Thu Oct 04 2018 17:47:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
राईट टू रिकॉल ग्रुप को अन ब्लॉक करवाने के लिए फ़ेसबुक को कम्प्लेन करे —
Kistura Ram Choudhary:
फेसबुक ने राइट टू रिकॉल पार्टी ग्रुप को ब्लॉक कर दिया है ।
--- <https://www.facebook.com/groups/rtrindia/> !!!
अगर आप इस ग्रुप के मेंबर है तो फेसबुक को निम्नलिखित शिकायत दर्ज कराएं और इस ग्रुप को अनब्लॉक करवाएं ।
<https://www.facebook.com/groups/rtrindia/>
धन्यवाद
ओर शिकायत कहाँ करनी है उसके लिए निचे स्क्रीन शोर्ट दिया हुँ उसको देखे -ओर यह स्टेप फोलो करे
1.Report problem पर click करें
2.Something not working पर click करे
3.उसके बाद "group "select करे
4, इसके बाद यह 👇मेसेजmsg copyy करें
ओर जो लिखने कि जगह ओपन होती है उधर पेस्ट करके सेंड कर दे
I was member of the group --- <https://www.facebook.com/groups/rtrindia/>
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And you have blocked this group !!!
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There was NO porn, no violence etc in this group.
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It was a POLITICS group with 100% legal/ethical/political posts. Since it had political posts, I suspect that our political rivals must have registered many WRONG complaints against this group. But you pls take a look --- there was NO violence or porn , and NO defamatory posts either !!
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SO PLEASE UNBLOCK THIS GROUP
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Fri Oct 05 2018 05:39:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
वेनेजुअला में राईट टू रिकॉल राष्ट्रपति होने के बाद भी वह अमेरिका जैसा कम भ्रष्ट क्यों नहीं बन सका ?
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(1) राईट टू रिकॉल राष्ट्रपति प्रक्रिया पॉजिटिव रिकॉल की बजाय नेगेटिव रिकॉल का उपयोग करती हैं | इसलिए अधिकांश वोटर्स रिकॉल के लिए मुहीम नहीं चलते क्योंकि वे डरते हैं “यदि नया व्यक्ति इससे भी ज्यादा भ्रष्ट निकला तो क्या ”? राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया में पॉजिटिव रिकॉल है अर्थात एक वोटर अधिकतम 5 प्रत्याशियों को अनुमोदित कर सकता है और पदासीन प्रधानमंत्री को भी अनुमोदित कर सकता है | बाद में, अनुमोदनों को अंको के अनुमोदन के रूप में बदला जा सकता है यानि वोटर या तो स्वीकृत कर सकता है या अवहेलना कर सकता है या प्रत्याशियों को -100 से 100 के बीच के अंक दे सकता है (अवहेलना = शून्य अंक ) |
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2) वेनेजुअला में रिकॉल प्रक्रिया और भी कमजोर होने का कारण है – ये शर्त कि कम से कम 190,000 हस्ताक्षर पहले इकट्ठे करना होंगे | (वेनेजुला में लगभग 1.90 करोड़ वोटर हैं )| तो वहां हस्ताक्षर सत्यापन की प्रक्रिया बहुत लम्बी होती है | ऐसा कई बार होता है कि समूह-A 1,00,000 हस्ताक्षर इकठ्ठा करेगा और समूह- B ने भी 1,00,000 हस्ताक्षर इकट्ठे करेगा लेकिन समूह – A के समर्थक B के पेटीशन पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे | और कई बार हस्ताक्षर इकट्ठे करने वाले रिश्वत ख लेते हैं या फिर उन्हें धमकाया जाता है | हमारे द्वारा प्रस्तावित रिकॉल प्रक्रिया में, कोई हस्ताक्षर इकठ्ठा नहीं करना है और इसलिए किसी सत्यापन की जरुरत नहीं है | प्रत्येक वोटर को स्वयं पटवारी कार्यालय जाकर या सुरक्षित एप्प / एस.एम.एस. द्वारा वोट देना होगा और इसलिए अनुमोदन दर्ज करते वक्त ही सत्यापन हो जाता है | और इसमें किसी तरह के संगठनवाद होने की सम्भावना नहीं है या कुछ माध्यमिक कार्यकर्ता या नेताओं के बिकने की संभावना नहीं है |
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(2a) इसे कहते हैं – तुल्यकालिक या समकालिक रिकॉल प्रक्रिया (Synchronous Recall Procedure) बनाम अतुल्यकालिक रिकॉल प्रक्रिया (Asynchronous Recall Procedure). तुल्यकालिक रिकॉल प्रक्रिया में, अनेक मतदातायों को अगले स्तर पर जाने के लिए एक साथ और एक ही समय पर किसी गतिविधि को अंजाम देना होता है जबकि अतुल्यकालिक रिकॉल प्रक्रिया में, इसके विपरीत हर मतदाता अपने चुने हुए समय और दिन आने पर कार्य करता है और जब एक निश्चित आंकड़ा इकट्ठे हो जाता है, बदलाव हो सकते हैं | तुल्यकालिक प्रक्रिया छोटे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स में अच्छी हैं जहाँ हर एक कंपोनेंट को केवल एक विशेष कार्य करना होता है और हर एक कंपोनेंट अन्य कंपोनेंट्स से जुड़ा होता है | लेकिन कुछ मतदाता हो सकता है सोमवार को फ्री हों और कुछ मंगलवार को और इसलिए करोड़ों मतदाताओं के साथ निपटने में, अतुल्यकालिक रिकॉल प्रक्रिया ज्यादा बेहतर होती है | उदहारण- चुनाव प्रक्रिया तुल्यकालिक है अर्थात सभी मतदाताओं को उसी तय दिन में वोट करना पड़ेगा | लेकिन हमारी प्रस्तावित रिकॉल प्रक्रिया तुल्यकालिक नहीं है --- कोई भी मतदाता अपना अनुमोदन किसी भी दिन देने के लिए स्वतंत्र है |
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(3) आगे, वेनेजुअला में, चुनाव परिषद (भारत में चुनाव आयोग के समान) रिकॉल प्रक्रिया को निरस्त कर सकती है !!! यहाँ तक कि हस्ताक्षर इकठ्ठा करने को भी निरस्त कर सकती है !!! यह राईट टू रिकॉल को और भी ज्यादा पेचिंदा बना देता हैं |
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(4) और अंत में, वेनेजुअला के राष्ट्रपति के ऊपर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया है लेकिन जूरी सिस्टम नहीं है और ना ही जिला स्तर या राज्य स्तर के अधिकारीयों और जजों और अन्य सरकारी पदों पर राईट टू रिकॉल अथवा चुनाव करने का अधिकार है | और ना ही जिला स्तर पर जनमत संग्रह का अधिकार है और केवल राष्ट्र स्तर पर जनमत संग्रह का अधिकार है |
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तो इसलिए मतदाता राईट टू रिकॉल राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति को नियंत्रित कर सकते है (उदहारण-- राष्ट्रपति को नोटबंदी रद्द करने के लिए मजबूर किया जा सकता है) | लेकिन ये मतदाताओं को सही नीतियाँ बनाने में सहायक नहीं है क्योंकि प्रधानमंत्री स्तर पर, बड़े राजनैतिक समूह को चुनना ही एक मात्र विकल्प होता है और सभी बड़े राजनैतिक ग्रुप पेड मीडिया पर निर्भर हैं और इसलिए पेड मीडिया प्रायोजक अपनी नीतियाँ चलाते हैं |
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जूरी सिस्टम के ना होने से, निर्माणकरता और औद्योगिक इकाइयों को अधिकारीयों के भ्रष्टाचार और गलत मनमानी का शिकार होना पड़ता है और इसी वजह से वेनेजुअला में औद्योगिक विकास घटिया है और इसलिए बेरोजगारी ज्यादा है और इसलिए अपराध भी |
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अगली समस्या है— MRCM जैसे कानून का अभाव | कच्चे तेल से होने वाली आय का सीधे नागरिकों के पास जाना लेकिन पर ये सीधे शीर्ष अधिकारीयों के हाथों में जाती है | वे इसे अपनी जेबों में भरते हैं और उड़ा देते हैं | MRCM का अभाव हैं क्योंकि वेनेजुअला के कार्यकर्ता या तो MRCM जैसे विकल्पों के बारे में अनजान है या फिर उन्हें गरीबी मिटने में कम रूचि हैं और केवल उन्हें भ्रष्टाचार कम करना है |
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और वेनेजुअला में राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का कानून ना होने से शिक्षा दयनीय है और इसलिए गणित/ विज्ञान / इंजीनियरिंग की शिक्षा भी घटिया है और इसलिए भी औद्योगिक विकास बहुत कम है |
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अमेरिका के पास MRCM नहीं है लेकिन अमेरिका में जूरी सिस्टम है और जिला स्तर पर रिकॉल और चुनाव प्रक्रियाएं हैं और इसलिए निर्माणकर्तायों को कम शोषण झेलना होता है और इसलिए औद्योगिक उत्पादकता अधिक है और बेरोजगारी कम है और इसलिए गरीबी कम है |
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कुछ फर्जी रिकालिस्ट ये दावा करते हैं कि वेनेजुअला अमेरिका जैसा देश नहीं बन सकता क्योंकि उसके कानूनों में “ अधिकारी एक अच्छी सरकारी वेबसाइट बनाएगा और सरकारी वेबसाइट पर सारी जानकारी रखेगा” जैसे खंड नहीं है !! ये केवल बकवास है |
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वेनेजुअला में वोटर्स को पता है कि जिला स्तर पर शीर्ष अधिकारी और छोटे अधिकारी भ्रष्ट हैं और इसके लिए उन्हें किसी वेबसाइट की जरुरत नहीं है | लेकिन उनके पास जूरी सिस्टम और जिला स्तर पर अमेरिका जैसे राईट टू रिकॉल प्रक्रियां नहीं है जिससे वे इन भ्रष्ट पदों को नियंत्रित और दण्डित कर सके, इसलिए मेरे विचार में वेनेजुअला अमेरिका समान नहीं बन सकता !! और उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं है कि कौन से कानूनी ड्राफ्ट्स जूरी सिस्टम, जिला स्तर पर रिकॉल ला सकते हैं और राईट टू रिकॉल राष्ट्रपति में भी सुधार कर सकते है |
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अधिकतर राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता ये भी दावा करते हैं कि वेनेजुअला में राईट टू रिकॉल विफल हुआ क्योंकि वहां के वोटर्स में अच्छे नैतिक मूल्य नहीं है” | इसलिए पहले, हमें सभी वोटर्स के अन्दर अच्छी नैतिक मूल्य डालने होंगे और उसके बाद ही हमें राईट टू रिकॉल लाना चाहिए !!
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अन्य शब्दों में, “रिकॉल प्रक्रियाओं के छपने के अगले दिन ही अच्छी वेबसाइट आना चाहिए” , “नैतिक मूल्य रिकॉल प्रक्रियायों से पहले लाने होंगे” , इत्यादि सभी तर्क बकवास और व्यर्थ हैं |
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राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री की जरुरत है ताकि प्रधानमंत्री जैसे शक्तिशाली व्यक्ति राष्ट्रीय/राजकीय /जिला स्तर पर रिकॉल कानूनों और जूरी सिस्टम और MRCM जैसे अच्छे कानूनों को हटाने की हिम्मत ना कर सके !! लेकिन किसी भी एक विभाग में बदलाव तब आयेंगे जब जिला स्तर/ राज्य स्तर / राष्ट्र स्तर पर बैठे मंत्रियों, अधिकारीयों और जजों का काम सुधरें और उनके द्वारा निजी क्षेत्र में कार्यरत लोगों को परेशान ना किया जाए | और इसलिए जिला स्तर/ राज्य स्तर / राष्ट्र स्तर पर बैठे मंत्रियों, अधिकारीयों और जजों के ऊपर राईट टू रिकॉल और जूरी सिस्टम होना जरुरी है और “अच्छी जानकरी वाली वेबसाइट” और “अच्छे नैतिक मूल्यों” जैसे दावे राईट टू रिकॉल सुधार सकते हैं, ये केवल रिकालिस्ट विरोधी और फर्जी रिकालिस्ट द्वारा बताए समय की बर्बादी वाले तर्क है !!
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तो वेनेजुअला की जनता को हम सुझाव समाधान के रूप में “पॉजिटिव रिकॉल, MRCM, सभी स्तर पर जूरी /रिकॉल का उपयोग” देते जबकि फर्जी रिकालिस्ट उन्हें एक “अच्छी वेबसाइट क्लॉज़” जोड़ने के अलावा कुछ नहीं बताएँगे और रिकालिस्ट विरोधी लोग उन्हें “नैतिक मूल्य सुधार, लोकपाल लाओं”, जैसे समाधान बताएँगे !! आप इन सुझावों की तुलना कर सकते हैं और तय करें कौन असली हैं और कौन नकली !!
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तो हम राईट टू रिकॉल ग्रुप में वेनेजुअला से क्या सीख ले सकते हैं ? कुछ नया नहीं !!
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हम राईट टू रिकॉल ग्रुप पहले से जानते हैं कि नेगेटिव रिकॉल कानून व्यर्थ हैं | यहाँ तक कि हमारे प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट्स में नेगेटिव रिकॉल प्रक्रिया मौजूद ही नहीं है | और हमने मतदाताओं के लिए अतुल्यकालिक प्रक्रिया (Asynchronous Procedure) का प्रावधान भी दिया है अर्थात मतदाता अपना अनुमोदन किसी भी दिन करने के लिए स्वतंत्र हैं | और इसीलिए राईट टू रिकॉल पुलिस आयुक्त, राईट टू रिकॉल सांसद/विधायक को छोड़कर, हमारे द्वारा प्रस्तावित सभी रिकॉल कानून अतुल्यकालिक प्रक्रिया हैं |
और यहाँ तक कि राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख का एक अतुल्यकालिक संस्करण भी है और राईट टू रिकॉल सांसद/विधायक का प्रथम आधा भाग भी अतुल्यकालिक है | राईट टू रिकॉल सांसद/विधायक का दूसरा आधा भाग ही केवल तुल्यकालिक(Synchronous) है क्योंकि प्रचलित चुनावी कानूनों के साथ ताल-मेल बैठाने के लिए जरुरी है |
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तो कानूनी ड्राफ्ट के नजरिये से, वेनेजुअला रिकॉल हमें वही सब बताता है जो हम सब पहले से जानते है लेकिन सक्रियतावाद के नजरिये से, हमने देखा कि कैसे फर्जी रिकालिस्ट और रिकालिस्ट विरोधी लोग अपने झूठे दावों को सही साबित करने के लिए नेगेटिव रिकॉल की कमियों का इस्तेमाल करते हैं | ये मालूम नहीं था | किसी भी संकट के आने पर, बहुत से लोग अच्छे और सच्चे समाधान प्रस्तावित करेंगे और बहुत से फर्जी और घटिया !!!
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Fri Oct 05 2018 14:02:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
नाना पाटेकर शायद शिवसेना या मनसे ज्वाइन करने वाले थे। शायद इसलिए संघ नेताओ और कार्यकर्ताओं और मिशनरीज़ ने मिलकर उन पर निशाना साधा। ये सभी चाहते हैं कि नाना पाटेकर राजनीती से दूर रहे या फिर सिर्फ संघ =बीजेपी को ज्वाइन करें।
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ज्यादा कुछ भी नहीं है
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(1) एक अभिनेत्री को एक फिल्म के डांस सांग के शूट के समय नाना पाटेकर से कुछ तकलीफ महसूस हुई औरइसलिए वो अभिनेत्री शूट छोड़कर चली गयी और चूंकि सेट बहुत महंगा था जिससे प्रोडूसर को काफी नुक्सान हो रहा था और इसलिए बॉलीवुड इंडस्ट्री के सभी प्रोडूसर्स ने उस अभिनेत्री का बहिस्कार करने का फैसला किया।
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(2) अभिनेत्री को छोटा मोटा काम भी नहीं मिल रहा था और इसके लिए उसने नाना पाटेकर पर आरोप लगा दिया।
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(3) जो लोग नाना पाटेकर पर निशाना साधना चाहते थे उन्होंने उस अभिनेत्री से मुलाकात की और कहा कि वह नाना पाटेकर पर छेड़छाड़ या छेड़छाड़ के प्रयास का आरोप लगा दे।
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(4) प्रायोजकों ने अभिनेत्री के जरिये नाना पाटेकर पर निशाना साधा क्योंकि नाना ने कांग्रेस और संघ को ज्वाइन करने से इंकार कर दिया और इसकी जगह शिवसेना /मनसे ज्वाइन करने की तैयारी कर रहे थे।
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इससे ज्यादा कुछ नहीं है।
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एक समानता के रूप में देखिये, संत राम रहीम गुरमीतजी के विरुद्ध चलाये गए फर्जी मामलें पर गौर करें। वे मिशनरीज के रस्ते का काँटा बन रहे थे और संघ नेता और मोदीजी भी उन्हें जयादा पसंद नहीं करते थे क्योंकि दलितों /पिछड़ा वर्ग के वोटर्स में उनकी पहुँच बहुत अच्छी थी। मोदीजी और संघ कार्यकर्ता सभी हिन्दू वोटर्स के ऊपर केवल अपना एकाधिकार चाहते हैं और हर वो व्यक्ति जिसका प्रभाव हिन्दू दलित और पिछड़े वोटर्स पर ज्यादा है, मोदीजी और संघ कार्यकर्ताओं को पसंद नहीं है या फिर उनके मकसद के बीच रुकावट जैसा है इसलिए मोदीजी और संघ और मिशनरीज़ ने सांठ गाँठ बनाकर डेरा सच्चा सौदा को एक झूठे मुक़दमे में फंसकर बर्बाद कर दिया।
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सौ बात की एक बात है --- जो कोई भी हिन्दू वोटो में दरार डालेगा , मोदीजी और संघ कार्यकर्ता पेड मीडिया और मिशनरीज के साथ मिलकर उस पर झूठे मुक़दमे चलवाकर उसे बर्बाद कर देंगे, अब चाहे वो संत आशाराम बापू हो या संत रामरहीम या फिर संत रामपाल या फिर चाहे नाना पाटेकर हो।
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Sat Oct 06 2018 17:44:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Sun Oct 07 2018 05:41:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Kushagra Yadav Salonup:
There is no such thing as public opinion. There is only published opinion.
Winston Churchill
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Sun Oct 07 2018 07:32:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
2018 विधानसभा चुनाव ; संभावित उमीदवार ध्यान दें
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राजस्थान में फॉर्म भरने की तारीख : 12-19 नवम्बर , वोटिंग : 7 दिसम्बर
मध्य प्रदेश में फॉर्म भरने की तारीख : 2- 9 नवम्बर , वोटिंग : 28 नवम्बर
छत्तीसगढ़ में फॉर्म भरने की तारीख : 16-23 अक्टूबर , वोटिंग : 12-18 नवम्बर
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जो भी कार्यकर्ता इन राज्यों में निवास करते है , वे राईट टू रिकॉल , ज्यूरी सिस्टम कानूनों का प्रचार करने के लिए चुनाव लड़ने का प्रयास करें।
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Sun Oct 07 2018 09:11:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
1991 के बाद से सरकारों द्वारा किया जा रहा सबसे बड़ा घोटाला FDI है !!
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एफडीआई में शामिल है -
A) राष्ट्रीय सम्पत्ति ( खनिज + प्राकृतिक संसाधन ) निजी कम्पनियों को बेचने के एवज में घूस खाना, एवं
B) सरकार द्वारा संचालित आवश्यक सेवाओं के उपक्रम ( चिकित्सा + शिक्षा + परिवहन आदि ) घूस खाकर निजी कम्पनियों के हवाले कर देना।
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दूसरा सबसे बड़ा घोटाला योजनाएं है। सभी योजनाये घोटाले है। और पिछले 70 सालो से सभी सरकारे समस्या का समाधान करने के लिए क़ानून बनाने की जगह योजनाये बनाकर घोटाले करती है।
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ऍफ़डीआई + योजनाए = ये दोनों घोटाले पूरी तरह से कानूनी होते है, और सरकारे इन्हें अपनी उपलब्धियों में गिनवाकर वोट भी मांगती है। इस तरह वे घोटाले करते है , और इसे "विकास" के नाम से बताकर वोट भी मांगते है।
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इस तरह सबसे बड़ा घोटाला 'एफडीआई एवं योजनाओं' से जनित "विकास" है !!
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Sun Oct 07 2018 19:28:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
मेरा मानना है कि नाना पाटेकर जी को ठिकाने लगाने के लिए फील्डिंग मोदी साहेब , संघ के नेताओं और संघ के कार्यकताओ ने जमायी है --- नाना पाटेकर एवं तनुश्री दत्ता पर बिकाऊ अर्नब गोस्वामी के इस वीडियो में 10 मिनिट का कोई भी हिस्सा देखें -- <https://www.youtube.com/watch?v=EDx1KywLLrQ>
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कृपया इस वीडियो को देखने के लिए अपने 40 मिनिट बर्बाद न करे। आप इस वीडियो का कोई भी 5-10 मिनिट का हिस्सा देखकर यह समझ सकते है कि अर्नब गोस्वामी किस तरह तनुश्री दत्ता का पक्ष ले रहा है।
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बिकाऊ अर्नब गोस्वामी संघ की टीम में है। और जब बिकाऊ अर्नब गोस्वामी नाना पाटेकर जी के खिलाफ स्टेंड लेता है तो यह अपने आप में सबूत है कि मोदी साहेब , संघ के नेता और संघ के कार्यकर्ता नाना पाटेकर जी को गिराना चाहते है।
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और मोदी साहेब , संघ के नेता , संघ के कार्यकर्ता नाना पाटेकर जी को क्यों गिराना चाहते है --- क्योंकि नाना पाटेकर जी मनसे या शिव सेना जॉइन करना चाहते थे। और इसी वजह से संघ के नेताओं को नाना पाटेकर "हिन्दू वोट कटुआ" नजर आने लगे। एक ऐसा आदमी जो हिन्दू वोट काट कर उनके द्वारा रची गयी हिन्दू वोटर्स की "राजनैतिक एकता" को भंग कर रहा है।
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इस वीडियो का 5-10 का कोई भी हिस्सा देखें।
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और वीडियो में दिए जा रहे तर्क देखें -- वीडियो में एक व्यक्ति तनुश्री दत्ता की कार में से हवा निकाल रहा है और दूसरा कार की छत पर कूद रहा है। इन व्यक्तियों का पब्लिक में नारको टेस्ट लिया जाना चाहिए ताकि यह पता लगे कि हिंसा करने के लिए उन्हें किसने पैसे दिए थे। लेकिन बिकाऊ अर्नब गोस्वामी को इस तरह की जाँच में कोई रुचि नहीं है। बल्कि बिकाऊ अर्नब गोस्वामी इस घटना का सहारा लेकर नाना पाटेकर पर कीचड़ उछाल रहा है। बिकाऊ अर्नब गोस्वामी अन्य पेनलिस्ट्स को भी उकसा रहा है कि वे नाना पाटेकर को कोसे !! और जो भी नाना पाटेकर पर कीचड़ फेंकने से इनकार करता है उसे वो महिला विरोधी ठहराता है !!!
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साफ़ है कि उनका लक्ष्य दोषी को दंड देना नहीं है। बल्कि वे नाना पाटेकर की छवि खराब करना चाहते। तो नाना पाटेकर की छवि ख़राब करने के लिए बिकाऊ अर्नब गोस्वामी को पैसा कौन दे रहा है ? यदि सभी घटनाओं को सिलसिलेवार देखा जाए तो यह आसानी से समझा जा सकता है कि नाना पाटेकर शिवसेना / मनसे जॉइन करना चाह रहे थे , और ऐसा होने से संघ के हिन्दू वोटो में विभाजन हो जाएगा।
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संत श्री आसाराम जी बापू , गुरमीत राम रहीम जी , संत रामपाल जी , प्रवीण जी तोगड़िया ... और नाना पाटेकर -- जिस भी व्यक्ति में हिन्दू वोटो को खींचने या लामबंद करके उन्हें अपनी और खींचने की क्षमता होता है वह संघ को अपना दुश्मन नजर आने लगता है !!
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Sun Oct 07 2018 20:07:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
यदि कोई उम्मीदवार चुनाव पूर्व ऐसा शपथ पत्र देता है कि -- "यदि मैं किये गए वादे पूरे न करूँ तो जनता मुझे बेदखल कर सकती है।" तो ऐसे शपथ का क्या कानूनी प्रभाव होगा।
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ऐसे शपथपत्र की कोई लीगल वेल्यू नही होती है , अतः वादे तोड़ने पर भी किसी विधायक को बेदखल नही होना पड़ेगा।
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कैसे ?
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१) शपथपत्र “फ़ेक्ट शीट” होती है । जिसमें शपथकर्ता सिर्फ़ “तथ्यों” को दर्ज करता है , तथा यह घोषणा करता है कि मुझ से सम्बंधित यह “तथ्य” सही व सत्य है । जैसे - मेरे पास इतनी सम्पत्ति है , मुझ पर इतने मुक़दमे है आदि आदि । यदि शपथ पत्र में दर्ज किये गए ये तथ्य ग़लत पाए जाते है तो अमुक विभाग / संस्था शपथकर्ता पर झूठे तथ्य बताने के एवज़ में मुक़दमा कर सकता है । लेकिन किसी भी शपथ पत्र में सिर्फ़ भूतकाल एवं वर्तमान के तथ्यों को ही दर्ज किया जाता है , भविष्य के “वादे” इसमें शामिल नही किए जाते। चूंकि इसमें भविष्य लक्षी वादे किये गए है अत: यह शपथपत्र नहीं है !!
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२) यदि किसी शपथ पत्र में भविष्य में किये जाने वाले कार्यो का वादा किया गया है तो यह शपथ पत्र न होकर एक "कॉन्ट्रेक्ट=करार" हो जाता है। करार होते ही इसकी प्रकृति बदल जाती है। यदि कोई करार किया जाता है तो करार में कम से कम दो पक्षकार होना जरुरी है। तथा करार को कानूनी रूप से वैध बनाने के लिए यह जरुरी है कि किसी पक्षकार द्वारा किये गए वादे के एवज में दुसरे पक्षकार द्वारा कोई लाभकारी भुगतान किया जाए। किसी प्रतिफल के अभाव में किये गए करार का कानूनी प्रभाव शून्य होता है। किन्तु उम्मीदवार द्वारा दिए गये शपथ पत्र में सिर्फ एक पक्षकार है , दूसरा पक्षकार नदारद है !! इस तरह यह करार "शून्य" है !!
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तो भविष्य लक्षी वादों के लिए दिया जाने वाला ऐसा शपथपत्र न तो कानूनी रूप से "शपथ पत्र" है और न ही यह कोई "करार" है। इसकी कोई कानूनी कीमत नहीं। अत: इस शपथपत्र का विचलन होने पर उम्मीदवार को अदालत में नहीं खींचा जा सकता है। अत: ऐसा शपथ पत्र सिर्फ एक चुनावी स्टंट है।
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यदि किसी उम्मीदवार को यह लगता है कि वह अपने वादों के प्रति ईमानदार है , और इतना ईमानदार है कि यदि वह अपने वादे पूरे न करे तो वह सहर्ष अपनी कुर्सी छोड़ देगा , तो अमुक उम्मीदवार को अपने चुनावी एजेंडे में राईट टू रिकॉल कानूनों के ड्राफ्ट शामिल करने चाहिए। राईट टू रिकॉल क़ानून होने से मतदाताओ को यह प्रक्रिया मिल जाती है कि , यदि उम्मीदवार अपने वादे पूरे न करे , तो क्षेत्र के मतदाता बहुमत का प्रदर्शन करके ऐसे उम्मीदवार को खुद ही नौकरी से निकाल सके।
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यदि कोई उम्मीदवार वादे पूरे करने का "शपथ पत्र" देने को तैयार है किन्तु वह अपने एजेंडे में राईट टू रिकॉल के ड्राफ्ट शामिल करने को राजी नहीं है , तो यह तय है कि अमुक उम्मीदवार पर्याप्त रूप से चालाक है तथा उसकी नियत पहले से ही बिगड़ी हुयी है।
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Sun Oct 07 2018 21:13:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
मोदी साहेब ने स्वीकार किया है कि वे जब CM बने तो गुजरात को अमेरिका या इंग्लेड जैसा नही बल्कि साउथ कोरिया की तरह बनाना चाहते थे !!!
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अमेरिका या इंगलेंड़ की तरह आत्मनिर्भर और ताक़तवर नही बल्कि साउथ कोरिया की तरह एक ग़ुलाम और पंगु राज्य !!!
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और ये बात वो खुले आम कह रहे है ।
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Wed Oct 10 2018 20:58:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सऊदी अरब से आने वाले पैसे का कमाल --- कोंग्रेस और संघ के नेता गुजरात में बेरोजगारी की समस्या के लिए उत्तर भारतीयों को जिम्मेदार ठहराते है , लेकिन बांग्लादेशी घुसपेठियो को नहीं !!
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इसी तरह से कोंग्रेस और संघ के नेता महाराष्ट्र में भी बेरोजगारी की समस्या के लिए उत्तर भारतीयों को जिम्मेदार ठहराते है , लेकिन यहाँ भी बांग्लादेशी घुसपेठियो को वे क्लीन चिट दे देते है !!
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Wed Oct 10 2018 21:15:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
31 अगस्त 2013 को मोदी साहेब द्वारा दिया गया बयान -- "महिलाओ की कभी भी गलती नहीं होती" !! मोदी साहेब ने यह बयान संत श्री आसाराम जी बापू के सन्दर्भ में दिया था। उन्होंने कहा था कि, "भारत सीता एवं सावित्री का देश है , और यहाँ की महिलाएं कभी गलत नहीं होती और न ही झूठ बोलती है , समस्या भारत के पुरुषो की मानसिकता में है" !!
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यह बयान उन्होंने आसाराम जी बापू को दोषी ठहराने के लिए दिया था। जाहिर है मोदी साहेब इतनी रुग्न मानसिकता के व्यक्ति नहीं है , लेकिन वे मिशनरीज को खुश करने के लिए आसाराम जी पर कीचड़ उछालना चाहते थे। तब आसाराम जी बापू गिरफ्तार किये गए थे और यह बयान देने के कुछ ही दिन पहले मोदी साहेब गुजरात में मिशनरीज की उस संस्था में मुख्य अतिथि थे जिसका मिशन पूरी दुनिया में यीशु का सन्देश पहुँचाना है।
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अगर महिला कभी गलत आरोप नहीं लगाती तो एम् जे अकबर को लात मारकर मंत्रिमंडल से बाहर निकालने से उनको कौनसी ताकत रोक रही है ? या खुद का मामला हो तो बात अलग हो जाती है !!
<http://archive.indianexpress.com/news/modi-calls-for-change-says-perverted-male-mentality-responsible-for-sexual-crimes/1162604/>
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Wed Oct 10 2018 21:31:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
गुजरात में उत्तर भारतीयों के साथ हिंसा का मुख्य कारण है --- पुलिस एवं अदालतों में व्याप्त अकूत भ्रष्टाचार एवं इस भ्रष्टाचार से उत्पन्न बेरोजगारी।
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नेताओं के भ्रष्टचार के कारण पुलिस विभाग पर धारा 498, घरेलू हिंसा , शराबबंदी , अफीम बंदी इत्यादि मामलो का अतिरिक्त दवाब हो गया है। और इसलिए पुलिस के पास महिलाओ के विरुद्ध अपराधों में लिप्त असली मुजरिमों को पकड़ने का न तो समय है , और ना ही उनकी रूचि है। प्रस्तावित समाधान -- राइट टू रिकॉल पुलिस कमिश्नर, पुलिस विभाग की शिकायतों पर जूरी सिस्टम और सभी हिंसा के मुकदमों में जूरी द्वारा सुनवाई अनिवार्य करना। जूरी सिस्टम ड्राफ्ट का लिंक -- <https://newindia.in/causes/JurySys3>
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इसके अलावा जमीनों की ऊँची कीमतों के कारण बाहर से आकर काम करने वाले मजदूर लोग अपने परिवार को शहरों में नहीं ला पाते है।
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और फिर सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नेताओं , इनके कार्यकर्ताओं , पुलिस और जजों के भ्रष्टाचार के कारण भारत के शहरों में कॉमर्सियल सेक्स में ऊपरी खर्चा (करीब 100% से 200 % तक ) बहुत ज्यादा है , जो इसे और महंगा बनाता है।
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और नतीजे में, बढ़ती बेरोजगारी के चलते अधिकतर गुजराती युवा गैर-गुजराती मजदूरों के विरोधी बन गए है।
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2011 में युवाओं को जनलोकपाल जैसे फर्जी आंदोलन ने भ्रष्टाचार समाप्त करने के नाम पर गुमराह करके ये बताया गया था कि लोकपाल के आने से भ्रष्टाचार शून्य हो जायेगा और भ्रष्टाचार शून्य होने से बेरोजगारी और अपराध भी गायब हो जायेंगे। आगे इसी कड़ी में जनवरी 2013 से लेकर मई 2014 तक युवाओं को मोदी साहेब के कल्कि रूप को प्रचार करके जनता को गुमराह किया गया कि मोदी साहेब के गद्दी पर आते ही सभी समस्याएं जादुई तरीके से समाप्त हो जायेगी। मैं और अधिकाँश रिकालिस्ट मोदी साहेब के वादों और जनलोकपाल जैसी नौटंकियों को हमेशा से बकवास नंबर 1 मानते आए है। मेरे अनुसार कार्यकर्ताओं को वास्तविक समाधान जैसे जूरी सिस्टम, राइट टू रिकॉल पुलिस कमिश्नर / जज / मुख्यमंत्री आदि, एवं सभी हिंसक मामलों में नार्को टेस्ट इन पब्लिक, जमीनों पर संपत्ति कर, MRCM इत्यादि कानूनी ड्राफ्ट्स पर ध्यान देना चाहिए और इनका प्रचार करना चाहिए। लेकिन सोनिया-मोदी-केजरीवाल के भक्तों ने इन सभी ड्राफ्ट्स का मजाक बनाते हुए कार्यकर्ताओं को इनका विरोध करने और सोनिया-मोदी-केजरीवाल की पूजा करने के लिए उकसाया।
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और नतीजे के रूप में अब हमारे सामने एक ज्वलनशील मुद्दा खड़ा है जहाँ एक तरफ एक गैर स्थानिक मजदूर द्वारा किये गए 14 महीने की बच्ची के साथ बलात्कार की आग तेजी से बढ़ रही है , और बढ़ रही बेरोजगारी इसमें घी डालने का काम कर रही है।
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समाधान है --कार्यकर्ताओं को सोनिया-मोदी-केजरीवाल की पूजा करना छोड़ कर उपरोक्त कानूनी ड्राफ्ट्स का प्रचार करना चाहिए।
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आप इन कानूनो को भारत में लाने के लिए क्या कर सकते हैं ?
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मेरी कवर पिक्चर पर क्लिक करें और उसके विवरण में प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट्स की लिंक देखें। शुरुआत के तौर पर आप MRCM= Minerals3 कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन <https://newindia.in/causes/Minerals3> पर जाकर वोट करके करें।
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Fri Oct 12 2018 05:21:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
प्रोफेसर डॉ.जी. डी. अग्रवाल, पूर्व प्रोफेसर, आई आई टी कानपुर, गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अनशन कर रहे थे -- अपने अनशन के 110 वे दिन उनकी मृत्यु हो गयी!!! वे 86 वर्षीय थे।
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मैं आमरण अनशन के विरुद्ध हूँ। विरोध दर्ज करने के लिए प्रतीकात्मक उपवास तक ठीक है -- लेकिन मरने तक नहीं।
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दुरात्मा अन्ना हज़ारे और महादुरात्मा गाँधी जैसे धूर्त लोगो और पेड मीडिया मालिकों की वजह से आमरण अनशन भारत में एक सर्कस बनकर रह गया है। माननीय प्रोफेसर एक नेक व्यक्ति थे, लेकिन क्यों ऐसे मार्ग चुनना जिसे पेड मीडिया ने एक मजाक बनाकर रख दिया है।
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मेरे विचार में कार्यकर्ताओं को आमरण अनशन जैसे व्यर्थ समाधानों को छोड़कर कानूनी ड्राफ्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और इन ड्राफ्ट्स पर चुनाव भी लड़ना चाहिए। मेरे विचार में, जब चुनाव लड़ना प्रतिबंधित हो जायेगा, तब भी आमरण अनशन की जगह महात्मा उधमसिंह योजना पर कार्य करना ज़्यादा नतीजे देगा। हर कार्यकर्ता को अपने उद्देश्य हेतु चुनाव जरूर लड़ना चाहिए लेकिन आमरण अनशन एक व्यर्थ प्रयास है।
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माननीय प्रोफेसर साहब को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि -- ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। प्रोफेसर साहब मृत्यु तक अपने उद्देश्य हेतु प्रतिबद्ध और ईमानदार बने रहे, ऐसा आज के समय बहुत कम देखने को मिलता हैं
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<https://hindi.timesnownews.com/india/article/environmentalist-gd-agrawal-dies-who-fasting-on-cleaning-of-ganga-issue/297889>
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दिल को छू लेने वाला मोदी साहेब का यह ट्वीट भी पढ़े , जो उन्होंने 2012 में किया था । तब जी डी अग्रवाल अनशन पर थे ।
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मोदी साहेब का ट्वीट ---- “स्वामी सानंद गंगा की धारा अविरल बनाए रखने के लिए आमरण अनशन पर है । मैं उनके स्वास्थ्य की कामना करता हूँ , और आशा करता हूँ कि केंद्र सरकार गंगा को बचाने के लिए सार्थक क़दम उठाएगी” !!
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<https://twitter.com/narendramodi/status/181972357643112450>
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Sat Oct 13 2018 13:19:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Satnam Kaur:
महिलाओ को अगर न्याय चाहिए होता तो,
#Metoo के साथ ये ट्वीट होता
@PMOIndia
#juryTrial
#RightToRecalljudge
#NarcoTest
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Sat Oct 13 2018 21:47:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
बीजेपी मंत्री अश्विनी चौबे का मानना है कि बिहारी ऐम्स में आकर भी समस्याएँ खड़ी कर रहे है !!!
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Sun Oct 14 2018 09:09:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
सबरीमाला विवाद—25 से 55 वर्ष के बीच की उम्र के क्रमरहित चुने हुए 1500 हिन्दू वोटर्स की जूरी द्वारा सुनवाई और फैसला
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कांग्रेस-संघ-सीपीएम-आप, ये सभी पार्टियाँ और इनके कार्यकर्ता मिशनरीज़ के एजेंट भ्रष्ट सुप्रीम कोर्ट जजों के महिलायों के प्रवेश के फैसले का समर्थन कर रहे हैं और एक बड़ा जनविरोध उठने के बाद, अब ये सभी कदम पीछे खीच रहें हैं !!!
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संघ द्वारा दिया गया एक बयान देखें--- <https://www.news18.com/news/india/rss-backs-womens-entry-in-temples-says-such-unfair-traditions-should-be-discarded-1215530.html>
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संघ मंदिरों में निषेध स्थानों पर महिलाओं के प्रवेश का समर्थन करता है और ये कहता है कि ऐसे कुरीतियों को हटा देना चाहिए !!
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“ऐसे संवेदनशील मुद्दे संवाद और चर्चा द्वारा सुलझाने चाहिए ना कि आक्रोश से,”—संघ कहता है
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और ऐसी 10 से ज्यादा न्यूज़लिंक आपको मिल जाएँगी जिसमे कांग्रेस-सीपीएम पार्टीयों के नेताओं ने भी मिशनरीज़ के एजेंट सुप्रीम जजों के फैसले का समर्थन किया है |
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और अब जबकि केरला में इस फैसले के विरोध में एक बड़ा आक्रोशित जनांदोलन खड़ा हो गया है, तो ये सभी पार्टियाँ अपना रुख बदल रहे हैं और मंदिर में महिलायों के प्रवेश निषेध का समर्थन कर रहे हैं !!
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कुल मिलाकर सार ये हैं -- कांग्रेस-संघ-सीपीएम-आप ये सभी पार्टियाँ और इनके कार्यकर्तायों का कोई वजूद नहीं है , ये सब वही करते हैं जो सुप्रीम कोर्ट के जज और मिशनरीज और अमेरिका-ब्रिटेन के धनिक कहते हैं | लेकिन जब जन आक्रोश उमड़ता हैं तब ये अपना रुख बदल लेते हैं !! पर जैसे ही जन आक्रोश कमजोर पड़ता है, ये फिर से मिशनरीज और अमेरिका-ब्रिटेन के धनिकों की घुलमि शुरू कर देते हैं |
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प्रस्तावित समाधान—कार्यकर्ताओं को भारत में जूरी सिस्टम और राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज कानून लाने के लिए कार्य करना चाहिए |
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यदि आप राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज कानून से सहमत हैं तो कृपया <https://newindia.in/causes/RtrSCCj> पर वोट कर अपना समर्थन दर्ज करें | साथ में <https://fb.com/ProposedLawsHindi/posts/859860420858820> पर दिए गए सम्पूर्ण ड्राफ्ट को “Law Drafts I Support” एल्बम में शेयर भी करें |
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आपसे विनती हैं सोमोके और कांग्रेस-संघ-आप नेताओं और कार्यकर्ताओं के पीछे अपना समय ख़राब ना करें | ये दोगले लोग बढ़ते आक्रोश का अभी समर्थन करेंगे, पर जैसे ही आक्रोश कमजोर पड़ेगा, ये मिशनरीज के फैसले का पुन: समर्थन करने लगेंगे |
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Fri Oct 19 2018 17:25:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Fri Oct 19 2018 17:51:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
कोंग्रेस/बीजेपी=आरएसएस/सीपीआई/आप लीडर्स व कार्यकर्ताओं तथा सुप्रीम कोर्ट के जजो ने मिलकर 1000 से 3000 तक केरला पुलिस के जवानों को इस महिला (रेहना फातिमा) को सबरीमाला मंदिर में घुसाने का आदेश दिया ।
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कृपया इस संस्कारवान महिला के अन्य फोटो भी इस लिंक में देखे
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congress/rss/cpi/aap leaders / workers and supreme judges have ordered some 1000 to 3000 Kerala policemen to enable this lady in picture, named Rehna Fatima, to enter Sabrimala temple.
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Pls do see other pictures of he lady at this link ---
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Pls -- you MUST see the pictures of the ;lady, whose rights matter to all congress/rss/aap/cpi workers and supreme judges so much --- <http://jollywollywood.blogspot.com/2016/03/mallu-model-rehana-fathima-bold.html>
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Sun Oct 21 2018 08:50:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
आतिशबाज़ी में कमी आने से दिल्ली डेंगू की चपेट में आने लगी ।
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Mon Oct 29 2018 04:13:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
यदि आपको यह लगता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय आपकी फ़ेसबुक प्रोफाइल फ़ोलो नही करता है, तो आपको अपनी माँग पोस्ट कार्ड पर लिखकर PMO भेजनी चाहिए ।
Ashok Jain VotevapsiCm:
आज 28 अक्टूबर 2018 रविवार को प्रधानमंत्री जी को पोस्ट कार्ड के माध्यम से EVM मशीन को बैन किये जाने व बैलेट पेपर से वोटींग कराने के लिए कानून बनाने की मांग करी |
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जो नागरिक समार्ट फोन, ट्वीटर, इंटरनेट यूज नहीं करते |
वो नागरिक प्रधानमंत्री जी को पोस्ट कार्ड लिखकर अमुख कानून बनाने की मांग कर सकते हैं |
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Wed Oct 31 2018 15:37:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
यदि आपने स्लीव लेस कुर्ता या कुर्ती पहनी है तो जामा मस्जिद में प्रवेश नही कर सकते ।
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लेकिन सुप्रीम कोर्ट में बैठे भ्रष्ट जज सबरीमाला स्थित ब्रह्मचारी भगवान अयप्पा के मंदिर में ख़ून से सना सेनेट्री नेपकिन भी घुसाने पर आमादा है। वो भी ज़बरदस्ती !!!
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समाधान - राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज , ज्यूरी सिस्टम एवं NHDMT - राष्ट्रीय हिंदू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट ।
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NHDMT के गेजेट में प्रकाशित होने से हिंदू मंदिर सुप्रीम कोर्ट में बैठे मिशनरीज़ के एजेंट जजों के चंगुल से निकल कर हिंदू नागरिकों के नियंत्रण में आ जाएँगे और राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज का क़ानून आने के बाद भारत के आम नागरिक भ्रष्ट जजों को लात मारकर नौकरी से निकाल सकेंगे ।
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फ़िलहाल भारत में राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज का क़ानून नही होने के कारण आम नागरिक इन्हें लात मारकर निकालने में अक्षम है । मौजूदा व्यवस्था में इन झंडुओ को सिर्फ़ संसद में महाभियोग लाकर ही हटाया जा सकता है । किंतु सत्ता में बैठे संघ के सांसदों और मोदी साहेब ने महाभियोग लाने से साफ़ इंकार कर दिया है । वे भ्रष्ट जजों के इस फ़ैसले का पूरा समर्थन कर रहे है । संघ के सभी कार्यकर्ता भी मोदी साहेब के इस फ़ैसले में गले गले पानी तक उनके साथ खड़े है । और आम आदमी पार्टी एवं कोंग्रेस तो जजों के इस फ़ैसले के समर्थन में है ही ।
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राष्ट्रीय हिंदू देवालय प्रबंधन ट्रस्ट के क़ानून का समर्थन करने के लिए यहाँ वोट करे - newindia.in/templelaw5
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