Mon May 03 2021 05:54:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
BrMb Chaitanya Kumar BrActivist:
राजस्थान विधानसभा उपचुनाव व पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव - 2021 के आज परिणाम घोषित हुए ।
1.इसमें सहाड़ा विधानसभा सीट से राइट टू रिकॉल पार्टी उम्मीदवार Ishwar Choudhary Jury Court को 701 वोट प्राप्त हुए।
2.तथा राजसमंद विधानसभा सीट से राइट टू रिकॉल पार्टी उम्मीदवार Hitesh Shakya को 117 वोट प्राप्त हुए।
3.पश्चिम बंगाल के सोनपुर दक्षिण व रामनगर से राइट टू रिकाॅल पार्टी उम्मीदवार Trayee Pradhan को 372 व 405 वोट प्राप्त हुए।
उपरोक्त तीनों प्रत्याशियों ने सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त किया। तथा अगले विधानसभा चुनाव में और भी बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प लिया।
गौरतलब है कि तीनों प्रत्याशियों ने #वोटवापसीपासबुक , #Jury_Court , #HinduBoard #Jury_Panchayat इत्यादि कानूनो के मुद्दे पर चुनाव लड़ा।
पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने तीनों उम्मीदवारों के प्रदर्शन को सराहा एवं आगे भी इन कानूनों के प्रचार के साथ उनके उज्ज्वल भविष्य हेतु शुभकामनाए दी।
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Mon May 03 2021 10:00:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
क्रोना की दूसरी लहर में अधिक मौतें क्यों हुयी ? संभावित कारण :
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Mon May 03 2021 16:53:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
जूरी कोर्ट बिना इस समस्या का कोई समाधान नही। #JuryCourt
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Mon May 03 2021 17:03:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Mon May 03 2021 17:25:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Only Solution is - #JuryCourt , #VoteVapsi
Angrej Singh Romana:
ਲੱਖ ਲੱਖ ਲਾਹਨਤ ਆ ਯਰ!!!
ਓ ਮਰੀ ਹੋਈ ਜਮੀਰ ਵਾਲਿਓ ਹੋ ਸਕਦਾ ਗਰੀਬ ਦੇ ਘਰ ਅੱਜ ਦੀ ਰੋਟੀ ਇਹ ਕੇਲੇ ਵੇਚ ਕੇ ਹੀ ਬਣਨੀ ਹੋਵੇ
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Mon May 03 2021 17:27:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Solution- #JuryCourt , #VoteVapsi
Ranjit Singh Bhukade:
किसी गरीब के साथ ऐसी हरकत बेचारे का खाना तक गिरा दिया
सभी से हाथ जोड़कर निवेदन है इसे थोड़ा फेमस कर दो जो कल तक मीडिया पर आ सके यह न्यूज़
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Mon May 03 2021 17:33:15 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Solution- #JuryCourt
जगबीर सिंह:
यह राजस्थान के कोटा के विज्ञान नगर एरिया का मामला है।
यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है और नगर निगम की सफाई वाली गाड़ी में अनाउंसमेंट किया जा रहा है की राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से भारत में करोना इतना तबाही मचा रहा है।
गाड़ी चालक का नाम है दीपक।
दीपक का कहना है कि यह ट्यून सारी गाड़ियों पर चलती है और सुपरवाइजर रोहित इसको चलवाता है यानी के धर्म विरोधी ट्यून चलवाने वाला भी हिंदू और गाड़ी चलाने वाला भी हिंदू।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन कहां है और उसकी जिम्मेवारी क्या है?
😪
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Mon May 03 2021 18:41:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Mon May 03 2021 19:01:10 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Tue May 04 2021 17:20:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Jagsir Singh Sandhu Ghuntri:
ਬਰਨਾਲਾ ਦੇ ਵਪਾਰੀਆਂ ਨੇ ਦੁਕਾਨਾਂ ਖੋਲਣ ਲਈ ਜਿਲ੍ਹਾ ਪ੍ਰਸਾਸ਼ਨ ਨੂੰ 1 ਘੰਟੇ ਦਾ ਅਲਟੀਮੇਟਮ ਦਿੱਤਾ
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Tue May 04 2021 18:41:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
यदि प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री से आपकी कोई मांग है तो आज यानी नागरिक कर्तव्य दिवस (प्रत्येक महीने की 5 तारीख) पर अपनी मांग का पोस्टकार्ड भेजें।
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मैं आज 2 पोस्टकार्ड भेजूंगा :
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(1) #VoteVapsiCm
(2) #OpenSmsVoteOnLockDown
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यदि आप भी पोस्टकार्ड भेजते है तो भेजे गए पोस्टकार्ड की फोटोकॉपी "My Letters to Pm" नाम से बनाये गए रजिस्टर में रखें।
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Tue May 04 2021 19:27:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद बीजेपी=संघ के कार्यकर्ताओ को गुंडों समूहों द्वारा सुनियोजित ढंग से पीटा व उनके घर-दूकान आदि पर आगजनी-तोड़फोड़ की जा रही है।
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कारण पुलिस एवं अदालतों का भ्रष्टाचार है। यदि बंगाल में पुलिस प्रमुख (SP) वोट वापसी पासबुक एवं जूरी मंडल में दायरे में होता तो वह यह सुनिश्चित करता कि नतीजो के बाद ऐसी कोई हिंसा न हो।
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समाधान : यदि मोदी साहेब चाहे तो जूरी कोर्ट कानून को गेजेट में प्रकाशित करके यह सुनिश्चित कर सकते है कि, गुंडई करने वाले समूहों पर पुलिस प्रमुख
निष्पक्ष कार्यवाही करें।
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जूरी कोर्ट क़ानून आने के तुरंत बाद पुलिस प्रमुख मुख्यमंत्री के नियंत्रण से निकलकर सीधे जनता के नियंत्रण में आ जाएगा। तब वह अपने राजनैतिक आकाओं के गलत आदेशो की अवहेलना करके वास्तविक दोषियों को गिरफ्तार करेगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो जिले के नागरिक वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे नौकरी से निकाल सकेंगे।
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जूरी कोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ दर्ज होने वाले मुकदमो की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी, जज नहीं। और इस वजह से जज घूस खाकर दोषियों को बरी नहीं कर सकेगा। जूरी मंडल आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट भी ले सकेगा, ताकि यह योजना बनाने वाले असली अपराधियों तक पहुँचा जा सके।
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किन्तु मोदी साहेब ने भारत में जूरी कोर्ट क़ानून लागू नहीं करने का फैसला किया है, और इस वजह से बंगाल में बीजेपी के कार्यकर्ता जान गँवा रहे है। दरअसल, मोदी साहेब एवं आरएसएस के नेता अपने कार्यकर्ताओ की हत्या को एक अवसर के रूप में देख रहे है। वे इन हिंसक घटनाओं को देश भर में फैला रहे है, ताकि अन्य राज्यों में TMC को आरोपी बनाकर बीजेपी=संघ के पक्ष में सहानूभूति वोट जोड़े जा सके।
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जहाँ तक ममता बनर्जी की बात है, उनसे बंगाल में जूरी कोर्ट कानून लागू करने की उम्मीद करना उनके साथ ज्यादती होगी। क्योंकि वे स्वयं मुख्यमंत्री है, और जूरी कोर्ट आने से पूरे राज्य के पुलिस प्रमुखों की चोटी उनके हाथ से निकल जायेगी। अत: कोई भी मुख्यमंत्री पुलिस प्रमुख को वोट वापसी के दायरे में नहीं करना चाहेगा।
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किन्तु मोदी साहेब चाहे तो यह कानून लागू करके अपने कार्यकर्ताओ को बचा भी सकते है, और हिंसा करने वालो को सजा भी दिलवा सकते है। किन्तु मोदी साहेब ने जूरी कोर्ट लागू करने से इनकार कर दिया है। और सिर्फ इस वजह से बंगाल में बीजेपी=संघ के कार्यकर्ताओ को बचाने वाला अब कोई नही है !!
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पुलिस राज्य सरकार के पास है, और नागरिको के पास वोट वापसी क़ानून न होने के कारण वे यह सब देखने / झेलने को विवश है।
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मोदी साहेब की बात तो जाने दीजिये, आरएसएस के कार्यकर्ता भी जूरी कोर्ट लागू करने के खिलाफ है। और उनकी रुचि भी सिर्फ इस बात में है कि, कैसे इन घटनाओं को फैलाकर बीजेपी=आरएसएस के वोट बढ़ाए जा सके !! उन्हें पता है कि, वोट समस्या को उठाने से मिलेंगे समाधान से नहीं !!
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#JuryCourt , #VoteVapsi
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Wed May 05 2021 20:33:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
5 मई 2021 :नागरिक कर्तव्य दिवस ।
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मैंने आज मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को 2 पोस्टकार्ड भेजे है।
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(1) #VoteVapsiCM
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(2) #OpneSmsVoteOnLockdown
#NoCompulsaryVaccine
#BelieveLockdownKillingMorePeople
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Fri May 07 2021 11:56:34 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Tue May 11 2021 05:47:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Tue May 11 2021 07:38:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Tue May 18 2021 06:46:45 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Sun May 23 2021 19:58:43 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
Ravinder Kajal:
लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे पूंजीपतियों के लिए 1 लाख का चालन कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन एक गरीब बाप के लिए 1लाख रुपए 1 करोड़ के बराबर है। जमीन बेचकर चालान की राशि जमा कराने पर ऐसे गरीब किसान की सदमे से मौत होने पर क्या न्याए मिलेगा
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Sun May 23 2021 20:03:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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Sat May 29 2021 07:57:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों द्वारा तय किया गया नियम की मरीजों को जबरदस्ती दवा दी जाये, और लॉकडाउन जैसे मुद्दों को छिपाने के लिए रामदेवजी एलोपैथी बनाम आयुर्वेद जैसे फर्जी मुद्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं !!
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एक मरीज को यह चुनने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए कि उसे क्या उपचार चाहिए। यह विकल्प पिछले साल मार्च-2020 में पीएम/सीएम द्वारा समाप्त किया गया था, न कि एलोपैथी डॉक्टरों द्वारा। यह पीएम/सीएम थे जिन्होंने फैसला किया कि तथाकथित आरटी-पीसीआर को महत्वपूर्ण बेंचमार्क के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, और यह पीएम/सीएम थे जिन्होंने फैसला किया कि मरीजों को उनकी इच्छा के खिलाफ दवा दी जानी चाहिए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए। और यह पीएम/सीएम थे जिन्होंने फैसला किया था कि "कोरोना रोगी" तथाकथित कोविड अस्पतालों को आरटीआर पीसीआर परीक्षण नकारात्मक आने के बिना नहीं छोड़ सकते हैं।
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रामदेवजी ने इस अनिवार्य जबरन दवा का कभी विरोध नहीं किया !
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लॉकडाउन से भारी नुकसान हुआ है। और फिर, रामदेवजी ने इस तालाबंदी का कभी विरोध नहीं किया !
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और अंत में, पीएम/सीएम वैक्सीन द्वारा हुई समस्याओं पर आंकड़ें छिपाते रहे हैं, और कई बार, पीएम/सीएम, सम्बन्धी जानकारी भी एकत्र नहीं कर रहे हैं और न ही कोई वेबसाइट बनवाई जहां कोई वैक्सीन के बाद मौत की रिपोर्ट कर सकता है, अन्य नुकसानों को भूल जाइए। और फिर, रामदेवजी ने कभी भी वैक्सीन से होने वाली मौतों पर कोई डेटा एकत्र करने और उनको सार्वजनिक करने की मांग नहीं की।
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रोगी तय करेगा कि वह किस डॉक्टर से इलाज चाहता है। पूरा आयुर्वेद बनाम एलोपैथी का मामला एकदम बकवास है, क्योंकि उत्तर सिर्फ एक पंक्ति का है — रोगी तय करे कि वह किस डॉक्टर को देखना चाहता है। तो इस मुद्दे को बिल्कुल भी क्यों उठाया जाये !
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तो कुल मिलाकर, केवल वास्तविक मुद्दों को दरकिनार करने के लिए, जैसे कि टीके से होने वाली मौतों पर डेटा का खुलासा, और लॉकडाउन से होने वाली मौतों, रामदेवजी और आईएमए दोनों ने मिलकर इस बेकार आयुर्वेद बनाम एलोपैथी बकवास मुद्दा बनाया है।
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>आयुर्वेद का समर्थन करने वालों के लिए :
आयुर्वेदिक दवाओं के लिए कोई नियामक प्राधिकरण नहीं है जिसके द्वारा आयुर्वेदिक टैग में बहुत सारी छद्म दवाएं बेची जाती हैं। भारत में कोई भी खुद को आयुर्वेदिक डॉक्टर के रूप में टैग कर सकता है और दवाएं देना शुरू कर सकता है, यहां तक कि अपनी दवाएं भी बना सकता है, मरीजों के लिए उनके खिलाफ रिपोर्ट करने का कोई तरीका नहीं है।
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चमत्कारिक दवाओं के खिलाफ एक कानून है लेकिन वह कभी लागू नहीं होता है।
तो जिन्हे लगता है, जैसे रामदेव जी, कि आयुर्वेद सबसे बेहतर है, वे कभी आयुर्वेद के नाम पर निरंकुश ठगी को रोकने के लिए सरकार से किसी कानून की मांग क्यों नहीं करते ?
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उत्तर आपके पास है ! क्यूंकि उन्हे आयुर्वेद बनाम अलोपथी करके लोगों का ध्यान असली मुद्दे जैसे प्रधानमंत्री द्वारा जबरदस्ती टीकाकरण, टीके से होने वाली समस्याओं, तालाबंदी, आदि से ध्यान हटाना था।
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2011 में अनशन से तबियत के बिगड़ने पर बाबा जी ने एलॉपथी अस्पताल में शरण लेकर जान बचायी।
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Sun May 30 2021 17:27:08 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)
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