Pawan Jury BhilwaraRj
बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद बीजेपी=संघ के कार्यकर्ताओ को गुंडों समूहों द्वारा सुनियोजित ढंग से पीटा व उनके घर-दूकान आदि पर आगजनी-तोड़फोड़ की जा रही है।
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कारण पुलिस एवं अदालतों का भ्रष्टाचार है। यदि बंगाल में पुलिस प्रमुख (SP) वोट वापसी पासबुक एवं जूरी मंडल में दायरे में होता तो वह यह सुनिश्चित करता कि नतीजो के बाद ऐसी कोई हिंसा न हो।
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समाधान : यदि मोदी साहेब चाहे तो जूरी कोर्ट कानून को गेजेट में प्रकाशित करके यह सुनिश्चित कर सकते है कि, गुंडई करने वाले समूहों पर पुलिस प्रमुख
निष्पक्ष कार्यवाही करें।
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जूरी कोर्ट क़ानून आने के तुरंत बाद पुलिस प्रमुख मुख्यमंत्री के नियंत्रण से निकलकर सीधे जनता के नियंत्रण में आ जाएगा। तब वह अपने राजनैतिक आकाओं के गलत आदेशो की अवहेलना करके वास्तविक दोषियों को गिरफ्तार करेगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो जिले के नागरिक वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे नौकरी से निकाल सकेंगे।
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जूरी कोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ दर्ज होने वाले मुकदमो की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी, जज नहीं। और इस वजह से जज घूस खाकर दोषियों को बरी नहीं कर सकेगा। जूरी मंडल आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट भी ले सकेगा, ताकि यह योजना बनाने वाले असली अपराधियों तक पहुँचा जा सके।
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किन्तु मोदी साहेब ने भारत में जूरी कोर्ट क़ानून लागू नहीं करने का फैसला किया है, और इस वजह से बंगाल में बीजेपी के कार्यकर्ता जान गँवा रहे है। दरअसल, मोदी साहेब एवं आरएसएस के नेता अपने कार्यकर्ताओ की हत्या को एक अवसर के रूप में देख रहे है। वे इन हिंसक घटनाओं को देश भर में फैला रहे है, ताकि अन्य राज्यों में TMC को आरोपी बनाकर बीजेपी=संघ के पक्ष में सहानूभूति वोट जोड़े जा सके।
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जहाँ तक ममता बनर्जी की बात है, उनसे बंगाल में जूरी कोर्ट कानून लागू करने की उम्मीद करना उनके साथ ज्यादती होगी। क्योंकि वे स्वयं मुख्यमंत्री है, और जूरी कोर्ट आने से पूरे राज्य के पुलिस प्रमुखों की चोटी उनके हाथ से निकल जायेगी। अत: कोई भी मुख्यमंत्री पुलिस प्रमुख को वोट वापसी के दायरे में नहीं करना चाहेगा।
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किन्तु मोदी साहेब चाहे तो यह कानून लागू करके अपने कार्यकर्ताओ को बचा भी सकते है, और हिंसा करने वालो को सजा भी दिलवा सकते है। किन्तु मोदी साहेब ने जूरी कोर्ट लागू करने से इनकार कर दिया है। और सिर्फ इस वजह से बंगाल में बीजेपी=संघ के कार्यकर्ताओ को बचाने वाला अब कोई नही है !!
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पुलिस राज्य सरकार के पास है, और नागरिको के पास वोट वापसी क़ानून न होने के कारण वे यह सब देखने / झेलने को विवश है।
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मोदी साहेब की बात तो जाने दीजिये, आरएसएस के कार्यकर्ता भी जूरी कोर्ट लागू करने के खिलाफ है। और उनकी रुचि भी सिर्फ इस बात में है कि, कैसे इन घटनाओं को फैलाकर बीजेपी=आरएसएस के वोट बढ़ाए जा सके !! उन्हें पता है कि, वोट समस्या को उठाने से मिलेंगे समाधान से नहीं !!
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#JuryCourt , #VoteVapsi
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