Posts for 2019-05


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 01 2019 14:35:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनाव आयोग को ट्वीट करें कि तेजबहादुर का नामांकन निरस्त न किया जाए —
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#DontCancelTejBahadurNomination
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" @EciSveep @ceoup , वाराणसी से #तेज़_बहादुर_यादव_का_नामांकन_रद्द_न_किया_जाए , pls do NOT cancel Tej Bahadur election nomination form in Varanasi. #TejBahadur #TejBahadurYadav "
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सभी से आग्रह है कि उपरोक्त ट्वीट करें ।
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आप तेज़ बहादुर यादव की सपा से उम्मीदवारी का समर्थन करते हो या न करते हो , किंतु आपको यह ट्वीट अवश्य भेजना चाहिए । क्योंकि तेज़ बहादुर यादव का नामांकन ग़लत वजह से ख़ारिज किया गया है ।
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चुनाव आयोग ने आवेदन प्रक्रिया को जान बूझकर इस तरह रखा है कि रिटर्निंग ओफिसर यदि किसी का आवेदन निरस्त करना चाहे तो वह किसी भी बहाने से प्रत्याशी का फ़ॉर्म रिजेक्ट कर सकता है। 2018-विधानसभा चुनावों में आसिंद के RO ने एक ग़लत एवं चिल्लर कारण का हवाला देते हुए हमारे एक प्रत्याशी का फ़ॉर्म रिजेक्ट कर दिया था ।
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हमारा प्रस्ताव है कि RO को किसी भी प्रत्याशी का आवेदन रद्द करने का अधिकार नही होना चाहिए । यदि प्रत्याशी एफ़िड़ेविट या फ़ॉर्म में कोई ग़लत सूचना देता है तो बाद में नागरिकों की जूरी मामले की सुनवाई कर सकती है । लेकिन किसी भी प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से नही रोका जाना चाहिए ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 04 2019 22:10:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

4 मई 2019 , जमशेदपुर लोकसभा के पोटका विधान सभा क्षेत्र मे राइट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्याशी महेश कुमार जी द्वारा चुनाव प्रचार

Mahesh Kumar Jamshedpur LsCandidate:

4 मई 2019
पोटका विधान सभा मे राइट टू रिकॉल का प्रचार हाता चौक पर

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 04 2019 22:45:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

उत्तर पूर्वी दिल्ली से राईट टू रिकॉल पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी अजय जी तिवारी राईट टू रिकॉल कानूनों की जानकारी देते हुए

अखंड भारत परिषद्:

न कांग्रेस न भाजपा,
अजेय भाई आपका।
न पप्पू पर न गप्पू पर,
बटन दबेगा टंपू पर।।
प्रजातन्त्र में प्रजा को राजा सी शक्ति न हो तो यह तंत्र भ्रष्टतंत्र बन जाता है।
वही शक्ति देने के लिए राईट टू रिकाॅल पार्टी काम कर रही है।
चुनाव चिंह : आॅटो
मैं अजेय भाई उत्तर पूर्वी दिल्ली से लोकसभा प्रत्याशी हूँ
मैं आप सभी सनातनी राष्ट्रभक्तों से विनम्रतापूर्वक आग्रह करता हूँ कि आॅटो पर बटन दबाकर मुझे अपना आशीर्वाद दें...
निवेदक :अजेय भाई
9818003398
www.RTRP.in/301h
राईट टू रिकाॅल पार्टी।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 04 2019 22:47:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भोपाल लोकसभा क्षेत्र से राईट टू रिकॉल पार्टी के प्रत्याशी पियूष जी जैन

Piyush Jain:

मैं पियूष जैन भोपाल लोकसभा क्षेत्र से राईट टू रिकॉल पार्टी का उम्मीदवार हूँ | बेरोजगारी कम करने और देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए मेरा प्रस्ताव है --जी.एस.टी पूर्ण रूप से हटाना और इसके स्थान पर संपत्ति कर लागू करवाना
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1. क्यों मुझे जीएसटी हटवाना है --- जीएसटी (GST) छोटी इकाईयों का कत्लखाना है। दुसरे विश्वयुद्ध के बाद अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको ने 1950 में इस कत्लखाने की ड्राफ्टिंग की थी। इसे इस तरह ड्राफ्ट किया गया है, कि यह बड़ी कम्पनियों को अतिरिक्त फायदा पहुंचा कर छोटी इकाईयों को बाजार से बाहर कर देता है। फिर जिन भी देशो में बहुराष्ट्रीय कम्पनियां गयी वहां उन्होंने जीएसटी लागू करवाया। और जहाँ जहाँ जीएसटी लागू हुआ वहां छोटी इकाईयों का कारोबार बड़ी कम्पनियों के हिस्से में चला गया। वैट जीएसटी का छोटा भाई है, और यह भी बड़ी इकाईयों को अतिरिक्त लाभ देता है। भारत में ऍफ़ डी आई आने के बाद पहले वेट आया, और अब वे जीएसटी लेकर आये है। पर छोटी कम्पनियों को खत्म करने में जीएसटी हर लिहाज से वेट का बाप है।
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2. कैसे वेल्थ टैक्स बेरोजगारी कम करेगा
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आज भारत में कारोबार करने या निर्माण करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती जमीन की ऊँची कीमते है। वेल्थ टेक्स आने ने धनिक वर्ग द्वारा संग्रहित की गयी अकार्यशील भूमि पर उन्हें कर चुकाना होगा। इससे उन्हें नुक्सान होगा और वे कर से बचने के लिए इस भूमि का व्यावसायिक उपयोग करने लगेंगे या फिर इन्हे रिहाईश या व्यावसायिक उद्देश्य के लिए बेच देंगे। इससे बाजार में जमीन की आपूर्ति बढ़ेगी और जमीन सस्ती हो जायेगी। देश में जमीनों के दाम 5 से 10 गुना तक गिर जाएंगे। जमीने सस्ती होने से व्यापार करना एवं निर्माण इकाइयां लगाना आसान हो जायेगा और वस्तुओ की निर्माण लागत गिरेगी। बड़े पैमाने पर छोटी और मझौली इकाइयों की स्थापना से रोजगार का सृजन होगा, महंगाई घटेगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ने से निर्माण की गुणवत्ता में सुधार आएगा और भारत का निर्माण उद्योग तकनिकी रूप से ज्यादा विकास करेगा। तकनिकी गुणवत्ता हासिल करने से भारत आधुनिक स्वदेशी हथियारों के उत्पादन की क्षमता जुटा लेगा और हमारी सेना आत्मनिर्भर और मजबूत होगी।

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वेल्थ टेक्स एक प्रगामी कर है। और इस वजह से ये न्यायपूर्ण है।
हमारा प्रस्ताव है कि सरकार को व्यक्ति द्वारा धारण की गयी वेल्थ पर टेक्स लेना चाहिए। हमारे प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्न है :
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1. वेल्थ में मुख्य रूप से जमीन को शामिल किया गया है। इसके अलावा सोना, चांदी, महंगी धातुएं, हीरे एवं इसी प्रकार के कीमती पत्थर, महंगी कलाकृतियाँ , पेंटिंग्स, अंशपत्र, ऋण पत्र, बांड्स आदि शामिल है। वेल्थ टेक्स का मुख्य लक्ष्य जमीनों को कर के दायरे में लाना है। जमीन एवं फ्लेट में भूखंड, कृषि भूखंड, फ्लेट्स, इमारतें, कार्यालय, तथा किसी भूखंड पर निर्माण से प्राप्त हुआ स्वामित्व, अपार्टमेन्ट, बंगले, कार्यालय, गोदाम, इमारते, औद्योगिक शेड्स तथा इनमे किये गए सभी प्रकार के निर्माण शामिल है ।
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2.राष्ट्रीय स्तर पर वेल्थ टेक्स का संग्रहण एवं नेशनल वेल्थ टेक्स ऑफिसर करेगा। वेल्थ टेक्स ऑफिसर प्रजा के अधीन होगा। अर्थात देश के नागरिक इस अधिकारी को बहुमत का प्रयोग करके नौकरी से निकाल सकेंगे। इस प्रावधान के कारण वेल्थ टेक्स ऑफिसर धनिक वर्ग के साथ मिली भगत बनाकर जनता के साथ धांधली नहीं करेगा।
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3. प्रति व्यक्ति 25 वर्ग मीटर रिहाइश भूमि, 50 वर्ग मीटर निर्माण एवं 2 एकड़ कृषि भूमि कर मुक्त होगी। प्रति पुरुष 100 ग्राम स्वर्ण एवं प्रति महिला 500 ग्राम स्वर्ण कर मुक्त होगा। इससे अधिक भूमि या स्वर्ण आदि होने पर प्रत्येक व्यक्ति को धारण की गयी अतिरिक्त वेल्थ पर 1% सालाना टेक्स देना होगा। यदि व्यक्ति ने आयकर चुकाया है तो चुकाया गया आयकर देय वेल्थ टेक्स में घटा दिया जाएगा। 60 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिको को ये छूट 2 गुनी एवं 80 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिको के लिए ये छूटे चार गुना होगी। इससे उन नागरिको पर वेल्थ टेक्स नहीं आएगा, जिनके पास बेहद कम या जीवन यापन कर पाने जितनी ही वेल्थ है।
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4. सभी प्रकार के ट्रस्ट, सोसाईटीयां, सिमितियाँ, एनजीओ, न्यास, क्लब, राजनैतिक पार्टियाँ, धर्मार्ध संगठन, अस्पताल, स्कूल, मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि सभी इकाइयां वेल्थ टेक्स के दायरे में होगी। किन्तु यदि कोई चेरिटेबल ट्रस्ट आदि चाहे तो जिन सदस्यों को वह सेवाए देता है प्रति सदस्य 500 रू सालाना की छूट प्राप्त कर सकता है। प्रत्येक नागरिक ऐसे 5 संगठनों को 500 रूपये की छूट दे सकता है। इस तरह जो संगठन वास्तविक अर्थो में सेवाए दे रहे है उन्हें सेवाग्राही सदस्य अपने हिस्से की छूट दे देंगे और उन पर प्रभावी वेल्थ टेक्स कम हो जाएगा। भारत में कुल 33 लाख एनजीओ है। इनमे से ज्यादातर संगठन सरकारी अनुदान में भूमि ग्रहण करते है और इन्हें अकार्यशील बना देते है। इसके अलावा धनिक वर्ग अपने धन को कर मुक्त करने के लिए ट्रस्ट खोल लेते है और इस ट्रस्ट के नाम पर जमीनों का संग्रहण करते है। इस प्रावधान से फर्जी संगठनों के भूमि संग्रहण करने की प्रवृति में कमी आएगी।

5. किसी भी प्रकार का विवाद होने की स्थिति में मामले की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी करेगी। ज्यूरी मंडल का चयन मतदाता सूचियों में से रेंडमली किया जायेगा।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 04 2019 22:49:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से राईट टू रिकॉल पार्टी की प्रत्याशी ऋचा जी कटियार

Kamal Monga:

चांदनी चौक, दिल्ली लोकसभा 2019 से Richa Katiyar ji जोकि एक वकील हैं और DRDO scientist रह चुकी हैं, ने राईट टू रिकाल PM/CM /Judges etc के कानूनों की ताकत लोगों को देने के लिए चुनाव लडने का फैसला लिया है।

चुनाव चिन्ह : AUTO

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue May 07 2019 20:17:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

एसपी, जिला जज, शिक्षा अधिकारी एवं चिकित्सा अधिकारी को प्रजा के अधीन करने के लिए प्रस्तावित जूरी प्रक्रियाएं , #Redo105 . #VoteWapsiPassbook , #P20180436105
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इस क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने से पुलिस एवं निचली अदालतों के भ्रष्टाचार में 70% तक की गिरावट आ जायेगी और सरकारी स्कूल एवं अस्पताल प्राइवेट स्कूलों एवं अस्पतालों से भी बेहतर हो जायेंगे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri May 10 2019 06:39:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Excellent

Mahesh Kumar Jamshedpur LsCandidate:

4 may 2019
पोटका विधानसभा हल्दीपोखर

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 16 2019 06:05:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Arya Ballari Karnataka:

Modi wave or Money wave?
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A superb video on the money spent for BJP's publicity and campaigns, how it's funded and the increasing use of electoral bonds. Back in March last year, Modi govt passed a shameless amendment which allowed foreign companies to donate to Indian political parties LEGALLY. And this amendment was applied retrospectively from 1976 !! Activists like us posted about how the electoral bonds will allow donors to remain anonymous thus making it impossible to know who's funding which party. Well after about a year, all our worst fears have come true.
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Indian politicians will now LEGALLY receive donations from the ultra-rich; so guess who will they work for??!! As Rajiv Dixit ji would say "जो धन देता है वो धुन बजवाता है". Anybody who still thinks that politicians will work for the country / poor after receiving hundreds of crores from the ultra-rich lives in a fantasy world.
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Video credits: The Wire
(via Karthik Gowd)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun May 19 2019 22:18:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नए कार्यकर्ताओ के लिए सूचना :
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राईट टू रिकॉल अंगेस्ट करप्शन नामक फेसबुक ग्रुप से मेरा कोई सरोकार नही है। राइट टू रिकॉल कार्यकर्ताओ द्वारा बनाया गया यह ग्रुप कार्यकर्ताओ द्वारा 2 साल पहले छोड़ दिया गया है, एवं अब यह फेसबुक ग्रुप किसी नामालूम व्यक्ति द्वारा संचालित किया जाता है। क्योंकि राईट टू रिकॉल के नाम से यह सबसे बड़ा फेसबुक ग्रुप है, अत: बहुधा नए आने वाले कार्यकर्ता इस ग्रुप में जाकर जुड़ जाते है और यह मानकर चलते है कि यह राईट टू रिकॉल मूवमेंट का फेसबुक ग्रुप है। अत: नए कार्यकर्ताओ को इस बारे में सूचित किया जाता है, कि इस फेसबुक ग्रुप की नीतियाँ आन्दोलन को केन्द्रीकृत करने की है, और इसीलिए मैंने यह ग्रुप काफी पहले छोड़ दिया है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon May 20 2019 23:24:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रेडो - नागरिको द्वारा जिला स्तर के अधिकारीयों को निकालने एवं दण्डित करने का प्रस्तावित क़ानून
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( Proposed Notification ; REDO - Right to Expel & Punish District level Officers )
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कानून का सार : यह क़ानून स्कूल-अस्पताल-थानों-अदालतों को सुधारने के लिए लिखा गया है। इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब नागरिक यह बता सकेंगे कि वे मौजूदा एस पी , जिला शिक्षा अधिकारी, जिला चिकित्सा अधिकारी एवं जिला जज की नौकरी चालू रखना चाहते है, या उन्हें निकाल कर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है। साथ ही पुलिस-शिक्षा-चिकित्सा विभाग एवं जिला न्यायालय से सम्बंधित मामलो एवं शिकायतों की सुनवाई करने तथा दंड देने की शक्ति जजो के पास नही, बल्कि आम नागरिको की ज्यूरी के पास रहेगी। इस कानून को संसद या विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे अधिसूचना के रूप में राज्य सरकार के गेजेट में सीधे छाप सकते है। इसे प्रधानमंत्री द्वारा भी केंद्र सरकार के गेजेट में छापा जा सकता है।
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#Redo105, #VoteWapsiPassBook , #P20180436105
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है -
(I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश,
(II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश।
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टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर आपको यानी प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी।
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(02) तब यदि आप अपने जिला पुलिस प्रमुख, जिला जज, जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के काम काज से संतुष्ट नहीं है तो उसे नौकरी से निकालने के लिए पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर अपनी स्वीकृति हाँ के रूप में दर्ज करवा सकेंगे। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दर्ज करवा सकेंगे।
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(03) आप अपनी स्वीकृति किसी भी दिन रद्द कर सकते है एवं किसी भी अन्य प्रत्याशी को किसी भी दिन स्वीकृत कर सकते है। जब आप किसी प्रत्याशी के लिए हाँ दर्ज करेंगे या अपनी स्वीकृति रद्द करेंगे तो पटवारी इसकी एंट्री आपकी वोट वापसी पासबुक में करेगा।
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(04) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य-सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश
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(05) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के पिता या उनकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस राजपत्र अधिसूचना के लिए अभिभावक माना जायेगा। अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी चालू रखने या निकाल दिए जाने के लिए "हाँ" दर्ज कर सकेंगे।
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(06) पुलिस प्रमुख, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षा अधिकारी, जिला जज एवं जूरी प्रशासक के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :
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(6.1) पुलिस प्रमुख के लिए : यदि 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(6.2) चिकित्सा अधिकारी के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए आवश्यक जैसे MBBS, BAMS या इसके समकक्ष डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष पूर्ण हो चुके हो, तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(6.3) जिला जज के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला जज पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(6.4) शिक्षा अधिकारी एवं जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला न्यायवादी ( जूरी प्रशासक ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(07) धारा 6 में दी गयी योग्यता धारण वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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(08) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए "हाँ" दर्ज करना
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(8.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(8.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(8.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
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(8.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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टिप्पणी : रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(09) पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(9.1) पुलिस प्रमुख एवं शिक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है। इस बारे में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक स्वीकृति प्राप्त कर लेता है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(9.2) जिला चिकित्सा अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में "हाँ" दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(9.3) जिला जज के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति की विनती के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(9.4) जिला शिक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(10) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त मतदान की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल
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(10.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि जिले के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(10.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक मत प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। यदि दिल्ली पुलिस प्रमुख का कोई उम्मीदवार 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख सकते है, और दिल्ली पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करेंगे।
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(11) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे । किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त मतदान की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(12) विशिष्ट परिस्थितियों में राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री किसी जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया एवं उसके स्टाफ पर ज्यूरी ट्रायल को 4 वर्षों के लिए हटाकर अपने विवेकाधिकार से उस जिले में नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी, जिला जज एवं जिला चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(13) मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृति से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का, और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(14) पुलिस, शिक्षा, न्यायालय एवं चिकित्सा विभाग के मामलो का नागरिको की जूरी द्वारा निपटान
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 15.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(14.1) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने पर आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई तय करनी होगी।
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(14.2) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महा जूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महा जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(14.3) यदि पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, चिकित्सा अधिकारी या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(14.4) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(14.5) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु मृत्यु दंड में 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(15) जनता की आवाज
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा 15.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon May 20 2019 23:27:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(1) 2003, कैलिफोर्निया के मुख्यमंत्री ग्रे डेविस को नागरिको ने वोट वापिस लेने के अधिकार का प्रयोग करते हुए नौकरी से बाहर निकाल दिया था। डेमोक्रेट उम्मीदवार डेविस 11 महीने पहले दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे, और उनके रहते बिजली व्यवस्था बदतर होती जा रही थी। तो कैलिफोर्निया के नागरिको ने डेविस को नौकरी से निकाल कर अर्नाल्ड श्वार्जनेगर को मुख्यमंत्री बना दिया था। अमेरिका के इतिहास में ऐसा सिर्फ दूसरी बार हुआ था कि, मुख्यमंत्री को वोट वापसी द्वारा बीच में ही निकाल दिया गया !!
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<https://bit.ly/2HtPJJr>;
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The Gray Davis recall was a successful effort in 2003 to recall Gray Davis, a Democrat, from his position as Governor of California. The outcome of the recall election held on October 7, 2003, was that Davis was recalled in favor of Republican Arnold Schwarzenegger. The recall effort was the first successful recall of a California governor, and only the second recall of a state governor in American history.
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(2) 2017, कोलोराडो प्रान्त के सेड्विक काउंटी के नागरिको ने अपने एस.पी. थॉमस हन्ना को वोट वापसी क़ानून का प्रयोग करते हुए नौकरी से निकाल दिया था। थॉमस पर पद पर रहते हुए यौन अपराध के आरोप थे !! वोट वापसी में 91% नागरिको ने उन्हें निकाल दिए जाने पर सहमती दी थी !!
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<https://bit.ly/2WTNxAl>;
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An effort to recall Thomas Hanna in Sedgwick County, Colorado, from his position as sheriff was launched in September 2016. A committee consisting of Jon Atkins, Hildy Blake, and Thayne Tucker began circulating the recall petition in late September. The recall effort was started following Hanna's arrest for allegedly sexually assaulting a developmentally disabled inmate. Hanna was successfully recalled on January 10, 2017.
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(3) 2016, कैलिफोर्निया के जज एरोन पर्सकी को नागरिको ने वोट वापसी क़ानून का प्रयोग करके नौकरी से निकाल दिया था। एक 20 वर्षीय युवक ने नीम बेहोश युवती के साथ बलात्कार किया था, और नागरिको की जूरी द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद पर्सकी ने उसे सिर्फ 6 माह की सजा दी थी !! टर्नर पर जो आरोप साबित हुए थे उनमे उसे 14 वर्ष तक की सजा दी जा सकती थी , किन्तु पर्सकी ने सिर्फ 6 माह की टोकन सजा दी !! पर्सकी 80 सालो में पहले जज थे, जिन्हें नागरिको ने लात मार कर बाहर किया था।
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<https://nyti.ms/2JeJeN6>;
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Aaron Persky, the California judge who drew national attention in 2016 when he sentenced a Stanford student to just six months in jail for sexually assaulting an unconscious woman, was recalled on Tuesday, according to The Associated Press. He is the first judge recalled in California in more than 80 years.

With nearly all precincts reporting on Wednesday, just under 60 percent of voters were in favor of removing Judge Persky from the Santa Clara County Superior Court, where he had served since 2003. Cindy Hendrickson, a prosecutor, was elected to replace him.
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तो इस तरह वोट वापसी का प्रयोग करके अमेरिका के नागरिक नेता-पुलिस एवं जजों को चेतावनी देते रहते है, ताकि अन्य नेता-जज-अधिकारी ईमानदार बने रहे।

जजों को ईमानदार बनाए रखने का यह बेहद सरल एवं निरापद तरीका है - एक भ्रष्ट जज को दंड दो , ताकि उसका हश्र देखकर अन्य जज तमीज में काम करने लगे।

लेकिन भारत में हमारे पास ऐसे ब्रांडेड नेता और उनके अंध भगत है जो इस तरह की प्रक्रियाओ में नहीं मानते। उनका मानना है कि, उनके नेताओं के फोटो गले में ताबीज की तरह लटका कर घूमने, और उनकी जय जय कार करने से जज ईमानदार बनेंगे, और अदालतों का भ्रष्टाचार अपने आप गायब हो जाएगा !! और इसीलिए वे भारत में वोट वापसी का क़ानून लाने का विरोध करते है !!!
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और बचा खुचा मोर्चा हमारे विशिष्ट बुद्धिजीवियों और ज्यादा पढ़ी लिखी बिरादरी ने संभाल रखा है। वे पूरी जिन्दगी आम भारतीयों के दिमाग में यह कीले ठोकते रहते है कि, भारतीय लोग भ्रष्ट है, जाहिल है, गवांर है, उनमे राष्ट्रिय चरित्र का अभाव है, जागरूक नहीं है, अशिक्षित है, उनमे राजनैतिक संस्कृति का अभाव है और इसी वजह से भारत में सारी समस्याओं की जड़ में खुद भारतीय है !!! और इसीलिए भारत में नतीजा हमारे सामने है।
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सारा जोधपुर जानता है कि, सलमान ने हिरण मारे थे, और इसके भर भर के सबूत मौजूद है। और सारा मुंबई जानता है कि उस रात दारु पीकर गाड़ी दबंग खान ही चला रहा था। जिन सबूतों के आधार पर सेशन जज ने सलमान को सजा सुनाई, उन्ही सबूतो के आधार पर हाई कोर्ट जज ने सलमान को बरी कर दिया। निचोड़ यह है कि, अदालत में सबूत कोई मायने नहीं रखते। मायने यह रखता है कि क्या जज किसी सबूत को सबूत मानने को राजी है या नहीं।
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पूरा मामला जजो के विवेक यानी कि उन्हें दी गयी घूस पर टिका हुआ है, न कि जिरह और सबूतों पर !! भ्रष्ट जजो को नौकरी से निकालने और दंड देने की शक्ति जब तक नागरिको के पास नहीं आएगी, जज इसी तरह के काण्ड करते रहेंगे।
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भारत में वोट वापसी क़ानून लाने के लिए हमें जो इबारत गेजेट में छपवाने की जरूरत है उसका प्रस्तावित ड्राफ्ट निचे दिए गए लिंक पर देखें। यदि ये इबारत गेजेट में छाप दी जाती है तो भारत के प्रत्यके नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी और उन्हें वोट वापसी लेने का अधिकार मिल जाएगा - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2149581858493372>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 22 2019 23:01:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सभी को सूचित किया जाता है कि फेसबुक ने टेग रिमूव करने की सेटिंग को बदल दिया है, और इस वजह से टेग को रिमूव करने में दिक्कत हो रही है. इसका मतलब यह है कि, आप अब से मुझे किसी भी पोस्ट में सिर्फ एक बार बार टेग कर सकते है. क्योंकि फेसबुक में यह फीचर है कि ब्लॉक किया हुआ यूजर किसी को टेग नहीं कर सकता !! उधर रमेश प्लेटफोर्म पर पहुंचा और इधर ट्रेन चल दी, की तर्ज पर इधर आपने मुझे टेग किया, और उधर आपको तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा !!
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( और फोटो अपलोड करते समय विशेष ध्यान रखें. क्योंकि फेसबुक फोटो अपलोड करते समय खुद ही आपके मित्रो को टेग कर देता है.)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu May 23 2019 11:43:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भीलवाड़ा लोकसभा चुनाव में मुझे 13,140 वोट प्राप्त हुए है।
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पार्टी के अन्य कार्यो में व्यस्त होने के कारण मैं स्वयं सिर्फ 4 दिन ही चुनाव प्रचार कर पाया। किन्तु भीलवाड़ा के अन्य सभी कार्यकर्ताओ ने अपने स्तर पर चुनाव प्रचार में सहयोग किया और इस तरह सबके मिले जुले प्रयासों से संतोष प्रद वोट प्राप्त हुए है। पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में हमें भीलवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से कुल 5,600 मत प्राप्त हुए थे। इस तरह मतों में लगभग 7,500 की वृद्धि हुयी है।
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जूरी सिस्टम और वोट वापसी क़ानूनो की मांग को आगे बढाने के लिए सभी कार्यकर्ताओ, मतदाताओं एवं दानदाताओं का हार्दिक आभार।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat May 25 2019 20:17:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सभी कार्यकर्ताओ के लिए विशेष सूचना :
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इस पोस्ट में Redo = रेडो नामक क़ानून ड्राफ्ट के बारे आवश्यक सूचनाएं दी गयी है.
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(1) प्रस्तावित Redo क़ानून थानों-अदालतों-स्कूलों-अस्पतालों की दशा को बेहतर बनाने के लिए लिखा गया है. इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। और तब नागरिक यह बता सकेंगे कि वे मौजूदा जिला शिक्षा अधिकारी, जिला चिकित्सा अधिकारी एवं जिला जज की नौकरी चालू रखना चाहते है, या उन्हें निकाल कर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है। साथ ही शिक्षा-चिकित्सा एवं जिला न्याय विभाग से सम्बंधित शिकायतों की सुनवाई करने तथा दंड देने की शक्ति जजो के पास नही, बल्कि आम नागरिको की ज्यूरी के पास रहेगी।
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(2) इस क़ानून का हेश टेग - #Redo105 , #VoteWapsiPassBook , #P20180436105
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(3) मुख्यमंत्री इस क़ानून को अधिसूचना के रूप में राज्य सरकार के गेजेट में सीधे छाप सकते है। इसे प्रधानमंत्री द्वारा भी केंद्र सरकार के गेजेट में छापा जा सकता है।
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(4) यह क़ानून वोट वापसी पासबुक पर टिका हुआ है, और यह बिना किसी वेबसाईट, सर्वर, इंटरनेट आदि के काम कर सकेगा.
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इस क़ानून का समर्थन करने का तरीका निचे दिया गया है :
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है, तो पहला कदम उठाने के लिए यह क़ानून प्रधानमंत्री को भेजे. इसके लिए आपको इस क़ानून की बुकलेट छपवानी होगी. बुकलेट के पीडीऍफ़ का लिंक -
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<https://www.facebook.com/groups/823035381428996/permalink/824469107952290/>;
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बुकलेट में 4 पेज ( = 8 पृष्ठ ) होंगे और यह बुकलेट 2 रूपये की कीमत में छपेगी. तो पहले कदम के रूप में आपको 1000 की संख्या में यह बुकलेट छपवानी होगी, जिस पर आपको 2000 रूपये का खर्च आएगा. यदि आप किसी शहर में 2-3 कार्यकर्ता है तो यह बुकलेट छपवा सकते है, और इस नागरिको में बाँटते रह सकते है. यह बुकलेट पेम्पलेट भी है, और बुक पोस्ट भी है. इसी से नागरिको को ड्राफ्ट के बारे में सूचना दी जायेगी और यदि नागरिक इसका समर्थन करता है तो वह इस पर 4 रूपये के टिकेट चिपका कर पीएम को बुक पोस्ट कर देगा. जब तक आप इसे नहीं छपवाते तब तक आप मुझसे यह बुकलेट मंगा सकते है. मैं आपको इसकी कुछ कोपियाँ कोरियर करूँगा. जिन्हें भी ये बुकलेट चाहिए वे कमेन्ट में “हाँ” या “मुझे भेजें” लिखे.
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दूसरा तरीका यह है कि आप इस ड्राफ्ट का लेटर पीएम को भेज सकते है. लेटर भेजने के लिए आपको इसके ड्राफ्ट का print out निकालना होगा. लेटर यहाँ से डाउनलोड करे -
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<https://www.facebook.com/groups/823035381428996/permalink/824469944618873>;
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लेटर फोर्मेट 1 पेज ( = 2 पृष्ठ ) का है. आप दो पृष्ठों का print out निकाल ले और फिर एक पेज पर इसकी आगे पीछे इसकी फोटो कोपी करवाकर यह एक पेज लिफाफे में डालकर पीएम को पोस्ट कर दें. लिफाफे को चिपकाना नहीं है, और इस पर बुक पोस्ट लिखकर 4 रूपये के टिकेट चिपकाने है. एक बार print out निकालने के बाद आप एक पेज के आगे पीछे फोटो स्टेट करवाकर इसे अन्य को भी दे सकते है. इस तरह 2 रूपये + 4 टिकेट + 1 रूपये लिफाफा = 7 रूपये में ये लेटर आप पीएम को भेज सकते है. बुकलेट छपवाने पर भी यह 2 रूपये बुकलेट + 4 रूपये टिकेट = 6 रूपये में पड़ेगा.
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मोबाइल पर पढने के लिए एवं व्हाट्स एप पर भेजने के लिए पीडीऍफ़ यहाँ से डाउनलोड करें -
. <https://www.facebook.com/groups/823035381428996/permalink/823053544760513/>;
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मोबाईल पर यह क़ानून आप इस लिंक पर भी पढ़ सकते है, और चेंज डॉट ओआरजी पर इस पिटीशन को वोट कर सकते है -
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<http://chng.it/LJK7jXQW>;
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इस एल्बम को फोलो करें. मैं इस क़ानून के बारे में अन्य जानकारियां भी इस एल्बम में रखता रहूँगा.
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed May 29 2019 21:30:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

समाधान - Redo क़ानून थानों-अदालतों की दशा को बेहतर बनाने के लिए लिखा गया है. इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। और तब नागरिक यह बता सकेंगे कि वे मौजूदा एसपी एवं जिला जज की नौकरी चालू रखना चाहते है, या उन्हें निकाल कर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है। साथ ही पुलिस विभाग से सम्बंधित शिकायतों की सुनवाई करने तथा दंड देने की शक्ति जजो के पास नही, बल्कि आम नागरिको की ज्यूरी के पास रहेगी
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<https://www.change.org/p/pmoindia-redo105>;
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