Pawan Jury BhilwaraRj
नाना पाटेकर शायद शिवसेना या मनसे ज्वाइन करने वाले थे। शायद इसलिए संघ नेताओ और कार्यकर्ताओं और मिशनरीज़ ने मिलकर उन पर निशाना साधा। ये सभी चाहते हैं कि नाना पाटेकर राजनीती से दूर रहे या फिर सिर्फ संघ =बीजेपी को ज्वाइन करें।
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ज्यादा कुछ भी नहीं है
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(1) एक अभिनेत्री को एक फिल्म के डांस सांग के शूट के समय नाना पाटेकर से कुछ तकलीफ महसूस हुई औरइसलिए वो अभिनेत्री शूट छोड़कर चली गयी और चूंकि सेट बहुत महंगा था जिससे प्रोडूसर को काफी नुक्सान हो रहा था और इसलिए बॉलीवुड इंडस्ट्री के सभी प्रोडूसर्स ने उस अभिनेत्री का बहिस्कार करने का फैसला किया।
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(2) अभिनेत्री को छोटा मोटा काम भी नहीं मिल रहा था और इसके लिए उसने नाना पाटेकर पर आरोप लगा दिया।
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(3) जो लोग नाना पाटेकर पर निशाना साधना चाहते थे उन्होंने उस अभिनेत्री से मुलाकात की और कहा कि वह नाना पाटेकर पर छेड़छाड़ या छेड़छाड़ के प्रयास का आरोप लगा दे।
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(4) प्रायोजकों ने अभिनेत्री के जरिये नाना पाटेकर पर निशाना साधा क्योंकि नाना ने कांग्रेस और संघ को ज्वाइन करने से इंकार कर दिया और इसकी जगह शिवसेना /मनसे ज्वाइन करने की तैयारी कर रहे थे।
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इससे ज्यादा कुछ नहीं है।
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एक समानता के रूप में देखिये, संत राम रहीम गुरमीतजी के विरुद्ध चलाये गए फर्जी मामलें पर गौर करें। वे मिशनरीज के रस्ते का काँटा बन रहे थे और संघ नेता और मोदीजी भी उन्हें जयादा पसंद नहीं करते थे क्योंकि दलितों /पिछड़ा वर्ग के वोटर्स में उनकी पहुँच बहुत अच्छी थी। मोदीजी और संघ कार्यकर्ता सभी हिन्दू वोटर्स के ऊपर केवल अपना एकाधिकार चाहते हैं और हर वो व्यक्ति जिसका प्रभाव हिन्दू दलित और पिछड़े वोटर्स पर ज्यादा है, मोदीजी और संघ कार्यकर्ताओं को पसंद नहीं है या फिर उनके मकसद के बीच रुकावट जैसा है इसलिए मोदीजी और संघ और मिशनरीज़ ने सांठ गाँठ बनाकर डेरा सच्चा सौदा को एक झूठे मुक़दमे में फंसकर बर्बाद कर दिया।
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सौ बात की एक बात है --- जो कोई भी हिन्दू वोटो में दरार डालेगा , मोदीजी और संघ कार्यकर्ता पेड मीडिया और मिशनरीज के साथ मिलकर उस पर झूठे मुक़दमे चलवाकर उसे बर्बाद कर देंगे, अब चाहे वो संत आशाराम बापू हो या संत रामरहीम या फिर संत रामपाल या फिर चाहे नाना पाटेकर हो।
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