Pawan Jury BhilwaraRj
प्रस्तावित गौ नीति क़ानून आए बिना देशी गाय की बचने वाली नही है। अधिक विवरण इस पोस्ट में देखें - <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/862195567486855/>
Pawan Jury BhilwaraRj:
[**भारत में देसी गाय की क्या स्थिति है? देसी गाय को कैसे बचाया जा सकता है ?**](<https://hi.quora.com/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE>)
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ऍफ़ डी आई को रोके बिना भारत में गाय को बचाया नहीं जा सकता। यदि ऍफ़ डी आई जारी रही तो 2050 तक हिन्दुओ का एक अच्छा खासा तबका गौ मांस खाने लगेगा, और गौ मांस भक्षण को सार्वजनिक स्वीकार्यता मिल जायेगी। देशी गाय की संख्या इतनी सिकुड़ चुकी होगी कि, इसके दूध एवं उत्पादो से मध्यम वर्ग तक वंचित हो जाएगा, और सिर्फ अमीर लोग ही इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
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देशी गाय A2 दूध देती है, जो कि एक औषधि है। वर्ण संकर गाय, भैंस समेत शेष सभी अन्य दुधारू जानवर A1 दूध देते है। A2 एवं A1 दूध में क्या फर्क है, और क्यों A2 दूध एवं गौ मूत्र फायदेमंद है, इस बार में कृपया गूगल करें या कोरा पर प्रश्न जोड़े। मैंने जवाब में इस विवरण को शामिल नहीं किया है।
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गाय को लेकर अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको के दो लक्ष्य है :
* **देशी गाय के A2 दूध, गौ मूत्र आदि पर एकाधिकार बनाना**
* **भारत में ज्यादातर हिन्दुओ को गौमांस खाने के लिए तैयार करना, ताकि धर्मांतरण किये जा सके।
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देशी गाय के उत्पादों पर एकाधिकार बनाने के लिए वे कानूनों का इस्तेमाल करते है, और हिन्दु युवाओं को गौ मांस भक्षण की तरफ धकेलने के लिए उनके पास पेड मीडिया है।
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**(** इस जवाब में चार खंड है। खंड **(स)** एवं **(द)** महत्त्वपूर्ण है। आप चाहे तो सीधे खंड (स) एवं (द) पढ़ सकते है। )
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**खंड (अ)**
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**(1)** मुग़लो के शासन काल में ज्यादातर समय तक गौ कशी निषिद्ध थी। बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहाँ आदि के काल में गौ हत्या पर प्रतिबंध जारी रहे। औरंगजेब के शासन के शुरूआती वर्षो में गौ हत्या की अनुमति थी, किन्तु बाद में औरंगजेब ने गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए गेजेट नोटिफिकेशन निकाले थे । तब से लेकर बहादुरशाह जफर तक बहुधा प्रतिबन्ध जारी रहा। जफ़र के शासन काल में भी गौ कशी पर मृत्यु दंड का प्रावधान था। मुगल शासको द्वारा गौ हत्या का समर्थन नहीं करने के कारण इस काल में गायें बची रही।
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[Fact Check: Did Mughals ban cow slaughter?](<https://www.indiatoday.in/fact-check/story/rajasthan-bjp-madan-lal-saini-mughal-cow-slaughter-1297573-2018-07-27>)
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**(2)** ब्रिटिश गौ मांस खाते थे, और उन्होंने भारत में आने के साथ ही गायें काटने के लिए गेजेट नोटिफिकेशन छापने शुरू किये। जब कत्लखानों में गायें काटी जाने लगी तो मुस्लिम धर्मावलम्बी भी गौ मांस खाने लगे, और यहाँ से हिन्दू-मुस्लिम में गाय को लेकर प्रतिरोध प्रारंभ हुआ। ब्रिटिश द्वारा गौ कशी को प्रोत्साहन देने के पीछे दो कारण थे : धर्मांतरण , एवं हिन्दू-मुस्लिम में राजनैतिक अलगाव खड़ा करना।
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**(3)** सैन्य नियंत्रण हासिल करने के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत के सैनिको को कन्वर्ट करने के प्रयास शुरु कर दिए थे। बैरको में हिन्दू देवी देवताओं के चित्र लगाने एवं धार्मिक चिन्ह शरीर पर धारण करने आदि पर प्रतिबन्ध लगाये गए, बैरको में चर्च खोले गए, और रविवार को पादरियों को बुलाकर उन्हें उपदेश किये जाने लगे। 1857 से पहले तक कारतूसो पर भैंस की चर्बी चढ़ाई जाती थी, किन्तु वायसराय ने इस पर गाय एवं सूअर की चर्बी मिक्स करके लगाने के आदेश दिए।
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**(4)** क्रान्ति तो असफल हो गयी थी, लेकिन 1860 से भारत में देश के विभिन्न स्थानों से गौ हत्या पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए छोटे मोटे आन्दोलन शुरू हुए, और ये फैलने-बढ़ने लगे। किन्तु गोरो ने गाय काटने पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया। गोरे जानते थे कि, यदि गाय कटती रहेगी तो मुस्लिम गौ मांस खायेंगे और इससे हिन्दू मुस्लिम के बीच के खाई बनेगी। और इस तरह भारत में हिन्दू-मुस्लिम के बीच गाय को लेकर पहली बार दंगो की शुरुआत हुयी !!!
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इसी बीच गोरों ने दलितों को कन्वर्ट करने के लिए कुछ दलित नेताओं को सार्वजनिक रूप से गाय काटने और गौ मांस खाने के लिए चाबी देना शुरू किया। यदि दलित गाय खाना शुरू कर देते थे, तो वे हिन्दू धर्म से च्युत हो जाते थे, और फिर उन्हें कन्वर्ट करना आसान हो जाता था। किन्तु दलितों ने पेड नेताओं के झांसे में आने से इनकार कर दिया।
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भारत में गाय बचाने की यह मूवमेंट देश व्यापी हो चुकी थी, और 1860 से 1895 के दौरान गाय को लेकर सैंकड़ो दंगे हुए। बाद में महर्षि दयानंद सरस्वती से लेकर देश के कई नेता, संत, महंत, राजनेता, सेनानी आदि भी इस मूवमेंट में जुड़ते चले गए। यह विकेन्द्रित आन्दोलन था। हिन्दुओ का तर्क था कि गाय काटना हमारे धर्म के खिलाफ है, और हम अपने देश में गौ कशी नहीं होने देंगे।
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See More at : [Cow protection movement](<https://goo.gl/2NHb54>)
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**(5)** इसी समय इत्तिफाक से भारत में एक संत का अवतरण हुआ। इन्होने 1885 में भारत के हिन्दुओ को यह बात **बतानी शुरू की** कि :
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*गौ मांस का सेवन हिन्दू धर्म एवं भारतीय संस्कृति का अनिवार्य अंग रहा है। और वैदिक काल में ऐसा कोई हिन्दू नहीं हो सकता था, जो गौ मांस न खाता हो। यदि हिन्दूओ को ताकतवर होना है तो उन्हें मांसाहार अवश्य करना चाहिए।
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उन्होंने यह भी बताया कि : *गीता पढ़ने की जगह यदि हिन्दू फ़ुटबाल खेलेंगे तो उन्हें मुक्ति जल्दी मिलेगी !!*
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चूंकि ये संत बंगाली थे, अत: मांसाहार उनकी संस्कृति का अंग था, और यह स्वभाविक भी था। किन्तु अंत तक वे माँसाहारी ही बने रहे, और अपने अनुयायियों को भी मांसाहार करने की सलाह दी !! हालांकि, उन्होंने हिन्दुओ को गौ मांस खाने के लिए कभी प्रेरित नहीं किया, किन्तु इसे त्याज्य ही बताया। बात के साधारण होने के बावजूद इन उपदेशो की **टाइमिंग** का अपना महत्त्व था। इन महाशय ने उस समय गौ हत्या एवं गौ मांस भक्षण के पक्ष में एक वाजिब धार्मिक वजह दे दी थी !!
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जाहिर है, ब्रिटिश काल में इन्हें काफी मकबूलियत प्राप्त हुयी, और आज भी ये भारत के सबसे महान संत माने जाते है !!
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( मैं वेदों आदि का मर्मग्य नहीं हूँ। अत: मुझे नहीं पता कि वैदिक काल में हिन्दू होने के लिए गौ मांस भक्षण करना आवश्यक था, या नही। किन्तु भारत में शायद ये एक मात्र संत हुए, जिन्होंने गौ मांस भक्षण को वैदिक संस्कृति से जोड़ा, और इत्तिफाक से इन्हें अन्तराष्ट्रीय ख्याति भी मिली !! )
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**(6)** अपने शुरूआती दौर में मोहन दास ने गौ हत्या का विरोध किया था, किन्तु 1947 में मोहन ने स्टेंड लिया कि गौ हत्या को प्रतिबंधित करने के लिए क़ानून नहीं बनाया जाना चाहिए। मोहन का मानना था - धर्म के आधार पर न तो मुस्लिमो के लिए क़ानून बनने चाहिए न हिन्दुओ के लिए।
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**(7)** 1955 में कोंग्रेस के सांसद ने पहली बार गौ हत्या पर देश व्यापी प्रतिबन्ध लगाने के लिए बिल संसद में रखा था। किन्तु जवाहर लाल ने कोंग्रेस के सांसदों को धमकाया कि यदि यह बिल पास हुआ तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। बिल गिर गया।
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**(8)** 1966 में हजारो साधू-संतो ने संसद का घेराव करके देश व्यापी गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए गेजेट नोटिफिकेशन निकालने की मांग की। पहले लाठी चार्ज, फिर टियर गैस और फिर इंदिरा जी ने गोली चलाने के आदेश दिए। लगभग 66 लोग मारे गए। सरकारी आंकड़ा शायद 11 के आस पास का है। संख्या के बारे में विकी पीडिया पर भी गलत जानकारी रखी है। 2 साल पहले तक वहां सही जानकारी थी। पिछले वर्ष इसे बदल दिया गया।
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बाद में इंदिरा जी ने उन सभी राज्यों में गौ हत्या के क़ानून लागू किये, जहाँ जहाँ पर कोंग्रेस सत्ता में थी। उन सभी राज्यों में गौ हत्या के क़ानून लागू नहीं हुए जहाँ पर कम्युनिस्ट सरकार थी, या कोंग्रेस विपक्ष में थी। इस तरह 150 साल बाद देश के कई राज्यों में फिर से गौ हत्या निषेध के बिल पास हुए !!
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( कृपया ध्यान दें कि गौ हत्या रोकने का क़ानून केंद्र सरकार द्वारा नहीं बनाया जा सकता। यह राज्य का विषय है। अत: सिर्फ राज्य सरकारें ही इस पर प्रभावी क़ानून बना सकती है। )
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**खंड (ब)**
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1966 से 1998 तक गाय राजनीती से लगभग बाहर रही। ऍफ़ डी आई का विस्तार होने के साथ ही भारत में अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का नियंत्रण बढ़ने लगा और इस वजह से मिशनरीज की ताकत भी बढ़ना शुरू हुयी। पिछले 10 वर्षो से गाय फिर से राजनीति की मुख्यधारा में है। तो वह चक्र फिर से शुरू हो चुका है जो गोरों ने 200 साल पहले प्रारंभ किया था। इसमें कुछ नई चीजे यह है कि, अब ब्रिटिश-अमेरिकी धनिक पहले के मुकाबले कई गुणा ज्यादा ताकतवर है, और उनके एजेंडे में देशी गाय पर एकाधिकार करने की नीति भी शामिल है।
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आज की तारीख में भारत की किसी भी राजनैतिक पार्टी या नेता में इतना साहस नहीं है कि वे अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के खिलाफ जा सके। तो वास्तविक रूप से वे अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के साथ है, किन्तु मौखिक रूप से गौ हत्या रोकने के पक्ष में बयान वगेरह देते रहते है।
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किन्तु वास्तव में **गाय बचाने** के ये सारे बयान सिर्फ तनाव बढाने के लिए दिए जाते है। क्योंकि यदि गाय बचानी हो तो इसके लिए गेजेट में क़ानून छापने होते है। और क़ानून छापने को कोई पार्टी तैयार नहीं है। कार्यकर्ताओ को भाषण सुनाकर वे यह विश्वास दिला देते है, कि हम गाय बचाने के प्रयास कर रहे है !!
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इसके सैंकड़ो उदाहरण है, किन्तु निचे मैंने कुछ उदाहरण दिए है, जिससे आपको इस नीति की झलक मिल सकती है। तनाव बढाने के इस सर्कस में सभी पॉलिटिकल पार्टियां शामिल है। कोई अपवाद नहीं। कोई भी नहीं।
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**(1)** वाजपेयी ने 2003 में संसद में देश व्यापी गौ हत्या पर प्रतिबन्ध के लिए बिल पेश किया था। NDA में शामिल अन्य दलों ने इस बिल का विरोध किया और बिल गिर गया। मेरे विचार में बिल अव्यवहारिक था, और इसे गिरना ही था। केंद्र सरकार के पास पुलिस नहीं होती है, अत: गौ हत्या पर केंद्र द्वारा देश व्यापी बिल लाना अव्यवहारिक है। और यदि पास कर भी दिया जाता है, तो यह कभी लागू नहीं होगा।
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[INDIA: Opposition to Cow Slaughter Bill Undercuts Pro-Hindu Agenda](<http://www.ipsnews.net/2003/08/india-opposition-to-cow-slaughter-bill-undercuts-pro-hindu-agenda/>)
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**(2)** 12 जुलाई 2014, एम पी विधानसभा में कोंग्रेस विधायक आरिफ अकील द्वारा गौ रक्षा हेतु निजी बिल सदन में रखा गया। इस बिल में प्रावधान थे कि : गाय की मृत्यु के बाद गायो का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए , या तो उसे जलाया जाए या उसे दफनाया जाए। गाय के अंगो की तस्करी तथा खरीद फरोख्त पर प्रतिबन्ध लगाया जाए आदि आदि।
[.](<https://www.telegraphindia.com/india/bjp-buries-gau-mata-bill-cong-bhopal-mla-springs-surprise-on-rival/cid/163352>)
[BJP ‘buries’ Gau Mata bill - Cong Bhopal MLA springs surprise on rival](<https://www.telegraphindia.com/india/bjp-buries-gau-mata-bill-cong-bhopal-mla-springs-surprise-on-rival/cid/163352>)
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अक़ील ने सदन में कहा कि गाय को हिन्दू अपनी माता का दर्जा देते है इसलिए गाय की रक्षा तथा सम्मान के लिए सरकार को गौ सरक्षण के क़ानून को पास करना चाहिए। संघ=बीजेपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में बिल को 55 वोटो से गिरवा दिया !!! संघ=बीजेपी सरकार द्वारा बिल गिरा दिए जाने पर आरिफ अकिल कोर्ट चले गए और यह बिल पास करने का ऑर्डर करवाने के लिए उन्होंने जनहित याचिका लगाई।
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**(** इसका यह आशय नहीं है, कि कोंग्रेस गौ हत्या रुकवाना चाहती है। क्योंकि जब मैंने कोंग्रेस के कार्यकर्ताओ से पूछा कि एमपी को जाने दीजिये, आप उन राज्यों में ये बिल पास करवा दीजिये जहाँ आपकी सरकारें है, तो उन्होंने जवाब दिया कि, --- हमें ये बिल पास करने में कोई इंटरेस्ट नहीं है। पर हम यह स्थापित करना चाहते थे कि, गाय पर क़ानून बनाने को लेकर कोंग्रेस एवं बीजेपी=संघ एक ही है। बस भाषण एवं बयानो में भिन्नता है।**)**
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**(3)** पेड आमिर खान ने जब युवाओं को मांस खाने को प्रोत्साहित करने के लिए दंगल फिल्म बनाई तो बीजेपी=संघ के सांसद उदित राज ने एक के बाद एक 3 ट्विट किये कि, गरीब दलितों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए बीफ खाना चाहिए। उन्हें प्रेरित करने के लिए उन्होंने उसेन बोल्ट का उदाहरण भी दिया कि, बोल्ट गरीब थे , किन्तु बीफ खाने से ही वे गोल्ड मैडल जीत पाए। भारत में बीफ सबसे सस्ता पोषक आहार है, अत: गरीबों-दलितों को बीफ खाना चाहिए। ये बयान मैंने अपनी जेब से नहीं रखा है, संघ=बीजेपी के सांसद उदित राज ने ये ट्विट किये थे।
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[BJP's Udit Raj Tweets Beef Helped Usain Bolt Win Gold, Then Clarifies](<https://www.news18.com/news/politics/beef-helped-usain-bolt-win-gold-medals-in-olympics-bjp-mp-udit-raj-1286624.html>)
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कैच इसमें यह है कि, उदित राज ने कार्ल लुईस का जिक्र जानबूझकर नहीं किया। दरअसल 90 के दशक के ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता कार्ल लुइस 100% शाकाहारी है !! जब लुइस की आयु 20 वर्ष के क़रीब थी तो उन्होंने शाकाहार अपना लिया था, और अपने बेहतरीन प्रदर्शन का श्रेय वे शाकाहार को देते है। उनका दावा है कि, शाकाहार अपनाने के कारण ही उनके प्रदर्शन में सुधार हुआ और वे बेहतर एथलीट बन पाए।
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जाहिर है, संघ=बीजेपी का लक्ष्य खेल और खुराक पर टिप्पणी करना नही था, बल्कि वे गौ माँस सेवन को प्रोत्साहित करना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने गौ मांस का फेवर करने वाला किरदार चुना। संघ=बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने उदित राज पर कार्यवाही करने से इनकार कर दिया था।
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**(4)** पहले संघ=बीजेपी के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि, जिन्हें गौ मांस खाना है वे पाकिस्तान चले जाए। और इसके जवाब में संघ=बीजेपी के केन्द्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजुजू ने सार्वजनिक रूप से कहा कि -- " मैं गौ मांस खाता हूँ, और किसी में हिम्मत है तो मुझे रोक कर दिखाए !! संघ=बीजेपी के किसी भी कार्यकर्ता ने न तो नकवी एवं रिजीजू पर कार्यवाही की मांग की और न ही उनका विरोध किया !! लेकिन यदि किसी सामान्य नागरिक पर उन्हें गौ मांस खाने का शुबहा हो जाए तो वे उसे पीटना शुरू कर देते है !!
[.](<https://www.hindustantimes.com/india/i-eat-beef-can-somebody-stop-me-rijiju-retorts-to-naqvi-statement/story-qUNsLUQY0sy1ICiCWfRFTJ.html>)
['I eat beef, can somebody stop me?' Rijiju retorts to Naqvi statement](<https://www.hindustantimes.com/india/i-eat-beef-can-somebody-stop-me-rijiju-retorts-to-naqvi-statement/story-qUNsLUQY0sy1ICiCWfRFTJ.html>)
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**(5)** जब मनोहर पर्रीकर गोवा के सीएम थे तो हाईकोर्ट ने गोवा में गौ वंश की कटवाई पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। पर्रीकर तब इस प्रतिबन्ध को हटवाने के लिए कोर्ट गए। जब पर्रीकर को केंद्र में मंत्री बना दिया गया तो, संघ=बीजेपी के लक्ष्मीकान्त पार्सेकर गोवा के सीएम बने और उन्होंने गौ हत्या पर रोक का क़ानून लाने से इनकार कर दिया !! उनका तर्क था कि, हमें बड़ी मुश्किल से अल्पसंख्यको का विश्वास हासिल किया है, गौ हत्या पर बेन लगाकर हम लोगो को नाराज नहीं कर सकते। केंद्र में बीजेपी=संघ का जो भी एजेंडा रहा हो किन्तु गोवा में गौ कशी जारी रहेगी !!
[.](<https://www.hindustantimes.com/india/beef-not-to-be-banned-in-goa-it-s-part-of-food-habit-cm-parsekar/story-YfJvQy0KgEqoZ17ykVQqxN.html?fbclid=IwAR0Rw3luhbE48U73MKOYJJEODp4o3lW7n37I7derlelmCLSFyQINBylRXyg>)
[Beef not to be banned in Goa; it's part of food habit: CM Parsekar](<https://www.hindustantimes.com/india/beef-not-to-be-banned-in-goa-it-s-part-of-food-habit-cm-parsekar/story-YfJvQy0KgEqoZ17ykVQqxN.html?fbclid=IwAR0Rw3luhbE48U73MKOYJJEODp4o3lW7n37I7derlelmCLSFyQINBylRXyg>)
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**(6)** मई 2017, केरल में यूथ कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से गाय काटी, गौ मांस का वितरण किया। और केरल के बीजेपी अध्यक्ष ने घटना का वीडियो ट्विटर पर अपलोड किया। यदि आप इस घटना की गहराई से पड़ताल करेंगे तो जान जायेंगे कि मिशनरीज गाय का इस्तेमाल किस तरह कर रही है। ऊपर दिए गए प्रसंग में 3 घटनाएं है और तीनो का प्रभाव अलग अलग है।
[.](<https://goo.gl/xGQxen>)
[Police book Youth Congress workers for slaughtering cow in Kerala market](<https://goo.gl/xGQxen>)
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केरल में गाय काटना कानूनी है। पर भारत में क्या आपने पहले कभी यह सुना या देखा है कि किन्ही नामचीन लोगो ने सार्वजनिक रूप से गाय काटी हो, और इसके फुटेज पूरे देश में फैलाए हो ? क्या ऐसे फुटेज कभी आप तक पहुंचे है ? नहीं !! निचे इसका चित्र दिया गया है, जो कि विचलित करने वाले दृश्यों की श्रेणी में आता है। मैंने यहाँ वीडियो नहीं रखा है।
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राज्य सरकार ने इन लोगो पर आईपीसी की धारा 428 एवं पशु क्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। दोनों धाराएं कमजोर है अत: आरोपी आसानी से बच निकलेंगे।
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**(!)** धारा 428 : जो कोई दस रुपए या उससे अधिक के मूल्य के किसी जीवजन्तु या जीवजन्तुओं को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
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यह धारा "रिष्टि" होने की दशा में लागू होती है। रिष्टि करना तब कहा जाता है जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाए। इन लोगो ने जो गाय काटी है उसे ये किसी अन्य व्यक्ति से छीन कर तो नहीं लाये थे। गाय इन्ही की रही होगी। खुद की संपत्ति की रिष्टि नहीं की जा सकती, अत: अदालत में यह धारा उड़ जायेगी।
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**(!!)** पशु क्रूरता अधिनियम में पहला अपराध करने से सिर्फ जुर्माने का प्रावधान है। वो भी 50 से 150 रुपये। दूसरा या तीसरा अपराध करने से जुर्माना 200 रूपये एवं अधिकतम सजा 3 महीने की है। इस तरह से आरोपी 50 रूपये देकर बरी हो जायेंगे।
केरल में गौ वध करना गैर कानूनी नहीं है, इसीलिए इन्हे गौ कशी के जुर्म में भी सजा नहीं दी जा सकती। स्पष्ट है कि कोंग्रेस के पदाधिकारियों ने सब देख भाल कर यह हरकत की थी।
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यदि इन आरोपियों पर आईपीसी की धारा 295 के तहत केस दर्ज किया जाए तो इन्हे 2 साल की सजा हो जायेगी। किन्तु यह सजा तब होगी जब इन पर पुलिस यह धारा लगाए और जज घूस खाकर इन्हे छोड़ न दे। पुलिस राज्यों के अधीन आती है, अत: केंद्र सरकार तकनीकी रूप से इसमें कोई हस्तक्षेप करके यह धारा नहीं लगवा सकती। तो इस तरह यह नजर आता है, कि प्रधानमंत्री जी इसमें कुछ नहीं कर सकते थे। पर ऐसा नहीं है।
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**6.1. केंद्र सरकार कैसे यह सुनिश्चित कर सकती है कि इन सभी आरोपियों को जल्दी से जल्दी 2 साल की सजा हो जाए ?**
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इसके लिए केंद्र सरकार निम्न कदम उठा सकती थी :
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केंद्र सरकार एक गेजेट नोटिफिकेशन निकाल सकती थी कि, पशु क्रूरता अधिनियम तथा आई पी सी की धारा 428 एवं धारा 295 के तहत दर्ज मामलो की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी द्वारा की जायेगी।
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यह अधिसूचना जारी होने के बाद यह मुकदमा ज्यूरी के सामने आता। अब ग्रांड ज्यूरी इस मुकदमे की सुनवाई के लिए केरल राज्य के 500 से 1500 नागरिको की ज्यूरी का गठन कर सकती थी। ग्रांड ज्यूरी को यह अधिकार होता है कि वह किसी मुकदमे की धाराएं बदल सके। इस तरह ग्रांड ज्यूरी इन आरोपियों पर धारा 295 लगा देगी। ज्यूरी में सुनवाई रोजाना होती है। तथा वीडियो एवं फोटो के रूप में सबूत मौजूद होने से ज्यूरी इन सभी आरोपियों को 2-3 दिन में ही 2 साल की सजा दे देती।
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ज्यूरी चाहे तो इन आरोपियों का सार्वजनिक नारको टेस्ट भी ले सकती थी। नारको टेस्ट होने से यह सामने आता कि इन कार्यकर्ताओं को ऐसा करने के निर्देश कोंग्रेस के किन किन आला नेताओं से मिले थे। इस तरह इस साजिश में शामिल सभी व्यक्ति आरोपी बनते और ज्यूरी इन्हें भी दो दो साल की सजा दे देती। यदि ज्यूरी चाहे तो अपराध में भूमिका के आधार पर सजा को घटा बढ़ा सकती थी।
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**6.2.** **क्यों मैं कहता हूँ कि यदि जूरी होती कोंग्रेस के इन नेताओं को 100% सजा हो जाती ?**
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देखिये, यहाँ एक बात यह समझना जरुरी है कि, केरल में रहने वाले जो भी लोग गौ मांस खाते है, वे भी इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे कि कुछ लोग सार्वजनिक रूप से गाय काट कर इसके फुटेज पूरे देश में फैलाकर हिन्दुओ की भावनाएं जाया तौर पर भड़काएं। गौ मांस खाना और सार्वजनिक रूप से गाय काट कर पूरे देश में इसे फैलाना बिलकुल अलग बात है।
इसे एक और उदाहरण से समझिये :
* भारत में कितने लोग गाली देते है, या पोर्न देखते है ? और
उनमें से कितने लोग यह स्वीकार करेंगे कि कोई व्यक्ति टीवी पर गालियाँ दें ?
मेरे विचार में 99.99% लोग नग्नता-हिंसा-बर्बरता आदि के सार्वजनिक प्रदर्शन को बर्दाश्त नहीं करेंगे, और वे सोचेंगे कि यदि इन्हें रोका नहीं गया तो समाज में वैमनस्य एवं हिंसा फैलेगी। तो वे इन आरोपियों को सजा देंगे। जज का दिमाग इस तरीके से काम नहीं करता। उन्हें जो पैसा देता है, वे उस हिसाब से क़ानून की व्याख्या कर देते है। और मिशनरीज के पास पैसे का समन्दर है।
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यदि धारा 295 के तहत ट्रायल होता, और ज्यूरी सुनवाई करती तो सजा होना तय था। क्योंकि वीडियो में यह साफ़ नजर आ रहा है कि जब गाय काटी जा रही थी, तो ये लोग कई मोबाइल से इसका वीडियो शूट कर रहे थे। इस तरह यह साबित है कि इनका उद्देश्य सिर्फ गाय काटना ही नहीं था, बल्कि गाय को बर्बर तरीके से काटते हुए वीडियो बनाना, और इसे जनता में फैलाना था। यदि इन्हें सिर्फ कानून का विरोध करना होता था तो ये वीडियो नहीं बनाते थे।
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और यदि केरल की जूरी इन्हें सजा न देती तो जूरी की अपील हायर जूरी में जाती, और हायर जूरी में पूरे देश के 1500 नागरिक इस मामले को सुनते। और उस स्थिति में इन्हें सजा मिलना तय था। और इसका परिणाम यह होता कि, आगे कोई इस तरह का दुस्साहस नहीं करता। क्योंकि ज्युरर इस बात पर भी ध्यान देते कि ऐसी घटना से देश में बड़े पैमाने पर साम्प्रदायिक दंगे फ़ैल सकते है, और सैंकड़ो जाने जा सकती है।
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29 मई, 2017 को मैंने एवं जूरी सिस्टम की मांग करने वाले कई समर्थको ने प्रधानमंत्री जी को ट्विट भेजने शुरू किये कि, इन आरोपियों का जूरी ट्रायल करने के लिए पीएम एक नोटिफिकेशन निकाले। किन्तु पीएम ने इस तरह का नोटिफिकेशन नहीं निकाला। यदि तब बीजेपी=संघ के कार्यकर्ता भी इस मामले के लिए जूरी ट्रायल की मांग करनी शुरू करते तो पीएम के नोटिफिकेशन निकालने की सम्भावना बढ़ जाती।
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मेरे द्वारा किया गया ट्विट - [pawan jury on Twitter](<https://twitter.com/pawanjury/status/869150717914869760>)
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किन्तु संघ=बीजेपी के कार्यकर्ताओ की ज्यादा रुचि इस बात में थी कि कैसे इस बात को पूरे देश में फैलाया जाए कि, कोंग्रेस के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से गाय काटी है। उन्होंने सजा दिलवाने और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई कदम न उठाये। यहाँ तक कि बीजेपी की केरल इकाई के शीर्ष नेताओं ने इसका बर्बर वीडियो अपनी प्रोफाइल पर अपलोड किया और इसे पूरे देश में फैलाया !! तो इस तरह गाय का इस्तेमाल सिर्फ लोगो का खून गरम करने के लिए किया जा रहा है, लेकिन समाधान की अवहेलना की जाती है।
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यही बात जब आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओ से कही गयी कि, आप इन्हे सजा दिलवाने के लिए इनकी ज्यूरी ट्रायल की मांग का ट्वीट भेजने का समर्थन करो, तो उनका कहना यह था कि हम इसकी निंदा कर सकते है, लेकिन जूरी ट्रायल का समर्थन न करेंगे। और वैसे भी गाय हमारे एजेंडे में शामिल नहीं है। हम उसे अन्य पशुओ के सदृश ही समझते है।
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मेरा मानना है कि, आप हिन्दू है या मुसलमान है या मांसाहारी है या शाकाहारी है, या कोंग्रेसी है या भाजपाई है उत्तर भारतीय है या दक्षिण भारतीय है, जो भी है एक भारतीय होने के नाते इस तरह की घटनाओ से देश को एवं देश के हर वर्ग को हर तरफ से नुकसान ही होगा। ऐसी घटनाएं देश में बारूद बिछा देती है, और कभी एक चिंगारी इसमें विस्फोट कर देगी। मिशनरीज पेड मीडिया के माध्यम से गाय का इस्तेमाल देश में इसी तरह का बारूद बिछाने के लिए कर रहा है।
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**(7) और कैसे वे गायों का इस्तेमाल समुदाय में आपसी प्रतिरोध बढाने के लिए कर रहे है ?**
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अन्य राज्यों का हाल मुझे पता नही । लेकिन राजस्थान में सड़कों पर काफी गायें बढ़ गयी है। इक्का दुक्का नही। बल्कि उनके झुंडो ने सड़कों को अपना ठिकाना बना लिया है । राजमार्ग से लेकर शहरों के मुख्य मार्गों और गलियों तक। सभी जगह। वाहन चलाने वालों को इससे बहुत समस्या का सामना करना पड़ रहा है, और एक्सीडेंट्स भी हो रहे है।
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वे चाहते है कि गाएँ और गौ रक्षक नागरिकों की आँखों में चुभने लगे। यदि नागरिकों को गाये मुसीबत की तरह दिखने लगेंगी तो वे इन्हें बचाने की मुहिम के प्रति उदासीन हो जाएँगे। आवारा पशुओं को प्रबंधित करने तथा नागरी यातायात को समुचित बनाए रखने की ज़िम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है, तथा पशु कल्याण अधिकारी गायों के रख रखाव के लिए उत्तरदायी है। लेकिन शहर के नागरिकों के पास ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है कि वे इन अधिकारियों को नियंत्रित कर सके।
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नगर पालिकाओ ने अचानक से गौ वंश को अधिग्रहीत करके उन्हें आश्रय देना बंद कर दिया है। मुझे नहीं पता, ऐसा क्यों हुआ। अचानक से लावारिस मवेशियों को पकड़ने वाले वाहन निष्क्रिय हो गए है, इस विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी अन्य विभागों में लगा दी गयी है, पालिकाओ द्वारा संचालित कोईंन हाउसेस ने गायों को आश्रय देना बन्द ही नही कर दिया बल्कि उलटे उन्हें बाज़ार में छोड़ दिया है, तथा गौ शालाओं को दिए जा रहे अनुदानों को लम्बित कर दिया गया है। और नतीजे में गौ वंश के झुंडो ने सड़कों पर अपना जमाव बना लिया।
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सड़कों पर गायों की संख्या बढ़ने से अब सड़क दुर्घटनाएँ भी हो रही है । सिर्फ़ वडोदरा में ही गौ वंश के चलते दो व्यक्तियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। देश भर में इस तरह की दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है, और पेड मीडिया द्वारा रिपोर्ट भी किया जा रहा है, कि दुर्घटनाओ की वजह गौ वंश है।
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**और यह प्रक्रिया इस तरह समुदाय में प्रतिरोध बढ़ाती है :**
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पहले पेड आमिर खान दंगल में युवाओं को मांस खाने के लिए प्रेरित करते है। फिर सांसद उदित राज कहते है कि गरीब-दलित बच्चों को पोषक तत्वों के लिए गौ मांस का सेवन करना चाहिए। ( दरअसल, गौ मांस चिकेन, मटन से सस्ता है। सस्ता होने की वजह भी राजनैतिक है। ) , इसके बाद कोइन हाउस एवं स्थानीय प्रशासन के कमजोर प्रबंधन के कारण गौ वंश की आवक सड़को पर बढ़ने लगी।
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फिर प्रधानमंत्री जी एक के बाद एक सार्वजनिक रूप से गौ रक्षको को गुंडा एवं असामाजिक तत्व कहते है, और नतीजे में गौ रक्षको को ऐसे अन वांछित समूहों के रूप में देखा जाने लगता है, जो एक तरफ तो सड़को पर गायों को संख्या बढाकर दुर्घटनाओ के लिए जिम्मेदार है, और दूसरी तरफ उनकी वजह से गरीब-दलित गौ मांस का सेवन करके खुद को पोषित नहीं कर पा रहे है !!! जबकि सच्चाई यह है कि गौ रक्षक कुछ न कर रहे है, बल्कि सारी अव्यवस्था की वजह वांछित कानूनों का अभाव और गलत कानूनों का लागू होना है।
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ब्रिटिश राज द्वारा सेना को दूध आपूर्ति के लिए जो गौ शालाएं स्थापित की गयी थी, उन्हें भी बंद करने के आदेश दिए गए है, और अब 1 लाख रूपये मूल्य तक की गाय को 1000 रूपये के टोकन एमाउंट में विभिन्न उपक्रमों को दिया जा रहा है !!
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[No cash cow, Army to sell bovines for token amount](<https://goo.gl/ZC4Kys>)
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इन 40 गौ शालाओं में कुल 25,000 गायें है !! दरअसल बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की निगाहें इस जमीन पर है । अभी अगले 5-10 साल में ये लोग मुक्त हुयी इस 20,000 हैक्टेयर जमीन को ठिकाने लगा देंगे, मतलब बेच बाच देंगे। यानी हमारे हाथ से गायें भी गयी और अब जमीन भी जायेगी !!
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[अब पैकेट वाला दूध पीएंगे सैनिक, मोदी सरकार बंद करेगी 39 गोशालाएं](<https://aajtak.intoday.in/story/modi-government-to-close-army-gaushala-cow-firm-1-945356.html?fbclid=IwAR0n9nmbcLlcLtd7AKpyPPkYtVF6hGTqFSlz8RPFbvkwWAANcwyKEOEsYeY>)
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तो वक्त के साथ साथ गाय को लेकर बयान बाजी और हिंसा और भी बढ़ेगी, गौ रक्षको द्वारा स्ट्रीट जस्टिस की घटनाओ में भी इजाफा होगा, पेड मीडिया पर इन्हें बड़े पैमाने पर रिपोर्ट भी किया जाएगा, और ऐसे कोई क़ानून नही छापे जायेंगे जिससे बढ़ते हुए तनाव को कम किया जा सके। और फिर हम किसी भी समय हम गाय को लेकर एक देश व्यापी दंगे के गवाह बनेंगे, जिसके अलाव पर फिर से वोट इकट्ठे किये जायेंगे !!
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और जब गौ मांस पर भक्षण पर इस तरह की बहस शुरू होगी तो अचानक से आप टीवी-अखबारों में कुछ बुद्धिजीवियों को यह तर्क देते हुए सुनेंगे कि हिन्दू धर्म में गौ मांस खाना जायज है, और ऐसा खुद स्वामी विवेकानंद ने कहा है !! अब पिछले 100 वर्षो से पेड मीडिया ने पूरे देश के हिन्दुओ के मानस पर स्वामी विवेकानन्द जी को इतना गहरा छापा है, कि आम राय में स्वामी विवेकानंद को हिन्दू धर्म का प्रतीक मान लिया गया है।
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तो मुझे नहीं लगता कि पेड मीडिया की चपेट में आये नागरिक स्वामी विवेकानंद के वक्तव्यों को डिफेंड करेंगे, बल्कि वे विभिन्न तर्क देकर इन्हें स्वीकार करना शुरू कर देंगे। गौ मांस को सार्वजनिक रूप से धार्मिक स्वीकृत मिलने लगेगी, और फिर मिशनरीज अन्य हिन्दू संतो को मीडिया कवरेज के एवज में गौ मांस का सार्वजनिक समर्थन करने के लिए बाध्य करेंगे।
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और वे ऐसा करेंगे भी। बाकी का काम सँभालने के लिए उनके पास मीडिया कवरेज के भूखे नेता है, और वे इसमें और भी इंधन डालेंगे। तो अब उनके पास आरक्षण के अलावा देश में आग लगाने के लिए एक और मुद्दा गाय है !!
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यह सब इतने धीमी गति से होगा कि आपको लगेगा यह खुद ब खुद हो रहा है !! जैसे आज भारत में हर महीने जीएसटी के कारण सैंकड़ो छोटे-मझौले व्यापारी अपना धंधा गँवा रहे है, और उन्हें इसका अहसास नहीं है, कि वे अपना कारोबार एक गलत क़ानून की वजह से खो रहे है।
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**खंड (स)**
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**(1) और कैसे अब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत में देशी गाय की नस्ल को ख़त्म कर देंगे ?**
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बहुराष्ट्रीय कम्पनियां **A2** दूध के उत्पादन पर एकाधिकार बनाना चाहती है, ताकि इन्हें ऊँचे दाम पर बेचा जा सके। आज से कई दशको पहले अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने भारत की देशी गाय की नस्ल आयात की और विदेश में इसे संवर्धित करना शुरू किया। किन्तु जब तक भारत में इस नस्ल की गाये इतनी बड़ी संख्या में मौजूद है, तब तक देशी गाय के उत्पादों को ऊँची कीमत पर नहीं बेचा जा सकता।
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तो भारत में देशी गाय की नस्ल की गायो की संख्या कम करने के लिए उन्होंने मनमोहन सिंह जी + सोनिया जी को 2014 में यह निर्देश दिए थे कि, वे भारत में देशी गायों का निषेचन जर्मन सांडो से बड़े पैमाने पर करवाने के लिए आवश्यक क़ानून गेजेट में छापे। मनमोहन सिंह जी ने इस योजना को हरी झंडी दे दी थी, किन्तु सांडो का आयात होने से पहले ही सत्ता परिवर्तन हो गया। बाद में मोदी साहेब ने पीएम बनने के बाद इन सांडो का आयात किया।
[.](<https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/German-bulls-reach-frozen-semen-production-stations/articleshow/46615564.cms?fbclid=IwAR01I-mFC3BkAfaoJJ7LGZDJf-iLIxYQPViVCxRPkAF1ytTT_LfPvjMrJqQ>)
[German bulls reach frozen semen production stations - Times of India](<https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/German-bulls-reach-frozen-semen-production-stations/articleshow/46615564.cms?fbclid=IwAR01I-mFC3BkAfaoJJ7LGZDJf-iLIxYQPViVCxRPkAF1ytTT_LfPvjMrJqQ>)
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NDDB ( राष्ट्रीय डेयरी बोर्ड ) चेयरमेन को आदेश दिए गए कि पशुपालको को जर्सी सांडो का वीर्य उपलब्ध करवाया जाए। भारत की लाखों देशी गायो का गर्भाधान अब जर्मन सांडो द्वारा करवा दिया जाएगा। देशी गायों की अगली पीढ़ी में देशी गायों के सिर्फ 50% जींस ही देशी होंगे, और इससे अगली पीढ़ी 25% देशी होगी। तीसरी और चौथी पीढ़ी में क्रमश: देशी जींस 12% एवं इससे कम रह जायेंगे।
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एक गाय की अगली पीढ़ी 6 वर्ष में आती है। इस तरह अगले 20-30 वर्षो में भारत की ज्यादातर देशी गायों का आनुवंशिक रूपांतरण भैंसों-सुअरों में हो चुका होगा। और इस निषेचन के बाद देशी गायें **A2** की जगह **A1** दूध देने लगेगी !!
[.](<https://goo.gl/pgytYJ>)
[The future of India’s dairy industry lies with bull semen](<https://goo.gl/pgytYJ>)
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देशी गाय कम दूध देती है लेकिन भारत की शुद्ध नस्ल की गाय के दूध में A2 प्रोटीन होने ?