जाते है। उनका हमेशा कहना होता है कि आप Pm को सीधे चिट्ठी मत भेजो, पहले हमारे संगठन से जुड़ जाओ। फिर वे इस संगठन का नाम आगे बढाने के लिए भीड़ इकट्ठी करके संगठन के नाम से कलेक्टर को ज्ञापन देते है, इसे अखबार में निकलवाते है। इससे उनके संगठन का नाम और उनकी नेता गिरी चमकती है।
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अब इस पूरी कवायद में समस्या वहीँ की वहीँ रहती है, और नागरिको का सारा समय व ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
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मैं धरने, प्रदर्शन, मजमेबाजी, जुलुस आदि के खिलाफ नहीं हूँ, किन्तु इस बात में कोई दो राय नहीं है कि ऐसे नेता-कार्यकर्ता-संगठन को Pm को चिट्ठी भेजने से मना करते है, किन्तु सारा जोर सिर्फ मजमेबाजी पर लगाते है पूरी तरह से "टाइम वेस्टर" है और सिर्फ समस्याओं के बढाने पर काम कर रहे है।

यदि उनकी ro. रुचि समाधान में होती थी, तो वे पहले Pm को चिट्ठी भेजते है फिर अन्य नागरिको को भी चिट्ठी भेजने के लिए कहते थे और तब मजमे बाजी करते थे !! वे जानते है कि किन्ही 100 नागरिको में से यदि चिट्ठी भेजने की बात आती है तो समय-ऊर्जा- संसाधनों के लिहाज से 100 में से 100 नागरिक Pm को ख़त लिख सकते है, किन्तु सड़क पर मजमा लगाने का समय-ऊर्जा-संसाधन इन 100 में से 5 लोगो के पास ही होगा। किन्तु चूंकि इन्हें मजमा लगाकर अपना शक्ति प्रदर्शन करना है अत: ये चिट्ठी भेजने का विरोध करते है, और सिर्फ उन लोगो में रुचि लेते है जो मजमें आने को तैयार हो।
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पेज नम्बर 004
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1.4. यह रजिस्टर मुख्य रूप से 3 काम करेगा।

(A) भारतीय संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह देश को चलाने के लिए आवश्यक निर्देश Pm-Cm को भेजें। Pm-Cm को पत्र भेजकर आप अपना कर्तव्य पूरा कर सकते है और इसमें सबसे जरुरी पहलू यह है कि इसके लिए न तो आपको किसी मीडिया की जरूरत है और न ही किसी नेता की।

चिट्ठी भेजने से आपकी मांग सीधे Pm तक पहुंचेगी और आपके पास इसका रिकॉर्ड भी रहेगा।
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(B) चिट्ठी भेजना बहुत ही सुलभ एवं सस्ता तरीका है। उदाहरण के लिए आप सिर्फ 1 रू के पोस्टकार्ड पर लिखकर भेज सकते है कि "Pm, कृपया Wto एग्रीमेंट रद्द करें या टू चाइल्ड पालिसी लागू करें। और यह सब करने में आपके सिर्फ 30 मिनिट खर्च होते है। यह रजिस्टर उन चिट्ठियों की फोटो कॉपी रखने के काम आयेगा, जो चिट्ठिया आपने भेजी है। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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(C) यह रजिस्टर आपके आस पास के "टाइम वेस्टर्स" यानी समय बर्बाद करके समस्याएं खड़ी रखने वाले नेताओं एवं कार्यकर्ताओ को एक्सपोज करता है। तब यदि कोई कार्यकर्ता आपसे कहता है कि सरकारी स्कूल एवं सरकारी अस्पतालो में सुधार आना चाहिए या WTO समझौते को रद्द कर दिया जाना चाहिए, तो आप अमुक कार्यकर्ता से पूछ सकते है कि -- क्या आपने यह बात Pm से कही है ? और नहीं कही है तो क्यों नहीं कही है ?
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और आप अपना रजिस्टर दिखाकर कह सकते है कि मैने Pm को चिट्ठी भेजकर Pm-Cm को कहा है कि स्कूल-अस्पताल-थाने-अदालतें सुधारने के अमुक क़ानून को गेजेट में छापो। और फिर आप उनसे सार्वजनिक रूप से पूछ सकते है कि आपने Pm को चिट्ठी लिखकर ऐसा क्यों नहीं कहा। इस तरह अमुक कार्यकर्ता अन्य नागरिको के सामने एक्सपोज हो जाएगा और अन्य नागरिक उसे सुनना बंद कर देंगे। इससे अमुक छद्म कार्यकर्ता आपकी एवं अन्य नागरिको के समय एवं ऊर्जा की हानि नहीं कर सकेगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jun 22 2019 22:19:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

My Letters to Pm रजिस्टर : अध्याय 2 , पेज नंबर 013 , तारीख 10-6-2019
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शीर्षक : मेरे राजनैतिक विश्वास
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(1) जजों के बारे में :
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1.1. सुप्रीम कोर्ट – मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत की सुप्रीम कोर्ट के कुल जजों में से 90% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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1.2. हाई कोर्ट - मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत की हाई कोर्ट के कुल जजों में से 80% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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1.3. निचली कोर्ट - मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत की निचली अदालतों के कुल जजों में से 90% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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टिपण्णी : सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट एवं निचली अदालतों के जो जज बिकाऊ नहीं है वे निकम्मे, स्वार्थी एवं पद प्रतिष्ठा के आकांक्षी है और इस वजह से वे भारत की अदालतों को सुधारने के लिए न तो कोई कदम उठाते है और न ही परवाह करते है – ऐसा मैं विश्वास करता हूँ ।
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निष्कर्ष : मेरा मानना है कि, भारत की अदालतें एवं जज देश की सबसे भ्रष्ट संस्था है। जजों के भ्रष्टाचार को ख़त्म किये बिना देश की किसी भी समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। जो कार्यकर्ता एवं नेता जजों के भ्रष्टाचार पर अपना रुख साफ़ नहीं करता, मैं उसे एक फर्जी कार्यकर्ता / फर्जी नेता मानकर खारिज करता हूँ।
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[ फुटनोट : पाठक के लिए सूचना – अपने रजिस्टर में यह अध्याय अवश्य जोड़े, तथा जजों पर आपकी जो “मान्यता” हो उसे लिखे। यदि आपको लगता है कि भारत के जज ईमानदार है तो ऐसा ही लिखे। परन्तु जजों पर अपनी मान्यता रखना अनिवार्य है। ]
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पेज नंबर 014
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(2) राजनीती शास्त्रियों एवं अर्थ शास्त्रियों के बारे में :
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2.1. राजनीति शास्त्रियों के बारे में – मेरा दृढ़ विश्वास है कि राजनीति शास्त्र ( जिसे में राजनीति अंध शास्त्र भी कहता हूँ ) के सभी विशेषग्य, प्रोफेसर्स, लेक्चरर इत्यादि में से 70% भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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2.2. अर्थशास्त्रियों के बारे में - मेरा दृढ़ विश्वास है कि अर्थशास्त्र के सभी विशेषग्य, प्रोफेसर्स, लेक्चरर, स्तम्भ लेखक इत्यादि में से 70% भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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टिप्पणी – जो शेष 30% भ्रष्ट एवं बिकाऊ नहीं है वे 30% अनिवार्य रूप से निकम्मे, पद लोलुप एवं पद प्रतिष्ठा के आकांक्षी है, और उन्हें भारत की अर्थ व्यवस्था एवं राजनैतिक व्यवस्था सुधारने में कोई रुचि नहीं है ।
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मेरा मत – अनुपादक विषयों के इन विशेषज्ञों ने भारत में जितना वैचारिक प्रदुषण फैलाया है उसका कोई जोड़ नहीं है । समाज जब तक इन्हें सुनता पढता रहेगा या इन्हें तवज्जो देता रहेगा तब तक भारत में राजनैतिक आर्थिक सुधार लाना मुमकिन नहीं है – ऐसी मेरी मान्यता है !!
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पेज नंबर 015
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3. BJP = RSS के बारे में
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जिस तरह गंगाधर एवं शक्तिमान एक ही व्यक्ति है और अलग अलग अवसर पर अलग तरह की वेश भूषा एवं भिन्न नाम से सामने आता है उसी तरह BJP एवं Rss एक ही संगठन है और इसके सदस्य अपनी सुविधा एवं अवसर के अनुसार BJP एवं RSS के अलग अलग किरदारों के रूप में सामने आते है – ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है.
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भारत में कई लोगो एवं बच्चो का मानना है कि गंगाधर एवं शक्तिमान अलग अलग व्यक्ति है, और साथ ही वे BJP एवं RSS को भी दो अलग अलग संगठन मानते है. मैं उन्हें कहता हूँ कि उन्हें जो भी मान्यता ठीक लगे वो मान सकते है. किन्तु मेरा मानना है कि RSS एवं BJP में जो अंतर है वह अंतर उतना ही है जितना गंगाधर एवं शक्तिमान में है.
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मेरी इस मान्यता के कारण मैं संघ के सभी कार्यकर्ताओ को बीजेपी का कार्यकर्ता एवं बीजेपी के कार्यकर्ताओं को संघ का कार्यकर्ता कहकर पुकारता हूँ.
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पेज नं 016
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4. केंचुआ = केन्द्रीय चुनाव आयोग के बारे में
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केंचुआ = केन्द्रीय चुनाव आयोग के बारे में मेरी मान्यता है कि केंचुआ भारत की दुसरे(*) नंबर की सबसे भ्रष्ट संस्था है.
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मेरा मानना है कि Evm मशीनों को देश पर थोपकर चुनाव आयोग ने हमारे पूरे लोकतंत्र को हाईजेक किया हुआ है. मैं विश्वास करता हूँ कि केंचुआ ही Evm का हैकर है. और चूंकि केंचुआ आम कार्यकर्ताओ को evm का अवलोकन करने का अवसर नहीं देता इसीलिए यह साबित है कि जिसे Evm खोलने या इससे छेड़खानी का अवसर मिले वह इसे हैक कर सकता है.
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(*) भ्रष्टाचार में केंचुआ शीर्ष संस्था नहीं है. भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट का कोई मुकाबला नहीं है, और मैं सुप्रीम कोर्ट को देश की सबसे भ्रष्ट संस्था मानता हूँ. मेरा मानना है कि भारत में नेताओं-अधिकारियों के हर प्रकार के हर स्तर के भ्रष्टाचार की जिम्मेदार सुप्रीम कोर्ट है और सुप्रीम कोर्ट ही भारतीय भ्रष्टाचार की गंगोत्री है.
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पेज नं 017
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5. ऊँचे कद वाले ब्रांडेड नेताओं के बारे में :
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निचे दिया गया चित्र बताता है कि भारत की सभी पार्टियों के ब्रांडेड नेताओं की क्या स्थिति है और उनके अंध भगत उन्हें किस दृष्टी से देखते है.
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भारत के सभी ब्रांडेड नेता चुनाव जीतने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा संचालित मीडिया पर बुरी तरह से निर्भर करते है. पेड मीडिया इन नेताओं का जलवा बनाये रखने के लिए टीवी-अख़बार के जरिये इनकी सकारात्मक छवि का निर्माण करता है. पेड मीडिया द्वारा रची गयी इसी छवि की चपेट में आकर मतदाता इन्हें वोट करते है और इन नेताओं के अंध भगत इन्हें मसीहा के रूप में देखते है. जैसा कि चित्र में दिखाया गया है कि पानी के ऊपर ऊपर देखने से हमें आभास होता है कि हम शार्क देख रहे है. जबकि पानी के निचे देखने पर मालूम होता है कि यह बेबी शार्क भी नहीं है, बल्कि एक नुमाइशी मछली है.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jun 23 2019 10:05:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

My Letters to Pm रजिस्टर : अध्याय 3 , पेज नंबर 025 , तारीख 11-6-2019
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शीर्षक : Pm-Cm को भेजे गए पत्रों की सूची
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3.1. Redo – Right to Expel and punish Dist level Oficers
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रिडो – नागरिको द्वारा जिला स्तर के अधिकारियों को निकालने एवं दण्डित करने का प्रस्तावित क़ानून

यह क़ानून ड्राफ्ट Pm को तारीख 5-6-2019 को भेजा गया. भेजी गयी चिट्ठी की फोटो कॉपी पेज नंबर 35 पर देखें. इस क़ानून के आने से सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों, थानों एवं अदालतों में तेजी से सुधार आएगा.
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3.2. #RajivDixitJuryTrial , राजीव भाई के हत्यारों की शिनाख्त के लिए संदिग्धों का नागरिको का जूरी ट्रायल किया जाए. यह चिट्ठी 23-1-2019 को भेजी गयी थी. चिट्ठी की फोटो कॉपी पेज नंबर 36 पर देखें.
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3.3. #Repatriation , विदेशी कम्पनियां भारत में जो मुनाफा कमाती है, उसके बदले में उन्हें डॉलर चुकाने का वादा भारत सरकार को रद्द कर देना चाहिए. 23-1-2019 को यह चिट्ठी भेजी गयी. चिट्ठी की फोटो कॉपी पेज नंबर 37 पर देखें.
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3.4. #LeaveWTO , भारत को Wto समझौता रद्द कर देना चाहिए. यह चिठ्ठी 22-1-2019 को भेजी गयी थी. इस चिट्ठी की फोटो कॉपी पेज नंबर 38 पर रखी है.
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[ 3.2. , 3.3. , एवं 3.4. में दी गयी चिट्ठियां फेसबुक पर “ Postcard sent to Pm “ नामक एल्बम में रखी है, तथा 3.1. में दी गयी रिडो की चिट्ठी फेसबुक पर “My Letters to Pm” नामक एल्बम में रखी गयी है.
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( फुटनोट : यह अध्याय बनाना अनिवार्य है, ताकि एक ही अध्याय में आपके द्वारा भेजी गयी चिट्ठियां देखी जा सके. )
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Jun 23 2019 14:33:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

My Letters to Pm रजिस्टर : अध्याय 4 , पेज नंबर 034 , तारीख 11-6-2019
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शीर्षक - Pm-Cm को भेजे गए पत्रों की फोटो कॉपी
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इस अध्याय में उन चिट्ठियों की फोटो कॉपी रखी जाती है, जो पत्र मैं Pm-Cm को भेजता हूँ। इस तरह यह अध्याय सबसे महत्तवपूर्ण है और इसी के लिए इस रजिस्टर को बनाया गया है। यदि आप Pm को चिट्ठी भेज रहे है किन्तु इसकी फोटो कॉपी सहेज कर नहीं रख रहे है, तो यह चिट्ठी भेजना नहीं बल्कि चिट्ठी को लेटर बॉक्स में फेंक कर आने के समान है।
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यदि आप खुद ही अपनी चिट्ठी के प्रति गंभीर नहीं है तो आप Pm से कैसे उम्मीद कर सकते है कि वह आपकी चिट्ठी को गंभीरता से ले !!
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पेज नं - 035
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1. #Redo रिडो : सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों, थानों एवं अदालतों में सुधार लाने के लिए इस प्रस्तावित अधिसूचना पूरा ड्राफ्ट Pm को भेजा गया। भेजने की तारीख : 5-6-2019

Pm को भेजी गयी इस चिट्ठी में कुल 4 पेज ( 8 पृष्ठ ) है। इस चिट्ठी के सभी 8 पृष्ठ पेज नंबर _______ पर देखें जा सकते है। इस क़ानून का पीडीऍफ़ यहाँ से डाउनलोड करें -
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पेज नं 036
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2. #RajivDixitJuryTrial : राजिव भाई दीक्षित के संदिग्ध हत्यारों का जूरी ट्रायल। यह पोस्टकार्ड 23-1-2019 को भेजा गया था। यह चिट्ठी "postcard sent to Pm" शीर्षक से बनाए गए फेसबुक एल्बम पर भी देखी जा सकती है।
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आजादी बचाओ आन्दोलन के प्रणेता श्री राजिव दीक्षित जी की हत्या 30 नवम्बर 2010 को भिलाई ( छत्तीसगढ़ ) में कर दी गयी थी। मैंने Pm को चिट्ठी भेजकर मांग की है कि, संदिग्ध हत्यारों को चिन्हित करने और उन्हें सजा देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य की मतदाता सूचियों में से लॉटरी द्वारा 500 नागरिको का चयन करके जूरी मंडल का गठन किया जाए।

यह जूरी संदिग्धों का नारको टेस्ट भी ले सकेगी।
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राजिव भाई के फर्जी समर्थको की पहचान : सोशल मीडिया पर राजिव भाई की हत्या की जांच की मांग करने वाले बहुत से छद्म समर्थक मौजूद है। इन छद्म समर्थको की पहचान यह है कि ये सभी राजिव भाई के संदिग्ध हत्यारों के जूरी ट्रायल एवं नारको टेस्ट लिए जाने का सिर्फ जबानी समर्थन करते है, किन्तु इस बारे में Pm चिट्ठी भेजने का हमेशा विरोध करते है। इनका मूल उद्देश्य राजीव भाई के नाम पर अपना चूरन, चटनी, पापड़, अचार बेचना एवं राजिव भाई के व्याख्यानों का इस्तेमाल करके ख्याति पाना है।
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पेज नं 037
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3. #Repatriation : डॉलर पुनर्भरण समझौता रद्द करना - यह चिट्ठी 23-1-2019 को भेजी गयी थी।
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भारत सरकार ने इस तरह का समझौता किया हुआ है कि जो भी विदेशी कम्पनियां भारत में रुपयों के रूप में मुनाफा कमाती है, भारत सरकार कमाए गए इन रुपयों के बदले में डॉलर चुकाने के लिए बाध्य है !!
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उदाहरण के लिए यदि कोका कोला या मैगी भारत में अपना सामान बेचकर यदि 70 करोड़ रूपये बनाती है तो RBI उन्हें क़ानूनी रूप से 1 करोड़ डॉलर देने के लिए बाध्य है। इसी तरह जब भी आप कोई विदेशी वस्तु खरीदते है तो भारत पर डॉलर चुकाने का बोझ भी बढ़ जाता है। मैंने Pm को चिट्ठी भेजकर इस समझौते को रद्द करने को कहा है। इसके बाद हम विदेशी कम्पनियों को उतने ही डॉलर चुकायेंगे जितना डॉलर वे RBI में जमा कराती है। मुनाफे में कमाए गए रुपयों के एवज में हम डॉलर नहीं चुकायेंगे।
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फुटनोट : उल्लेखनीय है कि जब चीन ने WTO एग्रीमेंट साइन किया तो उसने विदेशियों द्वारा चीन में कमाए गए येन ( चीनी मुद्रा ) के बदले में डॉलर चुकाने का समझौता करने से इंकार कर दिया था।
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पेज नं 038
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4. #LeaveWTO : विश्व व्यापार संगठन के साथ किये गए एग्रीमेंट को रद्द करने के लिए यह चिट्ठी 22-1-2019 को भेजी गयी।
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विश्व व्यापार संगठन = W.T.O. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको द्वारा संचालित किये जाने वाला संगठन है। भारत ने यह समझौता 1991-92 में किया था। इस संघठन का उद्देश्य विकासशील देशो पर ऐसी नीतियाँ थोपना है जिससे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक खनिज संसाधनों एवं राष्ट्रीय सम्पत्तियों का अधिग्रहण कर सके। इस समझौते की आड़ में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत के प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से अधिग्रहण कर रहे है।
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W.T.O. एग्रीमेंट के फर्जी विरोधियो की पहचान : W.T.O. एग्रीमेंट के फर्जी विरोधी सोशल मीडिया में दिन में 4 पोस्ट इस एग्रीमेंट के खिलाफ लिखेंगे और WTO एग्रीमेंट को कोसेंगे। किन्तु ये लोग Pm को चिट्ठी लिखकर WTO एग्रीमेंट रद्द करने के लिए कभी भी नहीं कहते है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Jun 25 2019 14:27:14 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

मैं भारत में मौजूद विभिन्न समस्याओ के समाधान के लिए जो चिट्ठियां Pm एवं Cm को भेजता हूँ, उसका रिकॉर्ड एक रजिस्टर में रखता हूँ। मेरे पास अभी 1 रजिस्टर है, और 1 ऐसा ही ओर बनाने वाला हुँ । एक रजिस्टर घर पर रहेगा , ताकि सुरक्षित रहे। एवं एक रजिस्टर मैं अन्य नागरिको को पढ़ने के लिए दूंगा एवं अपने साथ रखूँगा । रजिस्टर के छाया चित्र :
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मेरे विचार में प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि आवश्यक निर्देश चिट्ठी द्वारा Pm एवं Cm को भेजे एवं इसका रिकॉर्ड अपने पास रखने के लिए एक नोटबुक या रजिस्टर रखें.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jun 26 2019 20:14:42 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चिट्ठी-रजिस्टर केम्पेन मेथड :
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सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि आने वाली 5 तारीख से पहले अपने नागरिक कर्तव्य का रजिस्टर तैयार करें, ताकि आप Pm को जो चिट्ठी भेजें उसका रिकॉर्ड रजिस्टर में रख सके। रजिस्टर बनाने का तरीका और प्रक्रिया के बारे में मेरा Letters to Pm नामक एल्बम देखें। उसमे मैंने अपने रजिस्टर के कुछ अध्याय अपलोड कर दिए है।
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जैसे जैसे आप रजिस्टर के अध्याय लिखते जाये उन्हें अपने Letters to Pm नामक एल्बम में अपलोड करते जाए। चिट्ठी-रजिस्टर मेथड के बारे में अन्य जानकारियां मैं समय समय पर डालता रहूँगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Jun 26 2019 21:57:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

धनवापसी पासबुक – खनिज रॉयल्टी सीधे नागरिको के खातों में भेजने का प्रस्ताव
(DhanVapsi Passbook– Directly Deposit Mineral Royalty in Citizens Account)
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(इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।)
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इस कानून का सार : यह क़ानून देश के खनिजो की लूट रोकने के लिए लिखा गया है। इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में छपने के तुरंत बाद भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन देश के नागरिको की संपत्ति घोषित हो जायेंगे, और 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी। तब देश के समस्त खनिज+स्पेक्ट्रम+सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी एवं किराया “ 135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता ” नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इकट्ठा हुयी इस राशि का 65% हिस्सा सभी भारतीयों में बराबर बांटा जाएगा और 35% हिस्सा सेना के खाते में जाएगा। प्रत्येक भारतीय के हिस्से में आयी राशि की एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी।
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खनिजो की नीलामी करके पैसा इकठ्ठा करने वाला राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी धन वापसी पासबुक में दायरे में होगा और नागरिक पटवारी कार्यालय में जाकर उसे नौकरी से निकालने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। यदि खनिज अधिकारी या उसके स्टाफ के खिलाफ घपला करने की या अन्य कोई शिकायत आती है तो सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति जज के पास न होकर आम नागरिको की जूरी के पास रहेगी। यह क़ानून देश की सभी खदानों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है। इस क़ानून को संसद से पास करने की जरूरत नही है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित धनवापसी पासबुक क़ानून गेजेट में छापें - #DhanVapsiPassbook , #P20180436101
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) : सभी नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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1.इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी।
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2. इस कानून के गेजेट में छपने के बाद भारत की केंद्र सरकार को होने वाली खनिज रॉयल्टी, स्पेक्ट्रम रॉयल्टी और केंद्र सरकार द्वारा अधिगृहीत जमीनों के किराये से प्राप्त राशि का 65% हिस्सा भारत के नागरिकों में समान रूप से बांटा जायेगा, और हर महीने यह धनराशि सीधे आपके बैंक खाते में जमा होगी। शेष 35% हिस्से का उपयोग सिर्फ सेना में सुधार के लिए खर्च होगा। जब आप राशि प्राप्त करेंगे तो इसकी एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी।
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3. यह कानून ऐसा कोई वादा नहीं करता कि आपको प्रति महीने 500 रू या 1000 रू या कोई स्थिर राशि प्राप्त होगी। यदि खनिजों / स्पेक्ट्रम का या जमीनों का बाजार मूल्य बढ़ता है तो आमदनी और किराया बढ़ सकता है। लेकिन यदि खनिज आमदनी और किराया घटता है तो नागरिकों को हर महीने मिलने वाली यह राशि भी घटेगी।
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4. राष्ट्रीय खनिज अधिकारी (NMRO=National Mineral Royalty Officer) के पास खनिज रॉयल्टी और सरकारी जमीनों का किराया तय करने, इकठ्ठा करने और सभी नागरिकों के बैंक खातों में जमा करने हेतु आवश्यक कर्मचारी एवं अधिकार होंगे। NMRO की नियुक्ति प्रधानमन्त्री करेंगे, किन्तु यदि यह धनराशि आपको समय पर नही मिल रही है या अन्य किसी वजह से आप NMRO को नौकरी से निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो आप धन वापसी पासबुक के साथ पटवारखाने में जाकर अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दे सकेंगे।
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5. आप पटवारी कार्यालय में जाकर अपनी स्वीकृति किसी भी दिन रद्द कर सकते है, एवं राष्ट्रिय खनिज अधिकारी के किसी भी अन्य प्रत्याशी को किसी भी दिन स्वीकृत कर सकते है। जब आप किसी प्रत्याशी के लिए हाँ दर्ज करेंगे या अपनी स्वीकृति रद्द करेंगे तो पटवारी इसकी एंट्री आपकी धन वापसी पासबुक में करेगा।
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6. इस कानून के पारित होने के बाद यदि राष्ट्रीय खनिज अधिकारी या उसका स्टाफ कोई गबन-घपला-लापरवाही भ्रष्टाचार करता है या अन्य किसी मामले में उनकी कोई भी शिकायत आती है और यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य-सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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7. राष्ट्रीय खनिज अधिकारी सम्पूर्ण भारत में सभी खदानों, स्पेक्ट्रम, सरकारी भूमि की खुली नीलामी आयोजित करेगा। वह केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली जमीनों की रूप रेखा तैयार करेगा और इन सभी जमीनों पर लीज की लम्बाई भी तय करेगा। किन्तु खनिज अधिकारी के पास जल संसाधनों पर कोई अधिकार नहीं होंगे।
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8. राष्ट्रीय खनिज अधिकारी प्रत्येक व्यक्ति या कंपनी जिसके पास खदाने, स्पेक्ट्रम, सरकारी जमीने आदि लीज पर है, से रॉयल्टी और किराया प्रति माह इकठ्ठा करेगा एवं इकट्ठी की गयी राशि को भारत के सभी व्यस्क नागरिकों के बैंक खातों में प्रति माह जमा करवाएगा। सभी नागरिकों को लगभग बराबर राशि मिलेगी लेकिन ये राशि व्यक्ति की आयु, उसके पुत्र या पुत्रियों की संख्या, विकलांगता आदि के आधार पर कम ज्यादा हो सकती है। वितरण अनुपात की जानकारी आगे की धाराओं में दी गयी है।
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9. कुछ मामलों में किसी एक राज्य में निवास कर रहे नागरिकों को उनके राज्य के खनिज और जमीन से प्राप्त राशि में से अतिरिक्त राशि मिल सकती है, लेकिन ये राशि देश के समस्त नागरिकों को मिल रही राशि के दो-गुना से अधिक नहीं होगी। और ऐसे क्षेत्रों में जिनकी सीमा शत्रु देशों से लगी हो या सुदूर क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों को भी बंटने वाली राशि में से अतिरिक्त पैसा मिल सकता है। लेकिन उपरोक्त अपवादों को छोड़कर अन्य सभी नागरिकों को बराबर हिस्सा मिलेगा।
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10. यह कानून सिर्फ केंद्र सरकार के अधीन आने वाली खदानो, स्पेक्ट्रम और जमीनों पर लागू होगा। किन्तु केंद्र सरकार के अधीन जल संसाधन इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेगें। यह कानून राज्य, नगरपालिकाओं, जिले, तहसील, ग्राम पंचायतों के अधिकार में आने वाली खदानों और जमीनों पर भी लागू नहीं होगा। मुख्यमंत्री, महापौर और सरपंच अपने राज्य/ नगर/ जिले/ तहसील / गाँव के स्वामित्व में आने वाले खनिजो एवं जमीनों से प्राप्त आय को अपने राज्य/ नगर/ जिले/ तहसील/ गाँव के नागरिकों में बांटने के लिए ऐसा ही कानून लागू कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यह कानून पानी या पानी के वितरण से मिलने वाली राशि पर लागू नहीं होगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश
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राष्ट्रीय सम्पत्तियों पर नागरिको के स्वामित्व की घोषणा : भारत के नागरिक देश की सभी खदानों, स्पेक्ट्रम, IIM अहमदाबाद को शामिल करते हुए सभी IIM के भू-खंडो, जेएनयू के भू-खंडो, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों जिनका स्वामित्व निजी कंपनियों या ट्रस्टो के पास नहीं है के भू-खंडो को संयुक्त और समान रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व की संपत्ति घोषित करते है। अब से ये भू-खंड भारत की राज्य सरकार या भारत की केंद्र सरकार या किसी अन्य सरकारी पक्ष या निजी पक्ष की संपत्ति नहीं है । भारत के सभी अधिकारीयों, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशो से विनती की जाती है कि, भारत के नागरिको के उपरोक्त फैसले के विरुद्ध कोई भी याचिका स्वीकार ना करे ।
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12. राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी का भू-खंडो पर क्षेत्राधिकार
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(12.1) निम्नलिखित मंत्रालयों और विभागों के सभी भू-खंड राष्ट्रीय खनिज अधिकारी के क्षेत्राधिकार में आयेंगे :
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01. विज्ञान, चिकित्सा, गणित और इंजीनियरिंग के शिक्षण संस्थानों को छोड़कर आई.आई.एम, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय।
02. एयरपोर्ट, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के स्वामित्व वाले सभी भवन
03. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय
04. उपभोक्ता मामलें एवं लोक वितरण मंत्रालय
05. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
06. लघु उद्योग एवं कृषि एवं ग्राम उद्योग मंत्रालय
07. कपड़ा उद्योग मंत्रालय
08. युवा मामलें और खेल मंत्रालय
09. नीति आयोग
10. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
11. मानव संसाधन विकास मंत्रालय
12. ग्रामीण विकास मंत्रालय
13. सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय
14. शहरी विकास एवं गरीबी उपशमन मंत्रालय
15. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
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(12.2) यह क़ानून देश की सभी खदानों एवं सरकारी भूमि की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है।
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(12.3) राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी का निजी व्यक्तियों, कंपनियों, ट्रस्टों, राज्य सरकारो एवं नगर / जिला शासन के स्वामित्व वाले भू-खण्डों पर कोई अधिकार नहीं होगा। सेना, न्यायालयों, जेलों, रेलवे, बस स्टेशनों, कक्षा 12 तक के सरकारी विद्यालयों और कर संग्रहण कार्यालयों द्वारा उपयोग में लिए जा रहे भू-खंड भी खनिज अधिकारी के क्षेत्राधिकार से बाहर होंगे।
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(12.4) सभी चिकित्सा महाविद्यालयों, IIT, NIT, इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, IISC, विज्ञान और गणित महाविद्यालयों को स्वास्थ्य मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय या विज्ञान मंत्रालय जैसा प्रधानमंत्री तय करे, का अंग बनाया जायेगा। संबंधित मंत्री इन महाविद्यालयों में दिन-प्रतिदिन के संचालन हेतु अध्यक्ष नियुक्त करेंगे। सभी महाविद्यालय जिनमें चिकित्सा, विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग का शिक्षण कार्य हो रहा है, के भू-खंड खनिज अधिकारी के क्षेत्राधिकार में नहीं आएंगे।
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13. भारत सरकार के स्वामित्व वाले भू-खण्डों से किराया इकठ्ठा करना
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(13.1) अनुपयोगी भूमि के लिए - खनिज रॉयल्टी अधिकारी अपने विवेक से किसी भूमि को उचित माप के भू-खंडो में विभाजित करेगा, एवं प्रत्येक भू-खंड के लिए नीलामी करवाएगा। नीलामी के लिए निम्नलिखित शर्तें होगी :

(13.1.1) लीज 5, 10, 15, 20 या 25 वर्षो की होगी। खनिज रॉयल्टी अधिकारी इसमें से कोई अवधि तय करेगा। किन्तु लीज 25 वर्षों से अधिक नहीं हो सकेगी।
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(13.1.2) बोली लगाने वाले मासिक किराये और लीज की अवधि के लिए बोलियां लगाएंगे जो कि अधिकतम लीज अवधि से कम हो सकती है। बोली का प्रारूप मासिक किराये व लीज महीने के अनुसार होगा। एक व्यक्ति एक से ज्यादा बोली लगा सकता है। लीज की न्यूनतम अवधि 12 महीने होगी।
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(13.1.3) निविदा का भार ( मासिक किराया ) / लॉग ( मासिक लीज ) के अनुसार होगा। अर्थात जितना अधिक किराया उतना अधिक भार और जितनी लम्बी लीज, उतना कम भार।
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(13.1.4) निविदाएं पूरी तरह से पारदर्शी एवं सार्वजनिक होगी, तथा सभी निविदाएँ सभी को दिखेगी।
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(13.1.5) खनिज अधिकारी निविदाओ के भार के अनुसार भू-खंड देगा। ( मासिक_ किराया ) / लॉग ( मासिक_लीज )
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(13.1.6) खनिज रॉयल्टी अधिकारी जमा राशि के रूप में 6 महीने का किराया या इसके समान राशि लेगा।
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(13.1.7) अमुक किरायेदार किसी भी दिन भूमि खाली करने के लिए और अदा किये जा रहे किराये को बंद करने के लिए स्वतंत्र होगा।
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(13.2) लीज अवधि के दौरान लीज पर दिए गए भू-खंड के आस पास के 1 वर्ग किमी क्षेत्र में जमीन के मूल्य में आने वाले बदलाव के प्रतिशत, जिस दिन लीज पर दिये गए भू-खंड के किराये में संशोधन हुआ है, और प्रचलित प्रभावी ब्याज दर में प्रतिशत बदलाव के आधार पर खनिज रॉयल्टी अधिकारी हर 3 वर्ष में किराये को संशोधित करेगा।
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(13.3) लीज अवधि समाप्त होने के बाद खनिज रॉयल्टी अधिकारी एक नयी नीलामी करवाएगा, जिसमे मौजूदा लीज धारक को निम्नलिखित अतिरिक्त लाभ मिलेंगे :
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(13.3.1) उसका निविदा भार 1.1 से 1.5 से गुणा हो जायेगा, जो कि इस पर निर्भर करेगा कि उसने कितने वर्षों तक किराया चुकाया है।
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(13.3.2) नीलामी समाप्त होने के बाद वह 3 महीने के अन्दर अपनी बोली बढ़ा सकता है।
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(13.3.3) नए लीज धारक द्वारा चुकाये गए 6 महीने के अग्रिम किराये में से मौजूदा लीज धारक को 20% से 50% तक की राशि मिलेगी जो इस पर निर्भर करेगी कि मौजूदा लीज धारक ने कितने महीनो तक जमीन ले रखी थी।
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(13.3.4) लेकिन यदि मौजूदा लीज धारक नीलामी से चूक जाता है, तब वह उस भूमि से अपनी संपत्ति हटा सकता है या बेच सकता है। लेकिन उसे ये भूमि खाली करनी होगी।
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(13.4) यदि मौजूदा लीज धारक लीज शुदा भू-खंड पर बोली लगाता है तो उसे 25% अधिक (25% * लीज महीनो में /300) के साथ अधिकतम 50% तक का बोनस प्राप्त होगा। अर्थात उसकी बोली का भार 1.25 से 1.50 के गुणन में बढ़ जाएगा। किन्तु यह इससे अधिक नहीं होगा।
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(13.5) यदि कोई भू-खंड लीज पर है, तो खनिज अधिकारी भू-खण्ड के आस पास के 1 किमी क्षेत्र में पिछले 3 वर्षो में विक्रय की गयी जमीन के विक्रय मूल्य का माध्य निकालकर भू-खंड की कीमत तय करेगा, और अगले 10 वर्षो के लिए (बाजार मूल्य मूल्य * प्रचलित ब्याज दर / 3) के रूप में वार्षिक किराये को निर्धारित करेगा। किराया हर 3 वर्ष में संशोधित होगा। 10 वर्षों के बाद ऐसे भूखंड पर धारा 13.1 में बताये गए नियम लागू होंगे।
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(13.6) खनिज रॉयल्टी अधिकारी इकट्ठे हुए किराये का 35% हिस्सा रक्षा मंत्री को सेना मजबूत करने के लिए हथियार उपलब्ध कराने और सभी नागरिकों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए देगा।
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14. भू-खंडो से प्राप्त किराए एवं खनिज रॉयल्टी का नागरिको में बंटवारा
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(14.1) खनिज रॉयल्टी अधिकारी इकट्ठे हुए किराये का 35% हर महीने उन नागरिकों को भेजेगा जो पिछले 10 वर्षों से अमुक राज्य में रह रहे है। किन्तु यह राशि पिछले वर्ष में भारत के नागरिकों को प्राप्त राशि के दोगुने से अधिक नहीं होगी। खनिज रॉयल्टी अधिकारी शेष किराया हर महीने भारत के नागरिको को भेजेगा।
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(14.2) इस कानून के पारित होने के 1 वर्ष के बाद नागरिको को प्राप्त होने वाला किराया इस प्रकार से बदलेगा :
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(14.2.1) यदि उसके (0 पुत्र), (0 पुत्र, 1 पुत्री), (0 पुत्र, 2 पुत्री) है, तब किराया 33% अधिक मिलेगा और यदि उसकी आयु 60 वर्ष है तो किराया 66% अधिक मिलेगा।
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(14.2.2) यदि उसके (1 पुत्र, 0 पुत्री), (1 पुत्र, 1 पुत्री), (1 पुत्र, 2 पुत्री) है, तब किराया 15% अधिक मिलेगा और उसकी आयु 60 वर्ष है तो किराया 33% अधिक होगा।
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(14.2.3) यदि उसके (2 पुत्र, 0 पुत्री), (2 पुत्र, 1 पुत्री) है तो किराया में कोई बदलाव नहीं होगा - ना बढेगा ना घटेगा।
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(14.2.4) यदि उसके (2 पुत्र, 2 पुत्री) या (3 पुत्र, 1 पुत्री) है, तो किराया 33% कम मिलेगा।
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(14.2.5) यदि उसके बिंदु 4 से अधिक संतान है तो किराया 66% कम मिलेगा।
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(14.2.6) यहाँ जुड़वाँ संतान एक संतान के रूप में गिनी जाएगीं और गोद ली गयी संताने नहीं गिनी जाएगी।
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(14.3) 60 वर्ष से ऊपर के पुरुषों और 55 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को मिलने वाला किराया 33% अधिक होगा और 75 वर्ष से ऊपर के पुरुषों और 70 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को मिलने वाला किराया 66% अधिक होगा।
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(14.4) 7 वर्ष से कम आयु के बच्चे को कोई भी किराया नहीं मिलेगा। 7 वर्ष से 14 वर्ष के बीच के बच्चों को मिलने वाला किराया सामान्य किराये का एक तिहाई (33%) होगा और 14 वर्ष से 18 वर्ष के बीच के बच्चों को मिलने वाला किराया सामान्य किराये का दो तिहाई (66%) होगा। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को मिलने वाला किराया उसकी माता को दिया जायेगा, जब तक कि जूरी खनिज रॉयल्टी अधिकारी को उस बच्चे के पिता या किसी अन्य संबंधी को देने का आदेश नहीं करती या यदि माता जीवित नहीं है।
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(14.5) आगे, यदि जूरी पाती है कि पति एक या उससे अधिक संतान की देखभाल अच्छे से नहीं कर रहा है तो जूरी खनिज अधिकारी को निर्देश दे सकती है कि पिता को मिलने वाले किराए का आधा भाग माता को दिया जाए। ऐसी स्थिति में खनिज रॉयल्टी अधिकारी आधा भाग माता को देगा और आधा भाग पिता को।
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15. खनिज रॉयल्टी इकठ्ठा करना
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खनिज रॉयल्टी अधिकारी 1947 से पहले एवं बाद में लीज पर दी गयी सभी कार्यशील लीज शुदा खदानों की लीज का बाजार भाव से पुनर्मूल्यांकन करके तय करेगा कि क्या अमुक कार्यशील खदान की रॉयल्टी राशि बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं। देश की अन्य सभी खदानों, कच्चे तेल के कुओ आदि से होने वाली आय भी NMRO प्राप्त करेगा।
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(15.2) खनिज रॉयल्टी अधिकारी प्राप्त होने वाली खनिज रॉयल्टी एवं भूमि किराया सेना में, राज्यों में और भारत के नागरिकों में उसी अनुपात में बाँटेगा जैसा कि भूमि किराया वितरण से संबंधित धाराओं में वर्णित किया गया है।
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16. खनिज रॉयल्टी अधिकारी व उसके स्टाफ की शिकायतों का जूरी द्वारा निपटान
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(16.1) खनिज रॉयल्टी अधिकारी प्रत्येक जिले के लिए एक जिला जूरी प्रशासक, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य जूरी प्रशासक और भारत के लिए एक राष्ट्रीय जूरी प्रशासक नियुक्त करेगा।
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[ टिपण्णी : जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक धनवापसी पासबुक के दायरे में होंगे और इस पासबुक में दिए गए "वोट वापसी" सेक्शन का उपयोग करके मतदाता उपरोक्त में से किसी अधिकारी को नौकरी से निकालकर किसी दुसरे व्यक्ति को लाने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। इसकी प्रक्रियाएं इसी क़ानून की धारा 19 में दी गयी है।]
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(16.2) जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य रिटायर होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर कार्यरत रहेगा। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू व यात्रा-व्यय मिलेगा
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(16.3) यदि खनिज रॉयल्टी अधिकारी या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला आता है तो वादी अपने मामले की शिकायत महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, या इस मामले की सुनवाई के लिए 30 से 55 वर्ष आयु वर्ग के नागरिकों के एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है। जूरी मंडल के गठन में निम्नलिखित नियमो का पालन किया जाएगा :

(16.3.1) शिकायत उस जिले में दर्ज होगी जहाँ प्रॉपर्टी स्थित है या नागरिक रहता है। यदि नागरिक या लीज धारक या अधिकारी मामला उसी राज्य में स्थित किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करना चाहते है तो वे राज्य जूरी प्रशासक या राज्य के हाई कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं। यदि पक्षकार मामले को राज्य से बाहर स्थानांतरित करना चाहते है तो वे राष्ट्रीय जूरी प्रशासक या सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं।
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(16.3.2) जिले में प्रत्येक विवाद के लिए जिला जूरी प्रशासक लॉटरी से ( रैंडमली ) 3 से 10 गणित, विज्ञान या इंजीनियरिंग में स्नातकों का चयन, मामले में सहायता देने के लिए स्नातकों की तैयार सूची से करेगा। चयनित इंजीनियरों की आयु 30 वर्ष से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उनके पास 5 वर्षों का कार्य अनुभव होना चाहिए।
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(16.3.3) जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा 30 से 55 वर्ष आयु वर्ग के उन मतदाताओ को चुनेगा, जो न तो पिछले 5 वर्षों में किसी जूरी में प्रस्तुत हुए हो और न पूर्व में उन्हें किसी अपराध में दोष सिद्ध पाया गया हो।
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(16.3.4) जूरी सदस्यों की संख्या न्यूनतम 12 से प्रारम्भ होकर 50, 200, 500 और अधिकतम 1500 तक हो सकेगी। जूरी का आकर आरोपी कर्मचारी के पद एवं हैसियत पर निर्भर करेगा।
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(16.3.5) यदि विवाद की राशि 10 लाख से कम है तो जूरी का आकार 12 होगा, और प्रति 10 लाख के लिए एक जूरी सदस्य बढ़ा दिया जायेगा।
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(16.3.6) यदि शिकायत में राशि के साथ किसी अधिकारी के विरुद्ध शिकायत भी शामिल है तो जूरी के आकार का निर्धारण ऊपर बताये गए बिंदु (4) या (5) में से जो भी अधिक है, उसके अनुसार होगा।
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(16.3.7) जूरी सदस्य उन जिलों से चयनित होंगे जहाँ की जिला अदालतें वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग द्वारा सुनवाई करने वाली जिला अदालत से जुड़ी हो। यदि अमुक जिला वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा किसी अन्य जिले से नहीं जुड़ा है, तो सभी जूरी सदस्य उस जिले से होंगे जहाँ मामला दर्ज किया गया है।
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(16.3.8) जूरी सदस्य दोनों पक्षों को 1-1 घंटे के लिए सुनेंगे। 65% से अधिक जूरी सदस्यों के ये कहने के बाद कि वे पर्याप्त सुन चुके है, सुनवाई समाप्त हो जाएगी।
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(16.3.9) यदि 75% या अधिक जूरी सदस्य आरोपी कर्मचारी को नौकरी से निकालने या जुर्माना लगाने का निर्णय देते है तो खनिज रॉयल्टी अधिकारी अमुक कर्मचारी को निकाल सकता है या उससे किराया वसूल सकता है, या रॉयल्टी अधिकारी को ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यदि शिकायतकर्ता को लगता है कि रॉयल्टी अधिकारी ने जूरी सदस्यों के निर्णय का ठीक से पालन नहीं किया है, तो वह भारत के मतदाताओं से मांग कर सकता है कि वे धारा 20 में दी गयी वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके उसे नौकरी से निकालने की सहमती दें।
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(16.3.10) जिला अदालत के जूरी सदस्यों के निर्णय की अपील राज्य हाई कोर्ट के जूरी सदस्य या जजों के सामने एवं बाद में सुप्रीम कोर्ट के जूरी सदस्य या जजों के सामने की जा सकती है।
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17 खनिज रॉयल्टी अधिकारी एवं जूरी प्रशासक द्वारा आवेदन करने की योग्यताएं
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(17.1 ) राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो वह राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी या राष्ट्रीय जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(17.2) जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला एवं राज्य जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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18 .धारा 17 में दी गयी योग्यता रखने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार करके इसे पीएम की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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19. मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना
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(19.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी धनवापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी, , जिला जूरी प्रशासक, राज्य एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं धनवापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(19.2) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(19.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(19.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। राष्ट्रीय खनिज अधिकारी एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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20. राष्ट्रीय खनिज अधिकारी एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(20.1) राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के लिए : यदि किसी उम्मीदवार को देश की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) की 35% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री मौजूदा अधिकारी को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति सम्बंधित पद पर कर सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा।
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(20.2) राज्य जूरी प्रशासक के लिए : यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि स्वीकृतियों की यह संख्या पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी अमुक व्यक्ति को राज्य जूरी प्रशासक के पद पर नियुक्ति कर सकते है।
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(20.3) जिला जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि यह संख्या पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी अमुक व्यक्ति को जिला जूरी प्रशासक के पद पर नियुक्ति कर सकते है।
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21. जनता की आवाज
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(21.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(21.2) यदि कोई मतदाता धारा 21.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के लिए प्रयास किये है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]

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----------धन वापसी क़ानून ड्राफ्ट का समापन-----------

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हमें इस क़ानून की जरूरत क्यों है ?

कच्चा माल यानी खनिज और जमीन ही दुनिया की असली संपत्ति है । सारी निर्माण इकाइयां, कारखाने, औद्योगिक विकास आदि कच्चे माल की सस्ती उपलब्धता पर निर्भर करता है। दुर्भाग्य से भारत में खनिजो की पहले से कमी है। इसी खनिज को लूटने के लिए ब्रिटिश-फ़्रांसिस साम्राज्य भारत में आये । उन्हें अपनी फैक्ट्रियो को चलाने के लिए सस्ते कच्चे माल यानी खनिज की जरूरत थी। अंग्रेजो ने भारत के खनिजो का बलात रूप से अधिग्रहण किया और 2 सदियों तक मुफ्त में इसे लूटा ।
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जब भारत आजाद हुआ तो नागरिको ने यह मांग की थी कि भारत के प्राकृतिक संसाधनों को भारत के समस्त नागरिको की संपत्ति घोषित करो। किन्तु जिन लोगो के हाथ में सत्ता आयी थी वे नागरिको की इस संयुक्त संपत्ति को खुद के कब्जे में रखना चाहते थे। अत: उन्होंने इन संसाधनों को अपने अधिकार में ले लिया। और फिर आजादी के बाद से जो भी दल सत्ता में आया उसने उद्योग पतियों से घूस खाकर औने पौने दामो में खदाने खोदने के लाइसेंस दिए। रेत, पत्थर, ताम्बा, जस्ता, लोहा से लेकर सोना , चांदी से हीरे तक सभी प्रकार के खनिज मन मर्जी से खोदकर बेचे जा रहे है। जो भी सरकार सत्ता में आती है सबसे पहले यह देखती है कि कौन कौन से संसाधन विदेशियों को बेचकर कितना माल कमाया जा सकता है । यह लूट वे विनेवेश और निजीकरण के नाम पर चलाते है ।
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और अब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आने के बाद यह लूट 10 गुना तेजी से हो रही है। विदेशी धनिक हमारे नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए चंदे देते है और बदले में उनसे कीमती खदानों को खोदने के अधिकार कानूनी रूप से ले लेते है। आज सरकारे जिन प्राकृतिक संसाधनों को बेच रही है, वह भारत के समस्त नागरिक की संपत्ति है। यदि हमारे पूर्वजो ने अंग्रेजो से लोहा लेकर उन्हें यहाँ से भागने के लिए बाध्य नहीं किया होता तो आज यह संपत्ति बचती नहीं थी। किन्तु अंग्रेजो के जाने के बाद भी आज तक यह लूट जारी है !! अंग्रेजो ने बलात रूप से इसे मुफ्त में लूटा, जबकि आज यह लूट कानूनी रूप से औने पौने दामो में चलाई जा रही है। सरकारों को कोई हक़ नहीं कि वे हमारी सम्पत्तियों को हमसे बिना पूछे बेचे।
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यह क़ानून भारत के सभी प्राकृतिक संसाधनों को देश के 135 करोड़ नागरिको की संपत्ति घोषित करता है। इस क़ानून के आने के बाद भारत में प्राकृतिक संसाधनों की यह लूट बंद हो जायेगी। खनिजो की रॉयल्टी एवं जमीनों के किराए से जो राशि इकट्ठी होगी उसका 65% हिस्सा 135 करोड़ भारतीयों में बराबर बाँट दिया जाएगा और यह राशि हर महीने प्रत्येक भारतीय के खाते में ट्रांसफर होगी। शेष 35% हिस्सा सेना को मजबूत करने के लिए खर्च किया जाएगा।
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यदि हम भारत के नागरिक यह क़ानून लाने में सफल नहीं होते है तो जल्दी ही बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत के सभी प्राकृतिक संसाधनों का अधिग्रहण करके भारत को कंगाल कर देगी। और यदि एक बार हमने प्राकृतिक संसाधन गँवा दिए तो भारत औद्योगिक विकास के लिए हमेशा के लिए परजीवी हो जाएगा। क्योंकि जो देश कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हो जाता है उसकी रीढ़ हमेशा के लिए टूट जाती है ।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित धनवापसी पासबुक क़ानून को गेजेट में छापे - #DhanVapsiPassbook, #P20180436101
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें : @Pmoindia , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #DhanVapsiPassbook , #P20180436101
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7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (21) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Jun 27 2019 22:04:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Kushagra Yadav Salonup:

मैं भारत में मौजूद विभिन्न समस्याओ के समाधान के लिए जो चिट्ठियां PM/CM को भेजता हूँ, उसका रिकॉर्ड एक रजिस्टर में रखता हूँ। इस रजिस्टर की एक हूबहू कॉपी भी मैं रखुगा। यह रजिस्टर मैं नागरिकों को पढ़ने के लिए देता हूँ ताकि वे भारत की समस्याओं को कम करने के लिए मेरे प्रयासों के बारे में जान सके।
मेरे विचार में प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि आवश्यक निर्देश चिट्ठी द्वारा PM एवं CM को भेजे एवं इसका रिकॉर्ड अपने पास रखने के लिए एक नोटबुक या रजिस्टर रखें.
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I keep records of all the letters in a register that I send to the PM/CM for the solution of various problems in India. I also keep a xerox of this register. I give this register to the citizens so that they may know about my efforts for the betterment of India.
In my opinion, every citizen of India has this responsibility to send important letters to PM/CM and also keep records of all that.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jun 29 2019 19:40:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

My Letters to Pm रजिस्टर : अध्याय 6 , पेज नंबर 140 , तारीख 13-6-2019
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शीर्षक – मेरे शहर के परिचित नागरिक जिन्होंने Pm-Cm को पत्र भेजे / नहीं भेजे है
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Index - सूची
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01. श्री स्वप्नेश जी व्यास
02. श्री विष्णु जी सेन
03. श्री सुनील ही ओझा
04. श्री दिनेश जी जैन
05. श्री अंकुश जी माहेश्वरी
6. श्री गजेन्द्र जी भाटी
07. श्री सौरभ जी साहनी
08. श्री अमित जी शर्मा
09. श्री सुभाष जी पिल्लई
10. श्री दीपक जी टाक
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इस अध्याय को सम्पादित किया जाता रहेगा. ऊपर दिए गए मेरे शहर के परिचित जब भी pm को पत्र भेजते है, तब इसे अपडेट किया जाएगा. हर मैंने अद्यतन सूचना इस पोस्ट के कमेन्ट बॉक्स में देखि जा सकती है.
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page – 141
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इस अध्याय में मेरे शहर के उन नागरिको के ब्यौरे है जिन्हें मैं जानता हूँ. इस अध्याय में 15-25 तक नागरिको के नाम हो सकते है. जब इनमे से मेरा कोई परिचित Pm-Cm को पत्र भेजेगा तो मैं इसे यहाँ दर्ज करता हूँ.

6.1. श्री स्वप्नेश जी व्यास
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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6.2. श्री विष्णु जी सेन(*)
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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page – 142
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6.3. श्री सुनील ही ओझा(*)
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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6.4. श्री दिनेश जी जैन
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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6.5. श्री अंकुश जी माहेश्वरी
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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page – 143
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6.6. श्री गजेन्द्र जी भाटी
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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6.7. श्री सौरभ जी साहनी
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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6.8. श्री अमित जी शर्मा
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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page – 144
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6.9. श्री सुभाष जी पिल्लई
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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6.10. श्री दीपक जी टाक
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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(*) सुनील जी ओझा एवं विष्णु जी सेना जूरी सिस्टम के मुद्दों पर क्रमश: मांडलगढ़ एवं चित्तौड़ विधानसभा से 2018 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके है. सुनील जी ओझा को 1650 एवं विष्णु जी को 1300 मत प्राप्त हुए.
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पाठक के लिए सूचना :
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यदि आप भी नागरिक ड्यूटी रजिस्टर बनाते है तो यह अध्याय अवश्य जोड़े. आप इसमें अपने शहर के किसी भी परिचित व्यक्ति का नाम जोड़ सकते है. यदि वे पत्र भेजते है एवं इसका रिकॉर्ड रखते है और यदि आपने इसे देखा है, तो इसे उनके नाम के आगे “हाँ” से चिन्हित करें. लेकिन यदि वे पत्र नहीं भेजते है तब भी “ना” नहीं लिखे. उनके सामने का कॉलम खाली छोड़ दें.
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यदि इस सूची में वे लोग शामिल है जो चुनाव लड़ चुके है, तो उन्हें चिन्हित करें.
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( टिप्पणी - इस अध्याय में आगे और भी नाम जोड़े जायेंगे. )
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Jun 29 2019 19:45:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

My Letters to Pm रजिस्टर : अध्याय 7 , पेज नंबर 154 , तारीख 13-6-2019
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शीर्षक – मेरे शहर से बाहर निवास करने वाले परिचित नागरिक जिन्होंने Pm-Cm को पत्र भेजे / नहीं भेजे है
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Index - सूची
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01. श्री मानवेन्द्र जी व्यास ( जोधपुर-बीकानेर )
02. श्री मति पद्मजा जी पाति ( बेंगलूर )
03. श्री वरुण जी सैनी ( हरियाणा )
04. श्री मंजीत सिंह जी बैंसला
05. श्री अजय भाई तिवाड़ी* ( दिल्ली )
06. श्री तरुण जी डडसेना* ( महासमुंद )
07. श्री संदीप सिंह जी
08. श्री विशाल जी ढोकले ( औरंगाबाद )
09. श्री रूप सिंह जी सोलंकी ( सूरत )
10. कुमार निवास जी
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पाठको के लिए सूचना : यदि आप कोरा / फेसबुक का इस्तेमाल करते है तो यह अध्याय अवश्य जोड़े एवं आपकी मित्र सूची में से कुछ मित्रो के इसमें नाम लिखें. यदि इनमे से को व्यक्ति यदि Pm-Cm को पत्र भेजता है और अपने नागरिक ड्यूटी रजिस्टर को फेसबुक पर Letters to Pm एल्बम में रखता है, तो इसे यहाँ दर्ज करें.
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page 155
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इस अध्याय में मेरे उन परिचित मित्रो के ब्यौरे है जो मुझसे फेसबुक / कोरा / ट्विटर इत्यादि प्लेटफोर्म से जुड़े हुए है और वे मेरे शहर में निवास नहीं करते है. यदि वे Pm k पत्र भेजते है तो उन्हें यहाँ दर्ज किया जाता है.
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7.1. श्री मानवेन्द्र जी व्यास ( जोधपुर-बीकानेर )
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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page 156
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7.2. श्री मति पद्मजा जी पाति ( बेंगलूर )
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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7.3. श्री वरुण जी सैनी ( हरियाणा )
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
.
7.4. श्री मंजीत सिंह जी बैंसला
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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page 157
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7.5. श्री अजय भाई तिवाड़ी* ( दिल्ली )
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
.
7.6. श्री तरुण जी डडसेना* ( महासमुंद )
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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page 158
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7.7. श्री संदीप सिंह जी
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
.
7.8. श्री विशाल जी ढोकले ( औरंगाबाद )
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
.
7.9. श्री रूप सिंह जी सोलंकी ( सूरत )
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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7.10. कुमार निवास जी
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(a) क्या pm-cm को पत्र भेजते है ? ...................
(b) क्या पत्रों का रिकॉर्ड रखा है ? ......................
(c) सत्यापन का तरीका एवं तिथि : ....................
(d) क़ानून जिनके निर्देश भेजे है :
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श्री अजय भाई तिवाड़ी पूर्व दिल्ली से और श्री तरुण डडसेना जी महासमुंद लोकसभा क्षेत्र से जूरी वोट वापसी के मुद्दे पर 2019 का चुनाव लड़ चुके है. अजय जी ने यह चुनाव राईट टू रिकॉल पार्टी की और से और तरुण जी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में यह चुनाव लड़ा था.
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