Posts for 2022-04

Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 01 2022 16:00:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

this gentleman name Sobroto Roy says : NaMo and Amitbhai Shah had attended a lecture in USA in oct-1984 !!!
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Yes, year 1984 !!! .
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Back then travel to USA was very expensive. Getting visa was very difficult !! So its "outstanding" and "interesting". And btw, this event was at John Hopkins Univ, which is Rockfellar creation !!!
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And pls also look at one TOPIC --- "socio political analysis of recent sikh trajedy" !!! How caring, and how touching !!!
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<https://twitter.com/subyroy/status/797705361058885632>;
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And the gentlemans says --- Amit Shah may not have been there --- he doesnt clearly remeber. But he very clearly remebers that NaMo was there.
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<https://twitter.com/subyroy/status/1486727693630459909>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Apr 01 2022 16:00:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Ramdev and soya Ruchi soon ramdev wi badmouth cow milk and ask people to drink soya milk instead !!!
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No wonder he got soya milk almost for free !!!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 03 2022 13:49:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Ramdev seems to have looted PSU banks
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Well, he has stooped low anyway by supporting forcedvax. So robbing PSU bank is now usual for him
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कैसे राष्ट्रीय बैंकों के समर्थन से रुचि सोया के ज़रिये अमीर बनी पतंजलि |
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<https://hindi.newsclick.in/backed-nationalised-banks-how-ramdevs-patanjali-got-rich-through-ruchi-soya>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 07 2022 04:53:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Kapil Bishnoi:

For your information
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1980 April 6th: Birth of BJP(RSS)
1980 April 6th: Easter Sunday, i.e. Resurrection of Jesus from the dead.
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Could be a coincidence?
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In my opinion, it is too much of a coincidence for a so called Hinduvadi party.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 07 2022 04:53:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Two years ago, in april-2020, many had gone to their balcony and lit a diyaa or mobile torch. Well, 06-april-1980 was founding day of a well known political party. Pls find the diyaa date of april-2020 and name of that political party
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When whole lower class was suffering lockdown miseries, it was important to see that supporters of that party did indeed celebrated their foundation day in april-2020

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Apr 07 2022 19:51:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(1) RRP इफ़ेक्ट - RRR ; हर हाथ हथियार !!!
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पिछले 73 वर्षों से भारत में किसी भी राजनैतिक पार्टी ने भारतीयों को हथियारबंद करने के प्रस्ताव को अपने एजेंडे में शामिल नही किया है। राइट टू रिकॉल पार्टी एक मात्र पार्टी है जिसके उम्मीदवार इस मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे है कि — हथियारबंद नागरिक समाज की रचना के लिए जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए।
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कार्यकर्ताओं में इस माँग की बढ़ती लोकप्रियता ने पेड मीडिया के प्रायोजकों को मुख्य धारा की फ़िल्म में इस बिंदु का उल्लेख करने के लिए बाध्य किया है।
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(2) साउथ में अचानक से राइट टू रिकॉल के विषय पर एक के बाद एक फ़िल्में बन रही है। फ़ीचर फ़िल्म “वोटर” एवं “वन” इसी श्रेणी की फ़िल्में है । राइट टू रिकॉल को फ़ीचर करने के पीछे इन फ़िल्मों के निम्न उद्देश्य है :
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(1) राइट टू रिकॉल पार्टी के सकारात्मक क़ानून ड्राफ़्ट की माँग को तोड़ने के लिए दर्शकों के दिमाग़ में नकारात्मक राइट टू रिकॉल की प्रोसिजर प्लांट करना।
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(2) राइट टू रिकॉल के असूचित कार्यकर्ताओं को कमल हासन की पार्टी की तरफ़ भेजना ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 10 2022 05:57:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Ramdev seems to have looted PSU banks
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Well, he has stooped low anyway by supporting forcedvax. So robbing PSU bank is now usual for him
.
कैसे राष्ट्रीय बैंकों के समर्थन से रुचि सोया के ज़रिये अमीर बनी पतंजलि |
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<https://hindi.newsclick.in/backed-nationalised-banks-how-ramdevs-patanjali-got-rich-through-ruchi-soya>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 10 2022 05:59:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

this gentleman name Sobroto Roy says : NaMo and Amitbhai Shah had attended a lecture in USA in oct-1984 !!!
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Yes, year 1984 !!! .
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Back then travel to USA was very expensive. Getting visa was very difficult !! So its "outstanding" and "interesting". And btw, this event was at John Hopkins Univ, which is Rockfellar creation !!!
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And pls also look at one TOPIC --- "socio political analysis of recent sikh trajedy" !!! How caring, and how touching !!!
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<https://twitter.com/subyroy/status/797705361058885632>;
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And the gentlemans says --- Amit Shah may not have been there --- he doesnt clearly remeber. But he very clearly remebers that NaMo was there.
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<https://twitter.com/subyroy/status/1486727693630459909>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Apr 11 2022 14:08:06 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Aditya Prakash Sharma:

VVPAT मशीन के बावजूद कैसे हो सकता है वोटो का घपला ? वीडियो को पूरा देखिए ?

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 12 2022 09:56:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

श्रीलंका एवं नेपाल में डॉलर संकट ; इन बलन्दो के नसीबों में है पस्ती एक दिन !!
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श्रीलंका के साथ कुछ नया या अलग नही हुआ है। FDI जनित विकास का अनिवार्य साइड इफ़ेक्ट है कि एक न एक दिन टाट उलटना पड़ता है। पिछले 50 साल के दर्जनो मुल्क इसकी चपेट के आकर दिवालिए हो चुके है। औसतन हर 4-5 साल में एक देश उड़ ही जाता है।
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तकनीकी उत्पादन न करने के कारण व्यापार घाटा —> व्यापार घाटे के कारण डॉलर की कमी —>:फिर डॉलर लाने के लिए क़र्ज़ा —> जब क़र्ज़ा मिलना बंद हो जाए तो डॉलर लाने के लिए FDI —-> जब FDI से नए निवेश के रूप में डॉलर आने कम हो जाए तो सरकारी संपत्तियाँ जैसे सार्वजनिक उपक्रमों, ज़मीन, खनिज आदि की बिकवाली —-> और जब ये भी शेष न रहे तो टाट उलट दिया जाता है ।
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एक लगा बंधा फ़ार्मूला है। भारत इसी रास्ते पर तेज़ी से दौड़ रहा है। किसी भी दिन ढह सकता है। और FDI को रोका नही गया तो एक दिन ढहना तय है।
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गर्राए औजे ज़माना आलम ए इमकाँ न हो,
इन बलन्दो के नसीबों में है पस्ती एक दिन,
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भारत के लिए समाधान -
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हमें ऐसे कानूनो की ज़रूरत है जिससे भारत “मेड इन इंडिया मेड बाई इंडियंस” की नीति पर चलते हुए ऐसी वस्तुओं का उत्पादन कर सके जिनकी विदेशों में माँग हो। ऐसे क़ानून निम्नलिखित है :
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(1) #Woic - यह क़ानून डॉलर पुनर्भरण के समझौते को रद्द करके सम्वेदनशील क्षेत्रो में FDI पर रोक लगाता है। इससे हम आने वाले रिपेट्रीएशन क्राइसिस से बच जाएँगे।
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(2) #EmptyLandTax - बड़े पैमाने पर छोटे एवं मझौले कारख़ाने लगाना आसान बनाने के लिए GST रद्द करके रिक्त भूमि कर का प्रस्तावित क़ानून गेजेट में प्रकाशित करना।
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(3) #JuryCourt - कारख़ाना मालिकों की जज-पुलिस-नेता माफिया से रक्षा करने के लिए जूरी कोर्ट लाग़ू करना।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 12 2022 21:42:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Aditya Prakash Sharma:

क्या एलन, आकाश और बायजू जैसी दिग्गज भारतीय कोचिंग कम्पनिया पूरी तरह से विदेशियों के हाथों बिकने वाली है ?
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जी हां ये सत्य हो सकता है !!

नीचे दिए गए लिंक पर आप क्लिक करके ये देख सकते है कि एलन कोचिंग ने एक अमेरिकी कम्पनी Lupa systems को 1 बिलियन डॉलर के बदले अपनी 35% की हिस्सेदारी बेच दी है ।
👇👇
<https://entrackr.com/2022/01/exclusive-kota-famed-allen-career-institute-set-to-raise-funds-at-over-1-bn-valuation/>;

ठीक इसी तरह आकाश कोचिंग ने भी अमिरिकी कम्पनी blackstone group को लगभग 200 मिलियन डॉलर के बदले अपनी 38 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी है ।
👇👇
<https://m.economictimes.com/markets/stocks/news/blackstone-picks-up-37-5-stake-in-aakash-educational/articleshow/71824952.cms>;

हालांकि 38 प्रतिशत के बाद ब्लैकस्टोन कम्पनी के मालिक आकाश कोचिंग में 51 प्रतिशत की हिस्सेदारी की मांग कर रहे थे पर इस पर आकाश कोचिंग के मालिक राजी नही थे अतः ये डील रद्द हुई और इसके 1.5 साल बाद ही आकाश कोचिंग को byju कम्पनी ने 1 बिलियन डॉलर देकर खरीद लिया
👇👇
<https://www.vccircle.com/blackstone-bags-2x-returns-in-aakash-exit-scripted-by-byju-s-1-bn-acquisition-deal>;

गौर करने वाली बात ये है कि byju कम्पनी भी अपनी 78 प्रतिशत हिस्सेदारी अमेरिकी कम्पनियों को पहले ही बेच चुकी है और बायजू रवीन्द्रन के पास अब कम्पनी का 22 प्रतिशत ही मालिकाना हक बचा है ।
👇👇
<https://app.dealroom.co/companies/byju_s>;

इसका अर्थ है कि आकाश कोचिंग को अमिरिकी ब्रिटिश धनिकों द्वारा संचालित byju कम्पनी ने खरीद लिया है ।

तो आखिर राजेश माहेश्वरी(एलन के मालिक), जे. सी. चौधरी(आकाश के मालिक) और बायजू रवीन्द्रन(बायजू के मालिक) जैसे उद्यमी व्यक्ति अपनी कम्पनियों की हिस्सेदारियो को विदेशियों को बेचने हेतु क्यो मजबूर हुए ।

जागरूकता वादी लोग इस बात के पीछे ये तर्क दे सकते है कि इन लोगो को अपने बिजनेस को बढाने हेतु अधिक पैसे की आवश्यकता रही होगी । अतः उन्होंने अपनी हिस्सेदारियो को बेचा ।

जबकि ये तर्क बिल्कुल बेबुनियाद है क्योकि यदि

1) किसी कम्पनी को पैसा चाहिए होता है तो वो शेयर मार्केट में खुद को लिस्ट करवा कर ipo ला सकती है ।

2) साथ ही ये कम्पनियां इतनी बड़ी ब्रांड है कि यदि इनको भारत भर में अपने सेंटर खोलने ही है तो ये अपने ब्रांड वैल्यू के आधार पर फ्रेंचाइजी देकर हर शहर में अपने सेंटर खोल सकते है । इसमें इनका एक रुपये का भी इन्वेस्टमेंट नही होता बल्कि ये फ्रेंचाइजी पार्टनर से फ्रेंचाइजी देने के एवज में पैसा ले सकते है ।

पर फिर भी इन लोगो को अपनी हिस्सेदारिया बेचने पर मजबूर क्यो होना पड़ा ?

क्योकि इसका कारण है = मोदी सोनिया केजरी समेत सभी सत्ताधारी पार्टियों द्वारा 2020 में भारत मे शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को मंजूरी दी गयी
👇👇
<https://www.livemint.com/education/news/govt-plans-to-ease-rules-on-foreign-investment-in-education-sector/amp-11581358606272.html#aoh=16497510692753&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com&amp_tf=From%20%251%24s>;

तो शिक्षा क्षेत्र में FDI आने से भारतीय कोचिंग दिग्गज अपनी हिस्सेदारी बेचने हेतु क्यो मजबूर हुए ?

देखिए इसको एक उदाहरण से समझते है मान लीजिए आपके पास कोई दुकान है जिसकी कीमत 50 लाख है अब कोई दबंग आपके घर पर आता है और कहता है कि मुझे ये दुकान 30 लाख में बेचो हालांकि आप का कोई मानस नही था दुकान बेचने का पर वो जो दबंग आपके पास आया है तो उसके एक हाथ मे डंडा है और एक हाथ मे 30 लाख और मिठाई का डिब्बा (और अदालत+पुलिस पहले ही उसकी जेब मे है) तो फिर आप क्या करेंगे ?

ठीक ऐसा ही हमारे उद्यमि कोचिंग मालिको के साथ हो रहा है । मतलब की यदि भारतीय कोचिंग मालिक अमिरिकी ब्रिटिश धनिकों के आफर को ठुकराते है तो अमिरिकी ब्रिटिश धनिक पेड मीडिया में पैसा फेक कर इन लोगो के कपड़े फड़वाने शुरू करेंगे जैसा कि वो लोग हिन्दू सन्तो को मीडिया में बदनाम करवा चुके है और फिर जजो के द्वारा इन पर सौ दो सौ फर्जी केस करवा कर अंदर कर देंगे । इसीलिए इन लोगो ने हिस्सेदारी बेचना उचित समझा ।

शिक्षा के क्षेत्र में FDI के क्या नुकसान होंगे -

1) अब ये सभी उद्यमी 2, 3 साल में ही इन कोचिंग संस्थानों में अपना मालिकाना खो देंगे और इनके द्वारा खड़े किए गए ब्रांड को अमरीकी ब्रिटिश धनिक चलाएंगे और मुनाफा कमाएंगे । जैसे कि 1991 के दशक में भारत मे बेवरेज इंडस्ट्री में FDI को अनुमति मिली थी तब भारत के ब्रांड लिम्का, कैम्पकोला, थम्बसप, गोल्डस्पॉट इत्यादि कम्पनियों को पेप्सी और कोकाकोला ने खरीद लिया था ।

2) मोदी सोनिया केजरी ने मिलकर लॉक डाउन लगाया और बच्चो को ऑनलाइन एजुकेशन की तरफ धकेल दिया इससे अब जो छोटे शहरों और कस्बों में जो छोटे कोचिंग संचालक है उनकी कोचिंग बंद हो चुके है या बंद होने के कगार पर पहुच चुके है क्योकि बच्चो को वो इन बड़े विदेशी ब्रांड्स जैसी हाई फाई luxurious 'सुविधाए' नही दे पा रहे है ।

3) अमिरिकी मल्टीनेशनल कम्पनियां FDI के रूप में जिस भी देश मे जाती है वहा मिशनरियों का प्रभाव अपने आप बढ़ने लगता है ।
अब जबकि भारत के शिक्षा क्षेत्र में अमिरिकी दबदबा कायम हो जाएगा तब भारतीय और खासकर हिंदुओ के बच्चो को ईसाई धर्म की तरफ मिशनरी खींचना शुरू करेंगे और हिन्दू संस्कृति का क्षरण बढ़ता जाएगा ।

4) FDI का एक बुरा प्रभाव और भी है कि भारतीय समाज मे अश्लीलता व्यापक पैमाने पर बढ़ेगी ।

5) और सबसे बड़ा दुखद परिणाम होगा कि अंत मे विदेशी कम्पनियां जो अभी डॉलर लेकर के आ रही है जब वो अपना लाभांश मांगेगी तो वो लाभांश भारत के रिज़र्व बैंक को डॉलर में चुकाना पड़ेगा इससे हमारा डॉलर रिज़र्व पर अतिरिक्त भर पड़ेगा और हमारे ऊपर डॉलर पुनर्भरण की विकट समस्या बढ़ जाएगी ।

तो आखिर इन भयंकर हानियों के चलते हुए भी मोदी सोनिया केजरी ने शिक्षा के क्षेत्र में FDI को मंजूरी क्यो दी ?

क्योकि किसी भी देश को चलाने हेतु डॉलर की जरूरत होती है और हमारा देश ऐसे सामान या प्रोडक्ट नही बना रहा जिनको बेच कर हम दूसरे देश से डॉलर ला सके । तो हमारे तथाकथित फर्जी राष्ट्रवादी नेताओ मोदी सोनिया केजरी को देश चलाने का एक ही तरीका दिखता है और वो है प्रत्यक्ष विदेशी निवेश । ये लोग हर क्षेत्र में एक के बाद एक FDI को मंजूरी देते जा रहे है ताकि देश चलाने हेतु डॉलर मिलता रहे ।

तो अभी ये दौर चलेगा जिसमे हमारी सारी सरकारी निजी कंपनियों को विदेशी खरीदते चले जाएंगे और अंत मे जब सारी कम्पनियां बिक जाएगी तो हमारा देश श्री लंका की तरह दिवालिया हो चुका होगा ।

समाधान = FDI का समाधान है हम अपने नेताओं पर लगाम लगाए की वो fdi को मंजूरी न दे इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को नौकरी से निकालने का अधिकार हम जनता के पास होना चाहिए यानी वोट वापसी PM, और वोट वापसी CM कानून ।
यदि ये कानून गेजेट में छपेगा तो अगले ही दिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की अक्ल ठिकाने आ जाएगी और ये लोग FDI को मंजूरी नही देंगे । इसके साथ ही हमे हमारी सेना को हथियारों में आत्मनिर्भर बनाना पड़ेगा ताकि हम दुश्मनों का अपने दम पर मुकाबला कर सके और अमेरिका सहित कोई भी देश हमको न धमका सके कि हमारी कम्पनियों को भारत मे घुसने दो । इसके लिए हमे jury court कानून को गेजेट में छपवाना होगा ।

साथ ही सभी छोटे बड़े कोचिंग संचालको और शिक्षकों को छात्रों को ये जानकारी देनी होगी और एक नेताविहीन जनान्दोलन हेतु छात्रों को तैयार करना होगा कि ये कानून जल्द ही लागू हो जाए ।

वोट वापसी CM और जूरी कोर्ट कानून का ड्राफ्ट पढ़ने हेतु इस लिंक पर क्लिक करे
👇
www.Tinyurl.com/VvpCM
www.Tinyurl.com/JuryCourt

#ALLENKota #aakashinstitute #byjus #JuryCourt #VvpCM #BanEVM #BanFDI #modi #Kejriwal #AdityaPrakash

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Apr 16 2022 20:04:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अच्छे दिनो की आस लगाए हबीब,
हम अच्छे दिन भी गँवाते चले गए !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Apr 17 2022 08:25:18 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Amit Kumar Swain:

How this movement will move ahead if there are chances that even recalist candidates can sellout ?
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Irresepective of how candidate is, each election campaign creates awareness of drafts within citizens and we get new supporters and activists . Activists help us to take the drafts to more people .
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As the number of supporters increase vote share of RRP increases and other parties realise that the drafts of RRP hv become an agenda which fetches votes and not making it a poll promise they may lose votes further . So it creates a competition within parties to support it , comment on it and add it to their manifesto . That creates pressure on ruling party to bring the laws partially or fully so that they don't loose seats .
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Thus recallist candidates leaving the party and joining other party have no effect to the movement . By contesting once they have served their purpose , party used them once to push the drafts . It also proves that RRP do not have black money or nefarious funding to feed greedy people . In place of them we get new candidates who have more enthusiasm which benefits the movement .

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Apr 23 2022 22:16:07 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अमेरिका में जब चुनाव होते है तो चुनाव आयोग प्रत्येक मतदाता को अपने खर्चे से एक पेम्पलेट भेजता है, जिसमें उम्मीदवारो के बारे में जानकारी होती है। इस जानकारी में उम्मीदवार का नाम, पार्टी का नाम, फोटो, एजेंडा, वादे आदि शामिल होते है। यह जानकारी उम्मीदवार द्वारा चुनाव आयोग को प्रेषित की जाती है, और चुनाव आयोग उसमें बिना छेड़छाड़ के इसे प्रकाशित करता है।
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इस तरह अमेरिका में जब कोई छोटा आदमी किसी छोटी पार्टी से या निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ता है, और यदि उसके पास खर्च करने के लिए पैसा और प्रचार करने वाले कार्यकर्ता नहीं है, लेकिन यदि उसने निर्धारित क्राइटेरिया मीट कर लिया है तो उसके चुनाव क्षेत्र में प्रत्येक मतदाता तक उसके बारे में "प्राथमिक" जानकारी पहुँच जाती है। भारत में "प्राथमिक" जानकारी पहुँचाने का पूरा भार प्रत्याशी पर ही होता है। इस वजह से छोटे उम्मीदवार प्रचार में पिछड़ जाते है, एवं बड़े उम्मीदवार संसाधनों की प्रचुरता के कारण बढ़त बना लेते है।
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उदाहरण के लिए, 2019 में मैंने जब लोकसभा चुनाव लड़ा था तो मेरे पास प्रचार के लिए 8 दिन का समय था। मेरे लोकसभा क्षेत्र में 20 लाख मतदाता है। अन्य साथी कार्यकर्ताओ के सहयोग से हमने 10 हजार पर्चे छपवाकर उन्हें नागरिको में वितरित किया। सीमित समय में सीमित बजट एवं सीमित संसाधनों के कारण लगभग 20 हजार मतदताओ तक मेरा पेम्पलेट पहुँचा, और अनुमानित 75 हजार नागरिको तक राईट टू रिकॉल पार्टी का एवं मेरा नाम पहुँच पाया होगा। 20 लाख में से 19 लाख मतदाता मेरे मुद्दों आदि से पूरी तरह से अपरिचित रहे।
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इससे क्या अंतर आता है ?
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बड़ी पार्टियों के पास इतने संसाधन है कि वे निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदाताओ तक पहुँच जाते है। मेरे जैसे छोटे उम्मीदवार के पास उतने संसाधन नहीं होते। मैं लगभग एक लाख मतदाताओ तक पहुँच पाया और एवज में मुझे 13,000 वोट मिले। यदि चुनाव आयोग उम्मीदवारों के बारे में "प्राथमिक" जानकारी पहुचाने का भार ले लेता है तो छोटे उम्मीदवारों के बारे में जानकारी लगभग समस्त मतदाताओ तक पहुंचेगी और उनका वोट शेयर बढ़ जाएगा। वोट शेयर बढ़ने से ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार चुनावों में आना शुरू करेंगे और बड़ी पार्टियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
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तो अमेरिका में भी किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने की छूट है, और भारत में भी किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने की छूट है। लेकिन अमेरिका में जो छोटे प्रत्याशी निर्धारित मापदंड को पूरा कर लेते है उनके बारे में "प्राथमिक" जानकारी पहुँचाने का काम चुनाव आयोग करता है, जबकि भारत में सभी उम्मीदवारो को यह काम ख़ुद ही करना होता है। और इस वजह से छोटे उम्मीदवार चुनाव में खड़े तो हो पाते है, किन्तु मतदाताओ तक पहुँच नहीं पाते।
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(*)हालाँकि, अमेरिका में भी सभी छोटे उम्मीदवार निर्धारित मापदंड पूरा नहीं कर पाते, लेकिन कुछ छोटे उम्मीदवार इसे पूरा कर लेते है। विभिन्न जिलो एव राज्यो में निर्धारित मापदंड भिन्न है)
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बड़ी पार्टियों को अतिरिक्त लाभ पहुँचाने और छोटे उम्मीदवारों की दबाने की नीति के इस अंतर को पेड राजनीती शास्त्रियों ने "लोकतंत्र" के आवरण से ढक के रखा हुआ है। क्योंकि पेड राजनीती शास्त्रियों के अनुसार भारत में भी लोकतंत्र है, और अमेरिका में भी लोकतंत्र है !! और लोकतंत्र के नाम पर उन्होंने छोटे उम्मीदवारों की गर्दन मरोड़ने के लिए कितने क़ानून छापे हुए है इस पर 100 पेज की पूरी किताब लिखी जा सकती है !!!
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अमेरिकी चुनावों में चुनाव आयोग द्वारा वितरित किये जाने वाले ऐसे 92 पृष्ठ के पेम्पलेट का पीडीऍफ़ यहाँ देख सकते है -- <https://kingcounty.gov/~/media/depts/elections/how-to-vote/voters-pamphlet/2016/08/201608-edition-3.ashx?la=en>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Apr 25 2022 18:49:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रस्तावित गौ नीति क़ानून आए बिना देशी गाय की बचने वाली नही है। अधिक विवरण इस पोस्ट में देखें - <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/862195567486855/>;

Pawan Jury BhilwaraRj:

[**भारत में देसी गाय की क्या स्थिति है? देसी गाय को कैसे बचाया जा सकता है ?**](<https://hi.quora.com/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE>;)
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ऍफ़ डी आई को रोके बिना भारत में गाय को बचाया नहीं जा सकता। यदि ऍफ़ डी आई जारी रही तो 2050 तक हिन्दुओ का एक अच्छा खासा तबका गौ मांस खाने लगेगा, और गौ मांस भक्षण को सार्वजनिक स्वीकार्यता मिल जायेगी। देशी गाय की संख्या इतनी सिकुड़ चुकी होगी कि, इसके दूध एवं उत्पादो से मध्यम वर्ग तक वंचित हो जाएगा, और सिर्फ अमीर लोग ही इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
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देशी गाय A2 दूध देती है, जो कि एक औषधि है। वर्ण संकर गाय, भैंस समेत शेष सभी अन्य दुधारू जानवर A1 दूध देते है। A2 एवं A1 दूध में क्या फर्क है, और क्यों A2 दूध एवं गौ मूत्र फायदेमंद है, इस बार में कृपया गूगल करें या कोरा पर प्रश्न जोड़े। मैंने जवाब में इस विवरण को शामिल नहीं किया है।
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गाय को लेकर अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको के दो लक्ष्य है :

* **देशी गाय के A2 दूध, गौ मूत्र आदि पर एकाधिकार बनाना**
* **भारत में ज्यादातर हिन्दुओ को गौमांस खाने के लिए तैयार करना, ताकि धर्मांतरण किये जा सके।

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देशी गाय के उत्पादों पर एकाधिकार बनाने के लिए वे कानूनों का इस्तेमाल करते है, और हिन्दु युवाओं को गौ मांस भक्षण की तरफ धकेलने के लिए उनके पास पेड मीडिया है।
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**(** इस जवाब में चार खंड है। खंड **(स)** एवं **(द)** महत्त्वपूर्ण है। आप चाहे तो सीधे खंड (स) एवं (द) पढ़ सकते है। )
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**खंड (अ)**
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**(1)** मुग़लो के शासन काल में ज्यादातर समय तक गौ कशी निषिद्ध थी। बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहाँ आदि के काल में गौ हत्या पर प्रतिबंध जारी रहे। औरंगजेब के शासन के शुरूआती वर्षो में गौ हत्या की अनुमति थी, किन्तु बाद में औरंगजेब ने गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए गेजेट नोटिफिकेशन निकाले थे । तब से लेकर बहादुरशाह जफर तक बहुधा प्रतिबन्ध जारी रहा। जफ़र के शासन काल में भी गौ कशी पर मृत्यु दंड का प्रावधान था। मुगल शासको द्वारा गौ हत्या का समर्थन नहीं करने के कारण इस काल में गायें बची रही।
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[Fact Check: Did Mughals ban cow slaughter?](<https://www.indiatoday.in/fact-check/story/rajasthan-bjp-madan-lal-saini-mughal-cow-slaughter-1297573-2018-07-27>;)
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**(2)** ब्रिटिश गौ मांस खाते थे, और उन्होंने भारत में आने के साथ ही गायें काटने के लिए गेजेट नोटिफिकेशन छापने शुरू किये। जब कत्लखानों में गायें काटी जाने लगी तो मुस्लिम धर्मावलम्बी भी गौ मांस खाने लगे, और यहाँ से हिन्दू-मुस्लिम में गाय को लेकर प्रतिरोध प्रारंभ हुआ। ब्रिटिश द्वारा गौ कशी को प्रोत्साहन देने के पीछे दो कारण थे : धर्मांतरण , एवं हिन्दू-मुस्लिम में राजनैतिक अलगाव खड़ा करना।
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**(3)** सैन्य नियंत्रण हासिल करने के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत के सैनिको को कन्वर्ट करने के प्रयास शुरु कर दिए थे। बैरको में हिन्दू देवी देवताओं के चित्र लगाने एवं धार्मिक चिन्ह शरीर पर धारण करने आदि पर प्रतिबन्ध लगाये गए, बैरको में चर्च खोले गए, और रविवार को पादरियों को बुलाकर उन्हें उपदेश किये जाने लगे। 1857 से पहले तक कारतूसो पर भैंस की चर्बी चढ़ाई जाती थी, किन्तु वायसराय ने इस पर गाय एवं सूअर की चर्बी मिक्स करके लगाने के आदेश दिए।
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**(4)** क्रान्ति तो असफल हो गयी थी, लेकिन 1860 से भारत में देश के विभिन्न स्थानों से गौ हत्या पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए छोटे मोटे आन्दोलन शुरू हुए, और ये फैलने-बढ़ने लगे। किन्तु गोरो ने गाय काटने पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया। गोरे जानते थे कि, यदि गाय कटती रहेगी तो मुस्लिम गौ मांस खायेंगे और इससे हिन्दू मुस्लिम के बीच के खाई बनेगी। और इस तरह भारत में हिन्दू-मुस्लिम के बीच गाय को लेकर पहली बार दंगो की शुरुआत हुयी !!!
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इसी बीच गोरों ने दलितों को कन्वर्ट करने के लिए कुछ दलित नेताओं को सार्वजनिक रूप से गाय काटने और गौ मांस खाने के लिए चाबी देना शुरू किया। यदि दलित गाय खाना शुरू कर देते थे, तो वे हिन्दू धर्म से च्युत हो जाते थे, और फिर उन्हें कन्वर्ट करना आसान हो जाता था। किन्तु दलितों ने पेड नेताओं के झांसे में आने से इनकार कर दिया।
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भारत में गाय बचाने की यह मूवमेंट देश व्यापी हो चुकी थी, और 1860 से 1895 के दौरान गाय को लेकर सैंकड़ो दंगे हुए। बाद में महर्षि दयानंद सरस्वती से लेकर देश के कई नेता, संत, महंत, राजनेता, सेनानी आदि भी इस मूवमेंट में जुड़ते चले गए। यह विकेन्द्रित आन्दोलन था। हिन्दुओ का तर्क था कि गाय काटना हमारे धर्म के खिलाफ है, और हम अपने देश में गौ कशी नहीं होने देंगे।
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See More at : [Cow protection movement](<https://goo.gl/2NHb54>;)
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**(5)** इसी समय इत्तिफाक से भारत में एक संत का अवतरण हुआ। इन्होने 1885 में भारत के हिन्दुओ को यह बात **बतानी शुरू की** कि :
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*गौ मांस का सेवन हिन्दू धर्म एवं भारतीय संस्कृति का अनिवार्य अंग रहा है। और वैदिक काल में ऐसा कोई हिन्दू नहीं हो सकता था, जो गौ मांस न खाता हो। यदि हिन्दूओ को ताकतवर होना है तो उन्हें मांसाहार अवश्य करना चाहिए।
.*

उन्होंने यह भी बताया कि : *गीता पढ़ने की जगह यदि हिन्दू फ़ुटबाल खेलेंगे तो उन्हें मुक्ति जल्दी मिलेगी !!*
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चूंकि ये संत बंगाली थे, अत: मांसाहार उनकी संस्कृति का अंग था, और यह स्वभाविक भी था। किन्तु अंत तक वे माँसाहारी ही बने रहे, और अपने अनुयायियों को भी मांसाहार करने की सलाह दी !! हालांकि, उन्होंने हिन्दुओ को गौ मांस खाने के लिए कभी प्रेरित नहीं किया, किन्तु इसे त्याज्य ही बताया। बात के साधारण होने के बावजूद इन उपदेशो की **टाइमिंग** का अपना महत्त्व था। इन महाशय ने उस समय गौ हत्या एवं गौ मांस भक्षण के पक्ष में एक वाजिब धार्मिक वजह दे दी थी !!
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जाहिर है, ब्रिटिश काल में इन्हें काफी मकबूलियत प्राप्त हुयी, और आज भी ये भारत के सबसे महान संत माने जाते है !!
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( मैं वेदों आदि का मर्मग्य नहीं हूँ। अत: मुझे नहीं पता कि वैदिक काल में हिन्दू होने के लिए गौ मांस भक्षण करना आवश्यक था, या नही। किन्तु भारत में शायद ये एक मात्र संत हुए, जिन्होंने गौ मांस भक्षण को वैदिक संस्कृति से जोड़ा, और इत्तिफाक से इन्हें अन्तराष्ट्रीय ख्याति भी मिली !! )
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**(6)** अपने शुरूआती दौर में मोहन दास ने गौ हत्या का विरोध किया था, किन्तु 1947 में मोहन ने स्टेंड लिया कि गौ हत्या को प्रतिबंधित करने के लिए क़ानून नहीं बनाया जाना चाहिए। मोहन का मानना था - धर्म के आधार पर न तो मुस्लिमो के लिए क़ानून बनने चाहिए न हिन्दुओ के लिए।
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**(7)** 1955 में कोंग्रेस के सांसद ने पहली बार गौ हत्या पर देश व्यापी प्रतिबन्ध लगाने के लिए बिल संसद में रखा था। किन्तु जवाहर लाल ने कोंग्रेस के सांसदों को धमकाया कि यदि यह बिल पास हुआ तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। बिल गिर गया।
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**(8)** 1966 में हजारो साधू-संतो ने संसद का घेराव करके देश व्यापी गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए गेजेट नोटिफिकेशन निकालने की मांग की। पहले लाठी चार्ज, फिर टियर गैस और फिर इंदिरा जी ने गोली चलाने के आदेश दिए। लगभग 66 लोग मारे गए। सरकारी आंकड़ा शायद 11 के आस पास का है। संख्या के बारे में विकी पीडिया पर भी गलत जानकारी रखी है। 2 साल पहले तक वहां सही जानकारी थी। पिछले वर्ष इसे बदल दिया गया।
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बाद में इंदिरा जी ने उन सभी राज्यों में गौ हत्या के क़ानून लागू किये, जहाँ जहाँ पर कोंग्रेस सत्ता में थी। उन सभी राज्यों में गौ हत्या के क़ानून लागू नहीं हुए जहाँ पर कम्युनिस्ट सरकार थी, या कोंग्रेस विपक्ष में थी। इस तरह 150 साल बाद देश के कई राज्यों में फिर से गौ हत्या निषेध के बिल पास हुए !!
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( कृपया ध्यान दें कि गौ हत्या रोकने का क़ानून केंद्र सरकार द्वारा नहीं बनाया जा सकता। यह राज्य का विषय है। अत: सिर्फ राज्य सरकारें ही इस पर प्रभावी क़ानून बना सकती है। )
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**खंड (ब)**
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1966 से 1998 तक गाय राजनीती से लगभग बाहर रही। ऍफ़ डी आई का विस्तार होने के साथ ही भारत में अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का नियंत्रण बढ़ने लगा और इस वजह से मिशनरीज की ताकत भी बढ़ना शुरू हुयी। पिछले 10 वर्षो से गाय फिर से राजनीति की मुख्यधारा में है। तो वह चक्र फिर से शुरू हो चुका है जो गोरों ने 200 साल पहले प्रारंभ किया था। इसमें कुछ नई चीजे यह है कि, अब ब्रिटिश-अमेरिकी धनिक पहले के मुकाबले कई गुणा ज्यादा ताकतवर है, और उनके एजेंडे में देशी गाय पर एकाधिकार करने की नीति भी शामिल है।
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आज की तारीख में भारत की किसी भी राजनैतिक पार्टी या नेता में इतना साहस नहीं है कि वे अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के खिलाफ जा सके। तो वास्तविक रूप से वे अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के साथ है, किन्तु मौखिक रूप से गौ हत्या रोकने के पक्ष में बयान वगेरह देते रहते है।
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किन्तु वास्तव में **गाय बचाने** के ये सारे बयान सिर्फ तनाव बढाने के लिए दिए जाते है। क्योंकि यदि गाय बचानी हो तो इसके लिए गेजेट में क़ानून छापने होते है। और क़ानून छापने को कोई पार्टी तैयार नहीं है। कार्यकर्ताओ को भाषण सुनाकर वे यह विश्वास दिला देते है, कि हम गाय बचाने के प्रयास कर रहे है !!
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इसके सैंकड़ो उदाहरण है, किन्तु निचे मैंने कुछ उदाहरण दिए है, जिससे आपको इस नीति की झलक मिल सकती है। तनाव बढाने के इस सर्कस में सभी पॉलिटिकल पार्टियां शामिल है। कोई अपवाद नहीं। कोई भी नहीं।
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**(1)** वाजपेयी ने 2003 में संसद में देश व्यापी गौ हत्या पर प्रतिबन्ध के लिए बिल पेश किया था। NDA में शामिल अन्य दलों ने इस बिल का विरोध किया और बिल गिर गया। मेरे विचार में बिल अव्यवहारिक था, और इसे गिरना ही था। केंद्र सरकार के पास पुलिस नहीं होती है, अत: गौ हत्या पर केंद्र द्वारा देश व्यापी बिल लाना अव्यवहारिक है। और यदि पास कर भी दिया जाता है, तो यह कभी लागू नहीं होगा।
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[INDIA: Opposition to Cow Slaughter Bill Undercuts Pro-Hindu Agenda](<http://www.ipsnews.net/2003/08/india-opposition-to-cow-slaughter-bill-undercuts-pro-hindu-agenda/>;)
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**(2)** 12 जुलाई 2014, एम पी विधानसभा में कोंग्रेस विधायक आरिफ अकील द्वारा गौ रक्षा हेतु निजी बिल सदन में रखा गया। इस बिल में प्रावधान थे कि : गाय की मृत्यु के बाद गायो का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए , या तो उसे जलाया जाए या उसे दफनाया जाए। गाय के अंगो की तस्करी तथा खरीद फरोख्त पर प्रतिबन्ध लगाया जाए आदि आदि।
[.](<https://www.telegraphindia.com/india/bjp-buries-gau-mata-bill-cong-bhopal-mla-springs-surprise-on-rival/cid/163352>;)
[BJP ‘buries’ Gau Mata bill - Cong Bhopal MLA springs surprise on rival](<https://www.telegraphindia.com/india/bjp-buries-gau-mata-bill-cong-bhopal-mla-springs-surprise-on-rival/cid/163352>;)
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अक़ील ने सदन में कहा कि गाय को हिन्दू अपनी माता का दर्जा देते है इसलिए गाय की रक्षा तथा सम्मान के लिए सरकार को गौ सरक्षण के क़ानून को पास करना चाहिए। संघ=बीजेपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में बिल को 55 वोटो से गिरवा दिया !!! संघ=बीजेपी सरकार द्वारा बिल गिरा दिए जाने पर आरिफ अकिल कोर्ट चले गए और यह बिल पास करने का ऑर्डर करवाने के लिए उन्होंने जनहित याचिका लगाई।
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**(** इसका यह आशय नहीं है, कि कोंग्रेस गौ हत्या रुकवाना चाहती है। क्योंकि जब मैंने कोंग्रेस के कार्यकर्ताओ से पूछा कि एमपी को जाने दीजिये, आप उन राज्यों में ये बिल पास करवा दीजिये जहाँ आपकी सरकारें है, तो उन्होंने जवाब दिया कि, --- हमें ये बिल पास करने में कोई इंटरेस्ट नहीं है। पर हम यह स्थापित करना चाहते थे कि, गाय पर क़ानून बनाने को लेकर कोंग्रेस एवं बीजेपी=संघ एक ही है। बस भाषण एवं बयानो में भिन्नता है।**)**
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**(3)** पेड आमिर खान ने जब युवाओं को मांस खाने को प्रोत्साहित करने के लिए दंगल फिल्म बनाई तो बीजेपी=संघ के सांसद उदित राज ने एक के बाद एक 3 ट्विट किये कि, गरीब दलितों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए बीफ खाना चाहिए। उन्हें प्रेरित करने के लिए उन्होंने उसेन बोल्ट का उदाहरण भी दिया कि, बोल्ट गरीब थे , किन्तु बीफ खाने से ही वे गोल्ड मैडल जीत पाए। भारत में बीफ सबसे सस्ता पोषक आहार है, अत: गरीबों-दलितों को बीफ खाना चाहिए। ये बयान मैंने अपनी जेब से नहीं रखा है, संघ=बीजेपी के सांसद उदित राज ने ये ट्विट किये थे।
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[BJP's Udit Raj Tweets Beef Helped Usain Bolt Win Gold, Then Clarifies](<https://www.news18.com/news/politics/beef-helped-usain-bolt-win-gold-medals-in-olympics-bjp-mp-udit-raj-1286624.html>;)
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कैच इसमें यह है कि, उदित राज ने कार्ल लुईस का जिक्र जानबूझकर नहीं किया। दरअसल 90 के दशक के ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता कार्ल लुइस 100% शाकाहारी है !! जब लुइस की आयु 20 वर्ष के क़रीब थी तो उन्होंने शाकाहार अपना लिया था, और अपने बेहतरीन प्रदर्शन का श्रेय वे शाकाहार को देते है। उनका दावा है कि, शाकाहार अपनाने के कारण ही उनके प्रदर्शन में सुधार हुआ और वे बेहतर एथलीट बन पाए।
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जाहिर है, संघ=बीजेपी का लक्ष्य खेल और खुराक पर टिप्पणी करना नही था, बल्कि वे गौ माँस सेवन को प्रोत्साहित करना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने गौ मांस का फेवर करने वाला किरदार चुना। संघ=बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने उदित राज पर कार्यवाही करने से इनकार कर दिया था।
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**(4)** पहले संघ=बीजेपी के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि, जिन्हें गौ मांस खाना है वे पाकिस्तान चले जाए। और इसके जवाब में संघ=बीजेपी के केन्द्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजुजू ने सार्वजनिक रूप से कहा कि -- " मैं गौ मांस खाता हूँ, और किसी में हिम्मत है तो मुझे रोक कर दिखाए !! संघ=बीजेपी के किसी भी कार्यकर्ता ने न तो नकवी एवं रिजीजू पर कार्यवाही की मांग की और न ही उनका विरोध किया !! लेकिन यदि किसी सामान्य नागरिक पर उन्हें गौ मांस खाने का शुबहा हो जाए तो वे उसे पीटना शुरू कर देते है !!
[.](<https://www.hindustantimes.com/india/i-eat-beef-can-somebody-stop-me-rijiju-retorts-to-naqvi-statement/story-qUNsLUQY0sy1ICiCWfRFTJ.html>;)
['I eat beef, can somebody stop me?' Rijiju retorts to Naqvi statement](<https://www.hindustantimes.com/india/i-eat-beef-can-somebody-stop-me-rijiju-retorts-to-naqvi-statement/story-qUNsLUQY0sy1ICiCWfRFTJ.html>;)
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**(5)** जब मनोहर पर्रीकर गोवा के सीएम थे तो हाईकोर्ट ने गोवा में गौ वंश की कटवाई पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। पर्रीकर तब इस प्रतिबन्ध को हटवाने के लिए कोर्ट गए। जब पर्रीकर को केंद्र में मंत्री बना दिया गया तो, संघ=बीजेपी के लक्ष्मीकान्त पार्सेकर गोवा के सीएम बने और उन्होंने गौ हत्या पर रोक का क़ानून लाने से इनकार कर दिया !! उनका तर्क था कि, हमें बड़ी मुश्किल से अल्पसंख्यको का विश्वास हासिल किया है, गौ हत्या पर बेन लगाकर हम लोगो को नाराज नहीं कर सकते। केंद्र में बीजेपी=संघ का जो भी एजेंडा रहा हो किन्तु गोवा में गौ कशी जारी रहेगी !!
[.](<https://www.hindustantimes.com/india/beef-not-to-be-banned-in-goa-it-s-part-of-food-habit-cm-parsekar/story-YfJvQy0KgEqoZ17ykVQqxN.html?fbclid=IwAR0Rw3luhbE48U73MKOYJJEODp4o3lW7n37I7derlelmCLSFyQINBylRXyg>;)
[Beef not to be banned in Goa; it's part of food habit: CM Parsekar](<https://www.hindustantimes.com/india/beef-not-to-be-banned-in-goa-it-s-part-of-food-habit-cm-parsekar/story-YfJvQy0KgEqoZ17ykVQqxN.html?fbclid=IwAR0Rw3luhbE48U73MKOYJJEODp4o3lW7n37I7derlelmCLSFyQINBylRXyg>;)
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**(6)** मई 2017, केरल में यूथ कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से गाय काटी, गौ मांस का वितरण किया। और केरल के बीजेपी अध्यक्ष ने घटना का वीडियो ट्विटर पर अपलोड किया। यदि आप इस घटना की गहराई से पड़ताल करेंगे तो जान जायेंगे कि मिशनरीज गाय का इस्तेमाल किस तरह कर रही है। ऊपर दिए गए प्रसंग में 3 घटनाएं है और तीनो का प्रभाव अलग अलग है।
[.](<https://goo.gl/xGQxen>;)
[Police book Youth Congress workers for slaughtering cow in Kerala market](<https://goo.gl/xGQxen>;)
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केरल में गाय काटना कानूनी है। पर भारत में क्या आपने पहले कभी यह सुना या देखा है कि किन्ही नामचीन लोगो ने सार्वजनिक रूप से गाय काटी हो, और इसके फुटेज पूरे देश में फैलाए हो ? क्या ऐसे फुटेज कभी आप तक पहुंचे है ? नहीं !! निचे इसका चित्र दिया गया है, जो कि विचलित करने वाले दृश्यों की श्रेणी में आता है। मैंने यहाँ वीडियो नहीं रखा है।

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राज्य सरकार ने इन लोगो पर आईपीसी की धारा 428 एवं पशु क्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। दोनों धाराएं कमजोर है अत: आरोपी आसानी से बच निकलेंगे।
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**(!)** धारा 428 : जो कोई दस रुपए या उससे अधिक के मूल्य के किसी जीवजन्तु या जीवजन्तुओं को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
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यह धारा "रिष्टि" होने की दशा में लागू होती है। रिष्टि करना तब कहा जाता है जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाए। इन लोगो ने जो गाय काटी है उसे ये किसी अन्य व्यक्ति से छीन कर तो नहीं लाये थे। गाय इन्ही की रही होगी। खुद की संपत्ति की रिष्टि नहीं की जा सकती, अत: अदालत में यह धारा उड़ जायेगी।
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**(!!)** पशु क्रूरता अधिनियम में पहला अपराध करने से सिर्फ जुर्माने का प्रावधान है। वो भी 50 से 150 रुपये। दूसरा या तीसरा अपराध करने से जुर्माना 200 रूपये एवं अधिकतम सजा 3 महीने की है। इस तरह से आरोपी 50 रूपये देकर बरी हो जायेंगे।

केरल में गौ वध करना गैर कानूनी नहीं है, इसीलिए इन्हे गौ कशी के जुर्म में भी सजा नहीं दी जा सकती। स्पष्ट है कि कोंग्रेस के पदाधिकारियों ने सब देख भाल कर यह हरकत की थी।
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यदि इन आरोपियों पर आईपीसी की धारा 295 के तहत केस दर्ज किया जाए तो इन्हे 2 साल की सजा हो जायेगी। किन्तु यह सजा तब होगी जब इन पर पुलिस यह धारा लगाए और जज घूस खाकर इन्हे छोड़ न दे। पुलिस राज्यों के अधीन आती है, अत: केंद्र सरकार तकनीकी रूप से इसमें कोई हस्तक्षेप करके यह धारा नहीं लगवा सकती। तो इस तरह यह नजर आता है, कि प्रधानमंत्री जी इसमें कुछ नहीं कर सकते थे। पर ऐसा नहीं है।
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**6.1. केंद्र सरकार कैसे यह सुनिश्चित कर सकती है कि इन सभी आरोपियों को जल्दी से जल्दी 2 साल की सजा हो जाए ?**
**.**
इसके लिए केंद्र सरकार निम्न कदम उठा सकती थी :
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केंद्र सरकार एक गेजेट नोटिफिकेशन निकाल सकती थी कि, पशु क्रूरता अधिनियम तथा आई पी सी की धारा 428 एवं धारा 295 के तहत दर्ज मामलो की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी द्वारा की जायेगी।
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यह अधिसूचना जारी होने के बाद यह मुकदमा ज्यूरी के सामने आता। अब ग्रांड ज्यूरी इस मुकदमे की सुनवाई के लिए केरल राज्य के 500 से 1500 नागरिको की ज्यूरी का गठन कर सकती थी। ग्रांड ज्यूरी को यह अधिकार होता है कि वह किसी मुकदमे की धाराएं बदल सके। इस तरह ग्रांड ज्यूरी इन आरोपियों पर धारा 295 लगा देगी। ज्यूरी में सुनवाई रोजाना होती है। तथा वीडियो एवं फोटो के रूप में सबूत मौजूद होने से ज्यूरी इन सभी आरोपियों को 2-3 दिन में ही 2 साल की सजा दे देती।
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ज्यूरी चाहे तो इन आरोपियों का सार्वजनिक नारको टेस्ट भी ले सकती थी। नारको टेस्ट होने से यह सामने आता कि इन कार्यकर्ताओं को ऐसा करने के निर्देश कोंग्रेस के किन किन आला नेताओं से मिले थे। इस तरह इस साजिश में शामिल सभी व्यक्ति आरोपी बनते और ज्यूरी इन्हें भी दो दो साल की सजा दे देती। यदि ज्यूरी चाहे तो अपराध में भूमिका के आधार पर सजा को घटा बढ़ा सकती थी।
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**6.2.** **क्यों मैं कहता हूँ कि यदि जूरी होती कोंग्रेस के इन नेताओं को 100% सजा हो जाती ?**
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देखिये, यहाँ एक बात यह समझना जरुरी है कि, केरल में रहने वाले जो भी लोग गौ मांस खाते है, वे भी इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे कि कुछ लोग सार्वजनिक रूप से गाय काट कर इसके फुटेज पूरे देश में फैलाकर हिन्दुओ की भावनाएं जाया तौर पर भड़काएं। गौ मांस खाना और सार्वजनिक रूप से गाय काट कर पूरे देश में इसे फैलाना बिलकुल अलग बात है।

इसे एक और उदाहरण से समझिये :

* भारत में कितने लोग गाली देते है, या पोर्न देखते है ? और
उनमें से कितने लोग यह स्वीकार करेंगे कि कोई व्यक्ति टीवी पर गालियाँ दें ?

मेरे विचार में 99.99% लोग नग्नता-हिंसा-बर्बरता आदि के सार्वजनिक प्रदर्शन को बर्दाश्त नहीं करेंगे, और वे सोचेंगे कि यदि इन्हें रोका नहीं गया तो समाज में वैमनस्य एवं हिंसा फैलेगी। तो वे इन आरोपियों को सजा देंगे। जज का दिमाग इस तरीके से काम नहीं करता। उन्हें जो पैसा देता है, वे उस हिसाब से क़ानून की व्याख्या कर देते है। और मिशनरीज के पास पैसे का समन्दर है।
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यदि धारा 295 के तहत ट्रायल होता, और ज्यूरी सुनवाई करती तो सजा होना तय था। क्योंकि वीडियो में यह साफ़ नजर आ रहा है कि जब गाय काटी जा रही थी, तो ये लोग कई मोबाइल से इसका वीडियो शूट कर रहे थे। इस तरह यह साबित है कि इनका उद्देश्य सिर्फ गाय काटना ही नहीं था, बल्कि गाय को बर्बर तरीके से काटते हुए वीडियो बनाना, और इसे जनता में फैलाना था। यदि इन्हें सिर्फ कानून का विरोध करना होता था तो ये वीडियो नहीं बनाते थे।
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और यदि केरल की जूरी इन्हें सजा न देती तो जूरी की अपील हायर जूरी में जाती, और हायर जूरी में पूरे देश के 1500 नागरिक इस मामले को सुनते। और उस स्थिति में इन्हें सजा मिलना तय था। और इसका परिणाम यह होता कि, आगे कोई इस तरह का दुस्साहस नहीं करता। क्योंकि ज्युरर इस बात पर भी ध्यान देते कि ऐसी घटना से देश में बड़े पैमाने पर साम्प्रदायिक दंगे फ़ैल सकते है, और सैंकड़ो जाने जा सकती है।
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29 मई, 2017 को मैंने एवं जूरी सिस्टम की मांग करने वाले कई समर्थको ने प्रधानमंत्री जी को ट्विट भेजने शुरू किये कि, इन आरोपियों का जूरी ट्रायल करने के लिए पीएम एक नोटिफिकेशन निकाले। किन्तु पीएम ने इस तरह का नोटिफिकेशन नहीं निकाला। यदि तब बीजेपी=संघ के कार्यकर्ता भी इस मामले के लिए जूरी ट्रायल की मांग करनी शुरू करते तो पीएम के नोटिफिकेशन निकालने की सम्भावना बढ़ जाती।
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मेरे द्वारा किया गया ट्विट - [pawan jury on Twitter](<https://twitter.com/pawanjury/status/869150717914869760>;)
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किन्तु संघ=बीजेपी के कार्यकर्ताओ की ज्यादा रुचि इस बात में थी कि कैसे इस बात को पूरे देश में फैलाया जाए कि, कोंग्रेस के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से गाय काटी है। उन्होंने सजा दिलवाने और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई कदम न उठाये। यहाँ तक कि बीजेपी की केरल इकाई के शीर्ष नेताओं ने इसका बर्बर वीडियो अपनी प्रोफाइल पर अपलोड किया और इसे पूरे देश में फैलाया !! तो इस तरह गाय का इस्तेमाल सिर्फ लोगो का खून गरम करने के लिए किया जा रहा है, लेकिन समाधान की अवहेलना की जाती है।
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यही बात जब आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओ से कही गयी कि, आप इन्हे सजा दिलवाने के लिए इनकी ज्यूरी ट्रायल की मांग का ट्वीट भेजने का समर्थन करो, तो उनका कहना यह था कि हम इसकी निंदा कर सकते है, लेकिन जूरी ट्रायल का समर्थन न करेंगे। और वैसे भी गाय हमारे एजेंडे में शामिल नहीं है। हम उसे अन्य पशुओ के सदृश ही समझते है।
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मेरा मानना है कि, आप हिन्दू है या मुसलमान है या मांसाहारी है या शाकाहारी है, या कोंग्रेसी है या भाजपाई है उत्तर भारतीय है या दक्षिण भारतीय है, जो भी है एक भारतीय होने के नाते इस तरह की घटनाओ से देश को एवं देश के हर वर्ग को हर तरफ से नुकसान ही होगा। ऐसी घटनाएं देश में बारूद बिछा देती है, और कभी एक चिंगारी इसमें विस्फोट कर देगी। मिशनरीज पेड मीडिया के माध्यम से गाय का इस्तेमाल देश में इसी तरह का बारूद बिछाने के लिए कर रहा है।
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**(7) और कैसे वे गायों का इस्तेमाल समुदाय में आपसी प्रतिरोध बढाने के लिए कर रहे है ?**
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अन्य राज्यों का हाल मुझे पता नही । लेकिन राजस्थान में सड़कों पर काफी गायें बढ़ गयी है। इक्का दुक्का नही। बल्कि उनके झुंडो ने सड़कों को अपना ठिकाना बना लिया है । राजमार्ग से लेकर शहरों के मुख्य मार्गों और गलियों तक। सभी जगह। वाहन चलाने वालों को इससे बहुत समस्या का सामना करना पड़ रहा है, और एक्सीडेंट्स भी हो रहे है।
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वे चाहते है कि गाएँ और गौ रक्षक नागरिकों की आँखों में चुभने लगे। यदि नागरिकों को गाये मुसीबत की तरह दिखने लगेंगी तो वे इन्हें बचाने की मुहिम के प्रति उदासीन हो जाएँगे। आवारा पशुओं को प्रबंधित करने तथा नागरी यातायात को समुचित बनाए रखने की ज़िम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है, तथा पशु कल्याण अधिकारी गायों के रख रखाव के लिए उत्तरदायी है। लेकिन शहर के नागरिकों के पास ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है कि वे इन अधिकारियों को नियंत्रित कर सके।
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नगर पालिकाओ ने अचानक से गौ वंश को अधिग्रहीत करके उन्हें आश्रय देना बंद कर दिया है। मुझे नहीं पता, ऐसा क्यों हुआ। अचानक से लावारिस मवेशियों को पकड़ने वाले वाहन निष्क्रिय हो गए है, इस विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी अन्य विभागों में लगा दी गयी है, पालिकाओ द्वारा संचालित कोईंन हाउसेस ने गायों को आश्रय देना बन्द ही नही कर दिया बल्कि उलटे उन्हें बाज़ार में छोड़ दिया है, तथा गौ शालाओं को दिए जा रहे अनुदानों को लम्बित कर दिया गया है। और नतीजे में गौ वंश के झुंडो ने सड़कों पर अपना जमाव बना लिया।
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सड़कों पर गायों की संख्या बढ़ने से अब सड़क दुर्घटनाएँ भी हो रही है । सिर्फ़ वडोदरा में ही गौ वंश के चलते दो व्यक्तियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। देश भर में इस तरह की दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है, और पेड मीडिया द्वारा रिपोर्ट भी किया जा रहा है, कि दुर्घटनाओ की वजह गौ वंश है।
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**और यह प्रक्रिया इस तरह समुदाय में प्रतिरोध बढ़ाती है :**
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पहले पेड आमिर खान दंगल में युवाओं को मांस खाने के लिए प्रेरित करते है। फिर सांसद उदित राज कहते है कि गरीब-दलित बच्चों को पोषक तत्वों के लिए गौ मांस का सेवन करना चाहिए। ( दरअसल, गौ मांस चिकेन, मटन से सस्ता है। सस्ता होने की वजह भी राजनैतिक है। ) , इसके बाद कोइन हाउस एवं स्थानीय प्रशासन के कमजोर प्रबंधन के कारण गौ वंश की आवक सड़को पर बढ़ने लगी।
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फिर प्रधानमंत्री जी एक के बाद एक सार्वजनिक रूप से गौ रक्षको को गुंडा एवं असामाजिक तत्व कहते है, और नतीजे में गौ रक्षको को ऐसे अन वांछित समूहों के रूप में देखा जाने लगता है, जो एक तरफ तो सड़को पर गायों को संख्या बढाकर दुर्घटनाओ के लिए जिम्मेदार है, और दूसरी तरफ उनकी वजह से गरीब-दलित गौ मांस का सेवन करके खुद को पोषित नहीं कर पा रहे है !!! जबकि सच्चाई यह है कि गौ रक्षक कुछ न कर रहे है, बल्कि सारी अव्यवस्था की वजह वांछित कानूनों का अभाव और गलत कानूनों का लागू होना है।
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ब्रिटिश राज द्वारा सेना को दूध आपूर्ति के लिए जो गौ शालाएं स्थापित की गयी थी, उन्हें भी बंद करने के आदेश दिए गए है, और अब 1 लाख रूपये मूल्य तक की गाय को 1000 रूपये के टोकन एमाउंट में विभिन्न उपक्रमों को दिया जा रहा है !!
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[No cash cow, Army to sell bovines for token amount](<https://goo.gl/ZC4Kys>;)
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इन 40 गौ शालाओं में कुल 25,000 गायें है !! दरअसल बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की निगाहें इस जमीन पर है । अभी अगले 5-10 साल में ये लोग मुक्त हुयी इस 20,000 हैक्टेयर जमीन को ठिकाने लगा देंगे, मतलब बेच बाच देंगे। यानी हमारे हाथ से गायें भी गयी और अब जमीन भी जायेगी !!
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[अब पैकेट वाला दूध पीएंगे सैनिक, मोदी सरकार बंद करेगी 39 गोशालाएं](<https://aajtak.intoday.in/story/modi-government-to-close-army-gaushala-cow-firm-1-945356.html?fbclid=IwAR0n9nmbcLlcLtd7AKpyPPkYtVF6hGTqFSlz8RPFbvkwWAANcwyKEOEsYeY>;)
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तो वक्त के साथ साथ गाय को लेकर बयान बाजी और हिंसा और भी बढ़ेगी, गौ रक्षको द्वारा स्ट्रीट जस्टिस की घटनाओ में भी इजाफा होगा, पेड मीडिया पर इन्हें बड़े पैमाने पर रिपोर्ट भी किया जाएगा, और ऐसे कोई क़ानून नही छापे जायेंगे जिससे बढ़ते हुए तनाव को कम किया जा सके। और फिर हम किसी भी समय हम गाय को लेकर एक देश व्यापी दंगे के गवाह बनेंगे, जिसके अलाव पर फिर से वोट इकट्ठे किये जायेंगे !!
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और जब गौ मांस पर भक्षण पर इस तरह की बहस शुरू होगी तो अचानक से आप टीवी-अखबारों में कुछ बुद्धिजीवियों को यह तर्क देते हुए सुनेंगे कि हिन्दू धर्म में गौ मांस खाना जायज है, और ऐसा खुद स्वामी विवेकानंद ने कहा है !! अब पिछले 100 वर्षो से पेड मीडिया ने पूरे देश के हिन्दुओ के मानस पर स्वामी विवेकानन्द जी को इतना गहरा छापा है, कि आम राय में स्वामी विवेकानंद को हिन्दू धर्म का प्रतीक मान लिया गया है।
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तो मुझे नहीं लगता कि पेड मीडिया की चपेट में आये नागरिक स्वामी विवेकानंद के वक्तव्यों को डिफेंड करेंगे, बल्कि वे विभिन्न तर्क देकर इन्हें स्वीकार करना शुरू कर देंगे। गौ मांस को सार्वजनिक रूप से धार्मिक स्वीकृत मिलने लगेगी, और फिर मिशनरीज अन्य हिन्दू संतो को मीडिया कवरेज के एवज में गौ मांस का सार्वजनिक समर्थन करने के लिए बाध्य करेंगे।
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और वे ऐसा करेंगे भी। बाकी का काम सँभालने के लिए उनके पास मीडिया कवरेज के भूखे नेता है, और वे इसमें और भी इंधन डालेंगे। तो अब उनके पास आरक्षण के अलावा देश में आग लगाने के लिए एक और मुद्दा गाय है !!
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यह सब इतने धीमी गति से होगा कि आपको लगेगा यह खुद ब खुद हो रहा है !! जैसे आज भारत में हर महीने जीएसटी के कारण सैंकड़ो छोटे-मझौले व्यापारी अपना धंधा गँवा रहे है, और उन्हें इसका अहसास नहीं है, कि वे अपना कारोबार एक गलत क़ानून की वजह से खो रहे है।
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**खंड (स)**
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**(1) और कैसे अब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत में देशी गाय की नस्ल को ख़त्म कर देंगे ?**
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बहुराष्ट्रीय कम्पनियां **A2** दूध के उत्पादन पर एकाधिकार बनाना चाहती है, ताकि इन्हें ऊँचे दाम पर बेचा जा सके। आज से कई दशको पहले अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने भारत की देशी गाय की नस्ल आयात की और विदेश में इसे संवर्धित करना शुरू किया। किन्तु जब तक भारत में इस नस्ल की गाये इतनी बड़ी संख्या में मौजूद है, तब तक देशी गाय के उत्पादों को ऊँची कीमत पर नहीं बेचा जा सकता।
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तो भारत में देशी गाय की नस्ल की गायो की संख्या कम करने के लिए उन्होंने मनमोहन सिंह जी + सोनिया जी को 2014 में यह निर्देश दिए थे कि, वे भारत में देशी गायों का निषेचन जर्मन सांडो से बड़े पैमाने पर करवाने के लिए आवश्यक क़ानून गेजेट में छापे। मनमोहन सिंह जी ने इस योजना को हरी झंडी दे दी थी, किन्तु सांडो का आयात होने से पहले ही सत्ता परिवर्तन हो गया। बाद में मोदी साहेब ने पीएम बनने के बाद इन सांडो का आयात किया।
[.](<https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/German-bulls-reach-frozen-semen-production-stations/articleshow/46615564.cms?fbclid=IwAR01I-mFC3BkAfaoJJ7LGZDJf-iLIxYQPViVCxRPkAF1ytTT_LfPvjMrJqQ>;)
[German bulls reach frozen semen production stations - Times of India](<https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/German-bulls-reach-frozen-semen-production-stations/articleshow/46615564.cms?fbclid=IwAR01I-mFC3BkAfaoJJ7LGZDJf-iLIxYQPViVCxRPkAF1ytTT_LfPvjMrJqQ>;)
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NDDB ( राष्ट्रीय डेयरी बोर्ड ) चेयरमेन को आदेश दिए गए कि पशुपालको को जर्सी सांडो का वीर्य उपलब्ध करवाया जाए। भारत की लाखों देशी गायो का गर्भाधान अब जर्मन सांडो द्वारा करवा दिया जाएगा। देशी गायों की अगली पीढ़ी में देशी गायों के सिर्फ 50% जींस ही देशी होंगे, और इससे अगली पीढ़ी 25% देशी होगी। तीसरी और चौथी पीढ़ी में क्रमश: देशी जींस 12% एवं इससे कम रह जायेंगे।
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एक गाय की अगली पीढ़ी 6 वर्ष में आती है। इस तरह अगले 20-30 वर्षो में भारत की ज्यादातर देशी गायों का आनुवंशिक रूपांतरण भैंसों-सुअरों में हो चुका होगा। और इस निषेचन के बाद देशी गायें **A2** की जगह **A1** दूध देने लगेगी !!
[.](<https://goo.gl/pgytYJ>;)
[The future of India’s dairy industry lies with bull semen](<https://goo.gl/pgytYJ>;)
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देशी गाय कम दूध देती है लेकिन भारत की शुद्ध नस्ल की गाय के दूध में A2 प्रोटीन होने ?

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Apr 25 2022 19:14:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पद्मविभूषण एवं भारत रत्न पाने के लिए आजकल पद्म श्री पुरस्कृत कलाकार नशीले उत्पादों का प्रचार कर रहे है। FDI रोके बिना इस गंदगी को बढ़ने से रोका नही जा सकता।
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समाधान :
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(1) मीडिया में FDI रोकने के लिए #WOIC क़ानून गेजेट में छापा जाए ।
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(2) सूचना प्रसारण मंत्री एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन पर वोट वापसी आने से प्रसारण मंत्री अगले दिन से ही नशीले उत्पादों को प्रोत्साहन देने वाले विज्ञापनों पर निर्बंधन लगाना शुरू कर देगा।
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(3) #TCP क़ानून गेजेट में छापा जाए ताकि देश के नागरिक बहुमत द्वारा यह तय कर सके कि किसे पद्म एवं भारत रत्न पुरस्कार दिया जाना चाहिए और किन पुरस्कृत व्यक्तियों से ये पुरस्कार वापिस ले लिए जाने चाहिए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Apr 26 2022 20:24:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत में पेड मीडिया के प्रायोजकों द्वारा हिंदू-मुस्लिम गृह युद्ध के लिए बारूद बिछाया जा चुका है। इशारा मिलने पर किसी भी समय यह शुरू हो सकता है। इसमें हिंदू और मुसलमान दोनो वर्गों के नागरिको को जान-माल का नुक़सान होगा।
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यदि #JuryCourt क़ानून गेजेट में आ जाता है तो जूरी ज़हर उगलने वालों को दंड देना शुरू करेगी और यह प्रक्रिया रूक जाएगी। जज इसे नही रोक सकते। क्योंकि जज पेड मीडिया का हिस्सा है। अतः दंगे रोकने का एक मात्र त्वरित इलाज जूरी कोर्ट है। अंतिम एवं स्थायी समाधान FDI पर रोक लगाना है।
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पेड मीडिया में — भाजपा, कोंग्रेस, सपा, बसपा, आपा, AIMIM एवं अन्य सभी बड़ी पार्टियों के नेता, सभी जज, मुख्य धारा के सभी न्यूज़ चेनल, अख़बार, पत्रकार, फ़ेसबुक, ट्विटर, यू ट्यूब, कोरा, केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारें एवं सरकारी मशीनरी शामिल है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Apr 27 2022 11:16:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

सिर्फ़ मुस्लिम विरोध - मिशनरीज़ के लिए कवरिंग फ़ायर
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हिंदू तेज़ी से ईसाई धर्म में धर्मांतरित हो रहे है। इसे रोकने के लिए हिंदू धर्म के प्रशासन को सुधारना ज़रूरी है।
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हिंदू धर्म को बचाने में रूचि रखने वाले कार्यकर्ताओ का ध्यान मिशनरीज़ के बढ़ते विस्तार की और से बँटाने के लिए उन्हें “सिर्फ़ मुस्लिम विरोध” तक सीमित रखने की नीति का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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यदि प्रस्तावित #HinduBoard क़ानून गेजेट में आ जाता है तो हिंदुओं के धर्मांतरित होने की प्रक्रिया रुक जाएगी। हिंदू बोर्ड लाए बिना जितना “मुस्लिम विरोध” बढ़ेगा, कन्वरजन की स्पीड भी आनुपातिक रूप से बढ़ती जाएगी।
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अंतिम समाधान FDI पर रोक लगाना है। FDI को नही रोका गया तो मिशनरीज़ ताकतवर होते जाएँगे। भारत का पैड मीडिया और पेड मीडिया द्वारा खड़े किए गए सभी नेता मोदी, सोनिया, केजरीवाल आदि, मिशनरीज़ के लिए काम कर रहे है।
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(मोदी साहेब और योगी जी के आने के बाद धरमान्तरण की गति 5 गुना बढ़ गयी है। जहाँ केजरीवाल जी सत्ता में आएँगे वहाँ यह स्पीड 10 गुना तक बढ़ जाएगी। )
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Apr 27 2022 21:36:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

बेंगलूर के स्कूल में छात्रों को स्कूल बेग में बाइबल रखना अनिवार्य !!
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और स्कूल ने अभिभावको से यह अंडरटेकिंग लिया है कि अगर उन्हें अपने बच्चे को इस स्कूल में पढ़ाना है तो वे स्कूल बेग में बाइबिल रखने पर ऐतराज नही कर सकते।
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त्वरित समाधान - ज़िला शिक्षा अधिकारी पर वोट वापसी होने से यह सर्कस अगले दिन ही रुक जाएगा।
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अंतिम एवं स्थायी समाधान FDI पर रोक लगाना है। FDI रोके बिना पूरा देश चमगादड़ की तरह उल्टा भी लटक ले तो मिशनरीज़ को रोका नही जा सकता।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Apr 30 2022 07:04:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Aditya Prakash Sharma:

वोट वापसी CM कानून की अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे 👉 www.Tinyurl.com/VvpCM

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Apr 30 2022 21:50:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

NoConversion:

Now Sikhs are getting marriedi n Punjab .. what happened to marriages in Gurudwara... Failure

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