> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-06-20

Pawan Jury BhilwaraRj

My Letters to Pm रजिस्टर : अध्याय 1 , पेज नंबर 001

परिचय : इस रजिस्टर के बारे में
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1.1. इस रजिस्टर में मेरे द्वारा Pm-Cm को भेजी गयी चिट्ठियों का विवरण है
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मेरा नाम - पवन कुमार शर्मा , वोटर नंबर - XIU0740167
मेरा पता - s-261 प्रताप नगर, भीलवाड़ा ( राजस्थान )
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फेसबुक एल्बम - इस रजिस्टर के सभी पृष्ठों को मेरी फेसबुक प्रोफाइल पर स्कैन करके my letters to Pm नामक एल्बम में रखा जाता है। यदि आप फेसबुक इस्तेमाल करते है तो यह रजिस्टर इस एल्बम में पढ़ सकते है। एल्बम का लिंक -
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1.2. इस रजिस्टर की जरूरत क्यों है ?
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यह रजिस्टर मेरे नागरिक कर्तव्य के बारे में है। 5 वर्ष में एक बार वोट करने से नागरिक की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है। प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक निर्देश अपने प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी को भेजे। देश में व्याप्त विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए मैं Pm-Cm को जो भी निर्देश चिट्ठी द्वारा भेजता हूँ, उसका रिकॉर्ड इस रजिस्टर में रखा जाता है। इस रजिस्टर में भेजी गयी इन चिट्ठियों की फोटो कॉपी रखी जाती है।
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यदि आप देश की विभिन्न समस्याओं के बारे में फेसबुक / व्हाट्स एप / ट्विटर पर लिख रहे है किन्तु यह बात Pm-Cm को नहीं कह रहे है तो मेरे विचार में आपकी गतिविधियों का तब तक कोई मूल्य नहीं है, जब तक आप अपनी बात Pm-Cm को नहीं कहते।
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[ फुटनोट : पाठक के लिए सूचना – यदि आप भारतीय नागरिक है एवं अपना नागरिक कर्तव्य पूरा करते है तो इस तरह का एक रजिस्टर बनाएं एवं इस अध्याय में अपने शब्दों में लिखे कि यह रजिस्टर आपने क्यों बनाया है. यह अध्याय बनाना अनिवार्य है.
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पेज नंबर 002
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आपको अपने आस पास ऐसे कई कार्यकर्ता मिलेंगे जो विभिन्न राजनैतिक-आर्थिक-धार्मिक मसलो पर कई प्रकार की गतिविधियाँ करते है - वे सोशल मीडिया पर दिन में 10 पोस्ट करते है, धरने प्रदर्शन करते है, पुतले जलाते है किन्तु उनमे से बहुधा Pm-Cm को इस बारे में कभी भी सूचित नहीं करते।

मेरा सामना ऐसे कई लोगो से होता है जो कहते है कि भारत को WTO समझौता रद्द कर देना चाहिए, और वे लोग दिन में 4 बार यह बात कहते है। किन्तु जब मैं उनसे कहता हूँ कि क्या आपने यह बात कहने के लिए Pm को चिट्ठी भेजी है ? तो बहुधा उनके पास कोई जवाब नहीं है। मतलब वे सिर्फ 0 ( zero) के पीछे और 0 और 0 के पीछे फिर 0, 0, 0 ....0 लगाते रहते है किन्तु इसके पहले अंक लगाना भूल जाते है !!
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यही स्थिति उन लोगो की है जो दिन में 56 बार कहते है कि जनसँख्या नियन्त्रण के लिए क़ानून बनना चाहिए, रमा मंदिर का अयोध्या में निर्माण होना चाहिए, गौ हत्या बंद होनी चाहिए आदि आदि। किन्तु जब मैं उनसे कहता हूँ कि ये क़ानून तो सिर्फ Pm ही बना सकते है, मैं नहीं बना सकता, तो क्या अपने Pm को चिट्ठी लिखकर "टू चाइल्ड पालिसी" क़ानून को गेजेट में छापने के लिए कहा है तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता।
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दरअसल इनकी स्थिति उस वकील की है जो पान के गल्ले पर मुकदमे से जुड़े सभी सबूत दिखाता है, तर्क करता है, और अपनी बात को सही साबित करने की पूरी कोशिश करता है, किन्तु अदालत में जज के सामने जाते है खामोश हो जाता है।
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तो मेरे विचार में यदि आपको व्यवस्था से कोई शिकायत है तो Pm वे पहले व्यक्ति है जिन्हें आपको यह कहना चाहिए। जमाने को कहने की बात बाद में आती है। पहले Pm से तो कहो !!
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पेज नंबर 003
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1.3 क्यों नागरिको को अपनी मांग सीधे Pm-Cm को भेजनी चाहिए ?

छोटे मोटे संगठन चलाने वाले ज्यादातर कार्यकर्ता एवं नेता हमेशा से यह बात कहते आये है कि नागरिको को अपनी मांग सीधे Pm को नहीं भेजनी चाहिए !!!
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दरअसल उनकी रुचि समस्या के समाधान में नहीं होती, बल्कि समस्या को उभाड़ने में होती है, ताकि नागरिको का ध्यान अपनी और खींच कर अपने संगठन एवं खुद का नाम चमकाया जा सके। इसीलिए उनका मानना होता है कि Pm को कुछ भी कहने से पहले लोगो को उनके संगठन से जुड़ जाना चाहिए। फिर वे लोगो को इकट्ठा करके सड़क पर एक मजमा बनाते है, और यह मजमा दिखाकर वे अन्य नागरिको को भी अपनी और खींचते है। इस तरह वे अपने संगठन को बड़ा करते जाते है। उनका हमेशा कहना होता है कि आप Pm को सीधे चिट्ठी मत भेजो, पहले हमारे संगठन से जुड़ जाओ। फिर वे इस संगठन का नाम आगे बढाने के लिए भीड़ इकट्ठी करके संगठन के नाम से कलेक्टर को ज्ञापन देते है, इसे अखबार में निकलवाते है। इससे उनके संगठन का नाम और उनकी नेता गिरी चमकती है।
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अब इस पूरी कवायद में समस्या वहीँ की वहीँ रहती है, और नागरिको का सारा समय व ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
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मैं धरने, प्रदर्शन, मजमेबाजी, जुलुस आदि के खिलाफ नहीं हूँ, किन्तु इस बात में कोई दो राय नहीं है कि ऐसे नेता-कार्यकर्ता-संगठन को Pm को चिट्ठी भेजने से मना करते है, किन्तु सारा जोर सिर्फ मजमेबाजी पर लगाते है पूरी तरह से "टाइम वेस्टर" है और सिर्फ समस्याओं के बढाने पर काम कर रहे है।

यदि उनकी ro. रुचि समाधान में होती थी, तो वे पहले Pm को चिट्ठी भेजते है फिर अन्य नागरिको को भी चिट्ठी भेजने के लिए कहते थे और तब मजमे बाजी करते थे !! वे जानते है कि किन्ही 100 नागरिको में से यदि चिट्ठी भेजने की बात आती है तो समय-ऊर्जा- संसाधनों के लिहाज से 100 में से 100 नागरिक Pm को ख़त लिख सकते है, किन्तु सड़क पर मजमा लगाने का समय-ऊर्जा-संसाधन इन 100 में से 5 लोगो के पास ही होगा। किन्तु चूंकि इन्हें मजमा लगाकर अपना शक्ति प्रदर्शन करना है अत: ये चिट्ठी भेजने का विरोध करते है, और सिर्फ उन लोगो में रुचि लेते है जो मजमें आने को तैयार हो।
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पेज नम्बर 004
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1.4. यह रजिस्टर मुख्य रूप से 3 काम करेगा।

(A) भारतीय संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह देश को चलाने के लिए आवश्यक निर्देश Pm-Cm को भेजें। Pm-Cm को पत्र भेजकर आप अपना कर्तव्य पूरा कर सकते है और इसमें सबसे जरुरी पहलू यह है कि इसके लिए न तो आपको किसी मीडिया की जरूरत है और न ही किसी नेता की।

चिट्ठी भेजने से आपकी मांग सीधे Pm तक पहुंचेगी और आपके पास इसका रिकॉर्ड भी रहेगा।
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(B) चिट्ठी भेजना बहुत ही सुलभ एवं सस्ता तरीका है। उदाहरण के लिए आप सिर्फ 1 रू के पोस्टकार्ड पर लिखकर भेज सकते है कि "Pm, कृपया Wto एग्रीमेंट रद्द करें या टू चाइल्ड पालिसी लागू करें। और यह सब करने में आपके सिर्फ 30 मिनिट खर्च होते है। यह रजिस्टर उन चिट्ठियों की फोटो कॉपी रखने के काम आयेगा, जो चिट्ठिया आपने भेजी है। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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(C) यह रजिस्टर आपके आस पास के "टाइम वेस्टर्स" यानी समय बर्बाद करके समस्याएं खड़ी रखने वाले नेताओं एवं कार्यकर्ताओ को एक्सपोज करता है। तब यदि कोई कार्यकर्ता आपसे कहता है कि सरकारी स्कूल एवं सरकारी अस्पतालो में सुधार आना चाहिए या WTO समझौते को रद्द कर दिया जाना चाहिए, तो आप अमुक कार्यकर्ता से पूछ सकते है कि -- क्या आपने यह बात Pm से कही है ? और नहीं कही है तो क्यों नहीं कही है ?
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और आप अपना रजिस्टर दिखाकर कह सकते है कि मैने Pm को चिट्ठी भेजकर Pm-Cm को कहा है कि स्कूल-अस्पताल-थाने-अदालतें सुधारने के अमुक क़ानून को गेजेट में छापो। और फिर आप उनसे सार्वजनिक रूप से पूछ सकते है कि आपने Pm को चिट्ठी लिखकर ऐसा क्यों नहीं कहा। इस तरह अमुक कार्यकर्ता अन्य नागरिको के सामने एक्सपोज हो जाएगा और अन्य नागरिक उसे सुनना बंद कर देंगे। इससे अमुक छद्म कार्यकर्ता आपकी एवं अन्य नागरिको के समय एवं ऊर्जा की हानि नहीं कर सकेगा।
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